Wednesday, 12 Aug 2026 | 08:47 PM

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गर्मियों के लिए सत्तू की छाछ रेसिपी: घर पर बनाएं सत्तू की छाछ, गर्मी में चाहिए सत्तू की छाछ; स्वाद ऐसा की सब पूछेंगे रेसिपी

तस्वीर का विवरण

सामग्री: 4 बड़े चम्मच सत्तू, 2 चम्मच हरा धनिया, 1 हरी मिर्च पाउडर, थोड़ा सा जीरा पाउडर, स्वाद में काला नमक, थोड़ा सा साधारण नमक, थोड़ा सा साधारण नमक, थोड़ा सा हरा धनिया, कुछ पुदीने की मिठाई छवि: फ्रीपिक बनाने की विधि: सबसे पहले एक बड़ा पोछे में सत्तू डाला। अब इसमें शामिल हैं छोटा-थोड़ा करके छाछ रेवेरे और अच्छे से शौकीन बने रहें ताकि छोटे-मोटे न बनें। छवि: फ्रीपिक इसके बाद इसमें प्याज, हरी मिर्च, अन्य जीरा, काला और साधारण नमक शामिल हैं। अब ऊपर से हरा धनियां और पुदीने की पत्तियां। छवि: एआई साड़ी को अच्छी तरह से लाइक करें। अगर आपको ज्यादा ठंडा पसंद है तो इसमें कुछ बर्फ के टुकड़े भी डाल सकते हैं. अब आपकी मंहगी-ठंडी और स्वादिष्ट सत्तू की छाछ तैयार है। छवि: एआई सत्तू शरीर को ठंडक की सलाह में मदद करता है। इसके अलावा, भोजन की खपत और पाचन क्षमता बेहतर होती है। गर्मी में लू और डिहाइड्रेशन से बचने के लिए यह ड्रिंक काफी खतरनाक साबित होती है। छवि: फ्रीपिक पर्यटक तो इसमें थोड़ा नींबू रस भी मिला सकते हैं। पुदीना से स्वाद और ताजगी दोनों बढ़ते हैं। अगर बच्चे बना रहे हैं तो हरी मिर्च न डालें। छवि: फ्रीपिक गर्मी के दिनों में जब भी कुछ ठंडा और कॉकटेल पीने का मन करे, तब सत्तू की छाछ जरूर बनाएं। इसका देसी स्वाद हर किसी को पसंद आएगा। छवि: एआई अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए तरीके, तरीके और दावे अलग-अलग विद्वानों पर आधारित हैं। रिपब्लिक भारत लेख में दी गई जानकारी के सही होने का दावा नहीं किया गया है। किसी भी उपचार और सुझाव को पहले डॉक्टर या डॉक्टर की सलाह से अवश्य लें।

बच्चों के पैरों में दर्द I leg pain in childrens

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Last Updated:May 11, 2026, 15:54 IST बच्चों के पैरों में बार-बार होने वाला दर्द सिर्फ थकान नहीं, बल्कि ग्रोथ पेन, कमजोरी या पोषक तत्वों की कमी का संकेत भी हो सकता है. बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. ज्योति सिंह ने बच्चों की डाइट, मसाज और घरेलू उपायों को लेकर जरूरी सलाह दी है. मिर्जापुर. अक्सर छोटे बच्चों के पैरों में दर्द होता है, बच्चों के पैरों में दर्द होने के बाद कई बार मालिश के बाद भी दर्द ठीक नहीं होता है. अगर आपके बच्चों के पैरों में दर्द है तो इसके कुछ खास वजह हो सकती है. पहले ग्रोथ हो सकता है और दूसरा कारण थकान हो सकता है. वहीं, कई बार न्यूट्रिएंट्स की कमी की वजह से भी दर्द होता है. मंडलीय अस्पताल में तैनात डाइटीशियन डॉक्टर ज्योति सिंह ने बच्चों को लेकर टिप्स दिए हैं. डॉक्टर ज्योति सिंह ने घरेलू नुस्खे के साथ ही चिकित्सकीय पद्धति से बच्चों का ध्यान रखने की बात कही है. उन्होंने कहा कि बच्चों को प्रॉपर न्यूट्रिएंट्स दें और शाम में जरूर पैरों की मालिश करें. मंडलीय अस्पताल की बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. ज्योति सिंह ने लोकल 18 से बताया कि बच्चों के पैरों में दो चीजों से दर्द होता है. एक होता है ग्रोथ पैन, जो बच्चों के शारीरिक विकास की वजह से होता है. वहीं, दूसरा दर्द ज्यादा खेल-कूद आदि की वजह से होता है, कभी दर्द कमजोरी की वजह से भी हो सकता है. ऐसे में सबसे जरूरी बच्चों का खान-पान होता है. बच्चों को प्रॉपर प्रोटीन वाले सामान पनीर, अंडे, राजमा, सोयाबीन आदि को डाइट में रखना चाहिए. बच्चों को दूसरी जरूरी चीज कैल्शियम की आवश्यकता होती है. कैल्शियम के लिए बच्चों को रागी, चौराई, रामदाना, शिमला मिर्च, चने, खजूर और अंजीर आदि दे सकते हैं. बच्चों के पैरों में दर्द है तो इप्सम सॉल्ट है तो कुनकुने पानी में डालकर पैर को कुछ देर के लिए रोककर रखना चाहिए. ये टिप्स भी है बेहद कारगरडॉ. ज्योति सिंह ने बताया कि ध्यान रहे कि ज्यादा देर तक पैरों को पानी के अंदर नहीं रखे, वरना लूज मोशन जैसी समस्या हो सकती है. ऐसे में कम से कम समय तक पैरों को पानी में रखे. उन्होंने बताया कि बच्चों के पैरों में दर्द होन पर देसी तरीका है मसाज. थोड़ा मसाज बच्चों का रात में करना चाहिए. इसको करने से सोते समय बच्चों को बेहतर फील होता है. उनको अच्छी नींद लगती है, ये कुछ तरीके थे, जिनका उपयोग बच्चों के लिए पैरों में होने वाले दर्द को कम करने के लिए कर सकते हैं. अगर दर्द असहनीय हो या ज्यादा हो तो किसी पीडियाट्रिक को दिखा सकते हैं. मंडलीय अस्पताल में भी बाल रोग विशेषज्ञ है, यहां सम्पूर्ण इलाज है. About the Author Monali Paul नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Mirzapur,Uttar Pradesh

500 रु. में नौकरी की, ताने सहे,आज हैं फैशन आइकन:मेट गाला से माइकल जैक्सन तक; मनीष मल्होत्रा के संघर्ष की कहानी

500 रु. में नौकरी की, ताने सहे,आज हैं फैशन आइकन:मेट गाला से माइकल जैक्सन तक; मनीष मल्होत्रा के संघर्ष की कहानी

फैशन डिजाइनर मनीष मल्होत्रा किसी परिचय के मोहताज नहीं। लेकिन इस मुकाम पर पहुंचने के लिए उन्हें कई चुनौतियां पार करनी पड़ी हैं। अभी मनीष “मेट गाला’ में प्रदर्शित अपने विशेष परिधानों को लेकर चर्चा में हैं। जानते हैं उनकी संघर्ष से सफलता की कहानी…. मुंबई के एक मध्यमवर्गीय पंजाबी परिवार में 5 दिसंबर 1966 को जन्मे मनीष अपने स्कूली दिनों में मां के साथ न सिर्फ साड़ी खरीदने जाते, बल्कि साड़ियों को लेकर उन्हें फैशन टिप्स भी देने लगे थे। यहीं से फैशन और कॉस्ट्यूम डिजाइन के प्रति उनका लगाव बढ़ने लगा। बचपन से ही वे फिल्मों के बेहद शौकीन थे। वे लगभग हर ​फिल्म देखने जाते, लेकिन कलाकारों के अभिनय से ज्यादा मनीष का ध्यान उनके पहनावे पर होता था। कलाकारों के परिधान देख कर वे फैशन की बारीकियां समझने लगे। संघर्ष – डिजाइनिंग की डिग्री नहीं ले पाए, सेट पर लोग कपड़े सिलने वाला बोलते 1980 के दशक में फैशन डिजाइनिंग को पुरुषों का पेशा नहीं माना जाता था। लोग उनका मजाक उड़ाते थे। मनीष कभी डिजाइनिंग की औपचारिक पढ़ाई भी नहीं कर पाए, क्योंकि तब देश में पुरुषों के लिए फैशन डिजाइनिंग कोर्स नहीं होते थे। और विदेश जाकर कोर्स करने के पैसे उनके पास नहीं ​थे। कॅरिअर की शुरुआत में उन्होंने मुम्बई के “इक्विनॉक्स’ बुटीक में महज 500 रुपए महीने की नौकरी की। यहां उन्हें ग्राहकों को कपड़े दिखाने और उन्हें तह करने का काम मिला। खाली समय में मनीष छिप कर डिजाइन स्केच बनाते थे। बॉलीवुड के शुरुआती वर्षों में प्रोड्यूसर उनके डिजाइन को अधिक ग्लैमरस बता कर रिजेक्ट कर देते। सेट पर उनसे कहा जाता कि तुम कपड़े सिलने वाले हो, उन्हें दो और चलते बनो। शुरुआत – “रंगीला’ से बने बॉलीवुड के बड़े चेहरे, जैक्सन की जैकेट डिजाइन की मल्होत्रा ने 1990 में फिल्म “स्वर्ग’ में जूही चावला के लिए कॉस्ट्यूम ​​डिजाइन कर बॉलीवुड में ​डेब्यू किया। मनीष बताते हैं कि “गुमराह’ के लिए उन्हें पहली बार यश जौहर ने 10 हजार रुपए दिए। 1995 में “रंगीला’ में उर्मिला मातोंडकर के आउटफिट ​डिजाइन ने उन्हें रातोंरात बॉलीवुड का बड़ा चेहरा बना दिया। 1996 में माइकल जैक्सन भारत आए थे तो मनीष ने उनकी जैकेट डिजाइन की थी। सफलता – खुद के नाम को ही लग्जरी ब्रांड बनाया, श्रमिकों के कल्याण से भी जुड़े मनीष ने 2005 में अपने नाम से ही डिजाइनर कपड़ों का लग्जरी ब्रांड लॉन्च किया। वे स्किन केयर और ज्वेलरी में भी अपने कलेक्शन लॉन्च कर चुके हैं। आईफा, फिल्मफेयर समेत कई अवॉर्ड उन्हें मिल चुके हैं। वे चिकनकारी की ​महिला श्रमिकों के ​कल्याण की एक सामाजिक संस्था से भी जुड़े हैं। उनकी नेटवर्थ करीब 2500 करोड़ रुपए बताई जाती है।

500 रु. में नौकरी की, ताने सहे, आज फैशन आइकन:मनीष मल्होत्रा के संघर्ष की कहानी, रंगीला से बने बॉलीवुड के बड़े चेहरे

500 रु. में नौकरी की, ताने सहे, आज फैशन आइकन:मनीष मल्होत्रा के संघर्ष की कहानी, रंगीला से बने बॉलीवुड के बड़े चेहरे

फैशन डिजाइनर मनीष मल्होत्रा किसी परिचय के मोहताज नहीं। लेकिन इस मुकाम पर पहुंचने के लिए उन्हें कई चुनौतियां पार करनी पड़ी हैं। अभी मनीष “मेट गाला’ में प्रदर्शित अपने विशेष परिधानों को लेकर चर्चा में हैं। जानते हैं उनकी संघर्ष से सफलता की कहानी…. मुंबई के एक मध्यमवर्गीय पंजाबी परिवार में 5 दिसंबर 1966 को जन्मे मनीष अपने स्कूली दिनों में मां के साथ न सिर्फ साड़ी खरीदने जाते, बल्कि साड़ियों को लेकर उन्हें फैशन टिप्स भी देने लगे थे। यहीं से फैशन और कॉस्ट्यूम डिजाइन के प्रति उनका लगाव बढ़ने लगा। बचपन से ही वे फिल्मों के बेहद शौकीन थे। वे लगभग हर ​फिल्म देखने जाते, लेकिन कलाकारों के अभिनय से ज्यादा मनीष का ध्यान उनके पहनावे पर होता था। कलाकारों के परिधान देख कर वे फैशन की बारीकियां समझने लगे। संघर्ष – डिजाइनिंग की डिग्री नहीं ले पाए, सेट पर लोग कपड़े सिलने वाला बोलते 1980 के दशक में फैशन डिजाइनिंग को पुरुषों का पेशा नहीं माना जाता था। लोग उनका मजाक उड़ाते थे। मनीष कभी डिजाइनिंग की औपचारिक पढ़ाई भी नहीं कर पाए, क्योंकि तब देश में पुरुषों के लिए फैशन डिजाइनिंग कोर्स नहीं होते थे। और विदेश जाकर कोर्स करने के पैसे उनके पास नहीं ​थे। कॅरिअर की शुरुआत में उन्होंने मुम्बई के “इक्विनॉक्स’ बुटीक में महज 500 रुपए महीने की नौकरी की। यहां उन्हें ग्राहकों को कपड़े दिखाने और उन्हें तह करने का काम मिला। खाली समय में मनीष छिप कर डिजाइन स्केच बनाते थे। बॉलीवुड के शुरुआती वर्षों में प्रोड्यूसर उनके डिजाइन को अधिक ग्लैमरस बता कर रिजेक्ट कर देते। सेट पर उनसे कहा जाता कि तुम कपड़े सिलने वाले हो, उन्हें दो और चलते बनो। शुरुआत – “रंगीला’ से बने बॉलीवुड के बड़े चेहरे, जैक्सन की जैकेट डिजाइन की मल्होत्रा ने 1990 में फिल्म “स्वर्ग’ में जूही चावला के लिए कॉस्ट्यूम ​​डिजाइन कर बॉलीवुड में ​डेब्यू किया। मनीष बताते हैं कि “गुमराह’ के लिए उन्हें पहली बार यश जौहर ने 10 हजार रुपए दिए। 1995 में “रंगीला’ में उर्मिला मातोंडकर के आउटफिट ​डिजाइन ने उन्हें रातोंरात बॉलीवुड का बड़ा चेहरा बना दिया। 1996 में माइकल जैक्सन भारत आए थे तो मनीष ने उनकी जैकेट डिजाइन की थी। सफलता – खुद के नाम को ही लग्जरी ब्रांड बनाया, श्रमिकों के कल्याण से भी जुड़े मनीष ने 2005 में अपने नाम से ही डिजाइनर कपड़ों का लग्जरी ब्रांड लॉन्च किया। वे स्किन केयर और ज्वेलरी में भी अपने कलेक्शन लॉन्च कर चुके हैं। आईफा, फिल्मफेयर समेत कई अवॉर्ड उन्हें मिल चुके हैं। वे चिकनकारी की ​महिला श्रमिकों के ​कल्याण की एक सामाजिक संस्था से भी जुड़े हैं। उनकी नेटवर्थ करीब 2500 करोड़ रुपए बताई जाती है।

13 Held, NTA Denies Irregularities

13 Held, NTA Denies Irregularities

16 मिनट पहलेलेखक: अवधेश आकोदिया कॉपी लिंक 3 मई को देशभर में NEET UG 2026 की परीक्षा हुई थी। आशंका है कि परीक्षा का पर्चा पहले ही लीक हो गया था। राजस्‍थान में कई स्‍टूडेंट्स के पास हाथ से लिखा हुआ गेस पेपर मिला है जिसके सवाल असल परीक्षा से मैच हो रहे हैं। 10 मई को राजस्थान स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप यानी SOG ने इंटेल इनपुट पर कार्रवाई करते हुए देहरादून, सीकर और झुंझुनू से 13 संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है। इसमें सीकर के एक कोचिंग इंस्टीट्यूट के जुड़े करियर काउंसकर भी शामिल हैं 720 में से 600 नंबर के सवाल कॉमन जांच में सामने आया है कि परीक्षा के 720 में से 600 नंबर के सवाल दो दिन पहले ही सीकर में छात्रों के पास पहुंच गए थे। दरअसल, एक गेस पेपर केरल के एक कॉलेज से MBBS कर रहे स्टूडेंट ने 1 मई को सीकर में अपने एक दोस्त को भेज दिया था। रिपोर्ट के मुताबिक सीकर के एक पीजी संचालक को ये पेपर मिला, जिसने इसे अपने यहां रहने वाले स्टूडेंट्स को दे दिया। इस जरिए से ये अलग-अलग लोगों तक पहुंचा। पेपर में कुल 180 सवाल हल करने होते हैं और प्रत्येक सवाल 4 अंक का होता है। सभी संदिग्धों की सोशल मीडिया चैट खांगले जा रहे SOG अभी मामले की जांच कर रही है। एजेंसी मास्टरमाइंड तक पहुंचने के लिए कड़ी से कड़ी जोड़ रही है। सभी संदिग्धों की सोशल मीडिया चैट और कॉल लॉग्स खंगाले जा रहे हैं। दरअसल, ये एक गेस पेपर की तरह लोगों तक पहुंचा है और SOG अभी जांच कर रही है कि इसे पेपर लीक माना जाए या नहीं। हाथ से लिखे गए हैं सभी क्वेश्चन स्टूडेंट्स तक जो ‘क्वेश्चन बैंक’ पहुंचा है, उसमें फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी के 300 से ज्यादा सवाल हैं। ये सभी हाथ से लिखे गए हैं और इनकी हैंडराइटिंग भी एक ही है। इसमें से 150 सवाल हूबहू NEET UG 2026 के पेपर में आए। एक्सपर्ट्स के अनुसार किसी विशेष गेस पेपर से परीक्षा में कुछ सवाल हूबहू आने की संभावना रहती है, लेकिन इतनी बड़ी संख्या में प्रश्न आने की संभावना आमतौर पर नहीं होती। PG संचालक ने NTA को शिकायत दी, SOG के रडार पर NEET परीक्षा होने के बाद सीकर के एक पीजी संचालक ने परीक्षा करवाने वाले एजेंसी नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को ये शिकायत दी थी कि एक कथित ‘क्वेश्चन बैंक’ स्टूडेंट्स को मिला है। यह शख्स भी अब SOG के रडार पर है। जांच में इस बात की पुष्टि हुई है कि पीजी संचालक को भी परीक्षा से पहले वॉट्सएप पर ‘क्वेश्चन बैंक’ मिला था, जिसे उसने अपने यहां रहने वाले छात्रों और करियर काउंसलर्स को भेजा। सरकार जून 2024 में एंटी-पेपर लीक कानून लाई थी 21 जून 2024 को देश में एंटी-पेपर लीक कानून यानी पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट, 2024 लागू किया गया था। केंद्र सरकार ने आधी रात को इसका नोटिफिकेशन जारी किया था। ये कानून भर्ती परीक्षाओं में नकल और अन्य गड़ब​ड़ियां रोकने के लिए लाया गया है। इस कानून के तहत, पेपर लीक करने या आंसर शीट के साथ छेड़छाड़ करने पर कम से कम 3 साल जेल की सजा होगी। इसे ₹10 लाख तक के जुर्माने के साथ 5 साल तक बढ़ाया जा सकता है। परीक्षा संचालन के लिए नियुक्त सर्विस प्रोवाइडर अगर दोषी होता है तो उसे 5 से 10 साल तक की जेल की सजा और 1 करोड़ रुपए तक जुर्माना होगा। सर्विस प्रोवाइडर अवैध गतिविधियों में शामिल है, तो उससे परीक्षा की लागत वसूली जाएगी। इस कानून में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC), कर्मचारी चयन आयोग (SSC), रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB), बैंकिंग कार्मिक चयन संस्थान (IBPS) और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की परीक्षाएं शामिल होंगी। केंद्र के सभी मंत्रालयों, विभागों की भर्ती परीक्षाएं भी इस कानून के दायरे में होंगी। इसके तहत सभी अपराध संज्ञेय और गैर-जमानती होंगे। पेपर लीक करवाने पर एग्जाम सेंटर सस्पेंड होगा एंटी-पेपर लीक कानून के तहत, अगर किसी गड़बड़ी में एग्‍जाम सेंटर की भूमिका पाई जाती है तो उस सेंटर को 4 साल तक के लिए सस्‍पेंड किया जा सकता है। यानी उस सेंटर को अगले 4 साल तक के लिए कोई भी सरकारी एग्जाम कराने का अधिकार नहीं होगा। किसी संस्थान की संपत्ति कुर्क करने और जब्त करने का भी प्रावधान है और उससे परीक्षा की लागत भी वसूली जाएगी। कानून के तहत, कोई भी अधिकारी जो DSP या ACP के पद से नीचे न हो, परीक्षा में गड़बड़ी के मामलों की जांच कर सकता है। केंद्र सरकार के पास किसी भी मामले की जांच केंद्रीय एजेंसी को सौंपने की शक्ति है। NTA ने ट्वीट जारी कर कहा कोई गड़बड़ी नहीं हुई है 10 मई को NEET पेपर लीक की खबरों के बीच NTA ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (ट्विटर) पर विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा- नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने सोशल मीडिया पर एक विस्तृत स्पष्टीकरण जारी किया, जिसमें जोर देकर कहा गया कि परीक्षा ‘पूरी सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत’ आयोजित की गई थी और यह मामला अब कानून प्रवर्तन द्वारा जांच के अधीन है। The National Testing Agency is aware of reports concerning the action initiated by the Rajasthan Special Operations Group in connection with alleged irregularities around NEET (UG) 2026. The following is placed on record for the information of candidates, parents, and the public.…— National Testing Agency (@NTA_Exams) May 10, 2026 NEET UG 2024 हुआ था लीक 5 मई को NTA ने NEET UG एग्जाम कंडक्ट करवाया था। परीक्षा में पेपर लीक और धांधली के गंभीर आरोप लगे थे। 6 मई को NTA ने पेपर लीक की बात से इनकार किया था। जिसके बाद बिहार (पटना) और झारखंड (हजारीबाग) में जांच हुई। जांच में पेपर लीक के सबूत मिले और कई गिरफ्तारियां भी हुईं थीं। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने व्यापक परीक्षा रद्द करने से इनकार कर दिया था और कुछ सेंटर पर 1539 कैंडिडेट्स की दोबारा परीक्षा हुई थी। पेपर लीक के आरोपों के अलावा, 67 छात्रों को 720/720 अंक मिलना और एक ही केंद्र से कई टॉपर्स का आना भी बड़े विवाद का कारण बना था। ——————— ये खबर भी पढ़ें… बिहार

लक्ष्मीर भंडार जारी रहेगा: बीजेपी बंगाल में ममता की फ्लैगशिप योजना को क्यों खत्म नहीं करेगी | भारत समाचार

Venugopal has emerged as a key contender in the race for Kerala CM

आखरी अपडेट:11 मई, 2026, 14:59 IST टीएमसी ने मतदाताओं, विशेषकर महिला लाभार्थियों को बार-बार चेतावनी दी थी कि अगर राज्य में सत्ता में आई तो भाजपा लक्ष्मीर भंडार और अन्य प्रत्यक्ष-लाभ योजनाओं को बंद कर देगी। सुवेंदु अधिकारी ने पश्चिम बंगाल के पहले भाजपा मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली, जो राज्य में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक विकास है। छवि/एक्स पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने सोमवार को तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सबसे बड़े चुनाव प्रचार अभियानों में से एक को बेअसर करने के लिए तेजी से कदम उठाया और घोषणा की कि बंगाल में लक्ष्मी भंडार योजना और अन्य सभी चल रहे कल्याण कार्यक्रम नई भाजपा सरकार के तहत जारी रहेंगे। अपनी पहली कैबिनेट बैठक के बाद पत्रकारों से बात करते हुए – जहां सरकार ने छह प्रमुख फैसले लिए – अधिकारी ने कहा: “लक्ष्मीर भंडार को कोई रोक नहीं होगी…बंगाल में चल रही सभी लाभार्थी योजनाएं बंद नहीं होंगी।” यह घोषणा बड़ा राजनीतिक महत्व रखती है क्योंकि लक्ष्मीर भंडार 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव अभियान के केंद्रीय फ्लैशप्वाइंट में से एक के रूप में उभरा था। तृणमूल कांग्रेस और उसकी प्रमुख ममता बनर्जी के लिए, यह योजना केवल एक कल्याणकारी कार्यक्रम नहीं थी बल्कि एक राजनीतिक ढाल थी जिसके चारों ओर अधिकांश अभियान बनाया गया था। टीएमसी ने बार-बार महिला मतदाताओं और लाभार्थियों को चेतावनी दी कि अगर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सत्ता में आई तो लक्ष्मीर भंडार और अन्य प्रत्यक्ष-लाभ योजनाओं को रद्द कर देगी। बनर्जी ने हर रैली में इस मुद्दे को उठाया और चुनाव को बंगाल के कल्याण मॉडल और भाजपा सरकार के तहत इसके संभावित निराकरण के बीच एक विकल्प के रूप में पेश करने का प्रयास किया। पूरे अभियान के दौरान, टीएमसी ने भाजपा को “महिला विरोधी” के रूप में चित्रित करने की कोशिश की, यह तर्क देते हुए कि भगवा पार्टी न तो प्रत्यक्ष नकद-हस्तांतरण योजनाओं में विश्वास करती है और न ही यह समझती है कि लक्ष्मीर भंडार जैसे कार्यक्रम पूरे बंगाल में घरेलू वित्त के साथ कितनी गहराई से जुड़े हुए हैं। भाजपा इस मुद्दे पर बार-बार बचाव की मुद्रा में दिखी। जबकि कई भाजपा नेताओं ने मतदाताओं को आश्वासन दिया कि योजना जारी रहेगी – कुछ ने बढ़े हुए भुगतान का भी वादा किया – दूसरों ने यह सुझाव देकर विवाद पैदा कर दिया कि ऐसे कल्याण कार्यक्रमों की समीक्षा की जा सकती है या बंद कर दिया जा सकता है। प्रतिक्रिया ने अंततः भाजपा नेतृत्व को बार-बार यह स्पष्ट करने के लिए मजबूर किया कि यदि पार्टी सरकार बनाती है तो लक्ष्मीर भंडार को रोका नहीं जाएगा। यह योजना, जिसने 2021 में बनर्जी को सत्ता विरोधी लहर से निपटने में मदद करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, वर्तमान में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदायों की 25 से 60 वर्ष की आयु की महिलाओं को प्रति माह 1,200 रुपये तक प्रदान करती है, जबकि अन्य श्रेणियों के लाभार्थियों को 1,000 रुपये मासिक मिलते हैं। यह भी पढ़ें | भाजपा की बंगाल विजय को बनने में 15 साल लगे: इसके उदय के पीछे के वास्तुकारों पर एक नजर अभियान के दौरान टीएमसी की कल्याण राजनीति की तीखी आलोचना करने के बावजूद लक्ष्मीर भंडार को बनाए रखने के भाजपा के फैसले की तुलना इस बात से की गई है कि 2014 में सत्ता में आने के बाद नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने यूपीए-युग की कई प्रमुख योजनाओं को कैसे संभाला था। सबसे प्रमुख उदाहरण महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) था, जिसे भाजपा ने शुरू में कांग्रेस-युग की “विफलता” के प्रतीक के रूप में हमला किया था, अंततः इसे बनाए रखने, विस्तार करने और राजनीतिक रूप से पुन: पैकेजिंग करने से पहले। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने 2015 में संसद में मनरेगा को कांग्रेस की विफलताओं का “जीवित स्मारक” कहा था, फिर भी यह योजना बाद में केंद्र के सबसे बड़े ग्रामीण कल्याण कार्यक्रमों में से एक बन गई, खासकर कोविड-19 के दौरान। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना ​​​​है कि भाजपा बंगाल में इसी तरह की रणनीति का प्रयास कर सकती है – पहले लाभार्थियों को आश्वासन देना कि लक्ष्मीर भंडार सार्वजनिक प्रतिक्रिया से बचना जारी रखेगा, फिर योजना का ऑडिट या पुनर्गठन करना, टीएमसी के तहत कथित “रिसाव” या भ्रष्टाचार को उजागर करना, और अंततः भाजपा सरकार के स्वयं के कल्याण आख्यान के तहत इसे राजनीतिक रूप से पुनः ब्रांड या विस्तारित करने का प्रयास करना। लक्ष्मीर भंडार को बरकरार रखने के अलावा, अधिकारी ने अवैध आव्रजन को रोकने के उद्देश्य से लंबित बाड़ लगाने के काम को पूरा करने के लिए सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के लिए बांग्लादेश सीमा पर भूमि अधिग्रहण का रास्ता भी साफ कर दिया – एक मुद्दा जिसे भाजपा ने अभियान के दौरान आक्रामक रूप से सामने रखा था। भाजपा ने बार-बार टीएमसी सरकार पर एक छिद्रित सीमा की अनुमति देने का आरोप लगाया था, जिसने कथित तौर पर मुस्लिम-बहुल बांग्लादेश से बिना दस्तावेज वाले प्रवासियों को भारत में प्रवेश करने और चुनावी समर्थन के बदले में अज्ञात रहने में सक्षम बनाया था। एक और बड़ी घोषणा केंद्र की प्रमुख स्वास्थ्य बीमा योजना, आयुष्मान भारत को बंगाल में लागू करना थी। अधिकारी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम वाली सभी केंद्रीय कल्याण योजनाएं अब राज्य में लागू की जाएंगी, जो कई केंद्र सरकार के कार्यक्रमों के लिए बनर्जी के लंबे समय से चले आ रहे विरोध के उलट है। पूर्व मुख्यमंत्री ने अक्सर केंद्र प्रायोजित योजनाओं को अपनाने से इनकार कर दिया था जब बंगाल में पहले से ही अपने समानांतर संस्करण थे, जैसा कि आयुष्मान भारत के मामले में था। 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा के प्रदर्शन ने राज्य के राजनीतिक इतिहास में सबसे बड़ी सफलता दर्ज की, जिसने भगवा पार्टी को बंगाल की प्रमुख राजनीतिक ताकत के रूप में मजबूती से स्थापित किया। 2019 के लोकसभा चुनावों के बाद आक्रामक विस्तार के रूप में जो शुरू हुआ, उसका समापन भाजपा द्वारा राज्य में अपनी पहली सरकार बनाने के साथ हुआ, जिसने नाटकीय रूप से बंगाल के राजनीतिक परिदृश्य को नया आकार दिया। उस उभार के केंद्र में अधिकारी थे, जो 2021 के विधानसभा चुनावों से पहले टीएमसी से अलग होने के बाद बंगाल

किडनी फंक्शन टेस्ट I किडनी बीमारी के लक्षण

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Last Updated:May 11, 2026, 14:55 IST सिर्फ क्रिएटिनिन टेस्ट से किडनी की असली हालत का पता नहीं चलता. डॉक्टरों के मुताबिक पेशाब जांच, eGFR और UACR जैसे टेस्ट शुरुआती किडनी डैमेज पकड़ने में बेहद जरूरी हैं. समय रहते जांच और इलाज से डायलिसिस जैसी गंभीर स्थिति से बचा जा सकता है. कानपुर. जब भी लोगों को किडनी से जुड़ी कोई परेशानी होती है या डॉक्टर जांच लिखते हैं, तो ज्यादातर लोग सिर्फ क्रिएटिनिन और किडनी फंक्शन जांच करवाकर निश्चिंत हो जाते हैं. रिपोर्ट सामान्य आते ही उन्हें लगता है कि उनकी किडनी पूरी तरह स्वस्थ है. लेकिन हकीकत इससे काफी अलग है. कई बार किडनी अंदर ही अंदर खराब होती रहती है और साधारण जांच में इसका पता तक नहीं चलता. बीमारी जब गंभीर स्तर तक पहुंच जाती है, तब जाकर क्रिएटिनिन स्तर बढ़ा हुआ नजर आता है. कानपुर के गणेश शंकर विद्यार्थी मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर युवराज गुलाटी ने बताया कि सिर्फ किडनी फंक्शन जांच के भरोसे रहना खतरनाक हो सकता है. किडनी की असली स्थिति जानने के लिए दूसरी जरूरी जांचें भी करानी चाहिए. इनमें सबसे महत्वपूर्ण पेशाब की जांच मानी जाती है. इससे यह पता चलता है कि कहीं पेशाब में प्रोटीन या खून तो नहीं आ रहा. पेशाब में प्रोटीन आना किडनी खराब होने का शुरुआती संकेत माना जाता है. डॉक्टरों के अनुसार कई मरीजों में क्रिएटिनिन सामान्य रहता है, लेकिन पेशाब की जांच में गड़बड़ी सामने आ जाती है. ऐसे मामलों में अगर समय रहते इलाज शुरू हो जाए तो किडनी को गंभीर नुकसान से बचाया जा सकता है. GSVM Medical College के डॉक्टरों के मुताबिक किडनी की बीमारी पकड़ने के लिए सिर्फ एक जांच काफी नहीं होती. किडनी फंक्शन जांच के अलावा ईजीएफआर जांच भी बेहद जरूरी है. इस जांच से यह पता चलता है कि किडनी कितनी क्षमता से खून साफ कर रही है. इसके साथ ही यूएसीआर जांच भी अहम मानी जाती है, जिससे पेशाब में एल्ब्यूमिन यानी प्रोटीन की मात्रा का पता चलता है. यह जांच शुरुआती दौर में ही किडनी की खराबी का संकेत दे सकती है. पेशाब की जांच को हल्के में लेना पड़ सकता है भारीविशेषज्ञों का कहना है कि बहुत से लोग पेशाब की जांच को सामान्य समझकर टाल देते हैं, जबकि यही जांच कई बार बड़ी बीमारी का संकेत दे देती है. पेशाब में झाग बनना, खून आना या बार-बार संक्रमण होना किडनी की खराबी की तरफ इशारा कर सकता है. डॉक्टर युवराज गुलाटी के मुताबिक शरीर भी पहले से संकेत देने लगता है. जैसे पैरों और चेहरे पर सूजन आना, बिना वजह थकान रहना, भूख कम लगना, रात में बार-बार पेशाब आना या रक्तचाप लगातार बढ़ा रहना किडनी की बीमारी के शुरुआती लक्षण हो सकते हैं. मधुमेह और रक्तचाप के मरीजों को ज्यादा खतरा डॉक्टरों का कहना है कि मधुमेह और उच्च रक्तचाप से पीड़ित लोगों को सबसे ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है. ऐसे लोगों को नियमित रूप से किडनी फंक्शन जांच, ईजीएफआर, यूएसीआर और पेशाब की जांच जरूर करानी चाहिए. समय रहते बीमारी पकड़ में आ जाए तो दवा और खानपान से इसे काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है. लेकिन लापरवाही करने पर मरीज को डायलिसिस तक की जरूरत पड़ सकती है. विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि सिर्फ एक सामान्य रिपोर्ट देखकर निश्चिंत न हों. अगर शरीर में लगातार कोई परेशानी महसूस हो रही है तो तुरंत विशेषज्ञ से सलाह लेकर पूरी जांच कराएं. समय पर जांच ही किडनी को गंभीर बीमारी बनने से बचा सकती है. About the Author Monali Paul नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Kanpur Nagar,Uttar Pradesh

फीफा वर्ल्ड कप में यलो फीवर:हिट गाने ‘यलो’ की तर्ज पर 9 देशों की किट का रंग पीला; जर्सी का बॉब मार्ले को ट्रिब्यूट

फीफा वर्ल्ड कप में यलो फीवर:हिट गाने ‘यलो’ की तर्ज पर 9 देशों की किट का रंग पीला; जर्सी का बॉब मार्ले को ट्रिब्यूट

अमेरिका, मैक्सिको और कनाडा की संयुक्त मेजबानी में होने वाले 48 टीमों के फीफा वर्ल्ड कप में इस बार एक खास रंग का खुमार सिर चढ़कर बोल रहा है। यह रंग है पीला। दुनिया के मशहूर रॉक बैंड ‘कोल्डप्ले’ के सुपरहिट गाने ‘यलो’ की तर्ज पर इस बार 9 देशों ने अपनी होम या अवे किट के लिए सुनहरे और पीले रंग को चुना है। दिलचस्प बात यह है कि वर्ल्ड कप फाइनल के हाफ-टाइम शो में यही कोल्डप्ले बैंड अपनी धुनों का जादू बिखेरता नजर आएगा। पीली जर्सी का जिक्र हो और ब्राजील का नाम न आए, ऐसा हो ही नहीं सकता। बास्केटबॉल लेजेंड माइकल जॉर्डन के साथ कोलैबोरेशन वाली जर्सी के भारी बज के बावजूद, ब्राजील की असली पहचान उसकी पारंपरिक ‘क्लीन यलो’ होम जर्सी ही है, जो इस बार भी आकर्षण का केंद्र रहेगी। वहीं, दक्षिणी गोलार्ध के रग्बी दिग्गज देश ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका भी अपनी पारंपरिक ‘यलो-गोल्ड’ जर्सी में नजर आएंगे। ऑस्ट्रेलिया को मेजबान अमेरिका, पराग्वे और तुर्किए के साथ रखा गया है, जहां उन पर खासी नजर रहेगी। वहीं, दक्षिण अफ्रीकी टीम मैक्सिको की धरती पर चेक रिपब्लिक और दक्षिण कोरिया से भिड़ेगा। दूसरी ओर, कोलंबिया ने दशकों पुरानी लाल-नीले ट्रिमिंग्स वाली सिंपल पीली जर्सी रखी है। लेकिन पहली बार उतर रहे जमैका की जर्सी इस बार कोलंबिया को भी फीका कर सकती है। जमैका की किट म्यूजिक लेजेंड बॉब मार्ले को ट्रिब्यूट है। इसमें बोल्ड गोल्ड, हरे और रूबी लाल रंग के साथ साउंड वेव्स, विनाइल रिकॉर्ड्स और कैसेट पैटर्न को उकेरा गया है। इसके अलावा ‘ब्लैकस्टार’ घाना की टीम भी पीली जर्सी में नजर आएगी। स्वीडन की जर्सी इस बार 70 के दशक की एनर्जी से प्रेरित है। इसमें उस दौर की जींस और पारंपरिक स्वीडिश लोक परिधानों पर मिलने वाली खास ‘फ्लावर स्टिचिंग’ (फूलों की कढ़ाई) की झलक दिखेगी। कुल मिलाकर टूर्नामेंट में सफेद रंग के अलावा लाल और नीला रंग अभी भी सबसे ज्यादा लोकप्रिय बेस कलर है। हालांकि, इस वर्ल्ड कप में फैंस को नाइजीरिया की क्रिएटिव जर्सी और इटली की टीम की कमी बहुत खलेगी। इटली के फैंस वर्ल्ड कप में अपनी टीम के न होने के गम को भुलाने के लिए कोल्डप्ले के मशहूर दर्द भरे गीत- ‘फिक्स यू’, ‘लॉस्ट’ और ‘द हार्डेस्ट पार्ट’ सुन सकते हैं। टूर्नामेंट के ग्रुप ई में पीले रंग का सबसे ज्यादा दबदबा टूर्नामेंट के ग्रुप ई में पीले रंग का सबसे ज्यादा दबदबा है। पहली बार वर्ल्ड कप खेल रहा कुराकाओ हल्के पीले रंग की जर्सी पहनकर उतरेगा, जिसके कंधों पर विंटेज रेट्रो स्ट्राइप्स हैं। इसी ग्रुप में इक्वाडोर भी है, जिसकी बोल्ड पीली जर्सी के कॉलर पर लिखा है- ‘सपना देखो, आगे बढ़ो और इतिहास बनाओ।’ आइवरी कोस्ट ने भी पीले रंग के बेस में हल्का नारंगी शेड चुना है।

नेतन्याहू बोले- ईरान के नए सुप्रीम लीडर जिंदा:बंकर में छिपे, सत्ता पर पिता खामेनेई जैसी पकड़ नहीं, जनता के विद्रोह का डर सता रहा

नेतन्याहू बोले- ईरान के नए सुप्रीम लीडर जिंदा:बंकर में छिपे, सत्ता पर पिता खामेनेई जैसी पकड़ नहीं, जनता के विद्रोह का डर सता रहा

इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दावा किया है कि ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई जिंदा हैं, लेकिन उनकी सत्ता पर पकड़ उनके पिता अली खामेनेई जैसी मजबूत नहीं है। CBS न्यूज के शो ‘60 मिनट्स’ को दिए इंटरव्यू में नेतन्याहू ने कहा कि मुजतबा किसी बंकर या गुप्त जगह पर छिपे हुए हैं और वहीं से सत्ता संभालने की कोशिश कर रहे हैं। नेतन्याहू ने कहा कि ईरान इस समय 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद सबसे कमजोर दौर में है। उनके मुताबिक, शासन के भीतर दरारें बढ़ रही हैं और अलग-अलग गुटों में मतभेद सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि कुछ लोग संघर्ष जारी रखना चाहते हैं, जबकि दूसरे लोगों को डर है कि इससे अर्थव्यवस्था टूट जाएगी और जनता सड़कों पर उतर सकती है। नेतन्याहू ने कहा कि ईरानी शासन को सबसे ज्यादा डर अपनी ही जनता से है। उन्होंने दावा किया कि इजराइल और अमेरिका की कार्रवाई के बाद ईरान में विरोध प्रदर्शन बढ़े और लोगों ने शासन के खिलाफ आवाज उठाई। अमेरिका-इजराइल के हमले में घायल हुए थे मुजबता ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल के हमले में घायल हुए थे। इसके बाद से वह गुप्त ठिकाने पर रह रहे हैं और डॉक्टरों की टीम उनका इलाज कर रही है। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट्स के मुताबिक 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल ने ईरान में अयातुल्ला अली खामेनेई के ठिकाने पर हमला किया था। दावा किया गया है कि उसी हमले में मुजतबा खामेनेई घायल हो गए थे। हमले में अयातुल्ला अली खामेनेई, उनकी पत्नी और बेटे की मौत हो गई थी। बताया गया कि मुजतबा खामेनेई की हालत गंभीर रही है। उनके एक पैर का तीन बार ऑपरेशन किया गया है और अब उन्हें नकली पैर लगाना पड़ सकता है। एक हाथ की भी सर्जरी हुई है और वह धीरे-धीरे ठीक हो रहा है। उनके चेहरे और होंठ बुरी तरह जल गए हैं। इस वजह से उन्हें बोलने में परेशानी हो रही है और आगे प्लास्टिक सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान, जो पेशे से हार्ट सर्जन हैं, और स्वास्थ्य मंत्री भी उनके इलाज में शामिल रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक बड़े अधिकारी और सेना के कमांडर उनसे मिलने नहीं जाते, क्योंकि उन्हें डर है कि इजराइल उनके जरिए ठिकाने का पता लगा सकता है। नेतन्याहू बोले- ईरान की अर्थव्यवस्था और सैन्य ताकत नुकसान पहुंचा नेतन्याहू ने कहा कि ईरान के खिलाफ हाल की कार्रवाई में पेट्रोकेमिकल प्लांट, स्टील प्लांट और मिसाइल निर्माण से जुड़े कई ठिकानों को निशाना बनाया गया। उनके मुताबिक, इससे ईरान की अर्थव्यवस्था और सैन्य ताकत दोनों को नुकसान पहुंचा है। इंटरव्यू में नेतन्याहू ने कहा कि ईरान के खिलाफ लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। उनके मुताबिक, ईरान के पास अब भी एनरिच्ड यूरेनियम मौजूद है, कई परमाणु केंद्र सक्रिय हैं और बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। नेतन्याहू ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और इजराइल इस बात पर सहमत हैं कि अगर जरूरत पड़ी तो दोबारा सैन्य कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि अगर आर्थिक दबाव और समझौते से लक्ष्य हासिल हो जाए तो सैन्य कार्रवाई जरूरी नहीं होगी। नेतन्याहू का दावा- हमला नहीं करते तो ईरान एक-दो महीने में परमाणु बना लेता इंटरव्यू में नेतन्याहू ने दावा किया कि अगर इजराइल और अमेरिका ने हाल में कार्रवाई नहीं की होती, तो ईरान एक-दो महीने में परमाणु बम बना सकता था। उन्होंने कहा कि ईरान लंबे समय से परमाणु हथियार और लंबी दूरी की मिसाइलें विकसित करने की कोशिश कर रहा था। नेतन्याहू ने कहा कि ईरान ऐसा देश है, जो खुले तौर पर अमेरिका और इजराइल के विनाश की बात करता है। उनके मुताबिक, ईरान की मिसाइल क्षमता भविष्य में अमेरिका तक हमला करने की स्थिति में पहुंच सकती थी। इसी बीच, नेतन्याहू ने यह भी कहा कि ईरानी शासन का कमजोर होना हिजबुल्लाह, हमास और हूती जैसे संगठनों को भी प्रभावित करेगा। उनके मुताबिक, ये सभी संगठन ईरान के समर्थन पर टिके हैं और अगर तेहरान कमजोर हुआ तो इनकी ताकत भी घटेगी। उन्होंने दावा किया कि युद्ध से पहले हिजबुल्लाह के पास करीब डेढ़ लाख मिसाइलें और रॉकेट थे। इजराइल ने इनमें से 90% से ज्यादा नष्ट कर दिए हैं, लेकिन खतरा अब भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। ईरान की अर्थव्यवस्था और सैन्य ताकत दोनों को नुकसान पहुंचा सोशल मीडिया और अमेरिका में इजराइल की छवि को लेकर पूछे गए सवाल पर नेतन्याहू ने कहा कि कई विदेशी ताकतें बॉट फार्म और फर्जी अकाउंट के जरिए इजराइल विरोधी माहौल बना रही हैं। उन्होंने कहा कि इसका असर खासतौर पर युवा अमेरिकियों पर पड़ा है। नेतन्याहू ने यह भी कहा कि इजराइल आने वाले वर्षों में अमेरिकी सैन्य आर्थिक मदद को धीरे-धीरे खत्म करना चाहता है। उनके मुताबिक, इजराइल अब मदद लेने वाले देश की बजाय अमेरिका का बराबरी वाला साझेदार बनना चाहता है। उन्होंने कहा कि अगले 10 साल में अमेरिकी सैन्य सहायता को शून्य तक लाने की योजना बनाई जा सकती है। साथ ही इजराइल खुफिया जानकारी, तकनीक और मिसाइल डिफेंस जैसे क्षेत्रों में अमेरिका के साथ साझेदारी बढ़ाना चाहता है।

India Govt Replaces MGNREGA July 1 With VB-G RAM G

India Govt Replaces MGNREGA July 1 With VB-G RAM G

नई दिल्ली26 मिनट पहले कॉपी लिंक केंद्र सरकार ने सोमवार को घोषणा की कि नया विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानी VB-G RAM G, 1 जुलाई से पूरे देश में लागू होगा। इसके साथ ही महात्मा गांधी नेशनल रूरल एम्प्लोयमेंट एक्ट (MGNREGA) को खत्म कर दिया जाएगा। ग्रामीण विकास मंत्रालय की अधिसूचना के मुताबिक, यह नया कानून सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू होगा। सरकार ने भरोसा दिलाया है कि इस बदलाव से मजदूरों के काम पर कोई असर नहीं पड़ेगा। ट्रांजिशन पूरी तरह बिना रुकावट के होगा और किसी को रोजगार से वंचित नहीं किया जाएगा। मंत्रालय की अधिसूचना में कहा गया है कि 30 जून तक मनरेगा के तहत जो भी काम चल रहे होंगे, उन्हें नए सिस्टम में उसी तरह जारी रखा जाएगा। यानी किसी भी प्रोजेक्ट को बीच में नहीं रोका जाएगा। इसी के साथ, जिन मजदूरों के मनरेगा जॉब कार्ड e-KYC से वेरिफाइड हैं, वे तब तक मान्य रहेंगे जब तक नए ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड जारी नहीं हो जाते। जिनके e-KYC बाकी, उनको भी काम मिलेगा सरकार ने यह भी साफ किया है कि जिन मजदूरों का e-KYC अभी बाकी है, उन्हें भी काम से नहीं रोका जाएगा। जिनके पास जॉब कार्ड नहीं है, उनका रजिस्ट्रेशन ग्राम पंचायत स्तर पर पहले की तरह जारी रहेगा। मजदूरी भुगतान, शिकायत निवारण, फंड आवंटन और ट्रांजिशन से जुड़े नियमों का ड्राफ्ट तैयार किया जा रहा है। ग्रामीण विकास मंत्रालय ने कहा है कि इसे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से चर्चा के बाद जल्द सार्वजनिक किया जाएगा। सरकार ने ग्राम पंचायतों को ग्रामीण बदलाव का “केंद्रीय स्तंभ” बताया है। मंत्रालय के मुताबिक, नया कानून गांवों में रोजगार बढ़ाने, इंफ्रास्ट्रक्चर सुधारने और आत्मनिर्भरता को मजबूत करने में मदद करेगा। नए कानून से ज्यादा काम मिलेगा सरकार ने कहा कि नए कानून में हर ग्रामीण परिवार को अब साल में 125 दिन काम देने की गारंटी होगी, जो पहले 100 दिन थी। इससे गांवों में रहने वाले परिवारों को ज्यादा काम मिलेगा और उनकी आर्थिक सुरक्षा मजबूत होगी। कानून की धारा 22 के तहत इस योजना के खर्च को केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर वहन करेंगी। सामान्य राज्यों में खर्च का बंटवारा 60 प्रतिशत केंद्र और 40 प्रतिशत राज्य के बीच होगा। वहीं, पूर्वोत्तर राज्यों, पहाड़ी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों- जैसे उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में केंद्र सरकार 90 प्रतिशत खर्च उठाएगी। धारा 6 के अनुसार, राज्य सरकारें खेती के व्यस्त समय, जैसे बुवाई और कटाई के दौरान, साल में अधिकतम 60 दिनों तक इस योजना के तहत मिलने वाले काम को नियंत्रित कर सकेंगी। ……………….. यह खबर भी पढ़ें… ₹55 महीने में मिलेगी ₹3 हजार पेंशन: प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना में निवेश करें, जानें इससे जुड़ी खास बातें केंद्र सरकार देश के असंगठित क्षेत्र के श्रमिक को आर्थिक सुरक्षा देने के लिए ‘प्रधानमंत्री श्रम योगी मान-धन योजना’ चलाई जा रही है। इस स्कीम में 60 साल के बाद हर महीने 3000 रुपए पेंशन मिलती है। इसके जरिए बुढ़ापे में मासिक आय का सोर्स बन सकता है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…