सुप्रीम कोर्ट स्टाफ को 2 दिन का वर्क फ्रॉम होम:जज कार पूलिंग करके कोर्ट जाएंगे; मोदी की ईंधन बचाने की अपील पर फैसला

PM मोदी की ईंधन बचत की अपील पर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने वर्किंग को लेकर नई गाइडलाइन जारी की है। अब कोर्ट के हर विभाग का स्टाफ दो दिन वर्क फ्रॉम होम पर रहेगा। सभी जज कार पूल करेंगे। रजिस्ट्री से जुड़ा 50 फीसदी स्टाफ भी घर से काम करेगा। सोमवार, शुक्रवार और मिसलेनियस डे ( जो दिन पहले से तय नहीं होते) पर लिस्ट मामलों की सुनवाई केवल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए होगी। इसके अलावा कोर्ट के अन्य वर्किंग डे में भी सुनवाई ऑनलाइन ही की जाएगी। कोर्ट ने रजिस्ट्री विभाग को निर्देश दिया है कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग लिंक समय पर भेजें और टेक्निकल सपोर्ट हर समय उपलब्ध रहे, जिससे अदालत की कार्यवाही प्रभावित न हो। सुप्रीम कोर्ट सचिव जनरल भारत पराशर ने इस संबंध नें सर्कुलर जारी किया है। पीएम की अपील का राज्यों पर भी असर पीएम मोदी की पेट्रोल-डीजल बचाने की अपील का असर देश के राज्यों में भी दिखने लगा है। शुक्रवार को केरलम के सीएम बनने जा रहे वीडी सतीशन पद संभालने से पहले ही अपने काफिले में केवल तीन गाड़ियां रखने का फैसला किया है, जिसमें सिर्फ एक पायलट और एक एस्कॉर्ट वाहन चलेगा। एक दिन पहले महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस गुरुवार को MLC शपथ ग्रहण समारोह के लिए बाइक से विधान भवन पहुंचे थे। दिल्ली सीएम रेखा गुप्ता ने पेट्रोल-डीजल की बचत के लिए नए आदेश जारी किए। अब दिल्ली में सरकारी कर्मचारी हफ्ते में 2 दिन ‘वर्क फ्रॉम होम’ करेंगे। 50% सरकारी बैठकें ऑनलाइन होंगी और कोई भी मंत्री 1 साल तक विदेशी दौरे पर नहीं जाएगा। त्रिपुरा में ग्रुप C और D के सिर्फ 50% सरकारी कर्मचारी ही रोज ऑफिस आएंगे, बाकी कर्मचारी वर्क फ्रॉम होम करेंगे। पंजाब में गवर्नर ऑफिस में हर बुधवार को अधिकारी चार-पहिया वाहन से नहीं आएंगे। हरियाणा में सीएम नायब सिंह सैनी हफ्ते में एक दिन बिना गाड़ी के चलेंगे। पीएम मोदी भी बुधवार को काफिला छोड़ सिर्फ 2 गाड़ियों के साथ निकले। वहीं गृह मंत्री अमित शाह के काफिले में 4 गाड़ियां नजर आई थीं। PM की अपील के बाद 13 राज्यों में सरकार-नेताओं के फैसले 1. ओडिशा: सीएम ने काफिले में गाड़ियां घटाईं ओडिशा के सीएम मोहन माझी ने अपने काफिले की गाड़ियां घटा दी हैं। उनके काफिले में सिर्फ चार गाड़ियां हैं। जिसमें दो पुलिस की गाड़ी शामिल हैं। 2. अरुणाचल प्रदेश: मंत्रियों-सरकारी अधिकारियों की विदेश यात्रा पर रोक अरुणाचल प्रदेश सरकार ने खर्च कम करने के लिए अगले एक साल तक मंत्रियों और सरकारी अधिकारियों की विदेश यात्राओं पर पूरी तरह रोक लगा दी है। इसके अलावा मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और अन्य मंत्रियों के काफिले में वाहनों की संख्या 50% तक घटाने का आदेश दिया है। सरकार ने सरकारी बैठकों के लिए “वर्चुअल फर्स्ट” पॉलिसी भी लागू की है। अब जरूरी सरकारी यात्राओं के लिए कम से कम 15 दिन पहले टिकट बुक कराना जरूरी होगा, जबकि एलटीसी (भारत सरकार का अपने कर्मचारियों को दिया जाने वाला खर्च) यात्राओं की योजना 45 दिन पहले बनानी होगी। 3. त्रिपुरा: 50% कर्मचारी ही ऑफिस आएंगे, बाकी वर्क फ्रॉम होम त्रिपुरा सरकार ने खर्च और पेट्रोल-डीजल बचाने के लिए बड़ा फैसला लिया है। अब सरकारी दफ्तरों में ग्रुप C और D के सिर्फ 50% कर्मचारी ही रोज ऑफिस आएंगे, बाकी कर्मचारी वर्क फ्रॉम होम करेंगे। सरकार ने सभी विभागों को कर्मचारियों की साप्ताहिक ड्यूटी रोस्टर बनाने के निर्देश दिए हैं। जरूरी और इमरजेंसी सेवाओं वाले कर्मचारियों पर यह नियम लागू नहीं होगा। 4. हरियाणा: सीएम ने काफिला घटाया, हफ्ते में एक दिन बिना गाड़ी के चलेंगे हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने पेट्रोल-डीजल बचाने के लिए अपने सरकारी काफिले में गाड़ियों की संख्या कम करने का फैसला लिया है। उन्होंने कहा कि अब उनके काफिले में सिर्फ सुरक्षा के लिए जरूरी वाहन ही शामिल होंगे। सीएम ने यह भी तय किया है कि वे हफ्ते में एक दिन कोई भी गाड़ी इस्तेमाल नहीं करेंगे। 5. आंध्र प्रदेश: सीएम के साथ अब पहले से आधा काफिला आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने अपने काफिले में इस्तेमाल होने वाली गाड़ियों की संख्या 50% कम करने का फैसला लिया है। अब जिला दौरों के दौरान उनके साथ पहले से आधी गाड़ियां ही चलेंगी। मुख्यमंत्री ने मंत्रियों, वीआईपी लोगों से भी सरकारी गाड़ियों का कम इस्तेमाल करने और जरूरत होने पर ही यात्रा करने की अपील की है। 6. पंजाब: हर बुधवार अधिकारी चार पहिया से नहीं आएंगे पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने कहा, हमने अपने अधिकारियों के साथ बैठक के बाद यह फैसला किया है कि हर बुधवार को हमारा कोई भी अधिकारी चार-पहिया वाहन से नहीं आएगा। 7. राजस्थान: सीएम भजनलाल के काफिले में अब 5 गाड़ियां राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अपने काफिले में गाड़ियों की संख्या घटाने का आदेश दिया। पहले काफिले में 14-16 गाड़ियां रहती थीं, लेकिन बुधवार को दिल्ली दौरे के दौरान उनके साथ सिर्फ 5 गाड़ियां ही चलीं। पूरी खबर पढ़ें… 8. बिहार: CM सम्राट चौधरी इलेक्ट्रिक गाड़ी से सचिवालय पहुंचे बिहार के CM सम्राट चौधरी बुधवार को कैबिनेट बैठक के लिए इलेक्ट्रिक गाड़ी से सचिवालय पहुंचे। हालांकि मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सीएम की गाड़ी के पीछे पेट्रोल-डीजल वाली करीब 20 गाड़ियों का काफिला था। वहीं अब कई मंत्री सिर्फ एक या दो गाड़ियों में ही कार्यक्रमों और बैठकों में पहुंच रहे हैं। 9. मध्य प्रदेश: VIP काफिलों पर ब्रेक, CM ने गाड़ियां घटाईं मध्य प्रदेश में अब मंत्रियों और वीआईपी काफिलों में गाड़ियों की संख्या सीमित की जाएगी। साथ ही सरकारी दौरों और भ्रमण के दौरान रैलियों पर भी रोक रहेगी। मुख्यमंत्री मोहन यादव को Z+ कैटेगरी की सिक्योरिटी मिली है। इस वजह से उनके काफिले में अब तक कुल 13 वाहन शामिल रहते थे। नए आदेश के बाद भोपाल में स्थानीय दौरे के दौरान मुख्यमंत्री के काफिले में अब सिर्फ 8 वाहन शामिल होंगे। पूरी खबर पढ़ें… 10. यूपी: बैठकें वर्चुअल होंगी; 2 दिन वर्क फ्रॉम होम उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने मंगलवार को 7 बड़े फैसले लिए। मुख्यमंत्री, मंत्रियों, विधायकों और अफसरों का काफिला 50% घटेगा। हफ्ते में एक दिन इन्हें पब्लिक ट्रांसपोर्ट या बस-मेट्रो से चलना होगा। पूरी खबर पढ़ें… 11. दिल्ली: सरकारी कर्मचारी 2 दिन ‘वर्क फ्रॉम
‘अमरी’ के बाद चर्चा में आई अमृता प्रीतम की बायोपिक:भंसाली का सपना और साहिर का इश्क; क्या बड़े पर्दे पर दिखेगा अमृता-इमरोज का रिश्ता?

फिल्ममेकर मीरा नायर ने हाल ही में मशहूर चित्रकार अमृता शेरगिल के जीवन से प्रेरित अपनी नई फिल्म ‘अमरी’ का ऐलान किया। इसके बाद से इंडस्ट्री में एक बार फिर अमृता प्रीतम की भी बायोपिक को लेकर चर्चाएं तेज हो गईं। खबरें सामने आते ही बॉलीवुड में उस दूसरी ‘अमृता’ यानि अमृता प्रीतम की अधूरी कहानी फिर याद की जाने लगी, जिस पर सालों से फिल्म बनाने की कोशिशें होती रही हैं। भंसाली का ड्रीम प्रोजेक्ट बनकर रह गई ‘गुस्ताखियां’ अमृता प्रीतम की जिंदगी को बड़े परदे पर उतारने की सबसे बड़ी कोशिश संजय लीला भंसाली ने की थी। ‘गुस्ताखियां’ नाम के प्रोजेक्ट पर वह लंबे समय तक काम करते रहे हैं। शाहरुख- प्रियंका के नाम ने भी बटोरी थीं सुर्खियां भंसाली की फिल्म के लिए पहले ऐश्वर्या राय बच्चन का नाम सामने आया था। बाद में करीना कपूर खान भी इस प्रोजेक्ट से जुड़ीं। हालांकि, मेल लीड और डेट्स की समस्याओं के चलते फिल्म आगे नहीं बढ़ पाई। भंसाली के अलावा डायरेक्टर जसमीत के. रीन ने भी अमृता प्रीतम और साहिर की कहानी पर काम शुरू किया था। शाहरुख खान, रेड चिलीज एंटरटेनमेंट के जरिए इसे प्रोड्यूस कर करने वाले थे और संभवतः खुद साहिर का किरदार भी प्ले करते। वहीं, अमृता प्रीतम के रोल के लिए सबसे ज्यादा चर्चा प्रियंका चोपड़ा जोनास के नाम की थी। ‘अमरी’ का रिस्पॉन्स मेकर्स को देगा एक नई हिम्मत माना जा रहा है कि अगर ‘अमरी’ दर्शकों और क्रिटिक्स के बीच चर्चा का विषय बनती है, तो फिल्ममेकर्स फिर से अमृता प्रीतम की कहानी को बड़े परदे पर लाने का रिस्क ले सकते हैं। फिलहाल, हिंदी सिनेमा की यह सबसे चर्चित अधूरी बायोपिक्स में से एक बनी हुई है, जिसका इंतजार दर्शकों को सालों से है। जानकारों के मुताबिक, अमृता प्रीतम की कहानी में प्रेम, दर्द, विद्रोह और साहित्य का ऐसा मेल है, जो बड़े परदे के लिए परफेक्ट माना जाता है। साहिर लुधियानवी के लिए उनका प्रेम, उनकी कविताएं और बाद में इमरोज के साथ उनका रिश्ता हमेशा लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा। यही वजह है कि हर दौर के बड़े फिल्ममेकर्स उनकी जिंदगी को बेहद सिनेमैटिक मानते रहे हैं।
‘केरल में भविष्य की ओर देखें’: मुख्यमंत्री के रूप में वीडी सतीसन के शपथ ग्रहण में शामिल नहीं होंगे शशि थरूर; यहाँ जानिए क्यों | भारत समाचार

आखरी अपडेट:15 मई, 2026, 17:27 IST तिरुवनंतपुरम के सांसद, जिनका नाम एक समय संभावित सीएम उम्मीदवार के रूप में भी लिया जा रहा था, ने एक्स पर अपनी स्थिति स्पष्ट की कांग्रेस ने गुरुवार को सतीसन को केरल का सीएम नामित किया, जिससे पार्टी के नेतृत्व के फैसले पर कई दिनों से चल रहा सस्पेंस खत्म हो गया। (फ़ाइल छवि: पीटीआई) केरल में ‘सिंहासन की लड़ाई’ भले ही कांग्रेस द्वारा मुख्यमंत्री के रूप में वीडी सतीसन को चुनने के साथ अपने तार्किक निष्कर्ष पर पहुंच गई हो, लेकिन शपथ ग्रहण समारोह में पार्टी के सबसे प्रमुख वैश्विक चेहरों में से एक की आसन्न अनुपस्थिति ने यह सुनिश्चित कर दिया है कि आंतरिक घर्षण के अंगारे गर्म बने रहें। 18 मई को, जबकि तिरुवनंतपुरम में लोक भवन सत्ता के ऐतिहासिक परिवर्तन की तैयारी कर रहा है, डॉ. शशि थरूर ठीक 8,112 मील दूर होंगे – संयुक्त राज्य अमेरिका में व्यक्तिगत इतिहास की आधी सदी का जश्न मना रहे होंगे। शिक्षाविद और वर्षगाँठ अपनी अनुपस्थिति को स्पष्ट करने के लिए, तिरुवनंतपुरम के सांसद, जिनका नाम एक समय संभावित सीएम उम्मीदवार के रूप में भी चर्चा में था, ने खुलासा किया कि वह इस सप्ताह के अंत में अपने अल्मा मेटर, टफ्ट्स यूनिवर्सिटी में फ्लेचर स्कूल ऑफ लॉ एंड डिप्लोमेसी में एक दोहरे मील के पत्थर के लिए बोस्टन में हैं। थरूर प्रतिष्ठित आरंभिक भाषण देंगे और अपनी स्नातक कक्षा की 50वीं वर्षगांठ के पुनर्मिलन में भाग लेंगे। मुझे अपने शपथ ग्रहण समारोह में शामिल न हो पाने का दुख है @incKerala सहकर्मी और केरल के नए सीएम @vdsatheesan. मैं अपने अल्मा मेटर, फ्लेचर स्कूल ऑफ लॉ एंड डिप्लोमेसी के स्नातक समारोह में प्रारंभ भाषण देने के लिए इस सप्ताह के अंत में बोस्टन में हूं। @टफ्ट्सयूनिवर्सिटी —…— शशि थरूर (@ShashiTharoor) 15 मई 2026 थरूर ने पोस्ट किया, “अमेरिका में अतीत का जश्न मनाने का एक अवसर, जबकि मैं केरल में भविष्य की आशा करता हूं।” सतह पर, कारण स्पष्ट नहीं है; पांच दशकों के बाद किसी के अल्मा मेटर में मुख्य भाषण एक दुर्लभ, करियर-परिभाषित सम्मान है जिसे कुछ राजनेता अस्वीकार करेंगे। फोकस में प्रकाशिकी हालाँकि, केरल कांग्रेस की राजनीति के अतिसंवेदनशील रंगमंच में, समय को शायद ही कभी महज संयोग के रूप में देखा जाता है। पर्यवेक्षकों का कहना है कि थरूर की शारीरिक अनुपस्थिति केसी वेणुगोपाल बनाम वीडी सतीसन विवाद के तात्कालिक परिदृश्य से एक सुविधाजनक “रणनीतिक विराम” प्रदान करती है। जबकि केंद्रीय नेतृत्व को वेणुगोपाल के स्थान पर सतीसन को चुनकर “विनम्र पाई खाने” के लिए मजबूर होना पड़ा, बोस्टन में थरूर की उपस्थिति ने उन्हें परिणाम की दृश्यमान अजीबता से अछूता रहने की अनुमति दी। थरूर द्वारा बोस्टन में “पुनर्मिलन” का जश्न मनाने में एक सूक्ष्म विडंबना है, जबकि केरल में उनकी अपनी पार्टी अपने युद्धरत गुटों के अव्यवस्थित पुनर्मिलन का प्रयास कर रही है। एक ऐसे नेता के लिए जिसे अक्सर राज्य के संगठनात्मक “ए” और “आई” समूहों द्वारा दरकिनार कर दिया गया है, यह विदेश यात्रा “बाहरी-अंदरूनी” के रूप में उनकी छवि को मजबूत करती है – एक ऐसा व्यक्ति जो वैश्विक स्तर पर काम करता है, भले ही वह स्थानीय “भविष्य” पर नजर रखता हो। ‘केरल में भविष्य’ में भविष्य काल थरूर की पोस्ट की समापन पंक्ति – “केरल में भविष्य” के प्रति उनके दृष्टिकोण पर जोर देती हुई – अपनी छाप छोड़ने से नहीं चूकी। सतीसन अब एक शक्तिशाली, स्वतंत्र विचारधारा वाले मुख्यमंत्री के रूप में स्थापित हो गए हैं, ऐसे नेताओं के लिए मिसाल कायम की गई है जो पारंपरिक “अधीनस्थ” ढांचे में फिट नहीं बैठते हैं। क्या टफ्ट्स के पवित्र हॉल से थरूर की वापसी नए प्रशासन में अधिक मुखर भूमिका का संकेत देती है या क्या वह आंतरिक घेरे के ठीक बाहर मंडराते रहते हैं, यह 18 मई के समारोह का सबसे सम्मोहक उप कथानक बना हुआ है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया ‘केरल में भविष्य की ओर देखें’: मुख्यमंत्री के रूप में वीडी सतीसन के शपथ ग्रहण में शामिल नहीं होंगे शशि थरूर; उसकी वजह यहाँ है अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)केरल(टी)कांग्रेस(टी)केसी वेणुगोपाल(टी)राहुल गांधी(टी)वीडी सतीसन(टी)शशि थरूर
7 मिनट में कैंसर पर प्रहार, लंग्स कैंसर के लिए भारत में लॉन्च हुई क्रांतिकारी दवा, अस्पताल में घंटों रुकने का झंझट खत्म

Last Updated:May 15, 2026, 17:01 IST Lung Cancer Revolutionary Drug: लंग्स कैंसर के लिए भारत में क्रांतिकारी दवा को लॉन्च किया गया है. रॉश फार्मा कंपनी ने ऐसी दवा ईजाद की है जो 7 मिनट के अंदर इंजेक्शन के रूप में शरीर में पहुंचा दी जाती है और इतने समय में इसका असर शुरू होने लगता है. कंपनी का दावा है कि यह दवा शरीर के अंदर जाने में 80 प्रतिशत समय को घटा देगी. इससे लंग्स कैंसर के इलाज में क्रांतिकारी परिवर्तन आने की संभावना है. लंग्स कैंसर की नई दवा लॉन्च. Lung Cancer Revolutionary Drug: कैंसर के इलाज की दुनिया में आज एक नया इतिहास रचा गया है. भारत में लंग्स कैंसर के इलाज के लिए रॉश फार्मा ने एक क्रांतिकारी दवा को लॉन्च किया है. देश ही नहीं दुनिया की यह पहली इम्यूनोथेरेपी है जिसे इंजेक्शन के माध्यम से 7 मिनट के अंदर शरीर में पहुंचा दिया जाता है. इसलिए इसे 7-मिनट वाली इंजेक्टेबल इम्यूनोथेरेपी कहा जा रहा है. यह दुनिया की पहली ऐसी थेरेपी है जिसे नसों के बजाय स्किन के नीचे इंजेक्शन के जरिए दिया जा सकता है. अब तक कैंसर के मरीजों को घंटों तक अस्पताल के बिस्तर पर लेटकर नसों के जरिए कीमोथेरेपी या इम्यूनोथेरेपी लेनी पड़ती थी. इसमें 5 से 6 घंटे का समय बर्बाद होता था. लेकिन Tecentriq SC (Atezolizumab) नाम की इस नई दवा ने इस पूरी प्रक्रिया को ही बदल दिया है. स्विट्जरलैंड की दिग्गज कंपनी रोश फार्मा द्वारा पेश की गई यह तकनीक न केवल मरीजों का समय बचाएगी बल्कि उनके दर्द और मानसिक तनाव को भी कम करेगी.यह दवा अब पूरे देश में उपलब्ध है. इलाज में 80 प्रतिशत समय की बचतकिसी भी कैंसर के इलाज में जब कीमोथेरेपी दी जाती है तो इसमें घंटों समय लगता है. साथ ही अस्पताल में एक दिन बिताना पड़ता है. लेकिन रॉश फार्मा वाली इस थेरेपी को इंजेक्शन की तरह दिया जाता है और इसमें 80 प्रतिशत कम समय लगता है. इससे अस्पताल में अब बहुत कम समय बिताना पड़ेगा. अस्पताल में पहले जितनी देर में 1 मरीज को थेरेपी दी जाती थी इस नई दवा के आने से अब उतने समय में 5 मरीजों को इलाज किया जा सकेगा. अब तक इस दवा को 85 देशों में लॉन्च किया जा चुका है और 10 हजार से ज्यादा मरीज इससे लाभान्वित हो चुके हैं. लंग्स कैंसर के इस नई दवा से मरीजों का खर्च भी कम हो जाएगा और इससे देश पर आर्थिक बोझ में भी कमी आएगी. जिन मरीजों में मेटास्टेटिक लंग्स कैंसर था यानी कैंसर कोशिकाएं शरीर के अन्य हिस्सों में फैल चुकी थी, उन मरीजों पर भी इसका सफल प्रयोग किया गया है. अस्पताल और मरीज दोनों को फायदारॉश फार्मा ने अपने अध्ययन के आधार पर बताया है कि चूंकि यह दवा सीधे स्किन में इंजेक्ट की जाती है इसलिए दर्द भरे कीमोथेरेपी की तुलना में मरीज इसे ज्यादा पसंद करते हैं. यूरोपियन लीग कांग्रेस के मुताबिक 2024 में 5 में से 4 मरीजों ने इस इंजेक्शन को पसंद किया. इससे मरीजों को मानसिक संतुष्टि मिलती है और उसे आराम भी मिलता है. अस्पताल में ज्यादा देर नहीं बिताना पड़ता है. इस दवा के साइड इफेक्ट्स भी कम है. जहां कीमोथेरेपी या अन्य इलाज में मरीज में दर्द ज्यादा होता और इससे एंग्जाइटी और जलन होती है, उसके मुकाबले टिसेंट्रिक एससी Tecentriq SC दवा में कम साइड इफेक्ट्स देखे गए. मेदांता अस्पात में ऑन्कोलॉजी डिपार्टमेंट के प्रमुख डॉ. सज्जन राजपुरोहित ने कहा कि इम्यूनोथेरेपी से कैंसर के मरीजों के इलाज में क्रांतिकारी बदलाव आया है. उन्होंने कहा कि जो ट्रेडिशनल आईवी एडमिनिस्ट्रेशन दवा है उसमें लंबा समय लगता है और यह ज्यादा कष्टदायक होता था. इससे बड़े सुपर-स्पेशियलिटी अस्पतालों जहां कैंसर का जटिल इलाज होता है, पर ज्यादा दबाव पड़ता था. वहीं बार-बार अस्पताल जाना और इलाज में लंबा समय लगने से मरीज में भावनात्मक एवं शारीरिक दबाव बढ़ जाता है. वहीं सबक्यूटेनियस एडमिनिस्ट्रेशन से मरीजों का इलाज बहुत जल्दी और आसानी से किया जा सकता है. इससे इलाज का उनका समग्र अनुभव बेहतर होता है. इसमें ज्यादा वेटिंग नहीं करनी पड़ती. कैंसर केयर डिलीवरी में क्रांतिकारी सुधाररॉश फार्मा इंडिया के एमडी एवं सीईओ राजविंदर मेहदवान ने बताया कि हमारी कंपनी इस तरह के उच्च गुणवत्ता वाली दवाइयों पर रिसर्च करने और उसे विकसित करने के संकल्प के साथ काम कर रही है. हम न सिर्फ क्लिनिकल परिणामों को बेहतर बनाते हैं बल्कि इलाज में आने वाली चुनौतियों को भी दूर करते हैं. इसी कड़ी में टिसेंट्रिक एससी की लॉन्चिंग एडवांस्ड कैंसर केयर तक पहुंच को बेहतर बनाने के प्रति हमारी निरंतर प्रतिबद्धता को दिखाती है. यह दवा मरीजों और डॉक्टरों के लिए ऐसा सॉल्यूशन है जो बेहद तेजी से काम करती है और जटिल स्वास्थ्य चुनौतियों को सुलझाती है. यह इलाज को अधिक कुशल बनाने में कारगर साबित हुई है. रॉश फार्मा इंडिया के चीफ मेडिकल ऑफिसर डॉ. सिवाबालन सिवानेसन ने कहा, कैंसर का इलाज अब सिर्फ मरीज को जीवित रखने तक केंद्रित नहीं रहा बल्कि अब ऐसे तरीकों पर जोर दिया जा रहा है जो मरीज के अनुभव, सुविधा और जीवन की गुणवत्ता को भी बेहतर कर सके. टिसेंट्रिक एससी के साथ हम एक ऐसा इनोवेशन ला रहे हैं जो इलाज के समय को काफी हद तक कम कर देता है. साथ ही इससे टिसेंट्रिक का पहले से प्रमाणित प्रभाव एवं सेफ्टी प्रोफाइल भी बना रहता है. हमारा मानना है कि इस तरह की तरक्की भारत में ज्यादा पेशेंट-सेंट्रिक एवं फ्यूचर-रेडी कैंसर केयर डिलीवरी में अहम भूमिका निभा सकती है. मणिपाल हॉस्पिटल बेंगलुरु में मेडिकल ऑन्कोलॉजी के कंसल्टेंट एवं एचओडी डॉ. अमित रौथन ने बताया कि भारत में कैंसर के बढ़ते दबाव को देखते हुए जरूरी है कि हम मरीजों को इलाज देने के तरीके के बारे में फिर से सोचें. सबक्यूटेनियस इम्यूनोथेरेपी जैसे इनोवेशन से इलाज का तरीका बदल जाएगा. इसके लिए अब सिर्फ बड़े शहरों के अस्पतालों की ओर नहीं देखना होगा बल्कि छोटे शहरों के अस्पतालों में भी इसे आसानी से दिया जा सकेगा. इससे कैंसर मरीज और हेल्थकेयर सिस्टम दोनों पर दबाव कम होगा. यह दवा कैसे काम करती हैयह इंजेक्शन पेट या जांघ की त्वचा के नीचे दिया जाता
स्वाद में है कड़वा, लेकिन सेहत के लिये है वरदान, जानें करेले का जूस बनाने का तरीका और फायदे

करेला स्वाद में भले ही कड़वा होता है, लेकिन स्वास्थ्य के लिए इसे “प्राकृतिक औषधि” माना जाता है. खासकर करेले का जूस शरीर को अंदर से साफ करने और कई बीमारियों से बचाने में मदद करता है. अगर सही तरीके से बनाया और पिया जाए, तो यह आपकी सेहत को काफी सुधार सकता है. करेले का जूस बनाने की रेसिपी आवश्यक सामग्रीकरेला – 1–2नींबू का रस – 1 छोटा चम्मचकाला नमक – स्वादानुसारपानी – 1 गिलास बनाने की विधिकरेले की तैयारी करेंकरेले को अच्छी तरह धो लें और हल्का छिलका उतार लें. बीच के बीज निकाल दें. कड़वाहट कम करेंअगर ज्यादा कड़वाहट पसंद नहीं है, तो कटे हुए करेले को हल्के नमक के साथ 10–15 मिनट के लिए रख दें, फिर धो लें. मिक्सर में पीसेंकरेले के टुकड़ों को मिक्सर में डालें, थोड़ा पानी मिलाकर अच्छी तरह पीस लें. छानकर तैयार करेंजूस को छान लें और उसमें नींबू का रस और काला नमक मिलाएं. तुरंत पिएंताजा जूस तुरंत पीना ज्यादा फायदेमंद होता है. करेले का जूस पीने के फायदे1. ब्लड शुगर कंट्रोलकरेला डायबिटीज के मरीजों के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है.यह शरीर में शुगर लेवल को नियंत्रित करने में मदद करता है. 2. शरीर को डिटॉक्स करता हैकरेले का जूस शरीर से विषैले पदार्थ (टॉक्सिन) बाहर निकालने में मदद करता है.इससे लिवर और खून दोनों साफ होते हैं. 3. पाचन सुधारता हैकरेला पाचन शक्ति को मजबूत करता है और गैस, कब्ज जैसी समस्याओं से राहत देता है. 4. त्वचा के लिए लाभकारीखून साफ होने से त्वचा साफ और ग्लोइंग बनती है.पिंपल और एक्ने की समस्या में भी फायदा मिलता है. 5. वजन घटाने में सहायककरेले का जूस कम कैलोरी वाला होता है और मेटाबॉलिज्म बढ़ाता है, जिससे वजन कम करने में मदद मिलती है. 6. इम्युनिटी बढ़ाता हैइसमें विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट होते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं. जरूरी सावधानियांखाली पेट ज्यादा मात्रा में न पिएं.गर्भवती महिलाएं डॉक्टर की सलाह लें.स्वाद बहुत कड़वा लगे तो अधिक मात्रा में सेवन न करें. निष्कर्षकरेले का जूस भले ही स्वाद में कड़वा हो, लेकिन इसके फायदे बहुत मीठे हैं. अगर आप इसे नियमित और सही मात्रा में पीते हैं, तो यह आपकी सेहत को कई तरह से लाभ पहुंचा सकता है.
तरबूज या खरबूज, गर्मी में किसे खाने से शरीर में नहीं होगी पानी की कमी? जानें दोनों का अंतर

Last Updated:May 15, 2026, 16:45 IST Watermelon Vs Muskmelon: गर्मी के मौसम में बॉडी को हाइड्रेड रखना एक बड़ा चैलेंज होता है. लेकिन तरबूज और खरबूज जैसे समर फ्रूट से शरीर में पानी की कमी से बचा जा सकता है. पर सवाल ये है कि दोनों में से किसे खाना जल्दी डिहाइड्रेशन से लड़ने में मदद करता है? इसका जवाब यहां आप इस लेख की मदद से जान सकते हैं. तरबूज और खरबूज दोनों ही गर्मी के मौसम में मिलने वाले पौष्टिक फल हैं. दोनों को खाने से ही हाइड्रेशन और एनर्जी महसूस होती है. लेकिन फिर भी दोनों में बहुत अंतर होता है. एक हाइड्रेशन किंग तो एक न्यूट्रिएंट्स से भरपूर है. ऐसे में ये कंफ्यूज रहता है कि आखिर दोनों में से किसे खाना ज्यादा फायदेमंद रहेगा. यहां हम आपको दोनों का अंतर बता रहे हैं, जिसके आधार पर आप अपने लिए बेस्ट ऑप्शन चुन सकते हैं. अगर 100 ग्राम की बात करें, तो तरबूज में लगभग 30 कैलोरी होती है, जबकि खरबूजे में करीब 34 कैलोरी पाई जाती है. तरबूज में पानी की मात्रा लगभग 91 प्रतिशत होती है, इसलिए यह शरीर को जल्दी हाइड्रेट करता है. वहीं खरबूजे में पानी थोड़ा कम होता है, लेकिन इसमें फाइबर, विटामिन और मिनरल्स ज्यादा मिलते हैं. खरबूजे में विटामिन A और विटामिन C भरपूर मात्रा में होते हैं. ये आंखों की रोशनी बढ़ाने और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करने में मदद करते हैं. इसमें पोटैशियम भी ज्यादा होता है, जो ब्लड प्रेशर को कंट्रोल रखने में फायदेमंद माना जाता है. Add News18 as Preferred Source on Google तरबूज को गर्मियों का सबसे अच्छा हाइड्रेशन फल कहा जाता है. इसे खाने से शरीर में पानी की कमी नहीं होती और शरीर ठंडा रहता है. यह तेज गर्मी और लू से बचाने में मदद करता है. तरबूज में लाइकोपीन नाम का एंटीऑक्सीडेंट पाया जाता है, जो त्वचा को सूरज की हानिकारक किरणों से बचाता है. इसके अलावा इसमें एल-सिट्रुलिन नाम का तत्व होता है, जो एक्सरसाइज के बाद मांसपेशियों के दर्द को कम करने में मदद करता है. दूसरी तरफ, खरबूजा पोषण के मामले में ज्यादा फायदेमंद माना जाता है. इसमें मौजूद फाइबर पाचन को बेहतर बनाता है और कब्ज से राहत देता है. इसका बीटा-कैरोटीन आंखों और त्वचा के लिए अच्छा होता है और चेहरे पर प्राकृतिक निखार लाने में मदद करता है. तरबूज या खरबूज क्या है बेस्ट विकल्प? अगर आपकी चिंता का विषय शरीर को ठंडा और हाइड्रेट रखना है, तो तरबूज का सेवन आपके लिए बेहतर विकल्प है. लेकिन अगर आप बेहतर पोषण, पाचन और इम्यूनिटी चाहते हैं, तो खरबूजा ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकता है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।
वर्कआउट के दौरान कार्डियक अरेस्ट आने पर तुरंत क्या करें? ये वीडियो नहीं देखा तो बड़ी गलती हो सकती है – News18 हिंदी

Heart Attack in Gym: आजकल जिम में वर्कआउट करते समय अचानक हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं, और ये सिर्फ आम लोगों तक सीमित नहीं हैं. दिल्ली के 40 साल के मोहित, फरीदाबाद के 35 साल के पंकज और गाजियाबाद के 26 साल के कपिल तीनों ही जिम में एक्सरसाइज के दौरान अचानक गिर पड़े और उनकी जान नहीं बचाई जा सकी. महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में भी इसी तरह का एक मामला सामने आया, जहां कंवलजीत सिंह बग्गा की जिम में वर्कआउट करते समय हार्ट अटैक से मौत हो गई. ये घटनाएं सिर्फ आम लोगों तक ही नहीं रहीं. टीवी एक्टर सिद्धांत वीर सूर्यवंशी की भी जिम में एक्सरसाइज के दौरान तबीयत बिगड़ी थी और बाद में उनकी मौत हो गई. वहीं कॉमेडियन राजू श्रीवास्तव को भी वर्कआउट के दौरान सीने में दर्द हुआ और इलाज के बावजूद उनकी जान नहीं बच सकी. अब सवाल ये उठता है कि आखिर जिम में एक्सरसाइज करते समय ऐसा क्यों हो रहा है? क्या इसके पीछे ज्यादा वर्कआउट, गलत डाइट या फिर स्टेरॉयड का इस्तेमाल वजह है? और सबसे जरूरी बात हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट में फर्क क्या होता है, और अगर किसी के साथ ऐसा हो जाए तो उसकी जान कैसे बचाई जा सकती है? इन सभी सवालों के जवाब देंगे फिटनेस एक्सपर्ट सुमित दुबे और कार्डियोलॉजी के वरिष्ठ विशेषज्ञ डॉ. ऋषि वी. लोहीया, किम्स- किंग्सवे हॉस्पिटल्स से. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।
Punjab Kings vs RCB IPL 2026 Dharamshala Match

इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) का उत्साह अब धौलाधार की वादियों में पहुँच गया है। रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) की टीम टूर्नामेंट के 61वें मुकाबले के लिए धर्मशाला पहुँच चुकी है। रविवार, 17 मई को होने वाले इस हाई-वोल्टेज मैच में आरसीबी का सामना पंजाब किंग्स . दोनों टीमों के लिए ‘करो या मरो’ का मुकाबला अंक तालिका की जटिल स्थिति को देखते हुए यह मैच दोनों ही टीमों के लिए प्लेऑफ की दौड़ में बने रहने के लिहाज से बेहद निर्णायक है। यह मुकाबला एक तरह से नॉकआउट की तरह देखा जा रहा है, जहाँ हारने वाली टीम के लिए आगे का सफर लगभग समाप्त हो जाएगा। आरसीबी की टीम पिछले कुछ मैचों के लय को बरकरार रखते हुए इस महत्वपूर्ण मैच को जीतकर उम्मीदें जिंदा रखने के इरादे से मैदान पर उतरेगी, जबकि पंजाब किंग्स अपने इस दूसरे घरेलू मैदान का फायदा उठाना चाहेगी। पिच और मौसम की चुनौतियाँ बढ़ाएंगी रोमांच हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन का यह स्टेडियम दुनिया के सबसे खूबसूरत मैदानों में से एक है, लेकिन यहाँ की परिस्थितियाँ खिलाड़ियों के लिए चुनौतीपूर्ण होती हैं। धौलाधार की पहाड़ियों के साये में तेज गेंदबाजों को अतिरिक्त स्विंग और उछाल मिलने की पूरी संभावना है। शाम के समय तापमान में गिरावट और ओस (Dew) गिरने की संभावना के चलते टॉस की भूमिका सबसे अहम होगी। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि टॉस जीतने वाली टीम लक्ष्य का पीछा करना पसंद करेगी। एयरपोर्ट से बाहर आते कोहली स्टेडियम हाउसफुल और सुरक्षा के कड़े इंतजाम इस महामुकाबले को लेकर क्रिकेट प्रेमियों में जबरदस्त क्रेज देखा जा रहा है। स्टेडियम के सभी टिकट पहले ही बिक चुके हैं और धर्मशाला में पर्यटकों की भारी भीड़ उमड़ रही है। मैच के सफल आयोजन के लिए स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। स्टेडियम के आसपास की सड़कों पर यातायात व्यवस्था में बड़े बदलाव किए गए हैं ताकि दर्शकों को असुविधा न हो। भारी पुलिस बल की तैनाती के साथ-साथ सीसीटीवी कैमरों से हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। पंजाब किंग्स और आरसीबी के बीच होगी कड़ी टक्कर यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या बेंगलुरु की टीम ठंडी हवाओं और तेज आउटफील्ड के बीच अपना जलवा दिखा पाती है या पंजाब किंग्स अपने घरेलू समर्थन के दम पर बाजी मारती है। आरसीबी के लिए जहाँ विराट कोहली और फाफ डु प्लेसिस की फॉर्म अहम होगी, वहीं पंजाब के गेंदबाज अपनी रफ्तार से पहाड़ों में बल्लेबाजों को परेशान करने की कोशिश करेंगे। यह मुकाबला न केवल कौशल का बल्कि मानसिक मजबूती का भी इम्तिहान होगा, क्योंकि दबाव दोनों ही पक्षों पर बराबर है। खिलाडि़यों की फोटो
सौंफ शरबत रेसिपी: आंखों की रोशनी और पेट की ठंडक के लिए पिएं सौंफ का शरबत, एक मिनट में तैयार होगी ये समर ड्रिंक्स

15 मई 2026 को 16:29 IST पर अद्यतन किया गया सौंफ शरबत रेसिपी: गर्मियों के तपते मौसम में लोग अक्सर ऐसे पेय पदार्थों की तलाश में रहते हैं जो शरीर को ठंडक देते हैं, साथ में भी हो जाते हैं। तेज धूप के कारण शरीर में पानी की कमी, थकान और पाचन से जुड़े नुकसान होते हैं। ऐसे में शामिल होने वाले शरबत के मिश्रण में सर्वोत्तम सौपद शामिल होता है। यह ड्रिंक शरीर को ठंडा रखने के साथ ही पेट को भी आराम देता है। आइए जानते हैं इसे बनाने की विधि। अनुसरण करना : सौंफ का शरबत बनाने की सामग्री 1/4 कप सौंफ़ 4-5 हरी इलायची 8-10 काली मिर्च 1 छोटा चम्मच जीरा 2 बड़ी मठरी पुदीना मित्र 1 इंच दालचीनी का टुकड़ा 6-8 लम्बाई 10-12 केसर के चश्मे 3-4 चीनी चीनी काला नमक बर्फ छवि: फ्रीपिक इस शरबत को तैयार करने के लिए सबसे पहले नॉन स्टिक पैन गरम करें। अब इसमें 2 से 4 मिनट तक सूखा भून लें। छवि: फ्रीपिक इसके बाद इसमें सूखे पुदीना, दालचीनी, लौंग और केसर डालकर पेस्ट बना लें। फिर से इन सभी नाखूनों को अच्छे से ठंडा करके इसे प्लास्टिक में पीस लें। छवि: फ्रीपिक इसके बाद इसमें चीनी और काला नमक सामग्रियां ग्राइंड करें ताकि सभी सामग्री अच्छी तरह से मिक्स हो जाए। यह तैयार मिक्स लंबे समय तक स्टोर करके भी रखा जा सकता है। छवि: फ्रीपिक मसाले को तैयार करने के बाद शरबत के लिए एक चम्मच बर्फ के मिश्रण में डाल दें। अब संक्षेप में 2-3 कुकीज़ शामिल हैं। ऊपर से ठंडा पानी डाला। इसे अच्छे से मिक्स करने के बाद तैयार कर लिया जाता है शरबत। छवि: फ्रीपिक एक गिलास में बर्फ के टुकड़े डालने के लिए शरबत तैयार करें। अब इसमें 2 मिठाइयाँ और ऊपर से ठंडा पानी दाल तैयार करें। इसे अच्छी तरह मिक्स करने के बाद ठंडा-ठंडा सर्व करें। छवि: फ्रीपिक सौंफ का ठंडा-ठंडा शरबत शरीर को ठंडक देने के साथ पाचन को बेहतर बनाने में भी मदद करता है। इसमें मौजूद पुदीना, सौंफ और बेसिक हीट से रिलीफ का काम करते हैं। छवि: फ्रीपिक द्वारा प्रकाशित: कीर्ति सोनी प्रकाशित 15 मई 2026 16:29 IST पर (टैग्सटूट्रांसलेट)सौंफ शरबत रेसिपी(टी)ग्रीष्मकालीन स्वस्थ पेय(टी)सौंफ शरबत के फायदे(टी)घर का बना ग्रीष्मकालीन पेय(टी)गर्मियों के लिए ठंडा पेय(टी)भारतीय ग्रीष्मकालीन पेय पदार्थ(टी)पाचन ग्रीष्मकालीन पेय(टी)स्वस्थ शरबत रेसिपी(टी)सौंफ ड्रिंक रेसिपी
CJI बोले- बेरोजगार युवा कॉकरोच जैसे:ये मीडिया, सोशल मीडिया और RTI एक्टिविस्ट बनकर सिस्टम पर हमला करते हैं

सीजेआई सूर्यकांत ने एक मामले की सुनवाई के दौरान देश के बेरोजगार युवाओं को कॉकरोच कहा। उन्होंने कहा- कुछ बेरोजगार युवा कॉकरोच जैसे होते हैं, जो बाद में मीडिया, सोशल मीडिया या RTI एक्टिविस्ट बनकर सिस्टम पर हमला करने लगते हैं। CJI और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने शुक्रवार को एक वकील की याचिका पर सुनवाई की, जिसमें उसने सीनियर एडवोकेट का दर्जा पाने मांग की थी। बेंच ने वकील को फटकार लगाते हुए कहा- समाज में पहले से ही पैरासाइट (परजीवी) हैं जो सिस्टम पर हमला करते हैं। बेंच ने कहा कि दुनिया में हर कोई सीनियर बनने के योग्य हो सकता है, लेकिन आप इसके हकदार नहीं हैं। अगर आपको दिल्ली HC ने सीनियर एडवोकेट बना भी दिया, तो सुप्रीम कोर्ट आपके व्यवहार को देखते हुए उसे फैसलो को रद्द कर देगा। बेंच का सवाल- आपके पास कोई और केस नहीं कोर्ट ने पूछा कि क्या याचिकाकर्ता के पास कोई और मुकदमा नहीं है और क्या यह किसी सीनियर एडवोकेट बनने की चाह रखने वाले का सही व्यवहार है। सीनियर एडवोकेट का दर्जा दिया जाता है, इसे खुद से हासिल करने की कोशिश नहीं की जाती। बेंच ने सवाल किया कि आप इसे हासिल करने के पीछे पड़े हैं, क्या यह सही लगता है। सुप्रीम कोर्ट CBI से कई वकीलों की डिग्री की जांच कराने पर विचार कर सकता है, क्योंकि उनकी डिग्री की सत्यता पर गंभीर सवाल हैं। बार काउंसिल ऑफ इंडिया इस पर कुछ नहीं करेगा, क्योंकि उन्हें वोट चाहिए। सुनवाई के अंत में याचिकाकर्ता ने कोर्ट से माफी मांगी और अपनी याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी। कोर्ट ने याचिका वापस लेने की इजाजत दे दी। ……………. सीजेआई सूर्यकांत से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… सुप्रीम कोर्ट के सीजेआई सूर्यकांत बोले: फटेहाल आदमी के झोले में संविधान, यह न्याय की सबसे बड़ी ताकत सीजेआई सूर्यकांत अप्रैल के आखिरी हफ्ते में राजस्थान के जयपुर पहुंचे थे। उन्होंने यहां एक कॉन्फ्रेंस में कहा था कि पूर्व जज देश की अमूल्य धरोहर हैं। उनके अनुभव, ज्ञान और न्यायिक विवेक का राष्ट्र निर्माण, एडीआर, लोक अदालतों और कानूनी जागरूकता अभियानों में सक्रिय उपयोग होना चाहिए। पूरी खबर पढ़ें… CJI बोले मुझे डांटकर चैम्बर से बाहर निकाल दिया था: फिर उन्हीं जज की सलाह पर छोड़ा न्यायिक सेवा इंटरव्यू सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने शुक्रवार को अपनी निजी जिंदगी से जुड़ा एक किस्सा सुनाया। केस की सुनवाई के दौरान CJI ने बताया कैसे एक जज ने उन्हें डांट लगाते हुए चैंबर से बाहर निकल जाने को कहा था। ये किस्सा जस्टिस सूर्यकांत ने ज्यूडिशियल सर्विस की एप्लीकेंट की याचिका पर सुनवाई के दौरान सुनाया। पूरी खबर पढ़ें…








