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Soar Throat Reason In Summer: ज्यादा ठंडा खाने से गला खराब क्यों होता है?

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गर्मी आते ही अक्सर यह सलाह सुनने को मिलती है कि ज्यादा ठंडा पानी पीने या आइसक्रीम खाने से गला खराब हो जाता है. कई भारतीय परिवारों में यह धारणा काफी आम है, खासकर बच्चों को ठंडी चीजों से दूर रहने की सलाह दी जाती है. लेकिन क्या सच में ठंडा पानी और आइसक्रीम गले को नुकसान पहुंचाते हैं?

इनामदार अस्पताल, पुणे में ईएनटी सर्जन, डॉक्टर प्रवीण भोसले बताते हैं कि मेडिकल नजरिए से देखा जाए तो ठंडा पानी या आइसक्रीम अपने आप गले में इंफेक्शन पैदा नहीं करते. गले के अधिकतर संक्रमण वायरस और कुछ मामलों में बैक्टीरिया की वजह से होते हैं, न कि खाने-पीने की चीजों के तापमान से. लेकिन ज्यादा मात्रा में सेवन से गले में थोड़ी इरिटेशन जरूर हो सकती है.

ठंडी चीजों से गला खराब क्यों होता है
एक्सपर्ट बताते हैं कि बहुत ज्यादा ठंडी चीजें पहले से संवेदनशील अफेक्टेड गले में इरिटेशन को बढ़ा सकती हैं. दरअसल, गले की अंदरूनी सतह काफी नाजुक होती है और जब बहुत ठंडी चीजें इसके संपर्क में आती हैं, तो कुछ समय के लिए वहां की छोटी रक्त वाहिकाएं सिकुड़ सकती हैं. इससे कुछ लोगों को गले में खराश, हल्का दर्द, खांसी, कसाव या अचानक असहजता महसूस हो सकती है. यह आमतौर ये असर बहुत थोड़े समय के लिए रहता है. ये पर्मानेंट डैमेज का संकेत नहीं होता.

इन लोगों में ज्यादा दिखती है प्रॉब्लम
यह परेशानी तब ज्यादा महसूस होती है जब गला पहले से किसी कारण से प्रभावित हो. वायरल बुखार, टॉन्सिल की सूजन, एलर्जी, साइनस से जुड़ी समस्याएं, एसिडिटी, मुंह से सांस लेने की आदत, शरीर में पानी की कमी या प्रदूषण के संपर्क में रहने वाले लोगों को ठंडी चीजें खाने के बाद तकलीफ ज्यादा महसूस हो सकती है. ऐसे मामलों में ठंडी चीजें बीमारी की वजह नहीं बनतीं, लेकिन परेशानी को बढ़ाने वाला ट्रिगर जरूर बन सकती हैं.

दांतों में सड़न का कारण बन सकता है
बार-बार मीठी और ठंडी चीजें खाने से मुंह में बैक्टीरिया की एक्टिविटी बढ़ सकती है और यदि ओरल हाइजीन अच्छी न हो तो दांतों में सड़न, बदबू या मसूड़ों की समस्या भी बढ़ सकती है. इसलिए गले और मुंह की सेहत को अलग-अलग नहीं देखा जा सकता. पर्याप्त पानी पीना, मुंह की सफाई रखना और अच्छी ओरल हाइजीन बनाए रखना गले के आराम से भी जुड़ा होता है.

इन संकेतों को न करे नजरअदांज
यदि गले का दर्द तीन से चार दिन से ज्यादा बना रहे, तेज बुखार हो, निगलने में बहुत ज्यादा दर्द हो, बार-बार आवाज बैठ रही हो, सांस लेने में परेशानी महसूस हो या लार में खून दिखाई दे, तो स्थिति को गंभीरता से लेना जरूरी है.

सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.
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इनामदार अस्पताल, पुणे में ईएनटी सर्जन, डॉक्टर प्रवीण भोसले बताते हैं कि मेडिकल नजरिए से देखा जाए तो ठंडा पानी या आइसक्रीम अपने आप गले में इंफेक्शन पैदा नहीं करते. गले के अधिकतर संक्रमण वायरस और कुछ मामलों में बैक्टीरिया की वजह से होते हैं, न कि खाने-पीने की चीजों के तापमान से. लेकिन ज्यादा मात्रा में सेवन से गले में थोड़ी इरिटेशन जरूर हो सकती है.

ठंडी चीजों से गला खराब क्यों होता है
एक्सपर्ट बताते हैं कि बहुत ज्यादा ठंडी चीजें पहले से संवेदनशील अफेक्टेड गले में इरिटेशन को बढ़ा सकती हैं. दरअसल, गले की अंदरूनी सतह काफी नाजुक होती है और जब बहुत ठंडी चीजें इसके संपर्क में आती हैं, तो कुछ समय के लिए वहां की छोटी रक्त वाहिकाएं सिकुड़ सकती हैं. इससे कुछ लोगों को गले में खराश, हल्का दर्द, खांसी, कसाव या अचानक असहजता महसूस हो सकती है. यह आमतौर ये असर बहुत थोड़े समय के लिए रहता है. ये पर्मानेंट डैमेज का संकेत नहीं होता.

इन लोगों में ज्यादा दिखती है प्रॉब्लम
यह परेशानी तब ज्यादा महसूस होती है जब गला पहले से किसी कारण से प्रभावित हो. वायरल बुखार, टॉन्सिल की सूजन, एलर्जी, साइनस से जुड़ी समस्याएं, एसिडिटी, मुंह से सांस लेने की आदत, शरीर में पानी की कमी या प्रदूषण के संपर्क में रहने वाले लोगों को ठंडी चीजें खाने के बाद तकलीफ ज्यादा महसूस हो सकती है. ऐसे मामलों में ठंडी चीजें बीमारी की वजह नहीं बनतीं, लेकिन परेशानी को बढ़ाने वाला ट्रिगर जरूर बन सकती हैं.

दांतों में सड़न का कारण बन सकता है
बार-बार मीठी और ठंडी चीजें खाने से मुंह में बैक्टीरिया की एक्टिविटी बढ़ सकती है और यदि ओरल हाइजीन अच्छी न हो तो दांतों में सड़न, बदबू या मसूड़ों की समस्या भी बढ़ सकती है. इसलिए गले और मुंह की सेहत को अलग-अलग नहीं देखा जा सकता. पर्याप्त पानी पीना, मुंह की सफाई रखना और अच्छी ओरल हाइजीन बनाए रखना गले के आराम से भी जुड़ा होता है.

इन संकेतों को न करे नजरअदांज
यदि गले का दर्द तीन से चार दिन से ज्यादा बना रहे, तेज बुखार हो, निगलने में बहुत ज्यादा दर्द हो, बार-बार आवाज बैठ रही हो, सांस लेने में परेशानी महसूस हो या लार में खून दिखाई दे, तो स्थिति को गंभीरता से लेना जरूरी है.

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