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Bhuvneshwar is the most successful bowler of this IPL with 21 wickets.

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बेंगलुरू12 मिनट पहले

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आईपीएल में 200 विकेट लेने वाले पहले तेज गेंदबाज बनने का रिकॉर्ड भी भुवी ने इसी साल बनाया।

आईपीएल 2026 में जब भी रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु को मुश्किल वक्त में विकेट की जरूरत पड़ी, कप्तान रजत पाटीदार की नजर सबसे पहले एक ही खिलाड़ी पर गई- भुवनेश्वर कुमार। उम्र 36 साल, शरीर पहले जैसा तेज नहीं, लेकिन अनुभव और दिमाग पहले से कहीं ज्यादा मजबूत।

मुंबई के खिलाफ रायपुर में आखिरी ओवर का रोमांच खत्म हुए मुश्किल से एक दिन हुआ था, पर चार विकेट लेने और बल्ले से आखिरी ओवर में अहम रन बनाने वाले भुवी के चेहरे पर न कोई अतिरिक्त उत्साह था और न ही कोई दिखावा। वह शांति से बैठे थे, जैसे यह सब उनके लिए सामान्य हो। हाल ही में आर. अश्विन ने मजाक में कहा था कि भुवनेश्वर को फिर से भारत की टी20 टीम में होना चाहिए। जब यह बात उनसे पूछी गई तो वे मुस्कुराए और बोले, ‘अश्विन को ही सलेक्टर बना दो।’ यही सहजता भुवनेश्वर की सबसे बड़ी पहचान है। इस सीजन उनके नाम 21 विकेट हैं और वह पर्पल कैप होल्डर हैं।

आईपीएल में 200 विकेट लेने वाले पहले तेज गेंदबाज बनने का रिकॉर्ड भी उन्होंने इसी साल बनाया। लेकिन भुवनेश्वर के लिए आंकड़ों से ज्यादा अहम है मानसिक संतुलन। वे कहते हैं, ‘जिस दिन मुझे भारतीय टीम से बाहर किया गया, उसी दिन मैंने उसे स्वीकार कर लिया था। 10 साल तक सब कुछ देखा था। इसलिए अलग होना आसान था।’

कभी सिर्फ स्विंग गेंदबाज माने जाने वाले भुवनेश्वर ने अब खुद को टी20 के हिसाब से बदल लिया है। उनकी नकल बॉल और डेथ ओवर गेंदबाजी बल्लेबाजों के लिए बड़ी परेशानी बनी हुई है। वे मानते हैं कि टी20 क्रिकेट पूरी तरह बदल चुका है। पहले 200 रन बनते थे तो लगता था मैच खत्म। अब 200 भी छोटा स्कोर लगता है। बल्लेबाज बदल रहे हैं, इसलिए गेंदबाजों को भी बदलना पड़ता है। हालांकि, इतने बदलाव के बावजूद भुवनेश्वर खुद को बदला हुआ खिलाड़ी नहीं मानते। उनका कहना है कि उन्होंने कुछ नया नहीं किया। वे कहते हैं, ‘लोग सोचते हैं मैं कुछ अलग कर रहा हूं। लेकिन मैं वही पुरानी चीजें कर रहा हूं। फर्क सिर्फ इतना है कि विकेट मिल रहे हैं। विकेट से आत्मविश्वास आता है और आत्मविश्वास से गेंद सही जगह पड़ती है।’ यही भुवनेश्वर की असली कहानी है। तेज रफ्तार नहीं, आक्रामक बयान नहीं, सिर्फ अनुशासन, धैर्य, लगातार मेहनत। शायद इसी वजह से बढ़ती उम्र में भी वे आईपीएल के सबसे भरोसेमंद गेंदबाज बने हुए हैं।

खेल से ज्यादा फिटनेस को समय दे रहे हैं भुवी

भुवनेश्वर अब सालभर बहुत ज्यादा क्रिकेट नहीं खेलते। आईपीएल, यूपी टी20 लीग और सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी तक ही वे सीमित रहते हैं। बाकी समय ट्रेनिंग, जिम और फिटनेस पर ध्यान देते हैं।

वे मानते हैं कि 36 की उम्र में रिकवरी आसान नहीं रहती। भुवनेश्वर बताते हैं, ‘अब शरीर को ज्यादा समय चाहिए। लेकिन मेरे पास ट्रेनिंग के लिए ज्यादा वक्त है। इसलिए पहले से ज्यादा मेहनत कर पा रहा हूं।’

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आईपीएल में 200 विकेट लेने वाले पहले तेज गेंदबाज बनने का रिकॉर्ड भी भुवी ने इसी साल बनाया।

आईपीएल 2026 में जब भी रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु को मुश्किल वक्त में विकेट की जरूरत पड़ी, कप्तान रजत पाटीदार की नजर सबसे पहले एक ही खिलाड़ी पर गई- भुवनेश्वर कुमार। उम्र 36 साल, शरीर पहले जैसा तेज नहीं, लेकिन अनुभव और दिमाग पहले से कहीं ज्यादा मजबूत।

मुंबई के खिलाफ रायपुर में आखिरी ओवर का रोमांच खत्म हुए मुश्किल से एक दिन हुआ था, पर चार विकेट लेने और बल्ले से आखिरी ओवर में अहम रन बनाने वाले भुवी के चेहरे पर न कोई अतिरिक्त उत्साह था और न ही कोई दिखावा। वह शांति से बैठे थे, जैसे यह सब उनके लिए सामान्य हो। हाल ही में आर. अश्विन ने मजाक में कहा था कि भुवनेश्वर को फिर से भारत की टी20 टीम में होना चाहिए। जब यह बात उनसे पूछी गई तो वे मुस्कुराए और बोले, ‘अश्विन को ही सलेक्टर बना दो।’ यही सहजता भुवनेश्वर की सबसे बड़ी पहचान है। इस सीजन उनके नाम 21 विकेट हैं और वह पर्पल कैप होल्डर हैं।

आईपीएल में 200 विकेट लेने वाले पहले तेज गेंदबाज बनने का रिकॉर्ड भी उन्होंने इसी साल बनाया। लेकिन भुवनेश्वर के लिए आंकड़ों से ज्यादा अहम है मानसिक संतुलन। वे कहते हैं, ‘जिस दिन मुझे भारतीय टीम से बाहर किया गया, उसी दिन मैंने उसे स्वीकार कर लिया था। 10 साल तक सब कुछ देखा था। इसलिए अलग होना आसान था।’

कभी सिर्फ स्विंग गेंदबाज माने जाने वाले भुवनेश्वर ने अब खुद को टी20 के हिसाब से बदल लिया है। उनकी नकल बॉल और डेथ ओवर गेंदबाजी बल्लेबाजों के लिए बड़ी परेशानी बनी हुई है। वे मानते हैं कि टी20 क्रिकेट पूरी तरह बदल चुका है। पहले 200 रन बनते थे तो लगता था मैच खत्म। अब 200 भी छोटा स्कोर लगता है। बल्लेबाज बदल रहे हैं, इसलिए गेंदबाजों को भी बदलना पड़ता है। हालांकि, इतने बदलाव के बावजूद भुवनेश्वर खुद को बदला हुआ खिलाड़ी नहीं मानते। उनका कहना है कि उन्होंने कुछ नया नहीं किया। वे कहते हैं, ‘लोग सोचते हैं मैं कुछ अलग कर रहा हूं। लेकिन मैं वही पुरानी चीजें कर रहा हूं। फर्क सिर्फ इतना है कि विकेट मिल रहे हैं। विकेट से आत्मविश्वास आता है और आत्मविश्वास से गेंद सही जगह पड़ती है।’ यही भुवनेश्वर की असली कहानी है। तेज रफ्तार नहीं, आक्रामक बयान नहीं, सिर्फ अनुशासन, धैर्य, लगातार मेहनत। शायद इसी वजह से बढ़ती उम्र में भी वे आईपीएल के सबसे भरोसेमंद गेंदबाज बने हुए हैं।

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