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सिस्टोलिक और डायस्टोलिक बीपी क्या होता है? इसकी नार्मल रेंज क्या है, एक्सपर्ट से समझिए

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Systolic and Diastolic BP: जब भी आप ब्लड प्रेशर चेक करते हैं, तो उसमें 2 नंबर दिखाई देते हैं. ब्लड प्रेशर रीडिंग में ऊपर वाला नंबर सिस्टोलिक और नीचे वाला नंबर डायस्टोलिक बीपी कहलाता है. सामान्य बीपी 120/80 mmHg माना जाता है. अगर इससे ज्यादा रीडिंग आती है, तो यह हाई ब्लड प्रेशर माना जाता है.

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बीपी रीडिंग में ऊपर वाला नंबर सिस्टोलिक बीपी कहलाता है और नीचे वाला डायस्टोलिक बीपी.

Systolic vs Diastolic BP: आजकल हाई ब्लड प्रेशर की समस्या तेजी से बढ़ रही है. बड़ी संख्या में लोग इसका शिकार हो रहे हैं. जब भी आप डिजिटल मशीन से ब्लड प्रेशर चेक करते हैं, तब रीडिंग में दो नंबर जैसे 120 80 दिखाई देते हैं. बहुत से लोग यह तो जानते हैं कि यह बीपी की रीडिंग है, लेकिन सिस्टोलिक और डायस्टोलिक बीपी का असली मतलब नहीं जानते हैं. कुछ लोग सिर्फ ऊपर की रीडिंग को महत्वपूर्ण समझते हैं, तो कई लोग नीचे की रीडिंग को ज्यादा गंभीरता से लेते हैं. हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार ब्लड प्रेशर की सही जानकारी होना जरूरी है, ताकि हार्ट को ठीक रखा जा सके.

क्या होता है सिस्टोलिक बीपी?

नई दिल्ली के सर गंगाराम हॉस्पिटल के प्रिवेंटिव हेल्थ एंड वेलनेस डिपार्टमेंट की डायरेक्टर डॉ. सोनिया रावत ने News18 को बताया ब्लड प्रेशर रीडिंग में ऊपर वाला नंबर सिस्टोलिक बीपी कहलाता है. यह उस प्रेशर को दर्शाता है, जब दिल शरीर में खून पंप करता है. जब हार्ट धड़कता है और ब्लड धमनियों में भेजता है, तब उस समय धमनियों पर पड़ने वाले दबाव को सिस्टोलिक प्रेशर कहा जाता है. उदाहरण के लिए 120/80 में 120 सिस्टोलिक बीपी होता है. अगर सिस्टोलिक प्रेशर लगातार ज्यादा रहता है, तो इससे दिल और ब्लड वेसल्स पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है.

डायस्टोलिक बीपी क्या होता है?

डॉक्टर के मुताबिक ब्लड प्रेशर रीडिंग में नीचे वाला नंबर डायस्टोलिक बीपी कहलाता है. यह उस समय का दबाव बताता है, जब दिल धड़कनों के बीच आराम की स्थिति में होता है. जब हार्ट अगली धड़कन से पहले रिलैक्स करता है, तब धमनियों में जो दबाव रहता है, उसे डायस्टोलिक प्रेशर कहा जाता है. 120/80 की रीडिंग में 80 डायस्टोलिक बीपी होता है. अगर यह लगातार ज्यादा रहे, तो यह भी गंभीर बीमारियां पैदा कर सकता है. इसे कंट्रोल रखना भी बेहद जरूरी है.

बीपी की नॉर्मल रेंज क्या होती है?

एक्सपर्ट की मानें तो सामान्य ब्लड प्रेशर 120/80 mmHg माना जाता है. अगर सिस्टोलिक बीपी 120 से कम और डायस्टोलिक 80 से कम हो, तो इसे सामान्य माना जाता है. वहीं 130/80 या उससे अधिक की रीडिंग हाई ब्लड प्रेशर की तरफ इशारा कर सकती है. लंबे समय तक हाई बीपी रहने पर दिल की बीमारी, स्ट्रोक, किडनी की समस्या और आंखों से जुड़ी परेशानियों का खतरा बढ़ सकता है. कई बार हाई बीपी के शुरुआती लक्षण नजर नहीं आते, इसलिए इसे साइलेंट किलर भी कहा जाता है.

कब डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए?

अगर आपको बार-बार सिरदर्द, चक्कर, सांस फूलना या सीने में दर्द जैसी समस्याएं महसूस हों, तो तुरंत डॉक्टर से जांच करवानी चाहिए. अगर आपकी बीपी रीडिंग लगातार सामान्य सीमा से ऊपर या नीचे आ रही हो, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. समय रहते सही इलाज और लाइफस्टाइल बदलाव से ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखा जा सकता है. बीपी को सामान्य रखने के लिए संतुलित आहार, कम नमक, नियमित व्यायाम और तनाव कम करना बेहद जरूरी है. बीपी कंट्रोल रखने के लिए स्मोकिंग और शराब से बचना भी जरूरी है.

सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

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अमित उपाध्याय

अमित उपाध्याय News18 हिंदी की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें

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Systolic and Diastolic BP: जब भी आप ब्लड प्रेशर चेक करते हैं, तो उसमें 2 नंबर दिखाई देते हैं. ब्लड प्रेशर रीडिंग में ऊपर वाला नंबर सिस्टोलिक और नीचे वाला नंबर डायस्टोलिक बीपी कहलाता है. सामान्य बीपी 120/80 mmHg माना जाता है. अगर इससे ज्यादा रीडिंग आती है, तो यह हाई ब्लड प्रेशर माना जाता है.

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बीपी रीडिंग में ऊपर वाला नंबर सिस्टोलिक बीपी कहलाता है और नीचे वाला डायस्टोलिक बीपी.

Systolic vs Diastolic BP: आजकल हाई ब्लड प्रेशर की समस्या तेजी से बढ़ रही है. बड़ी संख्या में लोग इसका शिकार हो रहे हैं. जब भी आप डिजिटल मशीन से ब्लड प्रेशर चेक करते हैं, तब रीडिंग में दो नंबर जैसे 120 80 दिखाई देते हैं. बहुत से लोग यह तो जानते हैं कि यह बीपी की रीडिंग है, लेकिन सिस्टोलिक और डायस्टोलिक बीपी का असली मतलब नहीं जानते हैं. कुछ लोग सिर्फ ऊपर की रीडिंग को महत्वपूर्ण समझते हैं, तो कई लोग नीचे की रीडिंग को ज्यादा गंभीरता से लेते हैं. हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार ब्लड प्रेशर की सही जानकारी होना जरूरी है, ताकि हार्ट को ठीक रखा जा सके.

क्या होता है सिस्टोलिक बीपी?

नई दिल्ली के सर गंगाराम हॉस्पिटल के प्रिवेंटिव हेल्थ एंड वेलनेस डिपार्टमेंट की डायरेक्टर डॉ. सोनिया रावत ने News18 को बताया ब्लड प्रेशर रीडिंग में ऊपर वाला नंबर सिस्टोलिक बीपी कहलाता है. यह उस प्रेशर को दर्शाता है, जब दिल शरीर में खून पंप करता है. जब हार्ट धड़कता है और ब्लड धमनियों में भेजता है, तब उस समय धमनियों पर पड़ने वाले दबाव को सिस्टोलिक प्रेशर कहा जाता है. उदाहरण के लिए 120/80 में 120 सिस्टोलिक बीपी होता है. अगर सिस्टोलिक प्रेशर लगातार ज्यादा रहता है, तो इससे दिल और ब्लड वेसल्स पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है.

डायस्टोलिक बीपी क्या होता है?

डॉक्टर के मुताबिक ब्लड प्रेशर रीडिंग में नीचे वाला नंबर डायस्टोलिक बीपी कहलाता है. यह उस समय का दबाव बताता है, जब दिल धड़कनों के बीच आराम की स्थिति में होता है. जब हार्ट अगली धड़कन से पहले रिलैक्स करता है, तब धमनियों में जो दबाव रहता है, उसे डायस्टोलिक प्रेशर कहा जाता है. 120/80 की रीडिंग में 80 डायस्टोलिक बीपी होता है. अगर यह लगातार ज्यादा रहे, तो यह भी गंभीर बीमारियां पैदा कर सकता है. इसे कंट्रोल रखना भी बेहद जरूरी है.

बीपी की नॉर्मल रेंज क्या होती है?

एक्सपर्ट की मानें तो सामान्य ब्लड प्रेशर 120/80 mmHg माना जाता है. अगर सिस्टोलिक बीपी 120 से कम और डायस्टोलिक 80 से कम हो, तो इसे सामान्य माना जाता है. वहीं 130/80 या उससे अधिक की रीडिंग हाई ब्लड प्रेशर की तरफ इशारा कर सकती है. लंबे समय तक हाई बीपी रहने पर दिल की बीमारी, स्ट्रोक, किडनी की समस्या और आंखों से जुड़ी परेशानियों का खतरा बढ़ सकता है. कई बार हाई बीपी के शुरुआती लक्षण नजर नहीं आते, इसलिए इसे साइलेंट किलर भी कहा जाता है.

कब डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए?

अगर आपको बार-बार सिरदर्द, चक्कर, सांस फूलना या सीने में दर्द जैसी समस्याएं महसूस हों, तो तुरंत डॉक्टर से जांच करवानी चाहिए. अगर आपकी बीपी रीडिंग लगातार सामान्य सीमा से ऊपर या नीचे आ रही हो, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. समय रहते सही इलाज और लाइफस्टाइल बदलाव से ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखा जा सकता है. बीपी को सामान्य रखने के लिए संतुलित आहार, कम नमक, नियमित व्यायाम और तनाव कम करना बेहद जरूरी है. बीपी कंट्रोल रखने के लिए स्मोकिंग और शराब से बचना भी जरूरी है.

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अमित उपाध्याय

अमित उपाध्याय News18 हिंदी की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें

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