रॉकस्टार का सीक्वल नहीं बनाएंगे इम्तियाज अली:कहा- जिसे पसंद हो, वो बनाए, अपकमिंग फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ में अधूरा प्यार और बिछड़ने का दर्द दिखेगा

रॉकस्टार का सीक्वल नहीं बनाएंगे इम्तियाज अली, लेकिन उनकी आगामी फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ में एक बार फिर अधूरे प्यार, बिछड़ने और लौटकर आने की कसक देखने को मिलेगी। दिलजीत दोसांझ, शरवरी, वेदांग रैना और नसीरुद्दीन शाह स्टारर यह फिल्म सिर्फ लव स्टोरी नहीं, बल्कि यादों, माइग्रेशन और इमोशनल टूटन की कहानी है। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में इम्तियाज अली ने बताया कि वह ‘रॉकस्टार’ का सीक्वल क्यों नहीं बनाना चाहते। वहीं उन्होंने दिलजीत दोसांझ, ए.आर. रहमान और अपनी फिल्मों में बार-बार दिखने वाले दर्द व बिछड़ने के एहसास पर भी खुलकर बात की। शरवरी और वेदांग ने भी फिल्म से अपने भावनात्मक जुड़ाव और किरदारों की तैयारी के अनुभव साझा किए। सवाल: आपकी फिल्मों में इश्क मिलने से ज्यादा बिछड़ने में दिखता है। क्या ये आपकी निजी सोच से आता है? जवाब/इम्तियाज अली: जब मैं फिल्म बनाता हूं, तब अपने बारे में नहीं सोच रहा होता। शायद मैं कहानियां बनाकर खुद से भागने की कोशिश करता हूं। लेकिन ये सच है कि जब आप किसी शहर को छोड़ रहे होते हैं, तभी उसकी सबसे ज्यादा याद आती है। मुझे याद है, जब मैं दिल्ली और जमशेदपुर के बीच ट्रेन से सफर करता था, तो अपना शहर सबसे खूबसूरत तब लगता था जब उसे छोड़ रहा होता था। कहते हैं, “A city looks most beautiful from the light of the burning bridge.” यानी जब वापसी का रास्ता खत्म हो जाता है, तब उस जगह के लिए प्यार और बढ़ जाता है। सवाल: वेदांग, ‘मैं वापस आऊंगा’ आपके लिए क्या मायने रखती है? जवाब/वेदांग रैना: शुरुआत में मेरे लिए सबसे बड़ी बात सिर्फ इम्तियाज सर के साथ काम करना था। लेकिन जब स्क्रिप्ट आगे बढ़ी, तब महसूस हुआ कि यह कहानी मुझसे बहुत जुड़ी हुई है, क्योंकि मैं भी कश्मीरी पंडित हूं। मेरी फैमिली ने माइग्रेशन देखा है। इसलिए इस फिल्म से मेरा भावनात्मक जुड़ाव हो गया। ये सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि एक बड़ी जिम्मेदारी भी है। सवाल: शरवरी, आपके लिए इस फिल्म का मतलब क्या है? जवाब/शरवरी: ये एक सिंपल लव स्टोरी है। प्यार सिर्फ किसी इंसान से नहीं, अपनी मिट्टी और अपनेपन से भी हो सकता है। इस कहानी की सबसे बड़ी ताकत उसका प्यार है। एक एक्टर के तौर पर भी ये मेरे लिए नया अनुभव था। इस किरदार को निभाते हुए मैंने खुद को भी थोड़ा और समझा। सवाल: इम्तियाज, आपके लिए इश्क क्या है? क्या आप ‘लव एट फर्स्ट साइट’ में भरोसा करते हैं? जवाब/इम्तियाज अली: जैसे-जैसे मैं बड़ा हो रहा हूं, प्यार को लेकर और कन्फ्यूज होता जा रहा हूं। शायद फिल्मों के जरिए ही उसे समझने की कोशिश करता हूं। मुझे लगता है प्यार कुछ भी हो सकता है। पहली नजर में भी हो सकता है, बार-बार भी हो सकता है और सिर्फ एक बार भी हो सकता है। जैसे भगवान को हर इंसान अपने तरीके से समझता है, वैसे ही प्यार भी है। सवाल: आपकी फिल्मों में टूटना, बिछड़ना और फिर लौटकर आना बार-बार क्यों दिखता है? जवाब/इम्तियाज अली: ये सब बचपन की यादों और लोगों की कहानियों से आता है। पंजाब में शूटिंग के दौरान कई बुजुर्गों ने मुझे पार्टिशन के किस्से सुनाए। किसी ने बताया कि उनके बुजुर्ग वाघा बॉर्डर तक पहुंच गए थे और कह रहे थे, “मुझे लाहौर जाना है,” क्योंकि उन्हें याद नहीं था कि पार्टिशन हो चुका है। किसी ने वीडियो कॉल पर अपने बचपन की जगह का रास्ता समझाया, जहां वो खुद नहीं जा सकते थे। ऐसी कई छोटी-छोटी बातें मेरे दिमाग में जमा होती गईं और फिर इस फिल्म की कहानी बन गई। सवाल: वेदांग, आपके लिए इश्क क्या है? जवाब/वेदांग रैना: अगर प्यार को सिर्फ रोमांटिक तरीके से ना देखें, तो कोई चीज आपको बहुत गहराई से छू जाए, वो भी प्यार हो सकता है। मुझे नहीं पता कि मुझे ‘लव एट फर्स्ट साइट’ हुआ है या नहीं, लेकिन किसी चीज से गहराई से प्रभावित होना शायद प्यार ही है। सवाल: क्या आपका दिल टूटा है? जवाब/वेदांग रैना: हां, जरूर टूटा है। शायद उस वक्त लगा था कि दिल टूट गया है, लेकिन अब मैच्योर नजरिए से देखूं तो शायद वो कुछ और था। लेकिन वो एहसास मैंने महसूस किया है। सवाल: दिल टूटने ने आपको कितना बदला? जवाब/वेदांग रैना: हर अनुभव इंसान को बदलता है और दिल टूटना जिंदगी का बड़ा मोड़ होता है। उसके बाद लोगों, रिश्तों और दुनिया को देखने का नजरिया बदल जाता है। शायद वही चीज इंसान को और समझदार बनाती है। सवाल: शरवरी, आपके लिए प्यार क्या है? जवाब/शरवरी: हम सब जिंदगी भर प्यार को समझते रहते हैं। बचपन से लेकर परिवार और रिश्तों तक, हर जगह प्यार मौजूद होता है। मेरे लिए प्यार का मतलब एक वादा है, एक सच्चाई है। हमारी फिल्म भी इसी भावना पर बनी है, एक ऐसा प्यार जो बहुत प्योर है। सवाल: क्या कभी दिल टूटा? और उससे कैसे बाहर निकलीं? जवाब/शरवरी: जब मैं इम्तियाज सर की फिल्में देखती हूं, तो उनमें दर्द के साथ एक खूबसूरती भी दिखती है। मैं मानती हूं कि कोई रिश्ता कभी पूरी तरह खत्म नहीं होता। शायद उनकी फिल्मों ने मुझे यही सिखाया है। सवाल: इम्तियाज अली के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा? जवाब/ शरवरी: हमने शूटिंग से पहले उनके साथ रेकी की थी। वहीं हमें समझ आया कि फिल्म क्या है और किरदार कैसे सोचते हैं। पंजाब में शूटिंग के दौरान वहां के लोगों और खाने से भी बहुत प्यार मिला। सवाल: रेकी के दौरान की क्या खास यादें है? जवाब/वेदांग रैना: हम लोग लोकेशन पर सिर्फ साथ घूम रहे थे और समझ रहे थे कि फिल्म कैसे बनती है। तभी एहसास हुआ कि असली मेहनत डायरेक्टर और उनकी टीम करती है। सवाल: पंजाब शूट के दौरान सबसे मजेदार चीज क्या रही? जवाब/शरवरी: हमने रेकी के दौरान खूब स्टफ्ड कुलचे खाए। मुझे अभी भी पनीर-छोले याद हैं। वहां का खाना और लोग दोनों बेहद प्यारे थे। उसी दौरान हमने फिल्म और किरदारों को बेहतर तरीके से समझा। सवाल: आपकी फिल्मों में ट्रेन का सफर हमेशा खास क्यों होता है? जवाब/इम्तियाज अली: मुझे ट्रेन में शूटिंग और सफर करना हमेशा अच्छा लगता है। इस फिल्म के लिए हमने रेवाड़ी से पुराना
रॉकस्टार का सीक्वल नहीं बनाएंगे इम्तियाज अली:कहा- जिसे पसंद हो, वो बनाए, अपकमिंग फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ में अधूरा प्यार और बिछड़ने का दर्द दिखेगा

रॉकस्टार का सीक्वल नहीं बनाएंगे इम्तियाज अली, लेकिन उनकी आगामी फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ में एक बार फिर अधूरे प्यार, बिछड़ने और लौटकर आने की कसक देखने को मिलेगी। दिलजीत दोसांझ, शरवरी, वेदांग रैना और नसीरुद्दीन शाह स्टारर यह फिल्म सिर्फ लव स्टोरी नहीं, बल्कि यादों, माइग्रेशन और इमोशनल टूटन की कहानी है। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में इम्तियाज अली ने बताया कि वह ‘रॉकस्टार’ का सीक्वल क्यों नहीं बनाना चाहते। वहीं उन्होंने दिलजीत दोसांझ, ए.आर. रहमान और अपनी फिल्मों में बार-बार दिखने वाले दर्द व बिछड़ने के एहसास पर भी खुलकर बात की। शरवरी और वेदांग ने भी फिल्म से अपने भावनात्मक जुड़ाव और किरदारों की तैयारी के अनुभव साझा किए। सवाल: आपकी फिल्मों में इश्क मिलने से ज्यादा बिछड़ने में दिखता है। क्या ये आपकी निजी सोच से आता है? जवाब/इम्तियाज अली: जब मैं फिल्म बनाता हूं, तब अपने बारे में नहीं सोच रहा होता। शायद मैं कहानियां बनाकर खुद से भागने की कोशिश करता हूं। लेकिन ये सच है कि जब आप किसी शहर को छोड़ रहे होते हैं, तभी उसकी सबसे ज्यादा याद आती है। मुझे याद है, जब मैं दिल्ली और जमशेदपुर के बीच ट्रेन से सफर करता था, तो अपना शहर सबसे खूबसूरत तब लगता था जब उसे छोड़ रहा होता था। कहते हैं, “A city looks most beautiful from the light of the burning bridge.” यानी जब वापसी का रास्ता खत्म हो जाता है, तब उस जगह के लिए प्यार और बढ़ जाता है। सवाल: वेदांग, ‘मैं वापस आऊंगा’ आपके लिए क्या मायने रखती है? जवाब/वेदांग रैना: शुरुआत में मेरे लिए सबसे बड़ी बात सिर्फ इम्तियाज सर के साथ काम करना था। लेकिन जब स्क्रिप्ट आगे बढ़ी, तब महसूस हुआ कि यह कहानी मुझसे बहुत जुड़ी हुई है, क्योंकि मैं भी कश्मीरी पंडित हूं। मेरी फैमिली ने माइग्रेशन देखा है। इसलिए इस फिल्म से मेरा भावनात्मक जुड़ाव हो गया। ये सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि एक बड़ी जिम्मेदारी भी है। सवाल: शरवरी, आपके लिए इस फिल्म का मतलब क्या है? जवाब/शरवरी: ये एक सिंपल लव स्टोरी है। प्यार सिर्फ किसी इंसान से नहीं, अपनी मिट्टी और अपनेपन से भी हो सकता है। इस कहानी की सबसे बड़ी ताकत उसका प्यार है। एक एक्टर के तौर पर भी ये मेरे लिए नया अनुभव था। इस किरदार को निभाते हुए मैंने खुद को भी थोड़ा और समझा। सवाल: इम्तियाज, आपके लिए इश्क क्या है? क्या आप ‘लव एट फर्स्ट साइट’ में भरोसा करते हैं? जवाब/इम्तियाज अली: जैसे-जैसे मैं बड़ा हो रहा हूं, प्यार को लेकर और कन्फ्यूज होता जा रहा हूं। शायद फिल्मों के जरिए ही उसे समझने की कोशिश करता हूं। मुझे लगता है प्यार कुछ भी हो सकता है। पहली नजर में भी हो सकता है, बार-बार भी हो सकता है और सिर्फ एक बार भी हो सकता है। जैसे भगवान को हर इंसान अपने तरीके से समझता है, वैसे ही प्यार भी है। सवाल: आपकी फिल्मों में टूटना, बिछड़ना और फिर लौटकर आना बार-बार क्यों दिखता है? जवाब/इम्तियाज अली: ये सब बचपन की यादों और लोगों की कहानियों से आता है। पंजाब में शूटिंग के दौरान कई बुजुर्गों ने मुझे पार्टिशन के किस्से सुनाए। किसी ने बताया कि उनके बुजुर्ग वाघा बॉर्डर तक पहुंच गए थे और कह रहे थे, “मुझे लाहौर जाना है,” क्योंकि उन्हें याद नहीं था कि पार्टिशन हो चुका है। किसी ने वीडियो कॉल पर अपने बचपन की जगह का रास्ता समझाया, जहां वो खुद नहीं जा सकते थे। ऐसी कई छोटी-छोटी बातें मेरे दिमाग में जमा होती गईं और फिर इस फिल्म की कहानी बन गई। सवाल: वेदांग, आपके लिए इश्क क्या है? जवाब/वेदांग रैना: अगर प्यार को सिर्फ रोमांटिक तरीके से ना देखें, तो कोई चीज आपको बहुत गहराई से छू जाए, वो भी प्यार हो सकता है। मुझे नहीं पता कि मुझे ‘लव एट फर्स्ट साइट’ हुआ है या नहीं, लेकिन किसी चीज से गहराई से प्रभावित होना शायद प्यार ही है। सवाल: क्या आपका दिल टूटा है? जवाब/वेदांग रैना: हां, जरूर टूटा है। शायद उस वक्त लगा था कि दिल टूट गया है, लेकिन अब मैच्योर नजरिए से देखूं तो शायद वो कुछ और था। लेकिन वो एहसास मैंने महसूस किया है। सवाल: दिल टूटने ने आपको कितना बदला? जवाब/वेदांग रैना: हर अनुभव इंसान को बदलता है और दिल टूटना जिंदगी का बड़ा मोड़ होता है। उसके बाद लोगों, रिश्तों और दुनिया को देखने का नजरिया बदल जाता है। शायद वही चीज इंसान को और समझदार बनाती है। सवाल: शरवरी, आपके लिए प्यार क्या है? जवाब/शरवरी: हम सब जिंदगी भर प्यार को समझते रहते हैं। बचपन से लेकर परिवार और रिश्तों तक, हर जगह प्यार मौजूद होता है। मेरे लिए प्यार का मतलब एक वादा है, एक सच्चाई है। हमारी फिल्म भी इसी भावना पर बनी है, एक ऐसा प्यार जो बहुत प्योर है। सवाल: क्या कभी दिल टूटा? और उससे कैसे बाहर निकलीं? जवाब/शरवरी: जब मैं इम्तियाज सर की फिल्में देखती हूं, तो उनमें दर्द के साथ एक खूबसूरती भी दिखती है। मैं मानती हूं कि कोई रिश्ता कभी पूरी तरह खत्म नहीं होता। शायद उनकी फिल्मों ने मुझे यही सिखाया है। सवाल: इम्तियाज अली के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा? जवाब/ शरवरी: हमने शूटिंग से पहले उनके साथ रेकी की थी। वहीं हमें समझ आया कि फिल्म क्या है और किरदार कैसे सोचते हैं। पंजाब में शूटिंग के दौरान वहां के लोगों और खाने से भी बहुत प्यार मिला। सवाल: रेकी के दौरान की क्या खास यादें है? जवाब/वेदांग रैना: हम लोग लोकेशन पर सिर्फ साथ घूम रहे थे और समझ रहे थे कि फिल्म कैसे बनती है। तभी एहसास हुआ कि असली मेहनत डायरेक्टर और उनकी टीम करती है। सवाल: पंजाब शूट के दौरान सबसे मजेदार चीज क्या रही? जवाब/शरवरी: हमने रेकी के दौरान खूब स्टफ्ड कुलचे खाए। मुझे अभी भी पनीर-छोले याद हैं। वहां का खाना और लोग दोनों बेहद प्यारे थे। उसी दौरान हमने फिल्म और किरदारों को बेहतर तरीके से समझा। सवाल: आपकी फिल्मों में ट्रेन का सफर हमेशा खास क्यों होता है? जवाब/इम्तियाज अली: मुझे ट्रेन में शूटिंग और सफर करना हमेशा अच्छा लगता है। इस फिल्म के लिए हमने रेवाड़ी से पुराना
अंजुम शर्मा ने रणवीर सिंह की तारीफ:कहा- वो बहुत कमाल और सिक्योर एक्टर हैं; ‘धुरंधर’ में रहमान के रोल को भी सराहा

एक्टर अंजुम शर्मा इन दिनों वेब सीरीज ‘कप्तान’ में अपने किरदार ‘मुन्ना’ को लेकर चर्चा में हैं। ‘मिर्जापुर’ के शरद शुक्ला के बाद अंजुम ने इस बार एक बिल्कुल अलग और मस्तमौला किरदार निभाया है। दैनिक भास्कर से बातचीत में अंजुम शर्मा ने इंडस्ट्री में आउटसाइडर होने के संघर्ष, स्टार्स की इनसिक्योरिटी, ओटीटी के बदलते दौर पर बात की। सवाल: क्या ओटीटी ने बॉलीवुड और मेनस्ट्रीम सिनेमा की कहानी कहने का तरीका बदल दिया है? जवाब: बिल्कुल। ओटीटी मेनस्ट्रीम सिनेमा का ही एक्सटेंशन है। वही फिल्ममेकर आए, जिन्होंने फिल्मों का अनुभव लेकर ‘मिर्जापुर’, ‘सेक्रेड गेम्स’ जैसी सीरीज बनाई। फर्क सिर्फ इतना था कि यहां लॉन्ग फॉर्मेट मिला, इसलिए कहानियों को ज्यादा गहराई और खुलकर दिखाया जा सका। सवाल: इंडस्ट्री में आउटसाइडर होने की वजह से कभी इनसिक्योरिटी या पॉलिटिक्स फेस करनी पड़ी? जवाब:कभी-कभी ऐसा भी होता है कि किसी फिल्म या किरदार में कास्टिंग का पूरा मामला कॉम्बिनेशन पर निर्भर करता है। मैं इसमें किसी को दोष नहीं देता। कई बार मेकर्स ये देखते हैं कि दो कलाकार स्क्रीन पर साथ कैसे दिखेंगे, चाहे सामने बड़ा स्टार हो या कोई और एक्टर। ऐसे में अगर किसी एक कलाकार की प्रेजेंस या परफॉर्मेंस ज्यादा डोमिनेटिंग लगती है, तो हो सकता है कि वो उस किरदार या कहानी के लिए सही फिट न हो। कई बार कहानी को ऐसे एक्टर की जरूरत होती है, जो दूसरे किरदार पर हावी न पड़े और स्क्रीन पर बैलेंस बना रहे। मेरे साथ भी शुरुआत में एक-दो बार ऐसा हुआ, लेकिन मैं खुद को खुशकिस्मत मानता हूं कि जिन लोगों के साथ काम किया, उन्होंने हमेशा बहुत सुरक्षित और सहयोग वाला माहौल दिया। चाहे ‘मिर्जापुर’ में अली फजल हों, पंकज त्रिपाठी जी हों या विजय वर्मा। मैं उस वक्त काफी नया था, जबकि वो लोग काफी अनुभवी थे, लेकिन उन्हें देखकर मुझे लगा कि जितना सहज हो सकते हो, उतना सहज हो जाओ। क्योंकि सामने वाला कलाकार पूरी तरह सिक्योर होकर काम कर रहा है, आपको सपोर्ट कर रहा है और एप्रिशिएट भी कर रहा है। मुझे हमेशा ऐसा महसूस हुआ कि वो लोग आपको नीचे नहीं दिखाना चाहते, बल्कि अपने साथ लेकर आगे बढ़ाना चाहते हैं। सवाल: लेकिन इंडस्ट्री में ऐसा भी सुनने को मिलता है कि अच्छे सीन्स काट दिए जाते हैं या अच्छे एक्टर्स को रिप्लेस कर दिया जाता है? जवाब: बहुत पहले की बात है। एक फिल्म में एक ऐसे एक्टर को कास्ट किया गया था, जो पहले से फिल्मों में काम कर रहे थे और इंडस्ट्री से जुड़े हुए थे, लेकिन जिस लहजे और जिस जोन के किरदार के लिए उन्हें चुना गया था, उससे वो पूरी तरह वाकिफ नहीं थे। मुझे बिना ज्यादा कुछ बताए बुलाया गया और कहा गया कि उनकी आवाज डब करनी है। मैंने बिना यह पूछे कि क्यों, कैसे या कितने पैसे मिलेंगे, तुरंत हां कर दी। मैंने सोचा कि बुलाया है, तो जरूर कोई वजह होगी। मैंने डबिंग की और बाद में जब फिल्म रिलीज हुई, तो मैंने देखा कि फाइनल डबिंग काफी हद तक वैसी ही थी जैसी मैंने की थी। तब लगा कि शायद मेरी डबिंग को रेफरेंस की तरह इस्तेमाल किया गया होगा। ऐसे अनुभव बहुत कुछ सिखाते हैं। खासकर अगर आप इंडस्ट्री में बाहर से आए हैं, तो आपको समझ आ जाता है कि यहां मौके खुद आपके पास नहीं आते, आपको खुद उन्हें बनाना पड़ता है। सवाल: धुरंधर 2 में ऐसी कौन-सी चीज थी, जिसने आपको सबसे ज्यादा प्रभावित किया? जवाब: धुरंधर 2 देखकर मुझे बहुत समय बाद ऐसा लगा कि इतनी लंबी, करीब साढ़े तीन घंटे की फिल्म को मैं दोबारा देखना चाहूंगा। खासकर रणवीर सिंह का गांव वाला शुरुआती सीक्वेंस आपको पूरी तरह बांध लेता है। फिल्म में वो सारी चीजें हैं, जो अच्छे सिनेमा को यादगार बनाती हैं। सवाल: ‘एनिमल’ और ‘धुरंधर’ जैसे मेकर्स के साथ काम करने की इच्छा है? जवाब: बिल्कुल। संदीप रेड्डी वांगा, विशाल भारद्वाज, आदित्य धर जैसे मेकर्स के साथ काम करने का बहुत मन है। मुझे लगता है कि मेरे अंदर अभी बहुत कुछ एक्सप्लोर होना बाकी है। सही डायरेक्टर और सही कहानी आपकी एनर्जी को सही दिशा देते हैं। सवाल: ‘धुरंधर’ में कोई ऐसा किरदार लगा, जिसे आप करना चाहते? जवाब: नहीं, मतलब यह तो मैं नहीं कह सकता कि मैं अलग फ्लेवर डाल सकता था। मुझे धुरंधर के पार्ट वन में रहमान डकैत एक ऐसा कैरेक्टर था, जिसको देख कर लगा कि मतलब बखूबी उन्होंने निभाया है। अक्षय खन्ना ने बहुत अच्छे से किया है। उनको देख कर आपको लगता है कि अरे, यह आप करते तो इसमें दो-चार चीजें आप और एड कर सकते थे। रणवीर सिंह ने तो कमाल किया है। सबसे बड़ी बात ये है कि वो बहुत सिक्योर एक्टर हैं। वो कहानी और बाकी किरदारों के साथ पूरी तरह घुल-मिल जाते हैं। सवाल: क्या आज इंडस्ट्री में टैलेंट से ज्यादा पीआर और सोशल मीडिया को अहमियत मिलती है? जवाब: देखिए, मैं ये नहीं कहूंगा कि इंडस्ट्री पूरी तरह ऐसी है, लेकिन हां, आज एक गैप जरूर आ गया है। एक तरफ आपका टैलेंट, क्राफ्ट और काम है और दूसरी तरफ ये बात कही जाती है कि आपकी पीआर बहुत स्ट्रॉन्ग होनी चाहिए, आपको खुद को मार्केट करना आना चाहिए। मेरा मानना है कि एक्टर या किसी भी क्रिएटिव इंसान का असली काम अपना काम ईमानदारी और मेहनत से करना है। अगर आपने तमाम मुश्किलों के बावजूद अच्छा काम किया है, तो वही सिलसिला आगे बढ़ना चाहिए। आपकी पहचान आपके टैलेंट, क्रेडिबिलिटी और क्राफ्ट के आधार पर बननी चाहिए।
अमित बोले- ‘धुरंधर’ सक्सेस डिजर्व करती है, लेकिन ईर्ष्या हुई:प्रवीण सिसोदिया ने कहा- कास्टिंग परफेक्ट हो तो ‘मुगल-ए-आजम’ की तरह हर किरदार याद रहता है

फिल्म ‘सितंबर 21’ सिर्फ अल्जाइमर पर बनी कहानी नहीं, बल्कि उन केयरगिवर्स की भावनात्मक यात्रा है जो अपनों की देखभाल करते-करते अंदर से टूटने लगते हैं। डायरेक्टर करेन क्षिति सुवर्णा और को-प्रोड्यूसर प्रीति अली ने इस संवेदनशील विषय को असली जिंदगी के अनुभवों से जोड़कर पर्दे पर उतारा है। दैनिक भास्कर से बातचीत में प्रवीण एस. सिसोदिया, प्रियंका उपेंद्र और अमित बहल ने बताया कि फिल्म मरीजों के साथ उनके परिवार के दर्द को भी सामने लाती है। इंटरव्यू में ‘धुरंधर’ की कास्टिंग और ‘मुगल-ए-आजम’ जैसे क्लासिक सिनेमा पर भी चर्चा हुई। सवाल: पहली ही फिल्म में अल्जाइमर जैसा संवेदनशील विषय… आखिर इस कहानी ने आपको इतना अंदर तक कैसे छू लिया? जवाब/करेन क्षिति सुवर्णा: जब मैं अपनी पहली फीचर फिल्म बनाना चाहती थी, तब मैंने तय किया था कि सिर्फ मनोरंजन के लिए फिल्म नहीं बनाऊंगी। मैं ऐसी कहानी कहना चाहती थी जो समाज को कुछ दे। हमारे लेखक राज शेखर की यह उनकी असली जिंदगी की कहानी है। वह अपने भाई के केयरगिवर थे, जिन्हें अल्जाइमर था। हमारे प्रोड्यूसर्स की मां भी इस बीमारी से जूझ चुकी थीं। जब मैं अल्जाइमर केयर सेंटर गई, तब मुझे एहसास हुआ कि लोग मरीजों की बात तो करते हैं, लेकिन केयरगिवर्स की तकलीफ कोई नहीं समझता। वहीं से यह फिल्म शुरू हुई। सवाल: यानी यह सिर्फ मरीज की नहीं, उन लोगों की भी कहानी है जो चुपचाप टूटते रहते हैं? जवाब/करेन क्षिति सुवर्णा: बिल्कुल। अल्जाइमर का अभी तक कोई इलाज नहीं है। सिर्फ देखभाल की जा सकती है। लेकिन किसी ने यह नहीं दिखाया कि केयरगिवर्स पर क्या बीतती है। वे मानसिक और भावनात्मक रूप से टूट जाते हैं। हमारी फिल्म उसी दर्द और संघर्ष को दिखाती है। सवाल: प्रवीण, जब आपने पहली बार कहानी सुनी तो क्या तुरंत लगा कि यह फिल्म करनी ही है? जवाब/प्रवीण एस. सिसोदिया: हां। ऐसी फिल्में हर बार नहीं मिलतीं। एक कलाकार हमेशा कुछ नया करना चाहता है। जब करेन क्षिति ने कहानी सुनाई, तो मुझे लगा कि यह सिर्फ एक्टिंग नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी है। मैंने तुरंत हां कह दी। सवाल: प्रियंका, एक केयरगिवर का दर्द निभाना कितना मुश्किल था? जवाब/प्रियंका उपेंद्र: बहुत मुश्किल था। क्योंकि सिर्फ लुक बदलना काफी नहीं था। मुझे उसकी भावनाएं समझनी थीं। अल्जाइमर के बारे में सुनना अलग बात है, लेकिन यह सोचना कि उस इंसान और उसके family पर क्या गुजरती होगी… वह बहुत भारी था। मेरे किरदार के अंदर बहुत दर्द था, लेकिन बाहर से उसे मजबूत दिखना था। यही सबसे बड़ी चुनौती थी। सवाल: फिल्म का नाम ‘सितंबर 21’ क्यों रखा गया? क्या इसका कनेक्शन कोविड से भी है? जवाब/प्रीति अली: हां, कोविड का दौर फिल्म का हिस्सा है। लेकिन ‘सितंबर 21’ सिर्फ एक तारीख नहीं है, यह कहानी की भावनाओं से गहराई से जुड़ा हुआ हिस्सा है। मैं अभी ज्यादा नहीं बताऊंगी, क्योंकि दर्शकों को यह फिल्म में महसूस करना चाहिए। सवाल: अमित, आपको इस फिल्म की कहानी ने निजी तौर पर छुआ? जवाब/अमित बहल: बहुत ज्यादा। मेरे पिता मेरे शिक्षक थे और मैंने करीब ढाई साल तक उनकी देखभाल की थी।जब मैंने फिल्म देखी, तो मुझे एहसास हुआ कि यह सिर्फ मरीज की कहानी नहीं है, बल्कि उन लोगों की भी कहानी है जो उनके साथ जीते हैं। फिल्म यह भी दिखाती है कि हर केयरगिवर एक जैसा नहीं होता। हर इंसान की अपनी सीमाएं और संघर्ष होते हैं। सवाल: फिल्म में अल्जाइमर के मेडिकल पहलुओं पर भी काफी रिसर्च की गई है। यह कितना जरूरी था? जवाब/अमित बहल: बहुत जरूरी था। लोग अक्सर अल्जाइमर को सिर्फ बुढ़ापे में भूलने की आदत समझ लेते हैं। लेकिन यह एक गंभीर बीमारी है। फिल्म में दिखाया गया है कि यह बीमारी किस तरह बढ़ती है और मरीज के व्यवहार में क्या बदलाव आते हैं। यह सिर्फ इमोशनल फिल्म नहीं, बल्कि काफी शैक्षिक भी है। सवाल: फिल्म हिंदी और कन्नड़ दोनों भाषाओं में बनी है। पहली ही फिल्म में यह रिस्क लेना कितना मुश्किल था? जवाब/प्रीति अली: बहुत मुश्किल था। लेकिन जब हमने फिल्म को सपोर्ट करने का फैसला किया, तभी तय कर लिया था कि इसे दोनों भाषाओं में बनाएंगे। पूरी टीम ने इसे बहुत मेहनत से संभाला। सवाल: हाल ही में ‘धुरंधर’ की काफी चर्चा रही। उसकी सफलता और कास्टिंग को आप कैसे देखते हैं? जवाब/अमित बहल: ‘धुरंधर’ सच में कमाल की फिल्म है। उसकी सफलता पूरी तरह डिजर्व करती है। और सच कहूं तो थोड़ी-सी ईर्ष्या भी होती है, लेकिन वह बहुत स्वाभाविक है। उसकी कास्टिंग इतनी परफेक्ट थी कि कई किरदारों को पहचानना मुश्किल हो गया था। हर कलाकार अपने रोल में पूरी तरह फिट था। सवाल: प्रवीण, आपको ‘धुरंधर’ में कोई ऐसा किरदार लगा जिसे आप निभाना चाहते? जवाब/ प्रवीण एस. सिसोदिया: देखिए, अभिनेता के मन में हमेशा आता है कि “यह रोल मैं भी कर सकता था।” लेकिन सच यह है कि उस फिल्म की कास्टिंग शानदार थी। हर कलाकार बिल्कुल सही जगह पर था। मुझे तो ऐसा लगा जैसे पुरानी क्लासिक फिल्मों की तरह हर किरदार अपनी जगह पर पूरी ईमानदारी से खड़ा है। जैसे लोग ‘मुगल-ए-आजम’ के किरदारों को आज तक याद रखते हैं, वैसे ही जब कोई फिल्म सही कास्टिंग और सच्चे अभिनय के साथ बनती है, तो उसका असर लंबे समय तक रहता है।
अंजुम शर्मा ने रणवीर सिंह की तारीफ:कहा- वो बहुत कमाल और सिक्योर एक्टर हैं; ‘धुरंधर’ में रहमान के रोल को भी सराहा

एक्टर अंजुम शर्मा इन दिनों वेब सीरीज ‘कप्तान’ में अपने किरदार ‘मुन्ना’ को लेकर चर्चा में हैं। ‘मिर्जापुर’ के शरद शुक्ला के बाद अंजुम ने इस बार एक बिल्कुल अलग और मस्तमौला किरदार निभाया है। दैनिक भास्कर से बातचीत में अंजुम शर्मा ने इंडस्ट्री में आउटसाइडर होने के संघर्ष, स्टार्स की इनसिक्योरिटी, ओटीटी के बदलते दौर पर बात की। सवाल: क्या ओटीटी ने बॉलीवुड और मेनस्ट्रीम सिनेमा की कहानी कहने का तरीका बदल दिया है? जवाब: बिल्कुल। ओटीटी मेनस्ट्रीम सिनेमा का ही एक्सटेंशन है। वही फिल्ममेकर आए, जिन्होंने फिल्मों का अनुभव लेकर ‘मिर्जापुर’, ‘सेक्रेड गेम्स’ जैसी सीरीज बनाई। फर्क सिर्फ इतना था कि यहां लॉन्ग फॉर्मेट मिला, इसलिए कहानियों को ज्यादा गहराई और खुलकर दिखाया जा सका। सवाल: इंडस्ट्री में आउटसाइडर होने की वजह से कभी इनसिक्योरिटी या पॉलिटिक्स फेस करनी पड़ी? जवाब:कभी-कभी ऐसा भी होता है कि किसी फिल्म या किरदार में कास्टिंग का पूरा मामला कॉम्बिनेशन पर निर्भर करता है। मैं इसमें किसी को दोष नहीं देता। कई बार मेकर्स ये देखते हैं कि दो कलाकार स्क्रीन पर साथ कैसे दिखेंगे, चाहे सामने बड़ा स्टार हो या कोई और एक्टर। ऐसे में अगर किसी एक कलाकार की प्रेजेंस या परफॉर्मेंस ज्यादा डोमिनेटिंग लगती है, तो हो सकता है कि वो उस किरदार या कहानी के लिए सही फिट न हो। कई बार कहानी को ऐसे एक्टर की जरूरत होती है, जो दूसरे किरदार पर हावी न पड़े और स्क्रीन पर बैलेंस बना रहे। मेरे साथ भी शुरुआत में एक-दो बार ऐसा हुआ, लेकिन मैं खुद को खुशकिस्मत मानता हूं कि जिन लोगों के साथ काम किया, उन्होंने हमेशा बहुत सुरक्षित और सहयोग वाला माहौल दिया। चाहे ‘मिर्जापुर’ में अली फजल हों, पंकज त्रिपाठी जी हों या विजय वर्मा। मैं उस वक्त काफी नया था, जबकि वो लोग काफी अनुभवी थे, लेकिन उन्हें देखकर मुझे लगा कि जितना सहज हो सकते हो, उतना सहज हो जाओ। क्योंकि सामने वाला कलाकार पूरी तरह सिक्योर होकर काम कर रहा है, आपको सपोर्ट कर रहा है और एप्रिशिएट भी कर रहा है। मुझे हमेशा ऐसा महसूस हुआ कि वो लोग आपको नीचे नहीं दिखाना चाहते, बल्कि अपने साथ लेकर आगे बढ़ाना चाहते हैं। सवाल: लेकिन इंडस्ट्री में ऐसा भी सुनने को मिलता है कि अच्छे सीन्स काट दिए जाते हैं या अच्छे एक्टर्स को रिप्लेस कर दिया जाता है? जवाब: बहुत पहले की बात है। एक फिल्म में एक ऐसे एक्टर को कास्ट किया गया था, जो पहले से फिल्मों में काम कर रहे थे और इंडस्ट्री से जुड़े हुए थे, लेकिन जिस लहजे और जिस जोन के किरदार के लिए उन्हें चुना गया था, उससे वो पूरी तरह वाकिफ नहीं थे। मुझे बिना ज्यादा कुछ बताए बुलाया गया और कहा गया कि उनकी आवाज डब करनी है। मैंने बिना यह पूछे कि क्यों, कैसे या कितने पैसे मिलेंगे, तुरंत हां कर दी। मैंने सोचा कि बुलाया है, तो जरूर कोई वजह होगी। मैंने डबिंग की और बाद में जब फिल्म रिलीज हुई, तो मैंने देखा कि फाइनल डबिंग काफी हद तक वैसी ही थी जैसी मैंने की थी। तब लगा कि शायद मेरी डबिंग को रेफरेंस की तरह इस्तेमाल किया गया होगा। ऐसे अनुभव बहुत कुछ सिखाते हैं। खासकर अगर आप इंडस्ट्री में बाहर से आए हैं, तो आपको समझ आ जाता है कि यहां मौके खुद आपके पास नहीं आते, आपको खुद उन्हें बनाना पड़ता है। सवाल: धुरंधर 2 में ऐसी कौन-सी चीज थी, जिसने आपको सबसे ज्यादा प्रभावित किया? जवाब: धुरंधर 2 देखकर मुझे बहुत समय बाद ऐसा लगा कि इतनी लंबी, करीब साढ़े तीन घंटे की फिल्म को मैं दोबारा देखना चाहूंगा। खासकर रणवीर सिंह का गांव वाला शुरुआती सीक्वेंस आपको पूरी तरह बांध लेता है। फिल्म में वो सारी चीजें हैं, जो अच्छे सिनेमा को यादगार बनाती हैं। सवाल: ‘एनिमल’ और ‘धुरंधर’ जैसे मेकर्स के साथ काम करने की इच्छा है? जवाब: बिल्कुल। संदीप रेड्डी वांगा, विशाल भारद्वाज, आदित्य धर जैसे मेकर्स के साथ काम करने का बहुत मन है। मुझे लगता है कि मेरे अंदर अभी बहुत कुछ एक्सप्लोर होना बाकी है। सही डायरेक्टर और सही कहानी आपकी एनर्जी को सही दिशा देते हैं। सवाल: ‘धुरंधर’ में कोई ऐसा किरदार लगा, जिसे आप करना चाहते? जवाब: नहीं, मतलब यह तो मैं नहीं कह सकता कि मैं अलग फ्लेवर डाल सकता था। मुझे धुरंधर के पार्ट वन में रहमान डकैत एक ऐसा कैरेक्टर था, जिसको देख कर लगा कि मतलब बखूबी उन्होंने निभाया है। अक्षय खन्ना ने बहुत अच्छे से किया है। उनको देख कर आपको लगता है कि अरे, यह आप करते तो इसमें दो-चार चीजें आप और एड कर सकते थे। रणवीर सिंह ने तो कमाल किया है। सबसे बड़ी बात ये है कि वो बहुत सिक्योर एक्टर हैं। वो कहानी और बाकी किरदारों के साथ पूरी तरह घुल-मिल जाते हैं। सवाल: क्या आज इंडस्ट्री में टैलेंट से ज्यादा पीआर और सोशल मीडिया को अहमियत मिलती है? जवाब: देखिए, मैं ये नहीं कहूंगा कि इंडस्ट्री पूरी तरह ऐसी है, लेकिन हां, आज एक गैप जरूर आ गया है। एक तरफ आपका टैलेंट, क्राफ्ट और काम है और दूसरी तरफ ये बात कही जाती है कि आपकी पीआर बहुत स्ट्रॉन्ग होनी चाहिए, आपको खुद को मार्केट करना आना चाहिए। मेरा मानना है कि एक्टर या किसी भी क्रिएटिव इंसान का असली काम अपना काम ईमानदारी और मेहनत से करना है। अगर आपने तमाम मुश्किलों के बावजूद अच्छा काम किया है, तो वही सिलसिला आगे बढ़ना चाहिए। आपकी पहचान आपके टैलेंट, क्रेडिबिलिटी और क्राफ्ट के आधार पर बननी चाहिए।
अमित बोले- ‘धुरंधर’ सक्सेस डिजर्व करती है, लेकिन ईर्ष्या हुई:प्रवीण सिसोदिया ने कहा- कास्टिंग परफेक्ट हो तो ‘मुगल-ए-आजम’ की तरह हर किरदार याद रहता है

फिल्म ‘सितंबर 21’ सिर्फ अल्जाइमर पर बनी कहानी नहीं, बल्कि उन केयरगिवर्स की भावनात्मक यात्रा है जो अपनों की देखभाल करते-करते अंदर से टूटने लगते हैं। डायरेक्टर करेन क्षिति सुवर्णा और को-प्रोड्यूसर प्रीति अली ने इस संवेदनशील विषय को असली जिंदगी के अनुभवों से जोड़कर पर्दे पर उतारा है। दैनिक भास्कर से बातचीत में प्रवीण एस. सिसोदिया, प्रियंका उपेंद्र और अमित बहल ने बताया कि फिल्म मरीजों के साथ उनके परिवार के दर्द को भी सामने लाती है। इंटरव्यू में ‘धुरंधर’ की कास्टिंग और ‘मुगल-ए-आजम’ जैसे क्लासिक सिनेमा पर भी चर्चा हुई। सवाल: पहली ही फिल्म में अल्जाइमर जैसा संवेदनशील विषय… आखिर इस कहानी ने आपको इतना अंदर तक कैसे छू लिया? जवाब/करेन क्षिति सुवर्णा: जब मैं अपनी पहली फीचर फिल्म बनाना चाहती थी, तब मैंने तय किया था कि सिर्फ मनोरंजन के लिए फिल्म नहीं बनाऊंगी। मैं ऐसी कहानी कहना चाहती थी जो समाज को कुछ दे। हमारे लेखक राज शेखर की यह उनकी असली जिंदगी की कहानी है। वह अपने भाई के केयरगिवर थे, जिन्हें अल्जाइमर था। हमारे प्रोड्यूसर्स की मां भी इस बीमारी से जूझ चुकी थीं। जब मैं अल्जाइमर केयर सेंटर गई, तब मुझे एहसास हुआ कि लोग मरीजों की बात तो करते हैं, लेकिन केयरगिवर्स की तकलीफ कोई नहीं समझता। वहीं से यह फिल्म शुरू हुई। सवाल: यानी यह सिर्फ मरीज की नहीं, उन लोगों की भी कहानी है जो चुपचाप टूटते रहते हैं? जवाब/करेन क्षिति सुवर्णा: बिल्कुल। अल्जाइमर का अभी तक कोई इलाज नहीं है। सिर्फ देखभाल की जा सकती है। लेकिन किसी ने यह नहीं दिखाया कि केयरगिवर्स पर क्या बीतती है। वे मानसिक और भावनात्मक रूप से टूट जाते हैं। हमारी फिल्म उसी दर्द और संघर्ष को दिखाती है। सवाल: प्रवीण, जब आपने पहली बार कहानी सुनी तो क्या तुरंत लगा कि यह फिल्म करनी ही है? जवाब/प्रवीण एस. सिसोदिया: हां। ऐसी फिल्में हर बार नहीं मिलतीं। एक कलाकार हमेशा कुछ नया करना चाहता है। जब करेन क्षिति ने कहानी सुनाई, तो मुझे लगा कि यह सिर्फ एक्टिंग नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी है। मैंने तुरंत हां कह दी। सवाल: प्रियंका, एक केयरगिवर का दर्द निभाना कितना मुश्किल था? जवाब/प्रियंका उपेंद्र: बहुत मुश्किल था। क्योंकि सिर्फ लुक बदलना काफी नहीं था। मुझे उसकी भावनाएं समझनी थीं। अल्जाइमर के बारे में सुनना अलग बात है, लेकिन यह सोचना कि उस इंसान और उसके family पर क्या गुजरती होगी… वह बहुत भारी था। मेरे किरदार के अंदर बहुत दर्द था, लेकिन बाहर से उसे मजबूत दिखना था। यही सबसे बड़ी चुनौती थी। सवाल: फिल्म का नाम ‘सितंबर 21’ क्यों रखा गया? क्या इसका कनेक्शन कोविड से भी है? जवाब/प्रीति अली: हां, कोविड का दौर फिल्म का हिस्सा है। लेकिन ‘सितंबर 21’ सिर्फ एक तारीख नहीं है, यह कहानी की भावनाओं से गहराई से जुड़ा हुआ हिस्सा है। मैं अभी ज्यादा नहीं बताऊंगी, क्योंकि दर्शकों को यह फिल्म में महसूस करना चाहिए। सवाल: अमित, आपको इस फिल्म की कहानी ने निजी तौर पर छुआ? जवाब/अमित बहल: बहुत ज्यादा। मेरे पिता मेरे शिक्षक थे और मैंने करीब ढाई साल तक उनकी देखभाल की थी।जब मैंने फिल्म देखी, तो मुझे एहसास हुआ कि यह सिर्फ मरीज की कहानी नहीं है, बल्कि उन लोगों की भी कहानी है जो उनके साथ जीते हैं। फिल्म यह भी दिखाती है कि हर केयरगिवर एक जैसा नहीं होता। हर इंसान की अपनी सीमाएं और संघर्ष होते हैं। सवाल: फिल्म में अल्जाइमर के मेडिकल पहलुओं पर भी काफी रिसर्च की गई है। यह कितना जरूरी था? जवाब/अमित बहल: बहुत जरूरी था। लोग अक्सर अल्जाइमर को सिर्फ बुढ़ापे में भूलने की आदत समझ लेते हैं। लेकिन यह एक गंभीर बीमारी है। फिल्म में दिखाया गया है कि यह बीमारी किस तरह बढ़ती है और मरीज के व्यवहार में क्या बदलाव आते हैं। यह सिर्फ इमोशनल फिल्म नहीं, बल्कि काफी शैक्षिक भी है। सवाल: फिल्म हिंदी और कन्नड़ दोनों भाषाओं में बनी है। पहली ही फिल्म में यह रिस्क लेना कितना मुश्किल था? जवाब/प्रीति अली: बहुत मुश्किल था। लेकिन जब हमने फिल्म को सपोर्ट करने का फैसला किया, तभी तय कर लिया था कि इसे दोनों भाषाओं में बनाएंगे। पूरी टीम ने इसे बहुत मेहनत से संभाला। सवाल: हाल ही में ‘धुरंधर’ की काफी चर्चा रही। उसकी सफलता और कास्टिंग को आप कैसे देखते हैं? जवाब/अमित बहल: ‘धुरंधर’ सच में कमाल की फिल्म है। उसकी सफलता पूरी तरह डिजर्व करती है। और सच कहूं तो थोड़ी-सी ईर्ष्या भी होती है, लेकिन वह बहुत स्वाभाविक है। उसकी कास्टिंग इतनी परफेक्ट थी कि कई किरदारों को पहचानना मुश्किल हो गया था। हर कलाकार अपने रोल में पूरी तरह फिट था। सवाल: प्रवीण, आपको ‘धुरंधर’ में कोई ऐसा किरदार लगा जिसे आप निभाना चाहते? जवाब/ प्रवीण एस. सिसोदिया: देखिए, अभिनेता के मन में हमेशा आता है कि “यह रोल मैं भी कर सकता था।” लेकिन सच यह है कि उस फिल्म की कास्टिंग शानदार थी। हर कलाकार बिल्कुल सही जगह पर था। मुझे तो ऐसा लगा जैसे पुरानी क्लासिक फिल्मों की तरह हर किरदार अपनी जगह पर पूरी ईमानदारी से खड़ा है। जैसे लोग ‘मुगल-ए-आजम’ के किरदारों को आज तक याद रखते हैं, वैसे ही जब कोई फिल्म सही कास्टिंग और सच्चे अभिनय के साथ बनती है, तो उसका असर लंबे समय तक रहता है।
हैदराबाद ने एक सीजन में सबसे ज्यादा 200+ स्कोर बनाए:कोहली की टी-20 में 211वीं बार फिफ्टी पार्टनरशिप, विराट-हेड ने हाथ नहीं मिलाया; मोमेंट्स-रिकॉर्ड्स

सनराइजर्स हैदराबाद ने IPL 2026 के 67वें मुकाबले में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु को 55 रन से हरा दिया। मैच में कई मोमेंट्स और रिकॉर्ड्स देखने को मिले। विराट कोहली टी-20 में सबसे ज्यादा 211वीं बार फिफ्टी पार्टनरशिप में शामिल रहे। हैदराबाद ने इस सीजन सबसे ज्यादा 9वीं बार 200+ स्कोर बनाया। मैच के बाद विराट कोहली और ट्रैविस हेड ने हाथ नहीं मिलाया। हैदराबाद-बेंगलुरु मैच के रिकॉर्ड्स और मोमेंट्स… 1. कोहली 211वीं बार फिफ्टी पार्टनरशिप में शामिल रहे कोहली ने हैदराबाद के खिलाफ 211वीं बार टी-20 में फिफ्टी पार्टनरशिप की। उन्होंने राजीव गांधी स्टेडियम में वेंकटेश अय्यर के साथ पहले विकेट के लिए 60 रन जोड़े। वे टी-20 में सबसे ज्यादा बार फिफ्टी रन की साझेदारी का हिस्सा बनने वाले खिलाड़ी बन गए। उन्होंने इंग्लैंड के एलेक्स हेल्स को पीछे छोड़ा, जिनके नाम 210 साझेदारी है। 2. एक सीजन में सबसे ज्यादा बार 200+ रन बनाने वाली टीम बनी हैदराबाद IPL के एक सीजन में सबसे ज्यादा बार 200+ स्कोर करने वाली टीम बन गई। टीम ने बेंगलुरु के खिलाफ 4 विकेट खोकर 255 रन बनाए, जो इस सीजन टीम का नौवां 200+ स्कोर है। इससे पहले ये रिकॉर्ड गुजरात टाइटंस के नाम था, जिन्होंने 2025 में 8 बार यह कारनामा किया था। 3. भुवनेश्वर सबसे ज्यादा बार 50+ रन देने वाले गेंदबाज बने भुवनेश्वर IPL में संयुक्त रुप से सबसे ज्यादा बार एक स्पेल (4 ओवर) में 50+ रन देने वाले गेंदबाज बन गए हैं। उन्होंने मोहम्मद शमी बराबरी की, जिन्होंने 9 बार पचास से ज्यादा रन दिए हैं। भुवनेश्वर ने हैदराबाद के खिलाफ 51 रन दिए। इस लिस्ट में मोहम्मद सिराज 8 बार के साथ तीसरे नंबर पर हैं। 4. क्लासन ने मिडिल ऑर्डर में एक सीजन में सबसे ज्यादा रन बनाए क्लासन ने IPL के एक सीजन में नंबर 4 या उससे नीचे बैटिंग करते हुए सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी बन गए हैं। उन्होंने इस सीजन मिडिल ऑर्डर में बैटिंग करते हुए 606 रन बनाए हैं। उन्होंने ऋषभ पंत को पीछे छोड़ा, जिन्होंने 2018 में 579 रन बनाए थे। 5. हैदराबाद ने IPL में छठवीं बार 250+ का स्कोर बनाया हैदराबाद ने शुक्रवार को छठवीं बार 250 या उससे रन का स्कोर खड़ा किया। वह सबसे ज्यादा बार यह आंकड़ा पार करने वाली टीम है। इस लिस्ट में पंजाब और बेंगलुरु संयुक्त रूप से दूसरे नंबर पर हैं, जिन्होंने 3-3 बार यह कारनामा किया है। 6. अभिषेक सीजन में सबसे ज्यादा सिक्स लगाने वाले दूसरे भारतीय अभिषेक एक IPL सीजन में सबसे ज्यादा सिक्स लगाने वाले दूसरे भारतीय खिलाड़ी हैं। उन्होंने बेंगलुरु के खिलाफ 5 सिक्स लगाए। अभिषेक ने इस सीजन 43 छक्के लगाते हुए खुद को पीछे छोड़ा। उन्होंने 2024 में 42 सिक्स लगाए थे। इस लिस्ट में राजस्थान रॉयल्स के वैभव सूर्यवंशी पहले नंबर पर हैं, जिन्होंने इस सीजन 53 छक्के जड़े हैं। 7. नंबर-4 या नीचे बैटिंग करते हुए क्लासेन ने 6वीं फिफ्टी लगाई क्लासेन ने इस सीजन नंबर 4 या उससे नीचे बैटिंग करते हुए छठवीं बार 50+ का स्कोर बनाया। उन्होंने बेंगलुरू के खिलाफ 51 रन बनाए। उन्होंने एक सीजन में सबसे ज्यादा बार ऐसा करने वाले ऋषभ पंत और ग्लेन मैक्सवेल की बराबरी की। पंत ने 2018 और मैक्सवेल ने 2021 में 6 फिफ्टी लगाई थी। 8. पहली 2 गेंद पर सिक्स लगाने वाले टीम के तीसरे बल्लेबाज नीतीश ने बेंगलुरु के खिलाफ अपनी पहली 2 गेंदों पर लगातार 2 छक्के लगाए। वे हैदराबाद के लिए पारी की पहली 2 गेंदों पर सिक्स लगाने वाले तीसरे बल्लेबाज बन गए हैं। इससे पहले राशिद खान ने 2018 और पैट कमिंस ने 2025 में यह कारनामा किया था। 9. बेंगुलरु के 3 गेंदबाज ने 50+ रन दिए बेंगलुरु के 3 गेंदबाजों ने मैच में 50 या उससे ज्यादा रन दिए। एक मैच में सबसे ज्यादा 50+ रन देने वाले गेंदबाजों की लिस्ट में नंबर एक पर बेंगलुरु ही है। 2024 में बेंगलुरु के 4 गेंदबाजों ने एक मैच में फिफ्टी का आंकड़ा छुआ था। दिल्ली (2024) और राजस्थान (2024) के 3 गेंदबाजों ने पचास से ज्यादा रन दिए। सभी मौकों पर विरोधी टीम हैदराबाद थी। 10. ईशान ने बेंगलुरु के खिलाफ लगातार चौथी फिफ्टी लगाई ईशान किशन ने बेंगलुरु के खिलाफ 2024 से 2026 तक लगातार चौथी फिफ्टी लगाई। उन्होंने शुक्रवार को 79 रन की पारी खेली। वे बेंगलुरु के खिलाफ यह कारनामा करने वाले न्यूजीलैंड के केन विलियमसन के साथ दूसरे नंबर पर हैं। ऑस्ट्रेलिया के डेविड वॉर्नर पहले नंबर पर हैं, जिन्होंने 2014 से 2016 के बीच लगातार 7 फिफ्टी लगाई। यहां से टॉप-3 मोमेंट्स… 1. अभिषेक शर्मा ने सिक्स लगाकर खाता खोला बेंगलुरु के खिलाफ अभिषेक शर्मा ने सिक्स लगाकर अपना खाता खोला। उन्होंने मैच के पहले ओवर में भुवनेश्वर की पांचवी गेंद को लॉन्ग-ऑफ के ऊपर से छक्का जड़ दिया। यह पारी का उनका पहला रन था। 2. वेंकटेश ने अभिषेक का कैच छोड़ा हैदराबाद की पारी के छठवें ओवर में वेंकटेश अय्यर ने अभिषेक का कैच छोड़ दिया। ओवर की चौथी गेेंद रसिख सलाम डार ने शॉर्ट-लेंथ डाली। अभिषेक ने उसपर फ्लैट पुल शॉट खेला, लेकिन गेंद डीप स्क्वायर लेग पर पर खड़े वेंकटेश की ओर गई। उन्होंने दाईं ओर भागते हुए कैच लपकने की कोशिश की, लेकिन गेंद हाथ से छिटक गया। 3. कोहली-हेड के बीच नोंकझोंक, मैच के बाद हाथ नहीं मिलाया बेंगलुरू की पारी में पावरप्ले के दौरान कोहली और ट्रैविस हेड के बीच किसी बात को लेकर नोंक-झोंक हुई। इसके बाद कोहली ने मैच के बाद हेड से हैंडशेक भी नहीं किया। जब कोहली, हेड के पास पहुंचे, तो हेड ने हाथ आगे बढ़ाया, लेकिन कोहली एकदम से आगे निकल गए।
LSG Vs PBKS LIVE Score Update; Shreyas Iyer Rishabh Pant Prince Yadav

लखनऊ56 मिनट पहले कॉपी लिंक IPL में शनिवार को पंजाब किंग्स (PBKS) का सामना लखनऊ सुपर जायंट्स (LSG) से होगा। मैच लखनऊ के इकाना स्टेडियम में शाम 7.30 बजे से खेला जाएगा। पंजाब के लिए यह मुकाबला करो या मरो जैसा है। पहले हाफ में 7 में से 6 मैच जीतने वाली टीम लगातार 6 मुकाबले हार चुकी है। पंजाब को लखनऊ के खिलाफ जीत के बाद रविवार के अन्य मैचों के नतीजों पर भी निर्भर रहना होगा। दूसरी तरफ, लखनऊ पहले ही प्लेऑफ की रेस से बाहर हो चुकी है। IPL में दोनों टीमें 8वीं बार भिड़ेंगी IPL में दोनों टीमें 7 बार भिड़ चुकी हैं। लखनऊ ने 3 और पंजाब ने 4 मैच जीते हैं। एक मैच टाई रहा। इस सीजन दोनों टीमें दूसरी बार आमने-सामने होंगी। पहले मुकाबले में पंजाब ने अपने होमग्राउंड पर लखनऊ को हराया था। पंत और पूरन से बड़ी पारी की उम्मीद लखनऊ के लिए सबसे बड़ी राहत मिचेल मार्श और जोश इंग्लिस की शानदार फॉर्म है। पिछले मैच में दोनों ने 8.2 ओवरों में 109 रन की साझेदारी की थी। निकोलस पूरन पिछले 4 मैचों में केवल 87 रन बना सके हैं और फॉर्म में वापसी करना चाहेंगे। कप्तान ऋषभ पंत के बल्ले से इस सीजन केवल एक अर्धशतक निकला है। पंत आखिरी मैच में बड़ी पारी खेलकर सीजन खत्म करना चाहेंगे। गेंदबाजी में यह देखना दिलचस्प होगा कि मोहम्मद शमी की टीम में वापसी होती है या नहीं। मिचेल मार्श 13 मैचों में 563 रन बनाकर टीम के टॉप रन स्कोरर हैं। प्रिंस यादव 13 मैचों में 16 विकेट लेकर टॉप विकेट टेकर हैं। प्रियांश, प्रभसिमरन और कप्तान श्रेयस आउट ऑफ फॉर्म पंजाब किंग्स की सबसे बड़ी कमजोरी उसका बल्लेबाजी क्रम बन गया है। शुरुआती मैचों में आक्रामक शुरुआत देने वाले प्रियांश आर्या, प्रभसिमरन सिंह और कूपर कोनोली पिछले कुछ मैचों से फ्लॉप रहे हैं। प्रियांश ने पिछली 7 पारियों में सिर्फ एक अर्धशतक लगाया है और पिछले मैच में शून्य पर आउट हुए थे। प्रभसिमरन भी पिछली 5 पारियों में केवल एक पचासा लगा सके हैं। कप्तान श्रेयस अय्यर का बल्ला भी शांत है। पिछली 6 हार में वे केवल एक बार 50 का आंकड़ा पार कर पाए हैं। दिल्ली के खिलाफ मैच जिताने वाला मिडिल ऑर्डर आउट ऑफ फॉर्म है, जबकि खराब गेंदबाजी और फील्डिंग ने टीम की मुश्किलें बढ़ाई हैं। कूपर कोनोली 13 मैचों में 473 रन बनाकर टीम के टॉप रन स्कोरर हैं। अर्शदीप सिंह 13 मैचों में 14 विकेट लेकर टॉप विकेट टेकर हैं। पिच इकाना स्टेडियम की पिच पर स्पिनरों को काफी मदद मिलती है और बल्लेबाजों के लिए बड़े हिट्स लगाना आसान नहीं होता। शुरुआती ओवरों में तेज गेंदबाजों को भी मूवमेंट और स्विंग मिलती है, जो बल्लेबाजों के खिलाफ असरदार साबित हो सकती है। लखनऊ का इकाना स्टेडियम बाकी मैदानों से अलग माना जाता है। जहां दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और कोलकाता में 200 रन आम हैं, वहीं यहां औसतन स्कोर 165-170 के बीच रहता है। इससे मुकाबला संतुलित नजर आता है। इस पिच पर अब तक IPL के 28 मैच खेले गए हैं। 11 बार पहले बल्लेबाजी करने वाली टीम जीती है, जबकि 15 बार लक्ष्य का पीछा करने वाली टीम को जीत मिली है। एक मैच टाई रहा और एक का रिजल्ट नहीं निकला। बारिश की संभावना नहीं है लखनऊ में मैच के दौरान मौसम बेहद गर्म और शुष्क रहेगा। दिन भर तेज धूप और लू चलने की संभावना है। शाम 7.30 बजे तापमान 36 से 38 डिग्री के आसपास रह सकता है। बारिश की संभावना नहीं है और आसमान साफ रहेगा। दोनों टीमों की पॉसिबल प्लेइंग-XI लखनऊ- मिचेल मार्श, जोश इंग्लिस, निकोलस पूरन, आयुष बडोनी, ऋषभ पंत (कप्तान और विकेटकीपर), अब्दुल समद, शाहबाज अहमद, मोहसिन खान, मयंक यादव, आकाश सिंह, प्रिंस यादव। इम्पैक्ट प्लेयर: दिग्वेश सिंह राठी पंजाब- प्रियांश आर्या, प्रभसिमरन सिंह (विकेटकीपर), कूपर कोनोली, श्रेयस अय्यर (कप्तान), शशांक सिंह, सूर्यांश शेडगे, अजमतुल्लाह ओमरजई, हरप्रीत बरार, जेवियर बार्टलेट, लॉकी फर्ग्यूसन, अर्शदीप सिंह। इम्पैक्ट प्लेयर: युजवेंद्र चहल दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
IPL 2026 Playoffs: Punjabs Crucial Match

स्पोर्ट्स डेस्क1 घंटे पहले कॉपी लिंक IPL 2026 के लीग स्टेज में प्लेऑफ की तस्वीर लगभग साफ हो गई है। शुक्रवार को सनराइजर्स हैदराबाद ने रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु को हराकर 18 पॉइंट्स हासिल कर लिए। हालांकि बेहतर नेट रनरेट के दम पर बेंगलुरु ने पहले पायदान पर फिनिश किया। इसके साथ ही बेंगलुरु और गुजरात 26 मई को धर्मशाला में क्वालिफायर-1 खेलेंगे। गुजरात टाइटंस ने पहले ही चेन्नई सुपर किंग्स को हराकर 18 पॉइंट्स हासिल कर लिए थे। टीम का नेट रनरेट +0.695 है और वह दूसरे स्थान पर है। हैदराबाद भी 18 पॉइंट्स तक पहुंच गई, लेकिन नेट रनरेट में पीछे रहने के कारण तीसरे स्थान पर है। अब चौथे स्थान के लिए राजस्थान रॉयल्स, पंजाब किंग्स, कोलकाता नाइट राइडर्स और दिल्ली कैपिटल्स के बीच मुकाबला बचा है। पंजाब आज लखनऊ सुपर जायंट्स से भिड़ेगी और टीम को प्लेऑफ की उम्मीदें जिंदा रखने के लिए हर हाल में जीत दर्ज करनी होगी। पॉइंट्स टेबल की मौजूदा स्थिति… सभी टीमों का समीकरण बेंगलुरु और गुजरात टॉप-2 में कायम बेंगलुरु और गुजरात के 18-18 पॉइंट्स हैं। बेहतर नेट रनरेट के कारण बेंगलुरु (+0.783) पहले, जबकि गुजरात दूसरे स्थान पर है। दोनों टीमों का क्वालिफायर-1 खेलना तय है। क्वालिफायर-1 हारने वाली टीम को फाइनल खेलने का एक और चांस मिलता है। क्वालिफायर-2 जीतने वाली टीम का मुकाबला क्वालीफायर-1 हारने वाली टीम से एलिमिनेटर में होता है। जीतने वाली टीम फाइनल में क्वालीफायर-1 जीतने वाली टीम से खेलती हैं। हैदराबाद तीसरे स्थान पर हैदराबाद ने बेंगलुरु को हराकर 18 पॉइंट्स हासिल कर लिए। टीम तीसरे स्थान पर है। हालांकि नेट रनरेट कम (+0.524) होने के कारण SRH टॉप-2 में जगह नहीं बना सकी। टीम को अपना रनरेट ऊपर ले जाने के लिए बेंगलुरु के खिलाफ 91 रन की जीत चाहिए थी। लेकिन टीम 55 रन से ही जीत सकी। राजस्थान के पास सबसे बड़ा मौका राजस्थान 14 पॉइंट्स के साथ चौथे स्थान पर बनी हुई है। टीम का आखिरी मुकाबला मुंबई इंडियंस से है। जीत के साथ राजस्थान सीधे प्लेऑफ में पहुंच जाएगी। पंजाब के लिए करो या मरो की स्थिति पंजाब 13 पॉइंट्स के साथ पांचवें स्थान पर है। टीम को लखनऊ सुपर जायंट्स के खिलाफ जीत दर्ज करनी होगी। पंजाब की नजर राजस्थान और कोलकाता के नतीजों पर भी रहेगी। कोलकाता की उम्मीदें बरकरार कोलकाता के भी 13 पॉइंट्स हैं। टीम को दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ जीत दर्ज करनी होगी और साथ ही राजस्थान और पंजाब की हार की उम्मीद करनी होगी। दिल्ली के चांस बेहद कम दिल्ली 12 पॉइंट्स के साथ सातवें स्थान पर है। टीम का नेट रनरेट काफी खराब (-0.871) है। दिल्ली को कोलकाता के खिलाफ बड़े अंतर से जीत के अलावा दूसरी टीमों के नतीजों पर भी निर्भर रहना पड़ेगा। मुंबई, चेन्नई और लखनऊ बाहर मुंबई, चेन्नई और लखनऊ प्लेऑफ की रेस से बाहर हो चुकी हैं। चेन्नई सातवें, मुंबई नौवें और लखनऊ आखिरी पायदान पर हैं। टूर्नामेंट के टॉप प्लेयर्स… क्लासन तीसरे पायदान पर आए गुजरात के साई सुदर्शन साई सुदर्शन 638 रन के साथ ऑरेंज कैप होल्डर बने हुए हैं। उनके बाद गुजरात के ही कप्तान शुभमन गिल 616 रन के साथ दूसरे स्थान पर हैं। बेंगलुरु के खिलाफ 51 रन की पारी खेलने वाले हैदराबाद के हेनरिक क्लासन 606 रन के साथ तीसरे पायदान पर आ गए हैं। पर्पल कैप में भुवनेश्वर टॉप पर बरकरार हैदराबाद-बेंगलुरु मैच के बाद पर्पल कैप में कोई बदलाव नहीं हुआ है। बेंगलुरु के भुवनेश्वर कुमार 24 विकेट के साथ पहले स्थान पर है। गुजरात कागिसो रबाडा (24 विकेट) दूसरे और चेन्नई के अंशुल कम्बोज (21 विकेट) के साथ तीसरे स्थान पर है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
हैदराबाद ने एक सीजन में सबसे ज्यादा 200+ स्कोर बनाए:कोहली की टी-20 में 211वीं बार फिफ्टी पार्टनरशिप, विराट-हेड ने हाथ नहीं मिलाया; मोमेंट्स-रिकॉर्ड्स

सनराइजर्स हैदराबाद ने IPL 2026 के 67वें मुकाबले में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु को 55 रन से हरा दिया। मैच में कई मोमेंट्स और रिकॉर्ड्स देखने को मिले। विराट कोहली टी-20 में सबसे ज्यादा 211वीं बार फिफ्टी पार्टनरशिप में शामिल रहे। हैदराबाद ने इस सीजन सबसे ज्यादा 9वीं बार 200+ स्कोर बनाया। मैच के बाद विराट कोहली और ट्रैविस हेड ने हाथ नहीं मिलाया। हैदराबाद-बेंगलुरु मैच के रिकॉर्ड्स और मोमेंट्स… 1. कोहली 211वीं बार फिफ्टी पार्टनरशिप में शामिल रहे कोहली ने हैदराबाद के खिलाफ 211वीं बार टी-20 में फिफ्टी पार्टनरशिप की। उन्होंने राजीव गांधी स्टेडियम में वेंकटेश अय्यर के साथ पहले विकेट के लिए 60 रन जोड़े। वे टी-20 में सबसे ज्यादा बार फिफ्टी रन की साझेदारी का हिस्सा बनने वाले खिलाड़ी बन गए। उन्होंने इंग्लैंड के एलेक्स हेल्स को पीछे छोड़ा, जिनके नाम 210 साझेदारी है। 2. एक सीजन में सबसे ज्यादा बार 200+ रन बनाने वाली टीम बनी हैदराबाद IPL के एक सीजन में सबसे ज्यादा बार 200+ स्कोर करने वाली टीम बन गई। टीम ने बेंगलुरु के खिलाफ 4 विकेट खोकर 255 रन बनाए, जो इस सीजन टीम का नौवां 200+ स्कोर है। इससे पहले ये रिकॉर्ड गुजरात टाइटंस के नाम था, जिन्होंने 2025 में 8 बार यह कारनामा किया था। 3. भुवनेश्वर सबसे ज्यादा बार 50+ रन देने वाले गेंदबाज बने भुवनेश्वर IPL में संयुक्त रुप से सबसे ज्यादा बार एक स्पेल (4 ओवर) में 50+ रन देने वाले गेंदबाज बन गए हैं। उन्होंने मोहम्मद शमी बराबरी की, जिन्होंने 9 बार पचास से ज्यादा रन दिए हैं। भुवनेश्वर ने हैदराबाद के खिलाफ 51 रन दिए। इस लिस्ट में मोहम्मद सिराज 8 बार के साथ तीसरे नंबर पर हैं। 4. क्लासन ने मिडिल ऑर्डर में एक सीजन में सबसे ज्यादा रन बनाए क्लासन ने IPL के एक सीजन में नंबर 4 या उससे नीचे बैटिंग करते हुए सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी बन गए हैं। उन्होंने इस सीजन मिडिल ऑर्डर में बैटिंग करते हुए 606 रन बनाए हैं। उन्होंने ऋषभ पंत को पीछे छोड़ा, जिन्होंने 2018 में 579 रन बनाए थे। 5. हैदराबाद ने IPL में छठवीं बार 250+ का स्कोर बनाया हैदराबाद ने शुक्रवार को छठवीं बार 250 या उससे रन का स्कोर खड़ा किया। वह सबसे ज्यादा बार यह आंकड़ा पार करने वाली टीम है। इस लिस्ट में पंजाब और बेंगलुरु संयुक्त रूप से दूसरे नंबर पर हैं, जिन्होंने 3-3 बार यह कारनामा किया है। 6. अभिषेक सीजन में सबसे ज्यादा सिक्स लगाने वाले दूसरे भारतीय अभिषेक एक IPL सीजन में सबसे ज्यादा सिक्स लगाने वाले दूसरे भारतीय खिलाड़ी हैं। उन्होंने बेंगलुरु के खिलाफ 5 सिक्स लगाए। अभिषेक ने इस सीजन 43 छक्के लगाते हुए खुद को पीछे छोड़ा। उन्होंने 2024 में 42 सिक्स लगाए थे। इस लिस्ट में राजस्थान रॉयल्स के वैभव सूर्यवंशी पहले नंबर पर हैं, जिन्होंने इस सीजन 53 छक्के जड़े हैं। 7. नंबर-4 या नीचे बैटिंग करते हुए क्लासेन ने 6वीं फिफ्टी लगाई क्लासेन ने इस सीजन नंबर 4 या उससे नीचे बैटिंग करते हुए छठवीं बार 50+ का स्कोर बनाया। उन्होंने बेंगलुरू के खिलाफ 51 रन बनाए। उन्होंने एक सीजन में सबसे ज्यादा बार ऐसा करने वाले ऋषभ पंत और ग्लेन मैक्सवेल की बराबरी की। पंत ने 2018 और मैक्सवेल ने 2021 में 6 फिफ्टी लगाई थी। 8. पहली 2 गेंद पर सिक्स लगाने वाले टीम के तीसरे बल्लेबाज नीतीश ने बेंगलुरु के खिलाफ अपनी पहली 2 गेंदों पर लगातार 2 छक्के लगाए। वे हैदराबाद के लिए पारी की पहली 2 गेंदों पर सिक्स लगाने वाले तीसरे बल्लेबाज बन गए हैं। इससे पहले राशिद खान ने 2018 और पैट कमिंस ने 2025 में यह कारनामा किया था। 9. बेंगुलरु के 3 गेंदबाज ने 50+ रन दिए बेंगलुरु के 3 गेंदबाजों ने मैच में 50 या उससे ज्यादा रन दिए। एक मैच में सबसे ज्यादा 50+ रन देने वाले गेंदबाजों की लिस्ट में नंबर एक पर बेंगलुरु ही है। 2024 में बेंगलुरु के 4 गेंदबाजों ने एक मैच में फिफ्टी का आंकड़ा छुआ था। दिल्ली (2024) और राजस्थान (2024) के 3 गेंदबाजों ने पचास से ज्यादा रन दिए। सभी मौकों पर विरोधी टीम हैदराबाद थी। 10. ईशान ने बेंगलुरु के खिलाफ लगातार चौथी फिफ्टी लगाई ईशान किशन ने बेंगलुरु के खिलाफ 2024 से 2026 तक लगातार चौथी फिफ्टी लगाई। उन्होंने शुक्रवार को 79 रन की पारी खेली। वे बेंगलुरु के खिलाफ यह कारनामा करने वाले न्यूजीलैंड के केन विलियमसन के साथ दूसरे नंबर पर हैं। ऑस्ट्रेलिया के डेविड वॉर्नर पहले नंबर पर हैं, जिन्होंने 2014 से 2016 के बीच लगातार 7 फिफ्टी लगाई। यहां से टॉप-3 मोमेंट्स… 1. अभिषेक शर्मा ने सिक्स लगाकर खाता खोला बेंगलुरु के खिलाफ अभिषेक शर्मा ने सिक्स लगाकर अपना खाता खोला। उन्होंने मैच के पहले ओवर में भुवनेश्वर की पांचवी गेंद को लॉन्ग-ऑफ के ऊपर से छक्का जड़ दिया। यह पारी का उनका पहला रन था। 2. वेंकटेश ने अभिषेक का कैच छोड़ा हैदराबाद की पारी के छठवें ओवर में वेंकटेश अय्यर ने अभिषेक का कैच छोड़ दिया। ओवर की चौथी गेेंद रसिख सलाम डार ने शॉर्ट-लेंथ डाली। अभिषेक ने उसपर फ्लैट पुल शॉट खेला, लेकिन गेंद डीप स्क्वायर लेग पर पर खड़े वेंकटेश की ओर गई। उन्होंने दाईं ओर भागते हुए कैच लपकने की कोशिश की, लेकिन गेंद हाथ से छिटक गया। 3. कोहली-हेड के बीच नोंकझोंक, मैच के बाद हाथ नहीं मिलाया बेंगलुरू की पारी में पावरप्ले के दौरान कोहली और ट्रैविस हेड के बीच किसी बात को लेकर नोंक-झोंक हुई। इसके बाद कोहली ने मैच के बाद हेड से हैंडशेक भी नहीं किया। जब कोहली, हेड के पास पहुंचे, तो हेड ने हाथ आगे बढ़ाया, लेकिन कोहली एकदम से आगे निकल गए।








