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भारतीय शेयर बाजार को ताइवान ने पीछे छोड़ा:AI और चिप सेक्टर में तेजी से मार्केट कैप ₹415 लाख करोड़ पार, भारत की वैल्यू ₹413 लाख करोड़

भारतीय शेयर बाजार को ताइवान ने पीछे छोड़ा:AI और चिप सेक्टर में तेजी से मार्केट कैप ₹415 लाख करोड़ पार, भारत की वैल्यू ₹413 लाख करोड़

ताइवान ने शेयर बाजार की वैल्यू (मार्केट कैप) के मामले में भारत को पीछे छोड़ दिया है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के दौर में दुनिया की सबसे बड़ी चिपमेकर कंपनी ‘ताइवान सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कंपनी’ (TSMC) के शेयरों में आई भारी तेजी ने ताइवान को यह बढ़त दिलाई है। ब्लूमबर्ग के मुताबिक, सोमवार तक ताइवान का मार्केट कैप 4.95 ट्रिलियन डॉलर (करीब 415 लाख करोड़ रुपए) पहुंच गया, जबकि भारत की वैल्यू गिरकर 4.92 ट्रिलियन डॉलर (करीब 413 लाख करोड़ रुपए) रह गई है। अब दुनिया के टॉप-5 शेयर बाजारों में अमेरिका, चीन, जापान और हांगकांग के बाद ताइवान का नाम शामिल हो गया है। ताइवान की जीत के पीछे चिप कंपनी का हाथ ताइवान के शेयर बाजार की इस छलांग की सबसे बड़ी वजह TSMC कंपनी है। ताइवान के मुख्य इंडेक्स में इस अकेले कंपनी की 42% हिस्सेदारी है। इस साल अब तक कंपनी के शेयरों में 49% की बढ़त दर्ज की गई है। पूरी दुनिया में AI तकनीक के लिए इस्तेमाल होने वाले सेमीकंडक्टर्स (चिप्स) की सप्लाई में इस कंपनी का दबदबा है, जिसका फायदा ताइवान के बाजार को मिल रहा है। विदेशी निवेशकों ने भारत से ₹2 लाख करोड़ निकाले भारतीय शेयर बाजार के लिए यह साल चुनौतीपूर्ण रहा है। इस साल अब तक विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से करीब 24 अरब डॉलर (करीब 2 लाख करोड़ रुपए) निकाले हैं। इसकी मुख्य वजह भारतीय शेयरों की ऊंची वैल्यूएशन और रुपए की कमजोरी रही है। इसके उलट, निवेशक ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे उन बाजारों में पैसा लगा रहे हैं जो सीधे तौर पर AI हार्डवेयर और मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े हैं। इन 3 कारणों से पिछड़ा भारतीय बाजार नए नियमों ने ताइवान को दिया बूस्ट हाल ही में ताइवान के रेगुलेटर ने निवेश के नियमों में ढील दी है। अब घरेलू फंड किसी एक बड़ी कंपनी में अपनी नेट एसेट का 25% तक निवेश कर सकते हैं, पहले यह सीमा सिर्फ 10% थी। वर्तमान में केवल TSMC ही इस मापदंड को पूरा करती है। जेपी मॉर्गन के मुताबिक, इस बदलाव से ताइवान के बाजार में 6 अरब डॉलर (करीब 50 हजार करोड़ रुपए) का अतिरिक्त निवेश आ सकता है। अर्थव्यवस्था के मामले में अब भी भारत काफी आगे शेयर बाजार की वैल्यू में भले ही ताइवान आगे निकल गया हो, लेकिन अर्थव्यवस्था के कुल आकार (GDP) में भारत का दबदबा बरकरार है। IMF के अनुमानों के मुताबिक, भारत की इकोनॉमी 4.15 ट्रिलियन डॉलर की है, जबकि ताइवान की GDP महज 977 बिलियन डॉलर है। भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक बना हुआ है।

India Vs Taiwan Stock Market; AI TSMC Share Price

India Vs Taiwan Stock Market; AI TSMC Share Price

नई दिल्ली30 मिनट पहले कॉपी लिंक ताइवान ने शेयर बाजार की वैल्यू (मार्केट कैप) के मामले में भारत को पीछे छोड़ दिया है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के दौर में दुनिया की सबसे बड़ी चिपमेकर कंपनी ‘ताइवान सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कंपनी’ (TSMC) के शेयरों में आई भारी तेजी ने ताइवान को यह बढ़त दिलाई है। ब्लूमबर्ग के मुताबिक, सोमवार तक ताइवान का मार्केट कैप 4.95 ट्रिलियन डॉलर (करीब 415 लाख करोड़ रुपए) पहुंच गया, जबकि भारत की वैल्यू गिरकर 4.92 ट्रिलियन डॉलर (करीब 413 लाख करोड़ रुपए) रह गई है। अब दुनिया के टॉप-5 शेयर बाजारों में अमेरिका, चीन, जापान और हांगकांग के बाद ताइवान का नाम शामिल हो गया है। ताइवान की जीत के पीछे चिप कंपनी का हाथ ताइवान के शेयर बाजार की इस छलांग की सबसे बड़ी वजह TSMC कंपनी है। ताइवान के मुख्य इंडेक्स में इस अकेले कंपनी की 42% हिस्सेदारी है। इस साल अब तक कंपनी के शेयरों में 49% की बढ़त दर्ज की गई है। पूरी दुनिया में AI तकनीक के लिए इस्तेमाल होने वाले सेमीकंडक्टर्स (चिप्स) की सप्लाई में इस कंपनी का दबदबा है, जिसका फायदा ताइवान के बाजार को मिल रहा है। नए नियमों ने ताइवान को दिया बूस्ट हाल ही में ताइवान के रेगुलेटर ने निवेश के नियमों में ढील दी है। अब घरेलू फंड किसी एक बड़ी कंपनी में अपनी नेट एसेट का 25% तक निवेश कर सकते हैं, पहले यह सीमा सिर्फ 10% थी। अभी सिर्फ TSMC ही इस मापदंड को पूरा करती है। जेपी मॉर्गन के मुताबिक, इस बदलाव से ताइवान के बाजार में 6 अरब डॉलर (करीब 50 हजार करोड़ रुपए) का अतिरिक्त निवेश आ सकता है। विदेशी निवेशकों ने भारत से ₹2 लाख करोड़ निकाले भारतीय शेयर बाजार के लिए यह साल चुनौतीपूर्ण रहा है। इस साल अब तक विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से करीब 24 अरब डॉलर (करीब 2 लाख करोड़ रुपए) निकाले हैं। इसकी मुख्य वजह भारतीय शेयरों की ऊंची वैल्यूएशन और रुपए की कमजोरी रही है। इसके उलट, निवेशक ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे उन बाजारों में पैसा लगा रहे हैं जो सीधे तौर पर AI हार्डवेयर और मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े हैं। इन 3 कारणों से पिछड़ा भारतीय बाजार महंगी एनर्जी और महंगाई: ऊर्जा की बढ़ती लागत ने भारत में महंगाई की चिंता बढ़ा दी है, जिससे ग्रोथ की उम्मीदों पर असर पड़ा है। AI कंपनियों की कमी: भारत में ऐसी कंपनियों की कमी है जो सीधे तौर पर ग्लोबल AI इंफ्रास्ट्रक्चर या हार्डवेयर मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी हों। कॉर्पोरेट अर्निंग में सुस्ती: भारतीय कंपनियों के मुनाफे की रफ्तार भी धीमी रही है, जिससे निवेशकों का भरोसा कम हुआ है। अर्थव्यवस्था के मामले में अब भी भारत काफी आगे शेयर बाजार की वैल्यू में भले ही ताइवान आगे निकल गया हो, लेकिन अर्थव्यवस्था के कुल आकार (GDP) में भारत का दबदबा बरकरार है। IMF के अनुमानों के मुताबिक, भारत की इकोनॉमी 4.15 ट्रिलियन डॉलर की है, जबकि ताइवान की GDP महज 977 बिलियन डॉलर है। भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक बना हुआ है। मार्केट कैप क्या होता है? किसी भी देश के शेयर बाजार की ‘मार्केट कैपिटलाइजेशन’ का मतलब वहां की सभी लिस्टेड कंपनियों के शेयरों की कुल कीमत होती है। अगर किसी देश का मार्केट कैप बढ़ रहा है, तो इसका मतलब है कि वहां की कंपनियों में निवेशकों का भरोसा बढ़ रहा है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

Did Ranveer singh left for Dhurandhar 3 shoot amid ban, know the details

Did Ranveer singh left for Dhurandhar 3 shoot amid ban, know the details

3 मिनट पहले कॉपी लिंक फरहान अख्तर की फिल्म डॉन 3 छोड़ने से रणवीर सिंह विवादों में फंस चुके हैं। फरहान अख्तर की शिकायत के बाद FWICE (फिल्म फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न सिने एप्लॉय्ज) ने सोमवार को एक्टर पर बैन लगा दिया है। ऐसे में वो डॉन 3 विवाद खत्म होने तक कोई फिल्म नहीं कर सकेंगे। इसकी दूसरी तरफ रणवीर सिंह सोमवार देर रात मुंबई से रवाना हुए हैं, जिससे धुरंधर 3 की शूटिंग के कयास लगाए जा रहे हैं। रणवीर सिंह बैन की घोषणा होने के बाद देर रात मुंबई एयरपोर्ट पर स्पॉट हुए। एयरपोर्ट पर उन्होंने लंबे बालों को बांध रखा था और सफेत कुर्ते-पजामे के साथ काली जैकेट पहनी थी। एयरपोर्ट पर रणवीर सिंह ने मास्क और ग्लासेस से चेहरा पूरी तरह ढक रखा था। रणवीर सिंह के एयरपोर्ट में स्पॉट होने के ठीक बाद उनके धुरंधर को-स्टार अर्जुन रामपाल भी एयरपोर्ट पर स्पॉट हुए। अर्जुन रामपाल ने धुरंधर में मेजर इकबाल का रोल प्ले किया था। दोनों के साथ रवाना होने से धुरंधर 3 की शूटिंग की खबरें तेज हो गई हैं। डॉन 3 विवाद खत्म होने तक शूटिंग नहीं कर सकेंगे रणवीर सिंह, जानिए क्या है विवाद? धुरंधर की सक्सेस के बाद रणवीर सिंह ने फरहान अख्तर की फिल्म डॉन 3 अचानक छोड़ दी, जिसकी घोषणा 2023 में रणवीर के साथ हुई थी। मेकर्स का दावा है कि इससे उनका 45 करोड़ का नुकसान हुआ। पहले इस मामले की शिकायत प्रोड्यूसर गिल्ड में की गई, जिसके बाद ये मामला FWICE के पास पहुंचा। मामले को गंभीरता से लेते हुए फेडरेशन ने रणवीर सिंह को अलग-अलग मौकों पर 3 नोटिस भेजे, लेकिन उन्होंने साफ कहा कि ये लीगल मामला है, जो फेडरेशन द्वारा नहीं बल्कि कोर्ट के जरिए सुलझाना चाहिए। आखिरकार फेडरेशन ने सोमवार को मुंबई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस रख रणवीर सिंह पर बैन लगा दिया। ऐसे में रणवीर विवाद खत्म होने तक कोई नई फिल्म नहीं शूट कर सकेंगे। रणवीर सिंह की टीम बोली- वे सोच-समझकर चुप रणवीर सिंह के स्पोक पर्सन ने कहा- रणवीर सिंह फिल्म इंडस्ट्री और ‘डॉन’ फ्रैंचाइजी से जुड़े हर इंसान का दिल से सम्मान करते हैं। ‘डॉन 3’ को लेकर हाल ही में जो कुछ भी हुआ है, उस पर उन्होंने सोच-समझकर चुप रहना ही सही समझा। उनका मानना है कि काम से जुड़ी बातें और आपसी रिश्ते हमेशा गरिमा, समझदारी और आपसी सम्मान के साथ ही संभाले जाने चाहिए। इस बीच कई तरह की बातें और अफवाहें सामने आई हैं, लेकिन रणवीर ने कभी भी सरेआम इस पर कोई सफाई देना या इन अटकलों को बढ़ावा देना जरूरी नहीं समझा। उनका पूरा ध्यान पूरी तरह से उनके काम और आने वाले प्रोजेक्ट्स पर है। वे इस फिल्म से जुड़े सभी लोगों के लिए अपने दिल में सम्मान रखते हैं और चाहते हैं कि यह फ्रैंचाइजी आगे भी खूब कामयाब हो। ऐसे मुश्किल मौकों पर संयम और शालीनता बनाए रखना हमेशा से उनका अपना फैसला रहा है, और वे आगे भी इसी रुख पर कायम रहेंगे।” डॉन 3 का ऐलान 2023 में हुआ था। अब समझिए FWICE क्या है? रणवीर पर बैन का क्या असर होगा फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज (FWICE) फिल्म इंडस्ट्री के वर्कर्स और कलाकारों के हितों की रक्षा करने वाली सबसे बड़ी संस्था है। इसकी शुरुआत साल 1956 में हुई थी और 1958 में इसका रजिस्ट्रेशन कराया गया था। मदर बॉडी: यह फेडरेशन मुख्य रूप से एक मदर बॉडी (शीर्ष संस्था) की तरह काम करती है। इसके अंतर्गत कुल 34 अलग-अलग एसोसिएशंस आती हैं। सदस्यों की संख्या: इसमें एक्टर्स, डायरेक्टर्स, प्रोड्यूसर्स, कैमरामैन, टेक्नीशियंस, जूनियर आर्टिस्ट और स्पॉटबॉय जैसी 34 एसोसिएशंस के लगभग 4 से 5 लाख मेंबर्स जुड़े हुए हैं। दायरा: यह एशिया की सबसे बड़ी फिल्म फेडरेशन है। वर्तमान में फिल्म इंडस्ट्री में काम करने वाले करीब 90 प्रतिशत लोग इसी फेडरेशन से जुड़ी एसोसिएशंस के सदस्य हैं। इसका अपना एक संविधान है, जिसे मानना सभी सदस्यों के लिए जरूरी है। फेडरेशन काम बंद कर दे तो शूटिंग कैंसिल FWICE के पास फिल्म इंडस्ट्री के कामकाजी माहौल को नियंत्रित करने की बड़ी ताकत है। काम रोकना: अगर फेडरेशन अपने 4 से 5 लाख सदस्यों को किसी प्रोजेक्ट पर काम करने से रोक दे, तो अगले ही दिन से फिल्मों और टीवी शोज की शूटिंग पूरी तरह बंद हो जाएगी। पेमेंट वसूलना: फेडरेशन मेकर्स और एक्टर्स के बीच पैसों के विवाद को सुलझाती है। उदाहरण के लिए, कुछ समय पहले प्रोड्यूसर फिरोज नाडियाडवाला ने एक फिल्म के बाद क्रू मेंबर्स के करीब 3 करोड़ रुपए नहीं चुकाए थे। फेडरेशन ने उनकी अगली फिल्म ‘वेलकम टु जंगल’ की शूटिंग से पहले सभी सदस्यों को काम न करने का निर्देश दे दिया। इसके बाद प्रोडक्शन कंपनी और फेडरेशन के दबाव में फिरोज नाडियाडवाला को पुराना बकाया चुकाना पड़ा था। कार्रवाई का अधिकार: संविधान के खिलाफ काम करने पर फेडरेशन किसी भी एसोसिएशन या सदस्य को नॉन-मेम्बर घोषित कर सकती है। रणवीर की आने वाली फिल्मों पर क्या असर होगा? इस निर्देश के कारण रणवीर सिंह के नए प्रोजेक्ट्स और फिल्मों के निर्माण में दिक्कतें आ सकती हैं। रणवीर सिंह की आने वाली फिल्मों में ‘किंग’ (स्पेशल कैमियो), निर्देशक आदित्य धर के साथ अगला बड़ा प्रोजेक्ट, कियारा आडवाणी के साथ एक फिल्म और संजय लीला भंसाली की ‘बैजू बावरा’ शामिल हैं। शूटिंग में रुकावट: रणवीर की जिन फिल्मों की शूटिंग अभी होनी है, वहां काम करने वाले 90 प्रतिशत टेक्नीशियन, जूनियर आर्टिस्ट और क्रू मेंबर्स इसी फेडरेशन से जुड़े हैं। असहयोग निर्देश के कारण ये वर्कर्स रणवीर के सेट पर काम करने से मना कर सकते हैं, जिससे शूटिंग रुक सकती है। मेकर्स की परेशानी: रणवीर के साथ नई फिल्म प्लान कर रहे दूसरे प्रोड्यूसर्स के लिए काम आगे बढ़ाना मुश्किल होगा। उन्हें फिल्म शुरू करने से पहले फेडरेशन से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) लेने की जरूरत पड़ सकती है। जब तक यह विवाद नहीं सुलझता, तब तक रणवीर के नए प्रोजेक्ट्स लटक सकते हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

Did Ranveer singh left for Dhurandhar 3 shoot amid ban, know the details

Did Ranveer singh left for Dhurandhar 3 shoot amid ban, know the details

21 मिनट पहले कॉपी लिंक फरहान अख्तर की फिल्म डॉन 3 छोड़ने से रणवीर सिंह विवादों में फंस चुके हैं। फरहान अख्तर की शिकायत के बाद FWICE (फिल्म फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न सिने एप्लॉय्ज) ने सोमवार को एक्टर पर बैन लगा दिया है। ऐसे में वो डॉन 3 विवाद खत्म होने तक कोई फिल्म नहीं कर सकेंगे। इसकी दूसरी तरफ रणवीर सिंह सोमवार देर रात मुंबई से रवाना हुए हैं, जिससे धुरंधर 3 की शूटिंग के कयास लगाए जा रहे हैं। रणवीर सिंह बैन की घोषणा होने के बाद देर रात मुंबई एयरपोर्ट पर स्पॉट हुए। एयरपोर्ट पर उन्होंने लंबे बालों को बांध रखा था और सफेत कुर्ते-पजामे के साथ काली जैकेट पहनी थी। एयरपोर्ट पर रणवीर सिंह ने मास्क और ग्लासेस से चेहरा पूरी तरह ढक रखा था। रणवीर सिंह के एयरपोर्ट में स्पॉट होने के ठीक बाद उनके धुरंधर को-स्टार अर्जुन रामपाल भी एयरपोर्ट पर स्पॉट हुए। अर्जुन रामपाल ने धुरंधर में मेजर इकबाल का रोल प्ले किया था। दोनों के साथ रवाना होने से धुरंधर 3 की शूटिंग की खबरें तेज हो गई हैं। डॉन 3 विवाद खत्म होने तक शूटिंग नहीं कर सकेंगे रणवीर सिंह, जानिए क्या है विवाद? धुरंधर की सक्सेस के बाद रणवीर सिंह ने फरहान अख्तर की फिल्म डॉन 3 अचानक छोड़ दी, जिसकी घोषणा 2023 में रणवीर के साथ हुई थी। मेकर्स का दावा है कि इससे उनका 45 करोड़ का नुकसान हुआ। पहले इस मामले की शिकायत प्रोड्यूसर गिल्ड में की गई, जिसके बाद ये मामला FWICE के पास पहुंचा। मामले को गंभीरता से लेते हुए फेडरेशन ने रणवीर सिंह को अलग-अलग मौकों पर 3 नोटिस भेजे, लेकिन उन्होंने साफ कहा कि ये लीगल मामला है, जो फेडरेशन द्वारा नहीं बल्कि कोर्ट के जरिए सुलझाना चाहिए। आखिरकार फेडरेशन ने सोमवार को मुंबई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस रख रणवीर सिंह पर बैन लगा दिया। ऐसे में रणवीर विवाद खत्म होने तक कोई नई फिल्म नहीं शूट कर सकेंगे। रणवीर सिंह की टीम बोली- वे सोच-समझकर चुप रणवीर सिंह के स्पोक पर्सन ने कहा- रणवीर सिंह फिल्म इंडस्ट्री और ‘डॉन’ फ्रैंचाइजी से जुड़े हर इंसान का दिल से सम्मान करते हैं। ‘डॉन 3’ को लेकर हाल ही में जो कुछ भी हुआ है, उस पर उन्होंने सोच-समझकर चुप रहना ही सही समझा। उनका मानना है कि काम से जुड़ी बातें और आपसी रिश्ते हमेशा गरिमा, समझदारी और आपसी सम्मान के साथ ही संभाले जाने चाहिए। इस बीच कई तरह की बातें और अफवाहें सामने आई हैं, लेकिन रणवीर ने कभी भी सरेआम इस पर कोई सफाई देना या इन अटकलों को बढ़ावा देना जरूरी नहीं समझा। उनका पूरा ध्यान पूरी तरह से उनके काम और आने वाले प्रोजेक्ट्स पर है। वे इस फिल्म से जुड़े सभी लोगों के लिए अपने दिल में सम्मान रखते हैं और चाहते हैं कि यह फ्रैंचाइजी आगे भी खूब कामयाब हो। ऐसे मुश्किल मौकों पर संयम और शालीनता बनाए रखना हमेशा से उनका अपना फैसला रहा है, और वे आगे भी इसी रुख पर कायम रहेंगे।” डॉन 3 का ऐलान 2023 में हुआ था। अब समझिए FWICE क्या है? रणवीर पर बैन का क्या असर होगा फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज (FWICE) फिल्म इंडस्ट्री के वर्कर्स और कलाकारों के हितों की रक्षा करने वाली सबसे बड़ी संस्था है। इसकी शुरुआत साल 1956 में हुई थी और 1958 में इसका रजिस्ट्रेशन कराया गया था। मदर बॉडी: यह फेडरेशन मुख्य रूप से एक मदर बॉडी (शीर्ष संस्था) की तरह काम करती है। इसके अंतर्गत कुल 34 अलग-अलग एसोसिएशंस आती हैं। सदस्यों की संख्या: इसमें एक्टर्स, डायरेक्टर्स, प्रोड्यूसर्स, कैमरामैन, टेक्नीशियंस, जूनियर आर्टिस्ट और स्पॉटबॉय जैसी 34 एसोसिएशंस के लगभग 4 से 5 लाख मेंबर्स जुड़े हुए हैं। दायरा: यह एशिया की सबसे बड़ी फिल्म फेडरेशन है। वर्तमान में फिल्म इंडस्ट्री में काम करने वाले करीब 90 प्रतिशत लोग इसी फेडरेशन से जुड़ी एसोसिएशंस के सदस्य हैं। इसका अपना एक संविधान है, जिसे मानना सभी सदस्यों के लिए जरूरी है। फेडरेशन काम बंद कर दे तो शूटिंग कैंसिल FWICE के पास फिल्म इंडस्ट्री के कामकाजी माहौल को नियंत्रित करने की बड़ी ताकत है। काम रोकना: अगर फेडरेशन अपने 4 से 5 लाख सदस्यों को किसी प्रोजेक्ट पर काम करने से रोक दे, तो अगले ही दिन से फिल्मों और टीवी शोज की शूटिंग पूरी तरह बंद हो जाएगी। पेमेंट वसूलना: फेडरेशन मेकर्स और एक्टर्स के बीच पैसों के विवाद को सुलझाती है। उदाहरण के लिए, कुछ समय पहले प्रोड्यूसर फिरोज नाडियाडवाला ने एक फिल्म के बाद क्रू मेंबर्स के करीब 3 करोड़ रुपए नहीं चुकाए थे। फेडरेशन ने उनकी अगली फिल्म ‘वेलकम टु जंगल’ की शूटिंग से पहले सभी सदस्यों को काम न करने का निर्देश दे दिया। इसके बाद प्रोडक्शन कंपनी और फेडरेशन के दबाव में फिरोज नाडियाडवाला को पुराना बकाया चुकाना पड़ा था। कार्रवाई का अधिकार: संविधान के खिलाफ काम करने पर फेडरेशन किसी भी एसोसिएशन या सदस्य को नॉन-मेम्बर घोषित कर सकती है। रणवीर की आने वाली फिल्मों पर क्या असर होगा? इस निर्देश के कारण रणवीर सिंह के नए प्रोजेक्ट्स और फिल्मों के निर्माण में दिक्कतें आ सकती हैं। रणवीर सिंह की आने वाली फिल्मों में ‘किंग’ (स्पेशल कैमियो), निर्देशक आदित्य धर के साथ अगला बड़ा प्रोजेक्ट, कियारा आडवाणी के साथ एक फिल्म और संजय लीला भंसाली की ‘बैजू बावरा’ शामिल हैं। शूटिंग में रुकावट: रणवीर की जिन फिल्मों की शूटिंग अभी होनी है, वहां काम करने वाले 90 प्रतिशत टेक्नीशियन, जूनियर आर्टिस्ट और क्रू मेंबर्स इसी फेडरेशन से जुड़े हैं। असहयोग निर्देश के कारण ये वर्कर्स रणवीर के सेट पर काम करने से मना कर सकते हैं, जिससे शूटिंग रुक सकती है। मेकर्स की परेशानी: रणवीर के साथ नई फिल्म प्लान कर रहे दूसरे प्रोड्यूसर्स के लिए काम आगे बढ़ाना मुश्किल होगा। उन्हें फिल्म शुरू करने से पहले फेडरेशन से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) लेने की जरूरत पड़ सकती है। जब तक यह विवाद नहीं सुलझता, तब तक रणवीर के नए प्रोजेक्ट्स लटक सकते हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

बड़े पैमाने पर पलायन से टीएमसी प्रभावित: बंगाल चुनाव में हार के बाद 100 से अधिक नगर पार्षदों ने नागरिक निकाय छोड़े | भारत समाचार

India-Australia- Japan-US Quad Foreign Ministers meet in Delhi

आखरी अपडेट:26 मई, 2026, 10:05 IST राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि नगर निकायों को छोड़ने वाले पार्षद टीएमसी के एक समय के शक्तिशाली शहरी राजनीतिक नेटवर्क के और अधिक कमजोर होने की ओर इशारा करते हैं। बंगाल में नगरपालिका परित्याग: पार्षदों के इस्तीफा देने के कारण जमीनी स्तर पर टीएमसी की पकड़ कमजोर हो रही है। 2026 के विधानसभा चुनावों में अपनी हार के बाद पश्चिम बंगाल में नगर निकायों में इस्तीफों की लहर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के अंदर राजनीतिक अस्थिरता के नवीनतम संकेत के रूप में उभर रही है। राज्य भर में विभिन्न नगर पालिकाओं से 100 से अधिक पार्षदों ने इस्तीफा दे दिया है, जो पार्टी की जमीनी नागरिक संरचना के भीतर बढ़ती अशांति को उजागर करता है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि घटनाक्रम टीएमसी के एक समय के शक्तिशाली शहरी राजनीतिक नेटवर्क के और अधिक कमजोर होने की ओर इशारा करता है। नगर पालिकाओं में पार्षदों के सामूहिक इस्तीफे सबसे बड़ा झटका भाटपारा नगर पालिका से लगा, जहां चेयरपर्सन रेबा राहा सहित नगर पालिका के 35 पार्षदों में से 30 ने शुक्रवार को इस्तीफा दे दिया। पास के हलिसहर नगर पालिका में, 23 में से 16 पार्षदों ने पद छोड़ दिया। कांचरापाड़ा नगर पालिका से अन्य 14 पार्षदों ने इस्तीफा दे दिया। प्रमुख इस्तीफे देखने वाली अन्य नगर पालिकाओं में 18 इस्तीफे के साथ गरुलिया नगर पालिका, 15 के साथ उत्तरी बैरकपुर नगर पालिका और 14 के साथ कोंटाई नगर पालिका शामिल हैं। डायमंड हार्बर नगर पालिका में, आठ पार्षदों ने 16 सदस्यीय नागरिक निकाय से इस्तीफा दे दिया। क्यों दे रहे हैं पार्षद इस्तीफा? सार्वजनिक रूप से, कई पार्षदों ने पद छोड़ने के लिए व्यक्तिगत या संगठनात्मक कारणों का हवाला दिया। हालाँकि, निजी तौर पर, कई टीएमसी नेताओं ने स्वीकार किया कि पुलिस कार्रवाई और भ्रष्टाचार की जाँच का डर नगर पालिकाओं में तेजी से फैल रहा था, जहाँ पार्षद लंबे समय से पिछली सरकार के तहत राजनीतिक संरक्षण के साथ काम कर रहे थे। टीएमसी से जुड़े नगर निगम नेताओं की सिलसिलेवार गिरफ्तारियों के बाद घबराहट बढ़ गई। 20 मई को, पुलिस ने बिधाननगर नगर निगम के वार्ड 34 के पार्षद और बरो 5 के अध्यक्ष रंजन पोद्दार को इस आरोप में गिरफ्तार किया कि साल्ट लेक और करुणामयी क्षेत्रों में बस और ऑटो ऑपरेटरों से नियमित रूप से पैसा इकट्ठा किया जाता था। कुछ दिन पहले, विधाननगर के पार्षद सम्राट बरुआ को एक अन्य कथित जबरन वसूली मामले में गिरफ्तार किया गया था। कूचबिहार में, टीएमसी पार्षद उज्ज्वल तार को विधानसभा चुनाव अभियान के दौरान धमकी और धमकी से जुड़े आरोपों में गिरफ्तार किया गया था। डायमंड हार्बर मॉडल में आग लगी डायमंड हार्बर में इस्तीफों से बड़ी राजनीतिक बहस छिड़ गई क्योंकि यह क्षेत्र लंबे समय से टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी से जुड़ा रहा है। यह संकट फाल्टा विधानसभा पुनर्मतदान में भाजपा की जोरदार जीत के तुरंत बाद आया। भाजपा उम्मीदवार देबांगशु पांडा ने 71 प्रतिशत से अधिक वोट शेयर हासिल किया, जबकि टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान चौथे स्थान पर खिसक गए और उनकी जमानत जब्त हो गई। डायमंड हार्बर नगर पालिका से इस्तीफा देने वाले आठ पार्षदों ने पार्टी नेतृत्व पर उन्हें नगर निकाय चलाने का अधिकार देने से इनकार करने का आरोप लगाया। पार्षद तमाल हलदर ने बहुप्रचारित “डायमंड हार्बर मॉडल” पर हमला किया। हलदर ने कहा, “इतने समय तक डायमंड हार्बर मॉडल के नाम पर गुब्बारा फुलाया गया। अब गुब्बारा फूट गया है।” उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस अधिकारी व्यवस्था को नियंत्रित करते हैं और निर्वाचित प्रतिनिधियों को बहुत कम स्वतंत्रता है। कई पार्षदों ने पुलिस के कुछ वर्गों पर अवैध तालाब भरने, अनधिकृत निर्माण और जबरन वसूली से जुड़े कथित भ्रष्टाचार में शामिल होने का भी आरोप लगाया। कोलकाता नगर निगम के अंदर दरारें लंबे समय से टीएमसी के सबसे मजबूत राजनीतिक किलों में से एक माने जाने वाले कोलकाता नगर निगम के अंदर भी अशांति के संकेत दिखाई दिए हैं। टीएमसी पार्षद देबलीना बिस्वास ने वार्ड 74 के पार्षद के रूप में बने रहते हुए बरो नंबर 9 के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया। केएमसी द्वारा अभिषेक बनर्जी और उनके परिवार से जुड़ी 17 संपत्तियों को नोटिस जारी करने के तुरंत बाद इस्तीफा आया। टकराव तब और बढ़ गया जब मासिक केएमसी सत्र मुख्य कक्ष के अंदर आयोजित नहीं किया जा सका क्योंकि नागरिक अधिकारियों ने कथित तौर पर कमरा नहीं खोला। टीएमसी पार्षदों को केएमसी मुख्यालय के अंदर मनोरंजन कक्ष से कार्यवाही संचालित करने के लिए मजबूर होना पड़ा। मेयर फिरहाद हकीम ने बाद में घटनाक्रम को “नगर पालिका के लिए एक काला दिन” बताया। बीजेपी की रणनीति राजनीतिक विश्लेषकों का मानना ​​है कि भाजपा दोतरफा रणनीति अपना रही है। एक ओर, भाजपा सरकार अपने कार्यों को कथित तौर पर भ्रष्टाचार और सिंडिकेट राजनीति से प्रभावित नगर पालिकाओं की प्रशासनिक सफाई के रूप में प्रस्तुत कर रही है। दूसरी ओर, जांच और गिरफ़्तारियों से बना दबाव स्थानीय नागरिक संरचना को कमज़ोर कर रहा है जिसने टीएमसी की राजनीतिक मशीनरी को वर्षों तक बनाए रखने में मदद की। विशेषज्ञों के अनुसार, बंगाल में नगर पालिकाएँ न केवल नागरिक संस्थानों के रूप में बल्कि अनुबंधों, स्थानीय प्रभाव और लामबंदी नेटवर्क को नियंत्रित करने वाले राजनीतिक पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में भी कार्य करती हैं। पार्षदों के इस्तीफे के परिणामस्वरूप पार्टी जमीनी स्तर पर पकड़ खोती जा रही है। बढ़ते तनाव ने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को बिधाननगर, दम दम और बारानगर सहित कई नगर पालिकाओं के पार्षदों के साथ बैठक करने के लिए प्रेरित किया है। बनर्जी ने पार्टी सदस्यों को चुनावी हार के बाद संगठन छोड़ने के खिलाफ चेतावनी दी। उन्होंने कथित तौर पर पार्षदों से कहा, “हमें ऐसे कार्यकर्ताओं की ज़रूरत नहीं है जो केवल पार्टी जीतने पर रुकते हैं और हार के बाद चले जाते हैं।” चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना जगह : कोलकाता (कलकत्ता), भारत, भारत न्यूज़ इंडिया बड़े पैमाने पर पलायन से टीएमसी पर असर: बंगाल चुनाव में हार के बाद 100 से अधिक नगर पार्षदों ने नागरिक निकाय छोड़ दिए अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक,

Nifty Falls To 24,015 | IT, Metal Shares See Buying

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मुंबई11 मिनट पहले कॉपी लिंक आज यानी मंगलवार, 26 मई को सेंसेक्स 60 अंक (0.08%) की गिरावट के साथ 76,400 पर कारोबार कर रहा है। निफ्टी में भी 16 अंकों (0.07%) की गिरावट है, ये 24,015 के स्तर पर आ गया है। आज के कारोबार में आईटी और मेटल शेयरों में सबसे ज्यादा खरीदारी है। एशियाई बाजारों में मिला जुला कारोबार इंडेक्स लेवल पॉइंट चेंज परसेंट चेंज कोस्पी (साउथ कोरिया) 8087 249 3.18% निक्केई (जापान) 64898 -261 -0.40% हैंगसेंग (हॉन्गकॉन्ग) 25725 119 0.52% कल अमेरिकी बाजार चढ़कर बंद हुए थे इंडेक्स लेवल पॉइंट चेंज परसेंट चेंज डाउ जोन्स 50580 294 0.58% नैस्डैक 26344 51 0.19% S&P 500 7473 28 0.37% विदेशी निवेशकों ने ककल ₹822 करोड़ के शेयर खरीदे कैटेगरी लेटेस्ट बीते 7 दिन बीते 30 दिन DII 3,857 14,321 72,308 FII/FPI 822 -7,107 -45,178 कल सेंसेक्स 1074 अंक चढ़कर 76,489 पर बंद हुआ था दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Nifty Falls To 24,015 | IT, Metal Shares See Buying

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मुंबई12 मिनट पहले कॉपी लिंक आज यानी मंगलवार, 26 मई को सेंसेक्स 60 अंक (0.08%) की गिरावट के साथ 76,400 पर कारोबार कर रहा है। निफ्टी में भी 16 अंकों (0.07%) की गिरावट है, ये 24,015 के स्तर पर आ गया है। आज के कारोबार में आईटी और मेटल शेयरों में सबसे ज्यादा खरीदारी है। एशियाई बाजारों में मिला जुला कारोबार इंडेक्स लेवल पॉइंट चेंज परसेंट चेंज कोस्पी (साउथ कोरिया) 8087 249 3.18% निक्केई (जापान) 64898 -261 -0.40% हैंगसेंग (हॉन्गकॉन्ग) 25725 119 0.52% कल अमेरिकी बाजार चढ़कर बंद हुए थे इंडेक्स लेवल पॉइंट चेंज परसेंट चेंज डाउ जोन्स 50580 294 0.58% नैस्डैक 26344 51 0.19% S&P 500 7473 28 0.37% विदेशी निवेशकों ने ककल ₹822 करोड़ के शेयर खरीदे कैटेगरी लेटेस्ट बीते 7 दिन बीते 30 दिन DII 3,857 14,321 72,308 FII/FPI 822 -7,107 -45,178 कल सेंसेक्स 1074 अंक चढ़कर 76,489 पर बंद हुआ था दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

वर्ल्ड अपडेट्स:भारत-कनाडा फ्री ट्रेड डील पर तेजी, कनाडाई PM बोले- यह दोनों देशों के लिए गेम चेंजर होगा

वर्ल्ड अपडेट्स:भारत-कनाडा फ्री ट्रेड डील पर तेजी, कनाडाई PM बोले- यह दोनों देशों के लिए गेम चेंजर होगा

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा है कि भारत के साथ फ्री ट्रेड डील को लेकर बातचीत तेजी से चल रही है। उन्होंने इस समझौते को कनाडा के कारोबार और कर्मचारियों के लिए गेम चेंजर बताया। कार्नी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि इस डील से कनाडा को भारत जैसा बड़ा बाजार मिलेगा। उन्होंने केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के साथ हुई बैठक में ऊर्जा, कृषि, टेक्नोलॉजी और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की। पीयूष गोयल इस समय तीन दिन के कनाडा दौरे पर हैं। उन्होंने बताया कि भारत और कनाडा का लक्ष्य इस साल के अंत तक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पूरा करना है। दोनों देश 2030 तक आपसी व्यापार को 17 अरब डॉलर से बढाकर 50 अरब डॉलर तक ले जाना चाहते हैं। गोयल ने बताया कि इस दौरे में भारत से 112 कंपनियों का अब तक का सबसे बड़ा कारोबारी प्रतिनिधिमंडल कनाडा पहुंचा है। इसमें ऊर्जा, फार्मा, टेक, ऑटोमोबाइल और कृषि समेत कई सेक्टर की कंपनियां शामिल हैं।

कांग्रेस कर्नाटक में मुश्किल राह पर चल रही है क्योंकि डीके, सिद्धारमैया कैबिनेट में दबदबा बनाने के लिए आमने-सामने हैं भारत समाचार

Kerala Board Plus 2 Result 2026 Live Updates: Check steps to download DHSE Kerala class 12 results here.

आखरी अपडेट:26 मई, 2026, 07:57 IST कांग्रेस के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि फेरबदल की चर्चा तेजी से दो कारकों के इर्द-गिर्द घूम रही है- मंत्रियों का प्रदर्शन और सिद्धारमैया और शिवकुमार खेमों के बीच सत्ता का बंटवारा। सिद्धारमैया के समर्थक शिवकुमार को किसी भी बड़ी रियायत को एक संभावित संकेत के रूप में देखते हैं कि दिल्ली भविष्य में नेतृत्व परिवर्तन की तैयारी कर रही है। (एआई-जनरेटेड इमेज) मंगलवार को दिल्ली में कांग्रेस आलाकमान की नवीनतम कर्नाटक मंत्रणा को अब केवल इस चर्चा के रूप में नहीं देखा जा रहा है कि सिद्धारमैया रहेंगे या डीके शिवकुमार पदभार संभालेंगे। कांग्रेस के शीर्ष सूत्रों ने सीएनएन-न्यूज18 को बताया है कि अधिक तात्कालिक लड़ाई अब लंबे समय से लंबित कैबिनेट फेरबदल की ओर बढ़ रही है, उन्होंने कहा कि विभागों का वितरण कैसे किया जाता है, यह अंततः कर्नाटक में सत्ता के भविष्य के संतुलन को निर्धारित कर सकता है। सूत्रों का कहना है कि सिद्धारमैया, शिवकुमार, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी की चर्चा काफी हद तक शासन के प्रदर्शन, गुटीय समायोजन और आगामी राज्यसभा चुनावों की तैयारियों के इर्द-गिर्द घूम सकती है। सूत्रों ने कहा कि समझा जाता है कि केंद्रीय नेतृत्व राजनीतिक रूप से संवेदनशील क्षण में दोनों खेमों के बीच खुले मनमुटाव को रोकने के लिए उत्सुक है। कैबिनेट में फेरबदल क्यों बन गया है अहम? प्रतिनिधित्व और पोर्टफोलियो आवंटन को लेकर दोनों गुटों के विधायकों के बीच असंतोष बढ़ने से कर्नाटक कैबिनेट में फेरबदल महीनों से लंबित है। सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली अब इस फेरबदल को मुख्यमंत्री के सवाल को तुरंत हल किए बिना सत्ता संघर्ष को अस्थायी रूप से स्थिर करने का सबसे व्यावहारिक तरीका मानती है। यह भी पढ़ें | रिकॉर्ड्स और अनुस्मारक के बीच: कर्नाटक के सीएम पद के लिए शांत लड़ाई कांग्रेस के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि फेरबदल की चर्चा तेजी से दो कारकों के इर्द-गिर्द घूम रही है- मंत्रियों का प्रदर्शन और सिद्धारमैया और शिवकुमार खेमों के बीच सत्ता का बंटवारा। इसका मतलब है कि नया मंत्रिमंडल प्रभावी रूप से कर्नाटक कांग्रेस के अंदर एक राजनीतिक स्कोरबोर्ड बन सकता है। यदि सिद्धारमैया के वफादारों को प्रभावशाली मंत्रालयों का बहुमत मिलता है, तो यह संकेत हो सकता है कि आलाकमान निरंतरता की ओर झुक रहा है। यदि शिवकुमार का खेमा मजबूत प्रतिनिधित्व और भारी भरकम विभाग हासिल करता है, तो यह संकेत दे सकता है कि दिल्ली धीरे-धीरे उन्हें बाद के कार्यकाल में बड़ी भूमिका के लिए तैयार कर रही है। डीके शिवकुमार कैंप का जोर कांग्रेस के शीर्ष सूत्रों ने सीएनएन-न्यूज18 को बताया कि शिवकुमार के समर्थक न केवल अधिक कैबिनेट पदों के लिए दबाव डाल रहे हैं, बल्कि दृश्यमान प्रशासनिक और राजनीतिक अधिकार वाले “भावपूर्ण” पोर्टफोलियो के लिए भी जोर दे रहे हैं। आंतरिक रूप से जिन मांगों पर चर्चा हो रही है उनमें गृह जैसे विभागों सहित उच्च राजनीतिक प्रभाव वाले विभागों पर मजबूत नियंत्रण शामिल है। सूत्रों का कहना है कि शिवकुमार खेमे का मानना ​​है कि वास्तविक प्रशासनिक शक्ति के बिना प्रतीकात्मक आवास उन विधायकों को संतुष्ट नहीं करेगा जिन्होंने 2023 सरकार गठन वार्ता के दौरान उनका समर्थन किया था। डीके खेमे का तर्क यह है कि शिवकुमार ने 2019 में पार्टी के पतन के बाद कर्नाटक कांग्रेस संगठन का पुनर्निर्माण किया, 2023 विधानसभा जीत में केंद्रीय भूमिका निभाई और भविष्य के चुनावों से पहले वोक्कालिगा एकीकरण के लिए महत्वपूर्ण बने हुए हैं। इसलिए, एक मजबूत कैबिनेट पदचिह्न को आंतरिक रूप से पुरस्कार और रणनीतिक आवश्यकता दोनों के रूप में पेश किया जा रहा है। सिद्धारमैया का पलटवार इस बीच, सिद्धारमैया से किसी भी फेरबदल की प्रक्रिया में अपने वफादार विधायकों के लिए अधिकतम प्रतिनिधित्व के लिए आक्रामक तरीके से जोर देने की उम्मीद है। सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री के खेमे का मानना ​​है कि सरकार की कल्याण वास्तुकला और शासन मॉडल सिद्धारमैया के नेतृत्व से निकटता से जुड़ा हुआ है, और प्रमुख मंत्रालयों पर उनकी पकड़ कमजोर होने से प्रशासन अस्थिर हो सकता है। इसलिए उम्मीद की जाती है कि सिद्धारमैया गुट मुख्य शासन विभागों पर नियंत्रण बनाए रखने, अहिंदा सामाजिक गठबंधन के साथ जुड़े विधायकों को पुरस्कृत करने और यह सुनिश्चित करने पर जोर देगा कि किसी भी फेरबदल से यह धारणा पैदा न हो कि सत्ता हस्तांतरण पहले से ही चल रहा है। यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि सिद्धारमैया के समर्थक शिवकुमार को किसी भी बड़ी रियायत को एक संभावित संकेत के रूप में देखते हैं कि दिल्ली भविष्य में नेतृत्व परिवर्तन की तैयारी कर रही है। सूत्रों के अनुसार, नेतृत्व का मानना ​​​​है कि पार्टी राज्यसभा की गणना, राष्ट्रीय विपक्ष समन्वय और कर्नाटक की दीर्घकालिक चुनावी स्थिति के साथ अस्थिर आंतरिक संघर्ष को बर्दाश्त नहीं कर सकती है। यह बताता है कि वर्तमान चर्चा उत्तराधिकारी घोषित करने के बारे में कम और एक कैलिब्रेटेड संतुलन इंजीनियरिंग के बारे में अधिक क्यों है। दिल्ली वार्ता से उभरे तीन परिदृश्य 1. यथास्थिति, लेकिन सावधानीपूर्वक संतुलित मंत्रिमंडल के साथ इसे वर्तमान में सबसे संभावित अल्पकालिक परिणाम के रूप में देखा जाता है। इस मॉडल के तहत, सिद्धारमैया मुख्यमंत्री बने रहते हैं, शिवकुमार को विभागों और कैबिनेट प्रतिनिधित्व के माध्यम से प्रभाव का विस्तार मिलता है, और फेरबदल समझौता फार्मूला बन जाता है। यह कांग्रेस को नेतृत्व के सवाल को टालने की अनुमति देगा, साथ ही यह संकेत भी देगा कि शिवकुमार पार्टी के भविष्य के केंद्र में बने रहेंगे। यहां मुख्य संकेतक यह होगा कि किस खेमे को सबसे प्रभावशाली मंत्रालय मिलते हैं। 2. शिवकुमार ने संभाला सीएम पद दूसरी, और राजनीतिक रूप से पेचीदा, संभावना कर्नाटक में सत्ता परिवर्तन के इर्द-गिर्द घूमती है। इंडिया टुडे ने कांग्रेस सूत्रों के हवाले से कहा कि आंतरिक बातचीत अब एक फॉर्मूला तलाश रही है जिसके तहत सिद्धारमैया को राज्यसभा में स्थानांतरित किया जा सकता है। ऐसा कोई भी बदलाव सिद्धारमैया और शिवकुमार दोनों खेमों के हितों को संतुलित करने के उद्देश्य से एक व्यापक कैबिनेट बदलाव के साथ आने की उम्मीद है। 3. वाइल्ड कार्ड एंट्री? एक तीसरा, यद्यपि बहुत कम संभावित, परिदृश्य पर चर्चा की जा रही है, यदि गुटों के बीच झगड़े को हल करना असंभव हो जाता है तो मल्लिकार्जुन खड़गे का एक समझौतावादी चेहरे के

CNG ₹2 तक महंगी, दिल्ली में कीमत ₹83.09 किलो:इस महीने 3 बार दाम बढ़े, अब तक ₹5 इजाफा

CNG ₹2 तक महंगी, दिल्ली में कीमत ₹83.09 किलो:इस महीने 3 बार दाम बढ़े, अब तक ₹5 इजाफा

पेट्रोल-डीजल के बाद मंगलवार, 26 मई को CNG (कंप्रेस्ड नेचुरल गैस) की कीमतों में 2 रुपए की बढ़ोतरी की गई। इसके बाद दिल्ली में CNG की कीमत 83.09 रुपए प्रति किलो हो गई है। 23 मई को CNG के दाम 1 रुपए प्रति किलो बढ़े थे। वहीं, 16 मई की रात को कंपनियों ने CNG कीमतें 3 रुपए बढ़ाई थीं, जो अगले दिन की सुबह 6 बजे से लागू हो गई थी। खबर अपडेट हो रही है…