Monday, 03 Aug 2026 | 06:38 PM

Trending :

EXCLUSIVE

India Builds New Oil Reserve

India Builds New Oil Reserve

नई दिल्लीकुछ ही क्षण पहले कॉपी लिंक अमेरिका-ईरान युद्ध के दौरान हुए तेल संकट से सबक लेकर केंद्र सरकार ने नया इमरजेंसी ऑयल रिजर्व बनाने का फैसला लिया है। यह इमरजेंसी पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) सरकारी तेल कंपनी ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन (ONGC) बनाएगी। इकोनॉमिक टाइम्स (ET) की रिपोर्ट के मुताबिक, इस पूरे प्रोजेक्ट में करीब ₹15,000 करोड़ खर्च होने का अनुमान है। यह नया इमरजेंसी तेल भंडार कर्नाटक के मंगलुरु में एक अंडरग्राउंड गुफा में बनाया जाएगा। इसमें 1.75 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) यानी 17.5 लाख मिट्रिक टन तेल रखा जा सकेगा। वर्तमान में भारत की कुल स्ट्रेटेजिक क्रूड स्टोरेज क्षमता 53.3 लाख मिट्रिक टन है। प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद देश में आपातकालीन स्थिति के लिए तेल रखने की क्षमता करीब एक-तिहाई (33%) बढ़ जाएगी। ₹5000 करोड़ बनाने में और तेल भरने में ₹10,000 करोड़ का खर्च इस प्रोजेक्ट के खर्च को दो हिस्सों में बांटा गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, ONGC भूमिगत गुफा के निर्माण पर लगभग ₹5,000 करोड़ खर्च करेगी। इसके बाद, मौजूदा बाजार कीमतों और एक्सचेंज रेट के आधार पर इस फैसिलिटी में कच्चा तेल भरने के लिए ₹10,000 करोड़ की जरूरत पड़ सकती है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि ONGC इस बड़े निवेश की वसूली कैसे करेगी। यह भी तय होना बाकी है कि यह फैसिलिटी सिर्फ एक इमरजेंसी रिजर्व के रूप में काम करेगी या राजस्व बढ़ाने के लिए इसमें कॉमर्शियल एक्टिविटीज को भी शामिल किया जाएगा। पुरानी परंपरा से बड़ा बदलाव, पहले सरकार देती थी पूरा फंड ONGC का इतने बड़े पैमाने पर खर्च करना भारत में तेल भंडार बनाने के इतिहास में यह एक बहुत बड़ा बदलाव है। अब तक देश के सभी स्ट्रैटिजिक पेट्रोलियम रिजर्व प्रोजेक्ट्स को पूरी तरह सरकार फंड करती थी। इसका मैनेजमेंट एक विशेष सरकारी संस्था ‘इंडियन स्ट्रैटिजिक पेट्रोलियम रिजर्व्स लिमिटेड’ (ISPRL) करती है। चीन और अमेरिका के मुकाबले भारत का रिजर्व काफी छोटा भारत हर दिन लगभग 50 लाख बैरल कच्चे तेल की खपत करता है, जिसके मुकाबले हमारा मौजूदा रणनीतिक भंडार (5.33 मिलियन टन या 39 मिलियन बैरल) बहुत छोटा है। अमिरिकी एनर्जी इंफॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन (EIA) के साल 2025 के अंत के आंकड़ों के अनुसार, भारत के पास केवल 2.1 करोड़ (21 मिलियन) बैरल का स्ट्रैटिजिक क्रूड रिजर्व था। इसकी तुलना में चीन के पास 139.7 करोड़ बैरल, अमेरिका के पास 41.3 करोड़ बैरल और जापान के पास 26.3 करोड़ बैरल का विशाल भंडार है। नॉलेज बॉक्स: पेट्रोलियम रिजर्व आखिर होता क्या है? पेट्रोलियम रिजर्व मतलब क्रूड ऑयल या पेट्रोल-डीजल का स्टॉक, जिसे कोई देश भविष्य की आपूर्ति के लिए संभालकर रखता है। जैसे घर में आप अनाज स्टोर करते हो, वैसे ही देश तेल का भंडार रखता है। भारत में मौटेतौर पर 2 तरह के पेट्रोलियम रिजर्व हैं… 1. रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (Strategic Reserve) इसे पेट्रोलियम की तिजोरी की तरह समझिए। इसे सरकार द्वारा इमरजेंसी के लिए रखा गया जाता है। इसका इस्तेमाल आम दिनों में नहीं होता। युद्ध, तेल संकट या सप्लाई रुकने पर ही इसका इस्तेमाल होता है। मंगलोर, पादुर और विशाखापट्टनम में भारत के 3 स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व हैं। जहां जमीन के नीचे बड़े-बड़े गुफानुमा टैंकों में तेल रखा जाता है। 2. व्यावसायिक पेट्रोलियम भंडार (Commercial Reserve) इंडियन ऑयल जैसी तेल कंपनियां अपने पास कॉमर्शियल स्टॉक रखती हैं, ताकि पेट्रोल पंपों पर सप्लाई बनी रहे। ये रोजमर्रा की जरूरतों के लिए होते हैं। ये ज्यादातर जमीन के ऊपर बड़े टैंकों में रखा जाता है। ———————- पूरी खबर पढ़ें… जियो का IPO जल्द, 27 करोड़ शेयर जारी होंगे: SEBI के पास दस्तावेज जमा; मुकेश अंबानी बोले- आकाश, ईशा और अनंत जिम्मेदारी संभालेंगे रिलायंस इंडस्ट्रीज की 49वीं सालाना बैठक, यानी AGM शुक्रवार, 19 जून को हुई। कंपनी के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने करीब 44 लाख शेयरहोल्डर्स को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि कंपनी यूरोप और अफ्रीका के मार्केट में एंट्री कर रही है। वहीं, कंपनी जियो का IPO भी लाने जा रही है। अंबानी बताया कि 19 जून को ही SEBI के पास जियो IPO के दस्तावेज जमा कर दिए गए हैं। जियो के 27 करोड़ नए शेयर जारी किए जाएंगे। हालांकि शेयरों की कीमत क्या रहेगी, इसकी जानकारी फिलहाल नहीं दी गई है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

नाविकों के मुद्दे पर शशि थरूर ने किया पीएम मोदी का समर्थन | भाजपा ने कांग्रेस के “फर्जी आख्यान” दावे पर पलटवार किया

नाविकों के मुद्दे पर शशि थरूर ने किया पीएम मोदी का समर्थन | भाजपा ने कांग्रेस के "फर्जी आख्यान" दावे पर पलटवार किया

| CNN-News18 के साथ बातचीत में शशि थरूर द्वारा भारतीय नाविकों की मौत पर पीएम मोदी के रुख का समर्थन करने के बाद, बीजेपी ने कांग्रेस पर निशाना साधा, पीएम मोदी पर उनके हमले को “फर्जी कथा” बनाने का प्रयास बताया n18oc_politicsn18oc_breaking-newsn18oc_indiaNews18 मोबाइल ऐप – https://onelink.to/desc-youtube

मूंग दाल ब्रेड पकौड़ा रेसिपी: बेसन नहीं, घर में कम तेल में ऐसे बनाएं हाई प्रोटीन वाला मूंग दाल ब्रेड पकौड़ा; जानिए विधि

तस्वीर का विवरण

सामग्री: 1 कप ढीली मूंग दाल, 6 से 8 काली मिर्च पाउडर, 2 हरी मिर्च, 1 इंच बड़ा मसाला अदरक, 1 छोटा चम्मच अदरक, 1/4 छोटा चम्मच हल्दी पाउडर, 1/2 छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर, हरा धनिया, नमक, 2 से 3 बड़ा मसाला तेल छवि: सोशल मीडिया भरवाँ के लिए: 2 आलू, 1 तरबूज़, 1/2 छोटा मसाला, 1/2 छोटा मसाला, स्वादानुसार नमक, हरा धनियां छवि: फ्रीपिक बनाने की विधि: सबसे पहले मूंग दाल को 3 से 4 घंटे तक पानी में डूबो दें। इसके बाद पानी की स्वादिष्ट दाल को हरी मिर्च और अदरक के साथ पीस लें। ध्यान रखें कि बैटर सबसे ज्यादा पतला न हो। छवि: सोशल मीडिया अब बैटर में जीरा, हल्दी, लाल मिर्च, नमक और हरा धनिया का मिश्रण अच्छी तरह मिला लें। दूसरी तरफ जमे हुए आलू को मैश करें और इसमें प्याज, चाट मसाला, नमक और हरा धनियां मिलाकर तैयार कर लें। छवि: फ्रीपिक आलू की स्टफिंग पर एक बेकार योजना फैली हुई है और दूसरी योजना से बनी हुई है। मित्र तो इसे तिकोना काट सकते हैं। इसके बाद तैयार ब्रेड को मूंग दाल के बैटर में अच्छी तरह से डुबोएं, ताकि सभी तरफ बैटर की परत लग जाए। छवि: एआई एक नॉन-स्टिक तवा या पैन गर्म करें और उस पर थोड़ा सा तेल डालें। अब ब्रेड पकौड़े को दोनों तरफ से सुनहरा और कुरकुरा होने तक सेंक लें। तैयार है आपका परमाणु ऊर्जा संयंत्र और हाई प्रोटीन मूंग दाल ब्रेड पकौड़ा। छवि: एआई इसे हरी चटनी या टमाटर सॉस के साथ गर्मागर्म सर्व करें। दाल को ज्यादा महीन न पीसें, इससे पकौड़े ज्यादा कुरकुरे। अगर आलू की जगह पनीर की स्टफिंग का इस्तेमाल किया जाएगा तो प्रोटीन की मात्रा और बढ़ जाएगी। छवि: एआई डीप फ्राई करने की बजाय टीवी पर कम तेल बनाने से यह सबसे ज्यादा बनती है। स्वाद बढ़ाने के लिए बैटर में थोड़ा सा गरम मसाला भी मिला सकते हैं. छवि: एआई अगर आप स्वाद के साथ सेहत का भी ध्यान रखना चाहते हैं, तो यह मूंग दाल ब्रेड पकौड़ा रेसिपी जरूर आजमाएं। यह बच्चा और बड़ा सभी को बेहद पसंद आएगा। छवि: सोशल मीडिया

फिल्म 'उत्तर दा पुत्तर' का नया पोस्टर रिलीज:अन्नू कपूर की फिल्म में किस्मत या कर्म? हल्के-फुल्के अंदाज में बड़ा सवाल उठाया

फिल्म 'उत्तर दा पुत्तर' का नया पोस्टर रिलीज:अन्नू कपूर की फिल्म में किस्मत या कर्म? हल्के-फुल्के अंदाज में बड़ा सवाल उठाया

हाल ही में टीजर रिलीज के बाद चर्चा में आई फिल्म ‘उत्तर दा पुत्तर’ का नया पोस्टर सामने आया है। पोस्टर फिल्म की अनोखी दुनिया और अलग अंदाज की झलक देता है। इसके जरिए मेकर्स ने दर्शकों की उत्सुकता बढ़ाने की कोशिश की है। पोस्टर में अभिनेता अन्नू कपूर अलग अंदाज में नजर आ रहे हैं। वह एक बड़े वास्तु-प्रेरित चक्र के ऊपर रखी कमोड सीट पर बैठे दिखाई दे रहे हैं। फिल्म की तरह पोस्टर का विजुअल भी हटकर और व्यंग्यात्मक है। इसमें भाग्य, दिशा और रोजमर्रा की उलझनों को हल्के-फुल्के अंदाज में दिखाया गया है। फिल्म की टैगलाइन ‘करम बड़े या किस्मत?’ कहानी के मूल विचार को सामने लाती है। यह सवाल उठाती है कि इंसान की जिंदगी फैसले और कर्म तय करते हैं या किस्मत उसकी दिशा बदलती है। पोस्टर में मौजूद बाकी किरदार भी कहानी के दिलचस्प मोड़ों की झलक देते हैं। फिल्म में अन्नू कपूर के साथ रुखसार रहमान, बृजेंद्र काला, पवन मल्होत्रा, इश्तियाक खान, जीवेशु अहलूवालिया, राजेंद्र सेठी, सुमित गुलाटी और नितिन अरोड़ा अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे। फिल्म का निर्माण संदीप कपूर और प्रिया कपूर ने प्रोमोडोम मोशन पिक्चर्स के बैनर तले किया है। कहानी संदीप कपूर ने लिखी है, जबकि निर्देशन रविंदर सिवाच ने किया है। पोस्टर को लेकर निर्माता संदीप कपूर ने कहा, “हम चाहते थे कि पोस्टर फिल्म की असली पहचान को सामने लाए। यह मजेदार, थोड़ा अलग और दर्शकों में जिज्ञासा पैदा करने वाला है। फिल्म दिखाती है कि लोग अक्सर अपने सवालों के जवाब बाहर ढूंढ़ते हैं, जबकि जिंदगी उन्हें अपने तरीके से नई सीख देती रहती है।”

फिल्म 'उत्तर दा पुत्तर' का नया पोस्टर रिलीज:अन्नू कपूर की फिल्म में किस्मत या कर्म? हल्के-फुल्के अंदाज में बड़ा सवाल उठाया

फिल्म 'उत्तर दा पुत्तर' का नया पोस्टर रिलीज:अन्नू कपूर की फिल्म में किस्मत या कर्म? हल्के-फुल्के अंदाज में बड़ा सवाल उठाया

हाल ही में टीजर रिलीज के बाद चर्चा में आई फिल्म ‘उत्तर दा पुत्तर’ का नया पोस्टर सामने आया है। पोस्टर फिल्म की अनोखी दुनिया और अलग अंदाज की झलक देता है। इसके जरिए मेकर्स ने दर्शकों की उत्सुकता बढ़ाने की कोशिश की है। पोस्टर में अभिनेता अन्नू कपूर अलग अंदाज में नजर आ रहे हैं। वह एक बड़े वास्तु-प्रेरित चक्र के ऊपर रखी कमोड सीट पर बैठे दिखाई दे रहे हैं। फिल्म की तरह पोस्टर का विजुअल भी हटकर और व्यंग्यात्मक है। इसमें भाग्य, दिशा और रोजमर्रा की उलझनों को हल्के-फुल्के अंदाज में दिखाया गया है। फिल्म की टैगलाइन ‘करम बड़े या किस्मत?’ कहानी के मूल विचार को सामने लाती है। यह सवाल उठाती है कि इंसान की जिंदगी फैसले और कर्म तय करते हैं या किस्मत उसकी दिशा बदलती है। पोस्टर में मौजूद बाकी किरदार भी कहानी के दिलचस्प मोड़ों की झलक देते हैं। फिल्म में अन्नू कपूर के साथ रुखसार रहमान, बृजेंद्र काला, पवन मल्होत्रा, इश्तियाक खान, जीवेशु अहलूवालिया, राजेंद्र सेठी, सुमित गुलाटी और नितिन अरोड़ा अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे। फिल्म का निर्माण संदीप कपूर और प्रिया कपूर ने प्रोमोडोम मोशन पिक्चर्स के बैनर तले किया है। कहानी संदीप कपूर ने लिखी है, जबकि निर्देशन रविंदर सिवाच ने किया है। पोस्टर को लेकर निर्माता संदीप कपूर ने कहा, “हम चाहते थे कि पोस्टर फिल्म की असली पहचान को सामने लाए। यह मजेदार, थोड़ा अलग और दर्शकों में जिज्ञासा पैदा करने वाला है। फिल्म दिखाती है कि लोग अक्सर अपने सवालों के जवाब बाहर ढूंढ़ते हैं, जबकि जिंदगी उन्हें अपने तरीके से नई सीख देती रहती है।”

अविष्का के शतक से श्रीलंका-ए ट्राई सीरीज के फाइनल में:अफगानिस्तान को 103 रन से हराया; 21 जून को भारत से मुकाबला

अविष्का के शतक से श्रीलंका-ए ट्राई सीरीज के फाइनल में:अफगानिस्तान को 103 रन से हराया; 21 जून को भारत से मुकाबला

अविष्का फर्नांडो के शतक से श्रीलंका-ए वनडे ट्राई सीरीज के फाइनल में पहुंच गया है। टीम ने दांबुला में अफगानिस्तान-ए को 103 रन से हरा दिया। 21 जून को इसी मैदान भारत और श्रीलंका के बीच फाइनल खेला जाएगा। शुक्रवार को अफगानिस्तान-ए ने टॉस जीतकर गेंदबाजी चुनी। श्रीलंका-ए ने 50 ओवर 322/8 का स्कोर बनाया। जवाब में अफगानिस्तान-ए की टीम 42.5 ओवर में 219 रन पर सिमट गई। श्रीलंका-ए की जीत के हीरो अविष्का फर्नांडो रहे। उन्होंने 97 गेंदों पर 110 रन की पारी खेली। 13 चौके और एक छक्का भी लगाया। गेंदबाजी में दुलाज समुधिता ने 25 रन देकर 5 विकेट झटके। कुगाथस मथुलान ने 3 विकेट लिए। अविष्का को उनकी शतकीय पारी के लिए प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया। डिकवेला और अविष्का ने बड़े स्कोर की नींव रखी टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी श्रीलंका-ए को निरोशन डिकवेला और अविष्का फर्नांडो ने तेज शुरुआत दिलाई। दोनों ने पहले विकेट के लिए 133 रन जोड़कर अफगानिस्तान के गेंदबाजों को दबाव में ला दिया। डिकवेला ने 54 गेंदों पर 66 रन बनाए। पारी में 12 चौके भी शामिल रहे। डिकवेला के आउट होने के बाद भी अविष्का ने रन गति बनाए रखी। उन्होंने नुवानिदु फर्नांडो (45) के साथ दूसरे विकेट के लिए 93 रन की साझेदारी कर टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया। अविष्का ने 97 गेंदों पर 110 रन की पारी खेली और 35वें ओवर में आउट हुए। लोअर ऑर्डर ने फिनिश किया अविष्का के आउट होने के बाद रविंदु फर्नांडो ने 18 गेंदों पर 25 रन। वहीं वनुजा साहन ने 16 गेंदों में 19 रन बनाकर टीम को गे बढ़ाया। आखिरी ओवरों में अफगानिस्तान के गेंदबाज रन रोकने में नाकाम रहे और श्रीलंका-ए ने 50 ओवर में 322/8 का बड़ा स्कोर खड़ा कर दिया। अफगानिस्तान की ओर से फरीदून दावूदजई सबसे सफल गेंदबाज रहे। उन्होंने 10 ओवर में 60 रन देकर 4 विकेट लिए। फारमनुल्लाह सफी ने 3 विकेट हासिल किए। समुधिता के शुरुआती झटकों से बिखरा अफगानिस्तान 323 रन का पीछा करने उतरी अफगानिस्तान-ए की शुरुआत बेहद खराब रही। कप्तान इमरान मीर पहली ही गेंद पर खाता खोले बिना आउट हो गए। नूर उल रहमान भी बिना रन बनाए पवेलियन लौट गए। दुलाज समुधिता ने शुरुआती ओवरों में दो बड़े झटके देकर अफगानिस्तान को बैकफुट पर धकेल दिया। हसन ईसाखिल ने एक छोर संभालते हुए संघर्ष जरूर किया। उन्होंने 78 गेंदों पर 74 रन बनाए और बहीर शाह (35) के साथ चौथे विकेट के लिए 75 रन जोड़े। दोनों बल्लेबाजों ने टीम को मुकाबले में बनाए रखने की कोशिश की, लेकिन विकेट गिरते रहे। सफी को साथ नहीं मिला मध्यक्रम में फारमनुल्लाह सफी ने तेज बल्लेबाजी करते हुए 39 गेंदों पर 43 रन बनाए और कुछ समय के लिए श्रीलंका की चिंता बढ़ाई। हालांकि दूसरे छोर से उन्हें कोई बड़ा साथ नहीं मिला। समुधिता और मथुलान ने लगातार विकेट निकालकर अफगानिस्तान की वापसी की उम्मीद खत्म कर दी। समुधिता ने 6.5 ओवर में सिर्फ 25 रन देकर 5 विकेट लिए, जबकि मथुलान ने 38 रन देकर 3 विकेट चटकाए। अफगानिस्तान-ए की पूरी टीम 42.5 ओवर में 219 रन पर सिमट गई और श्रीलंका-ए ने 103 रन से जीत दर्ज की।

अविष्का के शतक से श्रीलंका-ए ट्राई सीरीज के फाइनल में:अफगानिस्तान को 103 रन से हराया; 21 जून को भारत से मुकाबला

अविष्का के शतक से श्रीलंका-ए ट्राई सीरीज के फाइनल में:अफगानिस्तान को 103 रन से हराया; 21 जून को भारत से मुकाबला

अविष्का फर्नांडो के शतक से श्रीलंका-ए वनडे ट्राई सीरीज के फाइनल में पहुंच गया है। टीम ने दांबुला में अफगानिस्तान-ए को 103 रन से हरा दिया। 21 जून को इसी मैदान भारत और श्रीलंका के बीच फाइनल खेला जाएगा। शुक्रवार को अफगानिस्तान-ए ने टॉस जीतकर गेंदबाजी चुनी। श्रीलंका-ए ने 50 ओवर 322/8 का स्कोर बनाया। जवाब में अफगानिस्तान-ए की टीम 42.5 ओवर में 219 रन पर सिमट गई। श्रीलंका-ए की जीत के हीरो अविष्का फर्नांडो रहे। उन्होंने 97 गेंदों पर 110 रन की पारी खेली। 13 चौके और एक छक्का भी लगाया। गेंदबाजी में दुलाज समुधिता ने 25 रन देकर 5 विकेट झटके। कुगाथस मथुलान ने 3 विकेट लिए। अविष्का को उनकी शतकीय पारी के लिए प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया। डिकवेला और अविष्का ने बड़े स्कोर की नींव रखी टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी श्रीलंका-ए को निरोशन डिकवेला और अविष्का फर्नांडो ने तेज शुरुआत दिलाई। दोनों ने पहले विकेट के लिए 133 रन जोड़कर अफगानिस्तान के गेंदबाजों को दबाव में ला दिया। डिकवेला ने 54 गेंदों पर 66 रन बनाए। पारी में 12 चौके भी शामिल रहे। डिकवेला के आउट होने के बाद भी अविष्का ने रन गति बनाए रखी। उन्होंने नुवानिदु फर्नांडो (45) के साथ दूसरे विकेट के लिए 93 रन की साझेदारी कर टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया। अविष्का ने 97 गेंदों पर 110 रन की पारी खेली और 35वें ओवर में आउट हुए। लोअर ऑर्डर ने फिनिश किया अविष्का के आउट होने के बाद रविंदु फर्नांडो ने 18 गेंदों पर 25 रन। वहीं वनुजा साहन ने 16 गेंदों में 19 रन बनाकर टीम को गे बढ़ाया। आखिरी ओवरों में अफगानिस्तान के गेंदबाज रन रोकने में नाकाम रहे और श्रीलंका-ए ने 50 ओवर में 322/8 का बड़ा स्कोर खड़ा कर दिया। अफगानिस्तान की ओर से फरीदून दावूदजई सबसे सफल गेंदबाज रहे। उन्होंने 10 ओवर में 60 रन देकर 4 विकेट लिए। फारमनुल्लाह सफी ने 3 विकेट हासिल किए। समुधिता के शुरुआती झटकों से बिखरा अफगानिस्तान 323 रन का पीछा करने उतरी अफगानिस्तान-ए की शुरुआत बेहद खराब रही। कप्तान इमरान मीर पहली ही गेंद पर खाता खोले बिना आउट हो गए। नूर उल रहमान भी बिना रन बनाए पवेलियन लौट गए। दुलाज समुधिता ने शुरुआती ओवरों में दो बड़े झटके देकर अफगानिस्तान को बैकफुट पर धकेल दिया। हसन ईसाखिल ने एक छोर संभालते हुए संघर्ष जरूर किया। उन्होंने 78 गेंदों पर 74 रन बनाए और बहीर शाह (35) के साथ चौथे विकेट के लिए 75 रन जोड़े। दोनों बल्लेबाजों ने टीम को मुकाबले में बनाए रखने की कोशिश की, लेकिन विकेट गिरते रहे। सफी को साथ नहीं मिला मध्यक्रम में फारमनुल्लाह सफी ने तेज बल्लेबाजी करते हुए 39 गेंदों पर 43 रन बनाए और कुछ समय के लिए श्रीलंका की चिंता बढ़ाई। हालांकि दूसरे छोर से उन्हें कोई बड़ा साथ नहीं मिला। समुधिता और मथुलान ने लगातार विकेट निकालकर अफगानिस्तान की वापसी की उम्मीद खत्म कर दी। समुधिता ने 6.5 ओवर में सिर्फ 25 रन देकर 5 विकेट लिए, जबकि मथुलान ने 38 रन देकर 3 विकेट चटकाए। अफगानिस्तान-ए की पूरी टीम 42.5 ओवर में 219 रन पर सिमट गई और श्रीलंका-ए ने 103 रन से जीत दर्ज की।

'भारत भाग्य विधाता’ में आतंक नहीं, नर्सों का साहस दिखाया:मनोज तापड़िया बोले- स्क्रिप्ट सुनते ही कंगना ने हामी भरी; विज्ञापन का सफर छोड़ बनाई फिल्म

'भारत भाग्य विधाता’ में आतंक नहीं, नर्सों का साहस दिखाया:मनोज तापड़िया बोले- स्क्रिप्ट सुनते ही कंगना ने हामी भरी; विज्ञापन का सफर छोड़ बनाई फिल्म

विज्ञापन जगत में 27 साल का लंबा सफर तय करने के बाद निर्देशक मनोज तापड़िया ने फिल्म ‘भारत भाग्य विधाता’ से सिनेमाई पर्दे पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। यह फिल्म 26/11 मुंबई हमले के दौरान कामा अस्पताल में नर्सों और स्टाफ द्वारा दिखाए गए अभूतपूर्व साहस की उस अनकही कहानी को बयां करती है, जो अब तक आम जनता के सामने नहीं आ पाई थी। फिल्म की रिलीज के बाद मनोज तापड़िया ने इसके निर्माण, कंगना रनोट के साथ काम करने और फिल्म की गहरी रिसर्च से जुड़े कई दिलचस्प अनुभव साझा किए। न्यूज आर्टिकल से मिला आइडिया, पर्दे पर उतारा साहस मनोज तापड़िया खुद को यथार्थवाद (रियलिज्म) का फिल्मकार मानते हैं। उनका कहना है कि इस फिल्म का विचार किसी काल्पनिक कहानी से नहीं, बल्कि एक वास्तविक घटना से आया था। 26/11 हमले के दौरान वे खुद मुंबई में ही थे। हमले के कुछ समय बाद उन्होंने कामा अस्पताल से जुड़ी एक छोटी सी खबर पढ़ी, जिसने उनके दिल को छू लिया। फिल्म में आतंक के खौफ से ज्यादा इंसानी जज्बे को प्राथमिकता दी गई है। मनोज बताते हैं: “मेरा मकसद सिर्फ आतंकवादी हमला या गोलियों की गूंज दिखाना नहीं था, बल्कि मैं उस रात अस्पताल के भीतर मौजूद लोगों का मानसिक तनाव और उनका अनुभव दिखाना चाहता था। अगर सिर्फ हमला दिखाता तो वह एक घटना बनकर रह जाती, लेकिन जब दर्शक किरदारों के दर्द से जुड़ते हैं, तो फिल्म सीधे दिल पर असर करती है।” इस पूरी घटना में मनोज को जिस बात ने सबसे ज्यादा झकझोरा, वह था नर्सों का निहत्था साहस। जिन महिलाओं के पास आत्मरक्षा के लिए एक लाठी तक नहीं थी, उन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर सैकड़ों मरीजों को सुरक्षित बचाया। वे चाहते तो पिछले दरवाजे से भाग सकते थे, लेकिन वे डटे रहे। यही इस फिल्म की असली आत्मा है, जिसे नर्सों के दृष्टिकोण से पर्दे पर उतारा गया है। बिना स्टार को सोचे लिखी कहानी, कंगना का शार्प स्क्रिप्ट सेंस फिल्मों के लेखन को लेकर मनोज का एक सख्त नियम है वे कभी भी किसी स्टार को ध्यान में रखकर स्क्रिप्ट नहीं लिखते। उनका मानना है कि पहले कहानी और संवाद पूरी तरह तैयार होने चाहिए, उसके बाद ही किरदारों के लिए सही कलाकारों का चयन होना चाहिए। अगर किसी स्टार को सोचकर लिखा जाए और वह मना कर दे, तो पूरी कहानी प्रभावित होती है। ‘भारत भाग्य विधाता’ लिखते समय भी उनके दिमाग में कोई नाम नहीं था। जब स्क्रिप्ट पूरी हुई, तब कास्टिंग डायरेक्टर मुकेश छाबड़ा के जरिए यह कहानी कंगना रनोट तक पहुंची। मनोज के मुताबिक, उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वे इतनी आसानी से कंगना तक पहुंच पाएंगे। लेकिन कंगना का स्क्रिप्ट सेंस बेहद तेज है; उन्होंने कहानी सुनते ही इसके विजन को समझा और तुरंत फिल्म के लिए हामी भर दी। कंगना के आने के बाद फिल्म का स्केल बड़ा हुआ और निर्माता शैलेश सिंह व जयंतीलाल गड़ा भी इस प्रोजेक्ट से जुड़े। सेट पर सभी को सुझाव देने की आजादी थी, जिससे दृश्यों को और बेहतर बनाने में मदद मिली। 5 घंटे के इंटरव्यू और कोर्ट दस्तावेजों पर टिकी प्रामाणिकता एक वास्तविक और संवेदनशील ऐतिहासिक घटना पर फिल्म बनाना बड़ी चुनौती थी, जिसके लिए विस्तृत रिसर्च की गई। दिलचस्प बात यह है कि मनोज ने खुद सीधे तौर पर पीड़ितों से मुलाकात नहीं की। इसके बजाय, उनकी टीम ने पत्रकारिता बैकग्राउंड के लोगों की मदद से वास्तविक किरदारों के इंटरव्यू रिकॉर्ड किए। राइटिंग टीम ने करीब 5 घंटे का वीडियो और ऑडियो मटेरियल महीनों तक बारीकी से देखा। रिसर्च का मकसद सिर्फ सूखे आंकड़े जुटाना नहीं, बल्कि पीड़ितों के हावभाव और उनके मानवीय पक्ष को समझना था।प्रामाणिकता बनाए रखने के लिए पुलिस रिकॉर्ड, अदालती दस्तावेज और अस्पताल के मूल लेआउट का बारीकी से अध्ययन किया गया। इसी गहरी रिसर्च का नतीजा है कि फिल्म में इस्तेमाल की गई स्थानीय शब्दावली और नर्सों का व्यवहार पूरी तरह वास्तविक नजर आता है। 100 ड्राफ्ट्स की मेहनत और समीक्षकों को जवाब फिल्म की स्क्रिप्टिंग प्रक्रिया बेहद सघन रही। शुरुआती लेखन भले ही दो महीने में पूरा हो गया था, लेकिन मनोज फिल्म की डबिंग खत्म होने तक इसमें बदलाव करते रहे। इसी वजह से फाइनल होने तक स्क्रिप्ट के लगभग 100 ड्राफ्ट तैयार किए गए। तकनीकी रूप से यह फिल्म जितनी सरल दिखती है, इसे शूट करना उतना ही जटिल था। अस्पताल के सीमित स्पेस में लगभग 70 मुख्य और सहायक कलाकारों के साथ समन्वय बिठाना चुनौतीपूर्ण था। बजट और सीमित संसाधनों के कारण पूरी टीम ने महज 35 दिनों के कड़े शेड्यूल में शूटिंग पूरी की। फिल्म रिलीज होने के बाद कुछ समीक्षकों का कहना था कि यह पूरी मुंबई के 26/11 के व्यापक माहौल को नहीं दिखा पाती। इस पर मनोज ने बहुत स्पष्टता से अपना नजरिया रखा। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य कभी भी पूरी मुंबई का हमला दिखाना था ही नहीं; उनका फोकस सिर्फ कामा अस्पताल के भीतर मौजूद नर्सों की मानसिक स्थिति और उस रात के तनाव को दर्शकों तक हूबहू पहुंचाना था। आगे के विजन पर बात करते हुए मनोज ने कहा कि वे भविष्य में भी ऐसी फिल्में बनाना चाहते हैं जो दर्शकों को मनोरंजन के साथ-साथ कुछ सोचने पर भी मजबूर करें।

'भारत भाग्य विधाता’ में आतंक नहीं, नर्सों का साहस दिखाया:मनोज तापड़िया बोले- स्क्रिप्ट सुनते ही कंगना ने हामी भरी; विज्ञापन का सफर छोड़ बनाई फिल्म

'भारत भाग्य विधाता’ में आतंक नहीं, नर्सों का साहस दिखाया:मनोज तापड़िया बोले- स्क्रिप्ट सुनते ही कंगना ने हामी भरी; विज्ञापन का सफर छोड़ बनाई फिल्म

विज्ञापन जगत में 27 साल का लंबा सफर तय करने के बाद निर्देशक मनोज तापड़िया ने फिल्म ‘भारत भाग्य विधाता’ से सिनेमाई पर्दे पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। यह फिल्म 26/11 मुंबई हमले के दौरान कामा अस्पताल में नर्सों और स्टाफ द्वारा दिखाए गए अभूतपूर्व साहस की उस अनकही कहानी को बयां करती है, जो अब तक आम जनता के सामने नहीं आ पाई थी। फिल्म की रिलीज के बाद मनोज तापड़िया ने इसके निर्माण, कंगना रनोट के साथ काम करने और फिल्म की गहरी रिसर्च से जुड़े कई दिलचस्प अनुभव साझा किए। न्यूज आर्टिकल से मिला आइडिया, पर्दे पर उतारा साहस मनोज तापड़िया खुद को यथार्थवाद (रियलिज्म) का फिल्मकार मानते हैं। उनका कहना है कि इस फिल्म का विचार किसी काल्पनिक कहानी से नहीं, बल्कि एक वास्तविक घटना से आया था। 26/11 हमले के दौरान वे खुद मुंबई में ही थे। हमले के कुछ समय बाद उन्होंने कामा अस्पताल से जुड़ी एक छोटी सी खबर पढ़ी, जिसने उनके दिल को छू लिया। फिल्म में आतंक के खौफ से ज्यादा इंसानी जज्बे को प्राथमिकता दी गई है। मनोज बताते हैं: “मेरा मकसद सिर्फ आतंकवादी हमला या गोलियों की गूंज दिखाना नहीं था, बल्कि मैं उस रात अस्पताल के भीतर मौजूद लोगों का मानसिक तनाव और उनका अनुभव दिखाना चाहता था। अगर सिर्फ हमला दिखाता तो वह एक घटना बनकर रह जाती, लेकिन जब दर्शक किरदारों के दर्द से जुड़ते हैं, तो फिल्म सीधे दिल पर असर करती है।” इस पूरी घटना में मनोज को जिस बात ने सबसे ज्यादा झकझोरा, वह था नर्सों का निहत्था साहस। जिन महिलाओं के पास आत्मरक्षा के लिए एक लाठी तक नहीं थी, उन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर सैकड़ों मरीजों को सुरक्षित बचाया। वे चाहते तो पिछले दरवाजे से भाग सकते थे, लेकिन वे डटे रहे। यही इस फिल्म की असली आत्मा है, जिसे नर्सों के दृष्टिकोण से पर्दे पर उतारा गया है। बिना स्टार को सोचे लिखी कहानी, कंगना का शार्प स्क्रिप्ट सेंस फिल्मों के लेखन को लेकर मनोज का एक सख्त नियम है वे कभी भी किसी स्टार को ध्यान में रखकर स्क्रिप्ट नहीं लिखते। उनका मानना है कि पहले कहानी और संवाद पूरी तरह तैयार होने चाहिए, उसके बाद ही किरदारों के लिए सही कलाकारों का चयन होना चाहिए। अगर किसी स्टार को सोचकर लिखा जाए और वह मना कर दे, तो पूरी कहानी प्रभावित होती है। ‘भारत भाग्य विधाता’ लिखते समय भी उनके दिमाग में कोई नाम नहीं था। जब स्क्रिप्ट पूरी हुई, तब कास्टिंग डायरेक्टर मुकेश छाबड़ा के जरिए यह कहानी कंगना रनोट तक पहुंची। मनोज के मुताबिक, उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वे इतनी आसानी से कंगना तक पहुंच पाएंगे। लेकिन कंगना का स्क्रिप्ट सेंस बेहद तेज है; उन्होंने कहानी सुनते ही इसके विजन को समझा और तुरंत फिल्म के लिए हामी भर दी। कंगना के आने के बाद फिल्म का स्केल बड़ा हुआ और निर्माता शैलेश सिंह व जयंतीलाल गड़ा भी इस प्रोजेक्ट से जुड़े। सेट पर सभी को सुझाव देने की आजादी थी, जिससे दृश्यों को और बेहतर बनाने में मदद मिली। 5 घंटे के इंटरव्यू और कोर्ट दस्तावेजों पर टिकी प्रामाणिकता एक वास्तविक और संवेदनशील ऐतिहासिक घटना पर फिल्म बनाना बड़ी चुनौती थी, जिसके लिए विस्तृत रिसर्च की गई। दिलचस्प बात यह है कि मनोज ने खुद सीधे तौर पर पीड़ितों से मुलाकात नहीं की। इसके बजाय, उनकी टीम ने पत्रकारिता बैकग्राउंड के लोगों की मदद से वास्तविक किरदारों के इंटरव्यू रिकॉर्ड किए। राइटिंग टीम ने करीब 5 घंटे का वीडियो और ऑडियो मटेरियल महीनों तक बारीकी से देखा। रिसर्च का मकसद सिर्फ सूखे आंकड़े जुटाना नहीं, बल्कि पीड़ितों के हावभाव और उनके मानवीय पक्ष को समझना था।प्रामाणिकता बनाए रखने के लिए पुलिस रिकॉर्ड, अदालती दस्तावेज और अस्पताल के मूल लेआउट का बारीकी से अध्ययन किया गया। इसी गहरी रिसर्च का नतीजा है कि फिल्म में इस्तेमाल की गई स्थानीय शब्दावली और नर्सों का व्यवहार पूरी तरह वास्तविक नजर आता है। 100 ड्राफ्ट्स की मेहनत और समीक्षकों को जवाब फिल्म की स्क्रिप्टिंग प्रक्रिया बेहद सघन रही। शुरुआती लेखन भले ही दो महीने में पूरा हो गया था, लेकिन मनोज फिल्म की डबिंग खत्म होने तक इसमें बदलाव करते रहे। इसी वजह से फाइनल होने तक स्क्रिप्ट के लगभग 100 ड्राफ्ट तैयार किए गए। तकनीकी रूप से यह फिल्म जितनी सरल दिखती है, इसे शूट करना उतना ही जटिल था। अस्पताल के सीमित स्पेस में लगभग 70 मुख्य और सहायक कलाकारों के साथ समन्वय बिठाना चुनौतीपूर्ण था। बजट और सीमित संसाधनों के कारण पूरी टीम ने महज 35 दिनों के कड़े शेड्यूल में शूटिंग पूरी की। फिल्म रिलीज होने के बाद कुछ समीक्षकों का कहना था कि यह पूरी मुंबई के 26/11 के व्यापक माहौल को नहीं दिखा पाती। इस पर मनोज ने बहुत स्पष्टता से अपना नजरिया रखा। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य कभी भी पूरी मुंबई का हमला दिखाना था ही नहीं; उनका फोकस सिर्फ कामा अस्पताल के भीतर मौजूद नर्सों की मानसिक स्थिति और उस रात के तनाव को दर्शकों तक हूबहू पहुंचाना था। आगे के विजन पर बात करते हुए मनोज ने कहा कि वे भविष्य में भी ऐसी फिल्में बनाना चाहते हैं जो दर्शकों को मनोरंजन के साथ-साथ कुछ सोचने पर भी मजबूर करें।

ऑस्ट्रेलिया ने बांग्लादेश को 7 रन से हराया:टी-20 सीरीज में 2-0 की बढ़त ली; रैनशॉ की फिफ्टी, प्लेयर ऑफ द मैच भी बने

ऑस्ट्रेलिया ने बांग्लादेश को 7 रन से हराया:टी-20 सीरीज में 2-0 की बढ़त ली; रैनशॉ की फिफ्टी, प्लेयर ऑफ द मैच भी बने

ऑस्ट्रेलिया ने चटगांव में खेले गए दूसरे टी-20 मुकाबले में बांग्लादेश को 7 रन से हरा दिया। इसी के साथ टीम ने तीन मैचों की सीरीज में 2-0 की अजेय बढ़त बना ली। यह बांग्लादेश की धरती पर ऑस्ट्रेलिया की पहली टी-20 सीरीज जीत भी है। 2021 में उसे 4-1 से हार का सामना करना पड़ा था। ऑस्ट्रेलिया की जीत के हीरो मैट रेनशॉ रहे। उन्होंने 89 रन की नाबाद पारी खेली। रैनशॉ ने चौथे विकेट के लिए टिम डेविड (45 रन, 26 गेंद) के साथ 50 गेंदों में 97 रन की साझेदारी की। शुरुआती छह ओवरों में तीन विकेट गंवाने के बाद इस साझेदारी ने ऑस्ट्रेलिया को 196/5 के स्कोर तक पहुंचाया। जवाब में एक बांग्लादेश का स्कोर 13वें ओवर में 130/2 था। अंतिम ओवरों में लगातार डॉट गेंदों और विकेटों ने मैच का रुख बदल दिया। ऑस्ट्रेलिया के लिए आरोन हार्डी ने सबसे ज्यादा 2 विकेट लिए। तंजीद ने बांग्लादेश को तेज शुरुआत दिलाई 198 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए बांग्लादेश को तंजीद हसन ने तेज शुरुआत दिलाई। उन्होंने पहले ही ओवर से आरोन हार्डी और स्पेंसर जॉनसन पर शॉट लगाए। जॉनसन के दूसरे ओवर में 22 रन बने, जो उनके टी-20 करियर का सबसे महंगा ओवर साबित हुआ। तंजीद का कैच चौथे ओवर में मैट रेनशॉ ने खुद की बॉलिंग में लपका। इसके बाद सौम्य सरकार ने भी तेजी से रन बनाए और पावरप्ले के बाद बांग्लादेश का स्कोर 72/1 पहुंच गया। हालांकि सातवें ओवर में एडम जम्पा ने उन्हें आउट कर ऑस्ट्रेलिया को राहत दिलाई। सैफ-एमोन ने उम्मीद जगाई, लेकिन टीम नहीं जीत सकी सौम्य के आउट होने के बाद परवेज हुसैन एमोन और सैफ हसन ने पारी संभाली। एमोन ने जैम्पा, जोएल डेविस और हार्डी पर लगातार बड़े शॉट लगाए, जबकि सैफ ने भी खुलकर बल्लेबाजी की। दोनों ने तीसरे विकेट के लिए 53 रन जोड़े और टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया। हालांकि यह साझेदारी ज्यादा देर नहीं टिक सकी। हार्डी ने एमोन (36 रन, 22 गेंद) को आउट कराया, जबकि सैफ (42 रन) भी जल्द ही जोएल डेविस का शिकार बन गए। इसके बाद शमीम हुसैन भी नाथन एलिस की गेंद पर आउट हो गए। अंतिम ओवरों में जम्पा, एलिस और हार्डी ने कसी हुई गेंदबाजी की और बांग्लादेश को बाउंड्री लगाने का मौका नहीं दिया। नतीजतन मेजबान टीम 20 ओवर में 189/6 तक ही पहुंच सकी। सैफ ने बेहतरीन कैच लपका पहले बल्लेबाजी करते हुए ऑस्ट्रेलिया की शुरुआत भी अच्छी नहीं रही। जोश इंग्लिस ने पहले ओवर में नसुम अहमद पर चौका और छक्का लगाया, लेकिन अगले ही ओवर में उसी गेंदबाज पर आउट हो गए। इसके बाद नाहिद राणा ने कूपर कोनोली को आउट किया, जहां स्लिप में सैफ हसन ने डाइव लगाकर बेहतरीन कैच पकड़ा। मुस्तफिजुर रहमान ने मिचेल मार्श (20 रन) को भी आउट किया। इस बार भी सैफ ने पीछे भागते हुए बेहतरीन कैच लपका। पावरप्ले के बाद ऑस्ट्रेलिया का स्कोर 44/3 था और बांग्लादेश मैच पर मजबूत पकड़ बनाए हुए था। रेनशॉ और डेविड ने बदला मैच मुश्किल स्थिति में बल्लेबाजी करने उतरे मैट रेनशॉ और टिम डेविड ने सिर्फ सात गेंदों में लय पकड़ ली। डेविड ने नाहिद राना और अब्दुल गफ्फार सकलैन पर लगातार बड़े शॉट लगाए। दसवें ओवर में उन्होंने सकलैन के खिलाफ 19 रन बटोरे। दूसरी ओर रेनशॉ ने लेग स्पिनर रिशाद हुसैन को निशाना बनाया। 13वें ओवर में उन्होंने लगातार तीन छक्के जड़कर सिर्फ 29 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा किया। 55 रन के स्कोर पर उन्हें जीवनदान भी मिला, जब नाहिद उनका कैच नहीं पकड़ सके। डेविड ने भी छक्का लगाकर ऑस्ट्रेलिया को 200 के करीब पहुंचा दिया, लेकिन सकलैन ने उन्हें डीप पॉइंट पर कैच कराकर पवेलियन भेज दिया। इसके बावजूद रेनशॉ अंत तक डटे रहे। अंतिम ओवर में उन्होंने और जोएल डेविस ने मुस्तफिजुर के खिलाफ छक्के लगाकर टीम को 197/5 तक पहुंचाया, जो अंत में जीत के लिए पर्याप्त साबित हुआ।