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India Builds New Oil Reserve

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नई दिल्लीकुछ ही क्षण पहले

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अमेरिका-ईरान युद्ध के दौरान हुए तेल संकट से सबक लेकर केंद्र सरकार ने नया इमरजेंसी ऑयल रिजर्व बनाने का फैसला लिया है। यह इमरजेंसी पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) सरकारी तेल कंपनी ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन (ONGC) बनाएगी।

इकोनॉमिक टाइम्स (ET) की रिपोर्ट के मुताबिक, इस पूरे प्रोजेक्ट में करीब ₹15,000 करोड़ खर्च होने का अनुमान है। यह नया इमरजेंसी तेल भंडार कर्नाटक के मंगलुरु में एक अंडरग्राउंड गुफा में बनाया जाएगा। इसमें 1.75 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) यानी 17.5 लाख मिट्रिक टन तेल रखा जा सकेगा।

वर्तमान में भारत की कुल स्ट्रेटेजिक क्रूड स्टोरेज क्षमता 53.3 लाख मिट्रिक टन है। प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद देश में आपातकालीन स्थिति के लिए तेल रखने की क्षमता करीब एक-तिहाई (33%) बढ़ जाएगी।

₹5000 करोड़ बनाने में और तेल भरने में ₹10,000 करोड़ का खर्च

इस प्रोजेक्ट के खर्च को दो हिस्सों में बांटा गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, ONGC भूमिगत गुफा के निर्माण पर लगभग ₹5,000 करोड़ खर्च करेगी। इसके बाद, मौजूदा बाजार कीमतों और एक्सचेंज रेट के आधार पर इस फैसिलिटी में कच्चा तेल भरने के लिए ₹10,000 करोड़ की जरूरत पड़ सकती है।

फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि ONGC इस बड़े निवेश की वसूली कैसे करेगी। यह भी तय होना बाकी है कि यह फैसिलिटी सिर्फ एक इमरजेंसी रिजर्व के रूप में काम करेगी या राजस्व बढ़ाने के लिए इसमें कॉमर्शियल एक्टिविटीज को भी शामिल किया जाएगा।

पुरानी परंपरा से बड़ा बदलाव, पहले सरकार देती थी पूरा फंड

ONGC का इतने बड़े पैमाने पर खर्च करना भारत में तेल भंडार बनाने के इतिहास में यह एक बहुत बड़ा बदलाव है। अब तक देश के सभी स्ट्रैटिजिक पेट्रोलियम रिजर्व प्रोजेक्ट्स को पूरी तरह सरकार फंड करती थी।

इसका मैनेजमेंट एक विशेष सरकारी संस्था ‘इंडियन स्ट्रैटिजिक पेट्रोलियम रिजर्व्स लिमिटेड’ (ISPRL) करती है।

चीन और अमेरिका के मुकाबले भारत का रिजर्व काफी छोटा

भारत हर दिन लगभग 50 लाख बैरल कच्चे तेल की खपत करता है, जिसके मुकाबले हमारा मौजूदा रणनीतिक भंडार (5.33 मिलियन टन या 39 मिलियन बैरल) बहुत छोटा है।

अमिरिकी एनर्जी इंफॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन (EIA) के साल 2025 के अंत के आंकड़ों के अनुसार, भारत के पास केवल 2.1 करोड़ (21 मिलियन) बैरल का स्ट्रैटिजिक क्रूड रिजर्व था।

इसकी तुलना में चीन के पास 139.7 करोड़ बैरल, अमेरिका के पास 41.3 करोड़ बैरल और जापान के पास 26.3 करोड़ बैरल का विशाल भंडार है।

नॉलेज बॉक्स: पेट्रोलियम रिजर्व आखिर होता क्या है?

पेट्रोलियम रिजर्व मतलब क्रूड ऑयल या पेट्रोल-डीजल का स्टॉक, जिसे कोई देश भविष्य की आपूर्ति के लिए संभालकर रखता है। जैसे घर में आप अनाज स्टोर करते हो, वैसे ही देश तेल का भंडार रखता है। भारत में मौटेतौर पर 2 तरह के पेट्रोलियम रिजर्व हैं…

1. रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (Strategic Reserve)

इसे पेट्रोलियम की तिजोरी की तरह समझिए। इसे सरकार द्वारा इमरजेंसी के लिए रखा गया जाता है। इसका इस्तेमाल आम दिनों में नहीं होता। युद्ध, तेल संकट या सप्लाई रुकने पर ही इसका इस्तेमाल होता है। मंगलोर, पादुर और विशाखापट्टनम में भारत के 3 स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व हैं। जहां जमीन के नीचे बड़े-बड़े गुफानुमा टैंकों में तेल रखा जाता है।

2. व्यावसायिक पेट्रोलियम भंडार (Commercial Reserve)

इंडियन ऑयल जैसी तेल कंपनियां अपने पास कॉमर्शियल स्टॉक रखती हैं, ताकि पेट्रोल पंपों पर सप्लाई बनी रहे। ये रोजमर्रा की जरूरतों के लिए होते हैं। ये ज्यादातर जमीन के ऊपर बड़े टैंकों में रखा जाता है।

———————-

पूरी खबर पढ़ें…

जियो का IPO जल्द, 27 करोड़ शेयर जारी होंगे: SEBI के पास दस्तावेज जमा; मुकेश अंबानी बोले- आकाश, ईशा और अनंत जिम्मेदारी संभालेंगे

रिलायंस इंडस्ट्रीज की 49वीं सालाना बैठक, यानी AGM शुक्रवार, 19 जून को हुई। कंपनी के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने करीब 44 लाख शेयरहोल्डर्स को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि कंपनी यूरोप और अफ्रीका के मार्केट में एंट्री कर रही है। वहीं, कंपनी जियो का IPO भी लाने जा रही है।

अंबानी बताया कि 19 जून को ही SEBI के पास जियो IPO के दस्तावेज जमा कर दिए गए हैं। जियो के 27 करोड़ नए शेयर जारी किए जाएंगे। हालांकि शेयरों की कीमत क्या रहेगी, इसकी जानकारी फिलहाल नहीं दी गई है। पूरी खबर पढ़ें…

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वर्तमान में भारत की कुल स्ट्रेटेजिक क्रूड स्टोरेज क्षमता 53.3 लाख मिट्रिक टन है। प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद देश में आपातकालीन स्थिति के लिए तेल रखने की क्षमता करीब एक-तिहाई (33%) बढ़ जाएगी।

₹5000 करोड़ बनाने में और तेल भरने में ₹10,000 करोड़ का खर्च

इस प्रोजेक्ट के खर्च को दो हिस्सों में बांटा गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, ONGC भूमिगत गुफा के निर्माण पर लगभग ₹5,000 करोड़ खर्च करेगी। इसके बाद, मौजूदा बाजार कीमतों और एक्सचेंज रेट के आधार पर इस फैसिलिटी में कच्चा तेल भरने के लिए ₹10,000 करोड़ की जरूरत पड़ सकती है।

फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि ONGC इस बड़े निवेश की वसूली कैसे करेगी। यह भी तय होना बाकी है कि यह फैसिलिटी सिर्फ एक इमरजेंसी रिजर्व के रूप में काम करेगी या राजस्व बढ़ाने के लिए इसमें कॉमर्शियल एक्टिविटीज को भी शामिल किया जाएगा।

पुरानी परंपरा से बड़ा बदलाव, पहले सरकार देती थी पूरा फंड

ONGC का इतने बड़े पैमाने पर खर्च करना भारत में तेल भंडार बनाने के इतिहास में यह एक बहुत बड़ा बदलाव है। अब तक देश के सभी स्ट्रैटिजिक पेट्रोलियम रिजर्व प्रोजेक्ट्स को पूरी तरह सरकार फंड करती थी।

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अमिरिकी एनर्जी इंफॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन (EIA) के साल 2025 के अंत के आंकड़ों के अनुसार, भारत के पास केवल 2.1 करोड़ (21 मिलियन) बैरल का स्ट्रैटिजिक क्रूड रिजर्व था।

इसकी तुलना में चीन के पास 139.7 करोड़ बैरल, अमेरिका के पास 41.3 करोड़ बैरल और जापान के पास 26.3 करोड़ बैरल का विशाल भंडार है।

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1. रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (Strategic Reserve)

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2. व्यावसायिक पेट्रोलियम भंडार (Commercial Reserve)

इंडियन ऑयल जैसी तेल कंपनियां अपने पास कॉमर्शियल स्टॉक रखती हैं, ताकि पेट्रोल पंपों पर सप्लाई बनी रहे। ये रोजमर्रा की जरूरतों के लिए होते हैं। ये ज्यादातर जमीन के ऊपर बड़े टैंकों में रखा जाता है।

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अंबानी बताया कि 19 जून को ही SEBI के पास जियो IPO के दस्तावेज जमा कर दिए गए हैं। जियो के 27 करोड़ नए शेयर जारी किए जाएंगे। हालांकि शेयरों की कीमत क्या रहेगी, इसकी जानकारी फिलहाल नहीं दी गई है। पूरी खबर पढ़ें…

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