Tuesday, 04 Aug 2026 | 05:05 PM

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गौरी स्प्रैट से रजिस्टर्ड मैरिज करेंगे आमिर खान:घर में होगी प्राइवेट सेरेमनी, करीबी दोस्त-रिश्तेदार शामिल होंगे, काम से ब्रेक लिया; कहा- इसे निजी रखना चाहते हैं

गौरी स्प्रैट से रजिस्टर्ड मैरिज करेंगे आमिर खान:घर में होगी प्राइवेट सेरेमनी, करीबी दोस्त-रिश्तेदार शामिल होंगे, काम से ब्रेक लिया; कहा- इसे निजी रखना चाहते हैं

मिस्टर परफेक्शनिस्ट आमिर खान, 61 साल की उम्र में गर्लफ्रेंड गौरी स्प्रैट से तीसरी शादी करने वाले हैं। ये शादी 5 जुलाई को होगी, जिसमें आमिर और गौरी के चंद रिश्तेदारों के अलावा महज करीबी दोस्त ही शामिल होने वाले हैं। शादी के लिए आमिर खान फिल्मों से ब्रेक लेने वाले हैं। शादी पर बात करते हुए आमिर खान ने डेकन क्रॉनिकल से कहा, “यह घर पर होने वाली एक बेहद सिंपल रजिस्टर्ड मैरिज होगी, जिसमें सिर्फ दोनों परिवारों के सदस्य और कुछ बेहद करीबी दोस्त शामिल होंगे। हम दोनों इस समारोह को बहुत सादा और निजी रखना चाहते हैं।” 5 जुलाई को होगी शादी आमिर खान ने पिछले साल 60वें जन्मदिन के मौके पर मीडिया के सामने गौरी स्प्रैट को इंट्रोड्यूस किया था। इसके बाद से ही दोनों कई मौकों पर साथ स्पॉट होते रहते हैं। बीते महीने उनकी शादी की खबरें चर्चा में रहीं। आमिर ने वैराइटी इंडिया को दिए इंटरव्यू में शादी की खबरों पर मुहर लगाई थी। उन्होंने कहा था, ‘मैं इस समय अमेरिका में हूं। शादी की खबर सही है। हमारी शादी 5 जुलाई को होगी।’ उन्होंने आगे कहा था, ‘गौरी और मैं एक-दूसरे को लेकर सीरियस हैं। हम एक मजबूत रिश्ते में हैं। मेरे दिल में तो मैं खुद को पहले से ही उनका पति मानता हूं। अब इस रिश्ते को शादी का नाम देना हमारे साथ की एक स्वाभाविक अगली शुरुआत है।’ पहले कहा था- बिना शादी के ही खुश हूं शादी की कन्फर्मेशन देने के कुछ समय पहले ही आमिर ने एक इंटरव्यू में कहा था कि गौरी स्प्रैट से शादी करना उनकी प्रायोरिटी नहीं है। वो बिना शादी के ही उनके साथ खुश हैं। आमिर ने कहा था- मैं भाग्यशाली हूं जो गौरी मुझे मिलीं मई 2026 में NBT को दिए इंटरव्यू में आमिर ने गौरी के साथ अपने रिश्ते को लेकर कहा था, ‘मैं बहुत भाग्यशाली हूं कि मुझे गौरी मिलीं और हमारा रिश्ता शुरू हुआ। वह बेहतरीन हैं और उनके साथ मुझे बहुत शांति मिलती है। हालांकि रीना दत्ता और किरण राव के साथ भी मेरा रिश्ता बहुत गहरा था, लेकिन चीजें आगे नहीं बढ़ पाईं। मैं खुद को खुशनसीब मानता हूं कि गौरी मेरी जिंदगी में आईं। मुझे लगता है, अब जाकर मैं मुकम्मल हुआ हूं।’ देखिए आमिर खान और गौरी स्प्रैट की चुनिंदा झलक- आमिर की पिछली शादियों से जुड़े ये किस्से भी पढ़िए- रोज खिड़की से पहली पत्नी रीना को निहारते थे आमिर आमिर ने साल 1986 में रीना दत्त से शादी की थी। ये एक लव मैरिज थी। शादी से पहले रीना और आमिर पड़ोसी थे। आमिर हर दिन सामने खिड़की पर खड़ी रीना को निहारा करते थे। उन्हें लगता था कि रीना भी उन्हें पसंद करती हैं, इसलिए खिड़की पर हर रोज आती हैं, मगर ऐसा नहीं था। वो मौसम का मजा लेने के लिए खिड़की पर आया करती थीं। रीना को इम्प्रेस करने के लिए खून से लिखा प्यार भरा खत एक दिन आमिर ने हिम्मत जुटा कर रीना से अपने दिल की बात कह ही दी, लेकिन रीना ने ना में जवाब देकर उनका दिल तोड़ दिया। उनकी ना से आमिर का दिल तो टूटा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। इसके बाद भी वो रीना को इम्प्रेस करने की हर मुमकिन कोशिश करते रहे। इसके बावजूद हर बार जवाब में ना ही मिलता। एक दिन आमिर ने अपने खून से रीना को प्यार भरा खत लिख दिया। रीना ने लेटर देख उनसे कहा कि वो लाइफ में कभी ऐसी हरकत ना करें। आमिर को भी बाद में अपनी गलती का एहसास हुआ। इस रवैये के चलते उन्होंने रीना से दूरी बना ली और मान लिया कि उनका पहला प्यार अधूरा ही रहेगा। इस बात को कुछ ही दिन बीते थे कि अचानक से हुई एक मुलाकात के दौरान रीना ने उनसे कह दिया कि वो भी उन्हें पसंद करती हैं। फिर इस तरह आमिर का पहला प्यार मुकम्मल हुआ। गुपचुप शादी की, खर्च सिर्फ 10 रुपए था जब आमिर और रीना ने एक दूसरे को डेट करना शुरू किया, तब आमिर 20 साल के थे और रीना 18 साल की। इस कारण तुरंत शादी करना मुमकिन नहीं था और आमिर के बालिग होने तक दोनों को इंतजार करना पड़ा। उम्र के अलावा अलग-अलग धर्म भी शादी में बड़ी रुकावट था। दोनों ने 18 अप्रैल 1986 को गुपचुप शादी कर ली। 21 साल के आमिर और 19 साल की रीना ने तीन गवाहों की मौजूदगी में कोर्ट मैरिज की थी। दिलचस्प बात यह है कि इस शादी में सिर्फ 10 रुपए का खर्च आया था। शादी के 16 साल बाद लिया था रीना से तलाक शादी के कुछ समय बाद दोनों एक बेटे जुनैद और बेटी आयरा खान के पेरेंट्स बने, मगर इस खूबसूरत रिश्ते का अंत हो गया। शादी के 16 साल बाद दोनों ने तलाक ले लिया। हालांकि तलाक के बाद भी रीना और आमिर अच्छा बाॅन्ड शेयर करते हैं। आमिर ने कई इंटरव्यूज में इस बात पर जोर दिया है कि आज भी रीना उनके परिवार का अहम हिस्सा हैं और हमेशा रहेंगी। फिल्म लगान के सेट पर मिली थीं किरण राव फिल्म लगान की शूटिंग के वक्त रीना और आमिर का रिश्ता बुरे दौर से गुजर रहा था। इस फिल्म की शूटिंग खत्म हो जाने के बाद उनका तलाक हुआ था। इसी फिल्म के सेट पर पहली बार आमिर की मुलाकात किरण राव से हुई थी। वो फिल्म में बतौर AD काम कर रही थीं। आमिर के लिए यह तलाक लेना आसान नहीं था। वो इन दिनों बहुत परेशान रहते थे। इस बुरे वक्त में किरण ने एक दोस्त के तौर पर उनकी खूब मदद की थी। इन दिनों के बारे में आमिर ने एक इंटरव्यू में कहा था- सदमे के उस दौर में एक दिन किरण का फोन आया और मैंने उनसे आधे घंटे तक फोन पर बात की। जब मैंने फोन रखा तो कहा, ‘हे भगवान! जब मैं उनसे बात करता हूं तो मुझे बहुत खुशी होती है।’ हालांकि तब तक दोनों एक-दूसरे को दोस्त मान रहे थे। दोनों में नजदीकियां आमिर और रीना के तलाक के कुछ समय बाद शुरू हुईं। आमिर को एक बार

Restaurant lets customers cook their own Korean noodles, costing half the cost

Restaurant lets customers cook their own Korean noodles, costing half the cost

Hindi News Business Restaurant Lets Customers Cook Their Own Korean Noodles, Costing Half The Cost नई दिल्ली9 मिनट पहले कॉपी लिंक एआई जनरेटेड फोटो । भारत के फूड मार्केट में कोरियन नूडल्स यानी राम्यन का क्रेज एक नए बिजनेस मॉडल में बदल रहा है। ‘सेल्फ-सर्विस राम्यन बार’ में ग्राहक पसंद के नूडल्स का पैकेट चुनते हैं, उसमें अंडा, चीज या चिकन जैसी टॉपिंग्स और मसाले डालकर काउंटर पर खुद पकाते हैं। सुस्त मांग और बढ़ती लागत से जूझ रहे रेस्टोरेंट मालिकों के लिए यह कम निवेश, कम स्टाफ और ज्यादा मार्जिन वाला मॉडल बन रहा है। वहीं, कोरियन नूडल्स कंपनियों को भी सुपरमार्केट से बाहर निकलकर सीधे ग्राहकों तक पहुंचने का एक नया और बड़ा बाजार मिल रहा है। चेन्नई के म्योन हब के फाउंडर विनोद कुमार के मुताबिक, एक सेल्फ-सर्विस राम्यन बार शुरू करने में करीब ₹20 लाख का खर्च आता है। यह बड़े किचन, भारी इंफ्रास्ट्रक्चर और स्पेशल शेफ वाले पारंपरिक रेस्टोरेंट्स के मुकाबले काफी कम है। चूंकि यह पूरी तरह पैकेज्ड फूड है, इसलिए खाना खराब होने का रिस्क नहीं रहता और कम स्टाफ में भी काम चल जाता है। इसी फायदे को देखते हुए दक्षिण कोरिया की सबसे बड़ी नूडल्स कंपनियों में से एक नोंगशिम ने भारत में रिलायंस रिटेल के फ्रेशपिक के साथ हाथ मिलाया है। भारत में नोंगशिम के आधिकारिक डिस्ट्रीब्यूटर रामा विजन के डायरेक्टर उदित जैन ने बताया कि ये राम्यन बार ग्राहकों को बिना फुल-सर्विस रेस्टोरेंट गए कम दाम में असली कोरियन स्वाद और कस्टमाइजेशन का मौका दे रहे हैं। ‘बोबा भाई’ के फाउंडर ध्रुव कोहली के अनुसार, जेन जी (युवा) और वर्किंग प्रोफेशनल्स इसके सबसे बड़े ग्राहक हैं जो बार-बार आ रहे हैं। इस बढ़ती मांग का असर अब स्टार्टअप इन्वेस्टमेंट्स पर भी दिख रहा है। गुड़गांव के कोरियन फूड स्टार्टअप गिमी मिची ने इंडियाक्वेशेंट की अगुवाई में 10 लाख डॉलर की सीड फंडिंग जुटाई है। महज छह महीने पहले शुरू हुई इस कंपनी की नेट मासिक बिक्री 1 करोड़ रुपए पार कर गई है और यह हर महीने 60% की दर से बढ़ रही है, जिसकी आधी बिक्री टियर-2 और टियर-3 शहरों से आ रही है। इस ट्रेंड पर वॉव! मोमो के फाउंडर सागर दरयानी ने बताया कि पूरे क्विक सर्विस रेस्टोरेंट (क्यूएसआर) सेक्टर के मेन्यू में अब कोरियन फूड शामिल हो चुका है। उनके खुद के पैकेज्ड कोरियन नूडल्स से हर महीने 1 करोड़ रुपए की कमाई हो रही है, जबकि उनका कुल नूडल्स बिजनेस ₹2 करोड़ महीना दे रहा है। मार्केट – छोटे शहरों में कोरियन नूडल्स की भारी मांग, कुल नूडल्स बिक्री में 34% शेयर डेटम इंटेलिजेंस की रिपोर्ट के अनुसार क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म ब्लिंकिट पर कुल नूडल्स बिक्री का 34% हिस्सा कोरियन नूडल्स का था। छोटे शहरों में इसकी मांग दिल्ली-एनसीआर के 31% के मुकाबले काफी ज्यादा रही, जिसमें कोच्चि में 45%, देहरादून में 44% और लुधियाना में 41% कोरियन नूडल्स बिके। ब्लिंकिट पर नोंगशिम और साम्यांग ब्रांड्स की हिस्सेदारी एक चौथाई रही। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

FIFA World Cup 2026 becomes a major platform for overseas players

FIFA World Cup 2026 becomes a major platform for overseas players

Hindi News Sports FIFA World Cup 2026 Becomes A Major Platform For Overseas Players चार्लोट हरपुर/ जोशुआ क्लोके. न्यूयॉर्क2 मिनट पहले कॉपी लिंक अपनी टीम में सबसे ज्यादा विदेशी मूल के खिलाड़ी शामिल करने में अल्जीरिया (13) शीर्ष पर है।- फाइल फोटो फीफा वर्ल्ड कप 2026 मैदान के साथ-साथ खिलाड़ियों की नागरिकता और माइग्रेशन के दिलचस्प आंकड़ों के लिए भी चर्चा में है। 48 टीमों के 1,248 खिलाड़ियों में से 292 खिलाड़ी उस देश के लिए नहीं खेल रहे हैं जहां उनका जन्म हुआ था। टूर्नामेंट में केवल 8 टीमें ऐसी हैं जिनमें कोई विदेशी मूल का खिलाड़ी शामिल नहीं है। माइग्रेशन, पुराने औपनिवेशिक संबंधों और फीफा के बदले नियमों ने वर्ल्ड कप की तस्वीर पूरी तरह बदल दी है। आंकड़ों के लिहाज से फ्रांस सबसे आगे है। इस वर्ल्ड कप में फ्रांस में जन्मे 98 खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं, लेकिन इनमें से 76 खिलाड़ी फ्रांस की बजाय अन्य देशों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। फुटबॉल में यह स्थिति नई नहीं है। 1930 के पहले वर्ल्ड कप में अमेरिकी टीम में इंग्लैंड और स्कॉटलैंड में जन्मे खिलाड़ी थे। समय के साथ फीफा ने दोहरी नागरिकता वाले नियमों में कई बदलाव किए। पहले यूथ लेवल पर एक देश के लिए खेलने के बाद टीम नहीं बदल सकते थे, लेकिन 2004 और 2009 में अल्जीरिया की मांग पर नियमों में ढील दी गई। नए नियम के अनुसार, यदि किसी खिलाड़ी ने 21 साल से पहले अधिकतम 3 प्रतिस्पर्धी मैच खेले हैं, तो आखिरी मैच के तीन साल बाद वह अपनी राष्ट्रीय टीम बदल सकता है। इसके अलावा जन्म, माता-पिता या दादा-दादी के जन्मस्थान या संबंधित देश में लगातार पांच साल रहने के आधार पर भी टीम चुनी जा सकती है। जमाल मुसियाला, फोलारिन बालोगन और डेक्लान राइस जैसे खिलाड़ी इसके बड़े उदाहरण हैं। डिएगो कोस्टा ने भी ब्राजील के लिए फ्रेंडली मैच खेलने के बाद स्पेन को चुना था। हालांकि, 2004 में ब्राजील के स्ट्राइकर एल्टन को बिना किसी पारिवारिक संबंध के भारी रकम देकर कतर की नागरिकता देने की बात भी सामने आई थी। इन नियमों के चलते अब फुटबॉल फेडरेशन सही खिलाड़ियों की तलाश के लिए बेहद आधुनिक और अप्रत्याशित तरीके अपना रहे हैं। वे एजेंटों के अलावा लिंक्डइन, वॉट्सऐप और ‘फुटबॉल मैनेजर’ जैसे वीडियो गेम्स के डेटाबेस का सहारा ले रहे हैं। कनाडा के ल्यूक डी फौगरोल्स का चयन पिता द्वारा कोच को भेजे गए लिंक्डइन मैसेज से और अल्फी जोन्स का चयन सौना बाथ में हुई बातचीत से संभव हुआ। ‘फुटबॉल मैनेजर’ गेम से चिली को बेन ब्रेरेटन डियाज मिले। फेडरेशन सीधे परिवारों से भी जुड़ रहे हैं; पोलैंड फुटबॉल एसोसिएशन के अध्यक्ष ने तो न्यूयॉर्क जाकर युवा खिलाड़ी जूलियन हॉल की मां से मुलाकात की और उन्हें पोलैंड की जर्सी भेंट की। विदेशी मूल के खिलाड़ियों की यह होड़ वर्ल्ड कप का एक स्थायी हिस्सा बन चुकी है। अल्जीरिया की टीम में 50% विदेशी मूल के खिलाड़ी अपनी टीम में सबसे ज्यादा विदेशी मूल के खिलाड़ी शामिल करने में अल्जीरिया (13) शीर्ष पर है, जबकि हैती में 12 ऐसे खिलाड़ी हैं। पहली बार खेल रही कुराकाओ की टीम में एक को छोड़कर सभी खिलाड़ी डच मूल के हैं। कतर की टीम में 11 अलग-अलग देशों में जन्मे खिलाड़ी हैं। वहीं, मोरक्को ने तो ब्राजील के खिलाफ मैच के दूसरे हाफ में ऐसे सभी 11 खिलाड़ी उतारे जिनका जन्म मोरक्को के बाहर हुआ था। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

FIFA World Cup 2026 becomes a major platform for overseas players

FIFA World Cup 2026 becomes a major platform for overseas players

Hindi News Sports FIFA World Cup 2026 Becomes A Major Platform For Overseas Players चार्लोट हरपुर/ जोशुआ क्लोके. न्यूयॉर्क18 मिनट पहले कॉपी लिंक अपनी टीम में सबसे ज्यादा विदेशी मूल के खिलाड़ी शामिल करने में अल्जीरिया (13) शीर्ष पर है।- फाइल फोटो फीफा वर्ल्ड कप 2026 मैदान के साथ-साथ खिलाड़ियों की नागरिकता और माइग्रेशन के दिलचस्प आंकड़ों के लिए भी चर्चा में है। 48 टीमों के 1,248 खिलाड़ियों में से 292 खिलाड़ी उस देश के लिए नहीं खेल रहे हैं जहां उनका जन्म हुआ था। टूर्नामेंट में केवल 8 टीमें ऐसी हैं जिनमें कोई विदेशी मूल का खिलाड़ी शामिल नहीं है। माइग्रेशन, पुराने औपनिवेशिक संबंधों और फीफा के बदले नियमों ने वर्ल्ड कप की तस्वीर पूरी तरह बदल दी है। आंकड़ों के लिहाज से फ्रांस सबसे आगे है। इस वर्ल्ड कप में फ्रांस में जन्मे 98 खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं, लेकिन इनमें से 76 खिलाड़ी फ्रांस की बजाय अन्य देशों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। फुटबॉल में यह स्थिति नई नहीं है। 1930 के पहले वर्ल्ड कप में अमेरिकी टीम में इंग्लैंड और स्कॉटलैंड में जन्मे खिलाड़ी थे। समय के साथ फीफा ने दोहरी नागरिकता वाले नियमों में कई बदलाव किए। पहले यूथ लेवल पर एक देश के लिए खेलने के बाद टीम नहीं बदल सकते थे, लेकिन 2004 और 2009 में अल्जीरिया की मांग पर नियमों में ढील दी गई। नए नियम के अनुसार, यदि किसी खिलाड़ी ने 21 साल से पहले अधिकतम 3 प्रतिस्पर्धी मैच खेले हैं, तो आखिरी मैच के तीन साल बाद वह अपनी राष्ट्रीय टीम बदल सकता है। इसके अलावा जन्म, माता-पिता या दादा-दादी के जन्मस्थान या संबंधित देश में लगातार पांच साल रहने के आधार पर भी टीम चुनी जा सकती है। जमाल मुसियाला, फोलारिन बालोगन और डेक्लान राइस जैसे खिलाड़ी इसके बड़े उदाहरण हैं। डिएगो कोस्टा ने भी ब्राजील के लिए फ्रेंडली मैच खेलने के बाद स्पेन को चुना था। हालांकि, 2004 में ब्राजील के स्ट्राइकर एल्टन को बिना किसी पारिवारिक संबंध के भारी रकम देकर कतर की नागरिकता देने की बात भी सामने आई थी। इन नियमों के चलते अब फुटबॉल फेडरेशन सही खिलाड़ियों की तलाश के लिए बेहद आधुनिक और अप्रत्याशित तरीके अपना रहे हैं। वे एजेंटों के अलावा लिंक्डइन, वॉट्सऐप और ‘फुटबॉल मैनेजर’ जैसे वीडियो गेम्स के डेटाबेस का सहारा ले रहे हैं। कनाडा के ल्यूक डी फौगरोल्स का चयन पिता द्वारा कोच को भेजे गए लिंक्डइन मैसेज से और अल्फी जोन्स का चयन सौना बाथ में हुई बातचीत से संभव हुआ। ‘फुटबॉल मैनेजर’ गेम से चिली को बेन ब्रेरेटन डियाज मिले। फेडरेशन सीधे परिवारों से भी जुड़ रहे हैं; पोलैंड फुटबॉल एसोसिएशन के अध्यक्ष ने तो न्यूयॉर्क जाकर युवा खिलाड़ी जूलियन हॉल की मां से मुलाकात की और उन्हें पोलैंड की जर्सी भेंट की। विदेशी मूल के खिलाड़ियों की यह होड़ वर्ल्ड कप का एक स्थायी हिस्सा बन चुकी है। अल्जीरिया की टीम में 50% विदेशी मूल के खिलाड़ी अपनी टीम में सबसे ज्यादा विदेशी मूल के खिलाड़ी शामिल करने में अल्जीरिया (13) शीर्ष पर है, जबकि हैती में 12 ऐसे खिलाड़ी हैं। पहली बार खेल रही कुराकाओ की टीम में एक को छोड़कर सभी खिलाड़ी डच मूल के हैं। कतर की टीम में 11 अलग-अलग देशों में जन्मे खिलाड़ी हैं। वहीं, मोरक्को ने तो ब्राजील के खिलाफ मैच के दूसरे हाफ में ऐसे सभी 11 खिलाड़ी उतारे जिनका जन्म मोरक्को के बाहर हुआ था। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

इम्तियाज अली बुर्का और पर्दा प्रथा के खिलाफ:कहा- महिलाएं जब कहती हैं वो इसमें कंफर्टेबल हैं, तो ये पिछड़े समाज की निशानी, जमकर हुई आलोचना

इम्तियाज अली बुर्का और पर्दा प्रथा के खिलाफ:कहा- महिलाएं जब कहती हैं वो इसमें कंफर्टेबल हैं, तो ये पिछड़े समाज की निशानी, जमकर हुई आलोचना

इन दिनों फिल्म मैं वापस आऊंगा से चर्चा में बने हुए डायरेक्टर इम्तियाज अली ने बुर्का और पर्दा प्रथा पर एक स्ट्रॉन्ग स्टेटमेंट दिया है, जिसके बाद से ही सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है। उनका कहना है कि महिलाओं का ये कहना कि वो बुर्के में सहज हैं, ये एक पिछड़े समाज की निशानी है। हाल ही में अनफिल्टर विद समदीश को पॉडकास्ट में इम्तियाज अली ने कल्चर और समाज पर बात करते हुए कहा है, ‘मुझे ये बड़ा नापसंद है, जब लोग कहें कि मैं बुर्के में कंफर्टेबल हूं, मैं पर्दे में कंफर्टेबल हूं। अगर आपको ऐसा लगता है तो ये एक पिछड़े हुए समाज की निशानी है। ये ठीक नहीं है जब आप कहते हैं कि मैं कंफर्टेबल हूं।’ आगे उन्होंने कहा, ‘इसका मतलब ये है कि आपके दिमाग में इतना विक्टिमाइजेशन हो गया है। मुझे नहीं पता ये कैसे कहना चाहिए। मैं इस बारे में आसपास के लोगों को टोक नहीं रहा या किसी के घर जाकर ये बोलता नहीं हूं। ये वो है जिस पर मैं यकीन करता हूं। अगर कोई कर रहा है तो ठीक है।’ आखिर में इम्तियाज अली ने कहा, ‘मैं आजकल सोच रहा हूं कि मॉडरेट (संतुलित सोच वाले) लोग कहां हैं। आप किसको वोट दोगे, आप कहां हों, ठीक है, आप कहीं भी हो सकते हैं। आज कल सब एक्स्ट्रीम हैं। अगर किसी की सोच नहीं मिलती तो हम उससे नफरत नहीं कर सकते।’ इम्तियाज अली के बयान पर छिड़ी बहस बुर्के पर दिया गया इम्तियाज अली का ये बयान सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर उनकी जमकर आलोचना की जा रही है। कुछ सोशल मीडिया यूजर ने सवाल उठाया है कि इम्तियाज अली खुद एक ऐसे समाज से आते हैं, जहां बुर्का प्रथा है। वहीं कुछ उन्हें पाखंडी कह रहे हैं। एक यूजर ने लिखा है, ‘इम्तियाज अली ने बुर्का/पर्दा की प्रथा को कमजोर, पिछड़ी सोच और समस्याग्रस्त बताया। लेकिन यह समदीश उसका बचाव करते हुए कह रहा है कि अगर किसी समुदाय ने इसे सामान्य मान लिया है, तो हम उस पर सवाल कैसे उठा सकते हैं? इम्तियाज खुद उसी समुदाय से आते हैं। वाह रे। कैसे पाखंडी हैं।’ एक यूजर ने लिखा, “मुसलमानों के सबसे बड़े दुश्मन ये लिबरल लोग हैं, क्योंकि ये उनकी गलत बातों या कमियों की आलोचना करने से बचते हैं।” इम्तियाज की फिल्म को कहा गया एंटी-नेशनल इम्तियाज अली के निर्देशन में बनी फिल्म मैं वापस आऊंगा 12 जून को सिनेमाघरों में रिलीज हुई है। ये फिल्म भारत-पाकिस्तान के बंटवारे की एक अधूरी प्रेम कहानी पर आधारित है, जिसे कई लोग एंटी नेशनल कह रहे हैं। इस पर फिल्म के म्यूजिक कंपोजर एआर रहमान ने भी हंसते हुए रिएक्शन दिया था। दिलजीत दोसांझ, वेदांग रैना, शरवरी वाघ और नसीरुद्दीन शाह स्टारर ये फिल्म रिलीज के पहले हफ्ते 14 करोड़ का कलेक्शन कर चुकी है। फिल्म को पाकिस्तान से मिलीं तारीफें पाकिस्तानी फिल्ममेकर उमर नासिर अली ने इम्तियाज अली की फिल्म मैं वापस आऊंगा की जमकर तारीफ करते हुए इसे एक बेहद खूबसूरत और गहरी भावनात्मक फिल्म बताया है। उमर नासिर के मुताबिक, यह फिल्म उनके दिल के बेहद करीब है क्योंकि वे खुद भी इसी विषय के आसपास एक फिल्म बना रहे हैं। इम्तियाज अली के बारे में-

इम्तियाज अली बुर्का और पर्दा प्रथा के खिलाफ:कहा- महिलाएं जब कहती हैं वो इसमें कंफर्टेबल हैं, तो ये पिछड़े समाज की निशानी, जमकर हुई आलोचना

इम्तियाज अली बुर्का और पर्दा प्रथा के खिलाफ:कहा- महिलाएं जब कहती हैं वो इसमें कंफर्टेबल हैं, तो ये पिछड़े समाज की निशानी, जमकर हुई आलोचना

इन दिनों फिल्म मैं वापस आऊंगा से चर्चा में बने हुए डायरेक्टर इम्तियाज अली ने बुर्का और पर्दा प्रथा पर एक स्ट्रॉन्ग स्टेटमेंट दिया है, जिसके बाद से ही सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है। उनका कहना है कि महिलाओं का ये कहना कि वो बुर्के में सहज हैं, ये एक पिछड़े समाज की निशानी है। हाल ही में अनफिल्टर विद समदीश को पॉडकास्ट में इम्तियाज अली ने कल्चर और समाज पर बात करते हुए कहा है, ‘मुझे ये बड़ा नापसंद है, जब लोग कहें कि मैं बुर्के में कंफर्टेबल हूं, मैं पर्दे में कंफर्टेबल हूं। अगर आपको ऐसा लगता है तो ये एक पिछड़े हुए समाज की निशानी है। ये ठीक नहीं है जब आप कहते हैं कि मैं कंफर्टेबल हूं।’ आगे उन्होंने कहा, ‘इसका मतलब ये है कि आपके दिमाग में इतना विक्टिमाइजेशन हो गया है। मुझे नहीं पता ये कैसे कहना चाहिए। मैं इस बारे में आसपास के लोगों को टोक नहीं रहा या किसी के घर जाकर ये बोलता नहीं हूं। ये वो है जिस पर मैं यकीन करता हूं। अगर कोई कर रहा है तो ठीक है।’ आखिर में इम्तियाज अली ने कहा, ‘मैं आजकल सोच रहा हूं कि मॉडरेट (संतुलित सोच वाले) लोग कहां हैं। आप किसको वोट दोगे, आप कहां हों, ठीक है, आप कहीं भी हो सकते हैं। आज कल सब एक्स्ट्रीम हैं। अगर किसी की सोच नहीं मिलती तो हम उससे नफरत नहीं कर सकते।’ इम्तियाज अली के बयान पर छिड़ी बहस बुर्के पर दिया गया इम्तियाज अली का ये बयान सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर उनकी जमकर आलोचना की जा रही है। कुछ सोशल मीडिया यूजर ने सवाल उठाया है कि इम्तियाज अली खुद एक ऐसे समाज से आते हैं, जहां बुर्का प्रथा है। वहीं कुछ उन्हें पाखंडी कह रहे हैं। एक यूजर ने लिखा है, ‘इम्तियाज अली ने बुर्का/पर्दा की प्रथा को कमजोर, पिछड़ी सोच और समस्याग्रस्त बताया। लेकिन यह समदीश उसका बचाव करते हुए कह रहा है कि अगर किसी समुदाय ने इसे सामान्य मान लिया है, तो हम उस पर सवाल कैसे उठा सकते हैं? इम्तियाज खुद उसी समुदाय से आते हैं। वाह रे। कैसे पाखंडी हैं।’ एक यूजर ने लिखा, “मुसलमानों के सबसे बड़े दुश्मन ये लिबरल लोग हैं, क्योंकि ये उनकी गलत बातों या कमियों की आलोचना करने से बचते हैं।” इम्तियाज की फिल्म को कहा गया एंटी-नेशनल इम्तियाज अली के निर्देशन में बनी फिल्म मैं वापस आऊंगा 12 जून को सिनेमाघरों में रिलीज हुई है। ये फिल्म भारत-पाकिस्तान के बंटवारे की एक अधूरी प्रेम कहानी पर आधारित है, जिसे कई लोग एंटी नेशनल कह रहे हैं। इस पर फिल्म के म्यूजिक कंपोजर एआर रहमान ने भी हंसते हुए रिएक्शन दिया था। दिलजीत दोसांझ, वेदांग रैना, शरवरी वाघ और नसीरुद्दीन शाह स्टारर ये फिल्म रिलीज के पहले हफ्ते 14 करोड़ का कलेक्शन कर चुकी है। फिल्म को पाकिस्तान से मिलीं तारीफें पाकिस्तानी फिल्ममेकर उमर नासिर अली ने इम्तियाज अली की फिल्म मैं वापस आऊंगा की जमकर तारीफ करते हुए इसे एक बेहद खूबसूरत और गहरी भावनात्मक फिल्म बताया है। उमर नासिर के मुताबिक, यह फिल्म उनके दिल के बेहद करीब है क्योंकि वे खुद भी इसी विषय के आसपास एक फिल्म बना रहे हैं। इम्तियाज अली के बारे में-

Gold Silver Price Fall | Rs 2830 Gold, Rs 10609 Silver Drop

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नई दिल्ली9 मिनट पहले कॉपी लिंक सोने-चांदी के दाम में इस हफ्ते गिरावट रही। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का दाम 2,830 रुपए गिरकर 1.45 लाख रुपए हो गया है। इससे पहले ये बीते हफ्ते यानी 13 जून को 1.48 लाख रुपए पर था। वहीं, चांदी 2.43 लाख रुपए किलो से गिरकर 2.32 लाख रुपए पर आ गई है। यानी इसकी कीमत 10,609 रुपए कम हुई। कैरेट के हिसाब से सोने की कीमत कैरेट भाव (रुपए/10 ग्राम) 24 ₹1,44,970 22 ₹1,32,793 18 ₹1,08,728 14 ₹84,808 देश के बड़े शहरों में सोने की कीमत शहर 10 ग्राम 24 कैरेट दिल्ली ₹1,46,230 मुंबई ₹1,46,080 कोलकाता ₹1,46,080 जयपुर ₹1,46,230 भोपाल ₹1,46,130 पटना ₹1,46,130 लखनऊ ₹1,46,230 रायपुर ₹1,46,080 अहमदाबाद ₹1,46,130 सोर्स: goodreturns 20 जून 2026 ऑल टाइम हाई से ₹31 हजार गिरा सोना इस साल सोने-चांदी की कीमत में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। 31 दिसंबर 2025 को सोने के दाम 1.33 लाख रुपए थे, जो 29 जनवरी को बढ़कर 1.76 लाख रुपए के सबसे ऊपरी स्तर पर पहुंच गए थे। तब से अब तक सोना 31 हजार रुपए सस्ता हो चुका है। वहीं, चांदी की कीमत 31 दिसंबर 2025 को 2.30 लाख रुपए थी, जो 29 जनवरी को 3.86 लाख रुपए के ऑलटाइम हाई पर पहुंच गई थी। तब से अब तक 142 दिन में चांदी 1.54 लाख रुपए सस्ती हो गई है। सोना 142 दिन में ₹31 हजार और चांदी ₹1.54 लाख सस्ती तारीख सोने की कीमत चांदी की कीमत 29 जनवरी ₹1,76,121 ₹3,85,933 31 जनवरी ₹1,65,795 ₹3,39,350 28 फरवरी ₹1,50,997 ₹2,66,700 31 मार्च ₹1,46,733 ₹2,30,135 30 अप्रैल ₹1,50,263 ₹2,40,331 31 मई ₹1,56,463 ₹2,63,350 20 जून ₹1,44,970 ₹2,31,973 सोर्स: IBJA सोने-चांदी के दाम में गिरावट की वजह यूएस-ईरान समझौता: अमेरिका-ईरान के बीच युद्धविराम समझौता साइन हुआ है। इसकी वजह से पश्चिम एशिया में युद्ध का खतरा कम हो गया, जिससे निवेशकों ने सोने-चांदी जैसे ‘सुरक्षित निवेश’ से अपना पैसा निकालना शुरू कर दिया। यूएस फेडरल रिजर्व का रुख: फेडरल रिजर्व ने हाल ही में संकेत दिए हैं कि वह इस साल ब्याज दरों में कटौती करने के बजाय उन्हें बढ़ा सकता है। ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीद से सोने जैसी बिना ब्याज वाली धातु की चमक कम हो जाती है। मजबूत अमेरिकी डॉलर: फेडरल रिजर्व के संकेतों के बाद वैश्विक बाजार में अमेरिकी डॉलर इंडेक्स मजबूत हुआ है। आमतौर पर जब डॉलर मजबूत होता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी की कीमतें गिरती हैं। मुनाफावसूली: पिछले कुछ समय पहले सोने और चांदी की कीमतें अपने रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुकी थीं। दामों में इतनी बड़ी तेजी आने के बाद बड़े निवेशकों और ट्रेडर्स ने मुनाफावसूली की, जिससे कीमतों में अचानक तेज गिरावट आई। ईटीएफ में बिकवाली: सुरक्षित निवेश का आकर्षण कम होने से गोल्ड-सिल्वर ETFs में भारी बिकवाली देखी गई। आज सिल्वर ईटीएफ में 6% और गोल्ड ईटीएफ में 3% की गिरावट है, जिसने घरेलू बाजार के भाव को नीचे खींचा है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Gold Silver Price Fall | Rs 2830 Gold, Rs 10609 Silver Drop

Gold Silver Price Fall | Rs 2830 Gold, Rs 10609 Silver Drop

नई दिल्ली25 मिनट पहले कॉपी लिंक सोने-चांदी के दाम में इस हफ्ते गिरावट रही। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का दाम 2,830 रुपए गिरकर 1.45 लाख रुपए हो गया है। इससे पहले ये बीते हफ्ते यानी 13 जून को 1.48 लाख रुपए पर था। वहीं, चांदी 2.43 लाख रुपए किलो से गिरकर 2.32 लाख रुपए पर आ गई है। यानी इसकी कीमत 10,609 रुपए कम हुई। कैरेट के हिसाब से सोने की कीमत कैरेट भाव (रुपए/10 ग्राम) 24 ₹1,44,970 22 ₹1,32,793 18 ₹1,08,728 14 ₹84,808 देश के बड़े शहरों में सोने की कीमत शहर 10 ग्राम 24 कैरेट दिल्ली ₹1,46,230 मुंबई ₹1,46,080 कोलकाता ₹1,46,080 जयपुर ₹1,46,230 भोपाल ₹1,46,130 पटना ₹1,46,130 लखनऊ ₹1,46,230 रायपुर ₹1,46,080 अहमदाबाद ₹1,46,130 सोर्स: goodreturns 20 जून 2026 ऑल टाइम हाई से ₹31 हजार गिरा सोना इस साल सोने-चांदी की कीमत में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। 31 दिसंबर 2025 को सोने के दाम 1.33 लाख रुपए थे, जो 29 जनवरी को बढ़कर 1.76 लाख रुपए के सबसे ऊपरी स्तर पर पहुंच गए थे। तब से अब तक सोना 31 हजार रुपए सस्ता हो चुका है। वहीं, चांदी की कीमत 31 दिसंबर 2025 को 2.30 लाख रुपए थी, जो 29 जनवरी को 3.86 लाख रुपए के ऑलटाइम हाई पर पहुंच गई थी। तब से अब तक 142 दिन में चांदी 1.54 लाख रुपए सस्ती हो गई है। सोना 142 दिन में ₹31 हजार और चांदी ₹1.54 लाख सस्ती तारीख सोने की कीमत चांदी की कीमत 29 जनवरी ₹1,76,121 ₹3,85,933 31 जनवरी ₹1,65,795 ₹3,39,350 28 फरवरी ₹1,50,997 ₹2,66,700 31 मार्च ₹1,46,733 ₹2,30,135 30 अप्रैल ₹1,50,263 ₹2,40,331 31 मई ₹1,56,463 ₹2,63,350 20 जून ₹1,44,970 ₹2,31,973 सोर्स: IBJA सोने-चांदी के दाम में गिरावट की वजह यूएस-ईरान समझौता: अमेरिका-ईरान के बीच युद्धविराम समझौता साइन हुआ है। इसकी वजह से पश्चिम एशिया में युद्ध का खतरा कम हो गया, जिससे निवेशकों ने सोने-चांदी जैसे ‘सुरक्षित निवेश’ से अपना पैसा निकालना शुरू कर दिया। यूएस फेडरल रिजर्व का रुख: फेडरल रिजर्व ने हाल ही में संकेत दिए हैं कि वह इस साल ब्याज दरों में कटौती करने के बजाय उन्हें बढ़ा सकता है। ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीद से सोने जैसी बिना ब्याज वाली धातु की चमक कम हो जाती है। मजबूत अमेरिकी डॉलर: फेडरल रिजर्व के संकेतों के बाद वैश्विक बाजार में अमेरिकी डॉलर इंडेक्स मजबूत हुआ है। आमतौर पर जब डॉलर मजबूत होता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी की कीमतें गिरती हैं। मुनाफावसूली: पिछले कुछ समय पहले सोने और चांदी की कीमतें अपने रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुकी थीं। दामों में इतनी बड़ी तेजी आने के बाद बड़े निवेशकों और ट्रेडर्स ने मुनाफावसूली की, जिससे कीमतों में अचानक तेज गिरावट आई। ईटीएफ में बिकवाली: सुरक्षित निवेश का आकर्षण कम होने से गोल्ड-सिल्वर ETFs में भारी बिकवाली देखी गई। आज सिल्वर ईटीएफ में 6% और गोल्ड ईटीएफ में 3% की गिरावट है, जिसने घरेलू बाजार के भाव को नीचे खींचा है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

कुन्हा के डबल गोल से जीता ब्राजील:ग्रुप-सी के टॉप पर आया, हैती फुटबॉल वर्ल्डकप से बाहर होने वाली पहली टीम

कुन्हा के डबल गोल से जीता ब्राजील:ग्रुप-सी के टॉप पर आया, हैती फुटबॉल वर्ल्डकप से बाहर होने वाली पहली टीम

5 बार की वर्ल्ड चैंपियन ब्राजील ने हैती को 3-0 से हराकर फुटबॉल वर्ल्ड कप 2026 में अपनी पहली जीत दर्ज की। इस जीत से ब्राजील ग्रुप-सी के टॉप पर आ गई। जबकि, हैती टूर्नामेंट से बाहर होने वाली पहली टीम बन गई। अब 24 जून को ब्राजील का मुकाबला स्कॉटलैंड से होगा, जबकि हैती अपने अंतिम ग्रुप मैच में मोरक्को से भिड़ेगा। मैनचेस्टर यूनाइटेड के फॉरवर्ड माथियस कुन्हा को इस मैच की स्टार्टिंग-11 में मौका मिला। उन्होंने 23वें और 36वें मिनट में गोल दागे। एक गोल विनीसियस जूनियर ने पहले हाफ के इंजरी टाइम के तीसरे मिनट में किया। इस मैच के बाद ब्राजील और मोरक्को के एक समान 4-4 अंक हैं, लेकिन ब्राजील गोल डिफरेंस की वजह से टेबल के टॉप पर है। ब्राजील का गोल डिफरेंस 3 है, जबकि मोरक्को का 1 है। गोल डिफरेंस टूर्नामेंट में किसी टीम के टोटल गोल और गंवाए गए गोल के बीच का अंतर होता है। उदाहरण के रुप में किसी टीम ने टूर्नामेंट में 5 गोल दागे हैं और 3 गोल खाए हैं, तो उसका गोल डिफरेंस 2 होगा। पहले हाफ में आए तीनों गोल ब्राजील ने 24 साल पुराना वर्ल्ड कप रिकॉर्ड दोहराया दूसरे हाफ में डिफेंस ने संभाली जिम्मेदारी, गोल रहित रहा मैच के दूसरे हाफ में हैती ने वापसी की कोशिश की, लेकिन ब्राजील के मजबूत डिफेंस और गोलकीपर के सामने कोई खास मौका नहीं बना सका। 1974 के बाद पहली बार वर्ल्ड कप में खेल रही हैती की टीम दो मैचों में हार के बाद नॉकआउट की दौड़ से बाहर हो गई। ब्राजील वर्ल्ड कप में सबसे ज्यादा गोल करने वाली टीम ब्राजील वर्ल्ड कप इतिहास में सबसे ज्यादा गोल करने वाली टीम बन गई है। उसने टूर्नामेंट में अब तक खेले 116 मैचों में 241 गोल दागे हैं। ब्राजील ने जर्मनी के वर्ल्ड रिकॉर्ड को पीछे छोड़ा। जर्मनी ने 113 मैचों में 239 गोल दागे हैं। ——————————————-

Brazil Tops Group C After 3-0 Win Over Haiti

कुन्हा के डबल गोल से जीता ब्राजील:ग्रुप-सी के टॉप पर आया, हैती फुटबॉल वर्ल्डकप से बाहर होने वाली पहली टीम

फिलाडेल्फिया19 मिनट पहले कॉपी लिंक 5 बार की वर्ल्ड चैंपियन ब्राजील ने हैती को 3-0 से हराकर फुटबॉल वर्ल्ड कप 2026 में अपनी पहली जीत दर्ज की। इस जीत से ब्राजील ग्रुप-सी के टॉप पर आ गई। जबकि, हैती टूर्नामेंट से बाहर होने वाली पहली टीम बन गई। मैनचेस्टर यूनाइटेड के फॉरवर्ड माथियस कुन्हा को इस मैच की स्टार्टिंग-11 में मौका मिला। उन्होंने 23वें और 36वें मिनट में गोल दागे। एक गोल विनीसियस जूनियर के बूट से आया। अब 24 जून को ब्राजील का मैच स्कॉटलैंड से होगा, जबकि हैती अपने अंतिम ग्रुप मैच में मोरक्को से भिड़ेगा। सुपीरियर प्लेयर ऑफ द मैच- विनीसियस जूनियर पहले हाफ में आए तीनों गोल पहला: 23वें मिनट में विनीसियस जूनियर के शॉट पर बॉल गोल पोस्ट से लगकर वापस आ गई। यहां कुन्हा ने रिबाउंड पर गोल दागा। उन्होंने वर्ल्ड कप में पहला गोल किया। दूसरा: 36वें मिनट में विनीसियस ने मिडफील्ड में एक और बेहतरीन पास देकर कुन्हा के लिए मौका बनाया। कुन्हा ने बाएं फुट से जोरदार शॉट लगाकर स्कोर 2-0 कर दिया। तीसरा: हाफ टाइम से ठीक पहले मिडफील्डर लुकस पेक्ता के फ्लिक पास पर विनीसियस ने डबल टच के बाद हैती के गोलकीपर एलेक्जेंडर प्लेसिड के पैरों के बीच से गोल में भेज दिया। गोल सेलिब्रेट करते माथियस कुन्हा। उन्होंने मैदान पर तैराने का इशारा करके सेलिब्रेट किया। ब्राजील ने 24 साल पुराना वर्ल्ड कप रिकॉर्ड दोहराया ब्राजील ने 24 साल बाद फुटबॉल वर्ल्ड कप के ग्रुप स्टेज मैच में तीन गोल दागे हैं। इससे पहले टीम ने 2002 में चीन के खिलाफ 4 और कोस्टा रिका के खिलाफ 5 गोल दागे थे। ब्राजील वर्ल्ड कप इतिहास में 41वीं बार किसी मैच में तीन या उससे अधिक गोल दागे हैं। यह टूर्नामेंट के इतिहास में किसी भी देश द्वारा सबसे ज्यादा बार हासिल की गई उपलब्धि है। ब्राजील वर्ल्ड कप इतिहास में सबसे ज्यादा गोल करने वाली टीम बन गई है। उसने 116 मैचों में 241 गोल दागे। ब्राजील ने जर्मनी के वर्ल्ड रिकॉर्ड को पीछे छोड़ा। जर्मनी के 239 गोल दागे हैं। डिफेंस ने संभाली जिम्मेदारी, दूसरा हाफ गोल रहित रहा मैच के दूसरे हाफ में हैती ने वापसी की कोशिश की, लेकिन ब्राजील के मजबूत डिफेंस और गोलकीपर के सामने कोई खास मौका नहीं बना सका। 1974 के बाद पहली बार वर्ल्ड कप में खेल रही हैती की टीम दो मैचों में हार के बाद नॉकआउट की दौड़ से बाहर हो गई। विनीसियस जूनियर सुपीरियर प्लेयर ऑफ द मैच। मैच 30: स्कॉटलैंड Vs मोरक्को; 0-1 साइबारी का लगातार दूसरे मैच में गोल, मोरक्को जीता मोरक्को ने फुटबॉल वर्ल्ड कप के ग्रुप-सी मैच में स्कॉटलैंड को 1-0 से हराया। टीम 4 अंक के साथ ग्रुप सी के टॉप पर है। उसने पहले मैच में ब्राजील को ड्रॉ पर रोका था। बूस्टन स्टेडियम में शनिवार को खेले गए इस मैच का एकमात्र और निर्णायक गोल स्ट्राइकर इस्माइल साइबारी ने किया, जो विश्व कप 2026 का अब तक का सबसे तेज गोल और विश्व कप इतिहास में मोरक्को का सबसे तेज गोल भी बन गया। ब्राहिम डियाज के सटीक पास पर साइबारी स्कॉटलैंड के डिफेंस को भेदते हुए आगे बढ़े और गोलकीपर एंगस गन को छकाकर गेंद को गोल पोस्ट में डाल दिया। वे वर्ल्ड कप में अपने शुरुआती दो मुकाबलों में गोल करने वाले केवल दूसरे अफ्रीकी खिलाड़ी बने हैं। उनसे पहले यह उपलब्धि मिस्र के मोहम्मद सलाह ने 2018 विश्व कप में हासिल की थी। गोल डिफरेंस से ब्राजील आगे इस मैच के बाद पॉइंट्स टेबल में ब्राजील पहले और मोरक्को दूसरे स्थान पर है। दोनों के एक समान 4-4 अंक हैं, हालांकि ब्राजील गोल डिफरेंस की वजह से टेबल के टॉप पर है। ब्राजील का गोल डिफरेंस 3 है, जबकि मोरक्को का 1 है। गोल डिफरेंस टूर्नामेंट में किसी टीम के टोटल गोल और गंवाए गए गोल के बीच का अंतर होता है। उदाहरण के रुप में किसी टीम ने टूर्नामेंट में 5 गोल दागे हैं और 3 गोल खाए हैं, तो उसका गोल डिफरेंस 2 होगा। ——————————————- फुटबॉल वर्ल्ड कप से जुड़ी यह खबर भी पढ़िए… अमेरिका 32 साल बाद फुटबॉल वर्ल्डकप के नॉकआउट में, ऑस्ट्रेलिया को 2-0 से हराया मेजबान अमेरिका ने फुटबॉल वर्ल्ड कप के राउंड ऑफ 32 में प्रवेश कर लिया है। उसने शनिवार के पहले मैच में ऑस्ट्रेलिया को 2-0 से हराया। अमेरिकी टीम ने 32 साल बाद नॉकआउट राउंड में जगह बनाई है। पढ़ें पूरी खबर दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…