आखिरी ओवर का रोमांच…वॉशिंगटन को 6 रन की जरूरत थी:अकील हुसैन ने हैट्रिक ली; निखिल चौधरी ने अंतिम बॉल पर छक्का लगाकर जिताया

मेजर क्रिकेट लीग में शनिवार रात एक अति रोमांचक मैच खेला गया। ऑकलैंड में मैच के आखिरी ओवर में वॉशिंगटन फ्रीडम को जीत के लिए 6 रनों की जरूरत थी। टेक्सास सुपर किंग्स के अकील हुसैन ने आखिरी ओवर में हैट्रिक लेकर मैच का रुख पलट दिया। लेकिन, फ्रीडम के बैटर निखिल चौधरी ने आखिरी बॉल पर छक्का लगाकर अपनी टीम को एक विकेट की जीत दिला दी। अकील हुसैन ने मेजर लीग की पहली हैट्रिक ली टेक्सेस के अकील हुसैन ने 20वें ओवर की पहली बॉल मार्को यानसन (9 रन) को डॉट कराई। उन्होंने अगली बॉल पर यानसन को पवेलियन भेज दिया। इसके बाद अपोंसो (18 रन) और फिर आसिफ महमूद (0 रन) को विकेटकीपर मुक्कामाला के हाथों स्टंप कराकर हैट्रिक पूरी की। अकील ने मेजर क्रिकेट लीग की पहली हैट्रिक ली। 5वीं गेंद पर लॉकी फर्ग्युसन ने एक रन लेकर निखिल को स्ट्राइक दी। फिर भारत में जन्मे ऑस्ट्रेलियाई ऑलराउंड निखिल ने आखिरी गेंद पर छक्का लगाकर मैच को अपने नाम किया। मिडिल ओवर में लड़खड़ाई फ्रीडम की टीम ओपनर्स के आउट होने के बाद वॉशिंगटन फ्रीडम की टीम लड़खड़ाती दिखी। मार्क चैपमेन 2 और एंडियस गॉस 6 रन बना सके। हालांकि, टीम ने 19 ओवर में जैसे-तैसे 180 रन बना लिए थे। यहां ऐसा लग रहा था कि टीम आसानी से जीत हासिल कर लेगी। मिचेल ओवन की फिफ्टी, स्मिथ के साथ 91 रन जोड़े 186 के टारगेट का पीछा करने उतरी वॉशिंगटन फ्रीडम के लिए मिचेल ओवन और स्टीव स्मिथ ने धमाकेदार शुरुआत की। ओवन ने 35 गेंदों पर 7 चौकों और 6 छक्कों की मदद से 77 रन बनाए। जबकि, स्टीव स्मिथ ने 21 गेंदों पर 30 रनों की पारी खेली। दोनों ने 91 रन की साझेदारी की। टेक्सास की ओर से कोई फिफ्टी नहीं टॉस जीतकर पहले बैटिंग करने उतरी टेक्सास सुपर किंग्स ने निर्धारित 20 ओवर में 185 रन बोर्ड पर लगाए थे। डेवोन फरेरा ने 20 गेंद पर 44 रन की पारी खेली। जबकि वियान मुल्डन ने इतनी ही गेंद पर 43 रन बनाए। दोनों ने 31 गेंद पर नाबाद 75 रनों की साझेदारी की। ——————————————————————-
आखिरी ओवर का रोमांच…वॉशिंगटन को 6 रन की जरूरत थी:अकील हुसैन ने हैट्रिक ली; निखिल चौधरी ने अंतिम बॉल पर छक्का लगाकर जिताया

मेजर क्रिकेट लीग में शनिवार रात एक अति रोमांचक मैच खेला गया। ऑकलैंड में मैच के आखिरी ओवर में वॉशिंगटन फ्रीडम को जीत के लिए 6 रनों की जरूरत थी। टेक्सास सुपर किंग्स के अकील हुसैन ने आखिरी ओवर में हैट्रिक लेकर मैच का रुख पलट दिया। लेकिन, फ्रीडम के बैटर निखिल चौधरी ने आखिरी बॉल पर छक्का लगाकर अपनी टीम को एक विकेट की जीत दिला दी। अकील हुसैन ने मेजर लीग की पहली हैट्रिक ली टेक्सेस के अकील हुसैन ने 20वें ओवर की पहली बॉल मार्को यानसन (9 रन) को डॉट कराई। उन्होंने अगली बॉल पर यानसन को पवेलियन भेज दिया। इसके बाद अपोंसो (18 रन) और फिर आसिफ महमूद (0 रन) को विकेटकीपर मुक्कामाला के हाथों स्टंप कराकर हैट्रिक पूरी की। अकील ने मेजर क्रिकेट लीग की पहली हैट्रिक ली। 5वीं गेंद पर लॉकी फर्ग्युसन ने एक रन लेकर निखिल को स्ट्राइक दी। फिर भारत में जन्मे ऑस्ट्रेलियाई ऑलराउंड निखिल ने आखिरी गेंद पर छक्का लगाकर मैच को अपने नाम किया। मिडिल ओवर में लड़खड़ाई फ्रीडम की टीम ओपनर्स के आउट होने के बाद वॉशिंगटन फ्रीडम की टीम लड़खड़ाती दिखी। मार्क चैपमेन 2 और एंडियस गॉस 6 रन बना सके। हालांकि, टीम ने 19 ओवर में जैसे-तैसे 180 रन बना लिए थे। यहां ऐसा लग रहा था कि टीम आसानी से जीत हासिल कर लेगी। मिचेल ओवन की फिफ्टी, स्मिथ के साथ 91 रन जोड़े 186 के टारगेट का पीछा करने उतरी वॉशिंगटन फ्रीडम के लिए मिचेल ओवन और स्टीव स्मिथ ने धमाकेदार शुरुआत की। ओवन ने 35 गेंदों पर 7 चौकों और 6 छक्कों की मदद से 77 रन बनाए। जबकि, स्टीव स्मिथ ने 21 गेंदों पर 30 रनों की पारी खेली। दोनों ने 91 रन की साझेदारी की। टेक्सास की ओर से कोई फिफ्टी नहीं टॉस जीतकर पहले बैटिंग करने उतरी टेक्सास सुपर किंग्स ने निर्धारित 20 ओवर में 185 रन बोर्ड पर लगाए थे। डेवोन फरेरा ने 20 गेंद पर 44 रन की पारी खेली। जबकि वियान मुल्डन ने इतनी ही गेंद पर 43 रन बनाए। दोनों ने 31 गेंद पर नाबाद 75 रनों की साझेदारी की। ——————————————————————-
ICICI Bank Top Gainer | Market Cap Rises; HDFC, Reliance Stocks Up

मुंबई15 मिनट पहले कॉपी लिंक पिछले कारोबारी हफ्ते में देश की टॉप-10 सबसे वैल्यूएबल कंपनियों में से 6 का कुल मार्केट वैल्यूएशन 88,678.1 करोड़ रुपए बढ़ गया है। इस तेजी में ICICI बैंक टॉप गेनर रहा। बैंक की वैल्युएशन 29,588.75 करोड़ रुपए बढ़कर 9.95 लाख करोड़ रुपए पर पहुंच गई। ICICI बैंक के अलावा HDFC बैंक, रिलायंस इंडस्ट्रीज, बजाज फाइनेंस, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) और लार्सन एंड टुब्रो (L&T) का मार्केट कैप भी बढ़ा है। वहीं बाजार की इस तेजी के बीच टॉप-10 सबसे वैल्यूएबल कंपनियों में से 4 की वैल्यू बीते हफ्ते घटी है। जिसमें भारती एयरटेल, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (LIC) और हिंदुस्तान यूनिलीवर के नाम शामिल हैं। देश की टॉप-10 कंपनियों में से 6 की वैल्यू ₹88 हजार करोड़ बढ़ी कंपनी हफ्ते भर में चेंज (₹ करोड़ में) मौजूदा मार्केट कैप (₹ लाख करोड़ में) ICICI बैंक +29,588 9.95 HDFC बैंक +24,718 12.26 रिलायंस इंडस्ट्रीज +12,044 17.84 बजाज फाइनेंस +11,580 6.10 SBI +9,322 9.64 लार्सन एंड टुब्रो +1,423 5.80 भारती एयरटेल -35,615 11.27 LIC -21,188 5.35 TCS -11,143 7.58 हिंदुस्तान यूनिलीवर -5,321 5.11 सोर्स: BSE (22 जून – 25 जून, 2026) रिलायंस देश की सबसे वैल्यूएबल कंपनी मार्केट कैप के हिसाब से रिलायंस इंडस्ट्रीज देश की सबसे मूल्यवान कंपनी के रूप में पहले नंबर पर बनी हुई है। इसके बाद दूसरे स्थान पर HDFC बैंक, तीसरे पर भारती एयरटेल, चौथे पर ICICI बैंक और पांचवें पर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया है। इस लिस्ट में छठे स्थान पर TCS, सातवें पर बजाज फाइनेंस, आठवें पर लार्सन एंड टुब्रो, नौवें पर LIC और दसवें स्थान पर हिंदुस्तान यूनिलीवर मौजूद है। बीते हफ्ते सेंसेक्स 297 अंक चढ़ा था पिछले हफ्ते शेयर बाजार में छुट्टियों की वजह से कम दिन कामकाज हुआ। इसके बावजूद बीते हफ्ते सेंसेक्स 297 अंक चढ़ा था। वहीं गुरुवार 25 जून को सेंसेक्स अपने डे हाई से 703 अंक टूट गया, वहीं निफ्टी भी 24,100 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे फिसल गया। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 109 अंक (0.14%) की बढ़त के साथ 77,100 पर और निफ्टी 34 अंक (0.14%) बढ़कर 24,056 पर बंद हुआ था। एक्सपर्ट का क्या है कहना रेलीगेयर ब्रोकिंग लिमिटेड के रिसर्च एसवीपी (SVP) अजीत मिश्रा के मुताबिक, बाजार ने छुट्टियों के कारण छोटे रहे इस हफ्ते का अंत मामूली बढ़त के साथ किया है। चार कारोबारी सत्रों में से तीन में बाजार में बढ़त देखी गई। अजीत मिश्रा ने बताया कि कच्चे तेल की कीमतों में कमी, पश्चिम एशिया में सुधरते भू-राजनीतिक घटनाक्रम और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) द्वारा चुनिंदा खरीदारी से बाजार का सेंटिमेंट मजबूत बना रहा। मार्केट कैपिटलाइजेशन क्या होता है? मार्केट कैप किसी भी कंपनी के टोटल आउटस्टैंडिंग शेयरों यानी वे सभी शेयर जो फिलहाल उसके शेयरहोल्डर्स के पास हैं, उनकी वैल्यू है। इसका कैलकुलेशन कंपनी के जारी शेयरों की कुल संख्या को उनकी कीमत से गुणा करके किया जाता है। इसे एक उदाहरण से समझें… मान लीजिए… कंपनी ‘A’ के 1 करोड़ शेयर मार्केट में लोगों ने खरीद रखे हैं। अगर एक शेयर की कीमत 20 रुपए है, तो कंपनी की मार्केट वैल्यू 1 करोड़ x 20 यानी 20 करोड़ रुपए होगी। कंपनियों की मार्केट वैल्यू शेयर की कीमतों के बढ़ने या घटने के चलते बढ़ता-घटता है। इसके और कई कारण हैं… बढ़ने का क्या मतलब घटने का क्या मतलब शेयर की कीमत में बढ़ोतरी शेयर प्राइस में गिरावट मजबूत वित्तीय प्रदर्शन खराब नतीजे पॉजिटीव न्यूज या इवेंट नेगेटिव न्यूज या इवेंट पॉजिटीव मार्केट सेंटिमेंट इकोनॉमी या मार्केट में गिरावट हाई प्राइस पर शेयर जारी करना शेयर बायबैक या डीलिस्टिंग मार्केट कैप के उतार-चढ़ाव का कंपनी और निवेशकों पर क्या प्रभाव पड़ता है? कंपनी पर असर : बड़ा मार्केट कैप कंपनी को मार्केट से फंड जुटाने, लोन लेने या अन्य कंपनी एक्वायर करने में मदद करता है। वहीं, छोटे या कम मार्केट कैप से कंपनी की फाइनेंशियल डिसीजन लेने की क्षमता कम हो जाती है। निवेशकों पर असर : मार्केट कैप बढ़ने से निवेशकों को डायरेक्ट फायदा होता है। क्योंकि उनके शेयरों की कीमत बढ़ जाती है। वही, गिरावट से नुकसान हो सकता है, जिससे निवेशक शेयर बेचने का फैसला ले सकते हैं। उदाहरण: अगर TCS का मार्केट कैप ₹12.43 लाख करोड़ बढ़ता है, तो निवेशकों की संपत्ति बढ़ेगी, और कंपनी को भविष्य में निवेश के लिए ज्यादा पूंजी मिल सकती है। लेकिन मार्केट कैप गिरता है तो इसका नुकसान हो सकता है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
हर्षाली ने 20 बार सलमान के हाथ पर थूका था:फिल्म 'बजरंगी भाईजान' के एक्टर मनोज बख्शी ने शूटिंग का किस्सा शेयर किया

फिल्म बजरंगी भाईजान के सेट से जुड़ा एक किस्सा एक्टर मनोज बख्शी ने हाल ही में शेयर किया। उन्होंने बताया कि शूटिंग के दौरान चाइल्ड आर्टिस्ट हर्षाली मल्होत्रा को सीन की जरूरत के चलते कई बार सलमान खान के हाथ पर थूकना पड़ा। मनोज ने बताया कि सलमान ने बिना किसी हिचक के करीब 20 बार अपना हाथ आगे कर दिया। मनोज बख्शी ने द वी टी शो पॉडकास्ट में बजरंगी भाईजान की शूटिंग का एक अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि उस दौरान उन्हें एहसास हुआ कि सुपरस्टार होने के बावजूद सलमान खान का व्यवहार बेहद सहज और विनम्र है। हर्षाली को नॉनवेज खाते हुए सीन करना था मनोज के अनुसार, फिल्म के एक सीन में मुन्नी का किरदार निभा रहीं हर्षाली मल्होत्रा को कैमरे की ओर देखकर नॉन-वेज खाते हुए दिखाना था। निर्देशक कबीर खान के निर्देशानुसार उन्हें चबा-चबाकर खाना था, लेकिन कई बार उनके मुंह में बड़ा टुकड़ा आ जाता था, जिसे वह चबा नहीं पाती थीं। ऐसी स्थिति में शूटिंग रोकने के बजाय सलमान खान ने अपना हाथ आगे बढ़ाकर हर्षाली से कहा था कि वह उसमें थूक दें। मनोज बख्शी के मुताबिक, सीन के दौरान ऐसा करीब 20 बार हुआ और सलमान ने एक बार भी असहजता नहीं जताई। मनोज ने बताया कि यह देखकर उन्होंने सलमान से कहा कि वह दूसरे के बच्चे के लिए ऐसा क्यों कर रहे हैं। इस पर सलमान ने जवाब दिया कि वह ऐसे ही हैं। बजरंगी भाईजान साल 2015 में रिलीज हुई थी। फिल्म में सलमान खान और हर्षाली मल्होत्रा की बॉन्डिंग को दर्शकों ने काफी पसंद किया था और यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बड़ी सफलता साबित हुई। मनोज बख्शी जब तक है जान, दिल्ली बेली, मदारी, नो वन किल्ड जेसिका, गदर 2 और अन्य फिल्मों में भी नजर आ चुके हैं। वहीं, हर्षाली मल्होत्रा को बजरंगी भाईजान के लिए करीब 5,000 लड़कियों के ऑडिशन के बाद चुना गया था। फिल्म के समय वह छह साल की थीं और अब 18 साल की हो गई हैं। वह दक्षिण भारतीय फिल्मों में भी काम कर रही हैं।
हर्षाली ने 20 बार सलमान के हाथ पर थूका था:फिल्म 'बजरंगी भाईजान' के एक्टर मनोज बख्शी ने शूटिंग का किस्सा शेयर किया

फिल्म बजरंगी भाईजान के सेट से जुड़ा एक किस्सा एक्टर मनोज बख्शी ने हाल ही में शेयर किया। उन्होंने बताया कि शूटिंग के दौरान चाइल्ड आर्टिस्ट हर्षाली मल्होत्रा को सीन की जरूरत के चलते कई बार सलमान खान के हाथ पर थूकना पड़ा। मनोज ने बताया कि सलमान ने बिना किसी हिचक के करीब 20 बार अपना हाथ आगे कर दिया। मनोज बख्शी ने द वी टी शो पॉडकास्ट में बजरंगी भाईजान की शूटिंग का एक अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि उस दौरान उन्हें एहसास हुआ कि सुपरस्टार होने के बावजूद सलमान खान का व्यवहार बेहद सहज और विनम्र है। हर्षाली को नॉनवेज खाते हुए सीन करना था मनोज के अनुसार, फिल्म के एक सीन में मुन्नी का किरदार निभा रहीं हर्षाली मल्होत्रा को कैमरे की ओर देखकर नॉन-वेज खाते हुए दिखाना था। निर्देशक कबीर खान के निर्देशानुसार उन्हें चबा-चबाकर खाना था, लेकिन कई बार उनके मुंह में बड़ा टुकड़ा आ जाता था, जिसे वह चबा नहीं पाती थीं। ऐसी स्थिति में शूटिंग रोकने के बजाय सलमान खान ने अपना हाथ आगे बढ़ाकर हर्षाली से कहा था कि वह उसमें थूक दें। मनोज बख्शी के मुताबिक, सीन के दौरान ऐसा करीब 20 बार हुआ और सलमान ने एक बार भी असहजता नहीं जताई। मनोज ने बताया कि यह देखकर उन्होंने सलमान से कहा कि वह दूसरे के बच्चे के लिए ऐसा क्यों कर रहे हैं। इस पर सलमान ने जवाब दिया कि वह ऐसे ही हैं। बजरंगी भाईजान साल 2015 में रिलीज हुई थी। फिल्म में सलमान खान और हर्षाली मल्होत्रा की बॉन्डिंग को दर्शकों ने काफी पसंद किया था और यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बड़ी सफलता साबित हुई। मनोज बख्शी जब तक है जान, दिल्ली बेली, मदारी, नो वन किल्ड जेसिका, गदर 2 और अन्य फिल्मों में भी नजर आ चुके हैं। वहीं, हर्षाली मल्होत्रा को बजरंगी भाईजान के लिए करीब 5,000 लड़कियों के ऑडिशन के बाद चुना गया था। फिल्म के समय वह छह साल की थीं और अब 18 साल की हो गई हैं। वह दक्षिण भारतीय फिल्मों में भी काम कर रही हैं।
बदल रहा है 1.1 लाख करोड़ का बाजार:लस्सी-छाछ से कोल्ड ड्रिंक्स पीछे, बिक्री में हुई चौगुनी ग्रोथ

इस साल की रिकॉर्ड तोड़ गर्मी ने देश के 1.1 लाख करोड़ रु. के सॉफ्ट ड्रिंक्स के बाजार का गणित बदल दिया है। किराना दुकानों के फ्रिज और क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर कोल्ड ड्रिंक्स के साथ छाछ, लस्सी और प्रोबायोटिक ड्रिंक्स जगह बना रहे हैं। यह बदलाव खासकर युवा उपभोक्ताओं और शहरी घरों में दिख रहा है, जो कार्बोनेटेड ड्रिंक्स के बजाय हेल्थ और प्रोटीन-बेस्ड डेयरी बेवरेजेज को तरजीह दे रहे हैं। मदर डेयरी के मैनेजिंग डायरेक्ट जयतीर्थ चारी के मुताबिक, इस सीजन लस्सी और छाछ जैसे डेयरी प्रोडक्ट्स ने 40% से ज्यादा की ग्रोथ दर्ज की है। क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर ही डबल-डिजिट की वृद्धि देख रहे हैं। हेरिटेज फूड्स के सीईओ श्रीदीप केसवन कहते हैं कि कंपनी के रेवेन्यू में डेयरी बेवरेजेज का योगदान तीन साल में दोगुना हो चुका है। वहीं, पराग मिल्क फूड्स की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अक्षाली शाह ने बताया कि भारत की पैकेज्ड फूड और बेवरेज इंडस्ट्री 9.51 लाख करोड़ की है, जो 2030 तक 14.27 लाख करोड़ रु. की होगी। डेयरी ड्रिंक्स मार्केट 2031 तक 4.23 लाख करोड़ रु. तक पहुंचने का अनुमान है। इसीलिए कंपनी प्रोटीन, हेल्थ, वेलनेस जैसे प्रोडक्ट पर फोकस कर रही हैं। पराग के इस बिजनेस में सालाना आधार पर 109% की ग्रोथ हुई। इसी कंज्यूमर शिफ्ट को देखते हुए हमने अवतार प्रोटीन कोल्ड कॉफी लॉन्च की। 15 ग्राम प्रोटीन का पैक सुविधा और न्यूट्रिशन को साथ लाने के लिए डिजाइन किया है। मदर डेयरी प्रोबायोटिक छाछ, पुदीना छाछ जैसे नए वैरिएंट्स ~10 के एंट्री प्राइस पर ला रही है। एफएमसीजी कंपनियों के लिए नया ‘ग्रोथ इंजन’ नेस्ले, एचयूएल, टाटा कंज्यूमर और डाबर जैसी बड़ी एफएमसीजी कंपनियों के लिए अब केचप, मेयोनीज के मुकाबले पीने के प्रोडक्ट्स (बेवरेजेज) सबसे बड़े ग्रोथ ड्राइवर बन गए हैं। हिंदुस्तान यूनिलीवर: कॉफी और हॉर्लिक्स-बूस्ट सेगमेंट में मजबूत डबल-डिजिट ग्रोथ दर्ज की गई। टाटा कंज्यूमर: रेडी-टू-ड्रिंक पोर्टफोलियो में 23% का उछाल आया। डाबर: नारियल पानी का बिजनेस दोगुना हुआ और रियल जूस में 26% की ग्रोथ रही। पेप्सिको (वरुण बेवरेजेज): मार्च तिमाही की कुल वॉल्यूम सेल में लगभग 63% हिस्सा ‘लो-शुगर’ और ‘नो-शुगर’ प्रोडक्ट्स का रहा। लस्सी-छाछ की बिक्री बढ़ने की वजह टैक्स अंतर कार्बोनेटेड ड्रिंक्स पर 40% तो, डेयरी बेवरेजेज पर 5% जीएसटी है। इस 35% के अंतर के कारण डेयरी कंपनियां ₹10 रु. के भी प्रोडक्ट बेच पा रही हैं। हेल्थ और न्यूट्रिशन कोविड के बाद उपभोक्ता स्वाद के साथ सेहत चाहते हैं। लस्सी-छाछ प्रोबायोटिक और लो-शुगर होने के कारण ‘हेल्दी अल्टरनेटिव’ हैं। मॉडर्न-ट्रेडिशनल हाइजेनिक पैकेजिंग के साथ कोकम, जलजीरा, आम पना और छाछ जैसे पेयों की बाजार में री-एंट्री हुई है। मार्केट ट्रेंड: कार्बोनेटेड ड्रिंक्स बनाम देसी बेवरेज कैटेगरी- मार्केट- प्रोजेक्टेड- सालाना ग्रोथ सॉफ्ट ड्रिंक्स-111.81-168.13- 4.64% लस्सी – 5.60 – 24.57 -16.96% छाछ – 19.33- 101.18- 18.16% (स्रोत: आईएमएआरसी। मार्केट साइज हजार करोड़ रुपए में)
तालियों से नहीं, विश्वसनीयता से तय होती है आपकी कीमत:जो अपनी भूल मानने को तैयार नहीं, वह सच तक नहीं पहुंच सकता

किसी भी पेशे में और खास तौर पर लेखन तथा कला के क्षेत्र में अहम चीज इंटेग्रिटी है। टैलेंट से भी ज्यादा क्योंकि प्रतिभा आपको पहचान दिला सकती है, लेकिन असली पहचान इस बात से बनती है कि आप अपने काम और अपने आप से कितने ईमानदार हैं। इंटेग्रिटी का मतलब सिर्फ सच बोलना नहीं है, बल्कि अपने विश्वासों और अपने व्यवहार के बीच कोई फासला न होने देना है। जो बात आप दूसरों से कहते हैं, वही बात अपने लिए भी लागू करना- यही इंटेग्रिटी है। इसका मतलब है विचारों, संवेदना, रचनात्मकता और अभिव्यक्ति के प्रति सच्चा होना। कलाकार का पहला फर्ज यह नहीं है कि वह लोगों को वही दे जो वे सुनना चाहते हैं; उसका पहला फर्ज है कि वो कहे जिसे वह सच मानता है। इंसान की अपनी सीमाएं, कमजोंरियां हो सकती हैं, वह गलतियां भी कर सकता है; लेकिन अगर उसमें ईमानदारी है तो अपनी गलतियों को पहचान लेगा और उनसे सीख लेगा। परफेक्शन एक भ्रम है, लेकिन ईमानदारी वह चीज है जो आपको जिंदा और प्रासंगिक बनाए रखती है। इंटेग्रिटी का मतलब जिद नहीं, बल्कि सत्य के प्रति निष्ठा है। विनम्रता और आत्म-परीक्षण भी इसका हिस्सा हैं। जब मैंने पहली बार फिल्म ‘लगान’ की कहानी सुनी थी, तो मुझे लगा था कि यह फिल्म शायद नहीं चलेगी। बाद में वही फिल्म भारतीय सिनेमा के इतिहास की महत्वपूर्ण फिल्मों में गिनी गई। मुझे अपनी उस राय को गलत मानने में कोई झिझक नहीं हुई। अपनी गलती स्वीकार करने का साहस भी बौद्धिक ईमानदारी में शामिल है। जो आदमी अपनी भूल मानने को तैयार नहीं, वह सच तक नहीं पहुंच सकता। आज भी मुझे कभी यह भ्रम नहीं होता कि मैं दुनिया के बाकी लोगों से ज्यादा योग्य हूं। अपने बारे में झूठे भ्रम पाल लेना भी एक तरह की बेईमानी है। कला में ईमानदारी का एक और अर्थ है- अपने विश्वास और सांस्कृतिक पहचान के प्रति निष्ठा। मुझे कभी-कभी यह देखकर अफसोस होता है कि कुछ फिल्मकार समाज, तहजीब और सांस्कृतिक विरासत से कटते जा रहे हैं। ऐसा लगता है जैसे उन्हें अपनी ही परंपराओं से संकोच होने लगा है। मेरे खयाल में किसी कलाकार की पहली जिम्मेदारी यह है कि वह अपनी सच्चाई के प्रति ईमानदार रहे। केवल ज्यादा आधुनिक या अंतरराष्ट्रीय दिखाई देने के लिए अपनी जड़ों से दूरी बना लेना मुझे कलात्मक ईमानदारी के खिलाफ लगता है। मुझे हमेशा यह लगा है कि महान सिनेमा की कोई राष्ट्रीयता नहीं होती, उसकी अपनी एक सच्चाई होती है। आप अकिरा कुरोसावा, इंगमार बर्गमैन, फेदेरिको फेलिनी को देख लीजिए, या फिर सत्यजित राय को। इन सबकी फिल्मों की भाषा, संस्कृति और परिवेश अलग हैं, लेकिन एक चीज साझा है- अपने अनुभव और अपनी दृष्टि के प्रति अटूट ईमानदारी। सत्यजित राय की फिल्मों में मुझे यही ईमानदारी दिखाई देती है। उन्होंने कभी दर्शकों पर प्रभाव डालने के लिए कृत्रिम भावुकता का सहारा नहीं लिया। उनके पात्र ज़िंदगी से आते हैं और ज़िंदगी की तरह ही हमारे सामने उपस्थित होते हैं। दिलचस्प है जितनी ईमानदारी से वे स्थानीय रहे, उतने ही वैश्विक, ग्लोबल हो गए। और सबसे महत्वपूर्ण बात यह कि उन्हें अपनी सांस्कृतिक पहचान पर पूरा भरोसा था। उन्होंने बंगाल की मिट्टी, वहां के लोगों और दुनिया को पूरी सच्चाई के साथ दिखाया। सत्तर के दशक में स्क्रिप्ट पर काम करते हुए सलीम साहब और मेरी हमेशा यही कोशिश रही कि कहानी के साथ बेईमानी न हो। इंटेग्रिटी केवल व्यक्तिगत गुण नहीं; यह संस्थागत और पेशेवर नैतिकता का भी प्रश्न है। ‘दीवार’ में विजय को हमने संत नहीं बनाया, क्योंकि वह था नहीं। ‘शक्ति’ में हमने किसी एक पात्र को पूरी तरह सही और दूसरे को पूरी तरह गलत नहीं ठहराया, क्योंकि ज़िंदगी इतनी सरल नहीं होती। ‘जंजीर’ में हमने जानबूझकर कथा को कसा हुआ रखा। उस दौर में हर फिल्म में एक्स्ट्रा गीत, हास्य और रोमांस जोड़ने का दबाव था, लेकिन अगर हर दृश्य केवल दर्शकों को खुश करने के लिए लिखा जाए, तो कहानी की रीढ़ टूट जाती है। मेरे लिए फिल्म अच्छी है या बुरी, यह अलग बहस है। असली सवाल यह है कि क्या फिल्मकार को अपनी बनाई हुई फिल्म पर खुद यकीन है। मेरा मानना है कि हर कलाकार को वही काम करना चाहिए जिस पर उसका दिल और दिमाग दोनों राजी हों। लोकप्रियता और सच्चाई के बीच चुनाव का क्षण ही कलाकार की असली परीक्षा है। आसान रास्ता चुनकर शायद आप सफलता हासिल कर लें, लेकिन अगर उस सफलता की कीमत आपकी रचनात्मक ईमानदारी है तो वह सौदा बहुत महंगा है। और सबसे बड़ी बेईमानी तब होती है जब आप ऐसी चीज बनाने लगते हैं जिस पर आपका अपना विश्वास ही नहीं है। महान कला और सिनेमा को ईमानदारी से अपने समय, समाज और अनुभव को व्यक्त करना चाहिए, न कि केवल दर्शकों को खुश करने के लिए बनाया जाना चाहिए। सिनेमा अंतत: समाज से निकलता है और समाज के मनोभावों को प्रतिबिंबित करता है। यही वजह है कि कुरोसावा की जापान में बनी हुई फिल्म हमें भारत में भी छूती है, और राय की बंगाल में बनी हुई फिल्म दुनिया के दूसरे छोर पर बैठे दर्शक को भी अपनी लगती है। स्थानीय होने और सार्वभौमिक होने के बीच कोई विरोध नहीं है। सच्चाई से कही गई स्थानीय कहानी ही अंततः सार्वभौमिक बनती है। दक्षिण भारतीय सिनेमा की सफलता का कारण भी उसकी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ाव बताया है। मेरे खयाल में कलाकार की असली इंटेग्रिटी इसी में है कि वह अपनी मिट्टी से जुड़ा रहे और अपनी सच्चाई पर भरोसा रखे। जो कलाकार अपनी पहचान से भागता है, वह अक्सर दुनिया तक भी नहीं पहुंच पाता। लेकिन जो अपनी सच्चाई के साथ खड़ा रहता है, उसकी आवाज सीमाओं और भाषाओं से बहुत आगे तक सुनाई देती है। आज की समस्या यह नहीं है कि हमारे फिल्मकार अंतरराष्ट्रीय सिनेमा देखते हैं। समस्या तब पैदा होती है जब वे उससे सीखने के बजाय उसकी नकल करने लगते हैं। प्रभाव लेना और बात है, अपनी पहचान खो देना दूसरी बात। मेरा मानना है कि दुनिया की खिड़कियां खुली रखिए, लेकिन अपने घर की नींव को मत उखाड़िए। यदि आप हर समय सबको खुश करने की कोशिश करेंगे, तो अंततः अपने आप
सेशेल्स में मोदी को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया:पीएम संसद को संबोधित करेंगे, भारतीय समुदाय से भी मिलेंगे; 3 दिन के दौरे पर हैं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज सेशेल्स की नेशनल असेंबली को संबोधित करेंगे। इसके साथ ही वे दुनिया के पहले ऐसे भारतीय प्रधानमंत्री बन जाएंगे, जिन्होंने 20 देशों की संसद या नेशनल असेंबली को संबोधित किया है। मोदी आज राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी के साथ द्विपक्षीय बातचीत करेंगे। इस दौरान दोनों समुद्री सुरक्षा और रक्षा सहयोग, कोस्ट गार्ड और समुद्री निगरानी समेत कई समझौतों पर दस्तखत कर सकते हैं। मोदी भारतीय समुदाय के कार्यक्रम में भी शामिल होंगे। मोदी शनिवार को तीन दिन की राजकीय यात्रा पर सेशेल्स पहुंचे थे। राजधानी विक्टोरिया में राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी ने उनका औपचारिक स्वागत किया और उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया। दोनों नेताओं ने नेशनल बॉटनिकल गार्डन का दौरा किया और यादगार के तौर पर एक पौधा लगाया। PM मोदी के सेशेल्स दौरे से जुड़ी 5 तस्वीरें… सेशेल्स से जुड़ी खास बातें जानिए… सेशेल्स की पहली बस्ती में शामिल थे 5 भारतीय पुर्तगाली नाविक वास्को द गामा ने पहली बार सेशेल्स को 1502 में खोज की थी। तब यहां पर लोगों की कोई स्थाई बसावट नहीं थी। इसके बाद कई सदियों तक अरब और यूरोपीय जहाज यहां रुकते रहे, लेकिन कोई स्थायी आबादी नहीं बनी। पहली बार 1770 में फ्रांस ने पहली स्थायी बस्ती बसाई। इसी दल में 15 फ्रांसीसी बसने वाले, 7 अफ्रीकी गुलाम और 5 भारतीय शामिल थे। इन्हें सेशेल्स का पहला स्थायी निवासी माना जाता है। इसके बाद 19वीं सदी में ब्रिटिश शासन के दौरान बिहार के भोजपुरी भाषी इलाकों से भी लोग यहां आकर बसने लगे। 20वीं सदी से तमिलनाडु और गुजरात से भी बड़ी संख्या में भारतीय व्यापारी, मजदूर और निर्माण कार्य से जुड़े लोग सेशेल्स पहुंचे। सेशेल्स के पूर्व राष्ट्रपति के पूर्वज बिहार से आज करीब 1.20 लाख आबादी वाले इस देश में भारतीय मूल के लोग लगभग 8% हैं। भारतीय मूल के लोगों में बिहारी समुदाय तीसरा सबसे बड़ा समूह माना जाता है। साल 2020 में राष्ट्रपति बने वेवेल रामकलावन की जड़ें भी बिहार से जुड़ी हैं। रामकलावन के परदादा करीब 138 साल पहले बिहार के गोपालगंज जिले के परसौनी गांव से कोलकाता पहुंचे थे। वहां से उन्हें गन्ने के खेतों में काम करने के लिए मॉरीशस भेजा गया। बाद में उनका परिवार सेशेल्स में बस गया। साल 2018 में, जब रामकलावन विपक्ष के सांसद थे, तब उन्होंने अपने पूर्वजों के गांव परसौनी का दौरा भी किया था। सेशेल्स के कछुए लंबी उम्र के लिए मशहूर दुनिया में कछुओं की 360 से ज्यादा प्रजातियां हैं। इनमें से सेशेल्स में पाया जाने वाला अल्डाब्रा जायंट कछुआ सबसे प्रसिद्ध प्रजातियों में से एक है। यह प्रजाति अपनी बेहद लंबी उम्र (औसत उम्र 150 साल) के लिए जानी जाती है। दुनिया का सबसे उम्रदराज जीवित स्थलीय जानवर जोनाथन भी इसी प्रजाति का कछुआ है। जोनाथन की उम्र करीब 194 साल मानी जाती है। उसका जन्म लगभग 1832 में हुआ था। वह 1882 में करीब 50 साल की उम्र में सेशेल्स से सेंट हेलेना भेज दिया गया था। वैज्ञानिक उसकी लंबी उम्र का राज जानने के लिए उसके डीएनए का अध्ययन कर रहे हैं। उनका मानना है कि उसकी कोशिकाएं इंसानों की कोशिकाओं की तरह तेजी से बदलाव नहीं करतीं। इससे उम्र बढ़ने और लंबी जिंदगी से जुड़े नए रहस्यों का पता चल सकता है। मोदी बोले- भारत और सेशेल्स के राजनयिक संबंधों के 50 साल पूरे पीएम मोदी ने सेशेल्स दौरे पर कहा- सेशेल्स भारत का महत्वपूर्ण समुद्री पड़ोसी और ‘विजन महासागर (MAHASAGAR)’ का प्रमुख साझेदार है। इस साल भारत और सेशेल्स के बीच राजनयिक संबंधों के 50 वर्ष पूरे हो रहे हैं। दोनों देशों के संबंध आपसी विश्वास, लोकतांत्रिक मूल्यों, विविधता के सम्मान और लोगों के गहरे जुड़ाव पर आधारित हैं। फरवरी 2026 में राष्ट्रपति हर्मिनी की भारत यात्रा के बाद अब इस दौरे में द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने पर चर्चा होगी। दोनों देश हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा, समृद्धि और विकास को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर काम करेंगे। मैं सेशेल्स की नेशनल असेंबली को संबोधित करने वाला पहला भारतीय प्रधानमंत्री बनूंगा। यह अवसर दोनों देशों के मजबूत लोकतांत्रिक मूल्यों और संसदीय परंपराओं को दर्शाता है। सेशेल्स में बसे भारतीय समुदाय से मिलने का भी अवसर मिलेगा, जिसने पीढ़ियों से दोनों देशों की मित्रता को मजबूत किया है। मुझे विश्वास है कि यह यात्रा भारत-सेशेल्स संबंधों को और गहरा करेगी, हिंद महासागर में समुद्री सहयोग बढ़ाएगी और सुरक्षित, शांतिपूर्ण व समृद्ध हिंद महासागर क्षेत्र के साझा दृष्टिकोण को आगे बढ़ाएगी। मोदी सेशेल्स जाने वाले सिर्फ दूसरे प्रधानमंत्री पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी साल 1976 में सेशेल्स गई थीं। उसी साल सेशेल्स आजाद हुआ था। भारत ने सेशेल्स के स्वतंत्रता समारोह में नौसेना का युद्धपोत आईएनएस नीलगिरि भी भेजा था। इसके बाद इंदिरा गांधी ने 1981 में फिर सेशेल्स का दौरा किया था। उनकी यात्रा के बाद, लगभग 34 साल तक किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री ने सेशेल्स की यात्रा नहीं की थी। इस दौरे का सबसे बड़ा उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक मौजूदगी और समुद्री सुरक्षा सहयोग को मजबूत करना था। मोदी की इस यात्रा के दौरान भारत ने सेशेल्स को दूसरा डोर्नियर समुद्री निगरानी विमान देने की घोषणा की, ताकि समुद्री निगरानी और तटीय सुरक्षा मजबूत हो सके। मोदी ने भारत की मदद से बने तटीय निगरानी रडार नेटवर्क का उद्घाटन किया। यह हिंद महासागर में जहाजों की निगरानी और समुद्री सुरक्षा बढ़ाने की भारत की बड़ी रणनीति का हिस्सा था। उस समय चीन हिंद महासागर के द्वीपीय देशों में अपना प्रभाव बढ़ा रहा था। ऐसे में मोदी का दौरा भारत की ‘पड़ोसी पहले’ और हिंद महासागर में रणनीतिक साझेदारी मजबूत करने की नीति का अहम हिस्सा माना गया।
PM Modi Addresses 20th Parliament in Seychelles

विक्टोरियाकुछ ही क्षण पहले कॉपी लिंक मोदी को सेशेल्स में गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को रविवार को सेशेल्स में गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी के बीच द्विपक्षीय बैठक भी शुरू हो गई है। इस दौरान दोनों देशों के बीच समुद्री सुरक्षा और रक्षा सहयोग, कोस्ट गार्ड और समुद्री निगरानी समेत कई समझौते हो सकते हैं। मोदी भारतीय समुदाय के कार्यक्रम में भी शामिल होंगे। वह आज सेशेल्स की नेशनल असेंबली को संबोधित करेंगे। इसके साथ ही वे दुनिया के पहले ऐसे भारतीय प्रधानमंत्री बन जाएंगे, जिन्होंने 20 देशों की संसद या नेशनल असेंबली को संबोधित किया है। मोदी शनिवार को तीन दिन की राजकीय यात्रा पर सेशेल्स पहुंचे थे। राजधानी विक्टोरिया में राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी ने उनका औपचारिक स्वागत किया। दोनों नेताओं ने नेशनल बॉटनिकल गार्डन का दौरा किया और यादगार के तौर पर एक पौधा लगाया। PM मोदी को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया, 2 तस्वीरें… प्रधानमंत्री मोदी को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। यह एक सैन्य सम्मान है, जिसमें सैनिक अपनी जगह पर खड़े होकर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या किसी विशेष अतिथि को सलामी देते हैं। इसके बाद राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी ने मोदी का स्वागत किया। दोनों के बीच द्विपक्षीय बैठक शुरू हो गई है। PM मोदी के सेशेल्स दौरे से जुड़ी 3 तस्वीरें… सेशेल्स की राजधानी विक्टोरिया में शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी ने सेशेल्स कोस्ट गार्ड को भारत में बना फास्ट पेट्रोल वेसल ‘लेस्पवार’ सौंपा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी को भारत में बना फास्ट पेट्रोल वेसल ‘पीएस लेस्पवार’ सौंपा। इससे सेशेल्स की समुद्री निगरानी और उसके विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) में गश्त की क्षमता मजबूत होगी। PM मोदी सेशेल्स नेशनल बोटैनिकल गार्डन पहुंचे और वहां पर कछुए को पत्ते खिलाए। सेशेल्स से जुड़ी खास बातें जानिए… सेशेल्स की पहली बस्ती में शामिल थे 5 भारतीय पुर्तगाली नाविक वास्को द गामा ने पहली बार सेशेल्स को 1502 में खोज की थी। तब यहां पर लोगों की कोई स्थाई बसावट नहीं थी। इसके बाद कई सदियों तक अरब और यूरोपीय जहाज यहां रुकते रहे, लेकिन कोई स्थायी आबादी नहीं बनी। पहली बार 1770 में फ्रांस ने पहली स्थायी बस्ती बसाई। इसी दल में 15 फ्रांसीसी बसने वाले, 7 अफ्रीकी गुलाम और 5 भारतीय शामिल थे। इन्हें सेशेल्स का पहला स्थायी निवासी माना जाता है। इसके बाद 19वीं सदी में ब्रिटिश शासन के दौरान बिहार के भोजपुरी भाषी इलाकों से भी लोग यहां आकर बसने लगे। 20वीं सदी से तमिलनाडु और गुजरात से भी बड़ी संख्या में भारतीय व्यापारी, मजदूर और निर्माण कार्य से जुड़े लोग सेशेल्स पहुंचे। सेशेल्स के पूर्व राष्ट्रपति के पूर्वज बिहार से आज करीब 1.20 लाख आबादी वाले इस देश में भारतीय मूल के लोग लगभग 8% हैं। भारतीय मूल के लोगों में बिहारी समुदाय तीसरा सबसे बड़ा समूह माना जाता है। साल 2020 में राष्ट्रपति बने वेवेल रामकलावन की जड़ें भी बिहार से जुड़ी हैं। रामकलावन के परदादा करीब 138 साल पहले बिहार के गोपालगंज जिले के परसौनी गांव से कोलकाता पहुंचे थे। वहां से उन्हें गन्ने के खेतों में काम करने के लिए मॉरीशस भेजा गया। बाद में उनका परिवार सेशेल्स में बस गया। साल 2018 में, जब रामकलावन विपक्ष के सांसद थे, तब उन्होंने अपने पूर्वजों के गांव परसौनी का दौरा भी किया था। सेशेल्स के कछुए लंबी उम्र के लिए मशहूर दुनिया में कछुओं की 360 से ज्यादा प्रजातियां हैं। इनमें से सेशेल्स में पाया जाने वाला अल्डाब्रा जायंट कछुआ सबसे प्रसिद्ध प्रजातियों में से एक है। यह प्रजाति अपनी बेहद लंबी उम्र (औसत उम्र 150 साल) के लिए जानी जाती है। दुनिया का सबसे उम्रदराज जीवित स्थलीय जानवर जोनाथन भी इसी प्रजाति का कछुआ है। जोनाथन की उम्र करीब 194 साल मानी जाती है। उसका जन्म लगभग 1832 में हुआ था। वह 1882 में करीब 50 साल की उम्र में सेशेल्स से सेंट हेलेना भेज दिया गया था। वैज्ञानिक उसकी लंबी उम्र का राज जानने के लिए उसके डीएनए का अध्ययन कर रहे हैं। उनका मानना है कि उसकी कोशिकाएं इंसानों की कोशिकाओं की तरह तेजी से बदलाव नहीं करतीं। इससे उम्र बढ़ने और लंबी जिंदगी से जुड़े नए रहस्यों का पता चल सकता है। दुनिया का सबसे उम्रदराज जीवित कछुआ। इसका नाम जोनाथन है। यह एल्डाब्रा जायंट कछुए की प्रजाति का है और अटलांटिक महासागर में स्थित सेंट हेलेना द्वीप पर रहता है। मोदी बोले- भारत और सेशेल्स के राजनयिक संबंधों के 50 साल पूरे पीएम मोदी ने सेशेल्स दौरे पर कहा- सेशेल्स भारत का महत्वपूर्ण समुद्री पड़ोसी और ‘विजन महासागर (MAHASAGAR)’ का प्रमुख साझेदार है। इस साल भारत और सेशेल्स के बीच राजनयिक संबंधों के 50 वर्ष पूरे हो रहे हैं। दोनों देशों के संबंध आपसी विश्वास, लोकतांत्रिक मूल्यों, विविधता के सम्मान और लोगों के गहरे जुड़ाव पर आधारित हैं। फरवरी 2026 में राष्ट्रपति हर्मिनी की भारत यात्रा के बाद अब इस दौरे में द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने पर चर्चा होगी। दोनों देश हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा, समृद्धि और विकास को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर काम करेंगे। मैं सेशेल्स की नेशनल असेंबली को संबोधित करने वाला पहला भारतीय प्रधानमंत्री बनूंगा। यह अवसर दोनों देशों के मजबूत लोकतांत्रिक मूल्यों और संसदीय परंपराओं को दर्शाता है। सेशेल्स में बसे भारतीय समुदाय से मिलने का भी अवसर मिलेगा, जिसने पीढ़ियों से दोनों देशों की मित्रता को मजबूत किया है। मुझे विश्वास है कि यह यात्रा भारत-सेशेल्स संबंधों को और गहरा करेगी, हिंद महासागर में समुद्री सहयोग बढ़ाएगी और सुरक्षित, शांतिपूर्ण व समृद्ध हिंद महासागर क्षेत्र के साझा दृष्टिकोण को आगे बढ़ाएगी। मोदी सेशेल्स जाने वाले सिर्फ दूसरे प्रधानमंत्री पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी साल 1976 में सेशेल्स गई थीं। उसी साल सेशेल्स आजाद हुआ था। भारत ने सेशेल्स के स्वतंत्रता समारोह में नौसेना का युद्धपोत आईएनएस नीलगिरि भी भेजा था। इसके बाद इंदिरा गांधी ने 1981 में फिर सेशेल्स का दौरा किया था। उनकी यात्रा के बाद, लगभग 34 साल तक किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री ने सेशेल्स की यात्रा नहीं की थी। इस दौरे का सबसे बड़ा उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक मौजूदगी और समुद्री सुरक्षा सहयोग को मजबूत करना था। मोदी की इस यात्रा के
Elon Musk SpaceX Story: Trillionaire on 55th Birthday

Hindi News Business Elon Musk SpaceX Story: Trillionaire On 55th Birthday | 3 Rocket Failures वॉशिंगटन3 मिनट पहले कॉपी लिंक साल 2008 में जब पूरी दुनिया मंदी की कगार पर खड़ी थी, अमेरिकी शेयर बाजार क्रैश हो चुका था और बड़ी-बड़ी बिलियन डॉलर कंपनियां मिट्टी में मिल रही थीं। तब एक इंसान जिसका नाम इलॉन मस्क था वो अपनी जिंदगी का सबसे बड़ा जुआ खेल रहा था। तीन रॉकेट लॉन्च फेल हो चुके थे। दूसरी कंपनी टेस्ला भी डूब रही थी। उसने अपना आखिरी एक-एक पैसा आखिरी रॉकेट लॉन्च पर लगा दिया। अगर ये फेल होता तो वो दिवालिया हो जाते। उनकी पूर्व पत्नी तालुलाह राइली बताती हैं, “मस्क खुद से बातें करने लगे थे, हाथ फैलाकर जोर-जोर से चिल्लाते थे। लगता था कि उन्हें दिल का दौरा न पड़ जाए।” लेकिन आज इसी रॉकेट कंपनी स्पेसएक्स के आईपीओ ने मस्क को दुनिया का पहला ट्रिलियनेयर बना दिया है। यानी उनकी नेटवर्थ 94 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा हो गई। आज 28 जून 2026 को मस्क 55 साल के हो गए हैं। इस मौक पर स्पेसएक्स की कहानी… 12 जून 2026 को इलॉन मस्क दुनिया के पहले ट्रिलियनेयर बने थे। उनकी नेटवर्थ 95 लाख करोड़ रुपए के पार पहुंच गई थी। अमेरिकी शेयर बाजार नैस्डैक पर स्पेसएक्स के शेयर की ट्रेडिंग 150 डॉलर प्रति शेयर पर शुरू हुई। जिसके बागद मस्क की कुल नेटवर्थ 1.1 ट्रिलियन डॉलर हो गई। जब मस्क ने अपनी पूरा पैसा रिस्की बिजनेस में दांव पर लगा दिया… इस कहानी की शुरुआत 1990 के दशक से होती है। डॉट कॉम बूम चल रहा था। उन्होंने स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से ड्रॉपआउट कर ‘जिप 2’ नाम की ऑनलाइन सिटी गाइड शुरू की, जिसे कॉम्पेक ने 37 मिलियन डॉलर में खरीदा। इसके बाद उन्होंने ‘x.com’ बनाया जो आगे चलकर पेपाल बना। जब इसे eBay ने 1.5 बिलियन डॉलर में खरीदा, तो मस्क के हिस्से 180 मिलियन डॉलर आए। इससे आराम से जीवन कट सकता था, लेकिन मस्क ने इस पूरी रकम को तीन बेहद रिस्की बिजनेस में लगा दिया। 100 मिलियन डॉलर स्पेसेक्स में, 70 मिलियन डॉलर टेस्ला में और 10 मिलियन डॉलर सोलर में। वो ताना जिसने मस्क को रॉकेट साइंटिस्ट बना दिया… साल 2001 में स्पेसेक्स की शुरुआत के समय मस्क रूस गए थे। वे पुरानी रीफर्बिश्ड इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल खरीदना चाहते थे। रूसियों ने उनका मजाक उड़ाते हुए ताना मारा, “शायद यह इंसान एलियंस को भी पैसे ट्रांसफर करना चाहता है, mars.com। पूरी गैलेक्सी में फ्री मनी ट्रांसफर!” जब मस्क ने एक रॉकेट के लिए 8 मिलियन डॉलर देने की बात की, तो रूसी अधिकारी ने हंसते हुए कहा, “8 मिलियन डॉलर में मैं तुम्हें रॉकेट्स का ब्रोशर और एक वोदका की बोतल फ्री दे सकता हूं।” रूसियों ने एक रॉकेट की कीमत 18 से 21 मिलियन डॉलर तक बढ़ा दी। मस्क समझ गए कि इनसे बात करना बेकार है और उन्होंने तय किया कि वे अपना रॉकेट खुद बनाएंगे। उन्होंने कैलकुलेट किया कि रॉकेट बनाने में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल जैसे टाइटेनियम, कॉपर और कार्बन फाइबर की असली कीमत रॉकेट की फाइनल सेलिंग प्राइस के 2% से भी कम होती है। यानी बाकी का 98% हिस्सा सप्लायर्स का मुनाफा और इनएफिशिएंसी थी। नासा जैसी कंपनी एक साधारण लैच यानी दरवाजे की कुंडी भी 1,500 डॉलर में खरीदती थीं क्योंकि वह “एयरोस्पेस ग्रेड” थी। मस्क ने तुरंत एक हार्डवेयर स्टोर से 30 डॉलर का बाथरूम लैच बुलवाया और अपनी टीम से बोला “यह लैच चांद पर भी दरवाजा बंद करेगा और मंगल पर भी।” इस तरह उन्होंने खर्च को 49 गुना कम कर दिया। उन्होंने 200 डॉलर प्रति किलो में बिकने वाले कार्बन फाइबर की जगह 3 से 4 डॉलर प्रति किलो वाले स्टेनलेस स्टील का इस्तेमाल शुरू किया। तीन फेलियर के बाद मस्क को कामयाबी मिली… फ्लाइट 1 (24 मार्च, 2006): इसे ओमेलेक आइलैंड लॉन्च साइट से छोड़ा गया था। उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद रॉकेट की फ्यूल लाइन में आग लग गई और यह क्रैश हो गया। फ्लाइट 2 (21 मार्च, 2007): यह दूसरी उड़ान थी। शुरुआती दौर में तो रॉकेट ने अच्छा काम किया, लेकिन बाद में यह अनियंत्रित होकर घूमने लगा और ऑर्बिट तक नहीं पहुंच पाया। फ्लाइट 3 (3 अगस्त, 2008): इस मिशन में रॉकेट का पहला हिस्सा कामयाबी से अलग तो हो गया, लेकिन थोड़ी सी गड़बड़ी हो गई। बचे हुए थ्रस्ट में थोड़ी देरी होने की वजह से पहला और दूसरा हिस्सा आपस में टकरा गए, जिससे रॉकेट तबाह हो गया।2008 में एक फेल लॉन्च के मलबे को टटोलते हुए इलॉन मस्क। मस्क के तीन रॉकेट लॉन्च लगातार फेल हुए थे, जिसके बाद वह पूरी तरह दिवालिया होने की कगार पर पहुंच गए थे। फ्लाइट 4 (28 सितंबर, 2008): यह कंपनी के लिए ‘करो या मरो’ जैसी कोशिश थी। इस बार फॉल्कन 1 ने बिल्कुल सही उड़ान भरी। डमी पेलोड को पृथ्वी की निचली कक्षा में पहुंचा दिया। इसने स्पेसएक्स को ऑर्बिट तक पहुंचने वाली दुनिया की पहली प्राइवेट कंपनी बना दिया। जब फाल्कन-9 ने रॉकेट साइंस के नियम बदल दिए… जब मस्क ने दोबारा इस्तेमाल होने वाले रीयूजेबल रॉकेट्स बनाने की बात की थी, तो रूसी एक्सपर्ट्स ने हंसते हुए कहा था, “रॉकेट को दोबारा उड़ाना ऐसा ही है जैसे पानी पीकर वापस बोतल में थूकना और फिर उसे पी लेना! यह बकवास है। लेकिन स्पेसेक्स ने इसे भी सच कर दिखाया। कंपनी ने 22 दिसंबर 2015 को पहला रीयूजेबल रॉकेट फाल्कन 9 लॉन्च और लैंड कराया। इलॉन मस्क दुनिया का सबसे ताकतवर रॉकेट स्टारशिप भी बना रहे हैं। वे इस पूरी तरह से रीयूजेबल रॉकेट से इंसानों को मंगल ग्रह पर भेजना चाहते हैं। वहां इलॉन मस्क इंसानों की बस्ती बसाना चाहते हैं। एक रॉकेट के फर्स्ट स्टेज पर 36 से 48 मिलियन डॉलर का खर्च आता है। पुरानी कंपनियां इसे समंदर में कचरे की तरह गिरा देती थीं, लेकिन स्पेसएक्स का फाल्कन 9 रॉकेट ऊपर जाता है और उसका फर्स्ट स्टेज वापस आकर सीधे जमीन या शिप पर वर्टिकली लैंड कर जाता है। स्पेसएक्स ने 22 दिसंबर 2015 को पहला रीयूजेबल रॉकेट फाल्कन 9 लॉन्च और लैंड कराया था। सुनीता विलियम्स को भी मस्क का स्पेसक्राफ्ट वापस लाया आज इलॉन मस्क की इसी







