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कटहल का अचार रेसिपी: सबसे खराब नहीं होगा चटपटे ‘कटहल का अचार’, नोट कर लें घर पर बनाने की आसान विधि

कटहल का अचार रेसिपी

30 जून 2026 को 16:48 IST पर अद्यतन किया गया कटहल का अचार रेसिपी: कटहल का सीजन खत्म होने से पहले ही इस खास अचार को बचाकर रखें। पूरे साल यह कटहल का अचार बिल्कुल भी बुरा नहीं होगा और इसका स्वाद पराठों के साथ बहुत ही लाजवाब लगता है। यह अचार की सब्जी का एक बेहतरीन विकल्प भी है। तो एक बार इसे जरूर खरीदें और इस आसान सी को अभी नोट कर लें। अनुसरण करना : कटहल का आचार्य बनाने की सामग्री कटहल हल्दी का तेल फ़, मेथी दाना, जीरा, बिजनेस बिजनेस, सौंफ और कलौंजी हल्दी पाउडर, हल्दी लाल मिर्च, हींग, काला नमक और सादा नमक सिरका 2-3 मी छवि: एआई कटहल कच्चे हाथों में छोटे सरसों का तेल लगा लें ताकि उसका दूध न मिले। इसके टुकड़े टुकड़े और बीच वाले कठोर हिस्सों को हटा दिया जाता है। छवि: एआई कटहल के अनुमान को पानी में थोड़ा सा नमक और हल्दी 5-7 मिनट तक के मसाले या स्टीम में 50-60 प्रतिशत तक गला दिया जाए। छवि: एआई यह अच्छा है सारा पानी निकाल कर लें और सूती कपड़े पर फैलाकर 4 से 6 घंटे तक धूप में सुखाएं। फिर साबुत मसाले जैसे सौंफ, मेथी, जीरा और राई को आधार पर प्रभाव भून लें और ठंडा होने पर दरदरा पीस लें। छवि: एआई चिप्स हुए कटहल में पिसे हुए सेमेस्टर, हल्दी, लाल मिर्च, नमक, कलौंजी और हींग शामिल हैं। आप कच्चा तेल भी डाल सकते हैं, अब इसे कटहल और पाउडर और सिरका भी अच्छी तरह से मिला लें। छवि: एआई इसे कांच के तीखा जार में भरें। अचार में तेल की मात्रा इतनी होनी चाहिए कि कटहल पूरी तरह से डूबा रहे। जार को 3-4 दिन तक धूप में रखें, ताकि आचार्य महान से पक जाएं। छवि: एआई द्वारा प्रकाशित: कीर्ति सोनी प्रकाशित 30 जून 2026 16:48 IST पर (टैग्सटूट्रांसलेट) कटहल का अचार रेसिपी इन हिंदी (टी) कटहल का अचार रेसिपी (टी) पारंपरिक भारतीय अचार (टी) घर का बना अचार (टी) कटहल का अचार कैसे बनाएं (टी) मसालेदार कटहल का अचार (टी) अचार भंडारण युक्तियाँ

T20 World Cup, West Indies, South Africa, Semifinal, Ian Bishop, Cricket News, Australia, England

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Hindi News Sports Cricket T20 World Cup, West Indies, South Africa, Semifinal, Ian Bishop, Cricket News, Australia, England स्पोर्ट्स डेस्क6 मिनट पहले कॉपी लिंक विमेंस टी-20 वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल की टीमें तय हो चुकी हैं। इस बड़े टूर्नामेंट में जीत हासिल करने के लिए परिस्थितियों के अनुसार ढलना सबसे महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि टीमों को बिना किसी अभ्यास समय के एक शहर से दूसरे शहर (जैसे साउथम्प्टन से लीड्स और मैनचेस्टर से लॉर्ड्स) का सफर तय करना पड़ा है। जियोस्टार के मीडिया डे के दौरान ICC विमेंस टी-20 वर्ल्ड कप एक्सपर्ट इयान बिशप ने कहा, ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड वर्तमान में टूर्नामेंट की दो सबसे मजबूत टीमें दिख रही हैं। हालांकि नॉकआउट स्टेज में किसी भी टीम को कमजोर नहीं माना जा सकता। ऑस्ट्रेलिया की बल्लेबाजी की गहराई सबसे बड़ी ताकत इयान बिशप ने कहा, ऑस्ट्रेलियाई टीम ने टूर्नामेंट में लगातार शानदार खेल दिखाया है और वे छह बार की वर्ल्ड चैंपियन हैं। टीम की सबसे बड़ी ताकत उनकी बल्लेबाजी की गहराई और पावर-हिटिंग है। टीम में जॉर्जिया वोल, बेथ मूनी, फीबी लिचफील्ड (जो दुनिया की बेस्ट युवा खिलाड़ियों में से एक हैं), एश्ले गार्डनर, जॉर्जिया वेयरहैम और एनाबेल सदरलैंड जैसी गहरी बल्लेबाजी लाइन-अप है। उनके पास सोफी मोलिनक्स, किम गार्थ, और युवा तेज गेंदबाज लूसी हैमिल्टन जैसी गेंदबाजी विकल्प भी मौजूद हैं। वेस्टइंडीज को बेहतर खेल दिखाने की जरूरत वेस्टइंडीज की टीम 2016 की पूर्व चैंपियन रह चुकी है, लेकिन इस टूर्नामेंट में उनका खेल उतार-चढ़ाव भरा रहा है। उन्होंने कहा, आयरलैंड और श्रीलंका के खिलाफ मैचों में उनकी बल्लेबाजी आत्मविश्वास से कम दिखी। सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया जैसी मजबूत टीम को रोकने के लिए वेस्टइंडीज को अपने खेल के लेवल में 25% से 40% तक सुधार करना होगा। टीम की सीनियर खिलाड़ी हेली मैथ्यूज और डेंड्रा डॉटिन अब तक बल्ले से अपनी लय में नहीं दिखी हैं, हालांकि मैथ्यूज ने गेंदबाजी अच्छी की है। शेमाइन कैंपबेल ने न्यूजीलैंड के खिलाफ पहले मैच में 90 रनों की शानदार पारी खेली थी। टीम को स्टेफनी टेलर और आलिया अलीन से बड़ी उम्मीदें होंगी। इंग्लैंड घरेलू परिस्थितियों में बेहद मजबूत इंग्लैंड की टीम का अपने घर में किसी भी विमेंस वर्ल्ड कप में न हारने का एक बेहतरीन रिकॉर्ड रहा है। वर्तमान में वे खिताब की बड़ी दावेदार मानी जा रही हैं। यदि उनकी कप्तान नेट साइवर-ब्रंट पूरी तरह फिट होकर मैदान पर उतरती हैं, तो इंग्लैंड को उनके घरेलू मैदानों पर हराना बेहद मुश्किल होगा। इंग्लैंड ने ऑस्ट्रेलिया की तरह ही टूर्नामेंट में बड़े स्कोर बनाए हैं और उनकी बल्लेबाजी काफी गहरी है। साउथ अफ्रीका उलटफेर करने में सक्षम साउथ अफ्रीका की टीम को किसी भी फॉर्मेट में कम नहीं आंकी जा सकती। टीम हर बार ICC टूर्नामेंट्स के नॉकआउट स्टेज और फाइनल में पहुंचकर संघर्ष करती है। हालांकि पिछले रन-चेज में उनका खेल थोड़ा डगमगाया था, लेकिन टीम के पास मरिजाने कैप, लौरा वोल्वार्ट, अयाबोंगा खाका और तस्मिन ब्रिट्स जैसे मैच विनर खिलाड़ी हैं। साउथ अफ्रीका के पास लड़ने का कल्चर और जज्बा है। ICC विमेंस टी-20 वर्ल्ड कप 2026 के सेमीफाइनल मुकाबले का लाइव प्रसारण जियोहॉटस्टार और स्टार स्पोर्ट्स नेटवर्क पर देखें। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

टेक कंपनियों पर ऑस्ट्रेलिया सख्त:कानून तोड़ने पर जुर्माना बढ़ाकर 660 करोड़ रुपए करने की तैयारी‎

टेक कंपनियों पर ऑस्ट्रेलिया सख्त:कानून तोड़ने पर जुर्माना बढ़ाकर 660 करोड़ रुपए करने की तैयारी‎

ऑस्ट्रेलिया 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया से दूर रखने के अपने कानून को और सख्त करने की तैयारी में है। किशोरों के लिए प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आयु सीमा लागू करने वाला ऑस्ट्रेलिया दुनिया का पहला देश बना था, लेकिन शुरुआती नतीजों से सरकार संतुष्ट नहीं है। कानून के तहत स्नैपचैट, इंस्टाग्राम और यूट्यूब जैसे लोकप्रिय प्लेटफॉर्म के लिए न्यूनतम आयु सीमा तय की गई है। इसके बाद ब्रिटेन, कनाडा, इंडोनेशिया और ब्राजील जैसे देशों ने भी इसी तरह के कदम उठाने शुरू किए हैं। हालांकि सरकारी रिपोर्ट बताती है कि कानून लागू होने के बावजूद किशोरों के सोशल मीडिया इस्तेमाल में अपेक्षित कमी नहीं आई है। हजारों अकाउंट जरूर बंद हुए हैं, लेकिन दस में से सात अभिभावकों का कहना है कि उनके बच्चों के अकाउंट अब भी सक्रिय हैं। शोधकर्ताओं ने भी पाया कि अधिकांश ऑस्ट्रेलियाई किशोर किसी न किसी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर रहे हैं। प्रधानमंत्री एंथोनी अल्बानीज ने कहा कि बड़ी टेक कंपनियां कानून का पालन सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठा रही हैं। उनके मुताबिक अब भी बड़ी संख्या में बच्चे सोशल मीडिया पर मौजूद हैं। संचार मंत्री अनिका वेल्सने आरोप लगाया कि टेक कंपनियां नियमों से बचने के लिए न्यूनतम प्रयास कर रही हैं और अपनी पुरानी रणनीतियां अपना रही हैं। दूसरी ओर, टेक कंपनियों ने इस कानून को अत्यधिक कठोर बताते हुए कहा है कि इसमें प्लेटफॉर्म पर पहले से मौजूद सुरक्षा उपायों को नजर अंदाज किया गया है। प्रतिबंधित प्लेटफॉर्म रेडिट ने तो ऑस्ट्रेलियाई सरकार के खिलाफ मुकदमा भी दायर किया है। कंपनी का तर्क है कि यह कानून बच्चों के राजनीतिक संवाद और अभिव्यक्ति के अधिकारों का उल्लंघन करता है। इस बीच ऑस्ट्रेलिया के ई-सेफ्टी कमिश्नर ने फेसबुक,इंस्टाग्राम, स्नैपचैट, टिकटॉक और यूट्यूब के खिलाफ कानून के पालन की जांच शुरू कर दी है। कानून के तहत प्रतिबंधित 10 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से बच्चों को दूर रखना संबंधित कंपनियों की जिम्मेदारी है। ऑनलाइन सेफ्टी नियामक केकानूनी अधिकार और बढ़ेंगे कानून तोड़ने वाली टेक्नोलॉजी कंपनियों पर अधिकतम जुर्माना दोगुना बढ़ाकर 660 करोड़ रुपए किया जाएगा। सरकार का कहना है, ऑनलाइन सेफ्टी नियामक के कानूनी अधिकार बढ़ाए जाएंगे। कंपनियों को बताना पड़ेगा कि उन्होंने 16 साल से कम आयु के बच्चों को अपने प्लेटफॉर्म से दूर रखने के लिए कौन से कदम उठाए हैं।

टेक कंपनियों पर ऑस्ट्रेलिया सख्त:कानून तोड़ने पर जुर्माना बढ़ाकर 660 करोड़ रुपए करने की तैयारी‎; किशोरों को सोशल मीडिया से दूर रखने की कोशिश

टेक कंपनियों पर ऑस्ट्रेलिया सख्त:कानून तोड़ने पर जुर्माना बढ़ाकर 660 करोड़ रुपए करने की तैयारी‎; किशोरों को सोशल मीडिया से दूर रखने की कोशिश

ऑस्ट्रेलिया 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया से दूर रखने के अपने कानून को और सख्त करने की तैयारी में है। किशोरों के लिए प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आयु सीमा लागू करने वाला ऑस्ट्रेलिया दुनिया का पहला देश बना था, लेकिन शुरुआती नतीजों से सरकार संतुष्ट नहीं है। कानून के तहत स्नैपचैट, इंस्टाग्राम और यूट्यूब जैसे लोकप्रिय प्लेटफॉर्म के लिए न्यूनतम आयु सीमा तय की गई है। इसके बाद ब्रिटेन, कनाडा, इंडोनेशिया और ब्राजील जैसे देशों ने भी इसी तरह के कदम उठाने शुरू किए हैं। हालांकि सरकारी रिपोर्ट बताती है कि कानून लागू होने के बावजूद किशोरों के सोशल मीडिया इस्तेमाल में अपेक्षित कमी नहीं आई है। हजारों अकाउंट जरूर बंद हुए हैं, लेकिन दस में से सात अभिभावकों का कहना है कि उनके बच्चों के अकाउंट अब भी सक्रिय हैं। शोधकर्ताओं ने भी पाया कि अधिकांश ऑस्ट्रेलियाई किशोर किसी न किसी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर रहे हैं। प्रधानमंत्री एंथोनी अल्बानीज ने कहा कि बड़ी टेक कंपनियां कानून का पालन सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठा रही हैं। उनके मुताबिक अब भी बड़ी संख्या में बच्चे सोशल मीडिया पर मौजूद हैं। संचार मंत्री अनिका वेल्सने आरोप लगाया कि टेक कंपनियां नियमों से बचने के लिए न्यूनतम प्रयास कर रही हैं और अपनी पुरानी रणनीतियां अपना रही हैं। दूसरी ओर, टेक कंपनियों ने इस कानून को अत्यधिक कठोर बताते हुए कहा है कि इसमें प्लेटफॉर्म पर पहले से मौजूद सुरक्षा उपायों को नजर अंदाज किया गया है। प्रतिबंधित प्लेटफॉर्म रेडिट ने तो ऑस्ट्रेलियाई सरकार के खिलाफ मुकदमा भी दायर किया है। कंपनी का तर्क है कि यह कानून बच्चों के राजनीतिक संवाद और अभिव्यक्ति के अधिकारों का उल्लंघन करता है। इस बीच ऑस्ट्रेलिया के ई-सेफ्टी कमिश्नर ने फेसबुक,इंस्टाग्राम, स्नैपचैट, टिकटॉक और यूट्यूब के खिलाफ कानून के पालन की जांच शुरू कर दी है। कानून के तहत प्रतिबंधित 10 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से बच्चों को दूर रखना संबंधित कंपनियों की जिम्मेदारी है। ऑनलाइन सेफ्टी नियामक केकानूनी अधिकार और बढ़ेंगे कानून तोड़ने वाली टेक्नोलॉजी कंपनियों पर अधिकतम जुर्माना दोगुना बढ़ाकर 660 करोड़ रुपए किया जाएगा। सरकार का कहना है, ऑनलाइन सेफ्टी नियामक के कानूनी अधिकार बढ़ाए जाएंगे। कंपनियों को बताना पड़ेगा कि उन्होंने 16 साल से कम आयु के बच्चों को अपने प्लेटफॉर्म से दूर रखने के लिए कौन से कदम उठाए हैं।

जापान में महिला मेयर के मातृत्व अवकाश पर विवाद:कवाटा बोली- देश में महिलाओं के प्रति अब भी कितना भेदभाव मौजूद है

जापान में महिला मेयर के मातृत्व अवकाश पर विवाद:कवाटा बोली- देश में महिलाओं के प्रति अब भी कितना भेदभाव मौजूद है

पश्चिमी जापान के यवाटा शहर की 35 वर्षीय मेयर शोको कवाटा छह माह की गर्भवती हैं और चार महीने की मैटरनिटी छुट्टी लेने की योजना बना रही हैं। ऐसा करने वाली वह जापान की पहली मेयर होंगी, लेकिन उनकी इस योजना ने जापान में राष्ट्रीय बहस छेड़ दी है। कई लोगों ने उन्हें बेबी शू और शुभकामना उपहार भेजकर समर्थन दिया, लेकिन समाज के एक वर्ग ने इसे गैर जिम्मेदार फैसला बताते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने जनता से ज्यादा अपने निजी जीवन को प्राथमिकता दी है। कवाटा ने कहा कि इस विवाद ने उन्हें पहली बार महसूस कराया कि जापान में महिलाओं के प्रति अब भी कितना भेदभाव मौजूद है। देश में गर्भवती और कामकाजी महिलाओं के साथ होने वाले भेदभाव के लिए “माताहारा’ (मैटरनिटी हैरेसमेंट) जैसा अलग शब्द भी प्रचलित है। पूर्व जनरल तोशियो तमोगामी ने लिखा कि सार्वजनिक पद पर बैठे लोगों को इतनी लंबी छुट्टी नहीं लेनी चाहिए और बच्चों की योजना बना रही महिलाओं को चुनाव नहीं लड़ना चाहिए। बढ़ते विरोध के बाद कवाटा ने सोशल मीडिया से दूरी बना ली। जापान में स्थानीय निकायों के 1,740 प्रमुखों में महिलाओं की हिस्सेदारी अब भी 4% से कम है। राष्ट्रीय दैनिक मैनिची ने लिखा कि देश में ऐसा माहौल बनना चाहिए, जहां महिलाएं बिना भेदभाव के मैटरनिटी लीव ले सकें।

एक्ट्रेस ने बेंगलुरु की सड़क पर छेड़छाड़ का आरोप लगाया:'बिग बॉस कन्नड़' फेम दिव्या सुरेश बोलीं- अज्ञात व्यक्ति ने कार तक पीछा किया

एक्ट्रेस ने बेंगलुरु की सड़क पर छेड़छाड़ का आरोप लगाया:'बिग बॉस कन्नड़' फेम दिव्या सुरेश बोलीं- अज्ञात व्यक्ति ने कार तक पीछा किया

‘बिग बॉस कन्नड़’ की पूर्व कंटेस्टेंट और एक्ट्रेस दिव्या सुरेश ने बेंगलुरु में देर रात अपने साथ हुई कथित छेड़छाड़ की घटना शेयर की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि यह घटना रविवार रात करीब 11:30 बजे हुई, जब वह अपनी कजिन के साथ कार की ओर जा रही थीं। दिव्या ने इंस्टाग्राम स्टोरी में लिखा कि एक अज्ञात व्यक्ति उनका पीछा करने लगा और उनके सामने अश्लील हरकतें करने लगा। उन्होंने बताया कि उन्होंने और उनकी कजिन ने तुरंत उसे टोका, लेकिन वह नहीं रुका और उनके कार में बैठने तक उनका पीछा करता रहा। दिव्या ने कहा कि केवल रात में सड़क पर चलने की वजह से किसी भी महिला को इस तरह के उत्पीड़न का सामना नहीं करना चाहिए। उन्होंने अपनी पोस्ट में बेंगलुरु पुलिस को टैग करते हुए सवाल किया, “जिस सुरक्षा का हमें बार-बार भरोसा दिया जाता है, वह कहां है?” घटना का वीडियो भी किया था रिकॉर्ड दिव्या ने घटना का एक वीडियो भी रिकॉर्ड किया था, जिसे उन्होंने इंस्टाग्राम स्टोरी पर शेयर किया। वीडियो में उनकी कजिन कथित तौर पर उस व्यक्ति की ओर इशारा करते हुए कहती हैं, “उसके हाथ की हरकत देखो।” वहीं, दिव्या कहती हैं कि जैसे ही वे कार में बैठीं, वह व्यक्ति उनका पीछा करता रहा। उनकी कजिन वीडियो में पुलिस को फोन करने के लिए भी कहती सुनाई देती हैं। कौन हैं दिव्या सुरेश 33 साल की दिव्या सुरेश टीवी शो ‘बिग बॉस कन्नड़ 8’ में नजर आ चुकी हैं। यह शो 2021 में प्रसारित हुआ था और इसे किच्चा सुदीप ने होस्ट किया था। उन्होंने ‘नन्ना हेन्ड्थी MBBS’ और ‘जोड़ी हक्की’ जैसे कन्नड़ टीवी सीरियल्स में काम किया है। दिव्या 2017 में मिस इंडिया साउथ का टाइटल भी जीत चुकी हैं। उन्होंने उसी साल कन्नड़ फिल्म ‘#9 हिल्टन क्रॉस’ से अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की। वह ‘राउडी बेबी’, ‘केम्पू हलादी हसिरु’ और ‘हिरण्या’ जैसी कई फिल्मों में भी नजर आई हैं। पिछले साल भी रही थीं चर्चा में अक्टूबर 2025 में बेंगलुरु में हुए एक कथित हिट-एंड-रन मामले में भी दिव्या सुरेश का नाम सामने आया था। आरोप था कि उनकी कार ने एक बाइक को टक्कर मार दी, जिस पर तीन लोग सवार थे। हादसे में एक महिला के घुटने की हड्डी टूट गई और उसका ऑपरेशन कराना पड़ा। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर दिव्या की कार जब्त की थी। पूछताछ में दिव्या ने माना कि वह गाड़ी चला रही थीं। उनका कहना था कि फ्लाइट पकड़ने की जल्दी में वह मौके पर नहीं रुकीं। इस मामले में आरटी नगर ट्रैफिक पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर कानूनी प्रक्रिया शुरू की थी।

गर्मी से मौतें बढ़ने का अधिक खतरा यूरोपीय देशों में‎:फ्रांस में कार्डिएक अरेस्ट के मामले‎ चार गुना बढ़े; कई देशों में ट्रेन, न्यूक्लियर प्लांट बंद‎

गर्मी से मौतें बढ़ने का अधिक खतरा यूरोपीय देशों में‎:फ्रांस में कार्डिएक अरेस्ट के मामले‎ चार गुना बढ़े; कई देशों में ट्रेन, न्यूक्लियर प्लांट बंद‎

यूरोप इस समय भीषण गर्मी की चपेट में है। ‎इसका असर अब केवल लोगों के स्वास्थ्य तक‎ सीमित नहीं रहा, बल्कि अर्थव्यवस्था और‎ बुनियादी ढांचे पर भी साफ दिखने लगा है।‎ पश्चिमी यूरोप का रेल नेटवर्क अस्त-व्यस्त हो‎ गया है। फ्रांस में कई परमाणु रिएक्टर बंद कर दिए‎ गए हैं या उनकी क्षमता घटा दी गई है, क्योंकि वे‎ नदियों में अत्यधिक गर्म पानी छोड़ रहे हैं। फ्रांस‎ के एक ऑटोमोबाइल प्लांट में यूनियन नेताओं ने‎ फैक्ट्री फ्लोर पर असहनीय गर्मी का हवाला देते ‎हुए हड़ताल का ऐलान किया है।‎ फ्रांस और इटली में बिजली घरों के बंद होने से‎ सैकड़ों इलाकों में बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई है।‎ विशेषज्ञों का मानना है कि यदि गर्मी का यह दौर जारी रहा तो कई यूरोपीय देशों की अर्थव्यवस्था‎ पर असर पड़ सकता है और मृत्यु दर भी बढ़ ‎सकती है। शहरों में स्थिति और गंभीर है। मोटी‎ दीवारों वाली पुरानी इमारतें दिनभर की गर्मी‎ सोखकर रात तक छोड़ती रहती हैं, जिससे‎ अपार्टमेंट भट्ठी जैसे बन गए हैं। गर्मी से परेशान‎ लोग आधी रात के बाद पार्कों का रुख कर रहे हैं।‎ एयर कंडीशनर खरीदने की होड़ मची है। कई लोग‎ राहत के लिए होटलों में तक ठहर रहे हैं। पेरिस में राजनीतिक पर्यावरण के विशेषज्ञ ‎फ्रांस्वा जेमेने कहते हैं, “हर कोई यही पूछ रहा है ‎कि हम इस स्थिति के लिए तैयार क्यों नहीं थे। ”‎एक सप्ताह से अधिक समय से जारी इस हीटवेव ‎ने ब्रिटेन, फ्रांस और स्पेन में तापमान के कई‎ रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। दुनिया के सबसे तेजी से गर्म हो रहे महाद्वीप की अधिकांश इमारतें और‎ बुनियादी ढांचा ठंडे मौसम को ध्यान में रखकर ‎बनाए गए थे। पुराने भवनों में गर्मी सोखने वाली‎ निर्माण सामग्री का इस्तेमाल हुआ है। उनमें बाहरी‎ शटर जैसी व्यवस्थाएं भी कम हैं, जिससे गर्मी‎ इमारतों के भीतर ही कैद होकर मुश्किलें और बढ़ा‎ रही है। यूरोप का इंफ्रास्ट्रक्चर सर्दी से बचाव के लिए बना है, बढ़ती गर्मी के लिए यह तैयार नहीं‎ फ्रांस के स्वास्थ्य मंत्री स्टीफेनी रिस्ट के‎ अनुसार कार्डिएक अरेस्ट के मामलो में चार गुना बढ़ोतरी हुई है। पहले 5 से 10 मामले‎ आते थे, अब 20 से 30 आ रहे हैं। 2023 ‎की एक स्टडी बताती है कि गर्मी से मौत का‎ खतरा फ्रांस, स्पेन और इटली में ज्यादा है।‎ इन देशों को ज्यादा नुकसान‎ जर्मन इंश्योरेंस कंपनी अलायंज की रिपोर्ट में ‎इटली, फ्रांस,जर्मनी व स्पेन को गर्मी की वजह से ‎सर्वाधिक आर्थिक नुकसान की बात कही गई है।‎ चार न्यूक्लियर रिएक्टर बंद‎ गर्मी की वजह से तापमान इतना बढ़ गया कि‎ फ्रांस में चार परमाणु बिजली घरों के रिएक्टर तक‎ बंद करने पड़े हैं।‎ जर्मनी, ब्रिटेन में कई ट्रेनें रद्द‎ गर्मी बढ़ने से जर्मनी, स्विटजरलैंड और ब्रिटेन में ‎ट्रेनें रद्द करना पड़ी हैं। कुछ अन्य देशों में ट्रेन के ‎ऑनबोर्ड सिस्टम गर्मी नहीं झेल पा रहे हैं।‎ गर्मी से बचने की योजनाएं फ्रांस ने 52 उपायों के साथ पिछले साल 388 पेज की योजना जारी की है। लंदन में इस सप्ताह ‎गर्मी से बचाने का प्लान पेश किया गया है।‎

गर्मी से मौतें बढ़ने का अधिक खतरा यूरोपीय देशों में‎:फ्रांस में कार्डिएक अरेस्ट के मामले‎ चार गुना बढ़े; कई देशों में ट्रेन, न्यूक्लियर प्लांट बंद‎

गर्मी से मौतें बढ़ने का अधिक खतरा यूरोपीय देशों में‎:फ्रांस में कार्डिएक अरेस्ट के मामले‎ चार गुना बढ़े; कई देशों में ट्रेन, न्यूक्लियर प्लांट बंद‎

यूरोप इस समय भीषण गर्मी की चपेट में है। ‎इसका असर अब केवल लोगों के स्वास्थ्य तक‎ सीमित नहीं रहा, बल्कि अर्थव्यवस्था और‎ बुनियादी ढांचे पर भी साफ दिखने लगा है।‎ पश्चिमी यूरोप का रेल नेटवर्क अस्त-व्यस्त हो‎ गया है। फ्रांस में कई परमाणु रिएक्टर बंद कर दिए‎ गए हैं या उनकी क्षमता घटा दी गई है, क्योंकि वे‎ नदियों में अत्यधिक गर्म पानी छोड़ रहे हैं। फ्रांस‎ के एक ऑटोमोबाइल प्लांट में यूनियन नेताओं ने‎ फैक्ट्री फ्लोर पर असहनीय गर्मी का हवाला देते ‎हुए हड़ताल का ऐलान किया है।‎ फ्रांस और इटली में बिजली घरों के बंद होने से‎ सैकड़ों इलाकों में बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई है।‎ विशेषज्ञों का मानना है कि यदि गर्मी का यह दौर जारी रहा तो कई यूरोपीय देशों की अर्थव्यवस्था‎ पर असर पड़ सकता है और मृत्यु दर भी बढ़ ‎सकती है। शहरों में स्थिति और गंभीर है। मोटी‎ दीवारों वाली पुरानी इमारतें दिनभर की गर्मी‎ सोखकर रात तक छोड़ती रहती हैं, जिससे‎ अपार्टमेंट भट्ठी जैसे बन गए हैं। गर्मी से परेशान‎ लोग आधी रात के बाद पार्कों का रुख कर रहे हैं।‎ एयर कंडीशनर खरीदने की होड़ मची है। कई लोग‎ राहत के लिए होटलों में तक ठहर रहे हैं। पेरिस में राजनीतिक पर्यावरण के विशेषज्ञ ‎फ्रांस्वा जेमेने कहते हैं, “हर कोई यही पूछ रहा है ‎कि हम इस स्थिति के लिए तैयार क्यों नहीं थे। ”‎एक सप्ताह से अधिक समय से जारी इस हीटवेव ‎ने ब्रिटेन, फ्रांस और स्पेन में तापमान के कई‎ रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। दुनिया के सबसे तेजी से गर्म हो रहे महाद्वीप की अधिकांश इमारतें और‎ बुनियादी ढांचा ठंडे मौसम को ध्यान में रखकर ‎बनाए गए थे। पुराने भवनों में गर्मी सोखने वाली‎ निर्माण सामग्री का इस्तेमाल हुआ है। उनमें बाहरी‎ शटर जैसी व्यवस्थाएं भी कम हैं, जिससे गर्मी‎ इमारतों के भीतर ही कैद होकर मुश्किलें और बढ़ा‎ रही है। यूरोप का इंफ्रास्ट्रक्चर सर्दी से बचाव के लिए बना है, बढ़ती गर्मी के लिए यह तैयार नहीं‎ फ्रांस के स्वास्थ्य मंत्री स्टीफेनी रिस्ट के‎ अनुसार कार्डिएक अरेस्ट के मामलो में चार गुना बढ़ोतरी हुई है। पहले 5 से 10 मामले‎ आते थे, अब 20 से 30 आ रहे हैं। 2023 ‎की एक स्टडी बताती है कि गर्मी से मौत का‎ खतरा फ्रांस, स्पेन और इटली में ज्यादा है।‎ इन देशों को ज्यादा नुकसान‎ जर्मन इंश्योरेंस कंपनी अलायंज की रिपोर्ट में ‎इटली, फ्रांस,जर्मनी व स्पेन को गर्मी की वजह से ‎सर्वाधिक आर्थिक नुकसान की बात कही गई है।‎ चार न्यूक्लियर रिएक्टर बंद‎ गर्मी की वजह से तापमान इतना बढ़ गया कि‎ फ्रांस में चार परमाणु बिजली घरों के रिएक्टर तक‎ बंद करने पड़े हैं।‎ जर्मनी, ब्रिटेन में कई ट्रेनें रद्द‎ गर्मी बढ़ने से जर्मनी, स्विटजरलैंड और ब्रिटेन में ‎ट्रेनें रद्द करना पड़ी हैं। कुछ अन्य देशों में ट्रेन के ‎ऑनबोर्ड सिस्टम गर्मी नहीं झेल पा रहे हैं।‎ गर्मी से बचने की योजनाएं फ्रांस ने 52 उपायों के साथ पिछले साल 388 पेज की योजना जारी की है। लंदन में इस सप्ताह ‎गर्मी से बचाने का प्लान पेश किया गया है।‎

महाराजा रणजीत सिंह की बरसी पर पाकिस्तान गए श्रद्धालु लौटे:गुरुद्वारों के दर्शन कर जताई खुशी; सरकारों से मांगी वीजा में ढील

महाराजा रणजीत सिंह की बरसी पर पाकिस्तान गए श्रद्धालु लौटे:गुरुद्वारों के दर्शन कर जताई खुशी; सरकारों से मांगी वीजा में ढील

महाराजा रणजीत सिंह की बरसी के अवसर पर पाकिस्तान गया सिख श्रद्धालुओं का जत्था मंगलवार को अटारी-वाघा बॉर्डर के रास्ते भारत लौट आया। इस यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं ने ननकाना साहिब, पंजा साहिब, करतारपुर साहिब सहित कई ऐतिहासिक गुरुद्वारों के दर्शन किए। भारत लौटने पर श्रद्धालुओं के चेहरों पर खुशी झलक रही थी। श्रद्धालुओं ने बताया कि यह यात्रा उनके लिए काफी इमोशनल रही। इसे वह भुला नहीं सकते। अमृतसर के श्रद्धालु बलवीर सिंह ने कहा कि सबसे पहले उन्होंने ननकाना साहिब में गुरु नानक देव जी के जन्मस्थान के दर्शन किए। इसके बाद पंजा साहिब, लाहौर स्थित अन्य ऐतिहासिक गुरुद्वारे और करतारपुर साहिब के दर्शन का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि इन पवित्र स्थलों पर पहुंचकर मन को गहरी शांति और आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त हुआ। पाकिस्तान में व्यवस्थाओं और सुरक्षा की सराहना श्रद्धालुओं ने पाकिस्तान में की गई व्यवस्थाओं की भी सराहना की। उन्होंने बताया कि यात्रा के दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम थे और हर समय सुरक्षा कर्मी उनके साथ मौजूद रहे। किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ा। श्रद्धालुओं ने कहा कि उन्हें वहां लोगों से बहुत प्रेम, सम्मान और सहयोग मिला, जिससे उनका अनुभव और भी बेहतर हो गया। एक अन्य श्रद्धालु हरजीत कौर ने बताया कि यह जत्था 21 जून को पाकिस्तान गया था और आज 30 जून को वापस लौटा। उन्होंने कहा कि इस यात्रा के दौरान उनकी वर्षों पुरानी मनोकामना पूरी हुई। पवित्र गुरुद्वारों के दर्शन कर उन्होंने अत्यंत आनंद और संतोष महसूस किया। वीजा प्रक्रिया आसान करने की श्रद्धालुओं की अपील श्रद्धालुओं ने भारत और पाकिस्तान दोनों सरकारों से अपील की कि धार्मिक यात्राओं को और सरल बनाया जाए। उन्होंने कहा कि वीजा प्रक्रिया को आसान किया जाना चाहिए और श्रद्धालुओं को अधिक से अधिक अवसर दिए जाने चाहिए ताकि वे अपने पवित्र स्थलों के दर्शन कर सकें। इससे दोनों देशों के बीच आपसी प्रेम, भाईचारा और सांस्कृतिक संबंध मजबूत होंगे। साझा विरासत को संरक्षित करने बेहतर प्रयास उन्होंने यह भी कहा कि साझा विरासत को संरक्षित करने और लोगों के बीच विश्वास बढ़ाने के लिए सीमा पार धार्मिक यात्राओं को बढ़ावा देना बहुत आवश्यक है। श्रद्धालुओं का मानना है कि ऐसे आयोजनों से न केवल आध्यात्मिक लाभ मिलता है, बल्कि दोनों देशों के बीच शांति और सद्भाव का संदेश भी जाता है।

रसोई में तेजी से जगह बना रहे फ्रोजन फूड:बर्गर पैटी, नगेट्स, मोमो और कबाब अब हमारे लंच-​डिनर का हिस्सा; सालाना ग्रोथ 14.5%

रसोई में तेजी से जगह बना रहे फ्रोजन फूड:बर्गर पैटी, नगेट्स, मोमो और कबाब अब हमारे लंच-​डिनर का हिस्सा; सालाना ग्रोथ 14.5%

भारतीय किचन में फ्रोजन फूड अब सिर्फ इमरजेंसी या पार्टी की जरूरत नहीं रहा। बर्गर पैटी, नगेट्स, मोमो और कबाब जैसे प्रोडक्ट्स तेजी से रोजमर्रा के खाने का हिस्सा बन रहे हैं। मार्केट रिसर्च फ्यूचर के मुताबिक अगले 10 साल में देश का फ्रोजन फूड बाजार हर साल 14% से भी ज्यादा बढ़ने का अनुमान है। बदलती लाइफस्टाइल, वर्किंग वुमन की बढ़ती तादाद और क्विक कॉमर्स का विस्तार- ये तीन ताकतें मिलकर इस बाजार को अगले दौर में ले जा रही हैं। आईटीसी मास्टरशेफ, मैकेन और एलटी फूड्स जैसी कंपनियां नए प्रोडक्ट्स, कोल्ड चेन इन्फ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल चैनलों में भारी निवेश कर रही हैं। घर का खाना पसंद, तैयारी का झंझट नहीं चाहते लोग फ्रोजन फूड कैटेगरी अभी सालाना करीब 13% की दर से बढ़ रही है। इसमें तैयार फ्रोजन स्नैक्स की रफ्तार पारंपरिक फ्रोजन सब्जियों, मसलन, मटर और मक्का से काफी तेज है। अलवारेज एंड मार्सल इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर ऋषभ जैन के मुताबिक, ग्राहक ऐसा खाना चाहते हैं जो घर पर ताजा पका हो, लेकिन तैयारी का झंझट न हो। नगेट्स, फ्राइज और मोमो जैसे प्रोडक्ट्स इसीलिए सबसे तेजी से बिक रहे हैं। इनमें पकाने का आखिरी काम ग्राहक खुद करता है। फ्रोजन फूड की बढ़ती लोकप्रियता के जानिए चार बड़े कारण 1. बदली लाइफस्टाइल – बढ़ती आय, व्यस्त दिनचर्या, बढ़ती कामकाजी महिलाओं ने रोज के खाने की प्लानिंग बदल दी है। 2. एयर फ्रायर कल्चर – घर पर रेस्तरां जैसा अनुभव देने वाले एयर फ्रायर ने फ्रोजन स्नैक्स की खपत के नए दरवाजे खोले हैं। 3. क्विक कॉमर्स की पहुंच – स्विगी, इंस्टामार्ट, ब्लिंकिट जैसे प्लेटफॉर्म युवा खरीदारों तक फ्रोजन प्रोडक्ट्स मिनटों में पहुंचा रहे। 4. सिर्फ स्नैकिंग से आगे – आईटीसी मास्टरशेफ कहती है- फ्रोजन फूड अब सिर्फ स्नैकिंग नहीं, लंच-डीनर हिस्सा बन रहा। कंपनियों की बड़ी तैयारी – आफ्टर-स्कूल स्नैकिंग से बिरयानी किट तक आईटीसी मास्टरशेफ – अनियन रिंग्स, पेरी-पेरी प्रॉन्स, फलाफेल कबाब, साबूदाना टिक्की; आईक्यूएफ (इंडिविजुअली क्विक फ्रीजिंग) टेक्नोलॉजी। मैकेन फूड्स इंडिया – एयर फ्रायर के लिए खास प्रोडक्ट्स; आफ्टर-स्कूल स्नैकिंग और मिनी मील सेगमेंट। एलटी फूड्स (दावत) – बिरयानी किट, थाई ग्रीन करी राइस किट, कप्पा राइस; डिजिटल चैनल से सालाना 45% से ज्यादा ग्रोथ। फैक्ट्री से लेकर रिटेल शेल्फ तक खर्चीला कोल्ड चेन फ्रोजन फूड बाजार आकर्षक जरूर है, लेकिन मुनाफा कमाना आसान नहीं है। फैक्ट्री से लेकर रिटेल शेल्फ तक बिना रुके कोल्ड चेन बनाए रखना बहुत खर्चीला है। ऋषभ जैन के मुताबिक, इस सेगमेंट में सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कंपनियां डिस्ट्रीब्यूशन की लागत और किफायती दाम के बीच किस हद तक संतुलन बना पाती हैं। निरंतर नए-नए प्रोडक्ट भी लाते रहना जरूरी है क्योंकि लोग एक ही तरह के खाने से जल्द ऊब जाते हैं।