Monday, 24 Aug 2026 | 06:31 AM

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'गलत काम करने वालों की आलोचना होनी चाहिए':अयोध्या में चढ़ावा चोरी पर अनुपम खेर बोले- इससे लोगों की आस्था पर फर्क नहीं पड़ता

'गलत काम करने वालों की आलोचना होनी चाहिए':अयोध्या में चढ़ावा चोरी पर अनुपम खेर बोले- इससे लोगों की आस्था पर फर्क नहीं पड़ता

फिल्म अभिनेता अनुपम खेर मंगलवार को अयोध्या पहुंचे। यहां उन्होंने सबसे पहले हनुमानगढ़ी और राम जन्मभूमि में दर्शन-पूजन कर भगवान राम और बजरंगबली का आशीर्वाद लिया। इसके बाद उन्होंने अपनी नई फिल्म ‘श्री राम भूमि’ की शूटिंग शुरू की। उन्होंने बताया कि फिल्म की शूटिंग अयोध्या में करीब 10 से 12 दिन तक चलेगी। अनुपम खेर ने कहा कि किसी भी नए काम की शुरुआत भगवान के आशीर्वाद से करना शुभ माना जाता है। उन्होंने सभी लोगों के सुख, शांति और अच्छे स्वास्थ्य की कामना की। राम मंदिर से जुड़े हालिया कथित चोरी के मामले पर उन्होंने कहा कि गलत काम करने वालों की आलोचना होनी चाहिए, लेकिन इससे मंदिर की गरिमा और लोगों की आस्था पर कोई असर नहीं पड़ता। उनके अनुसार, दान श्रद्धा और विश्वास से किया जाता है, इसलिए किसी की गलती को भगवान, मंदिर या सनातन धर्म से जोड़ना उचित नहीं है।

प्रभास को जोकर कहने पर फंसे थे अरशद वारसी:सफाई में कहा- सिर्फ दोस्तों से मजाक करता हूं, पता है हद क्या है, सेलेब्स ने की थी निंदा

प्रभास को जोकर कहने पर फंसे थे अरशद वारसी:सफाई में कहा- सिर्फ दोस्तों से मजाक करता हूं, पता है हद क्या है, सेलेब्स ने की थी निंदा

कुछ समय पहले ही अरशद वारसी ने फिल्म कल्कि 2898AD की आलोचना करते हुए कहा था कि फिल्म में प्रभास जोकर की तरह लग रहे थे। इस बयान पर उनकी जमकर आलोचना हुई और फिल्म के डायरेक्टर नाग अश्विन और एक्टर सुधीर बाबू ने उनके बयान की निंदा की। अब अरशद ने इस विवाद पर चुप्पी तोड़ी है और कहा कि वो सिर्फ उनके साथ मजाक करते हैं, जिन्हें वो जानते हैं। प्रभास पर दिए बयान पर अरशद वारसी ने न्यूज 18 को दिए इंटरव्यू में कहा है, ‘मैं सिर्फ अपने दोस्तों के साथ ही मजाक करता हूं। सच कहूं तो मैं किसी और के साथ मजाक नहीं करता। अगर मुझे कोई मजाक करना होता है, तो मैं सिर्फ उन्हीं लोगों के साथ करता हूं जिन्हें मैं अच्छी तरह जानता हूं और जो मेरे दोस्त हैं।’ आगे एक्टर ने कहा, ‘मुझे पता होता है कि उनके सामने क्या कहना है और कितनी हद तक कहना है। लेकिन अगर मैं किसी को नहीं जानता, तो उसके सामने कुछ भी नहीं कहता, क्योंकि मुझे उसके बारे में कोई जानकारी नहीं होती। बात बस इतनी-सी है।’ बातचीत में अरशद ने कहा है कि आज कल सोशल मीडिया पर हर बात को लेकर इतनी ज्यादा जांच-पड़ताल होती है कि लोगों को मजाक को मजाक की तरह लेना सीखना चाहिए। उन्होंने कहा, “हम सभी को थोड़ा हल्के-फुल्के अंदाज में जीना चाहिए।” अरशद का मानना है कि असल जिंदगी के अलावा फिल्मों में दिखाए जाने वाले मजाक को भी लोगों को मजाक की तरह ही लेना चाहिए। उन्होंने फिल्म मुन्नाभाई एमबीबीएस के उस डायलॉग का उदाहरण दिया, जिसमें उन्होंने एक चीनी टूरिस्ट को हक्का नूडल्स कहा था। अरशद ने कहा, ‘उसमें कुछ भी आपत्तिजनक नहीं है। आज लोग उसका ज्यादा विश्लेषण कर सकते हैं, लेकिन वह गलत नहीं है। जैसे हम किसी लड़के को मजाक में ‘बाल की दुकान’ कह देते हैं, उसमें भी कुछ आपत्तिजनक नहीं होता।’ हालांकि, अरशद यह भी कहते हैं कि वह ‘सेल्फ सेंसरशिप’ यानी खुद पर संयम रखने में भरोसा करते हैं। उन्होंने कहा, “हर किसी को इसका पालन करना चाहिए। मैं व्यक्तिगत तौर पर पाकिस्तानी ह्यूमर का बड़ा प्रशंसक नहीं हूं, क्योंकि वह अक्सर दूसरे लोगों को नीचा दिखाने वाला होता है। उसमें लोगों का मजाक उड़ाना और नाम रखकर चिढ़ाना ज्यादा होता है। कई लोगों को वह पसंद आता है, लेकिन मुझे नहीं। इसी तरह मुझे डबल मीनिंग या सेक्सुअल कॉमेडी भी पसंद नहीं है। यह मेरी निजी पसंद है। लोगों की अपनी-अपनी पसंद हो सकती है, लेकिन मैं अपने लिए इसी तरह की सेल्फ सेंसरशिप अपनाता हूं।” क्या था अरशद का पुराना बयान और क्यों हुआ विवाद समदीश भाटिया के पॉडकास्ट में अरशद वारसी से पूछा था कि उनकी देखी हुई आखिरी बुरी फिल्म कौन सी थी। इस पर उन्होंने कल्कि का नाम लेकर कहा था, ‘मैंने ‘कल्कि’ देखी तो मुझे अच्छी नहीं लगी। मुझे बहुत तकलीफ होती है पर अमित जी, वो आदमी समझ में ही नहीं आता यार। कसम से अगर उनके जितनी पावर मिल जाए ताे लाइफ बन जाए। वो कमाल हैं, अविश्वसनीय हैं। प्रभास को देखकर मैं वास्तव में दुखी हुआ। वो क्यों थे उस फिल्म में, माफी चाहूंगा पर वो एक जोकर की तरह लग रहे थे। मैं ‘मैड मैक्स’ (हॉलीवुड फिल्म) देखना चाहता हूं। मैं वहां मेल गिब्सन (हॉलीवुड एक्टर) को देखना चाहता हूं। तुमने उसको क्या बना दिया यार। क्यों करते हो ऐसा.. मुझे नहीं समझ में आता।’ अरशद वारसी के बयान पर भड़के डायरेक्टर नाग अश्विन अरशद का बयान सामने आने के बाद कल्कि डायरेक्टर नाग अश्विन ने सोशल मीडिया पर निंदा कर लिखा, “आइए पीछे न जाएं। अब नॉर्थ वर्सेस साउथ या बॉलीवुड वर्सेस टॉलीवुड जैसी बहसें बंद होनी चाहिए। हमें बड़ी तस्वीर पर ध्यान देना चाहिए, एकजुट भारतीय फिल्म इंडस्ट्री। अरशद साहब को अपने शब्दों का चुनाव थोड़ा बेहतर करना चाहिए था, लेकिन कोई बात नहीं। मैं उनके बच्चों के लिए ‘बुज्जी’ के खिलौने भेज रहा हूं। और मैं इतनी मेहनत करूंगा कि जब ‘कल्कि 2’ (K2) रिलीज हो, तो पहले दिन का पहला शो देखने के बाद वही ट्वीट करें कि प्रभास अब तक के सबसे बेहतरीन कलाकार हैं। वहीं साउथ एक्टर सुधीर बाबू ने भड़ककर लिखा, “रचनात्मक आलोचना करना ठीक है, लेकिन किसी के बारे में अपमानजनक बातें करना कभी सही नहीं होता। मुझे अरशद वारसी से ऐसी गैर-पेशेवर टिप्पणी की उम्मीद नहीं थी। प्रभास का कद इतना बड़ा है कि छोटे सोच वाले लोगों की टिप्पणियों से उस पर कोई फर्क नहीं पड़ता।”

Blue & Silver Lead Demand; White Tops Resale Value

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नई दिल्ली7 मिनट पहले कॉपी लिंक नई कार खरीदते समय सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि कौन-सा कलर चुनें? सिर्फ पसंद का नहीं, बल्कि मेंटेनेंस, गर्मी, रीसेल वैल्यू और ट्रेंड का भी। BASF की जनवरी में आई रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में भारत में बिकने वाली कुल कारों में 48% सफेद रहीं। यानी हर दो में से एक खरीदार सफेद कलर की कार खरीद रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह सफेद कलर का मेंटेनेंस अन्य कलर की तुलना में सबसे कम है, यानी सफेद कलर में स्क्रैच छुपाना सबसे आसान होता है। साथ ही सफेद कार की रीसेल वैल्यू भी सबसे ज्यादा होती है। हालांकि, अब ट्रेंड बदल रहा है और अलग लुक के लिए लोग ग्रे, ब्लैक, ब्लू और ग्रीन जैसे बोल्ड कलर वाली कार भी खरीद रहे हैं। परफेक्ट कार कलर चुनने की 5-स्टेप प्रोसेस स्टेप 1: अपना प्राइमरी यूज और इलाका देखें सबसे पहले यह तय करें कि आप गाड़ी कहां और कैसे चलाने वाले हैं: गर्म और मैदानी इलाके: अगर आप दिल्ली, राजस्थान, एमपी जैसे गर्म इलाकों में रहते हैं, तो वाइट या सिल्वर चुनें। ये हीट रिफ्लेक्ट करते हैं और केबिन को ठंडा रखते हैं। ठंडे और पहाड़ी इलाके: जम्मू या हिमाचल जैसे ठंडे राज्यों में हैं, तो आप ब्लैक, डार्क ग्रे या अन्य डार्क शेड्स चुन सकते हैं। ये हीट एब्जॉर्ब करके गाड़ी को गर्म रखते हैं। स्टेप 2: अपनी मेंटेनेंस की आदत पहचानें आप गाड़ी की साफ-सफाई को कितना वक्त दे सकते हैं, यह बहुत जरूरी है: डेली सफाई का झंझट नहीं चाहिए: अगर आपके पास रोज गाड़ी साफ करने का समय नहीं है, तो बेज, लाइट ब्राउन या सिल्वर चुनें। इन पर धूल-मिट्टी आसानी से छिप जाती है। रोज सफाई कर सकते हैं: अगर आपके पास क्लीनिंग बॉय है या आप खुद रोज मेहनत कर सकते हैं, तभी ग्लॉसी ब्लैक या डार्क कलर्स की तरफ जाएं। मेंटेनेंस के लिए ‘बेस्ट’ VS ‘वर्स्ट’ कलर धूल छुपाने में बेस्ट: बेज, लाइट ब्राउन और सिल्वर। सिल्वर: ब्लैक कार के मुकाबले सिल्वर कार पर दोगुनी धूल जमने पर भी वह गंदी नहीं दिखती। बेज, लाइट ब्राउन: इन कलर की कार पर ब्लैक से 3 गुना ज्यादा धूल जमने पर ही गंदी दिखेगी। सबसे खराब: ब्लैक कलर पर धूल का एक-एक कण चमकता है और मेंटेनेंस सबसे मुश्किल होता है। स्क्रैच ठीक करने में आसान प्लेन वाइट: इसका पेंट सबसे ज्यादा बनता है, इसलिए हूबहू मैच ढूंढना आसान और सस्ता होता है। DIY टच-अप: प्लेन वाइट और ब्लैक के सस्ते स्प्रे पेंट आसानी से मिल जाते हैं, जिससे छोटे स्क्रैच खुद छुपा सकते हैं। सबसे मुश्किल (मैट फिनिश): इस पर स्क्रैच हटाने के लिए बफिंग नहीं कर सकते। बफिंग करते ही वह हिस्सा चमकदार हो जाता है। ‘स्पेशल एडिशन’ रंग खरीदने के नुकसान रीपेंटिंग: कार का कोई हिस्सा खराब होने पर दोबारा ठीक वैसा ही रंग मिलना बहुत मुश्किल होता है, क्योंकि ये कलर लिमिटेड संख्या में बनते हैं। उदाहरण: टाटा का काजीरंगा और जेट एडिशन, पुरानी डिजायर का रीगल एडिशन। स्टिकर का झंझट: इन कारों के खास स्टिकर्स या बैज खराब होने पर नया स्टिकर नहीं मिलता; पूरा सेट खरीदना पड़ सकता है नहीं तो गाड़ी अधूरी दिखेगी। स्टेप 3: रोड सेफ्टी और विजिबिलिटी को तवज्जो दें रात के समय होने वाले एक्सीडेंट्स से बचने के लिए कलर की विजिबिलिटी मायने रखती है: बेस्ट सेफ्टी (हाई विजिबिलिटी): अगर सेफ्टी सबसे ऊपर है, तो निऑन शेड्स या फ्लैट वाइट सबसे बेस्ट हैं। ये रात के अंधेरे में भी दूर से दिख जाते हैं। रिस्की (लो विजिबिलिटी): मैट ब्लैक या डार्क ग्रे रात में सड़क के अंधेरे में मर्ज हो जाते हैं, जिससे टी-बोन क्रैश का खतरा रहता है। इन्हें चुनते समय यह रिस्क ध्यान में रखें। स्टेप 4: बजट और वेरिएंट की उपलब्धता चेक करें शोरूम जाने से पहले बजट का गणित समझें: कम बजट: अगर बजट टाइट है, तो फ्लैट वाइट चुनें। इसके लिए ज्यादातर कंपनियां एक्स्ट्रा पैसे नहीं लेतीं और स्क्रैच आने पर इसका री-पेंट भी सबसे सस्ता होता है। फ्लेक्सिबल बजट: अगर आप एक्स्ट्रा कॉस्ट उठाने को तैयार हैं, तभी मैट फिनिश, ट्रेंडी कलर्स या स्पेशल एडिशंस जैसे जेट या काजीरंगा एडिशन की तरफ कदम बढ़ाएं। स्टेप 5: फ्यूचर रिसेल वैल्यू का आकलन करें गाड़ी को 4-5 साल में बदलने का प्लान है या लंबे समय तक रखने का, यह सोच लें: जल्दी और अच्छी रिसेल चाहिए: वाइट, सिल्वर या लाइट ग्रे जैसे मास-मार्केट कलर्स चुनें। पुरानी गाड़ियों के बाजार में इनके खरीदार तुरंत मिल जाते हैं और वैल्यू भी अच्छी मिलती है। शौक के लिए गाड़ी ले रहे हैं: अगर रिसेल की चिंता नहीं है और आप अपनी पर्सनालिटी दिखाना चाहते हैं, तो खाकी, फॉल्कलैंड ब्लू या रेड जैसे ट्रेंडी कलर्स चुन सकते हैं। शॉर्ट समरी गाइड हर मामले में परफेक्ट और सेफ: मैटेलिक वाइट या सिल्वर। दिखने में स्पोर्टी लेकिन हाई मेंटेनेंस: ग्लॉसी ब्लैक या ट्रेंडी कलर्स। सबसे ज्यादा रिस्की और सिरदर्द: मैट ब्लैक या लिमिटेड स्पेशल एडिशंस। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

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नई दिल्ली23 मिनट पहले कॉपी लिंक नई कार खरीदते समय सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि कौन-सा कलर चुनें? सिर्फ पसंद का नहीं, बल्कि मेंटेनेंस, गर्मी, रीसेल वैल्यू और ट्रेंड का भी। BASF की जनवरी में आई रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में भारत में बिकने वाली कुल कारों में 48% सफेद रहीं। यानी हर दो में से एक खरीदार सफेद कलर की कार खरीद रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह सफेद कलर का मेंटेनेंस अन्य कलर की तुलना में सबसे कम है, यानी सफेद कलर में स्क्रैच छुपाना सबसे आसान होता है। साथ ही सफेद कार की रीसेल वैल्यू भी सबसे ज्यादा होती है। हालांकि, अब ट्रेंड बदल रहा है और अलग लुक के लिए लोग ग्रे, ब्लैक, ब्लू और ग्रीन जैसे बोल्ड कलर वाली कार भी खरीद रहे हैं। परफेक्ट कार कलर चुनने की 5-स्टेप प्रोसेस स्टेप 1: अपना प्राइमरी यूज और इलाका देखें सबसे पहले यह तय करें कि आप गाड़ी कहां और कैसे चलाने वाले हैं: गर्म और मैदानी इलाके: अगर आप दिल्ली, राजस्थान, एमपी जैसे गर्म इलाकों में रहते हैं, तो वाइट या सिल्वर चुनें। ये हीट रिफ्लेक्ट करते हैं और केबिन को ठंडा रखते हैं। ठंडे और पहाड़ी इलाके: जम्मू या हिमाचल जैसे ठंडे राज्यों में हैं, तो आप ब्लैक, डार्क ग्रे या अन्य डार्क शेड्स चुन सकते हैं। ये हीट एब्जॉर्ब करके गाड़ी को गर्म रखते हैं। स्टेप 2: अपनी मेंटेनेंस की आदत पहचानें आप गाड़ी की साफ-सफाई को कितना वक्त दे सकते हैं, यह बहुत जरूरी है: डेली सफाई का झंझट नहीं चाहिए: अगर आपके पास रोज गाड़ी साफ करने का समय नहीं है, तो बेज, लाइट ब्राउन या सिल्वर चुनें। इन पर धूल-मिट्टी आसानी से छिप जाती है। रोज सफाई कर सकते हैं: अगर आपके पास क्लीनिंग बॉय है या आप खुद रोज मेहनत कर सकते हैं, तभी ग्लॉसी ब्लैक या डार्क कलर्स की तरफ जाएं। मेंटेनेंस के लिए ‘बेस्ट’ VS ‘वर्स्ट’ कलर धूल छुपाने में बेस्ट: बेज, लाइट ब्राउन और सिल्वर। सिल्वर: ब्लैक कार के मुकाबले सिल्वर कार पर दोगुनी धूल जमने पर भी वह गंदी नहीं दिखती। बेज, लाइट ब्राउन: इन कलर की कार पर ब्लैक से 3 गुना ज्यादा धूल जमने पर ही गंदी दिखेगी। सबसे खराब: ब्लैक कलर पर धूल का एक-एक कण चमकता है और मेंटेनेंस सबसे मुश्किल होता है। स्क्रैच ठीक करने में आसान प्लेन वाइट: इसका पेंट सबसे ज्यादा बनता है, इसलिए हूबहू मैच ढूंढना आसान और सस्ता होता है। DIY टच-अप: प्लेन वाइट और ब्लैक के सस्ते स्प्रे पेंट आसानी से मिल जाते हैं, जिससे छोटे स्क्रैच खुद छुपा सकते हैं। सबसे मुश्किल (मैट फिनिश): इस पर स्क्रैच हटाने के लिए बफिंग नहीं कर सकते। बफिंग करते ही वह हिस्सा चमकदार हो जाता है। ‘स्पेशल एडिशन’ रंग खरीदने के नुकसान रीपेंटिंग: कार का कोई हिस्सा खराब होने पर दोबारा ठीक वैसा ही रंग मिलना बहुत मुश्किल होता है, क्योंकि ये कलर लिमिटेड संख्या में बनते हैं। उदाहरण: टाटा का काजीरंगा और जेट एडिशन, पुरानी डिजायर का रीगल एडिशन। स्टिकर का झंझट: इन कारों के खास स्टिकर्स या बैज खराब होने पर नया स्टिकर नहीं मिलता; पूरा सेट खरीदना पड़ सकता है नहीं तो गाड़ी अधूरी दिखेगी। स्टेप 3: रोड सेफ्टी और विजिबिलिटी को तवज्जो दें रात के समय होने वाले एक्सीडेंट्स से बचने के लिए कलर की विजिबिलिटी मायने रखती है: बेस्ट सेफ्टी (हाई विजिबिलिटी): अगर सेफ्टी सबसे ऊपर है, तो निऑन शेड्स या फ्लैट वाइट सबसे बेस्ट हैं। ये रात के अंधेरे में भी दूर से दिख जाते हैं। रिस्की (लो विजिबिलिटी): मैट ब्लैक या डार्क ग्रे रात में सड़क के अंधेरे में मर्ज हो जाते हैं, जिससे टी-बोन क्रैश का खतरा रहता है। इन्हें चुनते समय यह रिस्क ध्यान में रखें। स्टेप 4: बजट और वेरिएंट की उपलब्धता चेक करें शोरूम जाने से पहले बजट का गणित समझें: कम बजट: अगर बजट टाइट है, तो फ्लैट वाइट चुनें। इसके लिए ज्यादातर कंपनियां एक्स्ट्रा पैसे नहीं लेतीं और स्क्रैच आने पर इसका री-पेंट भी सबसे सस्ता होता है। फ्लेक्सिबल बजट: अगर आप एक्स्ट्रा कॉस्ट उठाने को तैयार हैं, तभी मैट फिनिश, ट्रेंडी कलर्स या स्पेशल एडिशंस जैसे जेट या काजीरंगा एडिशन की तरफ कदम बढ़ाएं। स्टेप 5: फ्यूचर रिसेल वैल्यू का आकलन करें गाड़ी को 4-5 साल में बदलने का प्लान है या लंबे समय तक रखने का, यह सोच लें: जल्दी और अच्छी रिसेल चाहिए: वाइट, सिल्वर या लाइट ग्रे जैसे मास-मार्केट कलर्स चुनें। पुरानी गाड़ियों के बाजार में इनके खरीदार तुरंत मिल जाते हैं और वैल्यू भी अच्छी मिलती है। शौक के लिए गाड़ी ले रहे हैं: अगर रिसेल की चिंता नहीं है और आप अपनी पर्सनालिटी दिखाना चाहते हैं, तो खाकी, फॉल्कलैंड ब्लू या रेड जैसे ट्रेंडी कलर्स चुन सकते हैं। शॉर्ट समरी गाइड हर मामले में परफेक्ट और सेफ: मैटेलिक वाइट या सिल्वर। दिखने में स्पोर्टी लेकिन हाई मेंटेनेंस: ग्लॉसी ब्लैक या ट्रेंडी कलर्स। सबसे ज्यादा रिस्की और सिरदर्द: मैट ब्लैक या लिमिटेड स्पेशल एडिशंस। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

सोना ₹177 बढ़कर ₹1.44 लाख पर पहुंचा:इस साल ₹11 हजार महंगा हो चुका, चांदी ₹150 बढ़कर ₹2.27 लाख किलो हुई

सोना ₹177 बढ़कर ₹1.44 लाख पर पहुंचा:इस साल ₹11 हजार महंगा हो चुका, चांदी ₹150 बढ़कर ₹2.27 लाख किलो हुई

सोने-चांदी के दाम में आज यानी 8 जुलाई को बढ़त है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का दाम 177 रुपए बढ़कर 1.44 लाख रुपए हो गया है। वहीं, 1 किलो चांदी का दाम 150 रुपए बढ़कर 2.27 लाख रुपए पर पहुंच गई है। सोना इस साल ₹11 हजार महंगा हुआ इस साल सोने-चांदी की कीमत में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। सोना 2026 में अब तक 11 हजार रुपए महंगा हुआ है। 31 दिसंबर 2025 को 10g सोना 1.33 लाख रुपए के ऊपर था, जो अब 1.44 लाख रुपए पर पहुंच गया है। वहीं, चांदी की कीमत में 3 हजार रुपए की गिरावट है। चांदी 31 दिसंबर 2025 को 2.30 लाख रुपए किलो थी, जो अब 2.27 लाख रुपए पर है। इस दौरान 29 जनवरी को सोने ने 1.76 लाख रुपए और चांदी ने 3.86 लाख रुपए का ऑलटाइम हाई भी बनाया था। ज्वेलर्स से सोना खरीदते समय इन 2 बातों का रखें ध्यान 1. सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें: हमेशा ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) का हॉलमार्क लगा हुआ सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें। ये नंबर अल्फान्यूमेरिक यानी कुछ इस तरह से हो सकता है- AZ4524। हॉलमार्किंग से पता चलता है कि सोना कितने कैरेट का है। 2. कीमत क्रॉस चेक करें: सोने का सही वजन और खरीदने के दिन उसकी कीमत कई सोर्सेज (जैसे इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट) से क्रॉस चेक करें। सोने का भाव 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट के हिसाब से अलग-अलग होता है। असली चांदी की पहचान करने के 4 तरीके

OTT से हटी, गुरुद्वारों में फ्री दिखेगी दिलजीत की 'सतलुज':स्पेशल स्क्रीनिंग शुरू; फिल्म में पंजाब में फर्जी मुठभेड़ में 25 हजार हत्याओं का दावा

OTT से हटी, गुरुद्वारों में फ्री दिखेगी दिलजीत की 'सतलुज':स्पेशल स्क्रीनिंग शुरू; फिल्म में पंजाब में फर्जी मुठभेड़ में 25 हजार हत्याओं का दावा

OTT प्लेटफॉर्म से हटाई गई दिलजीत दोसांझ स्टारर फिल्म ‘सतलुज’ अब फ्री में पंजाब में गुरुद्वारों दिखाई जाएगी। यह फिल्म पंजाब में आतंकवाद के दौर यानी 90 के दशक में फर्जी मुठभेड़ में 25 हजार युवाओं की हत्या का दावा करने वाले ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट जसवंत खालड़ा की जिंदगी पर आधारित है। गुरदासपुर से गुरुद्वारों में फिल्म दिखाने की शुरूआत हो चुकी है। यहां गांव मानचोपड़ा में गुरुद्वारा साहिब से अनाउंसमेंट कर गांव के लोगों को फिल्म दिखाई गई। मोगा के गुरुद्वारे में भी फिल्म दिखाई गई। अब बुधवार और गुरुवार को पठानकोट के 2 प्रमुख गुरुद्वारों गुरुद्वारा सिंह सभा, मॉडल टाउन और गुरुद्वारा सिंह सभा सेंट्रल (रानीपुर) में इसकी स्क्रीनिंग का ऐलान कर दिया गया है। भारतीय किसान यूनियन के पंजाब यूथ अध्यक्ष इंद्रपाल सिंह बैंस ने कहा कि फिल्म को पंजाब के अन्य जिलों और गांव-गांव तक ले जाया जाएगा, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इसे देख सकें। वहीं दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (DSGMC) ने स्कूल-कॉलेजों में भी फिल्म की स्क्रीनिंग का ऐलान कर दिया है। गुरुद्वारा प्रबंधकों का दावा- इतिहास दबाने की कोशिश हुई पठानकोट के गुरुद्वारा प्रबंधक मनप्रीत सिंह का कहना है कि फिल्म मानवाधिकार कार्यकर्ता भाई जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन और संघर्ष पर आधारित है। उनका आरोप है कि पंजाब के इतिहास के एक अहम अध्याय को लोगों तक पहुंचने से रोकने के लिए फिल्म को जानबूझकर OTT प्लेटफॉर्म से हटाया गया। उनका कहना है कि अगर डिजिटल प्लेटफॉर्म पर फिल्म नहीं दिखाई जाएगी तो गुरुघरों के माध्यम से इसे लोगों तक पहुंचाया जाएगा, ताकि नई पीढ़ी खालड़ा के संघर्ष, मानवाधिकारों की लड़ाई और उनके बलिदान से परिचित हो सके। सीनियर वकील बोले- गुरुद्वारों में स्क्रीनिंग गैरकानूनी नहीं OTT से हटाने के बावजूद इसकी सार्वजनिक स्क्रीनिंग को लेकर पठानकोट के सीनियर एडवोकेट विशाल कोहली ने कहा कि गुरुद्वारों में संगत के लिए फिल्म की स्क्रीनिंग करना किसी कानून का उल्लंघन नहीं है। उनके मुताबिक, फिल्म की सामग्री पहले ही अलग-अलग ऑनलाइन माध्यमों पर लोगों तक पहुंच चुकी है। ऐसे में सामाजिक जागरूकता के उद्देश्य से इसका प्रदर्शन करना गैरकानूनी नहीं माना जा सकता। DSGMC का ऐलान- गुरुद्वारों के साथ स्कूल-कॉलेजों में भी दिखाई जाएगी फिल्म दिल्ली सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी (DSGMC) भी फिल्म के समर्थन में खुलकर सामने आ गई है। कमेटी के अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका ने कहा कि जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर बनी इस फिल्म को रोकना इतिहास को दबाने की कोशिश है। उन्होंने घोषणा की कि दिल्ली के गुरुद्वारों में फिल्म की सार्वजनिक स्क्रीनिंग कराई जाएगी। साथ ही स्कूलों और कॉलेजों में जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन, संघर्ष और मानवाधिकारों पर सेमिनार आयोजित किए जाएंगे। सभी गुरुद्वारा कमेटियों से फिल्म को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने की अपील भी की गई है। दिलजीत की फिल्म में क्या दिखाया गया, जिस पर एतराज? दिलजीत की इस फिल्म में पूर्व CM बेअंत सिंह की बम ब्लास्ट में हत्या का सीन भी दिखाया गया है। फिल्म की कहानी के लिए इस सीन को पुलिस की क्रूरता के एक टर्निंग पॉइंट के रूप में दिखाया गया है। फिल्म में यह भी दिखाया गया है कि कैसे पुलिस की क्रूरता और निर्दोष लोगों पर बढ़ते अत्याचारों के कारण एक आम आदमी अंदर से टूट जाता है और आतंकवाद या इस तरह के कदम उठाने के लिए मजबूर हो जाता है। इसमें तत्कालीन DGP केपीएल गिल को IPS बिट्‌टा के तौर पर दिखाया गया है। फिल्म में दिखाया गया है 31 अगस्त 1995 को तत्कालीन सीएम बेअंत सिंह की हत्या होती है और इस घटना के ठीक एक हफ्ते बाद यानी 6 सितंबर 1995 को जसवंत सिंह खालड़ा का भी अपहरण कर लिया जाता है। मुख्यमंत्री की मौत के बाद जब राजनीतिक माहौल बदला, तो पुलिस को डर था कि खालड़ा उनके इस 25 हजार अवैध दाह-संस्कार के काले राज को दुनिया के सामने न ले आएं, इसलिए वे खालड़ा का अपहरण करने का कदम उठाते हैं। फिल्म हटाने को लेकर केंद्र की क्या चिंता, आगे क्या फैसला लिया? केंद्र ने फिल्म हटाने को लेकर अभी औपचारिक तौर पर कुछ नहीं कहा है। हालांकि सरकारी सोर्सेज के जरिए मीडिया के मुताबिक फिल्म के कुछ हिस्सों का भारत विरोधी ताकतों द्वारा दुरुपयोग किए जाने की आशंका है। सूत्रों के मुताबिक, चिंता है कि फिल्म के कुछ दृश्य और सामग्री का इस्तेमाल खालिस्तान समर्थक आंदोलन के पक्ष में माहौल बनाने के लिए किया जा सकता है। खासकर पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले ऐसा हो सकता है। सरकार का मानना है कि “ऐसे मामलों में राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दे सबसे ऊपर होते हैं। यह राजनीति का विषय नहीं है। हालांकि केंद्र ने भाजपा के पंजाब प्रधान केवल सिंह ढिल्लों की अपील के बाद इस पर रिव्यू कमेटी बनाई है। कमेटी फिल्म की सामग्री, तथ्यों और प्रस्तुत किए गए विषयों का अध्ययन करेगी। जसवंत सिंह खालड़ा के बारे में जानिए, जिनके जीवन पर यह फिल्म बनी बैंक में काम करते थे, लावारिश लाशें खोजनी शुरू कर दीं 1990 के दशक के पंजाब के कई इलाकों में खालिस्तान की मांग जोर पकड़ रही थी। ऑपरेशन ‘ब्लू स्टार’ में 6 जून 1984 को खालिस्तान समर्थक जरनैल सिंह ‘भिंडरांवाले’ की मौत हो गई। जवाब में 31 अक्टूबर, 1984 को पीएम इंदिरा गांधी की उनके ही 2 सिख बॉडीगार्ड्स ने हत्या कर दी। इसके बाद खालिस्तान मूवमेंट को कुचलने का दौर शुरू हुआ। 1992 में बेअंत सिंह सीएम बने। तब के पंजाब पुलिस के DGP कंवर पाल सिंह गिल (केपीएस गिल) ने एंटी-टेररिज्म अभियान चलाया। पुलिस को खुली छूट थी। पंजाब के कई इलाकों से हजारों नौजवान रातोंरात गायब हो रहे थे। पुलिस पर निहत्थे लोगों को हिरासत में लेने और फर्जी एनकाउंटर के आरोप लग रहे थे। 1952 में अमृतसर जिले के खालड़ा गांव में जन्मे जसवंत सिंह, तब अमृतसर के एक बैंक में काम करते थे। जनवरी 1995 में वे शिरोमणि अकाली दल की मानवाधिकार यूनिट के महासचिव भी थे। लापता लोगों के डेथ सर्टिफिकेट न होने के चलते उनके परिवार वाले न उनकी संपत्ति पर दावा कर सकते थे और न ही बैंक में उनके खातों से पैसा निकाल पा रहे थे। ऐसे में जसवंत ने लापता लोगों, पुलिस हिरासत में हुई मौतों और श्मशानों में

लस्सी प्रमोट की, लेकिन पी नहीं:दोहरे रवैये पर ट्रोल हुईं सलमान की को-स्टार भाग्यश्री, अब भड़ककर कहा- बदनाम करने की कोशिश है, क्या आप वहां थे

लस्सी प्रमोट की, लेकिन पी नहीं:दोहरे रवैये पर ट्रोल हुईं सलमान की को-स्टार भाग्यश्री, अब भड़ककर कहा- बदनाम करने की कोशिश है, क्या आप वहां थे

सलमान खान के साथ फिल्म मैंने प्यार किया में नजर आ चुकीं एक्ट्रेस भाग्यश्री हाल ही में एक वीडियो की वजह से ट्रोलर्स के निशाने पर आ गईं। दरअसल, भाग्यश्री ने बनारस में एक लस्सी शॉप से लस्सी ली, उसे प्रमोट किया और कुछ देर बाद ही उन्होंने ये कहते हुए पूरी लस्सी छोड़ दी कि इसमें शुगर और फैट बहुत ज्यादा है। वीडियो वायरल होने के बाद भाग्यश्री के इस दोहरे रवैये पर सवाल उठाते हुए लोगों ने उनकी जमकर आलोचना की। मजाक उड़ने पर भाग्यश्री ने एक वीडियो जारी कर ट्रोलर्स को फटकार लगाई है। पहले देखिए भाग्यश्री का पुराना वायरल वीडियो- भाग्यश्री ने ट्रोल होने पर दी सफाई भाग्यश्री ने ऑफिशियल इंस्टाग्राम से एक वीडियो पोस्ट किया है, जिसमें वो लस्सी टेस्ट करती दिखीं। इसके साथ उन्होंने सफाई में लिखा है, ‘मैं सुबह 3 बजे से ही जाग रही थी। मंगला आरती में शामिल होने के बाद भीषण गर्मी में गंगा घाटों पर पैदल चली। ऐसे में यह लस्सी मेरे लिए किसी एनर्जी बूस्टर से कम नहीं थी। ऊपर डाले गए ड्राई फ्रूट्स ने इसके स्वाद में करारापन जोड़ दिया, जिसका मैंने खूब आनंद लिया।’ आगे उन्होंने लिखा, ‘बेहतरीन स्वाद के साथ-साथ इसमें उसे बनाने वालों का अपनापन और प्यार भी घुला हुआ था। इस वीडियो की एक क्लिप सोशल मीडिया पर यह कहकर वायरल की जा रही है कि यह फर्जी प्रमोशन था। क्या आप वहां मौजूद थे? क्या उस तथाकथित ‘फेक’ क्लिप के दौरान किसी ने यह सुना या रिकॉर्ड किया कि मैंने कहा हो, “यह बहुत मीठी है, मैं इसे नहीं पीऊंगी?”‘ आखिर में भाग्यश्री ने लिखा, ‘क्या आपकी मां ने कभी गर्मी में आपको लस्सी नहीं पिलाई? फर्जी तो आधा वीडियो और अधूरी जानकारी के साथ उसे सोशल मीडिया पर अपलोड करना होता है। स्थानीय खाने या स्थानीय दुकानदारों को बढ़ावा देकर कोई पैसे नहीं कमाता। इससे सिर्फ इतना फायदा होता है कि स्थानीय भोजन और छोटे विक्रेताओं को समर्थन मिलता है। दुख की बात है कि कुछ लोगों के पास इतनी फुर्सत है कि वे इतनी साधारण और अच्छी बात में भी नकारात्मकता ढूंढ़ लेते हैं। काशी पवित्रता की नगरी है। आपकी बेबुनियाद बातें उसके सामने बेहद महत्वहीन हैं।’ इसके अलावा भी भाग्यश्री ने एक स्टोरी पोस्ट की है, जिसमें उन्होंने लिखा, “काशी पवित्रता की नगरी है। फिर भी आधी-अधूरी जानकारी और अधूरे वीडियो के आधार पर मुझे बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। क्या आपकी मां ने कभी गर्मी में आपको लस्सी नहीं पिलाई? लस्सी पीने में आखिर गलत क्या है? भाग्यश्री के बारे में-

लस्सी प्रमोट की, लेकिन पी नहीं:दोहरे रवैये पर ट्रोल हुईं सलमान की को-स्टार भाग्यश्री, अब भड़ककर कहा- बदनाम करने की कोशिश है, क्या आप वहां थे

लस्सी प्रमोट की, लेकिन पी नहीं:दोहरे रवैये पर ट्रोल हुईं सलमान की को-स्टार भाग्यश्री, अब भड़ककर कहा- बदनाम करने की कोशिश है, क्या आप वहां थे

सलमान खान के साथ फिल्म मैंने प्यार किया में नजर आ चुकीं एक्ट्रेस भाग्यश्री हाल ही में एक वीडियो की वजह से ट्रोलर्स के निशाने पर आ गईं। दरअसल, भाग्यश्री ने बनारस में एक लस्सी शॉप से लस्सी ली, उसे प्रमोट किया और कुछ देर बाद ही उन्होंने ये कहते हुए पूरी लस्सी छोड़ दी कि इसमें शुगर और फैट बहुत ज्यादा है। वीडियो वायरल होने के बाद भाग्यश्री के इस दोहरे रवैये पर सवाल उठाते हुए लोगों ने उनकी जमकर आलोचना की। मजाक उड़ने पर भाग्यश्री ने एक वीडियो जारी कर ट्रोलर्स को फटकार लगाई है। पहले देखिए भाग्यश्री का पुराना वायरल वीडियो- भाग्यश्री ने ट्रोल होने पर दी सफाई भाग्यश्री ने ऑफिशियल इंस्टाग्राम से एक वीडियो पोस्ट किया है, जिसमें वो लस्सी टेस्ट करती दिखीं। इसके साथ उन्होंने सफाई में लिखा है, ‘मैं सुबह 3 बजे से ही जाग रही थी। मंगला आरती में शामिल होने के बाद भीषण गर्मी में गंगा घाटों पर पैदल चली। ऐसे में यह लस्सी मेरे लिए किसी एनर्जी बूस्टर से कम नहीं थी। ऊपर डाले गए ड्राई फ्रूट्स ने इसके स्वाद में करारापन जोड़ दिया, जिसका मैंने खूब आनंद लिया।’ आगे उन्होंने लिखा, ‘बेहतरीन स्वाद के साथ-साथ इसमें उसे बनाने वालों का अपनापन और प्यार भी घुला हुआ था। इस वीडियो की एक क्लिप सोशल मीडिया पर यह कहकर वायरल की जा रही है कि यह फर्जी प्रमोशन था। क्या आप वहां मौजूद थे? क्या उस तथाकथित ‘फेक’ क्लिप के दौरान किसी ने यह सुना या रिकॉर्ड किया कि मैंने कहा हो, “यह बहुत मीठी है, मैं इसे नहीं पीऊंगी?”‘ आखिर में भाग्यश्री ने लिखा, ‘क्या आपकी मां ने कभी गर्मी में आपको लस्सी नहीं पिलाई? फर्जी तो आधा वीडियो और अधूरी जानकारी के साथ उसे सोशल मीडिया पर अपलोड करना होता है। स्थानीय खाने या स्थानीय दुकानदारों को बढ़ावा देकर कोई पैसे नहीं कमाता। इससे सिर्फ इतना फायदा होता है कि स्थानीय भोजन और छोटे विक्रेताओं को समर्थन मिलता है। दुख की बात है कि कुछ लोगों के पास इतनी फुर्सत है कि वे इतनी साधारण और अच्छी बात में भी नकारात्मकता ढूंढ़ लेते हैं। काशी पवित्रता की नगरी है। आपकी बेबुनियाद बातें उसके सामने बेहद महत्वहीन हैं।’ इसके अलावा भी भाग्यश्री ने एक स्टोरी पोस्ट की है, जिसमें उन्होंने लिखा, “काशी पवित्रता की नगरी है। फिर भी आधी-अधूरी जानकारी और अधूरे वीडियो के आधार पर मुझे बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। क्या आपकी मां ने कभी गर्मी में आपको लस्सी नहीं पिलाई? लस्सी पीने में आखिर गलत क्या है? भाग्यश्री के बारे में-

पाकिस्तान का कार्गो प्लेन कराची के पास गायब हुआ:नेविगेशन सिस्टम में खराबी आई, 5 क्रू मेंबर सवार थे, अरब सागर में सर्च ऑपरेशन जारी

पाकिस्तान का कार्गो प्लेन कराची के पास गायब हुआ:नेविगेशन सिस्टम में खराबी आई, 5 क्रू मेंबर सवार थे, अरब सागर में सर्च ऑपरेशन जारी

पाकिस्तान का एक कार्गो विमान मंगलवार रात कराची पहुंचने से पहले लापता हो गया। विमान शारजाह से कराची आ रहा था और उसमें 5 क्रू मेंबर सवार थे। पाकिस्तान एयरपोर्ट्स अथॉरिटी के मुताबिक, रात 9:18 बजे पायलट ने एयर ट्रैफिक कंट्रोल को नेविगेशन सिस्टम में खराबी की जानकारी दी। कंट्रोल रूम ने विमान को मार्गदर्शन देने की कोशिश की, लेकिन करीब तीन मिनट बाद उसका संपर्क टूट गया। आखिरी बार विमान कराची से 155 नॉटिकल मील (287 किमी) पश्चिम में ट्रैक किया गया। विमान के लापता होने के बाद अरब सागर में बड़े स्तर पर सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया है। पाकिस्तान नेवी, एयर फोर्स और अन्य एजेंसियां खोज अभियान में जुटी हैं। अधिकारियों ने अभी तक विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने या किसी हताहत की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

पाकिस्तान का कार्गो प्लेन कराची के पास गायब हुआ:नेविगेशन सिस्टम में खराबी आई, 5 क्रू मेंबर सवार थे, अरब सागर में सर्च ऑपरेशन जारी

पाकिस्तान का कार्गो प्लेन कराची के पास गायब हुआ:नेविगेशन सिस्टम में खराबी आई, 5 क्रू मेंबर सवार थे, अरब सागर में सर्च ऑपरेशन जारी

पाकिस्तान का एक कार्गो विमान मंगलवार रात कराची पहुंचने से पहले लापता हो गया। विमान शारजाह से कराची आ रहा था और उसमें 5 क्रू मेंबर सवार थे। पाकिस्तान एयरपोर्ट्स अथॉरिटी (PAA) के मुताबिक, रात 9:18 बजे पायलट ने एयर ट्रैफिक कंट्रोल को नेविगेशन सिस्टम में खराबी की जानकारी दी। कंट्रोल रूम ने विमान को मार्गदर्शन देने की कोशिश की, लेकिन करीब तीन मिनट बाद उसका संपर्क टूट गया। आखिरी बार विमान कराची से 155 नॉटिकल मील (287 किमी) पश्चिम में ट्रैक किया गया। विमान के लापता होने के बाद अरब सागर में बड़े स्तर पर सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया है। पाकिस्तान नेवी, एयर फोर्स और अन्य एजेंसियां खोज अभियान में जुटी हैं। अधिकारियों ने अभी तक विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने या किसी हताहत की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। विमान के गायब होने की लोकेशन… हादसे की वजह फिलहाल साफ नहीं PAA ने कहा है कि विमान के लापता होने की वजह का अभी पता नहीं चल सका है। विमान और उसमें सवार 5 क्रू मेंबरों की स्थिति को लेकर भी कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है। फ्लाइट रडार 24 के शुरुआती डेटा के मुताबिक, आखिरी समय में विमान ने पहले ऊंचाई खोई, फिर कुछ ऊपर गया और इसके बाद अचानक तेजी से नीचे आया। शुरुआती अनुमान है कि विमान अरब सागर में दुर्घटनाग्रस्त हुआ हो सकता है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। स्थानीय मीडिया के मुताबिक, विमान बलूचिस्तान के ओरमारा तट के पास लापता हुआ। वहीं, K2 Airways ने कहा है कि वह पाकिस्तान सिविल एविएशन अथॉरिटी और अन्य सरकारी एजेंसियों के साथ जांच और सर्च ऑपरेशन में पूरा सहयोग कर रही है। 2018 में शुरू हुई थी K2 एयरवेज K2 एयरवेज कराची स्थित निजी कार्गो एयरलाइन है, जिसकी शुरुआत मई 2018 में हुई थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, हादसे का शिकार हुआ 27 साल पुराना Boeing 737 2024 में एयरलाइन के बेड़े में शामिल किया गया था। यह कंपनी का इकलौता विमान था और इसकी पिछली उड़ान 28 जून को हुई थी। एविएशन एक्सपर्ट इमरान असलम ने ARY न्यूज से कहा कि इंजन फेल होने की स्थिति में भी विमान आमतौर पर कुछ दूरी तक ग्लाइड करता है। उनके मुताबिक, विमान का इतनी तेजी से नीचे आना सामान्य नहीं है और इसकी वजह जांच के बाद ही साफ होगी। इससे पहले मई 2020 में पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस (PIA) का यात्री विमान कराची में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। हादसे में 97 लोगों की मौत हुई थी। बाद की जांच में पायलट, सह-पायलट और एयर ट्रैफिक कंट्रोल की मानवीय गलती को दुर्घटना का कारण माना गया था।