Sunday, 30 Aug 2026 | 01:39 PM

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बंगाल की खाड़ी में दो नावें डूबीं,500 मौतों की आशंका:ज्यादातर रोहिंग्या सवार थे, खराब मौसम की वजह से हादसा

बंगाल की खाड़ी में दो नावें डूबीं,500 मौतों की आशंका:ज्यादातर रोहिंग्या सवार थे, खराब मौसम की वजह से हादसा

म्यांमार में हिंसा से बचकर भाग रहे 500 से ज्यादा लोगों के समुद्र में लापता होने की आशंका है। संयुक्त राष्ट्र की दो एजेंसियों के मुताबिक, म्यांमार के तट के पास खराब मौसम में दो नावें गायब हो गईं। इनमें सवार ज्यादातर लोग रोहिंग्या समुदाय के थे। अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) और संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) ने संयुक्त बयान में बताया कि दोनों नावें जून के आखिर में म्यांमार के पश्चिमी रखाइन राज्य से रवाना हुई थीं। पहली नाव में करीब 250 लोग सवार थे। रवाना होने के कुछ ही समय बाद उससे संपर्क टूट गया। दूसरी नाव में करीब 280 यात्री सवार थे और माना जा रहा है कि वह 8 जुलाई को म्यांमार के अयेयारवाडी तट के पास डूब गई। रोहिंग्या लोगों के पास किसी देश की नागरिकता नहीं रोहिंग्या म्यांमार के रखाइन राज्य का एक मुस्लिम अल्पसंख्यक समुदाय है। दशकों से यह समुदाय सरकारी उत्पीड़न, हिंसा और भेदभाव का सामना कर रहा है। म्यांमार की बौद्ध बहुसंख्यक सरकार और वहां के स्थानीय लोग रोहिंग्याओं को म्यांमार का मूल निवासी नहीं मानते। उनका दावा है कि ये लोग ब्रिटिश शासनकाल के दौरान बांग्लादेश (तत्कालीन बंगाल) से आए अवैध अप्रवासी हैं। उन्हें आधिकारिक तौर पर ‘बंगाली’ कहकर पुकारा जाता है। रोहिंग्या समुदाय का कहना है कि वे रखाइन क्षेत्र में आठवीं सदी या उससे भी पहले से रह रहे हैं और वे वहीं के मूल निवासी हैं। साल 1982 में रोहिंग्याओं को नागरिकता देने से इनकार कर दिया गया। इसके कारण वे बिना किसी देश के नागरिक बन गए। उन्हें बुनियादी अधिकार जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, यात्रा और शादी करने तक की आजादी नहीं है। करीब 12 लाख रोहिंग्या फिलहाल बांग्लादेश के शरणार्थी शिविरों में रह रहे हैं। ये लोग म्यांमार की सेना की हिंसा से बचकर वहां पहुंचे थे। हाल के वर्षों में अमेरिका और अन्य देशों की विदेशी सहायता में कटौती के कारण इन शिविरों में खाद्य राशन भी कम कर दिया गया है। रोहिंग्या शरणार्थियों के पास सुरक्षित तरीके से म्यांमार लौटने का कोई रास्ता नहीं है। 2017 में म्यांमार की सेना पर रोहिंग्या समुदाय के खिलाफ बड़े पैमाने पर हिंसा करने के आरोप लगे थे, जिसे कई देशों ने नरसंहार (जेनोसाइड) माना है। जो रोहिंग्या अब भी म्यांमार में रह रहे हैं, उन्हें कड़ी पाबंदियों का सामना करना पड़ रहा है। इनमें से कई लोग नजरबंदी शिविरों में रहने को मजबूर हैं। मलेशिया पहुंचने के लिए उठा रहे जानलेवा जोखिम आमतौर पर रोहिंग्या इस मौसम में समुद्र के रास्ते यात्रा करने से बचते हैं, क्योंकि मानसून के दौरान समुद्र बेहद खतरनाक हो जाता है। हालांकि म्यांमार में हिंसा और बांग्लादेश के भीड़भाड़ वाले शरणार्थी शिविरों में खराब हालात के कारण रोहिंग्या समुदाय के लोग वर्षों से जर्जर लकड़ी की नावों में बैठकर मलेशिया, इंडोनेशिया और थाईलैंड जैसे देशों तक पहुंचने की कोशिश करते रहे हैं। खराब परिस्थितियों के कारण बड़ी संख्या में रोहिंग्या लोग जर्जर नावों के जरिए मलेशिया पहुंचने की कोशिश करते हैं। इस दौरान हजारों लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें नवजात बच्चे, बच्चे और गर्भवती महिलाएं भी शामिल हैं। संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि कई बार स्थानीय समुद्री एजेंसियां संकट में फंसी नावों की मदद भी नहीं करतीं। दुनिया के सबसे खतरनाक समुद्री रास्तों में एक संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, 2025 में अंडमान सागर और बंगाल की खाड़ी में करीब 900 रोहिंग्या शरणार्थी मारे गए या लापता हो गए थे। यह दुनिया में शरणार्थियों और प्रवासियों के लिए सबसे खतरनाक समुद्री मार्ग माना जाता है। IOM और UNHCR ने कहा कि यह संभावित हादसा दिखाता है कि रोहिंग्या संकट का अभी तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकला है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से बांग्लादेश के शरणार्थी शिविरों में रह रहे लोगों की मदद बढ़ाने की अपील की। एजेंसियों ने कहा कि दुनिया के सबसे खतरनाक समुद्री मार्गों में से एक पर और लोगों की जान जाने से रोकने के लिए खोज एवं बचाव अभियान मजबूत करना, शरण देने की व्यवस्था बेहतर करना और मानव तस्करी के नेटवर्क के खिलाफ सख्त कार्रवाई जरूरी है। UNHCR के अनुसार, 2025 में 6,500 से ज्यादा रोहिंग्या समुद्र के रास्ते भागने की कोशिश कर रहे थे। इनमें से करीब 900 लोग मारे गए या लापता हो गए। यह रोहिंग्या शरणार्थियों के लिए अब तक का सबसे घातक साल था और दुनिया के किसी भी प्रमुख शरणार्थी समुद्री मार्ग पर सबसे अधिक मृत्यु दर दर्ज की गई। भारत में कितने रोहिंग्या हैं? नोट: रोहिंग्याओं की संख्या को लेकर भारत सरकार और UNHCR के आंकड़े अलग-अलग हैं। UNHCR केवल अपने यहां पंजीकृत शरणार्थियों और शरण मांगने वालों की संख्या बताता है, जबकि भारत सरकार का अनुमान देश में मौजूद कुल रोहिंग्या आबादी पर आधारित है।

‘प्रहार, द उज्ज्वल निकम स्टोरी’ जल्द होगी रिलीज:निकम बोले- राजकुमार ने मेरी नकल नहीं की, पूरी बॉडी लैंग्वेज आत्मसात की

‘प्रहार, द उज्ज्वल निकम स्टोरी’ जल्द होगी रिलीज:निकम बोले- राजकुमार ने मेरी नकल नहीं की, पूरी बॉडी लैंग्वेज आत्मसात की

राजकुमार राव स्टारर फिल्म ‘प्रहार: द उज्ज्वल निकम स्टोरी’ जल्द ही रिलीज होगी। इसकी तैयारी और राजकुमार की मेथड एक्टिंग को लेकर खुद वरिष्ठ अधिवक्ता और पूर्व पब्लिक प्रॉसिक्यूटर निकम ने खास बातें साझा कीं उज्ज्वल निकम बताते हैं कि ‘राजकुमार राव ने पारंपरिक रिसर्च की तरह लगातार सवाल नहीं पूछे। वह लंबे समय तक सामने बैठकर केवल यह देखते थे कि मैं कैसे बैठता हूं, फाइल कैसे पकड़ता हूं और अदालत में बहस करते समय हाथों का इस्तेमाल कैसे करता हूं। राजकुमार ने मेरी नकल नहीं की, बल्कि पूरी बॉडी लैंग्वेज को आत्मसात किया। उन्होंने मुझसे सवाल कम पूछे, लेकिन मेरी हर सूक्ष्म बारिकियों को बखूबी पकड़ा।’ संवाद रटने से ज्यादा व्यक्तित्व समझने पर फोकस किया गया निकम के मुताबिक, ‘राजकुमार की दिलचस्पी संवाद याद करने से ज्यादा उस व्यक्तित्व को समझने में थी, जिसे उन्हें परदे पर जीना था। वह रियल लाइफ में इंट्रोवर्ट हैं लेकिन किरदार की तैयार के लिहाज से की जाने वाली हर चीज जेहन में दर्ज करते जाते हैं। खास बात ये है कि वह अनावश्यक बातचीत में समय नहीं गंवाते। यही उनकी तैयारी की सबसे बड़ी ताकत है।’ वॉइस पर भी खास मेहनत की गई निकम का कहना है कि ‘अदालत में किसी वकील की पहचान केवल कानूनी ज्ञान से नहीं, बल्कि प्रस्तुति से भी बनती है। वॉइस कब ऊंची होगी, कब धीमी होगी और किस तर्क पर कितना विराम लेना है। इन बारीकियों पर राजकुमार ने खास तौर पर विशेष मेहनत की। उन्होंने सिर्फ संवाद याद नहीं किए, बल्कि उस लय को पकड़ने की कोशिश की जिसमें मैं अदालत में दलीलें रखता हूं।’ पुराने वीडियो देखकर राजकुमार ने पकड़ी निकम की शैली व्यक्तिगत मुलाकातों के अलावा राजकुमार ने निकम की कई पुराने दलीलों और रिकॉर्डिंग्स को बार-बार देखा। बकौल निकम, ‘मैंने देखा कि वह शब्दों पर जोर, बोलने की स्पीड और चेहरे के भावों को समझने के लिए मेरे वीडियोज बार-बार देखते थे। यह किसी संवाद को याद करने का नहीं, बल्कि एक इंसान के व्यक्तित्व को आत्मसात करने का अभ्यास था।’ निर्देशक के साथ असली कोर्ट जाकर लाइव माहौल भी समझा निर्देशक अविनाश अरुण के साथ राजकुमार ने वास्तविक अदालत की कार्यवाही भी देखी। निकम कहते हैं कि ‘राजकुमार को असल कोर्ट में जाकर समझ आया कि कोर्टरूम फिल्मों से बिल्कुल अलग दुनिया है। वहां हर शब्द का महत्व होता है, हर प्रतिक्रिया नियंत्रित होती है। अभिनय से ज्यादा संयम जरूरी होता है।’ शूटिंग के दौरान खुद सेट पर पहुंचे थे निकम, बोल दिए संवाद निकम के अनुसार, किसी व्यक्ति की हूबहू नकल करना आसान है लेकिन उसे परदे पर विश्वसनीय बनाना मुश्किल। राजकुमार ने मेरी आवाज या चाल की कॉपी करने की कोशिश नहीं की। उन्होंने मेरी सोच, प्रतिक्रिया और ऊर्जा को समझने की कोशिश की। एक कोर्ट सीन की शूटिंग के दौरान मैं अचानक सेट पर पहुंच गया था और वह संवाद खुद बोल दिया, जिसे राजकुमार बोलने वाले थे। कुछ पल के लिए पूरी यूनिट चौंक गई। बाद में जब सभी को पता चला कि यह मजाक था, तो सेट पर ठहाके गूंज उठे।’

IIT Kanpur Alumnus Siddharth Saxena Merlin AI Startup Success Story

IIT Kanpur Alumnus Siddharth Saxena Merlin AI Startup Success Story

Hindi News Career IIT Kanpur Alumnus Siddharth Saxena Merlin AI Startup Success Story 7 मिनट पहले कॉपी लिंक कम उम्र में करोड़ों की कमाई करने वाले युवाओं में सिद्धार्थ सक्सेना का नाम शामिल हो गया है। उन्होंने एक ही दिन में लगभग 8 मिलियन अमेरिकी डॉलर यानी 77 करोड़ कमाने का दावा किया है। सिद्धार्थ IIT कानपुर के पूर्व छात्र हैं। उन्होंने कानपुर से कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग में बीटेक की डिग्री ली। वे ऐसे युवा एंटरप्रेन्योर हैं, जिन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई है। महज 26 साल की उम्र में उन्होंने एक ही दिन में रिकॉर्ड तोड़ कमाई की है। सिद्धार्थ राजस्थान में अलवर के रहने वाले हैं। पढ़ाई पूरी करने के बाद वे विभिन्न अंतरराष्ट्रीय टेक कंपनियों में रिसर्च एवं डेवलपमेंट से जुड़े। The IIT alum who earned Rs 76.99 crore in one day.> be Siddhartha Saxena> IIT Kanpur, computer science> works as a machine learning engineer at Envestnet, Yodlee, Wadhwani AI, Aalto University in Finland, Jumio Corporation in Canada> 2022, starts Merlin, an AI Chrome… pic.twitter.com/M7XPf3NtSS— Chandana 🌻✨ (@RoseOnX9) July 15, 2026 दोस्तों के साथ मिलकर खड़ा किया स्टार्टअप साल 2022 में सिद्धार्थ ने अपने IIT कानपुर के बैचमेट्स प्रत्युष राय और सिरसेंदु सरकार के साथ मिलकर ‘मर्लिन’ को लॉन्च किया। यह एक ऐसा AI-पावर्ड क्रोम एक्सटेंशन है जो यूजर की प्रोडक्टिविटी को कई गुना बढ़ा देता है। आज इस स्टार्टअप की वैल्यू करीब 415 करोड़ रुपए आंकी जा रही है। इसके साथ ही, सिद्धार्थ ने मर्लिन के बाद थाईन (Thine) नामक एक अन्य AI स्टार्टअप भी शुरू किया। मर्लिन प्रोफेशनल्स के लिए उपयोगी AI टूल मर्लिन का मुख्यालय अमेरिका में है। यह AI टूल क्रोम एक्सटेंशन के रूप में उपलब्ध है। इसका उपयोग वेब, डेस्कटॉप और मोबाइल पर किया जा सकता है। यह छात्रों, कंटेंट क्रिएटर्स, मार्केटर्स और प्रोफेशनल्स के लिए उपयोगी AI टूल है। फोर्ब्स की 30 Under 30 Asia 2024 लिस्ट में Merlin के तीनों संस्थापकों को शामिल किया गया था। Thine सिद्धार्थ सक्सेना का दूसरा AI स्टार्टअप है। इसका मुख्यालय पालो ऑल्टो (कैलिफोर्निया, अमेरिका) में है। सिद्धार्थ ये मानते हैं कि IIT कानपुर के कंप्यूटर साइंस कोर्स में एडमिशन पाना बेहद कठिन होता है जिसके लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। ये हार्वर्ड में एडमिशन से 20 गुना कठिन है। कानपुर में पढ़ाई के दौरान ही उनकी रुचि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग में हुई जिसने आगे चलकर उनके करियर की दिशा तय की। सिद्धार्थ ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर शुरुआती फोकस किया। उसके बाद ग्लोबल मार्केट को ध्यान में रखकर स्टार्टअप की स्थापना। इसे ही उनकी कामयाबी की सबसे बड़ी वजह माना जाता है। सिद्धार्थ का मानना है कि बिजनेस में कामयाब होने के लिए सिर्फ तकनीक ही नहीं, बल्कि सही सोच भी जरूरी है। उनके अनुसार, लोगों को सीमित सोच छोड़कर बड़े अवसरों को देखने और समझदारी से जोखिम लेने की मानसिकता अपनाना चाहिए। ये खबर भी पढ़ें मस्‍क ने ट्विटर से निकाला तो खड़ी की अपनी कंपनी: पराग जैन ने शुरू की पैरेलल वेब सिस्‍टम्स; दो साल में कमाए 19 हजार करोड़ पराग अग्रवाल इंडियन अमेरिकन सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं। 29 नवंबर 2021 को ट्विटर के सह-संस्थापक जैक डॉर्सी ने CEO पद छोड़ते समय पराग को कंपनी का अगला CEO घोषित किया था। लेकिन अक्टूबर 2022 में एलन मस्क ने ट्विटर का अधिग्रहण किया तो पराग को इस पद से हटा दिया। पूरी खबर यहां पढ़ें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Atul Kulkarni Fast Support Sonam Wangchuk

Atul Kulkarni Fast Support Sonam Wangchuk

9 मिनट पहले कॉपी लिंक एक्टर अतुल कुलकर्णी ने एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक के समर्थन में एक दिन का उपवास रखने का ऐलान किया। वहीं, एक्ट्रेस सोनाक्षी सिन्हा और कॉमेडियन समय रैना भी वांगचुक के समर्थन में आए। अतुल कुलकर्णी ने कहा कि वह 16 जुलाई को अपने घर पर दिनभर का उपवास करेंगे। अतुल ने कहा कि इसका मकसद सोनम वांगचुक और उनके साथियों के दर्द को महसूस करना और सरकार से संवेदनशीलता दिखाने की अपील करना है। अतुल ने लोगों से भी एक दिन का उपवास रखने की अपील की। अतुल कुलकर्णी ‘रंग दे बसंती’, ‘हे राम’ और ‘द गाजी अटैक’ समेत कई फिल्मों में नजर आ चुके हैं। बता दें कि सोनम वांगचुक NEET पेपर लीक मामले में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन में शामिल होकर भूख हड़ताल पर बैठे हैं। वांगचुक की भूख हड़ताल का आज यानी 16 जुलाई को 19वां दिन है। उनकी हड़ताल को लेकर अब बॉलीवुड के कई कलाकारों ने पब्लिकली अपना समर्थन जताया। एक्ट्रेस सोनाक्षी सिन्हा ने आज इंस्टाग्राम पर वीडियो शेयर करते हुए कहा कि उन्होंने पहले कभी इस तरह सार्वजनिक बयान नहीं दिया, लेकिन इस बार चुप रहना संभव नहीं था। उन्होंने कहा कि सोनम वांगचुक देश के लिए किए गए अपने कार्यों और उपलब्धियों के लिए जाने जाते हैं। उनके अनुसार, वांगचुक उन छात्रों के भविष्य के लिए अनशन कर रहे हैं, जिन्हें वे संकट में मानते हैं। उन्होंने कहा कि यह एक ऐसे सिस्टम के खिलाफ लड़ाई है, जिसके कामकाज पर सवाल उठ रहे हैं। सोनाक्षी ने कहा कि देश के युवा अपनी आवाज उठा रहे हैं, लेकिन इस मुद्दे पर संवाद शुरू नहीं हो रहा। उन्होंने कहा कि वह भी देश की युवा हैं और देश का भला चाहती हैं, इसलिए उन्होंने अपनी बात सार्वजनिक रूप से रखने का फैसला किया। उन्होंने यह भी कहा, “मैं बस यह पूछना चाहती हूं कि यह कब काफी होगा? जब ये लोग मर जाएंगे, तब क्या आप जागेंगे? और इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? जो हो रहा है, वह सही नहीं है। मैं बस यही कहना चाहती हूं।” एक्ट्रेस फातिमा सना शेख ने सोशल मीडिया पर लिखा कि अब 19 दिन हो चुके हैं और किसी की बात सुनने के लिए इतना इंतजार नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सोनम वांगचुक जैसे व्यक्ति, जिन्होंने देश के लिए काफी योगदान दिया है, उन्हें अपनी बात रखने के लिए अपनी सेहत दांव पर नहीं लगानी चाहिए। फातिमा ने कहा कि राजनीतिक विचार चाहे जो भी हों, छात्रों के भविष्य की रक्षा करना जरूरी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस मुद्दे का समाधान बातचीत के जरिए निकले और सोनम वांगचुक की सेहत सुरक्षित रहे। उन्होंने युवाओं के बेहतर भविष्य के समर्थन की भी अपील की। कॉमेडियन समय रैना ने भी सोनम वांगचुक की तस्वीर शेयर करते हुए लिखा कि वह उम्मीद और प्रार्थना कर रहे हैं कि वांगचुक सुरक्षित रहें और इस पूरे मामले का समाधान जल्द बातचीत के जरिए निकले। सुरेंद्र शर्मा ने सोनम वांगचुक से की अपील मशहूर कवि सुरेंद्र शर्मा ने सोनम वांगचुक के नाम एक वीडियो मैसेज जारी किया है। उन्होंने वांगचुक से आमरण अनशन खत्म करने की भावुक अपील की। सुरेंद्र शर्मा ने कहा कि देश को सोनम वांगचुक जैसे नेतृत्व की जरूरत है, इसलिए किसी मंत्री के इस्तीफे के लिए अपनी जान दांव पर नहीं लगानी चाहिए। उन्होंने कहा कि देश किसी एक इस्तीफे से बड़ा होता है और करोड़ों युवा आज वांगचुक को अपनी आवाज मानते हैं। शर्मा ने कहा कि अगर उन्हें कुछ हुआ तो युवाओं की उम्मीद टूट जाएगी। अंत में उन्होंने वांगचुक से देशहित में अनशन खत्म कर संघर्ष जारी रखने की अपील की। वहीं, इससे पहले सोनी राजदान, शबाना आजमी, रूबीना दिलैक, नसीरुद्दीन शाह, रत्ना पाठक शाह और अनुराग कश्यप जैसे कई सेलेब्स भी सोनम वांगचुक के समर्थन में पोस्ट कर चुके हैं। बता दें कि अभिनेत्री स्वरा भास्कर जंतर-मंतर पहुंचीं और सोनम वांगचुक से मुलाकात कर अपना समर्थन जताया। वहीं, इससे पहले प्रकाश राज भी जंतर-मंतर पहुंचे थे। पूरी खबर यहां पढ़ें… …………….. यह खबर भी पढ़ें…. 3 इडियट्स के ‘चतुर’ बोले-नहीं चाहता फुंसुख वांगडू मर जाएं:जीनत अमान ने कहा- अपने अच्छे दिमाग को चुपचाप मरते हुए मत देखिए सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल के समर्थन में वीडियो पोस्ट करते हुए एक्टर ओमी वैद्य ने उन्हें प्रेरणादायक बताते हुए उनकी जान बचाने की अपील की थी। वहीं, जीनत अमान ने सरकार से बातचीत शुरू करने की मांग की और कहा था कि यह देश के भविष्य से जुड़ा मुद्दा है। पूरी खबर यहां पढें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

'दुल्हनिया ले आएगी' का ट्रेलर रिलीज:फिल्म में शाहरुख के बेटे आर्यन की रूमर्ड गर्लफ्रेंड भी नजर आएंगी; कहानी में मजेदार ट्विस्ट और फैमिली ड्रामा

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आकाशादित्य लामा की फिल्म ‘दुल्हनिया ले आएगी’ का ट्रेलर रिलीज हो गया। कॉमेडी, रोमांस, पारिवारिक रिश्तों और शादी की अफरा-तफरी से भरपूर यह ट्रेलर एक ऐसी फैमिली एंटरटेनर की झलक दिखाता है, जिसमें हंसी के साथ-साथ इमोशंस और कई मजेदार ट्विस्ट भी देखने को मिलेंगे। फिल्म में खुशाली कुमार, महेश मांजरेकर और पीयूष मिश्रा दिखाई देंगे। फिल्म में शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान की रूमर्ड गर्लफ्रेंड लारिसा बोन्सी भी नजर आएंगी। बता दें कि सिद्धार्थ बनर्जी, आकाशादित्य लामा और विकास अग्रवाल द्वारा प्रोड्यूस की गई ‘दुल्हनिया ले आएगी’ 24 जुलाई, 2026 को थिएटर में रिलीज होगी। फिल्म की कहानी एक ऐसी दुल्हन के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसके सामने समय की बड़ी चुनौती है। इसी डेडलाइन के बीच उसकी जिंदगी में कई संभावित दूल्हों की एंट्री होती है और शुरू हो जाता है दूल्हों की तलाश का ऐसा मजेदार सिलसिला, जो दर्शकों को अंत तक बांधे रखने का वादा करता है। शादी के रंगों और उत्सव से सजा इसका माहौल फिल्म को और भी आकर्षक बनाता है। फिल्म के ट्रेलर को लेकर डायरेक्टर आकाशादित्य लामा ने कहा, “हर शादी में ड्रामा होता है, लेकिन ‘दुल्हनिया ले आएगी’ में यह ड्रामा फेरों से पहले ही शुरू हो जाता है। हमारी कोशिश थी कि ट्रेलर देखने के बाद दर्शकों के चेहरे पर मुस्कान हो और साथ ही उनके मन में यह जानने की उत्सुकता भी बनी रहे कि आगे क्या होने वाला है। यह तेज रफ्तार, मजेदार, इमोशनल और ऐसे किरदारों से भरी फिल्म है, जिनसे दर्शक आसानी से जुड़ जाएंगे। यह पूरी तरह से एक फैमिली एंटरटेनर है और मुझे उम्मीद है कि दर्शक इसे देखकर उतना ही आनंद लेंगे, जितना हमें इसे बनाने में आया।” खुशाली ने किरदार को करियर का सबसे मजेदार बताया एक्ट्रेस खुशाली कुमार ने कहा, “यह मेरे करियर के सबसे मनोरंजक किरदारों में से एक है। वह कॉन्फिडेंट है, अनप्रिडिक्टेबल है और हर पल सबको सरप्राइज करती रहती है। ट्रेलर में फिल्म की एनर्जी और मस्ती भरे नेचर को खूबसूरती से दिखाया गया है। अब मैं ऑडियंस को उसकी पूरी कहानी बड़े पर्दे पर देखने का इंतजार नहीं कर सकती।” महेश मांजरेकर ने फिल्म के बारे में कहा, “‘दुल्हनिया ले आएगी’ की सबसे खास बात इसकी सादगी और ईमानदारी है। यह ऐसी फिल्म है, जो मनोरंजन करने की कोशिश नहीं करती, बल्कि आप खुद-ब-खुद इसकी दुनिया में खो जाते हैं और मुस्कुराने लगते हैं। मेरा किरदार अपने परिवार के लिए सबसे अच्छा चाहता है और यही इमोशनल पक्ष इसकी कॉमेडी को और भी दमदार बनाता है। ट्रेलर सिर्फ उस मजे की एक झलक है, जो फिल्म में देखने को मिलेगा। मुझे पूरा विश्वास है कि हर पीढ़ी के दर्शक इस कहानी से जुड़ाव महसूस करेंगे।” लारिसा बोन्सी ने ट्रेलर इंस्टाग्राम पर शेयर किया वहीं, फिल्म को लेकर एक्ट्रेस लारिसा बोन्सी ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर फिल्म ‘दुल्हनिया ले आएगी’ का ट्रेलर शेयर किया है। ट्रेलर शेयर करते हुए उन्होंने लिखा, “साल की सबसे धमाकेदार शादी का जश्न देखने के लिए तारीख याद रखिए। यह आकाशादित्य लामा की फिल्म ‘दुल्हनिया ले आएगी’ का ऑफिशियल ट्रेलर है। शादी की मस्ती, फैमिली ड्रामा और भरपूर मनोरंजन का शानदार मेल। यह फिल्म 24 जुलाई को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।” खुशाली कुमार, महेश मांजरेकर और पीयूष मिश्रा के अलावा फिल्म में ओंकार कपूर के साथ लोकप्रिय कंटेंट क्रिएटर्स अगू स्टेनली चिएदोजी और बी.सी. आंटी भी अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे। उनकी शानदार कॉमिक टाइमिंग और स्क्रीन प्रेजेंस फिल्म के ह्यूमर को और भी खास बनाती है।

विप्रो को पहली तिमाही में ₹3,352 करोड़ का मुनाफा हुआ:रेवेन्यू अनुमान से कम रहा, बोर्ड ने ₹2 डिविडेंड का ऐलान किया

विप्रो को पहली तिमाही में ₹3,352 करोड़ का मुनाफा हुआ:रेवेन्यू अनुमान से कम रहा, बोर्ड ने ₹2 डिविडेंड का ऐलान किया

आईटी सेक्टर की दिग्गज कंपनी विप्रो लिमिटेड ने चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी का पहली तिमाही में कॉन्सोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 0.6% बढ़कर 3,352 करोड़ रुपए रहा। पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी को 3,330 करोड़ रुपए का मुनाफा हुआ था। हालांकि विप्रो का रेवेन्यू एनालिस्ट के अनुमान से कम रहा। नतीजों के साथ ही कंपनी के बोर्ड ने प्रति इक्विटी शेयर 2 रुपए के डिविडेंड की भी ऐलान किया। रेवेन्यू 10.6% बढ़ा, लेकिन अनुमान से कम रहा पहली तिमाही में विप्रो का कॉन्सोलिडेटेड रेवेन्यू सालाना आधार पर 10.6% बढ़कर 24,479 करोड़ रुपए पर पहुंच गया। इसके बावजूद यह रॉयटर्स-LSEG के डेटा के अनुसार एनालिस्ट के औसत अनुमान (24,776 करोड़ रुपए) से कम रहा। अगर तिमाही आधार पर देखें, तो कंपनी के ग्रॉस रेवेन्यू में 1% की मामूली बढ़त दर्ज की गई है। आईटी सर्विसेज की परफॉर्मेंस और रेवेन्यू विप्रो का मुख्य बिजनेस यानी आईटी सर्विसेज का रेवेन्यू 2.61 बिलियन डॉलर रहा। यह सालाना आधार पर तो 1% ज्यादा है, लेकिन पिछली तिमाही के मुकाबले इसमें 1.4% की गिरावट आई है। कॉन्सटेंट करेंसी के लिहाज से आईटी सर्विसेज के रेवेन्यू में तिमाही आधार पर 1.2% की गिरावट और सालाना आधार पर 0.9% की बढ़त देखी गई है। लार्ज डील बुकिंग में 12.9% का उछाल तिमाही के दौरान विप्रो की कुल बुकिंग 3.37 बिलियन डॉलर रही, जो कॉन्सटेंट करेंसी में पिछली तिमाही से 2.4% कम है। हालांकि, कंपनी के लिए राहत की बात यह रही कि बड़ी डील्स की बुकिंग में तिमाही आधार पर 12.9% का शानदार उछाल आया और यह 1.63 बिलियन डॉलर तक पहुंच गई। मार्जिन और एट्रिशन रेट का हाल कंपनी का आईटी सर्विसेज ऑपरेटिंग मार्जिन 16% रहा है। इसमें पिछली तिमाही के मुकाबले 130 बेसिस पॉइंट्स और पिछले साल के मुकाबले 120 बेसिस पॉइंट्स की गिरावट आई है। इस तिमाही में ऑपरेटिंग कैश फ्लो 3,288 करोड़ रुपए रहा, जो कुल नेट इनकम का 98% है। वहीं, पिछले 12 महीनों के आधार पर कंपनी का वॉलंटरी एट्रिशन रेट यानी कर्मचारियों का नौकरी छोड़ने का रेश्यो 13.9% दर्ज किया गया। अगली तिमाही के लिए क्या है गाइडेंस जुलाई-सितंबर तिमाही यानी दूसरी तिमाही के लिए विप्रो ने आईटी सर्विसेज रेवेन्यू का अनुमान 2.57 बिलियन डॉलर से 2.63 बिलियन डॉलर के दायरे में रखा है। इसका मतलब है कि अगली तिमाही में कॉन्सटेंट करेंसी ग्रोथ -1.5% से लेकर 0.5% के बीच रह सकती है। टेक्नोलॉजी सर्विसेज और कंसलटिंग कंपनी है विप्रो विप्रो लिमिटेड एक लीडिंग टेक्नोलॉजी सर्विसेज और कंसलटिंग कंपनी है। 65 देशों में इसकी प्रेजेंस है। अजीम प्रेमजी को 1966 में 21 साल की उम्र में अपने पिता से विप्रो का कंट्रोल विरासत में मिला था। उनकी लीडरशिप में, विप्रो ने वनस्पति तेल के उत्पादन से लेकर आईटी सर्विसेज, सॉफ्टवेयर सॉल्यूशन और कंसल्टिंग सर्विसेज देने तक डायवर्सिफिकेशन किया। कंसॉलिडेटेड ​​​​​​मुनाफा मतलब पूरे ग्रुप का प्रदर्शन कंपनियों के रिजल्ट दो भाग में आते हैं- स्टैंडअलोन और कंसॉलिडेटेड। स्टैंडअलोन में केवल एक यूनिट का वित्तीय प्रदर्शन दिखाया जाता है, जबकि कॉन्सोलिडेटेड या समेकित फाइनेंशियल रिपोर्ट में पूरी कंपनी की रिपोर्ट दी जाती है। क्या होती है कॉन्सटेंट करेंसी? जब भारतीय आईटी कंपनियां वैश्विक स्तर पर व्यापार करती हैं, तो उन्हें डॉलर, यूरो या पाउंड जैसी विदेशी मुद्राओं में भुगतान मिलता है। लेकिन डॉलर और रुपए की एक्सचेंज रेट में लगातार उतार-चढ़ाव होता रहता है। इस उतार-चढ़ाव के असर को हटाकर कंपनी की असली ग्रोथ को नापने के लिए ‘कॉन्सटेंट करेंसी’ का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें करेंसी रेट को एक निश्चित स्तर पर फिक्स मानकर रेवेन्यू की गणना की जाती है ताकि सही परफॉर्मेंस का पता चल सके।

'दुल्हनिया ले आएगी' का ट्रेलर रिलीज:फिल्म में शाहरुख के बेटे आर्यन की रूमर्ड गर्लफ्रेंड भी नजर आएंगी; कहानी में मजेदार ट्विस्ट और फैमिली ड्रामा

'दुल्हनिया ले आएगी' का ट्रेलर रिलीज:फिल्म में शाहरुख के बेटे आर्यन की रूमर्ड गर्लफ्रेंड भी नजर आएंगी; कहानी में मजेदार ट्विस्ट और फैमिली ड्रामा

आकाशादित्य लामा की फिल्म ‘दुल्हनिया ले आएगी’ का ट्रेलर रिलीज हो गया। कॉमेडी, रोमांस, पारिवारिक रिश्तों और शादी की अफरा-तफरी से भरपूर यह ट्रेलर एक ऐसी फैमिली एंटरटेनर की झलक दिखाता है, जिसमें हंसी के साथ-साथ इमोशंस और कई मजेदार ट्विस्ट भी देखने को मिलेंगे। फिल्म में खुशाली कुमार, महेश मांजरेकर और पीयूष मिश्रा दिखाई देंगे। फिल्म में शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान की रूमर्ड गर्लफ्रेंड लारिसा बोन्सी भी नजर आएंगी। बता दें कि सिद्धार्थ बनर्जी, आकाशादित्य लामा और विकास अग्रवाल द्वारा प्रोड्यूस की गई ‘दुल्हनिया ले आएगी’ 24 जुलाई, 2026 को थिएटर में रिलीज होगी। फिल्म की कहानी एक ऐसी दुल्हन के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसके सामने समय की बड़ी चुनौती है। इसी डेडलाइन के बीच उसकी जिंदगी में कई संभावित दूल्हों की एंट्री होती है और शुरू हो जाता है दूल्हों की तलाश का ऐसा मजेदार सिलसिला, जो दर्शकों को अंत तक बांधे रखने का वादा करता है। शादी के रंगों और उत्सव से सजा इसका माहौल फिल्म को और भी आकर्षक बनाता है। फिल्म के ट्रेलर को लेकर डायरेक्टर आकाशादित्य लामा ने कहा, “हर शादी में ड्रामा होता है, लेकिन ‘दुल्हनिया ले आएगी’ में यह ड्रामा फेरों से पहले ही शुरू हो जाता है। हमारी कोशिश थी कि ट्रेलर देखने के बाद दर्शकों के चेहरे पर मुस्कान हो और साथ ही उनके मन में यह जानने की उत्सुकता भी बनी रहे कि आगे क्या होने वाला है। यह तेज रफ्तार, मजेदार, इमोशनल और ऐसे किरदारों से भरी फिल्म है, जिनसे दर्शक आसानी से जुड़ जाएंगे। यह पूरी तरह से एक फैमिली एंटरटेनर है और मुझे उम्मीद है कि दर्शक इसे देखकर उतना ही आनंद लेंगे, जितना हमें इसे बनाने में आया।” खुशाली ने किरदार को करियर का सबसे मजेदार बताया एक्ट्रेस खुशाली कुमार ने कहा, “यह मेरे करियर के सबसे मनोरंजक किरदारों में से एक है। वह कॉन्फिडेंट है, अनप्रिडिक्टेबल है और हर पल सबको सरप्राइज करती रहती है। ट्रेलर में फिल्म की एनर्जी और मस्ती भरे नेचर को खूबसूरती से दिखाया गया है। अब मैं ऑडियंस को उसकी पूरी कहानी बड़े पर्दे पर देखने का इंतजार नहीं कर सकती।” महेश मांजरेकर ने फिल्म के बारे में कहा, “‘दुल्हनिया ले आएगी’ की सबसे खास बात इसकी सादगी और ईमानदारी है। यह ऐसी फिल्म है, जो मनोरंजन करने की कोशिश नहीं करती, बल्कि आप खुद-ब-खुद इसकी दुनिया में खो जाते हैं और मुस्कुराने लगते हैं। मेरा किरदार अपने परिवार के लिए सबसे अच्छा चाहता है और यही इमोशनल पक्ष इसकी कॉमेडी को और भी दमदार बनाता है। ट्रेलर सिर्फ उस मजे की एक झलक है, जो फिल्म में देखने को मिलेगा। मुझे पूरा विश्वास है कि हर पीढ़ी के दर्शक इस कहानी से जुड़ाव महसूस करेंगे।” लारिसा बोन्सी ने ट्रेलर इंस्टाग्राम पर शेयर किया वहीं, फिल्म को लेकर एक्ट्रेस लारिसा बोन्सी ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर फिल्म ‘दुल्हनिया ले आएगी’ का ट्रेलर शेयर किया है। ट्रेलर शेयर करते हुए उन्होंने लिखा, “साल की सबसे धमाकेदार शादी का जश्न देखने के लिए तारीख याद रखिए। यह आकाशादित्य लामा की फिल्म ‘दुल्हनिया ले आएगी’ का ऑफिशियल ट्रेलर है। शादी की मस्ती, फैमिली ड्रामा और भरपूर मनोरंजन का शानदार मेल। यह फिल्म 24 जुलाई को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।” खुशाली कुमार, महेश मांजरेकर और पीयूष मिश्रा के अलावा फिल्म में ओंकार कपूर के साथ लोकप्रिय कंटेंट क्रिएटर्स अगू स्टेनली चिएदोजी और बी.सी. आंटी भी अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे। उनकी शानदार कॉमिक टाइमिंग और स्क्रीन प्रेजेंस फिल्म के ह्यूमर को और भी खास बनाती है।

विप्रो को पहली तिमाही में ₹3,352 करोड़ का मुनाफा हुआ:रेवेन्यू अनुमान से कम रहा, बोर्ड ने ₹2 डिविडेंड का ऐलान किया

विप्रो को पहली तिमाही में ₹3,352 करोड़ का मुनाफा हुआ:रेवेन्यू अनुमान से कम रहा, बोर्ड ने ₹2 डिविडेंड का ऐलान किया

आईटी सेक्टर की दिग्गज कंपनी विप्रो लिमिटेड ने चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी का पहली तिमाही में कॉन्सोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 0.6% बढ़कर 3,352 करोड़ रुपए रहा। पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी को 3,330 करोड़ रुपए का मुनाफा हुआ था। हालांकि विप्रो का रेवेन्यू एनालिस्ट के अनुमान से कम रहा। नतीजों के साथ ही कंपनी के बोर्ड ने प्रति इक्विटी शेयर 2 रुपए के डिविडेंड की भी ऐलान किया। रेवेन्यू 10.6% बढ़ा, लेकिन अनुमान से कम रहा पहली तिमाही में विप्रो का कॉन्सोलिडेटेड रेवेन्यू सालाना आधार पर 10.6% बढ़कर 24,479 करोड़ रुपए पर पहुंच गया। इसके बावजूद यह रॉयटर्स-LSEG के डेटा के अनुसार एनालिस्ट के औसत अनुमान (24,776 करोड़ रुपए) से कम रहा। अगर तिमाही आधार पर देखें, तो कंपनी के ग्रॉस रेवेन्यू में 1% की मामूली बढ़त दर्ज की गई है। आईटी सर्विसेज की परफॉर्मेंस और रेवेन्यू विप्रो का मुख्य बिजनेस यानी आईटी सर्विसेज का रेवेन्यू 2.61 बिलियन डॉलर रहा। यह सालाना आधार पर तो 1% ज्यादा है, लेकिन पिछली तिमाही के मुकाबले इसमें 1.4% की गिरावट आई है। कॉन्सटेंट करेंसी के लिहाज से आईटी सर्विसेज के रेवेन्यू में तिमाही आधार पर 1.2% की गिरावट और सालाना आधार पर 0.9% की बढ़त देखी गई है। लार्ज डील बुकिंग में 12.9% का उछाल तिमाही के दौरान विप्रो की कुल बुकिंग 3.37 बिलियन डॉलर रही, जो कॉन्सटेंट करेंसी में पिछली तिमाही से 2.4% कम है। हालांकि, कंपनी के लिए राहत की बात यह रही कि बड़ी डील्स की बुकिंग में तिमाही आधार पर 12.9% का शानदार उछाल आया और यह 1.63 बिलियन डॉलर तक पहुंच गई। मार्जिन और एट्रिशन रेट का हाल कंपनी का आईटी सर्विसेज ऑपरेटिंग मार्जिन 16% रहा है। इसमें पिछली तिमाही के मुकाबले 130 बेसिस पॉइंट्स और पिछले साल के मुकाबले 120 बेसिस पॉइंट्स की गिरावट आई है। इस तिमाही में ऑपरेटिंग कैश फ्लो 3,288 करोड़ रुपए रहा, जो कुल नेट इनकम का 98% है। वहीं, पिछले 12 महीनों के आधार पर कंपनी का वॉलंटरी एट्रिशन रेट यानी कर्मचारियों का नौकरी छोड़ने का रेश्यो 13.9% दर्ज किया गया। अगली तिमाही के लिए क्या है गाइडेंस जुलाई-सितंबर तिमाही यानी दूसरी तिमाही के लिए विप्रो ने आईटी सर्विसेज रेवेन्यू का अनुमान 2.57 बिलियन डॉलर से 2.63 बिलियन डॉलर के दायरे में रखा है। इसका मतलब है कि अगली तिमाही में कॉन्सटेंट करेंसी ग्रोथ -1.5% से लेकर 0.5% के बीच रह सकती है। टेक्नोलॉजी सर्विसेज और कंसलटिंग कंपनी है विप्रो विप्रो लिमिटेड एक लीडिंग टेक्नोलॉजी सर्विसेज और कंसलटिंग कंपनी है। 65 देशों में इसकी प्रेजेंस है। अजीम प्रेमजी को 1966 में 21 साल की उम्र में अपने पिता से विप्रो का कंट्रोल विरासत में मिला था। उनकी लीडरशिप में, विप्रो ने वनस्पति तेल के उत्पादन से लेकर आईटी सर्विसेज, सॉफ्टवेयर सॉल्यूशन और कंसल्टिंग सर्विसेज देने तक डायवर्सिफिकेशन किया। कंसॉलिडेटेड ​​​​​​मुनाफा मतलब पूरे ग्रुप का प्रदर्शन कंपनियों के रिजल्ट दो भाग में आते हैं- स्टैंडअलोन और कंसॉलिडेटेड। स्टैंडअलोन में केवल एक यूनिट का वित्तीय प्रदर्शन दिखाया जाता है, जबकि कॉन्सोलिडेटेड या समेकित फाइनेंशियल रिपोर्ट में पूरी कंपनी की रिपोर्ट दी जाती है। क्या होती है कॉन्सटेंट करेंसी? जब भारतीय आईटी कंपनियां वैश्विक स्तर पर व्यापार करती हैं, तो उन्हें डॉलर, यूरो या पाउंड जैसी विदेशी मुद्राओं में भुगतान मिलता है। लेकिन डॉलर और रुपए की एक्सचेंज रेट में लगातार उतार-चढ़ाव होता रहता है। इस उतार-चढ़ाव के असर को हटाकर कंपनी की असली ग्रोथ को नापने के लिए ‘कॉन्सटेंट करेंसी’ का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें करेंसी रेट को एक निश्चित स्तर पर फिक्स मानकर रेवेन्यू की गणना की जाती है ताकि सही परफॉर्मेंस का पता चल सके।

ड्रोन हमलों से रूस को पछाड़ने वाले रक्षामंत्री हटाए गए:जेलेंस्की के खिलाफ हजारों लोग सड़कों पर उतरे, इसी महीने प्रधानमंत्री को भी हटाया था

ड्रोन हमलों से रूस को पछाड़ने वाले रक्षामंत्री हटाए गए:जेलेंस्की के खिलाफ हजारों लोग सड़कों पर उतरे, इसी महीने प्रधानमंत्री को भी हटाया था

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने रक्षा मंत्री मिखाइलो फेदोरोव को नियुक्ति के सिर्फ छह महीने बाद पद से हटा दिया। इस फैसले के बाद गुरुवार को युद्ध शुरू होने के बाद पहली बार देश के कई शहरों में विरोध प्रदर्शन हुए। राजधानी कीव में बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरे। इसके अलावा ओडेसा, ल्वीव और रूस के हमलों का लगातार सामना कर रहे खारकीव शहर में भी लोगों ने प्रदर्शन किया। खारकीव में 300 से ज्यादा लोग हाथों में तख्तियां लेकर सड़कों पर उतरे और “शर्म करो, शर्म करो” के नारे लगाए। 35 वर्षीय मिखाइलो फेदोरोव को यूक्रेन में ड्रोन युद्ध की रणनीति का प्रमुख चेहरा माना जाता है। उन्होंने लंबी दूरी के ड्रोन हमलों के जरिए रूस के सैन्य ठिकानों और तेल उद्योग से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाने की रणनीति को आगे बढ़ाया। इसके अलावा कब्जे वाले क्रीमिया को सैन्य और रसद के स्तर पर अलग-थलग करने के अभियान में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।

जेलेंस्की ने प्रधानमंत्री के बाद अब रक्षामंत्री को भी हटाया:ड्रोन हमलों से रूस को पछाड़ा था, फैसले के खिलाफ हजारों लोग सड़कों पर उतरे

ड्रोन हमलों से रूस को पछाड़ने वाले रक्षामंत्री हटाए गए:जेलेंस्की के खिलाफ हजारों लोग सड़कों पर उतरे, इसी महीने प्रधानमंत्री को भी हटाया था

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने रक्षा मंत्री मिखाइलो फेदोरोव को नियुक्ति के सिर्फ छह महीने बाद पद से हटा दिया। इस फैसले के बाद गुरुवार को युद्ध शुरू होने के बाद पहली बार देश के कई शहरों में विरोध प्रदर्शन हुए। राजधानी कीव में बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरे। इसके अलावा ओडेसा, ल्वीव और रूस के हमलों का लगातार सामना कर रहे खारकीव शहर में भी लोगों ने प्रदर्शन किया। खारकीव में 300 से ज्यादा लोग हाथों में तख्तियां लेकर सड़कों पर उतरे और “शर्म करो, शर्म करो” के नारे लगाए। 35 साल के फेडोरोव यूक्रेन के ड्रोन युद्ध कार्यक्रम का सबसे बड़ा चेहरा माने जाते थे। उन्हें यूक्रेन में ड्रोन और रोबोट की मदद से युद्ध लड़ने की रणनीति का प्रमुख समर्थक माना जाता था। उनके हटने से अब यह सवाल उठने लगे हैं कि रूस जैसी बड़ी सेना का मुकाबला करने के लिए यूक्रेन की नई तकनीक और ड्रोन पर आधारित रणनीति आगे भी पहले की तरह जारी रहेगी या नहीं। फेडोरोव को हटाया जाना जेलेंस्की सरकार में बड़े बदलाव का हिस्सा है। इसी फेरबदल में प्रधानमंत्री को भी हटाया गया है। पहले डिजिटल मंत्री थे, फिर बने रक्षा मंत्री रक्षा मंत्री बनने से पहले फेडोरोव यूक्रेन के डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन (ई-गवर्नेंस) मंत्री थे। वे कई वर्षों तक जेलेंस्की के सबसे भरोसेमंद तकनीकी सलाहकार भी रहे। जनवरी में रक्षा मंत्री बनने के बाद उन्होंने सेना में नई तकनीक, ड्रोन और रोबोट का इस्तेमाल तेजी से बढ़ाया। उसी दौरान यूक्रेन के कई पुराने ड्रोन प्रोजेक्ट सफल होने लगे। यूक्रेन ने रूस के अंदर सैकड़ों किलोमीटर दूर तक लगातार ड्रोन हमले किए और कब्जे वाले क्रीमिया को निशाना बनाकर वहां रूसी सेना की आपूर्ति और ठिकानों पर हमले किए। इन सफलताओं से यूक्रेन में लोगों का भरोसा बढ़ा कि नई तकनीक के जरिए रूस का मुकाबला किया जा सकता है। शुरुआत से ही सेना के जनरलों से मतभेद रहे कई रिपोर्ट्स के अनुसार, रक्षा मंत्री फेदोरोव को हटाने के पीछे भ्रष्टाचार या नाकामी नहीं, बल्कि सेना के शीर्ष जनरलों और कमांडर-इन-चीफ ओलेक्सांद्र सिरस्की के साथ उनका गहरा मतभेद था। जनवरी में रक्षा मंत्री बनने के तुरंत बाद से ही फेडोरोव की उनसे बहस होने लगी थी। फेडोरोव का मानना था कि भविष्य का युद्ध ड्रोन, रोबोट और नई तकनीक से लड़ा जाएगा। लेकिन सिरस्की का कहना था कि यह सोच पूरी तरह व्यावहारिक नहीं है। उनका मानना था कि युद्ध जीतने के लिए अब भी सैनिकों को मोर्चे पर जाकर लड़ना पड़ेगा। केवल ड्रोन से युद्ध नहीं जीता जा सकता। दोनों के बीच आपसी बातचीत भी बंद हो गई थी। राष्ट्रपति जेलेंस्की ने कमान के इस टकराव को सुलझाने के लिए सेना के जनरलों का पक्ष लिया और फेदोरोव को हटाने का फैसला किया। रक्षा उद्योग की बड़ी कंपनियां भी नाराज हो गईं फेडोरोव ने हथियार खरीदने की व्यवस्था बदलने की कोशिश की। इससे अरबों डॉलर के रक्षा उद्योग से जुड़े कई ठेकेदार उनके विरोधी बन गए। उन्होंने ब्रेव-1 नाम का ऑनलाइन प्लेटफॉर्म शुरू किया, जिसे लोग ‘हथियारों का अमेजन’ कहते थे। इसके जरिए सैनिक अपनी जरूरत के कुछ हथियार और उपकरण खुद ऑनलाइन चुन सकते थे और मंगा सकते थे। इसके अलावा उन्होंने डॉटचेन नाम का एक और प्लेटफॉर्म भी शुरू किया। इन दोनों सिस्टम की वजह से हथियार खरीदने की पारंपरिक सरकारी प्रक्रिया कमजोर होने लगी। इससे हथियार कंपनियों की लॉबिंग और बंद कमरों में होने वाले रक्षा सौदों पर असर पड़ा। यही वजह थी कि कई बड़े रक्षा ठेकेदार उनके खिलाफ हो गए। सेना के भीतर भी विरोध था सेना के कुछ अधिकारियों का कहना था कि फेडोरोव के पास सैन्य अनुभव नहीं था। उनके आलोचकों का कहना था कि वे युद्ध का अनुभव रखने वाले अधिकारी नहीं, बल्कि अच्छी प्रस्तुति (प्रेजेंटेशन) देने वाले व्यक्ति हैं। उनके कई वरिष्ठ सहयोगी भी पहले डिजिटल मंत्रालय में काम करते थे। वे सेना से नहीं आए थे। इस वजह से भी सेना के भीतर उनके नेतृत्व पर सवाल उठते रहे। फेडोरोव के एक वरिष्ठ सहयोगी ने स्केल्या (Skelya) नाम की हमलावर सैन्य यूनिट की आलोचना की थी। उन्होंने कहा था कि उस यूनिट को लड़ाई में भारी नुकसान हुआ। इसके जवाब में स्केल्या यूनिट ने तंज कसते हुए कहा कि अगर उन्हें युद्ध की इतनी समझ है तो वे खुद मोर्चे पर जाकर हमला करके दिखाएं। यह विवाद भी काफी चर्चा में रहा। रक्षामंत्री की लोकप्रियता भी परेशानी बन गई राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि फेडोरोव की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही थी। वे ड्रोन कार्यक्रम का चेहरा बन चुके थे और लोगों के बीच काफी लोकप्रिय थे। कीव स्थित स्वतंत्र थिंक टैंक पेंटा सेंटर फॉर पॉलिटिकल स्टडीज के प्रमुख वोलोदिमिर फेसेन्को ने कहा, “जेलेंस्की चाहते हैं कि सरकार में सबसे बड़ा चेहरा वही बने रहें।” फेसेन्को ने यह भी कहा कि फेडोरोव को विपक्षी नेताओं का भी समर्थन मिलने लगा था। संभव है कि जेलेंस्की ने इसे भी अपने लिए राजनीतिक खतरे के रूप में देखा हो। यूक्रेन की समाचार वेबसाइट उक्राइन्स्का प्रावदा के मुताबिक, राष्ट्रपति जेलेंस्की ने अपने राजनीतिक सहयोगियों से कहा कि फेडोरोव, सेना के वरिष्ठ अधिकारियों और रक्षा उद्योग के बीच बढ़ते विवाद अब उनके लिए संभालना मुश्किल हो गए थे। रिपोर्ट के अनुसार, यही वजह बनी कि आखिरकार जेलेंस्की ने उन्हें रक्षा मंत्री के पद से हटाने का फैसला किया।