Saturday, 05 Sep 2026 | 07:39 PM

Trending :

EXCLUSIVE

सावन 2026 ब्लाउज़ डिज़ाइन: ब्लाउज़ के साथ स्टाइल करें ये ट्रेंडी ब्लाउज़ डिज़ाइन, हर कोई शोभायमान; तस्वीरें देखें

साड़ी के लिए सावन 2026 ट्रेंडी ब्लाउज़ डिज़ाइन, स्टाइलिश, उत्तम दर्जे का और आधुनिक डिज़ाइन

22 जुलाई 2026 को 22:49 IST पर अपडेट किया गया ट्रेंडी ब्लाउज़ डिज़ाइन 2026: सावन 2026 में फैशन के साथ कुछ नया डिज़ाइन करना चाहते हैं? ये ट्रेंडी ब्लाउज डिजाइंस आपको देगा परफेक्ट लुक। हर कोई आपका भव्य स्वागत। तो देखते हैं ये खास डिस्कशन। अनुसरण करना : नेट ब्लाउज: नेट वाले ब्लाउज का फैशन फिर से लौट आया है। मार्केट में नेट मार्केटिंग में आपको कई अलग-अलग पैच वर्कशॉप और शानदार डिस्किंस आसानी से मिल जाएंगे। छवि: एआई हॉल्टर नेक ब्लाउज: रोलेब में स्टाइलिश और आलीशान होटल है? बेमिसाल लेस पसंद है? तो हाल्टर नेक ब्लाउज आपके लिए सर्वोत्तम सर्वोत्तम पद पर बने रहेंगे। इसे सावन में जरूर खरीदें। छवि: एआई डोरी ब्लाउज: डीपी नेक मॉडल के शौकीन हैं? तो पीछे की ओर खूबसूरत डोरी की मूर्तियाँ। ये नेकेरिन को सपोर्टिव लुक के साथ असामीटिव लुक भी मिलता है। मार्केट से रेडीमेड डोरी भी ले सकते हैं। छवि: एआई ऑफ शोल्डर ब्लाउज: अगर आपकी महफ़िल में सबसे अलग आलीशान लड़कियाँ हैं, तो शोल्डर ब्लाउज़ के साथ डिज़ाइन किए गए डिज़ाइन। ये आपका ओवरऑल लुक बेहद शानदार और ग्लैमरस बना देगा। छवि: एआई पीएफ स्लैप्स ब्लाउज: किसी भी सिंपल से ब्लाउज को ट्रेंडी बनाना हो, तो इसमें शामिल हैं पफ स्क्रैप्स ब्रांड लें। यह डिज़ाइन आपको बहुत ही क्लासी और एलिगेंट लुक देने का काम देगा। छवि: एआई वी-नेक ब्लाउज: अगर आपके कंधे सामान्य हैं, तो वी-नेक ब्लाउज आप पर बहुत जचेगा। इसे और भी खूबसूरत मेकिंग के लिए आप नेकलाइन पर अपनी पसंद की गर्लफ्रेंड सी लेस बुक करवा सकते हैं। छवि: एआई द्वारा प्रकाशित: समृद्धि ब्रेजा प्रकाशित 22 जुलाई 2026 22:49 IST पर

रिलेशनशिप टिप्स: सोशल मीडिया के जरिए हुआ है प्यार? पहली मुलाकात से पहले इन 8 बातों का रखें ध्यान, टूट सकता है दिल

छवि अपलोड की गई

ऑनलाइन डेटिंग जोड़ों के लिए संबंध सलाह: आज के डिजिटल दौर में प्यार भी डिजिटल हो गया है। फेसबुक, चैट या डेटिंग ऐप्स के जरिए किसी अजनबी से बातचीत शुरू हुई और फिर उस बातचीत का प्यार में बदलाव अब बहुत आम बात है। सोशल मीडिया पर किसी से प्यार होता है बहुत ही खूबसूरत तस्वीरें होती हैं, लेकिन जब बात पहली बार असल जिंदगी में मिलती है, तो मन में चिंता और एक्साइटमेंट दोनों हो जाते हैं। अगर आप भी अपने सोशल मीडिया वाले से पहली बार मिलने जा रहे हैं, तो खुशी के साथ-साथ सावधानी बरतना भी बहुत जरूरी है। वर्चुअल दुनिया और असल दुनिया में काफी फर्क होता है। आपका दिल न दस्तावेज और आपकी पहली मुलाकात यादगार बने, इसके लिए इन 8 बातों का ध्यान जरूर रखें। तो जानें कौन सी हैं वो बातें- मिलने से पहले वीडियो कॉल जरूर करें लोग अक्सर महीनों चैट या कॉल करते रहते हैं, लेकिन वीडियो कॉल करने से कतरा जाते हैं। पहली मुलाकात से पहले कम से कम एक-दो बार वीडियो कॉल जरूर करें। इससे आपको पता चलेगा कि सामने वाला इंसान असल में दिखता ही है या नहीं, जैसा कि उसकी तस्वीर में दिखता है। इस प्रोफाइल का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है। हमेशा सार्वजनिक स्थान चुनें पहली बार मिल रहे हैं, तो कभी किसी के घर, सनसन जगह या किसी निजी इंजेक्शन पर भी नहीं। हमेशा कोई भी कैफे, रेस्तरां या मॉल जैसी भीड़भाड़ वाली जगह चुनें। सार्वजनिक स्थान पर आप खुद को सबसे ज्यादा सुरक्षित महसूस करेंगे और अगर कुछ अजीब लगे तो वहां से संपर्क करना भी आसान है। अपने किसी दोस्त या करीबी को पसंद करें आप जब भी अपने ऑनलाइन ऑफ़लाइन मेगासिटी से मिलें, तो अपने किसी करीबी दोस्त या भाई-बहन के बारे में पूरी जानकारी लें। उन्हें बताएं कि आप किस्से मिल रहे हैं, कहां जा रहे हैं और कितने बजे तक वापस आएंगे। अपना लाइव आकर्षण (लाइव लोकेशन) भी किसी एक करीबी के साथ साझा करें। उम्मीदों का पहाड़ न टूट पड़ा सोशल मीडिया पर इंसान अक्सर अपना सबसे अच्छा रूप ही स्वामी है। ऐसा हो सकता है कि असल जिंदगी में वह इंसानों का प्रत्यक्ष रूप न हो जो ऑनलाइन दिखता हो। इसलिए, मिलने से पहले बहुत अधिक विवरण न पालें। नाम रखने के लिए यदि आप सामने वाला की कल्पना करते हैं तो आपकी रेटिंग पूरी नहीं होती है, तो आपको ज्यादा रेटिंग नहीं मिलती है। नवीनतम समाचार पहली मुलाकात में ही सब कुछ तय कर लें, रुकें नहीं। यह बस एक नाम है ‘गेट-टुगेडर’ की तरह, जहां आप एक-दूसरे को समझने की कोशिश कर रहे हैं। भविष्य की बड़ी-बड़ी योजनाएं बनाएं या तुरंत कोई कमिट करने से बचें। इंस्टीट्यूट को अपनी विश्वसनीयता से आगे बढ़ने का अवसर। अपनी बहुत सी निजी बातें शेयर न करें खैर आप ऑनलाइन काफी समय से बात कर रहे हैं, लेकिन पहली मुलाकात में अपने मोबाइल फोन, घर का पता या कोई निजी जानकारी तुरंत साझा न करें। जब तक आप पूरी तरह से सामने वाले इंसान को जान और समझ न लें, तब तक एक पहचान बनाए रखें। उनकी सहमति पर ध्यान दें ऑनलाइन चैट पर कोई भी मिठी-मीठी बातें कर सकता है, लेकिन इंसान के असली स्वभाव के बारे में उसकी असलियत पता चल जाती है। नोटिस करें कि वह आपके साथ कैसा व्यवहार कर रहे हैं। वे वेटर या स्टाफ से तमीज़ से क्या बात कर रहे हैं? क्या वे आपकी बातों पर ध्यान से सुन रहे हैं या सिर्फ अपने मोबाइल में लगे हैं? ये छोटी-छोटी बातें उनके असली व्यक्तित्व को दर्शाती हैं। अपनी ‘गट फिलिंग’ पर भरोसा रखें अंदर की आवाज कभी झूठ नहीं बोलती। अगर मिलने के बाद आपको उनकी बातें करने के तरीके, उनके हाव-भाव या किसी भी चीज से अजीब सी दोस्ती महसूस हो रही है, तो अपनी उस गट फीलिंग को इग्नोर न करें। अगर आपको अच्छा नहीं लग रहा है, तो वहां से कोई भी यात्रा करना ही बेहतर है। ऑफ़लाइन प्यार मिलना कोई बुरी बात नहीं है, बस थोड़ी सी समझदारी और समझदारी जरूरी है। पहली मुलाकात को एक परीक्षा न दें, बल्कि एक अनुभव की तरह लें। अगर देखने में अच्छी लग रही है, तो आपके स्थान की एक खूबसूरत शुरुआत होगी और अगर कुछ ठीक नहीं हुआ, तो आपको एक जरूरी काम चाहिए। यह अवश्य पढ़ें: नीता अंबानी ने दिखाया ‘एंटीलिया’ का सबसे खूबसूरत कोना, चांदी के दरवाजे और आलीशान मंदिर, देखें खुली रह संगीत की झलक, वीडियो (टैग्सटूट्रांसलेट)सोशल मीडिया डेटिंग टिप्स(टी)सोशल मीडिया(टी)सोशल मीडिया डेटिंग टिप्स(टी)ऑनोइन डेटिंग टिप्स(टी)रिलेशनशिप टिप्स(टी)युगल टिप्स

ओट्स ढोकला रेसिपी: बनाना है कुछ नया स्वाद? बेसन की जगह घर में सिर्फ 5 मिनट में तैयार करें सॉफ्ट ओट्स ढोकला, नोट करें विधि

तस्वीर का विवरण

अन्य ढोलकला सामग्री बनाने के लिए: 1 कप ओट्स, ½ कप दही, ¼ कप पानी, 1 छोटा मोटा अदरक-हरी मिर्च का पेस्ट, ½ छोटा मोटा नमक, ½ छोटा काला हल्दी, 1 छोटा मोटा चीनी, 1 छोटा ईनो छवि: फ्रीपिक धन्यवाद के लिए: 1 बड़ा मूंगा तेल, 1 बड़ा तिल छवि: एआई ओट्स ढोलकला बनाने की विधि: सबसे पहले ओटीएस को पीसकर स्टोन पाउडर बनाया लें। अब एक बड़ा बाउल में ओट्स पाउडर, दही, नमक, हल्दी, अदरक-हरी मिर्च का पेस्ट और थोड़ा-सा पानी के टुकड़े अच्छी तरह से मिलाए जाते हैं। छवि: फ्रीपिक इस बैटर को 5 मिनट के लिए बढ़ा कर रख दें ताकि ओट्स अच्छे तरह से फूल जाएं। अब अंतिम रूप से सॉल्ट और इसमें ऊपर से एक राक्षसी पानी यांत्रिकी हाथ से फिलिंग शामिल है। इंस्टेंट इस बैटर को ग्रीक किए गए पोएशिया में डाला गया। छवि: एआई इसे 12-15 मिनट तक स्टीम करें। टूथपिक मैकेनिकल चेक करें, अगर साफा बाहर आ जाए तो ढोलकला तैयार है। थोड़ा ठंडा होने के बाद इसे आकार में काट लें। ये चित्र और नाममात्र का है। छवि: एआई एक छोटा पैन में तेल गर्म करें। इसमें राय, तिल, कारी पत्ते और हरी मिर्च के प्लास्टर भून लें। अब इस दामाद को ढोलकले के ऊपर डाल दे और ऊपर से हरा धनिया छिड़क दे। छवि: एआई ढोलकले को हरी धनिया की चटनी, नारियल या टमाटर की चटनी के साथ बेचें। क्रूज़ तो एक कप गर्म चाय या कॉफ़ी के साथ इसका आनंद भी ले सकते हैं। बच्चों और बड़ों, दोनों के लिए स्वादिष्ट और रेगिस्तानी जंगल हैं। छवि: एआई कार्बोहाइड्रेट से भरपूर होने के कारण पाचन के लिए अच्छा होता है। लंबे समय तक पेट भरना, जिससे बार-बार भूख नहीं लगती। वज़न नियंत्रण की कोशिश कर रहे लोगों के लिए भी अच्छा विकल्प हो सकता है। छवि: एआई अगर आप इस बार अनाउंसमेंट में कुछ नया, झटपट और डॉक्यूमेंट्री बनाना चाहते हैं, तो ओट्स ढोलकला की यह आसान रेसिपी जरूर ट्राई करें। इसका स्वाद और स्पाइसी टेक्स्टचर हर किसी को पसंद आएगा। छवि: एआई (टैग्सटूट्रांसलेट)ओट्स ढोकला रेसिपी(टी)ओट्स ढोकला रेसिपी(टी)हेल्दी स्नैक रेसिपी(टी)ढोकला रेसिपी(टी)हेल्दी रेसिपी(टी)ओट्स ढोकला कैसे बनाएं

ICICI Prudential Flexicap Fund Benefits; NAV Growth – Return Investment

ICICI Prudential Flexicap Fund Benefits; NAV Growth - Return Investment

Hindi News Business ICICI Prudential Flexicap Fund Benefits; NAV Growth Return Investment | Rajeev Arora 3 मिनट पहले कॉपी लिंक ICICI प्रूडेंशियल फ्लेक्सीकैप फंड को लॉन्च हुए पांच साल हो गए हैं; इस दौरान इसकी NAV 10 से बढ़कर 20 हो गई है। एक फ्लेक्सीकैप फड होने के नाते, इसे लार्ज-कैप, मिड-कैप और स्मॉल-कैप स्टॉक्स में निवेश करने की आजादी है, और यह उन जगहों पर अपने पोर्टफोलियो मिक्स को बदलता रहता है जहां सबसे अच्छे मौके दिखते हैं। यह फंड ‘बॉटम-अप’, ‘हाई-कनविक्शन’ निवेश शैली अपनाता है, जो इसके बेंचमार्क के मुकाबले 60% से जयादा के ‘एक्टिव शेयर’ से पता चलता है। यह वीडियो फंड की मुख्य सोच, पांच सालों में इसके विकास और इक्विटी निवेशकों के लिए लंबे समय के निवेश के महत्व के बारे में बताता है। यह उन लोगों के लिए एक छोटा और आसान वीडियो है जो यह समझना चाहते हैं कि कैसे सोच-समझकर चुने गए स्टॉक्स ने समय के साथ लगातार वेल्थ बनाने में मदद की है। वीडियो में अल्फानॉमिक्स कैपिटल के फाउंडर राजीव अरोड़ा ने क्या कहा जानने के लिए ऊपर वीडियो पर क्लिक करें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

Lalit Modi India Return | IPL FEMA Case ED Penalty Quashed Statement

Lalit Modi India Return | IPL FEMA Case ED Penalty Quashed Statement

8 मिनट पहले कॉपी लिंक IPL के संस्थापक ललित मोदी 16 साल बाद भारत लौटने की तैयारी में हैं। एक अपीलीय ट्रिब्यूनल ने 16 जुलाई को IPL 2009 के दक्षिण अफ्रीका आयोजन से जुड़े FEMA मामले में फैसला सुनाया था। इसमें मोदी को राहत देते हुए ED के लगाए गए जुर्माने को रद्द कर दिया था। फैसले के बाद ललित मोदी ने कहा कि अब उनकी भारत वापसी का रास्ता साफ हो गया है और वह इस साल के आखिर या अगले साल की शुरुआत में भारत लौट सकते हैं। उन्होंने बताया कि उनकी बेटी अक्टूबर में बच्चे को जन्म देने वाली है, जिसके बाद वह भारत आने की योजना बना रहे हैं। भारत से दक्षिण अफ्रीका पैसे भेजने का मामला था यह मामला 2009 में IPL को भारत से दक्षिण अफ्रीका ले जाने से जुड़ा है। उस समय लोकसभा चुनाव के कारण सुरक्षा कारणों से टूर्नामेंट भारत से दक्षिण अफ्रीका शिफ्ट किया गया था। इसके आयोजन के लिए BCCI ने दक्षिण अफ्रीका में करीब 243.45 करोड़ रुपए भेजे थे। बाद में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने आरोप लगाया कि यह रकम भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की पूर्व मंजूरी के बिना विदेश भेजी गई, जिससे विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) का उल्लंघन हुआ। ED ने 2011 में नोटिस जारी किया और 2018 में ललित मोदी समेत BCCI के कुछ पूर्व अधिकारियों पर जुर्माना लगाया था। ट्रिब्यूनल बोली- ललित व्यक्तिगत तौर पर जिम्मेदार नहीं अपीलीय ट्रिब्यूनल ने अपने फैसले में कहा कि दक्षिण अफ्रीका भेजी गई रकम ‘करंट अकाउंट ट्रांजैक्शन’ थी, न कि ‘कैपिटल अकाउंट ट्रांजैक्शन’। इसलिए इसके लिए RBI की पहले से मंजूरी लेना जरूरी नहीं था। ट्रिब्यूनल ने यह भी माना कि ललित मोदी BCCI की ओर से FEMA नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार नहीं थे। इसके आधार पर ट्रिब्यूनल ने ED के ज्यादातर निष्कर्ष और ललित मोदी पर लगाया गया जुर्माना रद्द कर दिया। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

Agniveer CAPF Recruitment | 50% Quota for Ex-Agniveers in GD Posts

Agniveer CAPF Recruitment | 50% Quota for Ex-Agniveers in GD Posts

Hindi News Career Agniveer CAPF Recruitment | 50% Quota For Ex Agniveers In GD Posts 12 मिनट पहले कॉपी लिंक केंद्र सरकार ने पूर्व अग्निवीरों के लिए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) और असम राइफल्स में कॉन्स्टेबल (GD) और राइफलमैन (GD) के पदों पर 50% आरक्षण देने की घोषणा की है। यह जानकारी गृह मंत्रालय ने लोकसभा में दी। इसके साथ ही कई राज्य सरकारों जैसे हरियाणा, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश ने अपनी पुलिस व अन्य सुरक्षा सेवाओं में भी अग्निवीरों के लिए विशेष आरक्षण और आयु सीमा में छूट की घोषणा की है। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने लोकसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में इसकी जानकारी दी। गृह मंत्रालय के अनुसार, पूर्व अग्निवीरों को फिजिकल स्टैंडर्ड टेस्ट (PST), फिजिकल एफिशिएंसी टेस्ट (PET) और लिखित परीक्षा से भी छूट दी जाएगी। यानी उनकी भर्ती प्रक्रिया को पहले की तुलना में अधिक आसान बनाया गया है। गृह मंत्रालय में बनाया गया ‘स्पेशल विंग’ पूर्व अग्निवीरों के भविष्य और रोजगार के अवसरों को बेहतर बनाने के लिए गृह मंत्रालय ने एक्स-अग्निवीर विंग की भी स्थापना की है। यह विंग विभिन्न सुरक्षा बलों में उनकी नियुक्ति और अन्य अवसरों के लिए समन्वय का काम करेगा। कार्यकाल पूरा होने से पहले ही घोषणा ‘अग्निपथ योजना’ के तहत भर्ती किए गए पहले बैच के अग्निवीरों का चार साल का कार्यकाल इस साल के अंत तक पूरा होगा। सरकार ने उनके भविष्य को ध्यान में रखते हुए पहले से ही केंद्रीय अर्धसैनिक बलों और असम राइफल्स में रोजगार का रास्ता तैयार कर दिया है। इन राज्यों में मिलेगा अग्निवारों को आरक्षण : हरियाणा राज्य मंत्रिमंडल ने अग्निवीर नीति को मंजूरी देते हुए हरियाणा सरकार के अंतर्गत सेवाओं में पूर्व अग्निवीरों के लिए आरक्षण 10% के बजाय 20% कर दिया है। इनमें विशेष रूप से फॉरेस्ट गार्ड (पर्यावरण, वन और वन्य जीव विभाग), वार्डर (जेल विभाग) और माइनिंग गार्ड (खनन और भूविज्ञान विभाग) शामिल हैं। दिल्ली दिल्ली पुलिस में कॉन्स्टेबल के 20% पद पूर्व अग्निवीरों के लिए आरक्षित हैं। साथ ही उन्हें शारीरिक दक्षता परीक्षा से छूट भी दी गई है। इतना ही नहीं पूर्व अग्निवीरों को कॉन्स्टेबल पद पर भर्ती के लिए निर्धारित अधिकतम उम्र सीमा में तीन वर्ष की छूट है जो फिलहाल 18-25 वर्ष है। इसके अतिरिक्त, अग्निवीर योजना के पहले बैच के उम्मीदवारों को 5 वर्ष की अतिरिक्त छूट दी गई है। उत्तराखंड, सिक्किम : राज्य सरकार ने वर्दीधारी पदों में 10% हॉरिजॉन्टल आरक्षण लागू किया है। सिक्किम राज्य में भी पुलिस भर्ती के लिए 20% आरक्षण की घोषणा की है। उत्तर प्रदेश उत्तर प्रदेश में भी पूर्व अग्निवीरों के लिए UP पुलिस (सिविल पुलिस), होम गार्ड्स, अग्निशमन सेवाएं और जेल वार्डर भर्ती में 20% हॉरिजॉन्टल आरक्षण रखा गया है। सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों के लिए ऊपरी आयु सीमा में 3 वर्ष की छूट और अग्निवीरों के पहले बैच के लिए 5 वर्ष की छूट रखी गई है। ये खबर भी पढ़ें : APAAR ID की अनिवार्यता खत्म:पेरेंट्स को मिलेगा हां या ना का विकल्प, देशभर में ओडिशा हाईकोर्ट का फैसला लागू सुप्रीम कोर्ट ने APAAR ID को लेकर सख्त फैसला सुनाया है। कोर्ट का कहना है कोई भी स्कूल खुद बच्चों की अपार आईडी नहीं बना सकता। इसके लिए माता-पिता की मर्जी जरूरी है। पूरी खबर यहां पढ़ें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

फ्रांस में कृषि कानून का विरोध, पर्यावरण मंत्री का इस्तीफा:कीटनाशकों के इस्तेमाल की मंजूरी से मंत्री नाराज, बोलीं- यह मधुमक्खियों के लिए नुकसानहेद

फ्रांस में कृषि कानून का विरोध, पर्यावरण मंत्री का इस्तीफा:कीटनाशकों के इस्तेमाल की मंजूरी से मंत्री नाराज, बोलीं- यह मधुमक्खियों के लिए नुकसानहेद

फ्रांस की पर्यावरण मंत्री मोनिक बारबू ने इस्तीफा देने का ऐलान किया है। उन्होंने यह फैसला उन्होंने विवादित कृषि बिल के विरोध में लिया है, जिसमें दो प्रतिबंधित कीटनाशकों के इस्तेमाल की मंजूरी दी गई है। एसोसिएटेड प्रेस (AP) के मुताबिक वैज्ञानिकों का कहना है कि ये कीटनाशक मधुमक्खियों और दूसरे परागण करने वाले कीड़ों के लिए नुकसानदायक हैं। पर्यावरण मंत्री बनीं बारबू आज राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को अपना इस्तीफा सौंपेंगी। फ्रांस की संसद ने मंगलवार को यह बिल पारित किया था। सरकार ने दावा किया कि वह ये कानून किसानों की मदद के लिए लाया जा रहा है। उसका कहना है कि किसानों को घटती कमाई और खेती की बढ़ती लागत जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। बिल के दो प्रावधानों से सबसे ज्यादा विवाद 1. प्रतिबंधित कीटनाशकों एसेटामिप्रिड और फ्लुपाइराडीफ्यूरोन के इस्तेमाल की अस्थायी मंजूरी देना। इसका इस्तेमाल चुकंदर, सेब और चेरी की खेती में किया जा सकेगा। 2. अगले 10 वर्षों में किसानों के लिए पानी के भंडारण (वॉटर स्टोरेज) की अनुमति की सीमा दोगुनी करना। इन्हीं प्रावधानों को लेकर पर्यावरणविदों और सरकार के भीतर भी विरोध बढ़ गया। इसके विरोध में पर्यावरण मंत्री मोनिक बारबू ने पद छोड़ने का फैसला किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने उनसे किए गए वादे के विपरीत इस प्रावधान को हटाने पर कोई चर्चा ही नहीं होने दी। बारबू ने सोशल मीडिया पर लिखा, पिछले नौ महीनों में मैंने जंगलों, साफ पानी, स्वच्छ हवा, उपजाऊ मिट्टी और जैव विविधता की रक्षा के लिए काम किया। लेकिन विरोधी ताकतें इतनी मजबूत हो गई हैं कि मैं अपने मकसद पूरे नहीं कर पा रही। राजनीति मेरी दुनिया नहीं है और अगर राजनीति ऐसी ही होती है, तो यह कभी मेरी दुनिया नहीं बन सकती। वहीं, सरकार का कहना है कि नए प्रावधान लाने का फैसला उन किसानों की मदद के लिए लिया गया है, जो मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं। पहले भी विवाद में रहा है यह कीटनाशक एसेटामिप्रिड और फ्लुपाइराडीफ्यूरोन रसायन नियोनिकोटिनॉइड नाम के कीटनाशकों के समूह में आते हैं। यूरोपीय संघ (EU) के नियमों के तहत इनका इस्तेमाल कुछ शर्तों के साथ किया जा सकता है, लेकिन फ्रांस में इन पर फिलहाल प्रतिबंध है। एसेटामिप्रिड पर फ्रांस ने 2018 में प्रतिबंध लगाया था, क्योंकि इसे मधुमक्खियों और दूसरे परागण करने वाले कीड़ों के लिए हानिकारक माना गया था। एक साल पहले भी इस रसायन पर बैन हटाने की कोशिशें हुई थीं लेकिन फ्रांस की सुप्रीम कोर्ट ने इससे इनकार कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि यह फैसला पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों की सुरक्षा के अनुरूप नहीं है।

BPCL Q1 Results | ₹3,962 Crore Loss Despite 23% Revenue Growth

BPCL Q1 Results | ₹3,962 Crore Loss Despite 23% Revenue Growth

9 मिनट पहले कॉपी लिंक भारत पेट्रोलियम ने आज 22 जुलाई को जून तिमाही के नतीजे जारी किए। इस तिमाही में कंपनी को ₹3,962 करोड़ का घाटा हुआ है। पिछले साल की इसी तिमाही में ₹6,124 करोड़ का मुनाफा हुआ था। वहीं मार्च तिमाही में ₹3,191 करोड़ का मुनाफा हुआ था। ऑपरेशंस से रेवेन्यू 23% बढ़कर ₹1.59 लाख करोड़ हुआ बीपीसीएल का रेवेन्यू ₹1.59 लाख करोड़ रहा। यह पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 23% ज्यादा है। तब कंपनी का ₹1.29 लाख करोड़ का रेवेन्यू रहा था। तिमाही दर तिमाही आधार पर देखें तो मार्च तिमाही के ₹1.35 लाख करोड़ के मुकाबले रेवेन्यू में 18% बढ़ा है। अमेरिका-ईरान जंग से कच्चे तेल का बढ़ना रही घाटे की मुख्य वजह 28 फरवरी को शुरू हुई अमेरिकी ईरान जंग की वजह से कच्चे तेल के दाम 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गए थे। इसके साथ ही भाड़ा और इंश्योरेंस की लागत में भी बढ़ोतरी हुई। बढ़ी हुई लागतों का पूरा बोझ आम उपभोक्ताओं पर LPG और पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाकर नहीं डाला जा सका, जिसकी वजह से कंपनी को यह नुकसान उठाना पड़ा। एक साल में फ्लैट रहा भारत पेट्रोलियम का शेयर भारत पेट्रोलियम के शेयर आज 3% गिरकर 309 रुपए पर बंद हुए। इस साल यानी 1 जनवरी से अब तक 19% गिरा है। बीते 6 महीने में यह 12% और एक साल में 9% गिरा है। 24 जनवरी 1976 को बनी थी भारत पेट्रोलियम भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) भारत की एक प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनी है। 24 जनवरी 1976 को इसकी स्थापना हुई थी। ये पेट्रोलियम उत्पादों को रिफाइन और मार्केट करती है। यह मुंबई, कोच्चि, नुमालीगढ़ और बीना में रिफाइनरियों का संचालन करती है। इनकी संयुक्त रिफाइनिंग क्षमता प्रति वर्ष 40 मिलियन मीट्रिक टन से अधिक है। BPCL फ्यूल, लुब्रिकेंट और लिक्वीफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) सहित विभिन्न पेट्रोलियम उत्पादों के डिस्ट्रीब्यूशन भी करती है। इसके चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर जी कृष्णकुमार हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

मूवी रिव्यू: मैक्स, मिन एंड म्याऊजाकी:रिश्तों, अकेलेपन और हीलिंग की संवेदनशील कहानी, लेकिन लंबी लेंथ और धीमी रफ्तार दर्शकों की सब्र की परीक्षा लेती है

मूवी रिव्यू: मैक्स, मिन एंड म्याऊजाकी:रिश्तों, अकेलेपन और हीलिंग की संवेदनशील कहानी, लेकिन लंबी लेंथ और धीमी रफ्तार दर्शकों की सब्र की परीक्षा लेती है

निर्देशक पद्मकुमार नरसिम्हामूर्ति की ‘मैक्स, मिन एंड म्याऊजाकी’ परिवार, रिश्तों, मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक हीलिंग पर आधारित धीमी रफ्तार लेकिन दिल छू लेने वाली कहानी पेश करती है। फिल्म में हायाओ म्याऊजाकी की फिल्मों की गर्मजोशी और बिल्लियों के प्रति प्रेम की झलक महसूस होती है। इसकी लेंथ 2 घंटे 18 मिनट है। दैनिक भास्कर डिजिटल फिल्म को 5 में से 3 स्टार देता है। फिल्म की कहानी कैसी है? फिल्म की शुरुआत मैक्स (सिद्धार्थ मेनन) और उसकी गर्लफ्रेंड मिन (मेधा शंकर) के ब्रेकअप से होती है। कभी दोनों को हायाओ मियाज़ाकी की फिल्में जोड़ती थीं, लेकिन अब उनका रिश्ता खत्म हो चुका है। अब उनके बीच सिर्फ उनकी पालतू बिल्ली म्याऊजाकी का रिश्ता बचा है। मिन कुछ समय के लिए बिल्ली को मैक्स के पास छोड़ देती है। जानवरों के बालों से एलर्जी के कारण मैक्स उसे रखने के लिए तैयार नहीं होता। धीरे-धीरे यही बिल्ली दोनों की जिंदगी में फिर से भावनात्मक जुड़ाव की वजह बनती है। यह सिर्फ ब्रेकअप की कहानी नहीं है। मैक्स मां वसुधा की कैंसर से हुई मौत के सदमे से उबरने की कोशिश कर रहा है। दूसरी ओर पिता रमेश पत्नी के जाने के बाद अकेलेपन, अपराधबोध और अंदरूनी संघर्ष से जूझ रहे हैं। कहानी तीन पीढ़ियों की भावनात्मक उलझनों को जोड़ती है। मैक्स के दादा श्रीधर महादेवन नर्सिंग होम में जीवन को नए नजरिए से देखते हैं। जेनिफर सेक्वेरा और कैरोल जैसे किरदार दिखाते हैं कि उम्र चाहे कोई भी हो, इंसान को अपनापन और प्यार की जरूरत हमेशा रहती है। फिल्म रिश्तों के टूटने, माता-पिता और बच्चों की बढ़ती दूरियों, मानसिक स्वास्थ्य, थेरेपी, अकेलेपन, इस्लामोफोबिया, लैंगिक भूमिकाओं और पारिवारिक जिम्मेदारियों जैसे कई सामाजिक मुद्दों को बिना भाषण दिए स्वाभाविक ढंग से कहानी में पिरोती है। हालांकि कई सब-प्लॉट के कारण फिल्म कुछ जगहों पर बिखरी हुई और जरूरत से ज्यादा लंबी महसूस होती है। स्टारकास्ट की एक्टिंग कैसी है? सिद्धार्थ मेनन ने मैक्स के किरदार में टूटे इंसान की भावनाओं को ईमानदारी से निभाया है। मां की मौत और रिश्ते के खत्म होने के बाद की उथल-पुथल को वह प्रभावी ढंग से स्क्रीन पर लाते हैं। मेधा शंकर ने मिन के किरदार में संयमित अभिनय किया है। ज्यादा ड्रामेटिक दृश्य नहीं होने के बावजूद वह किरदार को सहज बनाए रखती हैं। फिल्म की सबसे मजबूत परफॉर्मेंस आदिल हुसैन की है। रमेश महादेवन के रूप में उन्होंने अपराधबोध, अकेलेपन और आत्मस्वीकृति के संघर्ष को प्रभावशाली ढंग से निभाया है। खासकर थेरेपी वाले दृश्य और बेटे मैक्स के साथ उनके भावुक संवाद याद रहते हैं। नासर ने श्रीधर महादेवन का किरदार निभाया है। वह सीमित स्क्रीन टाइम में भी असर छोड़ते हैं। उनकी मौजूदगी फिल्म में अनुभव और भावनात्मक गहराई जोड़ती है। नफीसा अली जेनिफर सेक्वेरा के रूप में गरिमा और संवेदनशीलता लेकर आती हैं। विदात्री बंदी कैरोल के किरदार में सहजता और जीवन से थकी लेकिन सकारात्मक ऊर्जा से प्रभावित करती हैं। मंदिरा बेदी धारा के किरदार में कहानी को संतुलन देती हैं। हालांकि उनका रोल छोटा है, लेकिन वह प्रभाव छोड़ती हैं। डायरेक्शन और टेक्निकल पक्ष कैसा है? निर्देशक पद्मकुमार नरसिम्हामूर्ति ने भावनात्मक विषयों को संवेदनशीलता से पेश किया है। फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसके किरदार हैं, जिन्हें पर्याप्त समय मिला है। हालांकि इसी वजह से फिल्म कई जगह जरूरत से ज्यादा फैली हुई महसूस होती है। सिनेमैटोग्राफी साधारण लेकिन प्रभावी है। कैमरा पात्रों की भावनाओं पर फोकस करता है। प्रोडक्शन डिजाइन मजबूत है। मैक्स का आधुनिक अपार्टमेंट, स्टूडियो घिबली के पोस्टर और कैरोल का बोहेमियन घर किरदारों की मानसिक दुनिया को दर्शाते हैं। कॉस्ट्यूम डिजाइन किरदारों के व्यक्तित्व के अनुरूप है और छोटे-छोटे विजुअल डिटेल्स फिल्म को वास्तविक बनाते हैं। म्यूजिक कैसा है? फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर शांत और भावनात्मक है। संगीत कहानी पर हावी होने की बजाय उसका मूड बेहतर बनाता है। कहीं भी जरूरत से ज्यादा शोर या मेलोड्रामा नहीं है। हालांकि कोई गाना लंबे समय तक याद नहीं रह जाता। फिल्म की कमियां फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी इसकी 2 घंटे 18 मिनट की लंबी अवधि है। कई दृश्य और सब-प्लॉट छोटे किए जा सकते थे। कुछ जगहों पर भावुक संवाद लंबे लगते हैं और फिल्म की गति धीमी पड़ जाती है। कुछ कलाकारों का अभिनय निर्देशक की सोच के अनुरूप पूरा प्रभाव नहीं छोड़ पाता। कई गंभीर विषयों को एक साथ शामिल करने से कहानी कुछ हिस्सों में बिखरी हुई लगती है। फाइनल वर्डिक्ट: देखें या नहीं? अगर आपको तेज रफ्तार मसाला फिल्में पसंद हैं तो ‘मैक्स, मिन एंड म्याऊजाकी’ धीमी लग सकती है। लेकिन रिश्तों, परिवार, मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक हीलिंग पर आधारित संवेदनशील कहानियां पसंद हैं तो यह फिल्म पसंद आ सकती है। यह फिल्म मनोरंजन से ज्यादा इंसानी भावनाओं को समझने और महसूस करने का अनुभव देती है। लंबी लेंथ इसकी कमजोरी है, लेकिन ईमानदार कहानी और आदिल हुसैन का दमदार अभिनय इसे एक बार देखने लायक बनाते हैं।

अमेरिका में जेनेरिक दवाओं पर ट्रम्प का नया टैरिफ प्लान:2 साल 0%, फिर 100% और 200% ड्यूटी; भारत की फार्मा कंपनियों पर असर संभव

अमेरिका में जेनेरिक दवाओं पर ट्रम्प का नया टैरिफ प्लान:2 साल 0%, फिर 100% और 200% ड्यूटी; भारत की फार्मा कंपनियों पर असर संभव

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अमेरिका में आयात होने वाली जेनेरिक दवाओं पर टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। अगले दो साल तक ये दवाएं बिना किसी ड्यूटी के अमेरिका जा सकेंगी, लेकिन इसके बाद 100% और फिर 200% तक टैरिफ लगाया जाएगा। ट्रम्प के इस फैसले का भारतीय फार्मा इंडस्ट्री पर क्या असर पड़ेगा और अमेरिका ने यह कदम क्यों उठाया है, इसे 12 आसान सवाल-जवाब में समझिए… सवाल 1: ट्रम्प ने जेनेरिक दवाओं के टैरिफ को लेकर क्या ऐलान किया है? जवाब: अमेरिकी राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर बताया कि 1 अगस्त 2026 से अमेरिका में आने वाली सभी जेनेरिक दवाओं पर अगले दो सालों तक शून्य टैरिफ जारी रहेगा। दो साल बाद अगले एक साल के लिए टैरिफ 100% और उसके बाद इसे 200% हो जाएगा। सवाल 2: ट्रम्प प्रशासन ने इतना भारी टैरिफ लगाने की क्या वजह बताई है? जवाब: ट्रम्प के मुताबिक, इस नीति का मुख्य उद्देश्य जेनेरिक दवाओं के मैन्युफैक्चरिंग प्लांट अमेरिका के भीतर वापस लाना है। उन्होंने कहा कि जिन कंपनियों को समय सीमा दी गई है, अगर वे अमेरिका के भीतर अपने प्लांट और उपकरण नहीं लगाती हैं, तो उन्हें पेनल्टी के रूप में टैरिफ चुकाना होगा। हालांकि, पेटेंटेड, ब्रांडेड या इनोवेटिव दवाओं पर मौजूदा नीति पहले की तरह ही बनी रहेगी। सवाल 3: अमेरिकी हेल्थकेयर सिस्टम में जेनेरिक दवाओं का कितना इस्तेमाल होता है? जवाब: अमेरिका के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) के आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका में डॉक्टरों की लिखी जाने वाली कुल दवाओं में 90% से अधिक हिस्सेदारी जेनेरिक दवाओं की ही होती है। वहां का हेल्थकेयर सिस्टम काफी हद तक सस्ती जेनेरिक दवाओं पर निर्भर है। सवाल 4: इस फैसले का भारत पर क्या और कितना असर पड़ेगा? जवाब: भारत को ‘दुनिया की फार्मेसी’ कहा जाता है। अगर टैरिफ बढ़ाकर 100% और 200% किया जाता है, तो भारतीय दवाओं की लागत अमेरिकी बाजार में काफी बढ़ जाएगी। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) की रिपोर्ट के अनुसार: साल 2025 में भारत ने कुल 25.8 बिलियन डॉलर यानी करीब ₹2.49 लाख करोड़ की दवाओं का निर्यात किया। इसमें से 9.7 बिलियन डॉलर यानी करीब ₹0.94 लाख करोड़ की दवाओं का निर्यात अकेले अमेरिका को हुआ। ये कुल दवाओं का 38% हैं। हेल्थकेयर एनालिटिक्स फर्म IQVIA के मुताबिक, अमेरिकी फार्मेसियों में बिकने वाली कुल जेनेरिक दवाओं के 47% प्रिस्क्रिप्शन भारतीय कंपनियां ही पूरी करती हैं। सवाल 5: क्या 100% या 200% टैरिफ के बाद भी भारतीय दवाएं अमेरिका में टिक पाएंगी? जवाब: हां, भारतीय जेनेरिक दवाएं फिर भी प्रतिस्पर्धी बनी रह सकती हैं। GTRI की रिपोर्ट के अनुसार, कई भारतीय जेनेरिक दवाएं अमेरिका में ब्रांडेड दवाओं की तुलना में 7 से 10 गुना सस्ती बिकती हैं। ऐसे में अगर 100% टैरिफ भी लगा दिया जाता है, तब भी भारतीय दवाएं वहां की ब्रांडेड दवाओं से सस्ती ही रहेंगी। इस अतिरिक्त लागत का अधिकांश हिस्सा अंततः अमेरिकी हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स, इंश्योरेंस कंपनियों और मरीजों पर पड़ेगा, न कि भारतीय निर्यात पूरी तरह खत्म होगा। सवाल 6: क्या प्रमुख भारतीय दवा कंपनियों के पास पहले से अमेरिका में प्लांट हैं? जवाब: हां, भारत की कुछ कंपनियों जैसे सन फार्मा, जायडस लाइफसाइंसेस, लुपिन, अरबिंदो फार्मा, सिप्ला और डॉ. रेड्डीज लेबोरेटरीज जैसी प्रमुख कंपनियां अमेरिका में अपने प्लांट संचालित करती हैं। मैसाचुसेट्स और न्यूयॉर्क में सिप्ला अपने मैन्युफैक्चरिंग प्लांट की क्षमता बढ़ा रही है। डॉ. रेड्डीज ने कहा है कि कॉमर्शियली फायदेमंद होने पर वे अमेरिका में उत्पादन बढ़ाने के लिए तैयार हैं। सन फार्मा का कहना है कि अमेरिका में उनका मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर पर्याप्त है। सवाल 7: क्या अमेरिका में जेनेरिक दवाओं का उत्पादन शिफ्ट करना आसान है? जवाब: नहीं, यह बहुत मुश्किल और महंगा सौदा है। जेनेरिक दवाओं का कारोबार ग्लोबल सप्लाई चेन पर निर्भर है। विशेष रूप से एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट्स (APIs) के लिए कंपनियां भारत और चीन पर निर्भर हैं। अमेरिका में नया मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम खड़ा करने के लिए भारी पूंजी की जरूरत होगी, जिससे अमेरिका में दवाओं की कीमतें काफी बढ़ जाएंगी। सवाल 8: इस पूरी स्थिति से निपटने के लिए भारत को क्या कदम उठाने चाहिए? जवाब: GTRI के संस्थापक अजय श्रीवास्तव का सुझाव है कि भारत को दो मोर्चों पर काम करना होगा: सवाल 9: अमेरिकी हेल्थकेयर को भारतीय दवाओं से कितनी बचत होती है? जवाब: अमेरिकी लोग डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल, कैंसर, इंफेक्शियस डिजीज और मेंटल हेल्थ जैसी बीमारियों के इलाज के लिए बड़े पैमाने पर भारतीय जेनेरिक दवाएं लेते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय दवाओं ने अकेले 2022 में अमेरिकी हेल्थकेयर सिस्टम के 219 बिलियन डॉलर यानी करीब ₹21.14 लाख करोड़ बचाए थे। पिछले एक दशक में यह बचत $1.3 ट्रिलियन रही है। सवाल 10: अमेरिका में कौन-कौन सी भारतीय फार्मा कंपनियों की दवाएं ज्यादा बिकती है? जवाब: डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज, सिप्ला और सन फार्मा जैसी प्रमुख भारतीय कंपनियां अमेरिकी बाजार में सप्लाई करती हैं। अमेरिका में सबसे ज्यादा बिकने वाली भारतीय जेनेरिक दवाओं में शामिल हैं: सवाल 11: क्या यह फैसला ट्रम्प की व्यापक टैरिफ रणनीति का हिस्सा है? जवाब: हां, ट्रम्प प्रशासन का मुख्य जोर अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने और विदेशी आयात पर निर्भरता घटाने पर है। इससे पहले भी ब्रांडेड दवा निर्माताओं को अमेरिका में उत्पादन करने या कीमतें कम करने के बदले टैरिफ छूट दी गई थी। इसके अलावा, अमेरिका करीब 60 देशों पर 10% से 12.5% का नया टैरिफ लगाने पर विचार कर रहा है, जिसके दायरे में भारत भी आ सकता है। सवाल 12: भारत और अमेरिका के द्विपक्षीय व्यापार समझौतों पर इसका क्या असर होगा? जवाब: अमेरिका और भारत लगातार यह कहते आ रहे हैं कि वे एक द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के बेहद करीब हैं। ऐसे समय में जेनेरिक दवाओं पर भारी टैरिफ लगाने के इस नए ऐलान ने दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों में नई अनिश्चितता पैदा कर दी है। नॉलेज पार्ट: क्या होती हैं जेनेरिक दवाएं? जब कोई कंपनी रिसर्च करके नई दवा बनाती है, तो उसे कुछ सालों के लिए पेटेंट मिलता है। इसे ब्रांडेड दवा कहते हैं। पेटेंट खत्म होने के बाद अन्य कंपनियां उसी साल्ट/फार्मूले से सस्ती दवाएं बनाती हैं, जिन्हें ‘जेनेरिक दवा’ कहा जाता है। इनकी गुणवत्ता और असर ब्रांडेड दवा जैसा ही होता