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फ्रांस में कृषि कानून का विरोध, पर्यावरण मंत्री का इस्तीफा:कीटनाशकों के इस्तेमाल की मंजूरी से मंत्री नाराज, बोलीं- यह मधुमक्खियों के लिए नुकसानहेद

फ्रांस में कृषि कानून का विरोध, पर्यावरण मंत्री का इस्तीफा:कीटनाशकों के इस्तेमाल की मंजूरी से मंत्री नाराज, बोलीं- यह मधुमक्खियों के लिए नुकसानहेद

फ्रांस की पर्यावरण मंत्री मोनिक बारबू ने इस्तीफा देने का ऐलान किया है। उन्होंने यह फैसला उन्होंने विवादित कृषि बिल के विरोध में लिया है, जिसमें दो प्रतिबंधित कीटनाशकों के इस्तेमाल की मंजूरी दी गई है। एसोसिएटेड प्रेस (AP) के मुताबिक वैज्ञानिकों का कहना है कि ये कीटनाशक मधुमक्खियों और दूसरे परागण करने वाले कीड़ों के लिए नुकसानदायक हैं। पर्यावरण मंत्री बनीं बारबू आज राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को अपना इस्तीफा सौंपेंगी। फ्रांस की संसद ने मंगलवार को यह बिल पारित किया था। सरकार ने दावा किया कि वह ये कानून किसानों की मदद के लिए लाया जा रहा है। उसका कहना है कि किसानों को घटती कमाई और खेती की बढ़ती लागत जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। बिल के दो प्रावधानों से सबसे ज्यादा विवाद 1. प्रतिबंधित कीटनाशकों एसेटामिप्रिड और फ्लुपाइराडीफ्यूरोन के इस्तेमाल की अस्थायी मंजूरी देना। इसका इस्तेमाल चुकंदर, सेब और चेरी की खेती में किया जा सकेगा। 2. अगले 10 वर्षों में किसानों के लिए पानी के भंडारण (वॉटर स्टोरेज) की अनुमति की सीमा दोगुनी करना। इन्हीं प्रावधानों को लेकर पर्यावरणविदों और सरकार के भीतर भी विरोध बढ़ गया। इसके विरोध में पर्यावरण मंत्री मोनिक बारबू ने पद छोड़ने का फैसला किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने उनसे किए गए वादे के विपरीत इस प्रावधान को हटाने पर कोई चर्चा ही नहीं होने दी। बारबू ने सोशल मीडिया पर लिखा, पिछले नौ महीनों में मैंने जंगलों, साफ पानी, स्वच्छ हवा, उपजाऊ मिट्टी और जैव विविधता की रक्षा के लिए काम किया। लेकिन विरोधी ताकतें इतनी मजबूत हो गई हैं कि मैं अपने मकसद पूरे नहीं कर पा रही। राजनीति मेरी दुनिया नहीं है और अगर राजनीति ऐसी ही होती है, तो यह कभी मेरी दुनिया नहीं बन सकती। वहीं, सरकार का कहना है कि नए प्रावधान लाने का फैसला उन किसानों की मदद के लिए लिया गया है, जो मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं। पहले भी विवाद में रहा है यह कीटनाशक एसेटामिप्रिड और फ्लुपाइराडीफ्यूरोन रसायन नियोनिकोटिनॉइड नाम के कीटनाशकों के समूह में आते हैं। यूरोपीय संघ (EU) के नियमों के तहत इनका इस्तेमाल कुछ शर्तों के साथ किया जा सकता है, लेकिन फ्रांस में इन पर फिलहाल प्रतिबंध है। एसेटामिप्रिड पर फ्रांस ने 2018 में प्रतिबंध लगाया था, क्योंकि इसे मधुमक्खियों और दूसरे परागण करने वाले कीड़ों के लिए हानिकारक माना गया था। एक साल पहले भी इस रसायन पर बैन हटाने की कोशिशें हुई थीं लेकिन फ्रांस की सुप्रीम कोर्ट ने इससे इनकार कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि यह फैसला पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों की सुरक्षा के अनुरूप नहीं है।

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फ्रांस की पर्यावरण मंत्री मोनिक बारबू ने इस्तीफा देने का ऐलान किया है। उन्होंने यह फैसला उन्होंने विवादित कृषि बिल के विरोध में लिया है, जिसमें दो प्रतिबंधित कीटनाशकों के इस्तेमाल की मंजूरी दी गई है। एसोसिएटेड प्रेस (AP) के मुताबिक वैज्ञानिकों का कहना है कि ये कीटनाशक मधुमक्खियों और दूसरे परागण करने वाले कीड़ों के लिए नुकसानदायक हैं। पर्यावरण मंत्री बनीं बारबू आज राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को अपना इस्तीफा सौंपेंगी। फ्रांस की संसद ने मंगलवार को यह बिल पारित किया था। सरकार ने दावा किया कि वह ये कानून किसानों की मदद के लिए लाया जा रहा है। उसका कहना है कि किसानों को घटती कमाई और खेती की बढ़ती लागत जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। बिल के दो प्रावधानों से सबसे ज्यादा विवाद 1. प्रतिबंधित कीटनाशकों एसेटामिप्रिड और फ्लुपाइराडीफ्यूरोन के इस्तेमाल की अस्थायी मंजूरी देना। इसका इस्तेमाल चुकंदर, सेब और चेरी की खेती में किया जा सकेगा। 2. अगले 10 वर्षों में किसानों के लिए पानी के भंडारण (वॉटर स्टोरेज) की अनुमति की सीमा दोगुनी करना। इन्हीं प्रावधानों को लेकर पर्यावरणविदों और सरकार के भीतर भी विरोध बढ़ गया। इसके विरोध में पर्यावरण मंत्री मोनिक बारबू ने पद छोड़ने का फैसला किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने उनसे किए गए वादे के विपरीत इस प्रावधान को हटाने पर कोई चर्चा ही नहीं होने दी। बारबू ने सोशल मीडिया पर लिखा, पिछले नौ महीनों में मैंने जंगलों, साफ पानी, स्वच्छ हवा, उपजाऊ मिट्टी और जैव विविधता की रक्षा के लिए काम किया। लेकिन विरोधी ताकतें इतनी मजबूत हो गई हैं कि मैं अपने मकसद पूरे नहीं कर पा रही। राजनीति मेरी दुनिया नहीं है और अगर राजनीति ऐसी ही होती है, तो यह कभी मेरी दुनिया नहीं बन सकती। वहीं, सरकार का कहना है कि नए प्रावधान लाने का फैसला उन किसानों की मदद के लिए लिया गया है, जो मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं। पहले भी विवाद में रहा है यह कीटनाशक एसेटामिप्रिड और फ्लुपाइराडीफ्यूरोन रसायन नियोनिकोटिनॉइड नाम के कीटनाशकों के समूह में आते हैं। यूरोपीय संघ (EU) के नियमों के तहत इनका इस्तेमाल कुछ शर्तों के साथ किया जा सकता है, लेकिन फ्रांस में इन पर फिलहाल प्रतिबंध है। एसेटामिप्रिड पर फ्रांस ने 2018 में प्रतिबंध लगाया था, क्योंकि इसे मधुमक्खियों और दूसरे परागण करने वाले कीड़ों के लिए हानिकारक माना गया था। एक साल पहले भी इस रसायन पर बैन हटाने की कोशिशें हुई थीं लेकिन फ्रांस की सुप्रीम कोर्ट ने इससे इनकार कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि यह फैसला पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों की सुरक्षा के अनुरूप नहीं है।

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