Kangana Ranaut vs Rahul Gandhi

6 मिनट पहले कॉपी लिंक अभिनेत्री और बीजेपी सांसद कंगना रनोट ने कृति सेनन के रक्षाबंधन एड विवाद के बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधा है। राहुल गांधी ने एक्ट्रेस कृति सेनन का समर्थन करते हुए सोशल मीडिया पर ‘स्मैश द पेट्रियार्की’ का मैसेज लिखा था। इसके जवाब में कंगना ने बीजेपी के इंस्टाग्राम हैंडल का एक इलस्ट्रेटेड (कार्टून) पोस्ट री-शेयर किया। इसमें कंगना ने लिखा, “ब्रो, वेट। भारत माता की जय। शुरू करते हैं।” इस पोस्ट के जरिए बीजेपी ने ट्रिपल तलाक, शाह बानो केस, महिला आरक्षण और कर्नाटक कैबिनेट में महिलाओं की भागीदारी को लेकर कांग्रेस की नीयत पर सवाल उठाए हैं। एक्ट्रेस कृति सेनन के रक्षाबंधन एड पर लगातार विवाद जारी है। राहुल बोले- महिला क्या पहनती है, यह उसकी पसंद दरअसल, ज्वेलरी ब्रांड के रक्षाबंधन एडवर्टाइजमेंट में कृति सेनन के कपड़ों को लेकर विवाद चल रहा था। इस विवाद में राहुल गांधी ने मंगलवार को कृति सेनन के बयान को अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर री-शेयर किया। राहुल गांधी ने लिखा कि कोई महिला क्या पहनती है, क्या करती है और कहां जाती है, यह उसकी अपनी पसंद है। महिलाओं के कपड़ों और जीवनशैली की ऑनलाइन पुलिसिंग यानी पहरेदारी नहीं करनी चाहिए। राहुल ने अपने पोस्ट में ‘स्मैश द पेट्रियार्की’ हैशटैग का इस्तेमाल किया था। बीजेपी के कार्टून पोस्ट से कंगना ने कसा तंज राहुल गांधी के इस बयान के बाद कंगना रनौत ने बीजेपी का एक पोस्ट शेयर किया। इस पोस्ट में इलस्ट्रेशन (चित्रों) के जरिए राहुल गांधी के ‘स्मैश द पेट्रियार्की’ वाले नारे का जवाब दिया गया है। इलस्ट्रेशन में एक महिला राहुल गांधी से पूछती है कि ट्रिपल तलाक पर आपकी पार्टी ने क्या किया? जिस पर राहुल का कैरेक्टर कहता है कि वह तो वोट बैंक पॉलिटिक्स थी। इसके बाद महिला आरक्षण बिल, शाह बानो केस और कर्नाटक कैबिनेट का जिक्र होता है। पोस्ट में सवाल उठाया गया कि कर्नाटक की कांग्रेस सरकार के 33 मंत्रियों में एक भी महिला मंत्री क्यों नहीं है। कंगना ने कृति के कपड़ों पर भी उठाया था सवाल कंगना रनौत ने इससे पहले भी कृति सेनन के रक्षाबंधन वाले एड पर सवाल उठाए थे। कंगना ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी में लिखा था कि आज महिलाओं के पास पहनने के लिए हर तरह के कपड़े मौजूद हैं, फिर रक्षाबंधन जैसे पारंपरिक त्योहार पर भाई को राखी बांधते समय ऐसे कपड़े चुनने की क्या वजह थी। कंगना ने एड को अजीब बताया था। इसके जवाब में कृति सेनन ने कहा था कि किसी भी महिला की अपनी संस्कृति के प्रति निष्ठा को उसके कपड़ों की नेकलाइन से नहीं नापा जाना चाहिए। पूरी खबर पढ़ें विवाद के बाद ब्रांड ने हटाया एडवर्टाइजमेंट यह पूरा विवाद जीवा (GIVA) ज्वेलरी ब्रांड के 36 सेकंड के रक्षाबंधन एडवर्टाइजमेंट से शुरू हुआ था। एड में कृति सेनन इंडो-वेस्टर्न आउटफिट में नजर आई थीं और वे अपने भाई के साथ-साथ अपने पेट डॉग को भी राखी बांध रही थीं। सोशल मीडिया पर कपड़ों और पेट डॉग को राखी बांधने को लेकर विवाद बढ़ता देख ब्रांड ने आधिकारिक बयान जारी कर माफी मांगी और इस एडवर्टाइजमेंट को अपने सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से हटा लिया है। पूरी खबर पढ़ें ये खबर भी पढ़ें ‘भाई को बिकिनी में राखी क्यों बांधेंगी?’:कृति सेनन के रक्षाबंधन विज्ञापन में रिवीलिंग ड्रेस के बाद कंगना रनोट ने उठाए सवाल कृति सेनन हाल ही में रक्षाबंधन के लिए बने एक ज्वेलरी ब्रांड के विज्ञापन में नजर आई थीं। विज्ञापन में उन्होंने इंडो-वेस्टर्न कपड़े पहने थे, जिसमें ब्रालेट जैसा ब्लाउज, केप और ड्रेप्ड स्कर्ट शामिल थी। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
Kangana Ranaut vs Rahul Gandhi

22 मिनट पहले कॉपी लिंक अभिनेत्री और बीजेपी सांसद कंगना रनोट ने कृति सेनन के रक्षाबंधन एड विवाद के बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधा है। राहुल गांधी ने एक्ट्रेस कृति सेनन का समर्थन करते हुए सोशल मीडिया पर ‘स्मैश द पेट्रियार्की’ का मैसेज लिखा था। इसके जवाब में कंगना ने बीजेपी के इंस्टाग्राम हैंडल का एक इलस्ट्रेटेड (कार्टून) पोस्ट री-शेयर किया। इसमें कंगना ने लिखा, “ब्रो, वेट। भारत माता की जय। शुरू करते हैं।” इस पोस्ट के जरिए बीजेपी ने ट्रिपल तलाक, शाह बानो केस, महिला आरक्षण और कर्नाटक कैबिनेट में महिलाओं की भागीदारी को लेकर कांग्रेस की नीयत पर सवाल उठाए हैं। एक्ट्रेस कृति सेनन के रक्षाबंधन एड पर लगातार विवाद जारी है। राहुल बोले- महिला क्या पहनती है, यह उसकी पसंद दरअसल, ज्वेलरी ब्रांड के रक्षाबंधन एडवर्टाइजमेंट में कृति सेनन के कपड़ों को लेकर विवाद चल रहा था। इस विवाद में राहुल गांधी ने मंगलवार को कृति सेनन के बयान को अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर री-शेयर किया। राहुल गांधी ने लिखा कि कोई महिला क्या पहनती है, क्या करती है और कहां जाती है, यह उसकी अपनी पसंद है। महिलाओं के कपड़ों और जीवनशैली की ऑनलाइन पुलिसिंग यानी पहरेदारी नहीं करनी चाहिए। राहुल ने अपने पोस्ट में ‘स्मैश द पेट्रियार्की’ हैशटैग का इस्तेमाल किया था। बीजेपी के कार्टून पोस्ट से कंगना ने कसा तंज राहुल गांधी के इस बयान के बाद कंगना रनौत ने बीजेपी का एक पोस्ट शेयर किया। इस पोस्ट में इलस्ट्रेशन (चित्रों) के जरिए राहुल गांधी के ‘स्मैश द पेट्रियार्की’ वाले नारे का जवाब दिया गया है। इलस्ट्रेशन में एक महिला राहुल गांधी से पूछती है कि ट्रिपल तलाक पर आपकी पार्टी ने क्या किया? जिस पर राहुल का कैरेक्टर कहता है कि वह तो वोट बैंक पॉलिटिक्स थी। इसके बाद महिला आरक्षण बिल, शाह बानो केस और कर्नाटक कैबिनेट का जिक्र होता है। पोस्ट में सवाल उठाया गया कि कर्नाटक की कांग्रेस सरकार के 33 मंत्रियों में एक भी महिला मंत्री क्यों नहीं है। कंगना ने कृति के कपड़ों पर भी उठाया था सवाल कंगना रनौत ने इससे पहले भी कृति सेनन के रक्षाबंधन वाले एड पर सवाल उठाए थे। कंगना ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी में लिखा था कि आज महिलाओं के पास पहनने के लिए हर तरह के कपड़े मौजूद हैं, फिर रक्षाबंधन जैसे पारंपरिक त्योहार पर भाई को राखी बांधते समय ऐसे कपड़े चुनने की क्या वजह थी। कंगना ने एड को अजीब बताया था। इसके जवाब में कृति सेनन ने कहा था कि किसी भी महिला की अपनी संस्कृति के प्रति निष्ठा को उसके कपड़ों की नेकलाइन से नहीं नापा जाना चाहिए। पूरी खबर पढ़ें विवाद के बाद ब्रांड ने हटाया एडवर्टाइजमेंट यह पूरा विवाद जीवा (GIVA) ज्वेलरी ब्रांड के 36 सेकंड के रक्षाबंधन एडवर्टाइजमेंट से शुरू हुआ था। एड में कृति सेनन इंडो-वेस्टर्न आउटफिट में नजर आई थीं और वे अपने भाई के साथ-साथ अपने पेट डॉग को भी राखी बांध रही थीं। सोशल मीडिया पर कपड़ों और पेट डॉग को राखी बांधने को लेकर विवाद बढ़ता देख ब्रांड ने आधिकारिक बयान जारी कर माफी मांगी और इस एडवर्टाइजमेंट को अपने सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से हटा लिया है। पूरी खबर पढ़ें ये खबर भी पढ़ें ‘भाई को बिकिनी में राखी क्यों बांधेंगी?’:कृति सेनन के रक्षाबंधन विज्ञापन में रिवीलिंग ड्रेस के बाद कंगना रनोट ने उठाए सवाल कृति सेनन हाल ही में रक्षाबंधन के लिए बने एक ज्वेलरी ब्रांड के विज्ञापन में नजर आई थीं। विज्ञापन में उन्होंने इंडो-वेस्टर्न कपड़े पहने थे, जिसमें ब्रालेट जैसा ब्लाउज, केप और ड्रेप्ड स्कर्ट शामिल थी। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
Pratapgarh School Children Risk Lives Crossing Nala on Broken Tree Bridge

Hindi News Career Pratapgarh School Children Risk Lives Crossing Nala On Broken Tree Bridge 2 मिनट पहले कॉपी लिंक राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले की दलोट (दलौद) तहसील के अंतर्गत आने वाले उदयाखेड़ी गांव में स्कूली बच्चों के लिए आने-जाने का कोई पक्का रास्ता या पुल नहीं है। ये बच्चे एक टूटे हुए पेड़ के सहारे स्कूल जाने को मजबूर हैं। कुदरत के सहारे गिरे एक खजूर के पेड़ को ही बच्चों ने अपना रास्ता बना लिया है। ग्रामीणों ने खजूर के गिरे हुए पेड़ के सहारे बांस और कील ठोककर बच्चों को पकड़ने के लिए अस्थायी सहारा बनाया है। इसके जरिए बच्चे संतुलन बनाकर किसी तरह नाले को पार करते हैं। इस जगह के लिए पुलिया दो बार सैंक्शन हो चुकी है लेकिन आस पास के खातेदारी जमीन वाले इसे बनाने नहीं दे रहे है । इससे पहले गांव के लोगों ने अपने हाथों से एक पुल तैयार किया था। लेकिन बारिश की वजह से ये पुल टूट गया। अब बच्चे कुदरत के बनाए पुल को पार करके स्कूल जा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि नदी पार करने के लिए कोई सुरक्षित व्यवस्था नहीं होने से कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से यहां जल्द से जल्द स्थायी पुल बनाने की मांग की है, ताकि बच्चों और ग्रामीणों को जान जोखिम में डालकर नदी पार न करनी पड़े। ——————————————————– ये खबर भी पढ़ें कंप्यूटर पढ़ाने के बदले झाड़ू-पोछा कराते हैं टीचर:छात्रों ने लगाए नारे- प्रिंसिपल हटाओ; जांच में बिस्किट देकर छात्रों को भड़काने का आरोप 20 अगस्त को कन्नौज के गुगरापुर PMश्री कंपोजिट विद्यालय में जूनियर कक्षाओं के बच्चे स्कूल पहुंचे और स्कूल के बाहर खड़े होकर प्रदर्शन करने लगे। बच्चों ने प्रभारी प्रधानाध्यापक राकेंद्र सक्सेना की कार को घेर लिया और नारेबाजी की। उन पर कई आरोप भी लगाए। पूरी खबर यहां पढ़ें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Gurugram School Van Waterlogging | Nursery Kids Viral Video Update

Hindi News Career Gurugram School Van Waterlogging | Nursery Kids Viral Video Update 9 मिनट पहले कॉपी लिंक दिल्ली-NCR में बीते 2-3 दिनों से भारी बारिश हो रही है, जिसकी वजह से गुरुग्राम की सड़कों पर भारी जलभराव हो गया है। इन जलभराव की तस्वीरों में एक वीडियो जमकर वायरल हो रहा है। इस वीडियो में नर्सरी क्लास के कुछ बच्चे स्कूल यूनिफॉर्म में बैठे हैं और उनके चारों तरफ पानी भरा हुआ है। ये बच्चे डरे हुए हैं और उनमें एक बच्ची चारों तरफ भरे पानी को देखकर जोर-जोर से रो रही है और मम्मी- मम्मी पुकार रही है। स्कूल वैन में पानी भरा, ड्राइवर को रुकना पड़ा गुरुग्राम में सेक्टर-14 के केंद्रीय विद्यालय का वैन चालक करीब डेढ़ बजे बच्चों को लेकर स्कूल से निकला था, लेकिन सड़क पर भरे पानी के बीच वैन बंद हो गई। ये वैन भारी बारिश के बीच शीतला माता मंदिर के पास पानी में फंस गई। जिसमें नर्सरी के छोटे बच्चे सवार थे। ड्राइवर ने बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए उन्हें वैन से उतारकर एक दुकान में बैठा दिया और इसके बाद ड्राइवर ने बच्चों के पेरेंट्स को सूचना दी। हालांकि उस दुकान में भी चारों तरफ पानी भरा था, जिससे बच्चे डर गए और रोने लगे। बच्चों को 3 घंटे से ज्यादा इंतजार करना पड़ा जलभराव और ट्रैफिक के कारण बच्चों के पेरेंट्स को उन तक पहुंचने में 3 से ज्यादा घंटे लग गए। इस घटना से शहर के ड्रेनेज सिस्टम, जलनिकासी व्यवस्था और आपातकालीन शहरी प्रबंधन की कमियों को फिर सामने ला दिया है। सेक्टर 45 में भी क्लास 2 के स्टूडेंट्स कई घंटों फंसे रहे सुभाष चौक के आसपास भी भारी व्यवधान की सूचना मिली, जहां सेक्टर 45 स्थित दिल्ली पब्लिक स्कूल के छात्रों को ले जा रही बसें भारी बारिश और यातायात जाम में कई घंटों तक फंसी रहीं। रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ जगहों पर पानी लगभग चार फीट तक भर गया था, जिसके कारण बसें फंस गईं। सेक्टर 45 से सेक्टर सेक्टर 48 तक पहुंचने में कुछ ही मिनट लगते हैं लेकिन भारी जल भराव के चलते स्टूडेंट्स को पांच से छह घंटे लगे। दो दिन में हुई भारी बारिश के बाद कम से कम 12 स्कूल बसें एक इलाके में फंसीं और कई बच्चों को घंटों इंतजार करना पड़ा। गुरुग्राम में अब 85-90 मिमी बारिश हुई गुरुग्राम के कई इलाकों में लगभग डेढ़ घंटे के दौरान करीब 85-90 मिमी बारिश हुई, जिससे सड़क संपर्क बुरी तरह प्रभावित हुआ और शहर की जल निकासी व्यवस्था तथा मॉनसून की तैयारियों में कमियां उजागर हुईं। हालांकि, जब मौसम विभाग ने भारी बारिश की चेतावनी दी थी, तो स्कूलों और प्रशासन ने बच्चों की सुरक्षित वापसी के लिए क्या तैयारी की इस पर भी सवाल उठ रहे हैं। ———————— ये खबर भी पढ़ें.. राजस्थान के प्राइमरी स्कूल की छत गिरी:तेज आवाज सुनकर बच्चे कक्षा से बाहर निकले, मची अफरा-तफरी, दूसरी कक्षा भी जर्जर राजस्थान के डूंगरपुर जिले के दोवड़ा ब्लॉक की ग्राम पंचायत सत्तु देवकी स्थित अपर प्राइमरी स्कूल में एक कक्षा की छत गिर गई। उस समय स्कूल में 120 बच्चे मौजूद थे पूरी खबर पढ़ें.. दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
लाइक्स के लिए ‘रॉन्ग-वे ड्राइविंग’ का घातक ट्रेंड:ब्रिटेन में 32% केस बढ़े, पीएम भी चिंतित; तारीफ के लिए गलत दिशा में जा रहे युवा

अमेरिका, यूरोप में हाल के वर्षों में ‘टीन टेकओवर’ और ‘ब्लैकआउट चैलेंज’ जैसे खतरनाक ट्रेंड के बाद अब ब्रिटेन में ‘रॉन्ग-वे ड्राइविंग’ ट्रेंड में है। सोशल मीडिया पर व्यूज और लाइक्स हासिल करने की अंधी दौड़ ने युवाओं को नए और जानलेवा खेल में उलझा दिया है। ब्रिटेन में इन दिनों हाईवे पर गलत दिशा में तेज रफ्तार गाड़ी चलाने का का ट्रेंड तेजी से फैल रहा है। युवा भीड़भाड़ वाली सड़कों या हाईवे पर पर गलत दिशा में कार दौड़ाते हुए वीडियो शूट कर उन्हें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर पोस्ट करते हैं। इस खतरनाक ‘गेमिफाइड’ स्टंट के कारण हाल ही में कई हादसे हुए हैं। जैसे- 22 अगस्त को उत्तरी इंग्लैंड के मिडल्सब्रो में हाईवे पर गलत दिशा से आ रही कार ने पुलिस वाहन को जोरदार टक्कर मार दी। इस हादसे में कार सवार 5 युवाओं और दो पुलिस अधिकारियों की मौत हुई। जांच में कार चला रहे युवा के टिकटॉक अकाउंट पर मिले एक पुराने वीडियो में 160 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से कार चलाने और पुलिस से भागने के दृश्य मिले। इस ट्रेंड से चिंतित ब्रिटेन के पीएम एंडी बर्नहैम कहते हैं कि खतरनाक ड्राइविंग की रील्स वास्तव में निंदनीय काम है। अमेरिका में ‘स्ट्रीट टेकओवर’ और ‘नो-हेजिटेशन ड्राइविंग’ नाम से गलत दिशा में स्पीडिंग और पुलिस को उकसाने के वीडियो बनाए जाते हैं। कैलिफोर्निया और टेक्सास जैसे राज्यों में इसे रोकने के लिए विशेष टास्क फोर्स का गठन करना पड़ा है। रील्स की सनक, खतरे का अहसास खत्म सवाल है कि युवा ऐसे जानलेवा स्टंट क्यों कर रहे हैं? वॉशिंगटन में साइबर साइकोलॉजी की प्रो. मैरी एकन बताती हैं, ‘जब युवा इन जानलेवा कारनामों को रिकॉर्ड और ब्रॉडकास्ट करते हैं, तो उन्हें असली खतरे से काल्पनिक दूरी महसूस होने लगती है। उन्हें लगता है कि वे कोई वीडियो गेम खेल रहे हैं या लाइव परफॉर्मेंस दे रहे हैं। सोशल मीडिया पर मिलने वाले लाइक्स और व्यूज उन्हें जोखिम उठाने का सामाजिक इनाम महसूस कराते हैं।’ ब्रिटेन में इस वर्ष हाईवे पर गलत दिशा में गाड़ी चलाने के 62 केस हो चुके हैं, जो पिछले साल से 32% अधिक हैं। इस ट्रेंड से जुड़े हादसों में एक ही हफ्ते में 12 लोगों की मौत हुई है। ध्यान दें – ये अब ‘लाइक्स’ देखने के लिए दुनिया में नहीं हैं जैकब माटुसियाक, मकाई सैडिंगटन, थियो रे, माइकल रॉबर्ट कैहिल और कोल रॉबर्ट वर्थी की पासैट कार दुर्घटना में मृत्यु हो गई (बाएं से दाएं)। 17 से 23 साल के ये युवक अब सोशल मीडिया के अपने अकाउंट्स पर लाइक्स और व्यूज कभी नहीं देख सकेंगे।
Filmmaker Kuku Kohli Dies at 77

6 मिनट पहले कॉपी लिंक अजय देवगन को फिल्म ‘फूल और कांटे’ से लॉन्च करने वाले वेटरन फिल्ममेकर कुकू कोहली का मंगलवार को 77 साल की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने मुंबई के कोकिलाबेन अस्पताल में आखिरी सांस ली। उन्हें हार्ट अटैक आया था। आज कुकू कोहली का अंतिम संस्कार ओशिवारा श्मशान घाट में किया जाएगा। अंतिम दर्शन के लिए ‘महाभारत’ फेम गजेंद्र चौहान समेत कई सेलेब्स पहुंच रहे हैं। इस दौरान कुकू कोहली की पत्नी अरुणा ईरानी को गजेंद्र चौहान ने संभाला। राज कपूर के साथ काम करके करियर शुरू किया कुकू कोहली ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत राज कपूर की फिल्म बॉबी में असिस्टेंट के तौर पर काम करके की थी। उन्होंने कई साल उनके साथ रहकर फिल्म बनाने की बारीकियां सीखीं। बाद में वह फिल्म बेताब में सेकेंड यूनिट डायरेक्टर रहे। सनी देओल और अमृता सिंह स्टारर यह फिल्म हिट थी। इसके बाद उन्होंने अर्जुन में भी काम किया। कुकू कोहली, राज कपूर की फिल्मों जैसे बॉबी, प्रेम रोग और सत्यम शिवम सुंदरम में उनके असिस्टेंट थे। 1991 में कुकू कोहली ने फूल और कांटे से बतौर डायरेक्टर शुरुआत की। फिल्म हिट रही और अजय देवगन को बॉलीवुड में पहचान मिली। इसके बाद उन्होंने कोहराम और सुहाग जैसी फिल्में बनाईं। सुहाग में अजय देवगन और अक्षय कुमार पहली बार साथ नजर आए थे। 1995 में उनकी फिल्म हकीकत रिलीज हुई। इसमें अजय देवगन और तब्बू थे। फिल्म को फिल्मफेयर अवॉर्ड्स में सात कैटेगरी में नॉमिनेशन मिला। कुकू को बेस्ट डायरेक्टर के लिए भी नॉमिनेशन मिला। इसके बाद उन्होंने जुल्मी, अनाड़ी नंबर 1 और ये दिल आशिकाना जैसी फिल्में बनाईं। उनकी आखिरी फिल्म वो तेरा नाम था 2004 में रिलीज हुई थी। कुकू कोहली और अरुणा ईरानी ने गुपचुप शादी की थी कुकू कोहली की दो शादियां हुई थीं। कुकू कोहली की पहली पत्नी का नाम रीता कोहली था। रीता कोहली और कुकू कोहली की दो बेटियां पूजा और करिश्मा थीं। कुकू कोहली की पहली पत्नी रीता का निधन करीब 6 साल पहले हुआ था। वहीं, कुकू कोहली की दूसरी शादी एक्ट्रेस अरुणा ईरानी से हुई। दोनों की पहली मुलाकात फिल्म कोहराम के सेट पर हुई थी। शुरुआत में दोनों के बीच बिल्कुल नहीं बनती थी। हालांकि, काम के दौरान कुकू कोहली अरुणा का काफी ख्याल रखते थे। धीरे-धीरे उनकी दोस्ती बढ़ी और यही दोस्ती प्यार में बदल गई। जब अरुणा को कुकू से प्यार हुआ, तब उन्हें पता चला कि कुकू पहले से शादीशुदा हैं। उनकी पहली पत्नी रीता कोहली से दो बेटियां भी थीं। इसके बावजूद अरुणा ने कुकू के साथ रिश्ता आगे बढ़ाया। दोनों ने 1990 में शादी कर ली। हालांकि, उन्होंने कई साल तक अपनी शादी को सार्वजनिक नहीं किया। कुकू कोहली की डायरेक्ट की फूल और कांटे, कोहराम और सुहाग जैसी कई फिल्मों में अरुणा ईरानी ने काम किया था। अरुणा ने बताया था कि वह कुकू की पहली पत्नी और उनके परिवार की परेशानियां नहीं बढ़ाना चाहती थीं। इसलिए उन्होंने अपने रिश्ते को निजी रखा। शादी के बाद अरुणा और कुकू ने बच्चे नहीं करने का फैसला लिया। अरुणा ने कहा था कि उस समय उनकी उम्र और कुकू के पहले से बच्चों को देखते हुए उन्होंने यह फैसला लिया। ……………….. यह खबर भी पढ़ें… लगान-गजनी फेम एक्टर प्रदीप रावत का निधन:74 साल के थे, दोबारा कैंसर हुआ था; महाभारत में अश्वत्थामा बने थे लगान और गजनी समेत कई फिल्मों में नजर आने वाले अभिनेता प्रदीप रावत का 74 साल की उम्र में 4 अगस्त को निधन हो गया। उनके निधन की जानकारी लगान में उनके साथ काम करने वाले अभिनेता यशपाल शर्मा ने इंस्टाग्राम पर श्रद्धांजलि देते हुए शेयर की थी। पूरी खबर यहां पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
तिब्बत की बाढ़ से नेपाल की भोटेकोशी नदी उफान पर:कई जिलों में चेतावनी जारी, सीमा चौकी के 9 जवान लापता

चीन के तिब्बत क्षेत्र से आई बाढ़ मंगलवार को नेपाल के रसुवा जिले में पहुंच गई। इसके चलते भोटेकोशी नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया। बाढ़ के बीच रसुवा के टिमुरे बॉर्डर आउटपोस्ट में तैनात 9 पुलिसकर्मी लापता हो गए हैं। प्रशासन ने त्रिशूली नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की चेतावनी दी है। लोगों से नदी किनारे न जाने की अपील प्राधिकरण के कार्यकारी प्रमुख धर्मराज उप्रेती ने कहा कि तिब्बत से बाढ़ आने की सूचना मिलते ही प्रभावित इलाकों को अलर्ट भेज दिया गया था। बाढ़ के बाद टिमुरे स्थित बॉर्डर आउटपोस्ट (BOP) में तैनात 9 सशस्त्र पुलिसकर्मी लापता बताए जा रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार जवानों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। हालांकि चौकी पर मौजूद 25 से 30 अन्य लोग सुरक्षित हैं। भोटेकोशी और त्रिशूली नदियां नेपाल के उत्तरी इलाकों से होकर बहती हैं। तिब्बत में भारी बारिश या अचानक आई बाढ़ का असर इन नदियों के जरिए नेपाल के कई जिलों तक पहुंच सकता है। खबर अपडेट हो रही है…..
तिब्बत की बाढ़ से नेपाल की भोटेकोशी नदी उफान पर:कई जिलों में चेतावनी जारी, सीमा चौकी के 9 जवान लापता

चीन के तिब्बत क्षेत्र से आई बाढ़ मंगलवार को नेपाल के रसुवा जिले में पहुंच गई। इसके चलते भोटेकोशी नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया। बाढ़ के बीच रसुवा के टिमुरे बॉर्डर आउटपोस्ट में तैनात 9 पुलिसकर्मी लापता हो गए हैं। प्रशासन ने त्रिशूली नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की चेतावनी दी है। लोगों से नदी किनारे न जाने की अपील प्राधिकरण के कार्यकारी प्रमुख धर्मराज उप्रेती ने कहा कि तिब्बत से बाढ़ आने की सूचना मिलते ही प्रभावित इलाकों को अलर्ट भेज दिया गया था। बाढ़ के बाद टिमुरे स्थित बॉर्डर आउटपोस्ट (BOP) में तैनात 9 सशस्त्र पुलिसकर्मी लापता बताए जा रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार जवानों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। हालांकि चौकी पर मौजूद 25 से 30 अन्य लोग सुरक्षित हैं। भोटेकोशी और त्रिशूली नदियां नेपाल के उत्तरी इलाकों से होकर बहती हैं। तिब्बत में भारी बारिश या अचानक आई बाढ़ का असर इन नदियों के जरिए नेपाल के कई जिलों तक पहुंच सकता है। खबर अपडेट हो रही है…..
मूवी रिव्यू – ‘टॉक्सिक’:यश की फिल्म में स्टाइल, स्टारडम और एक्शन का पूरा ओवरडोज, लेकिन कहानी उलझी; तीन घंटे बाद सिरदर्द होता है

यश की फिल्म ‘टॉक्सिक’ में स्टाइल, स्टारडम और एक्शन का पूरा ओवरडोज है, लेकिन कहानी इतनी उलझी है कि तीन घंटे बाद सिरदर्द होता है। ड्यूरेशन: 3 घंटे 14 मिनट 12 सेकंड दैनिक भास्कर रेटिंग: 1.5/5 यश की ‘टॉक्सिक’ एक बड़े स्केल की गैंगस्टर फिल्म है, जिसमें ड्रग्स, परिवार, बदला, धोखा और खूब सारा एक्शन है। फिल्म का लुक शानदार है, यश का जलवा बरकरार है, लेकिन कहानी के मामले में फिल्म आपको पकड़ने के बजाय बार-बार उलझाती है। फिल्म की कहानी कहानी 1940 के दशक के गोवा की है, जहां ड्रग्स के कारोबार पर गैंग्स का कब्जा है। राया बने यश इसी दुनिया का बड़ा नाम है। परिवार में हुए धोखे और पुराने हिसाब-किताब के बाद कहानी उसके बेटे टिकट तक पहुंचती है, जहां बदले और गैंगवार का खेल शुरू होता है। आइडिया सुनने में दमदार है, लेकिन फिल्म इसे इतने किरदारों और इतनी तेजी से आगे बढ़ाती है कि कुछ देर बाद कहानी समझने से ज्यादा ये याद रखना मुश्किल हो जाता है कि कौन किसका आदमी है। फिल्म में एक्टिंग यश इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत हैं। राया के किरदार में उनका स्वैग, लुक, बॉडी लैंग्वेज और स्क्रीन प्रेजेंस शानदार है। टिकट के रोल में भी उन्होंने अपने अंदाज को बदलने की कोशिश की है और कुछ सीन्स में उनकी परफॉर्मेंस वाकई असर छोड़ती है। नयनतारा, कियारा आडवाणी, हुमा कुरैशी, तारा सुतारिया और रुक्मिणी वसंत जैसी बड़ी फीमेल स्टारकास्ट फिल्म में है, लेकिन अफसोस कि इनके किरदार उतनी मजबूती से नहीं लिखे गए। इतने बड़े नाम होने के बावजूद ज्यादातर किरदार यश के आसपास ही घूमते रह जाते हैं। फिल्म में डायरेक्शन और स्क्रीनप्ले गीतू मोहनदास ने फिल्म को छोटा सोचकर नहीं बनाया। सेट बड़े हैं, विजुअल्स रिच हैं और पूरी दुनिया को एक अलग अंदाज देने की कोशिश की गई है, लेकिन दिक्कत ये है कि डायरेक्टर ने कहानी से ज्यादा स्टाइल पर भरोसा कर लिया। स्क्रीनप्ले लगातार एक जगह से दूसरी जगह भागता है। किरदार आते हैं, गोली चलाते हैं, कोई मर जाता है और कहानी आगे बढ़ जाती है। लेकिन दर्शक के मन में एक ही सवाल घूमता रहता है ये हो क्यों रहा है? फिल्म की एडिटिंग एडिटिंग भी काफी तेज है। एक्शन में इतने कट हैं कि रोमांच के बजाय कई जगह उलझन होने लगती है। फिल्म खूबसूरत जरूर दिखती है, लेकिन खूबसूरत दृश्य और अच्छी कहानी में फर्क होता है। फिल्म में सिनेमैटोग्राफी यहां फिल्म को पूरे नंबर मिलते हैं। पुराने दौर का गोवा, शानदार सेट, कपड़े, रोशनी और एक्शन सीन मिलकर फिल्म को भव्य बनाते हैं। कई सीन ऐसे हैं, जिन्हें देखकर लगेगा कि फिल्म पर खूब पैसा खर्च हुआ है। लेकिन परेशानी वही है आंखों को फिल्म खूब पसंद आती है, दिमाग को कम। फिल्म में म्यूजिक संगीत फिल्म की एक और कमजोर कड़ी है। रवि बस्रूर का बैकग्राउंड स्कोर कई जगह माहौल बनाने के बजाय शोर पैदा करता है। हर बड़े सीन को भारी बनाने की कोशिश में संगीत इतना हावी हो जाता है कि कई बार सीन का असर ही दब जाता है। विशाल मिश्रा, रवि बस्रूर और तनिष्क बागची जैसे नामों से उम्मीद काफी ज्यादा थी। गाने बुरे नहीं हैं, लेकिन उनमें भी लगातार शोर महसूस होता है। कुछ देर सुनने के बाद कान भी आराम मांगने लगते हैं फिल्म को लेकर फाइनल वर्डिक्ट ‘टॉक्सिक’ में सब कुछ बड़ा है यश का स्टारडम, बजट, सेट, एक्शन और दृश्य। बस कहानी उस लेवल की नहीं है। फिल्म आपको बार-बार प्रभावित करने की कोशिश करती है, लेकिन मनोरंजन नहीं कर पाती। यश के कई पल शानदार हैं, मगर अकेला स्टारडम 3 घंटे 14 मिनट की फिल्म को नहीं खींच सकता। कुल मिलाकर, ‘टॉक्सिक’ की सबसे बड़ी परेशानी यही है फिल्म बहुत कुछ दिखाती है, लेकिन महसूस बहुत कम कराती है।
मूवी रिव्यू – ‘टॉक्सिक’:यश की फिल्म में स्टाइल, स्टारडम और एक्शन का पूरा ओवरडोज, लेकिन कहानी उलझी; तीन घंटे बाद सिरदर्द होता है

यश की फिल्म ‘टॉक्सिक’ में स्टाइल, स्टारडम और एक्शन का पूरा ओवरडोज है, लेकिन कहानी इतनी उलझी है कि तीन घंटे बाद सिरदर्द होता है। ड्यूरेशन: 3 घंटे 14 मिनट 12 सेकंड दैनिक भास्कर रेटिंग: 1.5/5 यश की ‘टॉक्सिक’ एक बड़े स्केल की गैंगस्टर फिल्म है, जिसमें ड्रग्स, परिवार, बदला, धोखा और खूब सारा एक्शन है। फिल्म का लुक शानदार है, यश का जलवा बरकरार है, लेकिन कहानी के मामले में फिल्म आपको पकड़ने के बजाय बार-बार उलझाती है। फिल्म की कहानी कहानी 1940 के दशक के गोवा की है, जहां ड्रग्स के कारोबार पर गैंग्स का कब्जा है। राया बने यश इसी दुनिया का बड़ा नाम है। परिवार में हुए धोखे और पुराने हिसाब-किताब के बाद कहानी उसके बेटे टिकट तक पहुंचती है, जहां बदले और गैंगवार का खेल शुरू होता है। आइडिया सुनने में दमदार है, लेकिन फिल्म इसे इतने किरदारों और इतनी तेजी से आगे बढ़ाती है कि कुछ देर बाद कहानी समझने से ज्यादा ये याद रखना मुश्किल हो जाता है कि कौन किसका आदमी है। फिल्म में एक्टिंग यश इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत हैं। राया के किरदार में उनका स्वैग, लुक, बॉडी लैंग्वेज और स्क्रीन प्रेजेंस शानदार है। टिकट के रोल में भी उन्होंने अपने अंदाज को बदलने की कोशिश की है और कुछ सीन्स में उनकी परफॉर्मेंस वाकई असर छोड़ती है। नयनतारा, कियारा आडवाणी, हुमा कुरैशी, तारा सुतारिया और रुक्मिणी वसंत जैसी बड़ी फीमेल स्टारकास्ट फिल्म में है, लेकिन अफसोस कि इनके किरदार उतनी मजबूती से नहीं लिखे गए। इतने बड़े नाम होने के बावजूद ज्यादातर किरदार यश के आसपास ही घूमते रह जाते हैं। फिल्म में डायरेक्शन और स्क्रीनप्ले गीतू मोहनदास ने फिल्म को छोटा सोचकर नहीं बनाया। सेट बड़े हैं, विजुअल्स रिच हैं और पूरी दुनिया को एक अलग अंदाज देने की कोशिश की गई है, लेकिन दिक्कत ये है कि डायरेक्टर ने कहानी से ज्यादा स्टाइल पर भरोसा कर लिया। स्क्रीनप्ले लगातार एक जगह से दूसरी जगह भागता है। किरदार आते हैं, गोली चलाते हैं, कोई मर जाता है और कहानी आगे बढ़ जाती है। लेकिन दर्शक के मन में एक ही सवाल घूमता रहता है ये हो क्यों रहा है? फिल्म की एडिटिंग एडिटिंग भी काफी तेज है। एक्शन में इतने कट हैं कि रोमांच के बजाय कई जगह उलझन होने लगती है। फिल्म खूबसूरत जरूर दिखती है, लेकिन खूबसूरत दृश्य और अच्छी कहानी में फर्क होता है। फिल्म में सिनेमैटोग्राफी यहां फिल्म को पूरे नंबर मिलते हैं। पुराने दौर का गोवा, शानदार सेट, कपड़े, रोशनी और एक्शन सीन मिलकर फिल्म को भव्य बनाते हैं। कई सीन ऐसे हैं, जिन्हें देखकर लगेगा कि फिल्म पर खूब पैसा खर्च हुआ है। लेकिन परेशानी वही है आंखों को फिल्म खूब पसंद आती है, दिमाग को कम। फिल्म में म्यूजिक संगीत फिल्म की एक और कमजोर कड़ी है। रवि बसरूर का बैकग्राउंड स्कोर कई जगह माहौल बनाने के बजाय शोर पैदा करता है। हर बड़े सीन को भारी बनाने की कोशिश में संगीत इतना हावी हो जाता है कि कई बार सीन का असर ही दब जाता है। विशाल मिश्रा, रवि बस्रूर और तनिष्क बागची जैसे नामों से उम्मीद काफी ज्यादा थी। गाने बुरे नहीं हैं, लेकिन उनमें भी लगातार शोर महसूस होता है। कुछ देर सुनने के बाद कान भी आराम मांगने लगते हैं फिल्म को लेकर फाइनल वर्डिक्ट ‘टॉक्सिक’ में सब कुछ बड़ा है यश का स्टारडम, बजट, सेट, एक्शन और दृश्य। बस कहानी उस लेवल की नहीं है। फिल्म आपको बार-बार प्रभावित करने की कोशिश करती है, लेकिन मनोरंजन नहीं कर पाती। यश के कई पल शानदार हैं, मगर अकेला स्टारडम 3 घंटे 14 मिनट की फिल्म को नहीं खींच सकता। कुल मिलाकर, ‘टॉक्सिक’ की सबसे बड़ी परेशानी यही है फिल्म बहुत कुछ दिखाती है, लेकिन महसूस बहुत कम कराती है।








