Elon Musk SpaceX Starbase Louisiana Rocket Launch Complex

Hindi News Business Elon Musk SpaceX Starbase Louisiana Rocket Launch Complex | Starship News 3 मिनट पहले कॉपी लिंक स्टारबेस, लुइसियाना की साइट पर इलॉन मस्क और लुइसियाना के गवर्नर जेफ लैंड्री। इलॉन मस्क इस निरीक्षण के लिए हेलीकॉप्टर से पहुंचे। इलॉन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स अमेरिका के दक्षिणी लुइसियाना में दुनिया का सबसे बड़ा रॉकेट लॉन्च कॉम्प्लेक्स बना रही है। इस प्रोजेक्ट पर कंपनी 100 बिलियन डॉलर यानी करीब ₹9.50 लाख करोड़ का निवेश करेगी। ‘स्टारबेस, लुइसियाना’ स्पेसएक्स का दूसरा ‘स्टारबेस’ कैंपस होगा। यह नया स्पेसपोर्ट लुइसियाना के पिकान आइलैंड पर 1.25 लाख एकड़ में फैला होगा, जो कि न्यूयॉर्क के मैनहट्टन शहर से भी आठ गुना बड़ा है। यहां से स्पेसएक्स के नेक्स्ट-जनरेशन रॉकेट ‘स्टारशिप’ और AI बेस्ड सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष में भेजा जाएगा। कंस्ट्रक्शन साल 2029 से शुरू होने की उम्मीद है। 3,000 नई नौकरियां मिलेंगी, औसत सैलरी ₹88 लाख सालाना होगी लुइसियाना के गवर्नर जेफ लैंड्री ने इसे राज्य की इकोनॉमी के लिए बड़ा कदम बताया है। लैंड्री के मुताबिक, इस स्पेसपोर्ट से क्षेत्र में कम से कम 3 हजार से ज्यादा डायरेक्ट नौकरियां पैदा होंगी। यहां काम करने वाले कर्मचारियों की औसत सालाना सैलरी 92,600 डॉलर यानी करीब 88 लाख रुपए होगी, जो वर्मिलियन पैरिश की मौजूदा औसत इनकम से लगभग दोगुनी है। गवर्नर ने कहा, “यह प्रोजेक्ट रोजगार, समुदायों के लिए प्रगति और हमारे तटीय इलाकों के लिए सुरक्षा लेकर आएगा।” ‘सेल्फ-सस्टेनिंग’ होगा कैंपस, खुद बनाएगा ईंधन और बिजली स्पेसएक्स की प्रेसिडेंट ग्विन शॉटवेल ने बताया कि यह कैंपस पूरी तरह ‘सेल्फ-सस्टेनिंग’ होगा। खुद का ईंधन और बिजली: कॉम्प्लेक्स के भीतर ही रॉकेट प्रोपेलेंट के लिए मीथेन गैस का उत्पादन होगा और इलेक्ट्रिसिटी जनरेशन फैसिलिटी लगाई जाएगी। शिपिंग और ट्रांसपोर्ट: स्टारशिप रॉकेट्स को लाने-ले जाने के लिए डीप-वॉटर शिपिंग पोर्ट और व्हीकल प्रोसेसिंग यूनिट्स बनाई जाएंगी। एक डेडिकेटेड एयरपोर्ट भी बनाया जा सकता है। शॉटवेल ने कहा कि इस फैसिलिटी का लक्ष्य हर साल स्टारशिप के हजारों उड़ानों को सपोर्ट करना है, हालांकि यह इंजीनियरिंग और रेग्युलेटरी अप्रूवल पर निर्भर करेगा। रॉकेट मैन्युफैक्चरिंग नहीं सिर्फ लॉन्चिंग होगी यह लुइसियाना कैंपस स्पेसएक्स के टेक्सास स्थित ‘स्टारबेस’ से काफी अलग होगा। टेक्सास में रॉकेट्स का निर्माण और असेंबली की जाती है, जबकि लुइसियाना फैसिलिटी में रॉकेट की मैन्युफैक्चरिंग नहीं होगी। इसका मुख्य फोकस केवल हाई-फ्रीक्वेंसी यानी तेज गति से लॉन्चिंग पर रहेगा। पिकान आइलैंड की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि यहां से रॉकेट्स को सन-सिंक्रोनस ऑर्बिट में आसानी से भेजा जा सकता है। यह ऑर्बिट सोलर-पावर्ड सैटेलाइट्स के लिए सबसे मुफीद मानी जाती है। दुनिया के सबसे अमीर कारोबारी इलॉन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स ने इस रॉकेट को बनाया है। स्टारशिप स्पेसक्राफ्ट (ऊपरी हिस्सा) और सुपर हैवी बूस्टर (निचला हिस्सा) को कलेक्टिवली ‘स्टारशिप’ कहा जाता है। लुइसियाना स्पेसपोर्ट के जरिए मस्क दो बड़े लक्ष्य… स्टारलिंक कॉन्स्टलेशन का तेजी से विस्तार करना। अंतरिक्ष में 10 लाख AI सैटेलाइट्स तैनात करना। नॉलेज पार्ट: क्या होता है ‘सन-सिंक्रोनस ऑर्बिट’? यह पृथ्वी का एक ऐसा ऑर्बिटहै जिसमें सैटेलाइट हमेशा सूर्य के एक ही कोण के साथ यात्रा करती है। यानी सैटेलाइट जिस जगह से भी गुजरती है, वहां हमेशा धूप होती है। सोलर-पावर्ड सैटेलाइट्स और अर्थ-ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट्स के लिए यह ऑर्बिट सबसे बेस्ट मानी जाती है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Elon Musk SpaceX Starbase Louisiana Rocket Launch Complex

Hindi News Business Elon Musk SpaceX Starbase Louisiana Rocket Launch Complex | Starship News 1 घंटे पहले कॉपी लिंक स्टारबेस, लुइसियाना की साइट पर इलॉन मस्क और लुइसियाना के गवर्नर जेफ लैंड्री। इलॉन मस्क इस निरीक्षण के लिए हेलीकॉप्टर से पहुंचे। इलॉन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स अमेरिका के दक्षिणी लुइसियाना में दुनिया का सबसे बड़ा रॉकेट लॉन्च कॉम्प्लेक्स बना रही है। इस प्रोजेक्ट पर कंपनी 100 बिलियन डॉलर यानी करीब ₹9.50 लाख करोड़ का निवेश करेगी। ‘स्टारबेस, लुइसियाना’ स्पेसएक्स का दूसरा ‘स्टारबेस’ कैंपस होगा। यह नया स्पेसपोर्ट लुइसियाना के पिकान आइलैंड पर 1.25 लाख एकड़ में फैला होगा, जो कि न्यूयॉर्क के मैनहट्टन शहर से भी आठ गुना बड़ा है। यहां से स्पेसएक्स के नेक्स्ट-जनरेशन रॉकेट ‘स्टारशिप’ और AI बेस्ड सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष में भेजा जाएगा। कंस्ट्रक्शन साल 2029 से शुरू होने की उम्मीद है। 3,000 नई नौकरियां मिलेंगी, औसत सैलरी ₹88 लाख सालाना होगी लुइसियाना के गवर्नर जेफ लैंड्री ने इसे राज्य की इकोनॉमी के लिए बड़ा कदम बताया है। लैंड्री के मुताबिक, इस स्पेसपोर्ट से क्षेत्र में कम से कम 3 हजार से ज्यादा डायरेक्ट नौकरियां पैदा होंगी। यहां काम करने वाले कर्मचारियों की औसत सालाना सैलरी 92,600 डॉलर यानी करीब 88 लाख रुपए होगी, जो वर्मिलियन पैरिश की मौजूदा औसत इनकम से लगभग दोगुनी है। गवर्नर ने कहा, “यह प्रोजेक्ट रोजगार, समुदायों के लिए प्रगति और हमारे तटीय इलाकों के लिए सुरक्षा लेकर आएगा।” ‘सेल्फ-सस्टेनिंग’ होगा कैंपस, खुद बनाएगा ईंधन और बिजली स्पेसएक्स की प्रेसिडेंट ग्विन शॉटवेल ने बताया कि यह कैंपस पूरी तरह ‘सेल्फ-सस्टेनिंग’ होगा। खुद का ईंधन और बिजली: कॉम्प्लेक्स के भीतर ही रॉकेट प्रोपेलेंट के लिए मीथेन गैस का उत्पादन होगा और इलेक्ट्रिसिटी जनरेशन फैसिलिटी लगाई जाएगी। शिपिंग और ट्रांसपोर्ट: स्टारशिप रॉकेट्स को लाने-ले जाने के लिए डीप-वॉटर शिपिंग पोर्ट और व्हीकल प्रोसेसिंग यूनिट्स बनाई जाएंगी। एक डेडिकेटेड एयरपोर्ट भी बनाया जा सकता है। शॉटवेल ने कहा कि इस फैसिलिटी का लक्ष्य हर साल स्टारशिप के हजारों उड़ानों को सपोर्ट करना है, हालांकि यह इंजीनियरिंग और रेग्युलेटरी अप्रूवल पर निर्भर करेगा। रॉकेट मैन्युफैक्चरिंग नहीं सिर्फ लॉन्चिंग होगी यह लुइसियाना कैंपस स्पेसएक्स के टेक्सास स्थित ‘स्टारबेस’ से काफी अलग होगा। टेक्सास में रॉकेट्स का निर्माण और असेंबली की जाती है, जबकि लुइसियाना फैसिलिटी में रॉकेट की मैन्युफैक्चरिंग नहीं होगी। इसका मुख्य फोकस केवल हाई-फ्रीक्वेंसी यानी तेज गति से लॉन्चिंग पर रहेगा। पिकान आइलैंड की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि यहां से रॉकेट्स को सन-सिंक्रोनस ऑर्बिट में आसानी से भेजा जा सकता है। यह ऑर्बिट सोलर-पावर्ड सैटेलाइट्स के लिए सबसे मुफीद मानी जाती है। दुनिया के सबसे अमीर कारोबारी इलॉन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स ने इस रॉकेट को बनाया है। स्टारशिप स्पेसक्राफ्ट (ऊपरी हिस्सा) और सुपर हैवी बूस्टर (निचला हिस्सा) को कलेक्टिवली ‘स्टारशिप’ कहा जाता है। लुइसियाना स्पेसपोर्ट के जरिए मस्क दो बड़े लक्ष्य… स्टारलिंक कॉन्स्टलेशन का तेजी से विस्तार करना। अंतरिक्ष में 10 लाख AI सैटेलाइट्स तैनात करना। नॉलेज पार्ट: क्या होता है ‘सन-सिंक्रोनस ऑर्बिट’? यह पृथ्वी का एक ऐसा ऑर्बिटहै जिसमें सैटेलाइट हमेशा सूर्य के एक ही कोण के साथ यात्रा करती है। यानी सैटेलाइट जिस जगह से भी गुजरती है, वहां हमेशा धूप होती है। सोलर-पावर्ड सैटेलाइट्स और अर्थ-ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट्स के लिए यह ऑर्बिट सबसे बेस्ट मानी जाती है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
तिरंगा-प्रेरित ड्रेस पर ट्रोलिंग के बाद उर्वशी रौतेला की सफाई:बोलीं- मैं देश को सिर्फ राष्ट्रीयता नहीं, अपनी पहचान के रूप में साथ रखती हूं

एक्ट्रेस उर्वशी रौतेला ने हाल ही में जयपुर में हुए मिस यूनिवर्स इंडिया 2026 के ग्रैंड फिनाले में पहने तिरंगा-प्रेरित गाउन पर उठे विवाद पर सफाई दी। उर्वशी ने कहा कि यह राष्ट्रीय ध्वज की हूबहू कॉपी नहीं थी, बल्कि तिरंगे से प्रेरित कॉउचर डिजाइन था। दरअसल, मिस यूनिवर्स इंडिया 2026 का ग्रैंड फिनाले 23 अगस्त को जयपुर के जी स्टूडियोज में आयोजित हुआ। पूर्व मिस यूनिवर्स इंडिया उर्वशी रौतेला जजिंग पैनल का हिस्सा थीं। उनके साथ भारत की पहली मिस यूनिवर्स सुष्मिता सेन, मिस यूनिवर्स इंडिया 2024 रिया सिंघा, पर्यावरणविद और फिल्म प्रोड्यूसर प्रज्ञा कपूर और पूर्व मिस इंडिया यूनिवर्स व मिस यूनिवर्स रनर-अप सेलिना जेटली भी पैनल में थीं। कार्यक्रम के लिए उर्वशी ने तिरंगे से प्रेरित गाउन पहना था। इसके बाद सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स ने इसे लेकर आपत्ति जताई। एक यूजर ने लिखा कि भारतीय राष्ट्रीय ध्वज को कपड़े के रूप में पहनना या ड्रेस मटेरियल पर सीधे प्रिंट करना फ्लैग कोड ऑफ इंडिया के तहत अनुमति नहीं है। अन्य यूजर्स ने भी इसे लेकर नाराजगी जताई। उर्वशी बोलीं- गाउन राष्ट्रीय ध्वज की हूबहू कॉपी नहीं मामले को लेकर हिंदुस्तान टाइम्स के साथ बातचीत में उर्वशी ने कहा कि मैं अपने देश को सिर्फ अपनी राष्ट्रीयता के तौर पर नहीं, बल्कि अपनी पहचान के एक हिस्से के रूप में अपने साथ लेकर चलती हूं। मैं ऐसा कुछ पहनना चाहती थी, जो सिर्फ यह न बताए कि मैं कहां से हूं, बल्कि यह भी बताए कि मेरे लिए भारत का क्या मतलब है। इसी सोच से इस कॉउचर ड्रेस का आइडिया आया। उर्वशी ने कहा कि गाउन की सिल्हूट, रंगों की जगह, सजावट, डिटेलिंग और प्रोडक्शन को फैशन के तौर पर तैयार किया गया था। उनके मुताबिक, यह केवल तीन रंगों को ड्रेस पर लगाने के बारे में नहीं था, बल्कि राष्ट्रीय भावना को कलात्मक अभिव्यक्ति में बदलने के बारे में था। विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय राष्ट्रीय ध्वज और इस गाउन में कई साफ अंतर हैं। उनके अनुसार, गाउन राष्ट्रीय ध्वज की हूबहू प्रतिकृति नहीं है, बल्कि तिरंगे से प्रेरित तत्वों का इस्तेमाल करके तैयार किया गया कॉउचर डिजाइन है। उन्होंने बताया कि इसमें कलर शेड्स, डायरेक्शन, प्रोपोर्शन, मटीरियल और सेंट्रल सिंबल में जान-बूझकर बदलाव किए गए थे। गाउन में तीन कलर और सर्कल जैसे सेंट्रल मोटिफ का इस्तेमाल किया गया है। उर्वशी के अनुसार, गाउन की हॉरिजॉन्टल कलर स्ट्राइप्स को वर्टिकल बनाया गया, एम्बलम को ज्वेलरी में बदला गया, और सीक्विन और फ्रिंज का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने कहा कि ऑरेंज असली केसरिया नहीं है, हरा एक अलग शेड है, और एम्बलम ऑफिशियल स्पेसिफिकेशन्स से अलग है। यह आउटफिट बेलारूसी डिजाइनर डारिया चेरमाशेंटसेवा के DASHA फैशन कॉउचर ने डिजाइन किया था। भारतीय फ्लैग कोड भारत सरकार का फ्लैग कोड ऑफ इंडिया, 2002 राष्ट्रीय ध्वज के इस्तेमाल से जुड़े नियम और प्रावधान बताता है। प्रिवेंशन ऑफ इंसल्ट्स टू नेशनल ऑनर एक्ट, 1971 के अनुसार, राष्ट्रीय ध्वज को किसी भी तरह की पोशाक या यूनिफॉर्म का हिस्सा नहीं बनाया जाना चाहिए और इसे कुशन, रूमाल, नैपकिन या किसी ड्रेस मटेरियल पर कढ़ाई या प्रिंट नहीं किया जाना चाहिए। कानून में यह भी कहा गया है कि राष्ट्रीय ध्वज को जानबूझकर जमीन, फर्श या पानी में छूने या घसीटने नहीं दिया जाना चाहिए।
इस्लामाबाद के अस्पताल में आग, 15 नवजातों की मौत:AC कंप्रेसर में विस्फोट से हादसा; वार्ड में 16 बच्चे थे, सिर्फ 1 बचा

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद के एक अस्पताल में बुधवार को आग लगने से 15 नवजात बच्चों की मौत हो गई। हादसा पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (पीआईएमएस) अस्पताल में स्त्री रोग वार्ड की नर्सरी में हुआ। अस्पताल अधिकारियों के मुताबिक, हादसे के वक्त नर्सरी में 16 नवजात बच्चे मौजूद थे। इनमें से सिर्फ एक बच्चे को बचाया जा सका। रेस्क्यू अधिकारियों के मुताबिक, नर्सरी के अंदर एयर कंडीशनर के कंप्रेसर में विस्फोट हुआ। इसके बाद आग लग गई और तेजी से पूरे वार्ड में फैल गई। आग की जानकारी मिलते ही रेस्क्यू टीमें मौके पर पहुंचीं और बचाव अभियान शुरू किया। अधिकारियों के मुताबिक, आग पर काबू पा लिया गया है। खबर लगातार अपडेट की जा रही है…
Abhay Verma Interview | Munjya Success & Working With Shah Rukh Khan

22 मिनट पहलेलेखक: आशीष तिवारी कॉपी लिंक ‘मुंज्या’ की सफलता के बाद अभय वर्मा के लिए शोहरत के साथ जिम्मेदारी भी बढ़ी है। वह कहते हैं कि सफलता ने उनकी भूख कम नहीं की, बल्कि सपनों को और बड़ा कर दिया। शाहरुख खान के साथ ‘किंग’ में काम करना उनके लिए सपने के सच होने जैसा रहा। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में अभय ने अपने करियर, ‘मुंज्या’ की सफलता, बड़े होते सपनों और शाहरुख खान से मिली सीख पर बात की। सवाल: ‘मुंज्या’ की सफलता के बाद क्या अब दबाव महसूस होता है? जवाब: दबाव नहीं कहूंगा, लेकिन जिम्मेदारी जरूर बढ़ गई है। सफलता के बाद उम्मीदें बढ़ जाती हैं और आपको अगली बार और मेहनत करनी पड़ती है। मुझे याद नहीं कि पिछली बार आठ घंटे कब सोया था। लेकिन मेरे सपने मुझे सोने नहीं देते। मैंने एक खूबसूरत बात सुनी थी कि अगर आपको पता हो कि आप फेल नहीं होंगे तो आप कितना बड़ा सपना देखेंगे? इसलिए अब मैंने अपने सपनों की कोई लिमिट नहीं रखी है। आराम बाद में होता रहेगा। अभी मैं अपने दर्शकों का प्यार और बड़ा करना चाहता हूं। ‘मुंज्या’ की सफलता ने अभय वर्मा के सपनों को और बड़ा कर दिया। सवाल: आज की तारीख में आपको सबसे ज्यादा खुशी किस चीज से मिलती है? जवाब: लोगों का प्यार मेरी सबसे बड़ी खुशी है। मैं इसे एक अमानत मानता हूं। दर्शक जब चाहें यह अमानत दे सकते हैं और जब चाहें अपने खजाने से और प्यार दे सकते हैं। मेरा काम है कि मैं इतनी मेहनत करूं कि यह प्यार बार-बार मिलता रहे। अभी तक जितना प्यार मिला है, उसने मेरी भूख कम नहीं की, बल्कि और बढ़ा दी है। सवाल: शाहरुख खान के साथ ‘किंग’ में काम करने का अनुभव कैसा रहा? जवाब: मैंने सपने देखना ही शाहरुख सर को देखकर शुरू किया है। लोग उन्हें अपना हीरो मानते हैं और उनके जैसा बनने का सपना देखते हैं। मेरे लिए तो वह उससे भी आगे हैं।मैंने उनसे पूछा कि शुरुआती दौर में फिल्में कैसे चुनते थे? उन्होंने कहा- ‘उन लोगों के साथ काम करो, जिनके साथ आपका मन लगे और जो आपको प्यार करते हों।’ उनके अंदर 35 साल के अनुभव के बाद भी सीखने और सिखाने की वही ऊर्जा है। वह सेट पर सैंडबैग उठाकर बताते हैं कि यह आपका मार्क है, ऐसे डायलॉग बोलकर देख सकते हो। जब वह शूट नहीं कर रहे होते तो एक कुर्सी लेकर बैठ जाते और देखते कि सिनेमा कैसे बन रहा है। उनके अंदर का पैशन और जज्बा देखकर मुझे समझ आया कि वह शाहरुख खान क्यों बने हैं। सवाल: पहली बार शाहरुख खान के साथ काम करने का फोन आया तो आपका रिएक्शन क्या था? जवाब: मेरे लिए दो राय की कोई बात नहीं थी। मैंने कहा कि मुझे दीवार पर मक्खी भी बना देंगे तो मैं मक्खी बन जाऊंगा, बस उनके साथ काम करने का मौका मिलना चाहिए। जिस दिन मेरा शूट नहीं होता था, तब भी मैं सेट पर पहुंच जाता था। अगर मेरा शूट जल्दी खत्म हो जाता और उनका शूट चल रहा होता तो मैं पूरा दिन सेट पर रहता। जब फोन आया तो पैसे की बात भी हुई। मैंने कहा कि मेरे लिए इससे ऊपर कोई बात नहीं है। आप प्रोफेशनल तौर पर जो ठीक समझें, करिए। मेरे लिए उनके साथ काम करना ही सबसे बड़ा मौका था। शाहरुख के साथ काम करना अभय वर्मा के लिए सपने से कम नहीं। सवाल: शाहरुख खान से पहली मुलाकात कैसी रही? जवाब: पहली बार मैं पोलैंड में उनसे मिला। हम करीब तीन घंटे साथ बैठे। सुहाना खान भी थीं। बाद में साथ डिनर किया। उनसे मिलने के बाद होटल जाते हुए मुझे एहसास हुआ कि यह वही इंसान हैं, जिनको देखकर मैंने सपने देखना सीखा था। लेकिन उनके साथ रहते हुए वह बिल्कुल महसूस नहीं होने देते कि वह इतने बड़े स्टार हैं। यही उनकी लेजेंडरी बात है कि 35 साल बाद भी वह इतने सरल हैं और सिर्फ अपनी कला से जुड़े रहते हैं। सवाल: ‘किंग’ का मैसेज आपके लिए कितना खास था? जवाब: उस मैसेज का स्क्रीनशॉट मैंने संभालकर रखा है। कभी-कभी वह मेरा वॉलपेपर भी बन जाता है। ‘मुंज्या’ को रिलीज हुए दो साल हो गए थे और बीच में कई तरह के विचार आते थे कि आगे क्या होगा, फिल्म कब रिलीज होगी। मैं रिजल्ट से ज्यादा काम को लेकर उत्साहित रहता हूं। लेकिन सफलता के बाद एक खूबसूरत जिम्मेदारी महसूस होती है कि अगली बार और मेहनत करनी है। _____________________________ अभय वर्मा का यह इंटरव्यू भी पढ़ें.. ‘आप एक्टिंग छोड़ो, एयरफोर्स जॉइन करो’:अभय वर्मा को मिला यह कॉम्प्लीमेंट, बोले- इससे बड़ा सम्मान मेरे लिए शायद कुछ हो ही नहीं सकता अभिनेता अभय वर्मा इन दिनों ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ में भारतीय वायुसेना के अधिकारी आरएस धालीवाल का किरदार निभाकर चर्चा में हैं। इस भूमिका ने उन्हें अभिनेता के तौर पर चुनौती दी और देश के अनसंग हीरोज को करीब से समझने का मौका दिया।पूरा इंटरव्यू पढ़ें.. दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
Babita Singh Reporting | Nimisha Sajayan Weight Gain & Story Statement

18 मिनट पहलेलेखक: वीरेंद्र मिश्र कॉपी लिंक फिल्म ‘बबीता सिंह रिपोर्टिंग’ एक महिला पुलिस अधिकारी की जिंदगी और संघर्षों पर आधारित है। दैनिक भास्कर से बातचीत में डायरेक्टर अंबिका पंडित और एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर सुदीप शर्मा ने फिल्म पर बात की। अंबिका ने बताया कि उन्हें बबीता का आवाज पहचानने का सफर खास लगा। वहीं सुदीप ने कहा कि क्राइम से ज्यादा महिला नजरिया और रोजमर्रा की जिंदगी की सच्चाई ने उन्हें आकर्षित किया। दोनों ने निमिषा सजयन के किरदार की तैयारी, शूटिंग के दौरान तालमेल, कानून की पढ़ाई और कहानी को बड़े पर्दे पर लाने की संभावनाओं पर बात की। अंबिका पंडित ने बताया कि बबीता के सफर में हर उस महिला की कहानी दिखी, जो जिम्मेदारियों के बीच अपनी आवाज तलाशती है। सवाल: कहानी पढ़कर ऐसा क्या खास लगा कि इसे आपको ही डायरेक्ट करना चाहिए? जवाब/अंबिका पंडित: मुझे बबीता का किरदार बहुत खूबसूरत लगा। वह पुलिस अधिकारी बनने की कोशिश कर रही है और इसी दौरान कई चीजों से जूझ रही है। उसकी घरेलू जिम्मेदारियां हैं। वह बहू और बेटी है और इन सबके बीच अच्छा काम करने की कोशिश कर रही है। लेकिन कई बार उसे छुट्टी लेकर घर जाना पड़ता है। बबीता का यह सफर, जहां से वह शुरू करती है और फिर अपनी आवाज सुनना और उसे पहचानना सीखती है, मुझे स्क्रिप्ट में सबसे ज्यादा पसंद आया। सवाल: बबीता के किरदार के लिए निमिषा सजयन को चुनने का फैसला कैसे हुआ? जवाब/अंबिका पंडित: यह फैसला मिलकर लिया गया था। हम सभी को निमिषा का काम बहुत पसंद था। वह बहुत अच्छी एक्टर हैं। उनके चेहरे और व्यवहार में वह ईमानदारी और सादगी है, जो हमें बबीता के किरदार में चाहिए थी। इसलिए हमें लगा कि निमिषा इस भूमिका के लिए सही रहेंगी। सवाल: इस फिल्म में क्राइम के अलावा ऐसी कौन-सी चीज थी, जिसने आपको सबसे ज्यादा आकर्षित किया? जवाब/सुदीप शर्मा: मेरे लिए फिल्म का महिला नजरिया सबसे ज्यादा आकर्षक था। यह बारीकी और ईमानदारी से लिखा गया है। इसमें बनावटीपन नहीं है। ऐसा लगता है कि यह कहानी किसी की असली जिंदगी से आई है। मुझे लगा कि पर्दे पर इसे देखकर बहुत से लोग इससे जुड़ पाएंगे, क्योंकि यह हमारे घरों और आसपास की जिंदगी की कहानी है। क्राइम तो बाद में आता है। अगर फिल्म में क्राइम नहीं भी होता और कहानी किसी दूसरी चीज के बारे में होती, तब भी यह उतनी ही दिलचस्प होती, क्योंकि इसका नजरिया बहुत अलग है। सवाल: आपके पिछले कामों में भी क्राइम के साथ समाज का अलग पहलू देखने को मिलता है। इस फिल्म में इसे अलग दिखाना कितना चुनौतीपूर्ण था? जवाब/सुदीप शर्मा: मेरे लिए यह चुनौती नहीं थी, क्योंकि अंबिका की राइटिंग पहले से ही अलग थी। स्क्रिप्ट पढ़कर मुझे यह सिर्फ एक और पुलिस या मर्डर मिस्ट्री नहीं लगी। इस फिल्म का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बबीता का सफर है। उसकी जिंदगी, रिश्ते और घर की कहानी ज्यादा अहम है। क्राइम यहां सिर्फ जरिया है, जिसके जरिए अलग कहानी कही गई है। मुझे यही बात सबसे ज्यादा स्मार्ट लगी। ‘बबीता सिंह रिपोर्टिंग’ 28 अगस्त 2026 को प्राइम वीडियो पर रिलीज होगी। सवाल:निमिषा को बबीता के किरदार में ढालना कितना चुनौतीपूर्ण रहा? जवाब/अंबिका पंडित: मेरे लिए यह आसान था। असली चुनौती निमिषा के लिए थी। उन्हें इस किरदार के लिए 14 किलो वजन बढ़ाना था। उन्होंने यह पूरी जर्नी तय की और मैंने इसे करीब से देखा। यह उनके लिए काफी चुनौतीपूर्ण था। हालांकि किरदार को उनसे निकालना आसान था, क्योंकि निमिषा बहुत ही भावनात्मक रूप से समझदार एक्टर हैं। इस दौरान हम दोनों अच्छे दोस्त भी बन गए। हम दोनों औरतें हैं, इसलिए इस कहानी को समझना मुश्किल नहीं था। यह हमें किसी और की कहानी नहीं, बल्कि अपनी ही जिंदगी का हिस्सा लगी। सवाल: शूटिंग के दौरान ऐसा कोई मौका आया, जब आपकी और अंबिका की राय अलग हो गई हो? जवाब/सुदीप शर्मा: ऐसा कुछ खास नहीं हुआ। जब आप खुद फिल्ममेकर हैं और किसी दूसरे फिल्ममेकर की फिल्म प्रोड्यूस कर रहे हैं, तो आपको अपना नजरिया पीछे रखना पड़ता है। इस प्रोजेक्ट में मेरा काम अंबिका को सपोर्ट करना था। उनके विजन के लिए जरूरी संसाधन या मदद देना मेरी जिम्मेदारी थी। हमारा पूरा प्रोसेस सहयोग वाला रहा। स्क्रिप्ट भी साफ थी, इसलिए राय के मतभेद की ज्यादा गुंजाइश नहीं थी। सवाल: शूटिंग के दौरान ऐसा कुछ बदला, जो स्क्रिप्ट में नहीं था और बाद में ज्यादा बेहतर लगा? जवाब/अंबिका पंडित: यह कहना मुश्किल है कि जो चीज बदली, वह स्क्रिप्ट से बेहतर थी या नहीं। जब कोई फिल्ममेकर स्क्रिप्ट पर काम करता है तो उसकी अपनी व्याख्या होती है। अंबिका ने लिखा, मैंने फिल्म बनाई और सुदीप शर्मा एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर हैं। हम तीनों की सोच अलग है। हमारी संवेदनाएं एक-दूसरे से मिलती हैं, इसलिए हम साथ काम कर रहे हैं, लेकिन यह जरूरी नहीं कि हम तीनों फिल्म बनाएं तो बिल्कुल एक जैसी फिल्म बने। इसलिए स्क्रिप्ट और स्क्रीन पर दिखाई देने वाली चीज में थोड़ा फर्क आना स्वाभाविक है। सवाल: आपकी लॉ की पढ़ाई ने फिल्ममेकिंग में किस तरह मदद की? जवाब/अंबिका पंडित: लॉ की पढ़ाई मेरी जिंदगी में हमेशा काम आती है। फिल्ममेकिंग में भी इसका फायदा मिलता है। कानून ने मुझे सही और गलत के साथ-साथ न्याय और अन्याय का फर्क समझाया। लॉ पढ़ने से दुनिया और समाज को देखने का नजरिया मिला। मेरे लिए फिल्ममेकर के तौर पर नजरिया सबसे जरूरी चीज है। लॉ में भी इंसानों के बीच होने वाले संघर्ष को समझना पड़ता है और फिल्ममेकिंग में भी इंसानों और उनके संघर्षों को समझना जरूरी है। सुदीप शर्मा ने कहा कि क्राइम कहानी का सिर्फ जरिया है, असली कहानी बबीता की जिंदगी और उसका नजरिया है। सवाल: क्राइम पर कई फिल्में और सीरीज बन चुकी हैं। इस फिल्म को अलग दिखाना कितना चुनौतीपूर्ण था? जवाब/सुदीप शर्मा: हमारे लिए यह सवाल ही नहीं था कि इसे बाकी क्राइम कहानियों से कैसे अलग करें, क्योंकि अंबिका की कहानी पहले से अलग थी। यह सामान्य मर्डर मिस्ट्री नहीं है। असल कहानी बबीता के सफर और जिंदगी की है। क्राइम सिर्फ माध्यम है, जिसके जरिए उसकी कहानी कही जाती है। यही इस फिल्म की खासियत है। सवाल: आप
Amazon Instamart Suspended for Dhatura Sale

Hindi News Career Amazon Instamart Suspended For Dhatura Sale | Slimane Mansour Death News 21 मिनट पहले कॉपी लिंक आज के प्रमुख करेंट अफेयर्स, जो सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स के लिए जरूरी हैं- नेशनल (INTERNATIONAL) 1. अमेजन, इंस्टामार्ट और बिगबास्केट के फूड लाइसेंस सस्पेन्ड 25 अगस्त को कर्नाटक के खाद्य सुरक्षा विभाग ने ई-कॉमर्स दिग्गज कंपनी अमेजन, इंस्टामार्ट और बिगबास्केट के फूड लाइसेंस सस्पेन्ड किये। रिपोर्ट के मुताबिक, इन ऑनलाइन प्लेटफॉर्मों पर बहुत ज्यादा जहरीले और नशीले पौधे धतूरा को खाद्य सामग्री के तौर पर बेचा जा रहा है। धतूरा एक पौधा होता है, इसके बीज और पत्तियां मानव स्वास्थ्य के लिए अत्यंत घातक और जहरीली होती हैं, जिससे गंभीर मानसिक बीमारी या मृत्यु भी हो सकती है डिपार्टमेंट ने जांच में पाया कि सुरक्षा जांच के बिना इन उत्पादों को खाद्य श्रेणी में लिस्ट किया गया था। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 भारत सरकार का एक महत्वपूर्ण कानून है। ये देश के नागरिकों को सस्ती दरों पर गुणवत्तापूर्ण खाद्यान्न उपलब्ध कराकर खाद्य और पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करता है। अमेजन (Amazon) अमेजन दुनिया की प्रमुख टेक्नोलॉजी और ई-कॉमर्स कंपनियों में से एक है। इसकी शुरुआत जेफ बेजोस ने 1994 में एक ऑनलाइन बुकस्टोर के तौर पर की थी। भारत में अमेजन 5 जून 2013 को लॉन्च हुआ था और आज अमेजन ऑनलाइन शॉपिंग के साथ-साथ क्लाउड क्लाउड कम्प्यूटिंग, (AWS), AI, प्राइम वीडियो डिजिटल पेमेंट और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में काम करती है। इंस्टामार्ट (Instamart) इंस्टामार्ट एक क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म है, जिसके जरिए लोग रोजमर्रा की जरूरत का सामान जैसे ग्रॉसरी, फल-सब्जियां, डेयरी, स्नैक्स, पर्सनल केयर घर पर मंगा सकते हैं। बिगबास्केट (BigBasket) बिगबास्केट भारत की प्रमुख ऑनलाइन ग्रॉसरी और क्विक कॉमर्स कंपनी है। इसे 2011 में शुरू किया गया था और 2021 में Tata डिजिटल ने इसमें हिस्सेदारी खरीदी थी। सरकार ने इन कंपनियों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत दंडात्मक कार्रवाई भी शुरू की है। 2. DRDO सभी मिसाइल सिस्टम डिफेंस इंडस्ट्री को सौंपेगा 25 अगस्त को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने देश में ही उत्पादन के लिए DRDO द्वारा विकसित सभी पारंपरिक मिसाइल सिस्टम की टेक्नोलॉजी को भारतीय रक्षा उद्योग को सौंपने की मंजूरी दी। इस फैसले से ऑपरेशनल क्षमता बढ़ेगी , आयात पर निर्भरता कम होगी और घरेलू स्तर पर वैल्यू एडिशन को बढ़ावा मिलेगा। अब जरूरी योग्यताओं, सर्टिफिकेशन और रेगुलेटरी जरूरतों के मुताबिक मिसाइल का देश में ही प्रोडक्शन हो सकेगा। इससे घरेलू मैन्युफैक्चरिंग क्षमताओं को बढ़ावा मिलेगा, डिफेंस टेक्नोलॉजी से सप्लाई चेन में भारतीय MSME और अन्य टेक्नोलॉजी पार्टनर की भागीदारी का भी मौका मिलेगा। इससे मिसाइल सिस्टम के डेवलपमेंट और औद्योगिक उत्पादन दोनों हो सकेंगे। 3. गेहूं आधारित सभी उत्पादों के निर्यात से प्रतिबंध हटा 24 अगस्त को केंद्र सरकार ने गेहूं और उससे बने उत्पादों के निर्यात पर लगा प्रतिबंध तत्काल प्रभाव से हटा दिया है। विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने निर्यात नीति में संशोधन किया है और अब गेहूं की निर्यात नीति ‘प्रतिबंधित’ से से ‘फ्री’ की कैटेगरी में आ गया है। अब आटा, मैदा, सूजी, रवा, होलमील आटा और अन्य संबंधित गेहूं उत्पादों के निर्यात की भी अनुमति मिल गई है। गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध पहली बार मई 2022 में घरेलू कीमतों और खाद्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लगाया गया था। इस फैसले से किसानों को बेहतर कीमत, निर्यातकों को विदेशी बाजारों तक पहुंच और भारत के कृषि निर्यात को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इस फैसले से भारतीय किसानों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बेहतर दाम मिल सकेगा और कृषि निर्यात बढ़ सकेगा। भारतीय गेहूं और आटे की दुनिया भर में काफी मांग है और भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गेहूं उत्पादक देश है। गेहूं रबी (Rabi) मौसम की मुख्य फसल है। निधन (DEATH) 4. फिलिस्तीनी विजुअल आर्ट स्लिमन मंसूर का निधन 24अगस्त को फिलिस्तीनी विजुअल आर्ट के जाने-माने कलाकार स्लिमन मंसूर का 79 साल की उम्र में निधन हो गया। मंसूर पांच दशकों से ज्यादा समय तक, फिलिस्तीनी पहचान, इतिहास, विस्थापन और जमीन से जुड़ाव को दिखाने के लिए विजुअल आर्ट का इस्तेमाल किया। मंसूर की पेंटिंग्स में अक्सर जैतून के पेड़, ग्रामीण नजारे, पारंपरिक फिलिस्तीनी कपड़े और कढ़ाई दिखाई देती थी। मंसूर की सबसे मशहूर पेंटिंग में ‘जमाल अल-महामेल’ (बोझ ढोने वाला ऊंट)हैं, जिसे उन्होंने 1973 में बनाया था। इस पेंटिंग में एक बुज़ुर्ग फिलिस्तीनी मजदूर को अपनी पीठ पर यरूशलेम उठाए हुए दिखाया गया है और ये फिलिस्तीनी कला की सबसे पहचानी जाने वाली तस्वीरों में से एक है। मंसूर की इस पेंटिंग को इतिहास के बोझ और फिलिस्तीनियों व उनकी मातृभूमि के बीच अटूट रिश्ते के प्रतीक के तौर पर देखा जाता है। मंसूर ने पहले इंतिफादा (फिलिस्तीनी विद्रोह) के दौरान फिलिस्तीनी कला को आगे बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभाई। मंसूर ने 1987 में,’न्यू विजन्स कलेक्टिव’ की सह-स्थापना की। यह फिलिस्तीनी कलाकारों का एक ग्रुप था, जिसने इजराइली आर्ट् सामग्री का बहिष्कार किया और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध चीजों , जैसे मिट्टी, मेहंदी और क्ले (चिकनी मिट्टी) के साथ प्रयोग किए। मंसूर फिलिस्तीनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़े विज़ुअल आर्ट को बनाने के लिए मशहूर थे। स्पोर्ट्स (SPORTS) 5. एन. श्रीराम बालाजी और अनिरुद्ध चंद्रशेखर ने टेनिस ओपन डबल्स जीता 25 अगस्त को भारत के एन. श्रीराम बालाजी और अनिरुद्ध चंद्रशेखर ने मैक्सिको में खेले गए कानकुन कंट्री टेनिस ओपन का डबल्स खिताब जीत लिया है। भारतीय जोड़ी ने फाइनल में मैक्सिको के मिगुएल एंजेल रेयेस-वरेला और बेलारूस के इवान ल्युटारेविच को 6-3, 7-6(4) से हराया। इस जीत के साथ बालाजी और अनिरुद्ध को 125-125 एसोसिएशन ऑफ टेनिस प्रोफेशनल्स रैंकिंग पॉइंट्स और 9,900 डॉलर (करीब 9.5 लाख रुपए) की इनामी राशि मिली। कानकुन की जीत अनिरुद्ध चंद्रशेखर के लिए चैलेंजर सर्किट का 11वां खिताब है। यह 2026 में उनका दूसरा खिताब भी है। इस साल इससे पहले अनिरुद्ध ने जापान के ताकेरू युजुकी के साथ बुसान ATP चैलेंजर 125 का खिताब जीता था। 6. पोर्श की IT और कंसल्टिंग यूनिट ‘MHP’ को TCS खरीदेगी 24 अगस्त को भारत की सबसे बड़ी IT कंपनी TCS जर्मन कंपनी पोर्श की IT और कंसल्टिंग यूनिट ‘MHP’ को 320 मिलियन यूरो यानी 3.5 हजार करोड़ रुपए में खरीदेगी। इस अधिग्रहण के साथ ही दोनों कंपनियों के बीच 1.25
कंगना से जुड़े सवाल पर भड़कीं तापसी पन्नू:मीडिया से बोलीं- आप सवाल पूछना बंद करेंगे, तभी विवाद खत्म होगा; कंगना ने 'सस्ती कॉपी' कहा था

बॉलीवुड एक्ट्रेस तापसी पन्नू कंगना रनोट से जुड़ा सवाल पूछे जाने पर भड़क गईं। हाल ही में कंगना ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए तापसी पर उनकी परवरिश और माता-पिता का मजाक उड़ाने का आरोप लगाया था। इस पर मीडिया से बातचीत के दौरान तापसी ने कहा कि जब लोग और मीडिया उनसे इस मुद्दे पर सवाल पूछना बंद कर देंगे, तब यह विवाद अपने आप खत्म हो जाएगा। तापसी अपनी अपकमिंग फिल्म ‘गांधारी’ के प्रमोशन के सिलसिले में बातचीत कर रही थीं। तापसी बोलीं- आप लोग विवाद खत्म नहीं होने देते जब तापसी से कंगना के आरोपों को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा, आप इस बात को खत्म क्यों नहीं होने देते? जब कोई हम दोनों से यह सवाल पूछना बंद कर देगा, तो यह मुद्दा भी खत्म हो जाएगा। आप सब लोगों को यह सब देखने में मजा आ रहा है, इसलिए वही सवाल पूछ रहे हैं। ऐसे सवाल पूछना अगर आप बंद कर दें, तो यह बात कब की खत्म हो जाती। कंगना ने सस्ती कॉपी कहा, फिर डिलीट की स्टोरी इससे पहले कंगना रनौत ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर दो स्टोरीज शेयर की थीं, जिन्हें बाद में उन्होंने डिलीट कर दिया था। उन्होंने लिखा, ‘एक सस्ती कॉपी अपनी आने वाली B-ग्रेड फिल्म को लेकर भी हमेशा की तरह मीडिया में सिर्फ हेडलाइन बनाने की कोशिश कर रही है, लेकिन आज उन्होंने सारी हदें पार कर दीं। उन्होंने मेरी परवरिश और मेरे माता-पिता का बेहद बेशर्मी से मजाक उड़ाया।’ एक्ट्रेस ने आगे लिखा, ‘मुझे लगता है कि सभी माता-पिता अपने बच्चों के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ करते हैं। मैं कभी किसी बहस में माता-पिता को नहीं लाती, लेकिन आज मैं उनके माता-पिता से भी पूछना चाहती हूं कि वे मेरे माता-पिता की तरह कोई ओरिजिनल इंसान क्यों नहीं पैदा कर सके? इतनी सस्ती कॉपी क्यों? आपकी कोशिशों के लिए मुझे अफसोस है।’ कंगना ने कहा- वो प्रतिष्ठित परिवार से आती हैं इसके बाद कंगना ने तापसी की टिप्पणी वाली एक खबर शेयर की और कहा कि कई लोग उनकी परवरिश और माता-पिता पर सवाल उठाते हैं। कंगना ने बताया कि उनका परिवार एक प्रतिष्ठित राजपूत जमींदार परिवार से आता है और उनके माता-पिता पढ़े-लिखे हैं। कंगना ने कहा कि यह उनकी निजी पसंद थी कि वह अपने करियर की शुरुआत बिल्कुल शुरुआत से करें। इसके लिए उनके माता-पिता पर सवाल क्यों उठाए जाते हैं? तापसी-कंगना का विवाद कई साल पुराना अभिनेत्री तापसी पन्नू और कंगना रनोट के बीच विवाद काफी पुराना है। विवाद की शुरुआत 2018-19 के आसपास हुई। तापसी ने फिल्म ‘मनमर्जियां’ के प्रमोशन के दौरान कहा था कि कंगना को अपनी बात कहने के लिए फिल्टर की जरूरत है। इसके बाद 2019 में तापसी ने कंगना की फिल्म ‘जजमेंटल है क्या’ के ट्रेलर की तारीफ की, लेकिन कंगना का नाम नहीं लिया। इस पर कंगना की बहन रंगोली चंदेल ने तापसी को ‘सस्ती कॉपी’ कह दिया था। इसके बाद 2020 में सुशांत सिंह राजपूत के निधन के बाद बॉलीवुड में नेपोटिज्म को लेकर बहस तेज हुई। इसी दौरान कंगना ने तापसी और स्वरा भास्कर को ‘बी-ग्रेड एक्ट्रेस’ कहा था। कंगना ने कहा था कि दोनों आउटसाइडर होने के बावजूद नेपोटिज्म का समर्थन करती हैं। तापसी ने इस पर कहा था कि आउटसाइडर्स को आपस में नहीं लड़ना चाहिए। ये खबर भी पढ़ें ‘भाई को बिकिनी में राखी क्यों बांधेंगी?’:कृति सेनन के रक्षाबंधन विज्ञापन में रिवीलिंग ड्रेस के बाद कंगना रनोट ने उठाए सवाल कृति सेनन हाल ही में रक्षाबंधन के लिए बने एक ज्वेलरी ब्रांड के विज्ञापन में नजर आई थीं। विज्ञापन में उन्होंने इंडो-वेस्टर्न कपड़े पहने थे, जिसमें ब्रालेट जैसा ब्लाउज, केप और ड्रेप्ड स्कर्ट शामिल थी। पूरी खबर पढ़ें
कंगना से जुड़े सवाल पर भड़कीं तापसी पन्नू:मीडिया से बोलीं- आप सवाल पूछना बंद करेंगे, तभी विवाद खत्म होगा; कंगना ने 'सस्ती कॉपी' कहा था

बॉलीवुड एक्ट्रेस तापसी पन्नू कंगना रनोट से जुड़ा सवाल पूछे जाने पर भड़क गईं। हाल ही में कंगना ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए तापसी पर उनकी परवरिश और माता-पिता का मजाक उड़ाने का आरोप लगाया था। इस पर मीडिया से बातचीत के दौरान तापसी ने कहा कि जब लोग और मीडिया उनसे इस मुद्दे पर सवाल पूछना बंद कर देंगे, तब यह विवाद अपने आप खत्म हो जाएगा। तापसी अपनी अपकमिंग फिल्म ‘गांधारी’ के प्रमोशन के सिलसिले में बातचीत कर रही थीं। तापसी बोलीं- आप लोग विवाद खत्म नहीं होने देते जब तापसी से कंगना के आरोपों को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा, आप इस बात को खत्म क्यों नहीं होने देते? जब कोई हम दोनों से यह सवाल पूछना बंद कर देगा, तो यह मुद्दा भी खत्म हो जाएगा। आप सब लोगों को यह सब देखने में मजा आ रहा है, इसलिए वही सवाल पूछ रहे हैं। ऐसे सवाल पूछना अगर आप बंद कर दें, तो यह बात कब की खत्म हो जाती। कंगना ने सस्ती कॉपी कहा, फिर डिलीट की स्टोरी इससे पहले कंगना रनौत ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर दो स्टोरीज शेयर की थीं, जिन्हें बाद में उन्होंने डिलीट कर दिया था। उन्होंने लिखा, ‘एक सस्ती कॉपी अपनी आने वाली B-ग्रेड फिल्म को लेकर भी हमेशा की तरह मीडिया में सिर्फ हेडलाइन बनाने की कोशिश कर रही है, लेकिन आज उन्होंने सारी हदें पार कर दीं। उन्होंने मेरी परवरिश और मेरे माता-पिता का बेहद बेशर्मी से मजाक उड़ाया।’ एक्ट्रेस ने आगे लिखा, ‘मुझे लगता है कि सभी माता-पिता अपने बच्चों के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ करते हैं। मैं कभी किसी बहस में माता-पिता को नहीं लाती, लेकिन आज मैं उनके माता-पिता से भी पूछना चाहती हूं कि वे मेरे माता-पिता की तरह कोई ओरिजिनल इंसान क्यों नहीं पैदा कर सके? इतनी सस्ती कॉपी क्यों? आपकी कोशिशों के लिए मुझे अफसोस है।’ कंगना ने कहा- वो प्रतिष्ठित परिवार से आती हैं इसके बाद कंगना ने तापसी की टिप्पणी वाली एक खबर शेयर की और कहा कि कई लोग उनकी परवरिश और माता-पिता पर सवाल उठाते हैं। कंगना ने बताया कि उनका परिवार एक प्रतिष्ठित राजपूत जमींदार परिवार से आता है और उनके माता-पिता पढ़े-लिखे हैं। कंगना ने कहा कि यह उनकी निजी पसंद थी कि वह अपने करियर की शुरुआत बिल्कुल शुरुआत से करें। इसके लिए उनके माता-पिता पर सवाल क्यों उठाए जाते हैं? तापसी-कंगना का विवाद कई साल पुराना अभिनेत्री तापसी पन्नू और कंगना रनोट के बीच विवाद काफी पुराना है। विवाद की शुरुआत 2018-19 के आसपास हुई। तापसी ने फिल्म ‘मनमर्जियां’ के प्रमोशन के दौरान कहा था कि कंगना को अपनी बात कहने के लिए फिल्टर की जरूरत है। इसके बाद 2019 में तापसी ने कंगना की फिल्म ‘जजमेंटल है क्या’ के ट्रेलर की तारीफ की, लेकिन कंगना का नाम नहीं लिया। इस पर कंगना की बहन रंगोली चंदेल ने तापसी को ‘सस्ती कॉपी’ कह दिया था। इसके बाद 2020 में सुशांत सिंह राजपूत के निधन के बाद बॉलीवुड में नेपोटिज्म को लेकर बहस तेज हुई। इसी दौरान कंगना ने तापसी और स्वरा भास्कर को ‘बी-ग्रेड एक्ट्रेस’ कहा था। कंगना ने कहा था कि दोनों आउटसाइडर होने के बावजूद नेपोटिज्म का समर्थन करती हैं। तापसी ने इस पर कहा था कि आउटसाइडर्स को आपस में नहीं लड़ना चाहिए। ये खबर भी पढ़ें ‘भाई को बिकिनी में राखी क्यों बांधेंगी?’:कृति सेनन के रक्षाबंधन विज्ञापन में रिवीलिंग ड्रेस के बाद कंगना रनोट ने उठाए सवाल कृति सेनन हाल ही में रक्षाबंधन के लिए बने एक ज्वेलरी ब्रांड के विज्ञापन में नजर आई थीं। विज्ञापन में उन्होंने इंडो-वेस्टर्न कपड़े पहने थे, जिसमें ब्रालेट जैसा ब्लाउज, केप और ड्रेप्ड स्कर्ट शामिल थी। पूरी खबर पढ़ें
Babita Singh Reporting | Nimisha Sajayan Weight Gain & Story Statement

2 घंटे पहलेलेखक: वीरेंद्र मिश्र कॉपी लिंक फिल्म ‘बबीता सिंह रिपोर्टिंग’ एक महिला पुलिस अधिकारी की जिंदगी और संघर्षों पर आधारित है। दैनिक भास्कर से बातचीत में डायरेक्टर अंबिका पंडित और एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर सुदीप शर्मा ने फिल्म पर बात की। अंबिका ने बताया कि उन्हें बबीता का आवाज पहचानने का सफर खास लगा। वहीं सुदीप ने कहा कि क्राइम से ज्यादा महिला नजरिया और रोजमर्रा की जिंदगी की सच्चाई ने उन्हें आकर्षित किया। दोनों ने निमिषा सजयन के किरदार की तैयारी, शूटिंग के दौरान तालमेल, कानून की पढ़ाई और कहानी को बड़े पर्दे पर लाने की संभावनाओं पर बात की। अंबिका पंडित ने बताया कि बबीता के सफर में हर उस महिला की कहानी दिखी, जो जिम्मेदारियों के बीच अपनी आवाज तलाशती है। सवाल: कहानी पढ़कर ऐसा क्या खास लगा कि इसे आपको ही डायरेक्ट करना चाहिए? जवाब/अंबिका पंडित: मुझे बबीता का किरदार बहुत खूबसूरत लगा। वह पुलिस अधिकारी बनने की कोशिश कर रही है और इसी दौरान कई चीजों से जूझ रही है। उसकी घरेलू जिम्मेदारियां हैं। वह बहू और बेटी है और इन सबके बीच अच्छा काम करने की कोशिश कर रही है। लेकिन कई बार उसे छुट्टी लेकर घर जाना पड़ता है। बबीता का यह सफर, जहां से वह शुरू करती है और फिर अपनी आवाज सुनना और उसे पहचानना सीखती है, मुझे स्क्रिप्ट में सबसे ज्यादा पसंद आया। सवाल: बबीता के किरदार के लिए निमिषा सजयन को चुनने का फैसला कैसे हुआ? जवाब/अंबिका पंडित: यह फैसला मिलकर लिया गया था। हम सभी को निमिषा का काम बहुत पसंद था। वह बहुत अच्छी एक्टर हैं। उनके चेहरे और व्यवहार में वह ईमानदारी और सादगी है, जो हमें बबीता के किरदार में चाहिए थी। इसलिए हमें लगा कि निमिषा इस भूमिका के लिए सही रहेंगी। सवाल: इस फिल्म में क्राइम के अलावा ऐसी कौन-सी चीज थी, जिसने आपको सबसे ज्यादा आकर्षित किया? जवाब/सुदीप शर्मा: मेरे लिए फिल्म का महिला नजरिया सबसे ज्यादा आकर्षक था। यह बारीकी और ईमानदारी से लिखा गया है। इसमें बनावटीपन नहीं है। ऐसा लगता है कि यह कहानी किसी की असली जिंदगी से आई है। मुझे लगा कि पर्दे पर इसे देखकर बहुत से लोग इससे जुड़ पाएंगे, क्योंकि यह हमारे घरों और आसपास की जिंदगी की कहानी है। क्राइम तो बाद में आता है। अगर फिल्म में क्राइम नहीं भी होता और कहानी किसी दूसरी चीज के बारे में होती, तब भी यह उतनी ही दिलचस्प होती, क्योंकि इसका नजरिया बहुत अलग है। सवाल: आपके पिछले कामों में भी क्राइम के साथ समाज का अलग पहलू देखने को मिलता है। इस फिल्म में इसे अलग दिखाना कितना चुनौतीपूर्ण था? जवाब/सुदीप शर्मा: मेरे लिए यह चुनौती नहीं थी, क्योंकि अंबिका की राइटिंग पहले से ही अलग थी। स्क्रिप्ट पढ़कर मुझे यह सिर्फ एक और पुलिस या मर्डर मिस्ट्री नहीं लगी। इस फिल्म का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बबीता का सफर है। उसकी जिंदगी, रिश्ते और घर की कहानी ज्यादा अहम है। क्राइम यहां सिर्फ जरिया है, जिसके जरिए अलग कहानी कही गई है। मुझे यही बात सबसे ज्यादा स्मार्ट लगी। ‘बबीता सिंह रिपोर्टिंग’ 28 अगस्त 2026 को प्राइम वीडियो पर रिलीज होगी। सवाल:निमिषा को बबीता के किरदार में ढालना कितना चुनौतीपूर्ण रहा? जवाब/अंबिका पंडित: मेरे लिए यह आसान था। असली चुनौती निमिषा के लिए थी। उन्हें इस किरदार के लिए 14 किलो वजन बढ़ाना था। उन्होंने यह पूरी जर्नी तय की और मैंने इसे करीब से देखा। यह उनके लिए काफी चुनौतीपूर्ण था। हालांकि किरदार को उनसे निकालना आसान था, क्योंकि निमिषा बहुत ही भावनात्मक रूप से समझदार एक्टर हैं। इस दौरान हम दोनों अच्छे दोस्त भी बन गए। हम दोनों औरतें हैं, इसलिए इस कहानी को समझना मुश्किल नहीं था। यह हमें किसी और की कहानी नहीं, बल्कि अपनी ही जिंदगी का हिस्सा लगी। सवाल: शूटिंग के दौरान ऐसा कोई मौका आया, जब आपकी और अंबिका की राय अलग हो गई हो? जवाब/सुदीप शर्मा: ऐसा कुछ खास नहीं हुआ। जब आप खुद फिल्ममेकर हैं और किसी दूसरे फिल्ममेकर की फिल्म प्रोड्यूस कर रहे हैं, तो आपको अपना नजरिया पीछे रखना पड़ता है। इस प्रोजेक्ट में मेरा काम अंबिका को सपोर्ट करना था। उनके विजन के लिए जरूरी संसाधन या मदद देना मेरी जिम्मेदारी थी। हमारा पूरा प्रोसेस सहयोग वाला रहा। स्क्रिप्ट भी साफ थी, इसलिए राय के मतभेद की ज्यादा गुंजाइश नहीं थी। सवाल: शूटिंग के दौरान ऐसा कुछ बदला, जो स्क्रिप्ट में नहीं था और बाद में ज्यादा बेहतर लगा? जवाब/अंबिका पंडित: यह कहना मुश्किल है कि जो चीज बदली, वह स्क्रिप्ट से बेहतर थी या नहीं। जब कोई फिल्ममेकर स्क्रिप्ट पर काम करता है तो उसकी अपनी व्याख्या होती है। अंबिका ने लिखा, मैंने फिल्म बनाई और सुदीप शर्मा एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर हैं। हम तीनों की सोच अलग है। हमारी संवेदनाएं एक-दूसरे से मिलती हैं, इसलिए हम साथ काम कर रहे हैं, लेकिन यह जरूरी नहीं कि हम तीनों फिल्म बनाएं तो बिल्कुल एक जैसी फिल्म बने। इसलिए स्क्रिप्ट और स्क्रीन पर दिखाई देने वाली चीज में थोड़ा फर्क आना स्वाभाविक है। सवाल: आपकी लॉ की पढ़ाई ने फिल्ममेकिंग में किस तरह मदद की? जवाब/अंबिका पंडित: लॉ की पढ़ाई मेरी जिंदगी में हमेशा काम आती है। फिल्ममेकिंग में भी इसका फायदा मिलता है। कानून ने मुझे सही और गलत के साथ-साथ न्याय और अन्याय का फर्क समझाया। लॉ पढ़ने से दुनिया और समाज को देखने का नजरिया मिला। मेरे लिए फिल्ममेकर के तौर पर नजरिया सबसे जरूरी चीज है। लॉ में भी इंसानों के बीच होने वाले संघर्ष को समझना पड़ता है और फिल्ममेकिंग में भी इंसानों और उनके संघर्षों को समझना जरूरी है। सुदीप शर्मा ने कहा कि क्राइम कहानी का सिर्फ जरिया है, असली कहानी बबीता की जिंदगी और उसका नजरिया है। सवाल: क्राइम पर कई फिल्में और सीरीज बन चुकी हैं। इस फिल्म को अलग दिखाना कितना चुनौतीपूर्ण था? जवाब/सुदीप शर्मा: हमारे लिए यह सवाल ही नहीं था कि इसे बाकी क्राइम कहानियों से कैसे अलग करें, क्योंकि अंबिका की कहानी पहले से अलग थी। यह सामान्य मर्डर मिस्ट्री नहीं है। असल कहानी बबीता के सफर और जिंदगी की है। क्राइम सिर्फ माध्यम है, जिसके जरिए उसकी कहानी कही जाती है। यही इस फिल्म की खासियत है। सवाल: आप









