Saturday, 10 Oct 2026 | 06:36 AM

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Amitabh Bachchan Pays Tribute To Nana Patekar

Amitabh Bachchan Pays Tribute To Nana Patekar

8 मिनट पहले कॉपी लिंक अमिताभ बच्चन ने शुक्रवार को दिवंगत अभिनेता नाना पाटेकर को याद किया। उन्होंने इंस्टाग्राम पर नाना के पांच पुराने वीडियो शेयर किए। इन वीडियो में दोनों की मुलाकातों, फिल्मों और बातचीत की झलक देखने को मिली। नाना पाटेकर का गुरुवार सुबह गोवा स्थित उनके घर पर कार्डियक अरेस्ट के बाद निधन हो गया था। पहले वीडियो में नाना एक इंटरव्यू के दौरान ‘कौन बनेगा करोड़पति’ में अमिताभ बच्चन के साथ शूटिंग का अनुभव बताते नजर आए। उन्होंने अमिताभ की तारीफ करते हुए कहा कि उनके आने से फिल्मों का अंदाज बदल गया था। वह हीरो के साथ कॉमेडियन भी बनते थे और डांस भी करते थे। कभी-कभी महिला का किरदार भी निभाते थे। नाना ने मजाक में कहा कि इससे कई लोगों का काम कम हो गया। दूसरे वीडियो में अमिताभ और नाना की फिल्म ‘कोहराम’ के मुहूर्त की झलक दिखाई गई। साल 1999 में रिलीज हुई फिल्म ‘कोहराम’ में अमिताभ बच्चन और नाना पाटेकर के अलावा जैकी श्रॉफ भी थे। तीसरे वीडियो में दोनों के बीच मजेदार बातचीत सुनाई दी। नाना ने कहा, ‘भगवान का दिया हुआ सब कुछ है, बंगला है, गाड़ी है, तुम्हारे पास क्या है?’ इस पर अमिताभ ने जवाब दिया, ‘आज तो मेरे पास नाना पाटेकर है।’ इसके बाद नाना ने मजाक में कहा कि अमिताभ अगले 25 साल तक केबीसी संभाल लें, फिर वह शो की जिम्मेदारी संभालेंगे। चौथे वीडियो में नाना ने अमिताभ के लिखे एक खत का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि फिल्म ‘दि अटैक्स ऑफ 26/11’ देखने के बाद अमिताभ ने उन्हें पत्र लिखकर उनके काम की तारीफ की थी। नाना ने कहा कि वह खत आज भी उनके पास संभालकर रखा है। 26/11 के मुंबई आतंकी हमलों पर आधारित फिल्म ‘द अटैक्स ऑफ 26/11’ में नाना पाटेकर संयुक्त पुलिस आयुक्त राकेश मारिया के रोल में थे। पांचवें वीडियो में नाना पाटेकर फिल्म ‘हम दोनों’ के मशहूर गाने ‘मैं जिंदगी का साथ निभाता चला गया’ की पंक्तियां गाते नजर आए। उन्होंने इस गाने को अपनी जिंदगी का सार बताया। अमिताभ ने उनकी तारीफ की और उनसे अपने अंदाज में गाना सुनाने की गुजारिश की। अमिताभ बच्चन ने KBC के मंच से भी नाना को याद किया ‘कौन बनेगा करोड़पति 18’ के मंच से भी अमिताभ ने नाना पाटेकर को याद किया। उन्होंने दुख जताते हुए कहा कि नाना पाटेकर का अचानक निधन हो गया। उनके जाने से फिल्म इंडस्ट्री और उन्हें जानने वाले लोग दुखी हैं। अमिताभ ने नाना को एक शानदार कलाकार, अच्छा दोस्त और समाज सेवा करने वाला इंसान बताया। उन्होंने कहा कि नाना अपनी बेबाकी, सादगी और सच बोलने के अंदाज के लिए जाने जाते थे। एक्टर ने आगे कहा कि कुछ लोग दुनिया से चले जाते हैं, लेकिन उनकी बातें और सीख हमेशा हमारे साथ रहती हैं। नाना भी ऐसे ही लोगों में से एक थे। उन्होंने नाना की कला को सलाम करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी। उन्होंने नाना के समाज सेवा के कामों को भी याद किया। उन्होंने बताया कि नाना एक बार KBC के खास कार्यक्रम में मेहमान बनकर आए थे। उस दौरान उन्होंने जीती हुई रकम समाज सेवा के लिए दे दी थी। नाना ने महाराष्ट्र के उन गांवों के किसानों की मदद की थी, जहां बारिश की कमी के कारण परेशानी थी। अमिताभ को नाना के साथ काम करने में झिझक थी अमिताभ बच्चन और नाना पाटेकर ने केवल एक ही फिल्म ‘कोहराम’ में साथ काम किया। नाना पाटेकर के निधन के बाद दैनिक भास्कर से बातचीत में ‘कोहराम’ के डायरेक्टर मेहुल कुमार ने बताया कि फिल्म की शूटिंग के दौरान अमिताभ बच्चन को शुरुआत में नाना के साथ काम करने में थोड़ा संकोच था, लेकिन बाद में दोनों की अच्छी दोस्ती हो गई। ………… यह खबर भी पढ़ें… रेपिस्ट के रोल पर नाना ने डायरेक्टर को गालियां दीं:’परिंदा’ के क्लाईमैक्स में आग से झुलसे, आर्मी जॉइन करने के लिए रक्षामंत्री को फोन किया नाना पाटेकर ने अपने करीब पांच दशक के करियर में कई यादगार किरदार निभाए थे। नाना अपने बेबाक और गुस्सैल अंदाज के लिए भी जाने जाते थे। एक बार डायरेक्टर रवि चोपड़ा ने उन्हें फिल्म में रेपिस्ट का रोल ऑफर किया तो नाना भड़क गए और उन्हें गालियां तक दे दीं। बाद में स्मिता पाटिल के हस्तक्षेप से मामला शांत हुआ और नाना को फिल्म में अहम विलेन का किरदार मिला। (परिंदा) की शूटिंग के दौरान भी उनका डायरेक्टर विधु विनोद चोपड़ा से विवाद हुआ था। पूरी खबर यहां पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

Rekha Tragic Life Story; Vinod Mehra Amitabh Bachchan Mukesh Agarwal

Rekha Tragic Life Story; Vinod Mehra Amitabh Bachchan Mukesh Agarwal

17 मिनट पहलेलेखक: वीरेंद्र मिश्र कॉपी लिंक रेखा आज अपना 72वां जन्मदिन मना रही हैं। रेखा की जिंदगी जितनी ग्लैमरस दिखती है, उसके पीछे उतने ही दर्दनाक अध्याय छिपे हैं। बचपन में पिता जेमिनी गणेशन की बेरुखी मिली, तो परिवार की आर्थिक मजबूरियों ने किशोर उम्र में ही फिल्मों में काम करने पर मजबूर कर दिया। बड़े पर्दे पर सफलता मिली, लेकिन निजी जिंदगी लगातार सवालों के घेरे में रही। विनोद मेहरा से कथित शादी, अमिताभ बच्चन से रिश्ते की चर्चाएं और 1990 में पति मुकेश अग्रवाल की आत्महत्या के बाद लगे गंभीर आरोपों ने उन्हें भीतर तक झकझोरा। इन मुश्किलों के बावजूद रेखा ने खुद को संभाला और हिंदी सिनेमा में ऐसी पहचान बनाई, जो आज भी कायम है। जन्मदिन पर पढ़िए रेखा की जिंदगी के 5 ऐसे अध्याय, जिन्होंने उनकी शख्सियत को प्रभावित किया। पिता ने बेटी को कभी अपना नहीं समझा, स्कूल में देखते रहे लेकिन पहचान तक नहीं मिली रेखा का जन्म 10 अक्टूबर 1954 को तमिल सिनेमा के मशहूर अभिनेता जेमिनी गणेशन और अभिनेत्री पुष्पवल्ली के घर हुआ था। लेकिन पिता की मौजूदगी उनके बचपन का हिस्सा नहीं बन सकी। सिमी गरेवाल के शो ‘रेंडेजवू विद सिमी गरेवाल’ में रेखा ने अपने बचपन और पिता के बारे में बात की थी। उन्होंने बताया था कि जब वह बहुत छोटी थीं, तभी उनके पिता उनकी जिंदगी से चले गए थे। उन्हें याद नहीं था कि उनके पिता कभी घर में रहे हों। रेखा ने अपने माता-पिता के रिश्ते को रोमांटिक बताया था और कहा था कि उनकी मां अपने पिता के प्यार में बेहद डूबी हुई थीं। रेखा के लिए पिता की पहली याद भी किसी पिता-पुत्री के रिश्ते जैसी नहीं थी। उनके कई सौतेले भाई-बहन एक ही स्कूल में पढ़ते थे। जेमिनी गणेशन कभी-कभी अपने दूसरे बच्चों को स्कूल छोड़ने आते थे। रेखा ने बताया कि उन्हें दूर से देखकर उनके मन में आया था- ‘ओह, ये अप्पा हैं।’ लेकिन रेखा के मुताबिक, उनके पिता ने उन्हें नोटिस तक नहीं किया। उन्होंने बताया कि उन्हें उनसे मिलने का मौका कभी नहीं मिला और उन्हें नहीं लगता कि उनके पिता ने उस वक्त उन्हें देखा भी था। बचपन में रेखा ने इस कमी को किस तरह महसूस किया, इसका अंदाजा उनकी एक मार्मिक बात से लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा था कि शायद उन्होंने इस दर्द को अपने अंदर ही दबा दिया था। उस उम्र में उनका ध्यान होमवर्क और दूसरी छोटी-छोटी चीजों पर ज्यादा था। उन्हें अपनी बहन के ज्यादा सुंदर होने की भी चिंता रहती थी। बड़ी होने के बाद रेखा को एहसास हुआ कि शायद उन्हें पिता की कमी महसूस हुई थी। उन्होंने कहा था कि जब आपने किसी चीज का स्वाद ही नहीं चखा हो, तो आपको नहीं पता होता कि वह चीज कैसी होती है। उनके लिए पिता शब्द का मतलब ही साफ नहीं था। रेखा ने बताया था कि उनके बचपन का बड़ा हिस्सा नानी और मौसी के साथ बीता, क्योंकि उनकी मां शूटिंग के सिलसिले में अक्सर बाहर रहती थीं। उनके पास कोई स्थायी पुरुष रोल मॉडल भी नहीं था। बाद में उन्होंने फिल्ममेकर मोहन सहगल को अपनी जिंदगी का पहला फादर फिगर बताया। बचपन खत्म होने से पहले ही फिल्मों में धकेली गईं, मां ने कहा- परिवार के लिए काम करना होगा रेखा के लिए फिल्मों में आना किसी सपने के पूरा होने की कहानी नहीं थी। वह अभिनेत्री बनना ही नहीं चाहती थीं। उस उम्र में उनके सपने किसी आम लड़की जैसे थे- प्यार करने वाला जीवनसाथी, शादी और ढेर सारे बच्चे। परिवार की आर्थिक स्थिति ने उनके इन सपनों को पीछे धकेल दिया। रेखा ने बताया था कि घर में कई बच्चों की पढ़ाई और दूसरे खर्चों की जिम्मेदारी थी। उनकी मां ने उनसे साफ कहा कि उन्हें काम करना होगा। फिल्मों में काम करने की इच्छा नहीं होने के बावजूद रेखा ने इसे स्वीकार किया और कहा कि वह सिर्फ एक फिल्म करेंगी- ‘अंजाना सफर’। इसके बाद जो हुआ, उसने उनकी जिंदगी बदल दी। स्कूल छूट गया और महज किशोर उम्र में वह फिल्म स्टूडियो के चक्कर लगाने लगीं। एक तरफ घर की आर्थिक जरूरत थी, दूसरी तरफ फिल्म इंडस्ट्री उनके लिए अनजान दुनिया थी। रेखा ने अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए बताया था कि वह उस माहौल के लिए तैयार नहीं थीं। उन्हें काम करना पसंद नहीं था और कई बार सेट पर जाने का मन नहीं करता था। बाद में उन्होंने अपने शुरुआती फिल्मी दौर को मुश्किल समय के तौर पर याद किया। मुंबई और फिल्म इंडस्ट्री उनके लिए सुरक्षित जगह जैसी नहीं थी। एक कम उम्र की लड़की, जिसे हिंदी भाषा तक ठीक से नहीं आती थी, अचानक ऐसे माहौल में पहुंच गई थी जहां उसे अपने लिए रास्ता बनाना था। बाद के वर्षों में रेखा ने बताया कि शुरुआती दौर में उन्हें रूप-रंग और भाषा को लेकर भी काफी आलोचना झेलनी पड़ी। इस मजबूरी से शुरू हुआ सफर धीरे-धीरे उनकी पहचान बन गया। जिस लड़की ने शुरुआत में सिर्फ परिवार की आर्थिक मदद के लिए कैमरे का सामना किया था, वही आगे चलकर हिंदी सिनेमा की सबसे बड़ी अभिनेत्रियों में शामिल हुई। रेखा ने पीछे मुड़कर इस सफर को सिर्फ शिकायत की नजर से नहीं देखा। उन्होंने कहा था कि वह अपनी जिंदगी में हुई हर घटना के लिए आभारी हैं, क्योंकि अगर उनकी जिंदगी का ‘स्क्रीनप्ले’ उसी क्रम में नहीं लिखा गया होता, तो शायद वह आज जैसी इंसान हैं, वैसी नहीं बन पातीं। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि रेखा और विनोद मेहरा ने मंदिर में गुपचुप शादी की है। विनोद मेहरा से शादी की खबर, ससुराल में कथित अपमान की कहानी रेखा का नाम अभिनेता विनोद मेहरा के साथ जुड़ा तो उनकी निजी जिंदगी फिर चर्चा में आ गई। दोनों ने साथ में फिल्में कीं और उनकी नजदीकियों की खबरें सामने आती रहीं। इसी दौरान यह दावा भी किया गया कि दोनों ने गुपचुप शादी कर ली थी। कई सालों तक रेखा और विनोद मेहरा की कथित शादी की कहानी फिल्मी गलियारों में सुनाई जाती रही। यह भी कहा गया कि शादी के बाद जब विनोद मेहरा रेखा को अपने घर लेकर

Rekha Tragic Life Story; Vinod Mehra Amitabh Bachchan Mukesh Agarwal

Rekha Tragic Life Story; Vinod Mehra Amitabh Bachchan Mukesh Agarwal

50 मिनट पहलेलेखक: वीरेंद्र मिश्र कॉपी लिंक रेखा आज अपना 72वां जन्मदिन मना रही हैं। रेखा की जिंदगी जितनी ग्लैमरस दिखती है, उसके पीछे उतने ही दर्दनाक अध्याय छिपे हैं। बचपन में पिता जेमिनी गणेशन की बेरुखी मिली, तो परिवार की आर्थिक मजबूरियों ने किशोर उम्र में ही फिल्मों में काम करने पर मजबूर कर दिया। बड़े पर्दे पर सफलता मिली, लेकिन निजी जिंदगी लगातार सवालों के घेरे में रही। विनोद मेहरा से कथित शादी, अमिताभ बच्चन से रिश्ते की चर्चाएं और 1990 में पति मुकेश अग्रवाल की आत्महत्या के बाद लगे गंभीर आरोपों ने उन्हें भीतर तक झकझोरा। इन मुश्किलों के बावजूद रेखा ने खुद को संभाला और हिंदी सिनेमा में ऐसी पहचान बनाई, जो आज भी कायम है। जन्मदिन पर पढ़िए रेखा की जिंदगी के 5 ऐसे अध्याय, जिन्होंने उनकी शख्सियत को प्रभावित किया। पिता ने बेटी को कभी अपना नहीं समझा, स्कूल में देखते रहे लेकिन पहचान तक नहीं मिली रेखा का जन्म 10 अक्टूबर 1954 को तमिल सिनेमा के मशहूर अभिनेता जेमिनी गणेशन और अभिनेत्री पुष्पवल्ली के घर हुआ था। लेकिन पिता की मौजूदगी उनके बचपन का हिस्सा नहीं बन सकी। सिमी गरेवाल के शो ‘रेंडेजवू विद सिमी गरेवाल’ में रेखा ने अपने बचपन और पिता के बारे में बात की थी। उन्होंने बताया था कि जब वह बहुत छोटी थीं, तभी उनके पिता उनकी जिंदगी से चले गए थे। उन्हें याद नहीं था कि उनके पिता कभी घर में रहे हों। रेखा ने अपने माता-पिता के रिश्ते को रोमांटिक बताया था और कहा था कि उनकी मां अपने पिता के प्यार में बेहद डूबी हुई थीं। रेखा के लिए पिता की पहली याद भी किसी पिता-पुत्री के रिश्ते जैसी नहीं थी। उनके कई सौतेले भाई-बहन एक ही स्कूल में पढ़ते थे। जेमिनी गणेशन कभी-कभी अपने दूसरे बच्चों को स्कूल छोड़ने आते थे। रेखा ने बताया कि उन्हें दूर से देखकर उनके मन में आया था- ‘ओह, ये अप्पा हैं।’ लेकिन रेखा के मुताबिक, उनके पिता ने उन्हें नोटिस तक नहीं किया। उन्होंने बताया कि उन्हें उनसे मिलने का मौका कभी नहीं मिला और उन्हें नहीं लगता कि उनके पिता ने उस वक्त उन्हें देखा भी था। बचपन में रेखा ने इस कमी को किस तरह महसूस किया, इसका अंदाजा उनकी एक मार्मिक बात से लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा था कि शायद उन्होंने इस दर्द को अपने अंदर ही दबा दिया था। उस उम्र में उनका ध्यान होमवर्क और दूसरी छोटी-छोटी चीजों पर ज्यादा था। उन्हें अपनी बहन के ज्यादा सुंदर होने की भी चिंता रहती थी। बड़ी होने के बाद रेखा को एहसास हुआ कि शायद उन्हें पिता की कमी महसूस हुई थी। उन्होंने कहा था कि जब आपने किसी चीज का स्वाद ही नहीं चखा हो, तो आपको नहीं पता होता कि वह चीज कैसी होती है। उनके लिए पिता शब्द का मतलब ही साफ नहीं था। रेखा ने बताया था कि उनके बचपन का बड़ा हिस्सा नानी और मौसी के साथ बीता, क्योंकि उनकी मां शूटिंग के सिलसिले में अक्सर बाहर रहती थीं। उनके पास कोई स्थायी पुरुष रोल मॉडल भी नहीं था। बाद में उन्होंने फिल्ममेकर मोहन सहगल को अपनी जिंदगी का पहला फादर फिगर बताया। बचपन खत्म होने से पहले ही फिल्मों में धकेली गईं, मां ने कहा- परिवार के लिए काम करना होगा रेखा के लिए फिल्मों में आना किसी सपने के पूरा होने की कहानी नहीं थी। वह अभिनेत्री बनना ही नहीं चाहती थीं। उस उम्र में उनके सपने किसी आम लड़की जैसे थे- प्यार करने वाला जीवनसाथी, शादी और ढेर सारे बच्चे। परिवार की आर्थिक स्थिति ने उनके इन सपनों को पीछे धकेल दिया। रेखा ने बताया था कि घर में कई बच्चों की पढ़ाई और दूसरे खर्चों की जिम्मेदारी थी। उनकी मां ने उनसे साफ कहा कि उन्हें काम करना होगा। फिल्मों में काम करने की इच्छा नहीं होने के बावजूद रेखा ने इसे स्वीकार किया और कहा कि वह सिर्फ एक फिल्म करेंगी- ‘अंजाना सफर’। इसके बाद जो हुआ, उसने उनकी जिंदगी बदल दी। स्कूल छूट गया और महज किशोर उम्र में वह फिल्म स्टूडियो के चक्कर लगाने लगीं। एक तरफ घर की आर्थिक जरूरत थी, दूसरी तरफ फिल्म इंडस्ट्री उनके लिए अनजान दुनिया थी। रेखा ने अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए बताया था कि वह उस माहौल के लिए तैयार नहीं थीं। उन्हें काम करना पसंद नहीं था और कई बार सेट पर जाने का मन नहीं करता था। बाद में उन्होंने अपने शुरुआती फिल्मी दौर को मुश्किल समय के तौर पर याद किया। मुंबई और फिल्म इंडस्ट्री उनके लिए सुरक्षित जगह जैसी नहीं थी। एक कम उम्र की लड़की, जिसे हिंदी भाषा तक ठीक से नहीं आती थी, अचानक ऐसे माहौल में पहुंच गई थी जहां उसे अपने लिए रास्ता बनाना था। बाद के वर्षों में रेखा ने बताया कि शुरुआती दौर में उन्हें रूप-रंग और भाषा को लेकर भी काफी आलोचना झेलनी पड़ी। इस मजबूरी से शुरू हुआ सफर धीरे-धीरे उनकी पहचान बन गया। जिस लड़की ने शुरुआत में सिर्फ परिवार की आर्थिक मदद के लिए कैमरे का सामना किया था, वही आगे चलकर हिंदी सिनेमा की सबसे बड़ी अभिनेत्रियों में शामिल हुई। रेखा ने पीछे मुड़कर इस सफर को सिर्फ शिकायत की नजर से नहीं देखा। उन्होंने कहा था कि वह अपनी जिंदगी में हुई हर घटना के लिए आभारी हैं, क्योंकि अगर उनकी जिंदगी का ‘स्क्रीनप्ले’ उसी क्रम में नहीं लिखा गया होता, तो शायद वह आज जैसी इंसान हैं, वैसी नहीं बन पातीं। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि रेखा और विनोद मेहरा ने मंदिर में गुपचुप शादी की है। विनोद मेहरा से शादी की खबर, ससुराल में कथित अपमान की कहानी रेखा का नाम अभिनेता विनोद मेहरा के साथ जुड़ा तो उनकी निजी जिंदगी फिर चर्चा में आ गई। दोनों ने साथ में फिल्में कीं और उनकी नजदीकियों की खबरें सामने आती रहीं। इसी दौरान यह दावा भी किया गया कि दोनों ने गुपचुप शादी कर ली थी। कई सालों तक रेखा और विनोद मेहरा की कथित शादी की कहानी फिल्मी गलियारों में सुनाई जाती रही। यह भी कहा गया कि शादी के बाद जब विनोद मेहरा रेखा को अपने घर लेकर