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JD Vance Defends US-Iran Deal as Trump Jokes About Blaming Him if Agreement Fails

JD Vance Defends US-Iran Deal as Trump Jokes About Blaming Him if Agreement Fails

वॉशिंगटन डीसी3 मिनट पहले

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अमेरिका और ईरान के बीच बुधवार रात ऐतिहासिक और विवादित पीस डील हुई। इसके बाद से अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इसका सबसे बड़ा चेहरा बनकर उभरे हैं। ‌BBC की रिपोर्ट के मुताबिक वेंस लगातार फ्रंट फुट पर आकर इस फैसले का बचाव कर रहे हैं।

व्हाइट हाउस की प्रेस ब्रीफिंग से लेकर द न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए इंटरव्यू तक, वेंस इस डील को डिफेंड करने की पूरी कमान संभाले हुए हैं। जब इस समझौते को लेकर इजराइल और अमेरिकी रिपब्लिकन पार्टी के अंदर से ही तीखी आलोचना शुरू हुई, तो वेंस ने बेहद कड़े शब्दों में जवाब दिया।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक रिपोर्टर ने उनसे पूछा कि क्या राष्ट्रपति ट्रम्प ने उन्हें अमेरिका-ईरान समझौते के लिए ‘बलि का बकरा’ बना दिया है। इस पर वेंस ने कहा कि उन्हें लगता है कि ट्रम्प मजाक कर रहे थे।

दरअसल, एक दिन पहले ट्रम्प ने कहा था कि अगर यह समझौता विफल हो जाता है तो वह इसका दोष वेंस पर डाल सकते हैं। हाल के महीनों में वह कई बार ऐसा बयान दे चुके हैं। रिपोर्ट के मुताबिक अगर ईरान के साथ हुआ समझौता कामयाब होता है तो वे 2028 में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव के सबसे बड़े दावेदार हो सकते हैं।

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों के सख्त सवालों के जवाब दिए।

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों के सख्त सवालों के जवाब दिए।

ईरान के साथ बातचीत का जिम्मा वेंस के कंधे पर

व्हाइट हाउस के मुताबिक, जेडी वेंस राष्ट्रपति ट्रम्प की राष्ट्रीय सुरक्षा टीम के सबसे भरोसेमंद सदस्य बनकर उभरे हैं। ट्रम्प के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जैरेड कुशनर के साथ मिलकर वेंस ने इस डील की बैक-चैनल बातचीत की अगुआई की है। स्विट्जरलैंड में होने वाली आगामी 60 दिनों की औपचारिक तकनीकी वार्ताओं की देखरेख का जिम्मा भी वेंस के कंधों पर है।

चूंकि ट्रम्प ने इस पूरी बातचीत की प्रक्रिया में वेंस को प्रमुख भूमिका दी है, इसलिए इस समझौते की सफलता या विफलता का सबसे बड़ा राजनीतिक असर भी उन्हीं पर पड़ सकता है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि यह शांति समझौता सफल रहता है और मिडिल ईस्ट में युद्ध रुक जाता है, तो साल 2028 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में जेडी वेंस खुद को एक कुशल डिप्लोमैट और युद्ध खत्म कराने वाले ‘ग्लोबल लीडर’ के रूप में पेश कर सकेंगे।

वेंस की किताब की अमेरिकी मीडिया खूब चर्चा हो रही

16 जून को वेंस की किताब ‘कम्यूनियन: फाइंडिंग माई वे बैक टु फेथ’ रिलीज हुई है। राजनीतिक गलियारों और अमेरिकी मीडिया में इस किताब की टाइमिंग और इसके कंटेंट को सीधे तौर पर साल 2028 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में उनकी संभावित दावेदारी से जोड़कर देखा जा रहा है।

अमेरिकी राजनीति के इतिहासकार इस किताब की तुलना 1975 में जिमी कार्टर की लिखी गई किताब ‘व्हाए नॉट द बेस्ट’ से कर रहे हैं। कार्टर ने राष्ट्रपति चुनाव जीतने से ठीक पहले अपनी आस्था और धर्म पर किताब लिखी थी, जिसने अमेरिकी जनता, विशेषकर धार्मिक झुकाव वाले वोटर्स के बीच उन्हें एक ‘भरोसेमंद चेहरा’ बना दिया था।

जेडी वेंस भी इसी रास्ते पर चल रहे हैं। अपनी राजनीतिक उपलब्धियों के बजाय अपनी आस्था और धर्म (ईसाई धर्म और कैथोलिक बनने के सफर) पर किताब लिखकर वे खुद को 2028 के चुनाव से पहले देश के सामने एक बेहद गंभीर, ईमानदार और पारिवारिक व्यक्ति के रूप में पेश कर रहे हैं।

वेंस 2019 में नास्तिकता छोड़कर कैथोलिक ईसाई बने थे। इस किताब के जरिए वे रिपब्लिकन पार्टी (GOP) के पारंपरिक और धार्मिक आधार को मजबूत कर रहे हैं। 2028 के प्राइमरी चुनावों (पार्टी के भीतर उम्मीदवार चुनने की रेस) में यह धार्मिक कार्ड उन्हें अन्य रिपब्लिकन दावेदारों (जैसे मार्को रूबियो) के मुकाबले मजबूत बढ़त दिला सकता है।

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस वेटिकन चर्च में पोप लियो के साथ।

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस वेटिकन चर्च में पोप लियो के साथ।

मार्को रूबियो 2028 के राष्ट्रपति पद के दावेदार माने जाते हैं

विदेश मंत्री मार्को रूबियो, जिन्हें 2028 के रिपब्लिकन राष्ट्रपति पद की दौड़ का संभावित दावेदार माना जाता है। अमेरिका ने जनवरी में बिना किसी बड़े सैन्य खर्च या अमेरिकी सैनिकों की जान जोखिम में डाले वेनेजुएला के तानाशाह निकोलस मादुरो को सत्ता से बेदखल करने में कामयाबी हासिल की थी।

उनकी निगरानी में ही इस पूरे ऑपरेशन को अंजाम दिया गया था ऐसे में इस पूरे मामले का क्रेडिट मार्को रूबियो को मिला। इस घटना ने उन्हें रिपब्लिकन वोटर्स के बीच एक ‘एक्शन-ओरिएंटेड’ लीडर बना दिया।

मार्को रुबियो की सबसे बड़ी यूएसपी (USP) यह है कि वे पार्टी के भीतर दो विरोधी विचारधाराओं (पारंपरिक रिपब्लिकन वोटर्स और ट्रम्प की अमेरिका फर्स्ट समर्थक वोटर्स) को एक साथ जोड़ सकते हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के पीछे उपराष्ट्रपति वेंस (बांए) और रूबियो (दाएं)। राष्ट्रपति ट्रम्प अपने संभावित उत्तराधिकारी को लेकर जानबूझकर स्थिति साफ नहीं कर रहे हैं। वे उन दोनों को यह महसूस कराते रहते हैं कि वे दोनों ही राष्ट्रपति पद की रेस में हैं। हालांकि, उन्होंने किसी एक का भी खुलकर समर्थन नहीं किया है।

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के पीछे उपराष्ट्रपति वेंस (बांए) और रूबियो (दाएं)। राष्ट्रपति ट्रम्प अपने संभावित उत्तराधिकारी को लेकर जानबूझकर स्थिति साफ नहीं कर रहे हैं। वे उन दोनों को यह महसूस कराते रहते हैं कि वे दोनों ही राष्ट्रपति पद की रेस में हैं। हालांकि, उन्होंने किसी एक का भी खुलकर समर्थन नहीं किया है।

ज्यादातर सर्वे में वेंस को बढ़त, रूबियो कड़ी टक्कर दे रहे

दुनिया के सबसे बड़े प्रेडिक्शन मार्केट पॉलिमार्केट के मुताबिक रूबियो सर्वे में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। साल 2026 की शुरुआत में रुबियो सिंगल डिजिट पर थे।

जून 2026 की ताजा ट्रेडिंग के मुताबिक, रिपब्लिकन उम्मीदवार बनने की रेस में मार्को रुबियो के शेयर बढ़कर 30% के ऑल-टाइम हाई पर पहुंच गए हैं। हालांकि इस प्लेटफॉर्म पर वेंस अभी भी 33% के साथ मामूली बढ़त बनाए हुए हैं।

वही, प्रेडिक्शन मार्केट कालशी के मुताबिक मार्को रुबियो 18% की संभावना के साथ पहले स्थान पर आ गए हैं। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस 17% के साथ दूसरे और डेमोक्रेट गेविन न्यूसम 16% के साथ तीसरे स्थान पर खिसक चुके हैं।

एक तीसरी सर्वे एजेंसी एमरसन कॉलेज पोल के मुताबिक मई 2026 में वेंस और रूबियो दोनों ही 35% के साथ बराबरी पर थे। जबकि फरवरी में यह आंकड़ा वेंस (52%) और रूबियो (20%) था।

वेंस को बड़े राजनीतिक नुकसान की आशंका

कुछ रिपब्लिकन नेताओं का मानना है कि ईरान से जुड़े इस समझौते की जिम्मेदारी वेंस के लिए एक ऐसा काम बन गई है, जिसमें मेहनत तो ज्यादा है लेकिन राजनीतिक फायदा कम।

नाम न बताने की शर्त पर एक सूत्र ने बीबीसी से कहा, जेडी वेंस पर जिम्मेदारी डाल देना ट्रम्प की पुरानी आदत रही है। वहीं, दूसरे सूत्र ने कहा, अगर कोई विवाद खड़ा हो जाए तो जेडी वेंस को आगे कर देना ट्रम्प के लिए कोई नई बात नहीं है।

अमेरिकी अखबार द वॉशिंगटन पोस्ट के मुताबिक ईरान के साथ हुआ यह ऐतिहासिक समझौता जेडी वेंस के राजनीतिक करियर के लिए एक दोधारी तलवार बन चुका है।

अखबार के मुताबिक वेंस इस समय भले ही व्हाइट हाउस के सबसे शक्तिशाली संकटमोचक दिख रहे हों, लेकिन वे वास्तव में एक राजनीतिक चक्रव्यूह में फंस चुके हैं।

2028 के राष्ट्रपति चुनाव की रेस में खुद को बनाए रखने के लिए वेंस को हर हाल में अगले 60 दिनों (स्विट्जरलैंड वार्ता) में इस ईरान डील को बिना किसी विवाद के सफल बनाना ही होगा, वरना उनका ‘प्रेसिडेंशियल ड्रीम’ यहीं दफन हो सकता है।

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वेंस से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें…

ट्रम्प के बाद कौन संभालेगा अमेरिका:पहले उपराष्ट्रपति वेंस आगे थे, वेनेजुएला पर हमले के बाद विदेश मंत्री रूबियो का रुतबा बढ़ा

अमेरिकी सेना ने 3 जनवरी की रात वेनेजुएला पर हमला किया और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को अगवा कर अमेरिका लेकर आ गए। यह मिलिट्री एक्शन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की मंजूरी से हुआ।

अमेरिकी मीडिया हाउस पॉलिटिको के मुताबिक ट्रम्प ने वेनेजुएला की जिम्मेदारी पूरी तरह मार्को रूबियो को सौंप दी है। इस पूरे ऑपरेशन में रूबियो की अहम भूमिका के बाद उनकी अगले अमेरिकी राष्ट्रपति बनने की संभावना तेजी से बढ़ी है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

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राजनीति

JD Vance Defends US-Iran Deal as Trump Jokes About Blaming Him if Agreement Fails

JD Vance Defends US-Iran Deal as Trump Jokes About Blaming Him if Agreement Fails

वॉशिंगटन डीसी3 मिनट पहले

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अमेरिका और ईरान के बीच बुधवार रात ऐतिहासिक और विवादित पीस डील हुई। इसके बाद से अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इसका सबसे बड़ा चेहरा बनकर उभरे हैं। ‌BBC की रिपोर्ट के मुताबिक वेंस लगातार फ्रंट फुट पर आकर इस फैसले का बचाव कर रहे हैं।

व्हाइट हाउस की प्रेस ब्रीफिंग से लेकर द न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए इंटरव्यू तक, वेंस इस डील को डिफेंड करने की पूरी कमान संभाले हुए हैं। जब इस समझौते को लेकर इजराइल और अमेरिकी रिपब्लिकन पार्टी के अंदर से ही तीखी आलोचना शुरू हुई, तो वेंस ने बेहद कड़े शब्दों में जवाब दिया।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक रिपोर्टर ने उनसे पूछा कि क्या राष्ट्रपति ट्रम्प ने उन्हें अमेरिका-ईरान समझौते के लिए ‘बलि का बकरा’ बना दिया है। इस पर वेंस ने कहा कि उन्हें लगता है कि ट्रम्प मजाक कर रहे थे।

दरअसल, एक दिन पहले ट्रम्प ने कहा था कि अगर यह समझौता विफल हो जाता है तो वह इसका दोष वेंस पर डाल सकते हैं। हाल के महीनों में वह कई बार ऐसा बयान दे चुके हैं। रिपोर्ट के मुताबिक अगर ईरान के साथ हुआ समझौता कामयाब होता है तो वे 2028 में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव के सबसे बड़े दावेदार हो सकते हैं।

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों के सख्त सवालों के जवाब दिए।

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों के सख्त सवालों के जवाब दिए।

ईरान के साथ बातचीत का जिम्मा वेंस के कंधे पर

व्हाइट हाउस के मुताबिक, जेडी वेंस राष्ट्रपति ट्रम्प की राष्ट्रीय सुरक्षा टीम के सबसे भरोसेमंद सदस्य बनकर उभरे हैं। ट्रम्प के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जैरेड कुशनर के साथ मिलकर वेंस ने इस डील की बैक-चैनल बातचीत की अगुआई की है। स्विट्जरलैंड में होने वाली आगामी 60 दिनों की औपचारिक तकनीकी वार्ताओं की देखरेख का जिम्मा भी वेंस के कंधों पर है।

चूंकि ट्रम्प ने इस पूरी बातचीत की प्रक्रिया में वेंस को प्रमुख भूमिका दी है, इसलिए इस समझौते की सफलता या विफलता का सबसे बड़ा राजनीतिक असर भी उन्हीं पर पड़ सकता है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि यह शांति समझौता सफल रहता है और मिडिल ईस्ट में युद्ध रुक जाता है, तो साल 2028 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में जेडी वेंस खुद को एक कुशल डिप्लोमैट और युद्ध खत्म कराने वाले ‘ग्लोबल लीडर’ के रूप में पेश कर सकेंगे।

वेंस की किताब की अमेरिकी मीडिया खूब चर्चा हो रही

16 जून को वेंस की किताब ‘कम्यूनियन: फाइंडिंग माई वे बैक टु फेथ’ रिलीज हुई है। राजनीतिक गलियारों और अमेरिकी मीडिया में इस किताब की टाइमिंग और इसके कंटेंट को सीधे तौर पर साल 2028 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में उनकी संभावित दावेदारी से जोड़कर देखा जा रहा है।

अमेरिकी राजनीति के इतिहासकार इस किताब की तुलना 1975 में जिमी कार्टर की लिखी गई किताब ‘व्हाए नॉट द बेस्ट’ से कर रहे हैं। कार्टर ने राष्ट्रपति चुनाव जीतने से ठीक पहले अपनी आस्था और धर्म पर किताब लिखी थी, जिसने अमेरिकी जनता, विशेषकर धार्मिक झुकाव वाले वोटर्स के बीच उन्हें एक ‘भरोसेमंद चेहरा’ बना दिया था।

जेडी वेंस भी इसी रास्ते पर चल रहे हैं। अपनी राजनीतिक उपलब्धियों के बजाय अपनी आस्था और धर्म (ईसाई धर्म और कैथोलिक बनने के सफर) पर किताब लिखकर वे खुद को 2028 के चुनाव से पहले देश के सामने एक बेहद गंभीर, ईमानदार और पारिवारिक व्यक्ति के रूप में पेश कर रहे हैं।

वेंस 2019 में नास्तिकता छोड़कर कैथोलिक ईसाई बने थे। इस किताब के जरिए वे रिपब्लिकन पार्टी (GOP) के पारंपरिक और धार्मिक आधार को मजबूत कर रहे हैं। 2028 के प्राइमरी चुनावों (पार्टी के भीतर उम्मीदवार चुनने की रेस) में यह धार्मिक कार्ड उन्हें अन्य रिपब्लिकन दावेदारों (जैसे मार्को रूबियो) के मुकाबले मजबूत बढ़त दिला सकता है।

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस वेटिकन चर्च में पोप लियो के साथ।

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस वेटिकन चर्च में पोप लियो के साथ।

मार्को रूबियो 2028 के राष्ट्रपति पद के दावेदार माने जाते हैं

विदेश मंत्री मार्को रूबियो, जिन्हें 2028 के रिपब्लिकन राष्ट्रपति पद की दौड़ का संभावित दावेदार माना जाता है। अमेरिका ने जनवरी में बिना किसी बड़े सैन्य खर्च या अमेरिकी सैनिकों की जान जोखिम में डाले वेनेजुएला के तानाशाह निकोलस मादुरो को सत्ता से बेदखल करने में कामयाबी हासिल की थी।

उनकी निगरानी में ही इस पूरे ऑपरेशन को अंजाम दिया गया था ऐसे में इस पूरे मामले का क्रेडिट मार्को रूबियो को मिला। इस घटना ने उन्हें रिपब्लिकन वोटर्स के बीच एक ‘एक्शन-ओरिएंटेड’ लीडर बना दिया।

मार्को रुबियो की सबसे बड़ी यूएसपी (USP) यह है कि वे पार्टी के भीतर दो विरोधी विचारधाराओं (पारंपरिक रिपब्लिकन वोटर्स और ट्रम्प की अमेरिका फर्स्ट समर्थक वोटर्स) को एक साथ जोड़ सकते हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के पीछे उपराष्ट्रपति वेंस (बांए) और रूबियो (दाएं)। राष्ट्रपति ट्रम्प अपने संभावित उत्तराधिकारी को लेकर जानबूझकर स्थिति साफ नहीं कर रहे हैं। वे उन दोनों को यह महसूस कराते रहते हैं कि वे दोनों ही राष्ट्रपति पद की रेस में हैं। हालांकि, उन्होंने किसी एक का भी खुलकर समर्थन नहीं किया है।

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के पीछे उपराष्ट्रपति वेंस (बांए) और रूबियो (दाएं)। राष्ट्रपति ट्रम्प अपने संभावित उत्तराधिकारी को लेकर जानबूझकर स्थिति साफ नहीं कर रहे हैं। वे उन दोनों को यह महसूस कराते रहते हैं कि वे दोनों ही राष्ट्रपति पद की रेस में हैं। हालांकि, उन्होंने किसी एक का भी खुलकर समर्थन नहीं किया है।

ज्यादातर सर्वे में वेंस को बढ़त, रूबियो कड़ी टक्कर दे रहे

दुनिया के सबसे बड़े प्रेडिक्शन मार्केट पॉलिमार्केट के मुताबिक रूबियो सर्वे में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। साल 2026 की शुरुआत में रुबियो सिंगल डिजिट पर थे।

जून 2026 की ताजा ट्रेडिंग के मुताबिक, रिपब्लिकन उम्मीदवार बनने की रेस में मार्को रुबियो के शेयर बढ़कर 30% के ऑल-टाइम हाई पर पहुंच गए हैं। हालांकि इस प्लेटफॉर्म पर वेंस अभी भी 33% के साथ मामूली बढ़त बनाए हुए हैं।

वही, प्रेडिक्शन मार्केट कालशी के मुताबिक मार्को रुबियो 18% की संभावना के साथ पहले स्थान पर आ गए हैं। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस 17% के साथ दूसरे और डेमोक्रेट गेविन न्यूसम 16% के साथ तीसरे स्थान पर खिसक चुके हैं।

एक तीसरी सर्वे एजेंसी एमरसन कॉलेज पोल के मुताबिक मई 2026 में वेंस और रूबियो दोनों ही 35% के साथ बराबरी पर थे। जबकि फरवरी में यह आंकड़ा वेंस (52%) और रूबियो (20%) था।

वेंस को बड़े राजनीतिक नुकसान की आशंका

कुछ रिपब्लिकन नेताओं का मानना है कि ईरान से जुड़े इस समझौते की जिम्मेदारी वेंस के लिए एक ऐसा काम बन गई है, जिसमें मेहनत तो ज्यादा है लेकिन राजनीतिक फायदा कम।

नाम न बताने की शर्त पर एक सूत्र ने बीबीसी से कहा, जेडी वेंस पर जिम्मेदारी डाल देना ट्रम्प की पुरानी आदत रही है। वहीं, दूसरे सूत्र ने कहा, अगर कोई विवाद खड़ा हो जाए तो जेडी वेंस को आगे कर देना ट्रम्प के लिए कोई नई बात नहीं है।

अमेरिकी अखबार द वॉशिंगटन पोस्ट के मुताबिक ईरान के साथ हुआ यह ऐतिहासिक समझौता जेडी वेंस के राजनीतिक करियर के लिए एक दोधारी तलवार बन चुका है।

अखबार के मुताबिक वेंस इस समय भले ही व्हाइट हाउस के सबसे शक्तिशाली संकटमोचक दिख रहे हों, लेकिन वे वास्तव में एक राजनीतिक चक्रव्यूह में फंस चुके हैं।

2028 के राष्ट्रपति चुनाव की रेस में खुद को बनाए रखने के लिए वेंस को हर हाल में अगले 60 दिनों (स्विट्जरलैंड वार्ता) में इस ईरान डील को बिना किसी विवाद के सफल बनाना ही होगा, वरना उनका ‘प्रेसिडेंशियल ड्रीम’ यहीं दफन हो सकता है।

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वेंस से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें…

ट्रम्प के बाद कौन संभालेगा अमेरिका:पहले उपराष्ट्रपति वेंस आगे थे, वेनेजुएला पर हमले के बाद विदेश मंत्री रूबियो का रुतबा बढ़ा

अमेरिकी सेना ने 3 जनवरी की रात वेनेजुएला पर हमला किया और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को अगवा कर अमेरिका लेकर आ गए। यह मिलिट्री एक्शन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की मंजूरी से हुआ।

अमेरिकी मीडिया हाउस पॉलिटिको के मुताबिक ट्रम्प ने वेनेजुएला की जिम्मेदारी पूरी तरह मार्को रूबियो को सौंप दी है। इस पूरे ऑपरेशन में रूबियो की अहम भूमिका के बाद उनकी अगले अमेरिकी राष्ट्रपति बनने की संभावना तेजी से बढ़ी है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

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