Sunday, 08 Nov 2026 | 02:16 AM

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'रामायण' का दूसरा ट्रेलर रिलीज:पहले ट्रेलर के मुकाबले VFX में सुधार, राम-रावण युद्ध के सीन दिखाए; राष्ट्रपति भवन में स्क्रीनिंग की तैयारी

'रामायण' का दूसरा ट्रेलर रिलीज:पहले ट्रेलर के मुकाबले VFX में सुधार, राम-रावण युद्ध के सीन दिखाए; राष्ट्रपति भवन में स्क्रीनिंग की तैयारी

रणबीर कपूर स्टारर फिल्म ‘रामायण’ का दूसरा ट्रेलर रिलीज कर दिया गया है। 2 मिनट 36 सेकेंड के इस ट्रेलर में पहले ट्रेलर के मुकाबले VFX और किरदारों के कॉस्टयूम में सुधार किया गया है। ट्रेलर में भगवान राम (रणबीर कपूर) और रावण (यश) के बीच धर्म और अधर्म के युद्ध को केंद्र में रखा गया है। ट्रेलर की शुरुआत एक वॉयसओवर से होती है, जिसमें इतिहास लिखे जाने से पहले की दुनिया का जिक्र है। इसमें दिखाया गया है कि कैसे अंधेरे की गहराइयों से रावण का उदय होता है। दुनिया भर में 5 नवंबर को रिलीज होने जा रही इस फिल्म का अंतरराष्ट्रीय नाम ‘रामायण: द राइज ऑफ ए लीजेंड’ रखा गया है। देखें दूसरे ट्रेलर की झलक … लॉंच से पहले नमित मल्होत्रा का भावुक पोस्ट फिल्म के मेकर नमित मल्होत्रा ने एक्स (X) पर एक नोट शेयर किया, जिस पर उनके साथ निर्देशक नितेश तिवारी और यश के भी दस्तखत हैं। नमित ने लिखा कि जब उन्होंने ‘रामायण’ बनाने की शुरुआत की थी, तब उनका सपना भारत की इस महान गाथा को दुनिया के हर कोने तक पहुंचाना था। उन्होंने कहा कि सोनी पिक्चर्स के ग्लोबल कैंपेन के जरिए दुनिया भर के दर्शक पहली बार इस कहानी को इतने बड़े पैमाने पर देखेंगे। उन्होंने इसे देश के लिए गर्व का पल बताते हुए लिखा- ‘हमारी सच्चाई, हमारा इतिहास, भारत से दुनिया तक, जय श्री राम’। राष्ट्रपति भवन में स्पेशल स्क्रीनिंग की तैयारी मिड-डे की रिपोर्ट के मुताबिक, मेकर्स नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में राजनीतिक हस्तियों और देश के शीर्ष नेताओं के लिए ‘रामायण’ की एक विशेष स्क्रीनिंग आयोजित करने की अनुमति मांग रहे हैं। अगर अनुमति मिलती है तो यह स्क्रीनिंग 5 नवंबर को फिल्म की ग्लोबल रिलीज के आसपास आयोजित की जाएगी। रणबीर कपूर, यश, साई पल्लवी और फिल्म के निर्देशक नितेश तिवारी शामिल हो सकते हैं। रणबीर कपूर बने हैं भगवान राम, यश निभा रहे रावण का रोल फिल्म ‘रामायण’ में बॉलीवुड और साउथ सिनेमा के बड़े कलाकार एक साथ नजर आने वाले हैं। रणबीर कपूर फिल्म में भगवान राम की भूमिका में हैं, जबकि साई पल्लवी माता सीता का किरदार निभा रही हैं। साउथ सुपरस्टार यश इस फिल्म में रावण के रोल में दिखेंगे। इसके अलावा सनी देओल हनुमान की भूमिका में हैं, जबकि रवि दुबे लक्ष्मण के किरदार में नजर आएंगे। फिल्म में अरुण गोविल, लारा दत्ता, रकुल प्रीत सिंह, विवेक ओबेरॉय और कुणाल कपूर भी अहम भूमिकाओं में शामिल हैं। 4000 करोड़ के बजट में बन रही देश की सबसे महंगी फिल्म ‘दंगल’ जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्म बना चुके डायरेक्टर नितेश तिवारी पिछले कई सालों से इस प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दो भागों में बनने वाली इस फिल्म का कुल बजट 4000 करोड़ रुपए के करीब है, जो इसे भारतीय सिनेमा के इतिहास की सबसे महंगी फिल्म बनाता है। फिल्म के विजुअल इफेक्ट्स (VFX) की जिम्मेदारी ऑस्कर विनिंग कंपनी DNEG संभाल रही है। फिल्म के पहले पार्ट की शूटिंग पूरी हो चुकी है। ऑस्कर विनर्स एआर रहमान और हैंस जिमर दे रहे म्यूजिक फिल्म के संगीत को लेकर भी काफी समय से चर्चा बनी हुई है। इस फिल्म में दो दिग्गज म्यूजिशियन एआर रहमान और ऑस्कर विजेता हैंस जिमर पहली बार एक साथ मिलकर बैकग्राउंड स्कोर और संगीत तैयार कर रहे हैं। फिल्म का निर्माण नमित मल्होत्रा के प्राइम फोकस स्टूडियोज और एक्टर यश के मॉन्स्टर माइंड क्रिएशंस के तहत किया जा रहा है। इस ग्रैंड प्रोजेक्ट को दो भागों में बनाया जा रहा है, जिसका पहला पार्ट 5 नवंबर 2026 में दिवाली के मौके पर सिनेमाघरों में रिलीज होगा। यह खबर भी पढ़ें… ‘रामायण’ फिल्म के मेकर पर इनकम टैक्स रेड की खबर: नमित मल्होत्रा की कंपनी प्राइम फोकस के मुंबई दफ्तरों में जांच; विदेशी लेन-देन से जुड़ा मामला फिल्म ‘रामायण’ के निर्माता नमित मल्होत्रा की कंपनी प्राइम फोकस लिमिटेड के मुंबई स्थित दफ्तरों पर आयकर विभाग की छापेमारी की खबर सामने आई थी। CNBC-TV18 की रिपोर्ट के मुताबिक, यह कार्रवाई विदेशी लेन-देन में कथित गड़बड़ियों की जांच के सिलसिले में की गई थी। इस दौरान कंपनी के शेयरों में भी करीब 8% की गिरावट दर्ज की गई थी। पूरी खबर यहां पढ़ें…

Jantar Mantar Chalo Game | Delhi Protest Satirical 3D Video Game News

Jantar Mantar Chalo Game | Delhi Protest Satirical 3D Video Game News

Hindi News Career Jantar Mantar Chalo Game | Delhi Protest Satirical 3D Video Game News 17 मिनट पहले कॉपी लिंक दिल्ली के जंतर-मंतर पर हाल ही में हुए प्रदर्शनों (Jantar Mantar 2.0) पर एक 27 वर्षीय IIT प्रोफेशनल सूरज कुशवाहा ने एक वीडियो गेम बनाया गया है, जिसका नाम ‘जंतर मंतर चलो’ है। ये एक 3D गेम (Satirical Game) है, जिसमें दिल्ली के जंतर-मंतर विरोध प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और चुनौतियों को एक गेमिंग मोड में ढाला गया है। इसमें आप गेम शुरू करने के लिए दिल्ली पुलिस या प्रोटेस्टर बनकर शामिल हो सकते हैं। जैसे ही आप गेम शुरू करते हैं आपको दिल्ली का जंतर-मंतर और आसपास के हिस्से नजर आने लगते हैं। पुलिस आपको पकड़ती नजर आती है, जगह-जगह डिटेन्शन पॉइंट और मीडिया भी इस गेम में दिखाई गई है, गेम से जुड़ी कुछ खास बातें मुख्य बातें: गेमप्ले (Gameplay): इस खेल में खिलाड़ियों के पास दो विकल्प होते हैं। वे या तो ‘आंदोलनकारी’ (Protester) बन सकते हैं या फिर ‘दिल्ली पुलिस’। अगर प्लेयर आंदोलनकारी बनता है, तो उसका काम भीड़ (काफिला) इकट्ठा करना, बैरिकेड्स तोड़ना और पुलिस तथा आंसू गैस के गोलों से बचते हुए जंतर-मंतर पहुंचना होता है। यदि प्लेयर पुलिस बनता है, तो उसका काम आंदोलनकारियों को रोकना, लाठीचार्ज/आंसू गैस का इस्तेमाल करना और उन्हें हिरासत में लेकर पुलिस बस में डालना होता है। ये गेम ‘Slither’ और अन्य सर्वाइवल गेमिंग कॉन्सेप्ट से प्रेरित होकर काफी कम समय में कोडिंग के जरिए बनाया गया है और सोशल मीडिया पर आते ही यह वायरल हो गया है। बता दें कि दिल्ली में 2 अक्टूबर से जंतर मंतर पर चीफ इलेक्शन कमीशन के इस्तीफे को लेकर प्रोटेस्ट जारी है। बरेली के सूरज ने बनाया ये एप बरेली के रहने वाले कुशवाहा, जिनका इंस्टाग्राम यूज़रनेम ‘बग्सराइटर’ (bugswriter) हैं। वे ‘वनप्ले.इन’ (oneplay.in) में डेवऑप्स (DevOps) इंजीनियर के तौर पर काम करते हैं और लिनक्स (Linux) पर बेस्ड एक यूट्यूब चैनल भी चलाते हैं। सूरज के मुताबिक, ‘मैं हाल ही में चल रहे विरोध प्रदर्शनों की खबरें देख रहा था। बहुत से लोग जंतर-मंतर पहुंचने की कोशिश कर रहे थे और इसके लिए वे अलग-अलग रास्ते अपना रहे थे। मेरे दिमाग में एक आइडिया आया – जो मेरे लिए एक तरह का ‘डार्क ह्यूमर’ (व्यंग्य) है तो मैंने सोचा कि क्यों न इस पर एक गेम बना लिया जाए।’ सूरज ने कहा कि हाल ही में चल रहे विरोध प्रदर्शनों की खबरें देख रहा था। बहुत से लोग जंतर-मंतर पहुंचने की कोशिश कर रहे थे और इसके लिए वे अलग-अलग रास्ते अपना रहे थे। मेरे दिमाग में एक आइडिया आया – ‘जो मेरे लिए एक तरह का ‘डार्क ह्यूमर’ (व्यंग्य) है तो मैंने सोचा कि क्यों न इस पर एक गेम बना लिया जाए।’ सूरज ने कॉलेज में गेम डिजाइन की पढ़ाई की थी, लेकिन उन्होंने कोडिंग के कुछ हिस्सों के लिए AI टूल्स और आर्ट डिजाइन के लिए अन्य टूल्स का इस्तेमाल किया। उन्होंने बताया कि गेमप्ले का कॉन्सेप्ट और डिजाइन उनका अपना है, जो ‘स्लिदर’ (Slither) गेम से प्रेरित है। ————– ये खबर भी पढ़ें.. ‘NEET पेपर बनता है, तभी बिकता है’:पेपर लीक कमेटी के प्रमुख नीलेकणि के 7 सुझाव, एग्जाम के कुछ घंटे पहले ही केश्चन पेपर तैयार हो NEET-UG पेपर लीक विवाद के बाद परीक्षा में सुधार के लिए बनाई गई हाई-पावर्ड टास्क फोर्स के प्रमुख और इंफोसिस के को-फाउंडर नंदन नीलेकणि ने पेपर लीक को रोकने का एक सुझाव दिया। पूरी खबर पढ़ें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Anupam Kher Statement on CJP Protest & PM Modi

Anupam Kher Statement on CJP Protest & PM Modi

14 मिनट पहले कॉपी लिंक अभिनेता अनुपम खेर ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे प्रदर्शनों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर की जा रही टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया दी है। अनुपम खेर ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो मैसेज जारी किया है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकार से सवाल पूछना और विरोध प्रदर्शन करना सभी का अधिकार है, लेकिन प्रधानमंत्री और उनकी मां के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल करना और पुलिसकर्मियों से बदसलूकी करना बिल्कुल गलत है। अनुपम ने प्रदर्शनकारियों से वोट चोरी के दावों के कानूनी सबूत देने की मांग की है। ‘गाली-गलौज से नहीं बनती विरोध की बात’ अनुपम खेर ने कहा कि वे प्रधानमंत्री के खिलाफ इस्तेमाल की जा रही अभद्र भाषा से काफी आहत हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश के प्रधानमंत्री पद का सम्मान होना चाहिए। अनुपम के अनुसार, किसी भी मुद्दे पर असहमति और विरोध का अपना स्थान होता है, लेकिन अपनी बात रखने के लिए गाली-गलौज का सहारा लेना सही नहीं है। उन्होंने प्रदर्शन के दौरान महिला पुलिसकर्मियों के साथ की गई बदसलूकी, अभद्र व्यवहार और उकसावे वाली हरकतों पर भी कड़ा एतराज जताया। ‘वोट चोरी के आरोप हैं तो सबूत पेश करें’ मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची में गड़बड़ी के आरोपों पर बोलते हुए अनुपम खेर ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में आरोपों को साबित करने के लिए सबूत जरूरी होते हैं। उन्होंने कहा कि अगर प्रदर्शनकारियों को चुनाव प्रक्रिया या चुनाव आयोग पर कोई शक है, तो उन्हें कानूनी और संवैधानिक रास्तों का इस्तेमाल करते हुए सबूत पेश करने चाहिए। अनुपम ने कहा कि वे पिछले 12 सालों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कामों को देखकर उनके नेतृत्व पर पूरा भरोसा रखते हैं और देश के करोड़ों लोगों की इस आस्था का भी सम्मान होना चाहिए। ‘भीगा हुआ आदमी बारिश से नहीं डरता’ सोशल मीडिया पर खुद को ‘अंधभक्त’ या ट्रोल किए जाने की आशंका पर अनुपम खेर ने अपने दादाजी की एक सीख को याद किया। उन्होंने बताया कि जब वे बॉलीवुड में काम की तलाश में संघर्ष कर रहे थे और रेलवे प्लेटफॉर्म पर सोते थे, तब उनके दादाजी ने उनसे कहा था कि ‘भीगा हुआ आदमी कभी बारिश से नहीं डरता’। अनुपम ने कहा कि अगर कुछ कलाकार प्रदर्शन के समर्थन में खड़े हो सकते हैं, तो सरकार के समर्थक भी अपनी बात खुलकर रख सकते हैं। वे किसी को खुश करने के लिए अपनी राय नहीं छिपाएंगे। CJP प्रदर्शन से जुड़ा है पूरा मामला यह विवाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ बुलाए गए देशव्यापी विरोध प्रदर्शन के बाद शुरू हुआ है। प्रदर्शनकारियों ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण (SIR) में धांधली और वोट चोरी के आरोप लगाते हुए चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की थी। दिल्ली के जंतर-मंतर और मुंबई के अगस्त क्रांति मैदान समेत कई जगहों पर हुए इन प्रदर्शनों के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी बहस हुई थी। मुंबई में प्रदर्शन के दौरान अभिनेता इमरान खान समेत कई लोगों को पुलिस ने हिरासत में भी लिया था, जिसके बाद से इस मुद्दे पर बयानबाजी जारी है। ये खबर भी पढ़ें अनुपम खेर@71; चेहरे पर लकवा मारा, फिर भी शूटिंग की:प्रोजेक्ट्स फ्लॉप हुए तो सिर्फ 400 रुपए बचे थे, रिकॉर्ड फिल्मफेयर अवॉर्ड जीते एक लड़का, जिसने नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) से अभिनय की तालीम हासिल की और बड़े ख्वाबों के साथ मुंबई पहुंचा। उसे एक फिल्म में शानदार किरदार मिला और उसने छह महीने तक पूरी लगन और मेहनत से उसकी तैयारी की। पूरी खबर पढ़ें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

नैनीताल की झील में गिरेंगी जाह्नवी कपूर,‘पीएन-36’ की शूटिंग जारी:बोट हाउस क्लब के पास फिल्माए जा रहे सीन, 20 अक्टूबर तक रहेगी फिल्म यूनिट

नैनीताल की झील में गिरेंगी जाह्नवी कपूर,‘पीएन-36’ की शूटिंग जारी:बोट हाउस क्लब के पास फिल्माए जा रहे सीन, 20 अक्टूबर तक रहेगी फिल्म यूनिट

नैनीताल की खूबसूरत नैनी झील इन दिनों फिल्म की शूटिंग का हिस्सा बनी हुई है। यहां फिल्म ‘पीएन 36’ की शूटिंग पिछले एक सप्ताह से चल रही है। अभिनेत्री जाह्नवी कपूर पर बोट हाउस क्लब के पास झील में गिरने के सीन फिल्माए जा रहे हैं। शुक्रवार को भी इसी स्थान पर शूटिंग जारी रहेगी। नयना देवी मंदिर में किए दर्शन फिल्म की शूटिंग के बीच जाह्नवी कपूर नवरात्रि के पहले दिन नयना देवी मंदिर पहुंची थीं। यहां उन्होंने पूजा-अर्चना की थी। फिल्म में उनके साथ साउथ की अभिनेत्री श्रीलीला और अभिनेता सिद्धार्थ गुप्ता भी नजर आएंगे। कहानी लीक होने से बचाने के लिए सुरक्षा स्विस होटल के प्रबंधक अनिल नेगी ने बताया कि फिल्म यूनिट के कई सदस्य उनके होटल में ठहरे हुए हैं। फिल्म की कहानी लीक होने की आशंका के चलते शूटिंग स्थल पर कड़ी सुरक्षा रखी गई है। नैनीताल में फिल्म का फिल्मांकन 20 अक्टूबर तक किया जाएगा।

Nana Patekar Amitabh Bachchan Fees Controversy

Nana Patekar Amitabh Bachchan Fees Controversy

19 मिनट पहले कॉपी लिंक फिल्म ‘दृश्यम’ में इंस्पेक्टर गायतोंडे का किरदार निभाने वाले अभिनेता कमलेश सावंत ने दिवंगत अभिनेता नाना पाटेकर से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा साझा किया है। पिंकविला को दिए एक इंटरव्यू में कमलेश ने बताया कि उन्होंने सुना था कि नाना पाटेकर अमिताभ बच्चन के साथ काम करने के लिए उनसे 1 रुपया ज्यादा फीस मांगते थे। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि यह सुनी-सुनाई बात है और वे इसकी पुष्टि नहीं करते। इसके अलावा कमलेश ने नाना की संवाद शैली के दौर और उनके समाज सेवा के कामों को याद किया है। 8 अक्टूबर को 75 साल की उम्र में नाना पाटेकर का निधन हो गया था। ‘दृश्यम’ में इंस्पेक्टर गायतोंडे का किरदार निभाने वाले अभिनेता कमलेश सावंत। ‘बच्चन साहब से 1 रुपया ज्यादा लूंगा’ कमलेश सावंत ने कहा कि उन्होंने नाना पाटेकर के साथ एक फिल्म में काम किया था, लेकिन उनके साथ कोई सीन नहीं था। उन्होंने बताया, “मैंने एक किस्सा सुना था कि नाना पाटेकर ने कहा था कि अगर मैं बच्चन साहब के साथ काम करूंगा तो 1 रुपया ज्यादा लूंगा। जब अमिताभ बच्चन को 1 करोड़ रुपए दिए गए, तो नाना ने 1 करोड़ 1 रुपया लिया।” ‘कोहराम’ फिल्म में साथ आए थे दोनों दिग्गज फिल्म रिकॉर्ड्स के मुताबिक, नाना पाटेकर और अमिताभ बच्चन ने साल 1999 में रिलीज हुई फिल्म ‘कोहराम’ में एक साथ काम किया था। उस दौर में अमिताभ बच्चन करीब 3 करोड़ रुपए फीस लेते थे, जबकि ‘क्रांतिवीर’ और ‘अग्नि साक्षी’ की सफलता के बाद नाना पाटेकर को प्रति फिल्म लगभग 1.25 करोड़ रुपए मिलते थे। उस समय नाना पाटेकर अमिताभ बच्चन के बाद इंडस्ट्री में सबसे ज्यादा फीस लेने वाले अभिनेताओं की सूची में शामिल थे। ‘सिनेमाघरों में डायलॉग्स पर सन्नाटा छा जाता था’ कमलेश सावंत ने बताया कि एक दौर में बॉलीवुड सिर्फ गानों और डांस पर चलता था, लेकिन नाना पाटेकर ने डायलॉग डिलीवरी का दौर शुरू किया और लोग उनके डायलॉग्स पर तालियां बजाते थे। उन्होंने मुंबई के गणेश टॉकीज और जय हिंद टॉकीज जैसे सिंगल स्क्रीन सिनेमाघरों का अनुभव शेयर करते हुए कहा कि केवल दो ही ऐसे कलाकार थे जिनके डायलॉग्स आने पर पूरे थिएटर में सन्नाटा छा जाता था- पहले अमिताभ बच्चन और दूसरे नाना पाटेकर। दर्शक उनके डायलॉग्स सुनने के लिए बिल्कुल शांत हो जाते थे। नाना पाटेकर की ‘नाम फाउंडेशन’ ग्रामीण क्षेत्रों में काम करती है। गांव के पानी का संकट दूर किया था कमलेश सावंत ने नाना पाटेकर के सामाजिक योगदान को याद करते हुए बताया कि महाराष्ट्र में उनके गांव ‘कोलोशी वरचीवाड़ी’ में पानी की गंभीर किल्लत थी। नाना पाटेकर की ‘नाम फाउंडेशन’ ने इस समस्या को दूर किया था। नाना खुद गांव पहुंचे थे और स्थिति को सुधारने में मदद की थी, जिसके बाद से गांव में पानी का कोई संकट नहीं है। कमलेश ने कहा कि नाना सिर्फ एक बेहतरीन कलाकार ही नहीं, बल्कि एक सक्रिय समाजसेवक भी थे। नाना पाटेकर का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया था। 8 अक्टूबर को हुआ था अचानक निधन 8 अक्टूबर 2026 को 75 वर्ष की उम्र में दिल का दौरा पड़ने से नाना पाटेकर का निधन हो गया था। कमलेश सावंत ने कहा कि उनका अचानक जाना सभी के लिए एक बड़ा झटका था, जिसे स्वीकार करना मुश्किल हो रहा है। वे किसी बीमारी से पीड़ित नहीं थे और उनका दृष्टिकोण काफी व्यापक था। यह खबर भी पढ़ें… रेपिस्ट के रोल पर नाना ने डायरेक्टर को गालियां दीं:’परिंदा’ के क्लाईमैक्स में आग से झुलसे, आर्मी जॉइन करने के लिए रक्षामंत्री को फोन किया नाना पाटेकर ने अपने करीब पांच दशक के करियर में कई यादगार किरदार निभाए थे। नाना अपने बेबाक और गुस्सैल अंदाज के लिए भी जाने जाते थे। एक बार डायरेक्टर रवि चोपड़ा ने उन्हें फिल्म में रेपिस्ट का रोल ऑफर किया तो नाना भड़क गए और उन्हें गालियां तक दे दीं। बाद में स्मिता पाटिल के हस्तक्षेप से मामला शांत हुआ और नाना को फिल्म में अहम विलेन का किरदार मिला। परिंदा की शूटिंग के दौरान भी उनका डायरेक्टर विधु विनोद चोपड़ा से विवाद हुआ था। पूरी खबर यहां पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

Nana Patekar Amitabh Bachchan Fees Controversy

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35 मिनट पहले कॉपी लिंक फिल्म ‘दृश्यम’ में इंस्पेक्टर गायतोंडे का किरदार निभाने वाले अभिनेता कमलेश सावंत ने दिवंगत अभिनेता नाना पाटेकर से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा साझा किया है। पिंकविला को दिए एक इंटरव्यू में कमलेश ने बताया कि उन्होंने सुना था कि नाना पाटेकर अमिताभ बच्चन के साथ काम करने के लिए उनसे 1 रुपया ज्यादा फीस मांगते थे। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि यह सुनी-सुनाई बात है और वे इसकी पुष्टि नहीं करते। इसके अलावा कमलेश ने नाना की संवाद शैली के दौर और उनके समाज सेवा के कामों को याद किया है। 8 अक्टूबर को 75 साल की उम्र में नाना पाटेकर का निधन हो गया था। ‘दृश्यम’ में इंस्पेक्टर गायतोंडे का किरदार निभाने वाले अभिनेता कमलेश सावंत। ‘बच्चन साहब से 1 रुपया ज्यादा लूंगा’ कमलेश सावंत ने कहा कि उन्होंने नाना पाटेकर के साथ एक फिल्म में काम किया था, लेकिन उनके साथ कोई सीन नहीं था। उन्होंने बताया, “मैंने एक किस्सा सुना था कि नाना पाटेकर ने कहा था कि अगर मैं बच्चन साहब के साथ काम करूंगा तो 1 रुपया ज्यादा लूंगा। जब अमिताभ बच्चन को 1 करोड़ रुपए दिए गए, तो नाना ने 1 करोड़ 1 रुपया लिया।” ‘कोहराम’ फिल्म में साथ आए थे दोनों दिग्गज फिल्म रिकॉर्ड्स के मुताबिक, नाना पाटेकर और अमिताभ बच्चन ने साल 1999 में रिलीज हुई फिल्म ‘कोहराम’ में एक साथ काम किया था। उस दौर में अमिताभ बच्चन करीब 3 करोड़ रुपए फीस लेते थे, जबकि ‘क्रांतिवीर’ और ‘अग्नि साक्षी’ की सफलता के बाद नाना पाटेकर को प्रति फिल्म लगभग 1.25 करोड़ रुपए मिलते थे। उस समय नाना पाटेकर अमिताभ बच्चन के बाद इंडस्ट्री में सबसे ज्यादा फीस लेने वाले अभिनेताओं की सूची में शामिल थे। ‘सिनेमाघरों में डायलॉग्स पर सन्नाटा छा जाता था’ कमलेश सावंत ने बताया कि एक दौर में बॉलीवुड सिर्फ गानों और डांस पर चलता था, लेकिन नाना पाटेकर ने डायलॉग डिलीवरी का दौर शुरू किया और लोग उनके डायलॉग्स पर तालियां बजाते थे। उन्होंने मुंबई के गणेश टॉकीज और जय हिंद टॉकीज जैसे सिंगल स्क्रीन सिनेमाघरों का अनुभव शेयर करते हुए कहा कि केवल दो ही ऐसे कलाकार थे जिनके डायलॉग्स आने पर पूरे थिएटर में सन्नाटा छा जाता था- पहले अमिताभ बच्चन और दूसरे नाना पाटेकर। दर्शक उनके डायलॉग्स सुनने के लिए बिल्कुल शांत हो जाते थे। नाना पाटेकर की ‘नाम फाउंडेशन’ ग्रामीण क्षेत्रों में काम करती है। गांव के पानी का संकट दूर किया था कमलेश सावंत ने नाना पाटेकर के सामाजिक योगदान को याद करते हुए बताया कि महाराष्ट्र में उनके गांव ‘कोलोशी वरचीवाड़ी’ में पानी की गंभीर किल्लत थी। नाना पाटेकर की ‘नाम फाउंडेशन’ ने इस समस्या को दूर किया था। नाना खुद गांव पहुंचे थे और स्थिति को सुधारने में मदद की थी, जिसके बाद से गांव में पानी का कोई संकट नहीं है। कमलेश ने कहा कि नाना सिर्फ एक बेहतरीन कलाकार ही नहीं, बल्कि एक सक्रिय समाजसेवक भी थे। नाना पाटेकर का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया था। 8 अक्टूबर को हुआ था अचानक निधन 8 अक्टूबर 2026 को 75 वर्ष की उम्र में दिल का दौरा पड़ने से नाना पाटेकर का निधन हो गया था। कमलेश सावंत ने कहा कि उनका अचानक जाना सभी के लिए एक बड़ा झटका था, जिसे स्वीकार करना मुश्किल हो रहा है। वे किसी बीमारी से पीड़ित नहीं थे और उनका दृष्टिकोण काफी व्यापक था। यह खबर भी पढ़ें… रेपिस्ट के रोल पर नाना ने डायरेक्टर को गालियां दीं:’परिंदा’ के क्लाईमैक्स में आग से झुलसे, आर्मी जॉइन करने के लिए रक्षामंत्री को फोन किया नाना पाटेकर ने अपने करीब पांच दशक के करियर में कई यादगार किरदार निभाए थे। नाना अपने बेबाक और गुस्सैल अंदाज के लिए भी जाने जाते थे। एक बार डायरेक्टर रवि चोपड़ा ने उन्हें फिल्म में रेपिस्ट का रोल ऑफर किया तो नाना भड़क गए और उन्हें गालियां तक दे दीं। बाद में स्मिता पाटिल के हस्तक्षेप से मामला शांत हुआ और नाना को फिल्म में अहम विलेन का किरदार मिला। परिंदा की शूटिंग के दौरान भी उनका डायरेक्टर विधु विनोद चोपड़ा से विवाद हुआ था। पूरी खबर यहां पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

Salman Khan Sultan Shooting Injuries & Health Struggles

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10 मिनट पहले कॉपी लिंक सलमान खान ने बुधवार को शो ‘कॉफी विद करण 9’ में बताया कि फिल्म ‘सुल्तान’ की शूटिंग के दौरान उनकी पसलियां टूट गई थीं। एक्टर ने बताया कि उन्हें हर्निया की तकलीफ हुई और उनका एक कंधा भी खराब हो गया था। इसके अलावा, उनके घुटने और पीठ में भी चोटें आई थीं। एक्टर ने ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया और ब्रेन एन्यूरिज्म का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इन परेशानियों के बावजूद वह अपनी हालत को फिट न रहने का बहाना नहीं मानते। इससे पहले जून 2025 में ‘द ग्रेट इंडियन कपिल शर्मा शो’ में सलमान ने अपनी सेहत को लेकर बात की थी। उन्होंने बताया था कि उन्हें ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया, ब्रेन एन्यूरिज्म और AV मालफॉर्मेशन जैसी समस्याएं हैं। 2011 में सलमान की अमेरिका में सर्जरी हुई थी सलमान खान काफी समय तक ‘ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया’ नाम की एक बेहद गंभीर और दर्दनाक न्यूरोलॉजिकल बीमारी से जूझ चुके हैं। ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया चेहरे की नस से जुड़ी एक ऐसी समस्या है, जिसमें अचानक बहुत तेज दर्द हो सकता है। यह दर्द चेहरे के एक तरफ, गाल, जबड़े या आंख के आसपास महसूस हो सकता है। कई बार चेहरे को छूने, दांत साफ करने, खाना चबाने या बोलने से भी दर्द शुरू हो जाता है। कुछ लोगों को ऐसा लगता है, जैसे चेहरे पर बिजली का झटका लगा हो। दर्द कुछ सेकंड से लेकर कुछ मिनट तक रह सकता है। हालांकि, हर मरीज में इसके लक्षण एक जैसे नहीं होते। सलमान को 2007 में चेहरे के एक तरफ दर्द महसूस हुआ था। बाद में यह परेशानी फिर सामने आई। साल 2011 में उन्होंने अमेरिका में इस बीमारी के इलाज के लिए सर्जरी कराई थी। सलमान ने सितंबर 2025 में टू मच विद काजोल एंड ट्विंकल शो में बताया था कि वे ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया के दर्द से लगभग साढ़े सात साल तक जूझते रहे। उन्होंने कहा कि उस दौरान दर्द से उनकी हालत बहुत खराब हो जाती थी। उन्होंने बताया था कि हर 4-5 मिनट में दर्द का दौरा पड़ता था। नाश्ता करने में उन्हें करीब डेढ़ घंटा लग जाता था और फिर वे सीधे रात का खाना खाते थे। एक साधारण ऑमलेट खाने में भी बहुत समय लगता था, क्योंकि दर्द के कारण खाना मुश्किल हो जाता था। दर्द निवारक दवाइयां भी कोई खास राहत नहीं देती थीं। शुरुआत में डॉक्टरों को लगा कि समस्या उनके दांतों में है, लेकिन बाद में पता चला कि यह नसों से जुड़ी बीमारी है। सलमान ने बताया कि उन्हें पहली बार यह दर्द 2007 में फिल्म ‘पार्टनर’ की शूटिंग के दौरान महसूस हुआ था। उस समय लारा दत्ता ने उनके चेहरे से बालों की एक लट हटाई थी। सलमान ने मजाक में कहा था, “मैंने कहा, ‘वाह लारा, कितना इलेक्ट्रिफाइंग!’ और वहीं से यह सब शुरू हुआ।” सलमान ने बताया था कि ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया की सर्जरी के बाद उन्हें इस समस्या से पूरी तरह राहत मिल गई थी। सलमान ने कहा था कि अब उनका वह दर्द पूरी तरह खत्म हो चुका है। उन्होंने बताया कि इस बीमारी को ‘सुसाइडल डिजीज’ भी कहा जाता है, क्योंकि इसका दर्द इतना असहनीय होता है कि इसे सहना बहुत मुश्किल हो जाता है। सलमान ने बताया था कि आजकल इस बीमारी का इलाज किया जा सकता है। गामा नाइफ सर्जरी नाम की प्रक्रिया से इसका उपचार किया जाता है। इसमें इलाज के दौरान मरीज के सिर और चेहरे को कई घंटों तक स्थिर रखा जाता है। सलमान ने बताया था कि उनकी सर्जरी करीब आठ घंटे चली थी। डॉक्टरों ने कहा था कि सर्जरी के बाद दर्द शायद 20-30 प्रतिशत कम होगा, लेकिन उनकी किस्मत अच्छी रही और दर्द पूरी तरह खत्म हो गया। हालांकि, उन्होंने यह भी बताया था कि उन्हें अब एन्यूरिज्म और आर्टिरियोवेनस मालफॉर्मेशन (AVM) जैसी दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं भी हैं। सलमान कई बार शूटिंग के दौरान चोटिल हुए हैं सलमान को फिल्मों की शूटिंग के दौरान पसलियों, कंधे, पैर और हाथ में चोटें आईं। ‘कॉफी विद करण 9’ में सलमान ने फिल्म ‘सुल्तान’ की शूटिंग के दौरान लगी चोटों का जिक्र किया। फिल्म ‘सिकंदर’ की शूटिंग के दौरान सलमान की दो पसलियां टूटने की खबर सामने आई थी। इसके बावजूद उन्होंने शूटिंग और रियलिटी शो ‘बिग बॉस’ की शूटिंग जारी रखी। हालांकि, उन्हें कई बार चोट लग चुकी है। साल 2025 में फिल्म मातृभूमि (बैटल ऑफ गलवान) की लद्दाख में शूटिंग के दौरान सलमान को चोटें आई थीं। कठिन मौसम और मुश्किल हालात में शूटिंग के दौरान उन्हें चोटें लगीं। इसके बाद उन्होंने मुंबई में अगले शूटिंग शेड्यूल से पहले कुछ दिन आराम करने का फैसला किया था। इससे पहले मई 2023 में सलमान खान ने सोशल मीडिया पर कंधे पर पट्टी लगी अपनी तस्वीर शेयर की थी। उन्होंने बताया था कि 5 किलो का डंबल उठाने के दौरान उन्हें चोट लगी थी। साल 2013 में फिल्म ‘जय हो’ की शूटिंग के दौरान भी सलमान के पैर में गंभीर चोट लगने की खबर आई थी। इसी फिल्म की शूटिंग के दौरान उनके हाथ में भी चोट लगी थी। 1992 में फिल्म ‘जागृति’ की शूटिंग के दौरान सह-अभिनेता अशोक सराफ के गले पर असली चाकू रखने का दृश्य था। हाल ही में अशोक सराफ ने एक इंटरव्यू में खुलासा किया था कि दबाव ज्यादा होने के कारण उनके गले पर कट लग गया था और खून बहने लगा था। इससे एक बड़ा हादसा होते-होते बचा था। ………….. यह खबर भी पढ़ें… सलमान खान बोले- मेरे बच्चे जरूर होंगे: शादी के फैसले पर भी बात की, संजय दत्त ने कहा- हमें भी गोद में छोटा सलमान चाहिए शो ‘कॉफी विद करण 9’ में सलमान खान ने कहा था कि भविष्य में उनके बच्चे जरूर होंगे। बुधवार को जियोहॉटस्टार पर स्ट्रीम हुए शो के पहले एपिसोड में उन्होंने शादी, अकेलेपन और निजी जिंदगी पर बात की थी। इस दौरान करिश्मा कपूर भी शो में पहुंची थीं। बातचीत के दौरान सलमान ने शादी, पिता बनने की इच्छा और अपनी जिंदगी पर फिल्म बनाए जाने से जुड़े सवालों के जवाब दिए। करण ने सलमान से पिता बनने की इच्छा के बारे में पूछा। इस पर एक्टर ने कहा कि किसी न किसी समय उनके बच्चे

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14 मिनट पहले कॉपी लिंक सलमान खान ने बुधवार को शो ‘कॉफी विद करण 9’ में बताया कि फिल्म ‘सुल्तान’ की शूटिंग के दौरान उनके सिर में चोट आई थी। एक्टर ने बताया कि उन्हें हार्निया की तकलीफ हुई और उनका एक कंधा भी चोटिल हो गया था। इसके अलावा, उनके घुटने और पीठ में भी चोटें आई थीं। एक्टर ने ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया और ब्रेन एन्यूरिज्म का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इन परेशानियों के बावजूद वह अपनी हालत को फिट न रहने का बहाना नहीं मानते। इससे पहले जून 2025 में ‘द ग्रेट इंडियन कपिल शर्मा शो’ में सलमान ने अपनी सेहत को लेकर बात की थी। उन्होंने बताया था कि उन्हें ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया, ब्रेन एन्यूरिज्म और AV मालफॉर्मेशन जैसी समस्याएं हैं। 2011 में सलमान की अमेरिका में सर्जरी हुई थी सलमान काफी समय तक ‘ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया’ नाम की एक गंभीर बीमारी से जूझ चुके हैं। ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया चेहरे की नस से जुड़ी एक ऐसी समस्या है, जिसमें अचानक बहुत तेज दर्द हो सकता है। यह दर्द चेहरे के एक तरफ, गाल, जबड़े या आंख के आसपास महसूस हो सकता है। कई बार चेहरे को छूने, दांत साफ करने, खाना चबाने या बोलने से भी दर्द शुरू हो जाता है। कुछ लोगों को ऐसा लगता है, जैसे चेहरे पर बिजली का झटका लगा हो। दर्द कुछ सेकंड से लेकर कुछ मिनट तक रह सकता है। हालांकि, हर मरीज में इसके लक्षण एक जैसे नहीं होते। सलमान को 2007 में चेहरे के एक तरफ दर्द महसूस हुआ था। बाद में यह परेशानी फिर सामने आई। साल 2011 में उन्होंने अमेरिका में इस बीमारी के इलाज के लिए सर्जरी कराई थी। सलमान ने सितंबर 2025 में टू मच विद काजोल एंड ट्विंकल शो में बताया था कि वे ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया के दर्द से लगभग साढ़े सात साल तक जूझते रहे। उन्होंने कहा कि उस दौरान दर्द से उनकी हालत बहुत खराब हो जाती थी। उन्होंने बताया था कि हर 4-5 मिनट में दर्द का दौरा पड़ता था। नाश्ता करने में उन्हें करीब डेढ़ घंटा लग जाता था और फिर वे सीधे रात का खाना खाते थे। एक साधारण ऑमलेट खाने में भी बहुत समय लगता था, क्योंकि दर्द के कारण खाना मुश्किल हो जाता था। दर्द निवारक दवाइयां भी कोई खास राहत नहीं देती थीं। शुरुआत में डॉक्टरों को लगा कि समस्या उनके दांतों में है, लेकिन बाद में पता चला कि यह नसों से जुड़ी बीमारी है। सलमान ने बताया कि उन्हें पहली बार यह दर्द 2007 में फिल्म ‘पार्टनर’ की शूटिंग के दौरान महसूस हुआ था। उस समय लारा दत्ता ने उनके चेहरे से बालों की एक लट हटाई थी। सलमान ने मजाक में कहा था, “मैंने कहा, ‘वाह लारा, कितना इलेक्ट्रिफाइंग!’ और वहीं से यह सब शुरू हुआ।” सलमान ने बताया था कि ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया की सर्जरी के बाद उन्हें इस समस्या से पूरी तरह राहत मिल गई थी। सलमान ने कहा था कि अब उनका वह दर्द पूरी तरह खत्म हो चुका है। उन्होंने बताया कि इस बीमारी को ‘सुसाइडल डिजीज’ भी कहा जाता है, क्योंकि इसका दर्द इतना असहनीय होता है कि इसे सहना बहुत मुश्किल हो जाता है। सलमान ने बताया था कि आजकल इस बीमारी का इलाज किया जा सकता है। गामा नाइफ सर्जरी नाम की प्रक्रिया से इसका उपचार किया जाता है। इसमें इलाज के दौरान मरीज के सिर और चेहरे को कई घंटों तक स्थिर रखा जाता है। सलमान ने बताया था कि उनकी सर्जरी करीब आठ घंटे चली थी। डॉक्टरों ने कहा था कि सर्जरी के बाद दर्द शायद 20-30 प्रतिशत कम होगा, लेकिन उनकी किस्मत अच्छी रही और दर्द पूरी तरह खत्म हो गया। हालांकि, उन्होंने यह भी बताया था कि उन्हें अब एन्यूरिज्म और आर्टिरियोवेनस मालफॉर्मेशन (AVM) जैसी दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं भी हैं। सलमान कई बार शूटिंग के दौरान चोटिल हुए हैं सलमान को फिल्मों की शूटिंग के दौरान पसलियों, कंधे, पैर और हाथ में चोटें आईं। ‘कॉफी विद करण 9’ में सलमान ने फिल्म ‘सुल्तान’ की शूटिंग के दौरान लगी चोटों का जिक्र किया। फिल्म ‘सिकंदर’ की शूटिंग के दौरान सलमान की दो पसलियां टूटने की खबर सामने आई थी। इसके बावजूद उन्होंने शूटिंग और रियलिटी शो ‘बिग बॉस’ की शूटिंग जारी रखी। हालांकि, उन्हें कई बार चोट लग चुकी है। साल 2025 में फिल्म मातृभूमि (बैटल ऑफ गलवान) की लद्दाख में शूटिंग के दौरान सलमान को चोटें आई थीं। कठिन मौसम और मुश्किल हालात में शूटिंग के दौरान उन्हें चोटें लगीं। इसके बाद उन्होंने मुंबई में अगले शूटिंग शेड्यूल से पहले कुछ दिन आराम करने का फैसला किया था। इससे पहले मई 2023 में सलमान खान ने सोशल मीडिया पर कंधे पर पट्टी लगी अपनी तस्वीर शेयर की थी। उन्होंने बताया था कि 5 किलो का डंबल उठाने के दौरान उन्हें चोट लगी थी। साल 2013 में फिल्म ‘जय हो’ की शूटिंग के दौरान भी सलमान के पैर में गंभीर चोट लगने की खबर आई थी। इसी फिल्म की शूटिंग के दौरान उनके हाथ में भी चोट लगी थी। 1992 में फिल्म ‘जागृति’ की शूटिंग के दौरान सह-अभिनेता अशोक सराफ के गले पर असली चाकू रखने का दृश्य था। हाल ही में अशोक सराफ ने एक इंटरव्यू में खुलासा किया था कि दबाव ज्यादा होने के कारण उनके गले पर कट लग गया था और खून बहने लगा था। इससे एक बड़ा हादसा होते-होते बचा था। ………….. यह खबर भी पढ़ें… सलमान खान बोले- मेरे बच्चे जरूर होंगे: शादी के फैसले पर भी बात की, संजय दत्त ने कहा- हमें भी गोद में छोटा सलमान चाहिए शो ‘कॉफी विद करण 9’ में सलमान खान ने कहा था कि भविष्य में उनके बच्चे जरूर होंगे। बुधवार को जियोहॉटस्टार पर स्ट्रीम हुए शो के पहले एपिसोड में उन्होंने शादी, अकेलेपन और निजी जिंदगी पर बात की थी। इस दौरान करिश्मा कपूर भी शो में पहुंची थीं। बातचीत के दौरान सलमान ने शादी, पिता बनने की इच्छा और अपनी जिंदगी पर फिल्म बनाए जाने से जुड़े सवालों के जवाब दिए। करण ने सलमान से पिता बनने की इच्छा के बारे में पूछा। इस पर एक्टर ने कहा कि किसी न किसी समय उनके बच्चे जरूर होंगे। उन्होंने करण

मूवी रिव्यू- जेलर 2: रजनीकांत का स्वैग बरकरार:एक्शन और सितारों का मेला; कमजोर कहानी और ढीली स्क्रीनप्ले ने मजा किया किरकिरा

मूवी रिव्यू- जेलर 2: रजनीकांत का स्वैग बरकरार:एक्शन और सितारों का मेला; कमजोर कहानी और ढीली स्क्रीनप्ले ने मजा किया किरकिरा

रजनीकांत स्क्रीन पर आएं और दुश्मनों की हवा टाइट न हो, ऐसा भला कैसे हो सकता है! उनका चश्मा लगाने का अंदाज हो, चलने का स्टाइल हो या फिर विलेन को बिना ज्यादा कुछ बोले सबक सिखाने वाला स्वैग, थलाइवा के फैंस के लिए ये सब किसी ट्रीट से कम नहीं है। जेलर 2 में भी रजनीकांत का भौकाल बरकरार है। एक्शन है, कॉमेडी है, बड़े सितारों की मौजूदगी है और खूब सारा मसाला भी। लेकिन पिक्चर में एक लोचा है। सितारों की महफिल तो सजती है, मगर कहानी कई बार अपना रास्ता भटक जाती है। यानी टाइगर की दहाड़ सुनाई तो देती है, लेकिन हर बार कहानी में दम नजर नहीं आता। कहानी: टाइगर की वापसी रजनीकांत एक बार फिर टाइगर मुथुवेल पांडियन के अंदाज में नजर आते हैं। इस बार भी मामला अपराध, दुश्मनी, खतरनाक लोगों और परिवार की सुरक्षा के इर्द गिर्द घूमता है। कहानी में ऐसे मोड़ आते हैं, जो टाइगर को फिर एक बार एक्शन मोड में ले आते हैं। एस.जे. सूर्या का किरदार बोधि कलपाक, विद्या बालन का कांथा कलपाक और मिथुन चक्रवर्ती की मौजूदगी कहानी में नए रंग जोड़ती है। फिल्म में कई ऐसे पल हैं, जहां लगता है कि अब कोई बड़ा धमाका होने वाला है। कुछ जगह ये उम्मीद पूरी भी होती है, लेकिन कई बार कहानी एक ही तरह के मसाले को दोबारा परोसने लगती है। फिल्म में एक्शन और स्टार पावर की कमी नहीं है, मगर कहानी को और कसकर बुना जाता तो मजा दोगुना हो सकता था। कुछ घटनाएं जरूरत से ज्यादा सुविधाजनक लगती हैं और कहानी का फ्लो भी बीच बीच में टूटता है। एक्टिंग: थलाइवा का अपना स्वैग रजनीकांत की सबसे बड़ी ताकत उनका स्क्रीन प्रेजेंस है। वह फ्रेम में आते हैं तो नजरें अपने आप उन पर टिक जाती हैं। उनका अंदाज, डायलॉग डिलीवरी और एक्शन करने का स्टाइल आज भी फैंस को सीटियां बजाने का मौका देता है। उम्र के इस पड़ाव पर भी उनका स्टारडम फिल्म का सबसे बड़ा आकर्षण बना रहता है। एस.जे. सूर्या अपने अंदाज से ध्यान खींचते हैं। उनके किरदार में अलग तरह की एनर्जी है और वह रजनीकांत के सामने अपनी मौजूदगी दर्ज कराते हैं। विद्या बालन और मिथुन चक्रवर्ती जैसे कलाकार फिल्म की स्टार वैल्यू बढ़ाते हैं, हालांकि हर किरदार को बराबर दमदार स्पेस नहीं मिल पाता। कॉमेडी के मोर्चे पर योगी बाबू और बाकी कलाकार कुछ हल्के फुल्के पल देते हैं। फिल्म में सितारों की भरमार है, लेकिन हर एंट्री यादगार बन जाए, ऐसा जरूरी नहीं। कुछ जगह स्टार पावर कहानी से आगे निकलती नजर आती है। डायरेक्शन: मसाला भरपूर, पकड़ कमजोर नेल्सन दिलीपकुमार को पता है कि रजनीकांत के स्टारडम को स्क्रीन पर कैसे भुनाना है। हीरो की एंट्री, एक्शन सीक्वेंस और कॉमेडी के बीच तालमेल बैठाने की कोशिश साफ नजर आती है। फिल्म में कुछ ऐसे मोमेंट्स हैं, जो थिएटर में दर्शकों को उत्साहित कर सकते हैं। दिक्कत तब होती है, जब फिल्म अपने ही मसाले को बार बार दोहराने लगती है। पहली फिल्म की सफलता के बाद सीक्वल से उम्मीदें बढ़ जाती हैं, लेकिन सिर्फ बड़े एक्शन और स्टार कैमियो से मजबूत कहानी की कमी पूरी नहीं होती। फिल्म का दूसरा हिस्सा ज्यादा टाइट हो सकता था। कई जगह स्क्रीनप्ले की रफ्तार धीमी पड़ती है और कुछ ट्विस्ट उतना असर नहीं छोड़ते, जितनी उनसे उम्मीद की जाती है। सिनेमैटोग्राफी और टेक्निकल पक्ष विजय कार्तिक कन्नन की सिनेमैटोग्राफी एक्शन और बड़े सेटअप को प्रभावशाली बनाने में मदद करती है। फिल्म का विजुअल ट्रीटमेंट भव्य है और एक्शन सीक्वेंस में जरूरी स्केल नजर आता है। बैकग्राउंड स्कोर भी कई दृश्यों का असर बढ़ाता है। लेकिन करीब पौने तीन घंटे की फिल्म में एडिटिंग की अहमियत और बढ़ जाती है। कुछ हिस्सों को छोटा किया जाता तो कहानी ज्यादा चुस्त लगती। जहां फिल्म को तेजी से आगे बढ़ना चाहिए, वहां वह कभी कभी ठहर जाती है। यही वजह है कि कुछ एक्शन सीक्वेंस दमदार होने के बावजूद पूरी फिल्म का पेस एक जैसा नहीं रहता। म्यूजिक: एंट्री में दम, माहौल में जोश अनिरुद्ध रविचंदर का बैकग्राउंड स्कोर फिल्म के एक्शन और रजनीकांत की एंट्री को वजन देता है। कई दृश्यों में संगीत माहौल को ज्यादा रोमांचक बनाता है और थलाइवा के स्वैग को और बड़ा करता है। हालांकि, संगीत और एक्शन के बीच संतुलन हर जगह एक जैसा नहीं है। कुछ हिस्सों में फिल्म की रफ्तार बनाए रखने की जरूरत ज्यादा महसूस होती है। बैकग्राउंड स्कोर अपना काम करता है, लेकिन कहानी की कमजोरियों को पूरी तरह ढक नहीं पाता। कहां रह गई कमी? जेलर 2 की सबसे बड़ी ताकत रजनीकांत हैं और सबसे बड़ी कमजोरी कहानी का ढीला पड़ता फ्लो। फिल्म में एक्शन, कॉमेडी और बड़े सितारों का तड़का है, लेकिन कुछ घटनाएं जरूरत से ज्यादा खिंची हुई लगती हैं। दूसरे हिस्से में स्क्रीनप्ले की पकड़ कमजोर पड़ती है और क्लाइमैक्स भी उतना दमदार असर नहीं छोड़ता, जितनी उम्मीद बनती है। सीक्वल से पहली फिल्म जैसा जादू दोहराने की उम्मीद रहती है। यहां कुछ पल उस दिशा में जाते हैं, मगर पूरी फिल्म उस स्तर की निरंतरता नहीं बना पाती। फिल्म को लेकर फाइनल वर्डिक्ट जेलर 2 रजनीकांत के फैंस के लिए एक बार फिर थलाइवा का स्वैग देखने का मौका है। उनकी एंट्री, एक्शन और कुछ मजेदार पल फिल्म को मनोरंजक बनाते हैं। एस.जे. सूर्या की मौजूदगी भी फिल्म में दिलचस्पी बनाए रखती है। लेकिन कमजोर पड़ता स्क्रीनप्ले, खिंची हुई कहानी और कम असरदार क्लाइमैक्स मजे में रुकावट डालते हैं। कुल मिलाकर, फिल्म में जलवा भी है, सितारों का मेला भी और एक्शन का तड़का भी, लेकिन कहानी हर बार साथ नहीं देती। रजनीकांत के कट्टर फैंस के लिए मसाला मौजूद है, मगर पहली जेलर जैसी बिजली की उम्मीद लेकर जाएंगे तो थोड़ी कमी जरूर महसूस हो सकती है।

मूवी रिव्यू- 'जेलर 2':रजनीकांत का स्वैग बरकरार; एक्शन और सेलेब्स का मेला, कमजोर कहानी और ढीली स्क्रीनप्ले ने मजा किया किरकिरा

मूवी रिव्यू- जेलर 2: रजनीकांत का स्वैग बरकरार:एक्शन और सितारों का मेला; कमजोर कहानी और ढीली स्क्रीनप्ले ने मजा किया किरकिरा

रजनीकांत स्क्रीन पर आएं और दुश्मनों की हवा टाइट न हो, ऐसा भला कैसे हो सकता है! उनका चश्मा लगाने का अंदाज हो, चलने का स्टाइल हो या फिर विलेन को बिना ज्यादा कुछ बोले सबक सिखाने वाला स्वैग, थलाइवा के फैंस के लिए ये सब किसी ट्रीट से कम नहीं है। फिल्म जेलर 2 में भी रजनीकांत का भौकाल बरकरार है। एक्शन है, कॉमेडी है, बड़े सितारों की मौजूदगी है और खूब सारा मसाला भी, लेकिन पिक्चर में एक लोचा है। सितारों की महफिल तो सजती है, मगर कहानी कई बार अपना रास्ता भटक जाती है। यानी टाइगर की दहाड़ सुनाई तो देती है, लेकिन हर बार कहानी में दम नजर नहीं आता। कहानी: टाइगर की वापसी रजनीकांत एक बार फिर टाइगर मुथुवेल पांडियन के अंदाज में नजर आते हैं। इस बार भी मामला अपराध, दुश्मनी, खतरनाक लोगों और परिवार की सुरक्षा के इर्द गिर्द घूमता है। कहानी में ऐसे मोड़ आते हैं, जो टाइगर को फिर एक बार एक्शन मोड में ले आते हैं। एस.जे. सूर्या का किरदार बोधि कलपाक, विद्या बालन का कांथा कलपाक और मिथुन चक्रवर्ती की मौजूदगी कहानी में नए रंग जोड़ती है। फिल्म में कई ऐसे पल हैं, जहां लगता है कि अब कोई बड़ा धमाका होने वाला है। कुछ जगह ये उम्मीद पूरी भी होती है, लेकिन कई बार कहानी एक ही तरह के मसाले को दोबारा परोसने लगती है। फिल्म में एक्शन और स्टार पावर की कमी नहीं है, मगर कहानी को और कसकर बुना जाता तो मजा दोगुना हो सकता था। कुछ घटनाएं जरूरत से ज्यादा सुविधाजनक लगती हैं और कहानी का फ्लो भी बीच बीच में टूटता है। एक्टिंग: थलाइवा का अपना स्वैग रजनीकांत की सबसे बड़ी ताकत उनका स्क्रीन प्रेजेंस है। वह फ्रेम में आते हैं तो नजरें अपने आप उन पर टिक जाती हैं। उनका अंदाज, डायलॉग डिलीवरी और एक्शन करने का स्टाइल आज भी फैंस को सीटियां बजाने का मौका देता है। उम्र के इस पड़ाव पर भी उनका स्टारडम फिल्म का सबसे बड़ा आकर्षण बना रहता है। एस.जे. सूर्या अपने अंदाज से ध्यान खींचते हैं। उनके किरदार में अलग तरह की एनर्जी है और वह रजनीकांत के सामने अपनी मौजूदगी दर्ज कराते हैं। विद्या बालन और मिथुन चक्रवर्ती जैसे कलाकार फिल्म की स्टार वैल्यू बढ़ाते हैं, हालांकि हर किरदार को बराबर दमदार स्पेस नहीं मिल पाता। कॉमेडी के मोर्चे पर योगी बाबू और बाकी कलाकार कुछ हल्के फुल्के पल देते हैं। फिल्म में सितारों की भरमार है, लेकिन हर एंट्री यादगार बन जाए, ऐसा जरूरी नहीं। कुछ जगह स्टार पावर कहानी से आगे निकलती नजर आती है। डायरेक्शन: मसाला भरपूर, पकड़ कमजोर नेल्सन दिलीप कुमार को पता है कि रजनीकांत के स्टारडम को स्क्रीन पर कैसे भुनाना है। हीरो की एंट्री, एक्शन सीक्वेंस और कॉमेडी के बीच तालमेल बैठाने की कोशिश साफ नजर आती है। फिल्म में कुछ ऐसे मोमेंट्स हैं, जो थिएटर में दर्शकों को उत्साहित कर सकते हैं। दिक्कत तब होती है, जब फिल्म अपने ही मसाले को बार बार दोहराने लगती है। पहली फिल्म की सफलता के बाद सीक्वल से उम्मीदें बढ़ जाती हैं, लेकिन सिर्फ बड़े एक्शन और स्टार कैमियो से मजबूत कहानी की कमी पूरी नहीं होती। फिल्म का दूसरा हिस्सा ज्यादा टाइट हो सकता था। कई जगह स्क्रीनप्ले की रफ्तार धीमी पड़ती है और कुछ ट्विस्ट उतना असर नहीं छोड़ते, जितनी उनसे उम्मीद की जाती है। सिनेमैटोग्राफी और टेक्निकल पक्ष विजय कार्तिक कन्नन की सिनेमैटोग्राफी एक्शन और बड़े सेटअप को प्रभावशाली बनाने में मदद करती है। फिल्म का विजुअल ट्रीटमेंट भव्य है और एक्शन सीक्वेंस में जरूरी स्केल नजर आता है। बैकग्राउंड स्कोर भी कई दृश्यों का असर बढ़ाता है। लेकिन करीब पौने तीन घंटे की फिल्म में एडिटिंग की अहमियत और बढ़ जाती है। कुछ हिस्सों को छोटा किया जाता तो कहानी ज्यादा चुस्त लगती। जहां फिल्म को तेजी से आगे बढ़ना चाहिए, वहां वह कभी कभी ठहर जाती है। यही वजह है कि कुछ एक्शन सीक्वेंस दमदार होने के बावजूद पूरी फिल्म का पेस एक जैसा नहीं रहता। म्यूजिक: एंट्री में दम, माहौल में जोश अनिरुद्ध रविचंदर का बैकग्राउंड स्कोर फिल्म के एक्शन और रजनीकांत की एंट्री को वजन देता है। कई दृश्यों में संगीत माहौल को ज्यादा रोमांचक बनाता है और थलाइवा के स्वैग को और बड़ा करता है। हालांकि, संगीत और एक्शन के बीच संतुलन हर जगह एक जैसा नहीं है। कुछ हिस्सों में फिल्म की रफ्तार बनाए रखने की जरूरत ज्यादा महसूस होती है। बैकग्राउंड स्कोर अपना काम करता है, लेकिन कहानी की कमजोरियों को पूरी तरह ढक नहीं पाता। कहां रह गई कमी? जेलर 2 की सबसे बड़ी ताकत रजनीकांत हैं और सबसे बड़ी कमजोरी कहानी का ढीला पड़ता फ्लो। फिल्म में एक्शन, कॉमेडी और बड़े सितारों का तड़का है, लेकिन कुछ घटनाएं जरूरत से ज्यादा खिंची हुई लगती हैं। दूसरे हिस्से में स्क्रीनप्ले की पकड़ कमजोर पड़ती है और क्लाइमैक्स भी उतना दमदार असर नहीं छोड़ता, जितनी उम्मीद बनती है। सीक्वल से पहली फिल्म जैसा जादू दोहराने की उम्मीद रहती है। यहां कुछ पल उस दिशा में जाते हैं, मगर पूरी फिल्म उस स्तर की निरंतरता नहीं बना पाती। फिल्म को लेकर फाइनल वर्डिक्ट जेलर 2 रजनीकांत के फैंस के लिए एक बार फिर थलाइवा का स्वैग देखने का मौका है। उनकी एंट्री, एक्शन और कुछ मजेदार पल फिल्म को मनोरंजक बनाते हैं। एस.जे. सूर्या की मौजूदगी भी फिल्म में दिलचस्पी बनाए रखती है। लेकिन कमजोर पड़ता स्क्रीनप्ले, खिंची हुई कहानी और कम असरदार क्लाइमैक्स मजे में रुकावट डालते हैं। कुल मिलाकर, फिल्म में जलवा भी है, सितारों का मेला भी और एक्शन का तड़का भी, लेकिन कहानी हर बार साथ नहीं देती। रजनीकांत के कट्टर फैंस के लिए मसाला मौजूद है, मगर पहली जेलर जैसी बिजली की उम्मीद लेकर जाएंगे तो थोड़ी कमी जरूर महसूस हो सकती है।