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SpaceX Buys AI Platform Cursor

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नई दिल्ली17 मिनट पहले

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इलॉन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स ने AI कोडिंग प्लेटफॉर्म ‘कर्सर’ की पैरेंट कंपनी एनिसफियर को 60 अरब डॉलर यानी करीब 5.67 लाख करोड़ रुपए में खरीदने के लिए एक मर्जर एग्रीमेंट किया है।

इस डील के बाद कर्सर के 25 वर्षीय भारतीय मूल के को-फाउंडर अमन संगर की अनुमानित नेटवर्थ बढ़कर 5.5 अरब डॉलर यानी करीब 51.98 हजार करोड़ रुपए हो गई है।

न्यूयॉर्क में जन्मे अमन संगर ने 14 साल की उम्र में कोडिंग शुरू कर दी थी। इसके बाद उन्होंने मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) से कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई की।

2022 में 21 साल की उम्र में अमन ने अपने तीन क्लासमेट्स- माइकल ट्रुएल, सुआलेह आसिफ और अरविद लुन्नेमार्क के साथ मिलकर कॉलेज छोड़ दिया। इन चारों ने इसी साल ‘कर्सर’ की शुरुआत की थी।

मैकेनिकल से AI कोडिंग तक का सफर

शुरुआत में इन चारों फाउंडर्स ने मैकेनिकल इंजीनियरिंग इंडस्ट्री के लिए एक AI कोपायलट बनाने की कोशिश की थी। हालांकि, बाद में उन्होंने अपना फोकस बदला और AI- असिस्टेड कोडिंग प्लेटफॉर्म बनाने पर काम शुरू किया।

लिंक्डइन पर अमन संगर ने अपने मिशन को बेहद आसान शब्दों में समझाया है- “सॉफ्टवेयर बनाने के रास्ते में आने वाली सभी बाधाओं को दूर करना।”

कर्सर कंपनी में अमन संगर की भूमिका

एनिसफियर कंपनी में अमन संगर चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर के रूप में काम कर रहे हैं। वहीं उनके साथी माइकल ट्रुएल CEO की भूमिका में हैं और सुआलेह आसिफ प्रोडक्ट हेड के तौर पर काम देख रहे हैं।

अमन संगर ने कर्सर की तेज ग्रोथ में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जहां वे प्रोडक्ट स्ट्रेटेजी, डिस्ट्रीब्यूशन और कम्युनिटी बिल्डिंग का काम संभालते हैं।

क्या है कर्सर प्लेटफॉर्म?

कर्सर एक AI बेस्ड कोडिंग टूल है। इसे इस तरह बनाया गया है, ताकि सॉफ्टवेयर डेवलपर्स बहुत आसानी और तेजी से अपना कोड लिख सकें, उसमें सुधार कर सकें और उसे समझ सकें।

पुराने कोडिंग टूल्स की तरह यह सिर्फ आगे का शब्द सुझाने (ऑटो-कम्प्लीट) का काम नहीं करता, बल्कि एक समझदार जोड़ीदार की तरह मदद करता है।

यह आपके पूरे प्रोजेक्ट के कोड को एक साथ समझ सकता है और बड़ी से बड़ी कोडिंग समस्याओं को पल भर में हल कर देता है।

अपनी इसी खूबी की वजह से यह डेवलपर्स और बड़ी कंपनियों के बीच काफी पसंद किया जा रहा है और AI की दुनिया में तेजी से उभर रहा है।

रिकॉर्ड कमाई: सालाना रेवेन्यू 4 अरब डॉलर पहुंचा

कर्सर प्लेटफॉर्म ने नवंबर 2025 में 1 अरब डॉलर यानी करीब 9.45 हजार करोड़ रुपए के सालाना रेवेन्यू का आंकड़ा पार किया था।

इसके बाद भी कंपनी की ग्रोथ नहीं रुकी और फोर्ब्स के अनुसार, इस महीने की शुरुआत तक कर्सर का सालाना रेवेन्यू 4 अरब डॉलर यानी 37.81 हजार करोड़ रुपए तक पहुंच गया।

मौजूदा समय में एनवीडिया, एडोबी, उबर, शॉपिफाई और पेपैल जैसी लगभग 50,000 कंपनियों के लाखों सॉफ्टवेयर डेवलपर्स कोड जनरेट और एडिट करने के लिए कर्सर का इस्तेमाल कर रहे हैं।

स्पेसएक्स डील की खास बातें

स्पेसएक्स ने मंगलवार को ऑल-स्टॉक ट्रांजैक्शन (शेयरों के जरिए) के तहत एनिसफियर के टेकओवर के लिए मर्जर एग्रीमेंट साइन किया है। यह घोषणा स्पेसएक्स के नैस्डैक पर रिकॉर्ड-ब्रेकिंग IPO आने के ठीक चार दिन बाद हुई है।

स्पेसएक्स ने कहा है कि उसे 2026 की तीसरी तिमाही तक इस मर्जर प्रक्रिया के पूरा होने की उम्मीद है। अमन संगर ने X पर पोस्ट किया- “कुछ बहुत ही मजबूत मॉडल्स को ट्रेन करने के लिए उत्साहित हूं!”

अमन संगर का बैकग्राउंड और भारतीय कनेक्शन

कर्सर की शुरुआत से पहले अमन संगर ने ब्रिजवाटर एसोसिएट्स और गूगल में इंटर्नशिप की थी, साथ ही वे अपनी खुद की AI कंसल्टेंसी भी चलाते थे।

उनके पिता अरविंद संगर IIT बॉम्बे के पूर्व छात्र और हेज फंड प्रोफेशनल हैं, जबकि उनकी मां शिल्पा संगर एक ऑर्थोडॉन्टिस्ट और एंटरप्रेन्योर हैं।

अमन की यह सफलता वैश्विक AI को आकार दे रहे भारतीय मूल के उन फाउंडर्स की बढ़ती लहर का हिस्सा है, जो IIT या बेंगलुरु से नहीं, बल्कि MIT और सिलिकॉन वैली से उभर रहे हैं।

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इस डील के बाद कर्सर के 25 वर्षीय भारतीय मूल के को-फाउंडर अमन संगर की अनुमानित नेटवर्थ बढ़कर 5.5 अरब डॉलर यानी करीब 51.98 हजार करोड़ रुपए हो गई है।

न्यूयॉर्क में जन्मे अमन संगर ने 14 साल की उम्र में कोडिंग शुरू कर दी थी। इसके बाद उन्होंने मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) से कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई की।

2022 में 21 साल की उम्र में अमन ने अपने तीन क्लासमेट्स- माइकल ट्रुएल, सुआलेह आसिफ और अरविद लुन्नेमार्क के साथ मिलकर कॉलेज छोड़ दिया। इन चारों ने इसी साल ‘कर्सर’ की शुरुआत की थी।

मैकेनिकल से AI कोडिंग तक का सफर

शुरुआत में इन चारों फाउंडर्स ने मैकेनिकल इंजीनियरिंग इंडस्ट्री के लिए एक AI कोपायलट बनाने की कोशिश की थी। हालांकि, बाद में उन्होंने अपना फोकस बदला और AI- असिस्टेड कोडिंग प्लेटफॉर्म बनाने पर काम शुरू किया।

लिंक्डइन पर अमन संगर ने अपने मिशन को बेहद आसान शब्दों में समझाया है- “सॉफ्टवेयर बनाने के रास्ते में आने वाली सभी बाधाओं को दूर करना।”

कर्सर कंपनी में अमन संगर की भूमिका

एनिसफियर कंपनी में अमन संगर चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर के रूप में काम कर रहे हैं। वहीं उनके साथी माइकल ट्रुएल CEO की भूमिका में हैं और सुआलेह आसिफ प्रोडक्ट हेड के तौर पर काम देख रहे हैं।

अमन संगर ने कर्सर की तेज ग्रोथ में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जहां वे प्रोडक्ट स्ट्रेटेजी, डिस्ट्रीब्यूशन और कम्युनिटी बिल्डिंग का काम संभालते हैं।

क्या है कर्सर प्लेटफॉर्म?

कर्सर एक AI बेस्ड कोडिंग टूल है। इसे इस तरह बनाया गया है, ताकि सॉफ्टवेयर डेवलपर्स बहुत आसानी और तेजी से अपना कोड लिख सकें, उसमें सुधार कर सकें और उसे समझ सकें।

पुराने कोडिंग टूल्स की तरह यह सिर्फ आगे का शब्द सुझाने (ऑटो-कम्प्लीट) का काम नहीं करता, बल्कि एक समझदार जोड़ीदार की तरह मदद करता है।

यह आपके पूरे प्रोजेक्ट के कोड को एक साथ समझ सकता है और बड़ी से बड़ी कोडिंग समस्याओं को पल भर में हल कर देता है।

अपनी इसी खूबी की वजह से यह डेवलपर्स और बड़ी कंपनियों के बीच काफी पसंद किया जा रहा है और AI की दुनिया में तेजी से उभर रहा है।

रिकॉर्ड कमाई: सालाना रेवेन्यू 4 अरब डॉलर पहुंचा

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इसके बाद भी कंपनी की ग्रोथ नहीं रुकी और फोर्ब्स के अनुसार, इस महीने की शुरुआत तक कर्सर का सालाना रेवेन्यू 4 अरब डॉलर यानी 37.81 हजार करोड़ रुपए तक पहुंच गया।

मौजूदा समय में एनवीडिया, एडोबी, उबर, शॉपिफाई और पेपैल जैसी लगभग 50,000 कंपनियों के लाखों सॉफ्टवेयर डेवलपर्स कोड जनरेट और एडिट करने के लिए कर्सर का इस्तेमाल कर रहे हैं।

स्पेसएक्स डील की खास बातें

स्पेसएक्स ने मंगलवार को ऑल-स्टॉक ट्रांजैक्शन (शेयरों के जरिए) के तहत एनिसफियर के टेकओवर के लिए मर्जर एग्रीमेंट साइन किया है। यह घोषणा स्पेसएक्स के नैस्डैक पर रिकॉर्ड-ब्रेकिंग IPO आने के ठीक चार दिन बाद हुई है।

स्पेसएक्स ने कहा है कि उसे 2026 की तीसरी तिमाही तक इस मर्जर प्रक्रिया के पूरा होने की उम्मीद है। अमन संगर ने X पर पोस्ट किया- “कुछ बहुत ही मजबूत मॉडल्स को ट्रेन करने के लिए उत्साहित हूं!”

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कर्सर की शुरुआत से पहले अमन संगर ने ब्रिजवाटर एसोसिएट्स और गूगल में इंटर्नशिप की थी, साथ ही वे अपनी खुद की AI कंसल्टेंसी भी चलाते थे।

उनके पिता अरविंद संगर IIT बॉम्बे के पूर्व छात्र और हेज फंड प्रोफेशनल हैं, जबकि उनकी मां शिल्पा संगर एक ऑर्थोडॉन्टिस्ट और एंटरप्रेन्योर हैं।

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