Sikar Student Suicide | Umesh Mali Ends Life Before NEET Exam Dream Shattered

Hindi News Career Sikar Student Suicide | Umesh Mali Ends Life Before NEET Exam Dream Shattered 12 मिनट पहले कॉपी लिंक 21 जून को नीट का एग्जाम है। जहां एक तरफ स्टूडेंट्स नीट की तैयारी में जुटे वहीं दूसरी तरफ नीट कैंडिडेट्स की सुसाइड की खबरे भी सामने आ रही हैं। राजस्थान के सीकर में रहने वाले 22 साल के छात्र उमेश माली ने सोमवार दोपहर अपने ही फ्लैट में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। 21 जून को उमेश की भी नीट की परीक्षा थी और ये उनका तीसरा अटेम्प्ट था। उमेश के पिता टाइल्स का काम करते हैं उमेश माली, झुंझुनूं के नवलगढ़ का रहने वाला था। उमेश के पिता लक्ष्मणराम मुंबई में टाइल्स ठेकेदारी का काम करते हैं और बच्चों की पढ़ाई के लिए उन्होंने सीकर में एक फ्लैट ले रखा था। इसी फ्लैट में उमेश अपनी मां, बड़ी बहन और छोटे भाई के साथ रहता था। एक दिन पहले ही घर से लौटा था उमेश उमेश सोमवार सुबह ही अपनी मां को गांव छोड़कर सीकर वापस लौटा था। रिपोर्ट के मुताबिक, उमेश फ्लैट पर अकेला था और दोपहर करीब ढाई बजे करीब उसने अपने फ्लैट पर सुसाइड कर लिया। दोपहर बाद जब उमेश की बड़ी बहन और छोटा भाई वापस फ्लैट पर लौटे, तब अंदर का नजारा देखकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। चीख-पुकार सुनकर आस-पास के लोग इकट्ठा हुए और तुरंत उद्योग नगर थाना पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस को तलाशी के दौरान उमेश के कमरे से सुसाइड नोट भी मिला है। सीकर में 22 वर्षीय नीट परीक्षार्थी उमेश माली की आत्महत्या का समाचार अत्यंत स्तब्ध करने वाला है। शोक संतप्त परिजनों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं। नीट प्रश्नपत्र लीक के कारण इस वर्ष राजस्थान के प्रदीप मेघवाल सहित कई बच्चों ने आत्मघाती कदम उठाए हैं। यह आत्महत्या नहीं, बल्कि…— Ashok Gehlot (@ashokgehlot51) June 16, 2026 पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने पेपर लीक को जिम्मेदार बताया मुख्यमंत्री ने अपनी पोस्ट में लिखा – सीकर में 22 वर्षीय नीट परीक्षार्थी उमेश माली की आत्महत्या का समाचार अत्यंत स्तब्ध करने वाला है। शोक संतप्त परिजनों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं। नीट प्रश्नपत्र लीक के कारण इस वर्ष राजस्थान के प्रदीप मेघवाल सहित कई बच्चों ने आत्मघाती कदम उठाए हैं। यह आत्महत्या नहीं, बल्कि, प्रश्न-पत्र लीक होने की व्यवस्था के सामने हमारे युवाओं का हौसला टूट रहा है। 16 जून को देहरादून की रिया ने भी सुसाइड किया देहरादून की रिया कुमारी थापा पढ़ाई में काफी होशियार थी। वह दो बार नीट की परीक्षा दे चुकी थी। लेकिन, इस बार नीट की परीक्षा को लेकर पिछले काफी समय से परेशान थी। आसपास के लोगों का कहना है कि पढ़ाई के प्रति उसकी लगन देखकर यकीन ही नहीं हो रहा है कि वह ऐसा कर सकती है। खुद ट्यूशन पढ़ाकर उठाती थी पढ़ाई का खर्च 16 जून को देहरादून की रिया का शब भी उनके घर में मिला था। रिया NEET की तैयारी कर रही थीं और पढ़ाई करने के साथ-साथ बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर अपनी परीक्षा फीस और किताबों का खर्च खुद उठाती थी। मंगलवार को रिया के कमरे का दरवाजा नहीं खुला, तो उसकी मां ने दरवाजा खटखटाया। काफी देर तक दरवाजा नहीं खुला तो उन्होंने पिता को बुलाया। पिता ने दरवाजा खोला तो अंदर रिया फांसी के फंदे पर लटकी मिली। रिया के पिता कारगिल युद्ध के दौरान जंग लड़ चुके हैं। वहीं, उसकी मां हाउसवाइफ हैं। पुलिस को कमरे से सुसाइड नोट मिला, जिसमें उसने पढ़ाई में सफलता ना मिलने का जिक्र किया है। परिचितों ने बताया कि रिया देर रात तक पढ़ाई करती थी। रिया ने 12वीं की परीक्षा में 97.6 % अंक हासिल कर कॉलेज टॉप किया था। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
तोड़ना | तृणमूल कांग्रेस की मान्यता पर पत्र के बाद अभिषेक बनर्जी ओम बिड़ला से मिलेंगे

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने अभिषेक बनर्जी को 19 जून को उनसे मिलने के लिए कहा है, जब बनर्जी ने उनसे किसी अन्य ब्लॉक को तृणमूल कांग्रेस के रूप में मान्यता नहीं देने का आग्रह किया था। n18oc_politics
alia bhatt did not replace deepika padukone from kalki 2898ad, getting trolled for alpha scene copy claim

1 मिनट पहले कॉपी लिंक अल्फा के टीजर से ट्रोलिंग के निशाने पर आईं आलिया भट्ट का कल्कि 2898 AD से दीपिका को रिप्लेस करना तय नहीं है। आलिया की कास्टिंग और फिल्म की शूटिंग करने के दावों को फिल्म से जुड़े स्पोक्सपर्सन ने निराधार कहा है। उन्होंने हिंदुस्तान टाइम्स से बातचीत में आलिया की कास्टिंग की खबरों पर कहा, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। किसी ने सोशल मीडिया पर यह बात पोस्ट कर दी और बाकी लोगों ने उसे खबर मानकर कॉपी-पेस्ट करना शुरू कर दिया। उनकी कास्टिंग को लेकर फिलहाल कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है।” स्पोक्सपर्सन ने उन दावों को भी निराधार बताया है, जिसमें कहा जा रहा था कि उन्होंने कुछ समय पहले ही फिल्म की 5 दिनों तक शूटिंग की है। दीपिका ने 8 घंटे की शिफ्ट डिमांड कर छोड़ी फिल्म सितंबर 2025 में फिल्म कल्कि के मेकर्स ने आधिकारिक बयान जारी कर बताया था कि दीपिका कल्कि के पार्ट-2 का हिस्सा नहीं होंगी। बाद में सामने आया कि मां बनने के बाद दीपिका ने फिल्मों में काम करने के लिए 8 घंटे की शिफ्ट में काम करने की डिमांड की थी। इस डिमांड के चलते उन्हें कल्कि और संदीप रेड्डी वांगा की स्पिरिट से भी निकाला गया है। खबरें सामने आने के बाद 8 घंटे की शिफ्ट बड़ा मुद्दा रही, जिस पर इंडस्ट्री में बड़ी बहस छिड़ गई। अल्फा से लगातार ट्रोल हो रही हैं आलिया भट्ट हाल ही में यशराज फिल्म्स के स्पाई यूनिवर्स की पहली फीमेल लीड फिल्म अल्फा का टीजर जारी हुआ था। टीजर में साफ लिखा गया था कि फिल्म ऑरिजिनल स्टोरी है, हालांकि टीजर के कई सीन हॉलीवुड फिल्म से मेल खाते थे। अल्फा के टीजर का एक सीन। 1990 की फिल्म ला फेमे निकिता का सीन। इसके अलावा अल्फा का पोस्टर भी काफी हद तक हॉलीवुड फिल्म ड्यून की तरह बनाया गया था। सीन और पोस्टर कॉपी किए जाने पर फिल्म के टीजर और आलिया की जमकर आलोचना हुई थी। फिल्म अल्फा का पोस्टर। हॉलीवुड फिल्म ड्यून का पोस्टर। आज जारी हुई है अल्फा का ट्रेलर आलिया भट्ट, शरवरी वाघ और बॉबी देओल स्टारर फिल्म अल्फा का ट्रेलर आज रिलीज किया जा चुका है। ट्रेलर एक्शन और एडवेंचर से भरपूर है। फिल्म में ऋतिक रोशन का भी कैमियो होने वाला है, जो यशराज फिल्म्स के स्पाई यूनिवर्स की फिल्म वॉर और वॉर 2 का हिस्सा रहे हैं। अल्फा यश राज फिल्म्स के स्पाई यूनिवर्स की 7वीं और फीमेल लीड वाली पहली फिल्म है। फिल्म 3 जुलाई को रिलीज होने के लिए शेड्यूल है। फिल्म का निर्देशन शिव रवैल ने किया है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
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15 मिनट पहले कॉपी लिंक अल्फा के टीजर से ट्रोलिंग के निशाने पर आईं आलिया भट्ट का कल्कि 2898 AD से दीपिका को रिप्लेस करना तय नहीं है। आलिया की कास्टिंग और फिल्म की शूटिंग करने के दावों को फिल्म से जुड़े स्पोक्सपर्सन ने निराधार कहा है। उन्होंने हिंदुस्तान टाइम्स से बातचीत में आलिया की कास्टिंग की खबरों पर कहा, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। किसी ने सोशल मीडिया पर यह बात पोस्ट कर दी और बाकी लोगों ने उसे खबर मानकर कॉपी-पेस्ट करना शुरू कर दिया। उनकी कास्टिंग को लेकर फिलहाल कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है।” स्पोक्सपर्सन ने उन दावों को भी निराधार बताया है, जिसमें कहा जा रहा था कि उन्होंने कुछ समय पहले ही फिल्म की 5 दिनों तक शूटिंग की है। दीपिका ने 8 घंटे की शिफ्ट डिमांड कर छोड़ी फिल्म सितंबर 2025 में फिल्म कल्कि के मेकर्स ने आधिकारिक बयान जारी कर बताया था कि दीपिका कल्कि के पार्ट-2 का हिस्सा नहीं होंगी। बाद में सामने आया कि मां बनने के बाद दीपिका ने फिल्मों में काम करने के लिए 8 घंटे की शिफ्ट में काम करने की डिमांड की थी। इस डिमांड के चलते उन्हें कल्कि और संदीप रेड्डी वांगा की स्पिरिट से भी निकाला गया है। खबरें सामने आने के बाद 8 घंटे की शिफ्ट बड़ा मुद्दा रही, जिस पर इंडस्ट्री में बड़ी बहस छिड़ गई। अल्फा से लगातार ट्रोल हो रही हैं आलिया भट्ट हाल ही में यशराज फिल्म्स के स्पाई यूनिवर्स की पहली फीमेल लीड फिल्म अल्फा का टीजर जारी हुआ था। टीजर में साफ लिखा गया था कि फिल्म ऑरिजिनल स्टोरी है, हालांकि टीजर के कई सीन हॉलीवुड फिल्म से मेल खाते थे। अल्फा के टीजर का एक सीन। 1990 की फिल्म ला फेमे निकिता का सीन। इसके अलावा अल्फा का पोस्टर भी काफी हद तक हॉलीवुड फिल्म ड्यून की तरह बनाया गया था। सीन और पोस्टर कॉपी किए जाने पर फिल्म के टीजर और आलिया की जमकर आलोचना हुई थी। फिल्म अल्फा का पोस्टर। हॉलीवुड फिल्म ड्यून का पोस्टर। आज जारी हुई है अल्फा का ट्रेलर आलिया भट्ट, शरवरी वाघ और बॉबी देओल स्टारर फिल्म अल्फा का ट्रेलर आज रिलीज किया जा चुका है। ट्रेलर एक्शन और एडवेंचर से भरपूर है। फिल्म में ऋतिक रोशन का भी कैमियो होने वाला है, जो यशराज फिल्म्स के स्पाई यूनिवर्स की फिल्म वॉर और वॉर 2 का हिस्सा रहे हैं। अल्फा यश राज फिल्म्स के स्पाई यूनिवर्स की 7वीं और फीमेल लीड वाली पहली फिल्म है। फिल्म 3 जुलाई को रिलीज होने के लिए शेड्यूल है। फिल्म का निर्देशन शिव रवैल ने किया है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
US Restores Pacific Command Name, Reverses 2018 Indo-Pacific Rebranding

वॉशिंगटन डीसी15 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने घोषणा की है कि US इंडो-पैसिफिक कमांड (USINDOPACOM) का नाम बदलकर फिर से US पैसिफिक कमांड (USPACOM) कर दिया गया है। अब इस कमांड से ‘इंडो’ शब्द हटा दिया गया है। अमेरिकी रक्षा मंत्री जिम मैटिस ने 2018 में कमांड के नाम में बदलाव किया था। उस समय अमेरिका ने कहा था कि हिंद महासागर (इंडियन ओशियन) क्षेत्र का रणनीतिक महत्व बढ़ रहा है और यह क्षेत्र प्रशांत महासागर (पैसिफिक ओशियन) की सुरक्षा व्यवस्था से पहले की तुलना में ज्यादा जुड़ गया है। 2018 में अमेरिकी रक्षा मंत्री जिम मैटिस ने इस सैन्य कमांड का नाम बदलकर इंडो-पैसिफिक कमांड कर दिया था। अमेरिका का कहना था कि हिंद महासागर का महत्व तेजी से बढ़ रहा है और अब हिंद महासागर तथा प्रशांत महासागर की सुरक्षा और रणनीति एक-दूसरे से पहले से ज्यादा जुड़ गई हैं। इसलिए कमांड के नाम में इंडो (हिंद महासागर) को भी शामिल किया गया था। यूएस-पैसिफिक कमांड क्या है? अमेरिकी सेना पूरी दुनिया को अलग-अलग क्षेत्रों में बांटकर चलती है। इनके लिए 11 यूनिफाइड कॉम्बैटेंट कमांड हैं। इनमें से 6 स्ट्रैटेजिक और 5 फंक्शनल कमांड हैं। यूएस पैसिफिक स्ट्रैटेजिक कमांड का हिस्सा है। यह अमेरिका की सबसे बड़ी और सबसे अहम सैन्य कमांडों में से एक है। यह कमांड एशिया और प्रशांत महासागर इलाके में एक्टिव है। अब नाम बदलने पर चर्चा क्यों है? अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने कहा कि यूएस पैसिफिक कमांड नाम बहुत पुराना और ऐतिहासिक है। इसे वापस लाने से सैनिकों को अपनी विरासत पर गर्व महसूस होगा। यह नाम कई बड़े युद्धों और महत्वपूर्ण मिशनों से जुड़ा रहा है, इसलिए इसे फिर से अपनाया गया है। पेंटागन ने यह भी कहा कि कमांड का सिर्फ नाम बदला है, रणनीति और जिम्मेदारियों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। लेकिन कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि इंडो शब्द हटने से यह मैसेज जा सकता है कि अमेरिका हिंद महासागर और भारत को पहले जितना प्रमुख महत्व नहीं दिखाना चाहता। अपने पहले कार्यकाल में ट्रम्प चीन को सबसे बड़ा खतरा मानते थे। तब वे दिखाना चाहते थे कि भारत उसकी एशिया रणनीति का अहम हिस्सा है और चीन को काउंटर करने में भारत की अहम भूमिका है। उन्होंने यह भी जताने की कोशिश की थी कि हिंद महासागर और प्रशांत महासागर को एक ही रणनीतिक क्षेत्र हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक अब शायद ट्रम्प की प्राथमिकताएं बदल गई हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
US Restores Pacific Command Name, Reverses 2018 Indo-Pacific Rebranding

वॉशिंगटन डीसी47 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने घोषणा की है कि US इंडो-पैसिफिक कमांड (USINDOPACOM) का नाम बदलकर फिर से US पैसिफिक कमांड (USPACOM) कर दिया गया है। अब इस कमांड से ‘इंडो’ शब्द हटा दिया गया है। अमेरिकी रक्षा मंत्री जिम मैटिस ने 2018 में कमांड के नाम में बदलाव किया था। उस समय अमेरिका ने कहा था कि हिंद महासागर (इंडियन ओशियन) क्षेत्र का रणनीतिक महत्व बढ़ रहा है और यह क्षेत्र प्रशांत महासागर (पैसिफिक ओशियन) की सुरक्षा व्यवस्था से पहले की तुलना में ज्यादा जुड़ गया है। 2018 में अमेरिकी रक्षा मंत्री जिम मैटिस ने इस सैन्य कमांड का नाम बदलकर इंडो-पैसिफिक कमांड कर दिया था। अमेरिका का कहना था कि हिंद महासागर का महत्व तेजी से बढ़ रहा है और अब हिंद महासागर तथा प्रशांत महासागर की सुरक्षा और रणनीति एक-दूसरे से पहले से ज्यादा जुड़ गई हैं। इसलिए कमांड के नाम में इंडो (हिंद महासागर) को भी शामिल किया गया था। यूएस-पैसिफिक कमांड क्या है? अमेरिकी सेना पूरी दुनिया को अलग-अलग क्षेत्रों में बांटकर चलती है। इनके लिए 11 कमांड हैं। इनमें से 6 स्ट्रैटेजिक और 5 फंक्शनल कमांड हैं। यूएस पैसिफिक स्ट्रैटेजिक कमांड का हिस्सा है। यह अमेरिका की सबसे बड़ी और सबसे अहम सैन्य कमांडों में से एक है। यह कमांड एशिया और प्रशांत महासागर इलाके में एक्टिव है। अब नाम बदलने पर चर्चा क्यों है? अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने कहा कि यूएस पैसिफिक कमांड नाम बहुत पुराना और ऐतिहासिक है। इसे वापस लाने से सैनिकों को अपनी विरासत पर गर्व महसूस होगा। यह नाम कई बड़े युद्धों और महत्वपूर्ण मिशनों से जुड़ा रहा है, इसलिए इसे फिर से अपनाया गया है। पेंटागन ने यह भी कहा कि कमांड का सिर्फ नाम बदला है, रणनीति और जिम्मेदारियों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। लेकिन कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि इंडो शब्द हटने से यह मैसेज जा सकता है कि अमेरिका हिंद महासागर और भारत को पहले जितना प्रमुख महत्व नहीं दिखाना चाहता। अपने पहले कार्यकाल में ट्रम्प चीन को सबसे बड़ा खतरा मानते थे। तब वे दिखाना चाहते थे कि भारत उसकी एशिया रणनीति का अहम हिस्सा है और चीन को काउंटर करने में भारत की अहम भूमिका है। उन्होंने यह भी जताने की कोशिश की थी कि हिंद महासागर और प्रशांत महासागर को एक ही रणनीतिक क्षेत्र हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक अब शायद ट्रम्प की प्राथमिकताएं बदल गई हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
चार ड्रॉप-आउट्स ने बनाई कर्सर की पैरेंट कंपनी एनीस्फीयर:11 साल में ट्रूल ने बिना सैलरी कंपनी शुरू की; 25 में स्पेसएक्स से बड़ी डील

माइकल ट्रूल को सुर्खियों से दूर रहकर कोडिंग पसंद है। सैलरी में दिलचस्पी नहीं रही। लेकिन महज 25 साल की उम्र में उनकी कंपनी कर्सर डेवलपर टूल्स सेगमेंट की सबसे बड़ी डील के केंद्र में है। स्पेसएक्स ने इसे 60 अरब डॉलर (~5.6 लाख करोड़) में खरीदने का ऐलान किया है। न्यूयॉर्क में जन्मे ट्रूल ने 11 साल की उम्र में कोडिंग शुरू की, होरेस मैन स्कूल के बाद एमआईटी पहुंचे और 18 साल की उम्र में गूगल में लैंग्वेज मॉडल्स पर इंटर्न रहे। 2022 में डिग्री छोड़कर एमआईटी के तीन साथियों- अमन सांगर, सुलेह आसिफ और आर्विड लुनेमार्क के साथ एनीस्फीयर बनाई, जो कर्सर की पैरेंट कंपनी है। शुरुआत में कंपनी कई आइडिया पर हाथ आजमाती रही, आखिरकार एआई बेस्ड कोडिंग टूल्स पर दांव सही साबित हुआ। 2023 में लॉन्च हुआ कर्सर डेवलपर्स को कोड लिखने, एडिट और डिबग करने में मदद करता है। 2025 के आखिर तक फोर्ब्स ने इसका वैल्युएशन करीब 2.8 लाख करोड़ आंका था। ओपनएआई-एंथ्रोपिक जैसे दिग्गजों के साथ यह ‘एआई कोडिंग’ सेगमेंट का अहम खिलाड़ी बन गया। कामयाबी के बावजूद ट्रूल कम बोलने और पब्लिक से दूर रहने वाले शख्स माने जाते हैं। शुरुआती सालों में सैलरी तक नहीं ली, छोटी-चुनिंदा टीम के लिए सख्त हायरिंग नीति और हमेशा एक ‘जेनरेशनल कंपनी’ बनाने का लक्ष्य रखा। बहरहाल, मंगलवार को हुई डील के बाद एनीस्फीयर स्पेसएक्स की पूर्ण सहायक कंपनी बन जाएगी। डील तीसरी तिमाही तक पूरी हो सकती है। टेकक्रंच के मुताबिक, इससे पहले स्पेसएक्स के पास 60 अरब डॉलर में कर्सर खरीदने या 10 अरब डॉलर देकर पार्टनरशिप जारी रखने का विकल्प था। आईपीओ के कुछ दिन बाद हुई यह डील एक्सएआई को मजबूत करने की कोशिश मानी जा रही है। बिजनेस इनसाइडर के मुताबिक, कर्सर ने थर्ड-पार्टी पर निर्भरता घटाने के लिए खुद की ‘कंपोजर’ मॉडल सीरीज बनाई थी, लेकिन इन्हें चलाने के लिए भारी कंप्यूटिंग पावर चाहिए। यही वजह है कि स्पेसएक्स का ‘कोलोसस’ इंफ्रास्ट्रक्चर इस डील की अहम वजह बना। ट्रूल के लिए यह टीनएज कोडर से अरबपति फाउंडर बनने तक का सफर है, और स्पेसएक्स के लिए एआई दिग्गजों से फासला घटाने की कोशिश। ट्रूल ने 18 की उम्र से ही शुरू कर दिया था एआई पर काम 2022 – एमआईटी छोड़ा, तीन साथियों के साथ खुद की कंपनी एनीस्फीयर बनाई। 2023 – कर्सर लॉन्च किया, 1 साल में ही आय 10 करोड़ डॉलर पार। 2025 – वैल्यूएशन 30 अरब डॉलर, आय 1 अरब डॉलर के पार। 2026 – 25 साल की उम्र में स्पेसएक्स के साथ 60 अरब डॉलर की बड़ी डील की।
Gold Prices Dip Rs 558 to Rs 1.50 Lakh10g; Silver Down Rs 744

नई दिल्ली2 मिनट पहले कॉपी लिंक सोने-चांदी के दाम में आज यानी 17 जून को गिरावट है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, एक किलो चांदी 744 रुपए गिरकर 2.48 लाख रुपए पर आ गई। इससे पहले इसकी कीमत 2.49 लाख रुपए प्रति किलो थी। वहीं, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 558 रुपए गिरकर 1.50 लाख रुपए पर आ गया है। चांदी इस साल 18 हजार और सोना 17 हजार महंगा हुआ हालांकि इस साल सोने-चांदी की कीमत बढ़ी है। सोना 2026 में अब तक 17 हजार रुपए महंगा हो चुका है। 31 दिसंबर 2025 को 10g सोना 1.33 लाख रुपए पर था, जो अब 1.50 लाख रुपए पर है। वहीं, चांदी 31 दिसंबर 2025 को 2.30 लाख रुपए किलो थी, जो अब 2.48 लाख रुपए पर है। सोने की कीमत 1.93 लाख तक जा सकती है अमेरिकी बैंकिंग व फाइनेंशियल सर्विसेज ग्रुप वेल्स फार्गो ने सोने की कीमत का लक्ष्य बढ़ाकर 6,100-6,300 डॉलर प्रति औंस कर दिया। यानी इसकी कीमत 1.93 लाख तक जा सकती है। वहीं औद्योगिक मांग और सप्लाई की कमी से चांदी लंबी अवधि में निवेशकों को फायदा दे सकती है। ज्वेलर्स से सोना खरीदते समय इन 2 बातों का रखें ध्यान सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें: हमेशा ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) का हॉलमार्क लगा हुआ सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें। ये नंबर अल्फान्यूमेरिक यानी कुछ इस तरह से हो सकता है- AZ4524। हॉलमार्किंग से पता चलता है कि सोना कितने कैरेट का है। कीमत क्रॉस चेक करें: सोने का सही वजन और खरीदने के दिन उसकी कीमत कई सोर्सेज (जैसे इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट) से क्रॉस चेक करें। सोने का भाव 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट के हिसाब से अलग-अलग होता है। असली चांदी की पहचान करने के 4 तरीके मैग्नेट टेस्ट: असली सिल्वर चुंबक से नहीं चिपकती। अगर चिपक जाए तो फेक है। आइस टेस्ट: सिल्वर पर बर्फ रखें। असली सिल्वर पर बर्फ तेजी से पिघलती है। स्मेल टेस्ट: असली सिल्वर में गंध नहीं होती। फेक में कॉपर जैसी गंध आती है। क्लॉथ टेस्ट: चांदी को सफेद कपड़े से रगड़ें। अगर काला निशान आए तो असली है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Gold Prices Dip Rs 558 to Rs 1.50 Lakh10g; Silver Down Rs 744

नई दिल्ली28 मिनट पहले कॉपी लिंक सोने-चांदी के दाम में आज यानी 17 जून को गिरावट है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, एक किलो चांदी 744 रुपए गिरकर 2.48 लाख रुपए पर आ गई। इससे पहले इसकी कीमत 2.49 लाख रुपए प्रति किलो थी। वहीं, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 558 रुपए गिरकर 1.50 लाख रुपए पर आ गया है। चांदी इस साल 18 हजार और सोना 17 हजार महंगा हुआ हालांकि इस साल सोने-चांदी की कीमत बढ़ी है। सोना 2026 में अब तक 17 हजार रुपए महंगा हो चुका है। 31 दिसंबर 2025 को 10g सोना 1.33 लाख रुपए पर था, जो अब 1.50 लाख रुपए पर है। वहीं, चांदी 31 दिसंबर 2025 को 2.30 लाख रुपए किलो थी, जो अब 2.48 लाख रुपए पर है। सोने की कीमत 1.93 लाख तक जा सकती है अमेरिकी बैंकिंग व फाइनेंशियल सर्विसेज ग्रुप वेल्स फार्गो ने सोने की कीमत का लक्ष्य बढ़ाकर 6,100-6,300 डॉलर प्रति औंस कर दिया। यानी इसकी कीमत 1.93 लाख तक जा सकती है। वहीं औद्योगिक मांग और सप्लाई की कमी से चांदी लंबी अवधि में निवेशकों को फायदा दे सकती है। ज्वेलर्स से सोना खरीदते समय इन 2 बातों का रखें ध्यान सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें: हमेशा ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) का हॉलमार्क लगा हुआ सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें। ये नंबर अल्फान्यूमेरिक यानी कुछ इस तरह से हो सकता है- AZ4524। हॉलमार्किंग से पता चलता है कि सोना कितने कैरेट का है। कीमत क्रॉस चेक करें: सोने का सही वजन और खरीदने के दिन उसकी कीमत कई सोर्सेज (जैसे इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट) से क्रॉस चेक करें। सोने का भाव 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट के हिसाब से अलग-अलग होता है। असली चांदी की पहचान करने के 4 तरीके मैग्नेट टेस्ट: असली सिल्वर चुंबक से नहीं चिपकती। अगर चिपक जाए तो फेक है। आइस टेस्ट: सिल्वर पर बर्फ रखें। असली सिल्वर पर बर्फ तेजी से पिघलती है। स्मेल टेस्ट: असली सिल्वर में गंध नहीं होती। फेक में कॉपर जैसी गंध आती है। क्लॉथ टेस्ट: चांदी को सफेद कपड़े से रगड़ें। अगर काला निशान आए तो असली है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
‘बेईमानी उनके खून में है’: पार्टी विभाजन विवाद के बीच संजय राउत ने विद्रोही सेना यूबीटी सांसदों को अपशब्द कहे | भारत समाचार

आखरी अपडेट:17 जून, 2026, 12:30 IST संजय राउत ने चेतावनी दी कि पार्टी छोड़ने के इच्छुक किसी भी सांसद को पहले अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए और लोगों से नया जनादेश मांगना चाहिए। शिवसेना यूबीटी में फूट की अटकलों के बीच पार्टी सांसद संजय राउत का कहना है, ‘अगर कोई जाना चाहता है तो इस्तीफा देकर जा सकता है। शिव सेना विभाजन पंक्ति: शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सांसद संजय राउत बुधवार को उस समय विवादों में घिर गए जब उन्होंने उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले गुट के भीतर संभावित विभाजन की अटकलों के बीच बागी सांसदों को निशाना बनाते हुए अपशब्द कहे। पार्टी नेताओं अरविंद सावंत और अनिल देसाई के साथ नई दिल्ली में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए, राउत ने एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के संपर्क में होने की अफवाह वाले नेताओं पर तीखा हमला बोला। किसी व्यक्ति का नाम लिए बिना, राउत ने संदिग्ध विद्रोहियों को “बेईमान” बताया और कहा कि “बेईमानी उनके खून में है”। अपशब्दों की झड़ी लगाने और बागी सांसदों को बेईमान (विश्वासघाती) बताने के बाद, राउत ने मीडिया को संबोधित करते हुए पत्रकारों से आग्रह किया कि वे उनकी गालियों को बीप न करें। राउत ने कहा कि निर्वाचित प्रतिनिधि आ सकते हैं और जा सकते हैं, लेकिन पार्टी के प्रति वफादारी बरकरार रहनी चाहिए। उन्होंने शिवसेना के संस्थापक बालासाहेब ठाकरे और पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे का जिक्र करते हुए कहा कि पार्टी नेताओं ने दशकों तक कार्यकर्ताओं का पोषण और समर्थन किया है और उन्हें धोखा नहीं दिया जाना चाहिए। राउत ने कहा कि पार्टी के पास किसी भी विभाजन के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है और मीडिया के माध्यम से कुछ सांसदों के अलग होने की खबरों के बारे में पता चल रहा है। उन्होंने कहा कि शिवसेना (यूबीटी) ने कानूनी कदम उठाना शुरू कर दिया है, गुरुवार को होने वाली अपनी संसदीय दल की बैठक से पहले व्हिप जारी किया है और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप सख्ती से कार्य करने के लिए कहा है। शिवसेना (यूबीटी) नेता ने यह भी चेतावनी दी कि पार्टी छोड़ने के इच्छुक किसी भी सांसद को पहले अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए और लोगों से नया जनादेश मांगना चाहिए। राउत ने दिल्ली में संवाददाताओं से कहा, “अगर कोई जाना चाहता है तो इस्तीफा देकर जा सकता है। अगर हमारे सांसदों के बारे में ऐसी खबरें सामने आती हैं तो उन्हें इसका खंडन करना चाहिए। इस बार महाराष्ट्र की जनता चुप नहीं रहेगी।” राउत ने आगे आरोप लगाया कि मौद्रिक प्रलोभन के माध्यम से दलबदल कराने का प्रयास किया जा रहा है। सांसदों को नकदी की पेशकश के बारे में जानकारी होने का दावा करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ सांसदों ने अग्रिम धनराशि प्राप्त की और महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों से चार्टर्ड उड़ानों से यात्रा की। उन्होंने कहा, “मुझे जानकारी है कि प्रत्येक सांसद को 15 करोड़ रुपये दिए गए, जिसके बाद वे नांदेड़ और पुणे सहित तीन स्थानों से चार्टर उड़ानों में सवार हुए। हमने कल संसदीय दल की बैठक के लिए व्हिप जारी किया है। अरविंद जी ने लोकसभा अध्यक्ष को लिखा है।” सावंत ने कहा कि किसी भी सांसद ने पार्टी छोड़ने के फैसले के बारे में आधिकारिक तौर पर पार्टी को सूचित नहीं किया है और ऐसी सभी खबरें मीडिया और सोशल मीडिया के माध्यम से आ रही हैं। देसाई ने कहा कि पार्टी का अपने सांसदों पर भरोसा बरकरार है, हालांकि एहतियात के तौर पर कानूनी सुरक्षा उपाय किए जा रहे हैं। तीनों नेताओं ने कहा कि उन्हें किसी भी विभाजन के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है और वे केवल मीडिया में आई खबरों पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं। यह टिप्पणी महाराष्ट्र में शिवसेना (यूबीटी) के भीतर संभावित विभाजन की खबरों पर तीव्र राजनीतिक अटकलों के बीच आई है। हालांकि, किसी अलग हुए गुट के बारे में पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। महाराष्ट्र में इस समय “ऑपरेशन टाइगर” की चर्चा चल रही है, इन अटकलों के बीच कि यूबीटी के नौ में से सात सांसद एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के संपर्क में हैं और सत्तारूढ़ पार्टी में शामिल होने की कोशिश कर रहे हैं। 2022 में शिंदे कई विधायकों के साथ उद्धव ठाकरे से अलग हो गए और पार्टी दो हिस्सों में बंट गई। अनिल देसाई ने संजय राउत का बचाव किया इस बीच, यूबीटी नेता अनिल देसाई ने अपमानजनक टिप्पणियों पर राउत का बचाव किया और कहा कि टिप्पणियाँ किसी विशिष्ट व्यक्ति पर निर्देशित नहीं थीं और एक नेता की भावनाओं को दर्शाती हैं जिन्होंने सार्वजनिक जीवन में दशकों बिताए हैं। #देखें | दिल्ली: शिव सेना यूबीटी सांसद संजय राउत द्वारा संदिग्ध बागी सांसदों को अपशब्द कहने पर शिव सेना यूबीटी सांसद अनिल देसाई का कहना है, “जो कुछ भी कहा जाता है, ये अपशब्द हैं, ये किसी के लिए विशेष रूप से नहीं हैं। जब एक भावनात्मक रूप से संवेदनशील व्यक्ति, जिसने अपने जीवन के 50 साल बिताए हैं… pic.twitter.com/sL8sNdRmcj– एएनआई (@ANI) 17 जून, 2026 समाचार एजेंसी एएनआई के हवाले से उन्होंने कहा, “जो कुछ भी कहा जाता है, ये अपशब्द हैं, ये किसी विशेष व्यक्ति के लिए नहीं हैं। जब एक भावनात्मक रूप से संवेदनशील व्यक्ति, जिसने अपने जीवन के 50 साल राजनीति में बिताए हैं, सार्वजनिक क्षेत्र में बोलता है, तो ऐसी चीजें होती हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह किसी विशेष व्यक्ति को संबोधित नहीं कर रहे थे।” शिवसेना (शिंदे गुट) टिप्पणियों की निंदा करती है हालाँकि, टिप्पणियों की शिंदे खेमे के महाराष्ट्र मंत्री संजय शिरसाट ने आलोचना की, जिन्होंने कहा कि पार्टी सहयोगियों का अपमान करना और दुर्व्यवहार करना अनुचित था और इससे पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ने में योगदान हो सकता है। #देखें | मुंबई, महाराष्ट्र: शिवसेना यूबीटी सांसद संजय राउत द्वारा संदिग्ध बागी सांसदों को अपशब्द कहने पर महाराष्ट्र के मंत्री संजय शिरसाट कहते हैं, “आपने उन्हें गाली देते हुए देखा होगा। वह एक जिले का नेतृत्व करते हैं; वह कई सालों से काम कर रहे हैं… मुझे लगता है कि उन्हें गाली देना और उनका अपमान करना… pic.twitter.com/jNw9RVY4jY– एएनआई (@ANI) 17 जून, 2026







