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राजकुमार हिरानी का ओटीटी डेब्यू:बोले- नई कहानी की तलाश में फ्रस्ट्रेशन होना तय, यही बेचैनी नई कहानी तक ले जाती है

राजकुमार हिरानी का ओटीटी डेब्यू:बोले- नई कहानी की तलाश में फ्रस्ट्रेशन होना तय, यही बेचैनी नई कहानी तक ले जाती है

साइबर क्राइम जैसे गंभीर विषय को मनोरंजक अंदाज में पर्दे पर लाने की तैयारी कर रहे राजकुमार हिरानी अपनी पहली वेब सीरीज ‘प्रीतम एंड पेड्रो’ से ओटीटी डेब्यू कर रहे हैं। दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने कहानी के आइडिया, फिल्म और ओटीटी में फर्क, क्रिएटिव प्रोसेस, दर्शकों की उम्मीदों और सीरीज के भावनात्मक संदेश पर बात की। सवाल: ‘प्रीतम एंड पेड्रो’ की कहानी का आइडिया कैसे आया? कब लगा कि यही कहानी बनानी चाहिए? जवाब: इस कहानी की शुरुआत कुछ छोटी कहानियों से हुई। मैंने साइबर क्राइम पर लिखी कुछ शॉर्ट स्टोरी पढ़ी थीं। उनसे समझ आया कि साइबर क्राइम कैसे होता है, उसे कैसे सुलझाया जाता है और उससे कैसे बचा जा सकता है। उसी दौरान लगा कि इस विषय में एक बड़ी और दिलचस्प कहानी बन सकती है। फिर किरदारों पर काम शुरू किया। धीरे-धीरे कहानी विकसित हुई, गोवा की सेटिंग आई, एक क्राइम ब्रांच का पुलिस ऑफिसर और एक हैकर जुड़ा। इस तरह पूरी दुनिया तैयार होती चली गई। सवाल: आपकी फिल्मों में अक्सर ह्यूमर के साथ एक गहरा मैसेज भी होता है। क्या इस सीरीज में भी दर्शकों को वैसा कुछ देखने मिलेगा? जवाब: देखिए, हमारी कोशिश हमेशा पहले दर्शकों का मनोरंजन करने की होती है। हम यह सोचकर कहानी नहीं बनाते कि हर बार कोई संदेश देना है। लेकिन इंसानी रिश्तों और समाज से जुड़ी कहानी में कुछ बातें अपने आप सामने आ जाती हैं। इस सीरीज में भी ऐसा ही है। यह साइबर क्राइम की कहानी है, लेकिन इसे हल्के और मनोरंजक अंदाज में बताया गया है। कहानी के आखिर में एक छोटा सा मैसेज जरूर आता है, लेकिन वह थोपा हुआ नहीं लगेगा। सवाल: फिल्मों और ओटीटी के लिए कहानी लिखने में सबसे बड़ा फर्क क्या होता है? जवाब: कुछ कहानियां ऐसी होती हैं जिन्हें आप दो या ढाई घंटे में कह सकते हैं, लेकिन कुछ कहानियों को ज्यादा समय चाहिए होता है। ओटीटी आपको किरदारों को गहराई से दिखाने, उनके सफर को विस्तार देने और कई ट्रैक साथ चलाने का मौका देता है। फिल्मों में यह आजादी कम होती है। इसलिए कुछ कहानियां वेब सीरीज के लिए ज्यादा सही होती हैं। सवाल 4: इस बार ह्यूमर में नया क्या देखने को मिलेगा? जवाब: ह्यूमर हमेशा किरदारों से निकलता है। नए किरदारों का व्यवहार और सोच भी अलग होती है। इस सीरीज में ‘पेड्रो’ ऐसा किरदार है जिसकी अपनी अलग दुनिया है। वह लोगों से जिस तरह बात करता है और केस को देखता-सुलझाता है, उसी से ह्यूमर निकलता है। सवाल: गोवा इस कहानी का हिस्सा कैसे बना? जवाब: दिलचस्प बात यह है कि शुरुआत में कहानी गोवा में नहीं थी। हमने पहला ड्राफ्ट हरियाणा को ध्यान में रखकर में लिखा था। लेकिन बाद में मैं और अभिजीत लिखने के लिए गोवा गए। वहां का माहौल, लोग और अनुभव अलग लगे, जिससे कहानी धीरे-धीरे बदलती गई और आखिर में इसे गोवा में सेट कर दिया। कई बार जगह खुद कहानी बदल देती है। सवाल: गोवा में शूटिंग का कोई ऐसा किस्सा जो आज भी याद आता हो? जवाब: एक मजेदार किस्सा यह हुआ कि हमारा एक असिस्टेंट गोवा पहुंचते ही छुट्टी वाले मूड में आ गया। एक रात वह दोस्त की कार लेकर घूमने गया और सुबह कार की हालत खराब करके लौटा। सबसे मजेदार बात यह थी कि अगले दिन वह ऐसे बैठा था जैसे कुछ हुआ ही नहीं। तब समझ आया कि गोवा ऐसी जगह है जहां कहानी अपने आप बनने लगती है। सवाल: सेट पर एक्टर्स और टीम के सुझावों को कितना महत्व देते हैं? जवाब: सिनेमा पूरी तरह टीमवर्क है। यह किसी एक इंसान का काम नहीं है। आप कहानी लिख लेते हैं, लेकिन उसके बाद कैमरा, म्यूजिक, डायरेक्शन और एक्टर्स मिलकर उसे बेहतर बनाते हैं। हर इंसान अपना नजरिया लेकर आता है। जितना खुलकर आप सबकी राय लेते हैं, काम उतना बेहतर होता जाता है। सवाल: आपकी फिल्मों से दर्शकों की उम्मीदें बहुत ज्यादा रहती हैं। क्या इसका दबाव महसूस होता है? जवाब: दबाव से ज्यादा यह एक चुनौती होती है। हर बार आपको नई कहानी खोजनी पड़ती है। मेरा मानना है कि फिल्म ऐसी चीज नहीं है जिसे लोग बार-बार एक जैसा देखना चाहें। हर बार कुछ नया देना जरूरी होता है। इसी वजह से स्क्रिप्ट को लेकर लगातार सोच चलता रहता है कि क्या नया किया जाए। कई बार फ्रस्ट्रेशन भी होता है। लगता है कि सही आइडिया क्यों नहीं मिल रहा। लेकिन जब कहानी का कोई हिस्सा खुलता है तो उसकी खुशी भी उतनी ही बड़ी होती है। राइटिंग ऐसा काम है जो कभी खत्म नहीं होता। आप काम बंद कर देते हैं, लेकिन दिमाग कहानी में लगा रहता है। कई बार नई कहानी की तलाश आपको सोने भी नहीं देती। सवाल: अगर एक लाइन में ‘प्रीतम एंड पेड्रो’ को बताना हो तो क्या कहेंगे? जवाब: यह दो बिल्कुल अलग तरह के लोगों की कहानी है, जो एक साथ आते हैं। उनके जरिए हम साइबर क्राइम की दुनिया दिखाते हैं। यह एक हार्ट-वॉर्मिंग कहानी है, जिसमें मनोरंजन, रिश्ते और एक खूबसूरत सफर भी है।

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राजकुमार हिरानी का ओटीटी डेब्यू:बोले- नई कहानी की तलाश में फ्रस्ट्रेशन होना तय, यही बेचैनी नई कहानी तक ले जाती है

राजकुमार हिरानी का ओटीटी डेब्यू:बोले- नई कहानी की तलाश में फ्रस्ट्रेशन होना तय, यही बेचैनी नई कहानी तक ले जाती है

साइबर क्राइम जैसे गंभीर विषय को मनोरंजक अंदाज में पर्दे पर लाने की तैयारी कर रहे राजकुमार हिरानी अपनी पहली वेब सीरीज ‘प्रीतम एंड पेड्रो’ से ओटीटी डेब्यू कर रहे हैं। दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने कहानी के आइडिया, फिल्म और ओटीटी में फर्क, क्रिएटिव प्रोसेस, दर्शकों की उम्मीदों और सीरीज के भावनात्मक संदेश पर बात की। सवाल: ‘प्रीतम एंड पेड्रो’ की कहानी का आइडिया कैसे आया? कब लगा कि यही कहानी बनानी चाहिए? जवाब: इस कहानी की शुरुआत कुछ छोटी कहानियों से हुई। मैंने साइबर क्राइम पर लिखी कुछ शॉर्ट स्टोरी पढ़ी थीं। उनसे समझ आया कि साइबर क्राइम कैसे होता है, उसे कैसे सुलझाया जाता है और उससे कैसे बचा जा सकता है। उसी दौरान लगा कि इस विषय में एक बड़ी और दिलचस्प कहानी बन सकती है। फिर किरदारों पर काम शुरू किया। धीरे-धीरे कहानी विकसित हुई, गोवा की सेटिंग आई, एक क्राइम ब्रांच का पुलिस ऑफिसर और एक हैकर जुड़ा। इस तरह पूरी दुनिया तैयार होती चली गई। सवाल: आपकी फिल्मों में अक्सर ह्यूमर के साथ एक गहरा मैसेज भी होता है। क्या इस सीरीज में भी दर्शकों को वैसा कुछ देखने मिलेगा? जवाब: देखिए, हमारी कोशिश हमेशा पहले दर्शकों का मनोरंजन करने की होती है। हम यह सोचकर कहानी नहीं बनाते कि हर बार कोई संदेश देना है। लेकिन इंसानी रिश्तों और समाज से जुड़ी कहानी में कुछ बातें अपने आप सामने आ जाती हैं। इस सीरीज में भी ऐसा ही है। यह साइबर क्राइम की कहानी है, लेकिन इसे हल्के और मनोरंजक अंदाज में बताया गया है। कहानी के आखिर में एक छोटा सा मैसेज जरूर आता है, लेकिन वह थोपा हुआ नहीं लगेगा। सवाल: फिल्मों और ओटीटी के लिए कहानी लिखने में सबसे बड़ा फर्क क्या होता है? जवाब: कुछ कहानियां ऐसी होती हैं जिन्हें आप दो या ढाई घंटे में कह सकते हैं, लेकिन कुछ कहानियों को ज्यादा समय चाहिए होता है। ओटीटी आपको किरदारों को गहराई से दिखाने, उनके सफर को विस्तार देने और कई ट्रैक साथ चलाने का मौका देता है। फिल्मों में यह आजादी कम होती है। इसलिए कुछ कहानियां वेब सीरीज के लिए ज्यादा सही होती हैं। सवाल 4: इस बार ह्यूमर में नया क्या देखने को मिलेगा? जवाब: ह्यूमर हमेशा किरदारों से निकलता है। नए किरदारों का व्यवहार और सोच भी अलग होती है। इस सीरीज में ‘पेड्रो’ ऐसा किरदार है जिसकी अपनी अलग दुनिया है। वह लोगों से जिस तरह बात करता है और केस को देखता-सुलझाता है, उसी से ह्यूमर निकलता है। सवाल: गोवा इस कहानी का हिस्सा कैसे बना? जवाब: दिलचस्प बात यह है कि शुरुआत में कहानी गोवा में नहीं थी। हमने पहला ड्राफ्ट हरियाणा को ध्यान में रखकर में लिखा था। लेकिन बाद में मैं और अभिजीत लिखने के लिए गोवा गए। वहां का माहौल, लोग और अनुभव अलग लगे, जिससे कहानी धीरे-धीरे बदलती गई और आखिर में इसे गोवा में सेट कर दिया। कई बार जगह खुद कहानी बदल देती है। सवाल: गोवा में शूटिंग का कोई ऐसा किस्सा जो आज भी याद आता हो? जवाब: एक मजेदार किस्सा यह हुआ कि हमारा एक असिस्टेंट गोवा पहुंचते ही छुट्टी वाले मूड में आ गया। एक रात वह दोस्त की कार लेकर घूमने गया और सुबह कार की हालत खराब करके लौटा। सबसे मजेदार बात यह थी कि अगले दिन वह ऐसे बैठा था जैसे कुछ हुआ ही नहीं। तब समझ आया कि गोवा ऐसी जगह है जहां कहानी अपने आप बनने लगती है। सवाल: सेट पर एक्टर्स और टीम के सुझावों को कितना महत्व देते हैं? जवाब: सिनेमा पूरी तरह टीमवर्क है। यह किसी एक इंसान का काम नहीं है। आप कहानी लिख लेते हैं, लेकिन उसके बाद कैमरा, म्यूजिक, डायरेक्शन और एक्टर्स मिलकर उसे बेहतर बनाते हैं। हर इंसान अपना नजरिया लेकर आता है। जितना खुलकर आप सबकी राय लेते हैं, काम उतना बेहतर होता जाता है। सवाल: आपकी फिल्मों से दर्शकों की उम्मीदें बहुत ज्यादा रहती हैं। क्या इसका दबाव महसूस होता है? जवाब: दबाव से ज्यादा यह एक चुनौती होती है। हर बार आपको नई कहानी खोजनी पड़ती है। मेरा मानना है कि फिल्म ऐसी चीज नहीं है जिसे लोग बार-बार एक जैसा देखना चाहें। हर बार कुछ नया देना जरूरी होता है। इसी वजह से स्क्रिप्ट को लेकर लगातार सोच चलता रहता है कि क्या नया किया जाए। कई बार फ्रस्ट्रेशन भी होता है। लगता है कि सही आइडिया क्यों नहीं मिल रहा। लेकिन जब कहानी का कोई हिस्सा खुलता है तो उसकी खुशी भी उतनी ही बड़ी होती है। राइटिंग ऐसा काम है जो कभी खत्म नहीं होता। आप काम बंद कर देते हैं, लेकिन दिमाग कहानी में लगा रहता है। कई बार नई कहानी की तलाश आपको सोने भी नहीं देती। सवाल: अगर एक लाइन में ‘प्रीतम एंड पेड्रो’ को बताना हो तो क्या कहेंगे? जवाब: यह दो बिल्कुल अलग तरह के लोगों की कहानी है, जो एक साथ आते हैं। उनके जरिए हम साइबर क्राइम की दुनिया दिखाते हैं। यह एक हार्ट-वॉर्मिंग कहानी है, जिसमें मनोरंजन, रिश्ते और एक खूबसूरत सफर भी है।

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