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जौ सत्तू का शरबत रेसिपी: पेट की गर्मी और सिरदर्द से राहत देता है जौ का सत्तू का शरबत, जानें बनाने का सही तरीका और किस समय का पेय

जौ सत्तू शरबत रेसिपी

27 मई 2026 को 18:54 IST पर अपडेट किया गया भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप में शरीर को अंदर से ठंडा करके रखने के लिए ‘जौ के सत्तू का शरबत’ एक बेहतरीन और पारंपरिक देसी सुपरफूड है। मेडिकल रिसर्च और आयुर्वेद दोनों ही मानते हैं कि जौ की तासीर बेहद वांछनीय है, जो गर्मियों में पेट की गर्मी को शांत करती है और लू से आराम में मददगार है। अनुसरण करना : जौ के सत्तू का शरबत गर्मी के कारण होने वाले विकार और तनाव को दूर करता है। इसमें मौजूद आयरन और सुपरमार्केट स्फूर्ति का निर्माण होता है। भयंकर धूप में यह शरीर का सुरक्षा कवच है। छवि: मेटा एआई सामग्री – जौ का शुद्ध सत्तू, ठंडे मटके का पानी, नींबू का रस और काला नमक, साथ ही जीरा और ताज़ा पुदीना आदि। छवि: मेटा एआई एक जग या पेस्टिल पोटीन में सत्तू पाउडर लें और थोड़ा सा पानी डालें। ताकि कोई पेट न रहे। छवि: मेटा एआई अब बाकी बचा हुआ ठंडा पानी और मिश्रण को नमकीन बना लें। ऊपर से जीरा, काला नमक, नींबू का रस और बर्फ के टुकड़े के टुकड़े। छवि: मेटा एआई जौ का सत्तू का शर्बत सुबह खाली पेट का शरबत सबसे ज्यादा माना जाता है। दोपहर के भोजन से 1 घंटा पहले भोजन से पाचन उत्तम होता है। छवि: मेटा एआई द्वारा प्रकाशित: आर्या पांडे प्रकाशित 27 मई 2026 18:54 IST पर (टैग्सटूट्रांसलेट)जौ पानी रेसिपी(टी)गर्मियों में ठंडक देने वाला पेय(टी)जौ शरबत के फायदे(टी)वजन घटाने वाला पेय(टी)घर का बना जौ का रस(टी)गर्मियों के लिए स्वास्थ्यवर्धक पेय पदार्थ(टी)किडनी के लिए जौ का पानी(टी)त्वरित जौ पेय(टी)शीतल पेय का विकल्प(टी)गर्मियों के लिए हाइड्रेशन पेय

ग्रीष्मकालीन छत शीतलन युक्तियाँ: गर्मी से छत बन गई है आग का गोला? ये 5 देसी जुगाड़ घर को ठंडा-ठंडा; कोई ए.सी. या लैपटॉप की जरूरत नहीं

तस्वीर का विवरण

पेंट या चूने का लेप करें: सफेद रंग के सूरज की किरण को ज्यादातर सोखने की बजाय वापस लौटा दिया जाता है, जिससे छत कम गर्म होती है। इससे घर का तापमान काफी कम महसूस होगा। छवि: एआई पानी का विवरण: शाम के समय छत पर पानी के जहाज़ से जमा हुई गर्मी धीरे-धीरे बाहर निकलती है। अगर रोजाना 10-15 मिनट तक पानी का सेवन किया जाए तो रात में कमरे में ज्यादा ठंडक महसूस होती है। छवि: एआई गमले और घास के टुकड़े: अगर आपके घर की छत खाली पड़ी है तो वहां छोटे-छोटे उपाय या गमले रखें। आसपास के उपचार गर्मी को कम करने में मदद करते हैं। छवि: एआई आप ग्रेड तो ग्रीन नेट या कृत्रिम घास भी बेकार हो सकते हैं। इससे छत सीधी धूप से बची रहती है और घर ठंडा बना रहता है। छवि: एआई प्लास्टिक पर निर्मित रेशम के टुकड़े: दोपहर की गर्म हवा को रोकने के लिए तीन साल पहले ज़ीले ज़ायकेदार पदार्थ निकालना भी काफी चमत्कारी होता है। छवि: मेटा एआई जब हवा इन पर्दों से आती है तो उसे कुछ अनवेशन महसूस होता है। पुराने समय में लोग इसी देसी तरीके से घर को ठंडे रखते थे। छवि: एआई छत पर तात या बांस की चटाइयाँ: छत पर टाट, बांस की चटाई या जूट की बोरी, धूप से सीधी छत पर नहीं। छवि: एआई अगर इन पर प्रभाव पानी डाला जाए तो ठंडक और बढ़ जाती है। कश्मीर में आज भी लोग इस देसी जुगाड़ का इस्तेमाल करते हैं। छवि: एआई दिन में दर्शन और दरवाज़ा बंद। रात में घर की हवा रिज़ॉर्ट से बाहर। अवांछित रंग के पर्दों का उपयोग करें। अधिकांश गर्मी पैदा करने वाले उपकरण कम लागत। छवि: मेटा एआई अगर आप भी बिना ज्यादा बिजली खर्च किए घर को ठंडा रखना चाहते हैं तो ये आसान देसी उपाय जरूर अपनाएं। इससे गर्मी में भी आपका घर काफी हद तक कूल-कूल बना रहेगा। छवि: एआई (टैग्सटूट्रांसलेट)घर के ठंडे भंडार के टिप्स(टी)गर्मी में घर को ठंडा करने के टिप्स(टी)कूलिंग टिप्स(टी)ग्रीष्मकालीन टिप्स(टी)ग्रीष्मकालीन छत को ठंडा करने के टिप्स(टी)ग्रीष्मकालीन कूलिंग टिप्स(टी)गर्मी में घर को ठंडा कैसे रखें

SC ने कहा- ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों पर 28% GST सही:राज्यों को मनी गेम्स पर बैन लगाने का हक मिला, गेमिंग कंपनियों की याचिकाएं खारिज

SC ने कहा- ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों पर 28% GST सही:राज्यों को मनी गेम्स पर बैन लगाने का हक मिला, गेमिंग कंपनियों की याचिकाएं खारिज

सुप्रीम कोर्ट ने ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों को जारी किए गए गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) के कारण बताओ (शो-कॉज) नोटिसों को पूरी तरह से वैध ठहराया है। कोर्ट ने कहा कि गेमिंग प्लेटफॉर्म पर जमा की जाने वाली कुल राशि (फुल वैल्यू ऑफ डिपॉजिट) पर 28% टैक्स वसूलना संवैधानिक रूप से सही है। देश की सबसे बड़ी अदालत ने डेल्टा कॉर्प और अन्य गेमिंग कंपनियों की उन याचिकाओं को खारिज कर दिया, जिनमें पिछली तारीख से (रिट्रोस्पेक्टिव) 28% GST लगाने के फैसले को चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने साफ किया कि ऑनलाइन गेमिंग से जुड़ी एक्टिविटीज GST एक्ट के तहत एक्शन एबल क्लेम्स के दायरे में आती हैं, इसलिए इन पर टैक्स वसूलना बिल्कुल सही है। राज्यों को मनी गेम्स पर बैन लगाने का हक मिला सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी स्पष्ट किया कि राज्य सरकारों को ऑनलाइन मनी गेम्स पर प्रतिबंध लगाने का पूरा अधिकार है। भले ही उन खेलों में स्किल की जरूरत क्यों न होती हो, राज्य सरकारें उन्हें पूरी तरह बैन या रेगुलेट कर सकती हैं। इसके साथ ही कोर्ट ने तमिलनाडु और कर्नाटक सरकार की अपीलों को स्वीकार कर लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाई कोर्ट और कर्नाटक हाई कोर्ट के उन पुराने फैसलों को रद्द कर दिया है, जिन्होंने ऑनलाइन गेमिंग पर दांव लगाने (स्टेक्स) को बैन या रेगुलेट करने वाले राज्य के कानूनों को असंवैधानिक बताकर खारिज कर दिया था। कोर्ट ने कर्नाटक हाई कोर्ट द्वारा गेमिंग कंपनियों को दी गई अंतरिम राहत को भी पूरी तरह से हटा दिया है। कंपनियां टैक्स नोटिस पर दे सकती हैं जवाब सुप्रीम कोर्ट ने अब GST अथॉरिटीज को निर्देश दिया है कि वे कानून के मुताबिक इन कारण बताओ नोटिसों पर आगे की प्रोसेसिंग शुरू करें। हालांकि, इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा है कि प्रभावित ऑनलाइन गेमिंग कंपनियां GST अथॉरिटीज द्वारा जारी किए गए इन शो-कॉज नोटिसों पर अपना जवाब दाखिल करने के लिए पूरी तरह से स्वतंत्र हैं। 2.5 लाख करोड़ के टैक्स नोटिस पर था विवाद सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल अगस्त 2025 में रियल-मनी गेमिंग (RMG) प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ जारी किए गए करीब 2.5 लाख करोड़ रुपए के रिट्रोस्पेक्टिव टैक्स नोटिस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। इस पूरे विवाद की मुख्य वजह टैक्स कैलकुलेशन के तरीके को लेकर अलग-अलग व्याख्या होना था। फुल डिपॉजिट बनाम ग्रॉस गेमिंग रेवेन्यू का गणित टैक्स विभाग की मांग थी कि कंपनियों को यूजर्स द्वारा प्लेटफॉर्म पर जमा की जाने वाली पूरी रकम (फुल फेस वैल्यू ऑफ डिपॉजिट) पर 28% की दर से टैक्स चुकाना होगा। दूसरी तरफ, गेमिंग कंपनियों का तर्क था कि उन्हें केवल टूर्नामेंट होस्ट करने के बदले ली जाने वाली कमीशन राशि पर ही टैक्स देना चाहिए, जिसे ग्रॉस गेमिंग रेवेन्यू (GGR) कहा जाता है। कंपनियों के मुताबिक, यह कमीशन कुल जमा राशि का केवल 5% से 15% ही होता है। कंपनियों के बंद होने और नौकरियों पर संकट गेमिंग कंपनियों ने कोर्ट के सामने यह दलील भी दी थी कि टैक्स विभाग द्वारा मांगी गई GST की कुल रकम इन कंपनियों की कुल कमाई से भी कई गुना ज्यादा है। अगर यह टैक्स वसूला गया, तो कंपनियों को आखिरकार अपना पूरा कामकाज बंद करना पड़ेगा। नया ऑनलाइन गेमिंग कानून और संकट अगस्त 2025 में जब सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रखा था, उसके करीब दो हफ्ते बाद ही भारत सरकार ने एक नया ऑनलाइन गेमिंग कानून बनाया था, जिसे ‘प्रमोशन एंड रेगुलेशन ऑफ ऑनलाइन गेमिंग एक्ट’ (PROGA) नाम दिया गया। यह कानून उन सभी ऑनलाइन मनी गेम्स को प्रतिबंधित करता है जहां कोई यूजर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इस उम्मीद के साथ पैसे जमा करता है कि उसे उस डिपॉजिट पर जीत की रकम (विनिंग्स) मिलेगी। 3.5 बिलियन डॉलर की इंडस्ट्री को नुकसान इस नए कानून के लागू होने से देश की करीब 3.5 बिलियन डॉलर की रियल-मनी गेमिंग इंडस्ट्री अचानक संकट में आ गई। कमाई पूरी तरह रुक जाने के कारण कंपनियों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा और उन्होंने बड़े पैमाने पर खर्चों में कटौती शुरू कर दी। इस वजह से गेमिंग कंपनियों को 3,000 से अधिक कर्मचारियों को नौकरी से निकालना पड़ा। गेमिंग इंडस्ट्री से जुड़े ये नए नियम आधिकारिक तौर पर 1 मई 2026 से प्रभावी हो चुके हैं। क्या होता है रिट्रोस्पेक्टिव टैक्स और एक्शनएबल क्लेम? ये खबर भी पढ़ें… हुंडई की कारें ₹12,800 तक महंगी होंगी: नई कीमतें 1 जून 2026 से लागू की जाएंगी, कंपनी ने इनपुट कॉस्ट बढ़ने के चलते फैसला किया हुंडई मोटर इंडिया की कारें 1 जून 2026 से महंगी होने जा रही हैं। कंपनी ने अपनी कारों की कीमतों में 12,800 रुपए तक की बढ़ोतरी करने का फैसला किया है। नई कीमतें अलग-अलग मॉडल और वेरिएंट के आधार पर तय की जाएंगी। पूरी खबर पढ़ें…

SC ने कहा- ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों पर 28% GST सही:राज्यों को मनी गेम्स पर बैन लगाने का हक मिला, गेमिंग कंपनियों की याचिकाएं खारिज

SC ने कहा- ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों पर 28% GST सही:राज्यों को मनी गेम्स पर बैन लगाने का हक मिला, गेमिंग कंपनियों की याचिकाएं खारिज

सुप्रीम कोर्ट ने ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों को जारी किए गए गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) के कारण बताओ (शो-कॉज) नोटिसों को पूरी तरह से वैध ठहराया है। कोर्ट ने कहा कि गेमिंग प्लेटफॉर्म पर जमा की जाने वाली कुल राशि (फुल वैल्यू ऑफ डिपॉजिट) पर 28% टैक्स वसूलना संवैधानिक रूप से सही है। देश की सबसे बड़ी अदालत ने डेल्टा कॉर्प और अन्य गेमिंग कंपनियों की उन याचिकाओं को खारिज कर दिया, जिनमें पिछली तारीख से (रिट्रोस्पेक्टिव) 28% GST लगाने के फैसले को चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने साफ किया कि ऑनलाइन गेमिंग से जुड़ी एक्टिविटीज GST एक्ट के तहत एक्शन एबल क्लेम्स के दायरे में आती हैं, इसलिए इन पर टैक्स वसूलना बिल्कुल सही है। राज्यों को मनी गेम्स पर बैन लगाने का हक मिला सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी स्पष्ट किया कि राज्य सरकारों को ऑनलाइन मनी गेम्स पर प्रतिबंध लगाने का पूरा अधिकार है। भले ही उन खेलों में स्किल की जरूरत क्यों न होती हो, राज्य सरकारें उन्हें पूरी तरह बैन या रेगुलेट कर सकती हैं। इसके साथ ही कोर्ट ने तमिलनाडु और कर्नाटक सरकार की अपीलों को स्वीकार कर लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाई कोर्ट और कर्नाटक हाई कोर्ट के उन पुराने फैसलों को रद्द कर दिया है, जिन्होंने ऑनलाइन गेमिंग पर दांव लगाने (स्टेक्स) को बैन या रेगुलेट करने वाले राज्य के कानूनों को असंवैधानिक बताकर खारिज कर दिया था। कोर्ट ने कर्नाटक हाई कोर्ट द्वारा गेमिंग कंपनियों को दी गई अंतरिम राहत को भी पूरी तरह से हटा दिया है। कंपनियां टैक्स नोटिस पर दे सकती हैं जवाब सुप्रीम कोर्ट ने अब GST अथॉरिटीज को निर्देश दिया है कि वे कानून के मुताबिक इन कारण बताओ नोटिसों पर आगे की प्रोसेसिंग शुरू करें। हालांकि, इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा है कि प्रभावित ऑनलाइन गेमिंग कंपनियां GST अथॉरिटीज द्वारा जारी किए गए इन शो-कॉज नोटिसों पर अपना जवाब दाखिल करने के लिए पूरी तरह से स्वतंत्र हैं। 2.5 लाख करोड़ के टैक्स नोटिस पर था विवाद सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल अगस्त 2025 में रियल-मनी गेमिंग (RMG) प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ जारी किए गए करीब 2.5 लाख करोड़ रुपए के रिट्रोस्पेक्टिव टैक्स नोटिस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। इस पूरे विवाद की मुख्य वजह टैक्स कैलकुलेशन के तरीके को लेकर अलग-अलग व्याख्या होना था। फुल डिपॉजिट बनाम ग्रॉस गेमिंग रेवेन्यू का गणित टैक्स विभाग की मांग थी कि कंपनियों को यूजर्स द्वारा प्लेटफॉर्म पर जमा की जाने वाली पूरी रकम (फुल फेस वैल्यू ऑफ डिपॉजिट) पर 28% की दर से टैक्स चुकाना होगा। दूसरी तरफ, गेमिंग कंपनियों का तर्क था कि उन्हें केवल टूर्नामेंट होस्ट करने के बदले ली जाने वाली कमीशन राशि पर ही टैक्स देना चाहिए, जिसे ग्रॉस गेमिंग रेवेन्यू (GGR) कहा जाता है। कंपनियों के मुताबिक, यह कमीशन कुल जमा राशि का केवल 5% से 15% ही होता है। कंपनियों के बंद होने और नौकरियों पर संकट गेमिंग कंपनियों ने कोर्ट के सामने यह दलील भी दी थी कि टैक्स विभाग द्वारा मांगी गई GST की कुल रकम इन कंपनियों की कुल कमाई से भी कई गुना ज्यादा है। अगर यह टैक्स वसूला गया, तो कंपनियों को आखिरकार अपना पूरा कामकाज बंद करना पड़ेगा। नया ऑनलाइन गेमिंग कानून और संकट अगस्त 2025 में जब सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रखा था, उसके करीब दो हफ्ते बाद ही भारत सरकार ने एक नया ऑनलाइन गेमिंग कानून बनाया था, जिसे ‘प्रमोशन एंड रेगुलेशन ऑफ ऑनलाइन गेमिंग एक्ट’ (PROGA) नाम दिया गया। यह कानून उन सभी ऑनलाइन मनी गेम्स को प्रतिबंधित करता है जहां कोई यूजर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इस उम्मीद के साथ पैसे जमा करता है कि उसे उस डिपॉजिट पर जीत की रकम (विनिंग्स) मिलेगी। 3.5 बिलियन डॉलर की इंडस्ट्री को नुकसान इस नए कानून के लागू होने से देश की करीब 3.5 बिलियन डॉलर की रियल-मनी गेमिंग इंडस्ट्री अचानक संकट में आ गई। कमाई पूरी तरह रुक जाने के कारण कंपनियों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा और उन्होंने बड़े पैमाने पर खर्चों में कटौती शुरू कर दी। इस वजह से गेमिंग कंपनियों को 3,000 से अधिक कर्मचारियों को नौकरी से निकालना पड़ा। गेमिंग इंडस्ट्री से जुड़े ये नए नियम आधिकारिक तौर पर 1 मई 2026 से प्रभावी हो चुके हैं। क्या होता है रिट्रोस्पेक्टिव टैक्स और एक्शनएबल क्लेम? ये खबर भी पढ़ें… हुंडई की कारें ₹12,800 तक महंगी होंगी: नई कीमतें 1 जून 2026 से लागू की जाएंगी, कंपनी ने इनपुट कॉस्ट बढ़ने के चलते फैसला किया हुंडई मोटर इंडिया की कारें 1 जून 2026 से महंगी होने जा रही हैं। कंपनी ने अपनी कारों की कीमतों में 12,800 रुपए तक की बढ़ोतरी करने का फैसला किया है। नई कीमतें अलग-अलग मॉडल और वेरिएंट के आधार पर तय की जाएंगी। पूरी खबर पढ़ें…

ईशान-वैभव के बीच आज फाइनल की जंग:IPL एलिमिनेटर में आज SRH-RR का मैच, वैभव तोड़ सकते हैं क्रिस गेल का 14 साल पुराना रिकॉर्ड

ईशान-वैभव के बीच आज फाइनल की जंग:IPL एलिमिनेटर में आज SRH-RR का मैच, वैभव तोड़ सकते हैं क्रिस गेल का 14 साल पुराना रिकॉर्ड

IPL में आज सनराइजर्स हैदराबाद (SRH) और राजस्थान रॉयल्स (RR) के बीच एलिमिनेटर मुकाबला खेला जाएगा। न्यू चंडीगढ़ के महाराजा यादवेंद्र सिंह क्रिकेट स्टेडियम में शाम 7:30 बजे से मैच शुरू होगा। ईशान किशन और वैभव सूर्यवंशी की टीम फाइनल में पहुंचने के लिए आज भिड़ेगी। इस मुकाबले को हारने वाली टीम टूर्नामेंट से बाहर हो जाएगी। वहीं, जीतने वाले को फाइनल में पहुंचने का एक और मौका मिलेगा। राजस्थान के ओपनर वैभव सूर्यवंशी के पास एक सीजन में सबसे ज्यादा छक्के लगाने का रिकॉर्ड तोड़ने का मौका है। यह रिकॉर्ड क्रिस गेल के नाम है। उन्होंने बेंगलुरु की ओर से 2012 सीजन में 59 छक्के लगाए थे। वैभव इस सीजन 53 सिक्स लगा चुके हैं। अगर आज वैभव सात छक्के लगाते हैं, तो वो क्रिस गेल का 14 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ देंगे। दूसरी ओर वैभव सूर्यवंशी राजस्थान के टॉप स्कोरर हैं। उन्होंने हैदराबाद के खिलाफ इसी सीजन में शतक लगाया था। वे 14 मैच में 232.27 के स्ट्राइक रेट से 583 रन बना चुके हैं। इनमें एक शतक के साथ 3 फिफ्टी शामिल हैं। दो मैचों में ईशान लगातार बना रहे अर्धशतक दूसरी ओर ईशान किशन भी फॉर्म में नजर आ रहे हैं। पिछले दो मैचों में लगातार उन्होंने अर्धशतक बनाया है। RCB के खिलाफ पिछले मैच में ईशान ने 79 रन और CSK के खिलाफ 70 रन बनाए थे।ईशान इस सीजन में 500 रन का आंकड़ा पार कर चुके हैं। उन्होंने 179.48 की स्ट्राइक रेट से खेलते 569 रन बनाए है। ईशान किशन भी ऑरेंज कैप की रेस में शामिल हैं। अगर राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ खेलते हुए ईशान 83 रनों से अधिक की पारी खेलते हुए ईशान किशन ऑरेंज कैप अपने नाम कर लेंगे। ईशान किशन ने अपने 10 साल लंबे आईपीएल करियर में अब तक प्लेऑफ में 9 मुकाबले खेले हैं। ईशान ने बेंगलुरु के खिलाफ लगातार चौथी फिफ्टी लगाई ईशान किशन ने बेंगलुरु के खिलाफ 2024 से 2026 तक लगातार चौथी फिफ्टी लगाई। उन्होंने शुक्रवार को 79 रन की पारी खेली। वे बेंगलुरु के खिलाफ यह कारनामा करने वाले न्यूजीलैंड के केन विलियमसन के साथ दूसरे नंबर पर हैं। ऑस्ट्रेलिया के डेविड वॉर्नर पहले नंबर पर हैं, जिन्होंने 2014 से 2016 के बीच लगातार 7 फिफ्टी लगाई। दूसरी ओर 15 साल के क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी टी-20 में डबल सेंचुरी बनाना चाहते हैं। उनका लक्ष्य IPL में वेस्टइंडीज के दिग्गज बल्लेबाज क्रिस गेल के 175 रन के रिकॉर्ड को तोड़ना है। वैभव ने इंग्लैंड के पूर्व क्रिकेटर केविन पीटरसन के यूट्यूब चैनल पर ये बातें कही है। उन्होंने कहा कि उन्हें सिर्फ अर्धशतक बनाने में दिलचस्पी नहीं है, बल्कि वे T20 क्रिकेट का पहला दोहरा शतक बनाना चाहते हैं।

ईशान-वैभव के बीच आज फाइनल की जंग:IPL एलिमिनेटर में आज SRH-RR का मैच, वैभव तोड़ सकते हैं क्रिस गेल का 14 साल पुराना रिकॉर्ड

ईशान-वैभव के बीच आज फाइनल की जंग:IPL एलिमिनेटर में आज SRH-RR का मैच, वैभव तोड़ सकते हैं क्रिस गेल का 14 साल पुराना रिकॉर्ड

IPL में आज सनराइजर्स हैदराबाद (SRH) और राजस्थान रॉयल्स (RR) के बीच एलिमिनेटर मुकाबला खेला जाएगा। न्यू चंडीगढ़ के महाराजा यादवेंद्र सिंह क्रिकेट स्टेडियम में शाम 7:30 बजे से मैच शुरू होगा। ईशान किशन और वैभव सूर्यवंशी की टीम फाइनल में पहुंचने के लिए आज भिड़ेगी। इस मुकाबले को हारने वाली टीम टूर्नामेंट से बाहर हो जाएगी। वहीं, जीतने वाले को फाइनल में पहुंचने का एक और मौका मिलेगा। राजस्थान के ओपनर वैभव सूर्यवंशी के पास एक सीजन में सबसे ज्यादा छक्के लगाने का रिकॉर्ड तोड़ने का मौका है। यह रिकॉर्ड क्रिस गेल के नाम है। उन्होंने बेंगलुरु की ओर से 2012 सीजन में 59 छक्के लगाए थे। वैभव इस सीजन 53 सिक्स लगा चुके हैं। अगर आज वैभव सात छक्के लगाते हैं, तो वो क्रिस गेल का 14 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ देंगे। दूसरी ओर वैभव सूर्यवंशी राजस्थान के टॉप स्कोरर हैं। उन्होंने हैदराबाद के खिलाफ इसी सीजन में शतक लगाया था। वे 14 मैच में 232.27 के स्ट्राइक रेट से 583 रन बना चुके हैं। इनमें एक शतक के साथ 3 फिफ्टी शामिल हैं। दो मैचों में ईशान लगातार बना रहे अर्धशतक दूसरी ओर ईशान किशन भी फॉर्म में नजर आ रहे हैं। पिछले दो मैचों में लगातार उन्होंने अर्धशतक बनाया है। RCB के खिलाफ पिछले मैच में ईशान ने 79 रन और CSK के खिलाफ 70 रन बनाए थे।ईशान इस सीजन में 500 रन का आंकड़ा पार कर चुके हैं। उन्होंने 179.48 की स्ट्राइक रेट से खेलते 569 रन बनाए है। ईशान किशन भी ऑरेंज कैप की रेस में शामिल हैं। अगर राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ खेलते हुए ईशान 83 रनों से अधिक की पारी खेलते हुए ईशान किशन ऑरेंज कैप अपने नाम कर लेंगे। ईशान किशन ने अपने 10 साल लंबे आईपीएल करियर में अब तक प्लेऑफ में 9 मुकाबले खेले हैं। ईशान ने बेंगलुरु के खिलाफ लगातार चौथी फिफ्टी लगाई ईशान किशन ने बेंगलुरु के खिलाफ 2024 से 2026 तक लगातार चौथी फिफ्टी लगाई। उन्होंने शुक्रवार को 79 रन की पारी खेली। वे बेंगलुरु के खिलाफ यह कारनामा करने वाले न्यूजीलैंड के केन विलियमसन के साथ दूसरे नंबर पर हैं। ऑस्ट्रेलिया के डेविड वॉर्नर पहले नंबर पर हैं, जिन्होंने 2014 से 2016 के बीच लगातार 7 फिफ्टी लगाई। दूसरी ओर 15 साल के क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी टी-20 में डबल सेंचुरी बनाना चाहते हैं। उनका लक्ष्य IPL में वेस्टइंडीज के दिग्गज बल्लेबाज क्रिस गेल के 175 रन के रिकॉर्ड को तोड़ना है। वैभव ने इंग्लैंड के पूर्व क्रिकेटर केविन पीटरसन के यूट्यूब चैनल पर ये बातें कही है। उन्होंने कहा कि उन्हें सिर्फ अर्धशतक बनाने में दिलचस्पी नहीं है, बल्कि वे T20 क्रिकेट का पहला दोहरा शतक बनाना चाहते हैं।

विजय की टीवीके को समर्थन देने के कुछ दिनों बाद बागी एआईएडीएमके विधायक ईपीएस के साथ फिर से एकजुट हुए | भारत समाचार

Ireland vs New Zealand Live Cricket Score, Only Test, Day 1: Latest updates  from first day's play in Belfast. (X)

आखरी अपडेट:27 मई, 2026, 15:01 IST अन्नाद्रमुक को सुलह की उम्मीद है क्योंकि वेलुमणि के नेतृत्व वाले बागी विधायक जिन्होंने विजय और टीवीके का समर्थन किया था, पार्टी महासचिव एडप्पादी के पलानीस्वामी के साथ फिर से जुड़ गए हैं, जिससे तमिलनाडु की राजनीति में दरार की आशंका कम हो गई है। वेलुमणि के नेतृत्व वाले विद्रोही खेमे के विधायकों की पार्टी प्रमुख पलानीस्वामी से मुलाकात के बाद अन्नाद्रमुक गुटों में सुलह हो गई। हाल ही में विजय और उनकी पार्टी टीवीके का समर्थन करने वाले बागी विधायकों के पार्टी महासचिव एडप्पादी के पलानीस्वामी के साथ फिर से एकजुट होने के बाद अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम के अंदर एक राजनीतिक सुलह हुई है। वेलुमणि के नेतृत्व वाले विद्रोही खेमे के विधायकों ने पार्टी प्रमुख पलानीस्वामी से मुलाकात की। यह घटनाक्रम विधायकों द्वारा सार्वजनिक रूप से विजय के राजनीतिक उत्थान के लिए समर्थन व्यक्त करने के कुछ ही दिनों बाद आया है, जिससे तमिलनाडु में बदलते राजनीतिक परिदृश्य से पहले अन्नाद्रमुक के अंदर संभावित दरार की अटकलें तेज हो गई हैं। मंगलवार को सी वे शनमुगम और एसपी वेलुमणि ने विधानसभा से इस्तीफा दे दिया था और बाद में सत्तारूढ़ तमिलगा वेट्री कज़गम में शामिल हो गए। इससे पहले, अन्नाद्रमुक के तीन बागी विधायक – मरागथम कुमारवेल, पी सत्यबामा और एस जयकुमार – ने विधानसभा से इस्तीफा दे दिया था और औपचारिक रूप से मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय की टीवीके में शामिल हो गए थे। विद्रोही गुट ने पहले अन्नाद्रमुक के व्हिप का उल्लंघन किया था और टीवीके सरकार के पक्ष में मतदान किया था, जिससे विपक्षी दल के अंदर गंभीर उथल-पुथल मच गई थी। अन्नाद्रमुक ने सत्तारूढ़ टीवीके पर दलबदल को प्रोत्साहित करने और विधानसभा में अपनी संख्या मजबूत करने के लिए “खरीद-फरोख्त” में शामिल होने का आरोप लगाया। अन्नाद्रमुक के वरिष्ठ नेता और पार्टी सचेतक एग्री एसएस कृष्णमूर्ति ने कहा कि स्पीकर को इस्तीफे स्वीकार नहीं करना चाहिए था क्योंकि दलबदल विरोधी कानून के तहत 25 बागी विधायकों को अयोग्य ठहराने की मांग करने वाली पार्टी की याचिका अभी भी लंबित है। ताजा राजनीतिक घटनाक्रम ने तमिलनाडु में टीवीके सरकार का समर्थन करने वाले कुछ दलों के बीच भी बेचैनी पैदा कर दी है। एस जोथिमनी ने सार्वजनिक रूप से कथित “घोड़े-व्यापार” पर चिंता व्यक्त की और अन्य राज्यों की तुलना में तमिलनाडु में विभिन्न राजनीतिक मानकों को लागू करने के खिलाफ चेतावनी दी। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना जगह : चेन्नई (मद्रास), भारत, भारत न्यूज़ इंडिया विजय की टीवीके को समर्थन देने के कुछ दिनों बाद बागी एआईएडीएमके विधायक ईपीएस के साथ फिर से एकजुट हो गए अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट) एआईएडीएमके राजनीतिक सुलह (टी) ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (टी) एडप्पादी के पलानीस्वामी (टी) वेलुमणि विद्रोही शिविर (टी) विजय टीवीके पार्टी (टी) तमिलनाडु की राजनीति (टी) विद्रोही विधायक फिर से एकजुट हुए (टी) एआईएडीएमके गुट

‘राजनीतिक, नैतिक और संवैधानिक हार’: सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बीजेपी ने विपक्ष पर साधा निशाना | भारत समाचार

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आखरी अपडेट:27 मई, 2026, 14:55 IST भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि फैसले ने चुनाव निकाय द्वारा शुरू की गई मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया के खिलाफ विपक्ष की कहानी को पूरी तरह से उजागर कर दिया है। बीजेपी नेता सुधांशु त्रिवेदी. SC महोदय का फैसला: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट द्वारा चुनाव आयोग के मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखने के बाद कांग्रेस और विपक्ष के भारत गुट पर तीखा हमला किया और आरोप लगाया कि कांग्रेस ने इस अभ्यास का विरोध किया था क्योंकि वह “अवैध मतदाताओं” के साथ खड़ी थी। एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए, भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि फैसले ने चुनाव निकाय द्वारा शुरू की गई मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया के खिलाफ विपक्ष की कहानी को पूरी तरह से उजागर कर दिया है। त्रिवेदी ने कहा, “बिहार और पश्चिम बंगाल में निर्णायक और भारी हार के बाद और देश में अराजकता फैलाने की उनकी नापाक साजिश विफल होने के बाद, यह अब कांग्रेस के लिए एक संवैधानिक हार है।” #घड़ी | दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट द्वारा बिहार में शुरू होने वाली मतदाता सूची की एसआईआर करने के ईसीआई के फैसले को बरकरार रखने पर, भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी कहते हैं, “बिहार और पश्चिम बंगाल में निर्णायक और भारी हार के बाद और उनके (कांग्रेस) अराजकता भड़काने के नापाक इरादे के बाद… pic.twitter.com/gAsa8qOSoF– एएनआई (@ANI) 27 मई 2026 उन्होंने फैसले को कांग्रेस नेता राहुल गांधी और विपक्षी गठबंधन के लिए “राजनीतिक, नैतिक और संवैधानिक हार” करार दिया। त्रिवेदी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने चुनावी असफलताओं के बाद चुनाव आयोग को दोषी ठहराने का प्रयास किया और पार्टी पर लोकतांत्रिक संस्थानों को कमजोर करने की कोशिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “सर्वोच्च न्यायालय ने इस अभ्यास को संवैधानिक रूप से वैध ठहराया है, इसे चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत आने की पुष्टि की है, और इसे स्वतंत्र और पारदर्शी चुनाव के संचालन के लिए अपरिहार्य माना है।” #घड़ी | दिल्ली: बीजेपी सांसद सुधांशु त्रिवेदी कहते हैं, “…न्यायालय ने आगे स्पष्ट किया है कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए, यह अभ्यास बिल्कुल आवश्यक था… हाल के वर्षों में, बड़े पैमाने पर मतदाता सूची में नाम जोड़े और हटाए गए हैं… pic.twitter.com/Hm7lsG123f– एएनआई (@ANI) 27 मई 2026 भाजपा नेता ने आगे दावा किया कि विपक्ष ने एसआईआर अभ्यास का विरोध किया क्योंकि यह वास्तविक मतदाताओं के बजाय “घुसपैठियों” की रक्षा कर रहा था। कांग्रेस पर एक अन्य हमले में, त्रिवेदी ने कहा, “विपक्षी दलों, विशेष रूप से कांग्रेस के समझौते चीन में निहित हैं, उनके पारिवारिक संबंध इटली में हैं, उनका वैचारिक केंद्र इंग्लैंड में है, अमेरिकी संस्थानों के भीतर दुर्भावनापूर्ण प्रचार का केंद्र है, और उनका मतदाता आधार बांग्लादेश से जुड़ा हुआ है।” इसी तरह की टिप्पणी करते हुए भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी को बेनकाब कर दिया है। भंडारी ने एक्स पर लिखा, “यह स्पष्ट है कि राहुल गांधी और कांग्रेस ने इसका विरोध किया क्योंकि वे अवैध घुसपैठियों के साथ खड़े थे, न कि भारतीय मतदाताओं के साथ।” उन्होंने विपक्ष के रुख को “राष्ट्र-विरोधी कृत्य” बताया। राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी बेनकाब हो गई है! सुप्रीम कोर्ट ने एसआईआर प्रक्रिया को कानूनी और संवैधानिक घोषित किया! यह स्पष्ट है कि राहुल गांधी और कांग्रेस ने पूरे समय विरोध किया क्योंकि वे अवैध घुसपैठियों के साथ खड़े थे, भारतीय मतदाताओं के साथ नहीं। यह सही मायनों में एक “राष्ट्रविरोधी कृत्य” था!… — प्रदीप भंडारी(प्रदीप भंडारी)🇮🇳 (@pradip103) 27 मई 2026 वरिष्ठ भाजपा नेता नलिन कोहली ने भी फैसले का स्वागत किया और विपक्षी दलों से चुनाव आयोग और लोकतांत्रिक संस्थानों पर सवाल उठाना बंद करने का आग्रह किया। केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने एसआईआर प्रक्रिया से जुड़े सभी कानूनी मुद्दों को स्पष्ट कर दिया है और कहा है कि चुनावी सुधारों के तहत मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया भविष्य में भी जारी रहेगी। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा? भारत के चुनाव आयोग (ईसीआई) को एक बड़ा बढ़ावा देते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा, विपक्षी दलों के आरोपों को खारिज कर दिया कि यह अभ्यास मनमाना या असंवैधानिक था। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली न्यायमूर्ति जॉयमाला बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने फैसला सुनाया कि एसआईआर अभ्यास का उद्देश्य स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करना और मतदाता सूची की अखंडता को मजबूत करना था। यह फैसला पहले बिहार में शुरू की गई और बाद में अन्य राज्यों में विस्तारित संशोधन प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर आया। विपक्षी दलों और याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि यह प्रक्रिया एनआरसी जैसी नागरिकता सत्यापन अभियान के समान है और इससे मतदाताओं को गलत तरीके से हटाया जा सकता है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया ‘राजनीतिक, नैतिक और संवैधानिक हार’: सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बीजेपी ने विपक्ष पर साधा निशाना अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)सुप्रीम कोर्ट एसआईआर फैसला(टी)चुनाव आयोग एसआईआर(टी)चुनावी सूची संशोधन(टी)कांग्रेस पर बीजेपी का हमला(टी)राहुल गांधी उजागर(टी)अवैध मतदाता विवाद(टी)स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव(टी)बिहार पश्चिम बंगाल की राजनीति

पाकिस्तान में 9 मुस्लिम जगहों के नाम नहीं बदलेंगे:हिंदू-सिख दौर का नाम रखा जाना था, कट्टरपंथियों के विरोध के बाद फैसला बदला

पाकिस्तान में 9 मुस्लिम जगहों के नाम नहीं बदलेंगे:हिंदू-सिख दौर का नाम रखा जाना था, कट्टरपंथियों के विरोध के बाद फैसला बदला

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की मरियम नवाज सरकार ने लाहौर की सड़कों, चौकों और इलाकों के पुराने नाम बहाल करने का फैसला फिलहाल टाल दिया है। सरकार जिन नामों को बहाल करना चाहती थी, उनमें कई हिंदू और सिख दौर के नाम शामिल थे। सरकार ने यह कदम कट्टरपंथी समूहों और सोशल मीडिया पर बढ़ते विरोध के बाद उठाया। कुछ लोगों ने इसे हिंदू और सिख पहचान वापस लाने की कोशिश बताते हुए धार्मिक रंग दे दिया था। लाहौर के डिप्टी कमिश्नर कैप्टन (रिटायर्ड) मोहम्मद अली एजाज ने पाकिस्तानी अखबार डॉन से कहा कि अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। नवाज शरीफ और मरियम नवाज की बैठक में मंजूर हुआ था प्रस्ताव 16 मार्च को लाहौर हेरिटेज एरियाज रिवाइवल (LHAR) की बैठक हुई थी। इसकी अध्यक्षता पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने की थी। पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज भी इसमें शामिल थीं। इसी बैठक में लाहौर के कई पुराने प्री-पार्टिशन नाम बहाल करने का प्रस्ताव पास किया गया। यह योजना लाहौर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को फिर से सामने लाने के लिए बनाई गई थी। बाद में मई में मरियम नवाज कैबिनेट ने भी इस प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी थी। नवाज शरीफ का कहना था कि हमें यूरोप से सीख लेनी चाहिए। वे ऐतिहासिक नामों से छेड़छाड़ नहीं करते हैं। मरियम का कहना था कि लाहौर का इतिहास ही इसकी पहचान है। पुराने नाम और इमारतें इसका सबूत हैं। यह पूरा प्रोजेक्ट लाहौर अथॉरिटी फॉर हेरिटेज रिवाइवल (LAHR) के तहत चलाया जा रहा था। न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक, यह कई अरब पाकिस्तानी रुपए का प्रोजेक्ट है। कट्टपंथियों ने इसे धार्मिक मुद्दा बना दिया डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ कट्टरपंथी तत्वों और सोशल मीडिया व्लॉगर्स ने इस फैसले पर मुख्यमंत्री मरियम नवाज का खुलकर विरोध किया। उन्होंने सरकार पर हिंदू और सिख नाम वापस लाने का आरोप लगाया और इसे धार्मिक मुद्दा बना दिया। PTI के मुताबिक, सरकार को डर था कि इस मुद्दे पर बड़ा राजनीतिक और सामाजिक विवाद खड़ा हो सकता है। इसी वजह से प्रशासन ने फिलहाल फैसला टाल दिया। विरोध के बाद LHAR ने इतिहासकारों, शहरी योजनाकारों, आर्किटेक्ट्स और दूसरे विशेषज्ञों की एक बैठक भी बुलाई। इसमें लाहौर की पुरानी पहचान और ऐतिहासिक नामों को बचाने पर चर्चा हुई। सरकारी बयान के मुताबिक, बैठक में मौजूद ज्यादातर लोगों ने माना कि लाहौर की ऐतिहासिक पहचान बहुमूल्य विरासत है और इसे आने वाली पीढ़ियों के लिए बचाया जाना चाहिए। कई विशेषज्ञ पुराने नाम बहाल करने के पक्ष में थे। पार्टिशन के बाद इन इलाकों के नाम बदल दिए गए थे पाकिस्तान बनने के बाद कई इलाकों के नाम बदल दिए गए थे। इसके बावजूद लाहौर के पुराने हिंदू और ब्रिटिश दौर के नाम आज भी लोगों की यादों और रोजमर्रा की बातचीत में इस्तेमाल होते हैं। कराची के इतिहासकार याकूब खान बंगश ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा कि 1947 के बाद लाहौर में वैसा वैचारिक बदलाव नहीं हुआ जैसा कराची जैसे शहरों में देखने को मिला था। उनके मुताबिक लाहौर में आने वाले ज्यादातर शरणार्थी कामकाजी तबके से थे, जिन्होंने शहर की पुरानी सामाजिक पहचान के साथ खुद को जोड़ लिया। इसी वजह से शहर का पुराना इतिहास लोगों की याद में बना रहा। —————— ये खबर भी पढ़ें… भारत ने जम्मू-कश्मीर पर चीन-पाकिस्तान का बयान खारिज किया:कहा- दूसरे देश को टिप्पणी का हक नहीं; चीन ने इतिहास से जुड़ा विवाद बताया था भारत ने चीन और पाकिस्तान के संयुक्त बयान में जम्मू-कश्मीर के जिक्र को पूरी तरह खारिज कर दिया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न और अविभाज्य हिस्से हैं। भारत ने चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) परियोजनाओं पर भी कड़ी आपत्ति जताई। यह बयान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की चीन यात्रा के बाद जारी संयुक्त बयान के जवाब में आया है। इसमें कहा गया था कि पाकिस्तान ने चीन को जम्मू-कश्मीर के हालात की जानकारी दी। पूरी खबर पढ़ें…

पाकिस्तान में 9 मुस्लिम जगहों के नाम नहीं बदलेंगे:हिंदू-सिख दौर का नाम रखा जाना था, कट्टरपंथियों के विरोध के बाद फैसला बदला

पाकिस्तान में 9 मुस्लिम जगहों के नाम नहीं बदलेंगे:हिंदू-सिख दौर का नाम रखा जाना था, कट्टरपंथियों के विरोध के बाद फैसला बदला

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की मरियम नवाज सरकार ने लाहौर की सड़कों, चौकों और इलाकों के पुराने नाम बहाल करने का फैसला फिलहाल टाल दिया है। सरकार जिन नामों को बहाल करना चाहती थी, उनमें कई हिंदू और सिख दौर के नाम शामिल थे। सरकार ने यह कदम कट्टरपंथी समूहों और सोशल मीडिया पर बढ़ते विरोध के बाद उठाया। कुछ लोगों ने इसे हिंदू और सिख पहचान वापस लाने की कोशिश बताते हुए धार्मिक रंग दे दिया था। लाहौर के डिप्टी कमिश्नर कैप्टन (रिटायर्ड) मोहम्मद अली एजाज ने पाकिस्तानी अखबार डॉन से कहा कि अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। नवाज शरीफ और मरियम नवाज की बैठक में मंजूर हुआ था प्रस्ताव 16 मार्च को लाहौर हेरिटेज एरियाज रिवाइवल (LHAR) की बैठक हुई थी। इसकी अध्यक्षता पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने की थी। पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज भी इसमें शामिल थीं। इसी बैठक में लाहौर के कई पुराने प्री-पार्टिशन नाम बहाल करने का प्रस्ताव पास किया गया। यह योजना लाहौर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को फिर से सामने लाने के लिए बनाई गई थी। बाद में मई में मरियम नवाज कैबिनेट ने भी इस प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी थी। नवाज शरीफ का कहना था कि हमें यूरोप से सीख लेनी चाहिए। वे ऐतिहासिक नामों से छेड़छाड़ नहीं करते हैं। मरियम का कहना था कि लाहौर का इतिहास ही इसकी पहचान है। पुराने नाम और इमारतें इसका सबूत हैं। यह पूरा प्रोजेक्ट लाहौर अथॉरिटी फॉर हेरिटेज रिवाइवल (LAHR) के तहत चलाया जा रहा था। न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक, यह कई अरब पाकिस्तानी रुपए का प्रोजेक्ट है। कट्टपंथियों ने इसे धार्मिक मुद्दा बना दिया डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ कट्टरपंथी तत्वों और सोशल मीडिया व्लॉगर्स ने इस फैसले पर मुख्यमंत्री मरियम नवाज का खुलकर विरोध किया। उन्होंने सरकार पर हिंदू और सिख नाम वापस लाने का आरोप लगाया और इसे धार्मिक मुद्दा बना दिया। PTI के मुताबिक, सरकार को डर था कि इस मुद्दे पर बड़ा राजनीतिक और सामाजिक विवाद खड़ा हो सकता है। इसी वजह से प्रशासन ने फिलहाल फैसला टाल दिया। विरोध के बाद LHAR ने इतिहासकारों, शहरी योजनाकारों, आर्किटेक्ट्स और दूसरे विशेषज्ञों की एक बैठक भी बुलाई। इसमें लाहौर की पुरानी पहचान और ऐतिहासिक नामों को बचाने पर चर्चा हुई। सरकारी बयान के मुताबिक, बैठक में मौजूद ज्यादातर लोगों ने माना कि लाहौर की ऐतिहासिक पहचान बहुमूल्य विरासत है और इसे आने वाली पीढ़ियों के लिए बचाया जाना चाहिए। कई विशेषज्ञ पुराने नाम बहाल करने के पक्ष में थे। पार्टिशन के बाद इन इलाकों के नाम बदल दिए गए थे पाकिस्तान बनने के बाद कई इलाकों के नाम बदल दिए गए थे। इसके बावजूद लाहौर के पुराने हिंदू और ब्रिटिश दौर के नाम आज भी लोगों की यादों और रोजमर्रा की बातचीत में इस्तेमाल होते हैं। कराची के इतिहासकार याकूब खान बंगश ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा कि 1947 के बाद लाहौर में वैसा वैचारिक बदलाव नहीं हुआ जैसा कराची जैसे शहरों में देखने को मिला था। उनके मुताबिक लाहौर में आने वाले ज्यादातर शरणार्थी कामकाजी तबके से थे, जिन्होंने शहर की पुरानी सामाजिक पहचान के साथ खुद को जोड़ लिया। इसी वजह से शहर का पुराना इतिहास लोगों की याद में बना रहा। —————— ये खबर भी पढ़ें… भारत ने जम्मू-कश्मीर पर चीन-पाकिस्तान का बयान खारिज किया:कहा- दूसरे देश को टिप्पणी का हक नहीं; चीन ने इतिहास से जुड़ा विवाद बताया था भारत ने चीन और पाकिस्तान के संयुक्त बयान में जम्मू-कश्मीर के जिक्र को पूरी तरह खारिज कर दिया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न और अविभाज्य हिस्से हैं। भारत ने चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) परियोजनाओं पर भी कड़ी आपत्ति जताई। यह बयान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की चीन यात्रा के बाद जारी संयुक्त बयान के जवाब में आया है। इसमें कहा गया था कि पाकिस्तान ने चीन को जम्मू-कश्मीर के हालात की जानकारी दी। पूरी खबर पढ़ें…