फ्रांस में 100 से ज्यादा स्कूलों में चाइल्ड एब्यूज स्कैंडल:3 साल की बच्ची का 'मॉनिटर' ने रेप किया; केस की खुली सुनवाई शुरू

फ्रांस इस समय एक बड़े चाइल्ड एब्यूज स्कैंडल से जूझ रहा है। पेरिस समेत 100 से ज्यादा स्कूलों और डे-केयर सेंटरों में बच्चों के साथ हिंसा, यौन शोषण और रेप के आरोपों की जांच चल रही है। मामले सामने आने के बाद देशभर में आक्रोश बढ़ गया है। 100 से ज्यादा संस्थानों में जांच पेरिस की प्रॉसिक्यूटर लॉर बेको ने बताया कि राजधानी में 84 प्रीस्कूल, करीब 20 प्राइमरी स्कूल और लगभग 10 डे-केयर सेंटरों में जांच चल रही है। कई मामलों में छोटे बच्चों के साथ रेप और यौन शोषण के आरोप लगाए गए हैं। आरोप स्कूल मॉनिटर्स पर लगे हैं। ये वे कर्मचारी होते हैं जो बच्चों की देखभाल लंच ब्रेक, खेल, सोने के समय और आफ्टर-स्कूल गतिविधियों के दौरान करते हैं। #MeTooSchool आंदोलन ने उठाई आवाज कोर्ट के बाहर #MeTooSchool आंदोलन से जुड़े लोगों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने बैनर पर लिखा- “कोई भी बच्चा स्कूल जाने से न डरे।” आंदोलन की सह-संस्थापक बार्का जरूआली ने कहा कि अब पूरे देश में बच्चों की सुरक्षा को लेकर जागने की जरूरत है। बच्चों को भूखा रखने और मारपीट के आरोप अभिभावकों ने आरोप लगाया कि कुछ मॉनिटर्स बच्चों पर चिल्लाते थे, बाल खींचते थे और खाना देने से मना कर देते थे। कुछ मामलों में बच्चों के साथ यौन शोषण के आरोप भी लगे हैं। पीड़ित परिवारों के वकीलों का कहना है कि कई अभिभावकों को शिकायत दर्ज कराने और कार्रवाई करवाने के लिए महीनों संघर्ष करना पड़ा। पीड़ित परिवारों ने ट्रायल सार्वजनिक कराया फ्रांस में बच्चों से जुड़े मामलों की सुनवाई आमतौर पर बंद कमरे में होती है, लेकिन इस बार पीड़ित परिवारों ने ट्रायल सार्वजनिक रखने की मांग की। परिवारों के वकीलों के मुताबिक वे गिसेल पेलिको के चर्चित रेप केस से प्रेरित थे। गिसेल ने कहा था कि “शर्म पीड़ितों नहीं, अपराधियों को होनी चाहिए।” कोर्ट में शुरू हुआ पहला बड़ा ट्रायल स्कैंडल से जुड़े पहले बड़े मामलों में से एक का ट्रायल इस हफ्ते पेरिस में शुरू हुआ। 36 वर्षीय स्कूल सहायक डेविड जी. पर सितंबर 2024 से अप्रैल 2025 के बीच 3 से 5 साल के पांच बच्चों के यौन शोषण और दो महिला सहकर्मियों के साथ यौन उत्पीड़न का आरोप है। हालांकि, आरोपी ने सभी आरोपों से इनकार किया है। जांचकर्ताओं के मुताबिक बच्चों ने पुलिस को अपने शब्दों में अनुचित छूने की घटनाएं बताईं। अगर दोष साबित हुए तो आरोपी को 10 साल तक की जेल और 1.5 लाख यूरो तक जुर्माना हो सकता है। बच्चों में दिखा गंभीर मानसिक असर कुछ अभिभावकों ने कहा कि उनके बच्चों में लंबे समय से डर और मानसिक तनाव के संकेत दिख रहे थे। एक वकील ने बताया कि 3 साल का एक बच्चा स्कूल जाने से डरने लगा था। आरोप है कि उसके साथ हिंसा करने वाले मॉनिटर के खिलाफ पहले भी शिकायतें थीं। प्रशासन पर बढ़ा दबाव मामले सामने आने के बाद पेरिस प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है। अधिकारियों के मुताबिक 2026 के पहले तीन महीनों में 78 स्कूल सहायकों को सस्पेंड किया गया, जिनमें 31 पर यौन शोषण के आरोप हैं। फ्रांस की स्वतंत्र संस्था CIIVISE के अनुसार देश में हर साल करीब 1.6 लाख बच्चे रेप या यौन शोषण का शिकार होते हैं। फ्रांस में स्कूल मॉनिटर कौन होते हैं? फ्रांस में स्कूल मॉनिटर, जिन्हें एनिमेटर या पेरिस्कोलर स्टाफ भी कहा जाता है, स्थानीय नगर प्रशासन द्वारा नियुक्त कर्मचारी होते हैं। ये सीधे फ्रांस के शिक्षा मंत्रालय के अधीन नहीं होते। इनकी जिम्मेदारी नर्सरी और प्राइमरी स्कूलों में 3 से 11 साल तक के बच्चों की निगरानी करना होती है। ये बच्चों को लंच ब्रेक, दोपहर की नींद, खेलकूद और आफ्टर-स्कूल गतिविधियों के दौरान संभालते हैं। ये शिक्षक नहीं होते, बल्कि खेल, क्राफ्ट और मनोरंजन गतिविधियां संचालित करते हैं। वहीं सेकेंडरी स्कूलों (कॉलेज और हाई स्कूल) में अनुशासन, सुरक्षा और अनुपस्थिति की निगरानी ‘स्कूल लाइफ’ स्टाफ करता है, जो विशेष प्रशासनिक अधिकारियों के अधीन काम करता है। फ्रांस में तीन साल की उम्र से स्कूल जाना जरूरी है। इसलिए नर्सरी और प्राइमरी स्कूलों में छोटे बच्चे दिन का बड़ा हिस्सा इन मॉनिटर्स के साथ बिताते हैं। मॉनिटर्स सीधे शिक्षा मंत्रालय या स्कूल के कर्मचारी नहीं होते। इन्हें स्थानीय प्रशासन, नगर परिषद या सिटी हॉल की तरफ से भर्ती किया जाता है। अब यह सिस्टम विवादों में है। ऐसा कहा जा रहा है कि मॉनिटर्स की भर्ती प्रक्रिया बहुत कमजोर है। कई लोगों को बिना खास ट्रेनिंग, मनोवैज्ञानिक जांच या पेशेवर डिग्री के काम पर रख लिया जाता है। बड़ी संख्या में लोग अस्थायी या घंटे के हिसाब से काम करते हैं, इसलिए निगरानी और जवाबदेही भी कमजोर रहती है। क्या है #MeTooSchool आंदोलन? #MeTooSchool फ्रांस का एक अभिभावक और सामाजिक आंदोलन है, जो स्कूलों में बच्चों के खिलाफ यौन शोषण, हिंसा और उत्पीड़न के मामलों को सामने लाने और पीड़ितों को न्याय दिलाने की मांग करता है। पीड़ित परिवारों ने आरोप लगाया कि शुरुआती शिकायतों को स्कूल प्रशासन ने नजरअंदाज कर दिया था। पेरिस की प्रॉसिक्यूटर लॉर बेको के मुताबिक राजधानी में 84 नर्सरी स्कूल, 20 प्राइमरी स्कूल और 10 डे-केयर सेंटरों में जांच चल रही है। पेरिस के मेयर इमैनुएल ग्रेगोयर ने बताया कि 2026 की शुरुआत से अब तक 78 स्कूल और आफ्टर-स्कूल कर्मचारियों को सस्पेंड किया गया है। इनमें 31 पर यौन हिंसा के आरोप हैं। उन्होंने बच्चों के खिलाफ अपराध रोकने के लिए 2 करोड़ यूरो की योजना की घोषणा की है। आगे क्या? फ्रांस सरकार स्कूलों और डे-केयर सेंटरों में सुरक्षा नियम कड़े कर सकती है। बच्चों के साथ काम करने वाले स्टाफ की जांच और बैकग्राउंड वेरिफिकेशन बढ़ाए जाने की संभावना है। आने वाले महीनों में और ट्रायल और गिरफ्तारी हो सकती हैं।
फ्रांस में 100 से ज्यादा स्कूलों में चाइल्ड एब्यूज स्कैंडल:3 साल की बच्ची का 'मॉनिटर' ने रेप किया; केस की खुली सुनवाई शुरू

फ्रांस इस समय एक बड़े चाइल्ड एब्यूज स्कैंडल से जूझ रहा है। पेरिस समेत 100 से ज्यादा स्कूलों और डे-केयर सेंटरों में बच्चों के साथ हिंसा, यौन शोषण और रेप के आरोपों की जांच चल रही है। मामले सामने आने के बाद देशभर में आक्रोश बढ़ गया है। 100 से ज्यादा संस्थानों में जांच पेरिस की प्रॉसिक्यूटर लॉर बेको ने बताया कि राजधानी में 84 प्रीस्कूल, करीब 20 प्राइमरी स्कूल और लगभग 10 डे-केयर सेंटरों में जांच चल रही है। कई मामलों में छोटे बच्चों के साथ रेप और यौन शोषण के आरोप लगाए गए हैं। आरोप स्कूल मॉनिटर्स पर लगे हैं। ये वे कर्मचारी होते हैं जो बच्चों की देखभाल लंच ब्रेक, खेल, सोने के समय और आफ्टर-स्कूल गतिविधियों के दौरान करते हैं। #MeTooSchool आंदोलन ने उठाई आवाज कोर्ट के बाहर #MeTooSchool आंदोलन से जुड़े लोगों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने बैनर पर लिखा- “कोई भी बच्चा स्कूल जाने से न डरे।” आंदोलन की सह-संस्थापक बार्का जरूआली ने कहा कि अब पूरे देश में बच्चों की सुरक्षा को लेकर जागने की जरूरत है। बच्चों को भूखा रखने और मारपीट के आरोप अभिभावकों ने आरोप लगाया कि कुछ मॉनिटर्स बच्चों पर चिल्लाते थे, बाल खींचते थे और खाना देने से मना कर देते थे। कुछ मामलों में बच्चों के साथ यौन शोषण के आरोप भी लगे हैं। पीड़ित परिवारों के वकीलों का कहना है कि कई अभिभावकों को शिकायत दर्ज कराने और कार्रवाई करवाने के लिए महीनों संघर्ष करना पड़ा। पीड़ित परिवारों ने ट्रायल सार्वजनिक कराया फ्रांस में बच्चों से जुड़े मामलों की सुनवाई आमतौर पर बंद कमरे में होती है, लेकिन इस बार पीड़ित परिवारों ने ट्रायल सार्वजनिक रखने की मांग की। परिवारों के वकीलों के मुताबिक वे गिसेल पेलिको के चर्चित रेप केस से प्रेरित थे। गिसेल ने कहा था कि “शर्म पीड़ितों नहीं, अपराधियों को होनी चाहिए।” कोर्ट में शुरू हुआ पहला बड़ा ट्रायल स्कैंडल से जुड़े पहले बड़े मामलों में से एक का ट्रायल इस हफ्ते पेरिस में शुरू हुआ। 36 वर्षीय स्कूल सहायक डेविड जी. पर सितंबर 2024 से अप्रैल 2025 के बीच 3 से 5 साल के पांच बच्चों के यौन शोषण और दो महिला सहकर्मियों के साथ यौन उत्पीड़न का आरोप है। हालांकि, आरोपी ने सभी आरोपों से इनकार किया है। जांचकर्ताओं के मुताबिक बच्चों ने पुलिस को अपने शब्दों में अनुचित छूने की घटनाएं बताईं। अगर दोष साबित हुए तो आरोपी को 10 साल तक की जेल और 1.5 लाख यूरो तक जुर्माना हो सकता है। बच्चों में दिखा गंभीर मानसिक असर कुछ अभिभावकों ने कहा कि उनके बच्चों में लंबे समय से डर और मानसिक तनाव के संकेत दिख रहे थे। एक वकील ने बताया कि 3 साल का एक बच्चा स्कूल जाने से डरने लगा था। आरोप है कि उसके साथ हिंसा करने वाले मॉनिटर के खिलाफ पहले भी शिकायतें थीं। प्रशासन पर बढ़ा दबाव मामले सामने आने के बाद पेरिस प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है। अधिकारियों के मुताबिक 2026 के पहले तीन महीनों में 78 स्कूल सहायकों को सस्पेंड किया गया, जिनमें 31 पर यौन शोषण के आरोप हैं। फ्रांस की स्वतंत्र संस्था CIIVISE के अनुसार देश में हर साल करीब 1.6 लाख बच्चे रेप या यौन शोषण का शिकार होते हैं। फ्रांस में स्कूल मॉनिटर कौन होते हैं? फ्रांस में स्कूल मॉनिटर, जिन्हें एनिमेटर या पेरिस्कोलर स्टाफ भी कहा जाता है, स्थानीय नगर प्रशासन द्वारा नियुक्त कर्मचारी होते हैं। ये सीधे फ्रांस के शिक्षा मंत्रालय के अधीन नहीं होते। इनकी जिम्मेदारी नर्सरी और प्राइमरी स्कूलों में 3 से 11 साल तक के बच्चों की निगरानी करना होती है। ये बच्चों को लंच ब्रेक, दोपहर की नींद, खेलकूद और आफ्टर-स्कूल गतिविधियों के दौरान संभालते हैं। ये शिक्षक नहीं होते, बल्कि खेल, क्राफ्ट और मनोरंजन गतिविधियां संचालित करते हैं। वहीं सेकेंडरी स्कूलों (कॉलेज और हाई स्कूल) में अनुशासन, सुरक्षा और अनुपस्थिति की निगरानी ‘स्कूल लाइफ’ स्टाफ करता है, जो विशेष प्रशासनिक अधिकारियों के अधीन काम करता है। फ्रांस में तीन साल की उम्र से स्कूल जाना जरूरी है। इसलिए नर्सरी और प्राइमरी स्कूलों में छोटे बच्चे दिन का बड़ा हिस्सा इन मॉनिटर्स के साथ बिताते हैं। मॉनिटर्स सीधे शिक्षा मंत्रालय या स्कूल के कर्मचारी नहीं होते। इन्हें स्थानीय प्रशासन, नगर परिषद या सिटी हॉल की तरफ से भर्ती किया जाता है। अब यह सिस्टम विवादों में है। ऐसा कहा जा रहा है कि मॉनिटर्स की भर्ती प्रक्रिया बहुत कमजोर है। कई लोगों को बिना खास ट्रेनिंग, मनोवैज्ञानिक जांच या पेशेवर डिग्री के काम पर रख लिया जाता है। बड़ी संख्या में लोग अस्थायी या घंटे के हिसाब से काम करते हैं, इसलिए निगरानी और जवाबदेही भी कमजोर रहती है। क्या है #MeTooSchool आंदोलन? #MeTooSchool फ्रांस का एक अभिभावक और सामाजिक आंदोलन है, जो स्कूलों में बच्चों के खिलाफ यौन शोषण, हिंसा और उत्पीड़न के मामलों को सामने लाने और पीड़ितों को न्याय दिलाने की मांग करता है। पीड़ित परिवारों ने आरोप लगाया कि शुरुआती शिकायतों को स्कूल प्रशासन ने नजरअंदाज कर दिया था। पेरिस की प्रॉसिक्यूटर लॉर बेको के मुताबिक राजधानी में 84 नर्सरी स्कूल, 20 प्राइमरी स्कूल और 10 डे-केयर सेंटरों में जांच चल रही है। पेरिस के मेयर इमैनुएल ग्रेगोयर ने बताया कि 2026 की शुरुआत से अब तक 78 स्कूल और आफ्टर-स्कूल कर्मचारियों को सस्पेंड किया गया है। इनमें 31 पर यौन हिंसा के आरोप हैं। उन्होंने बच्चों के खिलाफ अपराध रोकने के लिए 2 करोड़ यूरो की योजना की घोषणा की है। आगे क्या? फ्रांस सरकार स्कूलों और डे-केयर सेंटरों में सुरक्षा नियम कड़े कर सकती है। बच्चों के साथ काम करने वाले स्टाफ की जांच और बैकग्राउंड वेरिफिकेशन बढ़ाए जाने की संभावना है। आने वाले महीनों में और ट्रायल और गिरफ्तारी हो सकती हैं।
चुनरी चुनरी गाने के रीमेक पर भड़के अभिजीत भट्टाचार्या:कहा- वरुण इस गाने से सलमान खान नहीं बन सकता, भजन बनाया, सलमान ने भी दिया रिएक्शन

वरुण धवन की अपकमिंग फिल्म है जवानी तो इश्क होना है से गाना चुनरी चुनरी रिलीज हो चुका है। ये गाना 1999 की फिल्म बीवी नं. 1 के गाने का रीमेक है, जिसे अभिजीत भट्टाचार्या और अनुराधा श्रीराम ने गाया था। अब अभिजीत नया गाना देख भड़क गए हैं। उन्होंने कहा कि सुनकर ये किसी भजन जैसा लग रहा है। साथ ही उन्होंने कहा है कि वरुण इस गाने से कभी सलमान नहीं बन सकेंगे। हाल ही में एएनआई से बातचीत में सिंगर अभिजीत भट्टाचार्या ने कहा है, ‘जब मैंने ये गाना (चुनरी चुनरी रीमेक सॉन्ग) सुना तो मुझे लगा कि ये कोई भजन है। चुनरी चुनरी एक रोमांटिक ट्रेक था और इन लोगों ने अब इसे भजन बना दिया है।’ आगे उन्होंने वरुण धवन की आलोचना करते हुए कहा, ‘इस एक्टर (वरुण धवन) ने सिर्फ सेकेंड हैंड फिल्में की हैं। खासकर जब इसके पिता (डेविड धवन) ने ऑरिजिनल फिल्म बनाईं। उसने वही गाना इस्तेमाल किया, जो एक समय में हिट था। वरुण धवन इस गाने से सलमान खान नहीं बन सकता। सलमान खान और वरुण धवन में बहुद फर्क है।’ इसके अलावा अभिजीत ने कहा है, ‘ये गाना सलमान खान के करियर का सबसे बड़ा हिट है। जब फिल्म आई है, तब से लेकर अब तक ट्रेंडिंग है। ये सलमान की लाइफ का सबसे बड़ा हिट है। उस वक्त ये सुपरस्टार नहीं एक उभरता हुआ कलाकार था।’ मुझे अप्रोच करते तब भी सोचता- अभिजीत बीवी नं. 1 का गाना चुनरी चुनरी अभिजीत भट्टाचार्या ने गाया था, जबकि नए आए रीमेक गाने को आई पी सिंह, सुधीर यदुवंशी जैसे मेल सिंगर्स ने आवाज दी है। इस पर उन्होंने भड़कते हुए कहा, ‘अगर वो मुझे रीमेक गाने के लिए अप्रोच करते तब भी मैं इसे करने से पहले सोचता। मेरे ऑरिजिनल गाने में बहुत सारी एक्टिंग थी। अच्छा ही हुआ कि मैंने इसे नहीं किया, वर्ना डीग्रेड ही होता। हमने इस गाने को जिस तरह किया, वरुण कभी वैसा कर ही नहीं सकता।’ सलमान भी दे चुके हैं रीमेक पर रिएक्शन चुनरी-चुनरी गाना सलमान खान और सुष्मिता सेन पर फिल्माया गया था। हाल ही में फिल्म के ट्रेलर लॉन्च इवेंट में सलमान ने गाना सुनकर मजाकिया अंदाज में वरुण को इशारा करते हुए कहा, ‘वरुण ने मेरा एक और गाना उठा लिया।’ कब-कब वरुण धवन ने रीमेक का लिया सहारा जुड़वा 2 (2017) ऑरिजिनल फिल्म- जुड़वा (1997) इस फिल्म में वरुण धवन ने ऑरिजिनल फिल्म के गाने ऊंची है बिल्डिंग लिफ्ट तेरी बंद है और चलती है क्या 9 से 12 भी रीमेक किए थे। इन दोनों ही गानों को सलमान पर फिल्माया गया था। कुली नंबर 1 (2020) ऑरिजिनल फिल्म- कुली नंबर 1 (1995) 2020 की कुली नंबर 1 में 1995 की फिल्म के दो गाने तुझको मिर्ची लगी तो मैं क्या करूं और हुस्न है सुहाना को रीमेक किया गया था। इन फिल्मों के अलावा वरुण धवन की अपकमिंग फिल्म का टाइटल है जवानी तो इश्क होना है भी सलमान खान और सुष्मिता पर फिल्माए गए बीवी नंबर 1 के गाने से लिया गया है।
चुनरी चुनरी गाने के रीमेक पर भड़के अभिजीत भट्टाचार्या:कहा- वरुण इस गाने से सलमान खान नहीं बन सकता, भजन बनाया, सलमान ने भी दिया रिएक्शन

वरुण धवन की अपकमिंग फिल्म है जवानी तो इश्क होना है से गाना चुनरी चुनरी रिलीज हो चुका है। ये गाना 1999 की फिल्म बीवी नं. 1 के गाने का रीमेक है, जिसे अभिजीत भट्टाचार्या और अनुराधा श्रीराम ने गाया था। अब अभिजीत नया गाना देख भड़क गए हैं। उन्होंने कहा कि सुनकर ये किसी भजन जैसा लग रहा है। साथ ही उन्होंने कहा है कि वरुण इस गाने से कभी सलमान नहीं बन सकेंगे। हाल ही में एएनआई से बातचीत में सिंगर अभिजीत भट्टाचार्या ने कहा है, ‘जब मैंने ये गाना (चुनरी चुनरी रीमेक सॉन्ग) सुना तो मुझे लगा कि ये कोई भजन है। चुनरी चुनरी एक रोमांटिक ट्रेक था और इन लोगों ने अब इसे भजन बना दिया है।’ आगे उन्होंने वरुण धवन की आलोचना करते हुए कहा, ‘इस एक्टर (वरुण धवन) ने सिर्फ सेकेंड हैंड फिल्में की हैं। खासकर जब इसके पिता (डेविड धवन) ने ऑरिजिनल फिल्म बनाईं। उसने वही गाना इस्तेमाल किया, जो एक समय में हिट था। वरुण धवन इस गाने से सलमान खान नहीं बन सकता। सलमान खान और वरुण धवन में बहुद फर्क है।’ इसके अलावा अभिजीत ने कहा है, ‘ये गाना सलमान खान के करियर का सबसे बड़ा हिट है। जब फिल्म आई है, तब से लेकर अब तक ट्रेंडिंग है। ये सलमान की लाइफ का सबसे बड़ा हिट है। उस वक्त ये सुपरस्टार नहीं एक उभरता हुआ कलाकार था।’ मुझे अप्रोच करते तब भी सोचता- अभिजीत बीवी नं. 1 का गाना चुनरी चुनरी अभिजीत भट्टाचार्या ने गाया था, जबकि नए आए रीमेक गाने को आई पी सिंह, सुधीर यदुवंशी जैसे मेल सिंगर्स ने आवाज दी है। इस पर उन्होंने भड़कते हुए कहा, ‘अगर वो मुझे रीमेक गाने के लिए अप्रोच करते तब भी मैं इसे करने से पहले सोचता। मेरे ऑरिजिनल गाने में बहुत सारी एक्टिंग थी। अच्छा ही हुआ कि मैंने इसे नहीं किया, वर्ना डीग्रेड ही होता। हमने इस गाने को जिस तरह किया, वरुण कभी वैसा कर ही नहीं सकता।’ सलमान भी दे चुके हैं रीमेक पर रिएक्शन चुनरी-चुनरी गाना सलमान खान और सुष्मिता सेन पर फिल्माया गया था। हाल ही में फिल्म के ट्रेलर लॉन्च इवेंट में सलमान ने गाना सुनकर मजाकिया अंदाज में वरुण को इशारा करते हुए कहा, ‘वरुण ने मेरा एक और गाना उठा लिया।’ कब-कब वरुण धवन ने रीमेक का लिया सहारा जुड़वा 2 (2017) ऑरिजिनल फिल्म- जुड़वा (1997) इस फिल्म में वरुण धवन ने ऑरिजिनल फिल्म के गाने ऊंची है बिल्डिंग लिफ्ट तेरी बंद है और चलती है क्या 9 से 12 भी रीमेक किए थे। इन दोनों ही गानों को सलमान पर फिल्माया गया था। कुली नंबर 1 (2020) ऑरिजिनल फिल्म- कुली नंबर 1 (1995) 2020 की कुली नंबर 1 में 1995 की फिल्म के दो गाने तुझको मिर्ची लगी तो मैं क्या करूं और हुस्न है सुहाना को रीमेक किया गया था। इन फिल्मों के अलावा वरुण धवन की अपकमिंग फिल्म का टाइटल है जवानी तो इश्क होना है भी सलमान खान और सुष्मिता पर फिल्माए गए बीवी नंबर 1 के गाने से लिया गया है।
कार्तिक आर्यन स्टारर स्पोर्ट्स ड्रामा में 'बजरंगी भाईजान' जैसा इमोशन:नकली बर्फबारी के बाद अब असली कश्मीर में शूटिंग करेंगे कबीर खान

कबीर खान अपनी नई फिल्म में फिर फैमिली-इमोशन और चाइल्ड-कनेक्ट वाले जॉनर में लौट रहे हैं। फिल्म में कार्तिक आर्यन मुख्य भूमिका में हैं और कहानी एक बच्चे व एक मैच्योर किरदार के रिश्ते के इर्द-गिर्द घूमती है। सूत्रों के मुताबिक, फिल्म का टोन काफी हद तक सलमान खान स्टारर ‘बजरंगी भाईजान’ जैसी भावनात्मक अपील वाला रखा गया है। मेकर्स इसे भारी वीएफएक्स या बड़े सेट्स की बजाय कंटेंट-ड्रिवन फिल्म के तौर पर तैयार कर रहे हैं। फिल्म का बजट भी नियंत्रित रखा गया है। मड आइलैंड में बना कश्मीर, कृत्रिम बर्फबारी भी की गई फिल्म का पहला बड़ा शेड्यूल मुंबई के मड आइलैंड में पूरा किया गया, जहां करीब 15 दिनों तक कश्मीर जैसा सेट तैयार किया गया था। प्रोडक्शन डिजाइन टीम ने वहां कश्मीरी गलियां, बाजार और लोकल मकानों का सेट लगाया। इसी सेट पर पत्थरबाजी और सुरक्षा बलों से जुड़े कुछ अहम सीक्वेंस शूट किए गए। रात के सीन्स के लिए बड़े कृत्रिम चांद और हाई-इंटेंसिटी लाइट्स का इस्तेमाल किया गया ताकि मूनलाइट जैसा प्रभाव मिल सके। मुंबई की गर्मी के बीच सेट पर कृत्रिम बर्फबारी और ठंडा माहौल तैयार करने के लिए खास तकनीक का इस्तेमाल किया गया। कई सीन्स में लोकल कश्मीरी बैकग्राउंड और तनावपूर्ण माहौल को बेहद रियल तरीके से कैद करने की कोशिश की गई है। रियल लोकेशन को भी पूरी प्राथमिकता दे रहे हैं मेकर्स मुंबई शेड्यूल पूरा होने के बाद अब फिल्म की यूनिट असली कश्मीर में शूटिंग कर रही है। टीम बीती 13 तारीख को मुंबई से रवाना हुई थी और 15 तारीख से वहां मुख्य शूट शुरू हो चुका है। यह आउटडोर शेड्यूल करीब 10 दिनों का रखा गया। इसमें फिल्म के इमोशनल हिस्से, ट्रेनिंग मोंटाज और लोकल लोकेशन वाले सीन्स फिल्माए गए। कहानी में कश्मीर का बैकड्रॉप काफी अहम भूमिका निभाता है, इसलिए मेकर्स ने रियल लोकेशंस पर भी शूट को प्राथमिकता दी है। यूनिट घाटी के कम भीड़भाड़ वाले इलाकों और प्राकृतिक लोकेशंस पर शूट कर रही है ताकि विजुअल्स ज्यादा वास्तविक लगें। कुछ सीन्स स्थानीय कलाकारों और वास्तविक माहौल के बीच शूट हो रहे हैं, जिससे कहानी में ग्राउंडेड फील मिले। एप्लॉज और कबीर के जॉइंट वेंचर में बन रही फिल्म शुरुआती दिनों में इस फिल्म के मेकर्स के नामों को लेकर काफी गोपनीयता बरती जा रही थी। क्लैपबोर्ड और फाइलों पर किसी फाइनल टाइटल के बजाय केवल ‘प्रोजेक्ट नंबर’ या ‘प्रोडक्श नं.’ लिखा हुआ था, लेकिन अब यह पूरी तरह साफ हो चुका है कि इस फिल्म के पीछे समीर नायर की मशहूर और बड़ी कंपनी एप्लॉज एंटरटेनमेंट खड़ी है। कॉर्पोरेट स्तर पर एप्लॉज एंटरटेनमेंट जैसी बड़ी कंपनी का इस फिल्म को लीड करना फिल्म की मार्केटिंग, डिस्ट्रीब्यूशन और पोस्ट-प्रोडक्शन के स्केल को बढ़ा रहा है।
गुजरात की हार पर भड़के ग्लेन फिलिप्स:धमर्शाला में बोले- हम हार नहीं मानते, हर चीज का पक्ष में होना जरूरी, जो नहीं हुआ

आईपीएल के नॉकआउट मुकाबले में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) के हाथों मिली हार के बाद गुजरात टाइटंस (GT) के खेमे में मायूसी तो है, लेकिन खिलाड़ियों का हौसला कम नहीं हुआ है। मैच के बाद गुजरात टाइटंस के ग्लेन फिलिप्स मीडिया रूम में पत्रकारों के सवालों का जवाब देने आए। इस दौरान एक पत्रकार के ‘सरेंडर’ करने वाले सवाल पर फिलिप्स बुरी तरह भड़क गए और उसे ‘बेवकूफाना सवाल’ करार दिया। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान माहौल उस समय गरमा गया जब एक पत्रकार ने पूछा कि क्या पहली पारी खत्म होने के बाद ही आप लोगों को समझ आ गया था कि मैच हाथ से निकल चुका है और अब अगले मैच का इंतजार करना चाहिए? इस सवाल पर फिलिप्स ने कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा कि, यह बेहद ही बेवकूफाना और घटिया सवाल है। कोई भी टीम मैदान पर यह सोचकर नहीं उतरती कि चलो इस मैच को छोड़ देते हैं। हम प्रोफेशनल क्रिकेटर्स हैं, हम ऐसा क्यों करेंगे? हम मैदान पर गए और अपना सब कुछ झोंक दिया। हर चीज को आपके पक्ष में होना जरूरी होता है : फिलिप्स उन्होंने आगे कहा कि दुर्भाग्य से जब आप 250 रन जैसे विशाल लक्ष्य का पीछा कर रहे होते हैं, तो हर चीज का आपके पक्ष में होना जरूरी होता है, जो उस दिन नहीं हुआ। मैच के टर्निंग पॉइंट को लेकर फिलिप्स ने माना कि खराब फील्डिंग का खामियाजा टीम को भुगतना पड़ा। उन्होंने कहा, “प्लेऑफ जैसे बड़े मैचों में फील्डिंग की भूमिका सबसे अहम हो जाती है। रुतुराज का कैच जब वह 21 रन पर थे, तब छूटना हमें बहुत भारी पड़ा। उन्होंने हमें इसकी बड़ी सजा दी।” फिलिप्स ने स्वीकार किया कि कोई भी जानबूझकर कैच नहीं छोड़ता, लेकिन हमें अपनी मानसिकता में थोड़ा बदलाव करना होगा। उन्होंने जोर दिया कि मैदान पर हर खिलाड़ी में गेंद को लपकने और कुछ खास करने की भूख दिखनी चाहिए। 254 का पीछा करना आसान नहीं, स्कोरबोर्ड का भारी दबाव था उन्होंने कहा कि, पिच और रन चेज पर बात करते हुए फिलिप्स ने कहा, “यह काली मिट्टी की पिच थी। जब आप 254 रन का पीछा करते हैं, तो स्कोरबोर्ड का भारी दबाव होता है। पंजाब किंग्स ने इस सीजन में एक-दो बार ऐसा करके इसे आसान दिखा दिया है, लेकिन असल में ऐसा नहीं है। मैं आज तक किसी ऐसी टीम का हिस्सा नहीं रहा जो 250 के करीब भी पहुंची हो।” बिना खेले प्रेस कॉन्फ्रेंस में क्यों?’ फिलिप्स ने दिया मजेदार जवाब एक पत्रकार ने जब चुटकी लेते हुए पूछा कि आप आज प्लेइंग-11 का हिस्सा नहीं थे, फिर भी प्रेस कॉन्फ्रेंस में जवाब दे रहे हैं, क्या यह अजीब नहीं लगता? इस पर फिलिप्स ने मुस्कुराते हुए कहा कि, बिल्कुल नहीं। कई बार जो खिलाड़ी बाहर बैठा होता है, उसका नजरिया ज्यादा साफ होता है। हमारे मुख्य कोच आशीष नेहरा हमेशा कहते हैं- ‘चिल पिल लो’ (Take a chill pill)। खिलाड़ियों के लिए जरूरी है कि वे इस हार को भूलकर अगले मैच पर ध्यान लगाएं। एक रन की हार से बेहतर है ऐसी हार, वापसी करना आसान 2 दिन बाद होने वाले अगले नॉकआउट मुकाबले में वापसी को लेकर फिलिप्स ने सकारात्मक रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि इस तरह की बड़ी हार से उबरना कई बार 1 या 2 रन की हार से ज्यादा आसान होता है। अगर आप 1 रन से हारते हैं, तो आप सोचते रह जाते हैं कि काश वहां सिंगल ले लिया होता। लेकिन जब आप 250 रन के चेज में बहुत पीछे रह जाते हैं, तो आप बस यह मान लेते हैं कि आज हमारा दिन नहीं था। अच्छी बात यह है कि टॉप-2 में रहने की वजह से हमारे पास वापसी का एक और मौका मौजूद है।
टीएमसी में फूट? भाजपा नेता का दावा, 50 तृणमूल विधायक, 20 सांसद पाला बदलने को तैयार | भारत समाचार

आखरी अपडेट:27 मई, 2026, 13:05 IST वर्तमान में, टीएमसी के पास पश्चिम बंगाल से 29 लोकसभा सांसद हैं, जबकि भाजपा के पास 12 और कांग्रेस के पास एक है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर बीजेपी चाहे तो अगले कुछ दिनों में पूरी टीएमसी खत्म हो जाएगी. टीएमसी में उथल-पुथल गहरायी: 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में अपनी हार के बाद ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर अशांति व्यापक होती दिख रही है, जब वरिष्ठ भाजपा नेता सौमित्र खान ने दावा किया कि अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस के लगभग 20 सांसद भाजपा के संपर्क में थे और अगर पार्टी नेतृत्व मंजूरी देता है तो वे पाला बदलने के इच्छुक हैं। समाचार एजेंसी पीटीआई के हवाले से उन्होंने कहा, “अगर बीजेपी का केंद्रीय नेतृत्व एक बार कह दे तो टीएमसी अब पार्टी नहीं रहेगी. हर कोई आने के लिए तैयार है. करीब 50 विधायक पार्टी से नाखुश हैं और 20 सांसद शामिल होने के लिए तैयार हैं.” वर्तमान में, टीएमसी के पास पश्चिम बंगाल से 29 लोकसभा सांसद हैं, जबकि भाजपा के पास 12 और कांग्रेस के पास एक है। भाजपा नेता ने तृणमूल के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी पर भी तीखा हमला बोलते हुए उन्हें ”पापी” बताया और कहा कि ”पापियों को जेल जाना होगा।” दल-बदल विरोधी कानून के तहत, अयोग्यता से बचने के लिए संसदीय दल के कम से कम दो-तिहाई सदस्यों को एक साथ पाला बदलने की जरूरत होती है। टीएमसी के मामले में, लोकसभा में 29 सांसदों के साथ, संख्या लगभग 19 या 20 बैठती है। भाजपा नेता के दावों को खारिज करते हुए, वरिष्ठ टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने आरोपों को “बिल्कुल फर्जी” बताया। रॉय ने कहा, “भाजपा और सौमित्र खान पत्रकारों को जो कुछ दे रहे हैं, वह बिल्कुल फर्जी है। ऐसा कुछ नहीं होगा।” यह अटकलें ऐसे समय में आई हैं जब टीएमसी के भीतर असंतोष तेजी से दिखाई देने लगा है। पार्टी के कई सांसदों, विधायकों और स्थानीय नेताओं ने हाल के हफ्तों में सार्वजनिक रूप से असंतोष व्यक्त किया है। यह बेचैनी पूरे पश्चिम बंगाल में नागरिक निकायों से इस्तीफों की लहर के साथ भी आई है। हाल के दिनों में कथित तौर पर 100 से अधिक पार्षदों ने विभिन्न नगर पालिकाओं से इस्तीफा दे दिया है। सबसे बड़ा झटका भाटपाड़ा में लगा, जहां नगर पालिका अध्यक्ष रेबा राहा समेत 35 में से 30 पार्षदों ने इस्तीफा दे दिया. हलीशहर, कांचरापाड़ा, गारुलिया, उत्तरी बैरकपुर और कोंटाई से भी इसी तरह के इस्तीफे की खबरें आईं। टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी का गढ़ माने जाने वाले डायमंड हार्बर में आठ पार्षदों ने यह आरोप लगाते हुए इस्तीफा दे दिया कि निर्वाचित प्रतिनिधियों के पास नागरिक निकाय चलाने में बहुत कम अधिकार हैं। 2021 के विधानसभा चुनावों से पहले, कई प्रमुख टीएमसी नेता भाजपा में चले गए थे, लेकिन ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी के सत्ता बरकरार रखने के बाद वे वापस लौट आए। लेकिन इस बार समीकरण अलग हैं, टीएमसी के 15 साल के शासन को खत्म करने के बाद बीजेपी अब बंगाल की सत्ता में है। यह अटकलें ऐसे समय में आई हैं जब टीएमसी के भीतर बेचैनी के संकेत तेजी से दिखाई देने लगे हैं, हाल के हफ्तों में कई विधायकों, सांसदों और नेताओं ने सार्वजनिक रूप से असंतोष व्यक्त किया है। (एजेंसियों से इनपुट के साथ) चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया टीएमसी में फूट? भाजपा नेता का दावा, 50 तृणमूल विधायक, 20 सांसद पाला बदलने को तैयार अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें
सरकारी हिस्सेदारी बिक्री की खबर से कोल इंडिया 5% गिरा:₹5000 करोड़ जुटाने का प्लान, रिटेल निवेशकों को 29 मई को बोली लगाने का मौका

केंद्र सरकार ऑफर फॉर सेल के जरिए कोल इंडिया की 2% हिस्सेदारी बेच रही है। इस बिक्री में 1% इक्विटी का बेस ऑफर और ओवरसब्सक्रिप्शन होने पर अतिरिक्त 1% का ग्रीन शू ऑप्शन मिलेगा। इस घोषणा के बाद आज 27 मई को इसके शेयर 5% गिरकर 428 रुपए पर आ गए। हालांकि अब इसमें थोड़ी रिकवरी आई है और ये वापस 446 पर पहुंच गया है। कल ये ₹458 पर बंद हुआ था। सरकार ने इस बिक्री के लिए फ्लोर प्राइस ₹412 प्रति शेयर तय किया है, जो इसके पिछले क्लोजिंग प्राइस से करीब 11.2% डिस्काउंट पर है। सरकार का लक्ष्य ₹5 हजार करोड़ तक जुटाना है। OFS विंडो 27 मई और 29 मई को खुली रहेगी चौथी तिमाही में 12% बढ़ा मुनाफा, ₹5.25 प्रति शेयर डिविडेंड मार्च तिमाही (Q4) में कोल इंडिया का प्रदर्शन स्थिर रहा है। कंपनी का कंसोलिडेटेड प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) सालाना आधार पर 12% बढ़कर ₹10,908 करोड़ रुपए रहा। ऑपरेशंस से मिलने वाला रेवेन्यू भी 6% बढ़कर ₹46,490 करोड़ रुपए हो गया है। कंपनी के बोर्ड ने FY26 के लिए ₹5.25 प्रति शेयर के फाइनल डिविडेंड की घोषणा की है, जो आगामी AGM में शेयरधारकों की मंजूरी के बाद दिया जाएगा। तिमाही के दौरान EBITDA 12% बढ़कर ₹17,917 करोड़ रुपए रहा और EBITDA मार्जिन 36% से सुधरकर 39% हो गया। ब्रोकरेज फर्म्स की राय और फ्यूचर टारगेट ब्रोकरेज फर्म इलारा कैपिटल ने इस शेयर पर अपनी ‘अक्युमुलेट’ रेटिंग बरकरार रखी है और टारगेट प्राइस को ₹458 से बढ़ाकर ₹522 प्रति शेयर कर दिया है। नॉलेज पार्ट : ऑफर फॉर सेल: यह लिस्टेड कंपनियों के प्रमोटरों के लिए एक्सचेंज के जरिए अपनी हिस्सेदारी पारदर्शी तरीके से बेचने का एक आसान तरीका है। इसमें मुख्य रूप से बड़े संस्थागत और रिटेल निवेशक हिस्सा लेते हैं और यह सामान्य IPO की तुलना में तेजी से पूरा होता है।
हिस्सेदारी बिक्री की खबर से कोल इंडिया 5% गिरा:सरकार का ₹5000 करोड़ जुटाने का प्लान, रिटेल निवेशक 29 मई को बोली लगा सकेंगे

केंद्र सरकार OFS के जरिए कोल इंडिया की 2% हिस्सेदारी बेच रही है। इस बिक्री में 1% शेयरों का बेस ऑफर और ओवरसब्सक्रिप्शन होने पर अतिरिक्त 1% हिस्सेदारी बिक्री शामिल है। इस घोषणा के बाद आज 27 मई को इसके शेयर 5% गिरकर 428 रुपए पर आ गए। हालांकि अब इसमें थोड़ी रिकवरी आई है और ये वापस 446 पर पहुंच गया है। सरकार ने इस बिक्री के लिए फ्लोर प्राइस ₹412 प्रति शेयर तय किया है, जो इसके पिछले क्लोजिंग प्राइस से करीब 11.2% कम है। सरकार का लक्ष्य ₹5 हजार करोड़ तक जुटाना है। OFS विंडो 27 मई और 29 मई को खुली रहेगी चौथी तिमाही में 12% बढ़ा मुनाफा, ₹5.25 प्रति शेयर डिविडेंड मार्च तिमाही (Q4) में कोल इंडिया का प्रदर्शन स्थिर रहा है। कंपनी का कंसोलिडेटेड प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) सालाना आधार पर 12% बढ़कर ₹10,908 करोड़ रुपए रहा। ऑपरेशंस से मिलने वाला रेवेन्यू भी 6% बढ़कर ₹46,490 करोड़ रुपए हो गया है। कंपनी के बोर्ड ने FY26 के लिए ₹5.25 प्रति शेयर के फाइनल डिविडेंड की घोषणा की है, जो आगामी AGM में शेयरधारकों की मंजूरी के बाद दिया जाएगा। तिमाही के दौरान EBITDA 12% बढ़कर ₹17,917 करोड़ रुपए रहा और EBITDA मार्जिन 36% से सुधरकर 39% हो गया। ब्रोकरेज फर्म्स की राय और फ्यूचर टारगेट ब्रोकरेज फर्म इलारा कैपिटल ने इस शेयर पर अपनी ‘अक्युमुलेट’ रेटिंग बरकरार रखी है और टारगेट प्राइस को ₹458 से बढ़ाकर ₹522 प्रति शेयर कर दिया है। नॉलेज पार्ट : ऑफर फॉर सेल: यह लिस्टेड कंपनियों के प्रमोटरों के लिए एक्सचेंज के जरिए अपनी हिस्सेदारी पारदर्शी तरीके से बेचने का एक आसान तरीका है। इसमें मुख्य रूप से बड़े संस्थागत और रिटेल निवेशक हिस्सा लेते हैं और यह सामान्य IPO की तुलना में तेजी से पूरा होता है।
खालिस्तान समर्थक ने भारतीय उच्चायुक्त का काफिला रोका:गाड़ी के सामने तिरंगा फाड़ा, पैरों से रौंदने की कोशिश; कनाडा पुलिस ने खदेड़ा

कनाडा में एक बार फिर खालिस्तान समर्थकों ने भारत विरोधी हरकत की है। प्रतिबंधित संगठन सिख फॉर जस्टिस (SFJ) से जुड़े खालिस्तानी कार्यकर्ता इंदरजीत सिंह गोसल ने कनाडा में भारतीय उच्चायुक्त दिनेश पटनायक का काफिला रोक दिया। इतना ही नहीं, खालिस्तानी समर्थक ने पुलिस घेरा तोड़कर उनके सामने भारतीय तिरंगे को फाड़ दिया और उसे पैरों तले रौंदने की कोशिश की। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने भारत विरोधी नारे लगाए। साथ ही उसने आरोप लगाया कि पटनायक ने उसकी हत्या की सुपारी दी है। इस घटना का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें खालिस्तानी समर्थक की पूरी हरकत दिख रही है। इस घटना के बाद कनाडा सरकार की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। वैंकूवर में घटना, कार्यक्रम में जा रहे थे उच्चायुक्त यह घटना 26 मई को तब हुई जब वैंकूवर में भारतीय उच्चायुक्त दिनेश पटनायक काफिला के साथ एक कार्यक्रम में जा रहे थे। उनके कार्यक्रम की जानकारी खालिस्तानियों को पहले से थी, इसलिए वे प्रदर्शन करने के लिए पहले ही जमा हो गए थे। जैसे ही उन्होंने उच्चायुक्त के काफिले को देखा तो इनमें से एक इंदरजीत सिंह गोसल सुरक्षा घेरा तोड़कर गाड़ियों के सामने आ गया। भारत विरोधी नारेबाजी की गई उच्चायुक्त पटनायक की गाड़ी के सामने खड़े होकर गोसल ने भारतीय ध्वज को फाड़ दिया और उसे पैरों तले रौंदने की कोशिश की। इस दौरान वहां मौजूद भीड़ ने भारतीय आतंकवादी वापस जाओ के भड़काऊ नारे लगाए। प्रदर्शनकारी लगातार हरदीप सिंह निज्जर की हत्या का मुद्दा उठा रहे थे और चिल्ला रहे थे कि निज्जर को किसने मारा? भारतीय सरकार ने। गोसल ने उच्चायुक्त पर सुपारी देने का आरोप लगाया इंदरजीत सिंह गोसल वही शख्स है जिसे कनाडाई पुलिस ने हाल ही में थ्रेट टू लाइफ के तहत गवाह सुरक्षा की पेशकश की थी। तिरंगा फाड़ने के बाद अपने कृत्य को सही ठहराते हुए गोसल ने एक गंभीर आरोप लगाया। उसने कहा कि उसने भारतीय झंडा इसलिए फाड़ा क्योंकि पटनायक ने उसे जान से मारने के लिए किसी को 50,000 डॉलर की सुपारी दी थी। कनाडाई सरकार का कोई रिएक्शन नहीं इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद भारतीय समुदाय और राजनयिक हलकों में भारी आक्रोश है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि एक देश के शीर्ष राजनयिक को कनाडाई धरती पर न्यूनतम सुरक्षा भी क्यों नहीं मिल पा रही है? कनाडाई पुलिस की मौजूदगी में एक चरमपंथी सुरक्षा घेरा तोड़कर उच्चायुक्त की गाड़ी तक कैसे पहुंच गया? उच्चायुक्त के इंटरव्यू पर मचा बवाल मंगलवार को ही कनाडा के एक मीडिया प्लेटफॉर्म द ग्लोब एंड मेल ने एक कथित इंटरव्यू पब्लिश किया, जिसमें दावा किया गया कि भारतीय उच्चायुक्त दिनेश पटनायक ने कनाडा सरकार को चैलेंज किया है। इसमें कहा गया कि पटनायक ने कनाडाई धरती पर अपराधों में भारत सरकार की संलिप्तता के दावों को खारिज किया। साथ ही उन्होंने निज्जर केस से जुड़े आरोपों को कोरी कल्पना करार देते हुए कहा कि कनाडा की खुफिया एजेंसी खालिस्तानी अलगाववादियों के प्रभाव में आ चुकी है। पटनायक ने आरोप लगाया कि कनाडाई सुरक्षा खुफिया सेवा (CSIS) के कुछ हिस्से कनाडा से काम कर रहे खालिस्तानी अलगाववादी समूहों के प्रभाव में हैं। हालांकि, बाद में उच्चायुक्त ने आर्टिकल के ये दावे खारिज कर दिए। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा- आज ‘ग्लोब एंड मेल’ के लेख में लगाए गए आरोपों से मैं निराश हूं। भारत ने कनाडा की कानून प्रवर्तन और सुरक्षा एजेंसियों के साथ, खासकर पिछले एक साल में, बहुत अच्छा सहयोग बनाया है। हमें कनाडा की संस्थाओं पर पूरा भरोसा है और हम इन भ्रामक आरोपों को पूरी तरह से खारिज करते हैं। कनाडा सरकार ने पलटवार किया कनाडा के सार्वजनिक सुरक्षा मंत्री गैरी आनंदसंगारी ने भारतीय दूत के दावों पर पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि CSIS के कॉम्प्रोमाइज्ड होने का दावा झूठा है और यह कनाडाई सुरक्षाकर्मियों के काम को कमतर आंकता है। सिख फॉर जस्टिस और इसके समर्थक गोसल के बारे में जानिए… गुरपतवंत सिंह पन्नू ने बनाया संगठन सिख फॉर जस्टिस अमेरिका आधारित एक चरमपंथी और अलगाववादी संगठन है, जो भारत के पंजाब राज्य को अलग कर खालिस्तान नामक एक स्वतंत्र देश बनाने की वकालत करता है। भारत सरकार ने इसे देश की संप्रभुता और अखंडता के लिए खतरा मानते हुए एक गैरकानूनी और आतंकवादी संगठन घोषित किया हुआ है। इस संगठन की शुरुआत वर्ष 2009 में अमेरिका में हुई थी। इसका मुख्य संचालक गुरपतवंत सिंह पन्नू है, जो पेशे से वकील है और अमेरिका-कनाडा की दोहरी नागरिकता रखता है। भारत सरकार ने पन्नू को व्यक्तिगत रूप से भी आतंकवादी घोषित किया हुआ है। यह संगठन कनाडा, ब्रिटेन, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में बसे सिख प्रवासियों के बीच कथित खालिस्तान के समर्थन के लिए गैर-बाध्यकारी जनमत संग्रह कराता रहता है। हालांकि, इन आयोजनों की कोई कानूनी या कूटनीतिक मान्यता नहीं होती। SFJ सोशल मीडिया से पंजाब के युवाओं को भड़काने और कट्टरपंथी बनाने का प्रयास करता है। खालिस्तान समर्थक है इंदरजीत सिंह गोसल इंदरजीत सिंह गोसल कनाडा में सक्रिय एक प्रमुख खालिस्तान समर्थक और चरमपंथी है। वह भारत सरकार द्वारा प्रतिबंधित संगठन SFJ का मुख्य कनाडाई समन्वयक और आयोजक है। उसे घोषित आतंकवादी गुरपतवंत सिंह पन्नू का बेहद करीबी और राइट हैंड माना जाता है। जून 2023 में ब्रिटिश कोलंबिया में खालिस्तानी चरमपंथी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद, गोसल ने कनाडा में SFJ के संचालन और कमान की मुख्य जिम्मेदारी संभाली। वह कनाडा में कथित खालिस्तान जनमत संग्रह आयोजित कराने का मुख्य चेहरा बन गया। वह पन्नू के निजी सुरक्षा अधिकारी (PSO) के रूप में भी काम कर चुका है। नवंबर 2024 में कनाडा के ब्रैम्पटन में एक हिंदू मंदिर के बाहर श्रद्धालुओं पर हुए हिंसक हमले और विरोध प्रदर्शनों में गोसल मुख्य साजिशकर्ताओं में शामिल था। कनाडाई पुलिस (पील रीजनल पुलिस) ने हिंदू-कनाडाई नागरिकों को डराने-धमकाने और हिंसा फैलाने के आरोप में उसे गिरफ्तार किया था, लेकिन बाद में वह शर्तों पर रिहा हो गया। सितंबर 2025 में ओंटारियो पुलिस ने गोसल को उसके साथियों के साथ बिना लाइसेंस के अवैध हथियार रखने के आरोप में दोबारा गिरफ्तार किया। यह गिरफ्तारी भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल और उनके कनाडाई समकक्ष के बीच हुई एक उच्च-स्तरीय बैठक के ठीक बाद









