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लौकी की कढ़ी रेसिपी: गर्मी में पेट को ठंडा करने वाली दही और लौकी की कढ़ी, बच्चे भी हो जाएंगे फैन; नोट करें मिनट वाली रेसिपी

तस्वीर का विवरण

अगर आप भी रोज-रोज की दुकान से बोर हो गए हैं, तो इस बार घर पर खरीदें लौकी की स्वादिष्ट कढ़ी. छवि: एआई लोकी की कढ़ी बनाने की सामग्री: 1 कप लौकी, 1 कप दही, 2 बड़े बेसन, 1 हरी मिर्च नारंगी कटी हुई, 1 छोटा अदरक अदरक का पेस्ट, 1/2 छोटा अदरक हल्दी पाउडर, स्वाद नमक, 3 कप पानी छवि: फ्रीपिक धन्यवाद के लिए: 1 बड़ा चम्मच घी, 1/2 छोटा चम्मच मेथी दाना, 1/4 छोटा चम्मच मेथी दाना, 2 सूखी लाल मिर्च, चुटकीभर हींग, कैरी पत्ता। इसका स्वाद इतना अच्छा है कि बच्चा भी बार-बार खाने की मांग करेगा। छवि: फ्रीपिक बनाने की आसान विधि: सबसे पहले लोकी को ढोकर कद्दू कर लें। अब एक बड़ी झील में दही, बेसन और पानी के महानुभावों से फेंट लें ताकि गुठलियां न रहें। छवि: एआई इसके बाद इसमें कद्दू, की हुई लौकी, हल्दी, नमक, हरी मिर्च और अदरक दाल शामिल हैं। अब इस मिश्रण को गैस पर मध्यम आँच में मसाले के लिए रख दें। बीच-बीच में रुकें ताकि कढ़ी नीचे न लगें। छवि: एआई करीब 15-20 मिनट में लड़की अच्छी तरह पैक करेगी और थोड़ी थोड़ी गाड़ी होगी। अब एक छोटे पैन में घी गर्म करने के लिए तड़का लगाएं। इसमें जीरा, मेथी दाना, हींग, सूखी लाल मिर्च और कैरी पत्ता शामिल हैं। छवि: एआई जब तड़का अच्छी तरह से दिया जाए, तो इसे तैयार कर लें कढ़ी में डाल दें। बस तैयार है स्वादिष्ट और शानदार लौकी की कढ़ी। लौकी की कढ़ी को गरम-गरम चावल, जीरा चावल या रोटी के साथ सर्व करें. छवि: एआई ऊपर से छोटी हरी धनिया का स्वाद और भी बढ़ जाता है। शरीर को ठंडक प्रबंधन में मदद मिलती है। पाचन क्रिया बेहतर होती है। व्यवसाय होने का कारण आसानी से पच जाता है। छवि: सोशल मीडिया हीट डिहाइड्रेशन में आराम मिलता है। बच्चों और बड़ों दोनों के लिए कार्मिक पद की नियुक्ति होगी। अगर आप समर में कुछ फ़्लैक्शन, टेस्टी और कलाकृतियां बनाना चाहते हैं, तो लोकी की कढ़ी ज़रूर बनाएं। छवि: फ्रीपिक

दिल, दिमाग और पाचन का रक्षक वचा पौधा, आयुर्वेद में इसे क्यों माना जाता है संपूर्ण स्वास्थ्य का चमत्कारी उपाय?

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Last Updated:May 19, 2026, 15:45 IST वचा (वच) एक औषधीय आयुर्वेदिक पौधा माना जाता है, जो दिल, दिमाग और पाचन के लिए लाभकारी बताया गया है. यह रक्त संचार सुधारने, तनाव कम करने, मानसिक शांति देने और पाचन तंत्र को मजबूत करने में मदद करता है. आयुर्वेद के अनुसार इसके सेवन से हृदय पर दबाव कम होता है और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है. हालांकि इसके उपयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी माना जाता है. आयुर्वेद के अनुसार, वचा पौधा शरीर में रक्त संचार को बेहतर बनाने में मदद करता है और दिल को मजबूत रखने में सहायक माना जाता है. इसके अलावा यह तनाव कम करने, दिमाग को शांत रखने और पाचन सुधारने में भी उपयोगी बताया गया है. तनाव कम होने से हृदय पर पड़ने वाला दबाव भी घटता है. आयुर्वेद में वचा (वच) पौधे को एक खास औषधीय पौधा माना गया है. इसे पारंपरिक रूप से हृदय से जुड़ी समस्याओं में लाभकारी बताया जाता है. वाच का उपयोग प्राचीन समय से आयुर्वेदिक उपचार में किया जा रहा है. डॉ. अभिषेक कुमार मिश्रा बताते हैं कि इसके अलावा वचा पौधा पाचन तंत्र को भी मजबूत करता है. आयुर्वेद में माना जाता है कि खराब पाचन कई बीमारियों की जड़ होता है. वाच गैस, अपच और पेट की अन्य समस्याओं को दूर करने में मदद करता है. जब पाचन सही रहता है, तो शरीर में पोषक तत्व अच्छी तरह से अवशोषित होते हैं, जिससे हृदय समेत पूरे शरीर को लाभ मिलता है. Add News18 as Preferred Source on Google डॉ. अभिषेक मिश्रा के अनुसार, वचा पौधा शरीर में रक्त संचार को बेहतर बनाता है. जब शरीर में खून का प्रवाह सही तरीके से होता है, तो हृदय पर दबाव कम पड़ता है और दिल स्वस्थ रहता है. वाच के सेवन से नसों में जमा गंदगी को हटाने में मदद मिलती है, जिससे हार्ट ब्लॉकेज जैसी समस्याओं का खतरा कम हो सकता है. यही कारण है कि आयुर्वेदाचार्य इसे दिल को मजबूत बनाने वाला पौधा मानते हैं. लोकल 18 से बातचीत के दौरान रामनाथ आरोग्यधाम के वैद्य (डॉ.) अभिषेक कुमार मिश्रा बताते हैं कि वचा (वच) के पौधे दिल और दिमाग के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है. माना जाता है कि इसके पंचमूल का प्रयोग करके दिल से और दिमाग से संबंधित बीमारियों को दूर किया जा सकता है. वचा पौधे का एक बड़ा गुण यह भी है कि यह तनाव और मानसिक थकान को कम करने में सहायक होता है. आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव दिल की बीमारियों का एक बड़ा कारण बन चुका है. वाच दिमाग को शांत रखने में मदद करता है और चिंता को कम करता है. जब मन शांत रहता है, तो इसका सीधा असर दिल की सेहत पर पड़ता है. तनाव कम होने से हृदय पर पड़ने वाला अतिरिक्त दबाव भी घट जाता है. डॉ. अभिषेक मिश्रा बताते हैं कि इसके जड़ को सुखाकर पाउडर बनाकर इसका प्रयोग किया जा सकता है और इसके पांचों मूल का भी प्रयोग किया जाता है. इसका प्रयोग 4 रत्ती से 3 ग्राम तक किया जाता है, लेकिन इसका प्रयोग करने से पहले अपने डॉक्टर या किसी आयुर्वेदाचार्य से एक बार सलाह जरूर लें. डॉ अभिषेक कुमार मिश्रा बताते हैं कि वचा (वच) का पौधा लगाना भी काफी आसान है. इसको गमले में या किचन गार्डन में आसानी से लगाया जा सकता है. डॉ. अभिषेक कुमार मिश्रा बताते हैं कि वचा का उपयोग सिर्फ दिल और पाचन के लिए ही नहीं, बल्कि सर्दी-खांसी, दमा और आवाज से जुड़ी समस्याओं में भी किया जाता है. कई जगहों पर इसे बच्चों की याददाश्त बढ़ाने और बोलने की क्षमता सुधारने के लिए भी उपयोग में लाया जाता है. डॉ. अभिषेक कुमार मिश्रा के अनुसार, वाच में मौजूद औषधीय गुण शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में भी सहायक होते हैं. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।

इस घास की चाय क्यों पीते हैं पहाड़ों पर लोग? वजन घटाए…तनाव भगाए, चौंका देगा इसका सीक्रेट

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Last Updated:May 19, 2026, 15:33 IST Lemon Grass Tea Benefits : उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में प्राकृतिक रूप से उगने वाली लेमन ग्रास लोगों की पसंदीदा हर्बल चाय बनती जा रही है. इसकी खुशबू और औषधीय गुण शरीर को कई तरह से फायदा पहुंचाते हैं. बागेश्वर की चिकित्सक डॉ. संगीता लोकल 18 से बताती हैं कि इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट शरीर को अंदर से मजबूत बनाते हैं, संक्रमण से लड़ने की ताकत देते हैं. पहाड़ी इलाकों में ये प्राकृतिक इम्यूनिटी बूस्टर की तरह उपयोग होती आई है. पहाड़ों में लोग सुबह खाली पेट इसकी चाय पीते हैं, जिससे शरीर में ताजगी बनी रहती है. बिना चीनी इसका सेवन वजन नियंत्रित रखने में सहायक है. लेमन ग्रास चाय सिर्फ शरीर ही नहीं बल्कि त्वचा के लिए भी लाभकारी मानी जाती है. इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट त्वचा को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं. नियमित सेवन से शरीर में मौजूद टॉक्सिन बाहर निकलते हैं, जिससे त्वचा साफ और चमकदार दिखाई देती है. यह त्वचा पर समय से पहले आने वाले बुढ़ापे के असर को कम करने में मदद कर सकती है. कई लोग इसका उपयोग घरेलू ब्यूटी उपचार में भी करते हैं. पहाड़ी क्षेत्रों में महिलाएं इसे प्राकृतिक हेल्थ ड्रिंक के रूप में अपनाती हैं. गर्मियों में इसकी चाय शरीर को अंदर से ठंडक देने का काम भी करती है. लेमन ग्रास की तासीर हल्की गर्म मानी जाती है, इसलिए यह सर्दी-जुकाम में काफी राहत पहुंचाती है. इसकी चाय पीने से गले की खराश कम होती है, शरीर को आराम मिलता है. कई लोग इसमें अदरक और शहद मिलाकर भी सेवन करते हैं. इसमें मौजूद एंटीबैक्टीरियल गुण शरीर को संक्रमण से बचाने में मदद करते हैं. पहाड़ों में ठंड के मौसम में लोग नियमित रूप से इसकी चाय पीते हैं. इससे शरीर गर्म रहता है, सर्द मौसम का असर कम महसूस होता है. वायरल संक्रमण के दौरान भी इसे फायदेमंद माना जाता है. लेमन ग्रास चाय बनाना बेहद आसान है. इसके लिए पानी में ताजी लेमन ग्रास की पत्तियां डालकर कुछ मिनट तक उबालना होता है. स्वाद बढ़ाने के लिए इसमें शहद, अदरक या नींबू भी मिलाया जा सकता है. पहाड़ी क्षेत्रों में लोग अपने घरों के आसपास उगी लेमन ग्रास का उपयोग करते हैं. इसकी खुशबू चाय को बेहद ताजगी भरा स्वाद देती है. बाजार में भी अब सूखी लेमन ग्रास आसानी से उपलब्ध होने लगी है. प्राकृतिक और बिना केमिकल वाली यह चाय लोगों को हेल्दी जीवनशैली की ओर आकर्षित कर रही है. नियमित सेवन से शरीर और मन दोनों को फायदा मिल सकता है. Add News18 as Preferred Source on Google लेमन ग्रास में विटामिन A और विटामिन C अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करते हैं. बदलते मौसम में सर्दी-जुकाम और वायरल संक्रमण से बचाव के लिए लोग इसकी चाय पीना पसंद करते हैं. बागेश्वर की चिकित्सक  डॉ. संगीता लोकल 18 से बताती हैं कि इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट शरीर को अंदर से मजबूत बनाते हैं, संक्रमण से लड़ने की ताकत देते हैं. पहाड़ी इलाकों में इसे प्राकृतिक इम्यूनिटी बूस्टर माना जाता है. नियमित सेवन से शरीर में ऊर्जा बनी रहती है, थकान कम महसूस होती है. खासकर बरसात और सर्दियों के मौसम में इसकी चाय काफी फायदेमंद मानी जाती है. भागदौड़ भरी जिंदगी में मानसिक तनाव और चिंता की समस्या तेजी से बढ़ रही है. ऐसे में लेमन ग्रास चाय दिमाग को शांत रखने में मदद कर सकती है. इसकी खुशबू और प्राकृतिक गुण मानसिक तनाव को कम करने में सहायक माने जाते हैं. कई लोग दिनभर की थकान के बाद शाम के समय इसकी चाय पीते हैं, जिससे उन्हें सुकून महसूस होता है. इसमें मौजूद तत्व नर्वस सिस्टम को रिलैक्स करने में मदद करते हैं. इससे नींद भी बेहतर आती है और मन शांत रहता है. लगातार तनाव महसूस करने वाले लोगों के लिए यह हर्बल चाय एक अच्छा विकल्प बनती जा रही है. आजकल बढ़ते वजन की समस्या से परेशान लोग लेमन ग्रास चाय को अपनी डाइट में शामिल कर रहे हैं. यह शरीर के मेटाबॉलिज्म को तेज करने में मदद करती है, जिससे कैलोरी तेजी से बर्न होती है. यह पेट में अतिरिक्त चर्बी जमा होने से भी रोकती है. बिना चीनी के इसका सेवन करने से वजन नियंत्रित रखने में सहायता मिल सकती है. पहाड़ों में लोग सुबह खाली पेट इसकी चाय पीते हैं, जिससे शरीर में ताजगी बनी रहती है. यह शरीर को डिटॉक्स करने में भी मदद करती है. नियमित सेवन के साथ संतुलित भोजन और व्यायाम करने से बेहतर परिणाम देखने को मिल सकते हैं. लेमन ग्रास चाय पेट से जुड़ी कई परेशानियों में राहत देने का काम करती है. इसमें मौजूद प्राकृतिक तत्व पाचन तंत्र को मजबूत बनाते हैं. गैस, एसिडिटी और कब्ज जैसी समस्याओं को कम करने में मदद करते हैं. कई लोग भारी भोजन के बाद इसकी चाय पीना पसंद करते हैं, क्योंकि इससे पेट हल्का महसूस होता है. पहाड़ी क्षेत्रों में पुराने समय से लोग इसे घरेलू नुस्खे के तौर पर इस्तेमाल करते आए हैं. इसके सेवन से पेट दर्द और अपच की समस्या में भी राहत मिलती है. नियमित रूप से लेमन ग्रास चाय पीने से शरीर की पाचन क्रिया बेहतर बनी रहती है, भोजन जल्दी पचने में मदद मिलती है. लेमन ग्रास चाय शरीर से विषैले तत्व बाहर निकालने में मदद करती है. इसका सेवन करने से शरीर की सफाई प्राकृतिक तरीके से होती है. यह किडनी और लिवर को स्वस्थ रखने में भी मददगार मानी जाती है. पहाड़ी क्षेत्रों में लोग इसे शरीर को तरोताजा रखने के लिए पीते हैं. इसके सेवन से शरीर में पानी की मात्रा संतुलित रहती है, शरीर हल्का महसूस होता है. कई लोग इसे सुबह के समय पीना पसंद करते हैं ताकि दिनभर शरीर में ताजगी बनी रहे. प्राकृतिक डिटॉक्स ड्रिंक के रूप में इसकी लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।

विधायक रविंद्र भाटी ने खुद पर पेट्रोल छिड़का:पुलिस पकड़कर ले गई; 500 गाड़ियों के साथ कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन करने पहुंचे थे

विधायक रविंद्र भाटी ने खुद पर पेट्रोल छिड़का:पुलिस पकड़कर ले गई; 500 गाड़ियों के साथ कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन करने पहुंचे थे

बाड़मेर में विरोध प्रदर्शन के दौरान शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने अपने ऊपर पेट्रोल छिड़क लिया। समर्थकों ने कपड़े से तुरंत पेट्रोल को पोंछ दिया। इसी दौरान वहां मौजूद पुलिसकर्मी विधायक भाटी और उनके समर्थकों को धक्के मारते हुए ले गए। भाटी एक बैग में अपने साथ पेट्रोल भरी बोतल लेकर आए थे। उन्होंने बैग से बोतल निकाली और खुद पर छिड़क ली। पुलिस उन्हें पकड़कर कलेक्ट्रेट के अंदर ले गई है। यहां कलेक्टर चिन्मयी गोपाल और एसपी चुनाराम जाट उनसे बात कर रहे हैं। 4 पॉइंट्स में समझ लीजिए पूरा मामला 1. दरअसल, मजदूरों की मांगों को लेकर विधायक रविंद्र सिंह भाटी 500 गाड़ियों के काफिले के साथ मंगलवार दोपहर गिरल गांव से कलेक्ट्रेट की तरफ कूच किया। कलेक्ट्रेट से 1 किमी पहले पुलिस ने बसें लगा कर भाटी का काफिला रोक लिया। 2. काफिला रोकने के बाद विधायक भाटी पैदल ही अपने समर्थकों के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचे। समर्थकों को पुलिस ने पकड़ा तो विधायक भाटी ने खुद पर पेट्रोल छिड़क लिया। 3. भाटी ने सोमवार को घोषणा की थी कि अगर मजदूरों की मांगें नहीं मानी जाती हैं तो वे मंगलवार को मजदूर आंदोलन करेंगे। 4. इससे एक दिन पहले हाईकोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए गिरल माइंस से लिग्नाइट परिवहन (ट्रांसपोर्टेशन) शुरू करने और वाहनों को सुरक्षा देने के निर्देश दिए थे। साथ ही एसपी और शिव थानाधिकारी से बाधा उत्पन्न करने वालों को गिरफ्तार करने के आदेश दिए थे। पहले पढ़िए मांगें देखें भाटी के कूच की तस्वीरें… क्यों हो रहा विरोध राजस्थान स्टेट माइंस एंड मिनरल्स लिमिटेड (RSMML) की गिरल में लिग्नाइट माइंस की ओर से थुंबली समेत आसपास के इलाकों में जमीन अधिग्रहण कर कोयला खनन किया जा रहा है। आरोप है कि कंपनी ने स्थानीय लोगों को रोजगार देने का वादा किया था, लेकिन अब युवाओं को नौकरी से निकाला जा रहा है। इसी से प्रभावित किसान और गांव के युवा 9 अप्रैल से गिरल गांव में धरने पर बैठे हैं। बाड़मेर जिले के गिरल लिग्नाइट माइंस में स्थानीय श्रमिकों, ड्राइवरों और ग्रामीणों का आंदोलन पिछले 39 दिन से जारी है। उनकी मांग है कि 8 घंटे की ड्यूटी लागू की जाए और नौकरी के लिए स्थानीय लोगों को प्राथमिकता दी जाए। राजस्थान सरकार का PSU है RSMML RSMML राजस्थान सरकार का एक सार्वजनिक उपक्रम (PSU) है, जो रॉक फॉस्फेट, लिग्नाइट, जिप्सम और लाइमस्टोन का खनन करती है। गिरल लिग्नाइट माइंस, बाड़मेर जिले के थुम्बली और गिरल गांव में स्थित है। इसे राजस्थान की पहली आधुनिक ओपनकास्ट (खुली) लिग्नाइट खदान भी माना जाता है। 1994 में RSMML द्वारा इस खदान की शुरुआत की गई थी। यह मुख्य रूप से लिग्नाइट का उत्पादन करती है, जो गिरल लिग्नाइट पावर प्लांट को ईंधन की सप्लाई करती है।

प्याज की गंध: प्याज ही मुंह से निकलता है भयंकर विनाशकारी? इन 5 रसोई उपकरणों से चुकियों में गंध होगी दूर

प्याज की गंध: प्याज ही मुंह से निकलता है भयंकर विनाशकारी? इन 5 रसोई उपकरणों से चुकियों में गंध होगी दूर

प्याज की गंध दूर करें: रसोई में खाने से प्याज पूरे स्वाद को बढ़ा देता है, साथ ही गर्मियों में ये शरीर को अंदर से ठंडक भी देता है। लेकिन प्याज या कटर के बाद बार-बार हाथों और मुंह में तेजी से विघटन दिखाई देता है। क्योंकि इसमें मौजूद सकल कंपनी ग्राउंड्स माउथ से लंग्स प्याज़ तक के उद्यम लंबे समय तक गंध पैदा करते रहते हैं। पेज का तेज धमाका आने के कई बार ग्रुप में शर्मिंदगी मेहसूस होता है। इस समस्या से निपटने के लिए कुछ आसान और आसान उपाय हैं, जिन्हें आप अपना सकते हैं। प्याज खाने के कुछ देर बाद एक सेब खा लें। सेब में मौजूद एंजाइम्स ओबॅन्ज के स्टूडियो कंपाउंड्स को तोड़ने में मदद करते हैं। इससे संसारों की दुर्गंध काफी हद तक कम हो जाती है। टेम्प्लेट में स्क्रैप हटाने की क्षमता शानदार है। हाथों पर छोटे सा नींबू का रस राँचें या पानी से मुंह कर लें। इसमें मौजूद साइट्रिक एसिड बैक्टीरिया को नष्ट कर दिया जाता है और गंध को तुरंत ख़त्म कर दिया जाता है। ग्रीन टी में पॉलीफेनोल्स जैसे एंटीऑक्सीडेंट होते हैं। ये प्याज की गंध पैदा होने वाले तत्वों को नष्ट कर देती है। खाने के बाद एक कप गर्म ग्रीन टी पीने से मुंह में पानी रहता है और चर्चे का असर कम होता है। एक अनोखा लेकिन साधन ये भी है कि क्लासिक स्टील पर हैंड राँच लें। स्टील के चाकू प्याज़ के फ़ोर्स से जुड़कर गंध को खाल से अलग कर देते हैं। इसके अलावा हाथों पर नमक रांगेकर धोने से भी बदबू कम हो जाती है। मुंह की दुर्गंध के लिए एप्पल साइडर सिरका या सोडा वाले पानी से खरीदें। इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से लेकर मुंबई तक की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक है। जिसमें बैंच माउंट और स्टेबल कंट्रोल नहीं रहता है। ये सभी उपाय, आसान और घर में मीटिंग वाली सामग्री से ही जा सकते हैं। अगली बार प्याज या कटर के बाद इन एनीस्ट को पॉलिश और टैरोटाजा महसूस करें। (टैग्सटूट्रांसलेट)प्याज की गंध दूर करना(टी)प्याज की गंध दूर करना(टी)प्याज के बाद सांसों की दुर्गंध(टी)प्याज की गंध दूर करने के प्राकृतिक तरीके(टी)प्याज से सांस के उपाय

मुंह के छाले कब ले लेता है कैंसर का रूप, कैसे समझें कि ये नॉर्मल नहीं, ENT के बड़े डॉक्टर ने बताया क्लू

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Last Updated:May 19, 2026, 14:27 IST Persistence mouth ulcer: हमारे मुंह में छाले अक्सर होते रहते हैं. ये छाले बिना दर्द वाले होते हैं और अपने आप गायब भी हो जाते हैं. लेकिन जब ये छाले बार-बार आने लगे और साथ में आवाज में भी बदलाव होने लगे तो यह किसी गंभीर बीमारी के संकेत हो सकते हैं. इसलिए ऐसे संकेतों को कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए क्योंकि ये कैंसर के भी संकेत हो सकते हैं. लेकिन सवाल है कि कैसे समझें कि कौन सा छाला कैंसर का संकेत है. इसके लिए हमने मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज में ENT डिपार्टमेंट के प्रमुख प्रोफेसर डॉ. रवि मेहर से बात की. मुंह में छोटे-छोटे छाले बवंडर बन सकता है. हालांकि आमतौर पर इससे कोई परेशानी नहीं होती है. जब आप ज्यादा थक जाते हैं, कमजोरी होने लगती है, सीजनल इंफेक्शन होता है, पॉल्यूशन बढ़ता है, ब्रश करने में कुछ गलतियां होने लगती है तो मुंह में छाले आ जाते हैं और ये अपने आप ठीक भी हो जाते हैं. लेकिन जब ये छाले-छाले बार-बार आने लगे तो यह कैंसर भी हो सकता है. छाले के साथ अगर आवाज में परिवर्तन हो जाए तो यह ज्यादा घातक कॉम्बिनेशन है क्योंकि इससे कैंसर की आशंका ज्यादा प्रबल हो जाती है. ऐसे में हमारे लिए यह जानना जरूरी है कि हम कब समझें कि मामला गंभीर हो गया है और अब डॉक्टर के पास जाना चाहिए. इसके लिए हमने मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज नई दिल्ली में ENT डिपार्टमेंट के डायरेक्टर डॉ. रवि मेहर से बात की. कब ये छाले कैंसर का रूप बन जाते हैं डॉ. रवि मेहर ने बताया कि मुंह में छाले आमतौर पर नॉर्मल होते हैं. कई कारणों से यह अपने आप आते हैं और अपने आप चले जाते हैं. कुछ मामलों में कुछ दवाइयां खाकर भी इसे ठीक किया जा सकता है. लेकिन कुछ छाले बेहद गंभीर किस्म के हो सकते हैं. अगर मुंह में छाल बड़े हैं और इसमें दर्द भी हो रहा है तो इसे गंभीरता से लेनी चाहिए. अगर ये छाले दवाई खाने के बाद ठीक नहीं हो रहा है तो यह और भी गंभीर है. वास्तव में जब मुंह में छाले बड़े आकार के हो और वे सख्त होने लगे, उनमें से खून निकलने लगे और कभी-कभार दर्द भी हो तो ऐसे संकेत कैंसर के हो सकते हैं. हालांकि इन सबके बावजूद यह जरूरी नहीं कि ये कैंसर ही हो लेकिन अगर ये सारे लक्षण दवा खाने के बाद भी ठीक न हो और दो सप्ताह से ज्यादा हो गए हों तो कैंसर की आशंका ज्यादा है.अगर छाले का आकार धीरे-धीरे बढ़ता ही जाए कम न हो तो ये ज्यादा खतरनाक है. छाले के कैंसर में बदलने का सबसे बड़ा संकेत ये होता है कि यह सिर्फ एक छाला होता है जो धीरे-धीरे बड़ा होने लगता है. अगर सिर्फ एक छाला है तो ऐसे मामलों में बिना देर किए कैंसर के डॉक्टर के पास जाना चाहिए. कब छाले बिना नुकसान वाले होते हैं डॉ. रवि मेहर कहते हैं कि आमतौर पर छाले नॉर्मल ही होते हैं. ये आकार में छोटे-छोटे होते हैं, आकार बढ़ता नहीं है. ये अपने आप ठीक हो जाता है. अगर नहीं भी ठीक होता तो दो-तीन बाद लोग मल्टीविटामिन की गोलियां खा लेते हैं. इससे ठीक हो जाता है. ऐसे छाले मुंह में कई होते हैं. जब मल्टीपल छाले हो तो डरने की कोई बात नहीं. ये छाले क्यों निकलते हैं मुंह में छाले निकलने के कई कारण होते हैं. हालांकि हर छाला कैंसर नहीं होता. आमतौर पर मुंह में छाले खराब लाइफस्टाइल की गलतियों से निकलते हैं. जब शरीर में विटामिन B12, फोलिक एसिड (B9), आयरन और जिंक की कमी होने लगे तो मुंह में छाले निकलने लगते है. इसलिए मल्टीविटामिन खाते ही ठीक होने लगते हैं. पेट की समस्याओं के कारण भी छाले निकलने लगते हैं. जब पाचन तंत्र में खराबी, कब्ज या एसिडिटी होती है तो पेट की गर्मी बढ़ जाती है, जिसका सीधा असर मुंह की म्यूकोसा परत पर पड़ता है और छाले निकल आते हैं.कई बार ब्रश करते समय अचानक चोट लगना, गलती से गाल कट जाना या तीखे दांतों की रगड़ से भी छाले हो जाते हैं. शरीर में हार्मोनल बदलाव के कारण भी मुंह में छाले निकल सकते हैं. महिलाओं में पीरियड्स के दौरान होने वाले हार्मोनल उतार-चढ़ाव के कारण भी बार-बार छाले होने की समस्या देखी जाती है. मानसिक तनाव, कमजोर इम्यूनिटी, कुछ फूड इंटॉलरेंस आदि के कारण भी छाले निकल सकते हैं. लेकिन ये छाले दवा खाते ही ठीक होने लगते हैं या अपने आप ठीक होने लगते हैं. About the Author Lakshmi Narayan 18 साल से ज्यादा के लंबे करियर में लक्ष्मी नारायण ने डीडी न्यूज, आउटलुक, नई दुनिया, दैनिक जागरण, हिन्दुस्तान जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। समसामयिक विषयों के विभिन्न मुद्दों, राजनीति, समाज, …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें

जान्हवी कपूर ने किया बॉडीगार्ड को इशारा:तुरंत सेल्फी ले रहे फैन पर लिया गया एक्शन, गोविंदा के गार्ड्स की भी पैपराजी से हुई झड़प

जान्हवी कपूर ने किया बॉडीगार्ड को इशारा:तुरंत सेल्फी ले रहे फैन पर लिया गया एक्शन, गोविंदा के गार्ड्स की भी पैपराजी से हुई झड़प

सोमवार को अपकमिंग फिल्म पेड्डी का ट्रेलर लॉन्च इवेंट आयोजित किया गया था। मुंबई के बीकेसी में हुए इस इवेंट में जान्हवी कपूर और रामचरण समेत फिल्म की स्टारकास्ट पहुंची थी। इस दौरान एक फैन का नजदीक आकर सेल्फी लेना जान्हवी कपूर को पसंद नहीं आया और उन्होंने बॉडीगार्ड को इशारा कर तुरंत उसे अलग करवा दिया। पेड्डी ट्रेलर लॉन्च इवेंट से एक वीडियो सामने आया है, जिसमें जान्हवी कपूर मंच पर हैं। तभी एक फैन उनके काफी करीब आया और सेल्फी लेने लगा। उसके आते ही जान्हवी कपूर ने पास खड़े बॉडीगार्ड को एक नजर देख इशारा किया, जिसके ठीक बाद गार्ड ने उस शख्स का हाथ पकड़कर धक्का देकर मंच से नीचे उतार दिया। वीडियो सामने आने के बाद कई लोग जान्हवी की आलोचना कर रहे हैं। एक सोशल मीडिया यूजर ने लिखा है, मुझे समझ नहीं आता कि इन लोगों को इतना अटेंशन क्यों देते हैं। ये लोग भूल जाते हैं कि ये लोग पब्लिक की वजह से ही हैं और हमारे बिना कुछ नहीं हैं। वहीं दूसरे यूजर ने लिखा है, इसलिए इनकी मूवी नहीं चलती है। जिनकी वजह से इंडस्ट्री हैं, उनकी ही रिस्पेक्ट नहीं करते। नेपोकिड्स हैं, तो मूवी मिल रही है और दिखाना करना अच्छा होने का। बाकी असल में इनके पास कुछ नहीं है। गोविंदा के गार्ड की पैपराजी से हुई बहस हाल ही में गोविंदा एक इवेंट का हिस्सा बने, जहां उनके बॉडीगार्ड्स और पैपराजी के बीच बहस हो गई। दरअसल, इवेंट खत्म होने के बाद जैसे ही गोविंदा बाहर की तरफ निकले, तभी भीड़ ने उन्हें घेर लिया। इस दौरान पैपराजी भी उन्हें क्लिक कर रहे थे। तभी गोविंदा के बाउंसर ने उनके निकलने का रास्ता बनाते हुए लोगों को पीछे की तरफ धक्का दिया। धक्का लगते ही वहां मौजूद पैपराजी भड़क गए और बहस शुरू कर दी। हंगामा होने के बाद गोविंदा ने खुद बीच-बचाव कर मामले को संभाला। बता दें कि फिल्म पेड्डी 4 जून को सिनेमाघरों में रिलीज हो रही है। ये एक पैन इंडिया फिल्म है। बुच्ची बाबू के निर्देशन में बनी इस फिल्म को एआर रहमान ने म्यूजिक दिया है। ये जान्हवी कपूर की दूसरी तेलुगु फिल्म है। उन्होंने 2024 में फिल्म देवरा से तेलुगु सिनेमा में डेब्यू किया था। दो बार पोस्टपोन हुई जान्हवी कपूर- रामचरण की पेड्डी फिल्म पेड्डी शुरुआत में 27 मार्च को रामचरण के बर्थडे पर रिलीज की जाने वाली थी, हालांकि बाद में इसे पोस्टपोन कर दिया गया। रिपोर्ट्स के अनुसार, फिल्म को धुरंधर 2 और टॉक्सिक से क्लैश से बचाने के लिए पोस्टपोन किया गया था, हालांकि मेकर्स ने पोस्टपोन का कारण फिल्म के कुछ हिस्से कंप्लीट न होना बताया। पहले 30 अप्रैल 2026 के बाद इसे 25 जून के लिए शेड्यूल किया गया, जिसके बाद प्री-पोन कर इसे 4 जून को रिलीज किया जा रहा है।

जान्हवी कपूर ने किया बॉडीगार्ड को इशारा:तुरंत सेल्फी ले रहे फैन पर लिया गया एक्शन, गोविंदा के गार्ड्स की भी पैपराजी से हुई झड़प

जान्हवी कपूर ने किया बॉडीगार्ड को इशारा:तुरंत सेल्फी ले रहे फैन पर लिया गया एक्शन, गोविंदा के गार्ड्स की भी पैपराजी से हुई झड़प

सोमवार को अपकमिंग फिल्म पेड्डी का ट्रेलर लॉन्च इवेंट आयोजित किया गया था। मुंबई के बीकेसी में हुए इस इवेंट में जान्हवी कपूर और रामचरण समेत फिल्म की स्टारकास्ट पहुंची थी। इस दौरान एक फैन का नजदीक आकर सेल्फी लेना जान्हवी कपूर को पसंद नहीं आया और उन्होंने बॉडीगार्ड को इशारा कर तुरंत उसे अलग करवा दिया। पेड्डी ट्रेलर लॉन्च इवेंट से एक वीडियो सामने आया है, जिसमें जान्हवी कपूर मंच पर हैं। तभी एक फैन उनके काफी करीब आया और सेल्फी लेने लगा। उसके आते ही जान्हवी कपूर ने पास खड़े बॉडीगार्ड को एक नजर देख इशारा किया, जिसके ठीक बाद गार्ड ने उस शख्स का हाथ पकड़कर धक्का देकर मंच से नीचे उतार दिया। वीडियो सामने आने के बाद कई लोग जान्हवी की आलोचना कर रहे हैं। एक सोशल मीडिया यूजर ने लिखा है, मुझे समझ नहीं आता कि इन लोगों को इतना अटेंशन क्यों देते हैं। ये लोग भूल जाते हैं कि ये लोग पब्लिक की वजह से ही हैं और हमारे बिना कुछ नहीं हैं। वहीं दूसरे यूजर ने लिखा है, इसलिए इनकी मूवी नहीं चलती है। जिनकी वजह से इंडस्ट्री हैं, उनकी ही रिस्पेक्ट नहीं करते। नेपोकिड्स हैं, तो मूवी मिल रही है और दिखाना करना अच्छा होने का। बाकी असल में इनके पास कुछ नहीं है। गोविंदा के गार्ड की पैपराजी से हुई बहस हाल ही में गोविंदा एक इवेंट का हिस्सा बने, जहां उनके बॉडीगार्ड्स और पैपराजी के बीच बहस हो गई। दरअसल, इवेंट खत्म होने के बाद जैसे ही गोविंदा बाहर की तरफ निकले, तभी भीड़ ने उन्हें घेर लिया। इस दौरान पैपराजी भी उन्हें क्लिक कर रहे थे। तभी गोविंदा के बाउंसर ने उनके निकलने का रास्ता बनाते हुए लोगों को पीछे की तरफ धक्का दिया। धक्का लगते ही वहां मौजूद पैपराजी भड़क गए और बहस शुरू कर दी। हंगामा होने के बाद गोविंदा ने खुद बीच-बचाव कर मामले को संभाला। बता दें कि फिल्म पेड्डी 4 जून को सिनेमाघरों में रिलीज हो रही है। ये एक पैन इंडिया फिल्म है। बुच्ची बाबू के निर्देशन में बनी इस फिल्म को एआर रहमान ने म्यूजिक दिया है। ये जान्हवी कपूर की दूसरी तेलुगु फिल्म है। उन्होंने 2024 में फिल्म देवरा से तेलुगु सिनेमा में डेब्यू किया था। दो बार पोस्टपोन हुई जान्हवी कपूर- रामचरण की पेड्डी फिल्म पेड्डी शुरुआत में 27 मार्च को रामचरण के बर्थडे पर रिलीज की जाने वाली थी, हालांकि बाद में इसे पोस्टपोन कर दिया गया। रिपोर्ट्स के अनुसार, फिल्म को धुरंधर 2 और टॉक्सिक से क्लैश से बचाने के लिए पोस्टपोन किया गया था, हालांकि मेकर्स ने पोस्टपोन का कारण फिल्म के कुछ हिस्से कंप्लीट न होना बताया। पहले 30 अप्रैल 2026 के बाद इसे 25 जून के लिए शेड्यूल किया गया, जिसके बाद प्री-पोन कर इसे 4 जून को रिलीज किया जा रहा है।

आसमान से बरस रही आग, इन 5 बीमारियों के मरीज रहें अलर्ट, जरा सी लापरवाही पहुंचा देगी अस्पताल

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Last Updated:May 19, 2026, 14:13 IST Extreme Heat and Health: इस वक्त भीषण गर्मी का प्रकोप देखने को मिल रहा है. दिल्ली-NCR में पारा 46 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है और लू से लोगों का बुरा हाल है. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो यह मौसम हार्ट, डायबिटीज, अस्थमा, हाई BP और किडनी मरीजों के लिए गंभीर खतरा बन सकता है. सभी लोगों को गर्मी, हीटवेव और डिहाइड्रेशन से बचना चाहिए. सही देखभाल और सतर्कता से गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से बचाव किया जा सकता है. हार्ट और डायबिटीज के मरीजों को लू से बचना चाहिए. Heatwave Health Risks: देश के कई हिस्सों में भीषण गर्मी और हीटवेव का कहर लगातार बढ़ रहा है. पिछले कुछ दिनों में आसमान से आग बरस रही है और गर्म हवाओं ने लोगों का जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है. दिल्ली-एनसीआर समेत कई शहरों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है, जिससे लोगों की सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है. डॉक्टर्स के अनुसार गर्मी सिर्फ थकान या डिहाइड्रेशन ही नहीं बढ़ाती, बल्कि कुछ बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए यह मौसम बेहद खतरनाक साबित हो सकता है. खासतौर पर दिल, सांस, शुगर और ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियों से पीड़ित लोगों को गर्मियों में ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत होती है. जरा सी लापरवाही से हालत बिगड़ सकती है और अस्पताल की नौबत आ सकती है. यूपी के लखनऊ में मेदांता हॉस्पिटल के इमरजेंसी डिपार्टमेंट के हेड डॉ. लोकेंद्र गुप्ता ने News18 को बताया भीषण गर्मी और लू की चपेट में आना सभी लोगों के लिए खतरनाक होता है. खासतौर से हार्ट डिजीज, डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, अस्थमा और किडनी डिजीज से जूझ रहे लोगों के लिए यह मौसम बेहद खतरनाक है. भीषण गर्मी में शरीर को ठंडा रखने के लिए दिल को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है. तेज गर्मी की वजह से हार्ट रेट बढ़ सकता है और शरीर में पानी की कमी होने लगती है. जो लोग पहले से हार्ट डिजीज, हार्ट फेलियर या ब्लड प्रेशर की समस्या से जूझ रहे हैं, उनमें हीट स्ट्रेस की वजह से सीने में दर्द, सांस फूलना और कमजोरी जैसी दिक्कतें बढ़ सकती हैं. गंभीर मामलों में हार्ट अटैक का खतरा भी बढ़ सकता है. डॉक्टर ने बताया कि गर्मी में अस्थमा और सांस के मरीजों को भी ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए. गर्म हवा सांस की नलियों को प्रभावित कर सकती है. इसके अलावा धूल, प्रदूषण और गर्म हवाएं अस्थमा के मरीजों की परेशानी बढ़ा सकती हैं. इस मौसम में अस्थमा और COPD के मरीजों को सांस लेने में दिक्कत, खांसी और सीने में जकड़न की समस्या ज्यादा हो सकती है. ऐसे लोगों को धूप और गर्म हवा से बचना चाहिए और जरूरी दवाइयां हमेशा साथ रखनी चाहिए. इसके अलावा डायबिटीज पेशेंट्स को डिहाइड्रेशन जल्दी हो सकता है. शरीर में पानी की कमी होने से ब्लड शुगर लेवल प्रभावित हो सकता है और कमजोरी, चक्कर या थकान महसूस हो सकती है. कुछ मामलों में ज्यादा गर्मी इंसुलिन और दूसरी दवाओं के असर को भी प्रभावित कर सकती है. इसलिए डायबिटीज मरीजों को समय-समय पर पानी पीते रहना चाहिए और ब्लड शुगर मॉनिटर करते रहना चाहिए. एक्सपर्ट के अनुसार हाई ब्लड प्रेशर वाले मरीजों को भी गर्मी में ज्यादा खतरा होता है. गर्मी में शरीर का ब्लड सर्कुलेशन प्रभावित हो सकता है, जिससे ब्लड प्रेशर में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है. कई लोगों को चक्कर आना, कमजोरी या बेचैनी महसूस हो सकती है. जो लोग हाई BP की दवा लेते हैं, उन्हें गर्मियों में खास सावधानी बरतने की जरूरत होती है, क्योंकि कुछ दवाइयों की वजह से शरीर में पानी की कमी और बढ़ सकती है. तेज गर्मी में शरीर से ज्यादा पसीना निकलता है, जिससे पानी की कमी हो सकती है. अगर शरीर को पर्याप्त पानी न मिले, तो किडनी पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है. किडनी डिजीज से जूझ रहे लोगों में डिहाइड्रेशन की वजह से हालत गंभीर हो सकती है. ऐसे मरीजों को पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी होता है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 हिंदी की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें

मंत्री पद छोड़ने वाले स्ट्रीटिंग अब पीएम की दौड़ में:स्वास्थ्य मंत्री पद से इस्तीफा, 2018 में किया था 10 साल बाद प्रधानमंत्री बनने का दावा

मंत्री पद छोड़ने वाले स्ट्रीटिंग अब पीएम की दौड़ में:स्वास्थ्य मंत्री पद से इस्तीफा, 2018 में किया था 10 साल बाद प्रधानमंत्री बनने का दावा

ब्रिटेन के स्वास्थ्य मंत्री वेस स्ट्रीटिंग ने प्रधानमंत्री कीर स्टारमर के नेतृत्व पर भरोसा खत्म होने का हवाला देते हुए हाल ही में इस्तीफा दे दिया। पत्र में उन्होंने कहा कि स्टारमर लेबर पार्टी को अगला चुनाव नहीं जिता पाएंगे। इसे स्ट्रीटिंग की प्रधानमंत्री पद की महत्वाकांक्षा से जोड़कर देखा जा रहा है। वेस स्ट्रीटिंग को ब्रिटिश राजनीति का बेहद चतुर खिलाड़ी माना जाता है। विश्लेषक डेविड जेफरी बताते हैं कि स्ट्रीटिंग लंबे समय से पीएम बनने की इच्छा रखते रहे हैं। साल 2018 के एक शो में उन्होंने 10 साल बाद खुद को प्रधानमंत्री तक बताया था। अब वे अपने उस दावे को हकीकत में बदलने के बेहद करीब दिख रहे हैं। स्ट्रीटिंग खुद को एक आम राजनेता नहीं मानते। उनका जीवन बेहद संघर्षपूर्ण रहा है। टावर हैमलेट्स के गरीब कामकाजी परिवार से आने वाले स्ट्रीटिंग ने कॉलेज और यूनिवर्सिटी की पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए दुकानों में नौकरियां कीं। उन्होंने अपनी 2023 की किताब ‘वन बॉय, टू बिल्स एंड अ फ्राय अप’ में खुलासा किया था कि उनके दादा हथियारबंद लूट के मामले में जेल जा चुके थे। उन्होंने कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के सेल्विन कॉलेज से इतिहास की पढ़ाई की और 2015 में पहली बार सांसद बने। डॉक्टरों से रहा टकराव: स्वास्थ्य मंत्री के तौर पर वेस स्ट्रीटिंग का ट्रैक रिकॉर्ड मजबूत है। उन्होंने मार्च 2026 तक 65% मरीजों का इलाज 18 हफ्तों के भीतर कराने का लक्ष्य रखा और ब्रिटेन की सरकारी स्वास्थ्य सेवा (एनएचएस) की वेटिंग लिस्ट में 17 साल की सबसे बड़ी कटौती दर्ज की। हालांकि डॉक्टरों की हड़तालों के चलते वे पार्टी के वामपंथी धड़े के निशाने पर भी रहे। लेबर पार्टी का नेतृत्व पाने के लिए उन्हें इसी वामपंथी सदस्यता का समर्थन जुटाना होगा, जिसे पीएम स्टारमर से भी ज्यादा कट्टर माना जाता है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प से रहा है छत्तीस का आंकड़ा अगर स्ट्रीटिंग ब्रिटेन के अगले प्रधानमंत्री बनते हैं, तो लंदन-वॉशिंगटन रिश्तों पर नजर रहेगी, क्योंकि वे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के मुखर आलोचक रहे हैं। ट्रम्प के पहले कार्यकाल (2017-2021) में स्ट्रीटिंग ने उन्हें ‘घिनौना’ शख्स तक कहा था। इसी तरह, गर्भावस्था में पैरासिटामोल और ऑटिज्म वाले ट्रम्प के दावे पर स्ट्रीटिंग ने कह चुके हैं कि लोग ‘ट्रम्प की फिजूल बातों’ के बजाय ब्रिटिश डॉक्टरों और वैज्ञानिकों की सुनें।