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Home Remedies: बिना सर्जरी पाइल्स ठीक करने का नेचुरल तरीका

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Last Updated:May 17, 2026, 19:25 IST Bawasir Ka Ilaj: बवासीर को ठीक करने के लिए हमेशा सर्जरी की जरूरत नहीं पड़ती है. लेकिन शर्त है कि वक्त रहते खानपान में बदलाव किया जाए. इसके अलावा आयुर्वेद में गुलकंद के सेवन से लेकर नारियल तेल लगाने जैसे नेचुरल तरीके भी बताए गए हैं, जो कि पाइल्स को ठीक करने में मदद करता है. ख़बरें फटाफट बवासीर गर्मी में होने वाली एक कॉमन हेल्थ प्रॉब्लम है. इसमें मलद्वार के आसपास सूजन, दर्द, खुजली के साथ कई बार खून आने जैसी परेशानियां भी होती है. कुछ लोगों में यह स्थिति इतनी बढ़ जाती है कि मलद्वार की नसें बाहर निकलने लगती हैं. बवासीर होने का कारण खराब खानपान, लगातार कब्ज रहना, तनाव, लंबे समय तक एक ही जगह बैठे रहना माना जाता हैं. हालांकि गंभीर मामलों में बवासीर ठीक करने के लिए सर्जरी की जरूरत पड़ती है. लेकिन आमतौर पर ये समस्या खानपान में बदलाव और नेचुरल हर्ब्स के सेवन से ठीक हो जाती है. यहां हम आपको ऐसे ही कुछ फूड्स के बारे में बता रहे हैं. बवासीर में खानपान क्यों जरूरी है?आयुर्वेद के अनुसार शरीर में वात, पित्त और कफ यानी त्रिदोष का संतुलन बिगड़ने पर बवासीर जैसी समस्याएं जन्म लेती हैं. इसलिए आयुर्वेदिक उपचार में इन दोषों को संतुलित करने पर विशेष ध्यान दिया जाता है. इसलिए बवासीर को ठीक करने के लिए सबसे पहले खानपान को सुधारना जरूरी माना जाता है. बवासीर होने पर क्या खाएं क्या नहीं?बवासीर से पीड़ित लोगों को अधिक तेल-मसाले वाला भोजन और भारी खाद्य पदार्थों से बचना चाहिए, क्योंकि ये पाचन तंत्र को प्रभावित कर कब्ज बढ़ा सकते हैं. इसके स्थान पर हल्का, सुपाच्य और फाइबर युक्त भोजन लेना फायदेमंद होता है. हरे चने, साबुत अनाज, दलिया और ताजे फल-सब्जियां पाचन को बेहतर बनाने में मदद करते हैं. साथ ही दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी, छाछ और अन्य तरल पदार्थों का सेवन करने से पेट साफ रहता है और कब्ज की समस्या कम होती है. पाइल्स ठीक करने का नेचुरल तरीका आयुर्वेद में त्रिफला को पाचन सुधारने और शरीर की सफाई के लिए बेहद उपयोगी माना गया है. त्रिफला चूर्ण को आंवले के छिलके के साथ गर्म पानी में मिलाकर लेने से पेट अच्छी तरह साफ होता है और बवासीर के लक्षणों में राहत मिल सकती है. इसके अलावा गुलकंद का सेवन भी लाभकारी माना जाता है. यह शरीर को ठंडक पहुंचाने के साथ-साथ पाचन तंत्र को मजबूत करता है और आंतों की सूजन कम करने में सहायक होता है. नियमित रूप से सीमित मात्रा में गुलकंद खाने से दर्द और जलन में राहत मिल सकती है. खूनी बवासीर के लिए आयुर्वेदिक उपाययदि बवासीर में खून आने की समस्या हो रही हो, तो आयुर्वेद में लाजवंती के पौधे के रस को उपयोगी बताया गया है. यह सूजन कम करने और ब्लीडिंग रोकने में मदद कर सकता है. वहीं, सिट्ज बाथ भी एक सरल और प्रभावी घरेलू उपाय माना जाता है. गर्म पानी में त्रिफला, पीपल और गूलर की छाल का काढ़ा मिलाकर उसमें कुछ देर बैठने से गुदा क्षेत्र की सूजन, दर्द और जलन में राहत मिलती है. इसके बाद नारियल तेल जैसे प्राकृतिक तेल लगाने से आराम महसूस हो सकता है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. About the Author शारदा सिंहSenior Sub Editor शारदा सिंह मध्यप्रदेश की रहने वाली हैं. उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपना सफर शुरू किया. उनके पास डिजिटल मीडिया और लाइफस्टाइल पत्रक…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

अब जिंदगीभर नहीं झेलना पड़ेगा घुटनों का दर्द, वैज्ञानिकों ने खोजा ट्रीटमेंट, आर्थराइटिस पर लगेगी लगाम !

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Last Updated:May 17, 2026, 18:25 IST New Treatment for Osteoarthritis: कोरिया के वैज्ञानिकों ने ऑस्टियोआर्थराइटिस के मरीजों के लिए एक चमत्कारी इलाज ढूंढ निकाला है. उन्होंने एक ऐसे प्रोटीन की खोज की है, जो सिर्फ घुटनों का दर्द कम नहीं करता है, बल्कि आर्थराइटिस की बीमारी को भी रोक सकता है. इस ट्रीटमेंट को बनने में अभी लंबा वक्त लग सकता है, लेकिन यह खोज लाखों मरीजों के लिए भविष्य में राहत की बड़ी उम्मीद बन सकती है. वैज्ञानिकों ने एक ऐसा प्रोटीन खोजा है, जो ऑस्टोआर्थराइटिस की बीमारी को रोक सकता है. New Study on Osteoarthritis Treatment: एक उम्र के बाद अधिकतर लोगों को घुटनों में दर्द की समस्या होने लगती है. अक्सर इसे बुढ़ापे का संकेत माना जाता है, लेकिन कुछ लोग इस परेशानी से जवानी में ही जूझने लगते हैं. घुटनों के दर्द की सबसे बड़ी वजह ऑस्टियोआर्थराइटिस नामक बीमारी होती है. इस बीमारी की वजह से धीरे-धीरे घुटनों का कार्टिलेज घिसने लगता है. यह कार्टिलेज हड्डियों के बीच एक कुशन की तरह काम करता है, लेकिन इसके खराब होने पर घुटनों, कूल्हों और हाथों में दर्द, जकड़न और चलने-फिरने में परेशानी होने लगती है. इस बीमारी का अभी तक कोई सटीक इलाज नहीं है, लेकिन डॉक्टर दर्द कम करने की दवाएं देते हैं, ताकि मरीजों को राहत मिल सके. कोरिया के वैज्ञानिकों ने ऑस्टियोआर्थराइटिस को लेकर एक अनोखी खोज की है. अगर सब कुछ सही रहा, तो अगले कुछ सालों में आर्थराइटिस को रोकने वाली दवा बन सकती है. यह दवा घुटनों के दर्द से राहत दिलाएगी और इस बीमारी पर भी लगाम लगा देगी. Scitech Daily की रिपोर्ट के मुताबिक दक्षिण कोरिया के वैज्ञानिकों ने एक महत्वपूर्ण प्रोटीन SHP (NR0B2) की पहचान की है, जो कार्टिलेज को टूटने से बचाने में मदद करता है. यह प्रोटीन शरीर में प्राकृतिक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है और जोड़ों की डैमेज को धीमा कर सकता है. रिसर्च में पाया गया कि जैसे-जैसे ऑस्टियोआर्थराइटिस बढ़ता है, शरीर में SHP प्रोटीन का स्तर कम होने लगता है. यह प्रोटीन उन एंजाइम्स को कंट्रोल करता है, जो कार्टिलेज को नष्ट करते हैं, जैसे MMP-3 और MMP-13. जब SHP की मात्रा पर्याप्त होती है, तो ये एंजाइम कम सक्रिय रहते हैं और जोड़ों को नुकसान कम होता है. यह रिसर्च प्रतिष्ठित जर्नल नेचर कम्युनिकेशंस में प्रकाशित हुई है और अब दुनिया भर में चर्चाओं का विषय है. चूहों पर मिले शानदार रिजल्ट वैज्ञानिकों ने इस प्रोटीन का परीक्षण चूहों पर किया. जिन चूहों में SHP प्रोटीन नहीं था, उनमें जोड़ों का नुकसान तेजी से हुआ और दर्द भी ज्यादा देखा गया. वहीं, जिनमें SHP प्रोटीन को दोबारा सक्रिय किया गया, उनमें कार्टिलेज का नुकसान कम हुआ और चलने-फिरने की क्षमता में सुधार देखा गया. इससे यह संकेत मिला कि यह प्रोटीन बीमारी की गति को धीमा कर सकता है. शोधकर्ताओं ने एक एक्सपेरिमेंट में SHP प्रोटीन का जीन सीधे जोड़ों में इंजेक्ट किया. इस प्रक्रिया के बाद लंबे समय तक असर देखने को मिला. एक ही उपचार के बाद कार्टिलेज को नुकसान कम हुआ और दर्द में भी राहत मिली. यह संकेत देता है कि भविष्य में यह तकनीक ऑस्टियोआर्थराइटिस के इलाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है. कब तक बन पाएगी यह दवा? वैज्ञानिकों का कहना है कि यह खोज अभी शुरुआती चरण में है और मनुष्यों पर ज्यादा रिसर्च की जरूरत है. अगर आगे के क्लीनिकल ट्रायल सफल होते हैं, तो यह प्रोटीन आधारित थेरेपी ऑस्टियोआर्थराइटिस को रोकने या उसकी प्रगति को धीमा करने में बड़ी सफलता साबित हो सकती है. SHP प्रोटीन की खोज ऑस्टियोआर्थराइटिस के इलाज में एक नई उम्मीद लेकर आई है. अब तक जहां इलाज केवल दर्द कम करने पर केंद्रित था, वहीं यह शोध बीमारी की जड़ पर काम करने की संभावना दिखाता है. हालांकि इसे वास्तविक इलाज बनने में अभी समय लग सकता है, लेकिन यह खोज लाखों मरीजों के लिए भविष्य में राहत की बड़ी उम्मीद बन सकती है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 हिंदी की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें

यूक्रेन का रूस पर 1000 ड्रोन से हमला:सेमीकंडक्टर प्लांट, ऑयल रिफाइनरी को निशाना बनाया; 1 भारतीय समेत 4 की मौत

यूक्रेन का रूस पर 1000 ड्रोन से हमला:सेमीकंडक्टर प्लांट, ऑयल रिफाइनरी को निशाना बनाया; 1 भारतीय समेत 4 की मौत

यूक्रेन ने शनिवार रात को रूस के कई इलाकों पर 1000 से ज्यादा ड्रोन से हमला किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक इसमें कम से कम 4 लोगों की मौत हो गई है। इसमें 1 भारतीय मजदूर भी शामिल है। रूस में भारतीय दूतावास ने इसकी जानकारी दी। दूतावास के मुताबिक कुछ लोग घायल भी हैं। अधिकारियों ने हमले की जगह का दौरा किया और अस्पताल में भर्ती घायलों से मुलाकात भी की। अभी तक मारे गए और घायल लोगों की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है। कीव इंडिपेंडेंस की रिपोर्ट के मुताबिक यूक्रेन ने मॉस्को इलाके में सैन्य और ईंधन से जुड़े अहम ठिकानों को निशाना बनाया। इनमें एंगस्ट्रेम प्लांट शामिल है, जो रूस की सेना के लिए सेमीकंडक्टर बनाता है। इसके अलावा मॉस्को ऑयल रिफाइनरी, सोलनेचनोगोर्स्क और वोलोडार्स्कोये ईंधन स्टेशन को भी निशाना बनाया गया। यूक्रेन ने क्रीमिया पर भी हमला किया यूक्रेन ने दावा किया कि कब्जे वाले क्रीमिया में भी हमला किया गया। वहां बेलबेक एयरफील्ड पर एयर डिफेंस सिस्टम, एस-400 रडार सिस्टम का हैंगर, ड्रोन कंट्रोल सिस्टम, डेटा ट्रांसमिशन सेंटर और एयर ट्रैफिक कंट्रोल टावर को निशाना बनाया गया। रूसी अधिकारियों के मुताबिक, यह हमला हाल के महीनों में मॉस्को पर हुए सबसे बड़े यूक्रेनी ड्रोन हमलों में से एक था। रातभर राजधानी और आसपास के इलाकों में एयर रेड सायरन बजते रहे, कई धमाके सुनाई दिए और अलग-अलग जगहों पर मलबा गिरा। रूस ने 24 घंटे में 1000 से ज्यादा ड्रोन गिराए रूस के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि उसने 24 घंटे में 1054 यूक्रेनी ड्रोन, 8 गाइडेड बम और 2 मिसाइलों को मार गिराया। मंत्रालय ने यह भी कहा कि उसने फ्लेमिंगो क्रूज मिसाइल और नेपच्यून-एमडी मिसाइल को भी रोका, हालांकि यूक्रेन ने इन मिसाइलों के इस्तेमाल पर कुछ नहीं कहा है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में आसमान में चमक और कई जगह आग लगने के विजुअल हैं। खिमकी, क्लिन, जेलेनोग्राद और मॉस्को के कई हिस्सों में धमाकों की खबरें आईं। शेरमेत्येवो एयरपोर्ट के आसपास भी हलचल देखी गई। मॉस्को के मेयर सर्गेई सोब्यानिन ने बताया कि कपोतन्या इलाके में स्थित ऑयल रिफाइनरी के पास 12 लोग घायल हुए, जिनमें ज्यादातर निर्माण मजदूर थे। इस हमले का असर मॉस्को के एयरपोर्ट्स पर भी पड़ा। शेरमेत्येवो एयरपोर्ट पर करीब 200 फ्लाइट्स लेट या रद्द हो गईं, जबकि व्नुकोवो एयरपोर्ट पर करीब 100 फ्लाइट्स प्रभावित हुईं।

तिलक वर्मा और श्रीलीला के अफेयर की खबरें अफवाह:दावा- दोनों कभी एक-दूसरे से मिले तक नहीं; सोशल मीडिया पर चल रही अफवाहें

तिलक वर्मा और श्रीलीला के अफेयर की खबरें अफवाह:दावा- दोनों कभी एक-दूसरे से मिले तक नहीं; सोशल मीडिया पर चल रही अफवाहें

साउथ फिल्म एक्ट्रेस श्रीलीला और भारतीय क्रिकेटर तिलक वर्मा के बीच किसी तरह का रिलेशनशिप नहीं है। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक मामले से जुड़े एक सूत्र ने इस बात की पुष्टि की है। दरअसल पिछले की दिनों से सोशल मीडिया पर दोनों के रिलेशन की चर्चा की जा रही थी। सूत्र ने इन दावों को पूरी तरह से गलत और बिना किसी आधार का बताया है। सोर्स के मुताबिक, श्रीलीला और तिलक वर्मा कभी एक-दूसरे से मिले भी नहीं है और न ही दोनों के बीच कभी कोई बात हुई है। सोशल मीडिया पर दोनों को लेकर फैलाई जा रही बातें पूरी तरह से अफवाह है। सोशल मीडिया पर ऐसे शुरू हुई थी चर्चा इंटरनेट पर पिछले कुछ समय से दोनों के रिलेशनशिप को लेकर कई तरह की बातें की जा रही थी। फैन पेज और इंस्टा अकाउंट्स ने अलग-अलग इवेंट्स की तस्वीरों को मिलाकर यह अनुमान लगाना शुरू कर दिया था। कुछ अनवेरिफाइड रिपोर्ट्स में कहा गया कि दोनों एक ही समय के आसपास अलग-अलग जगहों पर नजर आए थे। इसमें मंदिर के दर्शन और स्पोर्ट्स मैच शामिल थे। इन बातों का कोई पुख्ता सबूत नहीं था, फिर भी इसे दोनों के अफेयर से जोड़कर देखा जाने लगा। सोर्स बोले- अफवाहों में कोई सच्चाई नहीं मामले से जुडे एक करीबी सोर्स ने इस पूरे विवाद पर खुलकर बात की है। सोर्स ने कहा कि तिलक वर्मा और श्रीलीला को लेकर जो भी बातें कही जा रही है, वे पूरी तरह से आधारहीन और झूठी है। दोनों कभी एक-दूसरे से आमने-सामने नहीं मिले है। सोर्स ने यह भी साफ किया कि लोगों को बिना किसी फैक्ट या सच्चाई के ऐसी मनगढंत बातें सोशल मीडिया पर शेयर नहीं करना चाहिए। नेशनल अवार्ड फिल्म में काम कर चुकी है श्रीलीला एक्ट्रेस श्रीलीला साउथ सिनेमा का एक बड़ा नाम है। उन्होंने अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत बेहद कम उम्र में की थी। फिल्म ‘भगवंत केसरी’ से उन्हें इंडस्ट्री में पहचान मिली। इस फिल्म को 71वें नेशनल फिल्म अवार्ड्स में बेस्ट तेलुगु फीचर फिल्म का अवार्ड भी मिला है। श्रीलीला को आखिरी बार फिल्म ‘उस्ताद भगत सिंह’ में देखा गया था। आने वाले समय में वह धनुष की फिल्म ‘धनुष 55’ में नजर आने वाली है। इसके अलावा वह बॉलीवुड के कुछ बडे प्रोजेक्ट्स पर भी काम कर रही है।

तिलक वर्मा और श्रीलीला के अफेयर की खबरें अफवाह:दावा- दोनों कभी एक-दूसरे से मिले तक नहीं; सोशल मीडिया पर चल रही अफवाहें

तिलक वर्मा और श्रीलीला के अफेयर की खबरें अफवाह:दावा- दोनों कभी एक-दूसरे से मिले तक नहीं; सोशल मीडिया पर चल रही अफवाहें

साउथ फिल्म एक्ट्रेस श्रीलीला और भारतीय क्रिकेटर तिलक वर्मा के बीच किसी तरह का रिलेशनशिप नहीं है। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक मामले से जुड़े एक सूत्र ने इस बात की पुष्टि की है। दरअसल पिछले की दिनों से सोशल मीडिया पर दोनों के रिलेशन की चर्चा की जा रही थी। सूत्र ने इन दावों को पूरी तरह से गलत और बिना किसी आधार का बताया है। सोर्स के मुताबिक, श्रीलीला और तिलक वर्मा कभी एक-दूसरे से मिले भी नहीं है और न ही दोनों के बीच कभी कोई बात हुई है। सोशल मीडिया पर दोनों को लेकर फैलाई जा रही बातें पूरी तरह से अफवाह है। सोशल मीडिया पर ऐसे शुरू हुई थी चर्चा इंटरनेट पर पिछले कुछ समय से दोनों के रिलेशनशिप को लेकर कई तरह की बातें की जा रही थी। फैन पेज और इंस्टा अकाउंट्स ने अलग-अलग इवेंट्स की तस्वीरों को मिलाकर यह अनुमान लगाना शुरू कर दिया था। कुछ अनवेरिफाइड रिपोर्ट्स में कहा गया कि दोनों एक ही समय के आसपास अलग-अलग जगहों पर नजर आए थे। इसमें मंदिर के दर्शन और स्पोर्ट्स मैच शामिल थे। इन बातों का कोई पुख्ता सबूत नहीं था, फिर भी इसे दोनों के अफेयर से जोड़कर देखा जाने लगा। सोर्स बोले- अफवाहों में कोई सच्चाई नहीं मामले से जुडे एक करीबी सोर्स ने इस पूरे विवाद पर खुलकर बात की है। सोर्स ने कहा कि तिलक वर्मा और श्रीलीला को लेकर जो भी बातें कही जा रही है, वे पूरी तरह से आधारहीन और झूठी है। दोनों कभी एक-दूसरे से आमने-सामने नहीं मिले है। सोर्स ने यह भी साफ किया कि लोगों को बिना किसी फैक्ट या सच्चाई के ऐसी मनगढंत बातें सोशल मीडिया पर शेयर नहीं करना चाहिए। नेशनल अवार्ड फिल्म में काम कर चुकी है श्रीलीला एक्ट्रेस श्रीलीला साउथ सिनेमा का एक बड़ा नाम है। उन्होंने अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत बेहद कम उम्र में की थी। फिल्म ‘भगवंत केसरी’ से उन्हें इंडस्ट्री में पहचान मिली। इस फिल्म को 71वें नेशनल फिल्म अवार्ड्स में बेस्ट तेलुगु फीचर फिल्म का अवार्ड भी मिला है। श्रीलीला को आखिरी बार फिल्म ‘उस्ताद भगत सिंह’ में देखा गया था। आने वाले समय में वह धनुष की फिल्म ‘धनुष 55’ में नजर आने वाली है। इसके अलावा वह बॉलीवुड के कुछ बडे प्रोजेक्ट्स पर भी काम कर रही है।

कोरोना के बाद एक और वायरस की ग्लोबल इमरजेंसी, अफ्रीकी देशों में मची तबाही, चपेट में आए तो मौत पक्की !

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Ebola Outbreak Worsens in Africa: इबोला वायरस का सबसे खतरनाक वेरिएंट इस वक्त अफ्रीकी देश डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कॉन्गो (DRC) और युगांडा में तबाही मचा रहा है. इस वेरिएंट का नाम बुंडीबुग्यो वायरस है. यह खतरनाक वायरस इन 2 देशों में तेजी से फैल रहा है और अब तक 88 लोगों की मौत हो चुकी है. करीब 300 से ज्यादा लोग इस वायरस की चपेट में आ चुके हैं और इसने दुनिया भर में हेल्थ एक्सपर्ट्स की टेंशन बढ़ा दी है. लगातार बढ़ते मामलों और मौतों को देखते हुए वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) ने इसे पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी ऑफ इंटरनेशनल कंसर्न (PHEIC) घोषित कर दिया है. कोविड के बाद पहली बार WHO ने किसी वायरस को लेकर ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी का ऐलान किया है. WHO के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस ने औपचारिक इमरजेंसी कमेटी की बैठक से पहले ही रविवार को इसे PHEIC घोषित करने का फैसला लिया. इसका मतलब है कि बीमारी के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैलने का खतरा गंभीर माना जा रहा है. हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि इतनी जल्दी लिया गया निर्णय इस बात का संकेत है कि स्थिति बेहद गंभीर हो चुकी है और तुरंत कार्रवाई की जरूरत है. WHO का मानना है कि इबोला के बुंडीबुग्यो वेरिएंट के कारण होने वाली मौतें और संक्रमित लोगों की संख्या बहुत ज्यादा हो सकती है, क्योंकि संघर्ष प्रभावित इलाकों में जांच और रिपोर्टिंग बेहद मुश्किल है. कई संक्रमित लोग अस्पताल तक पहुंच ही नहीं पा रहे हैं और उससे पहले ही दम तोड़ रहे हैं. क्या है इबोला का बुंडीबुग्यो स्ट्रेन? बुंडीबुग्यो वायरस इबोला के 3 प्रमुख स्ट्रेन में से एक है और इसे सबसे दुर्लभ वेरिएंट माना जाता है. यह इबोला वायरस डिजीज (EVD) का कारण बनता है. चिंता की सबसे बड़ी बात यह है कि इस स्ट्रेन के लिए फिलहाल कोई वैक्सीन, इलाज या विशेष टेस्ट उपलब्ध नहीं है. WHO ने कहा कि इबोला के जेयर स्ट्रेन (Zaire strain) के लिए वैक्सीन और कुछ ट्रीटमेंट मौजूद हैं, लेकिन बुंडीबुग्यो के खिलाफ अभी तक कोई प्रभावी स्वीकृत मेडिकल सुरक्षा नहीं है. यही वजह है कि WHO ने इस प्रकोप को असाधारण स्थिति बताया है. अगर इबोला की बात करें, तो यह बेहद संक्रामक और जानलेवा वायरस है. यह संक्रमित व्यक्ति के खून, उल्टी, पसीने, लार और अन्य बॉडी फ्लूइड्स के संपर्क से फैलता है. यह बीमारी इंसानों के साथ-साथ कुछ जानवरों में भी फैल सकती है. यह वायरस शरीर के कई अंगों को प्रभावित करता है और गंभीर मामलों में अंदरूनी और बाहरी ब्लीडिंग शुरू हो सकती है. इस वजह से इसे ब्लीडिंग फीवर भी कहा जाता है. बुंडीबुग्यो वायरस के लक्षण क्या हैं? इबोला वायरस के शुरुआती लक्षण सामान्य वायरल बुखार जैसे दिखाई दे सकते हैं, जिसकी वजह से शुरुआत में इसकी पहचान करना मुश्किल हो जाता है. संक्रमित व्यक्ति को तेज बुखार, सिरदर्द, गले में दर्द, शरीर और मांसपेशियों में तेज दर्द, कमजोरी और अत्यधिक थकान महसूस हो सकती है. जैसे-जैसे संक्रमण बढ़ता है, बीमारी गंभीर रूप लेने लगती है. मरीज को उल्टी, दस्त, पेट दर्द, त्वचा पर रैश, आंखों में लालिमा और सांस लेने में परेशानी जैसी समस्याएं होने लगती हैं. गंभीर मामलों में शरीर के अंदर और बाहर ब्लीडिंग भी शुरू हो सकती है, जो इस बीमारी को बेहद जानलेवा बना देती है. WHO के अनुसार इबोला के लक्षण संक्रमण के 2 से 21 दिनों के भीतर कभी भी दिखाई दे सकते हैं. क्या है ट्रीटमेंट और कैसे करें बचाव? इबोला वायरस के लिए फिलहाल कोई असरदार और सभी स्ट्रेन्स पर काम करने वाला इलाज नहीं है, लेकिन समय पर मेडिकल देखभाल मिलने से मरीज की जान बचाई जा सकती है. डॉक्टर मरीज को डिहाइड्रेशन से बचाने के लिए शरीर में तरल पदार्थ और इलेक्ट्रोलाइट्स देते हैं, ऑक्सीजन सपोर्ट, ब्लड प्रेशर कंट्रोल और संक्रमण से जुड़ी अन्य समस्याओं का इलाज किया जाता है. कुछ मामलों में एंटीवायरल दवाओं और एक्सपेरिमेंटल ट्रीटमेंट का भी इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन बुंडीबुग्यो स्ट्रेन के लिए अभी तक कोई स्वीकृत वैक्सीन या विशेष दवा मौजूद नहीं है. बचाव के लिए संक्रमित व्यक्ति के खून, पसीने, उल्टी, लार और अन्य बॉडी फ्लूइड्स के संपर्क से बचना बेहद जरूरी है. बार-बार साबुन से हाथ धोना, मास्क और ग्लव्स का इस्तेमाल करना, संक्रमित मरीजों को आइसोलेशन में रखना और भीड़भाड़ वाले संक्रमित क्षेत्रों की यात्रा से बचना संक्रमण रोकने के सबसे प्रभावी तरीके माने जाते हैं. क्या यह महामारी बन सकता है? WHO ने स्पष्ट किया कि फिलहाल यह स्थिति महामारी की श्रेणी में नहीं आती, लेकिन पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित करने का मकसद अंतरराष्ट्रीय समर्थन और संसाधनों को तेजी से जुटाना है. अफ्रीका CDC के महानिदेशक डॉ. जीन कसेया के अनुसार अधिकारियों को अभी तक यह नहीं पता चल पाया है कि संक्रमण की शुरुआत कहां से हुई. देर से पहचान होने के कारण वायरस को फैलने का समय मिल गया. बुंडीबुग्यो वायरस का पहला ज्ञात मामला 24 अप्रैल को एक नर्स में सामने आया था. इसके अलावा युगांडा में जिन लोगों में इस वायरस का संक्रमण मिला है, वे कॉन्गो की यात्रा से वापस आए थे. ऐसे में इंटरनेशनल ट्रैवलिंग के कारण इस वायरस के अन्य देशों में फैलने का भी खतरा है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

Chitrak Cheeta Benefits I चित्रक जड़ के फायदे

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Last Updated:May 17, 2026, 17:19 IST आयुर्वेद में चित्रक चीता को एक महत्वपूर्ण औषधीय पौधा माना गया है. पारंपरिक उपचारों में इसका उपयोग कफ, गैस, अपच, कमजोरी और जोड़ों से जुड़ी समस्याओं में किया जाता रहा है. हालांकि इसकी तासीर तेज मानी जाती है, इसलिए इसका सेवन हमेशा विशेषज्ञ की सलाह से ही करना चाहिए. आयुर्वेद के अनुसार कुछ औषधीय पौधों को शरीर में जमा कफ को संतुलित करने में सहायक माना जाता है. चित्रक चीता भी ऐसे पौधों में शामिल बताया जाता है, पारंपरिक चिकित्सा में इसका उपयोग सर्दी-जुकाम, कफ और मौसम बदलने पर होने वाली कुछ सामान्य परेशानियों में किया जाता रहा है. माना जाता है कि यह शरीर की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है. हालांकि, इसका उपयोग बहुत सावधानी से करना चाहिए, क्योंकि हर व्यक्ति के शरीर पर इसका असर अलग हो सकता है. भारत में आयुर्वेद का इतिहास काफी पुराना है. प्राचीन समय से ही कई औषधीय पौधों का उपयोग स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के लिए किया जाता रहा है. ऐसे ही खास पौधों में चित्रक चीता का नाम भी शामिल है. आयुर्वेद में इसे महत्वपूर्ण औषधीय पौधा माना जाता है. इसकी जड़ और कुछ अन्य हिस्सों का उपयोग पारंपरिक उपचारों में लंबे समय से किया जाता रहा है. हालांकि किसी भी औषधीय पौधे का इस्तेमाल डॉक्टर या आयुर्वेद विशेषज्ञ की सलाह के बिना नहीं करना चाहिए. आयुर्वेद में चित्रक चीता का उपयोग कुछ त्वचा संबंधी समस्याओं में भी बताया गया है. पारंपरिक उपचारों में इसका इस्तेमाल अलग-अलग तरीकों से किया जाता रहा है. माना जाता है कि इसके कुछ गुण त्वचा से जुड़ी परेशानियों में सहायक हो सकते हैं. हालांकि इसकी तासीर तेज मानी जाती है, इसलिए इसका उपयोग बहुत सावधानी और सही मात्रा में करना जरूरी होता है. बिना जानकारी या विशेषज्ञ की सलाह के इसका प्रयोग करना नुकसानदायक भी हो सकता है. किसी भी औषधीय पौधे की तरह इसका उपयोग भी चिकित्सकीय सलाह के बाद ही करना बेहतर माना जाता है. Add News18 as Preferred Source on Google  आजकल अनियमित खानपान और तली-भुनी चीजों के अधिक सेवन से कई लोगों को गैस और पेट फूलने की समस्या हो जाती है. आयुर्वेद में चित्रक चीता को पेट से जुड़ी परेशानियों में उपयोगी माना गया है. पारंपरिक उपचारों में इसका उपयोग पाचन क्रिया को बेहतर बनाने और गैस की समस्या को कम करने के लिए किया जाता रहा है. हालांकि, किसी भी औषधीय पौधे का सेवन विशेषज्ञ की सलाह से ही करना चाहिए. लोकल 18 से बातचीत के दौरान वैद्य जमुना प्रसाद यादव बताते हैं कि आयुर्वेद में चित्रक चीता को पाचन तंत्र के लिए लाभकारी माना गया है. कहा जाता है कि यह पाचन क्रिया को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है. अपच, पेट भारी रहना, गैस या भोजन ठीक से न पचने जैसी समस्याओं में पारंपरिक उपचारों में इसका उपयोग लंबे समय से किया जाता रहा है. हालांकि इसका सेवन हमेशा विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार ही करना चाहिए. आयुर्वेद के अनुसार चित्रक चीता को शरीर की कमजोरी और थकान दूर करने में उपयोगी माना जाता है. कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यह शरीर को ऊर्जा देने और सुस्ती कम करने में मदद कर सकता है. जब व्यक्ति लगातार थकान या कमजोरी महसूस करता है, तब पारंपरिक उपचारों में इसका उपयोग बताया जाता है। हालांकि इसके प्रभाव व्यक्ति की स्थिति पर निर्भर कर सकते हैं. कुछ आयुर्वेदिक जानकारों के अनुसार चित्रक चीता में ऐसे गुण बताए जाते हैं, जो शरीर की सूजन से जुड़ी समस्याओं में सहायक हो सकते हैं. कई बार शरीर में सूजन थकान, चोट या अन्य कारणों से भी हो सकती है. पारंपरिक उपचारों में चित्रक चीता का उपयोग ऐसी परेशानियों को कम करने के लिए किया जाता रहा है. हालांकि इसके प्रभाव को लेकर हर व्यक्ति का अनुभव अलग हो सकता है. आज के समय में लोग प्राकृतिक और आयुर्वेदिक चीजों की तरफ तेजी से आकर्षित हो रहे हैं. लेकिन किसी भी पौधे को चमत्कारी मानकर इस्तेमाल करने से पहले सही जानकारी लेना जरूरी है. आयुर्वेद में चित्रक चीता का विशेष महत्व जरूर बताया गया है, लेकिन सुरक्षित और सही उपयोग ही सबसे ज्यादा जरूरी होता है. स्वास्थ्य से जुड़ी किसी भी परेशानी में डॉक्टर या आयुर्वेद विशेषज्ञ की सलाह लेना हमेशा बेहतर विकल्प माना जाता है. बढ़ती उम्र, बदलती जीवनशैली और शरीर में पोषण की कमी के कारण कई लोगों को जोड़ों के दर्द और शरीर में अकड़न की समस्या होने लगती है. इससे चलने-फिरने और रोजमर्रा के काम करने में भी परेशानी हो सकती है. आयुर्वेद में चित्रक चीता को ऐसी समस्याओं में उपयोगी माना गया है. पारंपरिक उपचारों में इसका उपयोग लंबे समय से किया जाता रहा है. कुछ आयुर्वेद विशेषज्ञों का मानना है कि यह जोड़ों से जुड़ी परेशानियों में सहायक हो सकता है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। उत्तर प्रदेश की ताजा खबरें पढ़ने के लिए क्लिक करें|

भारत में घुसपैठ के बाद आतंकी हेयर ट्रांसप्लांट कराने पहुंचा:स्लीपर सेल नेटवर्क बनाने आया था; जांच एजेंसी से बोला- कश्मीर देखकर मकसद बदल गए

भारत में घुसपैठ के बाद आतंकी हेयर ट्रांसप्लांट कराने पहुंचा:स्लीपर सेल नेटवर्क बनाने आया था; जांच एजेंसी से बोला- कश्मीर देखकर मकसद बदल गए

भारत में आतंकी हमलों को अंजाम देने के लिए घुसपैठ करने वाले लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के एक पाकिस्तानी आतंकी ने अपना सपना पूरा करने के लिए मिशन को बीच में रोक दिया। आतंकी ने श्रीनगर में हेयर ट्रांसप्लांट कराया और फर्जी आधार-पैन बनवाकर भारत से भागने की योजना बना रहा था। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने रविवार को बताया कि आतंकी का नाम मोहम्मद उस्मान जट उर्फ ‘चाइनीज’ है। पूछताछ में उसने दावा किया कि कश्मीर की असली जिंदगी देखने के बाद उसके मकसद पूरी तरह बदल गए। आतंकी ने बताया कि पाकिस्तान में लश्कर के ट्रेनिंग कैंपों में उसे कश्मीर को लेकर जो बताया गया था, वहां तस्वीर बिल्कुल अलग थी। श्रीनगर पुलिस ने पिछले महीने उस्मान जट और अब्दुल्ला उर्फ अबू हुरैरा को गिरफ्तार किया था। दोनों को जम्मू-कश्मीर के बाहर स्लीपर आतंकी ठिकाने बनाने का काम सौंपा गया था। पूछताछ के दौरान जट ने बताया कि दोनों ने जम्मू-कश्मीर में उत्तरी हिस्से में कहां से घुसपैठ की थी। उसने किन-किन जगहों पर रहे, वह भी बताया। अधिकारियों के मुताबिक, अबू हुरैरा लश्कर-ए-तैयबा का सबसे लंबे समय तक बचा रहने वाला आतंकी है। वहीं उस्मान जट लाहौर का रहने वाला है और लश्कर का प्रशिक्षित ऑपरेटिव है। वह उत्तर और मध्य कश्मीर में आतंकी गतिविधियों में शामिल रहा। गिरफ्तार आतंकी ने बताया कि वह कई सालों से गंभीर हेयर लॉस की समस्या से जूझ रहा था, जिससे उसका आत्मविश्वास काफी प्रभावित हुआ था। उसने कहा कि उसने पहले भी हेयर रिस्टोरेशन प्रक्रिया के बारे में सुना था, लेकिन उसे लगता था कि यह सिर्फ पश्चिमी देशों में मिलने वाली महंगी सुविधा है। अधिकारियों ने बताया कि श्रीनगर की ऊपरी पहाड़ियों में रहने के दौरान उसकी मुलाकात पाकिस्तानी आतंकियों जरगाम और अब्दुल्ला उर्फ अबू हुरैरा से हुई। उसने उन लोगों के बारे में भी जानकारी दी जिनके साथ वह ठहरा था। इसी जानकारी के आधार पर श्रीनगर पुलिस ने उत्तर कश्मीर और श्रीनगर शहर में सक्रिय आतंकियों के ओवर ग्राउंड वर्कर्स (OGWs) के पूरे नेटवर्क का भंडाफोड़ किया। OGW नेटवर्क के बारे में जानकारी देते हुए गिरफ्तार आतंकी ने कहा कि जरगाम उसे एक दुकान पर ले गया और बताया कि दुकान का मालिक भरोसेमंद व्यक्ति है। दुकानदार से बातचीत के दौरान जट को पता चला कि उसने खुद भी हेयर ट्रांसप्लांट कराया है। इसके बाद आतंकी लगातार उस दुकानदार के संपर्क में रहा और उससे हेयर ट्रांसप्लांट कराने में मदद मांगी। अधिकारियों ने बताया कि आखिरकार उसे शहर के भीतर ही एक क्लिनिक ले जाया गया, जहां उसका हेयर ट्रांसप्लांट किया गया। कई बार प्रक्रिया के दौरान उसे क्लिनिक में रातभर रुकना भी पड़ा।प्रक्रिया पूरी होने के बाद जट, जिसने पहले ही अबू हुरैरा के साथ संपर्क बना लिया था, यात्री वाहन से जम्मू गया और फिर स्लीपर बस से पंजाब के मालेरकोटला पहुंचा। अधिकारियों के मुताबिक वहां उसने तुर्की के टीवी शो देखे और अंग्रेजी सीखने की कोशिश की। गिरफ्तार आतंकी ने पूछताछ में बताया कि वह असली आधार कार्ड, पैन कार्ड और बाद में पासपोर्ट बनवाना चाहता था ताकि उमर उर्फ ‘खरगोश’ की तरह भारत से भाग सके। अधिकारियों के अनुसार उमर फर्जी पासपोर्ट के जरिए भारत से निकलकर इंडोनेशिया पहुंच गया था और वहां से किसी अन्य फर्जी यात्रा दस्तावेज के सहारे खाड़ी देश में जाकर छिपा हुआ है। अधिकारियों ने बताया कि पाकिस्तान के कराची निवासी उमर ने 2012 के बाद भारत में घुसपैठ की थी और 2024 में राजस्थान के जयपुर से बनवाए गए फर्जी पासपोर्ट के जरिए फरार हो गया था।

भारत में घुसपैठ के बाद आतंकी हेयर ट्रांसप्लांट कराने पहुंचा:स्लीपर सेल नेटवर्क बनाने आया था; जांच एजेंसी से बोला- कश्मीर देखकर मकसद बदल गए

भारत में घुसपैठ के बाद आतंकी हेयर ट्रांसप्लांट कराने पहुंचा:स्लीपर सेल नेटवर्क बनाने आया था; जांच एजेंसी से बोला- कश्मीर देखकर मकसद बदल गए

भारत में आतंकी हमलों को अंजाम देने के मकसद से घुसे लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के एक पाकिस्तानी आतंकी ने अपना सपना पूरा करने के लिए मिशन को बीच में रोक दिया। आतंकी ने श्रीनगर में हेयर ट्रांसप्लांट कराया और फर्जी आधार-पैन बनवाकर भारत से भागने की योजना बना रहा था। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने रविवार को बताया कि आतंकी का नाम मोहम्मद उस्मान जट्ट उर्फ ‘चाइनीज’ है। पिछले महीने श्रीनगर पुलिस ने जट्ट और अब्दुल्ला उर्फ अबू हुरैरा को गिरफ्तार किया था। दोनों पर जम्मू-कश्मीर से बाहर स्लीपर बेस तैयार करने का आरोप है। बाद में जांच NIA को सौंप दी गई। NIA की पूछताछ में जट्ट ने दावा किया कि कश्मीर की असली जिंदगी देखने के बाद उसके मकसद पूरी तरह बदल गए। उसने बताया कि पाकिस्तान में लश्कर के ट्रेनिंग कैंपों में उसे कश्मीर को लेकर जो बताया गया था, वहां तस्वीर बिल्कुल अलग थी। भारत में स्लीपर सेल नेटवर्क बनाने आया था आतंकी अधिकारियों के मुताबिक, उस्मान जट्ट लाहौर का रहने वाला है और लश्कर का प्रशिक्षित ऑपरेटिव है। वह उत्तर और मध्य कश्मीर में आतंकी गतिविधियों में शामिल रहा। उसे भारत में घुसपैठ के बाद जम्मू-कश्मीर के बाहर आतंकियों का स्लीपर सेल नेटवर्क बनाने का काम सौंपा गया था। NIA के अनुसार, जट्ट भारत में घुसने के बाद श्रीनगर की ऊपरी पहाड़ियों में रहा। इस दौरान उसकी मुलाकात पाकिस्तानी आतंकियों- जरगाम और अब्दुल्ला उर्फ अबू हुरैरा से हुई। अबू हुरैरा लश्कर से जुड़ा पुराना आतंकी है। दुकानदार से हेयर ट्रांसप्लांट की जानकारी मिली जट्ट के मुताबिक, आतंकी जरगाम श्रीनगर में उसे एक दुकान पर ले गया और बताया कि दुकान का मालिक भरोसेमंद व्यक्ति है। दुकानदार से बातचीत के दौरान जट्ट को पता चला कि उसने हेयर ट्रांसप्लांट कराया है। इसके बाद आतंकी जट्ट ने भी हेयर ट्रांसप्लांट ट्रीटमेंट लेने का फैसला किया। जांच एजेंसियों के मुताबिक, वह कई सालों से गंभीर हेयर लॉस की समस्या से जूझ रहा था। वह हेयर ट्रांसप्लांट कराना चाहता था, लेकिन उसे लगता था कि यह सुविधाएं सिर्फ पश्चिमी देशों में ऊंचे दामों पर मिलती है। आतंकी पंजाब गया, अंग्रेजी सीखने की कोशिश की आतंकी ने अधिकारियों को बताया कि वह दुकानदार के संपर्क में रहा और उससे हेयर ट्रांसप्लांट कराने में मदद मांगी। इसके बाद वह दुकानदार उसे शहर के भीतर ही एक क्लिनिक ले गया, जहां आतंकी का हेयर ट्रांसप्लांट किया गया। इस दौरान कई सेशन हुए। इसके लिए आतंकी को कई बार क्लिनिक में रातभर रुकना भी पड़ा। ट्रांसप्लांट के बाद जट्ट पैसेंजर गाड़ी से जम्मू गया और फिर स्लीपर बस से पंजाब के मालेरकोटला पहुंचा। वहां उसने तुर्की के टीवी शो देखे और अंग्रेजी सीखने की कोशिश की। फर्जी आधार-पैन और पासपोर्ट बनवाने की तैयारी पूछताछ में आतंकी ने बताया कि वह असली आधार कार्ड, PAN कार्ड और बाद में पासपोर्ट बनवाना चाहता था ताकि भारत से भाग सके। अधिकारियों के अनुसार वह उमर उर्फ ‘खरगोश’ की तरह भागने की योजना बना रहा था। उमर पाकिस्तान के कराची का रहने वाला आतंकी है, जो 2024 में जयपुर से फर्जी पासपोर्ट बनवाकर इंडोनेशिया भाग गया था। अभी खाड़ी के देश में छिपा है। दिल्ली बम धमाके के बाद भी पकड़ाया था टेरर मॉड्यूल लश्कर-ए-तैयबा के इस अंतरराज्यीय मॉड्यूल का खुलासा नवंबर 2025 में अल-फलाह मॉड्यूल के भंडाफोड़ के करीब छह महीने बाद हुआ है। उस मॉड्यूल में डॉक्टरों समेत कई पढ़े-लिखे लोगों के कट्टरपंथी नेटवर्क का खुलासा हुआ था। आरोपियों में अल फलाह यूनिवर्सिटी का डॉ. उमर-उन-नबी भी शामिल था, जो पिछले साल 10 नवंबर को लाल किले के बाहर विस्फोटकों से भरी कार चला रहा था। उस धमाके में एक दर्जन से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी

एएमएमके के एकमात्र विधायक एस कामराज को विजय के नेतृत्व वाली टीवीके सरकार को समर्थन देने के लिए अयोग्यता का सामना करना पड़ रहा है | भारत समाचार

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आखरी अपडेट:17 मई, 2026, 16:57 IST एएमएमके के एकमात्र विधायक एस कामराज ने बाद में अपनी पार्टी से निष्कासन का सामना करने के बावजूद टीवीके सरकार का समर्थन किया। एएमएमके विधायक एस कामराज। (छवि: मायनेटा) एएमएमके प्रमुख टीटीवी दिनाकरन ने रविवार को कहा कि उनकी पार्टी के एकमात्र विधायक एस कामराज को 13 मई को महत्वपूर्ण फ्लोर टेस्ट के दौरान तमिलनाडु में मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय की टीवीके सरकार का समर्थन करने के लिए अयोग्यता का सामना करना पड़ेगा। एएमएमके, जो अन्नाद्रमुक और भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का हिस्सा था, ने तमिलनाडु चुनाव में 11 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ा और केवल मन्नारगुडी निर्वाचन क्षेत्र जीता। हालांकि, अभिनेता से नेता बने विजय ने बुधवार को तमिलनाडु विधानसभा में 144 वोटों के साथ बहुमत परीक्षण आसानी से जीत लिया। अतिरिक्त बढ़ावा एएमएमके विधायक एस कामराज से मिला, जिन्होंने बाद में अपनी पार्टी से निष्कासन का सामना करने के बावजूद टीवीके सरकार का समर्थन किया। यह भी पढ़ें: ‘बेहद हैरान’: विजय के तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बनने पर रजनीकांत की प्रतिक्रिया, स्टालिन से मुलाकात पर दी सफाई टीवीके के लिए कामराज के समर्थन के बाद, दिनाकरण ने कहा, “मैंने अब कामराज को पार्टी से निकाल दिया है। उन्हें जाने दें और दूसरी तरफ (टीवीके) में शामिल हो जाएं और अगर वे उन्हें पद की पेशकश करते हैं तो मंत्री बन जाएं। फिर हम देखेंगे कि अगला कदम क्या है।” दिनाकरम ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि वह कामराज की अयोग्यता पर जोर देंगे। उन्होंने कहा, “उन्हें लगता है कि हम कार्रवाई नहीं कर सकते क्योंकि वह पार्टी के अकेले विधायक हैं। हम आवश्यक कदम उठाएंगे। टीवीके द्वारा उनका समर्थन स्वीकार करना कानूनी रूप से संदिग्ध है। हम जिसे ‘हॉर्स-ट्रेडिंग’ का मामला मानते हैं, हम उसका पुरजोर विरोध करेंगे।” दिनाकरन ने पार्टी नेताओं से एकता बनाए रखने और अन्नाद्रमुक के संस्थापक एमजी रामचंद्रन (एमजीआर) और तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जे जयललिता की विरासत का हवाला देते हुए जल्दबाजी में लिए गए फैसलों से बचने का आग्रह किया, जो “कार्यकर्ताओं का मनोबल गिरा सकते हैं”। इस बीच, विजय सरकार ने विश्वास मत में अन्नाद्रमुक के 25 बागी विधायकों का समर्थन भी हासिल कर लिया, जिन्हें बाद में उनकी अपनी पार्टी से भी निष्कासित कर दिया गया था। एसपी वेलुमणि और सी वे षणमुगम के नेतृत्व वाले अन्नाद्रमुक के विद्रोही खेमे ने पार्टी प्रमुख एडप्पादी के पलानीस्वामी पर कट्टर प्रतिद्वंद्वी द्रमुक के साथ सरकार बनाने का प्रयास करने का आरोप लगाने के बाद विजय को बाहरी समर्थन दिया है। अन्नाद्रमुक ने यह भी कहा कि उन्होंने उन 25 विधायकों को अयोग्य ठहराने के लिए आवेदन किया है जिन्होंने पार्टी के व्हिप की अवज्ञा की और टीवीके के नेतृत्व वाली सरकार को समर्थन देने के लिए मतदान किया, जो ईपीएस नेतृत्व के तहत पार्टी में सबसे गंभीर संकट को दर्शाता है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया एएमएमके के एकमात्र विधायक एस कामराज को विजय के नेतृत्व वाली टीवीके सरकार को समर्थन देने के लिए अयोग्य ठहराया जा सकता है अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट) कामराज अयोग्यता पर टीटीवी दिनाकरन(टी)एएमएमके विधायक अयोग्यता(टी)एस कामराज समर्थन(टी)विजय टीवीके सरकार(टी)तमिलनाडु फ्लोर टेस्ट(टी)एआईएडीएमके बागी विधायक(टी)एनडीए गठबंधन की राजनीति(टी) खरीद फरोख्त के आरोप