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अब जिंदगीभर नहीं झेलना पड़ेगा घुटनों का दर्द, वैज्ञानिकों ने खोजा ट्रीटमेंट, आर्थराइटिस पर लगेगी लगाम !

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New Treatment for Osteoarthritis: कोरिया के वैज्ञानिकों ने ऑस्टियोआर्थराइटिस के मरीजों के लिए एक चमत्कारी इलाज ढूंढ निकाला है. उन्होंने एक ऐसे प्रोटीन की खोज की है, जो सिर्फ घुटनों का दर्द कम नहीं करता है, बल्कि आर्थराइटिस की बीमारी को भी रोक सकता है. इस ट्रीटमेंट को बनने में अभी लंबा वक्त लग सकता है, लेकिन यह खोज लाखों मरीजों के लिए भविष्य में राहत की बड़ी उम्मीद बन सकती है.

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वैज्ञानिकों ने एक ऐसा प्रोटीन खोजा है, जो ऑस्टोआर्थराइटिस की बीमारी को रोक सकता है.

New Study on Osteoarthritis Treatment: एक उम्र के बाद अधिकतर लोगों को घुटनों में दर्द की समस्या होने लगती है. अक्सर इसे बुढ़ापे का संकेत माना जाता है, लेकिन कुछ लोग इस परेशानी से जवानी में ही जूझने लगते हैं. घुटनों के दर्द की सबसे बड़ी वजह ऑस्टियोआर्थराइटिस नामक बीमारी होती है. इस बीमारी की वजह से धीरे-धीरे घुटनों का कार्टिलेज घिसने लगता है. यह कार्टिलेज हड्डियों के बीच एक कुशन की तरह काम करता है, लेकिन इसके खराब होने पर घुटनों, कूल्हों और हाथों में दर्द, जकड़न और चलने-फिरने में परेशानी होने लगती है. इस बीमारी का अभी तक कोई सटीक इलाज नहीं है, लेकिन डॉक्टर दर्द कम करने की दवाएं देते हैं, ताकि मरीजों को राहत मिल सके. कोरिया के वैज्ञानिकों ने ऑस्टियोआर्थराइटिस को लेकर एक अनोखी खोज की है. अगर सब कुछ सही रहा, तो अगले कुछ सालों में आर्थराइटिस को रोकने वाली दवा बन सकती है. यह दवा घुटनों के दर्द से राहत दिलाएगी और इस बीमारी पर भी लगाम लगा देगी.

Scitech Daily की रिपोर्ट के मुताबिक दक्षिण कोरिया के वैज्ञानिकों ने एक महत्वपूर्ण प्रोटीन SHP (NR0B2) की पहचान की है, जो कार्टिलेज को टूटने से बचाने में मदद करता है. यह प्रोटीन शरीर में प्राकृतिक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है और जोड़ों की डैमेज को धीमा कर सकता है. रिसर्च में पाया गया कि जैसे-जैसे ऑस्टियोआर्थराइटिस बढ़ता है, शरीर में SHP प्रोटीन का स्तर कम होने लगता है. यह प्रोटीन उन एंजाइम्स को कंट्रोल करता है, जो कार्टिलेज को नष्ट करते हैं, जैसे MMP-3 और MMP-13. जब SHP की मात्रा पर्याप्त होती है, तो ये एंजाइम कम सक्रिय रहते हैं और जोड़ों को नुकसान कम होता है. यह रिसर्च प्रतिष्ठित जर्नल नेचर कम्युनिकेशंस में प्रकाशित हुई है और अब दुनिया भर में चर्चाओं का विषय है.

चूहों पर मिले शानदार रिजल्ट

वैज्ञानिकों ने इस प्रोटीन का परीक्षण चूहों पर किया. जिन चूहों में SHP प्रोटीन नहीं था, उनमें जोड़ों का नुकसान तेजी से हुआ और दर्द भी ज्यादा देखा गया. वहीं, जिनमें SHP प्रोटीन को दोबारा सक्रिय किया गया, उनमें कार्टिलेज का नुकसान कम हुआ और चलने-फिरने की क्षमता में सुधार देखा गया. इससे यह संकेत मिला कि यह प्रोटीन बीमारी की गति को धीमा कर सकता है. शोधकर्ताओं ने एक एक्सपेरिमेंट में SHP प्रोटीन का जीन सीधे जोड़ों में इंजेक्ट किया. इस प्रक्रिया के बाद लंबे समय तक असर देखने को मिला. एक ही उपचार के बाद कार्टिलेज को नुकसान कम हुआ और दर्द में भी राहत मिली. यह संकेत देता है कि भविष्य में यह तकनीक ऑस्टियोआर्थराइटिस के इलाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है.

कब तक बन पाएगी यह दवा?

वैज्ञानिकों का कहना है कि यह खोज अभी शुरुआती चरण में है और मनुष्यों पर ज्यादा रिसर्च की जरूरत है. अगर आगे के क्लीनिकल ट्रायल सफल होते हैं, तो यह प्रोटीन आधारित थेरेपी ऑस्टियोआर्थराइटिस को रोकने या उसकी प्रगति को धीमा करने में बड़ी सफलता साबित हो सकती है. SHP प्रोटीन की खोज ऑस्टियोआर्थराइटिस के इलाज में एक नई उम्मीद लेकर आई है. अब तक जहां इलाज केवल दर्द कम करने पर केंद्रित था, वहीं यह शोध बीमारी की जड़ पर काम करने की संभावना दिखाता है. हालांकि इसे वास्तविक इलाज बनने में अभी समय लग सकता है, लेकिन यह खोज लाखों मरीजों के लिए भविष्य में राहत की बड़ी उम्मीद बन सकती है.

सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

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अमित उपाध्याय

अमित उपाध्याय News18 हिंदी की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें

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वैज्ञानिकों ने एक ऐसा प्रोटीन खोजा है, जो ऑस्टोआर्थराइटिस की बीमारी को रोक सकता है.

New Study on Osteoarthritis Treatment: एक उम्र के बाद अधिकतर लोगों को घुटनों में दर्द की समस्या होने लगती है. अक्सर इसे बुढ़ापे का संकेत माना जाता है, लेकिन कुछ लोग इस परेशानी से जवानी में ही जूझने लगते हैं. घुटनों के दर्द की सबसे बड़ी वजह ऑस्टियोआर्थराइटिस नामक बीमारी होती है. इस बीमारी की वजह से धीरे-धीरे घुटनों का कार्टिलेज घिसने लगता है. यह कार्टिलेज हड्डियों के बीच एक कुशन की तरह काम करता है, लेकिन इसके खराब होने पर घुटनों, कूल्हों और हाथों में दर्द, जकड़न और चलने-फिरने में परेशानी होने लगती है. इस बीमारी का अभी तक कोई सटीक इलाज नहीं है, लेकिन डॉक्टर दर्द कम करने की दवाएं देते हैं, ताकि मरीजों को राहत मिल सके. कोरिया के वैज्ञानिकों ने ऑस्टियोआर्थराइटिस को लेकर एक अनोखी खोज की है. अगर सब कुछ सही रहा, तो अगले कुछ सालों में आर्थराइटिस को रोकने वाली दवा बन सकती है. यह दवा घुटनों के दर्द से राहत दिलाएगी और इस बीमारी पर भी लगाम लगा देगी.

Scitech Daily की रिपोर्ट के मुताबिक दक्षिण कोरिया के वैज्ञानिकों ने एक महत्वपूर्ण प्रोटीन SHP (NR0B2) की पहचान की है, जो कार्टिलेज को टूटने से बचाने में मदद करता है. यह प्रोटीन शरीर में प्राकृतिक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है और जोड़ों की डैमेज को धीमा कर सकता है. रिसर्च में पाया गया कि जैसे-जैसे ऑस्टियोआर्थराइटिस बढ़ता है, शरीर में SHP प्रोटीन का स्तर कम होने लगता है. यह प्रोटीन उन एंजाइम्स को कंट्रोल करता है, जो कार्टिलेज को नष्ट करते हैं, जैसे MMP-3 और MMP-13. जब SHP की मात्रा पर्याप्त होती है, तो ये एंजाइम कम सक्रिय रहते हैं और जोड़ों को नुकसान कम होता है. यह रिसर्च प्रतिष्ठित जर्नल नेचर कम्युनिकेशंस में प्रकाशित हुई है और अब दुनिया भर में चर्चाओं का विषय है.

चूहों पर मिले शानदार रिजल्ट

वैज्ञानिकों ने इस प्रोटीन का परीक्षण चूहों पर किया. जिन चूहों में SHP प्रोटीन नहीं था, उनमें जोड़ों का नुकसान तेजी से हुआ और दर्द भी ज्यादा देखा गया. वहीं, जिनमें SHP प्रोटीन को दोबारा सक्रिय किया गया, उनमें कार्टिलेज का नुकसान कम हुआ और चलने-फिरने की क्षमता में सुधार देखा गया. इससे यह संकेत मिला कि यह प्रोटीन बीमारी की गति को धीमा कर सकता है. शोधकर्ताओं ने एक एक्सपेरिमेंट में SHP प्रोटीन का जीन सीधे जोड़ों में इंजेक्ट किया. इस प्रक्रिया के बाद लंबे समय तक असर देखने को मिला. एक ही उपचार के बाद कार्टिलेज को नुकसान कम हुआ और दर्द में भी राहत मिली. यह संकेत देता है कि भविष्य में यह तकनीक ऑस्टियोआर्थराइटिस के इलाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है.

कब तक बन पाएगी यह दवा?

वैज्ञानिकों का कहना है कि यह खोज अभी शुरुआती चरण में है और मनुष्यों पर ज्यादा रिसर्च की जरूरत है. अगर आगे के क्लीनिकल ट्रायल सफल होते हैं, तो यह प्रोटीन आधारित थेरेपी ऑस्टियोआर्थराइटिस को रोकने या उसकी प्रगति को धीमा करने में बड़ी सफलता साबित हो सकती है. SHP प्रोटीन की खोज ऑस्टियोआर्थराइटिस के इलाज में एक नई उम्मीद लेकर आई है. अब तक जहां इलाज केवल दर्द कम करने पर केंद्रित था, वहीं यह शोध बीमारी की जड़ पर काम करने की संभावना दिखाता है. हालांकि इसे वास्तविक इलाज बनने में अभी समय लग सकता है, लेकिन यह खोज लाखों मरीजों के लिए भविष्य में राहत की बड़ी उम्मीद बन सकती है.

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अमित उपाध्याय

अमित उपाध्याय News18 हिंदी की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें

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