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टीएमसी की वापसी या बीजेपी की सफलता? शशि थरूर कहते हैं, ‘ममता जीतेंगी लेकिन…’ | भारत समाचार

Marcus Stoinis has added 50 runs with Suryansh Shedge (Picture credit: AP)

आखरी अपडेट:03 मई, 2026, 21:34 IST जहां मौजूदा तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) अपनी जीत को लेकर आश्वस्त है, वहीं विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) राज्य में सत्ता हासिल करने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस सांसद शशि थरूर की फाइल फोटो (पीटीआई) कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने रविवार को विश्वास जताया कि तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव जीतेगी, उन्होंने कहा कि वह “पिछली बार की तरह इतना बड़ा बहुमत” हासिल नहीं कर पाएगी। पश्चिम बंगाल में वोटों की गिनती में अब कुछ ही घंटे बचे हैं और राजनीतिक पारा चढ़ने लगा है। जहां मौजूदा तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) अपनी जीत को लेकर आश्वस्त है, वहीं विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) राज्य में सत्ता हासिल करने की कोशिश कर रही है। केरल के तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस सांसद थरूर ने समाचार एजेंसी एएनआई के हवाले से कहा, “वहां के सभी एग्जिट पोल ने बहुत भ्रम पैदा किया है। मेरी समझ है कि ममता बनर्जी जीतेंगी। लेकिन उनके पास शायद पिछली बार की तरह इतना बड़ा बहुमत नहीं होगा।” #घड़ी | तिरुवनंतपुरम, केरल: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर का कहना है, “वहां के सभी एग्जिट पोल ने बहुत भ्रम पैदा कर दिया है। मेरा मानना ​​है कि ममता बनर्जी जीतेंगी। लेकिन उनके पास शायद पिछली बार की तरह इतना बड़ा बहुमत नहीं होगा।” pic.twitter.com/DbdxVYCZp4– एएनआई (@ANI) 3 मई 2026 पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2025 पश्चिम बंगाल में मतदान कल, 4 मई को सुबह 8 बजे शुरू होने वाला है। हालांकि, 294 निर्वाचन क्षेत्रों में से एक – दक्षिण 24 परगना की फाल्टा सीट – पर कल गिनती नहीं होगी क्योंकि भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई) ने चुनावी अनियमितताओं के आरोपों के बाद दोबारा मतदान का आदेश दिया है। फाल्टा में मतदान 21 मई को होगा और मतगणना 24 मई को होगी। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया टीएमसी की वापसी या बीजेपी की सफलता? शशि थरूर कहते हैं, ‘ममता जीतेंगी लेकिन…’ अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव(टी)शशि थरूर(टी)तृणमूल कांग्रेस(टी)ममता बनर्जी(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव 2025(टी)भाजपा बनाम टीएमसी(टी)एग्जिट पोल भ्रम(टी)फाल्टा पुनर्मतदान

नेपाल बोला- लिपुलेख से मानसरोवर यात्रा न करें:ये हमारा इलाका; भारत के इस हिस्से को पहले भी नेपाल अपना बताता रहा

नेपाल बोला- लिपुलेख से मानसरोवर यात्रा न करें:ये हमारा इलाका; भारत के इस हिस्से को पहले भी नेपाल अपना बताता रहा

नेपाल सरकार ने लिपुलेख के रास्ते कैलाश मानसरोवर यात्रा न करने की अपील की है। नेपाल के विदेश मंत्रालय ने रविवार को बयान जारी कर कहा कि 1816 की सुगौली संधि के मुताबिक लिम्पियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी क्षेत्र नेपाल का हिस्सा हैं। सरकार ने कहा कि लिपुलेख के रास्ते प्रस्तावित कैलाश मानसरोवर यात्रा को लेकर उसने भारत और चीन दोनों को डिप्लोमैटिक तरीके से अपनी आपत्ति और चिंता से अवगत करा दिया है। नेपाल ने यह भी बताया कि वह पहले भी भारत से इस इलाके में सड़क निर्माण, व्यापार और पर्यटन जैसी एक्टिविटी न करने की अपील करता रहा है। नेपाल ने चीन को भी आधिकारिक तौर पर यह जानकारी दी है कि लिपुलेख उसका हिस्सा है। नेपाल इससे पहले भी लिपुलेख को अपना हिस्सा बताता रहा है। उसने पिछले साल कुछ नोट जारी किए थे, जिसमें लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा को नेपाल का हिस्सा दिखाया गया था, जबकि ये तीनों इलाके भारतीय सीमा में आते हैं। नेपाल सरकार की तरफ से जारी प्रेस रिलीज… दो नदियों से तय हुई भारत-नेपाल की सीमा भारत, नेपाल और चीन सीमा से लगे इस इलाके में हिमालय की नदियों से मिलकर बनी एक घाटी है, जो नेपाल और भारत में बहने वाली काली या महाकाली नदी का उद्गम स्थल है। इस इलाके को कालापानी भी कहते हैं। यहीं पर लिपुलेख दर्रा भी है। यहां से उत्तर-पश्चिम की तरफ कुछ दूरी पर एक और दर्रा है, जिसे लिंपियाधुरा कहते हैं। अंग्रेजों और नेपाल के गोरखा राजा के बीच 1816 में हुए सुगौली समझौते में काली नदी के जरिए भारत और नेपाल के बीच सीमा तय की थी। समझौते के तहत काली नदी के पश्चिमी क्षेत्र को भारत का इलाका माना गया, जबकि नदी के पूर्व में पड़ने वाला इलाका नेपाल का हो गया। काली नदी के उद्गम स्थल, यानी ये सबसे पहले कहां से निकलती है, इसे लेकर दोनों देशों के बीच विवाद रहा है। भारत पूर्वी धारा को काली नदी का उद्गम मानता है। वहीं नेपाल पश्चिमी धारा को उद्गम धारा मानता है और इसी आधार पर दोनों देश कालापानी के इलाके पर अपना-अपना दावा करते हैं। लिपुलेख दर्रे से गुजरती है मानसरोवर यात्रा, चीनी सेना पर निगरानी भी आसान नेपाल ने 11 साल पहले भी विरोध जताया था पीएम मोदी ने 2015 में चीन यात्रा के दौरान उन्होंने और तत्कालीन चीनी प्रधानमंत्री ली केकियांग ने लिपुलेख के रास्ते व्यापार बढ़ाने का समझौता किया था। नेपाल ने उस समय भी इसका विरोध किया था, क्योंकि यह फैसला नेपाल से बिना सलाह के लिया गया था। नेपाल ने तब भारत और चीन को डिप्लोमेटिक नोट भेजे थे। 4 जुलाई से शुरू होगी कैलाश मानसरोवर यात्रा विदेश मंत्रालय ने कुछ समय पहले ही कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026 का पूरा शेड्यूल जारी किया है। इस साल भी यात्रा उत्तराखंड के लिपुलेख और सिक्किम के नाथुला दर्रे से संचालित होगी। दोनों रूट से 10-10 बैचों में कुल 1000 श्रद्धालु यात्रा करेंगे, जिनमें लिपुलेख रूट से 500 यात्री शामिल होंगे। उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले से संचालित होने वाली इस यात्रा का पहला बैच 4 जुलाई को दिल्ली से रवाना होगा। इससे पहले यात्रियों को 30 जून से 3 जुलाई तक दिल्ली में मेडिकल, डॉक्यूमेंट और ब्रीफिंग की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इस बार यात्रा को लेकर सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब लगभग पूरी यात्रा सड़क मार्ग से होगी। जहां पहले 60 किलोमीटर से ज्यादा पैदल चलना पड़ता था, वहीं अब कुल यात्रा में सिर्फ 38 किलोमीटर ट्रेक ही बचा है। पूरी यात्रा 1738 किलोमीटर की होगी, जिसमें ज्यादातर दूरी वाहन से तय की जाएगी।

नेपाल बोला- लिपुलेख से मानसरोवर यात्रा न करें:ये हमारा इलाका; भारत के इस हिस्से को पहले भी नेपाल अपना बताता रहा

नेपाल बोला- लिपुलेख से मानसरोवर यात्रा न करें:ये हमारा इलाका; भारत के इस हिस्से को पहले भी नेपाल अपना बताता रहा

नेपाल सरकार ने लिपुलेख के रास्ते कैलाश मानसरोवर यात्रा न करने की अपील की है। नेपाल के विदेश मंत्रालय ने रविवार को बयान जारी कर कहा कि 1816 की सुगौली संधि के मुताबिक लिम्पियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी क्षेत्र नेपाल का हिस्सा हैं। सरकार ने कहा कि लिपुलेख के रास्ते प्रस्तावित कैलाश मानसरोवर यात्रा को लेकर उसने भारत और चीन दोनों को डिप्लोमैटिक तरीके से अपनी आपत्ति और चिंता से अवगत करा दिया है। नेपाल ने यह भी बताया कि वह पहले भी भारत से इस इलाके में सड़क निर्माण, व्यापार और पर्यटन जैसी एक्टिविटी न करने की अपील करता रहा है। नेपाल ने चीन को भी आधिकारिक तौर पर यह जानकारी दी है कि लिपुलेख उसका हिस्सा है। नेपाल इससे पहले भी लिपुलेख को अपना हिस्सा बताता रहा है। उसने पिछले साल कुछ नोट जारी किए थे, जिसमें लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा को नेपाल का हिस्सा दिखाया गया था, जबकि ये तीनों इलाके भारतीय सीमा में आते हैं। नेपाल सरकार की तरफ से जारी प्रेस रिलीज… दो नदियों से तय हुई भारत-नेपाल की सीमा भारत, नेपाल और चीन सीमा से लगे इस इलाके में हिमालय की नदियों से मिलकर बनी एक घाटी है, जो नेपाल और भारत में बहने वाली काली या महाकाली नदी का उद्गम स्थल है। इस इलाके को कालापानी भी कहते हैं। यहीं पर लिपुलेख दर्रा भी है। यहां से उत्तर-पश्चिम की तरफ कुछ दूरी पर एक और दर्रा है, जिसे लिंपियाधुरा कहते हैं। अंग्रेजों और नेपाल के गोरखा राजा के बीच 1816 में हुए सुगौली समझौते में काली नदी के जरिए भारत और नेपाल के बीच सीमा तय की थी। समझौते के तहत काली नदी के पश्चिमी क्षेत्र को भारत का इलाका माना गया, जबकि नदी के पूर्व में पड़ने वाला इलाका नेपाल का हो गया। काली नदी के उद्गम स्थल, यानी ये सबसे पहले कहां से निकलती है, इसे लेकर दोनों देशों के बीच विवाद रहा है। भारत पूर्वी धारा को काली नदी का उद्गम मानता है। वहीं नेपाल पश्चिमी धारा को उद्गम धारा मानता है और इसी आधार पर दोनों देश कालापानी के इलाके पर अपना-अपना दावा करते हैं। लिपुलेख दर्रे से गुजरती है मानसरोवर यात्रा, चीनी सेना पर निगरानी भी आसान नेपाल ने 11 साल पहले भी विरोध जताया था पीएम मोदी ने 2015 में चीन यात्रा के दौरान उन्होंने और तत्कालीन चीनी प्रधानमंत्री ली केकियांग ने लिपुलेख के रास्ते व्यापार बढ़ाने का समझौता किया था। नेपाल ने उस समय भी इसका विरोध किया था, क्योंकि यह फैसला नेपाल से बिना सलाह के लिया गया था। नेपाल ने तब भारत और चीन को डिप्लोमेटिक नोट भेजे थे। 4 जुलाई से शुरू होगी कैलाश मानसरोवर यात्रा विदेश मंत्रालय ने कुछ समय पहले ही कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026 का पूरा शेड्यूल जारी किया है। इस साल भी यात्रा उत्तराखंड के लिपुलेख और सिक्किम के नाथुला दर्रे से संचालित होगी। दोनों रूट से 10-10 बैचों में कुल 1000 श्रद्धालु यात्रा करेंगे, जिनमें लिपुलेख रूट से 500 यात्री शामिल होंगे। उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले से संचालित होने वाली इस यात्रा का पहला बैच 4 जुलाई को दिल्ली से रवाना होगा। इससे पहले यात्रियों को 30 जून से 3 जुलाई तक दिल्ली में मेडिकल, डॉक्यूमेंट और ब्रीफिंग की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इस बार यात्रा को लेकर सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब लगभग पूरी यात्रा सड़क मार्ग से होगी। जहां पहले 60 किलोमीटर से ज्यादा पैदल चलना पड़ता था, वहीं अब कुल यात्रा में सिर्फ 38 किलोमीटर ट्रेक ही बचा है। पूरी यात्रा 1738 किलोमीटर की होगी, जिसमें ज्यादातर दूरी वाहन से तय की जाएगी।

सोयाबीन पनीर सब्ज़ी रेसिपी: वेट लॉस के लिए महान प्रोटीन युक्तियाँ चाहिए? घर में सोयाबीन की सब्जी

तस्वीर का विवरण

आवश्यक सामग्री:सोयाब चंक, 200 ग्राम पनीर, शेष आटा, 200 ग्राम दही, नमक, हल्दी, धनिया पाउडर, पिसी हुई लाल मिर्च, 3-4 प्याज, टमाटर (देसी मत लेना), लहसुन, हरी मिर्च, अदरक छवि: भारतज़किचन हिंदी वाईटी चैनल सोयाबीन को धो लें। एक बाउल गर्म पानी में नमक, हल्दी, लाल मिर्च। इस मिश्रण में सोया डाला। पनीर को बड़ा-बड़ा आकार में मापें। तवे में तेल मोनोमैट्रिक, बेंचमार्क पर बैच फ़्लोरिंग ब्राउन होने तक फ़्री करें। छवि: फ्रीपिक पनीर कोसोयाब मिश्रण में डालें। एक कटी प्याज को कुरकुरा होने तक भुनते रहें। फिर उसे ठंडा होने के लिए रख लीजिये. फिर दही में 2 गरम मसाला, 2 गरम मसाला. इस दही को फेंट लें। छवि: भारतज़किचन हिंदी वाईटी चैनल तेज़पत्ता, लौंग, इलायची, काली मिर्च के तेल में शामिल हैं। दो टमाटर, लहसुन, अदरक की प्यूरी को तेल में मिला कर खाएं। इसमें नमक हल्दी, लाल मिर्च। फिर दही, एक हरी मिर्च भी मिलाई जाती है। छवि: फ्रीपिक जब तेल से अलग लगें तो पानी में सेबयान लें और 3-4 मिनट तक पकाते रहें। भुने को प्याज काजू और चिप्स नारियल के साथ मिक्सी में पीस लें और ग्रेवी में डालें। छवि: भारतज़किचन हिंदी वाईटी चैनल धीमी गति से पकने के बाद व्यंजन भी डाले और 10 मिनट तक मसाले के टुकड़े पर डाले। सब्जी को पकाकर रख लें। गैस बंद करने के 10 मिनट बाद सर्व करें ताकि ग्रेवी चीज़ और सोयाबीन के अंदर तक मिक्स हो जाए। छवि: भारतज़किचन हिंदी वाईटी चैनल (टैग्सटूट्रांसलेट)सोयाबीन पनीर सब्जी(टी)सोयाबीन पनीर सब्जी रेसिपी(टी)वजन घटाने के लिए सोयाबीन पनीर सब्जी रेसिपी(टी)वजन घटाने के लिए सोयाबीन पनीर रेसिपी(टी)वजन घटाने के लिए सोयाबीन पनीर रेसिपी(टी)वजन घटाने(टी)वजन घटाने के लिए प्रोटीन स्रोत(टी)जीवन शैली समाचार

Kitchen Hack: बिना मटका धोए कितने दिन तक पी सकते हैं इसमें रखा पानी? जानें मिट्टी के घड़े की सफाई का सही तरीका और सावधानी

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Last Updated:May 03, 2026, 20:15 IST Matka Kaise Saaf Karna Chahiye: इसमें कोई दोराय नहीं कि गर्मी के दिनों में मिट्टी के घड़े में स्टोर किया हुआ पानी पीना सेहत के लिए फायदेमंद होता है. लेकिन यदि आप इसकी सफाई से जुड़ी सावधानियों पर ध्यान नहीं देते हैं, तो इससे आपकी सेहत भी बिगड़ सकते हैं. तो चलिए इस लेख में जानते हैं मटके को कितने दिनों में और कैसे साफ करना चाहिए. ख़बरें फटाफट सदियों से भारत में पानी को ठंडा करने के लिए मिट्टी से तैयार किए गए घड़ों का इस्तेमाल होता चला आ रहा है. ये तरीका गर्मी के दिनों में पानी को स्टोर करने के लिए सबसे अच्छा माना जाता है. आयुर्वेद के अनुसार, मटका में स्टोर किए हुए पानी में नेचुरल अल्कलाइन गुण होता है जो शरीर के पीएच लेवल को मेंटेन रखता है. इसके साथ ही मटके का पानी पीने से पाचन की समस्या नहीं होती है, गले की खराश नहीं होती, मेटाबॉलिज्म बूस्ट होता है और स्किन के लिए भी फायदेमंद भी होता है. लेकिन एक छोटी सी गलती मटके के इन सभी गुणों और फायदों पानी फेर सकती है और आपको बीमार बना सकती है. हम बात कर रहे हैं मटके की सफाई से जुड़ी जरूरी बातों और सावधानियों की. मटके का पानी कितने दिनों में चेज करना जरूरी होता है? मटके को साफ करने का सही तरीका क्या है? यदि आप भी गर्मी में मटके का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो इन दोनों सवालों के जवाब आपको पता होना बहुत जरूरी है. कितने दिन में बदलना चाहिए मटके का पानी?आमतौर पर लोग मटके में पानी कम होने पर कई दिनों तक रीफिल करते रहते हैं, जबकि ऐसा करना इसके फायदों को खत्म कर सकता है. इसलिए अधिकतम लाभ के लिए मटके को मौसम के टेंपरेचर के अनुसार धोते रहना जरूरी है. ऐसे में 24-48 घंटों के अंतराल में मटके को एक बार पूरी तरह से खंगालना जरूरी होता है. दरअसल, ज्यादा गर्मी के कारण इसमें कीडे़ के होने का खतरा ज्यादा होता है. मिट्टी के घड़े को धोने का सही तरीकामटके को रोज या नियमित रूप से गर्म पानी से साफ करें. इससे उसमें जमा गंदगी और कीटाणु दूर रहते हैं और पानी हमेशा सुरक्षित रहता है. मटका साफ करने का सही तरीका है नमक और बेकिंग सोडा का इस्तेमाल करना. नेचुरल होने के कारण इससे किसी तरह का खतरा नहीं होता है, साथ ही क्लीनिंग एजेंट होने से सफाई भी गहराई से होती है. दोनों को मटके में अच्छी तरह से फैलाकर हाथों से धोएं. इसके लिए आप साफ सॉफ्ट स्पंज का भी यूज कर सकते हैं. लेकिन कभी भी मटके को साबुन और डिटर्जेंट से साफ करने की गलती न करें. ऐसे करें मटके की डीप क्लीनिंग रेगुलर सफाई के अलावा महीने में एक बार मटके की डीप क्लीनिंग बहुत जरूरी होती है. इसके लिए मटके को अच्छे से साफ करने के लिए पानी में थोड़ा सिरका (विनेगर) मिलाकर धोएं. इससे बदबू, बैक्टीरिया और अंदर जमी गंदगी आसानी से निकल जाती है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. About the Author शारदा सिंहSenior Sub Editor शारदा सिंह मध्यप्रदेश की रहने वाली हैं. उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपना सफर शुरू किया. उनके पास डिजिटल मीडिया और लाइफस्टाइल पत्रक…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

अमेरिका-ईरान शांति वार्ता पर टिकी निवेशकों की नजर:निफ्टी के लिए 23,900 अहम सपोर्ट; इस हफ्ते 5 फैक्टर्स तय करेंगे बाजार की चाल

अमेरिका-ईरान शांति वार्ता पर टिकी निवेशकों की नजर:निफ्टी के लिए 23,900 अहम सपोर्ट; इस हफ्ते 5 फैक्टर्स तय करेंगे बाजार की चाल

सोमवार 4 मई को जब बाजार खुलेगा तो निवेशकों की नजर अमेरिका-ईरान के बीच शांति वार्ता पर रहेगी। इसके अलावा टाटा टेक और बीएचईएल जैसी कंपनियों के चौथी तिमाही के नतीजों से लेकर विदेशी निवेशकों की खरीद-बिक्री जैसे फैक्टर्स भी बाजार की चाल तय करेंगे। चलिए समझते हैं इस हफ्ते में बाजार में क्या हो सकता है… सपोर्ट और रेजिस्टेंस सपोर्ट जोन: 23,936 | 23,870 | 23,820 | 23,466 | 23,335 | 22,858 सपोर्ट यानी, वह स्तर जहां शेयर या इंडेक्स को नीचे गिरने से सहारा मिलता है। यहां खरीदारी बढ़ने से कीमत आसानी से नीचे नहीं जाती। यहां खरीदारी का मौका हो सकता है। रेजिस्टेंस जोन: 24,140 | 24,380 | 24,450 | 24,480 | 24,535 | 24,646 रेजिस्टेंस यानी, वह स्तर जहां शेयर या इंडेक्स को ऊपर जाने में रुकावट आती है। ऐसा बिकवाली बढ़ने से होता है। रजिस्टेंस जोन पार करने पर तेजी की उम्मीद रहती है। नोट: सपोर्ट और रेजिस्टेंस के लेवल्स वेल्थ व्यू एनालिटिक्स की रिपोर्ट के अनुसार है। अब 5 फैक्टर्स जो बाजार की दिशा तय कर सकते हैं… भारतीय शेयर बाजार के लिए पिछला हफ्ता भारी उतार-चढ़ाव वाला रहा। गुरुवार को सेंसेक्स और निफ्टी में 0.7% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई थी। शुक्रवार को महाराष्ट्र दिवस के कारण बाजार बंद रहा, लेकिन इस दौरान वैश्विक स्तर पर कई बड़े घटनाक्रम हुए हैं। 1. शांति वार्ता पर ट्रम्प के रुख पर निर्भर होगा बाजार शनिवार को ईरान ने अमेरिका को एक नया शांति प्रस्ताव भेजा है, जिसमें 14 प्रमुख बिंदु शामिल हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि वे इस प्रस्ताव की खुद समीक्षा करेंगे। ट्रम्प ने ये भी कहा कि ईरान ने पिछले 47 वर्षों में मानवता और दुनिया के साथ जो किया है, उसकी उसने अब तक पर्याप्त कीमत नहीं चुकाई है। उनके इस बयान से संकेत मिलते हैं कि डील इतनी आसान नहीं होगी। 2. कंपनियों के चौथी तिमाही के नतीजें टाटा टेक्नोलॉजीज, टाटा केमिकल्स, बीएचईएल, गोदरेज प्रॉपर्टीज और एथर एनर्जी जैसी कंपनियों के चौथी तिमाही के नतीजे आएंगे। वहीं शनिवार को डी मार्ट और कोटक बैंक ने नतीजे घोषित किए थे। इन दोनों कंपनियों के शेयरों में सोमवार को हलचल देखने को मिल सकती है। 3. विदेशी निवेशकों की बिकवाली विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) भारतीय बाजार से लगातार पैसा निकाल रहे हैं। अप्रैल महीने में उन्होंने कुल 70,135 करोड़ रुपए के शेयर बेचे हैं। हालांकि, घरेलू निवेशक (DIIs) बाजार को सहारा देने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने इस दौरान 51,063 करोड़ रुपए के शेयर खरीदे हैं। 4. डॉलर के मुकाबले रुपया 95 के पार गुरुवार को भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले अब तक के सबसे निचले स्तर 95.33 पर पहुंच गया। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है, जिससे रुपए पर दबाव बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भू-राजनीतिक तनाव कम होता है, तो रुपए को थोड़ी मजबूती मिल सकती है। फिलहाल 94.50 का स्तर एक सपोर्ट की तरह काम करेगा। 5. टेक्निकल नजरिया चॉइस ब्रोकिंग के टेक्निकल रिसर्च एनालिस्ट आकाश शाह ने कहा कि प्राइस एक्शन को देखकर लगता है कि बाजार थोड़ा पॉजिटिव रुझान के साथ एक दायरे में रह सकता है। बाजार में ऊपर की तरफ 24,350 और 24,600 के लेवल पर रेजिस्टेंस यानी रुकावट दिख रही है। वहीं नीचे की तरफ 23,900 और 23,550 पर सपोर्ट नजर आ रहा है। अगर बाजार 23,500 के नीचे गिरता है, तो बिकवाली का दबाव और बढ़ सकता है। मौजूदा हालात में ट्रेडर्स को अनुशासन बनाए रखने के साथ स्टॉप-लॉस का सख्ती से पालन करना चाहिए। एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर. के मुताबिक सेंसेक्स के लिए ऊपर की तरफ 77,500-78,000 का लेवल अभी भी एक बड़ी रुकावट बना हुआ है। वहीं, गिरावट आने पर 76,300–76,000 का लेवल तुरंत सपोर्ट देगा। कुल मिलाकर, इंडेक्स अभी वेट-एंड-वॉच वाली स्थिति में है। गुरुवार को सेंसेक्स 583 अंक गिरकर बंद हुआ था भारतीय शेयर बाजार के लिए पिछला हफ्ता भारी उतार-चढ़ाव वाला रहा। गुरुवार को सेंसेक्स और निफ्टी में 0.70% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई थी। शुक्रवार को महाराष्ट्र दिवस के कारण बाजार बंद रहा। डिस्क्लेमर: ये लेख सिर्फ जानकारी के लिए है। ऊपर दी गई राय और सलाह व्यक्तिगत विश्लेषकों या ब्रोकिंग कंपनियों की हैं, न कि दैनिक भास्कर की। हम निवेशकों को सलाह देते हैं कि कोई भी निवेश फैसला लेने से पहले सर्टिफाइड विशेषज्ञों से सलाह जरूर लें।

अमेरिका-ईरान शांति वार्ता पर टिकी निवेशकों की नजर:निफ्टी के लिए 23,900 अहम सपोर्ट; इस हफ्ते 5 फैक्टर्स तय करेंगे बाजार की चाल

अमेरिका-ईरान शांति वार्ता पर टिकी निवेशकों की नजर:निफ्टी के लिए 23,900 अहम सपोर्ट; इस हफ्ते 5 फैक्टर्स तय करेंगे बाजार की चाल

सोमवार 4 मई को जब बाजार खुलेगा तो निवेशकों की नजर अमेरिका-ईरान के बीच शांति वार्ता पर रहेगी। इसके अलावा टाटा टेक और बीएचईएल जैसी कंपनियों के चौथी तिमाही के नतीजों से लेकर विदेशी निवेशकों की खरीद-बिक्री जैसे फैक्टर्स भी बाजार की चाल तय करेंगे। चलिए समझते हैं इस हफ्ते में बाजार में क्या हो सकता है… सपोर्ट और रेजिस्टेंस सपोर्ट जोन: 23,936 | 23,870 | 23,820 | 23,466 | 23,335 | 22,858 सपोर्ट यानी, वह स्तर जहां शेयर या इंडेक्स को नीचे गिरने से सहारा मिलता है। यहां खरीदारी बढ़ने से कीमत आसानी से नीचे नहीं जाती। यहां खरीदारी का मौका हो सकता है। रेजिस्टेंस जोन: 24,140 | 24,380 | 24,450 | 24,480 | 24,535 | 24,646 रेजिस्टेंस यानी, वह स्तर जहां शेयर या इंडेक्स को ऊपर जाने में रुकावट आती है। ऐसा बिकवाली बढ़ने से होता है। रजिस्टेंस जोन पार करने पर तेजी की उम्मीद रहती है। नोट: सपोर्ट और रेजिस्टेंस के लेवल्स वेल्थ व्यू एनालिटिक्स की रिपोर्ट के अनुसार है। अब 5 फैक्टर्स जो बाजार की दिशा तय कर सकते हैं… भारतीय शेयर बाजार के लिए पिछला हफ्ता भारी उतार-चढ़ाव वाला रहा। गुरुवार को सेंसेक्स और निफ्टी में 0.7% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई थी। शुक्रवार को महाराष्ट्र दिवस के कारण बाजार बंद रहा, लेकिन इस दौरान वैश्विक स्तर पर कई बड़े घटनाक्रम हुए हैं। 1. शांति वार्ता पर ट्रम्प के रुख पर निर्भर होगा बाजार शनिवार को ईरान ने अमेरिका को एक नया शांति प्रस्ताव भेजा है, जिसमें 14 प्रमुख बिंदु शामिल हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि वे इस प्रस्ताव की खुद समीक्षा करेंगे। ट्रम्प ने ये भी कहा कि ईरान ने पिछले 47 वर्षों में मानवता और दुनिया के साथ जो किया है, उसकी उसने अब तक पर्याप्त कीमत नहीं चुकाई है। उनके इस बयान से संकेत मिलते हैं कि डील इतनी आसान नहीं होगी। 2. कंपनियों के चौथी तिमाही के नतीजें टाटा टेक्नोलॉजीज, टाटा केमिकल्स, बीएचईएल, गोदरेज प्रॉपर्टीज और एथर एनर्जी जैसी कंपनियों के चौथी तिमाही के नतीजे आएंगे। वहीं शनिवार को डी मार्ट और कोटक बैंक ने नतीजे घोषित किए थे। इन दोनों कंपनियों के शेयरों में सोमवार को हलचल देखने को मिल सकती है। 3. विदेशी निवेशकों की बिकवाली विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) भारतीय बाजार से लगातार पैसा निकाल रहे हैं। अप्रैल महीने में उन्होंने कुल 70,135 करोड़ रुपए के शेयर बेचे हैं। हालांकि, घरेलू निवेशक (DIIs) बाजार को सहारा देने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने इस दौरान 51,063 करोड़ रुपए के शेयर खरीदे हैं। 4. डॉलर के मुकाबले रुपया 95 के पार गुरुवार को भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले अब तक के सबसे निचले स्तर 95.33 पर पहुंच गया। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है, जिससे रुपए पर दबाव बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भू-राजनीतिक तनाव कम होता है, तो रुपए को थोड़ी मजबूती मिल सकती है। फिलहाल 94.50 का स्तर एक सपोर्ट की तरह काम करेगा। 5. टेक्निकल नजरिया चॉइस ब्रोकिंग के टेक्निकल रिसर्च एनालिस्ट आकाश शाह ने कहा कि प्राइस एक्शन को देखकर लगता है कि बाजार थोड़ा पॉजिटिव रुझान के साथ एक दायरे में रह सकता है। बाजार में ऊपर की तरफ 24,350 और 24,600 के लेवल पर रेजिस्टेंस यानी रुकावट दिख रही है। वहीं नीचे की तरफ 23,900 और 23,550 पर सपोर्ट नजर आ रहा है। अगर बाजार 23,500 के नीचे गिरता है, तो बिकवाली का दबाव और बढ़ सकता है। मौजूदा हालात में ट्रेडर्स को अनुशासन बनाए रखने के साथ स्टॉप-लॉस का सख्ती से पालन करना चाहिए। एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर. के मुताबिक सेंसेक्स के लिए ऊपर की तरफ 77,500-78,000 का लेवल अभी भी एक बड़ी रुकावट बना हुआ है। वहीं, गिरावट आने पर 76,300–76,000 का लेवल तुरंत सपोर्ट देगा। इंडेक्स अभी वेट-एंड-वॉच वाली स्थिति में है। गुरुवार को सेंसेक्स 583 अंक गिरकर बंद हुआ था भारतीय शेयर बाजार के लिए पिछला हफ्ता भारी उतार-चढ़ाव वाला रहा। गुरुवार को सेंसेक्स और निफ्टी में 0.70% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई थी। कारोबार में आईटी में सबसे ज्यादा खरीदारी रही, जबकि मेटल और सरकारी बैंक के शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली। शुक्रवार को महाराष्ट्र दिवस के कारण बाजार बंद रहा। डिस्क्लेमर: ये लेख सिर्फ जानकारी के लिए है। ऊपर दी गई राय और सलाह व्यक्तिगत विश्लेषकों या ब्रोकिंग कंपनियों की हैं, न कि दैनिक भास्कर की। हम निवेशकों को सलाह देते हैं कि कोई भी निवेश फैसला लेने से पहले सर्टिफाइड विशेषज्ञों से सलाह जरूर लें।

आयुष्मान की फिल्म पर लगे चीटिंग दिखाने के आरोप:एक्टर ने 'पति पत्नी और वो दो' मूवी पर दी सफाई, कहा- यह साफ-सुथरी पारिवारिक फिल्म

आयुष्मान की फिल्म पर लगे चीटिंग दिखाने के आरोप:एक्टर ने 'पति पत्नी और वो दो' मूवी पर दी सफाई, कहा- यह साफ-सुथरी पारिवारिक फिल्म

आयुष्मान खुराना की अपकमिंग फिल्म ‘पति पत्नी और वो दो’ का ट्रेलर रिलीज होते ही विवादों में आ गया है। सोशल मीडिया पर फिल्म पर शादी में धोखाधड़ी को बढ़ावा देने और इसे मजेदार तरीके से दिखाने के आरोप लग रहे हैं। हालांकि, अब ट्रेलर लॉन्च इवेंट के दौरान आयुष्मान खुराना और रकुल प्रीत सिंह ने इन आरोपों का जवाब दिया है। एक्टर का दावा है कि फिल्म में उनका किरदार ‘ग्रीन फ्लैग’ है और यह किसी भी तरह की बेवफाई या धोखा देने को प्रमोट नहीं करती है। शादी में धोखे को बढ़ावा देने का आरोप फिल्म का टीजर आने के बाद से ही कुछ लोग इस पर सवाल उठा रहे थे। आलोचकों का कहना है कि फिल्म में एक शादीशुदा आदमी का दूसरी औरतों के साथ अफेयर दिखाना समाज में गलत मैसेज दे सकता है। आरोप है कि ऐसी कहानियों से लोग शादी में पार्टनर को धोखा देने के लिए प्रेरित हो सकते हैं। इसे ‘चीटिंग’ को ग्लोरिफाई करने वाली फिल्म बताया जा रहा था। आयुष्मान बोले- मेरा मॉरल कंपास सही इन आरोपों को खारिज करते हुए आयुष्मान खुराना ने ट्रेलर लॉन्च पर अपनी सफाई दी। उन्होंने कहा, “यह फिल्म चार किरदारों की उलझनों के बारे में है। मेरा जो रोल है यानी प्रजापति पांडे, वो पूरी तरह से एक ‘ग्रीन फ्लैग’ किरदार है। उसका मॉरल कंपास बिल्कुल सही है। हम किसी भी तरह की धोखाधड़ी को बढ़ावा नहीं दे रहे क्योंकि यह एक साफ-सुथरी पारिवारिक फिल्म है। यह सिर्फ एक कॉमेडी ऑफ एरर्स है, जिसमें प्रजापति का किसी के साथ कोई अफेयर नहीं है। रकुल बोलीं- यह सिर्फ कॉमेडी है एक्ट्रेस रकुल प्रीत सिंह ने भी आयुष्मान की बात का समर्थन किया। उन्होंने कहा, यह फिल्म गलतफहमियों पर आधारित है। ऐसी सिचुएशन किसी के साथ भी हो सकती है। लोग इससे जरूर रिलेट करेंगे। इसे विवाद के नजरिए से देखने के बजाय मनोरंजन के तौर पर देखा जाना चाहिए। रकुल का मानना है कि फिल्म में कुछ भी ऐसा नहीं है जिससे किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचे। तीन एक्ट्रेसेस के बीच फंसे आयुष्मान टीजर में आयुष्मान खुराना ‘प्रजापति पांडे’ के किरदार में नजर आ रहे हैं। इस बार उनकी लाइफ में कन्फ्यूजन का लेवल काफी ज्यादा है। आयुष्मान एक या दो नहीं, बल्कि तीन महिलाओं के बीच फंसे हुए हैं। फिल्म में सारा अली खान, वामिका गब्बी और रकुल प्रीत सिंह लीड रोल में हैं। टीजर में विजय राज एक पुलिस वाले के रोल में दिख रहे हैं, जो कॉमेडी को और बढ़ा रहे हैं। यह फिल्म 15 मई को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।

आयुष्मान की फिल्म पर लगे चीटिंग दिखाने के आरोप:एक्टर ने 'पति पत्नी और वो दो' मूवी पर दी सफाई, कहा- यह साफ-सुथरी पारिवारिक फिल्म

आयुष्मान की फिल्म पर लगे चीटिंग दिखाने के आरोप:एक्टर ने 'पति पत्नी और वो दो' मूवी पर दी सफाई, कहा- यह साफ-सुथरी पारिवारिक फिल्म

आयुष्मान खुराना की अपकमिंग फिल्म ‘पति पत्नी और वो दो’ का ट्रेलर रिलीज होते ही विवादों में आ गया है। सोशल मीडिया पर फिल्म पर शादी में धोखाधड़ी को बढ़ावा देने और इसे मजेदार तरीके से दिखाने के आरोप लग रहे हैं। हालांकि, अब ट्रेलर लॉन्च इवेंट के दौरान आयुष्मान खुराना और रकुल प्रीत सिंह ने इन आरोपों का जवाब दिया है। एक्टर का दावा है कि फिल्म में उनका किरदार ‘ग्रीन फ्लैग’ है और यह किसी भी तरह की बेवफाई या धोखा देने को प्रमोट नहीं करती है। शादी में धोखे को बढ़ावा देने का आरोप फिल्म का टीजर आने के बाद से ही कुछ लोग इस पर सवाल उठा रहे थे। आलोचकों का कहना है कि फिल्म में एक शादीशुदा आदमी का दूसरी औरतों के साथ अफेयर दिखाना समाज में गलत मैसेज दे सकता है। आरोप है कि ऐसी कहानियों से लोग शादी में पार्टनर को धोखा देने के लिए प्रेरित हो सकते हैं। इसे ‘चीटिंग’ को ग्लोरिफाई करने वाली फिल्म बताया जा रहा था। आयुष्मान बोले- मेरा मॉरल कंपास सही इन आरोपों को खारिज करते हुए आयुष्मान खुराना ने ट्रेलर लॉन्च पर अपनी सफाई दी। उन्होंने कहा, “यह फिल्म चार किरदारों की उलझनों के बारे में है। मेरा जो रोल है यानी प्रजापति पांडे, वो पूरी तरह से एक ‘ग्रीन फ्लैग’ किरदार है। उसका मॉरल कंपास बिल्कुल सही है। हम किसी भी तरह की धोखाधड़ी को बढ़ावा नहीं दे रहे क्योंकि यह एक साफ-सुथरी पारिवारिक फिल्म है। यह सिर्फ एक कॉमेडी ऑफ एरर्स है, जिसमें प्रजापति का किसी के साथ कोई अफेयर नहीं है। रकुल बोलीं- यह सिर्फ कॉमेडी है एक्ट्रेस रकुल प्रीत सिंह ने भी आयुष्मान की बात का समर्थन किया। उन्होंने कहा, यह फिल्म गलतफहमियों पर आधारित है। ऐसी सिचुएशन किसी के साथ भी हो सकती है। लोग इससे जरूर रिलेट करेंगे। इसे विवाद के नजरिए से देखने के बजाय मनोरंजन के तौर पर देखा जाना चाहिए। रकुल का मानना है कि फिल्म में कुछ भी ऐसा नहीं है जिससे किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचे। तीन एक्ट्रेसेस के बीच फंसे आयुष्मान टीजर में आयुष्मान खुराना ‘प्रजापति पांडे’ के किरदार में नजर आ रहे हैं। इस बार उनकी लाइफ में कन्फ्यूजन का लेवल काफी ज्यादा है। आयुष्मान एक या दो नहीं, बल्कि तीन महिलाओं के बीच फंसे हुए हैं। फिल्म में सारा अली खान, वामिका गब्बी और रकुल प्रीत सिंह लीड रोल में हैं। टीजर में विजय राज एक पुलिस वाले के रोल में दिख रहे हैं, जो कॉमेडी को और बढ़ा रहे हैं। यह फिल्म 15 मई को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।

ये पेड़ा बूढ़ों को बना दे जवान, 1 पीस में दूर होगी थकान, दुकानदार का दावा सुन आप भी खरीदने पहुंच जाएंगे

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Last Updated:May 03, 2026, 19:55 IST छतरपुर जिले के जीतेंद्र कुमार जो शिलाजीत के पेड़े बनाकर कमजोर लोगों को जवान बना रहे हैं. जीतेंद्र के मुताबिक इनके क्षेत्र के जंगलों में शिलाजीत मिलता है जिससे ये पेड़े बनाते हैं. इनका जीतेंद्र का मानना है कि शिलाजीत युवाओं से लेकर बूढ़े तक को खानी चाहिए. इन्होंने शिलाजीत पेड़े बनाने का आइडिया आया. अब 800 रुपए किलो बेच रहे हैं. आज हम आपको एक ऐसी मिठाई के बारे में बताने जा रहे हैं. जिसे देखकर आप भी खुद को खाने से रोक नहीं पाएंगे. छतरपुर जिले में शिलाजीत का पेड़ा बनाया जाता है. इस पेड़े को ताकत का पेड़ा भी कहा जाता है. अगर कोई इस एक पेड़े को एक गिलास दूध के साथ खा लेता है तो वह पूरे दिन थकान महसूस नहीं करता है. छतरपुर जिले के जीतेंद्र कुमार जो शिलाजीत के पेड़े बनाकर कमजोर लोगों को जवान बना रहे हैं. जीतेंद्र के मुताबिक इनके क्षेत्र के जंगलों में शिलाजीत मिलता है जिससे ये पेड़े बनाते हैं. इनका जीतेंद्र का मानना है कि शिलाजीत युवाओं से लेकर बूढ़े तक को खानी चाहिए. इन्होंने शिलाजीत पेड़े बनाने का आइडिया आया. अब 800 रुपए किलो बेच रहे हैं. 1 लाख रुपए का ईनाम जीतेंद्र बताते हैं कि अगर कोई व्यक्ति इस एक पेड़े को एक गिलास दूध के साथ खा लेता है तो उसे 24 घंटे थकान नहीं होती है. अगर वह थकान महसूस करता है. उसे हम 1 लाख रुपए का ईनाम देंगे. हमें विश्वास है. हमार बनाया हुआ प्रोडक्ट है. हमें पता है इसकी क्वालिटी इसलिए तो 1 लाख रुपए का ईनाम दे रहे हैं. ऐसे बनाते हैं पेड़ा जीतेंद्र बताते हैं कि जैसे घरों में मावा शक्कर का पेड़ा बनाया जाता है वैसे ही इस पेड़े को भी तैयार किया जाता है. 1 किग्रा में 2 ग्राम शुद्ध शिलाजीत मिलाकर इन पेड़ों को तैयार करते हैं. मावा के पेड़े ये भी हैं. शिलाजीत के साथ में इन्हें तैयार किया गया है. पूरी रेसिपी आपको नहीं बता सकते हैं यही हमारा फार्मूला है.जीतेंद्र बताते हैं कि शिलाजीत का पेड़ा शरीर की कोशिकाओं को फिर से नया करता है.किसी भी रोग में यह रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है. जिससे शरीर बीमार नहीं पड़ता है. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Chhatarpur,Chhatarpur,Madhya Pradesh