Tuesday, 20 Oct 2026 | 09:29 AM

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न्यूयॉर्क में सालाना 2 करोड़ या भारत में 60 लाख?:सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस; लोग बोले- जिंदगी को सिर्फ पैसों से नहीं माप सकते

न्यूयॉर्क में सालाना 2 करोड़ या भारत में 60 लाख?:सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस; लोग बोले- जिंदगी को सिर्फ पैसों से नहीं माप सकते

भारतीय युवाओं के बीच विदेश में नौकरी करने का सपना अब सिर्फ बड़ी सैलरी तक सीमित नहीं रह गया है। बेहतर लाइफस्टाइल, ग्लोबल एक्सपोजर और करिअर ग्रोथ के साथ अब लोग यह भी सोचने लगे हैं कि क्या विदेश जाकर वास्तव में जिंदगी बेहतर होती है। इसी सवाल ने सोशल मीडिया पर तब नई बहस छेड़ दी, जब एक भारतीय प्रोफेशनल ने न्यूयॉर्क की हाई-पेइंग जॉब और भारत में आरामदायक जिंदगी के बीच अपनी दुविधा साझा की। रेडिट पर ‘भारत में सालाना 60 लाख बनाम न्यूयॉर्क में 2 करोड़’ शीर्षक से लिखी गई पोस्ट वायरल हो गई। प्रोफेशनल ने बताया कि उन्हें न्यूयॉर्क में 2.2 लाख डॉलर सालाना यानी करीब ₹2 करोड़ का ऑफर मिला है, जो बढ़कर 2.3 लाख डॉलर (2.2 करोड़ रुपए) तक जा सकता है। दूसरी तरफ भारत में रहने पर प्रमोशन के बाद उनकी सालाना सैलरी करीब ₹80 लाख तक पहुंच सकती है। प्रोफेशनल ने बताया कि उनके ऊपर कोई कर्ज नहीं है, अच्छी-खासी बचत है और भारत में हर महीने करीब ₹3.4 लाख की पैसिव इनकम भी आती है, जो विदेश जाने पर भी जारी रह सकती है। यही वजह है कि पहले जो ऑफर ‘ड्रीम मूव’ लग रहा था, अब उसी पर संदेह होने लगा है। इस पर सोशल मीडिया पर लोगों की राय दो हिस्सों में बंटी नजर आई। कई यूजर्स ने कहा कि जिंदगी को सिर्फ पैसों से नहीं मापा जा सकता। कुछ लोगों ने लिखा कि ग्लोबल एक्सपोजर, नेटवर्किंग और करिअर के मौके लंबे समय में भारत की आरामदायक नौकरी से ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकते हैं। हालांकि दूसरी तरफ कई यूजर्स ने न्यूयॉर्क के महंगी जीवनशैली की याद दिलाई। कुछ ने कहा कि 2.3 लाख डॉलर सुनने में बड़ा पैकेज लगता है, लेकिन टैक्स और किराया निकालने के बाद वहां बचत आसान नहीं होती। कई भारतीय न्यू जर्सी में रहकर रोज न्यूयॉर्क आने-जाने को मजबूर होते हैं। इसीलिए यह चर्चा उस नई सोच के केंद्र में आ गई है जिसमें युवा ‘विदेश यानी बेहतर जिंदगी’ के फॉर्मूले पर दोबारा सोचने लगे हैं। करिअर ग्रोथ, बेतहाशा खर्च, वीसा…हर पहलू पर बहस का बाजार गर्म समर्थकों का तर्क – न्यूयॉर्क में काम करने से ग्लोबल एक्सपोजर और करिअर ग्रोथ के बड़े मौके मिलेंगे। विरोध में राय – न्यूयॉर्क दुनिया के सबसे महंगे शहरों में शुमार है। भारी-भरकम टैक्स, ऊंचा घर किराया और रोजाना लंबी दूरी की यात्रा बड़ी चुनौती बन सकते हैं। वीसा को लेकर चिंता – कुछ यूजर्स ने याद दिलाया कि एच1बी या एल1 वीसा पर आय के अतिरिक्त स्रोत चलाना आसान नहीं होता।

AIIMS portable MRI| Brain Imaging technology| मशीन खुद चलकर आएगी मरीज के पास, करेगी MRI, एम्स दिल्ली में शुरू हुई कमाल की सुविधा

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होमताजा खबरDelhi मशीन खुद चलकर आएगी मरीज के पास, करेगी MRI, एम्स में शुरू हुई कमाल की सुव‍िधा Last Updated:May 02, 2026, 17:17 IST AIIMS नई दिल्ली ने देश का पहला पोर्टेबल बेडसाइड MRI शुरू किया है. इससे ICU और इमरजेंसी में बिना मरीज को हिलाए ब्रेन इमेजिंग की जा सकेगी. रेड‍ियोसर्जरी ग्‍लोबल के सहयोग से इसे एम्‍स लाया गया है. एम्‍स नई दि‍ल्‍ली में शुरू हुई बेडसाइड पोर्टेबल एमआरआई की सुव‍िधा. AIIMS Delhi Portable MRI: अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) नई दिल्ली ने देश में पहली बार पोर्टेबल बेडसाइड MRI सिस्टम शुरू कर दिया है.यह तकनीक गंभीर रूप से बीमार मरीजों के लिए गेम चेंजर साबित होने वाली है. अब ICU, इमरजेंसी और न्यूरोसर्जिकल वार्ड में मरीज को बिस्तर से हिलाए बिना ब्रेन की इमेजिंग की जा सकेगी. देश में पहली बार ऐसी कोई मशीन लाई गई है जो न्‍यरोलॉजी व‍िभाग में क्रांत‍िकारी साब‍ित होने वाली है. परंपरागत MRI से अलगअभी तक एम्‍स में पारंपरिक एमआरआई मशीनों से स्‍कैन क‍िया जाता था. ये एमआरआई मशीनें बड़ी, महंगी और स्थिर होती हैं. इनमें स्‍कैन के ल‍िए मरीज को ICU से MRI रूम तक ले जाना पड़ता है, जो गंभीर मरीजों के लिए जोखिम भरा होता है. नया अल्ट्रा-लो-फील्ड पोर्टेबल एमआरआई छोटा, व्हील वाला और आसानी से मरीज के बेड तक ले जाया जा सकता है. यह सिस्टम न्यूरोलॉजिकल कंडीशंस सेंटर में डॉ. शैलेश गायकवाड़ की टीम के नेतृत्व में उपयोग में लाया जा रहा है. किन मरीजों को फायदा?डॉ. शैलेश गायकवाड़ ने बताया क‍ि यह तकनीक स्ट्रोक, ट्रॉमा, ICU मॉनिटरिंग, बच्चों और पोस्ट-ऑपरेटिव न्यूरोसर्जिकल केस में तेज डायग्नोसिस की सुविधा देगी. इमरजेंसी में जहां समय की कमी होती है और मरीज को शिफ्ट करना खतरनाक है, वहां यह सिस्टम जीवन रक्षक साबित होगा. डॉक्टरों का कहना है कि इससे फैसला लेने की गति बढ़ेगी और मरीजों की जान बचाने में मदद मिलेगी. भारत के लिए ऐतिहासिक कदमभारत में इस पोर्टेबल MRI को नियामकीय मंजूरी मिलने के बाद AIIMS में लगाया गया है. अस्‍पताल को रेड‍ियोसर्जरी ग्‍लोबल के सहयोग से यह उपलब्ध हुआ है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह पॉइंट-ऑफ-केयर न्यूरो डायग्नोस्टिक्स में नई क्रांति लाएगा. दूरदराज के क्षेत्रों और छोटे अस्पतालों में भी ब्रेन इमेजिंग की पहुंच बढ़ेगी. मरीजों और चिकित्सा क्षेत्र पर प्रभावपोर्टेबल MRI से मरीजों को अनावश्यक ट्रांसफर का खतरा कम होगा, संक्रमण का जोखिम घटेगा और समय की बचत होगी. AIIMS के इस कदम से देशभर के अस्पतालों में ऐसी तकनीक अपनाने की राह खुल सकती है. यह खासकर संसाधन सीमित क्षेत्रों के लिए वरदान साबित होगा. About the Author प्रिया गौतमSenior Correspondent Priya Gautam is an accomplished journalist currently working with Hindi.News18.com with over 14 years of extensive field reporting experience. Previously worked with Hindustan times group (Hindustan Hindi) and …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Delhi,Delhi,Delhi

सुप्रीम कोर्ट ने टीएमसी को दिया झटका, तृतीय वर्ष के लिए केंद्रीय कर्मचारियों के दस्तावेजों के मामले में प्रवेश की अनुमति दी गई

सुप्रीम कोर्ट ने टीएमसी को दिया झटका, तृतीय वर्ष के लिए केंद्रीय कर्मचारियों के दस्तावेजों के मामले में प्रवेश की अनुमति दी गई

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की शुरुआत से पहले सैद्धांतिक कांग्रेस को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। तीसरे में केंद्र सरकार के कर्मचारियों की अपील को चुनौती देने वाली याचिका अदालत ने खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में कोई आदेश जारी नहीं किया जा सकता। जस्टिस पी एस नरसिम्हा और जस्टिस जोयामाल्या बागची की बेंच ने कहा कि चुनाव आयोग का फैसला पूरी तरह से भूमिका में है। शनिवार को विशेष रूप से दोनों जज बैठे थे। कांग्रेस की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने चुनाव आयोग पर आरोप लगाया। लेकिन बेंच ने इसे स्वीकार नहीं किया। उन्होंने साफ किया कि प्राथमिक स्तर के कर्मचारियों के लिए चुनाव आयोग का अधिकार है। बेंच के अध्यक्ष जस्टिस बागची ने कहा, “चुनाव आयोग के केंद्र में ऐसा कहीं नहीं लिखा है कि कर्मचारी केवल केंद्र का ही होगा। लेकिन अगर वह ऐसा भी लिखते हैं, तब भी हम उन्हें गलत नहीं कहते हैं।” न्यायमूर्ति नरसिम्हा ने कहा कि तृतीयक केंद्र में सिटकॉल कैमरा होगा, वहां राजनीतिक वैश्वीकरण के एजेंट होंगे। ऐसे में कलाकार के संकट का कोई आधार नहीं है. चुनाव आयोग के वकील ने क्या कहा इसके बाद चुनाव आयोग की ओर से वरिष्ठ वकील डी एस नायडू ने बात शुरू की. नायडू ने कहा कि निराधार खतरों के तहत पूरी याचिका दायर की गई है। चुनाव आयोग के सरकुल में ऐसा कहीं नहीं कहा गया है कि तीसरे चरण में राज्य सरकार के कर्मचारियों की कोई भूमिका ही नहीं होगी। यहां तक ​​कि तीन साल के कर्मचारियों के लिए जो रिटर्निंग ऑफीसर विज़ेट है, वह भी राज्य सरकार का ही अधिकारी होता है। आयोग के वकील ने कहा कि पूरा काम ऐतिहासिक कहा जा रहा है। सरकुल में लिखी गई सभी बातों का पालन करना होगा और उसी आधार पर कर्मचारियों की ड्यूटी निभानी होगी। इसके बाद कोर्ट ने कहा, “इस मामले में किसी भी आदेश का पालन नहीं किया जाएगा। चुनाव आयोग ने कहा है कि सरकार का पूरी तरह से पालन नहीं किया जाएगा।” उच्च न्यायालय ने भी टीएमसी के दलालों को खारिज कर दिया था इससे पहले, कैथोलिक कांग्रेस ने येली कलकत्ता उच्च न्यायालय में मूर्ति की स्थापना की थी। 30 अप्रैल को उच्च न्यायालय ने चिकन चॉकलेट्स को खारिज कर दिया था। हाई कोर्ट ने कहा था कि तीन साल के कर्मचारियों के लिए चुनाव आयोग का पद बनता है। यदि तृतीयक में कोई गड़बड़ी होती है, तो इसके लिए बाद में नामांकन दाखिल किया जा सकता है। केवल खतरों के आधार पर कोई आदेश नहीं दिया जाएगा। यह भी पढ़ें : पश्चिम बंगाल में 15 बूथों पर वोटिंग के दौरान फूट, खुलासा- सामने आए टीएमसी-बीजेपी कार्यकर्ता, वीडियो (टैग्सटूट्रांसलेट)पश्चिम बंगाल 2026(टी)पश्चिम बंगाल 2026(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव 2026(टी)भारत(टी)ममता बनर्जी(टी)ममता बनर्जी टीएमसी(टी)टीएमसी(टी)बीजेपी

RBI के नए डिप्टी गवर्नर बने रोहित जैन:3 साल का कार्यकाल होगा, टी-रबी शंकर की जगह लेंगे

RBI के नए डिप्टी गवर्नर बने रोहित जैन:3 साल का कार्यकाल होगा, टी-रबी शंकर की जगह लेंगे

अपॉइंटमेंट कमेटी ऑफ द कैबिनेट यानी ACC ने रोहित जैन को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) का नया डिप्टी गवर्नर नियुक्त किया है। उनकी यह नियुक्ति 3 साल के लिए होगी, जो 3 मई या उसके बाद से प्रभावी मानी जाएगी। जैन वर्तमान डिप्टी गवर्नर टी रबी शंकर की जगह लेंगे, जिनका कार्यकाल आज समाप्त हो रहा है। रोहित जैन इससे पहले दिसंबर 2020 से आरबीआई में कार्यकारी निदेशक (ED) के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे। कार्यकारी निदेशक के तौर पर जैन ने सुपरविजन विभाग (रिस्क, एनालिटिक्स और वल्नरेबिलिटी असेसमेंट) की जिम्मेदारी संभाली है। केंद्र सरकार ने पिछले महीने डिप्टी गवर्नर पद के लिए चार कार्यकारी निदेशकों का इंटरव्यू लिया था, जिसमें से जैन के नाम पर मुहर लगी है। रिजर्व बैंक में 30 साल का लंबा अनुभव जैन के पास रिजर्व बैंक में करीब तीन दशकों का लंबा अनुभव है। उन्होंने अपने करियर के दौरान सुपरविजन, ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट और बैंकिंग समेत कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में काम किया है। कॉमर्स और एमबीए की डिग्री, बैंकिंग रिस्क में भी एक्सपर्ट शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो जैन ने कॉमर्स में मास्टर डिग्री (M.Com) और बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में मास्टर डिग्री (MBA) हासिल की है। इसके साथ ही उन्होंने बैंकिंग रिस्क और रेगुलेशन में इंटरनेशनल सर्टिफिकेट (ICRR) और सर्टिफाइड एसोसिएट ऑफ द इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग एंड फाइनेंस (CAIIB) जैसी प्रोफेशनल डिग्रियां भी ली हैं। वे एक सर्टिफाइड बैंक ट्रेनर भी हैं। आरबीआई में डिप्टी गवर्नर्स का समीकरण आरबीआई में कुल चार डिप्टी गवर्नर होते हैं। इनमें से दो अधिकारियों की नियुक्ति बैंक के अंदरूनी रैंक से पदोन्नति (प्रमोशन) के जरिए की जाती है। रोहित जैन के साथ एस सी मुर्मू दूसरे ऐसे डिप्टी गवर्नर हैं, जिन्हें अक्टूबर 2025 में आरबीआई के भीतर से ही प्रमोट किया गया था। अन्य दो डिप्टी गवर्नर बाहरी क्षेत्रों से चुने जाते हैं। वर्तमान में अर्थशास्त्री पूनम गुप्ता और कमर्शियल बैंकर स्वामीनाथन जे. (एसबीआई के पूर्व एमडी) इस पद पर तैनात हैं। इन विभागों की मिल सकती है जिम्मेदारी रोहित जैन को टी रबी शंकर के कुछ महत्वपूर्ण विभागों का प्रभार मिलने की संभावना है। इनमें फाइनेंशियल मार्केट रेगुलेशन, फॉरेन एक्सचेंज और पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम जैसे विभाग शामिल हैं। आरबीआई जल्द ही आधिकारिक तौर पर जैन के पोर्टफोलियो की घोषणा करेगा। ये खबर भी पढ़ें… आपके बच्चे को लखपति बनाएगा PPF अकाउंट: अपने बच्चे के नाम खुलवाएं ये अकाउंट, जानें इसको लेकर क्या हैं नियम अगर आप बच्चे के नाम पर निवेश शुरू करने का प्लान बना रहे हैं तो पब्लिक प्रॉविडेंट फंड (PPF) स्कीम में निवेश कर सकते हैं। इस स्कीम में अभी 7.1% सालाना ब्याज दिया जा रहा है। आप अपने बच्चे के नाम पर PPF अकाउंट खोलकर उसके लिए आसानी से लाखों का फंड तैयार कर सकते हैं। लेकिन इसके कुछ नियम हैं। हम आपको उन नियमों के बारे में बता रहे हैं। पूरी खबर पढ़ें…

बंगाल चुनाव आयोग को लेकर बड़ा फैसला, 165 डेविल्स काउंटी और 77 पुलिस ऑब्जर्वर की नियुक्ति

बंगाल चुनाव आयोग को लेकर बड़ा फैसला, 165 डेविल्स काउंटी और 77 पुलिस ऑब्जर्वर की नियुक्ति

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव खत्म होने के बाद और वोटों की गिनती से पहले स्टॉन्ग रूम और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) में पार्टिकल्स को लेकर हंगामा मच गया है। इस बीच चुनाव आयोग ने शनिवार (2 मई, 2026) को बड़ा कदम उठाते हुए पश्चिम बंगाल में 165 अतिरिक्त तीन पर्यवेक्षक और 77 पुलिस पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की है। इस संबंध में चुनाव आयोग ने शनिवार (2 मई, 2026) को आधिकारिक रूप से एक बयान जारी किया है, जिसमें आयोग ने कहा है कि पश्चिम बंगाल में चल रहे विधानसभा चुनाव, 2026 के लिए माध्यमिक शिक्षा के लिए आस-पास की सुरक्षा और मजबूत करने और कानून व्यवस्था की देखरेख पर ध्यान देने के लिए 165 अतिरिक्त भाषा पर्यवेक्षक और 77 पुलिस पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की गई है। वोटो की गणना के लिए सोसाइटी और रेज़्यूमे आयोग की नियुक्ति की गई चुनाव आयोग ने कहा है कि इन सभी अतिरिक्त ग्रेडों वाले पर्यवेक्षकों और पुलिस पर्यवेक्षकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 165 जिलों में मतदान पर्यवेक्षकों की सहायता की जाए। आयोग ने कहा कि यह संविधान के अनुसार नियुक्तियां 324 और पीपल का प्रतिनिधित्व, 1951 की धारा 20बी के तहत चुनाव आयोग द्वारा शक्तियों के आधार पर निर्धारित अधिनियम हैं। इस कारखाने के दौरान सभी ऑब्जर्ब्स आयोग के अधीनस्थों और आयोगों के नियंत्रण और नेतृत्व में कार्य होंगे। भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई) ने विधानसभा के लिए चल रहे आम चुनाव के लिए मतगणना केंद्रों के आसपास सुरक्षा मजबूत करने और कानून एवं व्यवस्था की व्यवस्था की निगरानी के लिए गिनती पर्यवेक्षकों और 77 पुलिस पर्यवेक्षकों की सहायता के लिए 165 अतिरिक्त गणना पर्यवेक्षकों को तैनात किया है… pic.twitter.com/lJASM0XxGJ – एएनआई (@ANI) 2 मई 2026 चुनाव आयोग ने पर्यवेक्षकों के लिए निम्नलिखित सख्त निर्देश दिए चुनाव आयोग ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि पश्चिम बंगाल के जिन 165 क्षेत्रों में एक से अधिक काउंटी हॉल हैं, वहां पर काउंटी पर्यवेक्षकों की मदद के लिए अतिरिक्त न्यायिक पर्यवेक्षकों की सिफारिशें की गई हैं। इसके अलावा, पुलिस पर्यवेक्षकों को मतगणना केंद्रों के आसपास सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी दी गई है, ताकि तीन केंद्रों पर किसी तरह की कोई घटना न हो और मतगणना प्रक्रिया चुनाव आयोग के निर्देश-निर्देशों के तहत दी जा सके। मतगणना से पहले चुनाव आयोग का सख्त रुख चुनाव आयोग ने अपने बयान में यह भी स्पष्ट कर दिया है कि मतगणना केंद्रों पर स्टाफ पुलिस ऑब्जर्वर को किसी भी स्थिति में आतंकवादियों की गिनती के दिन और उसके दौरान गिनती हॉल में नहीं जाना पड़ेगा। पुलिस पर्यवेक्षक वोट गणना प्रक्रिया के दौरान प्राथमिक पर्यवेक्षकों और अन्य संस्थाओं के सदस्यों के साथ मिलकर काम करेंगे। इसके अलावा, रिनर्टिंग अधिकारी ईसीआईएनईटी के एक निश्चित दस्तावेज़ के तहत लेखांकन कर्मचारी, सेल और उनके सहयोगियों को एक क्यूआर कोड आधारित फोटो पहचान पत्र (डेटाबेस कार्ड) जारी किया जाएगा, जिसके माध्यम से वो गिनती केंद्रों में प्रवेश कर सकेंगे। आयोग ने यह भी कहा कि गणना अधिकारी और रिटर्निंग अधिकारी के अलावा किसी भी व्यक्ति को गणना हॉल के अंदर मोबाइल फोन लेकर जाने की अनुमति नहीं होगी। यह भी पढ़ेंः सुप्रीम कोर्ट ने टीएमसी को झटका दिया, सेंट्रल कर्मचारियों के रिकॉर्ड्स केस में प्रवेश से मना किया गया

पापा के करीब रहने बॉलीवुड में आना चाहती थीं त्रिशाला:संजय दत्त की सलाह के बाद एक्टिंग छोड़ी, अब मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ बन चुकी हैं

पापा के करीब रहने बॉलीवुड में आना चाहती थीं त्रिशाला:संजय दत्त की सलाह के बाद एक्टिंग छोड़ी, अब मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ बन चुकी हैं

संजय दत्त की बेटी त्रिशाला दत्त एक समय बॉलीवुड में आना चाहती थीं। इसकी वजह एक्टिंग का सपना नहीं, बल्कि पिता के करीब रहना था। त्रिशाला ने इन्साइड थॉट्स आउट लाउड पॉडकास्ट में कहा कि बचपन में उन्हें लगता था कि फिल्मों में आने से वह पिता के साथ ज्यादा समय बिता पाएंगी। त्रिशाला, संजय दत्त और उनकी पहली पत्नी ऋचा शर्मा की बेटी हैं। ऋचा का 1996 में ब्रेन ट्यूमर से निधन हुआ था। इसके बाद त्रिशाला अमेरिका में नाना-नानी के साथ पली-बढ़ीं। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने बॉलीवुड में आने की इच्छा जताई, तब संजय दत्त ने पूछा था कि क्या एक्टिंग सच में उनका पैशन है। त्रिशाला के मुताबिक, उन्होंने पिता से कहा था कि वह सिर्फ उनके करीब रहना चाहती हैं। इस पर संजय दत्त ने समझाया कि सिर्फ स्टार किड होने से कोई ए-लिस्ट एक्ट्रेस नहीं बनता। उन्होंने बेटी को वही करने की सलाह दी, जिसमें उसकी असली रुचि हो। त्रिशाला ने कहा कि उनके पिता जिंदगी में मुश्किल दौर से गुजरे हैं। उन्होंने हमेशा उन्हें सही दिशा दिखाने की कोशिश की। बॉलीवुड में करियर बनाने के बजाय त्रिशाला ने मानसिक स्वास्थ्य क्षेत्र चुना। वह अब थेरेपिस्ट हैं। उन्होंने कहा कि इंडस्ट्री में मानसिक स्वास्थ्य पर कम खुलकर बात होती है। वह लोगों को बताना चाहती थीं कि संघर्ष सामान्य है। त्रिशाला ने दीपिका पादुकोण की भी तारीफ की, जिन्होंने डिप्रेशन पर खुलकर बात की थी। त्रिशाला ने बताया कि उन्होंने माता-पिता के साथ सामान्य पारिवारिक जिंदगी नहीं जी। वह बचपन से अमेरिका में रहीं और भारत कम आ पाती थीं। हालांकि, उन्होंने कहा कि जब भी वह संजय दत्त के साथ होती हैं, उन्हें सामान्य पिता-बेटी जैसा रिश्ता महसूस होता है।

पापा के करीब रहने बॉलीवुड में आना चाहती थीं त्रिशाला:संजय दत्त की सलाह के बाद एक्टिंग छोड़ी, अब मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ बन चुकी हैं

पापा के करीब रहने बॉलीवुड में आना चाहती थीं त्रिशाला:संजय दत्त की सलाह के बाद एक्टिंग छोड़ी, अब मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ बन चुकी हैं

संजय दत्त की बेटी त्रिशाला दत्त एक समय बॉलीवुड में आना चाहती थीं। इसकी वजह एक्टिंग का सपना नहीं, बल्कि पिता के करीब रहना था। त्रिशाला ने इन्साइड थॉट्स आउट लाउड पॉडकास्ट में कहा कि बचपन में उन्हें लगता था कि फिल्मों में आने से वह पिता के साथ ज्यादा समय बिता पाएंगी। त्रिशाला, संजय दत्त और उनकी पहली पत्नी ऋचा शर्मा की बेटी हैं। ऋचा का 1996 में ब्रेन ट्यूमर से निधन हुआ था। इसके बाद त्रिशाला अमेरिका में नाना-नानी के साथ पली-बढ़ीं। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने बॉलीवुड में आने की इच्छा जताई, तब संजय दत्त ने पूछा था कि क्या एक्टिंग सच में उनका पैशन है। त्रिशाला के मुताबिक, उन्होंने पिता से कहा था कि वह सिर्फ उनके करीब रहना चाहती हैं। इस पर संजय दत्त ने समझाया कि सिर्फ स्टार किड होने से कोई ए-लिस्ट एक्ट्रेस नहीं बनता। उन्होंने बेटी को वही करने की सलाह दी, जिसमें उसकी असली रुचि हो। त्रिशाला ने कहा कि उनके पिता जिंदगी में मुश्किल दौर से गुजरे हैं। उन्होंने हमेशा उन्हें सही दिशा दिखाने की कोशिश की। बॉलीवुड में करियर बनाने के बजाय त्रिशाला ने मानसिक स्वास्थ्य क्षेत्र चुना। वह अब थेरेपिस्ट हैं। उन्होंने कहा कि इंडस्ट्री में मानसिक स्वास्थ्य पर कम खुलकर बात होती है। वह लोगों को बताना चाहती थीं कि संघर्ष सामान्य है। त्रिशाला ने दीपिका पादुकोण की भी तारीफ की, जिन्होंने डिप्रेशन पर खुलकर बात की थी। त्रिशाला ने बताया कि उन्होंने माता-पिता के साथ सामान्य पारिवारिक जिंदगी नहीं जी। वह बचपन से अमेरिका में रहीं और भारत कम आ पाती थीं। हालांकि, उन्होंने कहा कि जब भी वह संजय दत्त के साथ होती हैं, उन्हें सामान्य पिता-बेटी जैसा रिश्ता महसूस होता है।

राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन ने किया यूएई का कायाकल्प:शाही पहचान छिपाई, वेटर की नौकरी की; जानें कैसे बने नाहयान गल्फ के गेमचेंजर

राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन ने किया यूएई का कायाकल्प:शाही पहचान छिपाई, वेटर की नौकरी की; जानें कैसे बने नाहयान गल्फ के गेमचेंजर

संयुक्त राष्ट्र अमीरात (यूएई) ने तेल उत्पादक संगठन ओपेक से दूरी बनाकर संकेत दिया है कि उसका भविष्य तेल पर ही निर्भर नहीं है। राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान की रणनीति ग्रीन हाइड्रोजन, एआई और स्पेस मिशन पर है। उन्होंने 2015 में कहा था कि आखिरी तेल के बैरल पर यूएई शोक नहीं, उत्सव मनाएगा। पहले सैन्य कमांडर फिर क्राउन प्रिंस से राष्ट्रपति बनने तक उनके फैसलों ने न केवल यूएई का कायाकल्प किया है, खाड़ी देशों में बदलाव को भी हवा दी है। शेख मोहम्मद की परवरिश ने उनके फैसलों की नींव रखी। जब 14 वर्ष के थे, तब पिता शेख जायद ने उन्हें राजसी पहचान छिपाकर मोरक्को पढ़ने भेजा था। ताकि वे कठोर जीवन देख सकें। सैंडहर्स्ट की ट्रेनिंग और ‘वेटर’ के रूप में काम मोरक्को में पढ़ाई के दौरान उन्होंने अपना नाम बदलकर ‘हसन’ रखा था, ताकि कोई उन्हें पहचान न सके। वे अपना खाना खुद बनाते और कपड़े खुद धोते थे। वहां एक कैफे में वेटर के तौर पर भी काम किया, ताकि वह आम लोगों के संघर्ष और जीवन को करीब से समझ सकें। शेख मोहम्मद ने ब्रिटेन की प्रतिष्ठित रॉयल मिलिट्री अकादमी सैंडहर्स्ट से ट्रेनिंग ली और पासआउट होकर बाद में यूएई सेना में शामिल हुए। सेना के आधुनिकीकरण और प्रोफेशनल ट्रेनिंग को उन्होंने खुद मॉनिटर किया। शेख मोहम्मद ने खुद को कट्‌टरपंथी सोच से अलग रखा। छात्र जीवन में जब एक मौलवी ने उन्हें कट्टरपंथ की ओर मोड़ने की कोशिश की, तो वे जल्द समझ गए कि यह विचारधारा खतरनाक है। यमन युद्ध में नाहयान ने मिसाल पेश की। भतीजे को फ्रंट लाइन पर भेजा, जो आज युद्ध के कारण व्हीलचेयर पर हैं। 2004 में क्राउन प्रिंस बनने पर नाहयान ने कानूनों की दशा बदली। संसद में 50% महिला आरक्षण, 100% विदेशी स्वामित्व व गोल्डन वीसा जैसे फैसलों ने यूएई को निवेश हब बनाया। हालांकि, 2004-22 तक उनके भाई शेख खलीफा बिन जायद राष्ट्रपति थे, पर असली ताकत व कूटनीति क्राउन प्रिंस रहते नाहयान के पास थी। यही यूएई को गल्फ का गेमचेंजर बना रहा है। एआई से 50% सरकारी फैसले लेने वाला पहला देश बनेगा 2022 में राष्ट्रपति बनने के बाद शेख मोहम्मद ने पर्सनल लॉ में बदलाव कर तलाक, कस्टडी और विरासत में महिलाओं को अधिकार दिए। श्रम कानून बदलकर ‘निश्चित अवधि’ के अनुबंध अनिवार्य किए गए, जिससे बाहरी मजदूरों को लाभ हुआ। ‘एजेंटिक एआई’ मॉडल के तहत लक्ष्य है कि 2028 तक 50% सरकारी काम एआई संभाले, जो विश्लेषण के साथ फैसले भी ले सके। ऐसा करने वाला यूएई दुनिया का पहला देश होगा। सादगी की बात करें तो कई बार मेहमानों को वे खुद ही कॉफी सर्व करते हैं।

सिक्योरिटी के सीटी बजाने से नाराज हुए थे शाहरुख खान:वानखेड़े विवाद पर पूर्व एसीपी बोले- मुझे बताया गया कि शाहरुख राड़ा कर रहा है

सिक्योरिटी के सीटी बजाने से नाराज हुए थे शाहरुख खान:वानखेड़े विवाद पर पूर्व एसीपी बोले- मुझे बताया गया कि शाहरुख राड़ा कर रहा है

साल 2012 में मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में हुए विवाद पर तत्कालीन एसीपी इकबाल शेख ने हाल ही में बताया कि शाहरुख खान और एमसीए अधिकारियों के बीच गलतफहमी से बहस हुई, जिसे बढ़ने से रोकने के लिए उन्होंने एक्टर को मौके से बाहर ले जाने को कहा था। यह मामला 2012 के आईपीएल मैच के बाद सामने आया था, जब कोलकाता नाइट राइडर्स ने मुंबई इंडियंस को हराया था। मैच के बाद मैदान पर शाहरुख खान और सिक्योरिटी स्टाफ के बीच बहस के सीन सामने आए थे। इकबाल शेख ने शुभोजीत घोष के पॉडकास्ट में बताया, ‘जब मैं मेन गेट पर था, तो मुझे हमारे कलीग ने बताया कि शाहरुख यहां राड़ा (झगड़ा/हंगामा) कर रहा है।’ शेख ने बताया कि उस समय मैच खत्म हो चुका था। उन्होंने कहा, ‘मेरे साथ में ऑपरेटर था। उस टाइम मैच खत्म हो गया था, तकरीबन सब लोग जा चुके थे। फ्लडलाइट्स में से तीन-चार में से तीन लाइटें भी बंद हो गई थीं। सब लोग जा रहे थे। वहां पर शाहरुख खान और उसके फ्रेंड्स के साथ जो बच्चे लोग कुछ खेल रहे थे, वो एक साइड में खेल रहे थे।’ उन्होंने कहा, ‘वहां के सिक्योरिटी वाले ने उसके लिए ऑब्जेक्शन उठाया। सिक्योरिटी ने सीटी बजाई, तो शाहरुख खान को अच्छा नहीं लगा। उसमें कुछ बातचीत हुई, फिर सिक्योरिटी की तरफ से और एमसीए के कुछ लोगों ने बोला, तो आपस में हीटेड आर्गुमेंट्स हो गए।’ शाहरुख को तुरंत बाहर चलने को कहा इकबाल शेख ने बताया कि स्थिति बिगड़ने से पहले वह मौके पर पहुंचे और उन्होंने सीधे शाहरुख खान से कहा कि वह बाहर चलें। उन्होंने बताया कि एक्टर ने उनकी बात मानी और मामला वहीं शांत हो गया। घटना के बाद मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन ने एक्टर पर स्टेडियम में प्रवेश को लेकर नियम तोड़ने और स्टाफ से बदसलूकी का आरोप लगाया था। मरीन ड्राइव पुलिस स्टेशन में शिकायत भी दर्ज की गई थी। हालांकि, पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार शाहरुख खान ने बदसलूकी के आरोपों से इनकार किया था। उनका कहना था कि वह अपनी बेटी सुहाना खान और अन्य बच्चों की सिक्योरिटी को लेकर चिंतित थे।

बेटे के गम में मां की मौत, सदमा कैसे ले लेता है जान, इमोशनल शॉक पीड़ि‍त को कैसे संभालें?

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Mental Trauma Effects: उत्तर प्रदेश के इटावा जिले में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई. जब मां-बेटे में हुई कहासुनी के बाद बेटे ने जहर खाकर जान दे दी तो मां इस सदमे को बर्दाश्त नहीं कर पाई और उसने भी फांसी लगाकर जीवन लीला समाप्त कर ली. इलाके में इमोशनल शॉक या भावनात्मक सदमे के कारण हुई इन मौतों ने हलचल पैदा कर दी है. लोग बार-बार यही बात कह रहे हैं कि किसी की मौत का सदमा क्या इतना खतरनाक होता है कि खुदकुशी की कर लेते हैं. मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट डॉ. कल्‍याणी नागर की मानें तो अचानक का गहरा दुख, तीव्र तनाव, चिंता या ट्रॉमा कई बार व्यक्ति को एक्सट्रीम कदम उठाने पर मजबूर कर देता है. जबकि कई बार इसका साइड इफैक्ट अपने आप ही शरीर पर दिखाई दे जाता है. सदमा भावनात्मक और शारीरिक दोनों रूपों में नुकसान पहुंचा सकता है. सदमा ब्रेन और हार्ट पर सीधा असर डाल सकता है. तीव्र भावनात्मक सदमा ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम या हार्ट अटैक जैसी स्थिति पैदा कर सकता है. अत्यधिक भावनात्मक सदमा व्यक्ति को गहरे अवसाद, हताशा और लाचारी की स्थिति में ले जा सकता है, जहां उसे आत्महत्या के अलावा कोई दूसरा रास्ता नजर नहीं आता. बेटे की मौत के बाद संभव है कि इस मां को भी ऐसा ही लगा हो. हार्ट पर भी असर डालता है सदमा अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार तीव्र सदमा शरीर में स्ट्रेस हार्मोन (कोर्टिसोल और एड्रेनालाइन) की अचानक वृद्धि कर देता है. इससे दिल की धड़कन तेज हो जाती है, ब्लड प्रेशर बढ़ता है और हृदय की मांसपेशियां अस्थायी रूप से कमजोर हो सकती हैं. भावनात्मक सदमा अचानक हार्ट अटैक के लक्षण पैदा कर सकता है, जैसे सीने में दर्द, सांस फूलना, चक्कर आना. कुछ मामलों में यह हार्ट फेल्योर या अरिदमिया (Arrhythmia) का कारण बन जाता है, खासकर पहले से हृदय रोग वाले लोगों में. कैसे पहचानें खतरे के संकेत?ऐसे में डॉक्टर और एसोसिएशन अक्सर सलाह देते हैं कि जब भी कोई बेहद दुख की घटना हो जाए तो उससे जुड़े व्यक्ति का खास ध्यान रखना जरूरी है, हल्की सी लापरवाही भी जानलेवा हो जाती है. सदमा एक्यूट और क्रॉनिक दोनों ही स्थितियों में खराब है. सदमे में व्यक्ति चुप रह सकता है, रो सकता है या अचानक बेहोश हो सकता है. उसके सीने में दबाव, बांहों या जबड़े में दर्द, पसीना आना, उल्टी जैसा महसूस हो सकता है. आईसीएमआर की एक रिपोर्ट कहती है कि तीव्र मानसिक तनाव हार्ट अटैक को ट्रिगर कर देता है. सदमे को कैसे संभालें? अगर आपके पास सदमे का पीड़ित है तो उसे शांत जगह पर बिठाएं, गहरी सांस लेने को कहें. अगर उसके सीने में दर्द या सांस लेने में तकलीफ हो तो तुरंत 108 या नजदीकी अस्पताल पहुंचाएं. ECG और ब्लड टेस्ट जरूर करवाएं. अगर वह फिर ठीक से व्यवहार न करे तो उसे मानसिक सहायता दें, सदमे की काउंसलिंग कराएं. परिवार उसके आसपास रहे, उससे लगातार बात करें, उसे अकेले न छोड़ें. . अगर किसी को पहले से दिल की बीमारी है तो उसे झटके से कोई दुखभरी सूचना न दें और उसे लगातार व्यायाम करने व दवा लेने के लिए प्रेरित करें. क्या सदमे से मिल सकती है मुक्ति भावनात्मक सदमा स्ट्रैस कार्डियोमायोपैथी पैदा कर सकता है, जो ज्यादातर मामलों में रिवर्सिबल होता है, लेकिन समय पर इलाज जरूरी है. AIIMS और PGI चंडीगढ़ जैसे संस्थानों के विशेषज्ञ कहते हैं कि तीव्र दुख में हृदय की निगरानी रखें. योग करें, व्यायाम करें, लोगों से मिलें. स्वस्थ जीवनशैली और मजबूत सामाजिक समर्थन सदमे के प्रभाव को कम कर सकता है.