Tuesday, 20 Oct 2026 | 02:59 PM

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बंगाल के 15 बूथों पर आज दोबारा वोटिंग:काउंटिंग में केंद्रीय कर्मचारियों की नियुक्ति के खिलाफ TMC की याचिका, सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

बंगाल के 15 बूथों पर आज दोबारा वोटिंग:काउंटिंग में केंद्रीय कर्मचारियों की नियुक्ति के खिलाफ TMC की याचिका, सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल के 15 बूथों पर शनिवार को दोबारा वोटिंग कराने का फैसला किया है। 29 अप्रैल को दूसरे फेज की वोटिंग के दौरान डायमंड हार्बर के 4 और मगराहट पश्चिम के 11 बूथों पर हिंसा, EVM से छेड़छाड़ और झड़प हुई थी। वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने रविवार को पश्चिम बंगाल चुनाव मामले में TMC की याचिका पर सुनवाई के लिए स्पेशल बेंच गठित की है। यह याचिका कलकत्ता हाईकोर्ट के उस आदेश के खिलाफ है, जिसमें काउंटिंग में केवल केंद्र सरकार के कर्मचारियों को सुपरवाइजर बनाने की बात कही गई थी। जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जॉयमाल्या बागची की बेंच 2 मई को सुबह 10:30 बजे सुनवाई करेगी। कोलकाता के सात EVM स्ट्रॉन्गरूम में सिक्योरिटी बढ़ी कोलकाता के सात EVM स्ट्रॉन्गरूम में सिक्योरिटी सख्त कर दी गई है। पुलिस ने 200 मीटर के दायरे में 5 या उससे ज्यादा लोगों के इकठ्ठा होने पर रोक लगा दी है| सेंट्रल ऑर्म्ड पुलिस फोर्सेस (CAPF) की करीब 700 कंपनियां तैनात की गई हैं। प्रशासन ने यह फैसला खुदीराम अनुशीलन केंद्र के स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर गुरुवार रात TMC और BJP कार्यकर्ताओं के 5 घंटे विरोध-प्रदर्शन के बाद लिया गया है। वहीं, भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी शुक्रवार शाम 6.30 बजे कोलकाता के सखावत मेमोरियल स्कूल में EVM स्ट्रॉन्ग रूम पहुंचे। इसी स्ट्रॉन्ग रूम में गुरुवार रात को सीएम ममता बनर्जी 4 घंटे बैठी रही थीं। पश्चिम बंगाल- 8 एग्जिट पोल में से 6 में भाजपा, 2 में TMC सरकार ————————————————- ये खबर भी पढ़ें… बंगाल- 8 एग्जिट पोल में से 6 में भाजपा सरकार:असम में BJP, तमिलनाडु में DMK की वापसी; केरलम में 10 साल बाद UDF सरकार का अनुमान पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरलम, असम और पुडुचेरी विधानसभा चुनाव के एग्जिट पोल के नतीजे आ चुके हैं। पूरी खबर पढ़ें…

पश्चिम बंगाल के 15 बूथों पर दोबारा वोटिंग शुरू:सेकेंड फेज में मगरहाट-डायमंड हार्बर सीट पर हिंसा और EVM से छेड़छाड़ हुई थी

पश्चिम बंगाल के 15 बूथों पर दोबारा वोटिंग शुरू:सेकेंड फेज में मगरहाट-डायमंड हार्बर सीट पर हिंसा और EVM से छेड़छाड़ हुई थी

पश्चिम बंगाल में डायमंड हार्बर के 4 और मगरहाट पश्चिम के 11 बूथों पर दोबारा मतदान शुरू हो गया है। वोटिंग शाम 6 बजे तक होगी। चुनाव आयोग ने इन बूथों पर EVM से छेड़छाड़ और झड़प की शिकायत के बाद फिर से वोटिंग कराने का फैसला लिया था। सभी बूथ दक्षिण 24 परगना जिले में आते हैं। राज्य की सभी 294 सीटों पर रिकॉर्ड 92.84% वोटिंग हुई। 23 अप्रैल को फर्स्ट फेज की 152 सीटों पर 93.19% मतदान हुआ था। 29 अप्रैल को सेकेंड फेज की 142 सीटों पर 92.48% वोट पड़े। रिजल्ट 4 मई को आएंगे। पश्चिम बंगाल- 8 एग्जिट पोल में से 6 में भाजपा, 2 में TMC सरकार दक्षिण 24 परगना की 2 विधानसभा सीटों पर हो रही दोबारा वोटिंग से जुड़े अपडेट्स के लिए ब्लॉग से गुजर जाइए…

सेहत का विज्ञान- शाकाहारियों को B12 डेफिशिएंसी का रिस्क:दूध-दही खाएं, विटामिन D के लिए डेली धूप लें, जानें कब सप्लीमेंट जरूरी

सेहत का विज्ञान- शाकाहारियों को B12 डेफिशिएंसी का रिस्क:दूध-दही खाएं, विटामिन D के लिए डेली धूप लें, जानें कब सप्लीमेंट जरूरी

आजकल बिना किसी बड़ी बीमारी के भी लोगों में थकान, कमजोरी और बॉडी पेन जैसी शिकायतें कॉमन हो गई हैं। इसकी बड़ी वजह विटामिन D और B12 की कमी हो सकती है। बदलती लाइफस्टाइल, धूप में कम समय बिताना और डाइट में कमी के कारण ये दोनों न्यूट्रिएंट्स शरीर में धीरे-धीरे घटने लगते हैं। वेजिटेरियन लोगों में आमतौर पर B12 की कमी पाई ही जाती है। ऐसे में जानते हैं इसके लक्षण, सही स्तर, डाइट और कब सप्लीमेंट लेना जरूरी है। डेफिशिएंसी होने पर धूप में बैठें और डाइट में बदलाव करें विटामिन B12 की कमी शाकाहारी लोगों में ज्यादा होती है क्योंकि यह मुख्य रूप से मांस, मछली, अंडे और डेयरी में मिलता है। इसे पूरा करने के लिए दूध, दही, पनीर, चीज खाएं। अगर अंडे खाते हैं तो भोजन में शामिल करें। अगर गंभीर रूप से कमी है तो डॉक्टर की सलाह से सप्लीमेंट लें। विटामिन D की पूर्ति के लिए सबसे जरूरी सोर्स धूप है। इसलिए रोज थोड़ी देर धूप लें। गंभीर लक्षण और कब सप्लीमेंट लेना जरूरी विटामिन D की कमी से बहुत ज्यादा थकान, मूड खराब, शरीर दर्द और मांसपेशियों की कमजोरी हो सकती है। गंभीर होने पर हड्डियों की समस्या भी हो सकती है। विटामिन B12 डेफिशिएंसी में कमजोरी, ध्यान की कमी और हाथ-पैर में झनझनाहट होती है। अगर सुन्नपन, संतुलन की दिक्कत या खून की जांच में कमी साबित हो जाए या शरीर पोषक तत्व सही से न सोख पाएं, तो डाइट काफी नहीं होती। डॉक्टर की सलाह से सप्लीमेंट या इंजेक्शन लेना पड़ सकता है। सामान्य, कमी और जोखिम वाले स्तर विटामिन D अगर 12 ng/mL से कम हो तो डेफिशिएंसी मानी जाती है। 20–50 ng/mL को आमतौर पर पर्याप्त और सामान्य माना जाता है। 50 ng/mL से ऊपर स्तर बढ़ाने की कोशिश बिना डॉक्टर की सलाह के नहीं करनी चाहिए। हाई-डोज सप्लीमेंट लेने से खासतौर पर बचें। वहीं, विटामिन B12 में 200 pg/mL से कम होने को डेफिशिएंसी माना जाता है। 200–300 pg/mL बीच होने पर जांच और टेस्ट की सलाह दी जाती है। 300 pg/mL से ज्यादा सामान्य माना जाता है। रेणु रखेजा जानी-मानी न्यूट्रिशनिस्ट एवं हेल्थ कोच हैं। @consciouslivingtips

सोनम के बाद अब आकाश-आनंद-विशाल ने लगाई बेल याचिका:राज कुशवाहा की जमानत याचिका टेक्निकल ग्राउंड पर हुई कैंसल; राज की सोमवार को फिर लगेगी याचिका

सोनम के बाद अब आकाश-आनंद-विशाल ने लगाई बेल याचिका:राज कुशवाहा की जमानत याचिका टेक्निकल ग्राउंड पर हुई कैंसल; राज की सोमवार को फिर लगेगी याचिका

शुक्रवार को सोनम के प्रेमी राज कुशवाहा की जमानत याचिका को शिलॉन्ग कोर्ट ने खारिज कर दिया है। वहीं सोनम की जमानत को आधार बनाकर शिलांग जेल में बंद विशाल चौहान, आनंद कुर्मी और आकाश राजपूत ने भी जमानत मांग ली है। शुक्रवार को उनके वकील ने कोर्ट में अर्जी लगा दी है। बता दें की राजा रघुवंशी हत्याकांड की मुख्य आरोपी सोनम मंगलवार रात को जेल से रिहा हो चुकी है और फिलहाल शिलांग के एक होटल में ठहरी हुई है। राज के वकील फुयोसा योबिन बताया की राज की बेल एप्लिकेशन को सेशन कोर्ट ने शुक्रवार को निरस्त कर दिया। राज कुशवाहा की ज़मानत अर्जी ‘तकनीकी आधारों’ पर खारिज की गई, न कि मामले की मेरिट (गुण-दोष) के आधार पर, अर्जी में पिछले जमानत आवेदन का उल्लेख नहीं था। कोर्ट ने आदेश में उसका उल्लेख किया है। सोमवार को राज कुशवाहा के लिए ज़मानत मांगने हेतु अदालत में एक नई अर्जी दायर की जाएगी। इधर राज की गिरफ्तारी के बाद उसकी मां बहनों को लेकर इंदौर से अपने गांव (उप्र) चली गई है। वकील योबिन के अनुसार परिवार का कोई सदस्य राज से मिलने नहीं आता है। कोर्ट के दस्तावेज साइन करवाने के लिए वकील ही शिलांग जेल जाते है। अंडर ट्रायल और कानूनी आधारों की दलीलें रहीं बेअसर राज कुशवाहा के बचाव पक्ष की ओर से दलील दी गई थी कि अंडर ट्रायल मामलों में आरोपितों को लंबे समय तक जेल में रखना उनके अधिकारों का उल्लंघन है। आमतौर पर एक साल से अधिक समय तक जेल में रहने के आधार पर आरोपित जमानत का प्रयास करते हैं, लेकिन कोर्ट ने अपराध की गंभीरता और मामले के तथ्यों को देखते हुए राज को राहत देना उचित नहीं समझा। राज कुशवाहा की याचिका खारिज होने के बाद अब अन्य आरोपितों की राह भी मुश्किल नजर आ रही है। सोनम की जमानत रद्द कराने हाईकोर्ट जाएगी शिलॉन्ग पुलिस शिलॉन्ग पुलिस सोनम की जमानत को चुनौती देने के लिए मेघालय हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी कर रही है। पुलिस का मानना है कि सोनम इस हत्याकांड की मास्टरमाइंड है और उसकी रिहाई से केस के गवाहों को प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है। जमानत मिलने से वह गवाहों को प्रभावित कर सकती है। शिलॉन्ग एसपी विवेक सियेम ने दैनिक भास्कर से बात करते हुए कहा कि हम जरूरी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन कर रहे हैं और कानून के मुताबिक इस मामले को आगे बढ़ाते रहेंगे। कोर्ट ने अपने अधिकारों का उपयोग किया है। हमारी जांच नियमों के अनुसार आगे बढ़ेगी। एक और अर्जी दायर करने की तैयारी में सोनम रघुवंशी शिलॉन्ग पुलिस सूत्रों ने बताया कि जमानत के बाद सोनम को वकील की मदद से शिलॉन्ग में किसी सुरक्षित जगह पर रखा है। कारण यह है कि सोनम कोर्ट की अनुमति के बगैर शिलॉन्ग नहीं छोड़ सकती है। वहीं, सूत्रों के अनुसार सोनम खुद शिलॉन्ग से बाहर जाने के लिए कोर्ट में अर्जी दायर कर सकती है। इसके लिए वह स्वयं पर हमले का खतरा होने का तर्क दे सकती है। बताया जा रहा है कि उसके वकील की तरफ से इस मामले में तैयारी की जा रही है। 10 माह से जांच कर रही एसआईटी इंदौर शहर के सहकार नगर निवासी राजा रघुवंशी की हत्या के मामले में उसकी पत्नी सोनम को सशर्त जमानत मिली है। सत्र न्यायालय ने जमानत देते समय शिलांग की ईस्ट खासी हिल्स थाना पुलिस की जांच प्रक्रिया पर प्रश्न उठाए थे। दरअसल, न्यायालय ने पाया गया कि सोनम की गिरफ्तारी के अभिलेख में हत्या की वास्तविक धारा के बजाय असंगत धारा लगा दी गई। इसके साथ ही सोनम को गिरफ्तारी के समय आरोपी के रूप में उसके अपराध के बारे में भी नहीं बताया गया। इसे सत्र न्यायालय ने कानूनी प्रक्रिया की गंभीर खामी और संविधान में आरोपी को प्राप्त मौलिक अधिकार का उल्लंघन माना। यह भी पाया कि एसआईटी 10 माह में भी मामले की जांच पूरी नहीं कर सकी है। सारे गवाहों के बयान भी दर्ज नहीं किए गए हैं।

ग्वालियर में सरकारी अस्पताल का कमाल:जटिल ऑपरेशन कर महिला की बच्चेदानी बचाई, डॉक्टरों ने बड़ी फाइब्रॉइड गांठ हटाकर दी नई जिंदगी

ग्वालियर में सरकारी अस्पताल का कमाल:जटिल ऑपरेशन कर महिला की बच्चेदानी बचाई, डॉक्टरों ने बड़ी फाइब्रॉइड गांठ हटाकर दी नई जिंदगी

ग्वालियर में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं ने एक बार फिर भरोसा मजबूत किया है। कलेक्टर रुचिका सिंह चौहान के मार्गदर्शन में जिले के चिकित्सक लगातार बेहतर कार्य कर रहे हैं। इसी क्रम में सिविल अस्पताल हजीरा के डॉक्टरों ने शुक्रवार को एक जटिल सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम देकर 28 वर्षीय महिला की बच्चेदानी सुरक्षित बचा ली। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. सचिन श्रीवास्तव के अनुसार, इटावा निवासी ज्योति सिंह लंबे समय से बच्चेदानी में बड़ी गांठ (फाइब्रॉइड) की समस्या से जूझ रही थीं। अत्यधिक रक्तस्राव और असहनीय पेट दर्द के कारण उनका जीवन प्रभावित हो रहा था। कई निजी अस्पतालों में परामर्श के दौरान उन्हें बच्चेदानी निकालने की सलाह दी गई, लेकिन महंगे इलाज के कारण वे परेशान थीं। आखिरकार उन्होंने हजीरा सिविल अस्पताल में संपर्क किया, जहां प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. प्रशांत नायक के मार्गदर्शन में डॉ. राहुल श्रीवास्तव (जनरल सर्जन) और उनकी टीम ने विस्तृत जांच कर ऑपरेशन की योजना बनाई। गुरुवार को हुई सर्जरी में डॉक्टरों ने सफलतापूर्वक बड़ी गांठ निकाल दी और बच्चेदानी को सुरक्षित रखा। इस जटिल ऑपरेशन को सफल बनाने में डॉ. अनुपम कुलश्रेष्ठ की भी अहम भूमिका रही। पूरी प्रक्रिया विशेषज्ञ निगरानी में सावधानीपूर्वक पूरी की गई। मरीज और उनके परिजनों ने अस्पताल के डॉक्टरों और स्टाफ का आभार जताते हुए कहा कि सरकारी अस्पताल में इतनी बेहतर सुविधा और समर्पित सेवाएं मिलना सराहनीय है। अस्पताल प्रबंधन ने आमजन से अपील की है कि यहां आधुनिक सुविधाओं और विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम द्वारा जटिल ऑपरेशन एवं उपचार उपलब्ध हैं, जिनका लाभ उठाया जा सकता है।

भोपाल में टाॅवर पर चढ़ा युवक,रात में कांग्रेस का धरना:सुबह मानस भवन के पीछे से हटेंगी 27 झुग्गी; 8 SDM-तहसीलदार समेत 95 की ड्यूटी लगाई

भोपाल में टाॅवर पर चढ़ा युवक,रात में कांग्रेस का धरना:सुबह मानस भवन के पीछे से हटेंगी 27 झुग्गी; 8 SDM-तहसीलदार समेत 95 की ड्यूटी लगाई

भोपाल में पॉलिटेक्निक चौराहा स्थित मानस भवन की बस्ती हटाने के विरोध में एक युवक पॉलिटेक्निक चौराहे पर टावर पर चढ़ गया। वहीं, झुग्गियों को हटाने के विरोध में कांग्रेस मैदान में उतर गई है। रात में ही लोगों के साथ पूर्व मंत्री पीसी शर्मा, नगर निगम ने नेता प्रतिपक्ष शाबिस्ता जकी समेत कई कांग्रेसी धरने पर बैठे हैं। जकी ने बताया कि झुग्गियां हटाए जाने को लेकर हम प्रदर्शन कर रहे हैं। दरअसल, यहां बसे 27 झुग्गी परिवारों को शनिवार सुबह हटाया जा सकता है। इसके लिए एडीएम सुमित कुमार पांडेय ने 4-4 एसडीएम, तहसीलदार समेत कुल 95 अधिकारी-कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई है। एक बार कार्रवाई कैंसिल हो चुकी है। कांग्रेस के विरोध के चलते यहां भारी-भरकम पुलिस अमला भी तैनात होगा। करीब चार महीने भी इन झुग्गियों को हटाने की कवायद हुई थी, लेकिन कांग्रेस हाईकोर्ट से स्टे ले आई थी। इसके बाद यहां जश्न मना था। इनकी ड्यूटी लगी बैरागढ़ एसडीएम रविशंकर राय, एमपी नगर एसडीएम एलके खरे, शहर वृत्त एसडीएम दीपक पांडे और टीटी नगर एसडीएम अर्चना शर्मा की ड्यूटी लगाई गई है। इसके अलावा तहसीलदार यशवर्धन सिंह, करुणा दंडोतिया, सौरभ वर्मा, अनुराग त्रिपाठी समेत 9 नायब तहसीलदार, 10 राजस्व निरीक्षक और 68 पटवारियों को भी तैनात किया गया है। जीतू पटवारी भी जा चुके बस्ती में बता दें कि पूर्व में जिला प्रशासन का परिवारों को मालीखेड़ी में शिफ्ट करने का प्लान था। 25 दिसंबर 2025 को इन्हें एसडीएम ने बेदखली के आदेश जारी किए थे। इस मुद्दे पर कांग्रेस भी मैदान में उतर गई थी। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी बस्ती में पहुंचे और उन्हें कार्रवाई का विरोध जताया था। यहां होना है कार्रवाई यहां पर खसरा नंबर-1413/1 रकबा 31.5130 हेक्टेयर नोईयत वन अंशभाग 5613 वर्ग फीट के अतिक्रमण को हटाने की कार्रवाई होना है। यह इस साल की बड़ी कार्रवाई होगी। पूर्व सीएम, प्रदेश अध्यक्ष तक उतर चुके मैदान में मानस भवन के पीछे झुग्गी में रहने वाले परिवारों की शिफ्टिंग को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, प्रदेश अध्यक्ष पटवारी, पूर्व मंत्री पीसी शर्मा समेत कांग्रेस सवाल खड़े कर चुकी हैं। कांग्रेस ने कार्रवाई का विरोध जताया था। प्रदेश अध्यक्ष पटवारी ने एडीएम को खरी-खोटी सुनाई थी। तीन जगहों पर शिफ्टिंग का अनुमान इन परिवारों को भौंरी, कलखेड़ा, और मालीखेड़ी में बने आवासों में शिफ्ट किया जाएगा। यहां पर लोगों को निशुल्क, यानी बिना राशि लिए, ये आवास उपलब्ध कराए जाएंगे। आवास की राशि 2 लाख प्रति परिवार मानस भवन प्रबंधन उठाएगा। राशि पूर्व में ही जमा की जा चुकी है। 70 साल पुरानी है ये बस्ती यह बस्ती लगभग 70 साल पुरानी है। यहां 27 से अधिक आदिवासी और कुछ गैर-आदिवासी परिवार रहते हैं। शासन ने 25 अगस्त-25 को नोटिस जारी किया और कहा गया कि सात दिन में जगह खाली करें। यहां 27 परिवारों के 200 से ज्यादा लोग रहते हैं। दीवाली के दौरान शिफ्टिंग का विरोध भी हुआ था। कार्याध्यक्ष शर्मा ने कहा-हमने राशि भी जमा करवा दी पूर्व में जब कार्रवाई स्थगित हुई थी, तब मानस भवन के कार्याध्यक्ष रघुनंदन शर्मा ने कहा भास्कर से चर्चा में कहा था कि 27 परिवार में से आधे भी आदिवासी नहीं है। भार्गव, साहू, दांगी जैसे गोत्र वाले आदिवासी कैसे हो गए? हमने तो बस्ती वालों की मदद और उन्हें मकान का मालिकाना हक दिलाने के लिए प्रशासन को 54 लाख रुपए जमा करा दिए। हमारी जमीन पर अनाधिकृत कब्जा है। वो हमें दी जाए। झुग्गियां हटे या नहीं, इसे लेकर हमें कोई लेना-देना नहीं है। जिस बिल्डिंग में मानस भवन, उसका लोकार्पण दिग्विजय ने किया तुलसी मानस प्रतिष्ठान का लोकार्पण 30 मार्च 2003 को हुआ था। महामंडलेश्वर स्वामी सत्यमित्रानंद गिरी, राज्यपाल डॉ. भाई महावीर मुख्य अतिथि थे, जबकि अध्यक्षता पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने की थी। विशिष्ठ अतिथि के रूप में विधानसभा अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद शुक्ल, तत्कालीन संस्कृति मंत्री अजय सिंह थे। अध्यक्ष शर्मा ने कहा कि मानस भवन संस्था गरीबों के हितों में काम करती है।

Bad food combinations: गलती से भी तरबूज के साथ ना खाएं ये 4 चीजें, पेट में मच जाएगी खलबली, दिमाग पर भी होगा सीधा हमला

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Bad food combinations with watermelon: एक-दो दिन पहले मुंबई से एक ऐसी हैरान कर देने वाली खबर सामने आई थी, जिसमें एक ही परिवार के चार सदस्यों की तरबूज खाने के बाद मौत हो गई. खबरों के अनुसार, पहले परिवार ने बिरयानी खाई और फिर तरबूज, जिसके बाद उनकी हालत बिगड़ गई और मृत्यु हो गई. इस खबर से हर कोई सन्न है. जहां कुछ दिनों पहले तक लोग बड़े चाव से हर दिन गर्मियों के इस फल को खाते थे, अब उसे खाने में डर रहे हैं. पानी से भरपूर तरबूज वैसे तो सेहत को कई लाभ देता है. खासकर, गर्मियों में ये शरीर को हाइड्रेटेड रखता है. पाचन सही रखता है. पेट साफ करता है. लेकिन, कुछ भी खाने का सही लाभ तभी मिलता है, जब उसे सही मात्रा, सही समय और सही कॉम्बिनेशन के साथ खाया जाए. तरबूज भी आप खाएं, लेकिन उसे खाने का सही समय, तरीका और सही-गलत फूड कॉम्बिनेशन को ध्यान में रखकर ही खाएं. तरबूज खाने का सही समय क्या है? खासकर गर्मियों के मौसम में खानपान पर और भी अधिक ध्यान देने की जरूरत होती है, क्योंकि अधिक तापमान से भोजन जल्दी खराब हो जाता है. कुछ लोग तरबूज का आधा खाते हैं और बाकी का आधा हिस्सा फ्रिज में रख देते हैं. यह दो दिनों तक ऐसे ही पड़ा रहता है. याद रखें, इस फल में नमी होने के कारण बैक्टीरिया जल्दी पनप सकते हैं. ऐसे में कटे हुए तरबूज को देर तक बाहर भी न रखें, वरना इसमें साल्मोनेला या ई. कोलाई जैसे बैक्टीरिया पनप सकते हैं. तरबूज को शाम या रात में खाने से परहेज करें. कभी भी हेवी भोजन करने के तुरंत बाद इसे ना खाएं. कोशिश करें सुबह या दिन में तरबूज खाएं. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. तरबूज को किन चीजों के साथ नहीं खाना चाहिए? – तरबूज का सेवन कभी भी हाई प्रोटीन से भरपूर फूड्स के साथ नहीं करना चाहिए. इससे कुछ लोगों में पाचन संबंधित समस्याएं जैसे ब्लोटिंग, अपच, पेट फूलने की शिकायत शुरू हो जाती है. तरबूज आसानी से पचने वाला फल है, प्रोटीन को पचने और टूटने में समय लगता है. ऐसे में आप चिकन, मछली, अंडा, पनीर आदि के साथ या इन्हें खाते ही तुरंत बाद तरबूज न खाएं. -काफी लोग तरबूज खाने के तुरंत बाद ही पानी भरपेट पी लेते हैं. यह सही आदत नहीं है. पानी पिएंगे तो पेट फूल जाएगा. एक तो तरबूज खुद ही पानी से भरपूर फल होता है, ऐसे में आप ऊपर से और पानी पी लेंगे तो पेट फूला हुआ ही महसूस होगा. इससे पेट के पीएच लेवल पर भी नेगेटिव असर पड़ता है. -आप दही, दूध से बने अन्य पदार्थों के साथ भी तरबूज का सेवन करने से बचें. इस फल में अधिक पानी होने के कारण यह पेट में मौजूद एसिड को पतला कर देता है. इससे दूध से बने खाद्य पदार्थों को पचने में समस्या होती है. इन डेयरी प्रोडक्ट्स को पचने के लिए पर्याप्त एसिड की जरूरत होती है. इससे आपको पेट संबंधित कई तरह की समस्याएं हो सकती हैं. -अक्सर एक्सपर्ट भी बोलते हैं कि तरबूज को खट्टे फलों जैसे संतरा, मौसमी, नींबू आदि के साथ खाना अनहेल्दी हो सकता है. इससे आपको अपच की प्रॉब्लम हो सकती है. जिनकी पाचन शक्ति पहले से ही कमजोर है, वे तरबूज खाते समय इन फूड्स का सेवन बिल्कुल भी न करें.

केरल के डिजिटल पोल में यूडीएफ की जीत, केसी वेणुगोपाल को सीएम बनाने पर कांग्रेस के अंदर उठ रहे सवाल

केरल के डिजिटल पोल में यूडीएफ की जीत, केसी वेणुगोपाल को सीएम बनाने पर कांग्रेस के अंदर उठ रहे सवाल

केरल में विधानसभा चुनाव खत्म होने के बाद अब 4 मई को आने वाले विपक्षियों पर टिकी हुई है। केरल में अधिकांश बहुमत पोल में कांग्रेस पार्टी यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) की जीत नजर आ रही है। इसके साथ ही कांग्रेस के अंदर केरल के सीएम को लेकर हलचल भी तेज हो गई है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता तारिक बबीता ने कहा कि अगर केसी वेणुगोपाल केरल के मुख्यमंत्री बने तो विधानसभा चुनाव में यूनाइटेड डेमोक्रेटिक मोर्चा (यू पब्लिक) की जीत होने पर उन्हें जरूरी प्रक्रिया से जिला बनाना होगा। केरल में सीएम को लेकर क्या बोले कांग्रेस नेता केरल के पूर्व प्रभारी और बिहार के रिपब्लिकन से मिनियन तारिक के बयान से यह बात स्पष्ट हो गई है कि यू एफसी ने केरल में जीत हासिल की है और डिजिटल पोल से यह स्पष्ट है। उन्होंने शुक्रवार (1 मई 2026) को कहा, ‘केरल में कांग्रेस की जीत में कोई संदेह नहीं है।’ उन्होंने कांग्रेस के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के बारे में पूछे जाने पर कहा कि पार्टी की सर्वोच्च कमान ही सत्य निष्ठा के लिए उपयुक्त व्यक्ति का चयन है। तारिक अख्तर ने प्रक्रिया का विवरण देते हुए कहा कि आला कमान में एक नियुक्त पर्यवेक्षक, जो प्रमुख दल की बैठक बुलाएगा और अगर चर्चा के बाद मुख्यमंत्री पद के दावेदार पर सहमति बनती है तो इसकी सूचना अखिल भारतीय कांग्रेस समिति (मंचएलसी) को दी जाएगी। उन्होंने कहा, ‘अला आदेश अंतिम निर्णय.’ इस पद पर वेणुगोपाल के मुख्यमंत्री बनने की घोषणा करते हुए कहा गया है कि अगर कांग्रेस के नेता (संगठन) की मान्यता है, तो उन्हें आवश्यक प्रक्रिया का पालन करना होगा। उन्होंने कहा, ‘अगर विधायक दल, आला कमान को अंतिम निर्णय लेने का अधिकार देता है, तो इस पर विचार किया जाएगा।’ वोटों की गिनती की प्रक्रिया पूरी: चुनाव आयोग चुनाव आयोग ने शुक्रवार को कहा कि केरल में नौ अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनाव में पढ़े गए आरोपों की गणना से संबंधित सभी गड़बड़ियां पूरी कर ली गई हैं। केरल के मुख्य इलेक्ट्रॉनिक्स अधिकारी (सीईओ) रत्न यू.एस. केलकर ने एक बयान में कहा कि तृतीय चार मई को सुबह आठ बजे 43 स्थानों पर स्थित 140 नियुक्तियों पर काम शुरू होगा और इस प्रक्रिया में कुल 15,465 कर्मचारी शामिल होंगे। उन्होंने बताया कि इन नामांकन में 140 चुनाव अधिकारी (आरओ), 1,340 सहायक चुनाव अधिकारी, 4,208 पर्यवेक्षक, 4,208 प्राथमिक सुपर इंजीनियर और 5,563 सहायक चुनाव अधिकारी शामिल हैं। सीईओ ने बताया कि वोटों की गिनती पोस्टकार्ड से शुरू होगी और एक चरण में ज्यादातर 14 बूथों की गिनती की जाएगी। उन्होंने कहा कि जिन कक्षों में मतदान सामग्री साझा की गई है, उन्हें शामिल किया गया है या उनके विशेष सचिव, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स आयोग (ईसीआई) द्वारा नियुक्त पर्यवेक्षक और संबंधित अधिकारियों की उपस्थिति में खुलासा किया जाएगा और इसकी वीडियो रिकॉर्डिंग की जाएगी। ये भी पढ़ें: 7 साल के लड़के ने बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड, भारत से 29 KM के समुद्र तट से 10 घंटे में पार किया पार Input By : pl भाषा (टैग्सटूट्रांसलेट)केसी वेणुगोपाल(टी)तारिक अनवर(टी)यूडीएफ(टी)केरल चुनाव 2026(टी)केसी वेणुगोपाल(टी)तारिक बबासी(टी)यू फेसबुक (टी)केरल चुनाव 2026

सत्येन्द्र भूषण सिंह लघु उद्योग निगम के चेयरमेन बने:गुड्‌डी आदिवासी सहरिया विकास प्राधिकरण की अध्यक्ष नियुक्त

सत्येन्द्र भूषण सिंह लघु उद्योग निगम के चेयरमेन बने:गुड्‌डी आदिवासी सहरिया विकास प्राधिकरण की अध्यक्ष नियुक्त

एमपी में राजनीतिक नियुक्तियों का सिलसिला लगातार जारी है। बीजेपी के पूर्व कार्यालय मंत्री सत्येन्द्र भूषण सिंह को लघु उद्योग निगम का अध्यक्ष बनाया गया है। सत्येन्द्र भूषण को दो साल के लिए अध्यक्ष बनाया गया है। श्योपुर की पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष गुड्‌डी आदिवासी को सहरिया विकास प्राधिकरण का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। गुड्‌डी की नियुक्ति तीन साल के लिए की गई है। निगम-मंडलों की लिस्ट में गुड्‌डी पहली महिला अध्यक्ष अब तक दो दर्जन अध्यक्ष, उपाध्यक्षों के नामों की घोषणा हुई, लेकिन इनमें एक भी महिला को जिम्मेदारी नहीं दी गई थी। निगम मंडलों की लिस्ट में गुड्‌डी पहली महिला नेत्री हैं जिन्हें मंत्री का दर्जा दिया गया है। अब तक इन नेताओं को मिला मंत्री का दर्जा

ई-रिक्शा की टक्कर से 12 साल के बच्चे की मौत:इंदौर में अस्पताल से भागी महिला ड्राइवर; गार्डन में जा रहा था खेलने

ई-रिक्शा की टक्कर से 12 साल के बच्चे की मौत:इंदौर में अस्पताल से भागी महिला ड्राइवर; गार्डन में जा रहा था खेलने

इंदौर के हीरानगर में रहने वाले 12 साल के एक बच्चे की हादसे में मौत हो गई। वह गार्डन में खेलने जा रहा था। इस दौरान सड़क पार करते समय उसे एक ई-रिक्शा ने टक्कर मार दी। आसपास के लोगों ने बच्चे को उठाया और ई-रिक्शा चला रही महिला के साथ उसे एमवाय अस्पताल पहुंचाया। यहां बच्चे की मौत की सूचना मिलते ही महिला वहां से भाग गई। हीरानगर पुलिस के मुताबिक मृतक 12 वर्षीय करण पिता मुकेश डामोर निवासी रघुनंदन बाग है। शुक्रवार दोपहर करीब 4 बजे सड़क पार करते समय उसे ई-रिक्शा (MP09-AT5741) ने टक्कर मार दी। हादसे में करण गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे आसपास के लोग अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। करण के परिजनों ने बताया कि वह घर के सामने स्थित ग्लोवर गार्डन में दूसरे बच्चों के साथ खेलने जा रहा था। इसी दौरान वह हादसे का शिकार हो गया। करण का परिवार मूल रूप से झाबुआ का रहने वाला है। उसके पिता इंदौर में मजदूरी करते हैं। परिवार में उसका एक छोटा भाई भी है। पुलिस अब ई-रिक्शा चला रही महिला की तलाश कर रही है। इधर, सेज यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट ने किया सुसाइड वहीं, एक अन्य मामले में तेजाजी नगर इलाके में सेज यूनिवर्सिटी के हॉस्टल में रहने वाले इंजीनियरिंग के एक छात्र ने शुक्रवार को सुसाइड कर लिया। वह तबीयत खराब होने के कारण कॉलेज नहीं गया था। शाम को उसका दोस्त कमरे पर उसे देखने पहुंचा तो छात्र फंदे पर लटका मिला। मौके से किसी तरह का सुसाइड नोट नहीं मिला है। पुलिस ने शव को एमवाय अस्पताल भिजवाया है। तेजाजी नगर पुलिस के मुताबिक मृतक उत्कर्ष (21) ने सेज यूनिवर्सिटी के हॉस्टल में फांसी लगाई। उसका दोस्त हिमांशु उसे एमवाय अस्पताल लेकर पहुंचा था। हिमांशु ने पुलिस को बताया कि उत्कर्ष मूल रूप से लखनऊ का रहने वाला था और पिछले तीन साल से यहां इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा था। पुलिस के मुताबिक उत्कर्ष शुक्रवार को कमरे से बाहर नहीं निकला था। उसने तबीयत खराब होने की बात कही थी। शुरुआती जांच में उसके डिप्रेशन में होने की बात भी सामने आई है। पुलिस ने बताया कि परिवार से संपर्क किया जा रहा है और मामले की जांच जारी है।