E20 के बाद E85 फ्लेक्स-फ्यूल की तैयारी में भारत:माइलेज 30% तक कम हो सकता है; कच्चे तेल पर निर्भरता कम करने का लक्ष्य

ईरान-अमेरिका संघर्ष के बीच कच्चे तेल के सप्लाई संकट को देखते हुए भारत सरकार अब E85 फ्लेक्स-फ्यूल की ओर कदम बढ़ा रही है। सरकार जल्द ही E85 फ्यूल की मंजूरी के लिए ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी कर सकती है, जिसके लिए मार्केट में आम सहमति बन चुकी है। खाड़ी देशों पर निर्भरता कम करना लक्ष्य भारत अपनी जरूरत का 90% कच्चा तेल आयात करता है। इसमें से 50% से ज्यादा हिस्सा पश्चिम एशियाई देशों से आता है जो हॉर्मुज स्ट्रेट से गुजरकर पहुंचता है। ईरान-अमेरिका तनाव की वजह से ये रूट बंद है, जिससे कच्चे तेल के दाम 100 डॉलर के पार पहुंच गए हैं। कच्चे तेल का महंगा होना न केवल देश की अर्थव्यवस्था पर बोझ है, बल्कि आत्मनिर्भरता के लिए भी चुनौती है। इसी वजह से सरकार अब इथेनॉल वाले ईंधन पर फोकस कर रही है। अभी 20% एथेनॉल वाले पेट्रोल की बिक्री हो रही E85 फ्यूल में 85% एथेनॉल और 15% पेट्रोल होता है। अभी देशभर में E20 फ्यूल की बिक्री अनिवार्य है। इथेनॉल को गन्ने के रस, मक्का और सड़े हुए अनाज जैसे कृषि उत्पादों से बनाया जाता है। ये फ्यूल पर्यावरण में कार्बन उत्सर्जन को कम करने में भी मदद करता है। ऑटो इंडस्ट्री तैयार, नोटिफिकेशन का इंतजार ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री ने फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक को लेकर अपनी तैयारी पहले ही दिखा दी है। टोयोटा किर्लोस्कर मोटर के कंट्री हेड विक्रम गुलाटी के मुताबिक, फ्लेक्स-फ्यूल का सबसे बड़ा फायदा यह है कि एक देश के तौर पर हम आयात पर निर्भर नहीं रहेंगे। सरकार अब E85 को रेगुलेटेड फ्यूल के रूप में अनिवार्य करने की जगह फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को बढ़ावा देने की नीति पर काम कर रही है। इन 4 मोर्चों पर चुनौतियों से निपटना होगा SP ग्लोबल के डायरेक्टर पुनीत गुप्ता का कहना है कि E85 को अपनाने के लिए बड़े इकोसिस्टम की जरूरत होगी। इसमें 4 मुख्य चुनौतियां हैं: माइलेज और कीमत बन सकती है रुकावट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, तकनीक से ज्यादा बड़ी चुनौती फ्यूल की कीमत और माइलेज है। इथेनॉल की एनर्जी डेंसिटी कम होने के कारण फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों का माइलेज 20 से 30% तक गिर सकता है। इस कमी की भरपाई के लिए फ्यूल की कीमत कम रखनी होगी । टोयोटा, मारुति इथेनॉल वाले वाहन पेश कर चुके टोयोटा और मारुति सुजुकी जैसी कंपनियां पहले ही हाई इथेनॉल ब्लेंड से चलने वाले वाहन पेश कर चुकी हैं। टीवीएस मोटर के चेयरमैन सुदर्शन वेणु ने भी संकेत दिए हैं कि कंपनी अपाचे सहित अपने कई सेगमेंट में इथेनॉल से चलने वाले वाहन लाने की योजना बना रही है। टैक्स बेनेफिट्स पर जोर देने की जरूरत विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार को सब्सिडी देने के बजाय पॉलिसी इनेबलर के रूप में काम करना चाहिए। इसमें FFV (फ्लेक्स फ्यूल व्हीकल) पर कम टैक्स, पेट्रोल के मुकाबले इथेनॉल के दामों में बड़ा अंतर और इथेनॉल को कार्बन-न्यूट्रल मानकर क्रेडिट देना शामिल है। नॉलेज पार्ट: क्या होता है फ्लेक्स-फ्यूल इंजन? यह एक ऐसा इंजन है जो एक से ज्यादा तरह के ईंधन (जैसे शुद्ध पेट्रोल या पेट्रोल-इथेनॉल का कोई भी मिश्रण) पर चल सकता है। इसमें सेंसर लगे होते हैं जो ईंधन के मिश्रण को पहचानकर इंजन की सेटिंग्स को अपने आप एडजस्ट कर लेते हैं।
भारत-न्यूजीलैंड में FTA से सेब बागवान चिंतित:राठौर बोले-इम्पोर्ट ड्यूटी 25% की; हिमाचल, कश्मीर-उत्तराखंड के किसानों पर पड़ेगी मार

भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच बीते कल दिल्ली में हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) ने हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड में सेब बागवानों की चिंताएं बढ़ा दी है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता एवं ठियोग के विधायक कुलदीप राठौर ने कहा कि इस एग्रीमेंट के बाद न्यूजीलैंड के सेब पर इम्पोर्ट ड्यूटी 50 फीसदी से घटाकर 25 प्रतिशत रह जाएगी। राठौर ने कहा- बेशक पहले साल में यह कोटा 32,500 मीट्रिक टन (लगभग 20 kg के 16,25,000 बॉक्स) से शुरू होता है, लेकिन छठे साल तक यह बढ़कर 45,000 मीट्रिक टन (लगभग 22,50,000 बॉक्स) हो जाएगा। यह सेब अप्रैल से अगस्त दौरान भारत के बाजार में आएगा। इसकी मार पहले निचले क्षेत्रों के सेब बागवानों को पड़ेगी। सीजन की शुरुआत से पहले ही विदेशी सेब के आने से बाजार गिर जाएगा और इसका असर पूरे सीजन पर रहेगा। राठौर ने कहा- न्यूज़ीलैंड की सेब इंडस्ट्री में प्रोडक्टिविटी बहुत ज्यादा है, मॉडर्न बागों में प्रति हेक्टेयर 50-70 टन (लगभग 2,500 से 3,500 बॉक्स प्रति हेक्टेयर) पैदावार होती है, जबकि हिमाचल प्रदेश में एवरेज प्रोडक्टिविटी मात्र 7-8 टन प्रति हेक्टेयर (लगभग 350 से 400 बॉक्स प्रति हेक्टेयर) है। इस वजह से हिमाचल में इनपुट कॉस्ट न्यूजीलैंड समेत दूसरे देशों से भी कहीं ज्यादा है। ऐसे में विदेशी सेब के भारतीय बाजार में आने से राज्य के बागवानों को उचित दाम नहीं मिलेगे। 2.5 लाख परिवार सेब पर डिपेंडेंट: राठौर कुलदीप राठौर ने कहा- भारत का सेब सेक्टर, जो हिमालयी बेल्ट में फैला हुआ है, बड़ी ग्रामीण इकॉनमी को सपोर्ट करता है। जम्मू और कश्मीर लगभग 76-77% प्रोडक्शन के साथ सबसे आगे है, उसके बाद हिमाचल प्रदेश लगभग 21-22% के साथ दूसरे नंबर पर है। अकेले हिमाचल में 1 लाख 15 हजार हेक्टेयर से ज़्यादा ज़मीन पर सेब की खेती होती है और लगभग 2.5 लाख परिवार इस पर डिपेंडेंट हैं। केंद्र की किसान विरोधी नीतियों से किसान परेशान सेब राज्य की हॉर्टिकल्चर इनकम का लगभग 80% हिस्सा देते हैं। मगर केंद्र की किसान विरोधी नीतियों ने सेब उत्पादकों को चिंताएं बढ़ा दी है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री बनने से पहले नरेंद्र मोदी ने सेब पर इम्पोर्ट ड्यूटी 150 फीसदी करने का भरोसा हिमाचल के बागवानों को दिया था। पीएम ने अब तक इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ाने का वादा पूरा तो नहीं किया, लेकिन इसे कम जरूर किया है। CA स्टोर में रखे सेब पर भी मार पड़ेगी राठौर ने कहा कि न्यूजीलैंड के सेब की ज्यादा मार CA (वातानुकुलित) स्टोरेज से निकलने वाले सेब पर पड़ने वाली है। उन्होंने बताया कि यह एग्रीमेंट स्वदेसी सेब की इंडस्ट्री को तबाह करेगा। उन्होंने केंद्र सरकार से इम्पोर्ट कोटा और कीमतों की कड़ी निगरानी करने, कोल्ड स्टोरेज, ग्रेडिंग और ट्रांसपोर्ट सिस्टम को बेहतर बनाने, किसानों को मॉडर्न टेक्नोलॉजी मुहैया कराने और आगे कोई भी बदलाव करने से पहले किसानों से सलाह लेने की मांग की है।
पन्ना टाइगर रिजर्व: बाघ की मौत पर कार्रवाई:बीटगार्ड निलंबित, रेंजर-वनपाल को आरोप पत्र; एसटीएफ कर रही जांच

मध्य प्रदेश के विश्व प्रसिद्ध पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघ के कंकाल मिलने के मामले में प्रबंधन ने अनुशासनात्मक कार्रवाई की है। मैदानी अमले की घोर लापरवाही मानते हुए एक बीटगार्ड को निलंबित कर दिया गया है, जबकि वरिष्ठ अधिकारियों को आरोप पत्र जारी किए गए हैं। पन्ना टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर बीके पटेल ने बताया कि गंगऊ अभ्यारण्य के बीट कटरिया में बाघ का कंकाल मिलने के बाद प्राथमिक जांच के आधार पर बीटगार्ड रामसफल बैगा को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। इसके अतिरिक्त, निगरानी में चूक को लेकर कार्यवाहक वनपाल कमल किशोर मोची और रेंजर (परिक्षेत्राधिकारी) सागर शुक्ला को आरोप पत्र जारी कर उनसे जवाब मांगा गया है। यह घटना बीते मंगलवार, 21 अप्रैल 2026 को सामने आई थी, जब मझगवां-हिनौता मुख्य मार्ग के पास वन कक्ष क्रमांक-278 में एक नर बाघ का पूरी तरह सड़ा हुआ शव मिला था, जो कंकाल में बदल चुका था। चौंकाने वाली बात यह है कि यह शव मुख्य मार्ग से मात्र 150 फीट की दूरी पर था। अनुमान है कि बाघ की मौत लगभग 15 दिन पहले हो चुकी थी। इतने दिनों तक शव का जंगल में पड़े रहना और गश्ती दल को इसकी जानकारी न मिलना, पीटीआर की ‘एम-स्ट्राइप्स’ निगरानी प्रणाली और मैदानी अमले की सक्रियता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। बाघ की मौत प्राकृतिक कारणों से हुई है या इसके पीछे शिकारियों का हाथ है, इसकी गहन जांच जारी है। जबलपुर से आई विशेष कार्यबल (एसटीएफ) की टीम ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण कर साक्ष्य जुटाए हैं। डिप्टी डायरेक्टर ने बताया कि बाघ के अवशेषों के नमूने फॉरेंसिक लैब भेजे जा चुके हैं। पोस्टमार्टम और लैब रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सही कारणों का पता चलेगा, जिसके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
अब एंट्री लेवल जॉब्स सफलता की गारंटी नहीं:नौकरी के भरोसे नहीं सीधे बिजनेस से करिअर लॉन्च कर रहे युवा

अमेरिका की हवाई यूनिवर्सिटी से 2024 में ग्रेजुएट हुई एशले टेरेल ने सोचा था कि मार्केटिंग में अच्छी नौकरी मिलेगी। डिग्री, इंटर्नशिप और अनुभव के बावजूद महीनों कोशिश के बाद उन्हें सिर्फ एक ऑफर स्टोर में काम करने का मिला। वह हर दिन नौकरी ढूंढती रहीं, यहां तक कि व्यस्त समय में भी आवेदन करती थीं। लेकिन उन्हें पसंदीदा नौकरी नहीं मिली। यह सिर्फ उनकी कहानी नहीं है। विशेषज्ञ मानते हैं कि एंट्री-लेवल नौकरियां तेजी से घट रही हैं। ऐसे में युवा विकल्प के तौर पर अब एआई टूल्स का उपयोग करके कंटेंट क्रिएशन, ऐप डेवलपमेंट और कंसल्टेंसी के जरिए अपना रास्ता खुद बना रहे हैं। अमेजन में काम करने वाली 25 वर्षीय मैडिसन, खाली समय में एआई की मदद से सोशल मीडिया एप बना रही हैं। उन्होंने बताया कि बिना एआई यह काम महीनों और बड़ी टीम के बिना संभव नहीं था, लेकिन अब एक महीने में प्रोटोटाइप तैयार हो गया। इसी तरह सदर्न कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी से पढ़े सुहित अग्रवाल को बड़ी कंपनियों से जवाब नहीं मिला, तो स्टार्टअप्स में काम शुरू किया और एआई टूल्स की मदद से बड़ी जिम्मेदारियां निभाईं। अब इनके लिए तकनीक सिर्फ चुनौती नहीं, बल्कि खुद कुछ नया करने का साधन भी बन रही है। 22 वर्षीय सेलेस्टे अमाडॉन ने इन्वेस्टमेंट बैंकिंग जेपी मॉर्गन की इंटर्नशिप छोड़ खुद का डेटिंग एप ‘नोन’ शुरू किया। शुरू में परिवार ने विरोध किया, लेकिन बाद में जब उन्हें निवेश मिला, तो वही समर्थक बन गया। एलिजाह खासाबो, जो पहले कपड़े फोल्ड करते थे, आज अपनी टीम संभाल रहे हैं। हालांकि इसमें स्थिर आमदनी बड़ी चुनौती है। हार्वर्ड बिजनेस स्कूल के प्रोफेसर जोसेफ फुलर के मुताबिक खुद का काम शुरू करना आसान नहीं है। ज्यादातर स्टार्टअप स्थिर आमदनी के अभाव में फेल होते हैं, फिर भी युवा इसमें करियर पर नियंत्रण देख रहे हैं। फुलर कहते हैं, एआई ने पारंपरिक नौकरियां घटाने के साथ नए काम के औजार भी दिए हैं। युवाओं के लिए बड़ा बदलाव यह है कि जॉब सुरक्षा कम हुई है, अपने दम पर कुछ बनाने का भरोसा भी बढ़ा है। नई पीढ़ी के लिए जॉब्स का पहला पड़ाव ही मुश्किल- एक्सपर्ट फेडरल रिजर्व बैंक ऑफ न्यूयॉर्क की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका में 22-27 साल के युवाओं में बेरोजगारी कोविड के बाद ऊंचे स्तर पर है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे एंट्री-लेवल जॉब्स प्रभावित हो रही हैं, क्योंकि इनमें दोहराव वाले काम अब एआई कर रहा है। अर्थशास्त्री डैनियल झाओ कहते हैं ‘पहली सीढ़ी पर पैर रखना ही मुश्किल हो गया है।’ कई युवाओं को डिग्री के बाद भी रिटेल व पार्ट-टाइम काम करना पड़ रहा है।
बीजेपी अब ममता बनर्जी को बंधक बनाकर जान से मारने की धमकी दे रही है, टीएमसी ने बीजेपी नेता का पोस्ट शेयर कर लगाया बड़ा आरोप

पश्चिम बंगाल का पैराग्राफ पैरा रोजमर्रा बढ़ रहा है। चुनाव में डराने-धमकाने को लेकर आईपीएस अजयपाल शर्मा ने हाल ही में आतंकवादियों के नेताओं को चेतावनी दी थी। इसके बाद से विनिर्माण और उद्योग-मुख्यालय हैं। बीजेपी नेता अजय आलोक की एक पोस्ट को लेकर पारंपरिक कांग्रेस ने जोरदार पोस्ट कर पलटवार किया है. टीएमसी की ओर से मंगलवार (28 अप्रैल) को एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा गया, “ब्लाकर की धमकियां और फिल्में के बाद बीजेपी ममता अब नारायण को जेल में बंद जान से मारने की धमकियां देने आई है।” आगे ने लिखा, “बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने अपने ट्विटर हैंडल पर पोस्ट किया है कि डरायेगा तो कहलाएगा दीदी, इसका मतलब है कि अगर आप हमें डराने की कोशिश करते हैं, तो हथियार बंद कर देंगे, दोस्त। तीन बार की कंपनी ने मुख्यमंत्री के लिए ये है बीजेपी का प्रस्ताव।” बलात्कार की धमकियों और घृणित, अपमानजनक व्यंग्यचित्रों के प्रसार के बाद, भाजपा अब श्रीमती के खिलाफ खुली मौत की धमकियाँ जारी करने पर उतर आई है। @MamataOfficial. बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता @आलोक_अजय उनके एक्स हैंडल पर पोस्ट किया गया: “डरेगा तो बोलेगा दीदी।” @MamataOfficial“, जिसका अर्थ है, “यदि आप प्रयास करें… pic.twitter.com/WsJ3e0jwyo – अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (@AITCofficial) 28 अप्रैल 2026 मोदी और अमित शाह को टैग कर क्या कहापोस्ट में आगे कहा गया कि ये है बीजेपी का बंगाल के लिए बदलाव का सपना. वे उत्तर प्रदेश और बिहार की सड़कों पर विकसित अपनी गॉल मारो और दो संस्कृति को बंगाल में स्थापित करना चाहते हैं। इसके बाद मोदी और गृह मंत्री को टैग कर लिखा गया कि इस खतरनाक खतरनाक तानाशाह को टॉप लेवल से मंजूरी मिल गई है खुद पीएम और अमित शाह के कार्यकर्ताओं से। तुम लोगों को हिन्दी समझ नहीं आती क्या? पीड़ित कार्ड खेलने की कोशिश मत करो, गोली मारो और भाग जाओ यह तुम्हारी संस्कृति है हमारी नहीं, अपने गुंडों से लोगों को डराने की कोशिश मत करो। पूर्व वह जगह है जहां बंगाल और भारत के लोगों के लिए सूरज उगता है और आप सभी विनाश के लिए तैयार हैं। https://t.co/MtLcQxijiD – डॉ. अजय आलोक (@alok_ajay) 28 अप्रैल 2026 पोस्ट में आगे कहा गया है कि अगर किसी दोस्त के बारे में वे इस तरह की बात करते हैं, तो यह डायलॉग रोंगटे बिकते हो जाते हैं कि ये भगवा गुंडे बंगाल की आम गुड़िया और बेटी पर क्या खतरा मंडराएगा। पोस्ट में कहा गया कि इन शब्दों में बंगाल भूलेगा नहीं। बंगाल माफ़ नहीं करता. इस अपमान का प्रत्युत्तर से दिया जाएगा। 4 मई को बंगाल अपनी आवाज बुलंद करेगा। ये भी पढ़ें बंगाल में चुनावी प्रचार थमा, बीजेपी ने किया धुआंधार प्रचार, 21 जिलों में पीएम मोदी ने जनता को साधे और गठबंधन को घेरा अजय आलोक का पलटवारकांग्रेस के इस पोस्ट को लेकर बीजेपी नेता अजय आलोक ने पलटवार करते हुए लिखा, “आप लोगों को हिंदी समझ में नहीं आती? पीड़ित होने का नाटक मत करो, लोग आपकी संस्कृति है, हमारी नहीं. अपने गुंडों से लोगों को डराने की कोशिश मत करो. बंगाल और भारत के लोगों के लिए सूरज पूरब से उगता है और आप सब गंदगी की ओर बढ़ रहे हैं.” ये भी पढ़ें टीएमसी के अनमोल यूसुफ़ पुतिन ने बीजेपी की लोकप्रियता में पढ़े कसीदे! ममता-महबूबा से नीतीश तक भी पीछे नहीं, पीछे की मजबूरी क्या?
‘मस्ती करते देखो अच्छा लगा…’, जापानी मोइत्रा ने शेयर किया आईपीएस अजय पाल शर्मा का बार गर्ल संग डांस वीडियो, मचा हंगामा

पश्चिम बंगाल में 29 अप्रैल को होने वाली वाली दूसरे चरण की वोट से पहले कैथोलिक विलाप हुआ है। यूपी के 24 परगना जिले के पुलिस अधिकारी अजय पाल शर्मा ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर यूपी के 24 परगना जिले के पुलिस अधिकारी अजय पाल शर्मा को सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी किया है। वीडियो में कथित तौर पर एक्टर अजयपाल डांस शर्मार्स के बीच नाचते नजर आ रहे हैं। चाइनीज मोइत्रा ने सोशल प्लेटफॉर्म मीडिया एक्स पर दो वीडियो शेयर किए हैं। पहले एक खास महिला के सामने स्टेक ताली बजा रही थी, जबकि महिला डांस कर रही थी। दूसरे वीडियो में एक आदमी महिला के पास ‘चोली के पीछे क्या है’ गाने पर थिरकता दिख रही है। यूजीन ने वीडियो पोस्ट कर लिखा, ‘फेयर एंड लवली बबुआ @DripsAjaypal. आपको फेंटा कॉप स्टाइल में मस्ती करते हुए देखना अच्छा लगा। ठंडा-ठंडा कूल-कूल रहिए. ‘बंगाल हमेशा से ही अद्भुत है।’ फेयर एंड लवली बबुआ @DripsAjaypal – आपको फैंटाकॉप शैली का आनंद लेते हुए देखकर अच्छा लगा। ठंडा ठंडा ठंडा ठंडा रहो. बंगाल हमेशा से ही तृणमूल है. pic.twitter.com/CYfJ1q3pzn – महुआ मोइत्रा (@MahuaMoitra) 28 अप्रैल 2026 इससे पहले भी एक पोस्ट के माध्यम से जापानी ने उत्पादों पर आधारित उत्पाद का सार तैयार किया था। उन्होंने लिखा, ‘मेरे फेयर एंड लवली बबुआ अजय पाल शर्मा अपराधी, हम तो वो लोग हैं जो आपके छोटे फैंटा और बड़े फैंटा का भी इलाज कर लेते हैं!! ‘हीरोगिरी लिटिल संभल के।’ मेरा फेयर एंड लवली बबुआ @DripsAjaypal – हम तो वो लोग हैं जो कैद से आपके छोटा फैंटा और बड़ा फैंटा का भी इलाज कर लेते हैं!! हीरोगिरी थोड़ा संभल के लीजिए। pic.twitter.com/eLOrg5bQOi – महुआ मोइत्रा (@MahuaMoitra) 27 अप्रैल 2026 बीजेपी-कांग्रेस में अजय पाल शर्मा बोले- ये नहीं, बीजेपी बोली- कुछ गलत नहीं” href=’https://www.abplive.com/states/up-uk/bjp-congress-clashed-over-ajay-pal-sharma-viral-video-from-bengal-elections-jahanगीर-3121303/amp’ target=”_self”>बीजेपी-कांग्रेस में अजय पाल शर्मा बोले- ये नहीं, बीजेपी बोली- कुछ गलत नहीं यूपी के सहयोगी अजय पाल शर्मा को चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले का पुलिस पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। ‘एनकाउंटर स्पेशलिस्ट’ को विशेष तौर पर जाना जाता है। हाल ही में उनका एक वीडियो सामने आया था, जिसमें वह देख रहे हैं कि ‘अरे उनके भी लोग अच्छे हैं, समझ लीजिए कि लें अगर बदमाशी की तो उनका अच्छे से इलाज किया जाएगा।’ अगर खबर आए कि किसी ने खुराफात करने की, किसी ने परेशान करने की कोशिश की है तो उसके दोस्त से खबर लीजिए। जहां गिर के घरवाले भी यहां हैं। इन्हें बताएं कायदे से, जो बार-बार खबरें आ रही हैं कि उनके लोग धमाका कर रहे हैं तो समझ लें अच्छे लें से खबरें। बाद में रोना-पछताना मत.’ कौन हैं यूपी के आईपीएस अजय पाल शर्मा? टीएमसी को घर में चुनौती दी चुनौती, बंगाल में चुनौती” href=’https://www.abplive.com/states/up-uk/up-ips-ajay-pal-shrma-profile-who-challenged-the-tmc-candidate-jahanगीर-video-viral-3121233′ target=”_self”>कौन हैं यूपी के आईपीएस अजय पाल शर्मा? टीएमसी को घर में चुनौती दी चुनौती, बंगाल में चुनौती
खुम्बु आइसफॉल पर रुका एवरेस्ट पर्वतारोहियों का मिशन:गाइड्स को एयरलिफ्ट कराने की तैयारी; ‘एवरेस्ट की सेहत’ सुधारने में जुटे आइसफॉल डॉक्टर

समुद्र तल से 17 हजार फीट की ऊंचाई, एवरेस्ट की कठिन डगर और चारों तरफ पसरा मौत सा सन्नाटा… यहां हवा की एक सरसराहट भी दिल की धड़कनें बढ़ा देती है, क्योंकि एक जरा सी चूक सीधे गहरी खाई या बर्फ की कब्र में ले जा सकती है। इसी बर्फीले नर्क के बीच खड़ा है एक शख्स, जिसे दुनिया ‘आइसफॉल डॉक्टर’ कहती है। दावा जांगबू शेर्पा के लिए माउंट एवरेस्ट सिर्फ पहाड़ नहीं, बल्कि ‘मरीज’ है, जिसकी सांसों की नब्ज वह हर दिन टटोलता है। पर इस हफ्ते, खुम्बु आइसफॉल के उस दो मील के खतरनाक हिस्से ने दावा और उनकी 11 सदस्यीय विशिष्ट टीम को भी खौफ में डाल दिया है। भारी बर्फबारी के कारण बहुत बड़ी नीलीस-सफेद बर्फ की दीवार (सेराक) रास्ते में खड़ी हो गई है। यह दीवार इतनी विशाल है कि इसे पार करना बेहद खतरनाक है। फिलहाल ग्राउंड जीरो पर कोशिशों में जुटे जागंबू बताते हैं,‘रास्ते हर साल बंद होते हैं, पर मैंने अपनी जिंदगी में बर्फ का ऐसा पहाड़ रास्ते के बीच कभी नहीं देखा। हमने ड्रोन उड़ाकर देखा है, इसे पार करना अभी नामुमकिन है।’ यह मामूली रुकावट नहीं है, बल्कि एक ऐसी मौत की दीवार है जिसने सैकड़ों पर्वतारोहियों के सपनों को बेस कैंप में ही कैद कर दिया है।’ जांगबू कहते हैं ‘बेस कैंप अब एक तंबू के शहर में तब्दील हो चुका है, जहां 400 से ज्यादा पर्वतारोही टकटकी लगाए उस दीवार के पिघलने का इंतजार कर रहे हैं। चढ़ाई का समय तेजी से खत्म हो रहा है। नेपाल सरकार के लिए यह बड़ा राजस्व का मामला है, इसलिए विचार किया जा रहा है कि अगर एक-दो दिन में दीवार नहीं पिघली, तो गाइड्स को एयरलिफ्ट कर ऊपर पहुंचाया जाए। पहाड़ पर तीन बार फतह हासिल कर चुके दावा जांगबू जानते हैं कि रास्ता खुलने के बाद भी चुनौती कम नहीं होगी। सैकड़ों लोगों का एक साथ उस संकरे रास्ते से गुजरना एक नई मुसीबत को दावत देगा। जांगबू की नजरें अभी भी उस सफेद दीवार पर टिकी हैं- उन्हें इंतजार है कि कब उनका ‘मरीज’ उन्हें आगे बढ़ने का रास्ता देगा। क्योंकि एवरेस्ट पर, आखिरी फैसला हमेशा पहाड़ का ही होता है। खतरा, इसी जगह पर 2014 में 16 गाइड्स की मौत हुई थी आइसफॉल डॉक्टर्स का काम दुनिया के सबसे खतरनाक पेशों में गिना जाता है। ये जांबाज उस वक्त पहाड़ पर चढ़ते हैं जब कोई और वहां जाने की सोच भी नहीं सकता। दरकते ग्लेशियरों के बीच रस्सियां बांधना और रसातल जैसी गहरी दरारों पर एल्युमीनियम की सीढ़ियां टिकाना बड़ी चुनौती रहती है। पर इस साल, खतरा पहले से कहीं ज्यादा है। अप्रैल 2014 की घटना इन शेरपाओं के जेहन में अब भी ताजा है, जब इसी जगह बर्फ की दीवार गिरने से 16 गाइड्स की मौत हो गई थी। वह एवरेस्ट के इतिहास का सबसे भीषण दिन था। स्थिति वैसी ही है और सुरक्षा से समझौता करना खुदकुशी के बराबर है।
खुम्बु आइसफॉल पर रुका एवरेस्ट पर्वतारोहियों का मिशन:गाइड्स को एयरलिफ्ट कराने की तैयारी; ‘एवरेस्ट की सेहत’ सुधारने में जुटे आइसफॉल डॉक्टर

समुद्र तल से 17 हजार फीट की ऊंचाई, एवरेस्ट की कठिन डगर और चारों तरफ पसरा मौत सा सन्नाटा… यहां हवा की एक सरसराहट भी दिल की धड़कनें बढ़ा देती है, क्योंकि एक जरा सी चूक सीधे गहरी खाई या बर्फ की कब्र में ले जा सकती है। इसी बर्फीले नर्क के बीच खड़ा है एक शख्स, जिसे दुनिया ‘आइसफॉल डॉक्टर’ कहती है। दावा जांगबू शेर्पा के लिए माउंट एवरेस्ट सिर्फ पहाड़ नहीं, बल्कि ‘मरीज’ है, जिसकी सांसों की नब्ज वह हर दिन टटोलता है। पर इस हफ्ते, खुम्बु आइसफॉल के उस दो मील के खतरनाक हिस्से ने दावा और उनकी 11 सदस्यीय विशिष्ट टीम को भी खौफ में डाल दिया है। भारी बर्फबारी के कारण बहुत बड़ी नीलीस-सफेद बर्फ की दीवार (सेराक) रास्ते में खड़ी हो गई है। यह दीवार इतनी विशाल है कि इसे पार करना बेहद खतरनाक है। फिलहाल ग्राउंड जीरो पर कोशिशों में जुटे जागंबू बताते हैं,‘रास्ते हर साल बंद होते हैं, पर मैंने अपनी जिंदगी में बर्फ का ऐसा पहाड़ रास्ते के बीच कभी नहीं देखा। हमने ड्रोन उड़ाकर देखा है, इसे पार करना अभी नामुमकिन है।’ यह मामूली रुकावट नहीं है, बल्कि एक ऐसी मौत की दीवार है जिसने सैकड़ों पर्वतारोहियों के सपनों को बेस कैंप में ही कैद कर दिया है।’ जांगबू कहते हैं ‘बेस कैंप अब एक तंबू के शहर में तब्दील हो चुका है, जहां 400 से ज्यादा पर्वतारोही टकटकी लगाए उस दीवार के पिघलने का इंतजार कर रहे हैं। चढ़ाई का समय तेजी से खत्म हो रहा है। नेपाल सरकार के लिए यह बड़ा राजस्व का मामला है, इसलिए विचार किया जा रहा है कि अगर एक-दो दिन में दीवार नहीं पिघली, तो गाइड्स को एयरलिफ्ट कर ऊपर पहुंचाया जाए। पहाड़ पर तीन बार फतह हासिल कर चुके दावा जांगबू जानते हैं कि रास्ता खुलने के बाद भी चुनौती कम नहीं होगी। सैकड़ों लोगों का एक साथ उस संकरे रास्ते से गुजरना एक नई मुसीबत को दावत देगा। जांगबू की नजरें अभी भी उस सफेद दीवार पर टिकी हैं- उन्हें इंतजार है कि कब उनका ‘मरीज’ उन्हें आगे बढ़ने का रास्ता देगा। क्योंकि एवरेस्ट पर, आखिरी फैसला हमेशा पहाड़ का ही होता है। खतरा, इसी जगह पर 2014 में 16 गाइड्स की मौत हुई थी आइसफॉल डॉक्टर्स का काम दुनिया के सबसे खतरनाक पेशों में गिना जाता है। ये जांबाज उस वक्त पहाड़ पर चढ़ते हैं जब कोई और वहां जाने की सोच भी नहीं सकता। दरकते ग्लेशियरों के बीच रस्सियां बांधना और रसातल जैसी गहरी दरारों पर एल्युमीनियम की सीढ़ियां टिकाना बड़ी चुनौती रहती है। पर इस साल, खतरा पहले से कहीं ज्यादा है। अप्रैल 2014 की घटना इन शेरपाओं के जेहन में अब भी ताजा है, जब इसी जगह बर्फ की दीवार गिरने से 16 गाइड्स की मौत हो गई थी। वह एवरेस्ट के इतिहास का सबसे भीषण दिन था। स्थिति वैसी ही है और सुरक्षा से समझौता करना खुदकुशी के बराबर है।
प्रीति जिंटा से युजवेंद्र चहल ने की डिमांड:ओपनिंग बैटिंग करने की इच्छा जताई, एक्ट्रेस ने कहा- IPL खत्म होने के बाद कर लेना

IPL 2026 में पंजाब किंग्स के शानदार प्रदर्शन के बीच, स्पिनर युजवेंद्र चहल ने टीम की को-ओनर प्रीति जिंटा से एक मैच में ओपनिंग करने की डिमांड रख दी, जिसका प्रीति ने मजेदार जवाब दिया। श्रेयस अय्यर की कप्तानी में पंजाब किंग्स का प्रदर्शन इस सीजन में शानदार रहा है। टीम ने अब तक 7 मैचों में 6 जीत दर्ज की है, जबकि एक मुकाबला बारिश के कारण रद्द हो गया। टीम पॉइंट्स टेबल में टॉप पर है। हाल ही में दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ टीम ने IPL इतिहास का सबसे बड़ा रन चेज भी पूरा किया। टीम के लगातार अच्छे प्रदर्शन के बाद, प्रीति ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर फैंस से बातचीत करने का फैसला किया। उन्होंने फैंस से सवाल पूछने को कहा, जिस पर चहल ने अपनी इच्छा जाहिर की। चहल ने लिखा, ‘मैम, एक मैच में बैटिंग ओपनिंग करने का मौका मिल जाए तो।’ इस पर प्रीति जिंटा ने जवाब दिया, ‘जरूर युजी। तुम्हारे लिए कुछ भी। IPL खत्म होने के बाद, तुम्हें जो भी मैच पसंद हो। मुझे यकीन है कि प्रभसिमरन सिंह और प्रियांश आर्या को इससे कोई आपत्ति नहीं होगी।’ प्रभसिमरन और प्रियांश शानदार फॉर्म में पंजाब की मौजूदा सलामी जोड़ी प्रभसिमरन सिंह और प्रियांश आर्या बेहतरीन फॉर्म में है। दोनों ने टीम को मजबूत शुरुआत दी। इस सीजन में इस जोड़ी ने 57.4 की औसत और 192.61 की स्ट्राइक रेट के साथ रन बनाए हैं। प्रियांश आर्या अब तक 254 रन बना चुके हैं, जबकि प्रभसिमरन सिंह ने 7 मैचों की 6 पारियों में 192.62 की स्ट्राइक रेट से 287 रन बनाए हैं। इसी वजह से टीम ने अब तक अपनी प्लेइंग-11 में कोई बदलाव नहीं किया है। पंजाब किंग्स IPL इतिहास की पहली ऐसी टीम बन गई है, जिसने एक सीजन के शुरुआती 7 मैचों में अपनी प्लेइंग-11 में कोई बदलाव नहीं किया।
प्रीति जिंटा से युजवेंद्र चहल ने की डिमांड:ओपनिंग बैटिंग करने की इच्छा जताई, एक्ट्रेस ने कहा- IPL खत्म होने के बाद कर लेना

IPL 2026 में पंजाब किंग्स के शानदार प्रदर्शन के बीच, स्पिनर युजवेंद्र चहल ने टीम की को-ओनर प्रीति जिंटा से एक मैच में ओपनिंग करने की डिमांड रख दी, जिसका प्रीति ने मजेदार जवाब दिया। श्रेयस अय्यर की कप्तानी में पंजाब किंग्स का प्रदर्शन इस सीजन में शानदार रहा है। टीम ने अब तक 7 मैचों में 6 जीत दर्ज की है, जबकि एक मुकाबला बारिश के कारण रद्द हो गया। टीम पॉइंट्स टेबल में टॉप पर है। हाल ही में दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ टीम ने IPL इतिहास का सबसे बड़ा रन चेज भी पूरा किया। टीम के लगातार अच्छे प्रदर्शन के बाद, प्रीति ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर फैंस से बातचीत करने का फैसला किया। उन्होंने फैंस से सवाल पूछने को कहा, जिस पर चहल ने अपनी इच्छा जाहिर की। चहल ने लिखा, ‘मैम, एक मैच में बैटिंग ओपनिंग करने का मौका मिल जाए तो।’ इस पर प्रीति जिंटा ने जवाब दिया, ‘जरूर युजी। तुम्हारे लिए कुछ भी। IPL खत्म होने के बाद, तुम्हें जो भी मैच पसंद हो। मुझे यकीन है कि प्रभसिमरन सिंह और प्रियांश आर्या को इससे कोई आपत्ति नहीं होगी।’ प्रभसिमरन और प्रियांश शानदार फॉर्म में पंजाब की मौजूदा सलामी जोड़ी प्रभसिमरन सिंह और प्रियांश आर्या बेहतरीन फॉर्म में है। दोनों ने टीम को मजबूत शुरुआत दी। इस सीजन में इस जोड़ी ने 57.4 की औसत और 192.61 की स्ट्राइक रेट के साथ रन बनाए हैं। प्रियांश आर्या अब तक 254 रन बना चुके हैं, जबकि प्रभसिमरन सिंह ने 7 मैचों की 6 पारियों में 192.62 की स्ट्राइक रेट से 287 रन बनाए हैं। इसी वजह से टीम ने अब तक अपनी प्लेइंग-11 में कोई बदलाव नहीं किया है। पंजाब किंग्स IPL इतिहास की पहली ऐसी टीम बन गई है, जिसने एक सीजन के शुरुआती 7 मैचों में अपनी प्लेइंग-11 में कोई बदलाव नहीं किया।








