Friday, 01 May 2026 | 07:59 AM

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वॉरजोन में फंसे डॉ. मिलर का मिशन इम्पॉसिबल:ट्रम्प सरकार ने हाथ खड़े किए तो अमेरिकी डॉक्टर ने मोर्चा संभाला; कतर से 4 महाद्वीप होकर 62 घंटे में घर पहुंचे

वॉरजोन में फंसे डॉ. मिलर का मिशन इम्पॉसिबल:ट्रम्प सरकार ने हाथ खड़े किए तो अमेरिकी डॉक्टर ने मोर्चा संभाला; कतर से 4 महाद्वीप होकर 62 घंटे में घर पहुंचे

अमेरिका के न्यू ऑरलियन्स के रहने वाले डॉक्टर जेय मिलर के लिए भारत की ‘वन्स-इन-ए-लाइफटाइम’ फैमिली वेकेशन एक डरावने अनुभव में बदल गई। मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध के तनाव के बीच फंसे डॉक्टर ने जिस तरह से अपनी जान बचाकर घर वापसी की, वह किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। 28 फरवरी को डॉ. मिलर दोहा (कतर) से डलास के लिए रवाना हुए थे, लेकिन ईरान-इजरायल तनाव के चलते हवाई क्षेत्र बंद होने के कारण उनका विमान एक घंटे बाद वापस दोहा लौट आया। इजराइल और अमेरिका ने ईरान पर हमला किया था। जवाब में ईरान रॉकेट और ड्रोन दाग रहा था। कतर समेत मध्य-पूर्व के कई देशों ने एयरस्पेस बंद कर दिया। फ्लाइटें रद्द हो गईं। हजारों यात्री फंस गए। डॉ. मिलर ने बताया कि उस वक्त उन्होंने अपनी पत्नी को फोन किया और बस इतना कहा कि ‘मैं उनसे बहुत प्यार करता हूं, क्योंकि मुझे नहीं पता था कि मैं घर लौट पाऊंगा या नहीं।’ मिलर 45 साल के पल्मोनरी और क्रिटिकल केयर स्पेशलिस्ट हैं। वे मरीजों के पास लौटने के लिए पत्नी स्वाथी नर्रा और 5 साल की बेटी देवी से एक हफ्ते पहले भारत से निकल गए थे। भारत से अमेरिका जाते वक्त कतर से मिलर को अगली फ्लाइट पकड़नी थी, लेकिन युद्ध छिड़ने के कारण वे दोहा में ही फंस गए। वे एंडाज दोहा होटल में ठहरे थे। इस दौरान मिलर ने अमेरिकी स्टेट डिपार्टमेंट को कॉल किए। फॉर्म भरे। लुइसियाना के नेताओं से संपर्क किया, लेकिन कोई मदद नहीं मिली। अमेरिकी विदेश विभाग ने जब यह कह दिया कि यात्री अपनी सुरक्षा के लिए सरकार पर निर्भर न रहें, तब डॉक्टर मिलर ने खुद ही निकलने का रास्ता बनाया। दोहा से रियाद टैक्सी से 9 घंटे में पूरा किया सफर एशिया (सऊदी अरब) – दोहा एयरपोर्ट बंद होने के कारण मिलर ने रियाद तक 9 घंटे का सफर टैक्सी से पूरा किया। इसके लिए उन्हें 3 कारें बदलनी पड़ीं और 2.5 लाख रुपए खर्च किए। अफ्रीका (इथियोपिया) – रियाद से वे इथोपिया की राजधानी अदिस अबाबा पहुंचे। यहां 15 घंटे रुके । यूरोप और अमेरिका – इथियोपिया से उनकी फ्लाइट तेल भरवाने के लिए इटली (रोम) रुकी, फिर शिकागो होते हुए वे न्यू ऑरलियन्स पहुंचे।

न्यूक्लियर इमरजेंसी की तैयारी में खाड़ी देश:चंडीगढ़ की दवा कंपनी से 1 करोड़ कैप्सूल की क्षमता पूछी, कई देशों में सप्लाई की संभावना

न्यूक्लियर इमरजेंसी की तैयारी में खाड़ी देश:चंडीगढ़ की दवा कंपनी से 1 करोड़ कैप्सूल की क्षमता पूछी, कई देशों में सप्लाई की संभावना

ईरान-इजराइल जंग के बीच खाड़ी देशों ने संभावित न्यूक्लियर इमरजेंसी से निपटने की तैयारी तेज कर दी है। बहरीन स्थित एक फार्मा लायजनिंग एजेंट ने चंडीगढ़ की एक दवा कंपनी से संपर्क कर परमाणु आपदा में इस्तेमाल होने वाले प्रशियन ब्लू कैप्सूल के बारे में जानकारी मांगी है। एजेंट ने कंपनी से पूछा है कि क्या वह 1 करोड़ कैप्सूल बना सकती है। साथ ही अलग-अलग आयु वर्ग के लोगों के लिए इसकी डोज कितनी होती है और कंपनी की उत्पादन क्षमता क्या है, जैसे कई सवाल भी पूछे गए हैं। कंपनी की डायरेक्टर डॉ. वैशाली अग्रवाल के अनुसार, इस विषय पर बातचीत जारी है। फिलहाल एजेंट अपने देश के स्वास्थ्य मंत्रालय से इस बारे में चर्चा कर रहा है। अगर समझौता हो जाता है तो इन दवाओं की सप्लाई बहरीन, कुवैत, कतर और जॉर्डन जैसे खाड़ी देशों में की जा सकती है। कंपनी का मुख्यालय चंडीगढ़ में है, जबकि इसकी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट हिमाचल प्रदेश के बद्दी में स्थित है। इससे पहले जून 2025 में इजराइल-ईरान तनाव के दौरान भी इस दवा की मांग सामने आई थी, लेकिन 12 दिन में संघर्ष खत्म होने के बाद बातचीत आगे नहीं बढ़ पाई थी। जानिए, कैसे काम करती है प्रशियन ब्लू प्रशियन ब्लू परमाणु हमले या रेडियोलॉजिकल आपदा के दौरान इस्तेमाल होने वाली महत्वपूर्ण दवा है। यह शरीर में प्रवेश कर चुके रेडियोएक्टिव तत्व सीजियम-137 और थैलियम के प्रभाव को कम करती है। यह कैप्सूल आंतों में इन रेडियोएक्टिव तत्वों से जुड़कर उन्हें मल के जरिए शरीर से बाहर निकालने में मदद करता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसे रेडियोलॉजिकल और न्यूक्लियर इमरजेंसी में उपयोग होने वाली जरूरी दवाओं की सूची में शामिल किया है। अमेरिका और यूरोप में यह दवा पहले से बनाई जाती रही है, जबकि भारत में इसका कॉमर्शियल उत्पादन लगभग दो साल पहले शुरू हुआ है। यह दवा डीआरडीओ की दिल्ली स्थित लैब आईएनएमएएस (इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूक्लियर मेडिसिन एंड अलाइड साइंसेस) की तकनीक पर आधारित है। डीसीजीआई ने भारत की दो कंपनियों को इसके निर्माण और मार्केटिंग का लाइसेंस दिया है। इसमें अहमदाबाद की कंपनी को कच्चा माल उपलब्ध कराने और चंडीगढ़ की कंपनी को उत्पादन की जिम्मेदारी दी गई है। पोटेशियम आयोडाइड की भी बड़ी मांग बहरीन के एजेंट ने पोटेशियम आयोडाइड (केआई) टैबलेट को लेकर भी जानकारी मांगी है। इसके लिए करीब 1.2 करोड़ टैबलेट की संभावित मांग जताई गई है। पोटेशियम आयोडाइड का उपयोग न्यूक्लियर इमरजेंसी में थायराइड ग्रंथि को रेडिएशन से बचाने के लिए किया जाता है। इसके अलावा इसका इस्तेमाल हाइपरथायरायडिज्म के इलाज और फेफड़ों में जमा बलगम को ढीला करने में भी किया जाता है।

‘राष्ट्रपति खड़े हैं, आप बैठे हैं’: प्रोटोकॉल विवाद के बीच ममता ने 2024 फोटो के साथ पीएम मोदी पर हमला किया | राजनीति समाचार

A black plume of smoke rises from a warehouse in the industrial area of Sharjah City following reports of Iranian strikes in Dubai. (Photo: AP/File)

आखरी अपडेट:मार्च 09, 2026, 11:12 IST पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए टीएमसी ने एक तस्वीर साझा की जिसमें राष्ट्रपति मुर्मू, प्रधानमंत्री मोदी और 2024 के बीजेपी दिग्गज लाल कृष्ण आडवाणी हैं। विवाद कथित प्रशासनिक चूक से आगे बढ़कर पूर्ण राजनीतिक झगड़े में बदल गया है, पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी (बाएं) ने प्रोटोकॉल उल्लंघन से इनकार किया है और पीएम नरेंद्र मोदी (दाएं) ने कहा है कि राज्य के लोग राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (केंद्र) के अपमान पर टीएमसी को माफ नहीं करेंगे। (छवि: पीटीआई/फ़ाइल) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की हाल की राज्य यात्रा को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बीच जबरदस्त टकराव सोमवार को उस समय तेज हो गया, जब तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने दो साल पुरानी तस्वीर साझा कर प्रधानमंत्री पर हमला बोला। पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए, टीएमसी ने एक वीडियो साझा किया जिसमें दो तृणमूल नेताओं को राष्ट्रपति मुर्मू, प्रधान मंत्री मोदी और 2024 से भाजपा के दिग्गज लाल कृष्ण आडवाणी की तस्वीर दिखाते हुए दिखाया गया है। 31 मार्च, 2024 की इस तस्वीर में राष्ट्रपति मुर्मू और प्रधान मंत्री मोदी को आडवाणी से मिलते और उन्हें भारत रत्न से सम्मानित करते हुए दिखाया गया है। तस्वीर में राष्ट्रपति मुर्मू खड़े हैं, जबकि पीएम मोदी उनकी कुर्सी पर बैठे नजर आ रहे हैं। “प्रधानमंत्री राष्ट्रपति के कार्यालय का सम्मान करने के बारे में बड़े-बड़े दावे करते रहते हैं। आइए इस तस्वीर को ध्यान से देखें। देश की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति खड़ी हैं जबकि प्रधानमंत्री अपनी कुर्सी पर आराम से बैठे हैं। राष्ट्रपति के लिए सम्मान की सभी घोषणाएं खोखली लगती हैं जब दृश्य साक्ष्य उनके कार्यालय के लिए इस तरह की आकस्मिक उपेक्षा का खुलासा करते हैं,” तृणमूल ने एक सार्वजनिक रैली में बनर्जी की टिप्पणियों का एक छोटा वीडियो साझा करते हुए एक्स पर लिखा। प्रधानमंत्री राष्ट्रपति पद का सम्मान करने के बड़े-बड़े दावे करते रहते हैं। आइए इस तस्वीर को ध्यान से देखें। देश की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति खड़ी हैं जबकि प्रधानमंत्री अपनी कुर्सी पर आराम से बैठे हैं. सम्मान की सभी घोषणाएँ… pic.twitter.com/LUzw5wW4dW – अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (@AITCofficial) 8 मार्च 2026 पीएम मोदी पर हमला करते हुए बंगाल की मुख्यमंत्री ने कहा, “माननीय प्रधानमंत्री जी, यह आपके लिए है। क्या आप राष्ट्रपति, एक महिला और एक आदिवासी नेता का सम्मान करते हैं? फिर राष्ट्रपति क्यों खड़े हैं और आप बैठे हैं?” उन्होंने कहा, “मैंने आप सभी को दिखाया है, हम (राष्ट्रपति) का सम्मान करते हैं, लेकिन वे नहीं करते। यह तस्वीर साबित करती है कि कौन सम्मान करता है और कौन नहीं।” बनर्जी ने कहा, “मैंने आपके ट्वीट का जवाब दिया है कि हमने उस कार्यक्रम का आयोजन नहीं किया था (जिसमें राष्ट्रपति ने भाग लिया था)। एक निजी संगठन ने इसका आयोजन किया था और राज्य सरकार ने कहा कि संगठन के पास राष्ट्रपति के लिए कार्यक्रम आयोजित करने की क्षमता नहीं थी। उन्होंने हमें शामिल नहीं किया। यह माननीय राष्ट्रपति की पसंद है कि उन्होंने निमंत्रण स्वीकार किया। यह उनका विशेषाधिकार है, घंटे नहीं।” क्या है विवाद? दार्जिलिंग में नौवें अंतरराष्ट्रीय संताल सम्मेलन के लिए शनिवार को राष्ट्रपति मुर्मू के बंगाल दौरे के बाद बड़ा विवाद खड़ा हो गया. कार्यक्रम को संबोधित करते हुए, राष्ट्रपति ने मुख्यमंत्री बनर्जी या बंगाल के किसी अन्य मंत्री द्वारा सिलीगुड़ी के पास बागडोगरा हवाई अड्डे पर उनका स्वागत नहीं करने पर निराशा व्यक्त की। उन्होंने कहा, “आम तौर पर, जब राष्ट्रपति आ रहे हों तो मुख्यमंत्री को स्वागत करना चाहिए और अन्य मंत्रियों को मौजूद रहना चाहिए। लेकिन वह नहीं आईं। राज्यपाल बदल गए हैं और नहीं आ सके। लेकिन तारीख तय हो गई थी, इसलिए मैं आई हूं।” राष्ट्रपति ने कहा कि बनर्जी उनकी ”छोटी बहन” की तरह हैं। उन्होंने कहा, “मैं भी बंगाल की बेटी हूं। मुझे नहीं पता कि वह परेशान है या नहीं।” केंद्र सरकार द्वारा ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार पर प्रोटोकॉल उल्लंघन और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के प्रति सम्मान में कमी का आरोप लगाने के बाद विवाद शुरू हो गया। प्रधानमंत्री मोदी ने भी टीएमसी सरकार की आलोचना की और कहा कि राष्ट्रपति मुर्मू के कथित अपमान पर राज्य की जनता टीएमसी सरकार को माफ नहीं करेगी. ममता ने प्रोटोकॉल उल्लंघन से इनकार किया जल्द ही, बनर्जी ने प्रोटोकॉल के उल्लंघन के आरोपों से इनकार किया, यह कहते हुए कि किसी भी कुप्रबंधन की जिम्मेदारी कहीं और है, और एक निजी संस्था द्वारा आयोजित कार्यक्रम पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस आयोजन के लिए जिम्मेदार नहीं है। बनर्जी ने कहा था, “यह एक निजी संगठन का कार्यक्रम था। अगर वे इसे आपके लिए ठीक से व्यवस्थित नहीं कर सके, तो यह उनकी समस्या है।” जगह : पश्चिम बंगाल, भारत, भारत पहले प्रकाशित: मार्च 09, 2026, 10:48 IST समाचार राजनीति ‘राष्ट्रपति खड़े हैं, आप बैठे हैं’: प्रोटोकॉल विवाद के बीच ममता ने 2024 फोटो के साथ पीएम मोदी पर हमला किया अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)ममता बनर्जी(टी)राष्ट्रपति मुर्मू(टी)नरेंद्र मोदी(टी)द्रौपदी मुर्मू(टी)बंगाल(टी)प्रोटोकॉल उल्लंघन

'मैं हमेशा देश के समर्थन में खड़ी रही हूं':खामेनेई की मौत पर दुख जताने के बाद ट्रोल हुईं फरहाना भट्ट ने किया रिएक्ट

'मैं हमेशा देश के समर्थन में खड़ी रही हूं':खामेनेई की मौत पर दुख जताने के बाद ट्रोल हुईं फरहाना भट्ट ने किया रिएक्ट

‘बिग बॉस 19’ की पूर्व कंटेस्टेंट फरहाना भट्ट ने ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत पर दुख जताने के बाद हुई ट्रोलिंग पर प्रतिक्रिया दी है। फरहाना ने कहा कि उन्होंने हमेशा अपने देश के समर्थन में खड़े होकर काम किया है और देश के खिलाफ किसी भी नैरेटिव का विरोध किया है। इंस्टेंट बॉलीवुड से बातचीत में फरहाना भट्ट ने अपने बयान को लेकर कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है, जहां सभी को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है और लोग अपने विचार अलग-अलग तरीके से व्यक्त कर सकते हैं। विचारों में मतभेद होना स्वाभाविक है और वह इसे स्वीकार करती हैं। उन्होंने कहा कि लोग उनकी बात को लेकर प्रतिक्रिया दे रहे हैं, लेकिन उन्होंने हमेशा अपने देश के लिए काम किया है और आगे भी करती रहेंगी। कश्मीर में शांति के लिए कई पहल कीं: फरहाना फरहाना ने कहा कि पहलगाम हमले, ईरान, फिलिस्तीन या इजरायल से जुड़े मुद्दों पर वह पहले भी अपनी राय रखती रही हैं। पुलवामा हमले और पहलगाम हमले जैसे मामलों में भी वह भारतीय सेना के साथ खड़ी रही हैं। वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व भी कर चुकी हैं। उन्होंने बताया कि कश्मीर में शांति से जुड़े काम के दौरान उन्होंने भारतीय सेना के साथ मिलकर कई पहल की हैं। कश्मीर में सेना के कई वरिष्ठ अधिकारियों ने उनके काम की सराहना की है और उन्हें कई बार सम्मानित भी किया गया है। वहीं, होली को लेकर हुई ट्रोलिंग पर जवाब देते हुए फरहाना ने कहा कि भारत एक स्वतंत्र देश है। यहां हर व्यक्ति को अपने तरीके से त्योहार मनाने और अपनी बात रखने का अधिकार है, बशर्ते इससे देश की गरिमा को ठेस न पहुंचे। फरहाना ने खामेनेई के निधन पर क्या कहा था? खामेनेई के निधन को लेकर फरहाना भट्ट ने कहा था, “बिल्कुल, वे एक ऐसे व्यक्तित्व थे जिन्हें हम कभी नहीं भूल सकते। वे हमेशा हमारे दिलों में जिंदा रहेंगे। इस घटना से सभी कश्मीरी गहरे सदमे में हैं। आप विश्वास नहीं करेंगे, सेहरी के बाद मैं बिल्कुल नहीं सो पाई। मैं बहुत दुखी थी। ऐसा कभी नहीं होना चाहिए था।”

चंदिया कटनी बाइपास पर ट्रकों से यातायात बाधित:एक किलोमीटर तक सड़क पर खड़े रहते हैं भारी वाहन

चंदिया कटनी बाइपास पर ट्रकों से यातायात बाधित:एक किलोमीटर तक सड़क पर खड़े रहते हैं भारी वाहन

उमरिया जिले के चंदिया नगर में कटनी बाइपास मार्ग पर अव्यवस्थित रूप से खड़े ट्रकों के कारण यातायात व्यवस्था प्रभावित हो रही है। करीब एक किलोमीटर लंबे हिस्से में सड़क के दोनों किनारों पर भारी वाहनों की कतार लगने से आवागमन बाधित हो रहा है, जिससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। वाहन चालकों को सामने से आने वाले वाहनों को साइड देने में परेशानी होती है। स्थानीय लोगों के अनुसार, शाम 7 बजे से सुबह 8 बजे तक ट्रक सड़क घेरकर खड़े रहते हैं। मार्ग पर अंधा मोड़ होने के कारण सामने से आने वाले वाहन समय पर दिखाई नहीं देते, जिससे खतरा और बढ़ जाता है। इस मार्ग से प्रतिदिन गुजरने वाले बाइक सवार दुर्गा ने बताया कि दोनों तरफ ट्रक खड़े होने से निकलने की जगह नहीं बचती। यह शहर में प्रवेश का मुख्य मार्ग है, जिससे रात के समय आवागमन विशेष रूप से मुश्किल हो जाता है। मामले को लेकर एसडीओपी पी.एल. परस्ते ने बताया कि ट्रकों के खड़े होने से यातायात बाधित होने की शिकायत मिली है। उन्होंने जांच के निर्देश दिए हैं और आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

‘100 विधायक लाओ, सीएम बनो’: यूपी के डिप्टी सीएम को अखिलेश यादव की पेशकश से राजनीतिक तूफान खड़ा हो गया | राजनीति समाचार

India vs South Africa Live Score, T20 World Cup 2026 Super 8s: Follow Scorecard And Match Action From Ahmedabad. (Picture Credit: AFP)

आखरी अपडेट:22 फरवरी, 2026, 19:11 IST अखिलेश यादव ने केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक को 100 विधायक जुटाने पर मुख्यमंत्री बनने का मौका देने की पेशकश की, जिस पर बीजेपी की आलोचना शुरू हो गई. अखिलेश यादव (सपा): अखिलेश यादव समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष हैं. वह 2017 से राष्ट्रीय पार्टी प्रमुख के रूप में कार्यरत हैं। इससे पहले, उन्होंने 2012 से 2017 तक उत्तर प्रदेश के सबसे युवा मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया था। वह 52 वर्ष के हैं। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने रविवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की निर्धारित विदेश यात्रा से कुछ घंटे पहले राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया। एक सार्वजनिक कार्यक्रम में बोलते हुए, अखिलेश यादव ने कहा कि वह एक बार फिर उत्तर प्रदेश के दो उपमुख्यमंत्रियों – केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक – को मुख्यमंत्री बनने का मौका दे रहे हैं, अगर वे 100 विधायकों का समर्थन जुटा सकें। उन्होंने टिप्पणी की कि जो कोई भी 100 विधायक लाएगा वह स्वाभाविक रूप से शीर्ष पद का दावा करने की स्थिति में होगा। उन्हें यह कहते हुए सुना गया, “100 विधायक लाओ और एक हफ्ते के लिए मुख्यमंत्री बनो, लेकिन ऑफर सीमित समय के लिए है।” इस बयान पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की ओर से तुरंत राजनीतिक प्रतिक्रिया शुरू हो गई। पार्टी नेताओं ने इस टिप्पणी को विपक्षी खेमे के भीतर हताशा का प्रतिबिंब बताया। बीजेपी नेता और प्रवक्ता मनीष शुक्ला ने अखिलेश यादव की आलोचना करते हुए कहा कि उनकी टिप्पणी राजनीतिक हताशा को दर्शाती है. शुक्ला ने कहा कि समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष एक गंभीर राजनेता की तरह कम और एक कार्टून चरित्र की तरह अधिक दिखते हैं, उन्होंने कहा कि जब लोग उन्हें टेलीविजन पर देखते हैं तो मुस्कुराने लगते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश गंभीर मामलों को भी हल्के में लेते हैं और दावा किया कि जनता अब उन्हें गंभीरता से नहीं लेती है. बीजेपी प्रवक्ता ने आगे कहा कि इस टिप्पणी से अखिलेश यादव के राजनीतिक भविष्य को लेकर भ्रम और निराशा सामने आई है. उनके मुताबिक, उत्तर प्रदेश की जनता कटाक्ष और राजनीतिक बयानबाजी के बजाय विकास और स्थिरता चाहती है. योगी आदित्यनाथ का सिंगापुर दौरा यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ सिंगापुर की तीन दिवसीय यात्रा पर रवाना हुए। अपनी यात्रा के दौरान, वह सिंगापुर के शीर्ष नेतृत्व से भी मुलाकात करेंगे, जिसमें प्रधान मंत्री लॉरेंस वोंग, विदेश मामलों के मंत्री विवियन बालाकृष्णन, जनशक्ति मंत्री टैन सी लेंग और राष्ट्रपति थर्मन शनमुगरत्नम शामिल हैं। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना जगह : उत्तर प्रदेश, भारत, भारत पहले प्रकाशित: 22 फरवरी, 2026, 19:11 IST समाचार राजनीति ‘100 विधायक लाओ, सीएम बनो’: यूपी के डिप्टी सीएम को अखिलेश यादव की पेशकश से राजनीतिक तूफान खड़ा हो गया अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)अखिलेश यादव का राजनीतिक बयान(टी)समाजवादी पार्टी(टी)उत्तर प्रदेश की राजनीति(टी)योगी आदित्यनाथ सिंगापुर यात्रा(टी)बीजेपी की प्रतिक्रियाअखिलेश यादव(टी)उपमुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश(टी)राजनीतिक विवाद उत्तर प्रदेश(टी)अखिलेश यादव मुख्यमंत्री की पेशकश

पैट मैक्ग्रा की सौंदर्य प्रसाधन कंपनी संकट में:मैडोना-रिहाना इनकी क्लाइंट रहीं, किचन में बनाए उत्पादों से 9 हजार करोड़ की कंपनी खड़ी की

पैट मैक्ग्रा की सौंदर्य प्रसाधन कंपनी संकट में:मैडोना-रिहाना इनकी क्लाइंट रहीं, किचन में बनाए उत्पादों से 9 हजार करोड़ की कंपनी खड़ी की

लंदन की अश्वेत लड़की पैट मैक्ग्रा, जिसने मां के किचन से शुरू करके पेरिस-मिलान के सबसे बड़े रैम्प तक मेकअप का जादू पहुंचाया। आज अपनी ही कंपनी पैट मैक्ग्रा लैब्स को दिवालियेपन से बचाने की लड़ाई लड़ रही हैं। दुनिया उन्हें ‘मदर ऑफ मेकअप’ कहती है। मैडोना, टेलर स्विफ्ट, किम कार्दशियां से लेकर रिहाना तक के जिन चेहरों को हम रेड कार्पेट पर चमकता देखते हैं, उनमें पैट के ब्रश का स्पर्श होता है। 2015 में शुरू हुआ उनका ब्रांड पैट मैक्ग्रा लैब्स 2018 में 9000 करोड़ रु. से ज्यादा का सौंदर्य कारोबार कर रहा था। ऐसा करने वाला पहला अश्वेत महिला स्वामित्व का सौंदर्य ब्रांड बना। इसके आठ साल बाद ही पिछले महीने जनवरी में इसी कंपनी को कर्ज से राहत के लिए अमेरिका में दिवालिया होने की अर्जी देनी पड़ी। इसमें कंपनी पर 453 करोड़ रु. से अधिक के कर्ज की बात कही गई है। पेरिस या मिलान फैशन वीक में 80 बड़े सूटकेस के साथ आने के लिए मशहूर पैट के हर सूटकेस में हजारों आईशैडो, ग्लिटर और उनके बनाए सीक्रेट फॉर्मूले होते हैं। उनका सबसे चर्चित प्रोडक्ट ‘गोल्ड 001’ किसी हाई-टेक लैब में नहीं, बल्कि किचन में बना था। वे धातु जैसी चमक वाला गोल्ड शेड चाहती थीं और हाथ से पिगमेंट मिलाकर जो रंग निकला, वह पेरिस फैशन वीक में लॉन्च होते ही ऑनलाइन मिनटों में सोल्ड-आउट हो गया। 2024 के एक शो में उन्होंने मॉडल्स के चेहरे पर ऐसा ग्लास-स्किन इफेक्ट बनाया कि सोशल मीडिया में कई हफ्तों तक यही चर्चा होती रही कि यह ‘कांच की गुड़िया’ जैसा चेहरा आखिर कैसे बना। इस ग्लैमर की चमक के पीछे उनकी कंपनी की बैलेंस शीट बिगड़ गई। रिपोर्टों के अनुसार, तेज विस्तार, भारी मार्केटिंग खर्च, सप्लाई चेन में रुकावटें और रिटेल पार्टनरशिप की लागत ने पैट मैक्ग्रॉ लैब्स के बजट ढांचे को ध्वस्त कर दिया। पहचान: चलती-फिरती रिसर्च लैब लेकर घूमती हैं मैक्ग्रा ब्रिटेन में जमैका मूल की सिंगल मदर के घर जन्मी पैट मैक्ग्राॅ का रुझान बचपन से फैशन की ओर था। इटालियन वोग की कॉपियों को देखती थीं। 1990 के दशक में सोल सेकंड सोल की सिंगर कैरॉन व्हीलर के साथ टूर, फिर फोटोग्राफर स्टीवन मीजल के साथ काम ने उन्हें प्राडा, लुई वितां और वर्साचे जैसे फैशन हाउस की पहली पसंद बना दिया। वह शो में 70-80 बड़े ट्रंक मेकअप बैग लेकर पहुंचती हैं। कहा जाता है कि वे चलती-फिरती रिसर्च लैब लेकर घूमती हैं। 2021 में ब्रिटिश एम्पायर की ‘डेम’ की उपाधि मिली। सौंदर्य जगत से यह सम्मान पाने वाली वह पहली अश्वेत महिला हैं।

केरल टिप्पणी विवाद के बीच एमएस अय्यर ने पवन खेड़ा को बुलाया, शशि थरूर की ‘महत्वाकांक्षा’ की आलोचना की | राजनीति समाचार

केरल टिप्पणी विवाद के बीच एमएस अय्यर ने पवन खेड़ा को बुलाया, शशि थरूर की 'महत्वाकांक्षा' की आलोचना की | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:16 फरवरी, 2026, 13:24 IST अय्यर की टिप्पणी केरल के सीएम विजयन की हालिया प्रशंसा को लेकर उठे विवाद के बीच आई है, जिसमें उनका यह दावा भी शामिल है कि आगामी चुनावों के बाद वामपंथी नेता पद पर बने रहेंगे। कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने सोमवार को वरिष्ठ सहयोगियों पर तीखा हमला करने, कांग्रेस के नेतृत्व पर सवाल उठाने और केरल में चुनावी झटके की भविष्यवाणी करने के बाद पार्टी के भीतर ताजा विवाद पैदा कर दिया। अय्यर की टिप्पणी केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन की हालिया प्रशंसा को लेकर उठे विवाद के बीच आई है, जिसमें उनका यह दावा भी शामिल है कि वामपंथी नेता आगामी विधानसभा चुनाव के बाद भी पद पर बने रहेंगे। कांग्रेस ने तुरंत ही अय्यर की टिप्पणियों से दूरी बना ली, पार्टी प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा कि अय्यर अब पार्टी का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं और “पूरी तरह से व्यक्तिगत क्षमता में बोलते हैं”। पलटवार करते हुए, अय्यर ने खेरा को “कठपुतली” बताया और संगठन के भीतर उनके अधिकार को खारिज कर दिया। अय्यर ने बताया, “वह पार्टी के प्रवक्ता नहीं हैं। अगर कांग्रेस को अपने पक्ष में बोलने के लिए पवन खेड़ा के अलावा कोई और नहीं मिला, तो पार्टी उसी स्थिति में रहेगी।” एनडीटीवीउन्होंने कहा कि खेड़ा पिछले दो साल से उन्हें निशाना बना रहे थे। केरल में कांग्रेस की संभावनाओं पर, अय्यर ने भी इसी तरह की टिप्पणी की। “मैं चाहता हूं कि कांग्रेस जीते, लेकिन मुझे विश्वास नहीं है कि ऐसा होगा। कांग्रेस के नेता कम्युनिस्टों से जितनी नफरत करते हैं, उससे कहीं ज्यादा एक-दूसरे से नफरत करते हैं,” उन्होंने गहरे आंतरिक विभाजन की ओर इशारा करते हुए कहा। अय्यर ने तिरुवनंतपुरम से चार बार के सांसद शशि थरूर पर भी निशाना साधा और आरोप लगाया कि वरिष्ठ नेता अगले विदेश मंत्री बनने की महत्वाकांक्षा रखते हैं। विदेश नीति के मुद्दों पर थरूर के रुख का जिक्र करते हुए, अय्यर ने उन्हें “पाकिस्तान विरोधी” करार दिया और सुझाव दिया कि उनकी राजनीतिक आकांक्षाओं ने उन्हें पार्टी नेतृत्व के साथ मतभेद में डाल दिया है। कांग्रेस महासचिव और संचार प्रभारी जयराम रमेश को भी नहीं बख्शा गया, अय्यर ने टिप्पणी की कि रमेश का ध्यान “अपनी नौकरी बनाए रखने” पर था। नवीनतम हमला अय्यर के विवादास्पद बयानों की एक श्रृंखला को जोड़ता है, जिन्होंने पहले केरल चुनाव से कुछ महीने पहले तिरुवनंतपुरम में एक सेमिनार में विजयन की प्रशंसा करके पार्टी को शर्मिंदा किया था, जहां कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूडीएफ सत्तारूढ़ वामपंथियों से मुकाबला करने के लिए तैयार है। “विज़न 2031: विकास और लोकतंत्र” सेमिनार में बोलते हुए, अय्यर ने विकेंद्रीकृत शासन में केरल की उपलब्धियों की सराहना की और विजयन से आग्रह किया कि वे जो कहते हैं वह पंचायती राज में कांग्रेस की अधूरी विरासत को आगे बढ़ाएं। कांग्रेस नेतृत्व ने नए सिरे से हुई आलोचना का दृढ़ता से जवाब दिया। खेड़ा ने एक्स पर दोहराया कि अय्यर का पिछले कुछ वर्षों से कांग्रेस के साथ कोई संबंध नहीं है, जबकि रमेश ने जोर देकर कहा कि मतदाता यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट को सत्ता में बहाल करेंगे। रमेश ने कहा, “केरल के लोग अधिक जिम्मेदार और उत्तरदायी शासन के लिए यूडीएफ को वापस लाएंगे। वे यह भी जानते हैं कि एलडीएफ और भाजपा गुप्त भागीदार हैं।” विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ, अय्यर की टिप्पणियों ने एक बार फिर कांग्रेस के भीतर की खामियां उजागर कर दी हैं, जबकि पार्टी एकता प्रदर्शित करने और केरल में सत्तारूढ़ वामपंथ के खिलाफ अपने हमले को तेज करने की कोशिश कर रही है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना जगह : केरल, भारत, भारत पहले प्रकाशित: 16 फरवरी, 2026, 13:23 IST समाचार राजनीति केरल टिप्पणी विवाद के बीच एमएस अय्यर ने पवन खेड़ा को बुलाया, शशि थरूर की ‘महत्वाकांक्षा’ की आलोचना की अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)मणिशंकर अय्यर(टी)शशि थरूर(टी)केरल(टी)कांग्रेस

भारत-अमेरिका व्यापार समझौता विवाद: कांग्रेस के पुराने ‘शीत युद्ध के रहस्य’ ने खड़ा किया नया राजनीतिक तूफान | राजनीति समाचार

US President Donald Trump. (IMAGE: REUTERS)

आखरी अपडेट:11 फरवरी, 2026, 17:37 IST जैसा कि राहुल गांधी ने अमेरिकी व्यापार समझौते को ‘थोक आत्मसमर्पण’ बताया है, सरकारी सूत्रों ने शीत युद्ध के रिकॉर्ड का हवाला देते हुए आरोप लगाया है कि कांग्रेस ने एक बार सीआईए फंड स्वीकार किया था सरकारी सूत्रों ने राजनीतिक अस्तित्व के लिए राष्ट्रीय हितों से समझौता करने के कांग्रेस पार्टी के भीतर एक कथित ऐतिहासिक पैटर्न की ओर इशारा किया है। फ़ाइल छवि/फेसबुक जैसे ही नरेंद्र मोदी सरकार ने संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ अंतरिम व्यापार समझौते को औपचारिक रूप दिया, नई दिल्ली में एक भयंकर राजनीतिक विवाद छिड़ गया है। बुधवार को, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री पर राष्ट्रीय संप्रभुता के “थोक आत्मसमर्पण” का आरोप लगाया और आरोप लगाया कि यह सौदा भारत की ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा से समझौता करता है। हालाँकि, सरकारी सूत्रों ने शीत युद्ध के दौरान गुप्त विदेशी सहयोग के दस्तावेजी उदाहरणों का हवाला देते हुए, राजनीतिक अस्तित्व के लिए राष्ट्रीय हितों से समझौता करने के कांग्रेस पार्टी के भीतर एक कथित ऐतिहासिक पैटर्न की ओर इशारा करते हुए इस कथा का खंडन किया है। 1970 के दशक की ‘खतरनाक’ विरासत इस खंडन के केंद्र में पॉल एम मैकगर की पुस्तक “दक्षिण एशिया में जासूसी: ब्रिटेन, संयुक्त राज्य अमेरिका और भारत का गुप्त शीत युद्ध” में पाए गए विस्फोटक खुलासे हैं। मैक्गार भारत में पूर्व अमेरिकी राजदूत डैनियल पैट्रिक मोयनिहान के 1978 के संस्मरण का हवाला देते हैं, जिसका शीर्षक ए डेंजरस प्लेस है। अपने लेखन में, मोयनिहान ने स्पष्ट रूप से पुष्टि की कि केंद्रीय खुफिया एजेंसी (सीआईए) ने सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी को धन मुहैया कराकर कम से कम दो मौकों पर भारतीय घरेलू राजनीति में हस्तक्षेप किया था। इन गुप्त भुगतानों का प्राथमिक उद्देश्य पश्चिम बंगाल और केरल में कम्युनिस्ट सरकारों के लोकतांत्रिक चुनाव को विफल करना था। सबसे अधिक नुकसानदेह बात यह है कि मोयनिहान ने आरोप लगाया कि एक मामले में, सीआईए फंड सीधे इंदिरा गांधी को दिया गया था, जबकि वह कांग्रेस पार्टी की अध्यक्ष थीं। जवाहरलाल नेहरू के राजनीतिक विश्वासपात्र के रूप में उनकी भूमिका और बाद में कैबिनेट में उनकी पदोन्नति को देखते हुए, मैकगर का तर्क है कि यह “कल्पना करना कठिन” है कि वह अमेरिकी खुफिया के साथ इन संयुक्त पहलों से अनजान थीं, या इसमें शामिल नहीं थीं। नेहरू का संशयवाद और बुद्धि का ठहराव सरकार की आलोचना भारत के ख़ुफ़िया तंत्र की नींव तक फैली हुई है। मैकगर ने नोट किया कि जुलाई 1950 में निदेशक के रूप में संजीव पिल्लई को हटाने के बाद इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) का विस्तार गंभीर रूप से बाधित हुआ था। प्रधान मंत्री नेहरू “भौगोलिक रूप से व्यापक” खुफिया नेटवर्क की आवश्यकता पर गहराई से संदेह करते रहे, प्रसिद्ध रूप से यह कहते रहे कि ऐसा बुनियादी ढांचा “हमारी क्षमता से परे” था। सूत्रों का कहना है कि मजबूत, स्वतंत्र खुफिया जानकारी में निवेश करने की अनिच्छा ने भारत को भू-राजनीतिक पुनर्संरेखण के एक महत्वपूर्ण युग के दौरान कमजोर बना दिया, एक खालीपन जिसे कांग्रेस पार्टी ने कथित तौर पर विदेशी संरक्षण से भरा था। ‘समर्पण’ की विडंबना वर्तमान प्रशासन का तर्क है कि इस पृष्ठभूमि में देखने पर राहुल गांधी की “आत्मसमर्पण” की बयानबाजी गहरी विडंबनापूर्ण है। जबकि 2026 के व्यापार समझौते पर आर्थिक लचीलेपन के उद्देश्य से एक पारदर्शी, द्विपक्षीय समझौते के रूप में बातचीत की जा रही है, ऐतिहासिक रिकॉर्ड बताते हैं कि कांग्रेस पार्टी ने एक बार प्रांतीय चुनावों में हेरफेर करने के लिए गुप्त विदेशी फंडिंग स्वीकार की थी। सरकारी समर्थकों का सुझाव है कि डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन के तहत आज का “अमेरिका फर्स्ट” संरेखण भारत के $ 5-ट्रिलियन अर्थव्यवस्था लक्ष्यों का एक व्यावहारिक अनुसरण है, जबकि ऐतिहासिक “इंदिरा-सीआईए” लिंक लोकतांत्रिक प्रक्रिया के प्रत्यक्ष समझौते का प्रतिनिधित्व करता है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना पहले प्रकाशित: 11 फरवरी, 2026, 17:37 IST समाचार राजनीति भारत-अमेरिका व्यापार समझौता विवाद: कांग्रेस के पुराने ‘शीत युद्ध के रहस्य’ ने खड़ा किया नया राजनीतिक तूफान अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)अमेरिका-भारत व्यापार समझौता(टी)डोनाल्ड ट्रम्प(टी)नरेंद्र मोदी(टी)व्यापार समझौता(टी)सीआईए(टी)शीत युद्ध(टी)संयुक्त राज्य अमेरिका(टी)कांग्रेस