शिवपुरी में सड़क हादसा, हेल्पर की मौत:अमोला घाटी पर खड़े टैंकर में डंपर ने मारी टक्कर, चालक फरार

शिवपुरी जिले के सुरवाया थाना क्षेत्र में मंगलवार रात एक सड़क हादसे में डंपर हेल्पर की मौत हो गई। अमोला घाटी स्थित एनएच-27 पर खड़े एक टैंकर में पीछे से आ रहे डंपर ने टक्कर मार दी थी। मृतक की पहचान मुरैना निवासी अजीत गुर्जर के रूप में हुई है। यह हादसा मंगलवार रात करीब 11 बजे हुआ। टक्कर इतनी जोरदार थी कि डंपर में सवार हेल्पर केबिन में फंस गया। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और काफी प्रयासों के बाद हेल्पर को बाहर निकाला। उसे गंभीर हालत में मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। हादसे के बाद डंपर चालक फरार हादसे के बाद डंपर चालक मौके से फरार हो गया। पुलिस उसकी तलाश कर रही है। बताया गया है कि शिवपुरी की ओर आ रहा टैंकर रास्ते में खराब हो गया था, जिसके कारण उसे हाइवे किनारे खड़ा किया गया था। इसी दौरान तेज रफ्तार डंपर ने पीछे से उसमें टक्कर मार दी। पुलिस ने बताया कि दुर्घटनाग्रस्त टैंकर खाली था। सुरवाया पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
खड़ी फसल में आग, 50 एकड़ में लगा गेहूं खाक:रायसेन में फायर ब्रिगेड का पानी हुआ खत्म, 25 से ज्यादा ट्रैक्टर चलाए तब पाया काबू

रायसेन में बुधवार दोपहर गेहूं की खड़ी फसल में भीषण आग लग गई। आग में करीब 50 एकड़ में लगी फसल जलकर राख हो गई। आग इतनी तेजी से फैली कि किसानों को संभलने का मौका नहीं मिला। आग की लपटों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए किसानों ने अपनी जान जोखिम में डालकर ट्रैक्टर और पेड़ों की टहनियों का उपयोग कर आग बुझाने का प्रयास किया। देखें तीन तस्वीरें फायर ब्रिगेड का पानी खत्म हुआ घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन के अधिकारी सहित सांची नगर पालिका की दमकल टीमें मौके पर पहुंची लगातार आग बुझाने में जुटी रहीं। इसी बीच फायर ब्रिगेड का पानी भी खत्म हो गया। अभी आग लगने का कारण स्पष्ट नहीं हो पाया है प्रारंभिक जांच में शॉर्ट सर्किट और नरवाई से आग लगा बताया जा रहा है हालांकि किसानों ने बिजली कंपनी पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। इन किसानों के खेतों की फसल जली इस भीषण आग में दीवान सिंह, अवतार सिंह, बदन सिंह, सुरेंद्र पटेल, रामबाबू पटेल, बहादुर सिंह, संदीप ठाकुर, अतर ठाकुर, गोलू ठाकुर, संजू ठाकुर और ओंकार सिंह सहित कई किसानों की फसलें जलकर खाक हो गईं। कटाई से ठीक पहले हुई इस घटना से किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। महीनों की मेहनत कुछ ही मिनटों में राख में बदल गई, जिससे उनके सामने अब आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। प्रशासन नुकसान का आकलन कर रहा है।
इजराइल की हाइफा ऑयल रिफाइनरी पर मिसाइल अटैक:पेट्रोल टैंक में आग लगी; फारस की खाड़ी में भारत के 18 जहाज मौजूद

अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग का आज 32वां दिन हैं। लेबनान के ईरान समर्थन उग्रवादी संगठन हिजबुल्लाह ने दावा किया कि उसने सोमवार इजराइल के उत्तरी शहर हाइफा में ऑयल रिफाइनरी पर ईरानी मिसाइल से हमला किया। हमले के बाद रिफाइनरी परिसर में एक पेट्रोल टैंक में आग लग गई, जिससे इलाके में घना धुआं फैल गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह इम्पैक्ट हाइफा के इंडस्ट्रियल जोन में हुआ। अभी तक यह साफ नहीं है कि हमला सीधे मिसाइल से हुआ या इंटरसेप्ट किए गए मलबे के कारण। एहतियात के तौर पर स्थानीय प्रशासन ने लोगों को घरों की खिड़कियां बंद रखने और बाहर न निकलने की सलाह दी थी। ईरान जंग के बीच फारस की खाड़ी में भारत के 18 जहाज और 485 भारतीय क्रू मौजूद हैं। जलमार्ग मंत्रालय ने बताया कि ये सभी सुरक्षित हैं और हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है। अमेरिकी हमले में ईरान का विमान डैमेज ईरान में सोमवार को महान एयरलाइंस का एक प्लेन अमेरिकी हमले में क्षतिग्रस्त हो गया। यह विमान मशहद एयरपोर्ट पर खड़ा था और नई दिल्ली आने वाला था। इसका मकसद भारत से दवाइयों और दूसरी जरूरी राहत सामग्री लेकर जाना था। हालांकि, इस हमले को लेकर अमेरिका की ओर से अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ईरान जंग से जुड़ी 3 तस्वीरें… ईरान-इजराइल जंग से जुड़े पल-पल के अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…
गंजबासौदा में तेज हवा के साथ बूंदाबांदी:गेहूं कटाई के बीच बदला मौमस, किसान बोले- 70 प्रतिशत फसल अभी खेतों में खड़ी

गंजबासौदा में सोमवार रात करीब 8 बजे मौसम बदला। तेज हवा के साथ शुरू हुई हल्की बूंदाबांदी और आसमान में कड़कती बिजली ने किसानों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। हालांकि बारिश कुछ देर बाद रुक गई, लेकिन छाए हुए काले बादलों ने फसल बर्बादी का डर पैदा कर दिया है। किसान अमन शर्मा ने बताया कि इस समय गेहूं की कटाई का काम जोर-शोर से चल रहा है, लेकिन अब तक केवल 30 प्रतिशत काम ही पूरा हो पाया है। करीब 70 प्रतिशत फसल अभी भी खेतों में खड़ी है या कटने के इंतजार में है। ऐसे में तेज हवा से फसल गिरने और बारिश से दाने गीले होने का खतरा मंडरा रहा है। किसानों की दोहरी मुसीबत किसान हेमराज कुशवाहा के मुताबिक, सुबह तक मौसम बिल्कुल साफ था और किसी को अंदेशा नहीं था कि शाम को पानी गिरेगा। अब अचानक बदले मिजाज से किसान जल्द से जल्द कटाई निपटाने की जुगत में लग गए हैं। किसानों को डर है कि अगर गेहूं गीला हुआ तो उसका रंग खराब हो जाएगा और मंडी में सही दाम नहीं मिलेंगे। खेत गीले होने पर मशीन (हार्वेस्टर) चलाना मुश्किल हो जाएगा, जिससे काम हफ्तों पिछड़ सकता है। फिलहाल, तेज हवा और बादलों की लुकाछिपी से गंजबासौदा के किसान चिंतित है। सभी की नजरें अब आसमान पर टिकी हैं कि कहीं झमाझम बारिश उनकी साल भर की मेहनत पर पानी न फेर दे।
राजगढ़ में खड़ी बस को ट्राले ने मारी टक्कर:सवारी उतारते वक्त हादसा, दो किशोर घायल; टक्कर मारकर भागा ड्राइवर

राजगढ़ जिले के भोजपुर थाना क्षेत्र में सोमवार शाम 7:30 बजे ढाबला जोड़ पर एक सड़क हादसा हो गया। यहां सवारी उतार रही राजस्थान रोडवेज की बस को पीछे से आ रहे एक तेज रफ्तार ट्राले ने टक्कर मार दी। इस हादसे में बस में सवार दो किशोर यात्री घायल हो गए। घायलों की पहचान भोपाल निवासी निकेश पिता जगदीश (15) और निकेश पिता प्रभुलाल (16) के रूप में हुई है। दोनों को प्राथमिक उपचार के लिए खिलचीपुर अस्पताल ले जाया गया, जहां से उन्हें जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। टक्कर इतनी भीषण थी कि बस का पिछला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। सड़क किनारे खड़ी थी बस जानकारी के अनुसार, राजस्थान रोडवेज की बस (क्रमांक RJ14 PE 5046) कोटा से लगभग 30 सवारियां लेकर ब्यावरा की ओर जा रही थी। ढाबला जोड़ के पास कुछ यात्रियों को उतारने के लिए ड्राइवर ने बस सड़क किनारे खड़ी की थी। इसी दौरान पीछे से आ रहे ट्राले ने बस को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर के बाद ट्राला ड्राइवर वाहन लेकर मौके से फरार हो गया। दूसरी बस में बैठाकर सवारियों को रवाना किया घटना की सूचना मिलते ही टीआई उमाशंकर मुकाती ने त्वरित कार्रवाई की। पुलिस ने ढाबला क्षेत्र के सरपंच ढाबे के पास से टक्कर मारकर भाग रहे ट्राले को पकड़ लिया और उसे थाने ले आई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, टक्कर की आवाज इतनी तेज थी कि आसपास के लोगों को लगा जैसे कोई विस्फोट हुआ हो। हादसे के बाद बस में सवार यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। क्षतिग्रस्त बस को चालक और कंडक्टर खिलचीपुर ले गए, जबकि अन्य सवारियों को दूसरी बस में बैठाकर उनके गंतव्य के लिए रवाना किया गया। पुलिस ने मामले में शिकायत दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।
सड़क किनारे खड़ा यह पेड़ क्यों है इतना खास? महिलाओं और पाचन के लिए रामबाण, जानिए इसके पत्तों के फायदे

Last Updated:March 24, 2026, 15:25 IST अशोक का पेड़ सिर्फ धार्मिक और वास्तु महत्व ही नहीं रखता, बल्कि इसके पत्ते आयुर्वेद में औषधि के रूप में भी उपयोग किए जाते हैं. महिलाओं के स्वास्थ्य से लेकर पाचन, त्वचा और मधुमेह तक कई समस्याओं में इसके फायदे बताए जाते हैं, हालांकि इसके उपयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है. अशोक के वृक्ष के पत्ते औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं, जो मुख्य रूप से महिलाओं में मासिक धर्म की समस्याओं, स्त्री रोगों, रक्तस्राव को रोकने, सूजन कम करने और पेट के कीड़ों के इलाज में फायदेमंद हैं. इनके एंटीऑक्सीडेंट और एंटीमाइक्रोबियल गुण त्वचा संबंधी विकारों, किडनी की पथरी, मधुमेह और तनाव को दूर करने में भी मदद करते हैं. डॉक्टर रवि आर्य ने बताया कि अशोक के पेड़ के पत्ते और छाल पेट के स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं. यह पाचन क्रिया को सुधारने, कब्ज, पेट फूलने और पेट में मरोड़ या दर्द से राहत दिलाने में मदद करते हैं. इसके अलावा, इसके पत्ते पेट के कीड़ों को नष्ट करने में भी सहायक होते हैं. अशोक के पेड़ (सरका असोका) के पत्ते एंटीबैक्टीरियल, एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर होते हैं. ये त्वचा की समस्याओं जैसे पिंपल्स, मुंहासे, संक्रमण और खुजली को ठीक करने में फायदेमंद हैं. इनके उपयोग से त्वचा में निखार आता है और दाग-धब्बों को कम करने के साथ सूजन को शांत करने में भी सहायक होते हैं. Add News18 as Preferred Source on Google अशोक के वृक्ष के पत्ते दर्द, सूजन और त्वचा संबंधी समस्याओं के लिए फायदेमंद होते हैं. इनमें मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी और एनाल्जेसिक गुण शरीर के दर्द, जोड़ों के दर्द, फोड़े-फुंसी और घावों को ठीक करने में मदद करते हैं. इसका उपयोग काढ़े या लेप के रूप में किया जाता है. अशोक के पत्तों में हाइपोग्लाइसेमिक गुण होते हैं, जो रक्त शर्करा को कम करने में मदद कर सकते हैं. आप अशोक की पत्तियों का काढ़ा या पाउडर का सेवन कर सकते हैं. इसके अलावा, संतुलित आहार और नियमित व्यायाम के साथ इसका उपयोग मधुमेह प्रबंधन में सहायक हो सकता है. डॉक्टर से परामर्श जरूर लें. अशोक के वृक्ष के पत्ते औषधीय और वास्तु दोनों दृष्टियों से फायदेमंद माने जाते हैं. ये स्त्री रोगों (अनियमित पीरियड्स, ल्यूकोरिया), पेट की समस्याओं (कब्ज, सूजन), बवासीर, मधुमेह, त्वचा संक्रमण और बुखार के इलाज में उपयोगी हैं. साथ ही, इसके पत्तों का इस्तेमाल घर में नकारात्मकता दूर करने और धन वृद्धि के लिए भी किया जाता है. अशोक के वृक्ष के पत्ते औषधीय रूप से सेहत के लिए फायदेमंद होते हैं, लेकिन इसका सेवन करने से पहले चिकित्सक की सलाह लेना जरूरी है. बिना चिकित्सक की सलाह के इनका सेवन नहीं करना चाहिए, क्योंकि गलत उपयोग से यह सेहत के लिए नुकसानदायक भी हो सकते हैं. First Published : March 24, 2026, 15:25 IST
युद्ध के बीच तेल-गैस से ईरान की रिकॉर्ड कमाई:खर्ग टर्मिनल से सप्लाई जारी; खाड़ी देशों का प्रोडक्शन 70% तक गिरा

अमेरिका-इजराइल के साथ युद्ध लड़ रहे ईरान ने जंग को भी अवसर में बदल दिया है। अमेरिका ने खर्ग आइलैंड के पास सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया, लेकिन वैश्विक तेल संकट के डर से तेल टर्मिनल को सीधे निशाना नहीं बनाया। इसी का फायदा उठाते हुए ईरान ने खर्ग टर्मिनल चालू रखा और ‘घोस्ट फ्लीट’ के जरिए चीन को सप्लाई जारी रखी है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी और एसएंडपी ग्लोबल के मुताबिक, ईरान रोजाना 1.7 से 2 मिलियन बैरल तेल एक्सपोर्ट कर रहा है, जिसमें बड़ा हिस्सा चीन जा रहा है। देश के करीब 90% तेल का एक्सपोर्ट अभी भी खर्ग टर्मिनल से हो रहा है। साउथ पारस गैस फील्ड पर हमले से एक्सपोर्ट प्रभावित हुआ, लेकिन गैस सप्लाई पूरी तरह बंद नहीं हुई। रिपोर्ट है कि होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले विदेशी जहाजों से ईरान करीब 16.5 करोड़ रुपए प्रति जहाज ‘वॉर टैक्स’ भी वसूल रहा है। खाड़ी देशों का प्रोडक्शन 70% तक गिरा ईरान की होर्मुज स्ट्रेट पर पकड़ और लगातार हमलों के कारण सऊदी अरब, कतर, इराक, कुवैत और यूएई जैसे खाड़ी देशों की सप्लाई प्रभावित हुई है। सुरक्षित समुद्री रास्तों की कमी, बढ़ते हमले और लॉजिस्टिक्स बाधाओं के चलते इन देशों का कुल उत्पादन 70% तक गिर गया है। होर्मुज स्ट्रेट बंद करने से इन पांच देशों की सप्लाई पर असर… ———– ये खबर भी पढ़ें… रिपोर्ट- ईरान से सीजफायर वार्ता करना चाहते हैं ट्रम्प:ईरान की शर्त- पहले मुआवजा दो, आगे हमला नहीं होगा इसकी गारंटी भी चाहिए अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग का आज 22वां दिन है। ईरानी नेवी ने 13 मार्च की रात को एक भारतीय जहाज को सुरक्षित तरीके से होर्मुज स्ट्रेट पार कराया था। LPG लेकर आ रहा ये जहाज 10 दिन से फारस की खाड़ी में फंसा था। यह खबर ब्लूमबर्ग ने दी है। पूरी खबर पढ़ें…
‘पिछले दरवाजे की राजनीति काम नहीं करेगी’: टीएमसी के कुणाल घोष का कहना है कि बंगाल ममता के साथ खड़ा है विशेष | चुनाव समाचार

आखरी अपडेट:मार्च 19, 2026, 08:53 IST पार्टी के प्रवक्ता ने कहा कि भबनीपुर में मुख्यमंत्री “50,000 से अधिक वोटों के अंतर से जीतेंगे” बुधवार को कुणाल घोष ने बेलेघाटा में दीवार लेखन और निर्वाचन क्षेत्र में घर-घर जाकर अभियान चलाकर अपना अभियान शुरू किया। (न्यूज़18) तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के वरिष्ठ नेता, जाने-माने पत्रकार और पार्टी के प्रवक्ता कुणाल घोष ने पश्चिम बंगाल में एसआईआर अभ्यास को भाजपा द्वारा “पिछले दरवाजे की राजनीति” का सहारा लेने का प्रयास बताया है, यह देखते हुए कि “साजिशों” के बावजूद, लोग मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को वोट देंगे। News18 के साथ एक साक्षात्कार में, टीएमसी के लंबे समय से सहयोगी घोष, जो संगठनात्मक और सार्वजनिक दोनों स्तरों पर पार्टी की गतिविधियों में निकटता से शामिल रहे हैं, ने आगामी चुनावों में अपने गृह क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने की जिम्मेदारी के साथ उन पर भरोसा करने के लिए शीर्ष अधिकारियों को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा, “मैं बेहद खुश और आभारी हूं। मैं लंबे समय से पार्टी से जुड़ा हुआ हूं। मैंने पहले राज्यसभा सांसद के रूप में कार्य किया है, और अन्य समय में, मैंने संगठन के एक साधारण सैनिक के रूप में काम किया है। मुझे यह जिम्मेदारी देने के लिए मैं दीदी, अभिषेक बनर्जी और पार्टी नेतृत्व को दिल से धन्यवाद देता हूं। बेलेघाटा मेरा गृह निर्वाचन क्षेत्र है – मेरा जन्म यहीं हुआ था। हमारी पार्टी में, हम सभी सैनिक हैं; हर कोई समान रूप से महत्वपूर्ण है। हम सभी ममता बनर्जी के सैनिक हैं, और हम भारी बहुमत से जीतेंगे।” उन रिपोर्टों को खारिज करते हुए कि एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) ने पार्टी के लिए तनाव पैदा कर दिया है, उन्होंने कहा: “उन्हें (भाजपा) बंगाल में विश्वास नहीं है। वे दबाव बनाने के लिए केंद्रीय एजेंसियों का उपयोग करके पिछले दरवाजे की राजनीति का सहारा लेते हैं – कभी सीबीआई के माध्यम से, कभी ईडी के माध्यम से। लेकिन हमारे पास एक कहावत है: ‘हर मौसम में, हमारा भरोसा ममता बनर्जी पर रहता है।’ तमाम साजिशों के बावजूद बंगाल की जनता उन्हें वोट देगी. यह निश्चित है।” घोष ने ब्रिगेड ग्राउंड में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की रैली का भी मजाक उड़ाया, उन्होंने कहा कि मतदाताओं की तुलना में अधिक बांस के खंभे थे और कहा कि “अकेले भीड़ परिवर्तन में तब्दील नहीं होती है”। “कोई “परिवर्तन” या “प्रत्यावर्तन” नहीं होगा। हमने पहले भी ऐसी सभाएँ देखी हैं। एसयूसीआई की ब्रिगेड रैलियों ने महत्वपूर्ण भीड़ खींची है। अंततः, यह लोगों का जनादेश है जो मायने रखता है।” उन्होंने कहा कि भवानीपुर में, “ममता बनर्जी 50,000 से अधिक वोटों के अंतर से जीत हासिल करेंगी”। बुधवार को घोष ने बेलेघाटा में दीवार लेखन और निर्वाचन क्षेत्र में घर-घर जाकर अभियान चलाकर अपना अभियान शुरू किया। पहले प्रकाशित: मार्च 19, 2026, 08:47 IST समाचार चुनाव ‘पिछले दरवाजे की राजनीति काम नहीं करेगी’: टीएमसी के कुणाल घोष का कहना है कि बंगाल ममता के साथ खड़ा है अनन्य अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)कुणाल घोष(टी)तृणमूल कांग्रेस(टी)टीएमसी नेता(टी)ममता बनर्जी(टी)बीजेपी पिछले दरवाजे की राजनीति(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव(टी)बेलेघाटा निर्वाचन क्षेत्र(टी)एसआईआर अभ्यास
Iran War: बम से ज्यादा कहीं दवाई के बगैर मर न जाए खाड़ी देशों की जनता! सप्लाई चेन टूटने से त्राहिमाम

Last Updated:March 16, 2026, 23:04 IST Iran War Disrupt Drug Supply Chain: ईरान युद्ध ने बम, गोला-बारूद से जितनी तबाही मचा रही है, वह तो हम सबके सामने है लेकिन इस जंग की वजह से कहीं ऐसा न हो जाए कि खाड़ी देशों के लोग दवाई के बगैर मरने लगे. दरअसल, जब से अमेरिका-इजरायल का ईरान पर हमला हुआ है तब से खाड़ी देशों में हवाई और जल मार्ग बुरी तरह प्रभावित हुई है. इस कारण जरूरी दवाइयां इन देशों तक नहीं पहुंच रही है. ईरान-इजरायल, अमेरिका युद्ध के बाद ड्रग सप्लाई चेन बाधित. सांकेतिक तस्वीर. Iran War impact: ईरान युद्ध को करीब दो सप्ताह होने को है. दनदनाती मिसाइलों की गर्जना और कलस्टर बमों के शोर से जन-जीवन तो अस्त-व्यस्त हो ही चुका लेकिन आम लोगों के जीवन की डोर हिचकोले खाने लगे हैं. ऐसे में इस युद्ध में बम-बारूद से लोग मरे या न मरें दवाइयों की किल्लत से शायद जरूर मर जाएंगे. युद्ध ने जिस तरह से हवाई सेवा को प्रभावित किया है, उसमें आवश्यक दवाइयों की खेप आनी बंद हो गई. इस कारण दवाइयों का सप्लाई चेन टूट गया है. यह सिर्फ एक देश की बात नहीं है बल्कि पूरे खाड़ी देशों में दवाइयों का सप्लाई चेन प्रभावित हो रहा है. कैंसर जैसी बीमारियों के इलाज के लिए जरूरी ‘कोल्ड-चेन’ दवाओं की सप्लाई भी बाधित हुई है. मेडिकल उपकरण में देरी जानलेवारायटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक एक अधिकारी ने बताया कि अगर किसी मरीज की तुरंत सर्जरी होनी है और वह इलाज का इंतजार कर रहा है, तो आपको मजबूरी में हवाई मार्ग ही चुनना पड़ता है. इमरजेंसी सामान जैसे दवाइयां या मेडिकल उपकरण के लिए देरी जानलेवा हो सकती है. इसलिए महंगा और लंबा होने के बावजूद हवाई रास्ता ही चुना जा रहा है. एक्सपर्ट के मुताबिक कैंसर जैसी संवेदनशील दवाओं का स्टॉक आमतौर पर केवल तीन महीने का होता है. काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस के प्रशांत यादव कहते हैं कि कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली मोनोक्लोनल एंटीबॉडीज जैसी दवाओं पर सबसे बड़ा खतरा है. कुछ ग्राहकों ने चेतावनी दी है कि अगर स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो अगले 4 से 6 हफ्तों में उनके पास दवाओं की भारी कमी हो जाएगी. मूडिस के डेविड वीक्स ने चिंता जताते हुए कहा है कि कभी-कभी दवा की कमी नहीं होती, बल्कि उसे पैक करने या इस्तेमाल करने वाली चीजों की कमी हो जाती है. जैसे दवा की शीशियों के ढक्कन, आईवी बैग के प्लास्टिक और पैकेजिंग का सामान. अगर ये छोटी चीजें भी कम पड़ीं, तो दवाओं की पूरी सप्लाई चेन रुक सकती है. कैंसर मरीजों के लिए मुसीबतखाड़ी देश दवाइयों के लिए मुख्य रूप पश्चिमी देशों पर निर्भर है. बहुत सारी ऐसी दवाइयां होती है जिसकी एक्सपायरी डेट बहुत कम होती है. ऐसी दवाइयां जीवन रक्षक कैटगरी में ज्यादा आती है. यानी अगर ये दवाइयां कम होगी तो जो इन दवाइयों पर निर्भर मरीज हैं, उनके लिए भारी मुसीबतों का सामना करना पड़ सकता है. इंडस्टी के अधिकारियों का कहना है कि मध्य पूर्व में जारी युद्ध की वजह से खाड़ी देशों तक जरूरी दवाओं की पहुंच में बाधा आ रही है. सबसे ज्यादा कैंसर के इलाज की दवाओं और अन्य ऐसी दवाओं के लिए खतरा पैदा हो गया है, जिन्हें फ्रीजिंग की जरूरत होती है. अधिकारियों का कहना है कि वे खाड़ी देशों तक पहुंचने के लिए वैकल्पिक रास्ते तलाश रहे हैं. रास्ते बदलने पर विचारइस संकट के कारण कंपनियों को अपनी उड़ानों के रास्ते बदलने पड़ रहे हैं और क्षेत्र में सामान पहुंचाने के लिए जमीन के रास्ते तलाशने पड़ रहे हैं. वे सऊदी अरब के जेद्दा और रियाद जैसे हवाई अड्डों से ट्रकों के जरिए दवाएं भेज रहे हैं. खाड़ी देशों से सटी है तुर्की जो इस युद्ध में शामिल नहीं है. इसलिए अधिकारी इस्तांबुल और ओमान के विकल्पों पर भी विचार कर रहे हैं. हालांकि इससे केवल दवाएं ही नहीं, बल्कि भोजन और ईंधन की सप्लाई भी इस युद्ध की चपेट में है. कुछ अधिकारियों का कहना है कि हालांकि अभी तक दवाओं की कोई बड़ी किल्लत नहीं दिखी है, लेकिन अगर यह युद्ध लंबा खिंचता है तो स्थिति बदल सकती है. खाड़ी देश आयात पर बहुत अधिक निर्भर हैं और कुछ दवाओं की ‘एक्सपायरी डेट’ बहुत कम होती है, साथ ही उन्हें सख्त ‘कोल्ड-चेन स्टोरेज’ (ठंडे तापमान) की जरूरत होती है. ऐसे में जमीन के लंबे रास्तों से शिपिंग करना व्यावहारिक नहीं रह जाता. 20 प्रतिशत सप्लाई चेन प्रभावितहमले के बाद दुबई, अबू धाबी और दोहा जैसे इस क्षेत्र के प्रमुख हवाई अड्डे बंद कर दिए गए हैं. दुबई और दोहा यूरोप को एशिया और अफ्रीका से जोड़ने वाले बड़े कार्गो हब हैं. एमिरेट्स, एतिहाद जैसी एयरलाइंस और डीएचएल जैसी कंपनियां उन दवाओं को लाने-ले जाने का काम करती हैं, जिन्हें सुरक्षित और असरदार बनाए रखने के लिए एक निश्चित तापमान के भीतर रखना अनिवार्य होता है. एंटवर्प मैनेजमेंट स्कूल के प्रोफेसर वाउटर ड्यूल्फ ने उद्योग के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि दुनिया के कुल हवाई माल ढुलाई का 20% से अधिक हिस्सा मध्य पूर्व के इस तनाव की वजह से प्रभावित हो रहा है. गौर करने वाली बात यह है कि जीवन रक्षक दवाओं और टीकों की सप्लाई के लिए हवाई मार्ग ही सबसे मुख्य रास्ता होता है. चीन, सिंगापुर रास्तों की तलाशएक अधिकारी ने रायटर्स से बात करते हुए चेतावनी दी कि संवेदनशील दवाओं के लिए कोल्ड-चेन कॉरिडोर को रातों-रात तैयार नहीं किए जा सकते और ये हर जगह उपलब्ध भी नहीं होते. एक दवा कंपनी के कार्यकारी अधिकारी ने बताया कि उन्होंने कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की दवाओं की सप्लाई को प्राथमिकता देने के लिए आंतरिक टीमें बनाई हैं. इसके साथ ही आगाह किया कि यदि सही स्टोरेज और हैंडलिंग सुनिश्चित नहीं की गई, तो तापमान-संवेदनशील दवाओं की खेप खराब हो सकती है. वहीं एक मेडिकल डिवाइस कंपनी के अधिकारी कहते हैं कि उनकी प्राथमिकता अभी उन शिपमेंट की पहचान करना है जो रास्ते में हैं या निकलने के लिए तैयार हैं. इसके बाद ही यह तय किया जाएगा कि किन दवाओं का रास्ता बदलना है और किनके लिए नई योजना बनानी है. एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त
हनी सिंह ने फिर विवाद खड़ा किया:बोले- मेरा शो सुपरहिट, बाकियों का जैन-जी लैंग्वेज में 6-7; फैंस बोले- करण औजला को टारगेट किया

पंजाबी रैपर-सिंगर यो यो हनी सिंह ने दूसरे सिंगर्स पर कमेंट कर फिर विवाद खड़ा कर दिया है। दिल्ली के IGI स्टेडियम में माय स्टोरी वर्ल्ड टूर के इंडियन चैप्टर में संडे नाइट के दौरान हनी सिंह ने ये कमेंट किया। हनी सिंह ने कहा- यो यो हनी सिंह का शो होता है सुपरहिट, बाकियों का जेन जी (Gen Z) की लैंग्वेज में सिक्स-सेवन (6-7) है। इस दौरान हनी सिंह ने 6-7 सेवन बोलते हुए आवाज की टोन भी बदली और इशारे भी किए। जिसके बाद फैंस इसे पंजाबी सिंगर करण औजला से जोड़कर देख रहे हैं। हालांकि, हनी सिंह ने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन अब इंस्टाग्राम पर औजला और हनी सिंह के फैंस एक-दूसरे पर कमेंटबाजी कर रहे हैं। कुछ फैंस बचाव भी कर रहे हैं कि हनी सिंह ने ये बात करण औजला नहीं, बल्कि रैपर बादशाह के लिए कही है। करण औजला भी इन दिनों टूर पर हैं। शनिवार को ही उन्होंने मोहाली में शो किया था। जिसके बाद फैंस ज्यादा संभावना करण औजला से ही जोड़ रहे हैं। हालांकि, औजला का इसको लेकर कोई रिएक्शन नहीं आया है। हनी सिंह के बयान के 2 मतलब निकाले जा रहे हनी और औजला का विवाद क्यों शुरू हुआ हनी सिंह ने कमबैक के बाद कई इंटरव्यू दिए, जिसमें उन्होंने कहा कि आज के पंजाबी कलाकार उनके बनाए रास्ते पर चल रहे हैं। हनी सिंह ने एक बार यह तक कह दिया कि वह आजकल के गानों को बहुत ज्यादा नहीं सुनते। उन्हें लगता है कि म्यूजिक का लेवल गिर गया है। इसके बाद करण औजला ने एक इंटरव्यू में अपनी मेहनत के साथ आज के टाइम के संगीत को सक्सेसफुल बताया था। करण औजला ने कहा था- मैं सबकी रिस्पेक्ट करता हूं, लेकिन म्यूजिक बदल रहा है। अगर आप समय के साथ नहीं बदलेंगे, तो आप पीछे रह जाएंगे। इसके बाद कुछ फैंस ने माना कि करण औजला ने हनी सिंह को जवाब दिया है। इसके बाद फैंस ने माना कि दोनों के बीच कोल्ड वार शुरू हो गई है। फैंस आपस में भिड़े इंस्टाग्राम पर हनी सिंह के कमेंट के बाद उनके व करण औजला के फैंस आपस में भिड़ गए। हनी सिंह के फैंस ने कहा कि हनी सिंह ने ही इंडिया में रैप कल्चर शुरू किया था, इसलिए वह कमबैक के बाद भी टॉप पर हैं। वहीं, करण औजला के फैंस का मानना है कि हनी सिंह अब ‘अप्रासंगिक’ इरेलिवेंट हो रहे हैं। वह जलन की वजह से नए कलाकारों को नीचा दिखा रहे हैं।









