Wednesday, 15 Jul 2026 | 06:35 AM

Trending :

हरियाणा में अश्लील कंटेंट पर विवाद:इन्फ्लुएंसर्स ने कहा- डांसरों पर पैसे उड़ाने वाले बुजुर्गों को रोको, सपना चौधरी पर सॉफ्ट पोर्न देने का आरोप पिता की मौत का दर्द कैमरे पर उतरा:युवराज पाराशर ने बताया कैसे निजी दर्द फिल्म का सबसे भावुक दृश्य बना पिता की मौत का दर्द कैमरे पर उतरा:युवराज पाराशर ने बताया कैसे निजी दर्द फिल्म का सबसे भावुक दृश्य बना भारत-UK के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट आज से लागू:व्हिस्की, कारें और कपड़े सस्ते मिलेंगे; जानें किन चीजों के दाम बदलेंगे Padmakumar, Siddharth Menon & Vidhatri Bandi on Therapy & Relationships भारत-UK के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट आज से लागू:व्हिस्की, कारें और कपड़े सस्ते मिलेंगे; जानें किन चीजों के दाम बदलेंगे
EXCLUSIVE

न्यूक्लियर इमरजेंसी की तैयारी में खाड़ी देश:चंडीगढ़ की दवा कंपनी से 1 करोड़ कैप्सूल की क्षमता पूछी, कई देशों में सप्लाई की संभावना

न्यूक्लियर इमरजेंसी की तैयारी में खाड़ी देश:चंडीगढ़ की दवा कंपनी से 1 करोड़ कैप्सूल की क्षमता पूछी, कई देशों में सप्लाई की संभावना

ईरान-इजराइल जंग के बीच खाड़ी देशों ने संभावित न्यूक्लियर इमरजेंसी से निपटने की तैयारी तेज कर दी है। बहरीन स्थित एक फार्मा लायजनिंग एजेंट ने चंडीगढ़ की एक दवा कंपनी से संपर्क कर परमाणु आपदा में इस्तेमाल होने वाले प्रशियन ब्लू कैप्सूल के बारे में जानकारी मांगी है। एजेंट ने कंपनी से पूछा है कि क्या वह 1 करोड़ कैप्सूल बना सकती है। साथ ही अलग-अलग आयु वर्ग के लोगों के लिए इसकी डोज कितनी होती है और कंपनी की उत्पादन क्षमता क्या है, जैसे कई सवाल भी पूछे गए हैं। कंपनी की डायरेक्टर डॉ. वैशाली अग्रवाल के अनुसार, इस विषय पर बातचीत जारी है। फिलहाल एजेंट अपने देश के स्वास्थ्य मंत्रालय से इस बारे में चर्चा कर रहा है। अगर समझौता हो जाता है तो इन दवाओं की सप्लाई बहरीन, कुवैत, कतर और जॉर्डन जैसे खाड़ी देशों में की जा सकती है। कंपनी का मुख्यालय चंडीगढ़ में है, जबकि इसकी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट हिमाचल प्रदेश के बद्दी में स्थित है। इससे पहले जून 2025 में इजराइल-ईरान तनाव के दौरान भी इस दवा की मांग सामने आई थी, लेकिन 12 दिन में संघर्ष खत्म होने के बाद बातचीत आगे नहीं बढ़ पाई थी। जानिए, कैसे काम करती है प्रशियन ब्लू प्रशियन ब्लू परमाणु हमले या रेडियोलॉजिकल आपदा के दौरान इस्तेमाल होने वाली महत्वपूर्ण दवा है। यह शरीर में प्रवेश कर चुके रेडियोएक्टिव तत्व सीजियम-137 और थैलियम के प्रभाव को कम करती है। यह कैप्सूल आंतों में इन रेडियोएक्टिव तत्वों से जुड़कर उन्हें मल के जरिए शरीर से बाहर निकालने में मदद करता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसे रेडियोलॉजिकल और न्यूक्लियर इमरजेंसी में उपयोग होने वाली जरूरी दवाओं की सूची में शामिल किया है। अमेरिका और यूरोप में यह दवा पहले से बनाई जाती रही है, जबकि भारत में इसका कॉमर्शियल उत्पादन लगभग दो साल पहले शुरू हुआ है। यह दवा डीआरडीओ की दिल्ली स्थित लैब आईएनएमएएस (इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूक्लियर मेडिसिन एंड अलाइड साइंसेस) की तकनीक पर आधारित है। डीसीजीआई ने भारत की दो कंपनियों को इसके निर्माण और मार्केटिंग का लाइसेंस दिया है। इसमें अहमदाबाद की कंपनी को कच्चा माल उपलब्ध कराने और चंडीगढ़ की कंपनी को उत्पादन की जिम्मेदारी दी गई है। पोटेशियम आयोडाइड की भी बड़ी मांग बहरीन के एजेंट ने पोटेशियम आयोडाइड (केआई) टैबलेट को लेकर भी जानकारी मांगी है। इसके लिए करीब 1.2 करोड़ टैबलेट की संभावित मांग जताई गई है। पोटेशियम आयोडाइड का उपयोग न्यूक्लियर इमरजेंसी में थायराइड ग्रंथि को रेडिएशन से बचाने के लिए किया जाता है। इसके अलावा इसका इस्तेमाल हाइपरथायरायडिज्म के इलाज और फेफड़ों में जमा बलगम को ढीला करने में भी किया जाता है।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
राहुल गांधी का कोलकाता दौरा रद्द:प्रशासन पर परमिशन नहीं देने का आरोप; शाह बोले- बंगाल में बाबरी मस्जिद नहीं बनने देंगे

April 22, 2026/
5:01 am

कांग्रेस नेता राहुल गांधी का 23 अप्रैल को कोलकाता दौरा रद्द कर दिया गया है। पार्टी का आरोप है कि...

विजयवर्गीय बोले-एसपी को बचाने अनुनय की थी दिग्विजय ने:विधानसभा समितियों के पावर विधानसभा जैसे, सदस्य चाहें तो अधिकारी की खाट खड़ी कर सकते हैं

April 8, 2026/
8:45 am

संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने विधानसभा की समितियों को विधानसभा के बराबर बताते हुए कहा है कि इन समितियों...

IPL में आज बेंगलुरु के सामने गुजरात:पाटीदार इस सीजन 22 सिक्स लगा चुके; दोनों का हेड टु हेड बराबरी पर

April 24, 2026/
4:30 am

IPL-2026 के 34वें मैच में आज रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) का सामना गुजरात टाइटंस (GT) से होगा। मुकाबला बेंगलुरु के...

Punjab Warehouse Suicide Case | CBI Probe Demand by Randhawas Wife

March 24, 2026/
5:00 am

अमृतसर में वेयरहाउस के डिस्ट्रिक्ट मैनेजर (DM) गगनदीप सिंह रंधावा सुसाइड केस में पूर्व AAP मंत्री लालजीत भुल्लर की तीसरे...

Aamir Khan Marries Girlfriend Gauri Khan July 5

July 3, 2026/
9:05 am

2 मिनट पहले कॉपी लिंक बॉलीवुड एक्टर आमिर खान ने गुरुवार को पब्लिकली अपनी तीसरी शादी को कन्फर्म कर दिया...

राजनीति

न्यूक्लियर इमरजेंसी की तैयारी में खाड़ी देश:चंडीगढ़ की दवा कंपनी से 1 करोड़ कैप्सूल की क्षमता पूछी, कई देशों में सप्लाई की संभावना

न्यूक्लियर इमरजेंसी की तैयारी में खाड़ी देश:चंडीगढ़ की दवा कंपनी से 1 करोड़ कैप्सूल की क्षमता पूछी, कई देशों में सप्लाई की संभावना

ईरान-इजराइल जंग के बीच खाड़ी देशों ने संभावित न्यूक्लियर इमरजेंसी से निपटने की तैयारी तेज कर दी है। बहरीन स्थित एक फार्मा लायजनिंग एजेंट ने चंडीगढ़ की एक दवा कंपनी से संपर्क कर परमाणु आपदा में इस्तेमाल होने वाले प्रशियन ब्लू कैप्सूल के बारे में जानकारी मांगी है। एजेंट ने कंपनी से पूछा है कि क्या वह 1 करोड़ कैप्सूल बना सकती है। साथ ही अलग-अलग आयु वर्ग के लोगों के लिए इसकी डोज कितनी होती है और कंपनी की उत्पादन क्षमता क्या है, जैसे कई सवाल भी पूछे गए हैं। कंपनी की डायरेक्टर डॉ. वैशाली अग्रवाल के अनुसार, इस विषय पर बातचीत जारी है। फिलहाल एजेंट अपने देश के स्वास्थ्य मंत्रालय से इस बारे में चर्चा कर रहा है। अगर समझौता हो जाता है तो इन दवाओं की सप्लाई बहरीन, कुवैत, कतर और जॉर्डन जैसे खाड़ी देशों में की जा सकती है। कंपनी का मुख्यालय चंडीगढ़ में है, जबकि इसकी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट हिमाचल प्रदेश के बद्दी में स्थित है। इससे पहले जून 2025 में इजराइल-ईरान तनाव के दौरान भी इस दवा की मांग सामने आई थी, लेकिन 12 दिन में संघर्ष खत्म होने के बाद बातचीत आगे नहीं बढ़ पाई थी। जानिए, कैसे काम करती है प्रशियन ब्लू प्रशियन ब्लू परमाणु हमले या रेडियोलॉजिकल आपदा के दौरान इस्तेमाल होने वाली महत्वपूर्ण दवा है। यह शरीर में प्रवेश कर चुके रेडियोएक्टिव तत्व सीजियम-137 और थैलियम के प्रभाव को कम करती है। यह कैप्सूल आंतों में इन रेडियोएक्टिव तत्वों से जुड़कर उन्हें मल के जरिए शरीर से बाहर निकालने में मदद करता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसे रेडियोलॉजिकल और न्यूक्लियर इमरजेंसी में उपयोग होने वाली जरूरी दवाओं की सूची में शामिल किया है। अमेरिका और यूरोप में यह दवा पहले से बनाई जाती रही है, जबकि भारत में इसका कॉमर्शियल उत्पादन लगभग दो साल पहले शुरू हुआ है। यह दवा डीआरडीओ की दिल्ली स्थित लैब आईएनएमएएस (इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूक्लियर मेडिसिन एंड अलाइड साइंसेस) की तकनीक पर आधारित है। डीसीजीआई ने भारत की दो कंपनियों को इसके निर्माण और मार्केटिंग का लाइसेंस दिया है। इसमें अहमदाबाद की कंपनी को कच्चा माल उपलब्ध कराने और चंडीगढ़ की कंपनी को उत्पादन की जिम्मेदारी दी गई है। पोटेशियम आयोडाइड की भी बड़ी मांग बहरीन के एजेंट ने पोटेशियम आयोडाइड (केआई) टैबलेट को लेकर भी जानकारी मांगी है। इसके लिए करीब 1.2 करोड़ टैबलेट की संभावित मांग जताई गई है। पोटेशियम आयोडाइड का उपयोग न्यूक्लियर इमरजेंसी में थायराइड ग्रंथि को रेडिएशन से बचाने के लिए किया जाता है। इसके अलावा इसका इस्तेमाल हाइपरथायरायडिज्म के इलाज और फेफड़ों में जमा बलगम को ढीला करने में भी किया जाता है।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.