Thursday, 01 Oct 2026 | 02:28 PM

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भारतीय शेयर बाजार को साउथ कोरिया ने पीछे छोड़ा:AI में तेजी से मार्केट कैप ₹475 लाख करोड़ हुआ, भारत की वैल्यू ₹456 लाख करोड़

भारतीय शेयर बाजार को साउथ कोरिया ने पीछे छोड़ा:AI में तेजी से मार्केट कैप ₹475 लाख करोड़ हुआ, भारत की वैल्यू ₹456 लाख करोड़

साउथ कोरिया का शेयर बाजार भारत को पछाड़कर दुनिया का छठा सबसे बड़ा मार्केट बन गया है। इस तेजी की बड़ी वजह चिप बनाने वाली दिग्गज कंपनियां हैं, जो दुनिया भर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल के दम पर लगातार रिकॉर्ड बना रही हैं। ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के मुताबिक, इस साल साउथ कोरिया की लिस्टेड कंपनियों की कुल मार्केट कैप 86% बढ़कर 5 ट्रिलियन डॉलर (करीब 475 लाख करोड़ रुपए) पर पहुंच गई है। दूसरी तरफ, भारतीय शेयर बाजार की मार्केट कैप घटकर 4.8 ट्रिलियन डॉलर (करीब 456 लाख करोड़ रुपए) रह गई है। अमेरिकी शेयर बाजार का मार्केट कैप 78 ट्रिलियन सोर्स: ब्लूमबर्ग भारतीय बाजार के पिछड़ने की 3 मुख्य वजहें भारतीय शेयर बाजार के दुनिया में एक पायदान नीचे खिसकने के पीछे जानकारों ने तीन बड़े कारण बताए हैं: इकोनॉमी के मामले में भारत अभी भी साउथ कोरिया से दोगुने से ज्यादा बड़ा भले ही शेयर बाजार के वैल्यूएशन (मार्केट कैप) के मामले में साउथ कोरिया ने भारत को पछाड़ दिया हो, लेकिन देश की अर्थव्यवस्था (GDP) के आकार के मामले में भारत अब भी साउथ कोरिया से बहुत आगे है। इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) के अनुमानों के मुताबिक, भारत की इकोनॉमी का साइज 4.15 लाख करोड़ डॉलर ($4.15 ट्रिलियन) है और यह दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। वहीं, साउथ कोरिया की जीडीपी महज 1.93 लाख करोड़ डॉलर ($1.93 ट्रिलियन) है, जो भारत के मुकाबले आधे से भी कम है। मार्केट कैप क्या होता है? किसी भी देश के शेयर बाजार की ‘मार्केट कैपिटलाइजेशन’ का मतलब वहां की सभी लिस्टेड कंपनियों के शेयरों की कुल कीमत होती है। अगर किसी देश का मार्केट कैप बढ़ रहा है, तो इसका मतलब है कि वहां की कंपनियों में निवेशकों का भरोसा बढ़ रहा है।

भारतीय शेयर बाजार को साउथ कोरिया ने पीछे छोड़ा:AI में तेजी से मार्केट कैप ₹475 लाख करोड़ हुआ, भारत की वैल्यू ₹456 लाख करोड़

भारतीय शेयर बाजार को साउथ कोरिया ने पीछे छोड़ा:AI में तेजी से मार्केट कैप ₹475 लाख करोड़ हुआ, भारत की वैल्यू ₹456 लाख करोड़

साउथ कोरिया का शेयर बाजार भारत को पीछे छोड़कर दुनिया का छठा सबसे बड़ा मार्केट बन गया है। इसकी बड़ी वजह चिप बनाने वाली दिग्गज कंपनियां हैं, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल के दम पर लगातार रिकॉर्ड बना रही हैं। ब्लूमबर्ग के अनुसार इस साल साउथ कोरिया की लिस्टेड कंपनियों की कुल मार्केट कैप 86% बढ़कर 5 ट्रिलियन डॉलर (करीब 475 लाख करोड़ रुपए) पर पहुंच गई है। वहीं, भारतीय शेयर बाजार की मार्केट कैप घटकर 4.8 ट्रिलियन डॉलर (करीब 456 लाख करोड़ रुपए) रह गई है। भारतीय बाजार के पिछड़ने की 3 मुख्य वजहें भारतीय शेयर बाजार के दुनिया में एक पायदान नीचे खिसकने के पीछे जानकारों ने तीन बड़े कारण बताए हैं: इकोनॉमी के मामले में भारत अभी भी साउथ कोरिया से दोगुने से ज्यादा बड़ा भले ही शेयर बाजार के वैल्यूएशन (मार्केट कैप) के मामले में साउथ कोरिया ने भारत को पछाड़ दिया हो, लेकिन देश की अर्थव्यवस्था (GDP) के आकार के मामले में भारत अब भी साउथ कोरिया से बहुत आगे है। इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) के अनुमानों के मुताबिक, भारत की इकोनॉमी का साइज 4.15 लाख करोड़ डॉलर (4.15 ट्रिलियन डॉलर) है और यह दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। वहीं, साउथ कोरिया की GDP महज 1.93 लाख करोड़ डॉलर (1.93 ट्रिलियन डॉलर) है, जो भारत के मुकाबले आधे से भी कम है। मार्केट कैप क्या होता है? किसी भी देश के शेयर बाजार की ‘मार्केट कैपिटलाइजेशन’ का मतलब वहां की सभी लिस्टेड कंपनियों के शेयरों की कुल कीमत होती है। अगर किसी देश का मार्केट कैप बढ़ रहा है, तो इसका मतलब है कि वहां की कंपनियों में निवेशकों का भरोसा बढ़ रहा है।

दिलजीत दोसांझ के शो से खालिस्तानी धक्के मारकर निकाले:टोरंटो के कॉन्सर्ट में झंडे लेकर पहुंचे, पुलिस ने भीड़ से खींच-खींचकर पकड़े

दिलजीत दोसांझ के शो से खालिस्तानी धक्के मारकर निकाले:टोरंटो के कॉन्सर्ट में झंडे लेकर पहुंचे, पुलिस ने भीड़ से खींच-खींचकर पकड़े

पंजाबी सिंगर और एक्टर दिलजीत दोसांझ के 31 मई की रात टोरंटो कॉन्सर्ट में खालिस्तानी झंडे लेकर पहुंच गए। कनाडा के टोरंटो स्थित फेमस रॉजर्स सेंटर स्टेडियम में शो के बीच कुछ दर्शकों ने खालिस्तानी झंडे लहराए और शो को खराब करने की कोशिश की। घटना पर इस बार पहले से तैयार पुलिस टीम ने भीड़ में घुसकर खालिस्तानियों को धक्के देकर बाहर निकाल दिया। इसका एक वीडियो भी सामने आया है। इसमें साफ दिख रहा है कि सुरक्षाकर्मी स्टेडियम की भीड़ से गुजरते हुए झंडा लहराने वालों को धक्का देकर बाहर निकाल रहे हैं। घटना उस समय हुई जब दिलजीत परफॉर्म कर रहे थे और हजारों फैंस उनका उत्साह बढ़ा रहे थे। आयोजकों और लोकल पुलिस ने तुरंत एक्शन लिया, जिससे शो बिना ज्यादा रुकावट के जारी रहा। इस घटना ने सोशल मीडिया पर खालिस्तानियों को लेकर बहस छेड़ दी है। फैंस दिलजीत के स्टैंड की तारीफ कर रहे हैं तो दूसरी तरफ प्रो-खालिस्तान एक्टिविस्ट्स इसे मुद्दा बना रहे हैं। 3 पॉइंट में जानिए शो के दौरान क्या हुआ… दिलजीत कह चुके, हुड़दंगियों को बाहर निकालें इस घटना से पहले दिलजीत ने 11 मई 2026 को इंस्टाग्राम स्टोरीज पर खालिस्तानियों और उनके शो में हुड़दंग करने वालों को लेकर लिखा था कि बाहर प्रोटेस्ट करना किसी का भी अधिकार है, लेकिन अंदर आकर मेरे फैंस को हरास करना बर्दाश्त नहीं होगा। अगर कोई बैनर या झंडा लेकर आता है तो वह सपोर्ट दिखाने के लिए हो सकता है, लेकिन अगर बाहर गाली-गलौज कर रहे हैं और अंदर भी वही ड्रामा करेंगे तो नहीं चलेगा। मैंने सिक्योरिटी को कहा है कि जो प्रोग्राम खराब करे, उसे उठाकर बाहर फेंक दो। मैं किसी झंडे या बैनर के खिलाफ नहीं हूं, फेक नैरेटिव न फैलाएं। जानें कब-कब खालिस्थानी डाल चुके खलल ***************** ये खबर भी पढ़ें: पंजाबी सिंगर दिलजीत नहीं लड़ेंगे चुनाव: बोले-मैं नि:स्वार्थ सेवा करता हूं, वोट नहीं चाहिए; बचपन के दोस्त को भी करवाया रूबरू पंजाबी सिंगर दिलजीत दोसांझ ने कनाडा के शो में अपने दोस्त तजिंदर सिंह कोहली को लोगों के रू-ब-रू करवाया। दिलजीत ने कहा कि ये वो लड़ता है जिसने पंजाब में बाढ़ के दिनों में काम किया। ये 6 महीने तक अपने घर नहीं गया। मैंने इलेक्शन नहीं लड़ता है और न ही किसी से वोट लेने हैं। (पढ़ेंं पूरी खबर)

रणवीर सिंह विवाद के बीच फिल्म एसोसिएशन के खिलाफ याचिका:प्रोड्यूसर टीपी अग्रवाल ने बैन लगाने के अधिकार को दी चुनौती, कहा- यह गैरकानूनी है

रणवीर सिंह विवाद के बीच फिल्म एसोसिएशन के खिलाफ याचिका:प्रोड्यूसर टीपी अग्रवाल ने बैन लगाने के अधिकार को दी चुनौती, कहा- यह गैरकानूनी है

फिल्म प्रोड्यूसर और फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया (FFI) के पूर्व अध्यक्ष टीपी अग्रवाल ने फिल्म एसोसिएशनों की ओर से कलाकारों पर लगाए जाने वाले बैन के खिलाफ कोर्ट का रुख किया है। अग्रवाल ने मुंबई की दिंडोशी सिविल कोर्ट में फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज (FWICE) और इंडियन मोशन पिक्चर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (IMPPA) के खिलाफ याचिका दायर की है। उनका कहना है कि किसी भी संस्था के पास किसी कलाकार पर काम करने से रोकने या नॉन-कोऑपरेशन का निर्देश जारी करने का कानूनी अधिकार नहीं है। कोर्ट ने दोनों संगठनों को नोटिस जारी कर दिया है। रणवीर सिंह विवाद के बीच उठाया कदम यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब हाल ही में FWICE ने बॉलीवुड एक्टर रणवीर सिंह के खिलाफ नॉन-कोऑपरेशन यानी असहयोग का निर्देश जारी किया था। रणवीर सिंह का प्रोडक्शन हाउस एक्सेल एंटरटेनमेंट के साथ फिल्म ‘डॉन 3’ फिल्म छोड़ने के बाद से विवाद चल रहा है। इसके बाद फेडरेशन ने अपने सदस्यों को रणवीर के साथ काम न करने के लिए कहा था। इसी तरह के बॉयकॉट के फैसलों को टीपी अग्रवाल ने कोर्ट में चुनौती दी है। उनका कहना है कि इस तरह के फैसले कलाकारों की आजीविका को नुकसान पहुंचाते हैं। संगठन को बैन लगाने का अधिकार नहीं अग्रवाल ने अपनी याचिका में दलील दी है कि फिल्म इंडस्ट्री से जुड़ी कोई भी ट्रेड बॉडी या एसोसिएशन कानूनन किसी व्यक्ति को काम करने से नहीं रोक सकती। उन्होंने कहा कि फिल्म इंडस्ट्री आपसी सहयोग से चलती है। इस तरह के मामलों को सही कानूनी और प्रोफेशनल तरीकों से सुलझाया जाना चाहिए। किसी को काम करने से रोकने की कोशिश को हल्के में नहीं लिया जा सकता। इससे लोगों के काम करने की आजादी और क्रिएटिविटी पर सीधा असर पड़ता है। फिल्म फेडरेशन के अध्यक्ष रह चुके टीपी अग्रवाल टीपी अग्रवाल फिल्म इंडस्ट्री के सबसे सीनियर और प्रभावशाली चेहरों में से एक हैं। वे 17 साल तक इम्पा (IMPPA) के अध्यक्ष रह चुके हैं। इसके अलावा वे चार बार फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया (FFI) के अध्यक्ष भी चुने गए। वर्तमान में वे FFI और IMPPA दोनों संगठनों में संरक्षक (पेट्रन) के पद पर हैं। डॉन 3 छोड़ने के बाद शुरू हुआ विवाद रणवीर सिंह और फेडरेशन के बीच यह विवाद तब शुरू हुआ जब एक्टर ने अचानक फरहान अख्तर की फिल्म ‘डॉन 3’ से अलग होने का फैसला किया। फेडरेशन का आरोप है कि रणवीर के इस फैसले से फिल्म का शेड्यूल बिगड़ गया और प्रोड्यूसर्स को 45 करोड़ का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। इसी शिकायत के बाद FWICE ने 25 मई को रणवीर के खिलाफ नॉन-कोऑपरेशन डायरेक्टिव जारी किया था। हालांकि यह कोई कानूनी बैन नहीं है, लेकिन इसके कारण फिल्म की शूटिंग के दौरान लॉजिस्टिक्स और वर्कर्स को जुटाने में दिक्कतें आ सकती हैं।

रणवीर सिंह विवाद के बीच फिल्म एसोसिएशन के खिलाफ याचिका:प्रोड्यूसर टीपी अग्रवाल ने बैन लगाने के अधिकार को दी चुनौती, कहा- यह गैरकानूनी है

रणवीर सिंह विवाद के बीच फिल्म एसोसिएशन के खिलाफ याचिका:प्रोड्यूसर टीपी अग्रवाल ने बैन लगाने के अधिकार को दी चुनौती, कहा- यह गैरकानूनी है

फिल्म प्रोड्यूसर और फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया (FFI) के पूर्व अध्यक्ष टीपी अग्रवाल ने फिल्म एसोसिएशनों की ओर से कलाकारों पर लगाए जाने वाले बैन के खिलाफ कोर्ट का रुख किया है। अग्रवाल ने मुंबई की दिंडोशी सिविल कोर्ट में फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज (FWICE) और इंडियन मोशन पिक्चर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (IMPPA) के खिलाफ याचिका दायर की है। उनका कहना है कि किसी भी संस्था के पास किसी कलाकार पर काम करने से रोकने या नॉन-कोऑपरेशन का निर्देश जारी करने का कानूनी अधिकार नहीं है। कोर्ट ने दोनों संगठनों को नोटिस जारी कर दिया है। रणवीर सिंह विवाद के बीच उठाया कदम यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब हाल ही में FWICE ने बॉलीवुड एक्टर रणवीर सिंह के खिलाफ नॉन-कोऑपरेशन यानी असहयोग का निर्देश जारी किया था। रणवीर सिंह का प्रोडक्शन हाउस एक्सेल एंटरटेनमेंट के साथ फिल्म ‘डॉन 3’ फिल्म छोड़ने के बाद से विवाद चल रहा है। इसके बाद फेडरेशन ने अपने सदस्यों को रणवीर के साथ काम न करने के लिए कहा था। इसी तरह के बॉयकॉट के फैसलों को टीपी अग्रवाल ने कोर्ट में चुनौती दी है। उनका कहना है कि इस तरह के फैसले कलाकारों की आजीविका को नुकसान पहुंचाते हैं। संगठन को बैन लगाने का अधिकार नहीं अग्रवाल ने अपनी याचिका में दलील दी है कि फिल्म इंडस्ट्री से जुड़ी कोई भी ट्रेड बॉडी या एसोसिएशन कानूनन किसी व्यक्ति को काम करने से नहीं रोक सकती। उन्होंने कहा कि फिल्म इंडस्ट्री आपसी सहयोग से चलती है। इस तरह के मामलों को सही कानूनी और प्रोफेशनल तरीकों से सुलझाया जाना चाहिए। किसी को काम करने से रोकने की कोशिश को हल्के में नहीं लिया जा सकता। इससे लोगों के काम करने की आजादी और क्रिएटिविटी पर सीधा असर पड़ता है। फिल्म फेडरेशन के अध्यक्ष रह चुके टीपी अग्रवाल टीपी अग्रवाल फिल्म इंडस्ट्री के सबसे सीनियर और प्रभावशाली चेहरों में से एक हैं। वे 17 साल तक इम्पा (IMPPA) के अध्यक्ष रह चुके हैं। इसके अलावा वे चार बार फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया (FFI) के अध्यक्ष भी चुने गए। वर्तमान में वे FFI और IMPPA दोनों संगठनों में संरक्षक (पेट्रन) के पद पर हैं। डॉन 3 छोड़ने के बाद शुरू हुआ विवाद रणवीर सिंह और फेडरेशन के बीच यह विवाद तब शुरू हुआ जब एक्टर ने अचानक फरहान अख्तर की फिल्म ‘डॉन 3’ से अलग होने का फैसला किया। फेडरेशन का आरोप है कि रणवीर के इस फैसले से फिल्म का शेड्यूल बिगड़ गया और प्रोड्यूसर्स को 45 करोड़ का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। इसी शिकायत के बाद FWICE ने 25 मई को रणवीर के खिलाफ नॉन-कोऑपरेशन डायरेक्टिव जारी किया था। हालांकि यह कोई कानूनी बैन नहीं है, लेकिन इसके कारण फिल्म की शूटिंग के दौरान लॉजिस्टिक्स और वर्कर्स को जुटाने में दिक्कतें आ सकती हैं।

महबूब खान ने बदला नाम और फातिमा बन गईं नरगिस:नरगिस की 97वीं जयंती पर जानते हैं उनकी जिंदगी से जुड़े रोमांचक किस्से

महबूब खान ने बदला नाम और फातिमा बन गईं नरगिस:नरगिस की 97वीं जयंती पर जानते हैं उनकी जिंदगी से जुड़े रोमांचक किस्से

‘आवारा’, ‘श्री 420’ और ‘मदर इंडिया’ जैसी कल्ट फिल्मो की अभिनेत्री नरगिस दत्त सिर्फ एक स्टार नहीं, हिंदी सिनेमा की एक विरासत थीं। अपने करियर में 50 से ज्यादा फिल्मों में काम करने वाली नरगिस की 97वीं जयंती पर जानते हैं उनकी जिंदगी से जुड़े कुछ रोमांचक किस्से। नरगिस का जन्म ऐसे परिवार में हुआ, जहां कला और संगीत विरासत का हिस्सा थे। उनकी मां जद्दन बाई अपने दौर की मशहूर गायिका, संगीतकार, फिल्म निर्माता और अभिनेत्री थीं। बचपन में नरगिस का नाम फातिमा तेजेश्वरी रखा गया था, लेकिन फिल्मकार महबूब खान ने उन्हें नया नाम दिया- नरगिस। उनका मानना था कि ‘न’ अक्षर से शुरू होने वाले नाम भाग्यशाली होते हैं। महज 14 वर्ष की उम्र में नरगिस को महबूब खान की फिल्म ‘तकदीर’ मिली। स्क्रीन टेस्ट के दौरान ही उनकी प्रतिभा ने सभी को प्रभावित कर दिया और वे रातोंरात फिल्मी दुनिया की नई खोज बन गईं। हालांकि उनकी औपचारिक शिक्षा सीमित रही, लेकिन वे हिंदी, उर्दू, अंग्रेजी, गुजराती और मराठी भाषाएं जानती थीं। इतना ही नहीं, वे अच्छी सितार वादक भी थीं और उन्होंने उस्ताद विलायत खान से सितार सीखा था। फिल्मों में आने से पहले वे ‘बेबी रानी’ के नाम से जानी जाती थीं। राजकपूर के साथ एक अधूरी प्रेमकथा नरगिस और राज कपूर की कहानी हिंदी सिनेमा की सबसे चर्चित प्रेम कहानियों में शामिल है। दिलचस्प बात यह है कि दोनों की पहली मुलाकात तब हुई थी, जब वे बच्चे थे। वर्षों बाद जब राज अपनी पहली फिल्म ‘आग’ के लिए नायिका की तलाश कर रहे थे, तो उनकी पसंद नरगिस पर जाकर रुकी। ‘आग’ के साथ शुरू हुई यह साझेदारी जल्द ही निजी रिश्ते में बदल गई। 1948 से 1956 के बीच दोनों ने लगभग 16 फिल्मों में साथ काम किया और उनकी जोड़ी दर्शकों की पसंदीदा बन गई। ‘बरसात’, ‘आवारा’ और ‘श्री 420’ जैसी फिल्मों ने उन्हें पर्दे का सबसे लोकप्रिय रोमांटिक जोड़ा बना दिया। करीबी मित्र और अभिनेत्री निम्मी के अनुसार…‘दोनों एक-दूसरे को प्यार से ‘बेब्स’ और ‘बेबी’ कहकर बुलाते थे। लेकिन इस रिश्ते की सबसे बड़ी बाधा यह थी कि राज पहले से शादीशुदा थे।‘ ‘मदर इंडिया’ ने बदली नरगिस की जिंदगी 1957 में आई ‘मदर इंडिया’ सिर्फ एक फिल्म नहीं थी, बल्कि भारतीय सिनेमा का मील का पत्थर साबित हुई। इसी फिल्म ने नरगिस को अभिनय के उस शिखर पर पहुंचाया, जहां बहुत कम कलाकार पहुंच पाते हैं। लेकिन शूटिंग के दौरान घटी एक घटना ने उनकी निजी जिंदगी भी बदल दी। शूटिंग के दौरान सेट पर लगी आग में नरगिस फंस गईं। उस समय सुनील दत्त ने अपनी जान जोखिम में डालकर उन्हें बाहर निकाला। इस हादसे में दोनों घायल हुए, लेकिन यहीं से उनके बीच भावनात्मक नजदीकियां बढ़ीं। धीरे-धीरे यह रिश्ता प्रेम में बदल गया और 1958 में दोनों ने विवाह कर लिया। उन दिनों उनके रिश्ते को लेकर कई तरह की चर्चाएं और अफवाहें भी उड़ीं, लेकिन सुनील दत्त हर परिस्थिति में नरगिस के साथ खड़े रहे। विवाह के बाद नरगिस ने फिल्मों से लगभग दूरी बना ली और पूरी तरह परिवार को समय देना शुरू कर दिया। सुनील दत्त उन्हें प्यार से मनरो कहकर बुलाते थे, जबकि नरगिस ने उन्हें फ्रैंसली नाम दिया था।

महबूब खान ने बदला नाम और फातिमा बन गईं नरगिस:नरगिस की 97वीं जयंती पर जानते हैं उनकी जिंदगी से जुड़े रोमांचक किस्से

महबूब खान ने बदला नाम और फातिमा बन गईं नरगिस:नरगिस की 97वीं जयंती पर जानते हैं उनकी जिंदगी से जुड़े रोमांचक किस्से

‘आवारा’, ‘श्री 420’ और ‘मदर इंडिया’ जैसी कल्ट फिल्मो की अभिनेत्री नरगिस दत्त सिर्फ एक स्टार नहीं, हिंदी सिनेमा की एक विरासत थीं। अपने करियर में 50 से ज्यादा फिल्मों में काम करने वाली नरगिस की 97वीं जयंती पर जानते हैं उनकी जिंदगी से जुड़े कुछ रोमांचक किस्से। नरगिस का जन्म ऐसे परिवार में हुआ, जहां कला और संगीत विरासत का हिस्सा थे। उनकी मां जद्दन बाई अपने दौर की मशहूर गायिका, संगीतकार, फिल्म निर्माता और अभिनेत्री थीं। बचपन में नरगिस का नाम फातिमा तेजेश्वरी रखा गया था, लेकिन फिल्मकार महबूब खान ने उन्हें नया नाम दिया- नरगिस। उनका मानना था कि ‘न’ अक्षर से शुरू होने वाले नाम भाग्यशाली होते हैं। महज 14 वर्ष की उम्र में नरगिस को महबूब खान की फिल्म ‘तकदीर’ मिली। स्क्रीन टेस्ट के दौरान ही उनकी प्रतिभा ने सभी को प्रभावित कर दिया और वे रातोंरात फिल्मी दुनिया की नई खोज बन गईं। हालांकि उनकी औपचारिक शिक्षा सीमित रही, लेकिन वे हिंदी, उर्दू, अंग्रेजी, गुजराती और मराठी भाषाएं जानती थीं। इतना ही नहीं, वे अच्छी सितार वादक भी थीं और उन्होंने उस्ताद विलायत खान से सितार सीखा था। फिल्मों में आने से पहले वे ‘बेबी रानी’ के नाम से जानी जाती थीं। राजकपूर के साथ एक अधूरी प्रेमकथा नरगिस और राज कपूर की कहानी हिंदी सिनेमा की सबसे चर्चित प्रेम कहानियों में शामिल है। दिलचस्प बात यह है कि दोनों की पहली मुलाकात तब हुई थी, जब वे बच्चे थे। वर्षों बाद जब राज अपनी पहली फिल्म ‘आग’ के लिए नायिका की तलाश कर रहे थे, तो उनकी पसंद नरगिस पर जाकर रुकी। ‘आग’ के साथ शुरू हुई यह साझेदारी जल्द ही निजी रिश्ते में बदल गई। 1948 से 1956 के बीच दोनों ने लगभग 16 फिल्मों में साथ काम किया और उनकी जोड़ी दर्शकों की पसंदीदा बन गई। ‘बरसात’, ‘आवारा’ और ‘श्री 420’ जैसी फिल्मों ने उन्हें पर्दे का सबसे लोकप्रिय रोमांटिक जोड़ा बना दिया। करीबी मित्र और अभिनेत्री निम्मी के अनुसार…‘दोनों एक-दूसरे को प्यार से ‘बेब्स’ और ‘बेबी’ कहकर बुलाते थे। लेकिन इस रिश्ते की सबसे बड़ी बाधा यह थी कि राज पहले से शादीशुदा थे।‘ ‘मदर इंडिया’ ने बदली नरगिस की जिंदगी 1957 में आई ‘मदर इंडिया’ सिर्फ एक फिल्म नहीं थी, बल्कि भारतीय सिनेमा का मील का पत्थर साबित हुई। इसी फिल्म ने नरगिस को अभिनय के उस शिखर पर पहुंचाया, जहां बहुत कम कलाकार पहुंच पाते हैं। लेकिन शूटिंग के दौरान घटी एक घटना ने उनकी निजी जिंदगी भी बदल दी। शूटिंग के दौरान सेट पर लगी आग में नरगिस फंस गईं। उस समय सुनील दत्त ने अपनी जान जोखिम में डालकर उन्हें बाहर निकाला। इस हादसे में दोनों घायल हुए, लेकिन यहीं से उनके बीच भावनात्मक नजदीकियां बढ़ीं। धीरे-धीरे यह रिश्ता प्रेम में बदल गया और 1958 में दोनों ने विवाह कर लिया। उन दिनों उनके रिश्ते को लेकर कई तरह की चर्चाएं और अफवाहें भी उड़ीं, लेकिन सुनील दत्त हर परिस्थिति में नरगिस के साथ खड़े रहे। विवाह के बाद नरगिस ने फिल्मों से लगभग दूरी बना ली और पूरी तरह परिवार को समय देना शुरू कर दिया। सुनील दत्त उन्हें प्यार से मनरो कहकर बुलाते थे, जबकि नरगिस ने उन्हें फ्रैंसली नाम दिया था।

चार बार की चैंपियन इगा स्वियातेक फ्रेंच ओपन से बाहर:यूक्रेन की कोस्त्युक ने हराया; महिला अंपायर पर कमेंट करने वाले खिलाड़ी पर जुर्माना

चार बार की चैंपियन इगा स्वियातेक फ्रेंच ओपन से बाहर:यूक्रेन की कोस्त्युक ने हराया; महिला अंपायर पर कमेंट करने वाले खिलाड़ी पर जुर्माना

फ्रेंच ओपन 2026 के विमेंस सिंगल्स में सोमवार को बड़ा उलटफेर हुआ। यूक्रेन की 15वीं वरीय मार्ता कोस्त्युक ने चार बार की चैंपियन और तीसरी वरीय इगा स्वियातेक को 7-5, 6-1 से हराकर बाहर कर दिया। मुकाबला 1 घंटा 39 मिनट चला। दूसरी ओर महिला अंपायर पर कमेंट करने वाले पैराग्वे के एडोल्फो डेनियल वायेहो पर जुर्माना लगाया गया है। कोस्त्युक का मैच स्वितोलिना होगा क्वार्टर फाइनल में कोस्त्युक का सामना यूक्रेन की एलिना स्वितोलिना से होगा। स्वितोलिना ने स्विट्जरलैंड की बेलिंडा बेनसिच को हराकर अंतिम-8 में जगह बनाई। इस मुकाबले की विजेता ओपन एरा में फ्रेंच ओपन के सेमीफाइनल में पहुंचने वाली पहली यूक्रेनी महिला खिलाड़ी बनेगी। एक अन्य मैच में रोमानिया की सोराना सिर्स्तेआ ने चीन की वांग शियू को 6-3, 7-6 (4) से हराकर 17 साल बाद रोलां गैरो के क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई। यह उनके करियर का तीसरा ग्रैंड स्लैम क्वार्टर फाइनल है। अब उनका सामना रूस की मीरा एंड्रीवा से होगा। एंड्रीवा ने जिल टाइखमान को 6-3, 6-2 से हराया। पुरुषों में ज्वेरेव जीते, कैस्पर रूड बाहर पुरुष एकल वर्ग में दूसरी वरीयता प्राप्त अलेक्जेंडर ज्वेरेव ने जेस्पर डी जोंग को सीधे सेटों में हराकर अगले दौर में प्रवेश किया। ब्राजील के युवा खिलाड़ी जोआओ फोन्सेका ने कैस्पर रूड को 7-5, 7-6 (6), 5-7, 6-2 से हराकर पहली बार किसी ग्रैंड स्लैम के क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई। वायेहो पर 65,000 यूरो का जुर्माना, महिला अंपायर पर टिप्पणी की पैराग्वे के एडोल्फो डेनियल वायेहो पर 65 हजार यूरो (करीब 76 हजार डॉलर) का जुर्माना लगाया गया है। यह राशि उनके टूर्नामेंट से मिली पुरस्कार राशि की लगभग आधी है। पिछले हफ्ते दूसरे दौर में हारने के बाद वायेहो ने कहा था कि इतने कठिन मुकाबले में पुरुष अंपायर होना चाहिए था और महिला अंपायर के लिए ऐसी स्थिति संभालना मुश्किल है। फ्रैंच ओपन की डायरेक्टर अमेली मौरेस्मो ने सोमवार को कहा कि ऐसी टिप्पणियां पूरी तरह अस्वीकार्य हैं। ——————————————–

चार बार की चैंपियन इगा स्वियातेक फ्रेंच ओपन से बाहर:यूक्रेन की कोस्त्युक ने हराया; महिला अंपायर पर कमेंट करने वाले खिलाड़ी पर जुर्माना

चार बार की चैंपियन इगा स्वियातेक फ्रेंच ओपन से बाहर:यूक्रेन की कोस्त्युक ने हराया; महिला अंपायर पर कमेंट करने वाले खिलाड़ी पर जुर्माना

फ्रेंच ओपन 2026 के विमेंस सिंगल्स में सोमवार को बड़ा उलटफेर हुआ। यूक्रेन की 15वीं वरीय मार्ता कोस्त्युक ने चार बार की चैंपियन और तीसरी वरीय इगा स्वियातेक को 7-5, 6-1 से हराकर बाहर कर दिया। मुकाबला 1 घंटा 39 मिनट चला। पहले सेट में कड़ी चुनौती के बाद स्वियातेक लय खो बैठीं और दूसरे सेट में वापसी नहीं कर सकीं। हार के बाद उन्होंने कहा कि वह मैच पर नियंत्रण नहीं रख सकीं और दबाव के कारण उनका प्रदर्शन प्रभावित हुआ। कोस्त्युक ने मिले मौकों का पूरा फायदा उठाया। कोस्त्युक का मैच स्वितोलिना होगा क्वार्टर फाइनल में कोस्त्युक का सामना यूक्रेन की एलिना स्वितोलिना से होगा। स्वितोलिना ने स्विट्जरलैंड की बेलिंडा बेनसिच को हराकर अंतिम-8 में जगह बनाई। इस मुकाबले की विजेता ओपन एरा में फ्रेंच ओपन के सेमीफाइनल में पहुंचने वाली पहली यूक्रेनी महिला खिलाड़ी बनेगी। एक अन्य मैच में रोमानिया की सोराना सिर्स्तेआ ने चीन की वांग शियू को 6-3, 7-6 (4) से हराकर 17 साल बाद रोलां गैरो के क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई। यह उनके करियर का तीसरा ग्रैंड स्लैम क्वार्टर फाइनल है। अब उनका सामना रूस की मीरा एंड्रीवा से होगा। एंड्रीवा ने जिल टाइखमान को 6-3, 6-2 से हराया। पुरुषों में ज्वेरेव जीते, कैस्पर रूड बाहर पुरुष एकल वर्ग में दूसरी वरीयता प्राप्त अलेक्जेंडर ज्वेरेव ने जेस्पर डी जोंग को सीधे सेटों में हराकर अगले दौर में प्रवेश किया। ब्राजील के युवा खिलाड़ी जोआओ फोन्सेका ने कैस्पर रूड को 7-5, 7-6 (6), 5-7, 6-2 से हराकर पहली बार किसी ग्रैंड स्लैम के क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई। वायेहो पर 65,000 यूरो का जुर्माना, महिला अंपायर पर टिप्पणी की पैराग्वे के एडोल्फो डेनियल वायेहो पर 65 हजार यूरो (करीब 76 हजार डॉलर) का जुर्माना लगाया गया है। यह राशि उनके टूर्नामेंट से मिली पुरस्कार राशि की लगभग आधी है। पिछले हफ्ते दूसरे दौर में हारने के बाद वायेहो ने कहा था कि इतने कठिन मुकाबले में पुरुष अंपायर होना चाहिए था और महिला अंपायर के लिए ऐसी स्थिति संभालना मुश्किल है। फ्रैंच ओपन की डायरेक्टर अमेली मौरेस्मो ने सोमवार को कहा कि ऐसी टिप्पणियां पूरी तरह अस्वीकार्य हैं। ——————————————–

खड़गे की वापसी, कमलनाथ पर सवालिया निशान: बड़े नामों ने बढ़ाई कांग्रेस की राज्यसभा दौड़ | भारत समाचार

AP EAMCET 2026 Results Soon at cets.apsche.ap.gov.in — Steps To Check AP EAPCET Scorecard, Rank Card Today. (Representative/File Photo)

आखरी अपडेट:01 जून, 2026, 16:03 IST अपने स्वयं के नेताओं के अलावा, कांग्रेस उन राज्यों में प्रतिनिधित्व सुरक्षित करने के लिए सहयोगियों के साथ भी बातचीत कर रही है जहां उसके पास स्वतंत्र रूप से उम्मीदवारों को चुनने के लिए संख्या की कमी है। मल्लिकार्जुन खड़गे (बाएं) और कमल नाथ मैदान में बड़े नाम हैं। जैसे-जैसे 18 जून को राज्यसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं, कांग्रेस नेतृत्व वरिष्ठ नेताओं को समायोजित करने, राज्य-स्तरीय गुटीय समीकरणों को प्रबंधित करने और प्रतिकूल अंकगणित या क्रॉस-वोटिंग के कारण सीटें न खोने देने जैसे उच्च-दांव वाले संतुलन कार्य से जूझ रहा है। कई प्रमुख विपक्षी नेताओं की शर्तें समाप्त होने के साथ, आगामी चुनावों में पार्टी के भीतर इस बात पर गहन चर्चा शुरू होने की उम्मीद है कि उच्च सदन के लिए किसे और कहाँ से नामांकित किया जाए। इस मिश्रण में सबसे बड़े नामों में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे हैं, जिनका राज्यसभा कार्यकाल इस साल समाप्त हो रहा है। खड़गे के उच्च सदन में लौटने की उम्मीद है, जिससे उनका दोबारा नामांकन पार्टी के सामने सबसे कम विवादास्पद फैसलों में से एक बन जाएगा। बड़ी साज़िश मध्य प्रदेश को लेकर है, जहां कांग्रेस के पास केवल एक यथार्थवादी राज्यसभा सीट है और कई राजनीतिक पहलुओं पर विचार करना है। संसद में वापस आये कमलनाथ? मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ चुनाव से पहले सबसे चर्चित नामों में से एक बनकर उभरे हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, कांग्रेस नेतृत्व इस बात पर विचार कर रहा है कि क्या नाथ को मध्य प्रदेश से उम्मीदवार बनाया जाना चाहिए या उनकी जगह किसी अन्य उम्मीदवार को जगह दी जानी चाहिए। यह निर्णय एक राज्यसभा सीट से परे महत्व रखता है। हाल के वर्षों में अग्रिम पंक्ति की राजनीति से पीछे हटने के बावजूद नाथ राज्य में कांग्रेस के सबसे प्रभावशाली नेताओं में से एक बने हुए हैं। राज्यसभा नामांकन अनुभवी नेता के लिए नए सिरे से राष्ट्रीय भूमिका का संकेत दे सकता है। साथ ही, पार्टी को राज्य के नेताओं के प्रतिस्पर्धी दावों से निपटना होगा और ऐसे राज्य में गुटीय हितों को संतुलित करना होगा जहां वह 2020 में सत्ता खोने के बाद से उबरने के लिए संघर्ष कर रही है। दिग्विजय सिंह अलग हट गए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह द्वारा एक और राज्यसभा कार्यकाल अस्वीकार करने के बाद मुकाबला और अधिक खुला हो गया है। उनके फैसले ने एक नए सदस्य के लिए जगह खाली कर दी है, साथ ही इस बारे में अटकलें भी तेज हो गई हैं कि पार्टी अंततः अपनी संसदीय रणनीति के लिए किसे सबसे मूल्यवान मानती है। कांग्रेस नेता इस बात को लेकर सचेत हैं कि मध्य प्रदेश से चुना गया उम्मीदवार पार्टी के विधायकों को एकजुट रखने में सक्षम होना चाहिए, यह देखते हुए कि वहां केवल तीन सीटें हैं। मध्य प्रदेश में जॉर्ज कुरियन की दौड़ में भाजपा को दो सीटें मिलने की संभावना है। गठबंधन प्रबंधन भी महत्वपूर्ण अपने स्वयं के नेताओं के अलावा, कांग्रेस उन राज्यों में प्रतिनिधित्व सुरक्षित करने के लिए सहयोगियों के साथ भी बातचीत कर रही है जहां उसके पास स्वतंत्र रूप से उम्मीदवारों को चुनने के लिए संख्या की कमी है। झारखंड में पार्टी राज्यसभा सीट के लिए सहयोगी झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) पर निर्भर है। तमिलनाडु में, कांग्रेस भी अपने गठबंधन नेटवर्क के माध्यम से संभावनाएं तलाश रही है, यह रेखांकित करते हुए कि उच्च सदन में अपनी ताकत बनाए रखने के लिए क्षेत्रीय साझेदारी कैसे महत्वपूर्ण हो गई है। बातचीत पार्टी के सामने मौजूद व्यापक वास्तविकता को दर्शाती है: जबकि यह राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुख विपक्षी ताकत बनी हुई है, राज्यसभा में सदस्यों को भेजने की इसकी क्षमता कई राज्यों में गठबंधन सहयोगियों पर निर्भर करती है। क्रॉस वोटिंग का साया उम्मीदवार का चयन पार्टी अनुशासन की चिंताओं से भी प्रभावित हो रहा है। हाल के राज्यसभा चुनावों में कई राज्यों में विपक्षी विधायकों द्वारा क्रॉस-वोटिंग की घटनाएं देखी गईं, जिससे कांग्रेस के भीतर चिंता पैदा हो गई। इसलिए पार्टी नेताओं से अपेक्षा की जाती है कि वे ऐसे उम्मीदवारों का समर्थन करें जो विधायी दलों के भीतर व्यापक स्वीकार्यता प्राप्त कर सकें और गुटीय असंतोष को भड़काने से बच सकें। यह विचार उन राज्यों में विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो जाता है जहां कांग्रेस की संख्या सीट सुरक्षित करने के लिए आवश्यक सीमा से थोड़ी ही ऊपर है। एक संख्या खेल से भी अधिक कांग्रेस के लिए, राज्यसभा चुनाव एक नियमित संसदीय अभ्यास से कहीं अधिक बनता जा रहा है। वे कई वरिष्ठ नेताओं की भविष्य की भूमिकाएँ निर्धारित करेंगे, आंतरिक आकांक्षाओं को प्रबंधित करने की पार्टी की क्षमता का परीक्षण करेंगे और इसके नेतृत्व की अगली पीढ़ी के बारे में सुराग देंगे। चाहे वह खड़गे की अपेक्षित वापसी हो, कमल नाथ को लेकर अटकलें हों, या सहयोगियों के माध्यम से प्रतिनिधित्व की तलाश हो, आने वाले दिनों में पार्टी की पसंद व्यस्त चुनावी कैलेंडर से पहले उसकी प्राथमिकताओं के बारे में बहुत कुछ बताएगी। जैसे-जैसे नामांकन नजदीक आ रहे हैं, कांग्रेस के सामने अब केंद्रीय सवाल यह नहीं है कि क्या वह अपनी आवंटित सीटें जीत पाएगी, बल्कि यह है कि उसके कौन से दिग्गज अंततः उन पर कब्जा करेंगे। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया खड़गे की वापसी, कमलनाथ पर सवालिया निशान: बड़े नामों ने कांग्रेस की राज्यसभा दौड़ को गर्म कर दिया है अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)राज्यसभा चुनाव(टी)कांग्रेस की राज्यसभा रणनीति(टी)मल्लिकार्जुन खड़गे को दोबारा नामांकन(टी)कमलनाथ को राज्यसभा(टी)मध्य प्रदेश कांग्रेस की राजनीति(टी)दिग्विजय सिंह निर्णय(टी)गठबंधन प्रबंधन कांग्रेस(टी)क्रॉस वोटिंग की चिंताएं