मुंबई महिला लीग ऑक्शन- इरा जाधव की सबसे महंगी खिलाड़ी:आकाश टाइगर्स ने 10 लाख में खरीदा, U-19 में तिहरा शतक लगाया

16 साल की इरा जाधव पहली मुंबई महिला लीग नीलामी की सबसे महंगी खिलाड़ी बन गई हैं। उन्हें शनिवार को आकाश टाइगर्स ने 10 लाख रुपए में खरीदा। इरा ने पिछले साल अंडर-19 क्रिकेट में तिहरा शतक लगाया था। उन्हें आक्रामक बल्लेबाजी के लिए जाना जाता है। मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन (MCA) की ऑक्शन में कुल 363 विमेंस प्लेयर्स पर बोली लगी। इनमें से 50 खिलाड़ियों को तीन फ्रेंचाइजी ने अपनी टीम में शामिल किया। फ्रेंचाइजी ने कुल 1.47 करोड़ रुपए खर्च किए। लीग में शामिल होने वाली तीन टीमें- सोबो मुंबई फाल्कन्स, ठाणे स्काई राइजर्स और आकाश टाइगर्स हैं। जगमोहन डालमिया ट्रॉफी जीत चुकी हैं इरा इरा जाधव का हालिया प्रदर्शन शानदार रहा है। उन्हें ‘नमन अवॉर्ड्स 2026’ में बेस्ट घरेलू क्रिकेटर के लिए जगमोहन डालमिया ट्रॉफी से सम्मानित किया गया था। सिर्फ 14 साल की उम्र में उन्होंने विमेंस प्रीमियर लीग (WPL) के लिए रजिस्ट्रेशन कराया था। अब वे इस लीग में प्रदर्शन करके WPL के अगले सीजन के लिए दावा मजबूत करना चाहती हैं। सयाली, साइमा और हुमैरा बनीं ‘आइकन प्लेयर’ MCA ने लीग के पहले सीजन के लिए तीन अनुभवी खिलाड़ियों को ‘आइकन प्लेयर’ के तौर पर चुना है। भारतीय टीम का हिस्सा रह चुकीं सयाली सतघरे ‘सोबो मुंबई फाल्कन्स’ की आइकन होंगी, जबकि साइमा ठाकुर ‘ठाणे स्काई राइजर्स’ और हुमैरा काजी ‘आकाश टाइगर्स’ का प्रतिनिधित्व करेंगी। इन खिलाड़ियों का अंतरराष्ट्रीय और घरेलू अनुभव लीग के स्तर को और ऊंचा ले जाएगा। नाइक बोले- यह मुंबई क्रिकेट के लिए ऐतिहासिक शुरुआत MCA अध्यक्ष अजिंक्य नाइक ने कहा कि यह लीग भारत में महिला क्रिकेट के विकास में मील का पत्थर साबित होगी। नीलामी के लिए कुल 2,411 खिलाड़ियों ने पंजीकरण कराया था, जिनमें से अंतिम छंटनी के बाद पुरुष और महिला खिलाड़ियों की नीलामी एक साथ आयोजित की गई। जल्द ही शुरू होने वाली इस लीग से मुंबई के फैंस को रोमांचक क्रिकेट देखने की उम्मीद है। ——————————————————– महिला क्रिकेट से जुड़ी यह खबर भी पढ़िए… विमेंस टी-20 वर्ल्डकप के लिए टीम इंडिया का ऐलान BCCI ने विमेंस टी-20 वर्ल्ड कप के लिए भारतीय महिला टीम का ऐलान कर दिया है। पिछले साल वनडे वर्ल्डकप जिताने वालीं कप्तान हरमनप्रीत कौर को ही टीम की कप्तानी सौंपी गई है, जबकि स्मृति मंधाना को ही वाइस कैप्टन बनाया गया है। पढ़ें पूरी खबर
मुंबई महिला लीग ऑक्शन- इरा जाधव सबसे महंगी खिलाड़ी:आकाश टाइगर्स ने 10 लाख में खरीदा, U-19 में तिहरा शतक लगाया

16 साल की इरा जाधव पहली मुंबई महिला लीग नीलामी की सबसे महंगी खिलाड़ी बन गई हैं। उन्हें शनिवार को आकाश टाइगर्स ने 10 लाख रुपए में खरीदा। इरा ने पिछले साल अंडर-19 क्रिकेट में तिहरा शतक लगाया था। उन्हें आक्रामक बल्लेबाजी के लिए जाना जाता है। मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन (MCA) की ऑक्शन में कुल 363 विमेंस प्लेयर्स पर बोली लगी। इनमें से 50 खिलाड़ियों को तीन फ्रेंचाइजी ने अपनी टीम में शामिल किया। फ्रेंचाइजी ने कुल 1.47 करोड़ रुपए खर्च किए। लीग में शामिल होने वाली तीन टीमें- सोबो मुंबई फाल्कन्स, ठाणे स्काई राइजर्स और आकाश टाइगर्स हैं। जगमोहन डालमिया ट्रॉफी जीत चुकी हैं इरा इरा जाधव का हालिया प्रदर्शन शानदार रहा है। उन्हें ‘नमन अवॉर्ड्स 2026’ में बेस्ट घरेलू क्रिकेटर के लिए जगमोहन डालमिया ट्रॉफी से सम्मानित किया गया था। सिर्फ 14 साल की उम्र में उन्होंने विमेंस प्रीमियर लीग (WPL) के लिए रजिस्ट्रेशन कराया था। अब वे इस लीग में प्रदर्शन करके WPL के अगले सीजन के लिए दावा मजबूत करना चाहती हैं। सयाली, साइमा और हुमैरा बनीं ‘आइकन प्लेयर’ MCA ने लीग के पहले सीजन के लिए तीन अनुभवी खिलाड़ियों को ‘आइकन प्लेयर’ के तौर पर चुना है। भारतीय टीम का हिस्सा रह चुकीं सयाली सतघरे ‘सोबो मुंबई फाल्कन्स’ की आइकन होंगी, जबकि साइमा ठाकुर ‘ठाणे स्काई राइजर्स’ और हुमैरा काजी ‘आकाश टाइगर्स’ का प्रतिनिधित्व करेंगी। इन खिलाड़ियों का अंतरराष्ट्रीय और घरेलू अनुभव लीग के स्तर को और ऊंचा ले जाएगा। नाइक बोले- यह मुंबई क्रिकेट के लिए ऐतिहासिक शुरुआत MCA अध्यक्ष अजिंक्य नाइक ने कहा कि यह लीग भारत में महिला क्रिकेट के विकास में मील का पत्थर साबित होगी। नीलामी के लिए कुल 2,411 खिलाड़ियों ने पंजीकरण कराया था, जिनमें से अंतिम छंटनी के बाद पुरुष और महिला खिलाड़ियों की नीलामी एक साथ आयोजित की गई। जल्द ही शुरू होने वाली इस लीग से मुंबई के फैंस को रोमांचक क्रिकेट देखने की उम्मीद है। ——————————————————– महिला क्रिकेट से जुड़ी यह खबर भी पढ़िए… विमेंस टी-20 वर्ल्डकप के लिए टीम इंडिया का ऐलान BCCI ने विमेंस टी-20 वर्ल्ड कप के लिए भारतीय महिला टीम का ऐलान कर दिया है। पिछले साल वनडे वर्ल्डकप जिताने वालीं कप्तान हरमनप्रीत कौर को ही टीम की कप्तानी सौंपी गई है, जबकि स्मृति मंधाना को ही वाइस कैप्टन बनाया गया है। पढ़ें पूरी खबर
अब असम में खेला जाएगा? कांग्रेस ने डिजिटल पोल को बताया गलत, डेके शिवकुमार ने बीजेपी पर लगाया बड़ा दावा

असम चुनाव 2026: असम विधानसभा चुनाव 2026 के लिए सबसे पहले मोटरसाइकिल रैली को तेज किया गया है, जहां कांग्रेस और सहयोगी आश्रम ने दावा किया है कि राज्य में उनकी सरकार बनने जा रही है और पार्टी पोल को सांप्रदायिक बनाने की कोशिश की जा रही है। शनिवार को कांग्रेस के वरिष्ठ पर्यवेक्षक डी.के. शिवकुमार, चंबाल बजाजा और संगीतकार सिंह ने गठबंधन के सहयोगियों के साथ बैठक की, जबकि कांग्रेस ने इस चुनाव में राइजोर दल, असम जाति परिषद (एजेपी), सी.के.एल.एच.एल.सी. (एम.), ए.पी.एच.एल.सी. और सी.आर.आई. गौरव गोगोई का दावा- आराम से लेगी सरकार बैठक के बाद असम कांग्रेस के अध्यक्ष गौरव गोगोई ने दावा किया कि गठबंधन आराम से सरकार बनाएगा और कहा कि राज्य के लोगों, किसानों, युवाओं और महिलाओं ने बदलाव के लिए वोट दिया है, साथ ही उन्होंने समीक्षित दल की रणनीति पर सहमति जताते हुए कहा कि 4 मई को नतीजे आएंगे और सभी को एक मजबूत कमरे पर नजर रखनी होगी। ‘डर की वजह से लोग फ़्रांसीसी नहीं बोले’ कर्नाटक के स्नातक डी.के. शिवकुमार ने भी एलेक्टिट पोल को खारिज करते हुए कहा कि लाइब्रेरी में डार का मनोबल है, इसलिए लोग फ्रैंक राय अपने पास नहीं रख पाए, उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी से सहमति नहीं बनने वालों को सरकारी मंजूरी का लाभ नहीं मिल रहा है और उनकी टीम मजबूत और एकजुट है। शिवकुमार ने यह भी दावा किया कि बीजेपी के कुछ नेता खतरे की हार के बावजूद कांग्रेस के संपर्क में आने की कोशिश कर रहे हैं और पार्टी को अपने आंतरिक सर्वेक्षण पर पूरा भरोसा है। एक्जालिट पोल में एनडीए को बढ़त बीजेपी के नेतृत्व में एक्सिस माय इंडिया ने जहां एनडीए को 88-100 सीटें, जेवीसी ने 88-101 और मैट्रिज ने 85-95 सीटें दीं, वहीं कांग्रेस गठबंधन को 23 से 36 सीटें मिलीं। असम विधानसभा का चुनाव प्रारंभिक 4 मई को होगा और इस बार कांग्रेस ने छह गठबंधन के साथ गठबंधन बीजेपी के नेतृत्व वाले चेहरे को चुनौती दी है। (टैग्सटूट्रांसलेट)असम चुनाव 2026(टी)कांग्रेस(टी)असम चुनाव 2026(टी)कांग्रेस का दावा(टी)एग्जिट पोल विवाद(टी)एनडीए लीड(टी)गौरव गोगोई का बयान(टी)डीके शिवकुमार(टी)चुनाव परिणाम 4 मई(टी)असम की राजनीति(टी)गठबंधन सरकार(टी)बीजेपी बनाम कांग्रेस(टी)असम चुनाव 2026(टी)कांग्रेस दावा
नारियल पानी या गन्ने का जूस, गर्मी में क्या है ज्यादा फायदेमंद? डॉक्टर ने दिया सही जवाब

Last Updated:May 02, 2026, 18:08 IST गर्मी में ठंडक पाने के लिए लोग अक्सर नारियल पानी और गन्ने का जूस दो आसान विकल्पों की ओर बढ़ते हैं. लेकिन हर घूंट का असर एक जैसा नहीं होता. कभी शरीर को तुरंत ताकत की जरूरत होती है, तो कभी सिर्फ पानी की कमी पूरी करनी होती है. ऐसे में चुनाव सोच-समझकर करना जरूरी हो जाता है. सही समय, सही मात्रा और अपनी जरूरत को समझना ही असली समझदारी है. तो आइए जानते है कौन सा ड्रिंक गर्मी के लिए ज्यादा फायदेमंद है. नई दिल्ली: गर्मी के मौसम में ठंडक पाने के लिए लोग अक्सर नारियल पानी और गन्ने के जूस का सहारा लेते हैं, लेकिन दोनों का असर हर व्यक्ति पर एक जैसा नहीं होता. कभी शरीर को तुरंत ऊर्जा की जरूरत होती है, तो कभी सिर्फ पानी की कमी पूरी करनी होती है. ऐसे में सही विकल्प का चुनाव सोच-समझकर करना जरूरी है. विशेषज्ञों का मानना है कि सही समय, सही मात्रा और शरीर की जरूरत को समझकर ही इन पेयों का सेवन करना चाहिए. वरना राहत देने वाली चीज कभी-कभी परेशानी भी बढ़ा सकती है. डॉक्टर की रायडॉ. सुनीता चौधरी के अनुसार, नारियल पानी और गन्ने का जूस दोनों ही फायदेमंद हैं, लेकिन इन्हें शरीर की जरूरत के हिसाब से लेना चाहिए. नारियल पानी में पोटैशियम और सोडियम जैसे इलेक्ट्रोलाइट्स पाए जाते हैं, जो शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन को जल्दी दूर करते हैं. खासकर लू लगने या बार-बार प्यास लगने की स्थिति में नारियल पानी ज्यादा असरदार होता है. गन्ने के जूस के फायदेगन्ने का जूस शरीर को तुरंत ऊर्जा देने में मदद करता है, क्योंकि इसमें प्राकृतिक शर्करा होती है. अगर किसी को कमजोरी महसूस हो रही हो या शुगर लेवल कम लग रहा हो, तो गन्ने का जूस एक अच्छा विकल्प हो सकता है. हालांकि, इसे पीते समय साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना जरूरी है, क्योंकि जूस मशीन या गन्ने की सतह पर गंदगी होने का खतरा रहता है, जिससे संक्रमण का जोखिम बढ़ सकता है. किसे क्या चुनना चाहिएडॉक्टरों के अनुसार, डायबिटीज के मरीजों को गन्ने का जूस पीने से बचना चाहिए और उनके लिए नारियल पानी ज्यादा सुरक्षित विकल्प है. वहीं, जिन लोगों को बार-बार डिहाइड्रेशन की समस्या होती है, उनके लिए भी नारियल पानी बेहतर माना जाता है. सही समय और मात्राडॉ. चौधरी का कहना है कि दिन की शुरुआत गुनगुने पानी से करनी चाहिए. इसके बाद सुबह करीब 11 बजे के आसपास नारियल पानी या गन्ने का जूस लिया जा सकता है. मात्रा की बात करें तो एक बार में लगभग 200 मिली यानी एक गिलास पर्याप्त होता है. ज्यादा मात्रा में सेवन करने से बचना चाहिए, ताकि शरीर पर इसका नकारात्मक असर न पड़े. About the Author Amita kishor न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें
मलाइका अरोड़ा बोलीं- बेटे अरहान ने शादी से इनकार किया:कहा- ग्रैंडकिड्स भूल जाइए, प्रदूषण और खराब माहौल में बच्चे नहीं चाहता हूं

मलाइका अरोड़ा ने बेटे अरहान खान को लेकर एक बात शेयर की। उन्होंने बताया कि अरहान ने कहा कि वह शादी नहीं करना चाहते और बच्चे भी प्लान नहीं कर रहे हैं। मलाइका के मुताबिक, बेटे ने मजाक में कहा, “ग्रैंडकिड्स की उम्मीद छोड़ दो।” हाल ही में टाइम्स एंटरटेनमेंट को दिए इंटरव्यू में मलाइका रिश्तों और शादी पर बात कर रही थीं। उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी रिश्तों को अलग नजरिए से देखती है। उनका बेटा कई बार ऐसी बातें बोलता है, जो उन्हें सोचने पर मजबूर करती हैं। मलाइका ने बताया कि अरहान ने उनसे कहा, “मैं शादी नहीं करूंगा, इसलिए ग्रैंडकिड्स के बारे में भूल जाइए।” वजह पूछने पर अरहान ने बढ़ते प्रदूषण और खराब माहौल का जिक्र किया। उसने कहा कि AQI 500-1000 तक पहुंच रहा है, ऐसे माहौल में बच्चों को दुनिया में लाना सही नहीं लगता। मलाइका ने माना कि बेटे की सोच उनसे अलग है। उन्होंने उसे समझाया कि जिंदगी के हर फेज का अलग अनुभव होता है और परिवार बनाना भी उसका हिस्सा है। उन्होंने कहा कि रिश्ते बदलते रहते हैं और जिंदगी में कुछ भी स्थायी नहीं होता। इंसान को परिस्थितियों के हिसाब से खुद को ढालना पड़ता है। इंटरव्यू में मलाइका ने सेल्फ-लव पर भी बात की। उन्होंने कहा कि वह हर दिन खुद से प्यार करने को कहती हैं, क्योंकि अगर इंसान खुद को स्वीकार नहीं करेगा, तो जिंदगी खुलकर नहीं जी पाएगा। मलाइका अरोड़ा की शादी 1998 में अरबाज खान से हुई थी। दोनों का 2017 में तलाक हो गया था। अरहान उन्हीं के बेटे हैं। तलाक के बाद भी दोनों बेटे की को-पैरेंटिंग कर रहे हैं। मलाइका लंबे समय तक अर्जुन कपूर के साथ रिश्ते को लेकर भी चर्चा में रहीं।
सुप्रीम कोर्ट ने टीएमसी को दिया झटका, तृतीय वर्ष के लिए केंद्रीय कर्मचारियों के दस्तावेजों के मामले में प्रवेश की अनुमति दी गई

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की शुरुआत से पहले सैद्धांतिक कांग्रेस को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। तीसरे में केंद्र सरकार के कर्मचारियों की अपील को चुनौती देने वाली याचिका अदालत ने खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में कोई आदेश जारी नहीं किया जा सकता। जस्टिस पी एस नरसिम्हा और जस्टिस जोयामाल्या बागची की बेंच ने कहा कि चुनाव आयोग का फैसला पूरी तरह से भूमिका में है। शनिवार को विशेष रूप से दोनों जज बैठे थे। कांग्रेस की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने चुनाव आयोग पर आरोप लगाया। लेकिन बेंच ने इसे स्वीकार नहीं किया। उन्होंने साफ किया कि प्राथमिक स्तर के कर्मचारियों के लिए चुनाव आयोग का अधिकार है। बेंच के अध्यक्ष जस्टिस बागची ने कहा, “चुनाव आयोग के केंद्र में ऐसा कहीं नहीं लिखा है कि कर्मचारी केवल केंद्र का ही होगा। लेकिन अगर वह ऐसा भी लिखते हैं, तब भी हम उन्हें गलत नहीं कहते हैं।” न्यायमूर्ति नरसिम्हा ने कहा कि तृतीयक केंद्र में सिटकॉल कैमरा होगा, वहां राजनीतिक वैश्वीकरण के एजेंट होंगे। ऐसे में कलाकार के संकट का कोई आधार नहीं है. चुनाव आयोग के वकील ने क्या कहा इसके बाद चुनाव आयोग की ओर से वरिष्ठ वकील डी एस नायडू ने बात शुरू की. नायडू ने कहा कि निराधार खतरों के तहत पूरी याचिका दायर की गई है। चुनाव आयोग के सरकुल में ऐसा कहीं नहीं कहा गया है कि तीसरे चरण में राज्य सरकार के कर्मचारियों की कोई भूमिका ही नहीं होगी। यहां तक कि तीन साल के कर्मचारियों के लिए जो रिटर्निंग ऑफीसर विज़ेट है, वह भी राज्य सरकार का ही अधिकारी होता है। आयोग के वकील ने कहा कि पूरा काम ऐतिहासिक कहा जा रहा है। सरकुल में लिखी गई सभी बातों का पालन करना होगा और उसी आधार पर कर्मचारियों की ड्यूटी निभानी होगी। इसके बाद कोर्ट ने कहा, “इस मामले में किसी भी आदेश का पालन नहीं किया जाएगा। चुनाव आयोग ने कहा है कि सरकार का पूरी तरह से पालन नहीं किया जाएगा।” उच्च न्यायालय ने भी टीएमसी के दलालों को खारिज कर दिया था इससे पहले, कैथोलिक कांग्रेस ने येली कलकत्ता उच्च न्यायालय में मूर्ति की स्थापना की थी। 30 अप्रैल को उच्च न्यायालय ने चिकन चॉकलेट्स को खारिज कर दिया था। हाई कोर्ट ने कहा था कि तीन साल के कर्मचारियों के लिए चुनाव आयोग का पद बनता है। यदि तृतीयक में कोई गड़बड़ी होती है, तो इसके लिए बाद में नामांकन दाखिल किया जा सकता है। केवल खतरों के आधार पर कोई आदेश नहीं दिया जाएगा। यह भी पढ़ें : पश्चिम बंगाल में 15 बूथों पर वोटिंग के दौरान फूट, खुलासा- सामने आए टीएमसी-बीजेपी कार्यकर्ता, वीडियो (टैग्सटूट्रांसलेट)पश्चिम बंगाल 2026(टी)पश्चिम बंगाल 2026(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव 2026(टी)भारत(टी)ममता बनर्जी(टी)ममता बनर्जी टीएमसी(टी)टीएमसी(टी)बीजेपी
राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन ने किया यूएई का कायाकल्प:शाही पहचान छिपाई, वेटर की नौकरी की; जानें कैसे बने नाहयान गल्फ के गेमचेंजर

संयुक्त राष्ट्र अमीरात (यूएई) ने तेल उत्पादक संगठन ओपेक से दूरी बनाकर संकेत दिया है कि उसका भविष्य तेल पर ही निर्भर नहीं है। राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान की रणनीति ग्रीन हाइड्रोजन, एआई और स्पेस मिशन पर है। उन्होंने 2015 में कहा था कि आखिरी तेल के बैरल पर यूएई शोक नहीं, उत्सव मनाएगा। पहले सैन्य कमांडर फिर क्राउन प्रिंस से राष्ट्रपति बनने तक उनके फैसलों ने न केवल यूएई का कायाकल्प किया है, खाड़ी देशों में बदलाव को भी हवा दी है। शेख मोहम्मद की परवरिश ने उनके फैसलों की नींव रखी। जब 14 वर्ष के थे, तब पिता शेख जायद ने उन्हें राजसी पहचान छिपाकर मोरक्को पढ़ने भेजा था। ताकि वे कठोर जीवन देख सकें। सैंडहर्स्ट की ट्रेनिंग और ‘वेटर’ के रूप में काम मोरक्को में पढ़ाई के दौरान उन्होंने अपना नाम बदलकर ‘हसन’ रखा था, ताकि कोई उन्हें पहचान न सके। वे अपना खाना खुद बनाते और कपड़े खुद धोते थे। वहां एक कैफे में वेटर के तौर पर भी काम किया, ताकि वह आम लोगों के संघर्ष और जीवन को करीब से समझ सकें। शेख मोहम्मद ने ब्रिटेन की प्रतिष्ठित रॉयल मिलिट्री अकादमी सैंडहर्स्ट से ट्रेनिंग ली और पासआउट होकर बाद में यूएई सेना में शामिल हुए। सेना के आधुनिकीकरण और प्रोफेशनल ट्रेनिंग को उन्होंने खुद मॉनिटर किया। शेख मोहम्मद ने खुद को कट्टरपंथी सोच से अलग रखा। छात्र जीवन में जब एक मौलवी ने उन्हें कट्टरपंथ की ओर मोड़ने की कोशिश की, तो वे जल्द समझ गए कि यह विचारधारा खतरनाक है। यमन युद्ध में नाहयान ने मिसाल पेश की। भतीजे को फ्रंट लाइन पर भेजा, जो आज युद्ध के कारण व्हीलचेयर पर हैं। 2004 में क्राउन प्रिंस बनने पर नाहयान ने कानूनों की दशा बदली। संसद में 50% महिला आरक्षण, 100% विदेशी स्वामित्व व गोल्डन वीसा जैसे फैसलों ने यूएई को निवेश हब बनाया। हालांकि, 2004-22 तक उनके भाई शेख खलीफा बिन जायद राष्ट्रपति थे, पर असली ताकत व कूटनीति क्राउन प्रिंस रहते नाहयान के पास थी। यही यूएई को गल्फ का गेमचेंजर बना रहा है। एआई से 50% सरकारी फैसले लेने वाला पहला देश बनेगा 2022 में राष्ट्रपति बनने के बाद शेख मोहम्मद ने पर्सनल लॉ में बदलाव कर तलाक, कस्टडी और विरासत में महिलाओं को अधिकार दिए। श्रम कानून बदलकर ‘निश्चित अवधि’ के अनुबंध अनिवार्य किए गए, जिससे बाहरी मजदूरों को लाभ हुआ। ‘एजेंटिक एआई’ मॉडल के तहत लक्ष्य है कि 2028 तक 50% सरकारी काम एआई संभाले, जो विश्लेषण के साथ फैसले भी ले सके। ऐसा करने वाला यूएई दुनिया का पहला देश होगा। सादगी की बात करें तो कई बार मेहमानों को वे खुद ही कॉफी सर्व करते हैं।
सामंथा ने लॉन्च किया टॉक्सिन फ्री परफ्यूम:रणबीर से रश्मिका तक; परफ्यूम बिजनेस में उतरे सेलेब्स, फैंस से बन रहा नया कनेक्शन

फिल्म स्टार्स लंबे समय से परफ्यूम ब्रांड्स का प्रचार करते रहे हैं, लेकिन अब वे खुद इस बिजनेस में उतर रहे हैं और अपने-अपने तरीके से फैंस से जुड़ने की कोशिश कर रहे हैं। रणबीर कपूर ने पिछले साल ‘ARKS’ नाम से परफ्यूम लॉन्च किया। इसमें रणबीर ने ऑनलाइन स्ट्रेटजी अपनाई। कंपनी ने स्विगी इंस्टामार्ट से पार्टनरशिप की और इसे क्विक कॉमर्स पर उपलब्ध कराया। वहीं सामंथा रुथ प्रभु का ‘सीक्रेट एलकेमिस्ट’ खुद को भारत का पहला अरोमाथेरेपी-बेस्ड परफ्यूम ब्रांड बताता है, जिसमें टॉक्सिन-फ्री और वेलनेस-फोकस्ड खुशबुओं पर जोर है। रश्मिका मंदाना ने भी ‘डियर डायरी’ नाम से परफ्यूम ब्रांड शुरू की है। उनकी कंपनी ने 2026 के अंत तक 100 स्टोर्स तक विस्तार करने की योजना बनाई है। इधर, हॉलीवुड में भी रिहाना, सेलेना गोमेज जैसे सेलेब्रिटी इस बिजनेस में हैं। जानते हैं इनके बारे में। ये स्टार्स बना रहे अपने पर्सनलाइज्ड परफ्यूम सामंथा रुथ प्रभुका ‘सीक्रेट एलकेमिस्ट’ सामंथा ने मार्च 2026 में ब्रांड सीक्रेट एलकेमिस्ट के जरिए अरोमाथेरेपी-आधारित नए परफ्यूम्स की रेंज लॉन्च की है। ये उनके क्यूरेटेड परफ्यूम है व टॉक्सिन-फ्री हैं। औसतन 100ml परफ्यूम 999 रु. से शुरू है। रश्मिका मंदाना का डियर डायरी रश्मिका ने जुलाई 2025 में परफ्यूम ब्रांड ‘डियर डायरी’ लॉन्च किया। इसकी खुशबुएं उनकी निजी यादों और कूर्ग में बिताए बचपन से प्रेरित हैं। रश्मिका अपने परफ्यूम से फैंस से कनेक्ट बना रही हैं। औसतन 100ml परफ्यूम 2599 रु. का है। सेलेना गोमेज का रेयर ब्यूटी सेलेना ने रेयर ब्यूटी में फ्रेगरेंस लॉन्च किया है। इसमें कैरामेल, पिस्ता व सैंडलवुड जैसे नोट्स शामिल हैं। यह वीगन फ्रेंडली है। इसे यूं डिजाइन किया गया है कि इसकी खुशबू 12 घंटे तक विकसित होती रहे। औसतन 50ml परफ्यूम 4500 रु. का है। बियोंसे का बियोंसे परफ्यूम्स बियोंसे परफ्यूम्स के तहत दो नए परफ्यूम Cé Noir और Cé Lumière लॉन्च किए हैं। इनमें स्किन मस्क नोट इस्तेमाल किया गया है, जिससे खुशबू त्वचा पर धीरे-धीरे पर्सनल एहसास दे। कीमत 15 हजार रु. से शुरू है। रणबीर कपूर ARKS परफ्यूम रणबीर ने ARKS परफ्यूम लॉन्च किया है। इसकी 65% बिक्री ऑनलाइन हो रही है। हर महीने ₹1 करोड़ से ज्यादा का रेवेन्यू भी आ रहा है। यह ‘जेंडर-इन्क्लूसिव’ परफ्यूम है। इसकी एक 50ml बोतल की कीमत ₹2,999 रु. है।
benjamin netanyahu gym video| prostate cancer| iran-israel| नेतन्याहू को तो देखिए, कैंसर को मात दे जिम में बना रहे डोले, ईरान कैसे न खौफ खाए

Last Updated:May 02, 2026, 13:46 IST Israel PM benjamin netanyahu Gym: इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू वैसे तो हमेशा ही कुछ न कुछ दिलचस्प चीजें करते रहते हैं लेकिन इस बार उनका जिम से आया वीडियो काफी वायरल हो रहा है. 76 की उम्र में, प्रोस्टेट कैंसर से जूझ रहे नेतन्याहू का जिम में पसीना बहाते, सीढ़ियां चढ़ते, नाश्ते में उबले अंडे खाते हुए युवाओं को संदेश काफी कुछ कह रहा है. उन्होंने कहा है कि कसरत करें और कभी हार न मानें. यह वीडियो उनकी रिकवरी और मजबूत इरादे का ईरान को साफ संदेश है. इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का हाल ही में जारी जिम का वीडियो काफी वायरल हो रहा है. 76 साल की उम्र में प्रोस्टेट कैंसर से जूझ रहे नेता जिम में डंबल उठा रहे हैं, डोले बना रहे हैं और सीढ़ियां चढ़ रहे हैं. वे साफ-साफ बता रहे हैं कि वे एकदम फिट हैं और दुश्मनों को कोई मौका नहीं देना चाहते. उनके मजबूत इरादे निश्चित ही ईरान की पेशानी पर बल डालने के लिए काफी हैं. AI Image नेतन्याहू ने इस वीडियो में उबले अंडे खाते हुए युवाओं को संदेश भी दिया है कि कसरत करें और कभी हार न मानें. यह वीडियो उनकी रिकवरी और मजबूत इरादे के अलावा उनके टाइट रूटीन अनुशासन का उदाहरण है. वे नियमित रूप से जिम जाते हैं, वेट ट्रेनिंग और कार्डियो करते हैं. रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रोस्टेट कैंसर की सर्जरी और रेडिएशन थेरेपी के बावजूद उनका स्वास्थ्य सामान्य है.जिस कैंसर के होने पर लोग बेड पकड़ लेते हैं, नेतन्याहू का जिम में पसीना बहाना वाकई लोगों को प्रेरित करने वाला है. डॉक्टरों की मानें तो प्रोस्टेट कैंसर से उबरने वाले मरीजों के लिए व्यायाम बेहद जरूरी और फायदेमंद होता है. नियमित एक्सरसाइज मसल स्ट्रेंथ बढ़ाती है, थकान कम करती है और हड्डियों को मजबूत बनाती है. यह दिल की हेल्थ सुधारता है और वजन कंट्रोल रखता है. ADT (हॉर्मोन थेरेपी) के साइड इफेक्ट्स जैसे मसल लॉस और ऑस्टियोपोरोसिस को भी व्यायाम से रोका जा सकता है. कई स्टडी में सक्रिय पुरुषों में रिकरेंस का खतरा कम पाया गया है. Add News18 as Preferred Source on Google एम्स नई दिल्ली की ही कई स्टडीज बताती हैं कि व्यायाम के फायदे प्रोस्टेट ही नहीं बल्कि कई कैंसर सर्वाइवर्स में स्पष्ट हैं. मॉडरेट एक्सरसाइज (सप्ताह में 150-300 मिनट) कैंसर से मौत का खतरा 25-35 फीसदी तक कम कर सकती है. एक्सरसाइज से मूड बेहतर करता है, नींद सुधरती है और क्वालिटी लाइफ बढ़ती है. नेतन्याहू जैसा रूटीन स्ट्रेंथ ट्रेनिंग के साथ कार्डियो रिकवरी में मददगार साबित होता है. हालांकि,एक्सपर्ट कहते हैं कि प्रोस्टेट कैंसर में व्यायाम करते समय सावधानी जरूरी है. डॉक्टर कहते हैं कि हड्डी मेटास्टेसिस वाले मरीजों को हाई इंपैक्ट एक्सरसाइज से बचना चाहिए क्योंकि इससे फ्रैक्चर का खतरा बढ़ सकता है. थेरेपी के दौरान थकान या दर्द हो तो व्यायाम की तीव्रता कम रखनी चाहिए. हमेशा डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट की सलाह से ही व्यायाम शुरू करें, जैसा कि नेतन्याहू करते हैं. हेल्थ एक्सपर्ट की मानें तो प्रोस्टेट कैंसर मरीजों को सप्ताह में कम से कम 2 दिन स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और रोजाना मॉडरेट एरोबिक एक्टिविटी करनी चाहिए. वार्म-अप और कूल-डाउन जरूर शामिल करें. नेतन्याहू का संदेश प्रेरणादायक है कि उम्र या बीमारी के बावजूद पॉजिटिव सोच और मेहनत से बहुत कुछ हासिल किया जा सकता है. नियमित चेकअप के साथ स्वस्थ आदतें अपनाए रखने से बेहतर हेल्थ बनी रहती है. ऐसे में नेतन्याहू का यह वीडियो सिर्फ फिटनेस नहीं, बल्कि मानसिक मजबूती का भी प्रतीक है जो निश्चित रूप से ईरान और उनके प्रतिद्वंद्वियों को उनके फौलादी इरादों का संकेत दे रहा है. नेतन्याहू का प्रोस्टेट कैंसर जैसी बीमारी से लड़कर वापसी करना लाखों लोगों को प्रेरित करता है. डॉक्टरों का मानना है कि व्यायाम दवा की तरह काम करता है, फायदे ज्यादा, नुकसान कम, बशर्ते सही तरीके से किया जाए. स्वस्थ रहने के लिए अनुशासन और डॉक्टरी सलाह सबसे जरूरी है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।
अमेरिका अपने 5000 सैनिक जर्मनी से वापस बुलाएगा:जर्मन चांसलर ने कहा था- ईरान के खिलाफ उनकी प्लानिंग ठीक नहीं, इससे ट्रम्प नाराज

अमेरिका ने जर्मनी से करीब 5,000 सैनिक हटाने का फैसला किया है। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के मुताबिक यह प्रक्रिया अगले 6 से 12 महीनों में पूरी होगी। यह कदम सीधे तौर पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के बीच बयानबाजी के बाद सामने आया है। मर्ज ने पिछले महीने एक कार्यक्रम में कहा था कि अमेरिका के पास कोई अच्छी प्लानिंग नहीं है। उसे पता ही नहीं है कि वह इस जंग से बाहर कैसे निकलेगा। उन्होंने कहा कि ईरान बातचीत को टालने में माहिर है और अमेरिका को बिना नतीजे के इस्लामाबाद तक आना-जाना पड़ा। इससे अमेरिका को ईरान के सामने अपमानित होना पड़ा। इससे ट्रम्प नाराज हो गए थे। उन्होंने मर्ज को लेकर कहा कि वे बहुत खराब काम कर रहे हैं। उनको लगता है कि ईरान के पास परमाणु हथियार होना अच्छी बात है। उन्हें हकीकत की समझ नहीं है। जर्मनी में 36 हजार अमेरिकी सैन्य तैनात BBC के मुताबिक दिसंबर तक जर्मनी में 36,000 से ज्यादा अमेरिकी सैनिक तैनात थे। यह संख्या जापान के बाद दूसरी सबसे बड़ी तैनाती है, जहां करीब 55,000 अमेरिकी सैनिक मौजूद हैं। इसके अलावा इटली में करीब 12,000 और ब्रिटेन में लगभग 10,000 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। जर्मनी में अमेरिकी सैन्य ठिकाने लंबे समय से यूरोप में अमेरिका की रणनीतिक मौजूदगी का अहम हिस्सा रहे हैं। हालांकि, अमेरिका और यूरोपीय देशों के बीच ईरान को लेकर तनाव बढ़ा हुआ है। यूरोपीय देशों ने ईरान जंग में ट्रम्प का साथ देने के लिए कई बार इनकार किया है। जिसके बाद ट्रम्प आरोप लगाते आए है कि यूरोपीय देश केवल कागजी शेर है क्योंकि समय पर वह कभी काम नहीं आते। इसी बीच ट्रम्प ने इटली और स्पेन से भी सैनिक हटाने का संकेत दिया है। उनका कहना है कि ये देश ईरान के खिलाफ अमेरिका का साथ नहीं दे रहे हैं, जिससे नाटो के भीतर मतभेद बढ़ते दिख रहे हैं। पहले भी सैनिक हटाने की कोशिश कर चुके ट्रम्प राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प इससे पहले भी जर्मनी से सैनिक हटाने की बात कर चुके हैं। उन्होंने जर्मनी पर नाटो के तय लक्ष्य के मुताबिक रक्षा खर्च न करने का आरोप लगाया था। साल 2020 में जर्मनी से 12,000 सैनिक हटाने का प्रस्ताव भी आया था, लेकिन अमेरिकी संसद ने इसे रोक दिया था। बाद में राष्ट्रपति जो बाइडेन ने इस फैसले को पलट दिया था। पिछले साल अमेरिका ने रोमानिया में भी अपने सैनिकों की संख्या कम करने का फैसला लिया था। दरअसल, ट्रम्प अमेरिकी सैनिकों को यूरोप से हटाकर एशिया-प्रशांत क्षेत्र में शिफ्ट करना चाहते हैं ताकि चीन के खतरों से निपटा जा सके। अमेरिका के जर्मनी में सैन्य ठिकाने क्यों हैं? जर्मनी में अमेरिकी सेना की मौजूदगी 1945 से शुरू हुई, जब नाजी जर्मनी की हार के बाद अमेरिका ने वहां कब्जा कर लिया था। दूसरे विश्व युद्ध के तुरंत बाद वहां करीब 16 लाख अमेरिकी सैनिक तैनात थे, हालांकि 1 साल के बाद वहां 3 लाख सैनिक रह गए। शुरुआत में उनका काम जर्मनी के अमेरिकी कंट्रोल वाले हिस्से को संभालना और नाजीकरण खत्म करना था। लेकिन बाद में शीत युद्ध शुरू होने के साथ ही अमेरिका का मकसद बदल गया और जर्मनी को सोवियत संघ के खिलाफ एक मजबूत रक्षा दीवार बनाया गया। 1949 में नाटो बनने के बाद, अमेरिका के ये सैन्य ठिकाने स्थायी हो गए। इनका मकसद पश्चिम जर्मनी को मजबूत बनाना और सोवियत संघ के मुकाबले में खड़ा करना था। शीत युद्ध के समय जर्मनी में अमेरिका के करीब 50 बड़े सैन्य बेस और 800 से ज्यादा छोटे ठिकाने थे। उस समय वहां 2.5 लाख से ज्यादा अमेरिकी सैनिक तैनात रहते थे, और कई जगहों पर तो पूरी की पूरी अमेरिकी बस्तियां बस गई थीं, जहां सैनिकों के परिवार के लोग रहते थे। सोवियत संघ कमजोर हुआ तो सैनिक लौटे 1989 में बर्लिन की दीवार गिरने और 1991 में सोवियत संघ के टूटने के बाद अमेरिका ने अपनी मौजूदगी काफी कम कर दी, लेकिन पूरी तरह हटाई नहीं। आज की स्थिति में, यूरोप में अमेरिका के करीब 68,000 सैनिक तैनात हैं, जिनमें से लगभग 36,400 सिर्फ जर्मनी में हैं। ये सैनिक 20 से 40 अलग-अलग बेस में फैले हुए हैं। स्टुटगार्ट में यूरोप और अफ्रीका के लिए अमेरिकी कमांड हेडक्वार्टर है, जहां से पूरे क्षेत्र में सैन्य ऑपरेशन कंट्रोल होते हैं। यूरोप में अमेरिकी सेना के सात में से पांच स्थाई ठिकाने जर्मनी में ही हैं, बाकी बेल्जियम और इटली में हैं। जर्मनी के सबसे बड़े ठिकानों में रामस्टीन एयर बेस शामिल है, जो यूरोप में अमेरिकी वायुसेना का मुख्य केंद्र है और यहां करीब 8,500 सैनिक हैं। इसके अलावा ग्राफेनवोहर, विल्सेक और होहेनफेल्स यूरोप का सबसे बड़ा अमेरिकी ट्रेनिंग एरिया हैं। वीसबाडेन में अमेरिका आर्मी यूरोप और अफ्रीका का मुख्यालय है और लैंडस्टूल मेडिकल सेंटर अमेरिका का विदेश में सबसे बड़ा सैन्य अस्पताल है। इन बेस का रोल अब पूरी तरह बदल चुका है। पहले ये सोवियत खतरे को रोकने के लिए थे, लेकिन अब ये अमेरिका के लिए ‘लॉन्चिंग पैड’ और लॉजिस्टिक हब बन गए हैं। यहीं से अमेरिका ने इराक, अफगानिस्तान और हाल ही में ईरान से जुड़े सैन्य अभियानों को चलाया और सपोर्ट किया। असल में समझौता ऐसा है कि अमेरिका यूरोप की सुरक्षा में मदद करता है और बदले में यूरोप उसे ऐसा इन्फ्रास्ट्रक्चर देता है जिससे वह दुनिया भर में अपने सैन्य अभियान चला सके। इसलिए यह सिर्फ ‘यूरोप की मदद’ नहीं, बल्कि अमेरिका की रणनीति का हिस्सा है। एक्सपर्ट्स- इस फैसले से नाटो की एकता कमजोर हो सकती है सुरक्षा एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका जर्मनी से अपने सैनिक हटाता है तो इसके बड़े असर हो सकते हैं। इससे नाटो की एकता कमजोर पड़ सकती है, खासकर ऐसे वक्त में जब दुनिया में पहले ही तनाव बढ़ा हुआ है। साथ ही इससे ये संदेश जा सकता है कि अमेरिका अब यूरोप की सुरक्षा को लेकर उतना गंभीर नहीं है, जिसका फायदा रूस जैसे देश उठा सकते हैं। अमेरिकी संसद में भी इस फैसले की आलोचना हो रही है। कई नेताओं ने इसे लापरवाही भरा बताया है और कहा है कि इससे यूरोप में अमेरिका की पकड़ कमजोर हो सकती है। सीनेटर जैक रीड ने कहा






