सरकार ने अश्वगंधा के पत्तों को किया बैन, आयुर्वेद में इनका इस्तेमाल किया जाता है या नहीं, एक्सपर्ट से जानिए

Last Updated:April 21, 2026, 13:16 IST Ashwagandha Uses in Ayurveda: अश्वगंधा को आयुर्वेद की सबसे शक्तिशाली जड़ी-बूटी माना जाता है. आयुर्वेद में अश्वगंधा की जड़ों को शरीर के लिए बेहद फायदेमंद माना गया है. हालांकि कई हर्बल सप्लीमेंट्स में अश्वगंधा के पत्ते और इसका अर्क भी इस्तेमाल किया जा रहा था, जिसे फूड सेफ्टी स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने बैन कर दिया है. आयुर्वेद में अश्वगंधा के पत्तों का इस्तेमाल करने की सलाह नहीं दी जाती है. इन पत्तों का सेवन करने से शरीर में टॉक्सिसिटी हो सकती है. FSSAI ने अश्वगंधा के पत्तों के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है. Ashwagandha Root vs Leaves: सदियों से अश्वगंधा को शक्तिशाली जड़ी-बूटी माना जा रहा है. आयुर्वेदिक ग्रंथों के अनुसार अश्वगंधा की जड़ें सेहत के लिए अमृत समान होती हैं. सही मात्रा में इनका सेवन करने से कई स्वास्थ्य समस्याओं से छुटकारा मिल सकता है. अश्वगंधा को एक औषधि माना गया है, जो शरीर की ताकत बढ़ाने, तनाव कम करने और इम्यूनिटी सुधारने में मदद करती है. हाल ही में फूड सेफ्टी स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने अश्वगंधा के पत्तों और इसके अर्क के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है. कई हर्बल सप्लीमेंट्स और दवाओं में इसके पत्तों का यूज किया जा रहा था, जिसके बाद सरकार ने यह फैसला लिया है. अब सवाल है कि आयुर्वेद में अश्वगंधा का कैसे इस्तेमाल किया जाता है और पत्तों को लेकर एक्सपर्ट्स की क्या राय है. यूपी के प्रेम रघु आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज की प्रिंसिपल और आयुर्वेदाचार्य डॉ. सरोज गौतम ने News18 को बताया आयुर्वेद में अश्वगंधा को एक औषधीय पौधा माना गया है, लेकिन इसके अलग-अलग हिस्सों का उपयोग अलग-अलग तरीकों से किया जाता है. कई ग्रंथों में इसकी जड़ों का सेवन करने का बात कही गई है. अश्वगंधा की जड़ में सबसे अधिक सक्रिय औषधीय तत्व पाए जाते हैं, जैसे विथानोलाइड्स. ये तत्व तनाव कम करने और शरीर को एनर्जी देने में मदद करते हैं. यही कारण है कि आयुर्वेदिक दवाओं और सप्लीमेंट्स में अधिकतर जड़ का ही उपयोग किया जाता है. इसे नींद सुधारने, मानसिक तनाव घटाने और शारीरिक कमजोरी दूर करने में भी उपयोगी माना जाता है. अश्वगंधा की जड़ें सही तरह इस्तेमाल करने से गजब के फायदे मिल सकते हैं. अश्वगंधा के पत्तों पर क्या कहता है आयुर्वेद आयुर्वेद एक्सपर्ट के मुताबिक पत्तों का उपयोग कुछ सप्लीमेंट्स और हर्बल उत्पादों में उपयोग बढ़ा है, लेकिन आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से इनका उपयोग मुख्य औषधि के रूप में नहीं किया जाता. पत्तों में सक्रिय तत्वों की मात्रा जड़ की तुलना में कम और असंतुलित हो सकती है, इसलिए इनके उपयोग को लेकर सावधानी जरूरी है. इसके पत्तों में विथायनोन नामक तत्व बहुत ज्यादा हो सकता है. ऐसे में अश्वगंधा के पत्ते खाने से शरीर में टॉक्सिसिटी हो सकती है. यही वजह कि आयुर्वेदिक एक्सपर्ट अश्वगंधा को लेकर बेहद सावधानी बरतने की सलाह देते हैं. इसकी जड़ों का इस्तेमाल भी एक्सपर्ट की सलाह के अनुसार करना चाहिए. अश्वगंधा की जड़ के हेल्थ बेनिफिट्स अश्वगंधा की जड़ को आयुर्वेद में अत्यंत शक्तिशाली औषधि माना जाता है, जो शरीर और मन दोनों के लिए कई तरह से फायदेमंद होती है. अश्वगंधा की जड़ का नियमित और संतुलित सेवन नींद की गुणवत्ता सुधारने, चिंता और थकान कम करने और एनर्जी लेवल बढ़ाने में मदद करता है. पुरुषों में यह ताकत और स्टैमिना बढ़ाने के साथ-साथ हार्मोन संतुलन में भी सहायक मानी जाती है, जबकि महिलाओं के लिए भी यह हार्मोनल हेल्थ को सपोर्ट करती है. यह मांसपेशियों की मजबूती, दिमागी कार्यक्षमता और एकाग्रता बढ़ाने में भी उपयोगी होती है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें First Published : April 21, 2026, 13:16 IST
UN दूत बोलीं-भारत ने इजराइल की मदद कर कानून तोड़ा:हथियार भेजना नियमों के खिलाफ, इससे ग्लोबल सिस्टम कमजोर हो रहा

संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में भारत पर अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इजराइल के साथ उसके संबंध और युद्ध के समर्थन को लेकर भारत की कानूनी और नैतिक जिम्मेदारी बनती है। ‘टॉर्चर एंड जेनोसाइड’ नाम की इस रिपोर्ट को UN स्पेशल दूत फ्रांसेस्का अल्बानीज ने 23 मार्च को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में पेश किया। द हिंदू से बात करते हुए उन्होंने भारत पर आरोप लगाया कि इजराइल के साथ करीबी संबंधों के चलते भारत अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अपने दायित्वों का उल्लंघन कर रहा है और उसे इसकी जिम्मेदारी उठानी पड़ सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस ने इजराइल के कब्जे को गलत बताया है और देशों से हथियारों का लेन-देन रोकने को कहा है। इसके बावजूद भारत का हथियार भेजना नियमों के खिलाफ हो सकता है। उन्होंने कहा कि कानून के साथ-साथ भारत की नैतिक जिम्मेदारी भी बनती है। उनका मानना है कि भारत का इतिहास और न्याय की सोच ऐसे फैसलों के खिलाफ खड़ी होती है, लेकिन अभी सरकार का रुख उससे अलग नजर आ रहा है। गाजा में यातना शिविर जैसे हालात टॉर्चर एंड जेनोसाइड रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अक्टूबर 2023 से इजराइल ने गाजा और डिटेंशन सेंटर्स में फिलिस्तीनियों के खिलाफ व्यवस्थित यातना का इस्तेमाल किया। रिपोर्ट में गाजा को बहुत बड़ा यातना शिविर बताया गया है। इसी रिपोर्ट के आधार पर अल्बानीज ने भारत की भूमिका पर टिप्पणी करते हुए कहा कि इजराइल के साथ करीबी संबंधों के चलते भारत अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अपने दायित्वों का उल्लंघन कर रहा है और उसे इसकी जिम्मेदारी उठानी पड़ सकती है। इसी संदर्भ में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फरवरी में इजराइल यात्रा और ‘स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ का जिक्र किया। उनके अनुसार, यह संबंध अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को कमजोर करने की दिशा में जाता है। जेल से बाहर भी टॉर्चर सिस्टम रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि टॉर्चर केवल जेलों तक सीमित नहीं है। निगरानी, फेस रिकग्निशन, ड्रोन और चेकपॉइंट्स के जरिए फिलिस्तीनियों के जीवन पर लगातार नियंत्रण रखा जा रहा है। इससे उनकी रोजमर्रा की जिंदगी भी एक तरह के मानसिक और सामाजिक दबाव में रहती है। अल्बनीज ने बताया कि गाजा में हालात बेहद खराब हैं। करीब 1,90,000 लोग 50 वर्ग किमी से कम इलाके में रह रहे हैं। वहां दवाइयों, साफ-सफाई और सुरक्षा की भारी कमी है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति “कंसंट्रेशन कैंप” से भी बदतर हो गई है। उन्होंने यह भी कहा कि जेलों के अंदर और बाहर दोनों जगह एक जैसी नीतियां लागू हैं, जैसे भूख से दबाव बनाना और बुनियादी जरूरतों से वंचित रखना। उनके मुताबिक, यह सब लोगों की उम्मीद खत्म करने की कोशिश है। रिपोर्ट में वकीलों, डॉक्टरों, पत्रकारों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को निशाना बनाए जाने का भी जिक्र है। अल्बनीज ने कहा कि जब टॉर्चर पूरे सिस्टम में फैला हो और उसे संस्थागत समर्थन मिले, तो यह व्यक्तिगत घटना नहीं बल्कि राज्य नीति बन जाती है। अल्बनीज के मुताबिक, कई देश जैसे कोलंबिया, साउथ अफ्रीका, स्पेन, स्लोवेनिया और मलेशिया इस स्थिति को रोकने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन वैश्विक स्तर पर प्रभावशाली समूहों के कारण कार्रवाई मुश्किल हो रही है।
UN दूत बोलीं-भारत ने इजराइल की मदद कर कानून तोड़ा:हथियार भेजना नियमों के खिलाफ, इससे ग्लोबल सिस्टम कमजोर हो रहा

संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में भारत पर अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इजराइल के साथ उसके संबंध और युद्ध के समर्थन को लेकर भारत की कानूनी और नैतिक जिम्मेदारी बनती है। ‘टॉर्चर एंड जेनोसाइड’ नाम की इस रिपोर्ट को UN स्पेशल दूत फ्रांसेस्का अल्बानीज ने 23 मार्च को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में पेश किया। द हिंदू से बात करते हुए उन्होंने भारत पर आरोप लगाया कि इजराइल के साथ करीबी संबंधों के चलते भारत अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अपने दायित्वों का उल्लंघन कर रहा है और उसे इसकी जिम्मेदारी उठानी पड़ सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस ने इजराइल के कब्जे को गलत बताया है और देशों से हथियारों का लेन-देन रोकने को कहा है। इसके बावजूद भारत का हथियार भेजना नियमों के खिलाफ हो सकता है। उन्होंने कहा कि कानून के साथ-साथ भारत की नैतिक जिम्मेदारी भी बनती है। उनका मानना है कि भारत का इतिहास और न्याय की सोच ऐसे फैसलों के खिलाफ खड़ी होती है, लेकिन अभी सरकार का रुख उससे अलग नजर आ रहा है। गाजा में यातना शिविर जैसे हालात टॉर्चर एंड जेनोसाइड रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अक्टूबर 2023 से इजराइल ने गाजा और डिटेंशन सेंटर्स में फिलिस्तीनियों के खिलाफ व्यवस्थित यातना का इस्तेमाल किया। रिपोर्ट में गाजा को बहुत बड़ा यातना शिविर बताया गया है। इसी रिपोर्ट के आधार पर अल्बानीज ने भारत की भूमिका पर टिप्पणी करते हुए कहा कि इजराइल के साथ करीबी संबंधों के चलते भारत अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अपने दायित्वों का उल्लंघन कर रहा है और उसे इसकी जिम्मेदारी उठानी पड़ सकती है। इसी संदर्भ में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फरवरी में इजराइल यात्रा और ‘स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ का जिक्र किया। उनके अनुसार, यह संबंध अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को कमजोर करने की दिशा में जाता है। जेल से बाहर भी टॉर्चर सिस्टम रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि टॉर्चर केवल जेलों तक सीमित नहीं है। निगरानी, फेस रिकग्निशन, ड्रोन और चेकपॉइंट्स के जरिए फिलिस्तीनियों के जीवन पर लगातार नियंत्रण रखा जा रहा है। इससे उनकी रोजमर्रा की जिंदगी भी एक तरह के मानसिक और सामाजिक दबाव में रहती है। अल्बनीज ने बताया कि गाजा में हालात बेहद खराब हैं। करीब 1,90,000 लोग 50 वर्ग किमी से कम इलाके में रह रहे हैं। वहां दवाइयों, साफ-सफाई और सुरक्षा की भारी कमी है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति “कंसंट्रेशन कैंप” से भी बदतर हो गई है। उन्होंने यह भी कहा कि जेलों के अंदर और बाहर दोनों जगह एक जैसी नीतियां लागू हैं, जैसे भूख से दबाव बनाना और बुनियादी जरूरतों से वंचित रखना। उनके मुताबिक, यह सब लोगों की उम्मीद खत्म करने की कोशिश है। रिपोर्ट में वकीलों, डॉक्टरों, पत्रकारों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को निशाना बनाए जाने का भी जिक्र है। अल्बनीज ने कहा कि जब टॉर्चर पूरे सिस्टम में फैला हो और उसे संस्थागत समर्थन मिले, तो यह व्यक्तिगत घटना नहीं बल्कि राज्य नीति बन जाती है। अल्बनीज के मुताबिक, कई देश जैसे कोलंबिया, साउथ अफ्रीका, स्पेन, स्लोवेनिया और मलेशिया इस स्थिति को रोकने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन वैश्विक स्तर पर प्रभावशाली समूहों के कारण कार्रवाई मुश्किल हो रही है।
शाहरुख की किंग ने रिलीज से पहले ₹250 करोड़ कमाए:फिल्म के बजट का आधे से ज्यादा हिस्सा कवर, पेन मरुधर ने डिस्ट्रीब्यूशन राइट्स खरीदे

शाहरुख खान की अपकमिंग फिल्म किंग ने रिलीज से पहले ही 250 करोड़ रुपए की कमाई कर ली है। फिल्म का बजट 400 करोड़ रुपए बताया जा रहा है। यानी फिल्म का आधे से ज्यादा बजट कवर हो गया। बॉलीवुड हंगामा की रिपोर्ट के मुताबिक, फिल्म डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी पेन मरुधर ने फिल्म किंग के ऑल इंडिया डिस्ट्रीब्यूशन राइट्स 250 करोड़ रुपए में खरीद लिए। यह इस साल की बड़ी थिएट्रिकल डील्स में से एक मानी जा रही है। बता दें कि पेन मरुधर का शाहरुख खान के प्रोडक्शन हाउस के साथ पुराना संबंध रहा है। कंपनी पहले जवान, डंकी, जीरो, बदला और इत्तेफाक जैसी फिल्मों को रिलीज कर चुकी है। ए.ए. फिल्म्स, जियो स्टूडियोज, पीवीआर आईनॉक्स पिक्चर्स, यशराज फिल्म्स और धर्मा प्रोडक्शंस जैसी कंपनियों ने भी फिल्म के डोमेस्टिक राइट्स के लिए बोली लगाई थी। क्रिसमस 2026 में होगी बड़ी टक्कर किंग क्रिसमस 2026 के दौरान रिलीज होगी, जब जुमांजी, एवेंजर्स: डूम्सडे और ड्यून 3 जैसी हॉलीवुड फिल्में भी रिलीज होंगी। इस कॉम्पिटिशन को देखते हुए, फिल्म के लिए बड़े थिएटर रिलीज की प्लानिंग की जा रही है। फिल्म में शाहरुख खान के अलावा दीपिका पादुकोण, रानी मुखर्जी, अभिषेक बच्चन, सुहाना खान, अनिल कपूर, अभय वर्मा और अरशद वारसी भी नजर आएंगे। किंग की कहानी एक मेंटर और शिष्य के सफर पर आधारित है, जो कठिन परिस्थितियों में अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष करते हैं।
गोरी रंगत का लालच पड़ा भारी! 15 साल स्टेरॉयड क्रीम लगाने से डैमेज हुई स्किन, डॉक्टर ने बताया इसे रोकने का सही तरीका

Last Updated:April 21, 2026, 12:06 IST Fairness Cream Side Effects: जब लोग इसे ‘फेयरनेस क्रीम’ की तरह सालों-साल लगाते हैं, तो स्किन इसकी ‘एडिक्ट’ (आदी) हो जाती है. इसे अचानक छोड़ने पर चेहरा काला पड़ जाता है और चेहरे पर मवाद वाले दाने निकलने लगते हैं. हाल ही में श्रीनगर के प्रसिद्ध क्लिनिक ‘जरमीन एस्थेटिक्स’ से एक ऐसा ही दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहाँ एक महिला को 15 साल तक स्टेरॉयड क्रीम का इस्तेमाल करना बेहद भारी पड़ा. ख़बरें फटाफट एक महिला को 15 साल तक स्टेरॉयड क्रीम का इस्तेमाल करना बेहद भारी पड़ा. Skin thinning causes and treatment : आज के दौर में गोरी और बेदाग त्वचा पाने की चाहत में लोग किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं. सोशल मीडिया के चमक-धमक वाले विज्ञापनों और बिना किसी डॉक्टरी सलाह के मेडिकल स्टोर से मिलने वाली ‘फेयरनेस क्रीम’ का चलन भारत में एक महामारी की तरह बढ़ रहा है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि रातों-रात रंग साफ करने का दावा करने वाली ये क्रीम्स आपकी स्किन को हमेशा के लिए बर्बाद कर सकती हैं? हाल ही में श्रीनगर के प्रसिद्ध क्लिनिक ‘जरमीन एस्थेटिक्स’ से एक ऐसा ही दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहाँ एक महिला को 15 साल तक स्टेरॉयड क्रीम का इस्तेमाल करना बेहद भारी पड़ा. 15 साल के इस्तेमाल से बर्बाद हुई स्किनअक्सर लोग झाइयों (Pigmentation) या रंग साफ करने के लिए ऐसी क्रीम्स का सहारा लेते हैं जिनमें स्टेरॉयड की मात्रा बहुत अधिक होती है. इस मरीज ने भी पिछले 15 सालों से इन क्रीम्स को अपना ‘डेली स्किनकेयर’ समझकर इस्तेमाल किया. परिणाम स्वरूप, आज उनकी त्वचा की हालत इतनी गंभीर है कि उसे देख पाना भी मुश्किल है. श्रीनगर की मशहूर डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. कुरत-उल-ऐन के अनुसार के अनुसार, लंबे समय तक स्टेरॉयड के इस्तेमाल ने उनकी स्किन पर ये गहरे जख्म छोड़ दिए हैं: त्वचा का कागज जैसा पतला होना (Skin Thinning):मरीज की त्वचा इतनी पतली हो गई है कि अब चेहरा अपनी प्राकृतिक मजबूती खो चुका है. दिखने वाली रक्त वाहिकाएं (Visible Blood Vessels): त्वचा की ऊपरी परत खत्म होने के कारण अंदर की नीली और लाल नसों का जाल चेहरे पर साफ दिखाई देने लगा है. गंभीर लालिमा और असहनीय जलन: धूप की किरणें हों या किचन में गैस के पास काम करना, चेहरा बुरी तरह लाल होकर जलने लगता है. अत्यधिक संवेदनशीलता: अब स्थिति यह है कि त्वचा पर साधारण पानी या मॉइस्चराइजर लगाना भी मरीज के लिए दर्दनाक हो गया है. परमानेंट पिगमेंटेशन: जिस झाई को हटाने के लिए उन्होंने ये क्रीम शुरू की थी, वह अब और भी गहरी, काली और जिद्दी हो गई है जिसे ठीक करना अब एक बड़ी चुनौती है. स्किनकेयर नहीं, दवा है स्टेरॉयड क्रीमश्रीनगर की मशहूर डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. कुरत-उल-ऐन का स्पष्ट कहना है कि स्टेरॉयड क्रीम्स कोई ब्यूटी प्रोडक्ट नहीं हैं; ये गंभीर दवाएं हैं. इनका इस्तेमाल केवल डॉक्टर के पर्चे पर एक्जिमा या सोरायसिस जैसी बीमारियों के इलाज के लिए बहुत सीमित समय के लिए किया जाता है. जब लोग इसे ‘फेयरनेस क्रीम’ की तरह सालों-साल लगाते हैं, तो स्किन इसकी ‘एडिक्ट’ (आदी) हो जाती है. इसे अचानक छोड़ने पर चेहरा काला पड़ जाता है और चेहरे पर मवाद वाले दाने निकलने लगते हैं, जिसे मेडिकल भाषा में ‘टॉपिकल स्टेरॉयड विड्रॉल’ (TSW) कहा जाता है. View this post on Instagram
डायबिटीज के मरीजों के लिए क्यों ज्यादा खतरनाक है शराब? डॉक्टर ने बताया शुगर लेवल पर कैसे होता है असर

Last Updated:April 21, 2026, 11:26 IST Should Diabetics Drink Alcohol: डायबिटीज के मरीजों के लिए शराब खतरनाक हो सकती है, क्योंकि यह ब्लड शुगर लेवल को कभी बहुत कम तो कभी बहुत ज्यादा कर सकती है. इससे हाइपोग्लाइसीमिया और अन्य जटिलताओं का खतरा बढ़ जाता है. इसलिए इसका सेवन सीमित या पूरी तरह से टालना बेहतर होता है. डायबिटीज के मरीजों के लिए शराब खतरनाक हो सकती है. How Alcohol Impacts Blood Sugar: डायबिटीज की बीमारी महामारी की तरह फैल चुकी है. भारत में डायबिटीज के 10 करोड़ से ज्यादा मरीज हैं. आने वाले कुछ साल में इनकी संख्या 15 करोड़ तक पहुंच सकती है. डायबिटीज के मरीजों को ब्लड शुगर कंट्रोल करने के लिए दवा और इंसुलिन का सहारा लेना पड़ता है. इसके अलावा खानपान और लाइफस्टाइल का सीधा असर ब्लड शुगर पर पड़ता है. डॉक्टर्स की मानें तो डायबिटीज के मरीजों के लिए शराब बेहद खतरनाक हो सकती है, क्योंकि यह शुगर लेवल गड़बड़ा देती है. शुगर के मरीजों को शराब बिल्कुल नहीं पीनी चाहिए. ग्रेटर नोएडा के फोर्टिस हॉस्पिटल के फिजीशियन डॉ. दिनेश कुमार त्यागी ने News18 को बताया शराब का सबसे बड़ा असर लिवर पर पड़ता है, जो शरीर में ग्लूकोज लेवल को कंट्रोल करने में अहम भूमिका निभाता है. जब कोई व्यक्ति शराब पीता है, तो लिवर का ध्यान शुगर कंट्रोल करने के बजाय शराब को मेटाबोलाइज करने में लग जाता है. इससे ब्लड में ग्लूकोज का स्तर अचानक गिर सकता है, जिसे हाइपोग्लाइसीमिया कहा जाता है. यह स्थिति डायबिटीज के मरीजों के लिए खतरनाक हो सकती है. खासतौर से जिनका शुगर लेवल फ्लक्चुएट होता है, उनके लिए शराब का सेवन जानलेवा साबित हो सकता है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. डॉक्टर ने बताया कि कुछ अल्कोहलिक ड्रिंक्स जैसे बीयर, कॉकटेल या शराब में शुगर और कार्बोहाइड्रेट की मात्रा अधिक होती है, जिससे ब्लड शुगर तेजी से बढ़ सकता है. शराब कभी शुगर को बहुत कम कर सकती है और कभी बहुत ज्यादा बढ़ा सकती है. यह फ्लक्चुएशन ही इसे डायबिटीज मरीजों के लिए खतरनाक बनाता है. कई बार लोग शराब के साथ अनहेल्दी स्नैक्स खाते हैं, जिससे कैलोरी और शुगर का सेवन बढ़ जाता है. इससे शुगर लेवल और ज्यादा गड़बड़ा सकता है. साथ ही शराब दवाइयों के असर को भी कम या ज्यादा कर सकती है, जिससे ट्रीटमेंट बुरी तरह प्रभावित होता है. एक्सपर्ट के मुताबिक लंबे समय तक शराब का सेवन करने से नसों, आंखों और किडनी पर भी बुरा असर पड़ सकता है. शुगर के मरीजों में पहले से ही इन ऑर्गन्स के प्रभावित होने का खतरा रहता है, ऐसे में शराब इस जोखिम को और बढ़ा देती है. इसके अलावा शराब से डिहाइड्रेशन भी होता है, जिससे शरीर का संतुलन बिगड़ सकता है. अगर डायबिटीज के मरीज शराब पिएं, तो बेहद कम मात्रा में लें. खाली पेट शराब भूलकर भी न पिएं और किसी भी असामान्य लक्षण जैसे चक्कर, कमजोरी या पसीना आने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें. अगर शुगर लेवल बहुत ज्यादा रहता है, तब शराब पीने का रिस्क बिल्कुल न लें. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें First Published : April 21, 2026, 11:26 IST
डिंडौरी वार्ड-1 निवासियों ने मुख्य मार्ग किया जाम:स्थानीय समस्याओं पर कलेक्टर को बुलाने की मांग; पुलिस-प्रशासन मौके पर तैनात

डिंडोरी में मंगलवार सुबह करीब 9 बजे वार्ड क्रमांक एक सुबखार के निवासियों ने जबलपुर-अमरकंटक मुख्य मार्ग पर जाम लगा दिया। वे स्थानीय समस्याओं के समाधान के लिए कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया को मौके पर बुलाने की मांग पर अड़े हुए हैं। यातायात निरीक्षक सुभाष उईके और नायब तहसीलदार शैलेश गौर सहित पुलिस बल मौके पर तैनात है। पूर्व भाजपा विधायक दुलीचंद उरैती भी प्रदर्शनकारियों के साथ मौजूद हैं। उन्होंने बताया कि वार्ड की मुख्य सड़क (इमली कुटी से जबलपुर मार्ग तक), मुक्तिधाम रोड, घाट, पहुंच मार्ग, डैम घाट के पास स्नान घाट का निर्माण और सीवरेज लाइन के उचित निर्माण जैसी समस्याओं से निवासी पिछले दस साल से परेशान हैं। उरैती ने आगे कहा कि इन समस्याओं के समाधान के लिए पिछले दो साल से नगर परिषद अध्यक्ष और सीएमओ को लगातार आवेदन दिए जा रहे हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। पहले भी धरना प्रदर्शन किए जा चुके हैं, पर स्थिति जस की तस है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक कलेक्टर स्वयं आकर समस्याओं का जायजा नहीं लेतीं और लिखित आश्वासन नहीं देतीं, तब तक सड़क जाम नहीं खोला जाएगा। नायब तहसीलदार और नगर पालिका के अमले ने प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया। वहीं, भाजपा पार्षद भागीरथ उरैती ने बताया कि जिला प्रशासन के अधिकारी मौके पर आ रहे हैं।
‘समान अवसर को कम किया गया’: 700 से अधिक कार्यकर्ताओं ने पीएम मोदी के राष्ट्र के नाम संबोधन में एमसीसी के उल्लंघन का आरोप लगाया | भारत समाचार

आखरी अपडेट:21 अप्रैल, 2026, 10:42 IST पत्र में पोल पैनल से मुद्दे का संज्ञान लेने, पते की सामग्री और तरीके की जांच करने और उचित कार्रवाई शुरू करने का आग्रह किया गया। पीएम मोदी ने 18 अप्रैल को राष्ट्र को संबोधित किया। (एक्स/फाइल फोटो) पूर्व सिविल सेवकों, शिक्षाविदों, कार्यकर्ताओं और पत्रकारों सहित 700 से अधिक नागरिकों ने भारत के चुनाव आयोग को पत्र लिखकर 18 अप्रैल को राष्ट्र के नाम अपने संबोधन के दौरान प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन का आरोप लगाया है। 20 अप्रैल को मुख्य चुनाव आयुक्त को संबोधित एक पत्र में, कार्यकर्ताओं ने दावा किया कि महिला आरक्षण विधेयक पर प्रधान मंत्री का संबोधन एमसीसी अवधि के दौरान “चुनावी प्रचार और पक्षपातपूर्ण प्रचार” था। उन्होंने जांच की भी मांग की आदर्श आचार संहिता (एमसीसी) वर्तमान में असम, केरल और पुडुचेरी में लागू है, जहां 9 अप्रैल को मतदान हुआ था, तमिलनाडु (23 अप्रैल को मतदान) और पश्चिम बंगाल (23 और 29 अप्रैल को मतदान) में मतदान हुआ था। इन सभी विधानसभा चुनावों के लिए वोटों की गिनती 4 मई को होगी. शिकायत में, हस्ताक्षरकर्ताओं ने दावा किया कि चल रहे विधानसभा चुनावों के बीच, प्रधान मंत्री ने लागू संहिता का उल्लंघन करते हुए, “चुनावी प्रचार और पक्षपातपूर्ण प्रचार” के लिए आधिकारिक सरकारी मशीनरी और जन मीडिया का इस्तेमाल किया। उन्होंने यह भी बताया कि पीएम मोदी के संबोधन का आधिकारिक सरकारी जन मीडिया प्लेटफार्मों पर सीधा प्रसारण किया गया था, जो सरकारी खजाने से वित्त पोषित हैं। संहिता के प्रावधानों का हवाला देते हुए इसमें कहा गया है, “इस तरह की कार्रवाई सत्ता में पार्टी को अनुचित लाभ प्रदान करती है और स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों के लिए आवश्यक समान अवसर को कमजोर करती है।” इसमें इस बात पर प्रकाश डाला गया कि सत्ता में रहने वाली पार्टी को चुनावी लाभ के लिए आधिकारिक पद, सरकारी परिवहन, कर्मियों का उपयोग नहीं करना चाहिए या आधिकारिक यात्राओं को अभियान गतिविधियों के साथ नहीं जोड़ना चाहिए। पत्र में कहा गया है, “संबंधित राष्ट्रीय संबोधन प्रधानमंत्री द्वारा अपनी आधिकारिक क्षमता में दिया गया था और सार्वजनिक खर्च पर आधिकारिक जन मीडिया का उपयोग करके प्रसारित किया गया था। इससे आदर्श आचार संहिता की धारा VII के खंड 1 (ए), 1 (बी) और 4 में निहित स्पष्ट निषेध का उल्लंघन हुआ।” सीपीएम और सीपीआई ने रविवार को पैनल को इसी तरह की शिकायत सौंपी थी। पत्र में पोल पैनल से मुद्दे का संज्ञान लेने, पते की सामग्री और तरीके की जांच करने और उचित कार्रवाई शुरू करने का आग्रह किया गया। इसमें अन्य राजनीतिक दलों के लिए सार्वजनिक प्रसारकों पर समान प्रसारण समय का भी आह्वान किया गया, यदि प्रसारण के लिए पूर्व अनुमति दी गई हो। हस्ताक्षरकर्ता कौन हैं? हस्ताक्षरकर्ताओं में दिल्ली के पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग, राजनीतिक अर्थशास्त्री परकला प्रभाकर, कार्यकर्ता योगेन्द्र यादव, अर्थशास्त्री जयति घोष, संगीतकार-लेखक टीएम कृष्णा, पूर्व केंद्रीय सचिव ईएएस सरमा, कार्यकर्ता हर्ष मंदर, पत्रकार परंजॉय गुहा ठाकुरता, अकादमिक जोया हसन और पूर्व राजदूत मधु भादुड़ी शामिल हैं। अन्य में पारदर्शिता कार्यकर्ता अंजलि भारद्वाज, पूर्व सिविल सेवक आशीष जोशी, अमिताभ पांडे और अवे शुक्ला, पत्रकार जॉन दयाल और विद्या सुब्रमण्यम और सीपीआई नेता एनी राजा के साथ-साथ कई शिक्षाविद, वकील और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हैं। पीएम मोदी के संबोधन में क्या था? 18 अप्रैल को राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में, पीएम मोदी ने नारी शक्ति पहल को 21वीं सदी में महिलाओं को सशक्त बनाने के उद्देश्य से एक “महान यज्ञ” बताया। उन्होंने कांग्रेस और उसके सहयोगियों पर परिसीमन प्रक्रिया के बारे में गलत जानकारी फैलाने का भी आरोप लगाया, उन्होंने आरोप लगाया कि जनता के बीच भ्रम पैदा करने के लिए भ्रामक कथाओं का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह संशोधन महिलाओं को उनके लंबे समय से लंबित अधिकारों को प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किया गया था, जो दशकों से विलंबित था, जिसकी शुरुआत 2029 के लोकसभा चुनावों से हुई थी। यह संबोधन एक प्रमुख महिला आरक्षण विधेयक के संसद में पारित होने में विफल रहने के एक दिन बाद आया। लोकसभा में शुक्रवार को संविधान (131वां संशोधन) विधेयक पर तीखी बहस हुई, जिसमें कुल सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 816 करने का प्रस्ताव है। (एजेंसियों से इनपुट के साथ) चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना पहले प्रकाशित: 21 अप्रैल, 2026, 10:42 IST न्यूज़ इंडिया ‘समान अवसर को कम किया गया’: 700 से अधिक कार्यकर्ताओं ने पीएम मोदी के राष्ट्र के नाम संबोधन में एमसीसी के उल्लंघन का आरोप लगाया अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन(टी)भारत का चुनाव आयोग(टी)नरेंद्र मोदी का संबोधन(टी)महिला आरक्षण बिल(टी)नारी शक्ति पहल(टी)पक्षपातपूर्ण प्रचार आरोप(टी)विधानसभा चुनाव भारत(टी)सरकारी मीडिया का उपयोग
‘उन्होंने एक कलाबाज़ी की’: रिजिजू ने महिला आरक्षण विधेयक पर कांग्रेस, एसपी पर ‘विश्वासघात’ का आरोप लगाया | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:21 अप्रैल, 2026, 10:27 IST यह पूछे जाने पर कि क्या सरकार मौजूदा लोकसभा में महिला आरक्षण लागू करने के विपक्ष के सुझाव पर विचार करने को तैयार है, रिजिजू ने इसे एक राजनीतिक स्टंट बताया। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू लोकसभा में बोलते हैं (छवि: संसद टीवी/पीटीआई) संवैधानिक संशोधन विधेयक की हार के साथ बजट सत्र की विशेष बैठक समाप्त होने के दो दिन बाद, केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि विपक्ष ने शुरू में सरकार को समर्थन का आश्वासन देने के बाद “कलाबाज़ी” की थी। से विशेष रूप से बात कर रहा हूँ सीएनएन-न्यूज18रिजिजू ने कहा, “किसी ने (सरकार में) सपने में भी नहीं सोचा था कि कांग्रेस के नेतृत्व वाला विपक्ष महिला आरक्षण विधेयक को हरा देगा। उन सभी ने 2023 में विधेयक का समर्थन किया था। उन्होंने 2026 में कलाबाज़ी की। विपक्ष के साथ हमारे परामर्श के दौरान (विशेष बैठक से पहले), किसी भी पार्टी ने (बिलों का) विरोध नहीं किया।” यह पूछे जाने पर कि क्या समाजवादी पार्टी (एसपी) जैसे दलों ने परामर्श के दौरान समर्थन का आश्वासन दिया था, रिजिजू ने कहा, “मैंने व्यक्तिगत रूप से बहुत प्रयास किया। सभी से बात की। अचानक एसपी मुस्लिम महिलाओं के लिए कोटा के इस विचार के साथ आई। यह भारतीय संविधान के तहत संभव नहीं है। वे सिर्फ बहाने ढूंढ रहे थे,” उन्होंने कहा। मंत्री ने कहा कि जाति जनगणना के कारण विधेयक लाना जरूरी हो गया था। उन्होंने कहा कि 2023 विधेयक आरक्षण के कार्यान्वयन के लिए जनगणना और परिसीमन को अनिवार्य बनाता है। उन्होंने कहा, “लेकिन जाति जनगणना में समय लग रहा है, इसलिए, हम यह सुनिश्चित करने के लिए विधेयक लाए हैं कि महिलाओं को 2029 तक आरक्षण मिले।” मंत्री ने विपक्ष की इस कहानी को भी चुनौती दी कि जब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में चुनाव प्रचार के बीच विशेष सत्र बुलाया गया तो सरकार के दिमाग में चुनावी लाभ था। उन्होंने कहा, “चुनाव एक सतत प्रक्रिया है। अक्टूबर में मतदान का एक और दौर शुरू होगा, फिर मार्च में। तो क्या हमें चुनाव के कारण राष्ट्र निर्माण से संबंधित सभी काम रोक देना चाहिए? नरेंद्र मोदी सरकार जल्दबाजी में है। इस देश की महिलाओं ने आरक्षण के लिए 40 साल तक इंतजार किया है। हम इसे पहले अवसर पर लागू करना चाहते थे।” मंत्री ने महिला आरक्षण के प्रति अपनी सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई, लेकिन यह पूछे जाने पर कि क्या संवैधानिक संशोधन विधेयक अगले सत्र में वापस लाया जाएगा, उन्होंने कोई प्रतिबद्धता नहीं जताई। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार आरक्षण लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन इस स्तर पर अगले कदम की बारीकियों का खुलासा नहीं किया जा सकता है। विपक्षी लोकसभा सांसदों ने सवाल किया था कि विधेयक में राज्यों में 50 प्रतिशत सीट वृद्धि के प्रस्ताव का उल्लेख क्यों नहीं किया गया। रिजिजू ने कहा, “अंतिम प्रस्ताव परिसीमन आयोग से आएगा। सरकार केवल एक विस्तृत रूपरेखा दे सकती है, जो हमने किया।” उन्होंने कहा, “लेकिन अगर विपक्ष सहमत था तो गृह मंत्री अमित शाह ने एक संशोधित विधेयक का प्रस्ताव भी रखा। हमने संशोधित विधेयक को वापस लाने के लिए सिर्फ एक घंटे का समय मांगा, लेकिन विपक्ष ने उसे भी खारिज कर दिया क्योंकि वे महिला आरक्षण को हराने के लिए कोई बहाना चाहते थे।” यह पूछे जाने पर कि क्या सरकार 543 सांसदों वाली मौजूदा लोकसभा में महिला आरक्षण लागू करने के विपक्ष के सुझाव पर विचार करने को तैयार है, रिजिजू ने इसे एक राजनीतिक स्टंट बताया। मंत्री ने कहा, “प्रियंका गांधी वाड्रा को एक महिला होने के नाते अपने भाई के भ्रामक रुख के खिलाफ स्टैंड लेना चाहिए था। अब विकल्प सुझाने का क्या मतलब है? कांग्रेस और उसकी सहयोगी पार्टियां जैसे टीएमसी, डीएमके, एसपी कभी भी महिला विरोधी होने का दाग नहीं धो पाएंगी। महिला मतदाता उन्हें बंगाल से शुरुआत करके सबक सिखाएंगी।” चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना पहले प्रकाशित: 21 अप्रैल, 2026, 10:27 IST समाचार राजनीति ‘उन्होंने कलाबाज़ी खेली’: रिजिजू ने महिला आरक्षण विधेयक पर कांग्रेस, एसपी पर ‘विश्वासघात’ का आरोप लगाया अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)महिला आरक्षण बिल(टी)महिला आरक्षण(टी)संवैधानिक संशोधन बिल(टी)किरेन रिजिजू साक्षात्कार(टी)विपक्ष सोमरस(टी)जाति जनगणना भारत(टी)परिसीमन आयोग(टी)भारतीय संसद बहस
ABV-IIITM सहायक रजिस्ट्रार मामले में बड़ा फैसला:हाईकोर्ट ने कहा- चयन प्रक्रिया पूरी तो विवाद खत्म, जॉब जॉइन के बाद जांच पर रोक

ग्वालियर स्थित अटल बिहारी वाजपेयी भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी एवं प्रबंधन संस्थान में सहायक रजिस्ट्रार की नियुक्ति विवाद पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि चयन प्रक्रिया पूरी होने और बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की मंजूरी मिलने के बाद नियुक्ति को बार-बार जांच के दायरे में लाना उचित नहीं है। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस तरह बार-बार जांच करना कर्मचारी के अधिकारों के साथ अन्याय होगा। अदालत ने यह भी माना कि एक बार वैधानिक प्रक्रिया पूरी हो जाए तो उसे अनावश्यक रूप से विवादित नहीं किया जा सकता। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि चयन प्रक्रिया में कोई गंभीर खामी नहीं थी। लिखित परीक्षा केवल क्वालिफाइंग थी, जबकि अंतिम चयन इंटरव्यू के आधार पर किया गया, जो नियमों के अनुरूप था। अदालत ने कहा कि चयन प्रक्रिया को पहले ही बोर्ड ऑफ गवर्नर्स से मंजूरी मिल चुकी थी, ऐसे में तकनीकी त्रुटियों के आधार पर इसे चुनौती देना उचित नहीं है। कोर्ट ने यह भी गौर किया कि न तो किसी असफल अभ्यर्थी ने चयन को चुनौती दी और न ही पक्षपात का कोई ठोस आरोप सामने आया। SBI छोड़कर जॉइन किया था पद मामला संदीप उपाध्याय की नियुक्ति से जुड़ा है, जिन्होंने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की नौकरी छोड़कर साल 2019 में संस्थान में सहायक रजिस्ट्रार पद पर जॉइन किया था। नियुक्ति के बाद कुछ शिकायतों के आधार पर संस्थान ने कई जांच समितियां गठित कीं। इन समितियों ने चयन प्रक्रिया, पे प्रोटेक्शन और प्रोबेशन अवधि पर सवाल उठाए। यहां तक कि नियुक्ति रद्द करने की सिफारिश भी कर दी गई थी।






