अजाक्स में वर्चस्व की जंग, RSS प्रमुख भागवत तक पहुंची:कंसोटिया समर्थक ने की शिकायत; मौर्य का जवाब- संगठन की संपत्ति पर कब्जा करने की साजिश

मध्यप्रदेश अनुसूचित जाति जनजाति अधिकारी कर्मचारी संघ (अजाक्स) में वर्चस्व की लड़ाई अब बड़ा राजनीतिक रूप लेती दिख रही है। मामला राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत तक पहुंच गया है। पूर्व अपर मुख्य सचिव जेएन कंसोटिया समर्थक गुट ने संघ प्रमुख को लिखित शिकायत कर संगठन में हस्तक्षेप के गंभीर आरोप लगाए हैं। अजाक्स के संगठन महामंत्री गौतम पाटिल ने शिकायत में आरोप लगाया है कि संघ से जुड़े पदाधिकारी संगठन के कामकाज में दखल दे रहे हैं। विशेष रूप से सुरेन्द्र मिश्रा पर आरोप है कि वे मुकेश मौर्य के साथ मिलकर संगठन पर अनधिकृत नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं। उधर, इसी मामले में मुकेश मौर्य जिन्हें शासन ने अजाक्स का प्रांताध्यक्ष बताया है, उनके द्वारा अजाक्स भवन पर कब्जा करने के मामले में जल्द एफआईआर कराने की शिकायत की जा सकती है। मौर्य पर सदस्यता और गबन के आरोप शिकायत में कहा गया है कि अजाक्स में प्रदेश के लाखों शासकीय अधिकारी एवं कर्मचारी सदस्य के रूप में जुड़े हुए हैं और यह प्रदेश की लगभग 36 प्रतिशत अनुसूचित जाति एवं जनजाति आबादी का प्रतिनिधित्व करता है। अजाक्स में केवल शासकीय कर्मचारी ही सदस्य बन सकते हैं, जबकि मुकेश मौर्य एक निजी संस्थान में कार्यरत हैं। उन पर करीब 17.95 लाख रुपए की सदस्यता राशि के गबन का आरोप भी लगाया गया है। इनमें से लगभग ₹12.95 लाख रुपए स्थानीय स्तर पर रसीद काटकर एकत्र की गई, जिसे न तो बैंक में जमा किया गया और न ही उसका कोई लेखा-जोखा प्रस्तुत किया गया। इस संबंध में उन्हें जुलाई 2023 में प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित कर दिया गया। फर्जी कार्यकारिणी बनाने और संगठन की छवि खराब करने का आरोप गौतम पाटिल ने यह भी आरोप लगाया कि 29 एवं 30 जुलाई 2023 में कथित बैठकों के आधार पर कूटरचित कार्यकारिणी बनाकर उसे भोपाल में पंजीयन के लिए प्रस्तुत किया गया। इस पूरे मामले में शासन के अधिकारियों से मिलीभगत कर एक गैर-शासकीय व्यक्ति को प्रांताध्यक्ष बनाने का प्रयास बताया गया है। शिकायत में कहा गया है कि यह पूरा घटनाक्रम धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और अवैध हस्तक्षेप जैसे गंभीर अपराधों की श्रेणी में आता है। साथ ही इससे संघ और संगठन दोनों की छवि प्रभावित हो रही है। मौर्य का पलटवार: संपत्ति हड़पने की साजिश दूसरी ओर मुकेश मौर्य ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए पलटवार किया है। उनका कहना है कि कंसोटिया, एसएल सूर्यवंशी और गौतम पाटिल समेत कुछ लोग ट्रस्ट बनाकर संगठन की संपत्ति हड़पना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि उनके प्रांताध्यक्ष बनने के बाद ही यह विवाद खड़ा किया गया है। मौर्य ने कहा कि वे अपने कार्यकाल में कंसोटिया को संरक्षक बनाने को तैयार थे पर इनके द्वारा संगठन को तोड़ने का काम किया जा रहा है। मौर्य ने कहा कि बुधवार को इन सबके विरुद्ध एफआईआर कराएंगे। अजाक्स कार्यालय को घेर कर रखा है। फर्जी शिकायत कर रहे हैं। अधिकार नहीं है, फिर भी कब्जा कर रहे हैं। मौर्य ने कहा कि सुरेंद्र मिश्रा ने ग्वालियर में रविदास जयंती पर कार्यक्रम किया था तो ग्वालियर का कार्यालय भवन उन्हें सौंपा था। इसलिए ये लोग विरोध कर रहे हैं। मौर्य ने कहा कि सामाजिक समरसता के लिए सालों से काम कर रहा हूं। इसी तरह का कोई और कार्यक्रम करता है तो उसमें बुराई है? सभी वर्ग आएंगे इसलिए सहमति दी थी।
निशांत नहीं बनेंगे डिप्टी CM, आगे क्या करेंगे:आखिरी समय में नीतीश कुमार ने क्यों बेटे को नहीं बनाया उपमुख्यमंत्री, JDU क्या खत्म होगी

नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार डिप्टी CM नहीं बनेंगे। 14 अप्रैल की दोपहर 12 बजे तक उनको डिप्टी सीएम बनने के लिए मनाने की कवायद चलती रही, लेकिन वह नहीं माने। इसमें नीतीश कुमार की इच्छा ज्यादा रही। निशांत कुमार डिप्टी CM क्यों नहीं बने। अब आगे क्या करेंगे। JDU का भविष्य क्या होगा। इन्हीं सवालों का जवाब आज के एक्सप्लेनर बूझे की नाहीं में…। 3 पॉइंट में निशांत क्यों नहीं बने डिप्टी CM 1. परिवारवादः तेजस्वी-दीपक प्रकाश नहीं बनना चाहते निशांत कुमार डिप्टी CM नहीं बनेंगे। सूत्रों के मुताबिक, निशांत का मानना है कि अगर अभी सरकार में शामिल होंगे तो उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश और लालू प्रसाद यादव के बेटे तेजस्वी यादव की तरह परिवारवाद का आरोप लगेगा। राजनीति की शुरुआत में ही इस तरह का आरोप नहीं चाहते हैं। कमोबेश यही सोच उनके पिता और JDU के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार की भी है। दरअसल, नीतीश कुमार पूरी राजनीति परिवारवाद के खिलाफ करते रहे हैं। वह आज भी अपने हर भाषण में एक लाइन जरूर बोलते हैं- ‘2005 से पहले बिहार में कुछ था जी, वो हटे तो पत्नी को CM बना दिया। उन्होंने सिर्फ अपने परिवार वालों के लिए किया।’ 2. पद की लालच नहीं, सीनियरिटी का ख्याल रखने का मैसेज निशांत कुमार की जगह नई सरकार में JDU कोटे से दो डिप्टी CM होंगे। यादव समाज से आने वाले बिजेंद्र प्रसाद यादव और भूमिहार समाज से आने वाले विजय कुमार चौधरी। दोनों नेता नीतीश कुमार के काफी करीबी और पुराने सहयोगी हैं। 3. डिप्टी CM से ज्यादा जरूरी वोट बैंक बचाना निशांत कुमार के लिए इस वक्त की सबसे बड़ी चुनौती नीतीश कुमार के वोट बैंक को बचाना है। नीतीश कुमार का मुख्य वोट बैंक कुर्मी (उनकी जाति), महादलित, EBC और कुछ मुस्लिम-दलित समूहों में है। 16% से ज्यादा वोट बैंक हमेशा नीतीश कुमार के साथ रहा है। वह किसी भी पार्टी के साथ रहे, उनके वोटरों पर कोई फर्क नहीं पड़ता। फिलहाल बिहार में JDU के 85 विधायक और 12 सांसद हैं। पार्टी के अंदर चुनौती नहीं… सरकार में नहीं आए निशांत, आगे क्या करेंगे 1. राज्य घूमकर परिवारवाद की छवि से बाहर निकालेंगे निशांत की टीम में शामिल एक विधायक ने भास्कर को बताया, ‘वे पूरी तैयारी के साथ सरकार में शामिल होना चाहते हैं। इसके लिए वह राज्य की यात्रा करना चाहते हैं। ताकि लोगों की समस्या, सरकार का कामकाज और राजनीति के उतार-चढ़ाव को जान-समझ सके।’ एक तर्क है कि निशांत कुमार अभी परिवारवाद की उपज हैं। राजनीतिक अनुभव नहीं है। निशांत की एंट्री से JDU पर वंशवाद का ठप्पा लग रहा है, जो नीतीश की छवि को नुकसान पहुंचा रहा है। कई रिपोर्ट्स में इसे ‘राजनीतिक जरुरत’ बताया गया है, लेकिन विरोधी दल RJD-कांग्रेस इसे मुद्दा बनाएंगे। निशांत कुछ समय लेकर साबित करना चाहते हैं कि वे सिर्फ ‘नीतीश का बेटा’ नहीं, बल्कि स्वतंत्र नेता हैं। 2. डिप्टी नहीं, नेता बनने की तैयारी 2003 में बनी JDU बीते 23 साल से नीतीश की छांव में ही चल रही है। नीतीश कुमार ही चेहरा हैं। पिछले 30 सालों की बिहार की राजनीति को देखें तो यहां हमेशा तीसरी धुरी रही है। तीसरी धुरी का नेतृत्व नीतीश कुमार करते हैं। निशांत के सरकार में नहीं आने से JDU पर कोई असर पड़ेगा बिल्कुल, बहुत असर पड़ेगा। अब तक JDU के पास मुख्यमंत्री का पद रहा है। अब सत्ता का समीकरण बदल गया है। पार्टी को मुख्यमंत्री पद नहीं, उपमुख्यमंत्री से ही संतोष करना पडे़गा। पार्टी खत्म नहीं होगी, लेकिन प्रभाव कम जरूर होगा।
खबर हटके- 20 साल तक पेट में रहा थर्मामीटर:घसीटाराम-खोजाराम जैसे नाम बदल सकेंगे बच्चे; दुल्हन ने चेहरा दिखाने के लिए मांगे ₹90 लाख

चीन में एक व्यक्ति के पेट में 20 साल तक थर्मामीटर पड़ा रहा। वहीं, राजस्थान के स्कूलों में अब बच्चे घसीटाराम-खोजाराम जैसे अजीबोगरीब नाम बदल सकेंगे। उधर, उत्तर प्रदेश में एक दुल्हन ने चेहरा दिखाने के लिए ₹90 लाख की डिमांड कर दी। आज खबर हटके में जानेंगे ऐसी ही 5 रोचक खबरें… तो ये थी आज की रोचक खबरें, कल फिर मिलेंगे कुछ और दिलचस्प और हटकर खबरों के साथ… खबर हटके को और बेहतर बनाने के लिए हमें आपका फीडबैक चाहिए। इसके लिए यहां क्लिक करें…
रिलेशनशिप एडवाइज- कहीं मुझे प्यार तो नहीं हो गया:हमेशा बस उसका ही ख्याल, न देखूं तो बेचैनी, ये प्यार है या सिर्फ अट्रैक्शन

सवाल- मैं बीएससी सेकेंड ईयर का स्टूडेंट हूं। मेरी क्लास की एक लड़की से मेरी काफी अच्छी दोस्ती है। हम साथ बैठकर पढ़ते हैं और अपनी पर्सनल बातें भी शेयर करते हैं। वीकेंड्स पर हम साथ घूमने भी जाते हैं। पिछले कुछ समय से मुझे महसूस हो रहा है कि मेरे मन में उसके लिए अलग तरह की फीलिंग्स आने लगी हैं। उसे देखते ही खुशी होती है, उससे बात न हो तो बेचैनी होने लगती है। मैं अक्सर उसके बारे में ही सोचता रहता हूं। लेकिन मुझे समझ नहीं आ रहा कि ये सच में प्यार है या सिर्फ अट्रैक्शन। मैं अपनी फीलिंग्स को कैसे समझूं और इस सिचुएशन में मुझे क्या करना चाहिए? एक्सपर्ट: डॉ. जया सुकुल, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, नोएडा जवाब- आप जीवन के उस पड़ाव पर हैं, जहां भावनाएं बहुत तीव्र होती हैं। इस उम्र में किसी की तरफ अट्रैक्ट होना, हर वक्त उसके बारे में सोचना, बेचैनी होना बहुत स्वाभाविक है। ये अच्छी बात है कि आप अपनी भावनाओं को लेकर अवेयर हैं और जल्दबाजी में किसी फैसले से पहले इसे समझना चाहते हैं। चलिए अब आपकी उलझन को सुलझाने की कोशिश करते हैं। प्यार और अट्रैक्शन में फर्क प्यार और अट्रैक्शन के बीच थिन लाइन होती है, दोनों पेट में तितलियों जैसा एहसास कराते हैं। हालांकि, इनके मायने थोड़े अलग हैं। अट्रैक्शन यह आमतौर पर बाहरी चीजों पर निर्भर करता है। जैसे लुक, स्टाइल, बात करने का तरीका, हंसी या कोई खास टैलेंट। यह बहुत तेजी से होता है और कई बार बहुत तीव्र भी होता है, लेकिन यह जरूरी नहीं कि टिकाऊ भी हो। प्यार यह एक गहरा एहसास है, जो समय के साथ विकसित होता है। यह सिर्फ बाहरी सुंदरता पर निर्भर नहीं होता है। यह व्यक्ति के विचारों, उसके स्वभाव, उसकी अच्छाइयों-कमियों सबको स्वीकारने पर आता है। प्यार में स्थायित्व होता है और अक्सर लंबे समय तक टिका रहता है। ग्राफिक से दोनों में फर्क समझिए- ये प्यार है या आकर्षण? अपनी भावनाओं की गहराई नापने के लिए खुद से कुछ सवाल पूछें और ईमानदारी से उनके जवाब दें। यह कोई मनोवैज्ञानिक साइंटिफिक टेस्ट नहीं है। ये सवाल सिर्फ इसलिए है, ताकि आप खुद से पूछकर यह समझ सकें कि आप जो फील कर रहे हैं, वह प्यार है या आकर्षण। प्यार और आकर्षण में कंपैरिजन क्यों? अमूमन लोग अट्रैक्शन को ‘कमतर’ और प्यार को ‘बड़ा’ मानते हैं। लेकिन हकीकत यह है कि कई बार गहरे प्यार की शुरुआत एक छोटे से आकर्षण से ही होती है। इसलिए अपनी फीलिंग्स को जज न करें। नतीजे पर पहुंचने की जल्दी क्यों? इस वक्त में जो है, उसे महसूस करें आपकी उम्र अभी सिर्फ 21 साल है। यह करियर बनाने और खुद को समझने का समय है। इतनी जल्दी किसी रिश्ते को ‘प्यार’ का नाम देकर खुद पर दबाव न डालें। इस वक्त जो है, उसे महसूस करें। दोस्ती बहुत अनमोल होती है। हो सकता है कि आप दोनों का यह तालमेल समय के साथ और गहरा हो जाए और स्वाभाविक रूप से प्यार में बदल जाए। ये भी हो सकता है कि यह रिश्ता सिर्फ एक अच्छी दोस्ती ही रहे। जो भी हो, उसे स्वाभाविक तरीके से होने दें। कुछ भी ‘चेज’ (पीछा) न करें या जबरदस्ती हासिल करने की कोशिश न करें। इसके साथ आपको यह भी समझने की जरूरत कि प्यार वो नहीं है, जो किताबों में अक्सर पढ़ने को मिलता है। प्यार वो नहीं, जो रोमांटिक किताबें हमें बताती हैं फिल्मों और किताबों में प्यार को अक्सर विरह, तड़प, बेचैनी और पागलपन की तरह दिखाया जाता है। जबकि असल जिंदगी में प्यार का पैरामीटर बिल्कुल बुनियादी होना चाहिए। प्यार वो नहीं है, जो आपको कमजोर या असुरक्षित बनाए। ग्राफिक में प्यार के बारे में जानिए- जब भी लगे प्यार है, खुद से पूछें ये सवाल जिंदगी में जब भी ये कन्फ्यूजन हो कि ये प्यार है या नहीं, तो खुद से एक ही सवाल पूछें- “जब मैं उसके साथ होता हूं, तो अपने बारे में कैसा महसूस करता हूं?” अंतिम सलाह अभी आप सिर्फ अपनी दोस्ती को एन्जॉय करें। एक-दूसरे को और बेहतर तरीके से जानें। वक्त को अपना काम करने दें। अगर यह सच्चा प्यार होगा तो यह समय की कसौटी पर खरा उतरेगा और आपको खुद-ब-खुद इसका जवाब मिल जाएगा। जल्दबाजी न करें, जर्नी का आनंद लें। ……………… ये खबर भी पढ़िए रिलेशनशिप एडवाइज- पार्टनर फेसबुक पर लड़कियों से फ्लर्ट करता है: मैं कुछ बोलूं तो कहता है, ‘तुम इनसिक्योर हो,’ क्या ये चीटिंग है? इंटरनेट और सोशल मीडिया से पहले के दौर में ‘चीटिंग’ की परिभाषा अलग थी। तब धोखे का एक ही मतलब था- किसी तीसरे व्यक्ति के साथ शारीरिक संबंध। लेकिन आज की तारीख में जिंदगी का एक बड़ा हिस्सा मोबाइल पर गुजर रहा है। हमारी बहुत सारी बातचीत, जुड़ाव, प्रेम और आकर्षण दरअसल हमारी डिजिटल स्क्रीन पर ही हो रहे हैं। आगे पढ़िए…
‘नीतीश कुमार की निरंतरता का प्रतिबिंब’: बीजेपी ने बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में सम्राट चौधरी को क्यों चुना | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:14 अप्रैल, 2026, 23:48 IST सूत्रों ने कहा कि भाजपा नेता सम्राट चौधरी की कटौती का एक और कारण यह था कि उनके पास वित्त और गृह विभाग जैसे मजबूत और महत्वपूर्ण विभाग थे। भाजपा नेता सम्राट चौधरी 15 अप्रैल, 2026 को बिहार के 23वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेंगे। (छवि: पीटीआई/फ़ाइल) 15 अप्रैल को बिहार के पहले भाजपा मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने से पहले सम्राट चौधरी इतिहास रचने से एक कदम दूर हैं। ऐसे कई कारण हैं कि भाजपा, जो अब युवा रक्त पर ध्यान केंद्रित कर रही है, ने चौधरी को बिहार का नेतृत्व करने के लिए आदर्श उम्मीदवार के रूप में चुना क्योंकि राज्य कम से कम दो दशकों के जेडी (यू) प्रमुख नीतीश कुमार के शासनकाल के बाद “भगवा” मोड में चला गया है। लेकिन नीतीश कुमार सबसे महत्वपूर्ण कारण हो सकते हैं क्योंकि भाजपा सूत्रों के अनुसार, चौधरी का चयन “निरंतरता का प्रतिबिंब” है क्योंकि उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री के डिप्टी के रूप में काम किया है। बिहार के नए मुख्यमंत्री की घोषणा के लाइव अपडेट यहां देखें सूत्रों ने बताया न्यूज18 यह कटौती करने का एक और कारण यह था कि उनके पास वित्त और गृह विभाग जैसे मजबूत और महत्वपूर्ण विभाग थे। उन्होंने कहा, यह उनके अनुभव को दर्शाता है क्योंकि राज्य के गृह मंत्री का पोर्टफोलियो महत्वपूर्ण है और पहले यह विशेष रूप से नीतीश के पास था। युवा नेताओं पर भाजपा के फोकस के बारे में विस्तार से बताते हुए, खासकर 45 वर्षीय नितिन नबीन के राष्ट्रीय अध्यक्ष होने पर, सूत्रों ने कहा कि 57 वर्षीय चौधरी एक युवा नेता हैं और इसलिए, शीर्ष पदों पर युवाओं की पदोन्नति को बढ़ावा मिलता है। उन्होंने राज्य इकाई प्रमुख सहित संगठन में विभिन्न पदों पर भी काम किया है और उनके पास व्यापक प्रशासनिक अनुभव है जिसके कारण वह सरकार और पार्टी के बीच बेहतर समन्वय कर सकते हैं, जो आने वाले समय में महत्वपूर्ण होगा। सम्राट चौधरी कौन हैं? सम्राट चौधरी बुधवार को बिहार के 23वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेंगे, जो हिंदी पट्टी के केंद्र में “भगवा” राजनीति के एक नए युग का संकेत है। उनकी राजद की जड़ों से लेकर उनकी भाजपा के प्रति निष्ठा तक, एक प्रभावशाली क्षेत्रीय नेता के रूप में उनके उदय का पता राज्य की राजनीति में एक मजबूत पारिवारिक विरासत और कुशवाह (कोइरी) समुदाय से एक ओबीसी नेता के रूप में उनकी पकड़ से लगाया जा सकता है। उनके राजनीतिक विकास में उन्हें उनके पिता, शकुनी चौधरी – जो कि राजद के दिग्गज नेता लालू प्रसाद यादव के करीबी सहयोगी थे, का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ – जिसके बाद वह 1999 तक राबड़ी देवी के नेतृत्व वाली सरकार के तहत बिहार के सबसे युवा मंत्रियों में से एक बन गए। 2000 के दशक की शुरुआत में, वह राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के तीखे आलोचक थे। लेकिन, 2014 में, वह जेडीयू में शामिल हो गए, जिसे आज उनके सीएम पद पर पहुंचने की शुरुआत के रूप में देखा जा सकता है। वह अंततः 2017 और 2018 के बीच भाजपा में शामिल हो गए, जिससे अनजाने में बिहार में भगवा पार्टी के शासन के अग्रदूत के रूप में उनका भाग्य तय हो गया। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना पहले प्रकाशित: 14 अप्रैल, 2026, 23:39 IST समाचार राजनीति ‘नीतीश कुमार की निरंतरता का प्रतिबिंब’: बीजेपी ने बिहार के सीएम के रूप में सम्राट चौधरी को क्यों चुना? अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)सम्राट चौधरी बिहार के मुख्यमंत्री(टी)सम्राट चौधरी(टी)बिहार के मुख्यमंत्री(टी)बिहार में बीजेपी(टी)नीतीश कुमार की विरासत(टी)युवा बीजेपी नेतृत्व(टी)बिहार की राजनीति 2024(टी)बीजेपी सरकार का गठन
राजगढ़ में शादीशुदा प्रेमी जोड़े ने पेड़ पर फांसी लगाई:पांच साल से एक दूसरे को जानते थे; दो दिन में दूसरी ऐसी घटना

राजगढ़ जिले के भोजपुर थाना क्षेत्र के दुर्गपुरा गांव में मंगलवार सुबह एक प्रेमी जोड़े के शव गांव से करीब 2 किलोमीटर दूर जंगल की पहाड़ी पर नीम के पेड़ से लटके मिले। युवक ने गमछे और महिला ने चुन्नी से फंदा बनाकर आत्महत्या कर ली। घटना की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए, वहीं पुलिस ने पहुंचकर जांच शुरू कर दी है। सुबह करीब 10 बजे बकरी चराने गए एक युवक की नजर पहाड़ी पर पेड़ से लटके दोनों शवों पर पड़ी। वह घबरा गया और तुरंत गांव पहुंचकर लोगों को जानकारी दी। सूचना मिलते ही ग्रामीण मौके पर पहुंचे और पुलिस को खबर दी गई। कुछ ही देर में पूरा गांव घटनास्थल पर जुट गया। सूचना मिलते ही एसडीओपी धर्मवीर सिंह और भोजपुर थाना प्रभारी अजय यादव मौके पर पहुंचे। पुलिस ने शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए खिलचीपुर अस्पताल भेजा और मामले की जांच शुरू कर दी। पांच साल से चल रहा था प्रेम प्रसंग, दोनों थे शादीशुदा मृतकों की पहचान चैनसिंह तंवर (37) और मांगीबाई (35) के रूप में हुई। स्थानीय लोगों के अनुसार, दोनों एक ही गांव के रहने वाले थे और पिछले करीब पांच साल से उनके बीच प्रेम संबंध था। दोनों पहले से शादीशुदा थे और उनके बच्चे भी हैं। इस रिश्ते को लेकर दोनों परिवारों में पहले भी विवाद हो चुका था। परिजनों के अनुसार, करीब एक साल पहले दोनों घर छोड़कर भाग गए थे। उस समय परिजन उन्हें राजस्थान से ढूंढकर वापस लेकर आए थे। बाद में पंचायत और पुलिस के सामने समझाइश देकर दोनों को अलग कर दिया गया था। इसके बाद मांगीबाई पिछले चार महीने से अपने मायके कोयला गांव में रह रही थी। सोमवार को घर से निकले, फिर नहीं लौटे जानकारी के मुताबिक, सोमवार को चैनसिंह घर से खिलचीपुर जाने की बात कहकर निकला था, लेकिन वापस नहीं लौटा। वहीं मांगीबाई भी अपने मायके कोयला से बिना बताए निकल गई थी। मंगलवार सुबह दोनों के शव एक ही पेड़ पर अलग-अलग फंदों में लटके मिले। घटनास्थल से पुलिस को शराब की दो बोतलें भी बरामद हुई हैं। हालांकि, पुलिस ने आत्महत्या के पीछे के वास्तविक कारणों का अभी खुलासा नहीं किया है। पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच कर रही है। पिता प्रभुलाल के अनुसार, चैनसिंह खेती और मजदूरी करता था और उसके चार बच्चे हैं। वहीं मांगीबाई का भी एक 10 वर्षीय बेटा है। दो दिन पहले भी हुई थी ऐसी ही घटना गौरतलब है कि दो दिन पहले ही दुर्गपुरा से करीब 8 किलोमीटर दूर ढाबलीखुर्द गांव में भी एक प्रेमी जोड़े ने फांसी लगाकर आत्महत्या की थी।
पैदल जा रहे दंपती को वाहन ने टक्कर मारी:मंडला में पति का पैर कटकर अलग, मौत, पत्नी गंभीर घायल; खेत से घर जा रहे थे

मंडला जिले के टिकरिया थाना क्षेत्र में नेशनल हाईवे-30 पर बबैहा पुल के पास तेज रफ्तार वाहन ने पैदल जा रहे पति-पत्नी को जोरदार टक्कर मार दी, जिसमें पति की जान चली गई और पत्नी गंभीर रूप से घायल हैं। जुझारी गांव के रहने वाले 50 साल के रामचरण मरकाम अपनी पत्नी धनवती के साथ खेत का काम निपटाकर घर लौट रहे थे। जब वे बबैहा पुल पर पहुंचे, तभी एक तेज रफ्तार पिकअप वाहन ने उन्हें टक्कर मारी और ड्राइवर गाड़ी लेकर मौके से भाग निकला। नाले में जा गिरे रामचरण टक्कर इतनी भीषण थी कि रामचरण का पैर कट गया और वे उछलकर पुल के नीचे नाले में जा गिरे। सूचना मिलते ही कोतवाली पुलिस और डायल 112 की टीम मौके पर पहुंची। काफी तलाश के बाद पुलिस को नाले से रामचरण का शव मिला और उसे पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेजा। पत्नी की हालत नाजुक घायल पत्नी धनवती मरकाम को तुरंत जिला अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों के अनुसार, उनके सिर में गंभीर चोटें आई हैं और उनकी हालत काफी नाजुक बनी हुई है। हादसे के बाद इलाके में काफी भीड़ जमा हो गई। पुलिस ने अज्ञात वाहन के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और फरार चालक की तलाश शुरू कर दी है।
महू में दो मकानों में लगी आग:शॉर्ट सर्किट से लाखों का घरेलू सामान जलकर खाक, दमकल ने पाया काबू

महू के सिमरोल थाना क्षेत्र के शिव नगर में सोमवार रात आग लगने से दो परिवारों का भारी नुकसान हो गया। शॉर्ट सर्किट की वजह से लगी इस आग ने देखते ही देखते दो मकानों को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया। आग इतनी अचानक और तेजी से फैली कि घर के लोगों को सामान निकालने तक का मौका नहीं मिला। लपटों ने दोनों घरों को घेर लिया और अंदर रखा सारा घरेलू सामान जलकर राख हो गया। शोर सुनकर आसपास के लोग जमा हो गए और बचाव कार्य में जुट गए। ग्रामीणों ने पाया काबू दमकल विभाग को सूचना देने के साथ ही स्थानीय लोगों ने खुद ही आग बुझाने की कोशिशें शुरू कर दीं। काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका, लेकिन तब तक दोनों मकानों का कीमती सामान पूरी तरह नष्ट हो चुका था। कोई जनहानि नहीं राहत की बात यह रही कि इस हादसे में कोई भी घायल नहीं हुआ और समय रहते लोग घरों से बाहर निकल आए। हालांकि, पीड़ित परिवारों को बड़ा आर्थिक झटका लगा है। मौके पर पहुंची सिमरोल पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और नुकसान का आकलन किया जा रहा है।
रणबीर-आलिया की शादी की चौथी एनिवर्सरी:बर्फबारी के बीच सेलब्रैशन की तस्वीरें शेयर की; एक्ट्रेस ने लिखा- तू साथ है तो दिन रात है

बॉलीवुड कपल आलिया भट्ट और रणबीर कपूर ने 14 अप्रैल को अपनी शादी की चौथी एनिवर्सरी सेलिब्रेट की। इस मौके पर आलिया ने सोशल मीडिया पर अपने वेकेशन की कई अनसीन तस्वीरें और वीडियो शेयर किए हैं। इन तस्वीरों में यह कपल बर्फीली वादियों के बीच सुकून के पल बिताता नजर आ रहा है। आलिया ने इंस्टाग्राम पर अपनी स्कीइंग ट्रिप की झलक दिखाई है। शेयर किए गए वीडियो में दोनों पहाड़ों पर स्कीइंग करते और बर्फीली वादियों का लुत्फ उठाते दिख रहे हैं। एक फोटो में दोनों साथ बैठकर गर्म ड्रिंक्स एन्जॉय कर रहे हैं। हालांकि आलिया ने लोकेशन का खुलासा नहीं किया है, लेकिन विजुअल्स देखकर फैंस कयास लगा रहे हैं कि यह कपल स्विट्जरलैंड के गस्ताद में छुट्टियां मना रहा है। बेटी राहा संग नजर आए रणबीर कपूर तस्वीरों में रणबीर कपूर अपनी बेटी राहा के साथ नजर आ रहे हैं। रणबीर, राहा को साथ में लेकर ‘एल्पका’ (एक तरह का पहाड़ी जानवर) को खाना खिलाते दिख रहे हैं। आलिया ने पोस्ट के साथ एक इमोशनल नोट भी लिखा फिसलने और गिरने, चलने और बहुत सारी बातें करने के बीच… हमने अपने लिए एक बहुत ही शानदार लाइफ बना ली है। शॉर्ट में कहूं तो… तू साथ है तो दिन रात है। आलिया ने इस पोस्ट के बैकग्राउंड में अपनी फिल्म ‘हाईवे’ का म्यूजिक इस्तेमाल किया है। फैमिली ने दी बधाई आलिया की इस पोस्ट पर परिवार और बॉलीवुड सितारों ने खूब प्यार बरसाया। रणबीर की मां नीतू कपूर ने इसे ‘परफेक्ट’ बताया, वहीं आलिया की मां सोनी राजदान ने कमेंट किया “यह सब कितना जादुई और प्यारा है।” रणबीर की बहन रिद्धिमा ने भी दिल वाला इमोजी शेयर किया। अयान की फिल्म से शुरू हुई थी लव स्टोरी आलिया और रणबीर की प्रेम कहानी अयान मुखर्जी की फिल्म ‘ब्रह्मास्त्र’ के सेट पर शुरू हुई थी। कई सालों तक डेटिंग के बाद 14 अप्रैल 2022 को दोनों ने मुंबई में अपने घर ‘वास्तु’ में सादगी से शादी की थी। उसी साल नवंबर में उन्होंने बेटी राहा का स्वागत किया। अब यह जोड़ी एक बार फिर बड़े पर्दे पर साथ नजर आने वाली है। संजय लीला भंसाली की अगली फिल्म ‘लव एंड वॉर’ में रणबीर-आलिया के साथ विक्की कौशल भी लीड रोल में होंगे।
ट्रम्प ने PM मोदी को फोन किया, 40 मिनट बातचीत:ईरान जंग पर चर्चा, दोनों ने कहा- होर्मुज स्ट्रेट का खुला रहना बहुत जरूरी

PM मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के बीच करीब 40 मिनट तक फोन पर बातचीत हुई। अमेरिका-ईरान सीजफायर के बाद दोनों नेताओं के बीच पहली बातचीत थी। फोन कॉल के दौरान पीएम मोदी ने ट्रम्प से कहा, “भारत के लोग आपको पसंद करते हैं।” PM मोदी इस बातचीत को लेकर सोशल मीडिया पर लिखा- मुझे मेरे दोस्त राष्ट्रपति ट्रम्प का फोन आया। हमने दोनों देशों के बीच अलग-अलग क्षेत्रों में हुए काम और प्रगति पर बात की। हमने यह भी कहा कि आगे चलकर भारत और अमेरिका के रिश्ते को और मजबूत करेंगे। साथ ही, पश्चिम एशिया की स्थिति पर चर्चा हुई और इस बात पर जोर दिया कि हॉरमुज खुला और सुरक्षित रहना बहुत जरूरी है। अमेरिकी राजदूत बोले- भारत-US में जल्द बड़ा समझौता भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने कहा है कि प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के बीच होर्मुज की घेराबंदी के मुद्दे पर चर्चा हुई। उन्होंने यह भी बताया कि आने वाले कुछ दिनों और हफ्तों में भारत और अमेरिका के बीच ऊर्जा से जुड़े बड़े समझौते होने की उम्मीद है। राजदूत सर्जियो गोर ने कहा है कि भारत और अमेरिका के रिश्ते मजबूत हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच सहयोग लगातार बढ़ रहा है और कई अहम मुद्दों पर साथ मिलकर काम किया जा रहा है। गोर के मुताबिक, ट्रम्प ने पीएम मोदी से कहा कि हम सभी आपसे प्यार करते हैं। ट्रम्प-मोदी के बीच 20 दिन में दूसरी बातचीत इससे पहले पीएम मोदी और ट्रम्प के बीच 24 मार्च को फोन पर बात हुई थी। उस बातचीत में दोनों नेताओं ने मिडिल ईस्ट के हालात पर बात की थी। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि भारत चाहता है कि तनाव कम हो और जल्द से जल्द शांति बहाल हो उन्होंने होर्मुज स्ट्रेट को खुला और सुरक्षित रखने की अहमियत भी बताई थी, क्योंकि इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। यह खबर अपडेट हो रही है…







