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रिलेशनशिप एडवाइज- कहीं मुझे प्यार तो नहीं हो गया:हमेशा बस उसका ही ख्याल, न देखूं तो बेचैनी, ये प्यार है या सिर्फ अट्रैक्शन

रिलेशनशिप एडवाइज- कहीं मुझे प्यार तो नहीं हो गया:हमेशा बस उसका ही ख्याल, न देखूं तो बेचैनी, ये प्यार है या सिर्फ अट्रैक्शन

सवाल- मैं बीएससी सेकेंड ईयर का स्टूडेंट हूं। मेरी क्लास की एक लड़की से मेरी काफी अच्छी दोस्ती है। हम साथ बैठकर पढ़ते हैं और अपनी पर्सनल बातें भी शेयर करते हैं। वीकेंड्स पर हम साथ घूमने भी जाते हैं। पिछले कुछ समय से मुझे महसूस हो रहा है कि मेरे मन में उसके लिए अलग तरह की फीलिंग्स आने लगी हैं। उसे देखते ही खुशी होती है, उससे बात न हो तो बेचैनी होने लगती है। मैं अक्सर उसके बारे में ही सोचता रहता हूं। लेकिन मुझे समझ नहीं आ रहा कि ये सच में प्यार है या सिर्फ अट्रैक्शन। मैं अपनी फीलिंग्स को कैसे समझूं और इस सिचुएशन में मुझे क्या करना चाहिए? एक्सपर्ट: डॉ. जया सुकुल, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, नोएडा जवाब- आप जीवन के उस पड़ाव पर हैं, जहां भावनाएं बहुत तीव्र होती हैं। इस उम्र में किसी की तरफ अट्रैक्ट होना, हर वक्त उसके बारे में सोचना, बेचैनी होना बहुत स्वाभाविक है। ये अच्छी बात है कि आप अपनी भावनाओं को लेकर अवेयर हैं और जल्दबाजी में किसी फैसले से पहले इसे समझना चाहते हैं। चलिए अब आपकी उलझन को सुलझाने की कोशिश करते हैं। प्यार और अट्रैक्शन में फर्क प्यार और अट्रैक्शन के बीच थिन लाइन होती है, दोनों पेट में तितलियों जैसा एहसास कराते हैं। हालांकि, इनके मायने थोड़े अलग हैं। अट्रैक्शन यह आमतौर पर बाहरी चीजों पर निर्भर करता है। जैसे लुक, स्टाइल, बात करने का तरीका, हंसी या कोई खास टैलेंट। यह बहुत तेजी से होता है और कई बार बहुत तीव्र भी होता है, लेकिन यह जरूरी नहीं कि टिकाऊ भी हो। प्यार यह एक गहरा एहसास है, जो समय के साथ विकसित होता है। यह सिर्फ बाहरी सुंदरता पर निर्भर नहीं होता है। यह व्यक्ति के विचारों, उसके स्वभाव, उसकी अच्छाइयों-कमियों सबको स्वीकारने पर आता है। प्यार में स्थायित्व होता है और अक्सर लंबे समय तक टिका रहता है। ग्राफिक से दोनों में फर्क समझिए- ये प्यार है या आकर्षण? अपनी भावनाओं की गहराई नापने के लिए खुद से कुछ सवाल पूछें और ईमानदारी से उनके जवाब दें। यह कोई मनोवैज्ञानिक साइंटिफिक टेस्ट नहीं है। ये सवाल सिर्फ इसलिए है, ताकि आप खुद से पूछकर यह समझ सकें कि आप जो फील कर रहे हैं, वह प्यार है या आकर्षण। प्यार और आकर्षण में कंपैरिजन क्यों? अमूमन लोग अट्रैक्शन को ‘कमतर’ और प्यार को ‘बड़ा’ मानते हैं। लेकिन हकीकत यह है कि कई बार गहरे प्यार की शुरुआत एक छोटे से आकर्षण से ही होती है। इसलिए अपनी फीलिंग्स को जज न करें। नतीजे पर पहुंचने की जल्दी क्यों? इस वक्त में जो है, उसे महसूस करें आपकी उम्र अभी सिर्फ 21 साल है। यह करियर बनाने और खुद को समझने का समय है। इतनी जल्दी किसी रिश्ते को ‘प्यार’ का नाम देकर खुद पर दबाव न डालें। इस वक्त जो है, उसे महसूस करें। दोस्ती बहुत अनमोल होती है। हो सकता है कि आप दोनों का यह तालमेल समय के साथ और गहरा हो जाए और स्वाभाविक रूप से प्यार में बदल जाए। ये भी हो सकता है कि यह रिश्ता सिर्फ एक अच्छी दोस्ती ही रहे। जो भी हो, उसे स्वाभाविक तरीके से होने दें। कुछ भी ‘चेज’ (पीछा) न करें या जबरदस्ती हासिल करने की कोशिश न करें। इसके साथ आपको यह भी समझने की जरूरत कि प्यार वो नहीं है, जो किताबों में अक्सर पढ़ने को मिलता है। प्यार वो नहीं, जो रोमांटिक किताबें हमें बताती हैं फिल्मों और किताबों में प्यार को अक्सर विरह, तड़प, बेचैनी और पागलपन की तरह दिखाया जाता है। जबकि असल जिंदगी में प्यार का पैरामीटर बिल्कुल बुनियादी होना चाहिए। प्यार वो नहीं है, जो आपको कमजोर या असुरक्षित बनाए। ग्राफिक में प्यार के बारे में जानिए- जब भी लगे प्यार है, खुद से पूछें ये सवाल जिंदगी में जब भी ये कन्फ्यूजन हो कि ये प्यार है या नहीं, तो खुद से एक ही सवाल पूछें- “जब मैं उसके साथ होता हूं, तो अपने बारे में कैसा महसूस करता हूं?” अंतिम सलाह अभी आप सिर्फ अपनी दोस्ती को एन्जॉय करें। एक-दूसरे को और बेहतर तरीके से जानें। वक्त को अपना काम करने दें। अगर यह सच्चा प्यार होगा तो यह समय की कसौटी पर खरा उतरेगा और आपको खुद-ब-खुद इसका जवाब मिल जाएगा। जल्दबाजी न करें, जर्नी का आनंद लें। ………………
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