अमेरिका ने ईरान युद्ध पर 25 अरब डॉलर खर्च किए:ईरान बोला- जंग किसी समस्या का समाधान नहीं, बातचीत ही एकमात्र रास्ता

अमेरिका ईरान युद्ध पर पिछले 2 महीने में अब तक 25 अरब डॉलर खर्च कर चुका है। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के सीनियर अधिकारी जूल्स डब्ल्यू. हर्स्ट ने बुधवार को इसकी जानकारी संसद की आर्म्ड सर्विसेज कमेटी की सुनवाई में दी। हर्स्ट के मुताबिक कुल खर्च का बड़ा हिस्सा हथियारों, मिसाइलों और गोला-बारूद पर हुआ है। दूसरी तरफ ईरान के उप विदेश मंत्री सईद खातिबजादेह ने कहा कि जंग किसी समस्या का समाधान नहीं, बल्कि समस्या का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि मौजूदा संकट से निकलने का एकमात्र रास्ता बातचीत और कूटनीति है। खातिबजादेह ने कहा कि ईरान कई हफ्तों से युद्ध खत्म करने के लिए प्रस्ताव देता रहा है। युद्धविराम की कोशिशों के बावजूद अमेरिका और ईरान के बीच तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि ईरान ने समान शर्तों और बराबरी के आधार पर बातचीत का रास्ता सुझाया है। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… 1. ट्रम्प ने राइफल के साथ फोटो शेयर की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने राइफल के साथ फोटो पोस्ट कर ईरान को चेतावनी दी। फोटो पर लिखा था- नो मोर मिस्टर नाइस गाइ। 2. स्वीडिश PM ने अमेरिकी रणनीति पर सवाल उठाए स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टरसन ने कहा कि ईरान जंग में अमेरिका के पास कोई साफ रणनीति नजर नहीं आ रही। 3. ईरान ने UN में अमेरिका की शिकायत की ईरान ने संयुक्त राष्ट्र में शिकायत कर अमेरिका पर जहाज जब्त करने और 38 लाख बैरल तेल कब्जाने का आरोप लगाया। 4. लेबनान में 12 लाख लोगों पर भूखमरी का खतरा UN से जुड़ी रिपोर्ट में कहा गया कि युद्ध, विस्थापन और आर्थिक दबाव के कारण लेबनान में 12 लाख से ज्यादा लोग खाद्य संकट झेल सकते हैं। 5. भारत-ईरान विदेश मंत्रियों की फोन पर बातचीत विदेश मंत्री एस. जयशंकर और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने युद्धविराम, द्विपक्षीय रिश्तों और क्षेत्रीय हालात पर फोन पर चर्चा की। ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग गुजर जाइए…
इंदौर के पार्षद कालरा की रिकॉर्डिंग वायरल:सोशल मीडिया पर आई बातचीत की रिकॉर्डिंग, दुकान को लेकर कर रहे बात

इंदौर में पार्षद कमलेश कालरा की ऑडियो रिकॉर्डिंग सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। तीन अलग-अलग पार्ट में यह रिकॉर्डिंग सामने आई है। रिकॉर्डिंग में वह किसी व्यक्ति से दुकान के संबंध में बात कर रहे हैं। रिकॉर्डिंग के सामने आने के बाद एक रिकॉर्डिंग ओर सामने आई, जिसमें वह कह रहे हैं कि मीडिया तक ये रिकॉर्डिंग कैसे पहुंची। रिकॉर्डिंग की बात करें तो इसमें वह और दूसरे व्यक्ति से बात कर रहे हैं। जिसमें किसी दुकान को लेकर चर्चा की जा रही है। तीन अलग-अलग पार्ट में सामने आई रिकॉर्डिंग तीन अलग-अलग रिकॉर्डिंग सामने आई है। इसमें पहली रिकॉर्डिंग में सामने वाला किसी विजय का नाम लेकर पार्षद से कर रहा है कि वह आपसे मिलना चाहते हैं। इसमें शाम को मिलने की बात पर पार्षद कहते हैं कि पार्षद हैं ना। कभी भी कुछ भी काम आ जाता है, तो उसी टाइम जाना पड़ता है। सामने वाले ने कहा कि वह कह रहे हैं कि एक दुकान खाली करा देंगे। ये वाली दुकान का जैसा भैया कहेंगे वैसा कर लेंगे। आधा किराया भैया को दे देंगे। वहीं सामने वाला पार्षद को कहता है कि आप तो इस दुकान की चॉबी ही ले लेना। वहीं, दूसरी रिकॉर्डिंग में ऐसे फोन पर बात मत कराया करो। सबसे तुम ही बात कर लिया करो। सामने वाला कहता है कि वह मेरी बात नहीं मानेंगे, इस पर पार्षद कहते हैं कि जेसीबी आएगी तब मान जाएंगे। वहीं, तीसरी रिकॉर्डिंग में वह कह रहे हैं कि बाजार में ये ऑडियो कैसे आ गई मीडिया के पास। मीडिया में चल रही है। तुम ऐसे करोगे तो कैसे काम चलेगा। ये हटवाओ। आरोपों को गलत बताया जब पार्षद कमलेश कालरा से बात की तो उन्होंने कहा कि विजय नामक व्यक्ति ने दो दुकानों पर कब्जा कर रखा था। आज कार्रवाई हुई है, जबकि आज वे इलाके में थे भी नहीं, वे कोर्ट में थे। उन्होंने लेन-देन के आरोप को भी गलत बताया है।
हमले की आशंका इसलिए खामेनेई का अंतिम संस्कार रोका:भोपाल में ईरान के प्रतिनिधि का दावा; यह ट्रंप-नेतन्याहू की निजी जंग, बातचीत से पीछे हटने का आरोप

ईरान के सुप्रीम लीडर के अंतिम संस्कार में देरी को लेकर बड़ा बयान सामने आया है। ईरान के सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि मौलाना डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने रविवार को भोपाल में कहा कि सुरक्षा खतरे के कारण अंतिम संस्कार अभी तक नहीं किया गया है। उन्होंने आशंका जताई कि अगर लाखों लोग जुटते हैं तो उन पर हमला हो सकता है। मौलाना डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने कहा कि सुप्रीम लीडर का अंतिम संस्कार इसलिए टाला गया है क्योंकि हालात पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं। यदि अंतिम संस्कार आयोजित होता है तो ईरान के शहर मशहद में 2 करोड़ से अधिक लोगों के पहुंचने की संभावना है। इतनी बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा होते हैं, तो उन पर हमला किया जा सकता है। लेबनान में एक दिन में दो हजार से ज्यादा लोग मारे गए थे। वैसी स्थिति दोबारा बन सकती है। इसलिए हम हालात पूरी तरह शांत और सुरक्षित होने का इंतजार कर रहे हैं। मौलाना डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही भोपाल में कोहेफिजा स्थित एमआईजी हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में रविवार को आयोजित ‘इत्तेहाद-उल-मुस्लिमीन जलसा’ कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे। यह ट्रंप-नेतन्याहू की निजी जंग मौलाना इलाही ने कहा कि यह युद्ध ईरान ने नहीं छेड़ा, बल्कि यह डोनाल्ड ट्रंप और बेंजामिन नेतन्याहू की निजी जंग है। इससे न अमेरिका को फायदा है, न इजराइल को। ईरान ने कभी युद्ध नहीं चाहा। हमने पहले ही चेतावनी दी थी कि अगर युद्ध हुआ तो इसका असर कई देशों पर पड़ेगा। हमने बातचीत की कोशिश की, लेकिन उन्होंने ही हमला किया। ईरान के पास 5,000 साल से अधिक की सभ्यता है, बहुत अच्छे लोग हैं, कारखाने हैं और सब कुछ है। लेकिन दुर्भाग्य से 147 साल पहले से कुछ दूसरे देशों ने ईरान के खिलाफ बहुत सारे प्रतिबंध, आर्थिक प्रतिबंध बनाए। 3 दिन में ईरान गिराने की योजना थी, अमेरिकी भी इस युद्ध के खिलाफ मौलाना इलाही ने दावा किया कि अमेरिका को भरोसा था कि वह तीन दिनों में ईरान की सरकार गिरा सकता है। युद्ध के बाद ईरान का नक्शा बदलने की बात कही गई थी। ईरान को पांच हिस्सों में बांटने की योजना थी। युद्ध में ईरान को भारी नुकसान हुआ है। 1 लाख से अधिक घर तबाह, कई अस्पताल, विश्वविद्यालय और प्रयोगशालाएं नष्ट, कई कारखाने क्षतिग्रस्त, बड़ी संख्या में नागरिकों की मौत हुई है। अब ईरान अपने घायलों के इलाज के लिए भारत से दवाइयां खरीद रहा है। अमेरिकियों को इस युद्ध से कोई लाभ नहीं है, अमेरिकी सीनेटरों ने इस युद्ध की निंदा की है। आप न्यूयॉर्क के मेयर के बयान पर जाइए, जो मूल रूप से भारतीय हैं। अमेरिकी थोंपने लगे थे अपनी शर्तें, इसलिए विफल हुई वार्ता मौलाना इलाही ने बताया कि ईरान ने कभी भी किसी देश से यह नहीं कहा कि वह ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थ बने। कोई ईरान नहीं गया, कोई ईरान से नहीं आया। बल्कि, कुछ देश अपनी मर्जी से आगे आए और उन्होंने हमारे और अमेरिका के बीच बातचीत की पहल कर दी। ओमान और जिनेवा में बातचीत शुरू हुई थी और शुरुआती संकेत सकारात्मक थे। पहले अमेरिका ने 15-सूत्रीय प्रस्ताव दिया, जिसे ईरान ने खारिज किया। इसके बाद ईरान ने 10-सूत्रीय प्रस्ताव रखा, जिसे अमेरिका ने स्वीकार कर लिया। लेकिन अंतिम दौर में अमेरिका ने नई और असामान्य शर्तें रख दीं। उन्होंने कहा, जब यह साफ हो गया कि वे अपनी बात से पीछे हट रहे हैं, तो बातचीत विफल हो गई। होर्मुज अस्थायी रूप से बंद, लेकिन जल्द ही खुल जाएगा भारतीय जहाजों को लेकर उठ रहे सवालों के बीच मौलाना डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने स्पष्ट किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद किए जाने के पीछे सुरक्षा ही सबसे बड़ा कारण है। जब कुछ अन्य देश इस जलडमरूमध्य के रास्ते अपने युद्धपोत भेजना चाहते थे, तब ईरान को यह कदम उठाना पड़ा। यह कदम किसी एक देश के खिलाफ नहीं, बल्कि समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया था। उन्होंने विश्वास जताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य पहले की तरह सभी देशों के लिए खुल जाएगा, जैसा कि 28 फरवरी से पहले था। यह रोक अस्थायी है और जल्द ही स्थिति सामान्य हो जाएगी। तीन साल की मासूम ने रोते हुए उतार दी अपनी बाली मौलाना इलाही ने युद्ध के असर को लेकर एक भावुक घटना भी साझा की। उन्होंने बताया कि एक कार्यक्रम के दौरान तीन साल की बच्ची रोते हुए उनके पास आई और अपनी सोने की बाली उतारकर दे दी। बच्ची ने कहा, मैंने सुना है लड़कियों के स्कूल पर बमबारी हुई, कृपया यह ले लो। वह बच्ची यह नहीं जानती थी कि वे बच्चियां अब इस दुनिया में नहीं हैं। मैं भावुक हो गया। बाली वापस करते हुए कहा, यह तुम्हारे लिए उपहार है, और उसकी कीमत का दोगुना देने की बात कही। ईरान-भारत संबंध 5,000 साल पुराने, भारतीय दयालु भारत-ईरान संबंधों पर कहा, ईरान और भारत के बीच संबंध बहुत अच्छे हैं, बहुत मजबूत हैं। मुझे यकीन है कि ईरान और भारत के बीच संबंध बेहतर हो जाएंगे और विभिन्न पहलुओं शिक्षा, संस्कृति, अर्थव्यवस्था और अन्य क्षेत्रों में विस्तारित होंगे। हमारा और अधिक संबंध और मित्रता होनी चाहिए। वास्तव में यहां आने से पहले मैंने भारत के बारे में बहुत कुछ सुना और पढ़ा था कि भारतीय बहुत दयालु, वफादार, बुद्धिमान, ईमानदार और उदार होते हैं। लेकिन वह सब केवल किताबी जानकारी थी। जब भारत को अपनी आंखों से देखा तो महसूस किया कि भारत के लोग दूसरों से अलग हैं। उन्होंने अपनी अंतरराष्ट्रीय यात्राओं का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने 75 से अधिक देशों की यात्रा की है। वे विश्वविद्यालयों में व्याख्याता और प्रोफेसर रहे हैं। उन्हें संयुक्त राष्ट्र के सेमिनारों और सम्मेलनों में व्याख्यान देने के लिए दुनिया भर से आमंत्रित किया गया। उनके अनुसार, इतना बड़ा अनुभव होने के बावजूद उन्होंने जैसी दयालुता, ईमानदारी और मानसिकता भारत में देखी, वैसी किसी और देश में नहीं देखी। यह खबर भी पढ़ें… मौलाना इलाही ने पंडित नेहरू की किताब ‘डिस्कवरी ऑफ इंडिया’ को बताया अद्भुत, छात्रों को पढ़ने की दी सलाह ईरान के सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि मौलाना डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने कहा कि ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई भारत
हमले की आशंका में खामेनेई का अंतिम संस्कार रोका:भोपाल में ईरान के प्रतिनिधि का दावा; यह ट्रंप-नेतन्याहू की निजी जंग, बातचीत से पीछे हटने का आरोप

ईरान के सुप्रीम लीडर के अंतिम संस्कार में देरी को लेकर बड़ा बयान सामने आया है। ईरान के सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि मौलाना डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने रविवार को भोपाल में कहा कि सुरक्षा खतरे के कारण अंतिम संस्कार अभी तक नहीं किया गया है। उन्होंने आशंका जताई कि अगर लाखों लोग जुटते हैं तो उन पर हमला हो सकता है। मौलाना डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने कहा कि सुप्रीम लीडर का अंतिम संस्कार इसलिए टाला गया है क्योंकि हालात पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं। यदि अंतिम संस्कार आयोजित होता है तो ईरान के शहर मशहद में 2 करोड़ से अधिक लोगों के पहुंचने की संभावना है। इतनी बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा होते हैं, तो उन पर हमला किया जा सकता है। लेबनान में एक दिन में दो हजार से ज्यादा लोग मारे गए थे। वैसी स्थिति दोबारा बन सकती है। इसलिए हम हालात पूरी तरह शांत और सुरक्षित होने का इंतजार कर रहे हैं। मौलाना डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही भोपाल में कोहेफिजा स्थित एमआईजी हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में रविवार को आयोजित ‘इत्तेहाद-उल-मुस्लिमीन जलसा’ कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे। यह ट्रंप-नेतन्याहू की निजी जंग मौलाना इलाही ने कहा कि यह युद्ध ईरान ने नहीं छेड़ा, बल्कि यह डोनाल्ड ट्रंप और बेंजामिन नेतन्याहू की निजी जंग है। इससे न अमेरिका को फायदा है, न इजराइल को। ईरान ने कभी युद्ध नहीं चाहा। हमने पहले ही चेतावनी दी थी कि अगर युद्ध हुआ तो इसका असर कई देशों पर पड़ेगा। हमने बातचीत की कोशिश की, लेकिन उन्होंने ही हमला किया। ईरान के पास 5,000 साल से अधिक की सभ्यता है, बहुत अच्छे लोग हैं, कारखाने हैं और सब कुछ है। लेकिन दुर्भाग्य से 147 साल पहले से कुछ दूसरे देशों ने ईरान के खिलाफ बहुत सारे प्रतिबंध, आर्थिक प्रतिबंध बनाए। 3 दिन में ईरान गिराने की योजना थी, अमेरिकी भी इस युद्ध के खिलाफ मौलाना इलाही ने दावा किया कि अमेरिका को भरोसा था कि वह तीन दिनों में ईरान की सरकार गिरा सकता है। युद्ध के बाद ईरान का नक्शा बदलने की बात कही गई थी। ईरान को पांच हिस्सों में बांटने की योजना थी। युद्ध में ईरान को भारी नुकसान हुआ है। 1 लाख से अधिक घर तबाह, कई अस्पताल, विश्वविद्यालय और प्रयोगशालाएं नष्ट, कई कारखाने क्षतिग्रस्त, बड़ी संख्या में नागरिकों की मौत हुई है। अब ईरान अपने घायलों के इलाज के लिए भारत से दवाइयां खरीद रहा है। अमेरिकियों को इस युद्ध से कोई लाभ नहीं है, अमेरिकी सीनेटरों ने इस युद्ध की निंदा की है। आप न्यूयॉर्क के मेयर के बयान पर जाइए, जो मूल रूप से भारतीय हैं। अमेरिकी थोंपने लगे थे अपनी शर्तें, इसलिए विफल हुई वार्ता मौलाना इलाही ने बताया कि ईरान ने कभी भी किसी देश से यह नहीं कहा कि वह ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थ बने। कोई ईरान नहीं गया, कोई ईरान से नहीं आया। बल्कि, कुछ देश अपनी मर्जी से आगे आए और उन्होंने हमारे और अमेरिका के बीच बातचीत की पहल कर दी। ओमान और जिनेवा में बातचीत शुरू हुई थी और शुरुआती संकेत सकारात्मक थे। पहले अमेरिका ने 15-सूत्रीय प्रस्ताव दिया, जिसे ईरान ने खारिज किया। इसके बाद ईरान ने 10-सूत्रीय प्रस्ताव रखा, जिसे अमेरिका ने स्वीकार कर लिया। लेकिन अंतिम दौर में अमेरिका ने नई और असामान्य शर्तें रख दीं। उन्होंने कहा, जब यह साफ हो गया कि वे अपनी बात से पीछे हट रहे हैं, तो बातचीत विफल हो गई। होर्मुज अस्थायी रूप से बंद, लेकिन जल्द ही खुल जाएगा भारतीय जहाजों को लेकर उठ रहे सवालों के बीच मौलाना डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने स्पष्ट किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद किए जाने के पीछे सुरक्षा ही सबसे बड़ा कारण है। जब कुछ अन्य देश इस जलडमरूमध्य के रास्ते अपने युद्धपोत भेजना चाहते थे, तब ईरान को यह कदम उठाना पड़ा। यह कदम किसी एक देश के खिलाफ नहीं, बल्कि समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया था। उन्होंने विश्वास जताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य पहले की तरह सभी देशों के लिए खुल जाएगा, जैसा कि 28 फरवरी से पहले था। यह रोक अस्थायी है और जल्द ही स्थिति सामान्य हो जाएगी। तीन साल की मासूम ने रोते हुए उतार दी अपनी बाली मौलाना इलाही ने युद्ध के असर को लेकर एक भावुक घटना भी साझा की। उन्होंने बताया कि एक कार्यक्रम के दौरान तीन साल की बच्ची रोते हुए उनके पास आई और अपनी सोने की बाली उतारकर दे दी। बच्ची ने कहा, मैंने सुना है लड़कियों के स्कूल पर बमबारी हुई, कृपया यह ले लो। वह बच्ची यह नहीं जानती थी कि वे बच्चियां अब इस दुनिया में नहीं हैं। मैं भावुक हो गया। बाली वापस करते हुए कहा, यह तुम्हारे लिए उपहार है, और उसकी कीमत का दोगुना देने की बात कही। ईरान-भारत संबंध 5,000 साल पुराने, भारतीय दयालु भारत-ईरान संबंधों पर कहा, ईरान और भारत के बीच संबंध बहुत अच्छे हैं, बहुत मजबूत हैं। मुझे यकीन है कि ईरान और भारत के बीच संबंध बेहतर हो जाएंगे और विभिन्न पहलुओं शिक्षा, संस्कृति, अर्थव्यवस्था और अन्य क्षेत्रों में विस्तारित होंगे। हमारा और अधिक संबंध और मित्रता होनी चाहिए। वास्तव में यहां आने से पहले मैंने भारत के बारे में बहुत कुछ सुना और पढ़ा था कि भारतीय बहुत दयालु, वफादार, बुद्धिमान, ईमानदार और उदार होते हैं। लेकिन वह सब केवल किताबी जानकारी थी। जब भारत को अपनी आंखों से देखा तो महसूस किया कि भारत के लोग दूसरों से अलग हैं। उन्होंने अपनी अंतरराष्ट्रीय यात्राओं का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने 75 से अधिक देशों की यात्रा की है। वे विश्वविद्यालयों में व्याख्याता और प्रोफेसर रहे हैं। उन्हें संयुक्त राष्ट्र के सेमिनारों और सम्मेलनों में व्याख्यान देने के लिए दुनिया भर से आमंत्रित किया गया। उनके अनुसार, इतना बड़ा अनुभव होने के बावजूद उन्होंने जैसी दयालुता, ईमानदारी और मानसिकता भारत में देखी, वैसी किसी और देश में नहीं देखी। यह खबर भी पढ़ें… मौलाना इलाही ने पंडित नेहरू की किताब ‘डिस्कवरी ऑफ इंडिया’ को बताया अद्भुत, छात्रों को पढ़ने की दी सलाह ईरान के सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि मौलाना डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने कहा कि ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई भारत
अमेरिका-ईरान के बीच पाकिस्तान में बातचीत संभव:ईरानी विदेश मंत्री इस्लामाबाद पहुंचे, ट्रम्प ने अपने दामाद और विशेष दूत को भेजा

अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान में बातचीत हो सकती है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची शुक्रवार रात इस्लामाबाद पहुंच चुके हैं। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और दामाद जेरेड कुशनर को भी वहां भेजा है। वे आज पाकिस्तान पहुंचेंगे। हालांकि, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस बार पाकिस्तान नहीं गए हैं, उन्हें स्टैंडबाय पर रखा गया है। जरूरत पड़ने पर वे इस्लामाबाद जा सकते हैं। दूसरी तरफ संसद स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ भी इस बातचीत में शामिल नहीं हो रहे हैं। वे 11-12 अप्रैल को अमेरिका-ईरान की पहली बातचीत में डेलिगेशन के प्रमुख थे। व्हाइट हाउस ने कहा कि अमेरिकी डेलिगेशन पाकिस्तान में ईरान के साथ सीधे शांति वार्ता करेंगे। लेकिन ईरान की तरफ से अलग बयान आया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघई ने कहा कि ऐसी कोई बैठक तय ही नहीं है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि ईरान अपनी बात सीधे अमेरिका से नहीं, बल्कि पाकिस्तान के अधिकारियों के जरिए पहुंचाएगा। यानी बातचीत अगर होगी भी, तो आमने-सामने नहीं बल्कि बीच में पाकिस्तान मध्यस्थ का काम करेगा। यानी एक तरफ अमेरिका बातचीत की बात कर रहा है, दूसरी तरफ ईरान साफ इनकार कर रहा है। ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…
ईरान बोला- मौजूदा हालात में होर्मुज नहीं खुलेगा:अमेरिकी नाकेबंदी खत्म हो तभी सीजफायर; कल इस्लामाबाद में US-ईरान की बातचीत संभव

ईरान ने कहा है कि मौजूदा हालात में होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा नहीं खोला जाएगा। ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकेर गालिबाफ ने कहा कि सीजफायर के उल्लंघन के बीच यह संभव नहीं है। गालिबाफ ने आरोप लगाया कि अमेरिकी नाकेबंदी ईरानी बंदरगाहों को निशाना बना रही है और यह वैश्विक अर्थव्यवस्था को बंधक बनाने जैसा है। उन्होंने कहा कि पूर्ण सीजफायर तभी संभव है, जब नाकेबंदी खत्म हो। दूसरी तरफ अमेरिका और ईरान के बीच शुक्रवार को पाकिस्तान के इस्लामाबाद में बैठक होने की संभावना है। न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान की मध्यस्थता के बाद दोनों देश जल्द बातचीत की टेबल पर लौट सकते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी कहा है कि यह बैठक जल्द होना संभव है। पिछले 24 घंटे के 4 बड़े अपडेट्स ईरानी तेल पर छूट बढ़ी: अमेरिका ने ईरान के तेल की खरीद पर लगी पाबंदियों में दी गई छूट को 30 दिन के लिए बढ़ा दिया है। यह फैसला करीब 10 देशों की मांग पर लिया गया है, जो तेल की कमी का सामना कर सकते हैं। सीजफायर आगे बढ़ाई गई: अमेरिका ने पाकिस्तान की अपील पर ईरान के साथ चल रहे युद्धविराम (सीजफायर) को आगे बढ़ाया दिया। ट्रम्प ने कहा कि ईरान में इस समय नेतृत्व और सरकार में एकजुटता नहीं है। जहाज जब्त: ईरान की रेवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने होर्मुज स्ट्रेट में दो जहाजों को जब्त कर लिया है। ईरान ने कहा है कि इस समुद्री रास्ते की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा। MSC फ्रांसेस्का और एपामिनोडेस नाम के जहाजों पर कार्रवाई की गई। उड़ानें रद्द: यूरोप की सबसे बड़ी एयरलाइन लुफ्थांसा ने ईरान युद्ध के बाद बढ़ी ईंधन कीमतों के चलते 20 हजार उड़ानें रद्द करने का फैसला किया है।
अमेरिका-ईरान शांति समझौते के करीब पहुंचे:21 अप्रैल से पहले डील की कोशिश, जल्द आमने-सामने बातचीत संभव; ईरान और पाक अधिकारियों की बैठक आज

अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म करने को लेकर एक समझौते के करीब पहुंच गए हैं। अमेरिकी मीडिया एक्सिओस ने अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया है कि 21 अप्रैल को खत्म हो रहे सीजफायर से पहले समझौता करने की कोशिश कर रहे हैं। इस बीच गुरुवार को तेहरान में ईरानी अधिकारियों और पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर के बीच अहम बातचीत होगी। यह जानकारी मीडिया ‘तस्नीम’ ने दी। आसिम मुनीर बुधवार को ही तेहरान पहुंचे और विदेश मंत्री अब्बास अराघची से मुलाकात की। पाकिस्तानी सेना ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि मुनीर के नेतृत्व वाला यह प्रतिनिधिमंडल अमेरिका का संदेश लेकर ईरान गया है। अधिकारियों के मुताबिक, दोनों देशों के बीच बातचीत आगे बढ़ी है, लेकिन दोनों पक्षों के बीच अभी भी मतभेद बने हुए हैं। इस प्रक्रिया में पाकिस्तान, मिस्र और तुर्की मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर, ईरान और मध्यस्थ देशों के साथ लगातार बातचीत कर रहे हैं और ड्राफ्ट प्रस्तावों का आदान-प्रदान जारी है। अधिकारियों के मुताबिक, सीजफायर खत्म होने से पहले एक बार और आमने-सामने बातचीत हो सकती है। इस दौरान अगर फ्रेमवर्क समझौता होता है, तो डील के लिए सीजफायर को बढ़ाया जा सकता है, हालांकि अमेरिका ने अभी औपचारिक सहमति नहीं दी है। दावा- अमेरिकी नाकेबंदी से ईरान पर दबाव बढ़ा अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि होर्मुज स्ट्रेट में ट्रम्प की नौसैनिक नाकेबंदी और आर्थिक दबाव के कारण ईरान पर समझौते का दबाव बढ़ रहा है। अमेरिका ने दावा किया है कि नाकेबंदी के बाद पिछले 48 घंटों में कोई भी जहाज ईरानी बंदरगाहों तक नहीं पहुंचा। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक, इस दौरान 9 जहाजों को लौटा दिया गया। ईरान रोजाना करीब 15 लाख बैरल तेल निर्यात करता है। इससे उसे लगभग 140 मिलियन डॉलर की आय होती है, लेकिन नाकेबंदी से इस कमाई पर असर पड़ सकता है। ईरान के खार्ग द्वीप से लगभग 90% तेल निर्यात होता है, जो नाकेबंदी के चलते प्रभावित हो सकता है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, अगर ईरान तेल निर्यात नहीं कर पाया, तो उसे उत्पादन रोकना पड़ सकता है, जिससे आर्थिक नुकसान होगा। युद्ध से पहले भी ईरान की अर्थव्यवस्था प्रतिबंधों के कारण दबाव में थी, लेकिन अब हालात और बिगड़ गए हैं। रिपोर्ट- ईरान के परमाणु प्रोग्राम पर बातचीत आगे बढ़ी ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका के साथ चल रही बातचीत में प्रगति हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक, हालिया कूटनीतिक प्रयासों के बाद दोनों पक्ष एक समझौते की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। पाकिस्तान के आर्मी चीफ असीम मुनीर का तेहरान दौरा भी इसी कड़ी का हिस्सा है, जहां वह अमेरिका का संदेश लेकर पहुंचे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बैकचैनल संपर्क जारी है और ड्राफ्ट प्रस्तावों पर काम हो रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी हमलों के बाद ईरान की परमाणु क्षमता प्रभावित हुई है, जिससे बातचीत को गति मिली है। हालांकि, समझौते की दिशा में प्रगति के बावजूद दोनों पक्षों के बीच मतभेद अभी भी बने हुए हैं और कुछ पक्ष इसका विरोध कर रहे हैं। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…
भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर बातचीत फिर शुरू होगी:भारतीय-डेलिगेशन अगले हफ्ते वॉशिंगटन रवाना होगा; नए टैरिफ स्ट्रक्चर पर चर्चा होगी

भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से रुकी हुई अंतरिम ट्रेड डील को लेकर अगले हफ्ते बातचीत फिर से शुरू होने वाली है। केंद्र सरकार का एक हाई-लेवल डेलिगेशन अगले सप्ताह वॉशिंगटन रवाना होगा। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब अमेरिका में टैरिफ नियमों और अदालती फैसलों की वजह से व्यापारिक समीकरण बदल गए हैं। PTI की रिपोर्ट के अनुसार, बुधवार को सरकारी सूत्रों ने डेलिगेशन की इस यात्रा की पुष्टि की। पहले इस समझौते पर मार्च में हस्ताक्षर होने की उम्मीद थी, लेकिन डोनाल्ड ट्रम्प शासन के दौरान लागू टैरिफ व्यवस्था और अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के एक हालिया फैसले ने स्थितियों को कठिन बना दिया है। मार्च में होने वाला था समझौता दोनों देशों ने फरवरी में व्यापार समझौते के पहले चरण के लिए रूपरेखा तैयार कर ली थी। इस फ्रेमवर्क के तहत अमेरिका भारतीय सामानों पर आयात शुल्क यानी टैरिफ घटाकर 18% करने पर सहमत हो गया था। हालांकि, इसके तुरंत बाद अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रम्प के लगाए गए कुछ पुराने टैरिफ नियमों को रद्द कर दिया। अदालत के इस फैसले के बाद अमेरिकी प्रशासन ने 24 फरवरी से 150 दिनों के लिए सभी देशों से होने वाले आयात पर 10% टैरिफ लागू कर दिया है। इसी स्पष्टता की कमी के कारण पिछले महीने होने वाली बैठक टाल दी गई थी। भारत का रिलेटिव एडवांटेज कम हुआ जब फरवरी में फ्रेमवर्क तैयार हुआ था, तब भारत को अन्य प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में बेहतर स्थिति मिल रही थी। अमेरिका के अन्य देशों पर लगाए गए ऊंचे टैरिफ के बीच भारत के लिए 18% की दर फायदेमंद थी। लेकिन अब अमेरिका ने सभी देशों के लिए 10% का फ्लैट टैरिफ लागू कर दिया है। इससे भारत का वह खास फायदा कम हो गया है, क्योंकि अब हर ट्रेडिंग पार्टनर को एक समान दर का लाभ मिल रहा है। धारा 301 के तहत दो जांच चल रहीं अगले हफ्ते होने वाली यह बातचीत केवल टैरिफ तक सीमित नहीं रहेगी। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) ने हाल ही में धारा 301 के तहत दो अलग-अलग जांच शुरू की हैं, जिनमें भारत भी शामिल है… चर्चा का मुख्य एजेंडा क्या होगा? वॉशिंगटन में होने वाली इस बैठक में भारतीय अधिकारी नए टैरिफ स्ट्रक्चर पर स्पष्टता मांगेंगे। भारत की कोशिश होगी कि बदले हुए हालातों में भी भारतीय निर्यातकों के हितों की रक्षा की जाए। साथ ही धारा 301 के तहत चल रही जांचों पर भारत अपना पक्ष मजबूती से रखेगा ताकि भविष्य में किसी भी तरह के प्रतिबंधों से बचा जा सके। क्या है धारा 301? यह अमेरिका के ‘ट्रेड एक्ट 1974’ का एक हिस्सा है। इसके तहत अमेरिकी सरकार को यह अधिकार मिलता है कि अगर उसे लगता है कि किसी दूसरे देश की व्यापार नीतियां अमेरिकी व्यापार के लिए अनुचित या भेदभावपूर्ण हैं, तो वह उसकी जांच कर सकती है और उस पर जुर्माना या व्यापार प्रतिबंध लगा सकती है। भारत के लिए क्यों जरूरी है यह डील? ये खबर भी पढ़ें… थोक महंगाई 38 महीने में सबसे ज्यादा: मार्च में ये 3.88% पर पहुंची, रोजाना जरूरत का सामान और फ्यूल महंगा हुआ मार्च में थोक महंगाई (WPI) बढ़कर 3.88% पर पहुंच गई है। फरवरी के यह 2.13% पर थी। यानी इसमें एक महीने के अंदर 1.75% की बढ़ोतरी हुई है। थोक महंगाई ने 38 महीने का रिकॉर्ड भी तोड़ दिया है। जनवरी 2023 में थोक महंगाई 4.73% पर पहुंच गई थी। कॉमर्स मिनिस्ट्री ने आज यानी 15 अप्रैल को थोक महंगाई के आंकड़े जारी किए हैं। पूरी खबर पढ़ें…
ईरान-अमेरिका की 21 घंटे चली बातचीत बेनतीजा:अमेरिकी उपराष्ट्रपति बिना डील पाकिस्तान से रवाना, कहा- यह ईरान के लिए बुरी खबर

पाकिस्तान में ईरान और अमेरिका के बीच शांति को लेकर चल रही बातचीत बेनतीजा रही। यह 21 घंटे से ज्यादा समय तक चली। वेंस अब अपनी टीम के साथ अमेरिका के लिए रवाना हो गए हैं। देश लौटने से पहले वेंस ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इसमें उन्होंने कहा कि समझौता न होना अमेरिका से ज्यादा ईरान के लिए बुरी खबर है। उन्होंने कहा कि अमेरिका बिना किसी डील के ही लौट रहा है। वेंस ने कहा कि अमेरिका की शर्तें स्पष्ट थीं, लेकिन ईरान ने उन्हें नहीं माना। किसी भी समझौते के लिए जरूरी है कि ईरान ये वादा करे कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा। वहीं, ईरान ने भी कहा है कि इस्लामाबाद में अमेरिका के साथ हुई बातचीत बिना किसी समझौते के खत्म हो गई। ईरानी न्यूज एजेंसी तस्नीम के मुताबिक अमेरिका की शर्तें जरूरत से ज्यादा सख्त थीं। इस वजह से समझौते का रास्ता नहीं निकल पाया। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स पाकिस्तान में बातचीत बेनतीजा: अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की इस्लामाबाद में ईरान के साथ बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकला। वेंस ने कहा कि हमें पूरी तरह भरोसा चाहिए कि ईरान न तो परमाणु हथियार बनाएगा और न ही ऐसी तैयारी करेगा जिससे वह जल्दी हथियार बना सके। अमेरिका ने माइंस हटाने का अभियान शुरू किया: अमेरिकी सेना के सेंटकॉम (CENTCOM) ने कहा है कि अमेरिकी युद्धपोत समुद्री रास्ते को सुरक्षित बनाने की तैयारी कर रहे हैं। आरोप है कि ईरान ने इस अहम समुद्री मार्ग में बारूदी सुरंगें बिछाई हैं। नेतन्याहू बोले- अभियान अभी खत्म नहीं: इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई अभी खत्म नहीं हुई है। उनका कहना है कि हमले इसलिए किए गए क्योंकि ईरान परमाणु हथियार बनाने के करीब था। उन्होंने दावा किया कि इन हमलों से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को बड़ा नुकसान पहुंचा है। इमोशनल मैसेज: ईरानी संसद के स्पीकर गालिबाफ शुक्रवार रात प्लेन में बच्चों की तस्वीरें रखकर पाकिस्तान पहुंचे। ये बच्चे 28 फरवरी को मिसाइल हमले में मारे गए थे। इसका इल्जाम अमेरिका-इजराइल पर लगा था। लेबनान में हमले जारी: लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, तुफाहता इलाके में हुए हमलों में 9 लोग घायल हुए हैं, जिनमें 5 की हालत गंभीर है। जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…
मोदी-राहुल की बातचीत का VIDEO वायरल:संसद परिसर में दोनों ने हाथ जोड़कर अभिवादन किया, बातचीत भी हुई

PM नरेंद्र मोदी और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के बीच बातचीत का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। वीडियो में दोनों के बीच हल्की-फुल्की बातचीत होती दिखाई दी। यह वीडियो शनिवार को संसद परिसर का है, जहां दोनों नेता समाज सुधारक महात्मा ज्योतिराव फुले की 200वीं जयंती पर श्रद्धांजलि देने पहुंचे थे। वीडियो में दिख रहा है कि मोदी वहां मौजूद नेताओं लोकसभा स्पीकर ओम बिरला, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और अर्जुन राम मेघवाल से मिले और अभिवादन स्वीकार किया। इसके बाद मोदी राहुल गांधी के पास रुके हैं और उनसे बातचीत की। संसद परिसर में मोदी- राहुल की मुलाकात की 5 तस्वीरें: इसके पहले भी हुई हैं दोनो नेताओं की मुलाकातें: 9 अगस्त 2024: लोकसभा सत्र के बाद चाय पर चर्चा इस दिन संसद सत्र के समापन के बाद अनौपचारिक चाय बैठक में मोदी और राहुल ने एक-दूसरे का अभिवादन किया। 26 जून 2024: लोकसभा स्पीकर को आसन तक छोड़ने के लिए साथ आए लोकसभा चुनाव के बाद 26 जून 2024 को लोकसभा में ओम बिरला को स्पीकर चुना गया।मोदी, राहुल गांधी स्पीकर बिरला को अध्यक्षीय आसन तक लेकर गए। इस दौरान ओम बिरला से हाथ मिलाने के बाद पीएम मोदी और राहुल गांधी ने एक-दूसरे से भी हाथ मिलाया। 20 जुलाई, 2018: संसद में गले लगाने की घटना 20 जुलाई 2018 को लोकसभा में सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा हो रही थी। राहुल गांधी सरकार की आलोचना करने के बाद अपनी सीट से उठकर सीधे PM मोदी के पास गए और उनके सीट पर बैठे रहने के दौरान ही पीएम को गले लगा लिया। प्रधानमंत्री पहले तो हैरान रह गए, लेकिन फिर उन्होंने राहुल को वापस बुलाकर हाथ मिलाया और बातचीत की। मोदी ने बाद में इस घटना को याद करते हुए मजाक में कहा कि मैं यहां (लोकसभा) आया और कई चीजें सीखीं। पहली बार मैंने गले लगाने और गले पड़ने में फर्क भी समझा। 16 दिसंबर 2016: कांग्रेस का दल लेकर मोदी से मिले राहुल कांग्रेस नेताओं का एक दल 16 दिसंबर 2016 को पीएम मोदी से मिलने पहुंचा। यहां भी मोदी और राहुल की मुलाकात हुई। 27 मई 2014 और अन्य वर्ष: जवाहरलाल नेहरू की पुण्यतिथि 2014 में कार्यभार संभालने के कुछ समय बाद पीएम मोदी ने भारत के पहले प्रधानमंत्री की 50वीं पुण्यतिथि पर शांति वन में राहुल गांधी से मुलाकात की थी। इसके अलावा राजघाट (महात्मा गांधी के समाधि स्थल) और शक्ति स्थल पर भी कई बार दोनों नेताओं ने एक-दूसरे का अभिवादन किया है। ————————- ये खबर भी पढ़ें: राहुल गांधी बोले-मोदी जी एपस्टीन फाइल्स में आपका नाम आया:आपने देश को बेचा, शर्म आपको आनी चाहिए; मोदी ने कांग्रेसियों को नंगा बताया था कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने सोमवार को सोशल मीडिया X पर एक वीडियो शेयर किया। इसमें उन्होंने कहा- मोदी जी एपस्टीन फाइल्स में आपका नाम आया, शर्म आपको आनी चाहिए। आपने अमेरिका से ट्रेड डील करके देश को ट्रम्प के हाथों बेच दिया। पढ़ें पूरी खबर…








