अंकुरित या भुना चना, किससे मिलेगा आपको ज्यादा मात्रा में प्रोटीन? जानिये दोनों में अंतर

अंकुरित चने और भुने चने में अंतर: भारतीय आहार का एक सस्ता और पौष्टिक स्रोत है, जो प्रोटीन, फाइबर और कई जरूरी पोषक तत्वों से भरपूर होता है. लोग इसे अलग‑अलग तरीकों से खाते हैं, भुना हुआ चना और अंकुरित (स्प्राउटेड) चना सबसे आम रूप हैं. लेकिन सवाल यह है कि इन दोनों में से किसमें ज्यादा प्रोटीन होता है और कौन ज्यादा फायदेमंद है? आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं. प्रोटीन की मात्रा में अंतरसामान्य तौर पर देखा जाए, तो भुने हुए चने और अंकुरित चने दोनों में प्रोटीन अच्छी मात्रा में होता है,चलिये जानते हैं. भुना हुआ चना: इसमें प्रोटीन की मात्रा थोड़ी अधिक होती है, क्योंकि इसमें पानी नहीं होता और पोषक तत्व सघन (concentrated) रूप में रहते हैं. अंकुरित चना: अंकुरण के दौरान चने में पानी की मात्रा बढ़ जाती है, जिससे प्रोटीन का प्रतिशत थोड़ा कम दिखाई देता है, लेकिन उसकी गुणवत्ता और पचने की क्षमता बेहतर हो जाती है. यानी, मात्रा के हिसाब से भुने चने में प्रोटीन थोड़ा ज्यादा होता है, लेकिन शरीर के लिए उपयोग (absorption) के हिसाब से अंकुरित चना ज्यादा फायदेमंद माना जाता है. अंकुरित चने के फायदेप्रोटीन आसानी से पचता है.विटामिन C और B की मात्रा बढ़ जाती है.एंजाइम्स एक्टिव हो जाते हैं, जो पाचन को बेहतर बनाते हैं.वजन घटाने और फिटनेस के लिए अच्छा. अंकुरित चना शरीर को ज्यादा पोषण देता है और हल्का भी होता है. भुने चने के फायदेलंबे समय तक ऊर्जा देते हैं.फाइबर भरपूर, जिससे भूख कम लगती है.यात्रा या स्नैक के लिए सुविधाजनक.जल्दी खराब नहीं होते. भुना चना एक अच्छा और हेल्दी स्नैक है, खासकर जब जल्द ऊर्जा चाहिए हो. कौन सा बेहतर है?ज्यादा प्रोटीन मात्रा के लिए: भुना चनाबेहतर पाचन और पोषण के लिए: अंकुरित चना निष्कर्षभुने हुए और अंकुरित, दोनों तरह के चने अपने‑अपने तरीके से फायदेमंद हैं. अगर आप ज्यादा प्रोटीन की मात्रा चाहते हैं, तो भुना चना अच्छा विकल्प है. लेकिन अगर आप शरीर को ज्यादा पौष्टिक और आसानी से पचने वाला प्रोटीन देना चाहते हैं, तो अंकुरित चना बेहतर है.
किसान मोर्चा के नए अध्यक्ष ने वाहन रैली निकाली…नियुक्ति रद्द:18 दिन में ही गया भाजपा नेता का पद; पेट्रोल बचाओ अपील के बाद देश में पहली कार्रवाई

भिंड के भाजपा नेता सज्जन सिंह यादव को 100 से अधिक लग्जरी वाहनों के साथ शहर में प्रवेश करना भारी पड़ गया। नियुक्ति के 18 दिन में ही भाजपा ने उन्हें भिंड जिला भाजपा किसान मोर्चा के अध्यक्ष पद से हटा दिया है। वे अध्यक्ष नियुक्त होने के बाद बुधवार शाम को शक्ति प्रदर्शन कर रहे थे। इस दौरान शहर का ट्रैफिक बाधित हुआ तो हॉर्न बजाते और नारेबाजी के कारण शोर भी हुआ। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के निर्देश पर मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष जयपाल सिंह चावड़ा ने यह कार्रवाई की है। इस मामले में देश में यह पहली कार्रवाई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी छह दिन में दो बार ईंधन बचाने की अपील कर चुके हैं। इसके बाद उन्होंने अपने काफिले से वाहन कम कर दिए। देश के गृह मंत्री अमित शाह, अन्य विभागों के मंत्रियों, मप्र के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एवं मंत्रियों ने भी काफिले से वाहन कम कर दिए। इसके बाद भी सज्जन सिंह यादव अध्यक्ष बनने के बाद शक्ति प्रदर्शन कर रहे थे। पार्टी ने किया था जवाब तलब मामला सामने आने के बाद भाजपा संगठन ने सज्जन सिंह यादव से चर्चा की। उनसे जवाब तलब किया तो सज्जन सिंह यादव ने पार्टी नेतृत्व को सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने किसी भी कार्यकर्ता या समर्थक को वाहन लेकर आने के लिए नहीं कहा था। लोग स्वेच्छा से काफिले में शामिल हुए थे और यह पार्टी के प्रति उनका उत्साह व प्रेम था। नियुक्ति रद्द होने के बाद अब कॉल रिसीव नहीं कर रहे दैनिक भास्कर ने जब इस संबंध में सज्जन सिंह यादव से संपर्क करने का प्रयास किया तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया, वहीं भाजपा जिलाध्यक्ष देवेंद्र नरवरिया ने कहा कि मामले में सज्जन सिंह यादव से चर्चा की। उनका कहना था कि उन्होंने किसी को काफिले के लिए आमंत्रित नहीं किया था। लोग स्वयं शामिल हुए थे। अनुशासनहीनता पर कार्रवाई की जाएगी जयपाल सिंह चावड़ा ने बताया कि मंगलवार के बाद जहां-जहां से ऐसे मामले सामने आए हैं, वहां की जानकारी लेकर जिम्मेदारों से चर्चा की जा रही है। अभी भिंड का मामला प्रकाश में आया था। इस मामले में भिंड के जिला अध्यक्ष को दायित्व मुक्त कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि जहां भी इस तरह की अनुशासनहीनता सामने आएगी, उनके खिलाफ सख्त निर्णय लिए जाएंगे। इन्होंने भी की अनुशासनहीनता ………………… यह खबर भी पढ़ें सिंगरौली विकास प्राधिकरण अध्यक्ष ई-रिक्शा से बैढ़न पहुंचे: पीछे दौड़ा 200 वाहनों का काफिला सिंगरौली विकास प्राधिकरण के नवनियुक्त अध्यक्ष वीरेंद्र गोयल गुरुवार को मोरवा स्थित अपने आवास से ई-रिक्शा में सवार होकर बैढ़न जिला मुख्यालय पहुंचे। उनकी इस यात्रा के पीछे 200 से अधिक वाहनों का लंबा काफिला भी चला। पढ़ें पूरी खबर
धुरंधर के बाद ल्यारी पर आई एक और फिल्म:पाकिस्तानी फिल्म मेरा ल्यारी के फैसलाबाद में सिर्फ 22 टिकट बिके, कई शो कैंसिल

पाकिस्तानी फिल्म मेरा ल्यारी 8 मई को सिनेमाघरों में रिलीज हुई। यह फिल्म पाकिस्तान के ल्यारी इलाके पर आधारित थी। गौरतलब है कि ल्यारी का जिक्र भारतीय फिल्म धुरंधर में भी हुआ है, जो सुपरहिट साबित हुई थी। हालांकि, मेरा ल्यारी को बॉक्स ऑफिस पर कमजोर रिस्पॉन्स मिला। फेसबुक पेज ऑल पाकिस्तान शोबिज स्टार्स ने दावा किया कि पाकिस्तान की फिल्म मेरा ल्यारी को खराब शुरुआत के बाद फैसलाबाद के ताज महल सिनेमा से हटा दिया गया है। फिल्म पहले दिन सिर्फ 22 टिकट ही बेच पाई। कम दर्शक आने की वजह से अगले शो भी रद्द कर दिए गए। बता दें कि यह फिल्म धुरंधर और दूसरी फिल्मों को जवाब देने के लिए बनाई गई। फिल्म को कराची के ल्यारी इलाके की कहानी के तौर पर प्रमोट किया गया था। जहां फिल्मों में अक्सर इस इलाके को अपराध और गैंग हिंसा से जोड़कर दिखाया जाता है, वहीं मेरा ल्यारी में समुदाय, खेल और युवाओं की जिंदगी पर फोकस किया गया। महिला फुटबॉल पर आधारित है फिल्म की कहानी यह फिल्म महिला फुटबॉल पर आधारित है। अबू अलीहा के डायरेक्शन में बनी इस फिल्म में आयशा उमर, दनानीर मोबीन, सामिया मुमताज और ट्रिनेट लुकास हैं। फिल्म की कहानी महिला फुटबॉल, कम्युनिटी की एकता और ल्यारी में युवा खिलाड़ियों के सामने आने वाली चुनौतियों पर केंद्रित है। मेकर्स ने फिल्म के जरिए इलाके की एक अच्छी इमेज दिखाने की कोशिश की है। डायरेक्टर अबू अलीहा ने पहले कहा था कि फिल्म की 80 प्रतिशत कास्ट लोकल है, जिसमें फुटबॉल टीमों के सदस्य भी शामिल हैं। फिल्म को सिंध के सूचना मंत्री शरजील इनाम मेमन का भी सपोर्ट मिला।
धुरंधर के बाद ल्यारी पर आई एक और फिल्म:पाकिस्तानी फिल्म मेरा ल्यारी के फैसलाबाद में सिर्फ 22 टिकट बिके, कई शो कैंसिल

पाकिस्तानी फिल्म मेरा ल्यारी 8 मई को सिनेमाघरों में रिलीज हुई। यह फिल्म पाकिस्तान के ल्यारी इलाके पर आधारित थी। गौरतलब है कि ल्यारी का जिक्र भारतीय फिल्म धुरंधर में भी हुआ है, जो सुपरहिट साबित हुई थी। हालांकि, मेरा ल्यारी को बॉक्स ऑफिस पर कमजोर रिस्पॉन्स मिला। फेसबुक पेज ऑल पाकिस्तान शोबिज स्टार्स ने दावा किया कि पाकिस्तान की फिल्म मेरा ल्यारी को खराब शुरुआत के बाद फैसलाबाद के ताज महल सिनेमा से हटा दिया गया है। फिल्म पहले दिन सिर्फ 22 टिकट ही बेच पाई। कम दर्शक आने की वजह से अगले शो भी रद्द कर दिए गए। बता दें कि यह फिल्म धुरंधर और दूसरी फिल्मों को जवाब देने के लिए बनाई गई। फिल्म को कराची के ल्यारी इलाके की कहानी के तौर पर प्रमोट किया गया था। जहां फिल्मों में अक्सर इस इलाके को अपराध और गैंग हिंसा से जोड़कर दिखाया जाता है, वहीं मेरा ल्यारी में समुदाय, खेल और युवाओं की जिंदगी पर फोकस किया गया। महिला फुटबॉल पर आधारित है फिल्म की कहानी यह फिल्म महिला फुटबॉल पर आधारित है। अबू अलीहा के डायरेक्शन में बनी इस फिल्म में आयशा उमर, दनानीर मोबीन, सामिया मुमताज और ट्रिनेट लुकास हैं। फिल्म की कहानी महिला फुटबॉल, कम्युनिटी की एकता और ल्यारी में युवा खिलाड़ियों के सामने आने वाली चुनौतियों पर केंद्रित है। मेकर्स ने फिल्म के जरिए इलाके की एक अच्छी इमेज दिखाने की कोशिश की है। डायरेक्टर अबू अलीहा ने पहले कहा था कि फिल्म की 80 प्रतिशत कास्ट लोकल है, जिसमें फुटबॉल टीमों के सदस्य भी शामिल हैं। फिल्म को सिंध के सूचना मंत्री शरजील इनाम मेमन का भी सपोर्ट मिला।
काला कोट पहनकर कलकत्ता हाईकोर्ट पहुंचीं ममता बनर्जी:चुनाव के बाद हुई हिंसा से जुड़े मामले में पैरवी की; बाहर निकलीं तो चोर-चोर के नारे लगे

पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस चीफ ममता बनर्जी एक बार फिर काला कोट पहनकर कोर्ट में दलीलें देने पहुंची। ममता गुरुवार को कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस सुजॉय पाल के सामने पेश हुईं। मामला 2026 के राज्य विधानसभा चुनावों के नतीजों के बाद हुई चुनावी हिंसा से जुड़ी जनहित याचिका का था। सुनवाई के दौरान ममता ने कोर्ट को बताया कि राज्य में हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों के बाद बड़े पैमाने पर हिंसा हुई। इसमें बुलडोजर एक्शन भी शामिल है। पुलिस FIR दर्ज करने की परमिशन नहीं दे रही है। इधर, सुनवाई के बाद जब ममता कोर्ट रूम से बाहर निकलीं, तो गलियारों में मौजूद वकीलों की भीड़ ने उन्हें घेर लिया। ये सभी ममता को देखकर चोर-चोर के नारे लगाने लगे। सुप्रीम कोर्ट में भी दलीलें रख चुकी हैं ममता सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी में पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) मामले पर सुनवाई की थी, जहां तब बंगाल की मुख्यमंत्री रहीं ममता बनर्जी ने भीं दलीलें रखीं थीं। कोर्ट रूम में ममता ने 13 मिनट तक अपनी बात रखी। बेंच के सामने हाथ जोड़कर खड़ी ममता ने कहा कि हमें कहीं न्याय नहीं मिल रहा है। सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में यह पहला मौका था जब किसी राज्य के मौजूदा मुख्यमंत्री ने कोर्ट में पेश होकर अपनी दलीलें रखीं थीं। मुकदमों में आमतौर पर मुख्यमंत्रियों के वकील या सलाहकार ही पेश होते हैं। पढ़ें पूरी खबर…
कैसे कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने केरल का मुख्यमंत्री चुनने में अपना रास्ता अपनाया | भारत समाचार

आखरी अपडेट:14 मई, 2026, 13:51 IST कई दिनों के गहन विचार-विमर्श के बाद, केरल विधानसभा चुनाव में यूडीएफ की प्रचंड जीत के बाद कांग्रेस ने वीडी सतीसन को सीएम पद के लिए चुना। केरल के मनोनीत मुख्यमंत्री वीडी सतीसन और कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी की फ़ाइल छवि। (स्रोत: पीटीआई) केरल के अगले मुख्यमंत्री के रूप में वीडी सतीसन को नियुक्त करने के कांग्रेस के फैसले ने कांग्रेस के निर्णय लेने में, खासकर वायनाड से सांसद बनने के बाद केरल की राजनीति में, प्रियंका गांधी के बढ़ते प्रभाव को सूक्ष्मता से रेखांकित किया है। कई दिनों के गहन विचार-विमर्श और आंतरिक पैरवी के बाद, कांग्रेस नेतृत्व ने गुरुवार को केरल विधानसभा चुनावों में यूडीएफ की व्यापक जीत के बाद सतीसन को सीएम पद के लिए चुना। यह भी पढ़ें: वीडी सतीसन को केरल का नया मुख्यमंत्री नामित किया गया, कांग्रेस ने 11 दिनों का सस्पेंस खत्म किया जबकि वरिष्ठ नेता केसी वेणुगोपाल दिल्ली में मजबूत संगठनात्मक समर्थन के साथ एक मजबूत दावेदार बने रहे, कई मीडिया रिपोर्टों ने सुझाव दिया कि प्रियंका गांधी ने यह सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई कि नेतृत्व अंततः सतीसन की ओर झुका। सतीसन पर प्रियंका के दबाव के पीछे वायनाड फैक्टर? द स्टेट्समैन के अनुसार, प्रियंका गांधी वाड्रा कथित तौर पर अपने वायनाड निर्वाचन क्षेत्र में वीडी सतीसन के समर्थकों के दबाव में थीं, जिन्होंने कांग्रेस नेतृत्व से उन्हें केरल के अगले मुख्यमंत्री के रूप में नियुक्त करने का आग्रह करते हुए “ईमेल की बाढ़” भेजी थी। एक संगठित अभियान के हिस्से के रूप में, सतीसन के वायनाड समर्थकों ने उन्हें अगला मुख्यमंत्री बनाने की अपीलों के साथ उनके आधिकारिक ईमेल को भर दिया था। उन्होंने पार्टी के आलाकमान को यह दिखाने के लिए सार्वजनिक प्रदर्शन भी किए थे कि “जिस व्यक्ति ने लड़ाई का नेतृत्व किया” उसे राज्य का नेतृत्व करना चाहिए। कथित तौर पर प्रियंका गांधी केरल में राजनीतिक मूड के बारे में चिंतित थीं, खासकर वायनाड में, जो वह लोकसभा क्षेत्र है जिसका वह वर्तमान में प्रतिनिधित्व करती हैं। यह भी पढ़ें: मुख्यमंत्री के रूप में वीडी सतीसन: कैसे कांग्रेस ने केरल में कर्नाटक दोहराने से इनकार कर दिया? सीएम चेहरे पर सहमति बनाने से पहले कांग्रेस नेतृत्व ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और केरल के वरिष्ठ नेताओं के साथ कई दौर की चर्चा की। द न्यू इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, ऐसी ही एक चर्चा के दौरान, प्रियंका ने राहुल गांधी से मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार को अंतिम रूप देने से पहले केरल में “मौजूदा राजनीतिक माहौल” को ध्यान में रखने का आग्रह किया। जैसे ही सीएम चेहरे पर सस्पेंस जारी रहा, वायनाड में राहुल और प्रियंका को निशाना बनाने वाले पोस्टर सामने आए, जिसमें नेतृत्व को वेणुगोपाल के पक्ष में सतीसन को दरकिनार करने के खिलाफ चेतावनी दी गई, अन्यथा उन्हें “अमेठी जैसा” भाग्य मिलेगा। संदेश में केरल कांग्रेस के कुछ वर्गों के भीतर चिंताओं को दर्शाया गया है कि सतीसन की अनदेखी, जिसे व्यापक रूप से यूडीएफ के एलडीएफ विरोधी अभियान के चेहरे के रूप में देखा जाता है, कैडरों और समर्थकों के बीच नाराजगी पैदा कर सकता है। सतीसन को बढ़त क्यों मिली? 2026 के केरल विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ को निर्णायक जीत दिलाने के बाद सतीसन ने महत्वपूर्ण राजनीतिक गति के साथ नेतृत्व की दौड़ में प्रवेश किया। यूडीएफ ने 140 सदस्यीय विधानसभा में 102 सीटें हासिल कीं, जबकि कांग्रेस ने 63 सीटें जीतीं, जो गठबंधन के भीतर सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी। यह भी पढ़ें: केरल के गेम ऑफ थ्रोन्स में वीडी सतीसन को मिला ताज लेकिन वेणुगोपाल के पास रही सत्ता विपक्ष के नेता के रूप में, सतीसन ने भ्रष्टाचार के आरोपों, शासन के मुद्दों और कानून-व्यवस्था की चिंताओं पर वाम सरकार पर आक्रामक रूप से निशाना साधा था, जिससे चुनाव से पहले कांग्रेस के राजनीतिक संदेश को तेज करने में मदद मिली। कांग्रेस में बढ़ रहा है प्रियंका का प्रभाव! केरल के मुख्यमंत्री के फैसले ने कांग्रेस के आंतरिक विचार-विमर्श में प्रियंका गांधी वाड्रा की भूमिका की ओर भी ध्यान आकर्षित किया है। वायनाड से संसद में प्रवेश करने के बाद से, प्रियंका ने केरल की राजनीति में अधिक प्रत्यक्ष हिस्सेदारी हासिल कर ली है और उन्हें राज्य के राजनीतिक मूड की गहरी समझ रखने वाले व्यक्ति के रूप में देखा जा रहा है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना जगह : तिरुवनंतपुरम (त्रिवेंद्रम), भारत, भारत न्यूज़ इंडिया कैसे कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने केरल का मुख्यमंत्री चुनने में अपना रास्ता अपनाया? अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)प्रियंका गांधी केरल की राजनीति(टी)वीडी सतीसन मुख्यमंत्री(टी)केरल कांग्रेस नेतृत्व(टी)वायनाड निर्वाचन क्षेत्र की राजनीति(टी)यूडीएफ की जीत केरल चुनाव(टी)राहुल गांधी प्रियंका प्रभाव(टी)केरल सीएम पद की दौड़(टी)कांग्रेस आंतरिक निर्णय लेना
Body Builder death reason| इंटरनेशनल बॉडीबिल्डर रण सिंह की अचानक मौत, 30 साल की उम्र में बड़े खिताब किए थे नाम, कैसे गई जान

Last Updated:May 14, 2026, 13:50 IST Bodybuilder Ron Singh Death: इंटरनेशनल बॉडीबिल्डर रण सिंह उर्फ सुखविंदर सिंह की अचानक मौत से पूरे शहर में सन्नाटा छा गया है. तांडा होशियारपुर के रण सिंह का निधन 30 साल की उम्र में दिल का दौरा पड़ने से हुआ है. इन्होंने ऑस्ट्रेलिया में कई खिताब जीते थे. इंटरनेशनल बॉडी बिल्डर रण सिंह का 30 साल की उम्र में कार्डियक अरेस्ट से निधन हो गया है. Bodybuilder Ron Singh Death: मशहूर इंटरनेशनल बॉडीबिल्डर रण सिंह के अचानक निधन की खबर आ रही है. रण सिंह पंजाब के होशियारपुर में तांडा क्षेत्र के रहने वाले थे. महज 30 साल की उम्र में अंतरराष्ट्रीय बॉडी बिल्डिंग का बड़ा नाम बने सिंह की मौत से परिवार ही नहीं पूरे शहर में शोक छा गया है. रण सिंह का दूसरा नाम सुखविंदर सिंह था. जानकारी के अनुसार रण सिंह का निधन दिल का दौरा पड़ने से हुआ है. तांडा से निकलकर ऑस्ट्रेलिया सहित कई देशों में प्रतियोगिताएं जीतने वाले इस बॉडीविल्डर की उम्र सिर्फ 30 साल थी. ऐसे में एक बार फिर यह बहस छिड़ गई है कि इतनी शारीरिक मेहनत और डायटिंग रूटीन से बॉडी बनाने और जिम करने वाले बॉडीबिल्डर को कार्डियक अरेस्ट कैसे हो गया? बता दें कि बॉडीबिल्डर रण सिंह उर्फ सुखविंदर सिंह को मंगलवार दोपहर अचानक दिल का दौरा पड़ा. तुरंत उन्हें अस्पताल जाया गया जहां डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की कोशिश की लेकिन नहीं बचा सके और निधन हो गया. मात्र 30 साल की उम्र में उनकी इस अचानक मौत ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है. इलाके के चहेते रण सिंह की मौत की खबर फैलते ही उनके घर के बाहर लोग इकठ्ठे हो गए. इस दौरान लोगों ने बताया कि रण सिंह न सिर्फ तांडा बल्कि पूरे होशियारपुर जिले के लिए गौरव का प्रतीक थे. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कमाई थी शोहरतरण सिंह ने बॉडीबिल्डिंग के क्षेत्र में अपनी मेहनत और समर्पण से कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया था और पदक जीते थे. खासकर ऑस्ट्रेलिया में उन्होंने कई खिताब अपने नाम किए थे, जिससे उनका नाम देश-विदेश में चर्चा में रहा. वे युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत थे. जिम में घंटों कड़ी मेहनत करते और स्वस्थ जीवनशैली का संदेश देते थे. परिवार में पसरा मातमरण सिंह अपने पीछे बूढ़े माता-पिता, पत्नी और सिर्फ दो साल की छोटी बेटी छोड़कर गए हैं. वे अपने परिवार के इकलौते सहारे थे. उनकी अचानक मौत से पूरा परिवार टूट गया है. छोटी सी बच्ची अभी अपने पिता के चले जाने का मतलब भी नहीं समझ पा रही है. पहली घटना नहीं ये.. बता दें कि जिम में मेहनत करने के बाद हार्ट अटैक या कार्डियक अरेस्ट की ये पहली घटना नहीं है. आए दिन ऐसे मामले आते हैं जब रोजाना शारीरिक मेहनत करने के बावजूद लोगों को कार्डियक अरेस्ट हो रहा है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि भारी वजन उठाने वाले एथलीट्स को नियमित स्वास्थ्य जांच करानी चाहिए, क्योंकि अत्यधिक व्यायाम और सप्लीमेंट्स के कारण हृदय पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है. About the Author प्रिया गौतमSenior Correspondent Priya Gautam is an accomplished journalist currently working with Hindi.News18.com with over 14 years of extensive field reporting experience. Previously worked with Hindustan times group (Hindustan Hindi) and …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें
बीजेपी की नई टीम:नबीन के नेतृत्व में बीजेपी में बड़े बदलाव की तैयारी, मिलेनियल नेताओं को मिल सकता है बड़ा रोल

भाजपा के सबसे युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष बने सोमनाथ नबीन के साथ ही पार्टी में बड़े पैमाने पर बदलाव की चर्चा तेज हो गई थी। 45 साल की उम्र में उन्होंने मोहम्मद मोहम्मद का रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी उन्हें “मिलेनियल नेता” और पार्टी का “बॉस” बताते हैं। माना जा रहा है कि नवीन की नई टीम के अनुभवी नेता और उभरते हुए युवा राहुल का मिश्रण होगा, जिसका लक्ष्य भाजपा के राष्ट्रीय सम्मेलन को अगले चरण तक ले जाना है। अब चर्चा ये है कि बीजेपी में जल्द ही संगठन में बदलाव होंगे। अब देखिए ये होगी बीजेपी की टीम मिलेनियल में कौन कौन शामिल होता है। नवीन का राजनीतिक सफर खुद भाजपा की नई रणनीति का संकेत माना जा रहा है। बिहार सरकार में घटक दल और शहर विकास मंत्री बने रहने के बाद भी उनके संगठन में शीर्ष भूमिका ऑनलाइन तक बनी रही, इस बात का उदाहरण यह है कि भाजपा और औद्योगिक अनुभव को साथ लेकर चलना पसंद है। इससे पहले राजनाथ सिंह और अमित शाह भी संगठन और सरकार के बीच अहम भूमिका निभा रहे हैं। आधिकारिक तौर पर कहा गया है, केंद्र में कुख्यात कैदियों और नई राष्ट्रीय टीम का गठन 2027 के चुनाव की तैयारी का हिस्सा है। पार्टी सात राज्यों में चुनाव से पहले बेंचमार्क बैलेंस, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और नए नेतृत्व को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने की रणनीति पर काम कर रही है। और पढ़ें: बिहार के नए मॉडल पर बनी बात! संजय झा और वैलेंटाइन की मुलाकात में क्या हुआ? जेडीयू नेताओं ने खुद बताया मोदी सरकार 3.0 में अविनाशी का स्मारक मोदी सरकार 3.0 के दो साल पूरे होने से पहले ही केंद्र सरकार में बड़े पैमाने पर किसानों की चर्चाएं भी तेज हो गई हैं। राजनीतिक सिद्धांत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पिछले कार्यकाल के दौरे में कहा गया है कि आने वाले महीनों में मंत्रिपरिषद में बदलाव संभव है। स्टॉक्स के समर्थित दावे ये जा रहे हैं कि मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में नवंबर 2014 में पहली बार सरकार का विस्तार हुआ था, जबकि जुलाई 2016 और सितंबर 2017 में बड़े पैमाने पर प्रचार हुआ था। दूसरे अधिवेशन में जुलाई 2021 में बड़ा विस्तार हुआ और मई 2023 में लोकतंत्र के विभाजन में बदलाव हुआ। ऐसा माना जा रहा है कि मोदी 3.0 के दो साल बाद एक बार फिर से मंत्री परिषद की बहाली हो सकती है। 26 मई को केंद्र में मोदी सरकार के 12 साल पूरे हो जायेंगे, जबकि 9 जून को तीसरे कार्यकाल के दो साल पूरे हो जायेंगे. सचिवालय केंद्रीय मंत्रिपरिषद में 72 सदस्य हैं, जबकि संवैधानिक रूप से 81 मंत्री बनाए जा सकते हैं। इसके नए अवशेष और कुछ संगीतकारों के प्रोटोटाइप में बदलावों का नवीनीकरण किया गया है। सूत्रों के मुताबिक 2027 चुनाव में क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन पर विशेष ध्यान दिया जा सकता है। बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन ने हाल ही में एबीपी न्यूज से एक्सक्लूसिव बातचीत में भी कहा था, ”बीजेपी के कार्यकर्ता फुल टाइम पॉलिटिक्स करते हैं, 24X7 काम करते हैं,” जिसे पार्टी के कैडर आधारित मान्यता प्राप्त और लगातार विचारधारा की तैयारी के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। संगठन में युवा नेतृत्व जोर बीजेपी में 2027 के विधानसभा चुनावों पर ध्यान केंद्रित करते हुए चुनावी बदलावों की तैयारी तेज हो गई है। उत्तर प्रदेश बिहार और में बौद्ध मठ विस्तार के बाद कई नेताओं के संगठन में शामिल होने के संकेत मिले हैं। सूत्रों के मुताबिक मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, बिहार, यूपी, पश्चिम बंगाल और झारखंड के कई नेताओं को नई टीम में जगह मिल सकती है। अगले साल होने वाले चुनाव में कई नेताओं को राज्य प्रभारी बनने का दायित्व मिल सकता है। पार्टी अध्यक्ष नितिन नबीन के नेतृत्व में नई राष्ट्रीय टीम को लेकर चर्चा अंतिम चरण में घोषित की जा रही है। 20 जनवरी को राष्ट्रपति के पद पर नियुक्तियों के बाद नवीन कांस्टीट्यूशनल पद में बदलाव और प्रमुख पदों पर नियुक्तियां की जा रही हैं। माना जा रहा है कि जल्द ही नई टीम की घोषणा हो सकती है. पासपोर्ट के मुताबिक, नई टीम में युवा नेताओं की अहम भूमिका हो सकती है. हालांकि आईसीआईसीआई बैलेंस भंडार के लिए अनुभवी नेताओं की भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई हैं। राष्ट्रीय स्तर पर भी कई नए राज्यों के ज्वालामुखी शामिल हो सकते हैं, ताकि अलग-अलग राज्यों के नेताओं को राष्ट्रीय स्तर पर तैयार किया जा सके। इसके अलावा महिला नेताओं को भी नई टीम में अधिक प्रतिनिधित्व मिलने के संकेत हैं। राजनीतिक सिद्धांतों का मानना है कि भाजपा संगठन और भारत सरकार में विचारधारा केवल सार्वभौमिक परिवर्तन नहीं, बल्कि लंबे समय की राजनीतिक तैयारी का हिस्सा हैं। पार्टी 2027 में होने वाले महत्वपूर्ण चुनावी चुनावों पर ध्यान केंद्रित करते हुए अपनी रणनीति को नए सिरे से आकार दे रही है। इसके साथ ही बीजेपी अगली पीढ़ी के नेतृत्व की तैयारी पर भी जोर दे रही है। माना जा रहा है कि संगठन और सरकार में बदलाव आने वाले समय में पार्टी की राजनीतिक दिशा, विचारधारा संदेश और नेतृत्व संरचना पर गहरा असर पड़ सकता है। और पढ़ें: भदोही में गरेरे बीजेपी अध्यक्ष पुतिन नबीन को बताया ‘नारी विरोधी’, बोले- जो बिले संकट थे, जनता उनकी वजूद देवता | (टैग्सटूट्रांसलेट)नितिन नबीन(टी)बीजेपी नेतृत्व(टी)बीजेपी संगठन(टी)मोदी 3.0(टी)नितिन नबीन बीजेपी(टी)बीजेपी के नए अध्यक्ष(टी)बीजेपी संगठनात्मक परिवर्तन(टी)मोदी 3.0 कैबिनेट फेरबदल(टी)बीजेपी युवा नेतृत्व(टी)बीजेपी की राष्ट्रीय टीम(टी)बीजेपी 2027 रणनीति(टी)नितिन नबीन सहस्राब्दी नेता(टी)बीजेपी पीढ़ीगत बदलाव(टी)नरेंद्र मोदी बीजेपी(टी)अमित शाह(टी)राजनाथ सिंह(टी)बीजेपी चुनाव रणनीति(टी)बीजेपी नेतृत्व परिवर्तन(टी)नितिन नबीन(टी)बीजेपी(टी)अमित शाह(टी)राजनाथ सिंह
अमिताभ बच्चन 83 साल की उम्र में कैसे रहते हैं इतने एक्टिव और फिट? हर दिन करते हैं ये काम, खुद बताया ये सीक्रेट

Last Updated:May 14, 2026, 13:40 IST Amitabh Bachchan fitness secret: 83 साल की उम्र में आज भी बॉलीवुड के शंहशाह अमिताभ बच्चन हर यंग एक्टर को अपनी फिटनेस से टक्कर दे सकते हैं. वे इस उम्र में भी लगातार काम कर रहे हैं. बड़े पर्दे से लेकर छोटे पर्दे पर एक्टिव हैं. आखिर कहां से लाते हैं बिग बी इतनी एनर्जी. कैसे रहते हैं वे इतने मेंटली और फिजिकली हैप्पी, कूल, हेल्दी और स्ट्रेस रहित? अमिताभ बच्चन का फिटनेस सीक्रेट जानकर आपको जरूर हैरानी होगी अमिताभ बच्चन के फिट रहने का मंत्र. PC: instagram/amitabhbachchan 83 साल की उम्र में भी बॉलीवुड के शहंशाह, बिग बी, एंग्री यंग मैन जैसे नामों से मशहूर एक्टर अमिताभ बच्चन अपने काम के प्रति काफी डेडिकेटेड रहते हैं. इस उम्र में भी वे लगातार एक्टिंग और होस्टिंग में एक्टिंग हैं. उनके फिटनेस, एनर्जी के सामने तो यंग एक्टर भी फेल हो जाएं. आखिर किस तरह से अमिताभ बच्चन इस उम्र में भी इतने स्वस्थ, फिट रखते हैं? क्या है उनकी फिटनेस का राज? अमिताभ बच्चन के फिटनेस के राज का खुलासा किया है आयुष मंत्रालय ने. दरअसल, कुछ दिनों पहले आयुष मंत्रालय ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक पुराना वीडियो पोस्ट किया था, जिसमें अमिताभ बच्चन अपनी सेहत और फिट रहने के बारे में बताते नजर आ रहे हैं. चलिए जानते हैं यहां अमिताभ बच्चन के फिटनेस का राज क्या है? अमिताभ बच्चन ने खुद बताया फिट रहने का मंत्र आयुष मंत्रालय ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर अमिताभ बच्चन का एक पुराना वीडियो शेयर किया है. मौका है विश्व योग दिवस को बढ़ावा देना. हर साल 21 जून का दुनिया भर में योग दिवस सेलिब्रेट किया जाता है. ऐसे में 83 वर्ष की उम्र में इतने फिट और एक्टिव रहने वाले अमिताभ बच्चन से बेहतर कोई और उदाहरण नहीं हो सकता था. वीडियो के साथ कैप्शन में लिखा गया कि अमिताभ बच्चन की यह प्रेरणा लोगों को योग के प्रति जागरूक और उत्साहित कर सकती है. साथ ही यह भी बताया गया कि अभिनेता ने अपने स्वस्थ और संतुलित जीवन का राज योग को माना है. अमिताभ बच्चन ने कहा, मैं रोज योग करता हूं वीडियो में अमिताभ बच्चन कहते नजर आ रहे हैं कि वह प्रतिदिन योग करते हैं. इससे उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आए हैं. उनके अनुसार, योग ने उनके जीवन को बेहतर और समृद्ध बनाया है. बिग बी ने इस वीडियो में अपने फैंस को भी योग करने की सलाह दी. इसे रेगुलर प्रैक्टिस करने से जीवन को पूरी एनर्जी और क्षमता के साथ आप जी सकते हैं. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि योग हमेशा सही मार्गदर्शन और विशेषज्ञ की सलाह के साथ करना चाहिए. View this post on Instagram
केरल के नए मुख्यमंत्री के रूप में वीडी सतीसन: कैसे कांग्रेस कैडर नेतृत्व पर हावी रहा | भारत समाचार

आखरी अपडेट:14 मई, 2026, 13:23 IST पार्टी सूत्रों के मुताबिक, केसी वेणुगोपाल को शीर्ष पद की दौड़ में सबसे आगे माना जा रहा था. वीडी सतीसन ने केरल के नए मुख्यमंत्री की घोषणा की केरल के मुख्यमंत्री पद की दौड़: केरल विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) को भारी जीत हासिल होने के दस दिन बाद, गुरुवार को सबसे पुरानी पार्टी ने सस्पेंस खत्म कर दिया और वरिष्ठ नेता वीडी सतीसन को केरल के अगले मुख्यमंत्री के रूप में नामित किया। केरल की एआईसीसी प्रभारी दीपा दासमुंशी और राज्य के लिए पार्टी के केंद्रीय पर्यवेक्षकों अजय माकन और मुकुल वासनिक ने एक संवाददाता सम्मेलन में इस फैसले की घोषणा की। सतीसन ने दो अन्य दावेदारों, एआईसीसी महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल और पूर्व विपक्षी नेता रमेश चेन्निथला को पछाड़कर शीर्ष पद की दौड़ जीती। और पढ़ें: केसी वेणुगोपाल केरल के सीएम पद की दौड़ में सबसे आगे थे: 48 घंटों में क्या बदल गया? वेणुगोपाल विधायकों और आलाकमान की लोकप्रिय पसंद होने के बावजूद, पार्टी के फैसले में कैडर प्रबल रहे क्योंकि आलाकमान को यह मानने के लिए मजबूर होना पड़ा कि सतीसन की जमीनी स्तर की मांग को नजरअंदाज करने से राज्य में पार्टी के भविष्य को नुकसान होगा। पार्टी सूत्रों के मुताबिक वेणुगोपाल को शीर्ष पद की दौड़ में सबसे आगे माना जा रहा था. हालाँकि, केरल कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं द्वारा इस सप्ताह नई दिल्ली में राहुल गांधी के साथ चर्चा के बाद स्थिति बदल गई। सूत्रों ने कहा कि वरिष्ठ नेताओं ने राहुल गांधी को बताया कि जनता की राय और कांग्रेस गठबंधन सहयोगी दोनों सतीसन को अगला मुख्यमंत्री बनाने के पक्ष में हैं। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि पार्टी को ऐसे नेता का चयन करने से बचना चाहिए जो विधायक नहीं है, क्योंकि इससे उपचुनाव हो सकते हैं। पहले, सीएनएन-न्यूज18 ने बताया था कि पिछले हफ्ते तिरुवनंतपुरम में पर्यवेक्षकों अजय माकन और मुकुल वासनिक के साथ बैठक के दौरान 63 नवनिर्वाचित कांग्रेस विधायकों में से 43 ने मुख्यमंत्री पद के लिए वेणुगोपाल का समर्थन किया था। वेणुगोपाल ने इनमें से कई निर्वाचित विधायकों के लिए टिकट हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, और कहा जाता है कि कई लोग व्यक्तिगत रूप से उनके प्रति आभारी महसूस करते थे। लेकिन सतीसन यूडीएफ के विजयी अभियान का चेहरा थे, उन्होंने असामान्य एकजुटता के साथ “टीम यूडीएफ” की कप्तानी की और जब गठबंधन खुद अनिश्चित लग रहा था तो अक्सर स्पष्टता पेश करते थे। और पढ़ें: वीडी सतीसन की कुल संपत्ति क्या है? केरल के नए मुख्यमंत्री के पास 6 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति है 2021 से विपक्ष के नेता के रूप में, सतीसन ने लगातार विधानसभा के अंदर और बाहर पिनाराई विजयन सरकार पर कांग्रेस के हमले का नेतृत्व किया। यूडीएफ की 2021 की हार के बाद सतीसन ने सफलतापूर्वक कांग्रेस को एक आक्रामक विपक्षी ताकत के रूप में स्थापित किया। विरोध प्रदर्शनों, विधानसभा हस्तक्षेपों और मुद्दा-आधारित अभियानों के दौरान उनकी दृश्यता ने 2026 के चुनाव से पहले पार्टी के जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं को एकजुट करने में मदद की। हालाँकि, यूडीएफ में कांग्रेस की प्रमुख सहयोगी इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग, जिसके 22 विधायक हैं, को भी सतीसन का समर्थन करने के लिए कहा गया था। आईयूएमएल नेताओं ने कथित तौर पर कांग्रेस पर्यवेक्षकों से कहा कि मौजूदा विधायक को मुख्यमंत्री के रूप में चुनने से अनावश्यक उपचुनावों से बचने में मदद मिलेगी। कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ ने 140 विधानसभा सीटों में से 102 सीटों पर कब्जा कर लिया, जिससे एक दशक के बाद ऐतिहासिक वापसी हुई और वाम लोकतांत्रिक मोर्चा सिर्फ 35 सीटों पर सिमट गया। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया केरल के नए मुख्यमंत्री के रूप में वीडी सतीसन: कैसे कांग्रेस कैडर नेतृत्व पर हावी रहा अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)केरल सीएम रेस(टी)वीडी सतीसन केरल(टी)केरल के मुख्यमंत्री(टी)कांग्रेस यूडीएफ की जीत(टी)केरल विधानसभा चुनाव(टी)केसी वेणुगोपाल(टी)रमेश चेन्निथला(टी)इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग









