सरकार ने एविएशन फ्यूल में एथेनॉल मिलाने की मंजूरी दी:कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम होगी; गडकरी बोले-100% ब्लेंडिंग का टारगेट

सरकार ने एविएशन सेक्टर में प्रदूषण कम करने और महंगे कच्चे तेल के आयात को घटाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) में एथेनॉल ब्लेंडिंग को मंजूरी दे दी है। इसके लिए सरकार ने नोटिफिकेशन जारी कर ATF मार्केटिंग नियमों में बदलाव किया है। इस फैसले से न केवल हवाई यात्रा क्लीन होगी, बल्कि भारत की विदेशी तेल पर निर्भरता भी कम होगी। नए नियमों के तहत फ्यूल की परिभाषा बदली मंत्रालय के नोटिफिकेशन के अनुसार, अब एविएशन टर्बाइन फ्यूल की परिभाषा को अपडेट किया गया है। अब एटीएफ में हाइड्रोकार्बन के साथ-साथ सिंथेसाइज्ड कंपोनेंट्स (जैसे एथेनॉल) को भी शामिल किया जा सकेगा। यह भारतीय मानकों के अनुरूप होगा। सरकार का यह बदलाव अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ रहे सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (SAF) के चलन को ध्यान में रखकर किया गया है। तेल आयात और विदेशी मुद्रा की बचत होगी भारत अपनी जरूरत का करीब 87% कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण अक्सर तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रहता है, जिसका सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। हवाई ईंधन में एथेनॉल मिलाने से कच्चे तेल की खपत कम होगी, जिससे सरकार को विदेशी मुद्रा बचाने में मदद मिलेगी। गडकरी बोले- 100% एथेनॉल ब्लेंडिंग का टारगेट केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि देश को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनना होगा। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में भारत को 100% एथेनॉल ब्लेंडिंग का लक्ष्य रखना चाहिए। हमें फॉसिल फ्यूल (जीवाश्म ईंधन) पर अपनी निर्भरता को पूरी तरह खत्म करने की जरूरत है। गडकरी लंबे समय से फ्लेक्स-फ्यूल और ग्रीन हाइड्रोजन के इस्तेमाल पर जोर दे रहे हैं। CAFE III नॉर्म्स से ईवी और फ्लेक्स-फ्यूल को राहत सरकार का ध्यान केवल विमानों तक ही सीमित नहीं है। गडकरी ने कहा कि अप्रैल 2027 से लागू होने वाले ‘कॉर्पोरेट एवरेज फ्यूल एफिशिएंसी’ (CAFE) III नॉर्म्स का इलेक्ट्रिक वाहनों और फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियों पर बुरा असर नहीं पड़ेगा। इसका मतलब है कि सरकार भविष्य में पर्यावरण के अनुकूल चलने वाली गाड़ियों को बढ़ावा देना जारी रखेगी। CAFE III नॉर्म्स वाहनों के औसत ईंधन उत्सर्जन को नियंत्रित करने के मानक हैं, जो पर्यावरण सुरक्षा के लिए बनाए गए हैं। क्या होता है सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (SAF)? SAF एक ऐसा वैकल्पिक ईंधन है जिसे कुकिंग ऑयल, कृषि अवशेष और कचरे से तैयार किया जा सकता है। इसमें एथेनॉल का मिश्रण भी अहम भूमिका निभाता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके इस्तेमाल के लिए विमान के इंजन या मौजूदा फ्यूल सप्लाई सिस्टम में बड़े बदलाव की जरूरत नहीं होती। यह पारंपरिक जेट फ्यूल के मुकाबले कार्बन उत्सर्जन को काफी हद तक कम कर देता है। ये खबर भी पढ़ें… टेक महिंद्रा का मुनाफा 16% बढ़कर ₹1,354 करोड़: चौथी तिमाही में रेवेन्यू 12.64% बढ़ा, निवेशकों को 36 रुपए डिविडेंड देगी कंपनी टेक महिंद्रा का वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में कंसॉलिडेटेड मुनाफा सालाना आधार (YoY) 16% बढ़कर ₹1,354 करोड़ हो गया। एक साल पहले की समान तिमाही (Q4FY25) में कंपनी को ₹1,167 करोड़ का मुनाफा हुआ था। आज (22 अप्रैल) को कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च) के नतीजे जारी किए हैं। इसके अलावा कंपनी ने अपने निवेशकों को 36 रुपए का डिविडेंड देना का भी ऐलान किया है। पूरी खबर पढ़ें…
सरकार ने एविएशन फ्यूल में एथेनॉल मिलाने की मंजूरी दी:कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम होगी; गडकरी बोले-100% ब्लेंडिंग का टारगेट

सरकार ने एविएशन सेक्टर में प्रदूषण कम करने और महंगे कच्चे तेल के आयात को घटाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) में एथेनॉल ब्लेंडिंग को मंजूरी दे दी है। इसके लिए सरकार ने नोटिफिकेशन जारी कर ATF मार्केटिंग नियमों में बदलाव किया है। इस फैसले से न केवल हवाई यात्रा क्लीन होगी, बल्कि भारत की विदेशी तेल पर निर्भरता भी कम होगी। नए नियमों के तहत फ्यूल की परिभाषा बदली मंत्रालय के नोटिफिकेशन के अनुसार, अब एविएशन टर्बाइन फ्यूल की परिभाषा को अपडेट किया गया है। अब एटीएफ में हाइड्रोकार्बन के साथ-साथ सिंथेसाइज्ड कंपोनेंट्स (जैसे एथेनॉल) को भी शामिल किया जा सकेगा। यह भारतीय मानकों के अनुरूप होगा। सरकार का यह बदलाव अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ रहे सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (SAF) के चलन को ध्यान में रखकर किया गया है। तेल आयात और विदेशी मुद्रा की बचत होगी भारत अपनी जरूरत का करीब 87% कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण अक्सर तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रहता है, जिसका सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। हवाई ईंधन में एथेनॉल मिलाने से कच्चे तेल की खपत कम होगी, जिससे सरकार को विदेशी मुद्रा बचाने में मदद मिलेगी। गडकरी बोले- 100% एथेनॉल ब्लेंडिंग का टारगेट केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि देश को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनना होगा। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में भारत को 100% एथेनॉल ब्लेंडिंग का लक्ष्य रखना चाहिए। हमें फॉसिल फ्यूल (जीवाश्म ईंधन) पर अपनी निर्भरता को पूरी तरह खत्म करने की जरूरत है। गडकरी लंबे समय से फ्लेक्स-फ्यूल और ग्रीन हाइड्रोजन के इस्तेमाल पर जोर दे रहे हैं। CAFE III नॉर्म्स से ईवी और फ्लेक्स-फ्यूल को राहत सरकार का ध्यान केवल विमानों तक ही सीमित नहीं है। गडकरी ने कहा कि अप्रैल 2027 से लागू होने वाले ‘कॉर्पोरेट एवरेज फ्यूल एफिशिएंसी’ (CAFE) III नॉर्म्स का इलेक्ट्रिक वाहनों और फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियों पर बुरा असर नहीं पड़ेगा। इसका मतलब है कि सरकार भविष्य में पर्यावरण के अनुकूल चलने वाली गाड़ियों को बढ़ावा देना जारी रखेगी। CAFE III नॉर्म्स वाहनों के औसत ईंधन उत्सर्जन को नियंत्रित करने के मानक हैं, जो पर्यावरण सुरक्षा के लिए बनाए गए हैं। क्या होता है सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (SAF)? SAF एक ऐसा वैकल्पिक ईंधन है जिसे कुकिंग ऑयल, कृषि अवशेष और कचरे से तैयार किया जा सकता है। इसमें एथेनॉल का मिश्रण भी अहम भूमिका निभाता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके इस्तेमाल के लिए विमान के इंजन या मौजूदा फ्यूल सप्लाई सिस्टम में बड़े बदलाव की जरूरत नहीं होती। यह पारंपरिक जेट फ्यूल के मुकाबले कार्बन उत्सर्जन को काफी हद तक कम कर देता है। ये खबर भी पढ़ें… टेक महिंद्रा का मुनाफा 16% बढ़कर ₹1,354 करोड़: चौथी तिमाही में रेवेन्यू 12.64% बढ़ा, निवेशकों को 36 रुपए डिविडेंड देगी कंपनी टेक महिंद्रा का वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में कंसॉलिडेटेड मुनाफा सालाना आधार (YoY) 16% बढ़कर ₹1,354 करोड़ हो गया। एक साल पहले की समान तिमाही (Q4FY25) में कंपनी को ₹1,167 करोड़ का मुनाफा हुआ था। आज (22 अप्रैल) को कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च) के नतीजे जारी किए हैं। इसके अलावा कंपनी ने अपने निवेशकों को 36 रुपए का डिविडेंड देना का भी ऐलान किया है। पूरी खबर पढ़ें…
हिमाचल में 4000 फीट ऊंचाई पर उगती ये बूटी, पेट खराब हो या बावासीर…चुटकियों में आराम

Last Updated:April 22, 2026, 18:14 IST Kachnar Benefits Piles Stomach : हिमाचल प्रदेश के मंडी में कई ऐसी प्राकृतिक जड़ी-बूटियां अपने आप उगती हैं जो सेहत के लिए वरदान हैं. कचनार उन्हीं में से एक है. इसे स्थानीय भाषा में करैडे भी कहते हैं. इसे सब्जी बनाकर खाया जाता है, जो कई बीमारियों का अकेला इलाज है. मंडी के आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. ओम राज शर्मा लोकल 18 से बताते हैं कि कचनार एक ऐसी दवा है, जो प्राकृतिक रूप से हिमालयन जंगलों में उपलब्ध है. इसकी मदद से बवासीर से लेकर खराब पेट और सिर से लेकर दांतों के दर्द को ठीक किया जा सकता है. इसे गर्मियों में खाना ज्यादा लाभकारी है. कचनार की एक चम्मच छाल को एक कप मट्ठा (छाछ) के साथ दिन में 3 बार सेवन करने से बवासीर में खून गिरना बंद हो जाता है. हिमाचल की एक विशेषता यह भी है कि यहां विभिन्न प्रकार की दिव्य औषधियां प्राकृतिक रूप से उत्पन्न होती हैं, जिन्हें ऋतु और आवश्यकता के अनुसार उपयोग में लाया जाता है. इस समय कचनार/करैड़े की बहार देखने को मिल रही है, जो विशेष रूप से पहाड़ी क्षेत्रों में 4000 फीट की ऊंचाई तक पाया जाता है. कचनार के फूल सफेद, बैंगनी और गुलाबी रंगों में खिलते हैं, जो न केवल देखने में आकर्षक होते हैं बल्कि औषधीय गुणों से भी भरपूर हैं. आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. ओम राज शर्मा का कहना है कि इसकी छाल (त्वचा) और पुष्प विशेष रूप से उपयोग में लाए जाते हैं. इसके फूलों से तैयार किया गया गुलकंद या सब्जी कब्ज जैसी समस्या में लाभकारी है. इसके फूलों के रस (स्वरस) की मात्रा सामान्यतः 10 से 20 मिली तक उपयोग की जाती है. पहाड़ी क्षेत्रों में कचनार के फूलों के ‘बड़े-भल्ले’ और इसकी कलियों का रायता बड़े चाव से खाया जाता है, जो स्वाद और स्वास्थ्य दोनों के लिए लाभदायक है. आयुर्वेदिक दृष्टि से कचनार के प्रयोग से चर्म रोग, कृमि, रक्त संबंधी विकार, रक्तस्त्राव तथा खांसी जैसी समस्याओं से भी निजात मिलती है. Add News18 as Preferred Source on Google कचनार की जड़ को पानी में घिसकर लेप बनाकर और इसे गर्म करके लेप को सूजन पर लगाने से आराम मिलता है. मुंह में छाले होने पर कचनार की छाल का काढ़ा बनाकर उसमें थोड़ा-सा कत्था मिलाकर लगाने से आराम मिलता है. कचनार की एक चम्मच छाल को एक कप मट्ठा (छाछ) के साथ दिन में 3 बार सेवन करने से बवासीर में खून गिरना बंद हो जाता है. कचनार की कलियों के पाउडर को मक्खन और शक्कर मिलाकर 11 दिन तक खाने ये बीमारी ठीक हो सकती है. कचनार की फूल की कलियां घी में भूनकर सुबह-शाम खाने से भूख बढ़ती है. गैस होने पर कचनार की छाल का काढ़ा बनाकर, इसके 20 मिलीलीटर काढ़ा में आधा चम्मच पिसी हुई अजवायन मिलाकर प्रयोग करने से लाभ मिलता है. सुबह-शाम भोजन करने बाद इसका सेवन करने से अफरा (पेट फूलना) और गैस की तकलीफ दूर होती है. दांतों के दर्द से राहत के लिए भी कचनार का उपयोग किया जाता है. इसके पेड़ की छाल को आग में जलाकर उसकी राख को बारीक पीसकर मंजन बना लें. इस मंजन को सुबह और रात में करने से दांतों का दर्द और मसूड़ों से खून निकलना बंद हो जाता है. First Published : April 22, 2026, 18:14 IST
रितेश-जेनेलिया के छोटे बेटे का एक्टिंग डेब्यू:फिल्म 'राजा शिवाजी' में बाल शिवाजी बने 10 साल के राहिल देशमुख

रितेश देशमुख की फिल्म ‘राजा शिवाजी’ का ट्रेलर लॉन्च हो गया है। इस फिल्म के जरिए रितेश और जेनेलिया के छोटे बेटे राहिल देशमुख अपना एक्टिंग डेब्यू कर रहे हैं। 10 साल के राहिल फिल्म में छत्रपति शिवाजी महाराज के बचपन का किरदार निभा रहे हैं। यह फिल्म 1 मई को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। वहीं, रितेश खुद मुख्य भूमिका यानी छत्रपति शिवाजी महाराज के किरदार में नजर आएंगे। फिल्म का निर्देशन भी रितेश ने ही किया है। यह पहली बार है जब देशमुख परिवार की नई पीढ़ी बड़े पर्दे पर कदम रख रही है। जेनेलिया, जिन्होंने फिल्म को प्रोड्यूस किया है और इसमें सईबाई का किरदार भी निभाया है। 2016 में जन्में राहिल राहिल का जन्म 2016 में हुआ था। अक्सर पैपराजी को हाथ जोड़कर ‘नमस्ते’ करने वाले राहिल को अपने पहले ही प्रोजेक्ट के लिए एक चुनौतीपूर्ण ऐतिहासिक किरदार के लिए चुना गया है। फिल्म में राहिल उस दौर को दिखाएंगे जब शिवाजी महाराज ‘स्वराज्य’ का सपना बुन रहे थे। फिल्म में नजर आएंगे कई बड़े चेहरे ‘राजा शिवाजी’ में सिर्फ देशमुख परिवार ही नहीं, बल्कि फिल्म इंडस्ट्री के कई दिग्गज कलाकार भी शामिल हैं। फिल्म में संजय दत्त, विद्या बालन और अभिषेक बच्चन महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभा रहे हैं। रितेश ने बताया कि इस फिल्म को बनाने में उन्हें 10 साल का समय लगा। बीच में कोविड की वजह से काम रुक गया था, लेकिन अब यह फिल्म बड़े पर्दे पर आने के लिए तैयार है। इसे जियो स्टूडियोज और मुंबई फिल्म कंपनी ने मिलकर प्रोड्यूस किया है।
रितेश-जेनेलिया के छोटे बेटे का एक्टिंग डेब्यू:फिल्म 'राजा शिवाजी' में बाल शिवाजी बने 10 साल के राहिल देशमुख

रितेश देशमुख की फिल्म ‘राजा शिवाजी’ का ट्रेलर लॉन्च हो गया है। इस फिल्म के जरिए रितेश और जेनेलिया के छोटे बेटे राहिल देशमुख अपना एक्टिंग डेब्यू कर रहे हैं। 10 साल के राहिल फिल्म में छत्रपति शिवाजी महाराज के बचपन का किरदार निभा रहे हैं। यह फिल्म 1 मई को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। वहीं, रितेश खुद मुख्य भूमिका यानी छत्रपति शिवाजी महाराज के किरदार में नजर आएंगे। फिल्म का निर्देशन भी रितेश ने ही किया है। यह पहली बार है जब देशमुख परिवार की नई पीढ़ी बड़े पर्दे पर कदम रख रही है। जेनेलिया, जिन्होंने फिल्म को प्रोड्यूस किया है और इसमें सईबाई का किरदार भी निभाया है। 2016 में जन्में राहिल राहिल का जन्म 2016 में हुआ था। अक्सर पैपराजी को हाथ जोड़कर ‘नमस्ते’ करने वाले राहिल को अपने पहले ही प्रोजेक्ट के लिए एक चुनौतीपूर्ण ऐतिहासिक किरदार के लिए चुना गया है। फिल्म में राहिल उस दौर को दिखाएंगे जब शिवाजी महाराज ‘स्वराज्य’ का सपना बुन रहे थे। फिल्म में नजर आएंगे कई बड़े चेहरे ‘राजा शिवाजी’ में सिर्फ देशमुख परिवार ही नहीं, बल्कि फिल्म इंडस्ट्री के कई दिग्गज कलाकार भी शामिल हैं। फिल्म में संजय दत्त, विद्या बालन और अभिषेक बच्चन महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभा रहे हैं। रितेश ने बताया कि इस फिल्म को बनाने में उन्हें 10 साल का समय लगा। बीच में कोविड की वजह से काम रुक गया था, लेकिन अब यह फिल्म बड़े पर्दे पर आने के लिए तैयार है। इसे जियो स्टूडियोज और मुंबई फिल्म कंपनी ने मिलकर प्रोड्यूस किया है।
रतलाम में चलती कार में लगी आग, VIDEO:इंदौर से आ रहा था, आलोट-जावरा मार्ग पर हादसा; आगे का हिस्सा जलकर राख

रतलाम के आलोट में एक चलती कार में बुधवार दोपहर 4 बजे अचानक आग लग गई। ड्रायवर ने कार की बोनट से आग की लपटे देख तुरंत कार को रोड की साईड में लेकर खड़ा करते हुए बाहर निकल आया। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। आग के कारण कार का आधा हिस्सा जलकर राख हो गया। कार में आग लगने की घटना आलोट-जावरा सड़क मार्ग पर हुई। कार क्रमांक एमपी 13 सीई 2359 इंदौर की तरफ से आ रही थी। कार में केवल ड्रायवर ही सवार था। अचानक आग देख कार को साइड में कर रोक दिया। दोनों तरफ वाहनों को रोका इसके बाद आग की तेज लपटे शुरू हो गई। आग के कारण सड़क मार्ग से गुजर रहे वाहनों को दोनों तरफ रोकना पड़ा। आग की सूचना पर स्थानीय पुलिस व फायर लॉरी पहुंची। आग पर करीब आधे घंटे में काबू पाया। पुलिस आग के लगने का कारण तलाश रही है।
शिमला में लेंसकार्ट विवाद में हिंदू संघर्ष समिति का प्रदर्शन:स्टोर के भीतर हनुमान चालीसा का पाठ पढ़ा; कर्मचारियों को राखी बांध लगाया तिलक

आईवियर कंपनी लेंसकार्ट के ड्रेस कोड के खिलाफ हिंदू संघर्ष समिति ने आज (बुधवार को) शिमला के संजौली स्थित स्टोर में प्रदर्शन किया। इस दौरान स्टोर के भीतर बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ किया और लेंसकार्ट कंपनी के खिलाफ नारेबाजी की। शिमला में प्रदर्शनकारियों ने लेंसकार्ट स्टोर के सभी कर्मचारियों को राखी बांधी और तिलक लगाया। शिमला से पहले उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ इत्यादि राज्यों में लेंसकार्ट के खिलाफ प्रदर्शन हो चुके है। दरअसल, कुछ दिन पहले सोशल मीडिया पर कंपनी का एक पॉलिसी डॉक्यूमेंट वायरल हुआ था। इसमें कर्मचारियों को बिंदी, तिलक, कलावा और बुर्का पहनने पर रोक की बात थी। हिजाब और पगड़ी को कुछ शर्तों के साथ अनुमति दी गई थी। डॉक्यूमेंट वायरल होने के बाद भड़के लोग इस डॉक्यूमेंट के वायरल होने के बाद शिमला में भी हिंदू संघर्ष समिति के लोग भड़क उठे हैं। हालांकि, विवाद बढ़ने पर कंपनी के संस्थापक और सीईओ पियूष बंसल ने सफाई देते हुए कहा कि वायरल दस्तावेज़ “गलत” है और कंपनी की वर्तमान नीतियों को नहीं दर्शाता। हिंदू भावनाओं को आहत किया: विजय संघर्ष समिति के पदाधिकारी विजय ने कहा कि “कॉर्पोरेट जिहाद” के जरिए हिंदू भावनाओं को आहत किया जा रहा है और निवेश के दबाव में कंपनियां पक्षपातपूर्ण नीतियां अपना रही हैं। शिमला के संजौली में प्रदर्शन के फोटो..
बंगाल झालमुड़ी स्नैक रेसिपी: घर पर मिनटों में पीएम मोदी वाली बंगाल की झालमुरी, बच्चों से लेकर बड़े तक हो जाएं आपके फैन

झालमुरी पश्चिम बंगाल का एक बहुत ही लोकप्रिय स्ट्रीट फूड है। इसे मुरमुरे और चिप्स के साथ मिलाकर बनाया जाता है। इसमें कच्चे तेल के मसाले और मसालों का स्वाद बहुत काम आता है। छवि: एआई आवश्यक सामग्री: 2 कप मुरमुरे, 1 प्याज, 1 लाल आलू, 1 टमाटर, 2-3 हरी मिर्च, ½ कप भूरी मूंगफली, ½ काली मिर्च पाउडर, ½ काली मिर्च पाउडर, ½ काली मिर्च पाउडर, ½ काली मिर्च का मसाला, ½ काली मिर्च का मसाला, 1 काली मिर्च का तेल, धनिया, 1 मसाले का रस छवि: सोशल मीडिया सबसे पहले एक बड़ा बाउल लेन और इसमें मुरमुरे शामिल थे। अब इसमें टमाटर, टमाटर, आलू और हरी मिर्च डालें। इसके बाद मॉयुअल नोबेल से वॉल्व। छवि: सोशल मीडिया अब इसमें लाल मिर्च पाउडर, चाट मसाला और काला नमक डालें। ऊपर से हल्दी का तेल और नींबू का रस डालें। सभी बेकार को अच्छी तरह से करें। फाइनल में हरा धनिया मॉड्यूल तुरंत सर्व करें। छवि: एआई मुरमुरे के बाद तुरंत सर्व करें, अन्यथा ये प्राकृतिक हो जायेंगे। सरसों का तेल जरूर डालें, इससे असली बैलर का स्वाद आता है। आप यात्रा कर सकते हैं तो इसमें सेव या स्टेटस भी मिला सकते हैं। छवि: सोशल मीडिया झालमुरी न केवल स्वादिष्ट है, बल्कि रसायन भी है। इसमें ज्यादा तेल नहीं होता और यह असरदार होता है, जिसे आप भी कभी खा सकते हैं। शाम की चाय के साथ या बच्चों के टिफ़िन में। छवि: सोशल मीडिया अगर आप घर पर कुछ अलग और टेस्टी बनाना चाहते हैं, तो बंगाल की झालमुरी जरूर ट्राई कर सकते हैं। इसे बनाना बहुत ही आसान है, इसका स्वाद ही लाजवाब है। एक बार देखें, हर कोई आपका सितारा है। छवि: सोशल मीडिया छवि: सोशल मीडिया (टैग्सटूट्रांसलेट)बंगाली झालमुरी रेसिपी(टी)पीएम मोदी(टी)झालमुरी रेसिपी(टी)शाम के नाश्ते की रेसिपी(टी)मसालेदार स्नैक(टी)इंस्टेंट स्नैक रेसिपी(टी)हेल्दी स्नैक(टी)बच्चों के लिए झालमुड़ी रेसिपी(टी)बंगाली स्टाइल झालमुरी रेसिपी(टी)झालमुरी नमकीन
खरगोन में 40 पार तापमान, दोपहर में लू जैसे हालात:10 दिन से 40-41 डिग्री पारा, 70 लाख मिर्च पौधों को बचाने कर रहे स्प्रे

खरगोन में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर बना हुआ है, जिससे दोपहर 1 बजे के बाद लू जैसे हालात बन रहे हैं। भीषण गर्मी का असर जनजीवन के साथ खेती पर भी साफ दिखाई दे रहा है। गर्मी से बचाव के लिए किसान खेतों में मिर्च के पौधों पर पानी का स्प्रे कर रहे हैं और स्लाइडिंग नेट का उपयोग कर रहे हैं, ताकि तापमान को नियंत्रित रखा जा सके। बामखल के उन्नत किसान विजय यादव ने बताया कि वे पानी का छिड़काव कर करीब 70 लाख मिर्च के पौधों को बचाने का प्रयास कर रहे हैं। नेट हाउस में सुबह-शाम स्प्रे किया जा रहा है। मिर्च की फसल के लिए 20 से 27 डिग्री तापमान उपयुक्त होता है, जबकि वर्तमान में तापमान इससे कहीं अधिक है। स्लाइडिंग नेट करीब 50% तक गर्मी को रोकने में मदद कर रहे हैं। जिले में करीब 25 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में मिर्च की रोपाई होती है। यहां की मिर्च निमाड़-मालवा के साथ महाराष्ट्र के कई शहरों में भी भेजी जाती है। इसके लिए पहले से ऑर्डर बुक किए जाते हैं। पिछले 10 दिनों से 40-41 डिग्री तापमान पिछले 10 दिनों से जिले में तापमान 40 से 41 डिग्री के बीच बना हुआ है। पिछले दो दिनों से बादल छाने के कारण रात में भी उमस बढ़ गई है और न्यूनतम तापमान 22-23 डिग्री दर्ज किया गया है। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में मौसम साफ रहेगा और गर्मी और बढ़ सकती है। बढ़ती गर्मी को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने एडवाइजरी जारी की है। लोगों से अपील की गई है कि वे दोपहर में बिना टोपी या गमछे के धूप में बाहर न निकलें और पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें।
गर्मियों में डायरिया का अटैक! स्ट्रीट फूड ही नहीं, चॉकलेट भी बच्चों को कर रही बीमार, एक्सपर्ट से जानें

Last Updated:April 22, 2026, 17:30 IST Summer Health Tips: बदलता मौसम अपने साथ बीमारियों का खतरा लेकर आता है, जिसमें डायरिया सबसे ज्यादा पैर पसार रहा है. चिलचिलाती धूप और बिना मौसम की बारिश के बीच छोटे बच्चे तेजी से इसकी चपेट में आ रहे हैं. चौंकाने वाली बात यह है कि सिर्फ स्ट्रीट फूड ही नहीं, बल्कि बच्चों की पसंदीदा चॉकलेट भी इस गर्मी में उनके पेट को खराब कर रही है. डॉक्टरों के पास आने वाले मरीजों में 30 से 40 फीसदी मामले अकेले डायरिया के हैं. देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में इन दिनों मौसम के बदलते मिजाज ने लोगों की सेहत बिगाड़ दी है. कभी तेज धूप तो कभी अचानक होने वाली बारिश की वजह से बीमारियां बढ़ रही हैं, जिनमें डायरिया सबसे गंभीर समस्या बनकर उभरा है. खासकर छोटे बच्चों में उल्टी और दस्त की शिकायतें तेजी से बढ़ी हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि गर्मियों में खाना बहुत जल्दी खराब हो जाता है और उसमें मौजूद बैक्टीरिया शरीर में पहुंचते ही पेट दर्द और लूज मोशन जैसी परेशानियां खड़ी कर देते हैं.देहरादून के आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. सिराज सिद्दीकी के अनुसार, उनके पास आने वाले मरीजों में लगभग 30 से 40 प्रतिशत मामले डायरिया के ही आ रहे हैं. उन्होंने बच्चों की सेहत से जुड़ी कुछ ऐसी बातें बताई हैं, जिन्हें नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है. चॉकलेट भी बन रही है डायरिया की वजहआमतौर पर माता-पिता को लगता है कि बाहर का खाना या गंदा पानी ही बच्चों को बीमार करता है, लेकिन डॉक्टर ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है. उन्होंने बताया कि गर्मियों में ज्यादा तापमान होने की वजह से चॉकलेट बहुत जल्दी खराब हो जाती है और अंदर ही अंदर सड़ने लगती है. इसमें पनपने वाले बैक्टीरिया ही बच्चों में डायरिया और फूड पॉइजनिंग का मुख्य कारण बन रहे हैं. यही वजह है कि देहरादून के अस्पतालों में पहुंचने वाले ज्यादातर बच्चों में इस तरह की शिकायतें देखने को मिल रही हैं. इसलिए गर्मियों के दिनों में बच्चों को ज्यादा चॉकलेट देने से परहेज करना चाहिए. स्ट्रीट फूड और मोमोज की चटनी से रहें सावधानदेहरादून के हर कोने में मिलने वाले स्ट्रीट फूड बच्चों और युवाओं की पहली पसंद हैं, लेकिन यही उनकी सेहत के दुश्मन बन रहे हैं. डॉ. सिद्दीकी ने बताया कि मोमोज के साथ दी जाने वाली तीखी चटनी में बैक्टीरिया बहुत जल्दी पनपते हैं जो सीधे पेट पर हमला करते हैं. इसके अलावा, ज्यादातर फास्ट फूड मैदे से तैयार किए जाते हैं जो हमारे मेटाबॉलिज्म को कमजोर करने के साथ ही लीवर पर भी बुरा असर डालते हैं. जब शरीर का पाचन तंत्र कमजोर होता है, तो बीमारियां बहुत जल्दी शरीर को अपनी चपेट में ले लेती हैं. बेमौसम बारिश और दूषित पानी का खतराडॉक्टर के मुताबिक, इन दिनों होने वाली बिना मौसम की बारिश प्राकृतिक रूप से शुद्ध नहीं होती है. इसमें मौजूद टॉक्सिन्स यानी जहरीले तत्व पानी के साथ मिलकर उसे दूषित कर देते हैं. हालांकि सरकार पानी को फिल्टर करके सप्लाई करती है, लेकिन उन प्लांट्स की भी अपनी एक सीमा होती है. अगर पीने के पानी में किसी भी तरह के माइक्रोप्स रह जाते हैं, तो डायरिया होने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है. ऐसे में पानी की शुद्धता को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है. लापरवाही पड़ सकती है भारीउल्टी और दस्त होने से शरीर में पानी की कमी हो जाती है और मरीज बहुत ज्यादा कमजोरी महसूस करने लगता है. वैसे तो इलाज करवाने पर मरीज जल्दी ठीक हो जाता है, लेकिन अगर शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर लापरवाही बरती गई, तो यह स्थिति मरीज के लिए जानलेवा भी हो सकती है. बच्चों के मामले में यह और भी संवेदनशील हो जाता है क्योंकि उनका इम्यून सिस्टम वयस्कों के मुकाबले कमजोर होता है. इसलिए बचाव के लिए घर में बनी ताजी चीजें ही खिलाएं और पानी हमेशा अच्छी तरह फिल्टर किया हुआ ही इस्तेमाल करें. About the Author Seema Nath सीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम किया है. वर्तमान में मैं News18 (नेटवर्क18) के साथ जुड़ी हूं, जहां मै…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : Dehradun,Uttarakhand First Published : April 22, 2026, 17:30 IST






