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हिमाचल में 4000 फीट ऊंचाई पर उगती ये बूटी, पेट खराब हो या बावासीर…चुटकियों में आराम

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Kachnar Benefits Piles Stomach : हिमाचल प्रदेश के मंडी में कई ऐसी प्राकृतिक जड़ी-बूटियां अपने आप उगती हैं जो सेहत के लिए वरदान हैं. कचनार उन्हीं में से एक है. इसे स्थानीय भाषा में करैडे भी कहते हैं. इसे सब्जी बनाकर खाया जाता है, जो कई बीमारियों का अकेला इलाज है. मंडी के आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. ओम राज शर्मा लोकल 18 से बताते हैं कि कचनार एक ऐसी दवा है, जो प्राकृतिक रूप से हिमालयन जंगलों में उपलब्ध है. इसकी मदद से बवासीर से लेकर खराब पेट और सिर से लेकर दांतों के दर्द को ठीक किया जा सकता है. इसे गर्मियों में खाना ज्यादा लाभकारी है. कचनार की एक चम्मच छाल को एक कप मट्ठा (छाछ) के साथ दिन में 3 बार सेवन करने से बवासीर में खून गिरना बंद हो जाता है.

हिमाचल की एक विशेषता यह भी है कि यहां विभिन्न प्रकार की दिव्य औषधियां प्राकृतिक रूप से उत्पन्न होती हैं, जिन्हें ऋतु और आवश्यकता के अनुसार उपयोग में लाया जाता है. इस समय कचनार/करैड़े की बहार देखने को मिल रही है, जो विशेष रूप से पहाड़ी क्षेत्रों में 4000 फीट की ऊंचाई तक पाया जाता है.

कचनार

कचनार के फूल सफेद, बैंगनी और गुलाबी रंगों में खिलते हैं, जो न केवल देखने में आकर्षक होते हैं बल्कि औषधीय गुणों से भी भरपूर हैं. आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. ओम राज शर्मा का कहना है कि इसकी छाल (त्वचा) और पुष्प विशेष रूप से उपयोग में लाए जाते हैं.

कचनार

इसके फूलों से तैयार किया गया गुलकंद या सब्जी कब्ज जैसी समस्या में लाभकारी है. इसके फूलों के रस (स्वरस) की मात्रा सामान्यतः 10 से 20 मिली तक उपयोग की जाती है. पहाड़ी क्षेत्रों में कचनार के फूलों के ‘बड़े-भल्ले’ और इसकी कलियों का रायता बड़े चाव से खाया जाता है, जो स्वाद और स्वास्थ्य दोनों के लिए लाभदायक है. आयुर्वेदिक दृष्टि से कचनार के प्रयोग से चर्म रोग, कृमि, रक्त संबंधी विकार, रक्तस्त्राव तथा खांसी जैसी समस्याओं से भी निजात मिलती है.

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कचनार:

कचनार की जड़ को पानी में घिसकर लेप बनाकर और इसे गर्म करके लेप को सूजन पर लगाने से आराम मिलता है. मुंह में छाले होने पर कचनार की छाल का काढ़ा बनाकर उसमें थोड़ा-सा कत्था मिलाकर लगाने से आराम मिलता है.

कचनार

कचनार की एक चम्मच छाल को एक कप मट्ठा (छाछ) के साथ दिन में 3 बार सेवन करने से बवासीर में खून गिरना बंद हो जाता है. कचनार की कलियों के पाउडर को मक्खन और शक्कर मिलाकर 11 दिन तक खाने ये बीमारी ठीक हो सकती है.

कचनार

कचनार की फूल की कलियां घी में भूनकर सुबह-शाम खाने से भूख बढ़ती है. गैस होने पर कचनार की छाल का काढ़ा बनाकर, इसके 20 मिलीलीटर काढ़ा में आधा चम्मच पिसी हुई अजवायन मिलाकर प्रयोग करने से लाभ मिलता है. सुबह-शाम भोजन करने बाद इसका सेवन करने से अफरा (पेट फूलना) और गैस की तकलीफ दूर होती है.

कचनार

दांतों के दर्द से राहत के लिए भी कचनार का उपयोग किया जाता है. इसके पेड़ की छाल को आग में जलाकर उसकी राख को बारीक पीसकर मंजन बना लें. इस मंजन को सुबह और रात में करने से दांतों का दर्द और मसूड़ों से खून निकलना बंद हो जाता है.

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हिमाचल की एक विशेषता यह भी है कि यहां विभिन्न प्रकार की दिव्य औषधियां प्राकृतिक रूप से उत्पन्न होती हैं, जिन्हें ऋतु और आवश्यकता के अनुसार उपयोग में लाया जाता है. इस समय कचनार/करैड़े की बहार देखने को मिल रही है, जो विशेष रूप से पहाड़ी क्षेत्रों में 4000 फीट की ऊंचाई तक पाया जाता है.

कचनार

कचनार के फूल सफेद, बैंगनी और गुलाबी रंगों में खिलते हैं, जो न केवल देखने में आकर्षक होते हैं बल्कि औषधीय गुणों से भी भरपूर हैं. आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. ओम राज शर्मा का कहना है कि इसकी छाल (त्वचा) और पुष्प विशेष रूप से उपयोग में लाए जाते हैं.

कचनार

इसके फूलों से तैयार किया गया गुलकंद या सब्जी कब्ज जैसी समस्या में लाभकारी है. इसके फूलों के रस (स्वरस) की मात्रा सामान्यतः 10 से 20 मिली तक उपयोग की जाती है. पहाड़ी क्षेत्रों में कचनार के फूलों के ‘बड़े-भल्ले’ और इसकी कलियों का रायता बड़े चाव से खाया जाता है, जो स्वाद और स्वास्थ्य दोनों के लिए लाभदायक है. आयुर्वेदिक दृष्टि से कचनार के प्रयोग से चर्म रोग, कृमि, रक्त संबंधी विकार, रक्तस्त्राव तथा खांसी जैसी समस्याओं से भी निजात मिलती है.

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कचनार

कचनार की एक चम्मच छाल को एक कप मट्ठा (छाछ) के साथ दिन में 3 बार सेवन करने से बवासीर में खून गिरना बंद हो जाता है. कचनार की कलियों के पाउडर को मक्खन और शक्कर मिलाकर 11 दिन तक खाने ये बीमारी ठीक हो सकती है.

कचनार

कचनार की फूल की कलियां घी में भूनकर सुबह-शाम खाने से भूख बढ़ती है. गैस होने पर कचनार की छाल का काढ़ा बनाकर, इसके 20 मिलीलीटर काढ़ा में आधा चम्मच पिसी हुई अजवायन मिलाकर प्रयोग करने से लाभ मिलता है. सुबह-शाम भोजन करने बाद इसका सेवन करने से अफरा (पेट फूलना) और गैस की तकलीफ दूर होती है.

कचनार

दांतों के दर्द से राहत के लिए भी कचनार का उपयोग किया जाता है. इसके पेड़ की छाल को आग में जलाकर उसकी राख को बारीक पीसकर मंजन बना लें. इस मंजन को सुबह और रात में करने से दांतों का दर्द और मसूड़ों से खून निकलना बंद हो जाता है.

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