Wednesday, 22 Apr 2026 | 08:07 PM

Trending :

अनूपपुर में खड़ी इलेक्ट्रिक स्कूटी की बैटरी फटी:घर में रखा फ्रिज-वाशिंग मशीन समेत लाखों का सामान जला; परिजनों ने बाहर निकलकर जान बचाई ऑनलाइन गेमिंग के नए नियम 1-मई से लागू होंगे:गेमिंग-सर्टिफिकेट अब 10 साल तक वैलिड रहेगा; बिना पैसे वाले गेम्स को रजिस्ट्रेशन से छूट ऑनलाइन गेमिंग के नए नियम 1-मई से लागू होंगे:गेमिंग-सर्टिफिकेट अब 10 साल तक वैलिड रहेगा; बिना पैसे वाले गेम्स को रजिस्ट्रेशन से छूट छतरपुर में एक साथ 6 जगह लगी आग:फायर ब्रिगेड खराब होने से काबू पाने में देरी, टैंकर बुलाकर बाल्टी से पानी डालाकर बुझाई खेल मंत्री रेखा आर्या बोलीं-:2036 के ओलंपिक और कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए अभी से जुटें युवा, पदक लाने वालों को मिलेगी सरकारी नौकरी नीमच में अतिक्रमण हटाने के बाद बुजुर्ग की मौत:झोपड़ी में लगी आग. परिजनों ने पुलिस पर मारपीट का आरोप
EXCLUSIVE

हिमाचल में 4000 फीट ऊंचाई पर उगती ये बूटी, पेट खराब हो या बावासीर…चुटकियों में आराम

ask search icon

Last Updated:

Kachnar Benefits Piles Stomach : हिमाचल प्रदेश के मंडी में कई ऐसी प्राकृतिक जड़ी-बूटियां अपने आप उगती हैं जो सेहत के लिए वरदान हैं. कचनार उन्हीं में से एक है. इसे स्थानीय भाषा में करैडे भी कहते हैं. इसे सब्जी बनाकर खाया जाता है, जो कई बीमारियों का अकेला इलाज है. मंडी के आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. ओम राज शर्मा लोकल 18 से बताते हैं कि कचनार एक ऐसी दवा है, जो प्राकृतिक रूप से हिमालयन जंगलों में उपलब्ध है. इसकी मदद से बवासीर से लेकर खराब पेट और सिर से लेकर दांतों के दर्द को ठीक किया जा सकता है. इसे गर्मियों में खाना ज्यादा लाभकारी है. कचनार की एक चम्मच छाल को एक कप मट्ठा (छाछ) के साथ दिन में 3 बार सेवन करने से बवासीर में खून गिरना बंद हो जाता है.

हिमाचल की एक विशेषता यह भी है कि यहां विभिन्न प्रकार की दिव्य औषधियां प्राकृतिक रूप से उत्पन्न होती हैं, जिन्हें ऋतु और आवश्यकता के अनुसार उपयोग में लाया जाता है. इस समय कचनार/करैड़े की बहार देखने को मिल रही है, जो विशेष रूप से पहाड़ी क्षेत्रों में 4000 फीट की ऊंचाई तक पाया जाता है.

कचनार

कचनार के फूल सफेद, बैंगनी और गुलाबी रंगों में खिलते हैं, जो न केवल देखने में आकर्षक होते हैं बल्कि औषधीय गुणों से भी भरपूर हैं. आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. ओम राज शर्मा का कहना है कि इसकी छाल (त्वचा) और पुष्प विशेष रूप से उपयोग में लाए जाते हैं.

कचनार

इसके फूलों से तैयार किया गया गुलकंद या सब्जी कब्ज जैसी समस्या में लाभकारी है. इसके फूलों के रस (स्वरस) की मात्रा सामान्यतः 10 से 20 मिली तक उपयोग की जाती है. पहाड़ी क्षेत्रों में कचनार के फूलों के ‘बड़े-भल्ले’ और इसकी कलियों का रायता बड़े चाव से खाया जाता है, जो स्वाद और स्वास्थ्य दोनों के लिए लाभदायक है. आयुर्वेदिक दृष्टि से कचनार के प्रयोग से चर्म रोग, कृमि, रक्त संबंधी विकार, रक्तस्त्राव तथा खांसी जैसी समस्याओं से भी निजात मिलती है.

Add News18 as
Preferred Source on Google

कचनार:

कचनार की जड़ को पानी में घिसकर लेप बनाकर और इसे गर्म करके लेप को सूजन पर लगाने से आराम मिलता है. मुंह में छाले होने पर कचनार की छाल का काढ़ा बनाकर उसमें थोड़ा-सा कत्था मिलाकर लगाने से आराम मिलता है.

कचनार

कचनार की एक चम्मच छाल को एक कप मट्ठा (छाछ) के साथ दिन में 3 बार सेवन करने से बवासीर में खून गिरना बंद हो जाता है. कचनार की कलियों के पाउडर को मक्खन और शक्कर मिलाकर 11 दिन तक खाने ये बीमारी ठीक हो सकती है.

कचनार

कचनार की फूल की कलियां घी में भूनकर सुबह-शाम खाने से भूख बढ़ती है. गैस होने पर कचनार की छाल का काढ़ा बनाकर, इसके 20 मिलीलीटर काढ़ा में आधा चम्मच पिसी हुई अजवायन मिलाकर प्रयोग करने से लाभ मिलता है. सुबह-शाम भोजन करने बाद इसका सेवन करने से अफरा (पेट फूलना) और गैस की तकलीफ दूर होती है.

कचनार

दांतों के दर्द से राहत के लिए भी कचनार का उपयोग किया जाता है. इसके पेड़ की छाल को आग में जलाकर उसकी राख को बारीक पीसकर मंजन बना लें. इस मंजन को सुबह और रात में करने से दांतों का दर्द और मसूड़ों से खून निकलना बंद हो जाता है.

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
PM मोदी ने AI इम्पैक्ट समिट का उद्घाटन किया:जियो इंटेलिजेंस जैसे AI मॉडल्स को जाना, 300 से ज्यादा कंपनियों ने पेश किए इनोवेशंस

February 16, 2026/
4:00 am

भारत में आज 16 फरवरी से दुनिया के सबसे बड़े टेक्नोलॉजी इवेंट में से एक ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026’...

GE Aerospace & HAL Deal Complete; Tejas Fleet Strength Boost

April 14, 2026/
9:34 pm

नई दिल्ली22 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिकी डिफेंस कंपनी GE एयरोस्पेस और भारत की सरकारी कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL)...

मखाने की सब्जी रेसिपी: अचानक मेहमानों के पास जाएं तो सिर्फ 15 मिनट में बनाएं मखाने की ये लजीज सब्जी, हर कोई पूछेगा बनाने का राज; नोट करें आसान रेसिपी

March 22, 2026/
5:16 pm

22 मार्च 2026 को 17:16 IST पर अपडेट किया गया मखाने की सब्जी रेसिपी: अगर आपके घर मेहमान आए तो...

आयरलैंड में सेंट पैट्रिक्स डे की धूम:हरे रंग में रंगी राजधानी डबलिन, 5 लाख पर्यटक पहुंचे

March 18, 2026/
6:11 pm

आयरलैंड के सबसे बड़े नेशनल फेस्टिवल ‘सेंट पैट्रिक्स डे’ के मौके पर राजधानी डबलिन में चार दिनों से जश्न का...

पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: हैशटैग की जंग में बीजेपी बनाम टीएमसी का खुलासा- खुलासा, सोशल मीडिया पर 'डिजिटल महाभारत', नया चुनावी हथियार

March 19, 2026/
3:22 pm

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले राजनीति का सबसे बड़ा क्षेत्र अब मैदान या मंच नहीं, बल्कि सोशल मीडिया...

GT vs KKR Live Score, IPL 2026, Playing 11 Today Match Updates: Follow live action here.(Creimas Photo)

April 17, 2026/
6:13 pm

आखरी अपडेट:17 अप्रैल, 2026, 18:13 IST कांग्रेस ने ऐतिहासिक रूप से इन दावों को पुनर्चक्रित ‘राजनीतिक प्रतिशोध’ के रूप में...

नीतीश कुमार ने MLC पद से दिया इस्तीफा:विजय चौधरी लेकर विधान परिषद पहुंचे; नितिन नवीन ने प्रदेश अध्यक्ष के जरिए भेजवाया इस्तीफा

March 30, 2026/
5:14 am

बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने बिहार विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उनका इस्तीफा लेकर विजय...

राजनीति

हिमाचल में 4000 फीट ऊंचाई पर उगती ये बूटी, पेट खराब हो या बावासीर…चुटकियों में आराम

ask search icon

Last Updated:

Kachnar Benefits Piles Stomach : हिमाचल प्रदेश के मंडी में कई ऐसी प्राकृतिक जड़ी-बूटियां अपने आप उगती हैं जो सेहत के लिए वरदान हैं. कचनार उन्हीं में से एक है. इसे स्थानीय भाषा में करैडे भी कहते हैं. इसे सब्जी बनाकर खाया जाता है, जो कई बीमारियों का अकेला इलाज है. मंडी के आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. ओम राज शर्मा लोकल 18 से बताते हैं कि कचनार एक ऐसी दवा है, जो प्राकृतिक रूप से हिमालयन जंगलों में उपलब्ध है. इसकी मदद से बवासीर से लेकर खराब पेट और सिर से लेकर दांतों के दर्द को ठीक किया जा सकता है. इसे गर्मियों में खाना ज्यादा लाभकारी है. कचनार की एक चम्मच छाल को एक कप मट्ठा (छाछ) के साथ दिन में 3 बार सेवन करने से बवासीर में खून गिरना बंद हो जाता है.

हिमाचल की एक विशेषता यह भी है कि यहां विभिन्न प्रकार की दिव्य औषधियां प्राकृतिक रूप से उत्पन्न होती हैं, जिन्हें ऋतु और आवश्यकता के अनुसार उपयोग में लाया जाता है. इस समय कचनार/करैड़े की बहार देखने को मिल रही है, जो विशेष रूप से पहाड़ी क्षेत्रों में 4000 फीट की ऊंचाई तक पाया जाता है.

कचनार

कचनार के फूल सफेद, बैंगनी और गुलाबी रंगों में खिलते हैं, जो न केवल देखने में आकर्षक होते हैं बल्कि औषधीय गुणों से भी भरपूर हैं. आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. ओम राज शर्मा का कहना है कि इसकी छाल (त्वचा) और पुष्प विशेष रूप से उपयोग में लाए जाते हैं.

कचनार

इसके फूलों से तैयार किया गया गुलकंद या सब्जी कब्ज जैसी समस्या में लाभकारी है. इसके फूलों के रस (स्वरस) की मात्रा सामान्यतः 10 से 20 मिली तक उपयोग की जाती है. पहाड़ी क्षेत्रों में कचनार के फूलों के ‘बड़े-भल्ले’ और इसकी कलियों का रायता बड़े चाव से खाया जाता है, जो स्वाद और स्वास्थ्य दोनों के लिए लाभदायक है. आयुर्वेदिक दृष्टि से कचनार के प्रयोग से चर्म रोग, कृमि, रक्त संबंधी विकार, रक्तस्त्राव तथा खांसी जैसी समस्याओं से भी निजात मिलती है.

Add News18 as
Preferred Source on Google

कचनार:

कचनार की जड़ को पानी में घिसकर लेप बनाकर और इसे गर्म करके लेप को सूजन पर लगाने से आराम मिलता है. मुंह में छाले होने पर कचनार की छाल का काढ़ा बनाकर उसमें थोड़ा-सा कत्था मिलाकर लगाने से आराम मिलता है.

कचनार

कचनार की एक चम्मच छाल को एक कप मट्ठा (छाछ) के साथ दिन में 3 बार सेवन करने से बवासीर में खून गिरना बंद हो जाता है. कचनार की कलियों के पाउडर को मक्खन और शक्कर मिलाकर 11 दिन तक खाने ये बीमारी ठीक हो सकती है.

कचनार

कचनार की फूल की कलियां घी में भूनकर सुबह-शाम खाने से भूख बढ़ती है. गैस होने पर कचनार की छाल का काढ़ा बनाकर, इसके 20 मिलीलीटर काढ़ा में आधा चम्मच पिसी हुई अजवायन मिलाकर प्रयोग करने से लाभ मिलता है. सुबह-शाम भोजन करने बाद इसका सेवन करने से अफरा (पेट फूलना) और गैस की तकलीफ दूर होती है.

कचनार

दांतों के दर्द से राहत के लिए भी कचनार का उपयोग किया जाता है. इसके पेड़ की छाल को आग में जलाकर उसकी राख को बारीक पीसकर मंजन बना लें. इस मंजन को सुबह और रात में करने से दांतों का दर्द और मसूड़ों से खून निकलना बंद हो जाता है.

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.