Tuesday, 20 Oct 2026 | 04:25 PM

Trending :

EXCLUSIVE

उज्जैन में गैस एजेंसी संचालक और उपभोक्ता के बीच मारपीट:सिलेंडर नहीं मिलने से नाराज उपभोक्ताओं ने किया चक्काजाम, पुलिस ने वितरित कराए

उज्जैन में गैस एजेंसी संचालक और उपभोक्ता के बीच मारपीट:सिलेंडर नहीं मिलने से नाराज उपभोक्ताओं ने किया चक्काजाम, पुलिस ने वितरित कराए

उज्जैन में अभी भी एलपीजी की किल्लत बनी हुई है। इससे परेशान उपभोक्ताओं का मंगलवार को गुस्सा फूट पड़ा। इस दौरान गैस एजेंसी के संचालक और उपभोक्ता के बीच मारपीट हो गई। हालात इतने बिगड़े कि नई सड़क स्थित बिजली घर के पास उपभोक्ताओं ने चक्काजाम कर दिया। हालांकि मौके पर पहुंची पुलिस ने लोगों को समझाकर जाम खुलवाया और फिर पुलिस की निगरानी में गैस सिलेंडर का वितरण हुआ। शहर में गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं। इससे आपूर्ति व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। बहादुरगंज स्थित शिप्रा गैस एजेंसी पर एक उपभोक्ता और एजेंसी के संचालक के बीच मारपीट हो गई। इसके बाद लोगों ने अपने-अपने गैस सिलेंडर सड़क पर रखकर चक्का जाम कर दिया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है। पुलिस की निगरानी में बंटे सिलेंडर चक्काजाम करने से कुछ देर तक यातायात प्रभावित रहा। मारपीट की सूचना पर पुलिस पहुंची और लोगों को समझाकर मामले को शांत कराया। इसके बाद पुलिस की मौजूदगी में सिलेंडर के नंबर लगाने का काम शुरू किया गया। इस दौरान भी कई लोग विवाद करते नजर आए। एक महीने से चक्कर लगा रहे एटलस चौराहा निवासी आशिया खान ने बताया कि एक महीने से चक्कर लगा रही हूं टंकी नहीं मिल रही है। सोमवार को आई थी तो धक्का देकर बाहर निकला दिया। मकान मालिक चूल्हा नहीं जलाने दे रहे हैं। सिलेंडर नहीं मिलने से परेशान हैं। एजेंसी संचालक मारपीट कर रहे हैं। शहर से 25 किमी दूर रहने वाले किशोर दिव्यांग हैं। उन्होंने बताया कि अपना काम छोड़कर रोजाना लाइन में लग रहा हूं। एक माह से ऊपर हो चुका है अब तक सिलेंडर नहीं मिल पाया है। आरोप-एजेंसी पर बाउंसर लगाए उपभोक्ताओं ने आरोप लगाए कि गैस एजेंसी संचालक ग्राहकों के साथ मारपीट कर रहे हैं। लोगों ने इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल भी कर दिया, जिसमें एजेंसी संचालक के साथ दो अन्य लोग भिड़ते हुए नजर आ रहे हैं। लोगों ने आरोप लगाया कि एजेंसी पर बाउंसर तैनात किए गए हैं, जो ग्राहकों के साथ अभद्रता और डराते-धमकाते हैं। एजेंसी का लाइसेंस निरस्त करने की मांग प्रदर्शनकारियों ने जिला प्रशासन और आपूर्ति विभाग से तत्काल कार्रवाई की मांग करते हुए शिप्रा गैस एजेंसी का लाइसेंस निरस्त करने की मांग की है।

कांग्रेस का पीएम के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस:आरोप- राष्ट्र के नाम संबोधन में विपक्षी सांसदों के वोट पर सवाल उठाए, कार्रवाई की मांग

कांग्रेस ने पीएम के खिलाफ विशेषाधिकार हनन नोटिस का दिया:लोकसभा स्पीकर को लिखा लेटर; कहा- सांसदों के वोट पर टिप्पणी नियमों के खिलाफ

कांग्रेस ने पीएम नरेंद्र मोदी के खिलाफ लोकसभा में विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया है। पार्टी महासचिव केसी वेणुगोपाल ने मंगलवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को लेटर लिखकर कहा कि पीएम ने ‘राष्ट्र के नाम संबोधन’ में विपक्षी सांसदों के वोट और उनके इरादों पर सवाल उठाए थे। यह नियमों के खिलाफ है। वेणुगोपाल ने लिखा कि पीएम ने करीब 29 मिनट के संबोधन में विपक्षी दलों पर महिला आरक्षण बिल रोकने का आरोप लगाया। सांसदों के वोटिंग पैटर्न पर सवाल उठाए। उनके फैसलों के पीछे की मंशा पर भी टिप्पणी की। कांग्रेस सांसद ने मांग की है कि इस मामले को लोकसभा की विशेषाधिकार समिति को भेजा जाए और प्रधानमंत्री के खिलाफ कार्रवाई शुरू की जाए। स्पीकर को लिखे लेटर की चार मुख्य बातें… जयराम रमेश बोले- पीएम ने कांग्रेस पर 59 बार टारगेट किया कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि प्रधानमंत्री का राष्ट्र के नाम संबोधन आमतौर पर देश को जोड़ने और भरोसा बढ़ाने के लिए होता है। इस बार संबोधन में खुलकर राजनीतिक बात हुई। कांग्रेस पर 59 बार निशाना साधा गया। इसे प्रधानमंत्री के रिकॉर्ड पर एक और दाग माना जाएगा। PM ने कहा था- विपक्ष ने आधी आबादी का अधिकार छीना, उन्हें इस पाप की सजा मिलेगी पीएम नरेंद्र मोदी ने 18 अप्रैल को देश को संबोधित किया था। उन्होंने कहा था कि कांग्रेस, टीएमसी, डीएमके जैसे विपक्षी दल इस भ्रूणहत्या के गुनहगार हैं। ये देश के संविधान के अपराधी हैं। नारी शक्ति के अपराधी हैं। जिन लोगों ने आधी आबादी का अधिकार छीना, उन्हें इस पाप की सजा मिलेगी। दरअसल, लोकसभा में 17 अप्रैल को महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान (131वां संशोधन) बिल पास नहीं हो सका था। बिल में लोकसभा सीटें 543 से बढ़ाकर 816 करने का प्रस्ताव था। बिल के पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े, जबकि इसे पास करने के लिए 352 वोटों की जरूरत थी। क्या है विशेषाधिकार हनन? संसद के सांसदों और समितियों को कुछ खास अधिकार दिए जाते हैं, ताकि वे बिना दबाव के अपना काम कर सकें। अगर कोई सांसद या कोई बाहरी व्यक्ति इन अधिकारों में दखल देता है या उन्हें नुकसान पहुंचाता है, तो इसे विशेषाधिकार हनन माना जाता है। ऐसे मामले में कोई भी सांसद सदन में प्रस्ताव ला सकता है और कार्रवाई की मांग कर सकता है। ———————————– ये खबर भी पढ़ें… लोकसभा सीटें बढ़ाने का बिल 54 वोट से गिरा:पास होने के लिए चाहिए थे 352, मिले 298; मोदी सरकार बिल पास कराने में पहली बार नाकाम लोकसभा में सीटें बढ़ाने के लिए लाया गया संविधान का 131वां संशोधन बिल सरकार लोकसभा में पास नहीं करा पाई। इसमें संसद की 543 सीटें बढ़ाकर 850 करने का प्रावधान था। लोकसभा में बिल पर 21 घंटे की चर्चा के बाद वोटिंग हुई। उपस्थित 528 सांसदों ने वोट डाले। पक्ष में 298, विपक्ष में 230 वोट पड़े। पूरी खबर पढ़ें…

गर्मी में गन्ने का रस या नींबू पानी, क्या पीना है सेहत के लिये ज्यादा फायदेमंद?

गर्मी में स्किन हो जा रही टैनिंग, घर पर तैयार करें हर्बल फेस पैक्स

गर्मी का मौसम आते ही शरीर को ठंडा और हाइड्रेट रखना सबसे बड़ी जरूरत बन जाता है. ऐसे में सबसे ज्यादा लोग गन्ने का रस और नींबू पानी का सहारा लेते हैं. दोनों ही पेय गर्मी में बेहद लोकप्रिय हैं, लेकिन सवाल यह है कि सेहत के लिहाज से इनमें से क्या ज्यादा बेहतर है? आइए दोनों की तुलना विस्तार से समझते हैं. गन्ने का रस: फायदे और नुकसानगन्ने का रस प्राकृतिक मिठास और ऊर्जा का बेहतरीन स्रोत माना जाता है. फायदे:यह शरीर को तुरंत ऊर्जा देता है, क्योंकि इसमें प्राकृतिक शुगर होती है.लू लगने से बचाता है और शरीर को ठंडक देता है.आयरन, पोटैशियम, कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे मिनरल्स से भरपूर होता है.लीवर के लिए फायदेमंद माना जाता है और पीलिया में भी सहायक हो सकता है.थकान और कमजोरी जल्दी दूर करता है. नुकसान:बाजार में मिलने वाला गन्ने का रस कई बार अस्वच्छ पानी या गंदे बर्तनों में बनाया जाता है, जिससे संक्रमण का खतरा रहता है.एक गिलास गन्ने के रस में शुगर की मात्रा ज्यादा होती है, जो डायबिटीज वालों के लिए नुकसानदायक हो सकती है.अधिक मात्रा में पीने से वजन बढ़ने की संभावना रहती है. नींबू पानी: फायदे और सीमाएंनींबू पानी गर्मी में सबसे ज्यादा भरोसेमंद और हल्का पेय माना जाता है. फायदे:शरीर में पानी की कमी पूरी करता है और डिहाइड्रेशन से बचाता है.विटामिन C से भरपूर होने के कारण इम्युनिटी बढ़ाता है.पाचन तंत्र को सुधारता है और पेट को हल्का रखता है.कम कैलोरी वाला पेय है, वजन नियंत्रित रखने में सहायक.घर पर आसानी से स्वच्छ तरीके से बनाया जा सकता है. सीमाएं:इससे उतनी तुरंत ऊर्जा नहीं मिलती जितनी गन्ने के रस से.ज्यादा खट्टा या ज्यादा नमक‑चीनी डालने से पेट में जलन हो सकती है. कौन‑सा पीना है बेहतर?अगर आप तुरंत ऊर्जा चाहते हैं, बहुत ज्यादा थकान महसूस कर रहे हैं या बाहर ज्यादा काम करते हैं, तो सीमित मात्रा में गन्ने का रस फायदेमंद हो सकता है.लेकिन अगर आप डेली हाइड्रेशन, हल्का पाचन और सुरक्षित विकल्प चाहते हैं, खासकर वजन या शुगर का ध्यान रखते हैं, तो आपके लिये नींबू पानी बेहतर विकल्प है. गर्मी में दोनों पेय अपने‑अपने फायदे रखते हैं. सही विकल्प आपकी सेहत, जरूरत और मात्रा पर निर्भर करता है. सबसे अच्छा तरीका यह है कि नींबू पानी रोजमर्रा में पिएं और गन्ने के रस का सेवन कभी‑कभार, साफ‑सफाई का ध्यान रखते हुए करें, संतुलन ही गर्मी में स्वस्थ रहने की कुंजी है.

आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए ठोस नीति की मांग:आगर मालवा में भारतीय मजदूर संघ ने वेतन, सुरक्षा और श्रम अधिकारों को लेकर रखी 17 सूत्रीय मांग

आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए ठोस नीति की मांग:आगर मालवा में भारतीय मजदूर संघ ने वेतन, सुरक्षा और श्रम अधिकारों को लेकर रखी 17 सूत्रीय मांग

आगर मालवा में भारतीय मजदूर संघ की जिला इकाई ने मंगलवार को आउटसोर्स और ठेका कर्मचारियों की समस्याओं को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नाम 17 सूत्रीय मांगपत्र सौंपा। संघ के पदाधिकारियों ने कंपनी गार्डन से रैली निकालकर कलेक्ट्रेट पहुंचकर एसएलआर प्रीति चौहान को ज्ञापन दिया। सामाजिक सुरक्षा और वेतन को लेकर उठाए सवाल ज्ञापन में कहा गया है कि प्रदेश में बड़ी संख्या में आउटसोर्स कर्मचारी विभिन्न विभागों, उद्योगों और संस्थानों में कार्यरत हैं, लेकिन उन्हें सामाजिक सुरक्षा, उचित वेतन और श्रम कानूनों का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। संघ ने ‘आउटसोर्स सर्विस सिक्योरिटी एक्ट’ या निगम मंडल के गठन की मांग की है। ओवरटाइम, समय पर वेतन और सीधा भुगतान की मांग संघ ने मांग रखी कि 8 घंटे से अधिक कार्य पर ओवरटाइम दिया जाए और हर माह की 7 तारीख तक वेतन का भुगतान सुनिश्चित किया जाए। साथ ही वेतन पर्ची उपलब्ध कराने और बिचौलिया प्रथा समाप्त कर सीधे विभाग से भुगतान की व्यवस्था करने की बात कही गई। ज्ञापन में अनुभव के आधार पर वेतन वृद्धि, संविदा या नियमित भर्ती में प्राथमिकता, बिना जांच के सेवा समाप्ति पर रोक और शिकायतों की उच्च स्तरीय जांच की मांग भी शामिल है। ईएसआई, ईपीएफ और बीमा कवर की मांग संघ ने ईएसआई, ईपीएफ, 20 लाख रुपये का दुर्घटना बीमा, समान कार्य के लिए समान वेतन और साप्ताहिक अवकाश सुनिश्चित करने की मांग की है। साथ ही सेवा समाप्ति के खिलाफ अपील के लिए एक समिति गठित करने का अनुरोध किया गया। संघ ने नियमित कार्यों में लगे कर्मचारियों को 62 वर्ष तक सेवा का अवसर देने और रिक्त पदों पर समायोजन के लिए नीति बनाने की भी मांग की। भारतीय मजदूर संघ ने अपनी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई की अपेक्षा जताई है।

वे तेलंगाना राज्य ‘बंगाल-तमिलनाडु’ में प्रचार के शोर में चले गए, अब 23 अप्रैल को डेमोक्रेटिक पार्टी के भाग्य पर निर्णय

वे तेलंगाना राज्य 'बंगाल-तमिलनाडु' में प्रचार के शोर में चले गए, अब 23 अप्रैल को डेमोक्रेटिक पार्टी के भाग्य पर निर्णय

विधानसभा चुनाव 2026: पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में पहले चरण के मतदान से 48 घंटे पहले अब मंगलवार को चुनाव का प्रचार किया गया है। तमिल में सभी 234 पर 23 अप्रैल को मतदान होना है। वहीं बंगाल में पहले चरण की 152 सीट पर वोटिंग होगी। चुनावी प्रचार के बाद किसी भी तरह की सार्वजनिक रैली और राजनीतिक प्रचार अब उम्मीदवार नहीं कर सकता। तमिल की सभी सामग्री पर मतदान होगा तमिल की बात करें, तो इस बार एक साथ सभी 234 रिज्यूमे पर वोटिंग होगी। इस बार राज्य में कुल 4,023 अभ्यर्थी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। इस बार सभी के सहयोगी राज्य के अभिनेता से नेता बने विजय पार्टी टीवीके पर भी हैं। राज्य की कई सिफारिशों पर टीवीके को काफी समर्थन मिल रहा है। इस चुनाव में कुल 5.73 करोड़ वोट का खर्चा आया। बंगाल में 152 नामांकन पर पहले चरण का मतदान होगाबंगाल की 152 सीटों पर पहले चरण का मतदान होना है। 4 मई को सभी पश्चिमी राज्यों की गिनती की जाएगी। इस बार पश्चिम बंगाल में दूसरे चरण में मतदान होना है। पहले चरण में कुल 1,478 प्रतियोगिता मैदान हैं। करीब तीन करोड़ 60 लाख 77 हजार 171 कलाकार अपने मत का उपयोग करेंगे। इन कॉलेजों में एक करोड़ 75 लाख 77 हजार 210 महिलाएं हैं। इस बार प्रचार में महिलाओं से लेकर सबसे प्रमुख मुसलमानों तक ने सभी विश्वविद्यालयों को शामिल किया है। इन चतुर्थांश पर बंगाल में होगी वोटिंग चुनाव आयोग की जानकारी के मुताबिक, बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए पहले चरण के लिए 23 अप्रैल से 16 अप्रैल तक 152वें चरण में मतदान होगा। इनमें उत्तर बंगाल के आठ, दक्षिण बंगाल के तीन और जंगलमहल क्षेत्र के पांच जिले शामिल हैं। मुर्शिदाबाद की 22, कुशबिहार की नौ, जलपाईगुड़ी की सात, अलीपुरद्वार की पांच, क्लिंपोंग की एक, दार्जिलिंग की पांच, उत्तर दिनाजपुर की नौ, दक्षिण दिनाजपुर की छह, मालदा की 12, बीरभूम की 11, पश्चिम बुद्धमान की नौ, पूर्व मेदिनीपुर की 16, पश्चिम मेदिनीपुर की 15, ओझाग्राम की चार, पुरुलिया की नौ और बांकुड़ा की 12 देवता शामिल हैं. यह भी पढ़ें: बंगाल-तमिलनाडु चुनाव में गड़बड़ी रोकने के लिए EC का मेगा प्लान! एक सेकंड के लिए भी बंद हुआ कैमरा तो फिल्मी वोट!

पेन किलर के साथ भूलकर भी न खाएं ये दवा, शरीर में बन जाएगी जहर, नई स्टडी में चेतावनी

authorimg

Last Updated:April 21, 2026, 16:48 IST Painkiller turn Toxic : शरीर में दर्द होने पर पेनकिलर दवाइयां लोग लेते ही रहते हैं लेकिन इन पेनकिलर दवाइयों के साथ अगर आप कुछ खास तरह की दवाइयां साथ में लेते हैं तो लेने के देने पड़ सकते हैं. यहां तक कि अस्पताल जाने की नौबत भी आ सकती है. यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के एक नए अध्ययन पूरी दुनिया को चौंका दिया है. इस स्टडी में कहा गया गैबापेंटिनोइड्स के साथ कुछ दवाइयों के इतने ज्यादा साइड इफेक्ट हैं कि इससे भारी मुसबतों का सामना करना पड़ सकता है. इन दवाओं के कॉन्बिनेशन से ड्रग प्वाइजन का खतरा. यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ लंदन के शोधकर्ताओं ने अपने एक अध्ययन से दुनिया को चौंका दिया है. इस अध्ययन में कहा गया है कि गैबापेंटिनोइड्स जैसी पेनकिलर दवाइयों के साथ कुछ दवाओं को लेकर पर यह शरीर में जहर बनने लगती है. इसका दुष्प्रभाव इतना ज्यादा है कि इस कारण अस्पताल जाने की नौबत तक आ सकती है. अब सवाल है कि ये दवाइयां कौन-कौन सी है. डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक अगर पेनकिलर वाली gabapentinoids को ली जाए और इसके साथ डियाजीपाम या वैलियम जैसी दवा भी साथ में ली जाए तो यह ड्रग प्वाइजन बन सकती है. इन दवाओं को साथ में लेने पर अस्पताल पहुंचने की आशंका 30 प्रतिशत बढ़ जाती है. ऐसे में अपनी मर्जी से कभी भी इन दवाओं को साथ में नहीं लेनी चाहिए. अस्पताल पहुंचने का खतरा 30 फीसदी ज्यादा गैबापेंटिनोइड्स नसों के दर्द में इस्तेमाल होने वाली आम दवा है जो शरीर में दर्द, मिर्गी और एंग्जाइटी में भी खाई जाती है. ये दवाइयों उन न्यूरोट्रांसमीटर के रिलीज को कम करती है जिससे दर्द होती है. लेकिन इन दवाइयों का व्यापक पैमाने पर मिसयूज होने लगी है. शोध में यह भी सामने आया कि बेंजोडायजेपीन benzodiazepines जैसे Diazepam और Valium को गैबापेंटिनोइड्स के साथ लेने पर ड्रग पॉइजनिंग के कारण अस्पताल में भर्ती होने का खतरा दोगुना हो जाता है. वहीं ओपिओइड दवाएं जैसे Codeine, Tramadol और Morphine—को गैबापेंटिनोइड्स के साथ लेने पर अस्पताल में भर्ती होने का खतरा लगभग 30 प्रतिशत बढ़ा हुआ पाया गया.इन जोखिमों के बावजूद अध्ययन में शामिल करीब 90 प्रतिशत मरीजों को गैबापेंटिनोइड्स के साथ ओपिओइड्स भी दी गई थीं, जबकि आधे से अधिक मरीजों को बेंज़ोडायजेपीन दवाएं भी दी गई थीं.शोध में पाया गया कि जो लोग गैबापेंटिनोइड्स और बेंज़ोडायजेपीन दोनों लेते हैं, उनमें इलाज शुरू करने के पहले चार हफ्तों में ड्रग पॉइजनिंग के कारण अस्पताल में भर्ती होने का खतरा चार गुना तक बढ़ जाता है, तुलना में उन समयों के जब वे इनमें से कोई दवा नहीं ले रहे थे. इसी तरह, गैबापेंटिनोइड्स को ओपिओइड्स के साथ लेने पर भी खतरा दोगुना पाया गया. शोधकर्ताओं ने पाया कि 89 प्रतिशत प्रतिभागियों ने किसी न किसी समय ओपिओइड्स के साथ गैबापेंटिनोइड्स लिए, जबकि 55 प्रतिशत को कुछ समय के लिए बेंज़ोडायजेपीन भी दी गई थीं. 65 देशों में दवा का इस्तेमाल बढ़ाअध्ययन के प्रमुख लेखक डॉ. केनेथ मैन ने कहा, हाल के वर्षों में गैबापेंटिनोइड्स के प्रिस्क्रिप्शन तेजी से बढ़े हैं. यानी डॉक्टर इस दवा को मरीजों को लेने की सलाह देते है क्योंकि ओपिओइड्स के मुकाबले यह सुरक्षित माना जाता है. इसमें कोई संदेह नहीं कि ये दवा दर्द से राहत देने में प्रभावी है लेकिन इनके साथ कुछ खतरा भी है जिनके प्रति डॉक्टरों और मरीजों दोनों को सतर्क रहना चाहिए. इस दवा को इंग्लैंड में हर साल 45 लाख से अधिक लोगों को दी जाती हैं. वहीं अमेरिका में भी सातवीं सबसे ज्यादा प्रिस्क्राइब की जाने वाली दवाओं में शामिल हैं. यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ लंदन के पहले के शोध में पाया गया कि 2008 से 2018 के बीच 65 देशों में इनका उपयोग चार गुना से ज्यादा बढ़ गया है. साइड इफेक्ट पर क्या आते हैं लक्षण रिपोर्ट के मुताबिक अगर गैबापेंटिनोइड्स और वेलियम दवाओं के कॉम्बिनेशन से ड्रग पॉइजनिंग होता है तो इसमें सबसे पहले कंफ्यूजन यानी हर चीज में भ्रम होने लगती है, दिशा का ज्ञान नहीं रहता. इसके लिए मतली और दौरे भी आ सकते हैं. अगर सांस लेने वाली नली में रुकावट आ जाए तो मरीज की मौत भी हो सकती है. गंभीर मामलों में तत्काल अस्पताल में भर्ती करना जरूरी होता है, जहां डॉक्टर एंटीडोट दवाओं से इसका इलाज करते हैं. ब्रिटेन में हर साल लगभग 10,000 लोगों को ड्रग पॉइजनिंग के कारण अस्पताल ले जाया जाता है. इस अध्ययन में गैबापेंटिनोइड्स से जुड़े कई जानबूझकर और अनजाने में हुए पॉइजनिंग के मामले सामने आए, जिनमें दवा का गलत इस्तेमाल या निर्धारित मात्रा से ज्यादा खुराक लेना भी शामिल था.डॉ. कैनेथ मान ने कहा कि गैबापेंटिनोइड्स दवा को लिखते समय सावधानी बरतनी चाहिए, खासकर जब मरीज अन्य दवाएं भी ले रहा हो. साथ ही मरीजों की करीबी निगरानी जरूरी है. About the Author Lakshmi Narayan 18 साल से ज्यादा के लंबे करियर में लक्ष्मी नारायण ने डीडी न्यूज, आउटलुक, नई दुनिया, दैनिक जागरण, हिन्दुस्तान जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। समसामयिक विषयों के विभिन्न मुद्दों, राजनीति, समाज, …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें First Published : April 21, 2026, 16:48 IST

अशोकनगर में 17 मांगों को लेकर आउटसोर्स कर्मचारियों का प्रदर्शन:समान वेतन, सामाजिक सुरक्षा और 62 वर्ष सेवा की मांग, कलेक्ट्रेट पहुंच सौंपा ज्ञापन

अशोकनगर में 17 मांगों को लेकर आउटसोर्स कर्मचारियों का प्रदर्शन:समान वेतन, सामाजिक सुरक्षा और 62 वर्ष सेवा की मांग, कलेक्ट्रेट पहुंच सौंपा ज्ञापन

अशोकनगर में मंगलवार को भारतीय मजदूर संघ के बैनर तले आउटसोर्स कर्मचारियों ने अपनी 17 सूत्रीय मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने तहसील प्रांगण में धरना दिया और फिर रैली निकालकर कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचे। यहां उन्होंने मुख्यमंत्री के नाम तहसीलदार भारतेंदु यादव को ज्ञापन सौंपा। यह रैली जिला अध्यक्ष हरि सिंह रघुवंशी (हैरी) के नेतृत्व में निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में कर्मचारी शामिल हुए। ज्ञापन का वाचन जिला मंत्री शिशुपाल यादव ने किया। प्रदर्शनकारियों ने बताया कि विभिन्न विभागों, उद्योगों और संस्थाओं में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान प्रदेश और कर्मचारियों दोनों के हित में है। वेतन का समय पर भुगतान करने की मांग कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में आउटसोर्स नीति बनाना, सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करना और उचित वेतन प्रदान करना शामिल है। उन्होंने श्रम कानूनों का पालन करने, 8 घंटे से अधिक कार्य करने पर अतिरिक्त भुगतान देने, वेतन का समय पर भुगतान करने और बिचौलिया प्रथा को समाप्त करने की भी मांग की। अन्य मांगों में समान कार्य के लिए समान वेतन, बिना किसी ठोस कारण के नौकरी से न निकालना, ईएसआई-ईपीएफ जैसी सुविधाएं प्रदान करना, 62 वर्ष तक सेवा का प्रावधान, 20 लाख रुपए का दुर्घटना बीमा और नियमित पदों पर समायोजन की नीति बनाना शामिल है। कर्मचारियों ने साप्ताहिक अवकाश और कौशल विकास प्रशिक्षण की व्यवस्था सुनिश्चित करने की भी मांग की। इस प्रदर्शन में वरिष्ठ नागरिक परिषद के प्रदेश सचिव रामवीर सिंह रघुवंशी, अजमेर सिंह रघुवंशी, प्रतिराज यादव, रामकुमार यादव, राहुल रघुवंशी, अभिषेक रघुवंशी, सुनील शर्मा, सतीश रघुवंशी, वीरभद्र यादव, देवेंद्र केवट और गौरव नामदेव सहित बड़ी संख्या में कर्मचारी एवं पदाधिकारी मौजूद रहे।

आलिया भट्ट के नाम पर पाकिस्तान में फर्जीवाड़ा:एक्ट्रेस की AI एडिट फोटो से बेच रहे कपड़े; अलग-अलग इवेंट्स से उठाई तस्वीरें

आलिया भट्ट के नाम पर पाकिस्तान में फर्जीवाड़ा:एक्ट्रेस की AI एडिट फोटो से बेच रहे कपड़े; अलग-अलग इवेंट्स से उठाई तस्वीरें

पाकिस्तानी क्लोदिंग ब्रांड ‘वजायशा ऑफिशियल’ आलिया भट्ट की कुछ तस्वीरें पोस्ट कर विवादों में आ गया है। आलिया इन तस्वीरों में एथनिक कलेक्शन में नजर आ रही हैं। लेकिन यह कोई ऑफिशियल शूट नहीं है, बल्कि आलिया की पुरानी तस्वीरों को AI और डिजिटल एडिटिंग के जरिए ब्रांड के कपड़ों पर सुपरइम्पोज (चिपकाया) किया गया है। पाकिस्तानी ब्रांड आलिया की AI तस्वीरों के जारिए अपने सिल्क कलेक्शन का प्रमोशन कर रहा है। ऐसे पकड़ी गई ब्रांड की चोरी 16 अप्रैल को ब्रांड ने इंस्टाग्राम पर एक कैरोसेल पोस्ट किया। इसमें आलिया को गहरे लाल, टील और ब्लैक कलर के सिल्क सूट में दिखाया गया। ब्रांड ने कैप्शन में लिखा- “आलिया भट्ट को भी हमारा शीशा सिल्क कलेक्शन पसंद है।” लेकिन गौर से देखने पर पता चलता है कि ये तस्वीरें एक्ट्रेस के अलग-अलग इवेंट्स से उठाई गई हैं। इसमें आलिया का 2024 का लोरियल पेरिस रैंप वॉक वाला ‘वेट हेयर लुक’ और उनके सब्यसाची फोटोशूट के गहनों का इस्तेमाल किया गया है। यहां तक कि फरवरी 2026 के गुच्ची मिलान फैशन वीक के उनके लुक को भी एडिट किया गया है। ब्रांड बोला- ‘हमें वायरल कर दो’ इस पोस्ट पर फैंस का गुस्सा फूट पड़ा। कई लोगों ने पूछा कि क्या आलिया को इस बारे में पता भी है? इस पर ब्रांड ने बिना किसी डर के हंसने वाले इमोजी के साथ रिप्लाई किया- “इसे प्लीज वायरल कर दो, ताकि उन्हें भी पता चल जाए।” जब एक यूजर ने चेतावनी दी कि “वे तुम पर केस (Sue) कर देंगी”, तो ब्रांड ने जवाब दिया- “नहीं, वे ऐसा नहीं करेंगी।” यूजर्स ने आलिया को किया टैग सोशल मीडिया पर अब इस ब्रांड को काफी ट्रोल किया जा रहा है। कई यूजर्स ने इसे कॉपीराइट का उल्लंघन बताया है। एक यूजर ने लिखा, “यह पूरी तरह से AI का काम है, मैं यह आलिया को भेजूंगा।” फैंस लगातार आलिया भट्ट और उनकी टीम को टैग कर रहे हैं ताकि इस कमर्शियल धोखाधड़ी पर एक्शन लिया जा सके।

आलिया भट्ट के नाम पर पाकिस्तान में फर्जीवाड़ा:एक्ट्रेस की AI एडिट फोटो से बेच रहे कपड़े; अलग-अलग इवेंट्स से उठाई तस्वीरें

आलिया भट्ट के नाम पर पाकिस्तान में फर्जीवाड़ा:एक्ट्रेस की AI एडिट फोटो से बेच रहे कपड़े; अलग-अलग इवेंट्स से उठाई तस्वीरें

पाकिस्तानी क्लोदिंग ब्रांड ‘वजायशा ऑफिशियल’ आलिया भट्ट की कुछ तस्वीरें पोस्ट कर विवादों में आ गया है। आलिया इन तस्वीरों में एथनिक कलेक्शन में नजर आ रही हैं। लेकिन यह कोई ऑफिशियल शूट नहीं है, बल्कि आलिया की पुरानी तस्वीरों को AI और डिजिटल एडिटिंग के जरिए ब्रांड के कपड़ों पर सुपरइम्पोज (चिपकाया) किया गया है। पाकिस्तानी ब्रांड आलिया की AI तस्वीरों के जारिए अपने सिल्क कलेक्शन का प्रमोशन कर रहा है। ऐसे पकड़ी गई ब्रांड की चोरी 16 अप्रैल को ब्रांड ने इंस्टाग्राम पर एक कैरोसेल पोस्ट किया। इसमें आलिया को गहरे लाल, टील और ब्लैक कलर के सिल्क सूट में दिखाया गया। ब्रांड ने कैप्शन में लिखा- “आलिया भट्ट को भी हमारा शीशा सिल्क कलेक्शन पसंद है।” लेकिन गौर से देखने पर पता चलता है कि ये तस्वीरें एक्ट्रेस के अलग-अलग इवेंट्स से उठाई गई हैं। इसमें आलिया का 2024 का लोरियल पेरिस रैंप वॉक वाला ‘वेट हेयर लुक’ और उनके सब्यसाची फोटोशूट के गहनों का इस्तेमाल किया गया है। यहां तक कि फरवरी 2026 के गुच्ची मिलान फैशन वीक के उनके लुक को भी एडिट किया गया है। ब्रांड बोला- ‘हमें वायरल कर दो’ इस पोस्ट पर फैंस का गुस्सा फूट पड़ा। कई लोगों ने पूछा कि क्या आलिया को इस बारे में पता भी है? इस पर ब्रांड ने बिना किसी डर के हंसने वाले इमोजी के साथ रिप्लाई किया- “इसे प्लीज वायरल कर दो, ताकि उन्हें भी पता चल जाए।” जब एक यूजर ने चेतावनी दी कि “वे तुम पर केस (Sue) कर देंगी”, तो ब्रांड ने जवाब दिया- “नहीं, वे ऐसा नहीं करेंगी।” यूजर्स ने आलिया को किया टैग सोशल मीडिया पर अब इस ब्रांड को काफी ट्रोल किया जा रहा है। कई यूजर्स ने इसे कॉपीराइट का उल्लंघन बताया है। एक यूजर ने लिखा, “यह पूरी तरह से AI का काम है, मैं यह आलिया को भेजूंगा।” फैंस लगातार आलिया भट्ट और उनकी टीम को टैग कर रहे हैं ताकि इस कमर्शियल धोखाधड़ी पर एक्शन लिया जा सके।

साधु ने वकील पर किया त्रिशूल से हमला:सिग्नल पर रुकी कार, गाली-गलौज के बाद वार; बचाव में हाथ आगे किया तो हथेली में लगा त्रिशूल

साधु ने वकील पर किया त्रिशूल से हमला:सिग्नल पर रुकी कार, गाली-गलौज के बाद वार; बचाव में हाथ आगे किया तो हथेली में लगा त्रिशूल

भोपाल के बागसेवनिया इलाके में सोमवार दोपहर एक साधु ने जिला न्यायालय में पदस्थ अपर लोक अभियोजक नारायण सिंह ठाकुर पर त्रिशूल से हमला कर दिया। घटना मिसरोद स्थित बापू की कुटिया के सामने लाल सिग्नल पर उस वक्त हुई, जब वे परिवार के साथ कार से घर लौट रहे थे। फरियादी के मुताबिक जैसे ही उन्होंने सिग्नल पर अपनी कार रोकी, तभी एक साधु वहां पहुंचा और गालियां देने लगा। विरोध करने पर आरोपी ने त्रिशूल से कार के सामने के कांच पर वार कर दिया। इसके बाद वह ड्राइवर साइड आया और साइड विंडो पर भी त्रिशूल मारकर कांच तोड़ दिया। बचाव में हाथ आगे किया तो हथेली में घोंपा त्रिशूल घटना के दौरान आरोपी ने दोबारा हमला किया, जिसे रोकने के लिए वकील ने हाथ आगे किया। इस दौरान त्रिशूल उनकी दाहिनी हथेली में घुस गया, जिससे वे घायल हो गए और खून बहने लगा। आरोपी ने जान से मारने की धमकी भी दी। घटना के वक्त वकील की पत्नी, बेटा समेत मौके पर मौजूद अन्य लोगों ने बीच-बचाव किया। आरोपी भागने की कोशिश कर रहा था, तभी पुलिस को सूचना दी गई और मौके पर पहुंची पुलिस ने उसे पकड़ लिया। आरोपी की पहचान, केस दर्ज पुलिस पूछताछ में आरोपी ने अपना नाम अरविंद चौधरी बताया है। बागसेवनिया थाना पुलिस ने मामले में विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। हमले में वकील की कार के आगे और साइड के कांच पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है और आरोपी से पूछताछ जारी है।