जयपुर पहुंचीं मोहन सिस्टर्स:यूनिवर्सिटी के एनुअल फेस्ट में देंगी लाइव परफॉर्मेंस; बोलीं- पिंक सिटी में परफॉर्म करना हमेशा खास

बॉलीवुड की चर्चित मोहन सिस्टर्स रविवार दोपहर जयपुर पहुंचीं। मशहूर गायिका नीति मोहन, अभिनेत्री और डांसर शक्ति मोहन और कोरियोग्राफर एवं परफॉर्मर मुक्ति मोहन दिल्ली रोड स्थित एक निजी यूनिवर्सिटी के वार्षिक सांस्कृतिक समारोह में प्रस्तुति देने के लिए गुलाबी नगरी आई हैं। एयरपोर्ट पर तीनों बहनें बेहद कूल और कैजुअल अंदाज में नजर आईं। यहां से वे सीधे होटल रवाना हुईं, जहां कुछ देर विश्राम के बाद रिहर्सल के लिए यूनिवर्सिटी पहुंचेंगी। शाम को वे हजारों विद्यार्थियों के सामने अपनी लाइव प्रस्तुति देंगी। एयरपोर्ट पर तीनों बहनों ने कहा कि जयपुर में परफॉर्म करना हमेशा खास अनुभव रहता है। उन्होंने कहा कि राजस्थान के दर्शकों का उत्साह और प्यार हर बार उन्हें यहां आने के लिए प्रेरित करता है। इस बार भी वे एक साथ मंच साझा करने को लेकर बेहद उत्साहित हैं और विद्यार्थियों के लिए यादगार प्रस्तुति देने की तैयारी कर चुकी हैं। यूनिवर्सिटी के वार्षिक समारोह को लेकर विद्यार्थियों में खासा उत्साह है। आयोजकों के अनुसार तीनों बहनों की लाइव प्रस्तुति इस वर्ष के सांस्कृतिक उत्सव का सबसे बड़ा आकर्षण होगी। स्टूडेंट्स लंबे समय से उनके कार्यक्रम का इंतजार कर रहे थे और कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों के शामिल होने की उम्मीद है। तीनों बहनों ने बनाई अलग-अलग पहचान मोहन सिस्टर्स आज भारतीय मनोरंजन जगत का जाना-माना नाम हैं। चारों बहनों ने अपने-अपने क्षेत्र में अलग मुकाम हासिल किया है। इस बार जयपुर पहुंचीं नीति, शक्ति और मुक्ति मोहन लगातार बॉलीवुड और मनोरंजन उद्योग में सक्रिय हैं। नीति मोहन: बॉलीवुड की लोकप्रिय आवाज नीति मोहन देश की सबसे सफल प्लेबैक सिंगर्स में शुमार हैं। उन्होंने बॉलीवुड को कई सुपरहिट गाने दिए हैं। ‘इश्क वाला लव’, ‘जिया रे’, ‘सौ आसमान’, ‘नैनों वाले ने’, ‘मेरे यादों में’, ‘कश्मीर मैं तू कन्याकुमारी’ जैसे गीतों ने उन्हें देशभर में लोकप्रिय बनाया। नीति कई बड़े लाइव कॉन्सर्ट और म्यूजिक फेस्टिवल्स का भी हिस्सा रहती हैं और अपनी दमदार स्टेज परफॉर्मेंस के लिए जानी जाती हैं। शक्ति मोहन: डांस की दुनिया का बड़ा नाम शक्ति मोहन ने डांस रियलिटी शो ‘डांस इंडिया डांस’ जीतकर अपने करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद उन्होंने बतौर डांसर, कोरियोग्राफर और अभिनेत्री अपनी अलग पहचान बनाई। वे कई बड़े डांस रियलिटी शोज में जज और मेंटर रह चुकी हैं। उनकी डांस कंपनी और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाखों प्रशंसक हैं। बॉलीवुड के कई लोकप्रिय गानों की कोरियोग्राफी और स्टेज परफॉर्मेंस में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। मुक्ति मोहन: अभिनय और डांस दोनों में सक्रिय मुक्ति मोहन ने भी डांस रियलिटी शोज से पहचान बनाई और इसके बाद अभिनय तथा मंचीय प्रस्तुतियों में अपनी अलग जगह बनाई। वे कई टीवी शोज, म्यूजिक वीडियो और फिल्मों में नजर आ चुकी हैं। अपनी अभिव्यक्ति और समकालीन नृत्य शैली के कारण वे युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय हैं।
वृंदावन में VIP ट्रीटमेंट के आरोपों पर भड़कीं दीपिका सिंह:इन्फ्लुएंसर से बोलीं- व्यूज के लिए भक्तों की भावनाओं से खिलवाड़ न करें

टीवी एक्ट्रेस दीपिका सिंह ने वृंदावन मंदिर में VIP ट्रीटमेंट मिलने के आरोपों पर प्रतिक्रिया दी। हाल ही में पति रोहित राज गोयल और बच्चों के साथ वृंदावन दर्शन के दौरान वायरल हुए वीडियो को लेकर उठे विवाद के बीच दीपिका ने रविवार को इंस्टाग्राम पर नया वीडियो शेयर कर कहा कि पूरा सच सामने है और लोगों को बिना पूरी जानकारी के आरोप नहीं लगाने चाहिए। दरअसल, दीपिका सिंह हाल ही में अपने परिवार के साथ वृंदावन दर्शन के लिए पहुंची थीं। इस दौरान का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें कुछ यूजर्स ने आरोप लगाया कि उन्हें मंदिर में VIP ट्रीटमेंट दिया गया, जबकि उनके सामने खड़ी एक बुजुर्ग महिला की अनदेखी की गई। दीपिका सिंह ने आरोपों पर जवाब दिया विवाद बढ़ने पर दीपिका ने इंस्टाग्राम पर वीडियो शेयर किया। साथ ही एक इन्फ्लुएंसर को टैग करते हुए लिखा, “यह सब @glam_with_nishitwins (निशा बंसल) ने मेरी और पुजारी जी की ट्रोलिंग से शुरू किया था, लेकिन मैं उन्हें पूरी सच्चाई दिखाने की कोशिश कर रही हूं। इससे उन्हें भी ज्यादा व्यूज और फॉलोअर्स मिलेंगे। बाद में मुझे धन्यवाद कह सकती हैं। सबूत सबके सामने है। माता जी का प्रसाद भी मिला।” उन्होंने आगे लिखा, “असली प्रसाद: सही सोच, शुद्ध मन, अहंकार का त्याग, किसी पर बिना जाने उंगली न उठाना, शांति और अपने हक के लिए खड़े होने की शक्ति। दो बच्चों को देखकर दिया गया प्रेम क्या पाप है? बच्चे भी तो भगवान श्रीकृष्ण (गोपाल जी) का ही रूप हैं।” इन्फ्लुएंसर पर भड़कते हुए उन्होंने लिखा, “@glam_with_nishitwins, आप और आपके जैसे लोग ऐसी रील बनाकर भक्तों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। जो लोग अभी-अभी भक्ति के रास्ते पर चले हैं, उनका मन इससे टूट सकता है। कृपया भक्तों की भावनाओं का सम्मान करें। सिर्फ व्यूज और फॉलोअर्स पाने के लिए लोगों को गुमराह न करें। राधे-राधे।” वीडियो में बुजुर्ग महिला को भी प्रसाद मिला दीपिका ने जो वीडियो शेयर किया उसमें मंदिर के पुजारी उन्हें अंगवस्त्र, फूलों की माला और प्रसाद देते दिखाई देते हैं। साथ ही बच्चों को बांसुरी भी भेंट की जाती है। वीडियो में सामने खड़ी बुजुर्ग महिला को भी प्रसाद मिलता हुआ दिखाई देता है। दरअसल, इंस्टाग्राम पर निशा बंसल ने दीपिका का वीडियो शेयर करते हुए लिखा था, “कुछ तो शर्म कर लो, धर्म के ठेकेदारों। वो एक बूढ़ी मां है। उसकी उम्र खड़े होने लायक नहीं थी। इनको माला, बांसुरी, इत्र, सब सेवा, उसके नसीब प्रसाद भी नहीं।” दीपिका को ‘दीया और बाती हम’ से पहचान मिली थी दीपिका सिंह ने साल 2011 में स्टार प्लस के सुपरहिट शो ‘दीया और बाती हम’ से टीवी डेब्यू किया। इस शो में उन्होंने आईपीएस अधिकारी संध्या राठी का किरदार निभाया। इसके बाद उन्होंने वेब सीरीज ‘द रियल सोलमेट’ और टीवी शो ‘कवच: महाशिवरात्रि’ में काम किया। साल 2022 में फिल्म ‘टीटू अंबानी’ से बॉलीवुड में कदम रखा।
कलौंजी हेयर ऑयल: पसंदीदा में बालों और डैंड्रफ से हैं परेशान? घर पर ही खास कलौंजी का हेयर ऑयल; नोट कर लें आसान तरीका

26 जुलाई 2026 को 11:40 IST पर अपडेट किया गया कलौंजी हेयर ऑयल: आजकल बहुत से लोग बालों के झड़ने, स्कैल्प रूखी रहने और डैंड्रफ से परेशान रहने वाले हैं। राहत पाने के लिए लोग कई उत्पादों का इस्तेमाल करते हैं। कलौंजी के तेल में मौजूद थायमोकाइनोन स्कैल्प की सूजन और आयोडीन युक्त स्ट्रेस को कम करके बालों की मजबूती में मदद कर सकता है। इसे बालों का चमत्कारी इलाज नहीं माना जा सकता है और इस पर अभी क्लिनिकल शोध की जरूरत है। आयुर्वेद और यूनानी चिकित्सा में कलौंजी के तेल का प्रयोग लंबे समय से होता आ रहा है। अनुसरण करना : कलौंजी बाल और स्कैल्प के लिए कई पोषक तत्व पाए जाते हैं, जैसे थायमोकिनोन, ओमेगा-6 और ओमेगा-9 एसिड एसिड, विटामिन ई, अमीनो एसिड और प्लांट स्टेरॉल। छवि: फ्रीपिक कलौंजी का हेयर कलौंजी ऑयल बनाने के लिए आपको आधा कपौंजी, एक कप कोल्ड-प्रेस्ड नारियल का तेल या ऑलिव ऑयल, एक कांच की बोतल और एक महीन सूती कपड़ा या कलौंजी की जरूरत होगी। छवि: फ्रीपिक सबसे पहले कलौंजी को अधायन पर 1-2 मिनट प्रभाव भून लें और ध्यान दें कि बीज जलें नहीं। फिर भुनी हुई कलौंजी को दरदरा कूट लें। छवि: फ्रीपिक एक पैन में नारियल या जैतून के तेल को नारियल आँच पर गर्म करें और कुटी हुई कलौंजी के ढांचे को 30 मिनट तक बंद करें। छवि: फ्रीपिक बंद होने से तेल को ठंडा करें। इसके बाद इसे गुडकर कांच का साफ और बोतल में भर लें। इसे अदृश्य और अँधेरी जगह पर रखें। सही तरीके से स्टोर करने पर इसे लगभग 3 महीने तक इस्तेमाल किया जा सकता है। छवि: फ्रीपिक द्वारा प्रकाशित: कीर्ति सोनी प्रकाशित 26 जुलाई 2026 11:39 IST (टैग्सटूट्रांसलेट)कलौंजी हेयर ऑयल(टी)बालों के लिए काले बीज का तेल(टी)घर पर कलौंजी का तेल कैसे बनाएं(टी)प्राकृतिक बाल विकास तेल(टी)डैंड्रफ उपाय(टी)बालों के लिए थामोक्विनोन(टी)आयुर्वेदिक बालों की देखभाल
ईरान पर सबसे बड़े हमले से पीछे हटे ट्रम्प:सलाहकारों की चेतावनी- देश में पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलों की कमी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के खिलाफ बड़े सैन्य हमले की योजना फिलहाल रोक दी है। द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, शीर्ष सैन्य अधिकारियों ने चेतावनी दी कि व्यापक कार्रवाई से अमेरिकी सेना के पास मौजूद पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलों का भंडार तेजी से घट सकता है। जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन ने सलाह दी कि बड़े अभियान से मध्य पूर्व में तैनात अमेरिकी सैनिकों और सहयोगी देशों की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल के अंत तक अमेरिका 1,200 से ज्यादा पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलें इस्तेमाल कर चुका था। हालांकि ट्रम्प ने कहा है कि जरूरत पड़ने पर सभी विकल्प खुले हैं। फिलहाल सैन्य कार्रवाई की बजाय अमेरिका ने ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाते हुए कारोबारी बाबेक जंजानी के नेटवर्क से जुड़ी 9 कंपनियों और 4 लोगों पर नए प्रतिबंध लगाए हैं। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… 1. हूती विद्रोहियों का सऊदी अरब की रिफाइनरी पर हमला: हूती विद्रोहियों ने दावा किया है कि उन्होंने शनिवार को सऊदी अरब के जजान स्थित सऊदी अरामको रिफाइनरी पर 3 बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया है। जजान रिफाइनरी को सऊदी अरब की पांचवीं सबसे बड़ी तेल रिफाइनरी माना जाता है। 2. ईरान की फायरिंग के बाद 4 जहाजों ने बदला रास्ता: ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि उसकी नौसेना ने पिछले 24 घंटे में होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की कोशिश कर रहे चार जहाजों पर चेतावनी के तौर पर फायरिंग की। इसके बाद चारों जहाजों ने अपना रास्ता बदल लिया। 3. ईरान में पेट्रोल महंगा करने पर विचार: ईरान सरकार पेट्रोल की खपत को कंट्रोल करने के लिए पेट्रोल को महंगा कर सकती है। सरकार के मुताबिक, अभी इस पर विचार कर रही है कि बदलाव कैसे लागू किए जाएं। 4. अमेरिका ने ईरान पर हमला रोका: अमेरिका ने शुक्रवार रात ईरान पर हमला नहीं किया। इससे पहले वह लगातार 13 दिनों तक हर रात ईरान के सैन्य ठिकानों पर हमला कर रहा था। 5. बहरीन में अमेरिकी ठिकाने पर ईरानी हमला: ईरान ने बहरीन में अमेरिकी फिफ्थ फ्लीट के नौसैनिक ठिकाने पर हमला किया। यहां ड्रोन और मिसाइलों से हमला किया गया, जिसके बाद कई बड़े विस्फोट हुए। ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…
ईरान पर सबसे बड़े हमले से पीछे हटे ट्रम्प:सलाहकारों ने चेतावनी दी, देश में इंटरसेप्टर मिसाइलों की कमी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के खिलाफ सबसे बड़े हमले को फिलहाल टाल दिया है। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने यह फैसला अपने शीर्ष सलाहकारों और कैबिनेट सदस्यों के साथ शुक्रवार को हुई एक उच्च स्तरीय बैठक के बाद लिया। इस दौरान मुख्य चिंता मध्य पूर्व में अमेरिकी सेना के पास मौजूद एयर डिफेंस सिस्टम और इंटरसेप्टर मिसाइलों की भारी कमी को लेकर थी। इंटरसेप्टर खत्म होने का डर ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन ने निजी तौर पर सलाह दी थी कि ईरान के खिलाफ बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान चलाना संभव तो है, लेकिन इससे सेंट्रल कमांड के पास मौजूद इंटरसेप्टर मिसाइलें खतरनाक स्तर तक खत्म हो सकती हैं। अधिकारियों का कहना है कि अप्रैल के अंत तक रक्षा विभाग 1,200 से ज्यादा पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलें खर्च कर चुका है, जिनकी कीमत 4 मिलियन डॉलर प्रति मिसाइल से अधिक है। तब से स्थिति और खराब हुई है। जॉर्डन हमले के बाद बढ़ी चिंता हाल ही में जॉर्डन में तीन अमेरिकी सैनिकों की मौत के बाद चिंताएं और बढ़ गई हैं। एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि ईरान के ड्रोन और मिसाइल हमले के दौरान एक बैलिस्टिक मिसाइल अमेरिकी सुरक्षा घेरे को भेदकर निकल गई थी। सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अभियान बढ़ाया गया, तो अमेरिकी सैनिक, खाड़ी देशों के सहयोगी और महत्वपूर्ण ठिकाने ईरानी जवाबी हमलों के प्रति असुरक्षित हो जाएंगे। कूटनीति और दबाव की रणनीति व्हाइट हाउस के संचार निदेशक स्टीवन चेउंग ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप हमेशा से कूटनीतिक समाधान के पक्ष में रहे हैं, लेकिन अगर ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य या सहयोगियों के खिलाफ आतंकी गतिविधियां जारी रखता है, तो सभी विकल्प खुले हैं। उन्होंने कहा कि ईरान के लिए यही समझदारी है कि वह बातचीत के जरिए डील करे, वरना उसे अंजाम भुगतना होगा। आर्थिक दबाव और अन्य चुनौतियां ट्रंप के सलाहकारों ने चेतावनी दी है कि व्यापक युद्ध से वैश्विक आर्थिक अस्थिरता, ऊर्जा संकट और शरणार्थी संकट पैदा हो सकता है। इसके अलावा, प्रशासन के भीतर यह संदेह भी है कि तेज सैन्य अभियान ईरान को बातचीत की मेज पर लाने के बजाय उसे विदेशी खतरे के खिलाफ एकजुट कर सकता है। इसी दबाव को बनाए रखने के लिए शुक्रवार को ट्रेजरी विभाग ने ईरानी व्यवसायी बाबेक जंजानी के वित्तीय नेटवर्क से जुड़े 9 कंपनियों और 4 लोगों पर नए प्रतिबंधों की घोषणा की है।
आईटी की नौकरी छोड़कर एक्टिंग चुनी:60 ऑडिशन बाद मिला पहला काम; नैना सरीन बोलीं- मुंबई में टिकना है तो पैसों का इंतजाम जरूरी

आईटी कंपनी की अच्छी-खासी नौकरी छोड़कर एफटीआईआई पहुंचीं और फिर मुंबई आकर लगातार संघर्ष किया। 60 ऑडिशन के बाद पहला विज्ञापन मिला, लेकिन हार नहीं मानी। वेब सीरीज मेड इन हेवन, त्रिभुवन मिश्रा सीए टॉपर, राख और प्रीतम एंड पेड्रो जैसी सीरीज में नजर आ चुकीं अभिनेत्री नैना सरीन ने दैनिक भास्कर से बातचीत में अपने संघर्ष, ऑडिशन, इंडस्ट्री, परिवार और भविष्य की योजनाओं पर खुलकर बात की। सवाल: एक्टिंग का सपना देखने पर परिवार और समाज का कितना दबाव था? जवाब : मैं बोकारो के एक मिडिल क्लास परिवार से हूं। रिश्तेदारों को लगता था कि यह सिर्फ शौक है और कुछ साल बाद मैं वापस नौकरी कर लूंगी। लेकिन मम्मी-पापा ने हमेशा मेरा साथ दिया। मम्मी कहती थीं, “जब सिर पर पड़ेगा, तब देख लेंगे।” सवाल: मुंबई आने से पहले एफटीआईआई जाने का फैसला कैसे लिया? जवाब: मेरे पास सीधे मुंबई आने के पैसे नहीं थे। कॉलेज के एक सीनियर से एफटीआईआई के बारे में पता चला। मैं उस समय बेंगलुरु में आईटी कंपनी में इंस्ट्रक्शनल डिजाइनर थी। नौकरी के साथ वॉइस ओवर और मिमिक्री सीखती थी। फिर तैयारी करके एफटीआईआई का एंट्रेंस दोबारा दिया और चयन हो गया। सवाल: एफटीआईआई ने क्या सबसे बड़ा सबक दिया? जवाब: वहां सिर्फ एक्टिंग नहीं सिखाई जाती, बल्कि खुद को समझना और अपनी भावनाओं को खुलकर व्यक्त करना सीखते हैं। सबसे बड़ी ताकत वहां की कम्युनिटी है। मुंबई आने के बाद भी बैचमेट और सीनियर्स हमेशा साथ रहे। सवाल: मुंबई में पहला काम कैसे मिला? जवाब: मुंबई आने के बाद मैंने लगातार ऑडिशन दिए। करीब 60 ऑडिशन के बाद पहला विज्ञापन मिला। उसे नीरज घेवान ने डायरेक्ट किया था। बाद में उन्होंने मुझे मेड इन हेवन में भी कास्ट किया। सवाल: आपकी पहली फिल्म कौन-सी थी? जवाब: एफटीआईआई में पढ़ाई के दौरान ही मुझे फिल्म ‘होटल मुंबई’ मिली। इसमें मैंने ताज होटल की रिसेप्शनिस्ट का किरदार निभाया। इसके बाद ‘ईब आले ऊ’ ने मुझे काफी पहचान दिलाई। यह कई इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल्स में दिखाई गई। सवाल: वेब सीरीज का सफर कैसे शुरू हुआ? जवाब: मेड इन हेवन के बाद त्रिभुवन मिश्रा सीए टॉपर मिली। इस शो में लंबा शूट था और कई दूसरे प्रोजेक्ट छोड़ने पड़े। लेकिन सेट का माहौल शानदार था। मानव कौल और पूरी टीम ने हर सीन में काफी मदद की। सवाल: राख में सिर्फ दो सीन थे, फिर भी रोल क्यों चुना? जवाब: किरदार छोटा था, लेकिन बहुत प्रभावशाली था। ऑडिशन देते समय ही समझ आ गया था कि यह आसान नहीं है। इसमें इंटिमेसी वाले सीन भी थे, लेकिन सेट पर इंटिमेसी कोऑर्डिनेटर मौजूद थे, इसलिए पूरा माहौल सुरक्षित और प्रोफेशनल था। सवाल: प्रीतम एंड पेड्रो में राजकुमार हिरानी और अरशद वारसी के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा? जवाब: अरशद सर बेहद अनुशासित हैं। उनकी दिनचर्या सुनकर मैं हैरान रह गई। वहीं राजकुमार हिरानी सर ने मेरा सीन देखकर पूछा कि क्या मैंने एक्टिंग की पढ़ाई की है। जब उन्हें पता चला कि मैं एफटीआईआई से हूं, तो उन्होंने संस्थान को लेकर काफी बातें कीं। सवाल: आपने कहा कि लीड रोल करने के बाद भी छोटे किरदार करने में संकोच नहीं करतीं? जवाब: बिल्कुल नहीं। मैंने खुद कास्टिंग डायरेक्टर्स से कहा कि मुझे हर तरह के रोल के लिए ऑडिशन बुलाइए। मैं स्क्रीन टाइम नहीं देखती। अच्छा किरदार छोटा हो या बड़ा, फर्क नहीं पड़ता। सवाल: संघर्ष के दौरान सबसे बड़ी चुनौती क्या रही? जवाब: मुंबई में सबसे बड़ी चुनौती पैसों की होती है। मैं हर नए कलाकार से कहती हूं कि पहले अपनी कमाई का कोई जरिया तय करें। वॉइस ओवर करें, असिस्टेंट बनें, राइटिंग करें या कोई दूसरी नौकरी करें, लेकिन आर्थिक रूप से टिके रहना जरूरी है। सवाल: सबसे चुनौतीपूर्ण किरदार कौन-सा रहा? जवाब: त्रिभुवन मिश्रा सीए टॉपर में मां का किरदार। मां की जिम्मेदारी, उसकी बॉडी लैंग्वेज और भावनाएं समझना आसान नहीं था। इसके लिए मैंने अपनी मां को बहुत करीब से ऑब्जर्व किया। सवाल: इस समय किन प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही हैं? जवाब: कुछ इंडिपेंडेंट फिल्मों की शूटिंग पूरी की है। इसके अलावा अपनी एफटीआईआई बैचमेट श्रेया भट्टाचार्य के साथ अपने निजी अनुभवों पर आधारित एक मिनी सीरीज लिख रही हूं। अभी उसके लिए प्रोड्यूसर की तलाश है। सवाल: निजी जिंदगी का क्या प्लान है? जवाब: मेरा फोकस अभी सिर्फ फिल्मों में काम करना है। शादी सही समय और सही इंसान मिलने पर हो जाएगी। फिलहाल मैं चाहती हूं कि मेरे पास इतना काम हो कि बाकी चीजों के बारे में सोचने का समय ही न मिले। सवाल: आपने मिमिक्री और वॉइस ओवर भी सीखा है? जवाब: हां। बेंगलुरु में इसकी ट्रेनिंग ली थी। आवाज निकालना आसान है, लेकिन उसे लंबे समय तक उसी टोन में बनाए रखना सबसे मुश्किल काम होता है। पहले बच्चों की ई-लर्निंग किताबों की रिकॉर्डिंग भी किया करती थी।
आईटी की नौकरी छोड़कर एक्टिंग चुनी:60 ऑडिशन बाद मिला पहला काम; नैना सरीन बोलीं- मुंबई में टिकना है तो पैसों का इंतजाम जरूरी

आईटी कंपनी की अच्छी-खासी नौकरी छोड़कर एफटीआईआई पहुंचीं और फिर मुंबई आकर लगातार संघर्ष किया। 60 ऑडिशन के बाद पहला विज्ञापन मिला, लेकिन हार नहीं मानी। वेब सीरीज मेड इन हेवन, त्रिभुवन मिश्रा सीए टॉपर, राख और प्रीतम एंड पेड्रो जैसी सीरीज में नजर आ चुकीं अभिनेत्री नैना सरीन ने दैनिक भास्कर से बातचीत में अपने संघर्ष, ऑडिशन, इंडस्ट्री, परिवार और भविष्य की योजनाओं पर खुलकर बात की। सवाल: एक्टिंग का सपना देखने पर परिवार और समाज का कितना दबाव था? जवाब : मैं बोकारो के एक मिडिल क्लास परिवार से हूं। रिश्तेदारों को लगता था कि यह सिर्फ शौक है और कुछ साल बाद मैं वापस नौकरी कर लूंगी। लेकिन मम्मी-पापा ने हमेशा मेरा साथ दिया। मम्मी कहती थीं, “जब सिर पर पड़ेगा, तब देख लेंगे।” सवाल: मुंबई आने से पहले एफटीआईआई जाने का फैसला कैसे लिया? जवाब: मेरे पास सीधे मुंबई आने के पैसे नहीं थे। कॉलेज के एक सीनियर से एफटीआईआई के बारे में पता चला। मैं उस समय बेंगलुरु में आईटी कंपनी में इंस्ट्रक्शनल डिजाइनर थी। नौकरी के साथ वॉइस ओवर और मिमिक्री सीखती थी। फिर तैयारी करके एफटीआईआई का एंट्रेंस दोबारा दिया और चयन हो गया। सवाल: एफटीआईआई ने क्या सबसे बड़ा सबक दिया? जवाब: वहां सिर्फ एक्टिंग नहीं सिखाई जाती, बल्कि खुद को समझना और अपनी भावनाओं को खुलकर व्यक्त करना सीखते हैं। सबसे बड़ी ताकत वहां की कम्युनिटी है। मुंबई आने के बाद भी बैचमेट और सीनियर्स हमेशा साथ रहे। सवाल: मुंबई में पहला काम कैसे मिला? जवाब: मुंबई आने के बाद मैंने लगातार ऑडिशन दिए। करीब 60 ऑडिशन के बाद पहला विज्ञापन मिला। उसे नीरज घेवान ने डायरेक्ट किया था। बाद में उन्होंने मुझे मेड इन हेवन में भी कास्ट किया। सवाल: आपकी पहली फिल्म कौन-सी थी? जवाब: एफटीआईआई में पढ़ाई के दौरान ही मुझे फिल्म ‘होटल मुंबई’ मिली। इसमें मैंने ताज होटल की रिसेप्शनिस्ट का किरदार निभाया। इसके बाद ‘ईब आले ऊ’ ने मुझे काफी पहचान दिलाई। यह कई इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल्स में दिखाई गई। सवाल: वेब सीरीज का सफर कैसे शुरू हुआ? जवाब: मेड इन हेवन के बाद त्रिभुवन मिश्रा सीए टॉपर मिली। इस शो में लंबा शूट था और कई दूसरे प्रोजेक्ट छोड़ने पड़े। लेकिन सेट का माहौल शानदार था। मानव कौल और पूरी टीम ने हर सीन में काफी मदद की। सवाल: राख में सिर्फ दो सीन थे, फिर भी रोल क्यों चुना? जवाब: किरदार छोटा था, लेकिन बहुत प्रभावशाली था। ऑडिशन देते समय ही समझ आ गया था कि यह आसान नहीं है। इसमें इंटिमेसी वाले सीन भी थे, लेकिन सेट पर इंटिमेसी कोऑर्डिनेटर मौजूद थे, इसलिए पूरा माहौल सुरक्षित और प्रोफेशनल था। सवाल: प्रीतम एंड पेड्रो में राजकुमार हिरानी और अरशद वारसी के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा? जवाब: अरशद सर बेहद अनुशासित हैं। उनकी दिनचर्या सुनकर मैं हैरान रह गई। वहीं राजकुमार हिरानी सर ने मेरा सीन देखकर पूछा कि क्या मैंने एक्टिंग की पढ़ाई की है। जब उन्हें पता चला कि मैं एफटीआईआई से हूं, तो उन्होंने संस्थान को लेकर काफी बातें कीं। सवाल: आपने कहा कि लीड रोल करने के बाद भी छोटे किरदार करने में संकोच नहीं करतीं? जवाब: बिल्कुल नहीं। मैंने खुद कास्टिंग डायरेक्टर्स से कहा कि मुझे हर तरह के रोल के लिए ऑडिशन बुलाइए। मैं स्क्रीन टाइम नहीं देखती। अच्छा किरदार छोटा हो या बड़ा, फर्क नहीं पड़ता। सवाल: संघर्ष के दौरान सबसे बड़ी चुनौती क्या रही? जवाब: मुंबई में सबसे बड़ी चुनौती पैसों की होती है। मैं हर नए कलाकार से कहती हूं कि पहले अपनी कमाई का कोई जरिया तय करें। वॉइस ओवर करें, असिस्टेंट बनें, राइटिंग करें या कोई दूसरी नौकरी करें, लेकिन आर्थिक रूप से टिके रहना जरूरी है। सवाल: सबसे चुनौतीपूर्ण किरदार कौन-सा रहा? जवाब: त्रिभुवन मिश्रा सीए टॉपर में मां का किरदार। मां की जिम्मेदारी, उसकी बॉडी लैंग्वेज और भावनाएं समझना आसान नहीं था। इसके लिए मैंने अपनी मां को बहुत करीब से ऑब्जर्व किया। सवाल: इस समय किन प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही हैं? जवाब: कुछ इंडिपेंडेंट फिल्मों की शूटिंग पूरी की है। इसके अलावा अपनी एफटीआईआई बैचमेट श्रेया भट्टाचार्य के साथ अपने निजी अनुभवों पर आधारित एक मिनी सीरीज लिख रही हूं। अभी उसके लिए प्रोड्यूसर की तलाश है। सवाल: निजी जिंदगी का क्या प्लान है? जवाब: मेरा फोकस अभी सिर्फ फिल्मों में काम करना है। शादी सही समय और सही इंसान मिलने पर हो जाएगी। फिलहाल मैं चाहती हूं कि मेरे पास इतना काम हो कि बाकी चीजों के बारे में सोचने का समय ही न मिले। सवाल: आपने मिमिक्री और वॉइस ओवर भी सीखा है? जवाब: हां। बेंगलुरु में इसकी ट्रेनिंग ली थी। आवाज निकालना आसान है, लेकिन उसे लंबे समय तक उसी टोन में बनाए रखना सबसे मुश्किल काम होता है। पहले बच्चों की ई-लर्निंग किताबों की रिकॉर्डिंग भी किया करती थी।
मृणाल ठाकुर के भाई धवल कास्टिंग स्कैम से बचे,:बोले- पोर्टफोलियो और कार्ड के नाम पर 20 हजार मांगे, तभी समझ गया पैसे ऐंठने का खेल

वेब सीरीज ‘ठुकरा के मेरा प्यार’ के दूसरे सीजन को दर्शकों का शानदार रिस्पॉन्स मिल रहा है। इस मौके पर लीड कलाकार धवल ठाकुर और संचिता बसु ने दैनिक भास्कर से अपने स्ट्रगल, सोशल मीडिया से फिल्मों तक के सफर, कास्टिंग स्कैम, शूटिंग के किस्सों और प्यार पर खुलकर बात की। सवाल: ‘ठुकरा के मेरा प्यार’ का ऑफर मिला तो सबसे पहला ख्याल क्या आया? जवाब/धवल ठाकुर: मेरे लिए सबसे बड़ी बात यही थी कि इतना अच्छा मौका मिला था। मैं जल्द से जल्द स्क्रिप्ट पढ़कर किरदार की तैयारी शुरू करना चाहता था। कोशिश यही थी कि इस किरदार के साथ पूरी ईमानदारी रखूं। संचिता बसु: मुझे शुरुआत से ही शानवी का किरदार बहुत पसंद आया। मैं गर्ल्स स्कूल में पढ़ी हूं, इसलिए कॉलेज लाइफ कभी जी नहीं पाई। इस किरदार के जरिए लगा कि वह अनुभव भी जी सकूंगी। सवाल: पहली बार जब आप दोनों मिले, तब एक-दूसरे के बारे में क्या सोच थी? जवाब/धवल ठाकुर: हमारी पहली मुलाकात ऑडिशन के दौरान हुई थी। वहीं से प्रोफेशनल रिश्ता शुरू हुआ। बाद में वर्कशॉप और स्क्रिप्ट रीडिंग के दौरान दोस्ती हुई, जिसने हमारी ऑनस्क्रीन केमिस्ट्री मजबूत बनाई। संचिता बसु: पहली बार मिले तो धवल बहुत शांत लगे। बाद में पता चला कि वे बेहद अच्छे इंसान हैं। दो साल साथ काम करते-करते हमारी अंडरस्टैंडिंग इतनी अच्छी हो गई कि कई बार बिना बोले भी एक-दूसरे की बात समझ जाते हैं। सवाल: इस सीरीज तक पहुंचने का मौका कैसे मिला? जवाब/धवल ठाकुर: बॉम्बे शो स्टूडियोज से कॉल आया। किरदार की जानकारी और कुछ सीन भेजे गए। फिर सचिन सर और कमल सर से मुलाकात हुई। ऑडिशन दिया और चयन हो गया। संचिता बसु: उस समय मैं हैदराबाद में तेलुगु फिल्म की शूटिंग कर रही थी। जियो हॉटस्टार की तरफ से ऑडिशन का मेल आया। मैंने वहीं से ऑडिशन रिकॉर्ड कर भेजा और करीब 15 दिन बाद सिलेक्शन का कॉल आया। सवाल: सोशल मीडिया से फिल्मों तक का सफर कैसे शुरू हुआ? जवाब/संचिता बसु: मैंने कभी नहीं सोचा था कि एक्टिंग मेरा करियर बनेगी। नौवीं क्लास में शौक से वीडियो बनाती थी। शुरुआत में महीनों तक व्यूज नहीं आए, लेकिन वीडियो बनाना नहीं छोड़ा। फिर एक दिन वीडियो वायरल हुआ और वहीं से जिंदगी बदलने लगी। इसी दौरान मेरी रील्स देखकर मुझे एक तेलुगु फिल्म का ऑफर मिला। शुरुआत में लगा कि यह फेक कॉल है, क्योंकि आजकल ऐसे कई फर्जी कॉल आते हैं। यकीन नहीं हुआ कि कोई फिल्म के लिए बुला रहा है। लेकिन मेरे मैनेजर और कास्टिंग डायरेक्टर नवनीत झा ने भरोसा दिलाया कि सब कुछ असली है। सबसे दिलचस्प बात यह थी कि जिस फिल्म के लिए मुझे चुना गया, उसकी शूटिंग पहले दूसरी अभिनेत्री के साथ पूरी हो चुकी थी। बाद में मेकर्स ने नया चेहरा लेने का फैसला किया और पूरी फिल्म मेरे साथ दोबारा शूट की। उस वक्त मैं 11वीं क्लास में पढ़ती थी। भागलपुर से हैदराबाद शूटिंग के लिए जाती थी और लौटकर ऑनलाइन परीक्षा भी देती थी। मेरे लिए यह किसी सपने से कम नहीं था। सवाल: धवल, आपकी बहन मृणाल ठाकुर पहले से इंडस्ट्री में हैं। इसके बावजूद क्या आपने अपने स्ट्रगल के दौरान फेक ऑडिशन या कास्टिंग स्कैम का सामना किया? जवाब/धवल ठाकुर: बिल्कुल। मैं कास्टिंग स्कैम का शिकार होते-होते बचा हूं। कॉलेज के दिनों में सोशल मीडिया पर कास्टिंग पोस्ट देखकर ऑडिशन देने पहुंचा। वहां 10, 15 और 20 हजार रुपए के पैकेज दिखाए गए। कहा गया कि पहले पोर्टफोलियो और कार्ड बनवाइए, तभी काम मिलेगा। मेरे साथ ऐसा दो बार हुआ। तभी समझ आया कि यह ऑडिशन नहीं, नए कलाकारों से पैसे ऐंठने का तरीका है। बाद में कुछ एक्टर्स मिले, जिन्होंने मुझे जेन्युइन कास्टिंग ग्रुप से जोड़ा। वहीं से सही ऑडिशन मिलने शुरू हुए। मैं नए कलाकारों से कहना चाहूंगा कि ऑडिशन के नाम पर कभी पैसे न दें। असली कास्टिंग डायरेक्टर कभी पैसे नहीं मांगते। सवाल: संचिता आपको परिवार का साथ कितना मिला? जवाब/संचिता बसु: मम्मी हमेशा मेरे साथ खड़ी रहीं। लेकिन पापा को काफी समय तक पता नहीं था कि मैं वीडियो बनाती हूं। कोरोना के दौरान ज़ी म्यूजिक के एक गाने में मौका मिला। अखबार में खबर छपने के बाद उन्हें पहली बार पता चला कि मैं इस फील्ड में काम कर रही हूं। शुरुआत में उन्हें चिंता थी, लेकिन ‘ठुकरा के मेरा प्यार’ रिलीज होने के बाद उनका नजरिया पूरी तरह बदल गया। सवाल: इस सीरीज के बाद मिला सबसे खास कॉम्प्लिमेंट कौन-सा था? जवाब/संचिता बसु: मेरे लिए सबसे खास कॉम्प्लिमेंट पापा का था। उन्होंने पूरी सीरीज देखने के बाद सिर्फ इतना कहा, “बहुत अच्छा किया।” वो ज्यादा बोलते नहीं हैं, लेकिन उनकी आंखों की खुशी ही मेरे लिए सबसे बड़ा इनाम थी। धवल ठाकुर: परिवार ने कहा कि स्क्रीन पर मुझे देखकर बिल्कुल नहीं लगा कि मैं धवल हूं। ऐसा लगा जैसे उत्तर प्रदेश के किसी गांव का लड़का सामने खड़ा है। एक अभिनेता के लिए इससे बड़ा कॉम्प्लिमेंट नहीं हो सकता। सवाल: शूटिंग का सबसे मजेदार किस्सा कौन-सा रहा? जवाब/संचिता बसु: पहले सीजन के लिए मुझे बाइक चलाना सीखना पड़ा। शूटिंग के दौरान मैं कई बार बाइक से गिर गई। जब भी धवल पीछे बैठते थे, मैं उनसे कहती थी, “जब मैं बोलूं, तुरंत ब्रेक दबा देना।” धवल ठाकुर (हंसते हुए): मैं उनसे कहता था, “मेरे पैर लंबे हैं, मुझे कुछ नहीं होगा। तू बस अपनी चिंता कर।” पूरी यूनिट को पता था कि मुझे बाइक चलाने का ज्यादा अनुभव नहीं था। जिस दिन बाइक वाला सीन होता था, सब पहले से अलर्ट रहते थे। सवाल: दो सीजन साथ काम करने के बाद आपने एक-दूसरे से क्या सीखा? जवाब/संचिता बसु: दो साल साथ काम करने के बाद हम एक-दूसरे को अच्छी तरह समझने लगे हैं। धवल से मैंने सीखा कि किसी भी सीन को करते समय पहले उसकी जरूरत समझनी चाहिए। तब अभिनय अपने आप आसान हो जाता है। धवल ठाकुर: संचिता की सबसे अच्छी बात यह है कि उन्हें कोई नई चीज बताई जाए तो वह उसे सीखने की पूरी कोशिश करती हैं। मैंने उनसे शूटिंग के साथ सोशल मीडिया मैनेज करना सीखा। छुट्टी वाले दिन भी वह खुद रील शूट, एडिट और पोस्ट करती थीं। उनकी मेहनत मैंने बहुत
पाकिस्तान पुलिस की अफसर हरियाणवी गानों की फैन:न्योलीवाला के रशियन बंधाना, राजू पंजाबी के चौधर जाट की गाने पर रील्स बनाईं; लाहौर में SSP रहीं

पाकिस्तान की सीनियर पुलिस अधिकारी डॉ. अनूश मसूद चौधरी हरियाणवी गानों की बड़ी फैन हैं। उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर ढांडा न्योलीवाला के ‘रशियन बंधाना’, राजू पंजाबी के ‘चौधर पूरी जाट की’, खासा आला चाहर के ‘जय वीरू’ और सुमित गोस्वामी के ‘टोरा’ जैसे गानों पर कई रील्स बनाई हैं। पेशावर की रहने वाली डॉ. अनूश फिलहाल पाकिस्तान के पंजाब एलीट पुलिस में डिप्टी डायरेक्टर (एडमिनिस्ट्रेशन) के पद पर तैनात हैं। वह सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय रहती हैं। उनके फेसबुक अकाउंट पर करीब 2.5 लाख फॉलोअर्स हैं। डॉ. अनूश साल 2018 में खैबर पख्तूनख्वा की पहली महिला SSP बनी थीं। उस समय उनकी कार्यशैली के साथ-साथ उनकी खूबसूरती की काफी चर्चा हुई थी। इसके बाद वह लाहौर की भी SSP बनीं। डॉ. अनूश इंडियन म्यूजिक को भी खास पसंद करती हैं। उन्होंने पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसेवाला, आर-नैत, एमी विर्क और गुर सिद्धू के कई गानों पर भी रील्स अपलोड की हैं। जानिए कौन है डॉ. अनूश मसूद चौधरी… MBBS किया और गोल्ड मेडल हासिल किया डॉ. अनूश मसूद चौधरी ने मेडिकल क्षेत्र छोड़कर पुलिस सेवा को चुना और अपने करियर में कई ऐसे रिकॉर्ड बनाए, जिनकी वजह से वह देश की चर्चित महिला अधिकारियों में शामिल हैं। उन्होंने फातिमा जिन्ना मेडिकल कॉलेज से MBBS की पढ़ाई की और मेडिसिन में गोल्ड मेडल हासिल किया। इसके बाद सिविल सेवा परीक्षा पास कर पुलिस सेवा में शामिल हुईं। लाहौर की बेस्ट क्राइम फाइटर बनी वर्ष 2014 में अनूश मसूद चौधरी खैबर पख्तूनख्वा प्रांत की पहली महिला असिस्टेंट सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस (ASP) बनीं। इसके बाद उन्होंने पंजाब पुलिस में विभिन्न अहम जिम्मेदारियां संभालीं। कसूर में SP (इन्वेस्टिगेशन), लाहौर के मॉडल टाउन में एडिशनल SP और पंजाब पुलिस मुख्यालय में SP के रूप में भी उन्होंने काम किया। वर्ष 2018 में उन्हें लाहौर का ‘बेस्ट क्राइम फाइटर’ चुना गया। इंटरनेशनल वूमेन ऑफ करेज अवॉर्ड मिला मई 2022 में अनूश मसूद चौधरी को लाहौर ऑपरेशंस विंग का सीनियर सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस (SSP) नियुक्त किया गया। वह इस पद पर पहुंचने वाली पहली महिला पुलिस अधिकारी बनीं। इसके अलावा उन्होंने पुलिस विभाग में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने, जेंडर-सेंसिटिव पुलिसिंग को बढ़ावा देने और महिला पुलिसकर्मियों की ट्रेनिंग के लिए भी काम किया। वर्ष 2020 में महिलाओं के अधिकारों और पुलिस सेवा में योगदान के लिए उन्हें अमेरिकी विदेश विभाग की ओर से इंटरनेशनल वूमेन ऑफ करेज अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। पेरेंट्स डॉक्टर बनाना चाहते थे एक यूट्यूब चैनल को दिए इंटरव्यू में डॉ. अनूश मसूद चौधरी ने बताया था कि पेरेंट्स का सपना था कि मैं डॉक्टर बनूं। मैंने MBBS भी पूरी कर ली थी। मगर, पिता के मौत के बाद सब बदल गया। परिवार वाले चाहते थे कि मैं डॉक्टर बनकर विदेश सैटल हू जाऊं, लेकिन मैं पाकिस्तान में ही रहकर जनता की सेवा करना चाहती थी। इसके मैंने सेंट्रल सुपीरियर सर्विसेज (CSS) का फिल्ड चुना।
मृणाल ठाकुर के भाई धवल कास्टिंग स्कैम से बचे,:बोले- पोर्टफोलियो और कार्ड के नाम पर 20 हजार मांगे, तभी समझ गया पैसे ऐंठने का खेल

वेब सीरीज ‘ठुकरा के मेरा प्यार’ के दूसरे सीजन को दर्शकों का शानदार रिस्पॉन्स मिल रहा है। इस मौके पर लीड कलाकार धवल ठाकुर और संचिता बसु ने दैनिक भास्कर से अपने स्ट्रगल, सोशल मीडिया से फिल्मों तक के सफर, कास्टिंग स्कैम, शूटिंग के किस्सों और प्यार पर खुलकर बात की। सवाल: ‘ठुकरा के मेरा प्यार’ का ऑफर मिला तो सबसे पहला ख्याल क्या आया? जवाब/धवल ठाकुर: मेरे लिए सबसे बड़ी बात यही थी कि इतना अच्छा मौका मिला था। मैं जल्द से जल्द स्क्रिप्ट पढ़कर किरदार की तैयारी शुरू करना चाहता था। कोशिश यही थी कि इस किरदार के साथ पूरी ईमानदारी रखूं। संचिता बसु: मुझे शुरुआत से ही शानवी का किरदार बहुत पसंद आया। मैं गर्ल्स स्कूल में पढ़ी हूं, इसलिए कॉलेज लाइफ कभी जी नहीं पाई। इस किरदार के जरिए लगा कि वह अनुभव भी जी सकूंगी। सवाल: पहली बार जब आप दोनों मिले, तब एक-दूसरे के बारे में क्या सोच थी? जवाब/धवल ठाकुर: हमारी पहली मुलाकात ऑडिशन के दौरान हुई थी। वहीं से प्रोफेशनल रिश्ता शुरू हुआ। बाद में वर्कशॉप और स्क्रिप्ट रीडिंग के दौरान दोस्ती हुई, जिसने हमारी ऑनस्क्रीन केमिस्ट्री मजबूत बनाई। संचिता बसु: पहली बार मिले तो धवल बहुत शांत लगे। बाद में पता चला कि वे बेहद अच्छे इंसान हैं। दो साल साथ काम करते-करते हमारी अंडरस्टैंडिंग इतनी अच्छी हो गई कि कई बार बिना बोले भी एक-दूसरे की बात समझ जाते हैं। सवाल: इस सीरीज तक पहुंचने का मौका कैसे मिला? जवाब/धवल ठाकुर: बॉम्बे शो स्टूडियोज से कॉल आया। किरदार की जानकारी और कुछ सीन भेजे गए। फिर सचिन सर और कमल सर से मुलाकात हुई। ऑडिशन दिया और चयन हो गया। संचिता बसु: उस समय मैं हैदराबाद में तेलुगु फिल्म की शूटिंग कर रही थी। जियो हॉटस्टार की तरफ से ऑडिशन का मेल आया। मैंने वहीं से ऑडिशन रिकॉर्ड कर भेजा और करीब 15 दिन बाद सिलेक्शन का कॉल आया। सवाल: सोशल मीडिया से फिल्मों तक का सफर कैसे शुरू हुआ? जवाब/संचिता बसु: मैंने कभी नहीं सोचा था कि एक्टिंग मेरा करियर बनेगी। नौवीं क्लास में शौक से वीडियो बनाती थी। शुरुआत में महीनों तक व्यूज नहीं आए, लेकिन वीडियो बनाना नहीं छोड़ा। फिर एक दिन वीडियो वायरल हुआ और वहीं से जिंदगी बदलने लगी। इसी दौरान मेरी रील्स देखकर मुझे एक तेलुगु फिल्म का ऑफर मिला। शुरुआत में लगा कि यह फेक कॉल है, क्योंकि आजकल ऐसे कई फर्जी कॉल आते हैं। यकीन नहीं हुआ कि कोई फिल्म के लिए बुला रहा है। लेकिन मेरे मैनेजर और कास्टिंग डायरेक्टर नवनीत झा ने भरोसा दिलाया कि सब कुछ असली है। सबसे दिलचस्प बात यह थी कि जिस फिल्म के लिए मुझे चुना गया, उसकी शूटिंग पहले दूसरी अभिनेत्री के साथ पूरी हो चुकी थी। बाद में मेकर्स ने नया चेहरा लेने का फैसला किया और पूरी फिल्म मेरे साथ दोबारा शूट की। उस वक्त मैं 11वीं क्लास में पढ़ती थी। भागलपुर से हैदराबाद शूटिंग के लिए जाती थी और लौटकर ऑनलाइन परीक्षा भी देती थी। मेरे लिए यह किसी सपने से कम नहीं था। सवाल: धवल, आपकी बहन मृणाल ठाकुर पहले से इंडस्ट्री में हैं। इसके बावजूद क्या आपने अपने स्ट्रगल के दौरान फेक ऑडिशन या कास्टिंग स्कैम का सामना किया? जवाब/धवल ठाकुर: बिल्कुल। मैं कास्टिंग स्कैम का शिकार होते-होते बचा हूं। कॉलेज के दिनों में सोशल मीडिया पर कास्टिंग पोस्ट देखकर ऑडिशन देने पहुंचा। वहां 10, 15 और 20 हजार रुपए के पैकेज दिखाए गए। कहा गया कि पहले पोर्टफोलियो और कार्ड बनवाइए, तभी काम मिलेगा। मेरे साथ ऐसा दो बार हुआ। तभी समझ आया कि यह ऑडिशन नहीं, नए कलाकारों से पैसे ऐंठने का तरीका है। बाद में कुछ एक्टर्स मिले, जिन्होंने मुझे जेन्युइन कास्टिंग ग्रुप से जोड़ा। वहीं से सही ऑडिशन मिलने शुरू हुए। मैं नए कलाकारों से कहना चाहूंगा कि ऑडिशन के नाम पर कभी पैसे न दें। असली कास्टिंग डायरेक्टर कभी पैसे नहीं मांगते। सवाल: संचिता आपको परिवार का साथ कितना मिला? जवाब/संचिता बसु: मम्मी हमेशा मेरे साथ खड़ी रहीं। लेकिन पापा को काफी समय तक पता नहीं था कि मैं वीडियो बनाती हूं। कोरोना के दौरान ज़ी म्यूजिक के एक गाने में मौका मिला। अखबार में खबर छपने के बाद उन्हें पहली बार पता चला कि मैं इस फील्ड में काम कर रही हूं। शुरुआत में उन्हें चिंता थी, लेकिन ‘ठुकरा के मेरा प्यार’ रिलीज होने के बाद उनका नजरिया पूरी तरह बदल गया। सवाल: इस सीरीज के बाद मिला सबसे खास कॉम्प्लिमेंट कौन-सा था? जवाब/संचिता बसु: मेरे लिए सबसे खास कॉम्प्लिमेंट पापा का था। उन्होंने पूरी सीरीज देखने के बाद सिर्फ इतना कहा, “बहुत अच्छा किया।” वो ज्यादा बोलते नहीं हैं, लेकिन उनकी आंखों की खुशी ही मेरे लिए सबसे बड़ा इनाम थी। धवल ठाकुर: परिवार ने कहा कि स्क्रीन पर मुझे देखकर बिल्कुल नहीं लगा कि मैं धवल हूं। ऐसा लगा जैसे उत्तर प्रदेश के किसी गांव का लड़का सामने खड़ा है। एक अभिनेता के लिए इससे बड़ा कॉम्प्लिमेंट नहीं हो सकता। सवाल: शूटिंग का सबसे मजेदार किस्सा कौन-सा रहा? जवाब/संचिता बसु: पहले सीजन के लिए मुझे बाइक चलाना सीखना पड़ा। शूटिंग के दौरान मैं कई बार बाइक से गिर गई। जब भी धवल पीछे बैठते थे, मैं उनसे कहती थी, “जब मैं बोलूं, तुरंत ब्रेक दबा देना।” धवल ठाकुर (हंसते हुए): मैं उनसे कहता था, “मेरे पैर लंबे हैं, मुझे कुछ नहीं होगा। तू बस अपनी चिंता कर।” पूरी यूनिट को पता था कि मुझे बाइक चलाने का ज्यादा अनुभव नहीं था। जिस दिन बाइक वाला सीन होता था, सब पहले से अलर्ट रहते थे। सवाल: दो सीजन साथ काम करने के बाद आपने एक-दूसरे से क्या सीखा? जवाब/संचिता बसु: दो साल साथ काम करने के बाद हम एक-दूसरे को अच्छी तरह समझने लगे हैं। धवल से मैंने सीखा कि किसी भी सीन को करते समय पहले उसकी जरूरत समझनी चाहिए। तब अभिनय अपने आप आसान हो जाता है। धवल ठाकुर: संचिता की सबसे अच्छी बात यह है कि उन्हें कोई नई चीज बताई जाए तो वह उसे सीखने की पूरी कोशिश करती हैं। मैंने उनसे शूटिंग के साथ सोशल मीडिया मैनेज करना सीखा। छुट्टी वाले दिन भी वह खुद रील शूट, एडिट और पोस्ट करती थीं। उनकी मेहनत मैंने बहुत









