धुरंधर 2 ने दुनियाभर में ₹500 करोड़ कमाए:तीसरे दिन ₹113 करोड़ का कलेक्शन किया, जवान-बाहुबली 2 और दंगल को पीछे छोड़ा

रणवीर सिंह की फिल्म धुरंधर 2 ने रिलीज के तीसरे दिन यानी शनिवार को भारत में 113 करोड़ रुपए की कमाई की। फिल्म का पेड प्रीव्यू समेत तीन दिनों में फिल्म का कुल कलेक्शन 339.27 करोड़ रुपए हो गया। 19 मार्च को रिलीज हुई इस फिल्म ने दुनियाभर में 500 करोड़ रुपए की कमाई कर ली और तीसरे दिन कमाई के मामले में जवान, बाहुबली 2 और दंगल जैसी बड़ी फिल्मों को पीछे छोड़ दिया। फिल्म ने अब तक विदेशों में करीब 96.50 करोड़ रुपए कमाए हैं, जिसके चलते दुनियाभर में फिल्म का कुल कलेक्शन 501.04 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। भारत में तीन दिन का नेट कलेक्शन पेड प्रीव्यू शो (बुधवार): 43 करोड़ रुपए गुरुवार: 102.55 करोड़ रुपए शुक्रवार: 80.72 करोड़ रुपए शनिवार: 113 करोड़ रुपए कुल: 339.27 करोड़ रुपए तीसरे दिन हिंदी वर्जन ने रिकॉर्ड कमाई की तीसरे दिन 20,917 शोज में फिल्म की 81.6% ऑक्यूपेंसी रही। हिंदी वर्जन ने 105 करोड़ के साथ सबसे ज्यादा कमाई की। वहीं, तेलुगु में 5 करोड़ और तमिल में 2.95 करोड़ का कलेक्शन हुआ। धुरंधर 2 ने तीसरे दिन बॉक्स ऑफिस पर शानदार कमाई करते हुए 7 फिल्मों का रिकॉर्ड तोड़ दिया। धुरंधर 2 ने सिर्फ तीन दिनों में 339.27 करोड़ रुपए कमाए, जिसमें से हिंदी वर्जन ने 105 करोड़ रुपए का बिजनेस किया। अगर तुलना करें तो इसके पहले पार्ट ‘धुरंधर’ ने तीसरे दिन सिर्फ 51.60 करोड़ रुपए कमाए थे। अल्लू अर्जुन की ‘पुष्पा 2 ने भले ही तीसरे दिन 142.59 करोड़ रुपए कमाए हों, लेकिन पहले शनिवार को फिल्म के हिंदी वर्जन की कमाई सिर्फ 88.20 करोड़ रुपए रही थी। इसके अलावा कई बड़ी फिल्मों के आंकड़े भी पीछे रह गए। आमिर खान की ‘दंगल’ ने पहले शनिवार को हिंदी में 33.93 करोड़ रुपए, यश की ‘केजीएफ चैप्टर 2’ ने 42.90 करोड़, शाहरुख खान की ‘जवान’ ने 82.46 करोड़ रुपए और प्रभास की ‘बाहुबली 2’ ने तीसरे दिन 46.50 करोड़ रुपए का कलेक्शन किया था। जबकि RRR ने 31.50 करोड़ रुपए की कमाई की थी। धुरंधर 2 में रणवीर सिंह के अलावा अर्जुन रामपाल, संजय दत्त और आर माधवन भी हैं। फिल्म के राइटर, डायरेक्टर आदित्य धर हैं। ज्योति देशपांडे, लोकेश धर और आदित्य धर ने मिलकर फिल्म को प्रोड्यूस किया है। बी62 स्टूडियोज के बैनर तले बनी इस फिल्म को जियो स्टूडियोज ने प्रेजेंट किया है। धुरंधर को शानदार रिस्पॉन्स मिला था धुरंधर के पहले पार्ट ने भारत के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बॉक्स ऑफिस पर भी शानदार प्रदर्शन किया था। फिल्म ने दुनियाभर में करीब ₹1,307 करोड़ की कमाई की। भारत में फिल्म का ग्रॉस कलेक्शन ₹1,005.85 करोड़ रहा, जबकि नेट कलेक्शन लगभग ₹840 करोड़ हुआ। इसके साथ ही यह भारत में सबसे ज्यादा कमाई करने वाली हिंदी सिंगल-लैंग्वेज फिल्म बन गई। विदेशी बाजारों में भी फिल्म धुरंधर को जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला। ओवरसीज में इसने करीब ₹299.5 करोड़ का कारोबार किया। खासतौर पर अमेरिका और कनाडा में फिल्म ने ₹193.06 करोड़ से ज्यादा की कमाई कर ‘बाहुबली 2’ का रिकॉर्ड भी पीछे छोड़ दिया। दिलचस्प बात यह है कि बड़ी सफलता फिल्म को तब मिली, जब इसे खाड़ी देशों में रिलीज की अनुमति नहीं मिली थी। इसके अलावा ‘धुरंधर’ भारतीय सिनेमा की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली ‘A’ रेटेड फिल्म भी बन गई। ……..……..……..…….. धुरंधर 2 से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… धुरंधर 2 रिव्यू; रणवीर की फिर दमदार परफॉर्मेंस: नोटबंदी और राजनीतिक कड़ियों से जुड़ी कहानी, जानिए कैसी है फिल्म रणवीर सिंह की फिल्म ‘धुरंधर: द रिवेंज’ यानी धुरंधर 2 पहले पार्ट की ब्लॉकबस्टर सफलता के बाद बड़े स्केल पर लौटी है। इस बार फिल्म सिर्फ गैंगवार या बदले की कहानी नहीं रहती, बल्कि नोटबंदी से लेकर देश की कई बड़ी घटनाओं को जोड़ते हुए एक बड़ा नैरेटिव पेश करती है। पूरी खबर यहां पढ़ें…
कुरुक्षेत्र के तीन युवक उज्बेकिस्तान में किडनैप:बंधक बनाकर रखा, टॉर्चर किया; 45 लाख की फिरौती लेकर छोड़े, एजेंट ने भेजना था स्पेन

कुरुक्षेत्र जिले में तीन युवक को स्पेन भेजने का झांसा देकर एजेंट ने उज्बेकिस्तान में किडनैप करवा दिया। यहां किडनैपर्स ने 3 दिन तक उनको हाथ-पांव बांधकर रखा और टॉर्चर किया। उन्होंने टॉर्चर की वीडियो दिखाकर परिवार से 45 लाख रुपए की फिरौती मांगी। किडनैपर्स ने परिवार को वीडियो कॉल पर धमकाया कि उन्होंने एजेंट से इन तीनों को खरीदा है। अगर उनकी मांग पूरी नहीं हुई तो उनके बच्चों को मार देंगे। परिवार से 45 लाख रुपए की फिरौती वसूलने के बाद अगले दिन तीनों को छोड़ा गया। एजेंट ने उज्बेकिस्तान से स्पेन का वीजा लगवाने का भरोसा दिया था। 15 लाख रुपए में बात तय सुनील कुमार का बेटा मोहन लाल, कुलदीप सिंह का बेटा बहादुर सिंह ओर सोमप्रकाश का बेटा मनदीप है। तीनों कुरुक्षेत्र के रहने वाले हैं। सुनील कुमार, कुलदीप सिंह और सोम प्रकाश ने बताया कि, मोहन लाल, बहादुर सिंह और मनदीप को स्पेन भेजने की बात हुई थी। आरोपी एजेंट प्रेम सैनी, उसकी पत्नी अनीता रानी और उनके साथी अकरम खान व अली ने उन तीनों से 15-15 लाख रुपए मांगे थे। इसमें 2-2 लाख एडवांस, बाकी पेमेंट स्पेन पहुंचने पर देना तय हुआ था। स्पेन की जगह उज्बेकिस्तान भेजा आरोपी एजेंट ने जनवरी 2026 में पासपोर्ट के साथ तीनों परिवार से 2-2 लाख रुपए एडवांस लिए। पैसे लेकर आरोपी एजेंट ने बच्चों को जाने का रूट बदल दिया। आरोपी ने आश्वासन दिया कि सीधे स्पेन नहीं जा सकते। इसलिए पहले उज्बेकिस्तान, फिर अजरबैजान, उसके बाद उनको स्पेन भेजा जाएगा। 16 फरवरी को करवाई फ्लाइट आरोपी ने 9 फरवरी को उज्बेकिस्तान का वीजा दिया और 16 फरवरी को फ्लाइट करवा दी। 15 फरवरी की शाम को परिवार तीनों को लेकर दिल्ली के महिपालपुर होटल पहुंचे। यहां अकरम खान और अली ने युवकों के पासपोर्ट-टिकट देखे और फोटो लेकर उज्बेकिस्तान में उनके लोग होने का दावा किया। साथ ही आश्वासन दिया कि उनके लोग तीनों युवकों को रिसीव कर लेंगे। 16 फरवरी शाम 4 बजे तीनों युवक उज्बेकिस्तान पहुंच गए। एयरपोर्ट पर अकबर खान और दानिश खान नाम के दो लोग आए। उन्होंने एजेंट प्रेम सैनी, अकरम और अली का हवाला दिया और अपने साथ लेकर चले गए। दो दिन बाद 18 फरवरी को युवकों का फोन उनके पास आया। हाथ-पैर बांध किया टॉर्चर किडनैपर्स ने व्हाट्सएप पर वीडियो कॉल कर दिखाया कि उनके बच्चों के हाथ-पैर बांध रखे हैं और उनके साथ मारपीट की जा रही है। उसी दिन बाबा खान नाम के शख्स का फोन आया, जिसने धमकाया कि उसने तुम्हारे बच्चों को प्रेम सैनी, अकरम और अली से खरीद लिया है। 45 लाख रुपए मांगे उसने धमकाते हुए 45 लाख रुपए की फिरौती मांगी और कहा कि पैसे नहीं तो जान खतरे में। वे घबरा गए और प्रेम सैनी से बातचीत की। आरोपी एजेंट ने कहा कि उनको पैसे दे दो, हम बच्चों को छुड़वा लेंगे। 20 फरवरी उन्होंने 45 लाख रुपए आरोपियों को दे दिए। अगले ही दिन आरोपियों ने बच्चों को छोड़ दिया और टिकट करवाने की बात कही। पुलिस ने किया मामला दर्ज परिवार ने उसी दिन उनकी टिकट करवाई और अगले ही दिन तीनों बच्चे सुरक्षित घर वापस आ गए। उन्होंने आरोपी एजेंट से अपने पैसे वापस मांगे, लेकिन उन्होंने पैसे देने से साफ इनकार कर दिया। अब शिकायत पर पुलिस ने थाना कृष्णा गेट में आरोपी एजेंट पर केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी।
भाजपा ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ता को बनाया पदाधिकारी:कांग्रेस ने कहा कार्यकर्ताओं की कमी, भाजपा ने नाम बदलने की बात कही

सीहोर में भाजपा की नगर मंडल कार्यसमिति की सूची जारी होते ही विवाद खड़ा हो गया। जिला अध्यक्ष नरेश मेवाड़ा के सोशल मीडिया पेज से जारी सूची में कई नामों को लेकर आपत्ति सामने आई। नगर मंडल अध्यक्ष सुदीप प्रजापति द्वारा जारी सूची में अर्चना लाखन चौरसिया को उपाध्यक्ष बनाया गया है। वे महिला एवं बाल विकास विभाग में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के रूप में कार्यरत हैं। कांग्रेस ने सरकारी कर्मचारियों पर दबाव का आरोप लगाया कांग्रेस ने इस नियुक्ति को हास्यास्पद और निंदनीय बताया। पार्टी का कहना है कि इससे भाजपा में कार्यकर्ताओं की कमी और आंतरिक खींचतान उजागर होती है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकारी कर्मचारियों पर राजनीतिक कार्य के लिए दबाव बनाती है और अब उन्हें खुले तौर पर पदाधिकारी बनाया जा रहा है, जो नियमों के खिलाफ है। वहीं इस मामले में भाजपा ने सफाई देते हुए कहा कि संबंधित पदाधिकारी का नाम बदल दिया गया है।
सफेद कद्दूू के जूस में छिपा है ये राज, पीने से दिमाग होता है तेज, पाचन तंत्र ठीक से करता है काम, एक्सपर्ट ने बताया

Last Updated:March 22, 2026, 08:45 IST आयुर्वेद चिकित्सक डॉक्टर संतोष कुमार श्रीवास्तव बताते हैं कि कद्दू कई प्रकार के होते हैं. जिनमें मुख्य रूप से हर कद्दू और सफेद कद्दू होता है. ज्यादातर कद्दू की सब्जी बनाई जाती है और सफेद कद्दू पेठा बनाने के लिए काफी फेमस होता है, लेकिन यदि सफेद कद्दू का जूस बनाकर पिया जाए तो इससे पाचन तंत्र मजबूत होता है. क्योंकि इसमें मौजूद फाइबर पाचन क्रिया को सफल बनाते हैं. मेडिकल कॉलेज सुल्तानपुर में कार्यरत आयुर्वेद चिकित्सक डॉक्टर संतोष कुमार श्रीवास्तव बताते हैं कि कद्दू कई प्रकार के होते हैं. जिनमें मुख्य रूप से हर कद्दू और सफेद कद्दू होता है. ज्यादातर कद्दू की सब्जी बनाई जाती है और सफेद कद्दू पेठा बनाने के लिए काफी फेमस होता है. लेकिन यदि सफेद कद्दू का जूस बनाकर पिया जाए तो इससे पाचन तंत्र मजबूत होता है, क्योंकि इसमें मौजूद फाइबर पाचन क्रिया को सफल बनाते हैं. चूंकि इसमें लगभग 95% पानी होता है. इससे यह शरीर में ठंडक प्रदान करता है और डिटॉक्स करता है. इसके साथ ही शरीर के विषाक्त पदार्थों को भी बाहर करने का काम करता है. शरीर को डिटॉक्स करने से ठंडक मिलती है और यह ठंडक प्रदान करने में काफी कारगर सिद्ध होता है. सफेद कद्दू एक ऐसा औषधि फल होता है जो जूस के सेवन करने पर लोगों के मन को साथ बनता है और दिमाग चलने की प्रक्रिया को भी नियंत्रित करता है इसके साथ ही संतुलन की गुण होने की वजह से या दिमाग को तेज और प्रखर बनाने का काम करता है इसमें कई ऐसे पोषक तत्व होते हैं जो माइंड को शार्प करते हैं. Add News18 as Preferred Source on Google सफेद कद्दू में कैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं जो शरीर को स्वस्थ रखने में काफी मदद करते हैं. इसमें विटामिन, मिनरल, विटामिन सी, बी कॉम्प्लेक्स, नियासिन, थियामिन, राइबोफ्लेविन, आयरन, कैल्शियम, जिंक, पोटैशियम, मैग्नीशियम, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट्स, डाइटरी फाइबर आदि भरपूर होते हैं. सफेद कद्दू को ऐश गार्ड भी कहा जाता है. इसे खाने से शरीर में ऊर्जा आती है. यह धड़कनों को शांत रखता है. और इसमें विटामिन बी3 होने के कारण ये फूड को इस्तेमाल किए जाने वाले एनर्जी में बदल कर एनर्जी मेटाबॉलिज्म में मुख्य भूमिका निभाता है.जिसे शरीर में एनर्जी का लेवल बढ़ जाता है और थकान दूर होती है इसके साथ या स्ट्रेस कम करने मेंभी काफी मदद करता है. जिन लोगों को एनीमिया, शारीरिक कमजोरी है उनको सफेद कद्दू का सेवन करना चाहिए सफेद कद्दू के यदि जूस को नियमित रूप से किया जाए तो शरीर में रक्त की कमी दूर हो जाएगी और एनीमिया से लोगों को काफी राहत मिलेगी इसके साथ ही जिन लोगों को एनीमिया हुआ है उनमें एनर्जी लेवल को बढ़ जाएगा और थकान दूर हो जाएगी. सफेद कद्दू में शरीर को शांत रखने और शीतलता प्रदान करने की क्षमता होती है ऐसे में जिन लोगों को सर्दी और जुकाम की समस्या होती है उन लोगों को इसके जूस का सेवन करने से बचना चाहिए यदि वह इसका सेवन कर रहे हैं तो काली मिर्च और शहद मिलाकर सफेद कद्दू के जूस का सेवन करें. ऐसा करने से कूलिंग इफेक्ट काफी हद तक कम हो जाता है. अगर आप सफेद कद्दू का जूस बनाना चाहते हैं तो आपको जूस बनाने के लिए एक सफेद कद्दू को काट लें. मिक्सी में डालकर इसे ब्लेंड कर लें. इसे एक गिलास में छान लें. इसमें नींबू का रस, चुटकी भर काली मिर्च पाउडर, नमक स्वादानुसार डालें, मिलाएं और पी जाएं. या आपके लिए काफी फायदेमंद होगा. First Published : March 22, 2026, 08:45 IST
मैहर में घर के आंगन में घुसा मगरमच्छ:वन विभाग ने सुरक्षित रेस्क्यू कर बाणसागर बांध में छोड़ा

मैहर जिले के अमरपाटन वन परिक्षेत्र के ग्राम हर्रई टटेहरा टोला में शनिवार शाम एक मगरमच्छ खेत में बने एक घर के आंगन में घुस गया। मगरमच्छ को देखकर ग्रामीणों ने तुरंत वन विभाग को सूचना दी। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। मुकुंदपुर रेस्क्यू सेंटर की विशेषज्ञ टीम को भी बुलाया गया। टीम ने सावधानीपूर्वक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया और मगरमच्छ को सुरक्षित पकड़ लिया। रेस्क्यू कर बाणसागर बांध के सुरक्षित क्षेत्र में छोड़ा रेस्क्यू के बाद मगरमच्छ को वाहन से ले जाकर बाणसागर बांध के सुरक्षित क्षेत्र में छोड़ दिया गया। इस अभियान में मुकुंदपुर रेस्क्यू सेंटर के रेस्क्यू इंचार्ज अभिषेक विश्वकर्मा, परिक्षेत्र सहायक रामनिहोर वर्मा, अखिलेश मिश्रा, सीताराम पाल, पप्पू कोल, मोहित सिंगरहा और आशीष रैकवार शामिल थे। वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि ऐसी स्थिति में घबराएं नहीं और तत्काल विभाग को सूचित करें।
वर्ल्ड इंडोर चैंपियनशिप में अमेरिका के जॉर्डन एंथनी का गोल्ड:60 मीटर की दौड़ 6.41 सेकंड में पूरा किया; नौ महीने पहले फुटबॉल छोड़ा

ट्रैक एंड फील्ड की दुनिया में एक नई स्प्रिंट सनसनी उभरकर सामने आई है। अमेरिका के 21 वर्षीय जॉर्डन एंथनी ने वर्ल्ड इंडोर चैम्पियनशिप की 60 मीटर दौड़ में गोल्ड जीतकर न सिर्फ इतिहास रचा, बल्कि अपनी संघर्ष भरी कहानी से सभी को प्रेरित भी किया। एंथनी ने 6.41 सेकंड का समय निकाला, जो इतिहास का चौथा सबसे तेज समय है। रेस से सिर्फ 36 घंटे पहले उन्हें गंभीर समस्या का सामना करना पड़ा था। पोलैंड पहुंचने के बाद डोप टेस्ट के दौरान एक अधिकारी ने जब खून लिया तो सुई नस में नहीं लगी, बल्कि बाहर लग गई, जिससे उनके हाथ में ब्लड क्लॉट हो गया। वे अपना हाथ ठीक से हिला भी नहीं पा रहे थे। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और दर्द के साथ ही मैदान में उतरने का फैसला किया। नौ महीने पहले फुटबॉल छोड़कर चुना एथलेटिक्स जॉर्डन एंथनी की कहानी और भी खास इसलिए है क्योंकि उन्होंने महज नौ महीने पहले ही पेशेवर एथलेटिक्स में कदम रखा है। इससे पहले वे कॉलेज फुटबॉल में अर्कांसस रेजरबैक्स टीम से खेलते थे। जब उनसे पूछा गया कि उन्होंने एनएफएल का सपना क्यों छोड़ा, तो उन्होंने साफ कहा, ‘क्योंकि यहां कोई मुझे टक्कर मारने के लिए मेरी तरफ नहीं दौड़ रहा है।’ रोमांचक रहा फाइनल, 0.01 सेकंड से चूके अजू रोमांचक फाइनल में कांटे की टक्कर दिखी। जमैका के किशाने थॉम्पसन ने 6.45 सेकंड के साथ सिल्वर मेडल जीता, जबकि अमेरिका के ट्रेवॉन ब्रोमेल ने भी 6.45 सेकंड के साथ ब्रॉन्ज हासिल किया। इसका फैसला फोटो फिनिश से हुआ। ब्रिटेन के जेरमायाह अजू महज 0.01 सेकंड से मेडल से चूक गए। ओलिंपिक चैम्पियन लायल्स के साथ ट्रेनिंग एंथनी 100 मीटर के ओलिंपिक चैम्पियन नोआ लायल्स के ट्रेनिंग ग्रुप का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा, ‘मैं दूसरों की रेस देखता हूं। यह ठीक वैसा ही है जैसे फुटबॉल में हम दूसरी टीम का विश्लेषण करते हैं। ट्रैक एंड फील्ड में कई लोग ऐसा नहीं करते, लेकिन मैं माइंड गेम पर ध्यान देता हूं। मुझे पता होता है कि सामने वाला क्या अच्छा करता है और क्या नहीं।’ डेब्यू में जीता गोल्ड, अब घरेलू ओलिंपिक पर नजर इस जीत से एंथनी का आत्मविश्वास बढ़ गया है। उन्होंने कहा, ‘सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मैंने डेब्यू में गोल्ड जीता और इसे अमेरिका लेकर जा रहा हूं। मैंने कॉलेज फुटबॉल में ज्यादा दर्शकों के सामने खेला है, लेकिन यहां आकर मैं ज्यादा उत्साहित था। यह मेरे लिए आसान लगा।’ अब उनका अगला लक्ष्य लॉस एंजिलिस ओलिंपिक 2028 में गोल्ड जीतना है। ——————————– स्पोर्ट्स की यह खबर भी पढ़ें… आकाश दीप IPL 2026 से बाहर हुए:KKR के पेसर इंजरी के कारण नहीं खेलेंगे; मेगा ऑक्शन में एक करोड़ में खरीदा था कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) को IPL 2026 से पहले एक और झटका लगा है। टीम के तेज गेंदबाज आकाश दीप पूरे सीजन से बाहर हो गए हैं। शनिवार को क्रिकेट वेबसाइट क्रिकबज को फ्रेंचाइजी के एक अधिकारी ने इसकी पुष्टि की। पूरी खबर
'साइको सैया’ के अनुद सिंह ढाका बोले:क्लैपरबॉय था, इरफान खान ने कहा- तुम्हें एक्टर बनना ही चाहिए

एक्टर अनुद सिंह ढाका, जो वेब सीरीज ‘साइको सैया’ में अपने दमदार अभिनय से दर्शकों का ध्यान खींच रहे हैं, ने हाल ही में अपने करियर, अनुभव और अभिनय यात्रा पर खुलकर बातचीत की। बचपन से ही एक्टिंग का शौक रखने वाले अनुद ने बताया कि कैसे मशहूर अभिनेता इरफान खान ने उन्हें पहली बार देखा और उनके अभिनय में छुपी क्षमता को देखकर कहा, ‘तुझे एक्टर बनना चाहिए।’ ‘साइको सैया’ में अपने किरदार के लिए अनुद ने मेहनत के साथ-साथ सह-कलाकारों जैसे रवि किशन, तेजस्वी प्रकाश, सुरभि चंदना और सृष्टि श्रीवास्तव के साथ काम करने के अनुभव को भी बेहद प्रेरणादायक बताया। आपकी जर्नी कैसी रही एक छोटे शहर से मुंबई तक और एक्टिंग का फैसला कैसे लिया? मैं बचपन से ही एक्टर बनना चाहता था। शीशे के सामने खड़े होकर खुद को हीरो समझता था, हालांकि आज पुरानी फोटो देखता हूं तो लगता है कि काफी गलतफहमी थी। परिवार को भी अंदाजा था कि मैं एक्टिंग की तरफ झुक रहा हूं, लेकिन मैं IIT की तैयारी भी कर रहा था और चाहता था कि मुंबई जाऊं। आखिरकार IIT नहीं हुआ, तो मैंने पढ़ाई जारी रखी और फिर 2013 में भोपाल से मुंबई आ गया। शुरुआत आसान नहीं थी न पैसे, न कोई खास सपोर्ट। कई बार जमीन पर सोकर दिन गुजारे। लेकिन एक मकसद था कि एक्टिंग ही करनी है, इसलिए कभी बैकअप प्लान नहीं रखा। मुंबई आने के बाद मैंने सेंट जेवियर्स कॉलेज से पढ़ाई की, स्कॉलरशिप पर गुजारा किया और साथ-साथ समझा कि इंडस्ट्री कैसे काम करती है। धीरे-धीरे छोटे-छोटे काम, ऑडिशन और स्ट्रगल करते हुए आज यहां तक पहुंचा हूं। स्ट्रगल के दौरान ऐसा कोई मोड़ आया जिसने आपको भरोसा दिलाया कि आप सही रास्ते पर हैं? एक बहुत बड़ा टर्निंग पॉइंट तब आया जब मुझे फिल्म ‘करीब करीब सिंगल’ में असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर काम करने का मौका मिला। वहीं मेरी मुलाकात इरफान खान से हुई। मैं उस समय एडी (क्लैपर बॉय) का काम कर रहा था। एक दिन उन्होंने मुझे देखा और बिना किसी संदर्भ के बुलाकर कहा ‘मुझे लगता है तुम्हें एक्टर होना चाहिए।’ सोचिए, एक ऐसा इंसान जिसे आप आदर्श मानते हैं, वो अचानक आपसे ये कह दे तो आप हिल जाते हो। उन्होंने मजाक में ये भी कहा कि ‘एक्टर्स गधे होते हैं’, लेकिन उसी के साथ उन्होंने मुझे पुश भी किया कि मैं एक्टिंग करूं। उनकी उस एक बात ने मेरे अंदर का सारा डाउट खत्म कर दिया। उसके बाद मैंने कभी ये नहीं सोचा कि मुझे कुछ और करना चाहिए। शुरुआत में करियर कैसे आगे बढ़ा और पहले मौके कैसे मिले? शुरुआत में मैं ऑडिशन देता रहा और सर्वाइव करने के लिए अलग-अलग काम किए जैसे डिज्नी के लिए कार्टून लिखना, जिससे किराया निकलता था। फिर मुझे फिल्म Super 30 में छोटा सा रोल मिला, जिसमें मेरे किरदार का नाम भी नहीं था ‘रघुनाथ का चमचा’। लेकिन वहीं से शुरुआत हुई। उसके बाद छिछोरे मिली, जहां मैं बैकग्राउंड में था और कोशिश करता था कि स्क्रीन पर दिख जाऊं। इन छोटे-छोटे कामों से जो पैसे मिले, उनसे कुछ महीनों का गुजारा होता गया। फिर ताजमहल 1989 जैसे प्रोजेक्ट्स मिले और धीरे-धीरे पहचान बननी शुरू हुई। आपका पहला बड़ा ब्रेक क्या रहा और कब लगा कि लोग पहचानने लगे हैं? ईमानदारी से कहूं तो मुझे आज भी लगता है कि वो बड़ा ब्रेक अभी आना बाकी है। लेकिन जनहित में जारी, ताजमहल 1989 और लफंगे जैसे प्रोजेक्ट्स मेरे लिए बहुत अहम रहे। 2020 में जब मेरा काम नेटफ्लिक्स पर आया और आर्टिकल्स में मेरा नाम आने लगा, तब लगा कि शायद सही रास्ते पर हूं। फिर भी मैं इसे फाइनल मंजिल नहीं मानता अभी बहुत कुछ सीखना और करना बाकी है। ‘सईया साइको’ जैसे प्रोजेक्ट तक आप कैसे पहुंचे और आपको यह रोल कैसे मिला? यह रोल मुझे ऑडिशन के जरिए मिला। लेकिन मैंने थोड़ा अलग तरीका अपनाया। आमतौर पर जो मोनोलॉग होता है, उसे लोग ट्राइपॉड लगाकर कैमरे के सामने एक्ट करते हैं। मैंने सोचा, क्यों न कुछ अलग किया जाए। मैंने अपने फोन का फ्रंट कैमरा ऑन किया और सीधे उसमें एक्ट करके कास्टिंग डायरेक्टर को भेज दिया। मैंने कहा, ‘यह वह जोन है जहां मुझे लगता है कि यह कैरेक्टर होगा।’ पहले तो लगा शायद यह एक्सपेरिमेंट गलत पड़ गया, लेकिन अंततः उसी ऑडिशन पर मेरा सिलेक्शन हो गया। सेट पर काम करने का अनुभव कैसा रहा? आपके को‑स्टार्स और क्रू के साथ कैसा लगा? बिलकुल शानदार! रवि किशन के साथ काम करना अलग ही अनुभव था। यार, वह इतनी एनर्जी और फिनोमिनल मैन हैं। शुरुआत में थोड़ा डर लगता है क्योंकि हर कोई उनके सामने इंटिमिडेटेड लगता है, लेकिन फिर समझ आता है कि वह बस अपनी टीम को रेस्क्यू करने के लिए हैं। हंसते हैं, मजाक करते हैं, और प्रोफेशनल भी हैं। तेजस्वी प्रकाश और सुरभि चंदना के साथ शूटिंग शानदार रही। सृष्टि श्रीवास्तव के बारे में कहना चाहूंगा कि वह बहुत ग्रेसफुल और टैलेंटेड एक्ट्रेस हैं। उनके साथ कभी रिटेक की जरूरत नहीं पड़ी क्योंकि हम दोनों परफॉर्मेंस में पूरी तरह सिंक थे।
'साइको सैया’ के अनुद सिंह ढाका बोले:क्लैपरबॉय था, इरफान खान ने कहा- तुम्हें एक्टर बनना ही चाहिए

एक्टर अनुद सिंह ढाका, जो वेब सीरीज ‘साइको सैया’ में अपने दमदार अभिनय से दर्शकों का ध्यान खींच रहे हैं, ने हाल ही में अपने करियर, अनुभव और अभिनय यात्रा पर खुलकर बातचीत की। बचपन से ही एक्टिंग का शौक रखने वाले अनुद ने बताया कि कैसे मशहूर अभिनेता इरफान खान ने उन्हें पहली बार देखा और उनके अभिनय में छुपी क्षमता को देखकर कहा, ‘तुझे एक्टर बनना चाहिए।’ ‘साइको सैया’ में अपने किरदार के लिए अनुद ने मेहनत के साथ-साथ सह-कलाकारों जैसे रवि किशन, तेजस्वी प्रकाश, सुरभि चंदना और सृष्टि श्रीवास्तव के साथ काम करने के अनुभव को भी बेहद प्रेरणादायक बताया। आपकी जर्नी कैसी रही एक छोटे शहर से मुंबई तक और एक्टिंग का फैसला कैसे लिया? मैं बचपन से ही एक्टर बनना चाहता था। शीशे के सामने खड़े होकर खुद को हीरो समझता था, हालांकि आज पुरानी फोटो देखता हूं तो लगता है कि काफी गलतफहमी थी। परिवार को भी अंदाजा था कि मैं एक्टिंग की तरफ झुक रहा हूं, लेकिन मैं IIT की तैयारी भी कर रहा था और चाहता था कि मुंबई जाऊं। आखिरकार IIT नहीं हुआ, तो मैंने पढ़ाई जारी रखी और फिर 2013 में भोपाल से मुंबई आ गया। शुरुआत आसान नहीं थी न पैसे, न कोई खास सपोर्ट। कई बार जमीन पर सोकर दिन गुजारे। लेकिन एक मकसद था कि एक्टिंग ही करनी है, इसलिए कभी बैकअप प्लान नहीं रखा। मुंबई आने के बाद मैंने सेंट जेवियर्स कॉलेज से पढ़ाई की, स्कॉलरशिप पर गुजारा किया और साथ-साथ समझा कि इंडस्ट्री कैसे काम करती है। धीरे-धीरे छोटे-छोटे काम, ऑडिशन और स्ट्रगल करते हुए आज यहां तक पहुंचा हूं। स्ट्रगल के दौरान ऐसा कोई मोड़ आया जिसने आपको भरोसा दिलाया कि आप सही रास्ते पर हैं? एक बहुत बड़ा टर्निंग पॉइंट तब आया जब मुझे फिल्म ‘करीब करीब सिंगल’ में असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर काम करने का मौका मिला। वहीं मेरी मुलाकात इरफान खान से हुई। मैं उस समय एडी (क्लैपर बॉय) का काम कर रहा था। एक दिन उन्होंने मुझे देखा और बिना किसी संदर्भ के बुलाकर कहा ‘मुझे लगता है तुम्हें एक्टर होना चाहिए।’ सोचिए, एक ऐसा इंसान जिसे आप आदर्श मानते हैं, वो अचानक आपसे ये कह दे तो आप हिल जाते हो। उन्होंने मजाक में ये भी कहा कि ‘एक्टर्स गधे होते हैं’, लेकिन उसी के साथ उन्होंने मुझे पुश भी किया कि मैं एक्टिंग करूं। उनकी उस एक बात ने मेरे अंदर का सारा डाउट खत्म कर दिया। उसके बाद मैंने कभी ये नहीं सोचा कि मुझे कुछ और करना चाहिए। शुरुआत में करियर कैसे आगे बढ़ा और पहले मौके कैसे मिले? शुरुआत में मैं ऑडिशन देता रहा और सर्वाइव करने के लिए अलग-अलग काम किए जैसे डिज्नी के लिए कार्टून लिखना, जिससे किराया निकलता था। फिर मुझे फिल्म Super 30 में छोटा सा रोल मिला, जिसमें मेरे किरदार का नाम भी नहीं था ‘रघुनाथ का चमचा’। लेकिन वहीं से शुरुआत हुई। उसके बाद छिछोरे मिली, जहां मैं बैकग्राउंड में था और कोशिश करता था कि स्क्रीन पर दिख जाऊं। इन छोटे-छोटे कामों से जो पैसे मिले, उनसे कुछ महीनों का गुजारा होता गया। फिर ताजमहल 1989 जैसे प्रोजेक्ट्स मिले और धीरे-धीरे पहचान बननी शुरू हुई। आपका पहला बड़ा ब्रेक क्या रहा और कब लगा कि लोग पहचानने लगे हैं? ईमानदारी से कहूं तो मुझे आज भी लगता है कि वो बड़ा ब्रेक अभी आना बाकी है। लेकिन जनहित में जारी, ताजमहल 1989 और लफंगे जैसे प्रोजेक्ट्स मेरे लिए बहुत अहम रहे। 2020 में जब मेरा काम नेटफ्लिक्स पर आया और आर्टिकल्स में मेरा नाम आने लगा, तब लगा कि शायद सही रास्ते पर हूं। फिर भी मैं इसे फाइनल मंजिल नहीं मानता अभी बहुत कुछ सीखना और करना बाकी है। ‘सईया साइको’ जैसे प्रोजेक्ट तक आप कैसे पहुंचे और आपको यह रोल कैसे मिला? यह रोल मुझे ऑडिशन के जरिए मिला। लेकिन मैंने थोड़ा अलग तरीका अपनाया। आमतौर पर जो मोनोलॉग होता है, उसे लोग ट्राइपॉड लगाकर कैमरे के सामने एक्ट करते हैं। मैंने सोचा, क्यों न कुछ अलग किया जाए। मैंने अपने फोन का फ्रंट कैमरा ऑन किया और सीधे उसमें एक्ट करके कास्टिंग डायरेक्टर को भेज दिया। मैंने कहा, ‘यह वह जोन है जहां मुझे लगता है कि यह कैरेक्टर होगा।’ पहले तो लगा शायद यह एक्सपेरिमेंट गलत पड़ गया, लेकिन अंततः उसी ऑडिशन पर मेरा सिलेक्शन हो गया। सेट पर काम करने का अनुभव कैसा रहा? आपके को‑स्टार्स और क्रू के साथ कैसा लगा? बिलकुल शानदार! रवि किशन के साथ काम करना अलग ही अनुभव था। यार, वह इतनी एनर्जी और फिनोमिनल मैन हैं। शुरुआत में थोड़ा डर लगता है क्योंकि हर कोई उनके सामने इंटिमिडेटेड लगता है, लेकिन फिर समझ आता है कि वह बस अपनी टीम को रेस्क्यू करने के लिए हैं। हंसते हैं, मजाक करते हैं, और प्रोफेशनल भी हैं। तेजस्वी प्रकाश और सुरभि चंदना के साथ शूटिंग शानदार रही। सृष्टि श्रीवास्तव के बारे में कहना चाहूंगा कि वह बहुत ग्रेसफुल और टैलेंटेड एक्ट्रेस हैं। उनके साथ कभी रिटेक की जरूरत नहीं पड़ी क्योंकि हम दोनों परफॉर्मेंस में पूरी तरह सिंक थे।
ओलावृष्टि-बारिश से रबी फसलें गिरीं, कांग्रेस ने मांगा मुआवजा

चानक हुई ओलावृष्टि और तेज बारिश से किसानों की तैयार रबी फसलें बर्बाद हो गईं। गेहूं, चना, सरसों की फसलें खेतों में गिर गईं। कई जगह बालियां टूट गईं। उत्पादन में भारी गिरावट की आशंका है। जिला कांग्रेस अध्यक्ष मोहित रघुवंशी ने शमशाबाद विधानसभा क्षेत्र के ग्राम ऑडिया, मुड़रा, परसोरा, हिनोतिया, सांगूल, ढांडोन पिपारिया में ओलावृष्टि प्रभावित इलाकों का दौरा किया। किसानों से मुलाकात की। नुकसान देखा। रघुवंशी ने कहा कि कटाई के समय आई आपदा से किसानों को बड़ा आर्थिक नुकसान हुआ है। खेतों में खड़ी फसलें जमीन पर गिर गईं। पानी और ओलों से दाने खराब होने का खतरा बढ़ा है। फसल सड़ने की आशंका है। रघुवंशी ने प्रशासन से कहा कि फसल नुकसान का सर्वे पारदर्शी तरीके से कराया जाए। मुआवजे की राशि जल्द किसानों के खातों में पहुंचे। किसान अगली फसल की तैयारी कर सकें। मुख्यमंत्री से अपील की गई कि प्रभावित किसानों के कृषि ऋण माफ किए जाएं। केसीसी जमा करने में छूट दी जाए। फसल बीमा का लाभ शीघ्र दिया जाए। जिला कांग्रेस मीडिया प्रभारी सुशील शर्मा ने बताया कि 23 मार्च को कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा जाएगा। किसानों को जल्द राहत देने की मांग की जाएगी। इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ता और ग्रामीणजन मौजूद रहे।
ग्वालियर में कॉन्स्टेबल को जिंदा जलाने की कोशिश:फर्जी कॉल कर DIAL-112 को बुलाया; पेट्रोल उड़ेलकर निकाली माचिस, पुलिसकर्मियों ने दबोचा

ग्वालियर के बेहट सर्कल के हस्तिनापुर थाना क्षेत्र में एक युवक ने झूठी सूचना देकर DIAL-112 को मौके पर बुलाया और फिर कॉन्स्टेबल पर पेट्रोल डालकर उसे जलाने की कोशिश की। समय रहते पुलिसकर्मी ने झपट्टा मारकर माचिस छीन ली, जिससे बड़ा हादसा टल गया। घटना शनिवार रात करीब 9 बजे ग्राम फदलपुर की है। यहां रहने वाले मनोज कुशवाह ने खुद के साथ मारपीट होने की सूचना दी थी। कॉल मिलते ही संयुक्त एफआरवी (हस्तिनापुर-उटीला थाना) मौके पर पहुंची। जांच में सामने आया कि युवक नशे में था और झूठी सूचना देकर पुलिस को बुलाया था। जब पुलिस टीम लौटने लगी, तभी उसने वाहन रोक लिया और अपने पास रखी पेट्रोल की बोतल कॉन्स्टेबल अनिल कुशवाह व एफआरवी पर उड़ेल दी। इसके बाद उसने जेब से माचिस निकालकर आग लगाने की कोशिश की, लेकिन पुलिसकर्मी ने तुरंत उसे काबू कर लिया। आरोपी ने पकड़े जाने के दौरान कॉन्स्टेबल से हाथापाई की और उसकी वर्दी फाड़ दी। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर हवालात में बंद कर दिया है। एएसपी विदिता डागर के अनुसार, झूठी सूचना देने और शासकीय कार्य में बाधा डालने सहित अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया है। पेट्रोल डालने की घटना की जांच की जा रही है।








