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'साइको सैया’ के अनुद सिंह ढाका बोले:क्लैपरबॉय था, इरफान खान ने कहा- तुम्हें एक्टर बनना ही चाहिए

'साइको सैया’ के अनुद सिंह ढाका बोले:क्लैपरबॉय था, इरफान खान ने कहा- तुम्हें एक्टर बनना ही चाहिए

एक्टर अनुद सिंह ढाका, जो वेब सीरीज ‘साइको सैया’ में अपने दमदार अभिनय से दर्शकों का ध्यान खींच रहे हैं, ने हाल ही में अपने करियर, अनुभव और अभिनय यात्रा पर खुलकर बातचीत की। बचपन से ही एक्टिंग का शौक रखने वाले अनुद ने बताया कि कैसे मशहूर अभिनेता इरफान खान ने उन्हें पहली बार देखा और उनके अभिनय में छुपी क्षमता को देखकर कहा, ‘तुझे एक्टर बनना चाहिए।’ ‘साइको सैया’ में अपने किरदार के लिए अनुद ने मेहनत के साथ-साथ सह-कलाकारों जैसे रवि किशन, तेजस्वी प्रकाश, सुरभि चंदना और सृष्टि श्रीवास्तव के साथ काम करने के अनुभव को भी बेहद प्रेरणादायक बताया। आपकी जर्नी कैसी रही एक छोटे शहर से मुंबई तक और एक्टिंग का फैसला कैसे लिया? मैं बचपन से ही एक्टर बनना चाहता था। शीशे के सामने खड़े होकर खुद को हीरो समझता था, हालांकि आज पुरानी फोटो देखता हूं तो लगता है कि काफी गलतफहमी थी। परिवार को भी अंदाजा था कि मैं एक्टिंग की तरफ झुक रहा हूं, लेकिन मैं IIT की तैयारी भी कर रहा था और चाहता था कि मुंबई जाऊं। आखिरकार IIT नहीं हुआ, तो मैंने पढ़ाई जारी रखी और फिर 2013 में भोपाल से मुंबई आ गया। शुरुआत आसान नहीं थी न पैसे, न कोई खास सपोर्ट। कई बार जमीन पर सोकर दिन गुजारे। लेकिन एक मकसद था कि एक्टिंग ही करनी है, इसलिए कभी बैकअप प्लान नहीं रखा। मुंबई आने के बाद मैंने सेंट जेवियर्स कॉलेज से पढ़ाई की, स्कॉलरशिप पर गुजारा किया और साथ-साथ समझा कि इंडस्ट्री कैसे काम करती है। धीरे-धीरे छोटे-छोटे काम, ऑडिशन और स्ट्रगल करते हुए आज यहां तक पहुंचा हूं। स्ट्रगल के दौरान ऐसा कोई मोड़ आया जिसने आपको भरोसा दिलाया कि आप सही रास्ते पर हैं? एक बहुत बड़ा टर्निंग पॉइंट तब आया जब मुझे फिल्म ‘करीब करीब सिंगल’ में असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर काम करने का मौका मिला। वहीं मेरी मुलाकात इरफान खान से हुई। मैं उस समय एडी (क्लैपर बॉय) का काम कर रहा था। एक दिन उन्होंने मुझे देखा और बिना किसी संदर्भ के बुलाकर कहा ‘मुझे लगता है तुम्हें एक्टर होना चाहिए।’ सोचिए, एक ऐसा इंसान जिसे आप आदर्श मानते हैं, वो अचानक आपसे ये कह दे तो आप हिल जाते हो। उन्होंने मजाक में ये भी कहा कि ‘एक्टर्स गधे होते हैं’, लेकिन उसी के साथ उन्होंने मुझे पुश भी किया कि मैं एक्टिंग करूं। उनकी उस एक बात ने मेरे अंदर का सारा डाउट खत्म कर दिया। उसके बाद मैंने कभी ये नहीं सोचा कि मुझे कुछ और करना चाहिए। शुरुआत में करियर कैसे आगे बढ़ा और पहले मौके कैसे मिले? शुरुआत में मैं ऑडिशन देता रहा और सर्वाइव करने के लिए अलग-अलग काम किए जैसे डिज्नी के लिए कार्टून लिखना, जिससे किराया निकलता था। फिर मुझे फिल्म Super 30 में छोटा सा रोल मिला, जिसमें मेरे किरदार का नाम भी नहीं था ‘रघुनाथ का चमचा’। लेकिन वहीं से शुरुआत हुई। उसके बाद छिछोरे मिली, जहां मैं बैकग्राउंड में था और कोशिश करता था कि स्क्रीन पर दिख जाऊं। इन छोटे-छोटे कामों से जो पैसे मिले, उनसे कुछ महीनों का गुजारा होता गया। फिर ताजमहल 1989 जैसे प्रोजेक्ट्स मिले और धीरे-धीरे पहचान बननी शुरू हुई। आपका पहला बड़ा ब्रेक क्या रहा और कब लगा कि लोग पहचानने लगे हैं? ईमानदारी से कहूं तो मुझे आज भी लगता है कि वो बड़ा ब्रेक अभी आना बाकी है। लेकिन जनहित में जारी, ताजमहल 1989 और लफंगे जैसे प्रोजेक्ट्स मेरे लिए बहुत अहम रहे। 2020 में जब मेरा काम नेटफ्लिक्स पर आया और आर्टिकल्स में मेरा नाम आने लगा, तब लगा कि शायद सही रास्ते पर हूं। फिर भी मैं इसे फाइनल मंजिल नहीं मानता अभी बहुत कुछ सीखना और करना बाकी है। ‘सईया साइको’ जैसे प्रोजेक्ट तक आप कैसे पहुंचे और आपको यह रोल कैसे मिला? यह रोल मुझे ऑडिशन के जरिए मिला। लेकिन मैंने थोड़ा अलग तरीका अपनाया। आमतौर पर जो मोनोलॉग होता है, उसे लोग ट्राइपॉड लगाकर कैमरे के सामने एक्ट करते हैं। मैंने सोचा, क्यों न कुछ अलग किया जाए। मैंने अपने फोन का फ्रंट कैमरा ऑन किया और सीधे उसमें एक्ट करके कास्टिंग डायरेक्टर को भेज दिया। मैंने कहा, ‘यह वह जोन है जहां मुझे लगता है कि यह कैरेक्टर होगा।’ पहले तो लगा शायद यह एक्सपेरिमेंट गलत पड़ गया, लेकिन अंततः उसी ऑडिशन पर मेरा सिलेक्शन हो गया। सेट पर काम करने का अनुभव कैसा रहा? आपके को‑स्टार्स और क्रू के साथ कैसा लगा? बिलकुल शानदार! रवि किशन के साथ काम करना अलग ही अनुभव था। यार, वह इतनी एनर्जी और फिनोमिनल मैन हैं। शुरुआत में थोड़ा डर लगता है क्योंकि हर कोई उनके सामने इंटिमिडेटेड लगता है, लेकिन फिर समझ आता है कि वह बस अपनी टीम को रेस्क्यू करने के लिए हैं। हंसते हैं, मजाक करते हैं, और प्रोफेशनल भी हैं। तेजस्वी प्रकाश और सुरभि चंदना के साथ शूटिंग शानदार रही। सृष्टि श्रीवास्तव के बारे में कहना चाहूंगा कि वह बहुत ग्रेसफुल और टैलेंटेड एक्ट्रेस हैं। उनके साथ कभी रिटेक की जरूरत नहीं पड़ी क्योंकि हम दोनों परफॉर्मेंस में पूरी तरह सिंक थे।

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एक्टर अनुद सिंह ढाका, जो वेब सीरीज ‘साइको सैया’ में अपने दमदार अभिनय से दर्शकों का ध्यान खींच रहे हैं, ने हाल ही में अपने करियर, अनुभव और अभिनय यात्रा पर खुलकर बातचीत की। बचपन से ही एक्टिंग का शौक रखने वाले अनुद ने बताया कि कैसे मशहूर अभिनेता इरफान खान ने उन्हें पहली बार देखा और उनके अभिनय में छुपी क्षमता को देखकर कहा, ‘तुझे एक्टर बनना चाहिए।’ ‘साइको सैया’ में अपने किरदार के लिए अनुद ने मेहनत के साथ-साथ सह-कलाकारों जैसे रवि किशन, तेजस्वी प्रकाश, सुरभि चंदना और सृष्टि श्रीवास्तव के साथ काम करने के अनुभव को भी बेहद प्रेरणादायक बताया। आपकी जर्नी कैसी रही एक छोटे शहर से मुंबई तक और एक्टिंग का फैसला कैसे लिया? मैं बचपन से ही एक्टर बनना चाहता था। शीशे के सामने खड़े होकर खुद को हीरो समझता था, हालांकि आज पुरानी फोटो देखता हूं तो लगता है कि काफी गलतफहमी थी। परिवार को भी अंदाजा था कि मैं एक्टिंग की तरफ झुक रहा हूं, लेकिन मैं IIT की तैयारी भी कर रहा था और चाहता था कि मुंबई जाऊं। आखिरकार IIT नहीं हुआ, तो मैंने पढ़ाई जारी रखी और फिर 2013 में भोपाल से मुंबई आ गया। शुरुआत आसान नहीं थी न पैसे, न कोई खास सपोर्ट। कई बार जमीन पर सोकर दिन गुजारे। लेकिन एक मकसद था कि एक्टिंग ही करनी है, इसलिए कभी बैकअप प्लान नहीं रखा। मुंबई आने के बाद मैंने सेंट जेवियर्स कॉलेज से पढ़ाई की, स्कॉलरशिप पर गुजारा किया और साथ-साथ समझा कि इंडस्ट्री कैसे काम करती है। धीरे-धीरे छोटे-छोटे काम, ऑडिशन और स्ट्रगल करते हुए आज यहां तक पहुंचा हूं। स्ट्रगल के दौरान ऐसा कोई मोड़ आया जिसने आपको भरोसा दिलाया कि आप सही रास्ते पर हैं? एक बहुत बड़ा टर्निंग पॉइंट तब आया जब मुझे फिल्म ‘करीब करीब सिंगल’ में असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर काम करने का मौका मिला। वहीं मेरी मुलाकात इरफान खान से हुई। मैं उस समय एडी (क्लैपर बॉय) का काम कर रहा था। एक दिन उन्होंने मुझे देखा और बिना किसी संदर्भ के बुलाकर कहा ‘मुझे लगता है तुम्हें एक्टर होना चाहिए।’ सोचिए, एक ऐसा इंसान जिसे आप आदर्श मानते हैं, वो अचानक आपसे ये कह दे तो आप हिल जाते हो। उन्होंने मजाक में ये भी कहा कि ‘एक्टर्स गधे होते हैं’, लेकिन उसी के साथ उन्होंने मुझे पुश भी किया कि मैं एक्टिंग करूं। उनकी उस एक बात ने मेरे अंदर का सारा डाउट खत्म कर दिया। उसके बाद मैंने कभी ये नहीं सोचा कि मुझे कुछ और करना चाहिए। शुरुआत में करियर कैसे आगे बढ़ा और पहले मौके कैसे मिले? शुरुआत में मैं ऑडिशन देता रहा और सर्वाइव करने के लिए अलग-अलग काम किए जैसे डिज्नी के लिए कार्टून लिखना, जिससे किराया निकलता था। फिर मुझे फिल्म Super 30 में छोटा सा रोल मिला, जिसमें मेरे किरदार का नाम भी नहीं था ‘रघुनाथ का चमचा’। लेकिन वहीं से शुरुआत हुई। उसके बाद छिछोरे मिली, जहां मैं बैकग्राउंड में था और कोशिश करता था कि स्क्रीन पर दिख जाऊं। इन छोटे-छोटे कामों से जो पैसे मिले, उनसे कुछ महीनों का गुजारा होता गया। फिर ताजमहल 1989 जैसे प्रोजेक्ट्स मिले और धीरे-धीरे पहचान बननी शुरू हुई। आपका पहला बड़ा ब्रेक क्या रहा और कब लगा कि लोग पहचानने लगे हैं? ईमानदारी से कहूं तो मुझे आज भी लगता है कि वो बड़ा ब्रेक अभी आना बाकी है। लेकिन जनहित में जारी, ताजमहल 1989 और लफंगे जैसे प्रोजेक्ट्स मेरे लिए बहुत अहम रहे। 2020 में जब मेरा काम नेटफ्लिक्स पर आया और आर्टिकल्स में मेरा नाम आने लगा, तब लगा कि शायद सही रास्ते पर हूं। फिर भी मैं इसे फाइनल मंजिल नहीं मानता अभी बहुत कुछ सीखना और करना बाकी है। ‘सईया साइको’ जैसे प्रोजेक्ट तक आप कैसे पहुंचे और आपको यह रोल कैसे मिला? यह रोल मुझे ऑडिशन के जरिए मिला। लेकिन मैंने थोड़ा अलग तरीका अपनाया। आमतौर पर जो मोनोलॉग होता है, उसे लोग ट्राइपॉड लगाकर कैमरे के सामने एक्ट करते हैं। मैंने सोचा, क्यों न कुछ अलग किया जाए। मैंने अपने फोन का फ्रंट कैमरा ऑन किया और सीधे उसमें एक्ट करके कास्टिंग डायरेक्टर को भेज दिया। मैंने कहा, ‘यह वह जोन है जहां मुझे लगता है कि यह कैरेक्टर होगा।’ पहले तो लगा शायद यह एक्सपेरिमेंट गलत पड़ गया, लेकिन अंततः उसी ऑडिशन पर मेरा सिलेक्शन हो गया। सेट पर काम करने का अनुभव कैसा रहा? आपके को‑स्टार्स और क्रू के साथ कैसा लगा? बिलकुल शानदार! रवि किशन के साथ काम करना अलग ही अनुभव था। यार, वह इतनी एनर्जी और फिनोमिनल मैन हैं। शुरुआत में थोड़ा डर लगता है क्योंकि हर कोई उनके सामने इंटिमिडेटेड लगता है, लेकिन फिर समझ आता है कि वह बस अपनी टीम को रेस्क्यू करने के लिए हैं। हंसते हैं, मजाक करते हैं, और प्रोफेशनल भी हैं। तेजस्वी प्रकाश और सुरभि चंदना के साथ शूटिंग शानदार रही। सृष्टि श्रीवास्तव के बारे में कहना चाहूंगा कि वह बहुत ग्रेसफुल और टैलेंटेड एक्ट्रेस हैं। उनके साथ कभी रिटेक की जरूरत नहीं पड़ी क्योंकि हम दोनों परफॉर्मेंस में पूरी तरह सिंक थे।

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