Saturday, 01 Aug 2026 | 02:47 PM

Trending :

EXCLUSIVE

‘तन्वी द ग्रेट’ से चमकी शुभांगी, ऑडिशन में खूब रोईं:60 से ज्यादा रिजेक्शन झेलीं, कई बार बिना ऑडिशन लौटाया गया, अब लगातार मिल रहे अवॉर्ड्स

‘तन्वी द ग्रेट’ से चमकी शुभांगी, ऑडिशन में खूब रोईं:60 से ज्यादा रिजेक्शन झेलीं, कई बार बिना ऑडिशन लौटाया गया, अब लगातार मिल रहे अवॉर्ड्स

‘तन्वी द ग्रेट’ से पहचान बनाने वाली एक्ट्रेस शुभांगी दत्त आज लगातार अवॉर्ड्स जीत रही हैं, लेकिन यहां तक पहुंचने का सफर आसान नहीं था। दैनिक भास्कर से बातचीत में शुभांगी ने बताया कि उन्होंने 60 से ज्यादा ऑडिशन दिए, कई बार बिना ऑडिशन लिए ही उन्हें लौटा दिया गया। कभी कहा गया कि वह “बहुत लंबी” हैं, तो कभी “फिट नहीं” बैठतीं। कई बार रोते हुए घर लौटीं, लेकिन एक्टिंग का सपना नहीं छोड़ा। अनुपम खेर की फिल्म ‘तन्वी द ग्रेट’ ने उनकी जिंदगी बदल दी। सवाल: सबसे पहले, ‘तन्वी द ग्रेट’ की सफलता और लगातार मिल रहे अवॉर्ड्स को आप कैसे देखती हैं? जवाब: ये पूरी जर्नी मेरे लिए बहुत खास रही है। जब लोगों को आपका काम पसंद आता है और इंडस्ट्री आपको अवॉर्ड्स के जरिए सम्मान देती है, तो लगता है कि आप सही रास्ते पर हैं। मुझे ऑस्ट्रेलिया इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल, जी सिने अवॉर्ड्स, आइकॉनिक गोल्ड अवॉर्ड्स और हाल ही में इंदौर इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में भी सम्मान मिला। सबसे खुशी की बात ये है कि पूरी टीम को इतना प्यार मिल रहा है। सवाल: आज इतने अवॉर्ड्स मिल रहे हैं, लेकिन क्या बचपन से ही तय था कि आपको एक्टिंग में ही जाना है? जवाब: हां, कहीं ना कहीं बचपन से ही था। मैं शीशे के सामने कभी डॉक्टर बनती थी, कभी टीचर। टीवी देखते-देखते लगता था कि एक्टर्स हर तरह की जिंदगी जी लेते हैं। तभी से मन में था कि मुझे भी यही करना है। स्कूल बंक करके ऑडिशन देने चली जाती थी। कुछ समझ नहीं होता था, लेकिन कैमरे के सामने खड़े होने का बहुत शौक था। सवाल: लेकिन मिडिल क्लास परिवार में एक्टिंग का सपना देखना आसान नहीं होता, घरवालों का क्या रिएक्शन था? जवाब: मम्मी बहुत डरती थीं। वो कहती थीं कि ये इंडस्ट्री आसान नहीं है। हम मिडिल क्लास फैमिली से आते हैं, इसलिए उन्हें लगता था कि सपने लिमिट में देखने चाहिए। लेकिन मैं हमेशा उनसे कहती थी कि मुझे एक बार पूरी कोशिश करनी है। अगर नहीं हुआ तो कम से कम ये अफसोस नहीं रहेगा कि मैंने ट्राय नहीं किया। सवाल: शायद उसी संघर्ष की वजह से बचपन भी काफी उतार-चढ़ाव वाला रहा? जवाब: बिल्कुल। मैंने पांच-छह स्कूल बदले। कभी घर बदला, कभी हालात। एक साल बोर्डिंग स्कूल में भी रही क्योंकि मम्मी काम करती थीं। किराए के घरों में रहने की वजह से बार-बार शिफ्टिंग होती थी। उस समय मुश्किल लगता था, लेकिन अब लगता है कि उन्हीं चीजों ने मजबूत बनाया। सवाल: क्या इसी वजह से आपने बहुत कम उम्र में काम करना शुरू कर दिया था? जवाब: हां। मैंने 16 साल की उम्र से काम करना शुरू कर दिया था। कॉलेज के साथ-साथ इंटर्नशिप करती थी। बॉम्बे टॉकीज में ऑफिस का काम किया। मुझे अपने खर्च खुद उठाने थे। बाद में मॉडलिंग और दूसरे छोटे-मोटे काम भी किए। उस समय बस यही था कि कुछ ना कुछ करना है। सवाल: इसी दौरान आपने मास मीडिया की पढ़ाई भी की। क्या तब तक तय हो चुका था कि क्रिएटिव फील्ड में ही जाना है? जवाब: हां, बिल्कुल। मैंने मास मीडिया और एडवरटाइजिंग की पढ़ाई इसलिए चुनी क्योंकि मुझे पता था कि मुझे क्रिएटिव इंडस्ट्री में ही काम करना है। पढ़ाई के साथ-साथ मॉडलिंग भी शुरू हो गई थी। सवाल: मॉडलिंग की बात करें तो पहला बड़ा ब्रेक ऋतिक रोशन के साथ मिला था। वो अनुभव कितना खास था? जवाब: बहुत खास। मेरा पहला बड़ा मॉडलिंग असाइनमेंट ऋतिक रोशन सर के साथ था। वो उनके ब्रांड HRX का शूट था। मैं इतनी स्टारस्ट्रक थी कि कैमरे के सामने उन्हें देखकर डायलॉग ही भूल जाती थी। वो मेरे फेवरेट एक्टर हैं, इसलिए वो दिन आज भी यादगार है। सवाल: मॉडलिंग के साथ क्या तभी लगा कि अब एक्टिंग को प्रोफेशनली सीखना चाहिए? जवाब: हां। मुझे लगा कि सिर्फ सपना देखने से काम नहीं चलेगा, सीखना भी पड़ेगा। इसलिए मैंने अनुपम खेर सर के एक्टिंग स्कूल ‘एक्टर प्रिपेयर्स’ में डिप्लोमा किया। वहां कैमरा, डांस, एक्शन और एक्टिंग की बारीकियां सीखीं। सवाल: एक्टिंग सीखने के बाद क्या स्ट्रगल थोड़ा आसान हुआ या रिजेक्शन तब भी मिले? जवाब: नहीं, रिजेक्शन तब भी मिले। मैंने 60-70 से ज्यादा ऑडिशन दिए होंगे। कई बार बिना ऑडिशन लिए ही कह दिया जाता था कि “आप बहुत लंबी हैं” या “आप फिट नहीं बैठतीं।” कई बार रोते हुए घर लौटी हूं। सबसे ज्यादा मुश्किल इंतजार था कि आखिर मौका कब मिलेगा। सवाल: इतने रिजेक्शन के बाद कभी लगा कि अब छोड़ देना चाहिए? जवाब: हां, एक समय ऐसा भी आया जब मैंने दो-तीन महीने ऑडिशन देना बंद कर दिया था। मैं बहुत थक गई थी। लेकिन फिर खुद को संभालती थी क्योंकि एक्टिंग मुझे खुशी देती है। मैं नहीं चाहती थी कि ये सिर्फ स्ट्रगल बनकर रह जाए। सवाल: फिर उसी दौरान ‘तन्वी द ग्रेट’ का ऑडिशन आया? जवाब: हां। मुझे अलग-अलग तरह के ऑडिशन भेजे जाते थे। कभी कहा जाता कि एक ब्लाइंड पर्सन की तरह सोचो, कभी अलग इमोशनल सिचुएशन दी जाती। वो लोग मेरा अलग इंटरप्रिटेशन देखना चाहते थे। मैं कोशिश करती थी कि सबसे पहले ऑडिशन भेजूं ताकि लोग नोटिस करें। सवाल: फिल्म के लिए ऑडिशन का प्रोसेस कितना लंबा चला? जवाब: करीब छह महीने तक। उस दौरान मुझे दूसरे प्रोजेक्ट्स छोड़ने पड़े क्योंकि टीम चाहती थी कि फिल्म में बिल्कुल फ्रेश फेस हो। मुझे बताया गया था कि चार-पांच लड़कियां शॉर्टलिस्टेड हैं, इसलिए हर ऑडिशन मेरे लिए बहुत जरूरी था। सवाल: जब आखिरकार फिल्म फाइनल हुई, तब पहला रिएक्शन क्या था? जवाब: जब अनुपम सर और टीम ने कहा “यू आर डूइंग इट”, तब मुझे यकीन ही नहीं हुआ। मैं शांत बैठी रही क्योंकि पहले भी कई बार उम्मीद टूट चुकी थी। घर जाकर भी मम्मी ने कहा कि शूट शुरू होने तक किसी को मत बताना। सवाल: फिल्म मिलने के बाद सबसे पहले किस चीज पर काम शुरू हुआ? जवाब: सबसे पहले किरदार को समझने पर। मैं असली तन्वी से मिली। उसके साथ 15 दिन बिताए। उसके परिवार, उसके व्यवहार और उसकी दुनिया को समझा। अनुपम सर बार-बार कहते थे कि “इस फिल्म में एक्टिंग नहीं करनी, किरदार को जीना है।” सवाल: अनुपम खेर सेट पर कितने सख्त डायरेक्टर थे? जवाब: बहुत डिसिप्लिन्ड थे। अगर शॉट के बीच में मैं हंस देती थी तो तुरंत कहते थे- “शुभांगी, कैरेक्टर से बाहर मत आओ।” लेकिन वो बहुत सपोर्टिव भी थे। अगर मैं अच्छा सीन करती थी तो सबसे ज्यादा खुश वही होते थे। सवाल: पहला शूटिंग डे कितना नर्वस करने वाला था? जवाब: बहुत ज्यादा। शूट के दिन करीब आते जा रहे थे और मेरी नींद उड़ती जा रही थी। मैं बस यही चाहती थी कि किसी को निराश ना करूं। पहला सीन वही था जो फिल्म का पहला सीन है। सवाल: शूटिंग के दौरान सबसे मुश्किल हिस्सा क्या रहा? जवाब: एक ही दिन में अलग-अलग इमोशंस शूट करना। कभी इमोशनल सीन, फिर तुरंत फनी सीन। किरदार की भावनाओं को लगातार पकड़कर रखना सबसे मुश्किल था। सवाल: फिल्म में एक्शन सीन भी थे। उन्हें करना कितना चुनौतीपूर्ण था? जवाब: बहुत। एक सीन में कार सच में पहाड़ से लटकाई गई थी। मैं घबरा रही थी, लेकिन बोमन ईरानी सर आराम से जाकर बैठ गए। फिर मैंने भी हिम्मत की और सीन किया। उसके बाद तो मैंने कहना शुरू कर दिया कि मुझे एक्शन फिल्में करनी हैं। सवाल: पहली ही फिल्म में इतने बड़े कलाकारों के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा? जवाब: मैं हमेशा कहती थी कि मैं शेरों के बीच एक छोटा-सा कब हूं। पल्लवी जोशी जी, बोमन ईरानी सर, अरविंद स्वामी सर- सबने बहुत प्यार और सपोर्ट दिया। कभी महसूस नहीं होने दिया कि मैं नई हूं। सवाल: पल्लवी जोशी और अनुपम खेर से सबसे बड़ी सीख क्या मिली? जवाब: पल्लवी मैम ने कहा था- “अपने काम से प्यार करो, लेकिन उससे जरूरत से ज्यादा अटैच मत हो।” वहीं अनुपम सर ने सिखाया कि सेट पर पॉजिटिव माहौल कितना जरूरी होता है। सवाल: शूटिंग के दौरान सबसे खूबसूरत पल कौन से रहे? जवाब: लैंसडाउन में शूटिंग करना बहुत खूबसूरत अनुभव था। पूरा कास्ट और क्रू परिवार जैसा बन गया था। ठंड, पहाड़, कॉटेज और साथ में शूटिंग- सब किसी सपने जैसा लगता था। सवाल: इसी फिल्म की वजह से आपको इंटरनेशनल प्लेटफॉर्म्स पर भी पहचान मिली? जवाब: हां। इस फिल्म की वजह से मुझे पहली बार इंटरनेशनल ट्रैवल करने का मौका मिला। मैं कान्स फिल्म फेस्टिवल गई, रेड कार्पेट पर चली, मनीष मल्होत्रा का गाउन पहना। बचपन में कभी सोचा भी नहीं था कि ऐसा दिन आएगा। सवाल: आज जब पुराने ऑडिशन वाले दिन याद आते हैं तो क्या महसूस होता है? जवाब: आज जब मैं आराम नगर और पुराने ऑडिशन ऑफिस देखती हूं, तो याद आता है कि कितनी बार रोते हुए बाहर निकली हूं। लेकिन अब लगता है कि वो सब वर्थ इट था। सवाल: आज परिवार और दोस्तों का रिएक्शन देखकर कैसा लगता है? जवाब: बहुत अच्छा लगता है। मेरे स्कूल और कॉलेज के दोस्त कहते हैं कि उन्हें मुझ पर गर्व है। मेरी बचपन की दोस्त की मम्मी की आंखों में आंसू आ गए थे। वो कह रही थीं- “ये वही लड़की है जो हमारे घर खेला करती थी?” वो पल बहुत खास था। सवाल: अब आगे खुद को किस तरह के रोल्स में देखना चाहती हैं? जवाब: मैं हर तरह के रोल करना चाहती हूं। एक्शन भी, रोम-कॉम भी। मैंने शाहरुख खान सर की फिल्में देखकर बहुत सीखा है। मैं चाहती हूं कि अलग-अलग किरदार निभाऊं।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
एआई का खौफ, फ्रेंचाइजी बिजनेस की वापसी:लैपटॉप वाली नौकरी छोड़ ‘खुद का बॉस’ बनने की होड़; अमेरिकी मॉडल में भारतीयों का दबदबा

June 1, 2026/
12:48 pm

एआई के बढ़ते खतरे और महंगी पढ़ाई के बीच कॉरपोरेट नौकरियों के मुकाबले फ्रेंचाइजी बिजनेस का क्रेज बढ़ रहा है।...

शिवपुरी के बदरवास में दो दुकानों में लगी आग:जेसीबी से शटर-दीवार तोड़ी, ढाई घंटे में पाया काबू, डिफ्रीजर, माइक्रोवेव समेत लाखों का सामान जला

April 3, 2026/
1:57 pm

शिवपुरी जिले के बदरवास कस्बे में गुरुवार देर रात दो दुकानों में आग लग गई। किराना और बेकरी की इन...

9.90 लाख साइबर फ्रॉड मामले में दो आरोपी गिरफ्तारी:महाराष्ट्र पुलिस ने मैहर से दोनों को पकड़ा; धोखाधड़ी से खातों में पैसे ट्रांसफर करवाए

April 4, 2026/
10:13 am

महाराष्ट्र की ठाणे पुलिस ने 9.90 लाख रुपए के साइबर फ्रॉड के मामले में मैहर के रामनगर कस्बे से दो...

बीच सड़क पर नीतू कपूर और रणबीर ने किया डांस:साथ में पोज भी दिए, मां ने बेटे को गले लगाकर किया किस

April 30, 2026/
12:00 pm

एक्ट्रेस नीतू कपूर और उनके बेटे रणबीर कपूर बुधवार को पैपराजी के सामने साथ डांस स्टेप्स करते नजर आए। यह...

KKR vs MI Live Score, IPL 2026: Follow Kolkata Knight Riders vs Mumbai Indians match, live updates and scorecard from Eden Gardens in Kolkata. (Picture Credit: X/@IPL)

May 20, 2026/
5:34 pm

आखरी अपडेट:20 मई, 2026, 17:34 IST राकांपा को नई उथल-पुथल का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि रोहित पवार ने...

भूत बंगला के मेकर्स पर नॉन पेमेंट के आरोप:दावा- वेंडर्स के 48 लाख रुपए बकाया, बालाजी टेलीफिल्म्स ने आरोपों को किया खारिज

May 7, 2026/
12:57 pm

कुछ वेंडर्स ने अक्षय कुमार स्टारर फिल्म भूत बंगला के मेकर्स पर पेमेंट न करने का आरोप लगाया है। दावा...

जॉब - शिक्षा

राजनीति

‘तन्वी द ग्रेट’ से चमकी शुभांगी, ऑडिशन में खूब रोईं:60 से ज्यादा रिजेक्शन झेलीं, कई बार बिना ऑडिशन लौटाया गया, अब लगातार मिल रहे अवॉर्ड्स

‘तन्वी द ग्रेट’ से चमकी शुभांगी, ऑडिशन में खूब रोईं:60 से ज्यादा रिजेक्शन झेलीं, कई बार बिना ऑडिशन लौटाया गया, अब लगातार मिल रहे अवॉर्ड्स

‘तन्वी द ग्रेट’ से पहचान बनाने वाली एक्ट्रेस शुभांगी दत्त आज लगातार अवॉर्ड्स जीत रही हैं, लेकिन यहां तक पहुंचने का सफर आसान नहीं था। दैनिक भास्कर से बातचीत में शुभांगी ने बताया कि उन्होंने 60 से ज्यादा ऑडिशन दिए, कई बार बिना ऑडिशन लिए ही उन्हें लौटा दिया गया। कभी कहा गया कि वह “बहुत लंबी” हैं, तो कभी “फिट नहीं” बैठतीं। कई बार रोते हुए घर लौटीं, लेकिन एक्टिंग का सपना नहीं छोड़ा। अनुपम खेर की फिल्म ‘तन्वी द ग्रेट’ ने उनकी जिंदगी बदल दी। सवाल: सबसे पहले, ‘तन्वी द ग्रेट’ की सफलता और लगातार मिल रहे अवॉर्ड्स को आप कैसे देखती हैं? जवाब: ये पूरी जर्नी मेरे लिए बहुत खास रही है। जब लोगों को आपका काम पसंद आता है और इंडस्ट्री आपको अवॉर्ड्स के जरिए सम्मान देती है, तो लगता है कि आप सही रास्ते पर हैं। मुझे ऑस्ट्रेलिया इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल, जी सिने अवॉर्ड्स, आइकॉनिक गोल्ड अवॉर्ड्स और हाल ही में इंदौर इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में भी सम्मान मिला। सबसे खुशी की बात ये है कि पूरी टीम को इतना प्यार मिल रहा है। सवाल: आज इतने अवॉर्ड्स मिल रहे हैं, लेकिन क्या बचपन से ही तय था कि आपको एक्टिंग में ही जाना है? जवाब: हां, कहीं ना कहीं बचपन से ही था। मैं शीशे के सामने कभी डॉक्टर बनती थी, कभी टीचर। टीवी देखते-देखते लगता था कि एक्टर्स हर तरह की जिंदगी जी लेते हैं। तभी से मन में था कि मुझे भी यही करना है। स्कूल बंक करके ऑडिशन देने चली जाती थी। कुछ समझ नहीं होता था, लेकिन कैमरे के सामने खड़े होने का बहुत शौक था। सवाल: लेकिन मिडिल क्लास परिवार में एक्टिंग का सपना देखना आसान नहीं होता, घरवालों का क्या रिएक्शन था? जवाब: मम्मी बहुत डरती थीं। वो कहती थीं कि ये इंडस्ट्री आसान नहीं है। हम मिडिल क्लास फैमिली से आते हैं, इसलिए उन्हें लगता था कि सपने लिमिट में देखने चाहिए। लेकिन मैं हमेशा उनसे कहती थी कि मुझे एक बार पूरी कोशिश करनी है। अगर नहीं हुआ तो कम से कम ये अफसोस नहीं रहेगा कि मैंने ट्राय नहीं किया। सवाल: शायद उसी संघर्ष की वजह से बचपन भी काफी उतार-चढ़ाव वाला रहा? जवाब: बिल्कुल। मैंने पांच-छह स्कूल बदले। कभी घर बदला, कभी हालात। एक साल बोर्डिंग स्कूल में भी रही क्योंकि मम्मी काम करती थीं। किराए के घरों में रहने की वजह से बार-बार शिफ्टिंग होती थी। उस समय मुश्किल लगता था, लेकिन अब लगता है कि उन्हीं चीजों ने मजबूत बनाया। सवाल: क्या इसी वजह से आपने बहुत कम उम्र में काम करना शुरू कर दिया था? जवाब: हां। मैंने 16 साल की उम्र से काम करना शुरू कर दिया था। कॉलेज के साथ-साथ इंटर्नशिप करती थी। बॉम्बे टॉकीज में ऑफिस का काम किया। मुझे अपने खर्च खुद उठाने थे। बाद में मॉडलिंग और दूसरे छोटे-मोटे काम भी किए। उस समय बस यही था कि कुछ ना कुछ करना है। सवाल: इसी दौरान आपने मास मीडिया की पढ़ाई भी की। क्या तब तक तय हो चुका था कि क्रिएटिव फील्ड में ही जाना है? जवाब: हां, बिल्कुल। मैंने मास मीडिया और एडवरटाइजिंग की पढ़ाई इसलिए चुनी क्योंकि मुझे पता था कि मुझे क्रिएटिव इंडस्ट्री में ही काम करना है। पढ़ाई के साथ-साथ मॉडलिंग भी शुरू हो गई थी। सवाल: मॉडलिंग की बात करें तो पहला बड़ा ब्रेक ऋतिक रोशन के साथ मिला था। वो अनुभव कितना खास था? जवाब: बहुत खास। मेरा पहला बड़ा मॉडलिंग असाइनमेंट ऋतिक रोशन सर के साथ था। वो उनके ब्रांड HRX का शूट था। मैं इतनी स्टारस्ट्रक थी कि कैमरे के सामने उन्हें देखकर डायलॉग ही भूल जाती थी। वो मेरे फेवरेट एक्टर हैं, इसलिए वो दिन आज भी यादगार है। सवाल: मॉडलिंग के साथ क्या तभी लगा कि अब एक्टिंग को प्रोफेशनली सीखना चाहिए? जवाब: हां। मुझे लगा कि सिर्फ सपना देखने से काम नहीं चलेगा, सीखना भी पड़ेगा। इसलिए मैंने अनुपम खेर सर के एक्टिंग स्कूल ‘एक्टर प्रिपेयर्स’ में डिप्लोमा किया। वहां कैमरा, डांस, एक्शन और एक्टिंग की बारीकियां सीखीं। सवाल: एक्टिंग सीखने के बाद क्या स्ट्रगल थोड़ा आसान हुआ या रिजेक्शन तब भी मिले? जवाब: नहीं, रिजेक्शन तब भी मिले। मैंने 60-70 से ज्यादा ऑडिशन दिए होंगे। कई बार बिना ऑडिशन लिए ही कह दिया जाता था कि “आप बहुत लंबी हैं” या “आप फिट नहीं बैठतीं।” कई बार रोते हुए घर लौटी हूं। सबसे ज्यादा मुश्किल इंतजार था कि आखिर मौका कब मिलेगा। सवाल: इतने रिजेक्शन के बाद कभी लगा कि अब छोड़ देना चाहिए? जवाब: हां, एक समय ऐसा भी आया जब मैंने दो-तीन महीने ऑडिशन देना बंद कर दिया था। मैं बहुत थक गई थी। लेकिन फिर खुद को संभालती थी क्योंकि एक्टिंग मुझे खुशी देती है। मैं नहीं चाहती थी कि ये सिर्फ स्ट्रगल बनकर रह जाए। सवाल: फिर उसी दौरान ‘तन्वी द ग्रेट’ का ऑडिशन आया? जवाब: हां। मुझे अलग-अलग तरह के ऑडिशन भेजे जाते थे। कभी कहा जाता कि एक ब्लाइंड पर्सन की तरह सोचो, कभी अलग इमोशनल सिचुएशन दी जाती। वो लोग मेरा अलग इंटरप्रिटेशन देखना चाहते थे। मैं कोशिश करती थी कि सबसे पहले ऑडिशन भेजूं ताकि लोग नोटिस करें। सवाल: फिल्म के लिए ऑडिशन का प्रोसेस कितना लंबा चला? जवाब: करीब छह महीने तक। उस दौरान मुझे दूसरे प्रोजेक्ट्स छोड़ने पड़े क्योंकि टीम चाहती थी कि फिल्म में बिल्कुल फ्रेश फेस हो। मुझे बताया गया था कि चार-पांच लड़कियां शॉर्टलिस्टेड हैं, इसलिए हर ऑडिशन मेरे लिए बहुत जरूरी था। सवाल: जब आखिरकार फिल्म फाइनल हुई, तब पहला रिएक्शन क्या था? जवाब: जब अनुपम सर और टीम ने कहा “यू आर डूइंग इट”, तब मुझे यकीन ही नहीं हुआ। मैं शांत बैठी रही क्योंकि पहले भी कई बार उम्मीद टूट चुकी थी। घर जाकर भी मम्मी ने कहा कि शूट शुरू होने तक किसी को मत बताना। सवाल: फिल्म मिलने के बाद सबसे पहले किस चीज पर काम शुरू हुआ? जवाब: सबसे पहले किरदार को समझने पर। मैं असली तन्वी से मिली। उसके साथ 15 दिन बिताए। उसके परिवार, उसके व्यवहार और उसकी दुनिया को समझा। अनुपम सर बार-बार कहते थे कि “इस फिल्म में एक्टिंग नहीं करनी, किरदार को जीना है।” सवाल: अनुपम खेर सेट पर कितने सख्त डायरेक्टर थे? जवाब: बहुत डिसिप्लिन्ड थे। अगर शॉट के बीच में मैं हंस देती थी तो तुरंत कहते थे- “शुभांगी, कैरेक्टर से बाहर मत आओ।” लेकिन वो बहुत सपोर्टिव भी थे। अगर मैं अच्छा सीन करती थी तो सबसे ज्यादा खुश वही होते थे। सवाल: पहला शूटिंग डे कितना नर्वस करने वाला था? जवाब: बहुत ज्यादा। शूट के दिन करीब आते जा रहे थे और मेरी नींद उड़ती जा रही थी। मैं बस यही चाहती थी कि किसी को निराश ना करूं। पहला सीन वही था जो फिल्म का पहला सीन है। सवाल: शूटिंग के दौरान सबसे मुश्किल हिस्सा क्या रहा? जवाब: एक ही दिन में अलग-अलग इमोशंस शूट करना। कभी इमोशनल सीन, फिर तुरंत फनी सीन। किरदार की भावनाओं को लगातार पकड़कर रखना सबसे मुश्किल था। सवाल: फिल्म में एक्शन सीन भी थे। उन्हें करना कितना चुनौतीपूर्ण था? जवाब: बहुत। एक सीन में कार सच में पहाड़ से लटकाई गई थी। मैं घबरा रही थी, लेकिन बोमन ईरानी सर आराम से जाकर बैठ गए। फिर मैंने भी हिम्मत की और सीन किया। उसके बाद तो मैंने कहना शुरू कर दिया कि मुझे एक्शन फिल्में करनी हैं। सवाल: पहली ही फिल्म में इतने बड़े कलाकारों के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा? जवाब: मैं हमेशा कहती थी कि मैं शेरों के बीच एक छोटा-सा कब हूं। पल्लवी जोशी जी, बोमन ईरानी सर, अरविंद स्वामी सर- सबने बहुत प्यार और सपोर्ट दिया। कभी महसूस नहीं होने दिया कि मैं नई हूं। सवाल: पल्लवी जोशी और अनुपम खेर से सबसे बड़ी सीख क्या मिली? जवाब: पल्लवी मैम ने कहा था- “अपने काम से प्यार करो, लेकिन उससे जरूरत से ज्यादा अटैच मत हो।” वहीं अनुपम सर ने सिखाया कि सेट पर पॉजिटिव माहौल कितना जरूरी होता है। सवाल: शूटिंग के दौरान सबसे खूबसूरत पल कौन से रहे? जवाब: लैंसडाउन में शूटिंग करना बहुत खूबसूरत अनुभव था। पूरा कास्ट और क्रू परिवार जैसा बन गया था। ठंड, पहाड़, कॉटेज और साथ में शूटिंग- सब किसी सपने जैसा लगता था। सवाल: इसी फिल्म की वजह से आपको इंटरनेशनल प्लेटफॉर्म्स पर भी पहचान मिली? जवाब: हां। इस फिल्म की वजह से मुझे पहली बार इंटरनेशनल ट्रैवल करने का मौका मिला। मैं कान्स फिल्म फेस्टिवल गई, रेड कार्पेट पर चली, मनीष मल्होत्रा का गाउन पहना। बचपन में कभी सोचा भी नहीं था कि ऐसा दिन आएगा। सवाल: आज जब पुराने ऑडिशन वाले दिन याद आते हैं तो क्या महसूस होता है? जवाब: आज जब मैं आराम नगर और पुराने ऑडिशन ऑफिस देखती हूं, तो याद आता है कि कितनी बार रोते हुए बाहर निकली हूं। लेकिन अब लगता है कि वो सब वर्थ इट था। सवाल: आज परिवार और दोस्तों का रिएक्शन देखकर कैसा लगता है? जवाब: बहुत अच्छा लगता है। मेरे स्कूल और कॉलेज के दोस्त कहते हैं कि उन्हें मुझ पर गर्व है। मेरी बचपन की दोस्त की मम्मी की आंखों में आंसू आ गए थे। वो कह रही थीं- “ये वही लड़की है जो हमारे घर खेला करती थी?” वो पल बहुत खास था। सवाल: अब आगे खुद को किस तरह के रोल्स में देखना चाहती हैं? जवाब: मैं हर तरह के रोल करना चाहती हूं। एक्शन भी, रोम-कॉम भी। मैंने शाहरुख खान सर की फिल्में देखकर बहुत सीखा है। मैं चाहती हूं कि अलग-अलग किरदार निभाऊं।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.